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MP में बेची जाएंगी IVF से पैदा हुईं गाय, देंगी 10 लीटर दूध रोजाना, कीमत बस इतनी

भोपाल मप्र की मोहन सरकार अब गो-पालन को बढ़ावा देने के लिए अच्छी नस्ल की गाय की बछिया बेचेगी। सीएम के निर्देश पर पशुपालन विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। गो पालकों को भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक और आईवीएफ से पैदा हुई उन्नत नस्ल की बछिया उपलब्ध कराई जाएंगी। मप्र के पशु प्रजनन प्रक्षेत्रों में करीब 300 बछिया बिक्री के लिए चिह्नित की गई हैं। देश का दूसरा ब्रीडिंग सेंटर एमपी में नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर के देश में दो सेंटर हैं। इसमें से एक मध्यप्रदेश में हैं, जहां 13 नस्ल की गायों और 4 नस्ल की भैंसों का संरक्षण होता है।  वहीं, देसी गायों की नस्ल में सुधार के लिए अच्छी नस्ल के बच्चे, भ्रूण और सीमन पशुपालकों को उपलब्ध कराए जाते हैं। अभी साल में सिर्फ एक बार होती है नीलामी पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बेसहारा गौवंश सरकार और समाज दोनों के लिए बड़ी चुनौती है। सबसे जरूरी है कि गौपालक के लिए गाय लाभकारी हो। यानी गाय ज्यादा दूध देगी, तो लोग उसे बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। अब तक पशु प्रजनन प्रक्षेत्रों से साल में एक बार बछिया और बछड़ों की नीलामी होती थी। अब इसे बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा। दो तकनीक से पैदा हो रही बछिया भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक: देसी नस्ल की गाय की बच्चेदानी में अच्छी नस्ल का भ्रूण तैयार किया जाता है। आईवीएफ तकनीक: कृत्रिम तरीके से भ्रूण तैयार कर उसका देसी गाय की बच्चेदानी में प्रत्यारोपण किया जाता है। देश का दूसरा ब्रीडिंग सेंटर एमपी में नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर के देश में दो सेंटर हैं। इसमें से एक मध्यप्रदेश में हैं, जहां 13 नस्ल की गायों और 4 नस्ल की भैंसों का संरक्षण होता है। वहीं, देसी गायों की नस्ल में सुधार के लिए अच्छी नस्ल के बच्चे, भ्रूण और सीमन पशुपालकों को उपलब्ध कराए जाते हैं। अभी साल में सिर्फ एक बार होती है नीलामी पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बेसहारा गौवंश सरकार और समाज दोनों के लिए बड़ी चुनौती है। सबसे जरूरी है कि गौपालक के लिए गाय लाभकारी हो। यानी गाय ज्यादा दूध देगी, तो लोग उसे बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। अब तक पशु प्रजनन प्रक्षेत्रों से साल में एक बार बछिया और बछड़ों की नीलामी होती थी। अब इसे बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा। दो तकनीक से पैदा हो रही बछिया भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक: देसी नस्ल की गाय की बच्चेदानी में अच्छी नस्ल का भ्रूण तैयार किया जाता है। आईवीएफ तकनीक: कृत्रिम तरीके से भ्रूण तैयार कर उसका देसी गाय की बच्चेदानी में प्रत्यारोपण किया जाता है। तकनीक का इस्तेमाल बता दें कि, प्रदेश में मौजूद नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर में एक दर्जन से ज्यादा नस्ल की गायों और 4 नस्ल की भैंसों को पाला जा रहा है। यहां देशी गायों की नस्ल में सुधार के लिए भ्रूण ट्रांसफर तकनीक और आईवीएफ तकनीक(IVF Technology) का इस्तेमाल किया जाता है। भ्रूण ट्रांसफर तकनीक में देसी नस्ल की गायों के बच्चेदानी में उन्नत नस्ल(Advanced Breed Cow) का भ्रूण तैयार किया जाता है। जबकि आईवीएफ तकनीक के अंतर्गत, आर्टिफिशियल भ्रूण तैयार करके उसे गाय की बच्चेदानी में ट्रांसफर किया जाता हैं। इतनें में खरीद सकेंगे पशुपालक यहां गिर, साहिवाल, थारपारकर, कांकरेज, मालवी, निमाडी जैसी नस्लों को संरक्षण मिला हुआ है। बता दें कि ये गाय रोजाना 6 से 10 लीटर दूध देती है। 6 से 12 महीने की बछिया को सिर्फ 6 से12 हजार रुपए देकर पशुपालक खरीद सकेंगे। वहीं 2 से 3 साल की बछिया को 15 से 20 हजार रुपए में खरीद सकेंगे। यहां होती है नीलामी जानकारी के मुताबिक राजधानी भोपाल के भदभदा, टीकमगढ के मिनौरा, पन्ना के पवई, सागर के रतौना, छिंदवाड़ा के इमलीखेडा, बालाघाट के गढ़ी, आगर मालवा और खरगोन के रोडिया में इन बछियों की नीलामी होती है।

सिंहस्थ व्यवस्था से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को जल्द शुरू करें : मुख्य सचिव जैन

भोपाल मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सिंहस्थ व्यवस्था संबंधी बैठक की अध्यक्षता करते हुए शुक्रवार को मंत्रालय में अब तक सिंहस्थ के लिये स्वीकृत कार्यों की निविदाएं नियत समय में जारी करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जिन विभागों ने निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिये है, उनकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए उन्हें नियत समय में पूरा किया जायें। भीड़ नियंत्रण के लिये तैयार किया जायें प्लान मुख्य सचिव जैन ने कहा कि उज्जैन में आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर अभी से श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोत्तरी हो गई है। अत: वर्तमान स्थिति और सिंहस्थ समय में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का अनुमान लगाकर उनकी व्यवस्था और सुरक्षा के संबंध में प्लान तैयार किया जायें। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ में बेहतर व्यवस्था के लिये अधिकारियों की टीम प्रयागराज में कुंभ की व्यवस्थाओं का अध्ययन करें। बैठक में बताया गया कि उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के लिये 2 स्तरीय समिति का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा सिंहस्थ के कार्यों की स्वीकृति दी जा रही है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा सिंहस्थ से जुड़े कार्यों के प्रस्ताव को प्रस्तुत किया जा रहा है। बैठक में उज्जैन कलेक्टर और कमिश्नर वर्चुअली जुड़े और उन्होंने सिंहस्थ को लेकर की जा रही कार्रवाई एवं विकास कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। सिंहस्थ संबंधी कार्यों का प्रस्तुतिकरण बैठक में वर्ष 2025 से वर्ष 2027 तक आगामी तीन वर्षो के प्रस्तावित सिंहस्थ संबंधी कार्यों का प्रस्तुतिकरण दिया गया। बैठक में प्रमुख रूप से लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन एवं आवास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ऊर्जा, पर्यटन और संस्कृति विभाग सहित संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।  

अब मध्यप्रदेश में जनता सीधे चुन सकेगी जनपद और जिला पंचायत अध्यक्ष, अधिनियम में होगा संसोधन

भोपाल प्रदेश में जिस तरह महापौर सीधे जनता से चुने जाते हैं, वही व्यवस्था जिला और जनपद पंचायत अध्यक्ष के लिए भी बनाने की तैयारी है। अभी जिला और जनपद पंचायत के अध्यक्ष निर्वाचित सदस्यों के माध्यम से चुने जाते हैं। अध्यक्षों के चुनाव में प्रलोभन की शिकायत पंचायत चुनाव वैसे तो गैरदलीय आधार पर होते हैं लेकिन इसमें राजनीतिक दलों का पूरा दखल रहता है। जिस दल की सदस्य संख्या अधिक होती है, उसका समर्थित व्यक्ति अध्यक्ष बन जाता है। जिन निकायों में एक दल के समर्थकों का बहुमत नहीं होता है, वहां सदस्यों को प्रलोभन दिए जाने के साथ धमकाने की शिकायतें भी सामने आती हैं। इसे देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायतराज अधिनियम में संशोधन की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए पंचायतराज संचालनालय ने अन्य राज्यों के प्रविधानों की जानकारी मंगाई है ताकि उनका अध्ययन करके अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित किया जा सके। सदस्य करते हैं अध्यक्ष का चुनाव प्रदेश में 52 जिला और 313 जनपद पंचायतें हैं। प्रत्येक जिला पंचायत में औसत 15 तक सदस्य होते हैं। वर्तमान व्यवस्था में सदस्यों का चुनाव होता है। निर्वाचन उपरांत सदस्यों का सम्मेलन बुलाया जाता है, जिसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होता है। हॉर्स ट्रेडिंग की शिकायत कई बार मुकाबला बराबरी या नजदीकी होने के कारण सदस्यों को प्रलोभन देकर या डरा-धमकाकर उनका समर्थन प्राप्त कर अपना अध्यक्ष बनवा लिया जाता है। इससे चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठते हैं। यही कारण है कि नगरीय निकायों में महापौर और अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता से कराने का प्रविधान किया गया था लेकिन शिवराज सरकार ने नगर पालिका और परिषद के अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता के स्थान पर पार्षदों के माध्यम कराने की व्यवस्था कर दी। इससे निकाय में जिस दल का बहुमत हुआ, उसका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बन गया। जहां बहुमत की स्थिति नहीं बनीं, वहां ठीक वैसा ही हुआ, जैसा जिला और जनपद पंचायत के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव में होता है। फिलहाल सरकार नगरीय निकाय तो नहीं पर पंचायत चुनाव की व्यवस्था में परिवर्तन करने पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर पंचायतराज संचालनालय ने इसकी तैयारी भी प्रारंभ कर दी है। इसके लिए अन्य राज्यों के प्रविधानों की जानकारी मंगाई गई है ताकि उनका अध्ययन करके अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित किया जा सके। हालांकि, विधानसभा के 16 दिसंबर से प्रारंभ होने वाले शीतकालीन सत्र में संशोधन प्रस्ताव प्रस्तुत होने की संभावना कम ही है।

महाकुंभ 2025 के लिए भी विमान सेवा, 10 जनवरी से एलायंस एयर की उड़ान जबलपुर से प्रयागराज जाएगी

जबलपुर जबलपुर से पुणे के लिए सीधी विमान सेवा जल्द प्रारंभ होगी। यह आश्वासन केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने सांसद आशीष दुबे को दिया है। सांसद दुबे ने 28 नवंबर को नई दिल्ली में नागरिक विमानन मंत्री से भेंट कर जबलपुर से देश के विभिन्न नगरों के लिए हवाई सेवा प्रारंभ करने का आग्रह किया। महाकुंभ के लिए जबलपुर से 16 दिन के लिए चलेगी विमान सेवा प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के लिए जबलपुर से विमान सेवा प्रारंभ हो रही है। 10 जनवरी से एलायंस एयर की उड़ान जबलपुर से प्रयागराज जाएगी। यह विमान पहले दिल्ली से रात आठ बजे जबलपुर आएगा और फिर प्रयागराज के लिए 8.25 बजे रवाना होगा। कोलकाता, अहमदाबाद और चेन्नई हवाई सेवा प्रारंभ करने का मांग सौंपा केंद्रीय मंत्री ने सांसद को आश्वस्त किया कि जबलपुर से पुणे के बीच शीघ्र उड़ान प्रारंभ की जाएगी। इस उड़ान को हरी झंडी दिखाने वे स्वयं जबलपुर आएंगे। सांसद दुबे ने जबलपुर से पुणे, जबलपुर से कोलकाता, जबलपुर से अहमदाबाद और जबलपुर से चेन्नई हवाई सेवा प्रारंभ करने का मांग पत्र भी केंद्रीय मंत्री को सौंपा। हवाई कनेक्टिविटी कम होने से होने वाली असुविधा के बारे में बताया सांसद ने बताया कि पहले जबलपुर से देश के विभिन्न महानगरों व नगरों के लिए सीधी अथवा वन स्टाप उड़ान उपलब्ध थी परंतु पिछले कुछ महीनों में इसमें कमी आई है। हवाई कनेक्टिविटी कम होने से जबलपुर के नागरिकों को होने वाली असुविधा के बारे में सांसद ने मंत्री से चर्चा की। मुंबई जाने के लिए भी पुणे से एक वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगा ने कहा कि लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान जबलपुर से पुणे के बीच उड़ान प्रारंभ किये जाने की मांग बड़े पैमाने पर की गई थी। कुंभ जाने के लिए बडी संख्या में श्रद्धालु सड़क रेल मार्ग से निकलते हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए वायु मार्ग भी दिया गया है। महाकुंभ 13 जनवरी से 26 जनवरी तक आयोजित होगा। एलायंस एयर ने भी 26 जनवरी तक यह उड़ान रखी है। इस संबंध में कंपनी की तरफ से एयर ट्रैफिक कंट्रोल और एयरपोर्ट प्रबंधन को भी सूचना दे दी गई है।

बढ़ती हुई ठंड को देखते हुए मंदिर समितियों व ट्रस्टों के पदाधिकारियों ने सभी भगवानों को गर्म वस्त्र धारण कराने शुरू किए

भोपाल शहर में कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। ऐसे में लोगों ने ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़ों को पहनना शुरू कर दिया है। बढ़ती हुई ठंड को देखते हुए अलग-अलग मंदिर समितियों व ट्रस्टों के पदाधिकारियों ने भगवान श्रीराम, मां दुर्गा, श्रीराधा-कृष्ण, गणेश जी सहित सभी भगवानों को गर्म वस्त्र धारण कराने शुरू कर दिए हैं। शाल ओढ़ाई जा रही हैं। वहीं ठंड के चलते भगवान जी को गर्म खाद्य पदार्थ खजूर, गुड़ सहित अन्य पदार्थों का भोग लगाना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, भगवान के दरबार में ठंड का असर कम हो और गर्मी बनी रहे, इसके लिए हीटर और अलाव जैसे उपाय भी भक्तों ने करना शुरू कर दिया है। इसके साथ-साथ सुबह व शाम की आरती व्यवस्था में भी बदलाव होने लगा है।   बाबा बटेश्वर के समीप जलाया अलाव पुराने शहर के श्री बड़वाले महादेव मंदिर सेवा समिति के द्वारा गुरु प्रदोष के अवसर पर बाबा बटेश्वर का रुद्राभिषेक किया गया। एक क्विंटल फूल, बेल पत्र, धतूरा व चंदन आदि से भोलेनाथ का अलौकिक श्रृंगार किया गया। इसके साथ ही भगवान को गुड़ से बनी गजक व अन्य गर्म वस्तुओं का भोग लगाया गया। शीतलहर के प्रभाव को देखते हुए बाबा के समक्ष अलाव भी जलाया गया। प्रतिदिन अब भगवान को ऊनी वस्त्र धारण कराए जाएंगे एवं गुड़ से बनी गजक तथा अन्य गर्म वस्तुओं का भोग लगेगा। रात्रि में महा आरती के बाद प्रसादी वितरण हुआ। इस अवसर पर संयोजक संजय अग्रवाल, सदस्य प्रमोद नेमा, शिशिर मित्तल, अभिषेक लाला, केशव फुलवानी, प्रकाश मालवीय सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।

केरल ने 2050 तक शुद्ध कार्बन तटस्थ राज्य प्राप्त करने का लक्ष्य रखा, देश के लिए स्थापित करेगा मॉडल

तिरुवनंतपुरम देश के प्रमुख स्टार्टअप फेस्टिवल हडल ग्लोबल 2024 के विशेषज्ञों ने कहा कि केरल में स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करने में देश के लिए एक उदाहरण स्थापित करने की क्षमता है। राज्य के बजट 2022-23 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि केरल ने 2050 तक शुद्ध कार्बन तटस्थ राज्य प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। वे गुरुवार को यहां कोवलम में केरल स्टार्टअप मिशन (केएसयूएम) द्वारा आयोजित सम्मेलन में हरित हाइड्रोजन, ग्राफीन और हरित ऊर्जा जैसे विषयों पर तकनीकी वार्ता दे रहे थे। एएनईआरटी के वैज्ञानिक के प्रेमकुमार ने ‘ग्रीन हाइड्रोजन-एआई युग में स्वच्छ ऊर्जा के साथ भविष्य को ईंधन देना’ विषय पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा करते हुए, कहा कि केरल ग्रीन हाइड्रोजन नीति को अंतिम रूप दे रहा है, जिसका उद्देश्य राज्य को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और उपयोग के केंद्र के रूप में स्थापित करना है। . मसौदा नीति के अनुसार, राज्य का लक्ष्य 2030 तक हाइड्रोजन की लागत को 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक कम करना है।  

अब एमपी पुलिस सीएम-मंत्रियों को नहीं देगी सलामी

मध्यप्रदेश में अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही परंपरा को खत्म करते हुए बड़ा फैसला लिया गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पुलिस विभाग के जरिए दी जाने वाली सलामी परेड को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया है। पुलिस विभाग(MP Police) द्वारा जारी आदेश में लिखा गया है की, ‘सलामी अंग्रेजों की याद दिलाती है।’ बता दें कि पुलिस विभाग द्वारा जारी इस आदेश का कड़ाई से पालन करवाने के लिए भी फरमान जारी कर दिया गया है। खत्म हुई पुरानी परंपरामध्य प्रदेश(MP Police) में लंबे समय से पुलिस प्रदेश के सीएम और मंत्रियों के लिए सलामी परेड(MP Police will not Salute CM) करती आ रही थी। अब इस व्यवस्था को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया है। विशेष पुलिस महानिदेशक शैलेश सिंह की ओर से कहा गया है कि सलामी खत्म करने को लेकर जारी हुए इस आदेश का पूरी कड़ाई के साथ पालन कराया जाएगा। क्योंकि इसके तहत पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी पर खास प्रभाग पड़ता है। उन्होंने कहा कि, सलामी प्रथा से अंग्रेजों की याद आती है। इस तरह सलामी लेना असंवैधानिक है, जो उपनिवेशवाद को दर्शाता है। पुलिस विभाग एक अनुशासित विभाग है। इस विभाग में आदेश का उल्लंघन करना गलत प्रभाव डालता है।सिर्फ राज्यपाल को दी जाएगी सलामीबता दें कि जारी आदेश में सलामी परेड की व्यवस्था को सिर्फ सीएम और मंत्रियों के लिए खत्म कर किया गया है। वहीँ प्रदेश के राज्यपाल के लिए यह परंपरा पहले की तरह ही चलती रहेगी।

बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों की ढील कड़ी से पंप रहा साइबर ठगी का मकड़ जाल

भोपाल  साइबर ठगी के जाल में लोग हर पल फंस रहे हैं। ऑनलाइन बिजली का बिल भरने से लेकर होटल की बुकिंग तक में साइबर ठगों का जाल फैला हुआ है। जांच में सामने आया है कि ठगी का यह जाल बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों की ढील से फैल रहा है, क्योंकि बैंक नियमों को ताक में रखकर बिना सत्यापन किए ही खाते खोल रहे हैं। साथ ही एसटीआर की जांच भी नहीं हो रही है। टेलीकॉम कंपनियां भी बिना संपूर्ण सत्यापन के सिम जारी कर रही हैं। खाते और नंबर के इन्हीं हथियारों का फायदा उठाकर ठग वारदात करते हैं। वहीं लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस भी संख्या बल की कमी से जूझ रही है। बीते एक साल में ऐसे केस में 93 गिरफ्तारियां हुईं बीते एक वर्ष में भोपाल साइबर क्राइम सेल में साढ़े पांच हजार से अधिक शिकायतें पहुंची हैं। इनमें महज 61 एफआईआर ही दर्ज की गई हैं और इन मामलों में 93 गिरफ्तारियां हुई हैं। जिस सेल में रोजाना करीब 30 शिकायतें पहुंच रही हैं, वहां तीन महीने से एक भी इंस्पेक्टर नहीं है। जिन चुनिंदा मामलों में पुलिस हस्तक्षेप कर अपराधियों को पकड़ने का प्रयास करती है, उनमें क्राइम ब्रांच के ही इंस्पेक्टरों को कमान सौंप दी जाती है। बैंक और टेलीकॉम कंपनियों की चूक बैंक : कई निजी बैंकों के कर्मचारी लक्ष्य पूरा करने के लिए बिना केवाईसी और फिजिकल वेरीफिकेशन के खाते खुलवा देते हैं, जबकि आरबीआई की एडवाइजरी के अनुसार ई-केवाईसी आवश्यक है। ठगी के लिए उपयोग किए जाने वाले फर्जी बैंक खातों के लेनदेन के लिए आरबीआई ने एसटीआर (सस्पीशियस ट्रांजेक्शन रिपोर्ट) की व्यवस्था शुरू की है। यदि बैंक खातों में अचानक बढ़ते हुए लेन-देन की जानकारी पुलिस से साझा की जाए तो इस पर भी लगाम लगाई जा सकती है। फर्जी दस्तावेजों पर बैंक खाते खुलवाने का एक बड़ा मामला हाल ही में भोपाल में सामने आया था, जहां एक गिरोह दो साल से देशभर में 1800 से अधिक खाते खुलवा चुका था। उसे भोपाल पुलिस ने पकड़ा था। टेलीकॉम कंपनी : साइबर अपराध की पहली कड़ी फोन काल से ही जुड़ी है। टेलीकॉम कंपनियां बिना पुख्ता सत्यापन के सिमें उपलब्ध कराती हैं। इन्हीं सिमों का उपयोग कर लोग ठगी को अंजाम देते हैं। फर्जी तरीके से सिमों की खरीदी बंद होने से अपराध में आएगी कमी     साइबर अपराध रोकने के लिए बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यदि फर्जी तरीके से सिमों की खरीदी बंद हो और बैंक भी लेनदेन की जानकारी उपलब्ध कराएं तो अपराध में निश्चित ही कमी आएगी। हमारे पास पुलिस बल सीमित हैं। एक दिसंबर से थानों में साइबर डेस्क शुरू होगी तो साइबर क्राइम सेल का भार कम हो सकेगा। हरिनारायणाचारी मिश्र, पुलिस आयुक्त  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन के दौरान विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित करेंगे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 नवंबर से एक दिसंबर तक ओडिशा में भुवनेश्वर में आयोजित पुलिस महानिदेशकों और महानिरीक्षकों के अखिल भारतीय सम्मेलन में भाग लेंगे। यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय की एक विज्ञप्ति में दी गई है। विज्ञप्ति के अनुसार यह सम्मेलन आज शुरू हो रहा है। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में आतंकवाद, वामपंथी उग्रवाद, तटीय सुरक्षा, नए आपराधिक कानून, नारकोटिक्स सहित राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण घटकों पर विचार-विमर्श होगा। सम्मेलन के दौरान विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जाएगा। विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह सम्मेलन देश के वरिष्ठ पुलिस पेशेवरों और सुरक्षा प्रशासकों को राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित विभिन्न मुद्दों और साथ ही भारत में पुलिस के सामने आने वाली विभिन्न परिचालन, ढांचागत और कल्याण संबंधी समस्याओं पर स्वतंत्र रूप से चर्चा तथा बहस करने के लिए एक संवाद-मंच प्रदान करेगा। इसके विचार-विमर्श में आंतरिक सुरक्षा खतरों के अलावा अपराध नियंत्रण और कानून एवं व्यवस्था प्रबंधन से संबंधित चुनौतियों से निपटने में पेशेवर प्रथाओं और प्रक्रियाओं को तैयार करना और साझा करना शामिल होगा। सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, राज्य मंत्री (गृह मामले), राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख सहित अन्य लोग भाग लेंगे।  

एक जिला-एक उत्पाद :बुरहानपुर के केलों की मिठास अब सबकी जुबां पर

भोपाल एक जिला-एक उत्पाद मध्यप्रदेश का एक छोटा सा जिला बुरहानपुर बरसों से अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और हरे-भरे खेतों के लिए प्रसिद्ध है। अब यह जिला “एक जिला-एक उत्पाद” पहल के तहत सफलता के नये आयाम गढ़ रहा है। केले की फसल, जो इस जिले की मूल पहचान है, अब न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि एक नई उद्यम क्रांति का प्रतीक भी बन गई है। इसी साल फरवरी में हुए “बनाना फेस्टिवल” में यहां के उद्यमियों और किसानों के बीच संवाद का परिणाम अब धरातल पर नजर आ रहा है। इसी प्रेरणा से बुरहानपुर के उद्यमी रितिश अग्रवाल ने “बनाना पाउडर” बनाने की यूनिट स्थापित की हैं। यह यूनिट जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग के सहयोग से खकनार के धाबा गांव में संचालित की जा रही है। “बनानीफाय” ब्रांड के नाम से तैयार किया जा रहा यह बनाना पाउडर शारीरिक पोषण से भरपूर है। यह बच्चों और बड़ों सभी के लिए ऊर्जा और सेहत का खजाना है। इस यूनिट में केले से तीन प्रकार का पाउडर तैयार किया जा रहा है। खाने योग्य पाउडर (केले के गूदे से), जो शुद्ध और बेहद उच्च गुणवत्ता वाला है। सादा पाउडर (केले के छिलके सहित), जो खाने योग्य है और फाइबर से भी भरपूर है। केले के छिलके से तैयार पाउडर को खाद (मैन्योर) के रूप में उपयोग किया जाएगा। इसके उपयोग से सभी प्रकार की फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन मात्रा में भी सुधार होगा। इस प्रोजेक्ट को “प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना” के तहत 10 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। कुल 75 लाख रुपये पूंजी निवेश से बनी यह यूनिट एक मिसाल बन गई है। इसमें अहमदाबाद से लाई गई आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जो उत्पादन प्रक्रिया को तेज और कुशल बनाती हैं। “बनानीफाय” ब्रांड के उत्पादों को न केवल मध्यप्रदेश बल्कि महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, और दिल्ली जैसे राज्यों में भी भेजा जा रहा है। इसके 250 ग्राम और 500 ग्राम पैकेट क्रमशः 280 रुपये और 480 रुपये की कीमत पर उपलब्ध हैं। यूनिट की खासियत यह है कि यहां केले के छिलके को भी व्यर्थ नहीं जाने दिया जाता। छिलकों से बना पाउडर नर्सरियों और उद्यानिकी फसलों में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। यह पर्यावरणीय संरक्षण और कृषि उत्पादकता बढ़ाने का एक बेहतरीन उदाहरण है। नेपानगर की विधायिका सुमंजू दादू और कलेक्टर बुरहानपुर सुभव्या मित्तल द्वारा शुभारंभ की गई यह यूनिट अब न केवल बुरहानपुर के किसानों और उद्यमियों के लिए प्रेरणा बन गई है। यह यूनिट “एक जिला-एक उत्पाद” योजना की वास्तविक सफलता का प्रतीक बन गई है। “बनानीफाय” का बनाना पावडर न केवल आर्थिक समृद्धि ला रहा है, बल्कि यह एक उदाहरण है कि सही दिशा में किए गए प्रयास किस तरह से छोटे जिलों को भी अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिला सकते हैं। बुरहानपुर के मस्त केले अब सबकी जुबां पर मिठास घोल रहे हैं।  

राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड संस्कृत शिक्षा को दे रहा है बढ़ावा

भोपाल प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड अरूण, उदय और प्रभात कक्षाओं का संचालन 53 चयनित एजुकेशन फॉर ऑल (ईएफए) स्कूल में कर रहा है। इन विद्यालयों में संस्कृत माध्यम की कक्षाएं इस वर्ष शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ हो गई हैं। देश की सांस्कृतिक विरासत में संस्कृत भाषा का प्राचीन काल से महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में संस्कृत भाषा के विस्तार के लिये विशेष प्रावधान रखे गये हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उल्लेख किया गया है कि संस्कृत भाषा केवल संस्कृत पाठशाला एवं विश्वविद्यालयों तक सीमित न रहे बल्कि इसे मुख्य धारा में लाया जाये। इसके अनुपालन में प्रदेश में प्री-स्कूल के 3 वर्ष तथा कक्षा 1 और 2 के 2 वर्ष इस प्रकार बच्चे की उम्र 3 से 8 वर्ष की अवधि में बच्चों को संस्कृत माध्यम से पढ़ाई कराये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग संस्कृत माध्यम के विद्यालयों के संचालन की निगरानी भी रख रहा है। संस्कृत भाषा एक बीज भाषा है। यह भाषा सभी भाषाओं की जननी है। बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बच्चों के मस्तिष्क का 85 प्रतिशत विकास 6 वर्ष की अवस्था से पूर्व हो जाता है। शोध में यह बात भी सामने आयी है कि जो विद्यार्थी प्रारंभ से संस्कृत भाषा बोलते हैं, वे बाद के वर्षों में विश्व की किसी भी भाषा को बोलने की क्षमता रखते हैं। इसको दृष्टिगत रखते हुए 53 संस्कृत विद्यालय प्रदेश में प्रारंभ किये गये हैं। यह एक ऐसा अनोखा प्री-स्कूल है, जिसमें छोटे बच्चों को संस्कृत माध्यम से भारतीय संस्कृति और परम्परा के बारे में सीखने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। इन विद्यालयों में पुस्तकालय, प्रदर्शन क्षेत्र, कठपूतली का कोना, विश्राम क्षेत्र, कहानी का कोना, कला कोना, खिलौनों का कोना, उत्सव की दीवार, भोजन क्षेत्र, संस्कृत अध्ययन सामग्री, बाल उपवन, तुलसी का बर्तन और ध्यान कुटिया जैसी सुविधाएं बच्चों को उपलब्ध कराई गई हैं।  

मतदाता शिक्षा और मतदान जागरूकता के अभियान में चार श्रेणियों में मिलेगा पुरस्कार

भोपाल भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली द्वारा मतदाता शिक्षा और मतदान जागरूकता के सर्वोत्तम अभियान के लिये नेशनल मीडिया अवार्ड-2024 प्रदान किये जायेंगे। मीडिया संस्थानों को पुरस्कार चार श्रेणियों में प्रदान किये जायेंगे। पुरस्कार मतदाताओं को मतदान के लिये प्रेरित करने और मतदान के प्रति जागरूकता के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिये चलाये जा रहे उत्कृष्ट अभियानों को प्रोत्साहित करने के लिये दिये जायेंगे। आयोग ने 10 दिसम्बर 2024 तक संस्थानों से प्रस्ताव आमंत्रित किये हैं। प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक (टेलीविजन) मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक (रेडियो) मीडिया और ऑनलाइन (इंटरनेट एवं सोशल) मीडिया श्रेणियों में पृथक-पृथक पुरस्कार दिये जायेंगे। वर्ष-2024 में मतदान के प्रति मतदाताओं को जागरूक करने के लिये मीडिया संस्थानों द्वारा किये गये उत्कृष्ट कार्यों और विशिष्ट उपलब्धियों को प्रदर्शित करते हुए चार पृथक-पृथक श्रेणियों में अपने प्रस्ताव भेजने होंगे। सभी नामांकनों पर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा गठित मीडिया अवार्ड जूरी विचारोपरान्त निर्णय लेगी। नेशनल मीडिया अवार्ड-2024 से संबंधित विस्तृत विवरण (मेमोरेण्डम) कार्यालय मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश की वेबसाइट www.ceomadhyapradesh.nic.in और जनसम्पर्क विभाग की वेबसाइट www.mpinfo.org  पर उपलब्ध है। मीडिया संस्थान अपने प्रस्ताव श्री राजेश कुमार सिंह, अवर सचिव (संचार), भारत निर्वाचन आयोग, निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली 110001 को भेजे जा सकते हैं। संस्थान अपने प्रस्ताव मेमोरेण्डम में लिखी शर्तों का पालन करते हुए ई-मेल एड्रेस media-division@eci.gov.in पर भी भेज सकते हैं।  

सपनों को हकीकत में बदलने की बानगी है “बुरहानपुर का बनाना पावडर”

“Burhanpur’s Banana Powder” is a symbol of turning dreams into reality. मध्यप्रदेश का एक छोटा सा जिला बुरहानपुर बरसों से अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और हरे-भरे खेतों के लिए प्रसिद्ध है। अब यह जिला “एक जिला-एक उत्पाद” पहल के तहत सफलता के नये आयाम गढ़ रहा है। केले की फसल, जो इस जिले की मूल पहचान है, अब न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि एक नई उद्यम क्रांति का प्रतीक भी बन गई है। इसी साल फरवरी में हुए “बनाना फेस्टिवल” में यहां के उद्यमियों और किसानों के बीच संवाद का परिणाम अब धरातल पर नजर आ रहा है। इसी प्रेरणा से बुरहानपुर के उद्यमी श्री रितिश अग्रवाल ने “बनाना पाउडर” बनाने की यूनिट स्थापित की हैं। यह यूनिट जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग के सहयोग से खकनार के धाबा गांव में संचालित की जा रही है। “बनानीफाय” ब्रांड के नाम से तैयार किया जा रहा यह बनाना पाउडर शारीरिक पोषण से भरपूर है। यह बच्चों और बड़ों सभी के लिए ऊर्जा और सेहत का खजाना है। इस यूनिट में केले से तीन प्रकार का पाउडर तैयार किया जा रहा है। खाने योग्य पाउडर (केले के गूदे से), जो शुद्ध और बेहद उच्च गुणवत्ता वाला है। सादा पाउडर (केले के छिलके सहित), जो खाने योग्य है और फाइबर से भी भरपूर है। केले के छिलके से तैयार पाउडर को खाद (मैन्योर) के रूप में उपयोग किया जाएगा। इसके उपयोग से सभी प्रकार की फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन मात्रा में भी सुधार होगा। इस प्रोजेक्ट को “प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना” के तहत 10 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। कुल 75 लाख रुपये पूंजी निवेश से बनी यह यूनिट एक मिसाल बन गई है। इसमें अहमदाबाद से लाई गई आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जो उत्पादन प्रक्रिया को तेज और कुशल बनाती हैं। “बनानीफाय” ब्रांड के उत्पादों को न केवल मध्यप्रदेश बल्कि महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, और दिल्ली जैसे राज्यों में भी भेजा जा रहा है। इसके 250 ग्राम और 500 ग्राम पैकेट क्रमशः 280 रुपये और 480 रुपये की कीमत पर उपलब्ध हैं। यूनिट की खासियत यह है कि यहां केले के छिलके को भी व्यर्थ नहीं जाने दिया जाता। छिलकों से बना पाउडर नर्सरियों और उद्यानिकी फसलों में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। यह पर्यावरणीय संरक्षण और कृषि उत्पादकता बढ़ाने का एक बेहतरीन उदाहरण है। नेपानगर की विधायिका सुश्री मंजू दादू और कलेक्टर बुरहानपुर सुश्री भव्या मित्तल द्वारा शुभारंभ की गई यह यूनिट अब न केवल बुरहानपुर के किसानों और उद्यमियों के लिए प्रेरणा बन गई है। यह यूनिट “एक जिला-एक उत्पाद” योजना की वास्तविक सफलता का प्रतीक बन गई है। “बनानीफाय” का बनाना पावडर न केवल आर्थिक समृद्धि ला रहा है, बल्कि यह एक उदाहरण है कि सही दिशा में किए गए प्रयास किस तरह से छोटे जिलों को भी अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिला सकते हैं। बुरहानपुर के मस्त केले अब सबकी जुबां पर मिठास घोल रहे हैं।

जून 2025 तक पूरा हो जायेगा सड़क निर्माण का पहला चरण, बनेंगी 1284.29 किमी लम्बी 1035 सड़कें

भोपाल गांव-गांव तक पहुंच सड़क प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) में केन्द्र सरकार प्रदेश के 24 जिलों में निवासरत 3 विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की सभी बसाहटों तक एप्रोच रोड तैयार कर रही हैं। केन्द्र सरकार द्वारा पीएम जन-मन में प्रदेश की चिन्हित कुल 1295 पीवीटीजी बसाहटों में कुल 1284.29 किलोमीटर लम्बाई वाली 1035 सड़कें मंजूर की गई है। गांव-गांव तक कुल 1050 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली इन सम्पर्क सड़कों का निर्माण कार्य 5 चरणों में पूरा किया जायेगा। पहला चरण जून 2025 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य तय किया गया है। पहले चरण में 235 करोड़ रूपये की लागत से 295 किमी लम्बी 125 सड़कें बनाई जा रही है। इन पर काम तेजी से जारी है। पहले चरण के ही दूसरे भाग में 150.72 करोड़ रूपये की लागत से 180.29 किमी लम्बी 40 सड़कें बनाई जानीं है। इनके लिये निर्माण एजेंसी तय कर दी गई हैं। दूसरे चरण में 112.69 करोड़ रूपये लागत से 152 किमी लम्बी 60 सड़कें बनाई जायेंगी। तीसरे चरण 162 करोड़ रूपये की लागत से 216 किमी लम्बी 86 सड़कें निर्मित की जायेंगी। चौथे चरण में 187.74 करोड़ रूपये से 254 किमी लम्बी 97 सड़कें तथा 5वें चरण में 801 करोड़ रूपये लागत से 1187 किमी लम्बाई वाली 627 सड़कें तैयार की जायेंगी। पीएम जन-मन अभियान में सभी गांव-गांव पहुंच सड़़कें प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ाभागके अधीन निर्माण एजेंसी मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (एमपी आरआरडीए) द्वारा बनाई जायेंगी। निर्माण एजेंसी एमपी आरआरडीए द्वारा पहले चरण में मंजूर हुईं। सभी सड़कें जून 2025 तक निर्मित कर लेने के लिये तेजी से कार्य किया जा रहा है। दूसरे, तीसरे, चौथे एवं 5वें चरण में स्वीकृत सड़कों का निर्माण कार्य भी हर हाल में वर्ष 2025 के अंत तक पूरा कर लेने के लिये निर्माण एजेंसी ने ठोस तैयारी कर ली है।

महाराष्ट्र में फरवरी में बीएमसी समेत 14 नगर निगमों में चुनाव, अलग होने पर निकाय चुनाव में अलग-थलग पड़ सकते हैं उद्धव

मुंबई  शिवसेना (यूबीटी) महाविकास अघाड़ी से बाहर नहीं जाएगी। पार्टी के सांसद संजय राउत ने इस बयान से यूबीटी के कई नेता नाराज हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद शिवसेना (यूबीटी) के नेता अंबादास दानवे ने उद्धव ठाकरे से महाविकास अघाड़ी से निकलने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि बीएमसी समेत निकाय चुनाव यूबीटी को अकेले लड़ना चाहिए। अब इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे की पार्टी में मतभेद सामने आ गए हैं। संजय राउत ने कहा कि विधानसभा की हार की समीक्षा अघाड़ी की तीनों पार्टियां मिलकर करेंगी। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव से जुड़े फैसले बाद में लिए जाएंगे। पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि अकेले चुनाव लड़ने से उद्धव ठाकरे राजनीति में अलग-थलग पड़ सकते हैं। ऐसे में नया चुनावी प्रयोग करना जोखिम भरा हो सकता है। अंबादास दानवे ने की थी एमवीए से एग्जिट करने की बात विधानसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) को सिर्फ 20 सीटें मिलीं। मुंबई में भी पार्टी को तगड़ा नुकसान हुआ। इस हार पर उद्धव ठाकरे तो चुप रहे, मगर उनकी पार्टी के कई नेताओं ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। एमएलसी अंबादास दानवे ने बताया कि जीत की उम्मीद में कांग्रेस नेताओं ने प्रचार में कोताही की। वह मंत्री बनने के लिए सूट-बूट सिलाने में व्यस्त रहे। रणनीतिक तौर पर सीएम कैंडिडेट घोषित नहीं कर कांग्रेस ने अघाड़ी का नुकसान किया। उन्होंने कहा कि अब निकाय चुनाव में पार्टी को एमवीए से अलग चुनाव लड़ना चाहिए। राज्य की सभी 288 सीटों पर खड़ा करने की जरूरत है। उनके इस बयान के बाद संजय राउत ने सिरे से इस सलाह को खारिज कर दिया। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे अभी जल्दीबाजी में नहीं हैं बल्कि वह निकाय चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। अघाड़ी से बाहर निकले तो नहीं मिलेगा दलित-मुस्लिम वोट उद्धव ठाकरे महाविकास अघाड़ी के साथ लोकसभा चुनाव भी लड़े थे और उन्हें 9 सीटों पर जीत मिली थी। पार्टी में बंटवारे के बाद यह जीत बड़ी थी। अघाड़ी के साथ होने के कारण उसे परंपरागत मराठा वोटरों के अलावा दलित और मुसलमानों का वोट मिला था। विधानसभा चुनाव में भी मुस्लिम वोटरों ने खुलकर शिवसेना को वोट किया। फरवरी में मुंबई समेत राज्य की 14 म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनाव होने हैं। अगले तीन महीनों में राजनीति हालात बदल सकते हैं और महायुति की लहर भी सुस्त पड़ सकती है। अगर यूबीटी अघाड़ी से अलग होगी तो पिछले दो चुनाव में वोट देने वाले समर्थकों के बीच गलत मैसेज जा सकता है। गठबंधन से बाहर निकलने का एक मायने और निकल सकता है कि उद्धव ठाकरे एक बार फिर हार्ड हिंदुत्व की राह पर चल पड़े हैं। सिर्फ उद्धव सेना नहीं हारी, अघाड़ी में सब हारे हैं एक नेता ने बताया कि अघाड़ी में जीता कोई नहीं है, मगर हारे सब हैं। विधानसभा चुनाव में न सिर्फ उद्धव सेना बल्कि पूरी महाविकास अघाड़ी को नुकसान हुआ है। शिवसेना यूबीटी सबसे ज्यादा 20 सीटें जीतने में सफल रही है, मगर कांग्रेस 16 और शरद पवार की एनसीपी 10 सीटों पर सिमटी है। निकाय चुनाव में जब सीटों के बंटवारे पर बात होगी, तब उद्धव सेना की पोजिशन मजबूत रहेगी। अघाड़ी से बाहर निकलते ही उद्धव की शिवसेना के वोट और कम हो जाएंगे। जहां तक बीएमसी चुनाव का सवाल है, उद्धव सेना का परफॉर्मेंस कांग्रेस और एनसीपी से बेहतर रहा है। एक्सपर्ट मानते हैं कि उद्धव की नजर सिर्फ निकाय चुनाव पर नहीं है, बल्कि वह विधानसभा में विपक्ष की हैसियत को अपने पास रखना चाहते हैं।

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