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फलस्तीन लिखा बैग लेकर संसद पहुंचने पर दिया बयान, पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने की प्रियंका की तारीफ

इस्लामाबाद। कांग्रेस महासचिव और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के फलस्तीन लिखा बैग लेकर संसद पहुंचने के कदम की पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने तारीफ की है। पाकिस्तान के पूर्व मंत्री फवाद हसन चौधरी ने एक्स पर प्रियंका गांधी के बैग के साथ तस्वीर साझा की है। उन्होंने लिखा कि जवाहर लाल नेहरू जैसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पोती से क्या उम्मीद की जा सकती है? प्रियंका बौने लोगों के बीच तनकर खड़ी हुईं हैं। यह बेहद शर्मनाक है कि किसी पाकिस्तानी सांसद ने आज तक ऐसा साहस नहीं दिखाया।कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सोमवार को संसद में एक बैग लेकर पहुंचीं थी, जिस पर ‘फलस्तीन’ लिखा हुआ था, जो संघर्ष प्रभावित क्षेत्र के लोगों के समर्थन में एक इशारा था। प्रियंका गांधी वाड्रा के हैंडबैग पर ‘फलस्तीन’ शब्द और फलस्तीनी प्रतीक दिखाई दिए, जिसमें एक तरबूज की भी तस्वीर दिखी – जिसे फलस्तीनी एकजुटता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस्राइल की कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठा चुकी हैं प्रियंका प्रियंका गांधी वाड्रा गाजा पर इस्राइल की कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठा रही हैं और उन्होंने फलस्तीनियों के साथ एकजुटता व्यक्त की है। इससे पहले जून महीने में, प्रियंका गांधी ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना की थी, क्योंकि उन्होंने कहा था कि इस्राइल सरकार गाजा में ‘नरसंहारकारी कार्रवाई’ कर रही है, और उन्होंने उन पर और उनकी सरकार पर ‘बर्बरता’ का आरोप लगाया था। भाजपा ने उठाए थे सवाल भाजपा सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने ‘फलस्तीन समर्थक इशारे’ को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा पर निशाना साधते हुए कहा था कि जहां तक गांधी परिवार के सदस्यों का सवाल है, यह कोई नई बात नहीं है। नेहरू से लेकर प्रियंका वाड्रा तक, गांधी परिवार के सदस्य तुष्टिकरण का बैग लेकर घूमते हैं। उन्होंने कभी भी अपने कंधों पर देशभक्ति का बैग नहीं लटकाया। यह बैग उनकी हार का कारण है। What else could we expect from a granddaughter of a towering freedom fighter like Jawaharlal Nehru? Priyanka Gandhi has stood tall amidst pigmies, such shame that to date, no Pakistani member of Parliament has demonstrated such courage.#ThankYou pic.twitter.com/vV3jfOXLQq     — Ch Fawad Hussain (@fawadchaudhry) December 16, 2024

मध्यप्रदेश वासियों के लिए खुशखबरी, फाइलों के ढेर और बाबुओं के चक्कर से मिली मुक्ति , अब प्रदेश में लगेंगे ई ऑफिस

Good news for the people of Madhya Pradesh, freedom from piles of files and the affairs of babus, now e-offices will be set up. भोपाल ! मध्यप्रदेश में सरकारी कामकाज में तेजी लाने की कोशिश की जा रही है। इसके अंतर्गत प्रदेश में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य में अब सभी काम ऑनलाइन होंगे। ऑफिसों में फाइलों के ढेर और बाबुओं के चक्कर से मुक्ति मिल गई है। राज्य सरकार ने प्रदेश में ई ऑफिस लगाने की कवायद की है जिसका काम शुरु भी हो गया है। नए साल से मंत्रालय वल्लभ भवन में सभी विभागों में ई-ऑफिस के माध्यम से ही फाइलें निपटाई जाएंगी। इससे फाइलों की मॉनिटरिंग में भी आसानी होगी। ई-ऑफिस के लिए कर्मचारियों, अधिकारियों को बाकायदा प्रशिक्षण दिया गया है। कामकाज में तेजी और फाइलों की स्थिति की ट्रैकिंग के लिए ई-ऑफिस के संचालन की कवायद की जा रही है। राज्य मंत्रालय वल्लभ भवन के सभी विभागों में 1 जनवरी 2025 से ई-ऑफिस संचालित किए जाएंगे। इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभागीय प्रमुखों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं। मंत्रालय में करीब डेढ़ दर्जन विभागों में ई-ऑफिस शुरु भी हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था से टेबल पर से फाइलों का ढेर हट जाएगा। मंत्रालय में 39 विभागों में ई-ऑफिस चालू होगा जिनमें से 17 में ई- फाइल सिस्टम प्रारंभ भी हो चुका है। बाकी 22 विभागों में भी 1 जनवरी से ई-ऑफिस लगने लगेंगे।राजधानी के सभी विभागाध्यक्ष कार्यालयों यानि संचालनालयों को भी ई-ऑफिस से जोड़ दिया गया है। राज्य के सभी संभागों और जिलों में भी जल्द ही ई-ऑफिस चालू कराए जाएंगे। कैबिनेट प्रस्ताव भी ऑनलाइन राज्य मंत्रालय वल्लभ भवन के विभागों में अब ई- फाइलें ही बनेंगी। यहां तक कि कैबिनेट प्रस्ताव भी ऑनलाइन तैयार किया जाएगा। कैसा होगा ई-ऑफिस ई-ऑफिस में सभी काम ऑनलाइन होंगे। अधिकारी कर्मचारी कंप्यूटर पर फाइलें निपटाएंगे। सरकारी कामकाज ई- फाइलों से ही होंगे। मैन्युअल फाइलिंग बंद हो जाएगी। पुरानी नस्तियों को भी ई- फाइलों में रखा जाएगा। हालांकि मुख्यमंत्री व अन्य मंत्रियों के लिए मैन्युअल फाइलें ही चलेंगी।

राजस्थान की मरुधरा को देंगे 46, 300 करोड़ रुपये की सौगात, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे जयपुर

जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंचे। मरुधरा को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए वे 46, 300 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी करीब 3 घंटे तक जयपुर में रहेंगे। इस दौरान वह वाटिका रोड पर आयोजित एक वर्ष-परिणाम उत्कर्ष कार्यक्रम में शामिल होंगे और वहां से बिजली, पानी, सड़क, रेलवे से जुड़ी 46300 करोड़ रुपये से अधिक की 24 परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा पीएम मोदी पार्वती-कालीसिंध-चंबल पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का उद्घाटन भी करेंगे। 11 नदियों को इस परियोजना के तहत जोड़ा जाएगा, इससे प्रदेश के 21 जिलों में पानी की समस्या खत्म हो जाएगी। पीकेसी-ईआरसीपी में चंबल और इसकी सहायक नदियां पार्वती, कालीसिंध, कुनो, बनास, बाणगंगा, रूपरेल, गंभीरी और मेज शामिल हैं। नवनेरा बैराज से पानी गलवा बांध तक लाया जाएगा। यहां दो हिस्सों में ईसरदा बांध और बीसलपुर बांध तक पानी पहुंचेगा। नवनेरा से चंबल नदी पर जल सेतु बनाकर पानी मेज नदी तक आएगा। इससे राजस्थान की 2.80 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई करने के लिए पानी मिलेगा। पहले प्रदेश की सिर्फ 80 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होती थी। लेकिन, अब 2 लाख नया क्षेत्र जोड़ा जाएगा और इसका लाभ 25 लाख किसान परिवारों को होगा। इससे प्रदेश की 40 फीसदी आबादी तक साफ पानी पहुंचेगा। पीकेसी-ईआरसीपी से राजस्थान के झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, करौली, धौलपुर, भरतपुर, डीग, दौसा, अलवर, खैरथल-तिजारा, जयपुर, जयपुर ग्रामीण, कोटपूतली-बहरोड़, अजमेर, ब्यावर, केकड़ी, टोंक, दूदू जिले की जनता को पीने के पानी की समस्या से छुटकारा मिलेगा। यहां से पंपिंग कर पहले बने गलवा बांध तक जाएगा, गलवा से 31 किलोमीटर दूर ईसरदा तक पानी पहुंचेगा। अपने इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी दो बैराज का भी शिलान्यास करेंगे। बता दें कि कूल नदी पर रामगढ़ बैराज और पार्वती नदी पर महलपुर बैराज का निर्माण होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर लिखा, ‘विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए विकसित राजस्थान भी जरूरी है। इसी कड़ी में आज दोपहर 12 बजे जयपुर में राज्य सरकार के ‘एक वर्ष-परिणाम उत्कर्ष’ कार्यक्रम का हिस्सा बनूंगा, इसमें रेल-सड़क सहित कई परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास का भी सौभाग्य मिलेगा।’

स्कूल में गोलीबारी पर भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन, ‘छात्रों को पढ़ना-लिखना सीखना चाहिए न कि हिंसा’

वॉशिंगटन। अमेरिका के विस्कोंसिन में एक स्कूल में हुई गोलीबारी की घटना पर राष्ट्रपति जो बाइडन ने चिंता जाहिर की। बाइडन ने कहा कि स्कूल में बच्चों को पढ़ना-लिखना सीखना चाहिए न कि बंदूक चलाना और हिंसा करना। बाइडन ने देश में बढ़ रही बंदूक संस्कृति को लेकर भी नाराजगी जाहिर की और कहा कि देश की संसद को इस बारे में गंभीरता से सोचने की जरूरत है। स्कूल में गोलीबारी की घटना पर हैरानी और दुख जताते हुए बाइडन ने कहा कि ऐसी घटनाएं बिल्कुल अस्वीकार्य हैं और हम अपने बच्चों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं।’ व्हाइट हाउस से जारी बयान में कहा गया कि ‘आज विस्कोंसिन के मेडिसन के परिवार अपनों को खोने के दुख में हैं। हम चाहते हैं कि संसद इस पर तुरंत कोई कदम उठाए।’ बयान में कहा गया कि ‘न्यूटन से लेकर उवाल्डे, पार्कलैंड और मेडिसन तक स्कूलों में गोलीबारी की कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। हम इसे सामान्य नहीं मान सकते। हर बच्चे का अधिकार है कि उसे स्कूल में पूरी सुरक्षा मिले। स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों को पढ़ना-लिखना सीखना चाहिए न कि हिंसा और गोलीबारी करना।’ विस्कोंसिन के स्कूल में हुई गोलीबारी में पांच की मौत गौरतलब है कि सोमवार को मैडिसन के एबंडैंट लाइफ क्रिश्चियन स्कूल में अंधाधुंध गोलीबारी हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गोलीबारी में संदिग्ध हमलावर सहित पांच लोग मारे गए। मृतकों में बच्चे भी शामिल हैं। गोलीबारी में पांच लोग घायल भी हुए हैं। हमलावर एक किशोर को बताया जा रहा है, जो स्कूल में मृत पाया गया। अभी गोलीबारी के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। बाइडन ने कहा कि ‘मेरी सरकार ने बंदूक हिंसा के खिलाफ काफी काम किया। हमने गन सेफ्टी कानून पारित कराया और अन्य राष्ट्रपतियों की तुलना में बंदूक हिंसा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए। हालांकि अभी इसे रोकने के लिए काफी कुछ किया जाना बाकी है। खतरनाक हथियारों पर रोक लगनी चाहिए।’

हर साल प्रदेश में बंद पड़ी खदानों में डूबने से हो जाती है 50 लोगो की मौतें

रायपुर जिले में छह वर्षों में 300 से अधिक लोगों की मौत बंद पड़ी खदानों में डूबने से हुई है। ये आंकड़े जिला आपदा प्रबंधन से मिले हैं। खदान में डूबने से हर साल औसतन 50 से अधिक लोगों की जान चली जाती है। इसी तरह आगजनी और सर्पदंश से मौतों का आंकड़ा दूसरे नंबर पर है। जिले में आगजनी और सर्पदंश से भी हर वर्ष औसतन 20 से 25 लोगों की मौत हो जाती है। पिछले 11 महीनों में प्राकृतिक आपदा से मृत्यु के 191 प्रकरण हैं, जिनमें मृतक के स्वजनों को सात करोड़ 52 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। साल 2014 से 2024 तक लंबित प्रकरणों में भी मृतकों के स्वजनों को सहायता राशि दी गई है। चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्राकृति आपदा से मृत्यु होने पर मृतकों के स्वजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाती है। इस राशि से मृतक के स्वजनों को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में बड़ी मदद मिलती है। इसमें पानी में डूबने के अलावा बिच्छूदंश, आकाशीय बिजली गिरने, भारी बारिश होने से पेड़ व मकान गिरने, खदान धसकने जैसी घटनाएं भी शामिल हैं। हालांकि, ऐसी घटनाओं से मौतों की संख्या बंद खदानों में डूबने, आगजनी और सर्पदंश से मृत्यु की तुलना में बहुत कम हैं। आर्थिक सहायता से होगा लाभ प्राकृतिक आपदा से जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें ऐसे कई ऐसे थे जिनकी आय से ही परिवार का जीवन-यापन निर्भर था। ऐसे में उनकी मृत्यु से परिवार में आय के साधन भी बंद हो गए थे। इस सहायता राशि से मृतक के परिवार अब कोई व्यवसाय या अन्य किसी काम में लगा पाएंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इनका कहना प्राकृतिक आपदा से मृत्यु के 191 प्रकरणों में सहायता राशि की स्वीकृति दी गई है। मृतकों के स्वजनों को सात करोड़ 52 लाख रुपये बांटे गए हैं। ऐसे प्रकरणों में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. गौरव सिंह, कलेक्टर, रायपुर

आज पेश हो सकता है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल, लोकसभा की कार्यवाही शुरू

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत हुई। देशभर की निगाहें आज संसद पर टिकी हुई हैं, क्योंकि केंद्र सरकार आज ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश कर सकती है। यह बिल देशभर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल को लेकर देश में चल रही सियासत के बीच भाजपा ने अपने लोकसभा सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। बता दें कि 20 दिसंबर तक संसद का शीतकालीन सत्र है। इससे पहले यह चर्चा चली थी कि सोमवार को लोकसभा में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश हो सकता है। हालांकि, सोमवार को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि 12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई थी। कैबिनेट ने दो ड्रॉफ्ट कानूनों को मंजूरी दी थी, इसमें से एक संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से संबंधित है, जबकि दूसरा विधेयक विधानसभाओं वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों के एक साथ चुनाव कराने के संबंध में हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बिल पर आम लोगों की राय भी लेने की योजना है। विचार-विमर्श के दौरान बिल के प्रमुख पहलुओं, इसके फायदे और पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए जरूरी कार्यप्रणाली और चुनावी प्रबंधन पर बातचीत की जाएगी। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से बातचीत की जिम्मेदारी के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अर्जुन राम मेघवाल और किरेन रिजिजू को नियुक्त किया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय वन मेला: ‘लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण पर आधारित होगा वन मेला’, आज से 23 दिसम्बर तक

भोपाल वन राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि वन मेले का आयोजन अपने आप में एक अनूठा आयोजन है। उन्होंने कहा कि वन मेला “लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण” पर आधारित होगा। लघु वनोपज प्रबंधन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश में लघु वनोपज संग्रहण कार्य में लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है। मेले में प्रदेशवासियों के अलावा देश के विभिन्न राज्यों के लोगों को इस मेले का इंतजार रहता है। उन्होंने बताया कि 10वाँ अंतर्राष्ट्रीय वन मेला 17 से 23 दिसम्बर तक लाल परेड मैदान, भोपाल आयोजित होगा। उन्होंने कहा कि मेले में लघु वनोपज, औषधि पौधों के क्षेत्र की गतिविधियों, उत्पादों एवं अवसरों को प्रदर्शित करने के लिये इससे जुड़े संग्राहकों, उत्पादकों, व्यापारियों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, प्रशासकों और नीति निर्धारकों के बीच संवाद स्थापित करने के लिये एक व्यापक मंच उपलब्ध करायेगा। राज्य मंत्री श्री अहिरवार ने कहा कि वन मेले में 300 स्टॉल लगाये जा रहे हैं। जिसमें प्रदेश के जिला यूनियन, वन धन केन्द्र, जड़ी संग्राहक, उत्पादक, कृषक, आयुर्वेदिक औषधि निर्माता, परम्परागत भोजन सामग्री के निर्माता और विक्रेतागण अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। मेले में विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा प्रदर्शनी लगाई जायेगी। श्री अहिरवार ने कहा कि “लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण” पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला 19-20 दिसम्बर को मेला स्थल पर होगी। कार्यशाला में श्रीलंका, नेपाल और आस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। राज्य मंत्री श्री अहिरवार ने कहा कि वन मेले में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन 21 दिसम्बर को होगा। जिसमें उच्च गुणवत्ता युक्त लघु वनोपजों, जड़ी-बूटियों और एम.एफ.पी. पार्क द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक औषधियों के क्रय-विक्रय के लिये अनुबंध किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि मेले में ओपीडी का संचालन होगा, जिसमें प्रतिदिन आयुर्वेद चिकित्सकों, उपचार करने वाले विशेषज्ञों के द्वारा नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श प्रदान किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इसमें 25 हजार लोगों द्वारा उपचार कराने की संभावना है। राज्य मंत्री श्री अहिरवार ने कहा कि वन मेले में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। जिसमें आर्केस्ट्रा, नुक्कड़ नाटक, लोकनृत्य, स्कूली छात्र-छात्राओं के लिये गायन, चित्रकला, फैन्सी और ड्रेस का कार्यक्रम होगा। उन्होंने कहा कि ख्याति प्राप्त लोक गायिका श्रीमती मालिनी अवस्थी 18 दिसम्बर को, हास्य कलाकार श्री एहसान कुरैशी 19 दिसम्बर को, सूफी बैण्ड 20 दिसम्बर, फिडली क्राफ्ट 21 दिसम्बर और “एक शाम वन विभाग के नाम” 22 दिसम्बर वन मेले में आयोजित होंगे और 23 दिसम्बर को समापन कार्यक्रम होगा। वन राज्य मंत्री श्री अहिरवार ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वन मेले का उदघाटन समारोह 17 दिसम्बर को राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में शाम 5 बजे लाल परेड मैदान पर किया जायेगा। राज्य मंत्री श्री अहिरवार ने वन मेले में ज्यादा से ज्यादा लोगों को भागीदारी करने की अपील की है। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव एवं प्रशासन, म.प्र. लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित श्री अशोक बर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबंध संचालक म.प्र. लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित श्री विभाष ठाकुर और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।  

गुकेश की जीत के मिलेंगे ₹11 करोड़, देना होगा ₹4.67 करोड़ का टैक्स

नई दिल्ली हाल ही में, भारत के युवा ग्रैंडमास्टर D Gukesh ने शतरंज की दुनिया में एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया। महज 18 साल की उम्र में, उन्होंने चीन के डिंग लिरेन को हराकर विश्व शतरंज चैंपियन का खिताब जीता। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही उन्हें ₹11 करोड़ की इनामी राशि मिली, जो किसी भी शतरंज खिलाड़ी के लिए एक सपना होती है। लेकिन इस बड़ी राशि के साथ एक और बड़ी चुनौती भी सामने आई है आयकर की भारी रकम। दरअसल, D Gukesh को अपनी इनामी राशि ₹11 करोड़ पर ₹4.67 करोड़ का भारी-भरकम इनकम टैक्स चुकाना पड़ेगा, जो लगभग 42.5% है। इस टैक्स प्राइज ने सोशल मीडिया पर गर्मागरम बहस छेड़ दी है। ₹4.67 करोड़ का लिया जाएगा टैक्स भारत में पुरस्कार पर लगने वाला इनकम टैक्स काफी ज्यादा होता है, खासकर जब इनाम की राशि एक तय सीमा से ऊपर हो। D Gukesh को मिले ₹11 करोड़ के इनाम में से ₹4.67 करोड़ टैक्स के रूप में कटेगा। यह उनके कुल इनाम का एक बड़ा हिस्सा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इतनी बड़ी रकम पर देश के सबसे ऊंचे टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा। यह बताता है कि भारत में किसी भी चैंपियनशिप के जीतने के बाद मिलने वाले प्राइज मनी पर टैक्स दरें कितनी कड़ी होती हैं। खासकर जब किसी को बड़ी रकम मिलती है, तो उस पर भारी टैक्स देना पड़ता है। इस मामले ने इनाम पर टैक्स व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर आ रहीं प्रतिक्रिया गुकेश की जीत के बाद सोशल मीडिया पर इस टैक्स प्राइज को लेकर अगल-अगल प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ लोग इसे एक सही टैक्स व्यवस्था मानते हुए कहते हैं कि यह देश की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए जरूरी है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इतनी बड़ी रकम पर इतना भारी टैक्स प्राइज एक युवा खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी चुनौती हो सकती है। D Gukesh ने अभी तक इस कर मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उनकी जीत ने ना सिर्फ शतरंज के क्षेत्र में एक नया मुकाम स्थापित किया है, बल्कि इसने भारत की टैक्स व्यवस्था और अवॉर्ड प्राइज पर भी एक नई बहस को जन्म दिया है।

योगी सरकार ने पेश किया 17,865 करोड़ का अनुपूरक बजट, ऊर्जा विभाग को मिले सबसे अधिक 8587 करोड़

Yogi government presented supplementary budget of Rs 17,865 crore, Energy Department got maximum Rs 8587 crore योगी सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अपना द्वितीय अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। 17,865.72 करोड़ रुपए के इस अनुपूरक बजट में 790.49 करोड़ रुपए के नए प्रस्ताव सम्मिलित किए गए हैं। यह योगी सरकार का इस वित्तीय वर्ष का द्वितीय अनुपूरक बजट है, जो मूल बजट (7 लाख 36 हजार 437.71 करोड़ रुपए) का 2.42 प्रतिशत है। इससे पूर्व योगी सरकार 12,209.93 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट भी प्रस्तुत कर चुकी है। दोनों अनुपूरक बजट को मिलाकर योगी सरकार का वित्तीय वर्ष 2024-25 का कुल बजट अब 7 लाख 66 हजार 513.36 करोड़ रुपए का हो गया है। केंद्रीय योजनाओं के साथ ही आकस्मिक खर्चों का भी प्रस्ताव शामिल योगी सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि द्वितीय अनुपूरक बजट का आकार 17,865.72 करोड़ रुपए है। उन्होंने कहा कि यह सरकार विकास को प्राथमिकता देने वाली सरकार है और जब भी आवश्यकता होती है तब संवैधानिक तरीके से सदन के माध्यम से अनुपूरक बजट लाने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि अनुपूरक बजट में 790.49 करोड़ रुपए के नए प्रस्ताव सम्मिलित किए गए हैं। साथ ही इसमें केंद्रीय योजनाओं में 422.56 करोड़ रुपए के केंद्रांश की राशि भी अनुमानित है। इसके अतिरिक्त, कंटिजेंसी से जो 30 करोड़ 48 लाख रुपए का पैसा लिया गया था, उसकी भी प्रतिपूर्ति का भी प्रस्ताव इसमें शामिल है। विभिन्न विभागों की आवश्यकताओं की होगी पूर्ति वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अनुपूरक बजट में विभिन्न विभागों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप बजट जारी किया जाएगा। इसमें ऊर्जा विभाग को 8587.27 करोड़ रुपए, वित्त विभाग को 2438.63 करोड़ रुपए, परिवार कल्याण विभाग को 1592.28 करोड़ रुपए, पशुधन विभाग के लिए 1001 करोड़ रुपए, लोकनिर्माण विभाग के लिए 805 करोड़ रुपए, प्राथमिक शिक्षा विभाग के लिए 515 करोड़ रुपए, सूचना विभाग के लिए 505 करोड़ रुपए, पंचायती राज विभाग के लिए 454.01 करोड़ रुपए और चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग के लिए 354.54 करोड़ रुपए का बजट प्राविधानित किया गया है।30 जुलाई को प्रस्तुत किया गया था पहला अनुपूरक बजटयोगी सरकार ने इसी वर्ष फरवरी महीने में मूल बजट किया था, जो 7.36 लाख करोड़ रुपए से अधिक का था। इसके बाद योगी सरकार ने 30 जुलाई को 12,209.93 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया था। इसके 5 माह के बाद एक बार फिर योगी सरकार विकास कार्यों को गति देने के लिए आवश्यकता के अनुरूप द्वितीय अनुपूरक बजट लेकर आई है। इस बजट को मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित हुई कैबिनेट की बैठक में सर्वसम्मति से स्वीकृत कर लिया गया। इसलिए प्रस्तुत किया जाता है अनुपूरक बजट अनुपूरक बजट एक ऐसा वित्तीय दस्तावेज है जिसे सरकार किसी वित्तीय वर्ष के दौरान तब प्रस्तुत करती है. जब उसे अपने पहले से स्वीकृत बजट में अतिरिक्त खर्च की आवश्यकता होती है। यह बजट उन खर्चों को कवर करने के लिए प्रस्तुत किया जाता है, जिनको अनुमानित बजट में शामिल नहीं किया गया था, या जो नई परिस्थितियों के कारण आवश्यक हो गए हैं। यह बजट वित्त वर्ष के बीच में किसी विभाग या मंत्रालय की किसी योजना में अतिरिक्त राशि खर्च करने के लिए लाया जाता है। यह खर्च के अनुमान के साथ पेश किया जाता है।

जल्द ही उसलापुर से छूटेंगी नर्मदा, रीवा और भोपाल एक्सप्रेस, बिलासपुर रेलवे स्टेशन का दवाब होगा कम

बिलासपुर बहुत जल्द यात्रियों को बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस, बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस, बिलासपुर-भोपाल एक्सप्रेस समेत कटनी रेलखंड पर चलने वाली ट्रेनों में यात्रा करने उसलापुर स्टेशन जाना पड़ेगा। रेल प्रशासन इसका प्रपोजल भी तैयार कर रहा है। हालांकि, रेलवे की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टी नहीं हुई है। मगर, बिलासपुर रेल मंडल में इसकी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। उसलापुर शहर का दूसरा प्रमुख रेलवे स्टेशन है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इस स्टेशन को विकसित भी किया जा रहा है। आधे से ज्यादा कार्य हो चुके हैं। बचे कार्य जल्द पूरा हो जाएंगे। वहीं, बिलासपुर स्टेशन का भी कायाकल्प हो रहा है। 435 करोड़ खर्च कर रेलवे इस स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने के लिए तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत जोनल स्टेशन का नया मॉडल भी बना लिया गया है। इस मॉडल पर गौर करें, तो पुरानी बिल्डिंग के सामने एक नई लाइन बिछाई जाएगी। यह पुरानी लाइन से जुड़ेगी। लाइन विस्तार के लिए ट्रेनों की आवाजाही रोकना जरूरी लाइन विस्तार तभी संभव है, जब पुरानी लाइनों पर ट्रेनों का परिचालन बंद रहे। रेलवे इसकी तैयारी भी कर रही है। जोनल स्टेशन में तीन प्लेटफार्म छह, सात और आठ ऐसे हैं, जहां कटनी रेलखंड की ट्रेनें छूटती हैं। इन ट्रेनों में नर्मदा, रीवा, भोपाल एक्सप्रेस के अलावा बिलासपुर-शहडोल, बिलासपुर-चिरमिरी पैसेंजर जैसी ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों का परिचालन उसलापुर स्टेशन में शिफ्ट किए बिना लाइन विस्तार का कार्य संभव नहीं है। इसलिए रेलवे इस पर जोर दे रही है। बमुश्किल तीन से चार महीने में इस स्टेशन से इन ट्रेनों का परिचालन की उम्मीद है। रेलवे का मानना है कि जब तक अधिक से अधिक ट्रेनों का स्टापेज या परिचालन प्रारंभ नहीं होगा, उस स्टेशन का कद नहीं बढ़ेगा। इसी के तहत पिछले साल रायपुर से आने वाली ट्रेनों का स्टापेज उसलापुर किया गया है। नई व्यवस्था के तहत ट्रेन सीधे दाधापारा से उसलापुर पहुंचती हैं। इससे इंजन बदलने का झंझट भी खत्म हुआ है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर दवाब होगा कम बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर अधिक ट्रेनों की ठहराव की वजह से कहीं न कहीं जोनल स्टेशन में ट्रेनों का दबाव रहता है। इसी दबाव के चलते ट्रेनों को आउटर पर भी रोकना पड़ता है। कई बार मेल, आजाद हिंद एक्सप्रेस को दाधापारा रेलवे यार्ड में रोका गया है। हालांकि, यह स्थिति केवल जोनल स्टेशन में प्लेटफार्म पर जगह नहीं होने के कारण होती है। यदि कटनी रेलमार्ग की इन ट्रेनों को उसलापुर स्टेशन से रवाना किया जाता है और वापसी में इसी स्टेशन में परिचालन समाप्त किया जाता है, तो जोनल स्टेशन में काफी हद तक दबाव कम होगा। उसलापुर में अभी हो रहा है 17 ट्रेनों का ठहराव उसलापुर रेलवे स्टेशन में अभी 17 ट्रेनों का ठहराव है। इनमें आठ नियमित ट्रेनें हैं। अन्य ट्रेनें साप्ताहिक हैं। इन ट्रेनों का परिचालन शुरू होने से ट्रेनों की संख्या बढ़ जाएगी। इससे यात्री भी बढ़ जाएंगे। इसे देखते हुए ही रेल प्रशासन सुविधाओं में विस्तार कर रहा है।

डिजिलॉकर में स्टोर होगा निवेशकों के शेयर्स-म्यूचुअल फंड होल्डिंग डिटेल्स : सेबी

नई दिल्ली शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले किसी भी निवेशक के निधन के बाद उसके नाम पर मौजूद फाइनेंशियल एसेट्स के ट्रासंफर को आसान बनाने के लिए शेयर बाजार के रेगुलेटर सेबी डिजिलॉकर के इस्तेमाल करने पर जोर देने की तैयारी में है. निवेशकों के फाइनेंशियल एसेट्स डिमैट खातों जिसमें शेयर्स के साथ ही म्यूचुअल फंड में मौजूद यूनिट्स को सरकारी डिजिटल स्टरेज सिस्टम डिजिलॉकर में सुरक्षित स्टोर किया जाएगा.   DigiLocker में स्टोर होगा स्टॉक-म्यूचुअल फंड यूनिट डिटेल्स मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार के डिजिटल स्टोरेज सिस्टम डिजिलॉकर के इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया है. इस प्रस्ताव का मकसद किसी भी निवेशक के निधन होने पर उसके नाम पर मौजूदा फाइनेंशियल एसेट्स के ट्रांसफर को सरल और सुगम बनाया जा सके. निवेशक के नाम पर जो भी फाइनेंशियल एसेट्स मौजूद है वो उसके नॉमिनी या वारिस को आसानी से ट्रांसफर किया जा सके. निवेशकों के फाइनेंशियल एसेट्स में डिमैट अकाउंट्स के स्टेटमेंट जिसमें शेयर्स, डिबेंचर होते हैं. इसके अलावा म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेशकों के नाम पर यूनिट्स भी होता है. निवेशकों के इन सभी फाइनेंशियल एसेट्स में निवेश का स्टेटमेंट डिजिलॉकर में सुरक्षित स्टोर किया जाएगा. निवेशक के निधन पर नॉमिनी को करेगा नोटिफाई इस प्रस्ताव के मुताबिक निवेशक के निधन के बाद डिजिलॉकर उनके अकाउंट को अपडेट कर उन्हें नोटिफाई करेगा जिन्हें निवेशक ने अपना नॉमिनी या वारिस बनाया है जिससे वो व्यक्ति फाइनेंशियल एसेट्स को मैनेज कर सके. इस तरह जिस निवेशख का निधन हुआ है नॉमिनी उनके फाइनेंशियल एसेट्स डिटेल्स को एक्सेस कर सकेंगे और एसेट्स को ट्रांसफर कर सकेंगे. सेबी का मकसद स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड को अनक्लेम्ड एसेट्स होने से रोकना है और सही वारिस तक एसेट्स को ट्रांसफर करना है. 31 दिसंबर तक दे सकते हैं सुझाव सेबी ने अपने कंसलटेशन पेपर में ये प्रस्ताव दिया है कि है कि डिपॉजिटरीज और म्यूचुअल फंड्स डिमैट और म्यूचुअल फंड होल्डिंग स्टेटमेंट को डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराएं. ये भी प्रस्ताव दिया गया है कि केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसीज डिजिलॉकर के साथ निवेशक के निधन की सूचना को शेयर करें. डिजिलॉकर यूजर्स किसी भी व्यक्ति को अकाउंट एक्सेस करने के लिए नॉमिनेट कर सकता है. सेबी ने 31 दिसंबर, 2024 तक लोगों को इसे लेकर सुझाव मांगा है. 

वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टी20 में क्षेत्ररक्षण की खामियों को दूर करने उतरेगा भारत

नवी मुंबई. श्रृंखला के पहले मैच में 49 रन से जीत दर्ज करने के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम आज को यहां वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में क्षेत्ररक्षण की अपनी खामियों को दूर करने की कोशिश करेगी। ऑस्ट्रेलिया में अपने अंतिम एकदिवसीय मुकाबले और रविवार को यहां हुए पहले टी20 मैच के बीच कम समय के बावजूद भारत ने शानदार प्रदर्शन किया और कैरेबियाई टीम के खिलाफ टी20 मुकाबलों में अपनी जीत का सिलसिला नौ मैच तक पहुंचा दिया। क्षेत्ररक्षण हालांकि एक बार फिर टीम का कमजोर पक्ष रहा जब जेमिमा रोड्रिग्स, स्मृति मंधाना और साइमा ठाकोर ने एक-एक कैच टपकाया। साइमा ने कियाना जोसेफ (49) का कैच उस समय छोड़ा जब वह 34 रन बनाकर खेल रही थी। डिएंड्रा डॉटिन (28 गेंद में 52 रन, चार चौके, तीन छक्के) को जेमिमा और मंधाना ने जीवनदान दिए। कप्तान हरमनप्रीत की जगह क्षेत्ररक्षण के लिए उतरी मीनु मनि ने हालांकि शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने हालांकि यह नहीं बताया कि हरमनप्रीत क्यों वेस्टइंडीज की पारी के दौरान अधिकांश समय क्षेत्ररक्षण के लिए नहीं उतरीं। भारतीय कप्तान 14 गेंद में नाबाद 13 रन की अपनी पारी के दौरान हालांकि किसी भी तरह से परेशान नहीं दिखीं। भारत की जीत के तुरंत बाद कोचिंग स्टाफ ने युवा प्रिया मिश्रा, राघवी बिष्ट और नंदिनी कश्यप के साथ कैचिंग अभ्यास का एक सत्र शुरू किया लेकिन हवा ने उनके काम को मुश्किल बना दिया था। फिर भी भारत की बल्लेबाजों ने एकजुट प्रयास करके अच्छा उदाहरण पेश किया। शीर्ष पर उमा छेत्री (24) ने सलामी बल्लेबाज के रूप में अपने पहले मैच में कवर क्षेत्र में कुछ शानदार ड्राइव खेले और मंधाना ने पर्थ में तीसरे वनडे में 105 रन बनाने के बाद साल का अपना छठा अर्धशतक बनाया। लेकिन वह जेमिमा थी जिन्होंने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 35 गेंद में नौ चौकों और दो छक्कों की मदद से 73 रन बनाए जो इस प्रारूप में उनकी सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक थी। वेस्टइंडीज इस दौरे के लिए की गई तैयारियों के साथ न्याय नहीं कर पाने से निराश थी लेकिन जोसेफ, डॉटिन और करिश्मा रामहरम (18 रन पर दो विकेट) ने टीम की क्षमता को दिखाया जिसने इस साल इस प्रारूप में अपने अधिकतर मैच जीते हैं। जोसेफ और डॉटिन दोनों ने उम्दा पारियां खेलीं लेकिन वेस्टइंडीज के लिए विकेट गलत समय पर गिरे जिन्हें निश्चित रूप से गेंद से बेहतर प्रदर्शन करना होगा। मेहमान टीम ने पहले मैच में 10 वाइड फेंकी थी। टीम इस प्रकार है: भारत: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना, नंदिनी कश्यप, जेमिमा रोड्रिग्स, रिचा घोष, उमा छेत्री, दीप्ति शर्मा, सजीवन सजना, राघवी बिस्ट, रेणुका ठाकुर, प्रिया मिश्रा, टिटास साधु, साइमा ठाकोर, मीनु मनि और राधा यादव। वेस्टइंडीज: हेले मैथ्यूज (कप्तान), शेमाइन कैंपबेल, आलिया एलेन, शामिलिया कॉनेल, नेरिसा क्राफ्टन, डिएंड्रा डॉटिन, एफी फ्लेचर, शबिका गजनबी, चिनेले हेनरी, जाइदा जेम्स, कियाना जोसेफ, मैंडी मंगरू, अश्मिनी मुनिसर, करिश्मा रामहरक और राशदा विलियम्स। समय: मैच शाम सात बजे शुरू होगा।

मास्टरकार्ड ने कहा- भारत 2025 में क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था होगा

नई दिल्ली. मास्टरकार्ड इकोनॉमिक्स इंस्टीट्यूट (एमईआई) ने सोमवार को अपनी वार्षिक आर्थिक दृष्टिकोण रिपोर्ट में कहा कि मजबूत मध्यम वर्ग और निरंतर निवेश के साथ भारत के 2025 में क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान है। एमईआई की एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए रिपोर्ट में भारत को सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भी उजागर किया गया है, जिसकी अनुमानित जीडीपी वृद्धि 6.6 प्रतिशत और उपभोक्ता खर्च 2025 में 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है, “मजबूत मध्यम वर्ग और निरंतर निवेश से उत्साहित, भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच लचीला बना हुआ है और 2025 में वैश्विक विकास में शीर्ष योगदानकर्ताओं में से एक होने की संभावना है।” भारत में 25-54 आयु वर्ग की महिलाओं के बीच श्रम बल भागीदारी दर में भी शानदार वृद्धि देखी गई है, जो 2019 से 12 प्रतिशत अधिक है, जबकि इसी आयु वर्ग के पुरुषों के लिए यह 1 प्रतिशत अंक अधिक है। “द शीकोनॉमी” की वृद्धि ने भारत में महिलाओं की चक्रीय श्रम बल भागीदारी दर को 2019 के स्तर से पूरी तरह से ठीक कर दिया है। एमईआई ने 2024 में 3.1 प्रतिशत की गति के बाद 2025 में 3.2 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है। यूरोप और लैटिन अमेरिका और कैरिबियन (एलएसी) के अधिकांश हिस्सों में मामूली विस्तार के साथ अमेरिका, भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) में वृद्धि मजबूत रहने की उम्मीद है। मास्टरकार्ड के एशिया प्रशांत क्षेत्र के मुख्य अर्थशास्त्री डेविड मान ने कहा, “अगर 2024 ‘सामान्य स्थिति में वापस आने’ के बारे में था, तो 2025 सामान्यीकरण के बारे में है क्योंकि अस्थिरता कम हो जाएगी और मौद्रिक नीति को आसान बनाने से उपभोक्ताओं को आर्थिक विकास से लाभ मिल सकेगा। हालांकि, जापान में संभावित ब्याज दर वृद्धि या अमेरिकी टैरिफ जैसे नीतिगत निर्णय इस वृद्धि को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं। मान ने कहा कि संभावित व्यापार से जुड़े व्यवधानों के लिए तैयारी करते समय व्यवसायों को उपभोक्ता आशावाद का लाभ उठाना चाहिए। रिपोर्ट ने एशिया प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं के लिए रिमिटैंस की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला, जिसमें टॉप पांच प्राप्तकर्ता देशों में से चार इस क्षेत्र में हैं, जिसमें भारत भी शामिल है। जापान निरंतर मुद्रास्फीति अस्थिरता और येन ऐतिहासिक निम्नतम स्तर पर होने के साथ एक अद्वितीय आर्थिक वातावरण का सामना कर रहा है, जो चल रहे पर्यटन उछाल और उच्च-स्तरीय लक्जरी वस्तुओं पर खर्च में योगदान दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और सिंगापुर, जिन्होंने क्षेत्र के बाकी हिस्सों की तुलना में मजबूत मुद्रास्फीति के झटके का अनुभव किया है, उन्हें राहत मिलने की संभावना है क्योंकि स्तर लगभग 2-3 प्रतिशत तक गिर जाएगा और केंद्रीय बैंक अपनी संबंधित मौद्रिक नीतियों को आसान बना देंगे। मान ने आगे कहा, “व्यक्तिगत सरकारों की नीतियों का 2025 में काफी प्रभाव पड़ सकता है।”

इलेक्ट्रिक बाइक चार्ज करते समय शोरूम में लगी आग, लाखों का सामना जलकर खाक

Fire breaks out in showroom while charging electric bike, lakhs face burning to ashes दमोह-जबलपुर स्टेट हाईवे पर देहात थाना क्षेत्र के जबलपुर नाका इलाके में संचालित इलेक्ट्रिक बाइक के शोरूम में सोमवार की रात बाइक चार्ज करते समय शोरूम में आग लग गई। कुछ ही देर में आग ने पूरे शोरूम को लपेटे में ले लिया, जिसमें करीब 10 लोगों की बाइक जल गई और दुकानदार का 10 से 15 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद आग को बुझाया गया। इस दौरान जबलपुर नाका इलाके में काफी देर अफरा तफरी का माहौल बना रहा। शोरूम संचालक नरेंद्र राठौर के बड़े भाई महेंद्र राठौर ने बताया कि जबलपुर नाका पर मंडपेश्वर ई- बाइक के नाम से उनके छोटे भाई का शोरूम संचालित होता है।सोमवार की रात एक ई-बाइक चार्जिंग पर लगाई गई थी, जिसे चार्ज पर लगाते ही उसमें से चिंगारी निकली और बैटरी में विस्फोट हो गया। जिसके बाद आजू-बाजू खड़ी अन्य बाइक में आग लग गई। आग लगते ही शोरूम के अंदर मौजूद कर्मचारी जान बचाकर बाहर भागे और कुछ ही देर में पूरे शोरूम को आग ने चपेट में ले लिया। पड़ोसी दुकानदार ने तत्काल फायर ब्रिगेड और जबलपुर नाका चौकी पुलिस को सूचना दी। फाइर बिग्रेड मौके पर पहुंची और आग को बुझाया। पीड़ित के अनुसार दो इलेक्ट्रिक पूर्ण रूप से जल चुकी है, इसके अलावा 10 बाइक आगजनी में झुलस गई है। साथ ही शोरूम भी जलकर खाक हो गया, जिसमें करीब 10 से 15 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। सीएसपी अभिषेक तिवारी ने बताया कि सूचना मिलने के बाद फायर ब्रिगेड और पुलिस मौके पर पहुंच गई थी।

शिवनाथ नदी में दूषित पानी छोड़ने का मामले में हाईकोर्ट कोर्ट ने टीम बनाकर निगरानी के दिए निर्देश

 बिलासपुर बिलासपुर हाईकोर्ट में शिवनाथ नदी में शराब फैक्ट्री के वेस्ट मटेरियल को छोड़ने और जल प्रदूषण के मामले में लगातार सुनवाई जारी है. जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच के समक्ष पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट पेश की. सुनवाई में रिपोर्ट पेश कर बताया गया कि प्रदूषण कम हुआ है. जिस पर कोर्ट ने टीम बनाकर निगरानी करने निर्देशित किया है. अब मामले में 3 फरवरी, 2025 को अगली सुनवाई होगी. पूरा मामला मुंगेली जिले धूमा स्थित भाटिया वाइन फैक्ट्री का है. फैक्ट्री के वेस्ट मटेरियल और दूषित पानी को नियमों का उल्लंघन करते हुए शिवनाथ नदी में छोड़ा जा रहा था। जिससे लाखों मछलियां मर गई. हाईकोर्ट ने इस पर मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाकर जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई शुरू की. बिलासपुर हाईकोर्ट ने 23 सितंबर 2024 को मामले में दूषित पानी के स्त्रोत की पहचान का आदेश दिया था. जिसके बाद 23 अक्टूबर 2024 को केस में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि दूषित पानी कहां से बह रहा है, इसका पता नहीं लगाया जा सकता है. हालांकि नदी में पानी की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है. कोर्ट ने इसे देखते हुए 16 दिसंबर, 2024 को आगे की निगरानी के लिए फिर से सूचीबद्ध किया था। जिसमें पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 21 नवंबर और 4 दिसंबर को जांच कर रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें पानी का स्तर सामान्य पाया गया। वहीं कोर्ट ने पानी की स्थिति पर टीम बनाकर निगरानी करने निर्देशित दिया है. बता दें कि धूमा के पास शिवनाथ नदी में मछलियां मरी हुई मिली थी. शराब फैक्ट्री के अपशिष्ट से दूषित पानी छोड़ने से मौत की आशंका जताई गई. कुछ महीने पहले पथरिया एसडीएम भरोसा राम ठाकुर ने भाटिया शराब फैक्ट्री मर्चेंट के प्रबधंक को नोटिस जारी किया था. एसडीएम ने शराब फैक्ट्री के दूषित पानी को नदी में छोड़ने से जलीय जीव जंतु के खतरे को लेकर आशंका जताई थी.

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