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बीआरटीएस के पांच प्रमुख जंक्शन पर ब्रिज के लिए प्री फिजिबिलिटी सर्वे शुरू

इंदौर इंदौर के बीआरटीएस को प्रदेश सरकार ने हटाने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछली इंदौर यात्रा के दौरान बीआरटीएस तोड़ने की घोषणा की थी। अभी नगर निगम ने बीआरटीएस हटाने का काम शुरू नहीं किया, लेकिन बीआरटीएस के पांच प्रमुख जंक्शन पर ब्रिज के लिए प्री फिजिबिलिटी सर्वे शुरू करने के लिए नगर निगम ने टेंडर जारी किए है। जनवरी माह में सर्वे शुरू करने की तैयारी है, हालांकि नगर निगम को बीआरटीएस की बस लेन हटाने के लिए हाईकोर्ट से अनुमति लेना होगी। इन चौराहों पर होगा सर्वे बीआरटीएस के ब्रिज के लिए एलआईजी, पलासिया चौराहा, गीता भवन चौराहा, शिवाजी वाटिका, नवलखा चौराहा पर ब्रिज के लिए सर्वे होगा। सभी ब्रिज बीआरटीएस के मध्य हिस्से में बनाए जाएंगे। बीआरटीएस के भंवरकुआं पर ब्रिज बनकर तैयार हो चुका है, जबकि निरंजनपुर चौराहा पर ब्रिज का निर्माण शुरू हो चुका है। बीआटीएस के सबसे व्यस्त विजय नगर चौराहे पर ब्रिज नहीं बन पाएगा,क्योकि चौराहे से मेट्रो ट्रेन रुट क्रास कर रहा है। इसके अलावा पलासिया चौराहा से भी मेट्रो का रुट क्रास होगा। इस कारण यहां ब्रिज की ऊंचाई ज्यादा रखना होगी। टूटने और लाइन शिफ्टिंग पर भी खर्च होंगे करोड़ों बीआरटीएस ब्रिज तीन सौ करोड़ रुपये में बना है, लेकिन बीआरटीएस की बस लेन और स्टेशनों को तोड़कर ब्रिज बनाने के लिए भी करोड़ों रुपये की राशि खर्च होगी, क्योकि बीआरटीएस के दोनो तरफ सीवरेज लाइन बिछाई गई है, जबकि मध्य हिस्से में नर्मदा लाइन बिछी है। चौराहों पर नर्मदा लाइन भी शिफ्ट करना होगी। इसमें भी तगड़ा खर्च आना है। बीआरटीएस की बस लेन के मध्य हिस्से में बस स्टेशन भी बने है, जो चार फीट ऊचें प्लेटफार्म पर बनाए गए है। बस लेन की रैलिंग हटाने के साथ उन्हें भी तोड़ना होगा। मेयर पुष्य मित्र भार्गव का कहना है कि बीआरटीएस को लेकर कोर्ट में याचिका विचाराधीन है। बीआरटीएस हटाने का फैसला नीतिगत है। हम कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। बीआरटीएस के जंक्शनों पर ब्रिज के लिए जल्दी सर्वे शुरू होगा। जयपुर में भी बीआरटीएस प्रोजेक्ट रहा फ्लाॅट राजस्थान सरकार ने जयपुर में भी बीआरटीएस के दो काॅरिडोर बनाए थे, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो सका। सरकार ने 439 करोड़ रुपये खर्च कर 39 किलोमीटर का बीआरटीएस बनाया था,लेकिन अफसरों ने जितना दिमाग बजट को खपाने में लगाया, उतना बीआरटीएस के सफल संचालन में नहीं लगाया गया। न ठीक से बसें खरीदी गई और न ही ट्रैफिक स्टडी हो पाई। वर्ष 2010 में गेहलोत सरकार के समय यह प्रोजेक्ट अमल में आया था। बाद में वंसुधरा सरकार ने इस प्रोजेक्ट से किनारा कर लिया।  

चैंपियंस ट्रॉफी 2025 को लेकर 29 नवंबर को वर्चुअल (ऑनलाइन) बैठक करेगा आईसीसी बोर्ड

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का बोर्ड अगले साल फरवरी-मार्च में पाकिस्तान में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए 29 नवंबर को वर्चुअल (ऑनलाइन) बैठक करेगा। टूर्नामेंट का कार्यक्रम घोषित करने में काफी विलंब हो चुका है। देरी का कारण भारत द्वारा दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को देखते हुए पाकिस्तान में खेलने से इनकार करना है। भारत ने 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद से पाकिस्तान का दौरा नहीं किया है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) चाहता है कि टूर्नामेंट हाइब्रिड मॉडल में खेला जाए, जिसमें भारत के मुकाबले किसी तीसरे देश में आयोजित किए जाएं। जय शाह एक दिसंबर को संभालेंगे कार्यभार हाइब्रिड मॉडल पर अब तक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने सहमति नहीं जताई है। आईसीसी के प्रवक्ता ने मंगलवार को पीटीआई को बताया, ‘‘आईसीसी बोर्ड चैंपियंस ट्रॉफी के कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए 29 नवंबर को बैठक करेगा।’’ यह महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक बीसीसीआई सचिव जय शाह के एक दिसंबर को आईसीसी अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने से दो दिन पहले हो रही है। वह और बोर्ड के अन्य सदस्य नए पदाधिकारियों के कार्यभार संभालने से पहले मामले को सुलझाने के इच्छुक होंगे। ICC की इस पेशकश को नहीं मान रहा PCB आईसीसी के कार्यकारी बोर्ड सदस्य बढ़े हुए वित्तीय प्रोत्साहन के वादे के साथ पीसीबी को चैंपियंस ट्रॉफी के लिए हाइब्रिड मॉडल स्वीकार करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्र ने कहा, ‘‘पीसीबी ने कड़ा रुख अपनाया है और हाइब्रिड मॉडल के तहत टूर्नामेंट की मेजबानी नहीं करना चाहता है। इसलिए अब गतिरोध को समाप्त करने के लिए उन्हें अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन की पेशकश की जा रही है।’’ ‘हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाता है तो ऐसा हो’ उन्होंने कहा, ‘‘पीसीबी ने अब तक ऐसे सभी कदमों का विरोध किया है और इस बात पर जोर दिया है कि यदि भारत पाकिस्तान में खेलने को इच्छुक नहीं है तो यह उनकी समस्या है क्योंकि भाग लेने वाले अन्य छह देशों को पाकिस्तान में खेलने में कोई समस्या नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पीसीबी इस बात पर जोर दे रहा है कि अगर हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाता है तो भी भारत बनाम पाकिस्तान मैच और फाइनल लाहौर में खेले जाएं। जाहिर है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड इस पर सहमत नहीं होगा। वह पाकिस्तान के खिलाफ मैच के साथ सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबला भी दुबई में खेलना चाहता है।’’

केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह से जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. शाह ने की सौजन्य भेंट

भोपाल जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली प्रवास के दौरान केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से सौजन्य भेंट की। मंत्री डॉ. शाह ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह को मध्यप्रदेश में निवासरत् सभी जनजातियों और प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाभियान (पीएम जन-मन) के तहत विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) के समग्र कल्याण एवं नवाचारों के बारे में जानकारी दी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रंगोली कला में विश्व रिकार्ड बनाने पर प्रदेश की बेटी शिखा को दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर की बेटी शिखा और उनके कलाकार साथियों द्वारा नीमच में 84 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में महान विभूतियों पर केन्द्रित 100 चित्रों की रंगोली बनाने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बेटी शिखा ने अद्भुत और अनूठी रंगोली कला का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बेटी शिखा और उनके साथियों ने एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड और इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया है, जो मध्यप्रदेश और देश को गौरवान्वित करने वाला रचनात्मक कार्य है। ऐसी युवा प्रतिभाओं पर प्रदेशवासियों को गर्व है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुरैना में हुई दुर्घटना पर दु:ख व्यक्त किया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुरैना में हुई दुर्घटना पर दु:ख व्यक्त किया प्रभावित परिवारों को सहायता राशि देने के निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुरैना जिले के थाना कोतवाली अंतर्गत राठौर कॉलोनी में सोमवार और मंगलवार की मध्यरात्रि एक मकान में विस्फोट की घटना पर दु:ख व्यक्त किया है। इस घटना में 4 लोगों की असामयिक मृत्यु होने और 5 लोगों के घायल होने का समाचार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री सहायता कोष से मृतकों के परिजन को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला प्रशासन मुरैना को घटना के मूल कारणों का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर घायलों को तत्काल ग्वालियर रेफर किया गया। घायलों का समुचित उपचार भी किया गया।  

आयुष्मान कार्ड में ओटीपी बन रहा बड़ी मुसीबत, परेशानियों के बीच जारी है आयुष्मान कार्ड बनाने का काम

राजगढ़ भारत सरकार द्वारा बनाए जा रहे आयुष्मान कार्ड को गति जरूर मिल रही है, लेकिन वेरिफिकेशन के लिए आने वाला वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) अब कर्मचारियों के लिए सिरदर्द बन चुका है। दरअसल, कभी मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने के कारण ओटीपी नहीं आता, तो कभी मोबाइल में बैलेंस नहीं होने के कारण इनकमिंग सेवा बंद हो जाने के कारण भी मैसेज नहीं आ पा रहा है। ऐसे में कार्ड बनाने वाले परेशान होकर वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं। परेशानियों के बीच जारी है आयुष्मान कार्ड बनाने का काम नगर परिषद के संजय शर्मा बताते हैं कि आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी फिलहाल परेशानी बना हुआ है। वेरीफाई और आयुष्मान कार्ड को एक्टिवेट करने के लिए ओटीपी आवश्यक होता है। हालांकि टीम लगातार काम कर रही है। इसी का नतीजा है कि 400 से अधिक आयुष्मान कार्ड बन भी चुके हैं। विडंबना यह है कि बुधवार से लेकर शनिवार तक कार्ड जरूर बने, लेकिन दिक्कत आती जा रही है। मूल रूप से आयुष्मान कार्ड बनाने की बड़ी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का अमला निश्चित दिनों पर टीकाकरण में लग जाता है। ऐसे में नगर परिषद के अमले को ही मैदान में उतरना पड़ रहा है। संजय शर्मा ने बताया कि सोमवार को सिर्फ एक एएनएम और नगर परिषद के कर्मचारियों ने कार्ड बनाने की प्रक्रिया की। नगर परिषद के प्रतीक यादव, यश मकवाना, विशाल मेवाती, मुकेश यादव आदि मौजूद रहे। 400 कार्ड और बनना बाकी नगर परिषद के अनुसार, अधिकांश लोगों के कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसके तहत बुधवार को जहां सिर्फ पांच कार्ड बने थे, तो वहीं गुरुवार को 71, शुक्रवार को 104 और शनिवार को 102 कार्ड बनाए जा चुके हैं। अब भी करीब 400 लोगों के कार्ड बनाने का काम बाकी है। माना जा रहा है कि एक सप्ताह के भीतर इस कार्य को पूर्ण कर दिया जाएगा। एसडीएम और सीएमओ लगातार बनाए हुए हैं नजर एसडीएम और सीएमओ इस काम को लेकर गंभीर नजर आ रहे हैं। दरअसल, पिछले दिनों एसडीएम आशा परमार ने नगर में पहुंचकर इस कार्य की प्रगति को देखते हुए जल्द से जल्द कार्य पूर्ण करने के लिए निर्देश भी दिए थे। नगर परिषद के संजय शर्मा के मुताबिक सीएमओ आरती गरवाल के मार्गदर्शन में तेजी से काम करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का निवेश को लेकर गंभीर दृष्टिकोण: यूके में निवेशकों को किया आमंत्रित

Chief Minister Dr. Yadav’s serious view on investment: Invited investors to UK भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूके यात्रा में मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए लंदन के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-ऑन-वन मीटिंग कर व्यक्तिगत तौर पर निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने सेक्टर केंद्रित राउंड-टेबल मीटिंग कर निवेश संबंधी विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने वन-ऑन-वन बैठकों में प्रत्येक निवेशक की परियोजना और आवश्यकताओं को ध्यानपूर्वक सुना और मध्यप्रदेश में निवेश के लिए बेहतर अवसर और नीतिगत समर्थन का भरोसा दिलाया। राउंड-टेबल चर्चाओं में इलेक्ट्रिक वाहन, नवकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंडोरामा ग्रुप, एसआरएएम एंड एमआरएएम ग्रुप, सायनकॉननोड, हाइब्रिड एयर व्हीकल्स लिमिटेड, क्लिनीसप्लाईज, औरोरा एनर्जी रिसर्च, एल्सेवियर, वीडिलीवर, कैपरो, वेबसाइट, द मोंटकैल्म लग्ज़री होटल्स, फाइला अर्थ, एम्पर्जिया लिमिटेड, अयाना कंसल्टिंग, पैंजिया डेटा लिमिटेड, इनवर्जी, बीईएम ग्रुप लिमिटेड, डैक्स फर्स्ट, रैनसैट ग्रुप, कोगो इकोटेक सॉल्यूशंस, एम्पैटी.एआई, मनी फॉर बिजनेस लिमिटेड, डीएएम हेल्थकेयर लिमिटेड और हेलियन जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। बैठक में औद्योगिक विकास को गति देने और संभावित सहयोग के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में अनुकूल व्यावसायिक माहौल और निवेश के लिए उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित राउंड-टेबल परिचर्चाओं में भाग लिया। इन परिचर्चाओं में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ऑटोमोबाइल और नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और फूड प्रोसेसिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह पहल राज्य को एक वैश्विक निवेश स्थल बनाने और उद्योगपतियों के साथ मजबूत साझेदारी विकसित करने में परिणामोन्मुखी साबित होगी। साथ ही ये बैठकें औद्योगिक विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ मध्यप्रदेश के विकास के लिए नई संभावनाओं को आकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।

बैरागढ़ जोन में एक भी रैन बसेरा नहीं, सर्दी जोर पकड़ने लगी, नहीं मिल रहा अलाव का सहारा

भोपाल नगर निगम के बैरागढ़ जोन में एक भी रैन बसेरा नहीं है। उधर, सर्दी जोर पकड़ने लगी है। ऐसे में गरीब एवं बेसहारा लोगों के लिए रेलवे स्टेशन, आरक्षण केंद्र एवं फुटपाथ ही आसरा बने हुए हैं। सर्दी लगातार बढ़ रही है, पर अभी तक अलाव की व्यवस्था भी नहीं की गई है। कड़ाके की ठंड शुरू हो चुकी है। आने वाले दिनों में पारा और लुढ़कने की संभावना है। ऐसे में बेसहारा, गरीब बुजुर्गों के पास खुले आसमान में रात बिताने का अलावा कोई विकल्प नहीं है। बैरागढ़ जोन में वार्ड क्रमांक तीन, चार एवं पांच हैं। किसी भी वार्ड में रैन बसेरा नहीं है। पिछले साल नगर निगम ने थद्धाराम ज्ञानचंदानी सामुदायिक भवन में अस्थायी रैन बसेरा बनाया था। सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से यहां चादर एवं गद्दों की व्यवस्था की गई थी। इस बार अभी तक यह व्यवस्था नहीं की गई है। आरक्षण केंद्र के बाहर कंपकपाते मिले बुजुर्ग सोमवार रात्रि करीब नौ बजे संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन के आरक्षण केंद्र परिसर में बुजुर्ग ठंड से कंपकपाते नजर आए। कोई आशियाना नहीं है। इसलिए यहां रात गुजारना मजबूरी है। स्टेशन के टिकट काउंटर के पास भी देर रात को बेसहारा लोग सोते नजर आते हैं। बैरागढ़ मेन रोड पर रात्रि करीब 11 बजे कपड़े की दुकानें बंद होती हैं। दुकानों के सामने खाली जगह पर भी मुसाफिर एवं बेसहारा लोग आराम करते नजर आते हैं। सिविल अस्पताल के गेट के पास भी अस्थायी आश्रय स्थल नजर आता है।   हलालपुर बस स्टैंड पर 15 बेड नगर निगम ने पांच साल पहले हलालपुर बस स्टैंड पर सामुदायिक आश्रय स्थल बनाया था। जोन क्रमांक 20 में शामिल इस रैन बसेरे में 15 बेड हैं। बस स्टैंड पर रात के समय कई कई गरीब यात्री भी बसों से उतरते हैं। दिसंबर से फरवरी माह तक यहां लोगों को रात गुजारने के लिए जगह नहीं मिलती। बैरागढ़ एवं गांधीनगर बस स्टैंड के पास भी नया रैन बसेरा बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। जोनल अधिकारी जोन एक  के विक्रम झा ने बताया बैरागढ़ के थद्धाराम कम्युनिटी हॉल में जल्द ही अस्थायी रैन बसेरा बनाया जाएगा। हॉल अभी खाली है। यहां दो कर्मचारी भी तैनात किए जाएंगे, ताकि बेसहारा लोगों को कोई परेशानी नहीं हो। फिलहाल जोन क्षेत्र में स्थायी रैन बसेरा बनाने का प्रस्ताव नहीं है।

आईआईएम की ओर से नतीजो का एलान जनवरी के दूसरे सप्ताह में हो सकता है

नई दिल्ली कॉमन एडमिशन टेस्ट रिजल्ट की घोषणा जनवरी के सेकेंड वीक में जारी कर सकता है। आईआईएम की ओर से नतीजो का एलान आधिकारिक वेबसाइट https://iimcat.ac.in पर किया जाएंगा। रिजल्ट से परीक्षार्थियों के लिए उत्तरकुंजी जारी होनी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कैट आंसर-की दिसंबर के पहले सप्ताह में जारी हो सकती है। हालांकि, एग्जाम की आंसर-की रिलीज होने के संबंध में आधिकारिक कोई सूचना नहीं जारी हुई है, इसलिए परीक्षार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे पोर्टल पर लेटेस्ट अपडेट प्राप्त करने के लिए नजर बनाएं रखें। 24 नवंबर को आयोजित हुई थी कैट परीक्षा इंडियन इंस्ट्टीयूट ऑफ मैनेजमेंट कोलकाता की ओर से कैट परीक्षा का आयोजन 24 नवंबर, 2024 को किया गया था। यह एग्जाम देश के 170 शहरों में किया गया था। अब परीक्षार्थियों को उत्तरकुंजी और रिस्पॉस शीट रिलीज होने का इंतजार है, जो जल्द ही जारी हो सकती है। उत्तरकुंजी जारी होने के बाद कैंडिडेट्स अपने क्वैश्चचन की जांच कर सकेंगे। साथ ही अगर किसी प्रश्न पर कोई आपत्ति है तो ऑब्जेक्शन उठा सकेंगे। उत्तरकुंजी पर आपत्तियां एकत्र करने के बाद संस्थान की ओर से फाइनल आंसर-की और नतीजो का एलान किया जाएगा। रिजल्ट जनवरी के दूसरे सप्ताह में घोषित होने की संभावना है फिलहाल संस्थान ने नतीजे की कोई डेट अभी तक नहीं जारी की है। सबसे पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक पोर्टल iimcat.ac.in पर जाना होगा। अब, होमपेज पर उपलब्ध कैट एग्जाम आंसर-की पीडीएफ लिंक पर क्लिक करें।अब उत्तर कुंजी पीडीएफ पेज पर जाएं। लॉगिन क्रेडेंशियल सबमिट करें। अब कैट उत्तर कुंजी 2024 पीडीएफ आपकी स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगी। इसे डाउनलोड करें और भविष्य की आवश्यकता के लिए उसकी हार्ड कॉपी अपने पास रखें। बता दें कि कैट परीक्षा के माध्यम से कैंडिडेट्स देश के विभिन्न इंडियन इंस्ट्टीयूट ऑफ मैनेजमेंस्ट (IIM) संस्थानों में प्रवेश पा सकेंगे। इस एग्जाम के लिए आवेदन फॉर्म 1 अगस्त, 2024 से स्वीकार करना शुरू हुए थे। वहीं, 20  सितंबर, 2024 तक परीक्षा के लिए आवेदन कर पाएंगे। वहीं, 24 नवंबर को एग्जाम कंडक्ट कराया गया था। इसके बाद अब उम्मीदवार उत्तरकुंजी की राह देख रहे हैं।  इस एग्जाम से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करना होगा।

टीचिंग में बनाना है करियर तो 12वीं के बाद करें ये कोर्स, सुनहरा होगा भविष्य

देशभर में रिजल्ट बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट जारी होने का दौर शुरू हो चुका है। इसी के चलते 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने जा रहे ऐसे स्टूडेंट्स जो आगे चलकर शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाने की सोच रहे हैं या टीचर बनना चाहते हैं उनके लिए अभी से दरवाजे खुल जाएंगे। 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद ही बहुत से ऐसे कोर्स उपलब्ध हैं जिनमें आप प्रवेश लेकर इस क्षेत्र में अपने करियर का निर्माण कर सकते हैं। इसके लिए आपको ग्रेजुएशन डिग्री हासिल करने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि इन कोर्स के साथ आपको टीचिंग योग्यता के साथ ही ग्रेजुएशन डिग्री की मान्यता प्राप्त हो जाएगी। ये हैं कोर्स अगर आप बारहवीं उत्तीर्ण कर चुके हैं और शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं तो आप बीएलएड/डीएलएड/बीए बीएड/बीएससी बीएड कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। इन सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसमें बीएलएड/बीए बीएड/बीएससी बीएड सभी चार वर्षीय जबकि डीएलएड दो वर्षीय पाठ्यक्रम है। कैसे होता है प्रवेश बीएलएड/बीए बीएड/बीएससी बीएड में प्रवेश के लिए राज्यों की ओर से प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इन इंटीग्रेटेड कोर्सेज में दाखिले के लिए अब देश भर में एक परीक्षा आयोजित करने का भी प्रावधान है। इसके अलावा डीएलएड पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए कई राज्यों में प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है वहीं कहीं-कहीं मेरिट के आधार पर भी प्रवेश दिया जाता है। आपको बता दें कि बीएड करने वाले अभ्यर्थी छठी से आठवीं कक्षा तक में पढ़ाने के लिए पात्रता प्राप्त करते हैं। इसी प्रकार बीएलएड डिग्री हासिल करने वाले उम्मीदवार 6 साल से बड़े और 12 साल से कम उम्र के बच्चों को पढ़ाने के लिए योग्यता प्राप्त कर लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशनुसार डीएलएड वाले अभ्यर्थी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाने के योग्य होते हैं।  

वन्यजीव हमलों में होने वाली मौतों के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने मुआवजा राशि बढ़ाकर 25 लाख रुपये हुई

भोपाल वन्यजीव हमलों में होने वाली मौतों के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने मुआवजा राशि बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी है। पहले यह राशि सिर्फ 8 लाख रुपये थी। नई व्यवस्था में पीड़ित परिवार को तुरंत 10 लाख रुपये मिलेंगे और बाकी 15 लाख रुपये की FD बनाई जाएगी। यह कदम मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर उठाया गया है। मध्य प्रदेश का मुआवजा अब महाराष्ट्र के बराबर हो गया है। दो किश्तों में जाएगी राशि यह महत्वपूर्ण बदलाव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के बाद आया है। वन विभाग इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा। इससे पहले, वन्यजीव हमले में मौत पर मिलने वाला मुआवजा महाराष्ट्र के मुकाबले काफी कम था। अब बढ़ी हुई राशि से पीड़ित परिवारों को कुछ आर्थिक राहत मिल सकेगी। यह राशि दो किस्तों में दी जाएगी। पहली किस्त 10 लाख रुपये की तत्काल दी जाएगी। बाकी 15 लाख रुपये की FD की जाएगी। इस FD में से 10 लाख रुपये 5 साल बाद और 5 लाख रुपये 10 साल बाद मिलेंगे। यह राशि मृतक के वारिसों को ब्याज समेत मिलेगी। हर साल आते हैं 40 मामले वर्तमान में, वन विभाग के पास हर साल वन्यजीव हमलों में मौत के लगभग 40 मामले आते हैं। इसके लिए करीब 3 करोड़ रुपये का बजट रखा जाता है। नया प्रस्ताव कैबिनेट में पेश होने के बाद इस बजट में भी इजाफा होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र में भी इसी तरह की व्यवस्था है, जहां वन्यजीव हमले में मौत पर 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। मध्य प्रदेश में अभी तक मौत पर 8 लाख, इलाज पर खर्च की गई राशि और स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये दिए जाते थे। वहीं, छत्तीसगढ़ में 6 लाख, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में 5-5 लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। हैरान करने वाले हैं आंकड़े मध्य प्रदेश में बाघ, तेंदुए जैसे मांसाहारी जानवरों का रिहायशी इलाकों में आना बढ़ रहा है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। पिछले पांच सालों में वन्यजीव हमलों में 292 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2023-24 में अक्टूबर तक वन्यजीव हमलों में मौत, घायल होने और पशुओं के नुकसान के मामलों में 15 करोड़ 3 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। यह आंकड़ा इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। एमपी से सटे प्रदेशों में भी अलग है राशि मध्य प्रदेश से सटे राज्यों में मुआवजा राशि अलग-अलग है। छत्तीसगढ़ में जनहानि पर 6 लाख रुपये मिलते हैं, लेकिन स्थायी अपंगता पर कोई मुआवजा नहीं है। उत्तर प्रदेश में जनहानि पर 5 लाख और स्थायी अपंगता पर 4 लाख रुपये मिलते हैं। राजस्थान में जनहानि पर 5 लाख और स्थायी अपंगता पर 3 लाख रुपये मिलते हैं। गुजरात में जनहानि पर 5 लाख और स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये मिलते हैं। महाराष्ट्र में जनहानि पर 25 लाख और स्थायी अपंगता पर 7.5 लाख रुपये मिलते हैं।

भारतीय टेलीकॉम कंपनियां अगले कुछ वर्षों के दौरान भारी निवेश करने वाली, गांवों में फोन करते ही खट से कनेक्ट होगा!

नई दिल्ली इस समय देश के काफी ऐसे हिस्से हैं, जहां फोन की सेवा (Telephone Service) आपके मनमुताबिक नहीं मिलती है। गांवों में स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब है। लेकिन आने वाले कुछ वर्षों के दौरान ऐसी हालत नहीं रहेगी। क्योंकि भारतीय टेलीकॉम टावर कंपनियां अगले कुछ वर्षों के दौरान भारी निवेश करने वाली हैं। यह निवेश ग्रामीण नेटवर्क के विस्तार और शहरी क्षेत्रों में सर्विस क्वालिटी सुधारने के होगा। कितना होगा निवेश क्रिसिल रेटिंग्स (Crisil Ratings) की मंगलवार को यहां जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक टेलीकॉम टॉवर सेक्टर में वित्त वर्ष 2025 और 2026 में 21,000 करोड़ रुपये का निवेश होने वाला है। क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में बताया गया कि 5जी के रोलआउट के साथ-साथ बेहतर कवरेज और कनेक्टिविटी पर जोर देने से पिछले दो वित्तीय वर्षों में 23,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय (Capex) हुआ है। टावरों की संख्या में जोरदार वृद्धि क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर, आनंद कुलकर्णी ने बताया कि इंडस्ट्री ने पिछले दो वित्त वर्षों में 4जी और 5जी सेवाओं को सपोर्ट करने के लिए टावरों की संख्या जोरदार वृद्धि देखी है। अब जब 5जी सेवाओं का रोलआउट हो गया है, तो टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क कैपेक्स में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में भी हम टावरों की संख्या में बढ़ोतरी देखेंगे, क्योंकि कवरेज में बढ़त पाने के लिए कंपनी टावर पोर्टफोलियो का विस्तार करेंगी। कहां होगा कंपनियों का ध्यान कुलकर्णी का कहना है “टेलीकॉम कंपनियों का ध्यान कम पहुंच वाले ग्रामीण क्षेत्रों में टावर घनत्व पर रहेगा, जहां वित्तीय वर्ष 2024 के अंत में टेली घनत्व केवल 59 प्रतिशत था, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 134 प्रतिशत था। कुछ टेलीकॉम कंपनियों द्वारा अपने 4जी और 5जी कवरेज का विस्तार करने की योजना भी टावर कैपेक्स को बढ़ा सकती है।” 58,000 नए टॉवर लगे रिपोर्ट के मुताबकि बीते दो साल के दौरान टेलीफोन टावर सेक्टर में जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2023 और 2024 के दौरान इन कंपनियों ने कुल 58,000 नए टावर जोड़े। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में, टेलीकॉम इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन के कारण टावर कंपनियों के किरायेदारी अनुपात में गिरावट देखने को मिली है। टेलीकॉम इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन से मूल्य निर्धारण की क्षमता टेलीकॉम कंपनियों के पास चली गई है।

ट्रंप के मुताबिक उनके पहले आदेशों में इन तीन देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाएंगे

न्यूयॉर्क अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद चीन, मेक्सिको और कनाडा के खिलाफ कड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। ट्रंप के मुताबिक, उनके पहले आदेशों में इन तीन देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगाए जाएंगे, जिससे इन देशों की नीतियों पर दबाव डाला जाएगा। ट्रंप का कहना है कि इन देशों से अमेरिका में अवैध प्रवासियों की आवक, ड्रग्स की सप्लाई और अन्य गंभीर मुद्दों को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। ट्रंप का निर्णय और उद्देश्य ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके पहले आदेशों में कनाडा और मेक्सिको से अमेरिका आने वाले सभी उत्पादों पर 25 फीसदी का टैरिफ लगाया जाएगा। इसके अलावा, चीन से आने वाले उत्पादों पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा। यह फैसला विशेष रूप से तब लिया गया है जब अमेरिका में ड्रग्स की समस्या बढ़ रही है, जिनमें फेंटानिल जैसी दवाएं प्रमुख हैं, जो मुख्य रूप से मेक्सिको के रास्ते अमेरिका पहुंचती हैं। ट्रंप का मानना है कि इन देशों के साथ व्यापार संबंधों में सुधार लाने के लिए यह एक जरूरी कदम है। मेक्सिको और कनाडा से जुड़ी समस्याएं ट्रंप ने कहा कि कनाडा और मेक्सिको से अमेरिका में बड़ी संख्या में अवैध प्रवासी प्रवेश कर रहे हैं। इन देशों से अवैध प्रवासी अमेरिका में प्रवेश करते हैं, जो न केवल देश की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं बल्कि अमेरिका के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को भी प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, इन देशों से ड्रग्स की आपूर्ति भी अमेरिका में हो रही है, जिससे देश में अपराध का स्तर बढ़ रहा है। ट्रंप के अनुसार, इस स्थिति को सुधारने के लिए जरूरी है कि इन देशों से आने वाले उत्पादों पर कड़ा शुल्क लगाया जाए। चीन पर खास निशाना चीन के प्रति ट्रंप का गुस्सा विशेष रूप से इन ड्रग्स की आपूर्ति के कारण और अधिक बढ़ा है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि उन्होंने चीन के साथ कई बार ड्रग्स की आपूर्ति को रोकने को लेकर बातचीत की थी, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। ट्रंप के मुताबिक, चीन ने यह वादा किया था कि वह ड्रग्स डीलर्स को सजा देगा, लेकिन इस वादे पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते चीन से लगातार फेंटानिल जैसे ड्रग्स की खेप अमेरिका में आ रही है, जो मुख्यत: मेक्सिको के माध्यम से अमेरिका पहुंचती है। इस कारण ट्रंप ने चीन से आने वाले उत्पादों पर 10 फीसदी का अतिरिक्त शुल्क लगाने का निर्णय लिया। व्यापार और आपूर्ति चेन पर असर ट्रंप के इस फैसले से उत्तरी अमेरिका (कनाडा, मेक्सिको और अमेरिका) की आपूर्ति चेन पर असर पड़ सकता है। इन देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। 25 फीसदी टैरिफ के कारण कनाडा और मेक्सिको से आने वाले उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इसी प्रकार, चीन के साथ व्यापार में भी अतिरिक्त शुल्क लगने से अमेरिका और चीन के व्यापार संबंधों में और तनाव उत्पन्न हो सकता है। चीन की प्रतिक्रिया और भविष्य की रणनीति चीन ने पहले भी ट्रंप की व्यापार नीतियों को लेकर विरोध जताया था, और यह उम्मीद जताई जा रही है कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद चीन के साथ व्यापारिक तनाव और बढ़ सकता है। चीन के पॉलिसी एडवाइजर झेंग योंगनियान ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि ट्रंप की नई टीम से चीन को बड़ा खतरा हो सकता है। झेंग ने कहा कि ट्रंप की टीम में एलन मस्क और भारतीय मूल के बिजनेसमैन विवेक रामस्वामी जैसे लोग शामिल हैं, जो चीन के लिए अमेरिकी नीति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। झेंग का कहना था कि अगर ट्रंप अपनी सरकार में सुधार करने में सफल रहते हैं, तो अमेरिका एक नया और प्रतिस्पर्धी सिस्टम तैयार कर सकता है, जो चीन के लिए और भी मुश्किलें खड़ी करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप के व्यापार शुल्कों का सबसे बड़ा असर चीन के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा, जो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में खटास ला सकता है। ताइवान और दक्षिण चीन सागर यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीन के खिलाफ कड़े कदम उठा चुके थे, और अब एक बार फिर वह ताइवान और दक्षिण चीन सागर जैसे वैश्विक मुद्दों पर चीन के खिलाफ सख्त उपायों को लागू करेंगे। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को स्वतंत्र राज्य के रूप में मानता है। दक्षिण चीन सागर में चीन का कई देशों के समुद्री क्षेत्रों पर दावा है, जिसे अमेरिका और अन्य देशों ने चुनौती दी है। इस प्रकार, ट्रंप का यह कदम केवल अमेरिका के आंतरिक व्यापार नीति को बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य भी तैयार कर सकता है, जो वैश्विक व्यापार और कूटनीति में नई दिशा तय करेगा। कुल मिलाकर, डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम अमेरिका के प्रमुख व्यापार साझेदारों, विशेषकर चीन, मेक्सिको और कनाडा के साथ संबंधों को प्रभावित करेगा और एक नई कूटनीतिक चुनौती खड़ी करेगा। आने वाले दिनों में इस फैसले का वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव देखा जाएगा, जो उत्तरी अमेरिका के व्यापार और राजनीतिक समीकरणों को बदलने की दिशा में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।

मप्र से सागवान लकड़ी अवैध कटाई कर नागपुर, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हो रहा अवैध कारोबार

Illegal cutting of teak wood from Madhya Pradesh is taking place in Nagpur, Rajasthan, Andhra Pradesh and Telangana. भोपाल। जंगल महकमे मुख्यालय सर्किल और वनमंडलों में कई पद रिक्त पड़े हैं। खासकर सर्किल और वनमंडलों डीएफओ से लेकर डिप्टी रेंजर्स के पास खाली है। मैदानी अवल की बात करें तो वन विभाग में वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए 25000 के लगभग अमला स्वीकृत है. इनमें से 1900 खाली पड़े हैं. स्वीकृति अमले से 8% फॉरेस्ट गार्ड डीएफओ और पीएफ कार्यालय बाबू गिरी का काम कर रहे हैं तो 4% फॉरेस्ट गार्ड रसूखदार प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अफसरों के कार्यालयों और उनके बंगले पर दरबान दरबान बने हुए हैं. यह स्थिति भोपाल से लेकर 16 सर्किल और 65 वन मंडलों में बनी हुई है। इसका फायदा लकड़ी माफिया से लेकर अतिक्रमण माफिया तक उठा रहे हैं। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार मप्र से सागवान लकड़ी अवैध कटाई कर नागपुर, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई शहरों में अवैध कारोबार हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार टिंबर माफिया प्रदेश में सागौन की अवैध कटाई कर 100 करोड़ रूपया से अधिक का कारोबार करता है। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार जबलपुर, बैतूल, छतरपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, शहडोल और उज्जैन वन वृत में सबसे अधिक लकड़ी की अवैध कटाई हो रही है। धार वन मंडल में 40 घनमीटर सागवान की लकड़ी जप्त और देवास वन मंडल में हुई अवैध कटाई इस बात की गवाह है कि प्रदेश में धड़ल्ले से अवैध कटाई हो रही है। लकड़ी की अवैध कटाई और अन्य राज्यों में तस्करी की शिकायत नागपुर टिंबर संगठन के अलावा मध्य प्रदेश के टिंबर संगठन ने बकायदा पीसीसीएफ संरक्षण को की है। इस शिकायत की पुष्टि वन विभाग में अवैध कटाई से संबंधित दर्ज अपराधिक प्रकरण भी करते हैं। इस संबंध में छिंदवाड़ा सर्कल में एक समीक्षा बैठक भी हो चुकी है। इस समीक्षा बैठक में वन वृत और वन मण्डलों में पदस्थ आईएफएस अधिकारियों के साथ-साथ टिंबर संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे। इस बैठक में दिलचस्प पहलू यह रही कि जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदार अधिकारी टिंबर संगठन के पदाधिकारी से प्रमाण मांगते नजर आ रहे थे। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि छिंदवाड़ा में तो अवैध कटाई और तस्करी से संबंधित समीक्षा हुई किंतु मुख्यालय स्तर पर पूर्णकालिक पीसीसीएफ संरक्षण नहीं होने की वजह से मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है। टिंबर संगठन के पदाधिकारी के शिकायत की पुष्टि वन विभाग के अधिकृत आंकड़े भी कर रहें है। विभाग के अधिकृत आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष जबलपुर वन वृत में कुल दर्ज अपराधी प्रकरण 3445 में से 3129 प्रकरण केवल अवैध कटाई से संबंधित हैं। इसी प्रकार छिंदवाड़ा वन वृत्त में दर्ज प्रकरण की संख्या 2302 है तो अवैध कटाई के प्रकरण 2206 दर्ज किए गए हैं। उज्जैन वन वृत 1201 प्रकरण अवैध कटाई से संबंधित हैं। विदिशा वन मंडल के लटेरी और उसके आसपास क्षेत्र में आज भी अवैध कटाई के सिलसिला जारी है। अपर मुख्य सचिव अशोक अग्रवाल ने कलेक्टर एसपी के साथ बैठक की परंतु नतीजा कुछ नहीं निकला। लटेरी में आज भी रेंजर के पद खाली पड़े हैं। मुख्यालय और राज्य शासन स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया गया। सुरक्षा में हर साल वनकर्मियों के साथ मारपीट के 20-30 प्रकरण संरक्षण शाखा से एकत्रित आकड़ों के मुताबिक वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा में हर साल वनकर्मियों के साथ मारपीट के 20-30 प्रकरण दर्ज हो रहे है। पिछले तीन सालों में जंगलों की सुरक्षा में आधा दर्जन वनकर्मियों को अपनी जान तक गंवाने पड़े है। यही नहीं, विदिशा, रायसेन, गुना, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, नरसिंहपुर, बालाघाट, बैतूल, छिंदवाड़ा, सागर, दमोह, बुरहानपुर, वन मंडलों में 2 दर्जन से अधिक वन कर्मचारियों पर माफिया प्राणघातक हमला कर चुके हैं। सीआरपीसी की धारा 197 के तहत वन कर्मियों को प्रोटेक्शन दिया गया है कि गोलीबारी की घटना में तब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी जब तक राजपत्रित ऑफिसर की जांच रिपोर्ट न जाए। बुरहानपुर के बाद लटेरी गोलीकांड में वन कर्मियों पर बिना जांच के आईपीसी की धारा 302 और 307 के तहत एफआईआर दर्ज कर दी गई। धार में कछुआ गति से 40 घन मीटर की जांच वन मंडल धार में आरा मशीन मनावर से जब्त 40 घन मीटर अवैध सागवान के मामले में जांच कछुआ गति से चल रही है। बताया जाता है कि जांच में वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बचाने का प्रयास चल रहा है। 3 सप्ताह बाद भी वन विभाग की टीम या पता लगाने में असफल रही कि 40 घन मीटर सागवान चटपट धार में कहां से आई ? वन विभाग यह भी पता नहीं लगा सकी कि 2 साल से चल रहे गोरख धंधे में किन-किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों का इदरीशखान से सांठ-गांठ है। धार वन विभाग की बड़ी कार्यवाही के बाद यह सवाल उठने लगा है कि इतनी बड़ी मात्रा में सागवान इमारती लकड़ी कहां से काट कर आ रही थी? अवैध कटाई और उसके अवैध खरीद-फरोख्त के गोरख धंधे में वन विभाग के कौन-कौन अधिकारी -कर्मचारी शामिल थे? यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि तीन दिन पहले ही फॉरेस्ट के कर्मचारियों ने निरीक्षण किया था और सब कुछ ओके पाया था। मनावर एसडीओ और कुक्षी के प्रभारी रेंजर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पीएम जन-मन योजना का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर एवं पिछड़े जनजातीय समूहों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समाज के सबसे कमजोर आय वर्ग के लोगों को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई पीएम जन-मन योजना उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर एवं पिछड़े जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। छिंदवाड़ा जिले के तामिया ब्लॉक के भारियाढाना गांव की श्रीमती प्रमिला पति संजय भारती को इस योजना का भरपूर लाभ मिला है। प्रमिला मध्यप्रदेश की विशेष पिछड़ी भारिया जनजाति से हैं। वे अपने परिवार के साथ बड़ी विपरीत परिस्थितियों में जीवन-यापन कर रही थीं। परिवार में पांच सदस्य हैं। दिहाड़ी मजदूरी ही उनके परिवार का मुख्य आय स्रोत था और न्यूनतम आय में उनका जीवन बेहद कठिन था। श्रीमती प्रमिला भारती और उनके परिवार को इसी योजना से कई लाभ मिल रहे हैं, जिनसे उनका जीवन अब बेहद खुशहाल हो गया है। परिवार के पास आधार कार्ड, समग्र आईडी, जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड जैसे सभी जरूरी दस्तावेजों सहित जन-धन बैंक खाता भी है। इनकी मदद से उन्हें शासन की सभी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है। योजना के तहत सबसे पहले उन्हें एक पक्का मकान मिला। पहले उनके पुराने (मिट्टी और बांस से बने) कच्चे मकान में बारिश में पानी टपकता था और दीवारें भी अत्यंत कमजोर थीं। बारिश भीगते हुए और सर्दी कंपकपाते हुए बीतती थी। पक्की छत वाले मकान के रूप में अब उनके परिवार को एक स्थायी, मजबूत और सुरक्षित आवास मिल गया है। पहले चूल्हे पर लकड़ी जलाकर धुंए में खाना पकाने से उन्हें स्वास्थ्य समस्याएं होती थीं। लेकिन उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन मिलने से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। अब वे साफ-सुथरे वातावरण में भोजन बनाती हैं और गैस सिलेंडर रिफिल के लिए उन्हें सब्सिडी भी मिलती है। परिवार के सभी सदस्यों के जाति प्रमाण पत्र बन जाने से प्रमिला को अपने बच्चों की शिक्षा में भी उन्हें भरपूर मदद मिल रही है। एमपीटास पोर्टल पर प्रोफाइल बनने के बाद दोनों बच्चों को एसटी छात्रवृत्ति का लाभ मिला। इससे उनके शिक्षा संबंधी खर्चों का भार भी कम हुआ। पीएम जन-धन योजना से परिवार का बैंक खाते खोलने से उन्हें भारिया पोषण आहार योजना के तहत हर महीने पोषण आहार के लिए राशि सीधे खाते में मिल रही है। साथ ही आयुष्मान कार्ड मिलने से उनके परिवार को अब पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा भी मिल गई है। पीएम जन-मन योजना के कारण श्रीमती प्रमिला भारती और उनके परिवार को वे सभी सुविधाएं मिल रही हैं, जिनकी उन्हें लंबे समय से आस थी। शासकीय योजनाओं का सीधा और समग्र लाभ मिलने से उनका जीवन स्तर बेहतर हो गया है। श्रीमती प्रमिला भारती प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस परिवर्तन के लिए धन्यवाद देती हैं। वे कहतीं हैं “पी.एम. जन-मन ने हमारी सारी समस्याएं दूर कर दी हैं। आज मेरा पूरा परिवार खुशहाल और सुरक्षित जीवन जी रहा है।”

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