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7 दिसंबर से 3 राशियों को होगा लाभ ही लाभ

मेष राशि- आज मन में उतार-चढ़ाव रहेगा। आर्थिक रूप से थोड़ा परेशान होंगे लेकिन दिन के अंत में सफलता हासिल होगी। संतान की ओर से सुखद समाचार मिल सकता है। कारोबार में वृद्धि होगी। वाहन सुख में वृद्धि भी हो सकती है। किसी नए काम की शुरुआत के लिए अच्छा दिन है। वृषभ राशि- आज आपका मन प्रसन्न रहेगा। शुभ समाचार की प्राप्ति संभव है। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। सम्मान की प्राप्ति हो सकती है। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। आज किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता हासिल होने से उत्सुकता बरकरार रह सकती है। मिथुन राशि- आज आपके साहस में वृद्धि होगी और कार्यों में सफलता हासिल हो सकती है। हालांकि किसी बात को लेकर मन परेशान हो सकता है। नौकरी के लिए इंटरव्यू आदि में सफलता मिलेगी। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। उच्चाधिकारी आपके काम से प्रभावित होंगे। आर्थिक रूप से अच्छा दिन है। कर्क राशि- आज वाणी में मधुरता रहेगी। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। फिर भी मानसिक शांति के लिए प्रयास करें। किसी रुके हुए धन की प्राप्ति हो सकती है। सेहत का ध्यान रखें। व्यापार का विस्तार होगा। भूमि, वाहन व वाहन की खरीदारी संभव है। भौतिक सुख बढ़ेगा। सिंह राशि- आज पिता की सेहत का ध्यान रखें। परिवार का साथ मिलेगा। कारेाबार का विस्तार होगा। वाहन सुख बढ़ेगा। नपा-तुला रिस्क ही लें। किसी भी तरह की जल्दबाजी करने से बचें, वरना नुकसान हो सकता है। नौकरी की तलाश करने वालों के लिए यह अच्छा समय है। कन्या राशि- मन परेशान रहेगा। अज्ञात भय सताएगा। बच्चों की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। व्यर्थ के क्रोध व वाद-विवाद से बचें। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जा सकते हैं। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। किसी प्रकार का कोई रिस्क न लें। तुला राशि- आज खर्च की अधिकता मन को परेशान करेगी। आत्मसंयत रहें। सेहत का ध्यान रखें। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। भवन की साज-सज्जा व वस्त्रों पर खर्च बढ़ सकते हैं। कारोबारियों को मुनाफे के अवसर मिलेंगे। जीवनसाथी का साथ मिलेगा। तरक्की के अवसर खुद सामने आ सकते हैं। वृश्चिक राशि- आज धार्मिक कार्यों में रुचि रहेगी। किसी शुभ समाचार की प्राप्ति संभव है। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। मान-सम्मान की प्राप्ति रहेगी। नौकरी में कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार अच्छा रहने वाला है। धनु राशि- आज आपका दिन अच्छा रहने वाला है। हालांकि वाद-विवाद से दूर रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। बातचीत में संतुलन बनाए रखें। माता के सहयोग से कोई पैतृक संपत्ति प्राप्त हो सकती है। परिवार में मान-सम्मान मिलेगा। ऑफिस में तरक्की के योग बन रहे हैं। मकर राशि- आज आपका मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। शिक्षा से जुड़े कार्यों में मान-सम्मान की प्राप्ति हो सकती है। सेहत का ध्यान रखें। जीवनसाथी के साथ व स्वास्थ्य पर नजर रखें। कुटुंबों में वृद्धि होगी। धन आगमन हो सकता है। व्यापारियों के लिए अच्छा समय। कुंभ राशि- आज आपकी आर्थिक लाइफ खुशहाल रहेगी। दांपत्य सुख में वृद्धि होगी। परिवार में सुख-शांति रहेगी। धर्म के प्रति सद्भाव रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। व्यापारियों के लिए आज का दिन अनुकूल रहने वाला है। प्रेम की स्थिति अच्छी रहने वाली है। मीन राशि- आज आपका मन प्रसन्न रहेगा। किसी शुभ समाचार की प्राप्ति से उत्साहित रहेंगे, फिर भी धैर्यशीलता बनाए रखने का प्रयास करें। नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग बन रहे हैं। खर्च बढ़ेंगे। आय व व्यय में बैलेंस बनाना जरूरी है।

चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेत ‘इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार 2024’ से सम्मानित

नई दिल्ली चिली की पूर्व राष्ट्रपति और मानवाधिकारों की वैश्विक पैरोकार मिशेल बाचेलेत को शांति, निरस्त्रीकरण (हथियारों को कम करने) और विकास के लिए 2024 का ‘इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। यह घोषणा भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश सचिव शिवशंकर मेनन की अध्यक्षता वाली एक अंतर्राष्ट्रीय जूरी द्वारा की गई। बयान में कहा गया, “2024 के लिए शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए ‘इंदिरा गांधी पुरस्कार’ महामहिम मिशेल बाचेलेत को दिया जाता है। वे दुनिया भर की महिलाओं और पुरुषों के लिए कठिन परिस्थितियों में शांति, लैंगिक समानता, मानवाधिकार, लोकतंत्र और विकास के लिए लगातार प्रयास करने और चिली के साथ भारत के संबंधों में उनके योगदान के लिए एक उदाहरण और प्रेरणा हैं।” वेरोनिका मिशेल बाचेलेत जेरिया को शांति, असमानता के खिलाफ लड़ने और मानवाधिकारों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। अपने शानदार करियर में, उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। इसमें यूएन महिला की संस्थापक निदेशक, मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त और चिली की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में दो कार्यकाल शामिल है। उन्होंने लगातार लैंगिक असमानता और हाशिए पर पड़े समुदायों के अधिकारों की वकालत की है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अमिट छाप छोड़ी है। 29 सितंबर, 1951 को चिली के सैंटियागो प्रांत के ला सिस्टर्ना में पैदा होने वाली बाचेलेत को जनरल ऑगस्टो पिनोशे की तानाशाही के दौरान महत्वपूर्ण व्यक्तिगत और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 1973 में अपनी गिरफ्तारी, कारावास और यातना के बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और बाद में जर्मनी में निर्वासित जीवन बिताया था। बिना किसी बाधा के, वह चिली के राजनीतिक परिवर्तन में योगदान देने के लिए वापस लौट आईं और 2006 और फिर 2014 में राष्ट्रपति चुनी गईं। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए, बाचेलेत ने शिक्षा और कर संबंधी सुधार किए । उनके कार्यकाल में भारत और चिली के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर भी हुए, जिससे द्विपक्षीय संबंध बढ़े। राष्ट्रपति पद से परे, मिशेल बाचेलेत ने 2010 से 2013 तक यूएन महिला की पहली निदेशक के रूप में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के वैश्विक प्रयासों का नेतृत्व किया। बाद में, 2018 से 2022 तक मानवाधिकारों के लिए यूएन उच्चायुक्त के रूप में, उन्होंने फिलिस्तीन और अन्य संघर्ष क्षेत्रों में मानवाधिकारों के हनन सहित महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों को मुखर रूप से संबोधित किया। एलजीबीटीक्यू अधिकारों, लोकतंत्र और प्रगतिशील मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें दुनिया भर में एक प्रेरणादायक शख्सियत बना दिया है। आलोचनाओं का सामना करने के बावजूद, वह शांति और न्याय के लिए लड़ती रही हैं। बता दें कि ‘इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार’ लैंगिक समानता, लोकतंत्र और विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत-चिली संबंधों को मजबूत करने में बाचेलेत के असाधारण योगदान को मान्यता देता है।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और गरीबों और वंचितों का शोषण हो रहा है, अब ढोंग करने वाले मौन क्यों : सीएम योगी

लखनऊ आज बांग्लादेश में हिंदुओं, बौद्ध और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को कट्टरपंथी मार रहे हैं। उन्हें जलाया जा रहा है। उनकी संपत्तियों को लूटा जा रहा है। इतना ही नहीं माता और बहनों की इज्जत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जब तक वहां जिन्ना का जिन्न रहेगा तब तक इस तरह की अराजकता होती रहेगी। उन्होंने कहा कि वहां पर गरीबों और वंचितों का शोषण हो रहा है। यह पाप 1947 में देश के विभाजन के रूप में सभी के सामने आया था। उसी का बदसूरत स्वरूप बांग्लादेश के रूप में फिर हमारे सामने है। बाबा साहेब ने 1946-47 में ही जनता को इसे लेकर आगाह कर दिया था, उन्होंने कहा था कि देश का बंटवारा मत होने दीजिए। अगर यह हो गया तो आर-पार की लड़ाई शुरू हो जाएगी, जो आज हमारे सामने है। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा मार्ग स्थित आंबेडकर महासभा परिसर में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के निर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही। इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने हजरतगंज स्थित बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज कुछ लोग समाज को धोखा दे रहे हैं। वह समाज में झूठ फैला रहे हैं। यह वही लोग हैं, जो उस समय हैदराबाद के निजाम और उनके रजाकारों द्वारा दलितों के गांव जलाए जा रहे थे तो चुप थे। उस दौरान उनका शोषण हो रहा था। उन पर अत्याचार किया जा रहा था। उस समय भी बाबा साहेब आंबेडकर ने खुला पत्र लिखा था कि हैदराबाद के निजाम की रियासत के सभी दलितों, जिन पर अत्याचार हो रहा है, वह निजाम की रियासत को छोड़कर महाराष्ट्र की ओर चले जाएं, लेकिन अपना धर्म और मत न बदलें। सीएम योगी ने आगे कहा कि वहीं, हैदराबाद के निजाम और पाक परस्त जिन्ना के लोगों ने अपने नापाक इरादों को अंजाम देने के लिए बाबा साहेब को प्रलोभन देने का प्रयास किया, लेकिन वह अपने आदर्शों से टस से मस नहीं हुए। उन्होंने कहा कि मैं हमेशा भारतीय ही रहूंगा। मैंने भारतीय के रूप में जन्म लिया है और मेरी अंतिम यात्रा भी भारतीय के रूप में ही निकलेगी। उन्होंने आजीवन इस व्रत का पालन भी किया। वह लगातार दलित और वंचितों के लिए काम करते रहे। जिन लोगों ने बाबा साहेब की बात मानी, वह आज भारत में सुरक्षित हैं और आरक्षण का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। हमारी सरकार उन सभी का सम्मान करने के साथ उन्हें हर सुविधा उपलब्ध करा रही है। सीएम योगी ने कहा कि योगेंद्र नाथ मंडल की बातों में आकर जो लोग बहक गए थे, वह आज पाकिस्तान और बांग्लादेश में अत्याचार सह रहे हैं। यह दृश्य आज हम सभी के सामने है। 1947 में पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की बड़ी तादाद में आबादी थी। बांग्लादेश में 1971 तक 22 पर्सेंट हिंदू रहते थे, आज वह घटकर 6 से 8 फीसदी रह गए हैं। आज वहां जो कुछ भी हो रहा है, अगर इसी तरह नरसंहार चलता रहा तो यह संख्या बहुत सीमित रह जाएगी। जो लोग हमेशा दलितों को अपना वोट बैंक बना करके उनका शोषण करते आए हैं, वह बांग्लादेश की घटना पर मौन हैं। उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा है क्योंकि वह सच स्वीकार नहीं कर सकते हैं और सच बोल भी नहीं सकते हैं। उनमें बोलने का सामर्थ्य नहीं है इसलिए वह बांग्लादेश के दृश्य पर मौन हैं। यह लोग सिर्फ संविधान की प्रति दिखाकर ढोंग कर रहे हैं। उन्हें बाबा साहेब के मूल्यों से कोई लेना-देना नहीं है। इससे पहले भी इन्होंने बाबा साहेब के मूल संविधान पर कुठाराघात करके उसकी हत्या करने का प्रयास किया था। सीएम योगी ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना उसकी आत्मा होती है। कांग्रेस ने संविधान की प्रस्तावना से उसकी आत्मा हटाने का काम किया है। वर्ष 1975 में देश में इमरजेंसी लागू करके बाबा साहेब का अपमान किया था। आज भी कांग्रेस यही कर रही है। इन्होंने मूल संविधान की प्रस्तावना में संशोधन करके वह शब्द डालने का काम किया था, जो बाबा साहेब ने मूल संविधान में डाले ही नहीं थे। ऐसे में जो यह ढोंग कर रहे हैं, उसका वास्तविक चेहरा जनता और देश के सामने लाने की आवश्यकता है। बाबा साहेब हमेशा वंचित, पीड़ित और शोषित के लिए काम करते रहे। उन्होंने ही समाज को नई दिशा दिखाते हुए खुशहाल समाज की परिकल्पना दी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार गरीबों, वंचितों और दलितों के लिए बाबा साहेब के सपने को साकार करते हुए लगातार काम कर रही है। हमारी सरकार उन्हें फ्री टॉयलेट, आवास, जमीन के पट्टे उपलब्ध करा रही है। उन्हें पेंशन की सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। एससी-एसटी वर्ग के छात्रों स्कॉलरशिप और शुल्क प्रतिपूर्ति दी जा रही है। वर्तमान में हम जीरो पावर्टी के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में गरीबी को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। सभी वंचितों को राशन, आयुष्मान कार्ड, पेंशन, हर घर तक पानी समेत अनेक सुविधाओं को लाभ दिया जाएगा। हमारी सरकार बाबा साहेब पर शोध हो सके, जीवन दर्शन को गांव-गांव, घर-घर तक पहुंचाया जा सके, इसके लिए लखनऊ में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर की स्थापना करने जा रही है। अंबेडकर महासभा की मांग पर इंटरनेशनल सेंटर की स्थापना की जा रही है, जहां पर भव्य ऑडिटोरियम के साथ लाइब्रेरी भी होगी। यहां पर छात्राओं के लिए छात्रावास और अतिथि गृह के साथ बाबा साहेब का भव्य स्मारक भी होगा।

कोर्ट ने किशोरी से दुष्कर्म व हत्या के मामले में दोषी को मौत की सजा सुनाई, 62 दिन में सुनाया फैसला

कोलकाता महानगर से सटे दक्षिण 24 परगना जिले के जयनगर में एक किशोरी से दुष्कर्म व हत्या के मामले में कोर्ट ने मुस्तकिन सरदार नामक दोषी को मौत की सजा सुनाई है। गुरुवार को बारुईपुर के त्वरित अपर जिला न्यायालय के न्यायाधीश सुब्रत चट्टोपाध्याय ने मामले के मुख्य आरोपित मुस्तकिन को दोषी ठहराया था। इसके बाद शुक्रवार को मौत की सजा सुनाई गई। आरजी कर कांड को लेकर जिस समय राज्यभर में आंदोलन चल रहा था उसी दौरान जयनगर की घटना प्रकाश में आई थी। जिसके चलते पहले तो काफी शोर मचा। आरजी कर के आंदोलनकारी जयनगर में पीड़िता के घर भी गए। इतना ही नहीं, धर्मतल्ला में जूनियर डाक्टरों की भूख हड़ताल के सामने पीड़ित नाबालिग की ‘प्रतीकात्मक मूर्ति’ भी रखी गई थी। कोर्ट में आरजी कर मामले की चल रही सुनवाई प्रदर्शनकारियों ने आरजी कर की मृत महिला डॉक्टर के लिए भी न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए थे, लेकिन चार महीने बाद भी आरजी कर मामले में न्याय नहीं मिला है। मामले की जांच सीबीआइ कर रही है। वहीं दूसरी पर जयनगर की घटना में मात्र 63 दिनों में सुनवाई पूरी कर कोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा सुना दी। जयनगर मामले में दोषी को मौत की सजा सुनाए जाने के ठीक बाद राज्य पुलिस की ओर से एक्स हैंडल पर एक पोस्ट किया गया। जिसमें लिखा है कि जयनगर के लिए न्याय! इसमें यह भी लिखा है, यह फैसला अभूतपूर्व है। बंगाल में इससे पहले कभी भी रेप-मर्डर केस के महज 63 दिनों के अंदर दोषी को फांसी देने का आदेश नहीं दिया गया था। इस मामले की जांच करने का हमारा एक ही उद्देश्य था, पीड़िता और उसके परिवार को जल्द से जल्द न्याय दिलाना। लड़की वापस नहीं आएगी। लेकिन जिस अभूतपूर्व गति से हम उन्हें और उनके परिवार को ‘न्याय’ दे पाए, उससे हमें लंबे समय तक न्यायहीन नहीं रहना पड़ा, यही हमारी सांत्वना है, हमारी उपलब्धि है। कोर्ट के फैसले पर सीएम ममता बनर्जी ने जाहिर की खुशी सीएम ममता बनर्जी ने कोर्ट के फैसले पर खुशी भी जाहिर की। एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, चार अक्टूब को जयनगर में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए क्रूर बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपी को आज बरुईपुर की POCSO अदालत ने इस जघन्य घटना के मात्र 62 दिनों के भीतर ही मौत की सजा सुनाई है। इस तरह के मामले में मात्र दो महीने के भीतर दोषसिद्धि और मृत्युदंड राज्य के इतिहास में अभूतपूर्व है। मैं इस उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए राज्य पुलिस और अभियोजन प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों को बधाई देता हूँ। सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति शून्य सहिष्णुता रखती है और यह सुनिश्चित करना जारी रखेगी कि न्याय में न तो देरी हो और न ही न्याय से वंचित किया जाए।

RBI ने बिना कुछ गिरवी के कृषि लोन की सीमा 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का निर्णय लिया

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक ने कोलैटरल फ्री कृषि लोन की सीमा को 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया है। इसके जरिए सरकार की कोशिश छोटे और सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाना है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक द्वारा वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंक को यूपीआई के माध्यम से पूर्व-स्वीकृत क्रेडिट लाइनें देने की अनुमति दी गई है। आरबीआई की ओर से इन दोनों निर्णय का ऐलान शुक्रवार की एमपीसी के बाद किया गया। कोलैटरल फ्री कृषि लोन के लिए पहले यह लिमिट 1.60 लाख रुपये थी, जिसे 2019 में तय किया गया था। इससे पहले यह लिमिट 2010 में एक लाख रुपये थी। आरबीआई ने जारी बयान में कहा कि तब से लेकर अब तक की कुल मुद्रास्फीति और कृषि इनपुट लागत में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, बिना कुछ गिरवी के कृषि लोन की सीमा 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इससे औपचारिक ऋण प्रणाली में छोटे और सीमांत किसानों का कवरेज बढ़ेगा। इसका सर्कुलर जल्द ही जारी किया जाएगा। अधिक वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई ने स्मॉल फाइनेंस बैंक (एसएफबी) को यूपीआई के माध्यम से पूर्व-स्वीकृत क्रेडिट लाइनें प्रदान करने की अनुमति देने का भी निर्णय लिया है। सितंबर 2023 में यूपीआई के दायरे का विस्तार किया गया था। इससे पूर्व-स्वीकृत क्रेडिट लाइनों को यूपीआई के माध्यम से जोड़ा जा सकता है। पहले कमर्शियल बैंकों को ही यूपीआई के माध्यम से पूर्व-स्वीकृत क्रेडिट लाइन जारी करने की अनुमति थी। पेमेंट्स बैंकों, एसएफबी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को इस दायरे से बाहर रखा गया था। आरबीआई ने कहा, “यूपीआई पर क्रेडिट लाइन में नए ग्राहकों को कम-टिकट, कम-अवधि के लोन उपलब्ध कराने की क्षमता है। एसएफबी ग्राहकों तक पहुंचने के लिए एक उच्च तकनीक, कम लागत वाले मॉडल पर काम करते हैं और इससे पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।”

सूरत पुलिस ने फर्जी डॉक्टर गिरोह का किया खुलासा, 70 हजार दो, बन जाओ डॉक्टर, 13 लोग हुए गिरफ्तार

सूरत गुजरात के सूरत में एक फर्जी डॉक्टर गिरोह का खुलासा हुआ है, जिसमें 13 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें 10 फर्जी डॉक्टर भी शामिल हैं। यह गिरोह ‘बैचलर ऑफ इलेक्ट्रो-होम्योपैथी मेडिसिन एंड सर्जरी’ (BEMS) डिग्री बेचता था। सूरत पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश किया और बताया कि ये लोग महज 70 हजार रुपए में बिना किसी योग्यतानुसार 8वीं पास लोगों को भी डॉक्टर बना रहे थे। कैसे काम करता था गिरोह गिरोह के सदस्य फर्जी डिग्रियां देने के लिए एक फर्जी वेबसाइट चला रहे थे, जिस पर बीईएमएस डिग्री का रजिस्ट्रेशन किया जाता था। आरोपियों ने एक बोर्ड की स्थापना की थी, जिसके तहत पांच लोग इलेक्ट्रो-होम्योपैथी में ट्रेनिंग देने का काम करते थे। शुरुआत में यह गिरोह डिग्रियां देने के लिए एक फर्जी बोर्ड का इस्तेमाल कर रहा था, लेकिन बाद में उन्होंने गुजरात के आयुष मंत्रालय द्वारा जारी की गई डिग्रियां देना शुरू कर दिया। ये लोग दावा करते थे कि उनकी डिग्री राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त है। क्या करता था गिरोह गिरोह के सदस्य 70,000 रुपए में डिग्री बेचते थे और साथ ही ट्रेनिंग भी देते थे। इसके अलावा, वे हर साल रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल फीस और प्रोटेक्शन मनी के नाम पर 1,500 से 5,000 रुपए और वसूलते थे। इन फर्जी डॉक्टरों ने अपने ग्राहकों को यह गारंटी दी थी कि वे बिना किसी समस्या के एलोपैथी, होम्योपैथी और आरोग्य में मेडिकल प्रैक्टिस कर सकते हैं। पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया इस मामले में पुलिस ने कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से तीन आरोपी बीईएमएस डिग्रियां बेच रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सूरत के निवासी बीके रावत, रसेश गुजराती और इरफान सैयद के रूप में हुई है। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि किस तरह कुछ लोग सूरत में मेडिकल डिग्री के नाम पर धोखाधड़ी कर रहे थे और अवैध रूप से लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं से खिलवाड़ कर रहे थे।

महाराष्ट्र विधानसभा का तीन दिन का सत्र शुरू होने से पहले कालिदास कोलंबकर बने प्रोटेम स्पीकर

मुंबई महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शुक्रवार को कालिदास कोलंबकर को प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ दिलाई गई। महाराष्ट्र विधानसभा का तीन दिन का सत्र शुरू होने से पहले कोलंबकर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें मुंबई स्थित राजभवन में शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम ग्रोहे और मुख्य सचिव सुजाता सौनिक मौजूद थे। बता दें कि कोलंबकर प्रोटेम स्पीकर के रूप में 288 नवनिर्वाचित विधायकों को विधानसभा में शपथ दिलाएंगे। इसके साथ ही शनिवार, 7 दिसंबर से शुरू होने वाले 15वीं विधानसभा के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव भी कराया जाएगा। विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 16 से 21 दिसंबर तक नागपुर में आयोजित होगा। विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव 9 दिसंबर को होगा, इसके बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महायुति सरकार विश्वास मत हासिल करेगी। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री पद की शपथ फडणवीस ने गुरुवार शाम को ली, जबकि महायुति गठबंधन में शामिल शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और एनसीपी नेता अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में आयोजित हुआ। आजाद मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा समेत कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान समेत कई केंद्रीय मंत्री भी समारोह में मौजूद थे। शपथ ग्रहण समारोह में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, सलमान खान, संजय दत्त, रणबीर कपूर, रणवीर सिंह और माधुरी दीक्षित भी पहुंचे थे। दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी समारोह में शामिल हुए थे।

तलाशी अभियान के दौरान सेना के जवान की हार्ट अटैक से मौत, घटना के बाद से सेना और स्थानीय प्रशासन में शोक की लहर

श्रीनगर श्नीनगर के हरवां क्षेत्र में चल रहे एक सर्च ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना के जवान जसविंदर सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस घटना के बाद से सेना और स्थानीय प्रशासन में शोक की लहर दौड़ गई है। जवान की असामयिक मौत सेना के लिए एक बड़ी क्षति मानी जा रही है, क्योंकि वह अपनी सेवा में पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे थे। सेना के अधिकारी और अन्य जवान इस घटना के बाद दुखी हैं और शव को परिवार को सौंपने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं।   अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा बल शुक्रवार सुबह हरवां क्षेत्र में फकीर गुजरी, दारा में आतंकवादियों के खिलाफ सर्च कर रहे थे, तभी आर्मी जवान जसविंदर सिंह को हार्ट अटैक आया। आर्मी के 34 असम राइफल्स के जवान जसविंदर सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई। आप को बदा दें कि मंगलवार की मुठभेड़ के बाद से सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों का पता लगाने के लिए विशाल जंगल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चला रखा है।

भूस्खलन प्रभावित लोग राज्य और केंद्र सरकारों की ओर उम्मीद के साथ देख रहे हैं, उन्हें अब बहाने नहीं चाहिए: प्रियंका गांधी

नई दिल्ली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने शुक्रवार को कहा कि आपदाओं पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और भूस्खलन प्रभावित वायनाड के लोग राज्य और केंद्र सरकारों की ओर उम्मीद के साथ देख रहे हैं तथा उन्हें अब बहाने नहीं चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि वायनाड के लोगों को सम्मान के साथ अपने जीवन को पटरी पर लाने में सक्षम होने के लिए तत्काल मदद की आवश्यकता है। इससे एक दिन पहले ही प्रियंका गांधी ने इस मुद्दे पर केरल के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। वायनाड की सांसद ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आपदाएं राजनीति का विषय नहीं होनी चाहिए। ऐसी आपदाओं के पीड़ितों के सहयोग के प्रयासों में मानवता और करुणा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।” कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘वायनाड के लोग राज्य और केंद्र सरकारों की ओर आशा से देख रहे हैं, उन्हें बहाने नहीं चाहिए, उन्हें गरिमा के साथ अपने जीवन पटरी पर लाने में सक्षम होने के लिए तत्काल मदद की जरूरत है।” उनका कहना था कि जब सरकार में हर स्तर पर घावों को भरने और जीवन के पुनर्निर्माण के लिए मिलकर काम किया जाता है तो भारत मजबूत होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र और राज्य सरकार को आगे बढ़कर वायनाड के लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। प्रियंका गांधी ने अपने पोस्ट में ‘‘वायनाड में भूस्खलन और बाढ़ के लिए सहायता पर नोट” के स्क्रीनशॉट साझा किए। इस नोट में लिखा है, ‘‘केंद्र सरकार वायनाड के प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील है और राज्य सरकार को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए सक्रिय रूप से आगे बढ़ी है।” इसमें कहा गया है कि वायनाड में भूस्खलन आपदा के बाद प्रभावित लोगों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए केंद्र के सहयोग की पहली किस्त 145.60 करोड़ रुपये 31 जुलाई, 2024 को और 145.60 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त एक अक्टूबर, 2024 को जारी की गई।

केजरीवाल ने कहा- पिछले चुनाव के दौरान किए तीन वादे वह पूरा नहीं कर पाए, फिर मौका दिया तो वह इन कामों को पूरा करेंगे

नई दिल्ली दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वीकार किया है कि पिछले चुनाव के दौरान किए तीन वादे वह पूरा नहीं कर पाए। आम आदमी पार्टी के मुखिया ने कहा कि यदि जनता उन्हें एक बार फिर मौका दिया तो वह इन कामों को पूरा करेंगे। केजरीवाल ने कहा कि अच्छी सड़कें, यमुना की सफाई और 24 घंटे साफ पानी का वादा वह पूरा नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कोरोना और जेल जाने को इसकी वजह बताई। अरविंद केजरीवाल ने इंटरव्यू में कहा कि वह पिछले चुनाव के तीन वादे और महिलाओं को आर्थिक सहायता के नए वादे समेत चार काम आगे करना चाहते हैं। पिछले चुनाव के वादों को नहीं पूरा कर पाने की बात को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, ‘तीन चीजें मैंने पिछले चुनाव में कही थी। मैं दिल्ली की सड़कों को बहुत शानदार बनाना चाहता हूं, यूरोपियन स्टैंडर्ड की साफ सुथरी, वेल पेंटेंड, दोनों तरफ फूल पत्तियां, यमुना साफ करना चाहता हूं, घर-घर में 24 घंटे साफ पानी आए। ये तीन वादे मैंने पिछले चुनाव में किए थे, ये तीनों वादे मैं पूरे नहीं कर पाया।’ केजरीवाल ने अधूरे वादों की वजह करोना और शराब घोटाले के फंदे को बताया। उन्होंने कहा, ‘कारण रहा कि दो ढाई साल कोरोना रहा और डेढ़ दो साल ये सारा बेल और झूठे मामले में हमें उलझा दिए। अब हम सारी चीजों से निपट गए हैं। सारा मामला भी खत्म हो गया। कोरोना भी नहीं है। अब हम शांति से काम कर सकते हैं। ये तीन बड़े काम करने के लिए यदि जनता मुझे एक मौका और देती है तो ये तीन बड़े काम मैं करना चाहता हूं। एक काम जो अब मैंने वादा किया है, 18 साल से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को 1000 रुपए देंगे।’ गौरतलब है कि यमुना में प्रदूषण और सड़कों की खराब हालत को लेकर भाजपा और कांग्रेस की ओर से आम आदमी पार्टी की सरकार को लगातार घेरा जा रहा है। अब केजरीवाल ने खुद इसे स्वीकार किया है। दिल्ली में अगले साल जनवरी या फरवरी में चुनाव होने जा रहा है। पूर्व सीएम ने इंटरव्यू में कहा कि वह जनता को 6 रेवड़ी दे रहे हैं और इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी विकास कर रहे हैं। आप के मुखिया ने कहा कि वह महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें सशक्त बनाना चाहते हैं। अरविंद केजरीवाल ने भरोसा जताया कि अगले चुनाव में उनकी पार्टी एक बार फिर जीत हासिल करेगी। उन्होंने अपनी तरफ से सीटों की संख्या तो नहीं दी, लेकिन कहा कि पूर्ण बहुमत हासिल करेंगे। 2020 में ‘आप’ को 70 में से 62 और 2015 में 67 सीटों पर जीत हासिल की थी।

नेपाल पर चीन के बढ़ते कर्ज का बोझ चिंता का विषय बनता जा रहा है, BRI पर जतानी पड़ी सहमति

नेपाल नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने चीन के साथ अपने संबंध मजबूत करने की नीति अपनाते हुए चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) पर अपनी सहमति जताई है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारत से दूरी बनाते हुए चीन के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंध मजबूत करने की नीति अपनाई है। लेकिन उनके इस कदम से नेपाल पर चीन के बढ़ते कर्ज का बोझ चिंता का विषय बनता जा रहा है। केपी शर्मा ओली इस साल चौथी बार प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने परंपरा तोड़ते हुए कार्यकाल की शुरुआत के बाद भारत के बजाए चीन का दौरा किया और चीन को खुश करने की कोशिश की। वहीं चीन ने भी नेपाल को स्थल से जुड़ा हुआ देश बताते हुए और वहां के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए समर्थन दे रहा है। बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक में 9 पुराने समझौतों को दोहराया गया, जिनमें बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) प्रमुख है। इसके तहत नेपाल को चीन के कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि यह सहयोग नेपाल को चीन के कर्ज के जाल में और गहराई तक धकेल सकता है। नेपाल अपने अधिकांश व्यापार और ईंधन आपूर्ति के लिए लंबे समय तक भारत पर निर्भर रहा है, अब चीन पर निर्भरता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। नेपाल का दो-तिहाई व्यापार भारत के साथ होता है, जबकि चीन के साथ केवल 14% व्यापार है। बावजूद इसके, चीन अब नेपाल का सबसे बड़ा कर्जदाता बन गया है। पोखरा में चीन द्वारा निर्मित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा इस बढ़ती निर्भरता का प्रतीक है। लेकिन भारतीय हवाई क्षेत्र का उपयोग न कर पाने जैसी चुनौतियों ने इस परियोजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ओली की चीन-समर्थित परियोजनाओं को लेकर विपक्षी दल और गठबंधन सहयोगी आलोचना कर रहे हैं। उनका मानना है कि चीन से कर्ज लेकर शुरू की जा रही परियोजनाएं नेपाल को दीर्घकालिक आर्थिक संकट में डाल सकती हैं। 2016 में भारत द्वारा छह महीने के लिए तेल आपूर्ति रोकने के बाद ओली ने चीन से पेट्रोलियम आयात का समझौता किया था, जिससे भारत पर निर्भरता कम करने का प्रयास शुरू हुआ। लेकिन अब विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या चीन पर बढ़ती निर्भरता नेपाल के लिए भारत से दूरी बनाने का सही विकल्प है। कर्ज की बढ़ती मात्रा और परियोजनाओं के स्थायित्व को लेकर बढ़ती चिंताओं ने ओली की नीति पर गहरी बहस छेड़ दी है। नेपाल का यह झुकाव कूटनीति का एक नया अध्याय तो जरूर है, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभाव नेपाल के आर्थिक और रणनीतिक भविष्य के लिए कितने लाभकारी होंगे, यह समय ही बताएगा।

मनोज जारांगे ने राज्य सरकार से 5 जनवरी तक मराठा आरक्षण का मुद्दा सुलझाने को कहा, दिया अल्टिमेटम

मुंबई मुंबई के आजाद मैदान में भव्य तरीके से महायुति सरकार का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने के एक दिन बाद ही मराठा आरक्षण का मुद्दा गरमाने लगा है। मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल ने नई सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए एक महीने का अल्टीमेटम दिया है। मनोज जारांगे ने राज्य सरकार से 5 जनवरी तक मराठा आरक्षण का मुद्दा सुलझाने को कहा है। जारांगे ने कहा कि वह महायुति सरकार के गठन के लिए शुभकामनाएं देते हैं लेकिन अब लोगों की समस्याओं का समाधान करना जरूरी है। मनोज जारांगे ने कहा, “अगर सरकार 5 जनवरी तक मराठा समुदाय की सभी मांगें पूरी नहीं करती है तो मराठा फिर से आंदोलन में खड़े होंगे और सरकार की नाक में दम कर देंगे।” उन्होंने मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम को बधाई देते हुए कहा कि आइए मराठा आरक्षण के मुद्दे पर अब शुरुआत करें, नाटक बंद करें। साथ ही उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हम समाज का ख्याल रखने के लिए सामूहिक भूख हड़ताल की तारीख की घोषणा करेंगे, ध्यान रहे, जनता ने आपको चुना है, आप लोगों का दिल जीतने के लिए काम करें। जारंग ने कहा कि अगर फडणवीस मराठा आरक्षण का मुद्दा सुलझा लेंगे तो यह अच्छी बात है। एक दिन पहले 5 दिसंबर को देवेन्द्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री, एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। भव्य शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस मंत्रालय पहुंचे। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की अध्यक्षता में बुधवार को महायुति सरकार की पहली कैबिनेट बैठक हुई। इसके बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कई सवालों के विस्तार से जवाब दिए। मराठा आरक्षण के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तथ्य पहले ही राज्य विधानसभा में उठाया जा चुका है। पिछली सरकार ने केंद्र को ऐसी रिपोर्ट भेजी थी कि उसे डेटा नहीं मिल रहा था। इस बीच काफी कार्रवाई हुई, हमने कोर्ट में सपोर्टिंग एफिडेविट दिया। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है। हमने अपना मामला स्पष्ट कर दिया है। देवेंद्र फड़नवीस ने बताया कि पिछली सरकार में हमने ही मराठा समुदाय को न्याय देने की कोशिश की थी और हम मराठा समुदाय को न्याय दिलाकर रहेंगे।

पूर्व SC जज ने बताया- बाबरी विवाद के फैसलों में सेकुलरिज्म के सिद्धांत के तहत न्याय नहीं दिया गया, कोई राम मंदिर नहीं मिला था

नई दिल्ली पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आरएफ नरीमन ने बाबरी विवाद से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर अपनी असहमति जताते हुए कहा कि इन फैसलों में सेकुलरिज्म के सिद्धांत के तहत न्याय नहीं दिया गया। उन्होंने 2019 के ऐतिहासिक फैसले की भी आलोचना की, जिसमें विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण की अनुमति दी गई थी। जस्टिस नरीमन ने इसे ‘न्याय का बड़ा मजाक’ करार दिया और कहा कि इन फैसलों में सेकुलरिज्म को उचित स्थान नहीं दिया गया। जस्टिस नरीमन ने यह टिप्पणी “सेकुलरिज्म और भारतीय संविधान” विषय पर आयोजित प्रथम जस्टिस एएम अहमदी स्मृति व्याख्यान में की। उन्होंने बताया कि ‘खुद सुप्रीम कोर्ट ने ये बात मानी थी कि बाबरी मस्जिद के नीचे कोई राम मंदिर नहीं था।’ उन्होंने इस मामले से जुड़े पहले के फैसलों पर खुलकर बात की। लिब्रहान आयोग और राष्ट्रपति संदर्भ पर टिप्पणी रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस नरीमन ने कहा, “”सबसे पहले सरकार ने लिब्रहान आयोग नियुक्त किया, जो निश्चित रूप से 17 वर्षों तक सोया रहा और फिर 2009 में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। दूसरा, इसने अयोध्या अधिग्रहण क्षेत्र अधिनियम और साथ ही सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रपति संदर्भ दिया, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मस्जिद के नीचे कोई हिंदू मंदिर था या नहीं।” उन्होंने इसे “भ्रामक और शरारतपूर्ण प्रयास” बताया। 1994 का इस्माइल फारूकी मामला उन्होंने इस्माइल फारूकी बनाम भारत सरकार (1994) के फैसले का जिक्र किया, जिसमें अयोध्या क्षेत्र अधिग्रहण अधिनियम, 1993 की वैधता और राष्ट्रपति संदर्भ पर सुनवाई हुई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 67 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को वैध ठहराया, लेकिन न्यायमूर्ति अहमदी ने असहमति जताते हुए कहा कि यह कानून सेकुलरिज्म के खिलाफ है। 2019 का राम जन्मभूमि फैसला जस्टिस नरीमन ने राम जन्मभूमि मामले (2019) में अंतिम फैसले का भी जिक्र किया। इसमें तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया कि अयोध्या में 2.77 एकड़ की पूरी विवादित भूमि राम मंदिर के निर्माण के लिए सौंप दी जानी चाहिए। साथ ही, सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक भूमि देने का आदेश दिया गया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि 1992 में मस्जिद का विध्वंस कानून का गंभीर उल्लंघन था। जस्टिस नरीमन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा, “कोर्ट ने माना कि 1857 से 1949 तक मुसलमान वहां नमाज पढ़ते थे। लेकिन यह कहा गया कि वे इस स्थल पर ‘एकमात्र कब्जे’ का दावा नहीं कर सकते भले ही हिंदू पक्ष ने कई बार कानून के विपरीत कार्य किए हों। इसके बावजूद कोर्ट ने पूरा स्थल हिंदू पक्ष को सौंप दिया। यह न्याय का बड़ा मजाक है।” जस्टिस नरिमन ने इस फैसले को लेकर कहा, “मस्जिद का निर्माण 1528 में हुआ था और यह तब से एक मस्जिद के रूप में अस्तित्व में थी। लेकिन 1853 में पहली बार इसमें विवाद हुआ। जैसे ही ब्रिटिश साम्राज्य ने 1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी से सत्ता ली, एक दीवार को अंदर और बाहर के आंगन के बीच खड़ा किया गया। इस दीवार के बाद, अंदर के आंगन में मुस्लिम नमाज पढ़ते थे और बाहर के आंगन में हिंदू। यह तथ्य दर्ज है कि 1857 से लेकर 1949 तक दोनों पक्षों की प्रार्थनाएं होती रही थीं। लेकिन 1949 में कुछ लोग मस्जिद में घुसकर मूर्तियां स्थापित कर गए, जिसके बाद मुस्लिमों की प्रार्थनाएं रुक गईं।” एएसआई रिपोर्ट और ऐतिहासिक संदर्भ उन्होंने 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा तैयार रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इस रिपोर्ट में विभिन्न धर्मों से संबंधित पुरावशेष पाए गए, जिनमें शैव, बौद्ध और जैन संस्कृतियों के चिन्ह भी थे। जस्टिस नरिमन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने यह पाया था कि “कोई राम मंदिर बाबरी मस्जिद के नीचे नहीं था।” इसके बावजूद कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि मुस्लिमों के पास 1857 से 1949 तक के बीच विवादित स्थल पर “विशेष अधिकार” नहीं था, क्योंकि यह स्थान विवादित था। उन्होंने कहा, “कोर्ट ने माना कि इस स्थान पर हिंदू पक्ष ने कानून का उल्लंघन किया और इसलिए इस मामले में कोई एकतरफा दावा नहीं किया जा सकता था।” सेकुलरिज्म की अनदेखी पर नाराजगी जस्टिस नरीमन ने जोर देकर कहा, “हर बार हिंदू पक्ष ने कानून का उल्लंघन किया, लेकिन इसका परिणाम मस्जिद के पुनर्निर्माण के बजाय केवल वैकल्पिक भूमि देने के रूप में सामने आया। यह सेकुलरिज्म के साथ न्याय करने में असफलता है।” जस्टिस नरिमन ने इस बात पर जोर दिया कि हर बार जब कोई कानून का उल्लंघन हुआ, तो वह हिंदू पक्ष द्वारा हुआ था। उन्होंने सवाल उठाया कि “क्या न्याय का सही पालन किया गया था? इस फैसले में किसी तरह से सेकुलरिज्म को सम्मान नहीं दिया गया, जो कि मेरी व्यक्तिगत राय में न्याय का एक बड़ा अपमान है।” उन्होंने यह भी कहा कि, “आखिरकार, जो ‘सुधार’ किया गया वह यह था कि मस्जिद को पुनर्निर्मित करने के बजाय सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए कुछ और भूमि दी गई।” उन्होंने बाबरी विध्वंस साजिश मामले का भी जिक्र किया, जिसमें सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। इस पर उन्होंने कहा, “जिन न्यायाधीश ने यह फैसला दिया, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद उत्तर प्रदेश के उप-लोकायुक्त के रूप में नियुक्त किया गया। यह हमारे देश की स्थिति को दर्शाता है।”

गैस पीड़ितों के लिए आयुष्मान भारत ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना के तहत 5 दिसम्बर तक 20 हजार 199 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके

भोपाल भोपाल गैस पीड़ितों और उनके बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के लिए राज्य सरकार तत्पर है। गैस पीड़ितों के लिए आयुष्मान भारत ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना के तहत 5 दिसम्बर तक 20 हजार 199 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। गैस पीड़ितों और उनके बच्चों के लिए भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के तहत 6 अस्पताल और 9 औषधालय भी संचालित किए जा रहे हैं, जहां सभी प्रकार की जांच, उपचार और आवश्यक सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध हैं। साथ ही आयुष्मान योजना के अंतर्गत भोपाल गैस राहत विभाग से अनुबंधित सभी अस्पतालों में भी गैस पीड़ितों को आवश्यकतानुसार चिकित्सा सुविधाएँ दी जा रही हैं। गंभीर बीमारियों के विशेष इलाज किडनी, लीवर ट्रांसप्लांट और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित के इलाज के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। कैंसर उपचार के लिए विभाग ने एम्स भोपाल और 3 निजी अस्पतालों के साथ अनुबंध किया है। इसके अतिरिक्त कमला नेहरू अस्पताल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना की गई है, जहां 13 डायलिसिस मशीनों के जरिये पीड़ित मरीजों का नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। अत्याधुनिक आपातकालीन सेवाएं भी जारी भोपाल गैस राहत विभाग के सभी अस्पतालों में 24×7 इमरजेंसी यूनिट संचालित की जा रही है। इन यूनिट्स में गैस पीड़ितों और उनके बच्चों को तुरंत और उन्नत चिकित्सा सेवाएं, सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। गैस प्रभावित विधवाओं (कल्याणियों) को राज्य सरकार द्वारा विशेष राहत दी जा रही है। इन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अतिरिक्त 1,000 रुपये मासिक पेंशन दी जा रही है। वर्तमान में 4 हजार 406 विधवाओं को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। राज्य सरकार भोपाल गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रमुख लक्ष्य कल्याण योजनाओं के तेज क्रियान्वयन और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से गैस पीड़ितों के जीवन स्तर में त्वरित सुधार लाना है।  

कृषक उन्नति योजना के तहत मिली राशि से कोमल साहू ने कराया बोर, खरीदा भैंस

धमतरी, छत्तीसगढ़ में किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से कृषक उन्नति योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को उचित मूल्य पर उनकी फसल बेचने का मौका देना और कृषि के लिए उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से धान की खरीद, आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग और नवीन कृषि तकनीकों में निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। ऐसे ही किसान हैं धमतरी जिले के ग्राम भटगांव के श्री कोमल साहू। वे बताते हैं कि उनके द्वारा समर्थन मूल्य पर बेचे गए धान के एवज में उन्हें किसान उन्नति योजना के तहत एक लाख 51 हजार रूपये मिले। इस राशि से उन्होंने बोन खनन कराया और भैंस खरीदा। वे गद्गद होकर कहते हैं कि हम किसान तो काम करते ही हैं, पर योजना के तहत राशि के मिलने पर उन्हें खेती कार्य सहित अन्य सुविधाओं को बढ़ाने में मदद मिल रही है। इसके लिए उन्होंने प्रदेश के मुखिया श्री विष्णुदेव साय का तहे दिल से अभार व्यक्त किया। बता दें कि कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ 19,257 रुपये की आदान सहायता राशि प्रदान की जा रही है।

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