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इस तरह से पाएं शनिदेव की कृपा, रोजाना करें ये काम प्रसन्न रहेंगे शनि

शनि अनुशासन, धैर्य और दृढ़ता के लिए जाने जाते है। शनि को न्याय का देवता कहा जाता है। शनि व्यक्ति के कर्म के अनुसार फल देते हैं, इसलिए इन्हे कर्मफलदाता शनि कहा जाता है। शनि सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह है। शनि का राशि परिवर्तन 2.5 साल बाद होता है। जब शनि ग्रह लग्न से बारहवीं राशि में प्रवेश करते हैं तो उस विशेष राशि से अगली दो राशि में गुजरते हुए अपना समय च्रक पूरा करते समय शनि की साढ़े साती शुरु हो जाती है। अभी शनि कुंभ राशि में गोचर कर रहे हैं। शनि की साढ़े साती कुंभ, मकर और मीन राशि पर चल रही है। शनि को राशि चक्र पूरा करते समय 30 वर्ष लग जाते हैं। आइए जानते हैं शनि को प्रसन्न करने के उपाय। शनि देव सिखाते हैं ये 3 चीजें शनि विरोधाभासों का ग्रह है। एक ओर, इनकी धीमी गति हमें अटका हुआ, सुस्त या देरी से बोझिल महसूस करा सकती है। लेकिन दूसरी ओर, शनि का असली सार उसके मेहनती स्वभाव में निहित है। जब आप शनि की एनर्जी से तालमेल बिठाते हैं, तो यह आपको 3 चीजें सिखाकर, आपका जीवन बदलता देता- -अत्यधिक अनुसान -बेहतरीन दिनचर्या -दृढ़ता का मूल्य शनि ग्रह को शक्तिशाली बनाने के लिए खास उपाय अनुशासन जरुरी है सुबह जल्दी उठें, नियमित रुप से दिनचर्या का पालन करें और अपनी कमिटमेंट्स पर ध्यान देना जरुरी है। मेहनत करें जो लोग मेहनत करते हैं शनि उनके प्रयास का हमेशा सम्मान करते हैं। कभी भी चुनौतियों से न बचें, बड़े-बड़े चैलेंज को गले लगाओ। मन को व्यवस्थित करें यदि आप ध्यान या योग जैसे अभ्यास करेंगे तो शनि की भारी ऊर्जा को कम कर सकते हैं। दयालु बनें जो व्यक्ति दान और विनम्रता के कार्य करते हैं उन्हें शनि फल जरुर देते हैं। कम भाग्यशाली लोगों की मदद करना जरुरी है। हमेशा खुद को दयालु बनाएं।  

माफी औकाफ की जमीन पर बाउण्ड्रीवॉल सहित अन्य अतिक्रमण ध्वस्त कराए 100 करोड़ रूपए बाजार मूल्य की है यह जमीन

ग्वालियर ग्वालियर शहर के बीचों बीच तारागंज कोटा लश्कर स्थित रामजानकी मंदिर ट्रस्ट की लगभग पौने नौ बीघा सरकारी जमीन को जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। राज्य शासन के निर्देशों के पालन में मंदिरों से जुड़ी सरकारी जमीन (माफी औकाफ) को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए जिले में चलाई जा रही विशेष मुहिम के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस बड़ी कार्रवाई में मुक्त कराई गई सरकारी जमीन की कीमत लगभग 100 करोड़ रूपए आंकी गई है। जिला प्रशासन, नगर निगम एवं पुलिस की संयुक्त टीम ने इस जमीन को घेरने के लिये अवैध रूप से बनाई गई बाउण्ड्रीवॉल एवं अन्य अतिक्रमण जेसीबी मशीन एवं नगर निगम के मदाखलत दस्ते की मदद से ध्वस्त कराए। कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान ने रामजानकी मंदिर ट्रस्ट की जमीन के निरीक्षण दौरान मंदिर से जुड़ी माफीं औकाफ की जमीन पर अतिक्रमण करने के लिये अवैध रूप से बनाई गई बाउंड्रीवॉल सामने आई थी। कलेक्टर ने बाउंड्रीवॉल बनाने वाले के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इस परिपालन में गत शनिवार को यह कार्रवाई की गई है। इस जमीन पर मनोहर लाल भल्ला द्वारा बाउण्ड्रीवॉल बनाकर प्लॉट बेचने की तैयारी की जा रही थी। जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई कर न केवल बेशकीमती सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया, बल्कि बहुत से भोले भाले लोगों को प्लॉट की जालसाजी में फँसने से बचाया है।  

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए ई-खसरा परियोजना शुरू, ₹30 में ले पाएंगे खसरा-खतौनी की प्रमाणित प्रति

भोपाल  मध्य प्रदेश के किसानों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें अपनी जमीन के रिकॉर्ड आसानी से और कम कीमत पर मिलेंगे। मोहन सरकार ने ई-खसरा परियोजना शुरू की है, जिसके तहत किसान सिर्फ 30 रुपये में खसरा-खतौनी की प्रमाणित कॉपी प्राप्त कर सकते हैं। यह व्यवस्था जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए शुरू की गई है। राष्ट्रीय भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत ई-खसरा परियोजना की शुरुआत हुई है। इस परियोजना का लक्ष्य जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाना और किसानों तक आसानी से पहुंचाना है। इससे जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। अब किसानों को केवल 30 रुपये प्रति पन्ने पर खसरा, खतौनी और नक्शे की प्रमाणित प्रति मिलेगी। नहीं रहेगी हेराफेरी की आशंका खसरा और खतौनी किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। इनमें जमीन और खेती से जुड़ी सारी जानकारी होती है। पहले किसानों को केवल खसरा-खतौनी की फोटोकॉपी मिलती थी, जिसमें कई बार हेराफेरी की आशंका रहती थी। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था। कई बार तो किसानों के साथ धोखाधड़ी भी हो जाती थी। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें खसरा-खतौनी में बदलाव करके किसानों को ठगा गया है। लेकिन अब इस नई व्यवस्था के आने से ऐसी गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। किसानों को अब प्रमाणित दस्तावेज मिलेंगे, जिससे उन्हें सुरक्षा मिलेगी। सभी तहसीलों में आईटी सेंटर की व्यवस्था ई-खसरा परियोजना के तहत, प्रदेश की सभी तहसीलों में आईटी सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटर्स में एक निजी कंपनी काम कर रही है, जिसे सरकार ने यह जिम्मेदारी सौंपी है। किसान इन सेंटर्स में जाकर आसानी से अपने जमीन के दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर सकते हैं। खसरा (B-1) और नक्शे की कॉपी के लिए 30 रुपये प्रति पन्ना देना होगा। यह व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी है और इससे भ्रष्टाचार की संभावना खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी। इस लिए यह व्यवस्था किसानों के हित में बताई जा रही है। यहां देख सकते हैं विवरण सरकार ने किसानों के लिए एक और सुविधा भी उपलब्ध कराई है। यदि कोई किसान पैसे खर्च नहीं करना चाहता है, तो वह अपने खेत का विवरण मुफ्त में देख सकता है। इसके लिए उसे mpbhulekh.gov.in वेबसाइट पर जाना होगा। यहां से वह अपने खाते की जानकारी, खेत का नक्शा और अन्य जरूरी विवरण देख सकता है। इससे किसानों को अपने खेत और फसल पर नजर रखने में भी मदद मिलेगी।

धीरेंद्र शास्त्री ने बांग्लादेश के हिंदुओं से कहा यदि वे चुप रहेंगे, तो कोई उनकी मदद नहीं कर सकेगा,सड़कों पर उतरें और एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएं

छतरपुर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हिंदू एकता यात्रा का बुधवार को 7 वा  दिन है। यह यात्रा आज झांसी के मऊरानीपुर से घुघसी गांव तक पहुंचे । पदयात्रा में शामिल लोगों में उत्साह बना हुआ है। इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी। जिनमें संभल हिंसा, बांग्लादेश में हिंदुओं के हालात और मुस्लिम आबादी का मुद्दा शामिल है। धीरेंद्र शास्त्री ने बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के हिंदुओं को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हम अपने लिए नहीं लड़ रहे। बल्कि तुम्हारे भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अगर तुम नहीं जागोगे। तो तुम्हारे मंदिर एक-एक कर मस्जिदों में बदल दिए जाएंगे।” बांग्लादेश में हाल के दिनों में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचार की खबरें सामने आई हैं। इस बीच, चटगांव इस्कॉन पुंडरीक धाम के अध्यक्ष चिन्मय कृष्णन दास, जिन्हें चिन्मय प्रभु के नाम से जाना जाता है, को ढाका पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चिन्मय प्रभु ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई थी। शुक्रवार को उन्होंने रंगपुर में एक विरोध रैली को संबोधित किया था। पुलिस ने आरोप लगाया कि उनकी रैली में देश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया। इस मामले पर धीरेंद्र शास्त्री ने बांग्लादेश के हिंदुओं से अपील करते हुए कहा कि यदि वे चुप रहेंगे, तो कोई उनकी मदद नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश के हिंदू सड़कों पर उतरें और एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएं। अपनी संस्कृति और अपने रक्षकों की रक्षा करें। यदि वे ऐसा नहीं करेंगे, तो उनके मंदिर खत्म हो जाएंगे, और उनकी बहन-बेटियां या तो मारी जाएंगी या जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाएगा। भारत के हिंदुओं को भी इस बात को समझना होगा कि यह लड़ाई सबके भविष्य के लिए है।”  

मोदी सरकार ने मध्य प्रदेश में कमजोर जनजातीय समूह परिवारों के लिए 30,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी

भोपाल केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवारों के लिए 30,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी है। केंद्र ने ‘प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान’ (पीएम-जनमन) के तहत इन परिवारों को सौगात दी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने  ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हवाले से कहा- नरेन्द्र मोदी सरकार का ध्यान समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचने पर है। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवारों के लिए 30,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि पीएम-जनमन योजना के तहत लक्ष्य (4.9 लाख घर) मार्च 2026 तक हासिल किया जाना है। केंद्र ने पीएम-जनमन के अंतर्गत आंध्र प्रदेश राज्‍य में 297.18 कि.मी लंबाई की 76 सड़कों की स्‍वीकृति भी प्रदान की है। इन 76 सड़कों की अनुमानित लागत 275.07 करोड़ रुपये है, जिसमें से केंद्रीय अंश 163.39 करोड़ रुपये एवं राज्य अंश 111.68 करोड़ रुपये है। प्रधानमंत्री मोदी ने नवंबर 2023 में पीएम-जनमन पहल की शुरुआत की थी। इस पहल का उद्देश्य कमजोर जनजातीय परिवारों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करना है, जिसमें सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण के साथ-साथ बेहतर सड़क, दूरसंचार संपर्क और स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना शामिल है।

प्रयागराज महाकुंभ में 13 जनवरी 2025 को प्रथम मुख्य स्नान पर्व के लिए तैयारी

 प्रयागराज प्रयागराज में महाकुंभ 2025 को भव्य दिव्य नव्य बनाने की तैयारी युद्ध स्तर पर शुरू है। 13 जनवरी 2025 प्रथम मुख्य स्नान पर्व की तिथि 10 दिन पहले ही यह संपूर्ण कार्य पूरा करने की कोशिश जारी है। इसके लिए 24 घंटे दिन रात कार्य हो रहा है। लेबर टेक्नीशियन राजगीर कारीगर आदि स्विफ्ट वाइज काम कर रहे हैं। संगम और किला के मध्य स्थित बड़े हनुमान जी मंदिर के कॉरिडोर का निर्माण कार्य भी प्रयागराज विकास प्राधिकरण द्वारा लगातार किया जा रहा है। बड़े हनुमान मंदिर कॉरिडोर को जोधपुर पिंक स्टोन से सजाया संवारा जा रहा है। बता दें कि बड़े हनुमान मंदिर कॉरिडोर निर्माण के लिए 11,589 स्क्वायर मीटर जमीन को चिह्नित किया गया है। इसमें 535 स्क्वायर मीटर में बड़े हनुमान मंदिर का भव्य गर्भगृह और परिक्रमा पथ बन रहा हैं। वहीं कॉरिडोर एरिया के लिए 2184 स्क्वायर मीटर भूमि निर्धारित है। लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से कॉरिडोर का निर्माण कराया जाना था। पैदल परिक्रमा पथ बनेगा हालांकि कम समय की वजह से कुछ कार्यों को आगे बढ़ाया गया है। कॉरिडोर एरिया में पाथवे के अलावा पूजा-प्रसाद, फूलमाला की दुकानें और श्रद्धालुओं के लिए 6,176 स्क्वायर मीटर का खुला क्षेत्र डिवेलप किया जा रहा है। कॉरिडोर रोड के लिए 1,310 स्क्वायर मीटर और पैदल परिक्रमा पथ के लिए 760 स्क्वायर मीटर भूमि प्रस्तावित है। बजरंगबली से जुड़ी आकृतियां कॉरिडोर की दीवारों पर बजरंगबली के जीवन से जुड़ी आकृतियों को उकेरा जाएगा। कॉरिडोर में प्रसाद तैयार करने के लिए आधुनिक किचन का निर्माण होगा। श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना के लिए स्थान और मेडिटेशन सेंटर भी होगा। गर्भगृह में श्रद्धालुओं के आने और जाने के स्थान को भी चौड़ा किया जाएगा। इसके अलावा मंदिर में क्लाक रूम, आरओ वॉटर की सुविधा भी मिलेगी।

मोबाइल, रील की लत पारिवारिक रिश्तों पर पड़ रही है भारी, पत्नी रील बनाने में रहती है बिजी, तलाक के लिए कुटुंब न्यायालय में पहुंचे 2000 से अधिक मामले

भोपाल  इंटरनेट मीडिया पर रील्स बनाने का शौक अब नशा बनता जा रहा है। यह नशा लोगों के दांपत्य जीवन में जहर घोल रहा है। कई मामलों तो यह तलाक की भी प्रमुख वजह बन रहा है। भोपाल के कुटुंब न्यायालय में पिछले साढ़े 10 महीनों में जो केस आए हैं, उनमें से अधिकतर में पारिवारिक बिखराव की यह चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। न्यायालय के आंकड़े बताते हैं कि एक जनवरी से 20 नवंबर तक विवाह विच्छेद के तीन हजार 349 मामले आए हैं। उनमें से दो हजार नौ मामलों में मोबाइल फोन, इंटरनेट मीडिया पर रील्स बनाने के नशे को तलाक का आधार बताया गया है। यह संख्या कुल मामलों का 60 प्रतिशत है। कुटुंब न्यायालय में इस तरह की शिकायतों के आधार पर तलाक का आवेदन देने वाले दंपती को समझाने की कोशिश हो रही है, लेकिन यह तरीका अधिकांश मामलों में काम नहीं कर रहा है। इस साल ऐसे मामलों में से केवल 938 मामले ऐसे आए, जिनमें पति-पत्नी के बीच समझौता कराया जा सका। इस तरह बढ़ रही है कलह केस – 1 शादी के दो साल बाद एक पत्नी ने तलाक का आवेदन दिया। आरोप था कि उसके पति बैंक में पदस्थ हैं, लेकिन उसे खर्च के लिए पैसा नहीं देते हैं। उसे रील भी नहीं बनाने देते हैं और कहीं घुमाने भी नहीं ले जाते हैं। काउंसलिंग में पति ने कहा कि उसकी पत्नी प्राइवेट कंपनी में एग्जीक्यूटिव के पद पर है। वह रील बनाती है। टोका तो इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर मुझे ही ब्लाक कर दिया। मामले की काउंसलिंग चल रही है। केस – 2 एक सरकारी अधिकारी पति ने शिकायत की है कि उसकी पत्नी रील के जूनून में इस कदर खो जाती है कि बच्चे की देखभाल नहीं करती। घर का हर काम प्रभावित हो रहा है। यहां तक कि मुझे भी हमेशा तैयार रहने के लिए कहती है, ताकि उसके साथ वीडियो बनाने में उसका साथ दे सकूं। इससे बच्चे का स्कूल में परफार्मेंस खराब हो रहा है। मामले में किसी तरह समझौता कराया गया। केस – 3 सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत पति ने तलाक मांगा। आरोप है कि पत्नी लगातार रील बनाने में व्यस्त रहती है। पूरा समय वीडियो शूट करने और इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट करने में ही बीत रहा है। उसके फालोअर्स भी बढ़ रहे हैं। हर रील में अलग दिखने के लिए वह रोज खरीदारी कर रही है। इस पर पत्नी का कहना है कि पति के पास बाहर घूमाने का समय नहीं है, वह केवल टाइम पास के लिए यह करती है। केस – 4 शादी के पांच साल बाद एक दंपती के बीच तलाक का मामला आया। पत्नी का कहना था कि पति घुमाने नहीं ले जाते हैं। कहते हैं कि टूरिंग जाब में हूं, बाहर भटक-भटककर थक गया हूं। वे खुद बाहर घूमते हैं और रील बनाते हैं। बीते दिनों जब उनके रील्स स्क्राल कर रही थी तो एक रील के बैकग्राउंड में पति अपनी सहकर्मी के साथ कुछ खाते और मस्ती करते नजर आए। उसे यह बर्दाश्त नहीं हुआ। मामले में काउंसलिंग जारी है।

मध्य प्रदेश सरकार 5000 करोड़ रुपए का नया कर्ज ई-ऑक्शन के जरिए स्टॉक गिरवी रखकर लिया जाएगा

भोपाल  पिछले एक वर्ष में 49000 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर 5 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है. नए कर्ज को मिलाकर एक वर्ष मोहन सरकार कुल 54,000 करोड़ का कर्ज ले चुकी है, जिस पर अब विपक्षी पार्टियों से सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. मध्य प्रदेश सरकार 5000 करोड़ रुपए का नया कर्ज ई-ऑक्शन के जरिए स्टॉक गिरवी रखकर लिया जाएगा. सरकार 26 नवंबर को 5000 करोड़ कर्ज की राशि दो चरणों में क्रमशः 2500-2500 रुपए में लेगी. सूचना के मुताबिक यह राशि 27 नवंबर को सरकार के खाते में पहुंच जाएगी.    गौरतलब है मध्य प्रदेश सरकार एक साल में 54000 करोड़ रुपए कर्ज लेने पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सवाल उठाए है. कांग्रेस के पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल ने कहा कि सरकार किसानों का कर्ज क्यों नहीं माफ कर रही, लाडली बहनों को 3000 देने का वादा था उन्हें भी नहीं दिया जा रहा. सरकार विकास की बात करती हैं लेकिन विकास हो कहां रहा है. एक साल में पांच बार 5000 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी सरकार अगर पिछले 11 महीनों में नजर डालें, तो मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने कुल 49,000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है. सरकार का कहना है कि धनराशि राज्य की विकास योजनाओं व अन्य खर्चों के लिए इस्तेमाल की गई. हालांकि इससे जनता पर कर्ज का भार लगातार बढ़ता गया है, जो बढ़कर करीब 4 लाख करोड़ हो चुका है. पिछली बार अक्टूबर में दो किश्तों में लिया था 5000 करोड़ रुपए मध्य प्रदेश सरकार चौथी बार 5000 करोड़ रुपए का कर्ज RBI से 2500-2500 करोड़ रुपए के दो किश्तों में लेगी. 5000 करोड़ रुपए का कर्ज सरकार 11 और 19 साल के लिए लेगी. सरकार यह कर्ज प्रदेश में चल रहे विकास कार्य और अन्य योजनाओं को गति देने के लिए सरकार ले रही है.  पिछले 11 महीनों में मोहन सरकार कुल 49,000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है. सरकार का कहना है कि धनराशि राज्य की विकास योजनाओं व अन्य खर्चों के लिए इस्तेमाल की गई. हालांकि इससे जनता पर कर्ज का भार लगातार बढ़ता गया है, जो बढ़कर करीब 4 लाख करोड़ हो चुका है.  साल में 54, 000 करोड़ का कर्ज ले चुकी है मध्य प्रदेश सरकार उल्लेखनीय है अगस्त और सितंबर के महीने में सरकार द्वारा लिए जाने वाले कर्ज का आंकड़ा 20 हजार करोड़ तक पहुंच गया था. अगस्त महीने में सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया था, फिर 31 मार्च 2024 को खत्म हुए वित्त वर्ष में 3,75,578 करोड़ का कर्ज लिया था.अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक सरकार ने 44 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिया था. मध्य प्रदेश सरकार पर है करीब 4 लाख करोड़ रुपए का कर्ज     अगस्त 2024 के शुरुआत में मध्य प्रदेश सरकार ने 2500-2500 करोड़ रुपए का कर्ज दो किश्तों में मध्य प्रदेश सरकार ने     5000 करोड़ का कर्ज लिया था. यह कर्ज भी 11 साल और 21 साल की अवधि के लिए लिया गया था.     22 अगस्त 2024 को 2500-2500 करोड़ रुपए के दो किश्तों में 5 हज़ार रुपए का कर्ज 14 और 21 साल की अवधि के लिए फिर लिया गया…     24 सितंबर को 2500-2500 करोड़ रुपए का कुल 5 हज़ार करोड़ का कर्ज सरकार ने लिया,यह कर्ज 12 साल और 19 साल की अवधि के लिए लिया गया.     अक्टूबर माह में सरकार ने आरबीआई से दो किश्तों में क्रमशः 2500-25000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था.

रतलाम में दरगाह पर चला मध्य प्रदेश प्रशासन का बुलडोजर : फोरलेन बनने का रास्ता हुआ साफ

Madhya Pradesh administration’s bulldozer runs on Dargah रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम में जावरा फाटक से सेजावता फंटे तक बन रहे फोरलेन बनाने का रास्ता साफ हो गया है। पहलवान बाबा की दरगाह का हिस्सा हटाने पर कोर्ट ने 13 दिन पहले जो स्टे दिया था, उसे मंगलवार को खारिज कर दिया। तहसीलदार का कहना है कि स्टे के कारण दरगाह के आसपास फोरलेन का काम रुक गया था। अब फिर से काम शुरू किया गया है। साथ ही अतिक्रमण भी हटाया जा रहा है। वहीं दरगाह कमेटी के पक्ष से जानकारी मिली कि जुड़े कि हम हाई कोर्ट में याचिका लगाएंगे। इसके साथ ही सामने रणजीत हनुमान मंदिर का भी अतिक्रमण हटाया गया विवाद की बनी थी स्थिति जावरा फाटक से सेजावता फंटे तक 4.12 किमी लंबे फोरलेन का काम चल रहा है। इसमें पहलवान बाबा की दरगाह का कुछ हिस्सा अतिक्रमण में आ रहा है। इसको लेकर विवाद की स्थिति बनी तो प्रशासन ने दरगाह से जुड़े लोगों के साथ बैठक कर मामले का हल निकाला था। फिर भी कुछ लोग कोर्ट पहुंच गए और बताया कि पहलवान बाबा की दरगाह को अवैध कार्रवाई कर नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। 13 नवंबर को तृतीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड रतलाम अतुल श्रीवास्तव की कोर्ट में प्रशासन की ओर से पक्ष रखने के लिए कोई नहीं पहुंचा तो कोर्ट ने एकपक्षीय फैसला दे दिया। इसमें कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने (स्टे) का आदेश जारी किया था। 14 नवंबर को सरकारी अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने एकपक्षीय स्टे निरस्त करने का आवेदन दिया था। मंगलवार को कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद 13 नवंबर को स्टे दे आदेश निरस्त कर दिया। तहसीलदार के फैसले को कोर्ट ने माना सही तहसीलदार ने बताया कि अगस्त में तहसील कोर्ट ने फैसला देते हुए दरगाह के कुछ हिस्से के अतिक्रमण को हटाने का कहा था। इसमें बताया था कि डोसीगांव की सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है, इसे हटाया जाए। 5 दिन में नहीं हटाया तो प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस फैसले को दरगाह कमेटी से जुड़े पक्ष ने छिपाया और अतिक्रमण हटाने से रोकने पर स्टे के लिए कोर्ट पहुंच गए। कोर्ट में जब तहसीलदार के इस फैसले को पेश किया तो कोर्ट ने उसे सही माना। साथ ही कहा कि तहसील कोर्ट से मिले फैसले के खिलाफ दूसरे पक्ष को एसडीएम कोर्ट में अपील करनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। दरगाह कमेटी से जुड़े पक्ष से मिली जानकारी में बताया कि हमारे पक्ष को तहसील कोर्ट से नोटिस मिला था। लेकिन फैसले के बारे में जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने यह कहते हुए स्टे खारिज किया है कि हमें तहसील कोर्ट के फैसले को लेकर एसडीएम कोर्ट में अपील करनी थी। अब इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में याचिका लगाएंगे। फिर से शुरू होगा काम प्रशासन के अनुसार दरगाह बनाने के लिए पॉइंट एक (.1) आरा जमीन यानी 10 बाय 10 स्क्वायर फीट की जमीन अलॉट हुई थी। पीडब्ल्यूडी के अनुसार दरगाह के सामने फोरलेन बनाने के लिए 14 से 16 मीटर जगह मिल रही है। जबकि 21 मीटर की जगह चाहिए। बाकी जगह पर अतिक्रमण किया गया है। दरगाह के लिए डिवाइडर की डिजाइन बदलना भी तय 10 नवंबर को प्रशासन ने दरगाह से जुड़े लोगों के साथ बैठक की थी। इसमें तय किया था कि दरगाह फोरलेन पर बनने वाले डिवाइडर के बीच रह जाएगी। डिवाइडर की डिजाइन बदलना भी तय किया गया था। पूरे फोरलेन पर 6 फीट चौड़ा डिवाइडर बनाया जाएगा जो दरगाह के यहां 12 फीट चौड़ा हो जाएगा। वहीं मौके पर एसडीएम अनिल भाना और लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री अनुराग सिंह और एसडीओ बीके राय का कहना है कि रोड बनाने का काम जल्द शुरू करेंगे। दरगाह का अतिक्रमण हटाने पर दिया गया स्टे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अब इस हिस्से में फोरलेन का रुका हुआ काम जल्द शुरू किया जाएगा।

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