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मुख्यमंत्री डॉ. यादव को नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत अनुबंध होने पर जनप्रतिनिधियों ने दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना के लिए मंगलवार को जयपुर में हुए अनुबंध पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जनप्रतिनिधियों ने बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पार्वती-कालीसिंध-चंबल और केन-बेतवा परियोजनाओं के अनुबंध होने पर मिष्ठान खिलाकर बधाई दी गई। नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट कर कहा कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना के क्रियान्वयन से संपूर्ण मालवा क्षेत्र का तीव्र विकास संभव होगा। जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कहा कि केन-बेतवा परियोजना के शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आगामी 25 दिसम्बर को मध्यप्रदेश आगमन एक शुभ अवसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट करने वालों में विधायक गोलू शुक्ला, रूद्राक्ष शुक्ला, मानसिंह यादव, मिलिंद मालवीय आदि शामिल थे।  

1 जनवरी 2025 से आईटीसी डिमर्जर होगा प्रभावी, जल्द होगा कंपनी की लिस्टिंग

नई दिल्ली Maurya Sheraton के नाम से होटल कारोबार चलाने वाली आईटीसी (ITC) के होटल बिजनेस की नए साल 2025 में लिस्टिंग का रास्ता साफ हो गया है. एक जनवरी 2025 से आईटीसी लिमिटेड की होटल कारोबार से जुड़ी कंपनी आईटीसी होटल्स का डिमर्जर हो जाएगा. कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों के साथ इस जानकारी को साझा किया है. स्टॉक एक्सचेंज के पास रेगुलेटरी फाइलिंग में आईटीसी ने बताया कि आईटीसी होटल्स का डिमर्जर 1 जनवरी 2025 से प्रभावी हो जाएगा. रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया गया कि आईटीसी लिमिटेड और आईटीसी होटल्स लिमिटेड ने डिमर्जर के लिए आपसी सहमति के साथ सभी जरूरी शर्तों को पूरा कर लिया है. कंपनी ने बताया कि उसे एनसीएलएटी के कोलकाता बेंच से 4 अक्टूबर 2024 को आईटीसी लिमिटेड से आईटीसी होटल्स के डिमर्जर की मंजूरी मिल चुकी है. आईटीसी लिमिटेड से होटल कारोबार से जुड़ी कंपनी आईटीसी होटल्स के डिमर्जर के फैसले पर शेयरधारकों ने अपनी मुहर लगा दी है. आईटीसी को 16 दिसंबर 2024 को NCLT से कॉपी मिल चुका है. आईटीसी ने होटल बिजनेस को अलग करने का ऐलान अगस्त, 2023 में किया था. इसके साथ ही डीमर्जर के बाद आईटीसी के शेयरधारकों को होटल बिजनेस कंपनी के शेयर दिए जाएंगे. ITC होटल्स के शेयर मिलेंगे ITC शेयरहोल्डर्स को इस डीमर्जर स्कीम के तहत सिगरेट से लेकर कई तरह के प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी आईटीसी की आईटीसी होटल्स (ITC Hotels) में 40 फीसदी हिस्सेदारी होगी. आईटीसी होटल्स में 60 फीसदी हिस्सेदारी आईटीसी के शेयरहोल्डर्स को दी जाएगी. इसका फैसला  इस तरह से आईटीसी के शेयरधारकों की आईटीसी होटल्स में भी हिस्सेदारी होगी. बीते वर्ष 14 अगस्त 2023 को कंपनी के बोर्ड की बैठक हुई थी जिसमें स्कीम ऑफ अरेंजमेंट को मंजूरी दी थी जिसमें ये तय किया गया कि आईटीसी के हर शेयरधारकों को पैरेंट कंपनी में 10 शेयर के बदले में होटल्स बिजनेस से जुड़ी कंपनी आईटीसी होटल्स का एक शेयर दिया जाएगा. डिमर्जर के बाद स्टॉक एक्सचेंजों से मंजूरी मिलने पर आईटीसी होटल्स की स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग होगी.

विधायक को विधानसभा में बोलने से रोका तो मौन धरने पर बैठे, गले में शराब की बोतल पहनकर पहुंचे विधायक

When the MLA was stopped from speaking in the Assembly, he sat on a silent dharna, the MLA arrived wearing a liquor bottle around his neck. विधानसभा में शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन है। बाप पार्टी से विधायक कमलेश्वर डोडियार मौन धारण की मुद्रा में दिखाई दिए। कमलेश्वर डोडियार पीला कपड़ पलेटकर और मुंह को कागज से बंद करके मौन धारण करकरे बैठे गए। डोडियार का कहना है कि उन्हें विधानसभा में बोलने नहीं दिया जा रहा है। इसलिए वे विधानसभा के बाहर मौन धारण करके बैठे है। वहीं उज्जैन से कांग्रेस विधायक महेश परमार अनोखा प्रदर्शन करते हुए दिखाई दिए। कांग्रेस विधायक महेश परमार गले में शराब की बोतलों की माला पहनकर विधानसभा पहुंचे। डॉक्टर पर गाली देने का आरोप विधायक कमलेश्वर डोडियार को रतलाम के बंजली में आंदोलन करने से पहले गिरफ्तार कर लिया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें और उनके समर्थकों को चौथे दिन जमानत मिल गई थी। पुलिस ने डोडियार समेत 14 लोगों को हिरासत में लिया गया था। कमलेश्वर डोडियार ने जेल से रिहा होने के बाद जिला अस्पताल के एक डॉक्टर पर आरोप लगाते हुए कहा थ कि 5 दिसंबर को अस्पताल के डॉक्टर ने मुझे गालियां दी थी, मुझे अपमानित किया था, इसी को लेकर पूरा आदिवासी समाज रतलाम में आंदोलन करने जा रहा था। हमने आंदोलन से पहले डॉक्टर के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन डॉक्टर को सस्पेंड नहीं किया गया। हम 11 दिसंबर को आंदोलन करने वाले थे। हम शांतिपूर्वक आंदोलन करने वाले थे, लेकिन सरकार ने तानाशाही तरीके से मुझे 11 तारीख को गिरफ्तार कर लिया गया। मुझे और मेरे समर्थकों को ेस4 दिनों तक जेल में रखा गया। जिससे आदिवासी समाज में रोष है। डोडियार ने आगे कहा था कि में विधानसभा में मामले में अपनी बात रखूंगा। कांग्रेस विधायक का शराब घोटाले को लेकर प्रदर्शन उज्जैन से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने विधानसभा में शराब की बोतलों की माला पहनकर प्रदर्शन करते हुए कहा है कि प्रदेश में शराब के घोटाले चल रहे है। प्रदेश में दिल्ली से भी बड़े धोटाले हो रहे है, लेकिन सरकार सो रही है। हर जिले में करोड़ों के शराब घोटाले हो रहे है। कांग्रेस के इस अनोखे प्रदर्शन को लेकर बीजेपी ने कहा है कि सदन में इस तरह से शराब की बोतले ले जाना उचित नहीं है। सदन में जहां गांधी जी की प्रतिमा लगी है वहां शराब की बोतलों की माला पहनकर कांग्रेस जा रहे है। कांग्रेस विधायकों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

कोई भी स्कूल परिवहन (बस) फीस भी अब अलग से नहीं ले सकेगा, निजी स्कूलों के लिए फीस वृद्धि पर नया नियम लागू

भोपाल राज्य सरकार प्रदेश के निजी स्कूलों को बड़ी राहत देने जा रही है। अब ऐसे स्कूल जिनकी किसी भी कक्षा के लिए वार्षिक फीस 25 हजार रुपये से कम है, वे फीस नियंत्रण अधिनियम के दायरे में नहीं आएंगे। यदि ऐसे स्कूल 15 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि करते हैं तो इसके लिए पहले जिला समिति से अनुमति लेनी होगी। ऐसा नहीं करने पर अधिनियम के प्रविधान के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वाहन शुल्क वार्षिक फीस में होगा शामिल कोई भी स्कूल परिवहन (बस) फीस भी अब अलग से नहीं ले सकेगा। इसे भी वार्षिक फीस का ही भाग माना जाएगा। सरकार ने यह प्रविधान मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 में संशोधन के लिए प्रस्तुत विधेयक में किए हैं। सदन से विधेयक पारित होने के बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अनुमति मिलने पर प्रविधान प्रभावी होंगे। प्रदेश के आधे स्कूलों में वार्षिक फीस 25 हजार से कम प्रदेश में 34,652 निजी स्कूल हैं। इनमें से लगभग 16 हजार ऐसे हैं, जिनकी किसी भी कक्षा में वार्षिक फीस 25 हजार रुपये या इससे कम है। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2017 के तहत वर्ष 2020 में नियम बनाए गए। इसके प्रविधान अनुसार सरकार को यह अधिकार दिया गया कि वह निजी स्कूलों की फीस और अन्य विषयों पर निर्णय लेकर फीस विनियमन कर सकेगी। 10 फीसदी तक बिना अनुमति के बढ़ाई जा सकती है फीस 10 प्रतिशत वार्षिक फीस बिना अनुमति के बढ़ाई जा सकती है लेकिन अधिक वृद्धि के लिए जिला समिति की अनुमति लेना आवश्यक है। स्कूल 25 हजार रुपये तक फीस लेने वाले स्कूलों को शिक्षकों के वेतन सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन में परेशानी होती है। 25 हजार रुपये वार्षिक फीस वाले स्कूलों को छूट यदि दस प्रतिशत वृद्धि करते हैं तो अभिभावकों पर अधिक भार नहीं पड़ता है, इसलिए नई उपधारा प्रस्तावित की गई है कि 25 हजार रुपये वार्षिक फीस लेने वाले स्कूल अधिनियम के दायरे से बाहर रहेंगे। इसके साथ ही यह प्रविधान भी किया जा रहा है कि परिवहन फीस स्कूलों की वार्षिक फीस का भाग होगा। अभी स्कूल इसे वार्षिक फीस से अलग लेते हैं और इसमें वृद्धि भी अधिक होती है। इससे वार्षिक फीस नियंत्रित रहेगी। फीस बढ़ाने की शिकायत सुनने बनेगी समिति फीस बढ़ाने पर आपत्ति की अपील सुनने मंत्री की अध्यक्षता में समिति अधिनियम में यह संशोधन भी प्रस्तावित किया गया है कि वार्षिक फीस में 15 प्रतिशत से अधिक वृद्धि के आदेश के विरुद्ध अपील सुनने के लिए राज्य स्तरीय समिति होगी। इसके अध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री रहेंगे।

अब रूस जाने के लिए नहीं पड़ेगी वीजा की जरूरत, पुतिन जल्द करेंगे घोषणा

नई दिल्ली भारतीय पर्यटकों के लिए एक अच्छी खबर है. भारत के लोग जल्द ही बिना वीजा के रूस घूम सकते हैं. भारत और रूस के बीच 2025 में इसे लेकर एक सिस्टम विकसित होने की संभावना है. अब कुछ ही समय बाद भारतीयों को रूस जाने के लिए टूरिस्ट वीजा की आवश्यकता नहीं होगी. इससे पहले रूस ने भारतीयों के लिए अगस्त 2023 से ई-वीजा की शुरुआत की थी जिसकी प्रक्रिया पूरे होने में लगभग 4 दिन लगते हैं. हालांकि, अब नई वीजा-फ्री व्यवस्था से भारतीयों के लिए रूस की यात्रा और भी सरल हो जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल रूस ने जितने ई-वीजा जारी किए, उसमें भारत टॉप पांच देशों में शामिल था. रूस ने भारतीयों को 9,500 ई-वीजा दिए. बिना वीजा के रूस जा सकेंगे भारतीय रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत ग्रुप टूरिस्ट एक्सचेंज के लिए वीजा नियमों को आसान बनाने की प्रक्रिया जून 2023 में शुरू हुई थी. रूस के आर्थिक विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी, निकिता कोंद्रात्येव ने कहा, “भारत इस समझौते को अंतिम रूप देने के अंतिम चरण में है.” माना जा रहा है कि यह समझौता साल के अंत तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद भारतीय नागरिक बिना वीजा के रूस की यात्रा कर सकेंगे. रूस में भारतीय यात्रियों की बढ़ती संख्या हाल के वर्षों में रूस जाने वाले भारतीय यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है. 2023 में, रूस ने भारतीय यात्रियों को 9,500 ई-वीजा जारी किए, जो कुल ई-वीजा का 6% था. 2024 की पहली छमाही में, 28,500 भारतीय यात्रियों ने मॉस्को का दौरा किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.5 गुना अधिक है. 2023 में, 60,000 से अधिक भारतीयों ने रूस की यात्रा की, जो 2022 की तुलना में 26% अधिक है. मॉस्को सिटी टूरिज्म कमेटी के चेयरमैन, एवगेनी कोज़लोव ने बताया, “2023 की पहली तिमाही में, भारत गैर-CIS देशों के व्यापार पर्यटकों में तीसरे स्थान पर था.” मॉस्को के अधिकारियों का मानना है कि भारत रूस के लिए एक प्राथमिक बाजार है, क्योंकि दोनों देशों के बीच मजबूत और ऐतिहासिक संबंध हैं. रूस और भारत के बीच गहरी ऐतिहासिक और कूटनीतिक मित्रता रही है. नई वीजा-फ्री नीति से न केवल पर्यटन बल्कि व्यापारिक संबंधों को भी बल मिलेगा. 58 देशों में भारतीयों की वीजा फ्री एंट्री वर्तमान में भारतीय पासपोर्टधारियों को 58 देशों में वीजा फ्री एंट्री का अधिकार हासिल है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 में भारत का पासपोर्ट 83वें स्थान पर है जिसकी मदद से भारतीय थाईलैंड, इंडोनेशिया, मालदीव, श्रीलंका , मोरिशियस और कतर जैसे ट्रैवल डेस्टिनेशन्स पर बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं.

IRCTC Super App: रेलवे जल्द लॉन्च करेगा सुपर ऐप, यूजर्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर हर तरह की सुविधाएं मिलेगी

इंदौर भारतीय रेलवे ‘IRCTC Super App’ नाम से एक ऐप लेकर आ रही है, जिससे यात्रियों का अनुभव बहुत ही शानदार हो जाएगा। इस एक ऐप में टिकट बुकिंग, कारगो बुकिंग, फूड ऑर्डर सहित कई सुविधाएं मिल जाएंगी। सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम (CRIS) के साथ पार्टनरशिप में IRCTC ने ये ऐप बनाई है। इस ऐप का उद्देश्य यूजर्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर हर तरह की सुविधाएं देना है, जिससे उनको परेशानी न उठानी पड़े। पहले यूजर्स को हर चीज के लिए अलग-अलग ऐप में जाना पड़ता था, जिससे उनको मानसिक तनाव होता था।   सुपर ऐप के ये हैं फीचर्स सुपर ऐप के जरिए IRCTC के अलग-अलग ऐप से मिलने वाली सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर जाएंगी। आप इस ऐप के जरिए ट्रेन टिकट को खरीदना, प्लेटफॉर्म पास लेना, टिकट रिजर्व और अनरिजर्व सहित कई चीजें कर सकते हैं। इस ऐप की मदद से ये काम जल्दी हो जाएंगे। आपको लाइन में लगकर भीड़ का सामना नहीं करना पड़ेगा। IRCTC Rail Connect, UTS, Rail Madad और दूसरे प्लेटफॉर्म पर आपको जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रिजर्व टिकट बुकिंग सिस्टम करता रहेगा काम रेलवे ने अपनी सेवाओं को डिजिटल रूप से और अधिक सुगम बनाने के लिए एक नया सुपर ऐप लॉन्च किया है। इस ऐप के जरिए यात्री अपनी बुकिंग और अन्य सेवाओं का फायदा एक ही लॉगिन से उठा सकेंगे। यह ऐप यात्रा को और आरामदायक बनाने में मदद करेगा। भारतीय रेलवे के IT विभाग, CRIS द्वारा विकसित किए गए इस ऐप का उद्देश्य रेलवे सेवाओं को और अधिक सरल और सुविधाजनक बनाना है। हालांकि, इस ऐप के लॉन्च के बाद भी IRCTC का मौजूदा रिजर्व टिकट बुकिंग सिस्टम पहले की तरह काम करता रहेगा। यात्रियों के लिए यह ऐप एक बड़ा लाभ साबित होगा, जो रेलवे यात्रा को और अधिक सहज बनाएगा।

छत्तीसगढ़ में वाहन मालिकों के लिए परिवहन विभाग ने शुरू की योजना, घर बैठे लगवाएं हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट

रायपुर वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के लिए वाहन मालिकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्हें यहां-वहां भटकने की कतई जरूरत नहीं है। वे घर बैठे कंपनी के कर्मचारियों को बुलाकर नंबर प्लेट लगवा सकते हैं। यह नई सुविधा परिवहन विभाग ने शुरू की है, ताकि वाहन मालिकों को इधर-उधर भटकना न पड़े। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेशभर में अब वाहन मालिक अपनी गाड़ियों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के लिए दो अधिकृत वेंडरों के कर्मचारियों को सुविधा के अनुसार अपने घर बुला सकते हैं। यह योजना एक अप्रैल 2019 से पहले रजिस्टर्ड वाहनों पर लागू की गई है। नंबर प्लेट लगाने के लिए विभाग ने मेसर्स रियल मेजान इंडिया लिमिटेड और मेसर्स रास्मेर्टा सेफ्टी सिस्टम लिमिटेड को अधिकृत वेंडर नियुक्त किया है। वे विभाग द्वारा निर्धारित दरों पर ही नंबर प्लेट लगाएंगे। घर पहुंच सेवा का शुल्क अलग से लगेगा साथ ही परिवहन दफ्तरों को अलग-अलग जोन में बांटा गया है, ताकि लोग नंबर प्लेट लगवा सकें। अधिकारियों ने बताया कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के लिए परिवहन विभाग की वेबसाइट cgtransport.gov.in पर लॉग इन करना होगा। ऑनलाइन बुकिंग के लिए, डिजिटल मोड का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। हर इंस्टालेशन के लिए 100 रुपये का अतिरिक्त शुल्क देना होगा। घर पहुंच सेवा के लिए भी अतिरिक्त शुल्क लगेगा। एचएसआरपी नंबर प्लेट लगवाने के लिए ध्यान रखना होगा कि रजिस्ट्रेशन के साथ वाहन मालिक का मोबाइल नंबर वाहन पोर्टल पर दर्ज होना चाहिए। अगर नंबर दर्ज नहीं है तो पहले नंबर दर्ज कराना होगा। पोर्टल में नंबर होने पर रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ गाड़ी का चेसिस नंबर भी डालना होगा। इसके बाद, मोबाइल से वेरिफिकेशन होगा। 2019 से पुराने वाहनों की बदलेंगे नंबर प्लेट प्रदेश में वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाना अनिवार्य किया है। अतिरिक्त परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने वेंडरों को कहा है कि अब सभी वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगाना ही होगा। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का खर्च     365 रुपये दोपहिया के लिए     427 रुपये तीनपहिया के लिए     656 रुपये चारपहिया के लिए     705 रुपये भारी वाहनों के लिए नंबर प्लेट की खासियत इसमें एक यूनिक कोड होता है, जिसमें उस गाड़ी से जुड़ी सभी जानकारी होती है। इसे निकाला नहीं जा सकता। इसमें दो नंबर प्लेट और तीसरा नंबर प्लेट भी होता है, जो विंड सीट में लगता है। जनरेटिव एआई की सुविधा फिलहाल एक्सपेरिमेंट के तौर पर उपलब्ध है।

सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर मकर राशि में होगा सूर्यनारायण का प्रवेश

उज्जैन सूर्य के उत्तरायण का पर्व मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, जब सूर्य का प्रवेश दिन में हो या सुबह सूर्योदय के तीन मुहूर्त के आसपास हो, तो मकर संक्रांति का अनुक्रम बनता है। धर्मशास्त्र की इसी मान्यता के अनुसार, 14 तारीख को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। मोक्षदायिनी शिप्रा में पर्व स्नान होगा। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया, सूर्य के राशि परिवर्तन को सूर्य की संक्रांति कहा जाता है। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। सूर्य की मकर संक्रांति शुभ     सूर्य सिद्धांत की मान्यता के अनुसार, 14 जनवरी मंगलवार को पुनर्वसु नक्षत्र, विषकुंभ योग एवं बालव करण तथा कर्क राशि के चंद्रमा की साक्षी में सूर्य देवता का धनु राशि को छोड़कर के मकर राशि में प्रवेश करेंगे।     मकर राशि में प्रवेश होते ही सूर्य की मकर संक्रांति कहलाएगी। यह समय सुबह 7.59 पर होगा। सूर्य के मकर में प्रवेश करते ही खरमास का समापन होगा तथा उत्तरायण का पक्ष आरंभ हो जाएगा।     मांगलिक कार्य आरंभ होंगे। मकर संक्रांति का पर्व काल होने से यह स्नान, दान, तर्पण, पितरों के निमित्त श्रद्धा व्यक्त करने का दिवस है। इस दिन अन्नदान, वस्त्रदान करने का विशेष महत्व है।     तांबा, चांदी अथवा सोने के कलश में काले तिल भरकर के दान करने का महत्व भी बताया गया है। इस दिन जल में काले तिल डालकर स्नान करने से गरीबी दूर होती है तथा रोग, दोष समाप्त होते हैं। व्यापार में उतार चढ़ाव, भारत लाए जा सकते हैं वन्यप्राणी शास्त्रीय गणना व सूर्य सिद्धांत में संक्रांति के शुभ अशुभ फल में वाहन का विशेष महत्व होता है। इस बार संक्रांति का वाहन व्याघ्र तथा उप वाहन अश्व रहेगा। व्याघ्र पर सवार होकर आ रही संक्रांति वन्य प्राणियों के लिए विशेष प्रभावी रहेगी। इससे बाघ व कूनों में चीतों की संख्या में वृद्धि होगी। अन्य देशों से नए वन्यप्राणी भारत लाए जा सकते हैं। प्राणियों के जीवन पर कुछ संकट की स्थिति भी बन सकती है।

2024 का साल खास तौर पर लोकसभा चुनाव, विपक्षी एकजुटता, राज्यों में राजनीतिक बदलाव भरा रहा

नई दिल्ली 2024 का साल भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलावों और घटनाओं से भरा रहा। यह साल खास तौर पर लोकसभा चुनाव, विपक्षी एकजुटता, राज्यों में राजनीतिक बदलाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए चुनौतियों का साल रहा। आइए, 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम पर एक नजर डालते हैं। 1. लोकसभा चुनाव 2024: मोदी की तीसरी बार वापसी 2024 में भारत में हुए लोकसभा चुनाव ने भारतीय राजनीति में एक बार फिर से बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में लौटाया। बीजेपी ने अपने चुनावी प्रचार में विकास, सुरक्षा और कड़े प्रशासनिक उपायों को प्रमुख मुद्दा बनाया। नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीसरी बार शानदार जीत दर्ज की, लेकिन इस बार मुकाबला पहले से कहीं कठिन था। विपक्षी गठबंधन ने बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ा। इस गठबंधन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, समाजवादी पार्टी, और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल थे। हालांकि, बीजेपी ने बहुमत से सत्ता में वापसी की, लेकिन कुछ राज्यों में विपक्ष ने अच्छा प्रदर्शन किया। खासकर दक्षिण भारत, पश्चिम बंगाल, और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बीजेपी को कड़ी टक्कर मिली। इसने दिखा दिया कि भारतीय राजनीति में अब क्षेत्रीय दलों की ताकत लगातार बढ़ रही है और भविष्य में ये दल राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं। 2. विपक्ष का एकजुट होना 2024 का साल विपक्ष के लिए अहम था, क्योंकि विभिन्न विपक्षी दलों ने मिलकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला। ‘INDIA’ गठबंधन के तहत कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ा। हालांकि, यह गठबंधन अपनी पूरी ताकत के साथ चुनाव में सफलता हासिल नहीं कर सका, लेकिन यह विपक्ष के लिए एक नया रास्ता दिखाने का काम किया। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बीजेपी को रोकना था, लेकिन कई राज्यों में विपक्ष के बीच आंतरिक मतभेद और नेतृत्व को लेकर समस्याएं सामने आईं। इसके बावजूद, विपक्ष का एकजुट होना यह दर्शाता है कि भविष्य में बीजेपी को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों को एक साथ आना होगा। 3. राज्य चुनावों में बदलाव 2024 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें बीजेपी और विपक्ष दोनों के लिए बड़े बदलाव देखने को मिले। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, और तेलंगाना में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया और बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने सत्ता बरकरार रखी, जबकि मध्यप्रदेश और तेलंगाना में बीजेपी को अपनी ताकत साबित करनी पड़ी। इन चुनावों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी अहम रही, जैसे कि तेलंगाना में केसीआर (कांग्रेस नेता) और बंगाल में ममता बनर्जी ने अपनी पकड़ मजबूत बनाई। इन चुनावों ने यह साबित किया कि भारतीय राजनीति में राज्य स्तर पर क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और राष्ट्रीय राजनीति में उनका रोल भी महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, यह दिखाता है कि बीजेपी को राज्यों में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए लगातार कड़ी मेहनत करनी होगी। 4. कृषि और किसान आंदोलनों का असर 2024 में कृषि और किसान आंदोलनों का भी बड़ा राजनीतिक प्रभाव रहा। किसान विरोधी कानूनों को लेकर 2020 में शुरू हुआ आंदोलन अब भी पूरी तरह से समाप्त नहीं हो पाया था। हालांकि, 2024 में सरकार ने किसानों के लिए कुछ राहत के कदम उठाए, लेकिन किसानों के मुद्दे और उनके अधिकारों को लेकर विवाद जारी रहा। किसानों का आंदोलन और उनके समर्थन में विपक्षी दलों ने इसे अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया। इसने न सिर्फ सरकार को चुनौती दी, बल्कि यह भी साबित किया कि किसानों और ग्रामीण इलाकों के मुद्दे राजनीति में अहम बन चुके हैं। 5. राष्ट्रीय सुरक्षा: विदेश नीति की दिशा 2024 में भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति भी प्रमुख मुद्दा बने। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में कई अहम कदम उठाए, जैसे कि पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा विवाद पर कड़े रुख अपनाना। चीन के साथ सीमा पर तनाव और पाकिस्तान से संबंध जैसे मुद्दों ने राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कूटनीतिक तरीके से कई बार इन दोनों देशों से अपने रिश्तों को सुधारने की कोशिश की, लेकिन सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण रही। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत ने अपनी स्थिति मजबूत की और अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ रिश्तों को और प्रगाढ़ किया। 2024 में G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। 6. समाजवादी और क्षेत्रीय दलों की बढ़ती ताकत 2024 में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला, वह था क्षेत्रीय दलों और समाजवादी दलों की बढ़ती ताकत। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव की टीआरएस, और उत्तर-पूर्वी राज्यों में विभिन्न क्षेत्रीय दलों ने भारतीय राजनीति में अपनी महत्वपूर्ण जगह बनाई। इन दलों ने न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज की और अब उनका राष्ट्रीय निर्णयों पर असर होता है। इन दलों ने यह साबित किया कि राष्ट्रीय चुनावों में उनकी भूमिका और ताकत दिन-ब-दिन बढ़ रही है। 7. सवर्ण और पिछड़ा वर्ग के बीच टकराव 2024 में भारत में समाजिक न्याय और आरक्षण को लेकर भी राजनीति गरमाई। कई राज्य सरकारों ने सवर्ण और पिछड़े वर्गों के बीच आरक्षण की नीति को लेकर विवादों को जन्म दिया। बीजेपी सरकार ने सवर्णों के लिए आरक्षण बढ़ाने की योजना बनाई, वहीं विपक्ष ने इसे गरीबों के हक में न होने की आलोचना की। इन सामाजिक मुद्दों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राजनीतिक बहसें छेड़ीं, जिससे राजनीतिक दलों के बीच खींचतान बनी रही। 2024 भारतीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण साल था, जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सत्ता बरकरार रखी, लेकिन विपक्षी दलों ने भी अपनी चुनौती पेश की। राज्य चुनावों, किसान आंदोलनों, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों ने राजनीति को नया मोड़ दिया। यह साल यह दिखाता है कि भारतीय राजनीति अब केवल दो प्रमुख दलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि क्षेत्रीय और समाजवादी दल भी राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 2024 ने यह साबित किया कि भारतीय राजनीति में भविष्य में और अधिक बदलाव और संघर्ष देखने को मिल सकता है।  

अब आरआरबी की ओर से आरपीएफ एसआई भर्ती परीक्षा के लिए आंसर की जारी, 22 दिसंबर तक आपत्ति दर्ज करने का मौका

नई दिल्ली रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB) की ओर से आरपीएफ सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा का आयोजन 2, 3, 9, 12 और 13 दिसंबर को 2024 को देशभर में निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर करवाया गया था। एग्जाम संपन्न होने के बाद अब आरआरबी की ओर से प्रोविजनल आंसर की डाउनलोड के लिए उपलब्ध करवा दी गई है। परीक्षार्थी तुरंत ही ऑफिशियल वेबसाइट rrbcdg.gov.in पर जाकर या इस पेज पर दिए गए डायरेक्ट लिंक पर क्लिक करके उत्तर कुंजी डाउनलोड कर सकते हैं। आंसर की डाउनलोड करने के लिए आपको लॉग इन डिटेल दर्ज करनी होगी। 22 दिसंबर तक ऑब्जेक्शन दर्ज करने का मौका आंसर की द्वारा अभ्यर्थी अपने सभी प्रश्न उत्तरों का मिलान अच्छे से कर लें। इस दौरान अगर वे इसमें दिए किसी उत्तर से संतुष्ट नहीं हैं तो वे 22 दिसंबर 2024 रात्रि 12 बजे तक उस पर ऑब्जेक्शन दर्ज कर सकते हैं। अभ्यर्थी ध्यान रखें कि ऑब्जेक्शन दर्ज करने के लिए आपको 50 रुपये प्रति प्रश्न का भुगतान करना होगा। कैसे डाउनलोड करें आंसर की आरपीएफ एसआई एग्जाम सिटी स्लिप डाउनलोड करने के लिए आपको पहले आधिकारिक वेबसाइट rrbcdg.gov.in पर जाना होगा। वेबसाइट के होम पेज पर एसआई CEN RPF 01/2024 पर क्लिक करें। अब अभ्यर्थी आंसर की के लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद मांगी गई डिटेल दर्ज करके सबमिट करें। अब आप आंसर की डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही आप यहीं से आपत्ति भी दर्ज कर सकते हैं।  

शिक्षा के मंदिर में फूहड़ डांस, छात्राएं बीच में सिक्योरिटी गार्ड को कुर्सी पर बैठाकर मुन्नी बदनाम हुई गाने पर नाच रही

इंदौर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के खंडवा रोड कैंपस स्थित स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में छात्राओं के डांस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। छात्राएं बीच में सिक्योरिटी गार्ड को कुर्सी पर बैठाकर मुन्नी बदनाम हुई गाने पर नाच रही हैं। दरअसल, सोशल मीडिया में खंडवा रोड कैंपस स्थित स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में छात्राएं फूहड़ डांस कर रही हैं। वहीं पीछे से छात्र उनका वीडियो बना रहे हैं। डांस के जज कोई ओर नहीं बल्कि सिक्योरिटी गार्ड को बनाया गया है। जो कुर्सी पर बैठाकर छात्राओं का डांस देख रहे हैं। बताया जा रहा है कि, सीनियर छात्र छात्राओं द्वारा जूनियर छात्राओं को नचाया जा रहा है। जिसमें सीनियर छात्राएं गाना गा रही हैं तो जूनियर छात्राएं उस पर फूहड़ डांस कर रही। छात्राओं की हरकत और डांस से कुर्सी पर बैठा बुजुर्ग सिक्योरिटी गार्ड शर्मसार होते हुए नजर आ रहा है। वीडियो वायरल होने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि, कॉलेज के जिम्मेदारों को मामले की जानकारी तक नहीं है। इसी बीच पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि, विश्वविद्यालय में फूहड़ता बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। माता-पिता अपने बच्चों को संस्कार और संस्कृति की शिक्षा दें। महाविद्यालयों में अश्लीलता पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मध्य प्रदेश में टीबी का कहर, राजधानी में सबसे ज्यादा मरीज, देखें आंकड़े

TB havoc in Madhya Pradesh, highest number of patients in the capital, see figures स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में अभियान चलाकर सालभर में 1.66 लाख मरीजों की पहचान की है। सबसे ज्यादा 11768 मरीज भोपाल में मिले हैं। इसके बाद इंदौर और फिर छतरपुर का नंबर है। सबसे कम 608 मरीज निवाड़ी जिले में मिले हैं। सतना जिला 4680 मरीजों के साथ प्रदेश में 10वें पायदान पर है। हालांकि विभाग प्रदेश में लक्ष्य के मुकाबले 88 फीसदी मरीजों की ही पहचान कर सका है। अभियान के तहत जिलों में आबादी के अनुसार जनवरी से दिसंबर 2024 तक मरीजों(TB cases in MP) को तलाशने का लक्ष्य दिया गया था। दो जिलों में शत-प्रतिशत प्रदेश में 1.90 लाख टीबी मरीजों(TB cases in MP) को तलाशने का लक्ष्य था, जिसमें से विभाग 1.66 लाख मरीजों की पहचान कर सका है। प्रदेश में लक्ष्य के मुकाबले अभी 12 फीसदी मरीजों तक महकमा नहीं पहुंच सका है। प्रदेश के सिर्फ दो जिले शिवपुरी में 110 प्रतिशत, बुरहानपुर में 109 प्रतिशत टीबी मरीज की पहचान की जा चुकी है।

मध्यप्रदेश: मंडल अध्यक्षों के नाम को लेकर विरोध के सुर, नियम के विरुद्ध दोबारा मंडल अध्यक्ष बनाने का आरोप

शहडोल आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले में एक ओर जहां भाजपा मंडल अध्यक्षों के नाम की घोषणा के बाद खुशी का माहौल है. वहीं दूसरी ओर कुछ मंडल अध्यक्षों के नाम को लेकर विरोध बिगुल भी बजने लगे हैं. पपौंध मंडल में दोबारा उसी मंडल अध्यक्ष के नाम को लेकर जमकर विरोध हो रहा है.भ्रष्टाचार को बढ़ावा और नियमाविरुद्ध मंडल अध्यक्ष बनाने को लेकर विरोध कर रहे हैं. शहडोल जिले में 19 मंडल अध्यक्षों में से 16 के नाम की घोषणा हो चुकी है. तीन मंडल के मंडल अध्यक्ष सोहागपुर, बुढ़ार और ब्यौहारी के मंडल अध्यक्षों के नाम की घोषणा होना अभी बाकी है. मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर क्षेत्रीय कार्यकर्ता और लोगों में उत्साह है. लेकिन पपौंध मंडल अध्यक्ष श्यामपाल तिवारी की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं. सुमित पांडे, प्रभाकर मिश्रा, संतोष मिश्रा, मुकुंद राम कोल और क्षेत्र के लोगों ने दोबारा मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति पर भाजपा संगठन पर सवाल उठाए हैं.   उन्होंने बताया कि भाजपा की गाइडलाइन को नजरअंदाज करते हुए मंडल अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया. जबकि गाइडलाइन जारी की गई थी कि 2019 से 24 तक बने दो कार्यकाल से बने मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं किया जाना था. बावजूद इसके नियुक्ति किया गया और रायसुमारी की बैठक निश्चित दिनांक के एक दिन पहले ही कराया गया. सभी ने आरोप लगाया कि अगर गाइडलाइन का पालन नहीं करना था तो जारी क्यों की गई. फिलहाल, अब देखना है कि भाजपा संगठन क्या कार्यकर्ताओं की सुनेगी या विरोध को नजरअंदाज किया करेगी.   बता दें कि सीधी मंडल से संजय गुप्ता, करकी से शिव शंकर पटेल त्यागी, पपौंध से श्याम लाल तिवारी, मऊ से सचिन सिंह, बाण सागर से वीरेंद्र वैश्य, जयसिंहनगर से जयश्री कचेर, शहडोल नगर से प्रियम त्रिपाठी, चुहरी से राजीव तिवारी, सिंहपुर से राकेश कुशवाहा, गोहपारू से राम नारायण मिश्रा, धनपुरी से भोला पनिका, बकहो से धर्मेंद्र दुबे, खैराहा से विपुल सिंह, केशवाही से शुभम प्रिंस त्रिपाठी, जैतपुर से सचिन सेठिया के नाम की घोषणा की गई है. जबकि अभी भी जिले के तीन मंडल के मंडल अध्यक्ष सोहागपुर, बुढ़ार और ब्यौहारी के मंडल अध्यक्षों के नाम की घोषणा होना अभी बाकी है.

कांस्य स्तर का कॉन्टिनेंटल टूर एथलेटिक्स इवेंट भुवनेश्वर में होगा, इवेंट की मेजबानी करेगा भारत

नई दिल्ली भारत अगले साल 10 अगस्त को पहली बार विश्व एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर स्तर के आयोजन की मेजबानी करेगा। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) ने उक्त जानकारी दी। एएफआई के 2025 सीज़न के प्रतिस्पर्धी कैलेंडर के अनुसार, कांस्य स्तर का कॉन्टिनेंटल टूर एथलेटिक्स इवेंट भुवनेश्वर में होगा। इस मीट को ‘इंडियन ओपन’ नाम दिया गया है। कॉन्टिनेंटल टूर ट्रैक और फील्ड प्रतियोगिताओं की एक वार्षिक श्रृंखला है, जो कि एलीट-लेवल डायमंड लीग के बाद वैश्विक बैठकों के दूसरे स्तर के अंतर्गत आती है। इसे 2020 में वर्ल्ड चैलेंज सीरीज़ के उत्तराधिकारी के रूप में लॉन्च किया गया था और इसमें चार स्तर, स्वर्ण, रजत, कांस्य और चैलेंजर शामिल हैं। ओलंपिक डॉट कॉम के अनुसार, एएफआई के अध्यक्ष आदिल सुमारिवाला ने कहा, कॉन्टिनेंटल टूर भारतीय टीम के लिए सितंबर में होने वाली विश्व चैंपियनशिप से पहले घरेलू मैदान पर अपनी क्षमता दिखाने का एक अच्छा अवसर होगा। टोक्यो में 13-21 सितंबर तक आयोजित होने वाली विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 अगले साल की शीर्ष एथलेटिक्स प्रतियोगिता होगी। पिछली बार भारत ने इस तरह के अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स आयोजन की मेजबानी 2017 में की थी, जब भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप आयोजित की गई थी। भारत ने पुणे में बालेवाड़ी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 2013 एशियाई चैंपियनशिप की भी मेजबानी की थी। हरियाणा में 21 से 24 अप्रैल तक आयोजित होने वाला सीनियर नेशनल फेडरेशन कप मई में दक्षिण कोरिया में होने वाली एशियाई एथलेटिक चैंपियनशिप के लिए क्वालीफिकेशन इवेंट होगा। भारत का 2025 घरेलू एथलेटिक्स सत्र 12 जनवरी से उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय क्रॉस-कंट्री चैंपियनशिप, फरवरी में राष्ट्रीय अंतर-जिला एथलेटिक्स मीट और मार्च में आयोजित होने वाली इंडियन ओपन थ्रो और जंप प्रतियोगिताओं के साथ शुरू होगा। सुमरिवाला ने कहा, एएफआई ने अगले साल से क्षेत्रीय प्रतियोगिता भी शुरू की है, ताकि हाशिये पर मौजूद एथलीटों को अधिक अवसर मिल सके। क्षेत्रीय प्रतियोगिताएं अप्रैल में शुरू होंगी।  

बीजेपी को फरवरी के अंत तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है, राज्यों की इकाई में भी होगा बड़ा बदलाव

नई दिल्ली बीजेपी को फरवरी के अंत तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक जनवरी के मध्य तक आधे राज्यों में चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्यों में भी 60 फीसदी इकाई अध्यक्षों के कार्यकाल पूरे होने वाले हैं। अगले महीने के मध्य तक नए अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। बता दें कि जेपी नड्डा 2020 से ही बीजेपी अध्यक्ष हैं। इसके अलावा वह केंद्र में स्वास्थ्य मंत्री भी हैं। एक सीनियर नेता ने कहा, फरवरी के अंत तक बीजेपी के नए अध्यक्ष पद ग्रहण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नए अध्यक्ष सरकार से भी हो सकते हैं और संगठन से भी हो सकते हैं। इसपर कोई अंतिम फैसला नहीं किया गया है। आम तौर पर बीजेपी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का ही होता है। हालांकि 2024 के आम चुनाव को देखते हुए जेपी नड्डा का कार्यकाल बढ़ा दिया गया था। आम चुनाव के बाद बीजेपी की वापसी भी हो गई। बीजेपी में अध्यक्ष पद को लेकर मंथन लंबे समय से चल रहा है। अगस्त में भी इसको लेकर मंथन किया गया था लेकिन उस समय महाराष्ट्र, झारखंड और जम्मू-कश्मीर, हरियाणा के चुनाव करीब थे। ऐसे में यथास्थिति बनाए रखने का ही फैसला किया गया। 2014 में केंद्र में पूर्ण बहुमत से मोदी सरकार बनने के बाद अमित शाह को तीन साल के लिए पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। पार्टी के संविधान मुताबिक उसी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है जो कि कम से कम 15 साल से पार्टी का सदस्य हो। इससे पहले 2010 से 2013 तक संगठन की कमान नितिन गडकरी के पास थी। राजनाथ सिंह 2005 से 2009 तक और फिर 2013 से 14 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। 2014 से 2020 तक अमित शाह ने बीजेपी की कमान संभाली।

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