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पुलिस प्रशासन ने जूना अखाड़े पंहुचकर तंबू आदि उखड़वा दिए और अखाड़ा परिसर में इस संबंध में नोटिस चस्पा किया

हरिद्वार बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचारों के विरूद्ध श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े में गुरुवार से प्रस्तावित विश्व धर्म संसद के आयोजन को पुलिस ने रूकवा दिया है। तीन दिवसीय आयोजन की जूना अखाड़ा परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। हालांकि, जिला प्रशासन ने विश्व धर्म संसद के आयोजन की अनुमति नहीं दी थी। पुलिस ने अखाड़ा परिसर में चस्पा कर दिया नोटिस पुलिस प्रशासन ने सुबह जूना अखाड़े पंहुचकर वहां लगे तंबू आदि उखड़वा दिए और अखाड़ा परिसर में इस संबंध में नोटिस चस्पा कर दिया। प्रशासन की कार्रवाई के बाद दबाव में आते हुए आयोजकों ने धर्म संसद को स्थगित कर दिया। इक्कीस दिसंबर तक होने वाली धर्म संसद का आयोजन जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर और गाजियाबाद के डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद गिरी द्वारा किया जा रहा था। यति नरसिंहानंद करीब दो वर्ष पहले भी हरिद्वार मे आयोजित धर्म संसद में घृणा भाषण मामले में जेल जा चुके ह । बाद में यति नरसिंहानन्द ने कहा, ‘‘बांग्लादेश में जिस तरह से हिंदुओं का नरसंहार हो रहा है, पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं और कश्मीर से हिंदुओं को हटा दिया गया, उसकी भविष्य में पुनरावृत्ति न हो और भारत इस्लामी जिहाद का शिकार न बन जाए, इस पर चर्चा के लिए धर्म संसद का आयोजन किया गया था।” उन्होंने कहा कि वह जिला प्रशासन द्वारा अनुमति न देने के कारण यह धर्म संसद स्थगित कर रहे हैं। हरिद्वार से उच्चतम न्यायालय तक करेंगे पैदल यात्रा- नरसिंहानंद यति नरसिंहानंद ने घोषणा की कि इसके विरोध में अब वह हरिद्वार से उच्चतम न्यायालय तक पैदल यात्रा करेंगे और वहां अपनी गुहार लगाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस्लाम के बारे में जो बात कही है, अगर वह गलत है तो उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई कोई भी सजा मैं भुगतने को तैयार हूं। दो वर्ष पूर्व भी यति नरसिंहानंद द्वारा हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में कथित घृणा भाषण को लेकर देश भर में उनकी आलोचना हुई थी जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। एक दिन पूर्व बुधवार को भी धर्म संसद के आयोजन की अनुमति न मिलने पर यति नरसिंहानंद गिरी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपने खून से पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि हिंदू राष्ट्र की बात करते-करते हिन्दू इस देश में दोयम दर्जे का नागरिक बन गया है। पत्र में उन्होंने लिखा था कि वह और उनके कुछ साथी बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं के नृशंस नरसंहार से व्यथित होकर उनकी पीड़ा को दुनिया भर तक पहुंचाने के लिए माया देवी मंदिर श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े में विश्व धर्म संसद का आयोजन कर रहे हैं और उनका यह आयोजन किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं बल्कि जूना अखाड़े के मुख्यालय पर हो रहा है। उन्होंने लिखा, ‘‘यह भीड़ एकत्रित करके शक्ति प्रदर्शन करने का कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है बल्कि सीमित संख्या में संतों और प्रबुद्ध नागरिकों का एक छोटा सा सम्मेलन है। मंदिर के अंदर होने वाले ऐसे किसी कार्यक्रम के लिए कोई अनुमति की आवश्यकता नहीं है। परन्तु हरिद्वार के प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी शायद हम हिंदुओ को दोयम दर्जे का नागरिक मानते हैं और हम पर इसके लिए अनुमति मांगने का दबाव बना रहे हैं।” पत्र में उन्होंने कहा, ‘‘क्या अब हिंदुओ को अपने धर्म बंधुओं की नृशंस हत्याओं पर रोने के लिए भी सरकार की अनुमति की जरूरत पड़ेगी।”  

डंकी रूट पर ताले की तैयारी, भारतीयों की मुश्किलें बढ़ी, अमेरिका में प्रवेश के लिए मेक्सिको सीमा का उपयोग अब होगा बंद

वाशिंगटन अमेरिकी सपने को साकार करने की चाह में हजारों भारतीय हर साल खतरनाक और गैरकानूनी ‘डंकी रूट’ के जरिए अमेरिका पहुंचने की कोशिश करते हैं। यह रास्ता उन्हें कनाडा के दुर्गम जंगलों और जोखिमभरी सीमा से होते हुए अमेरिका तक ले जाता है। लेकिन अब यह मुश्किल यात्रा जल्द ही असंभव हो सकती है। अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में पद संभालने से पहले कनाडा को चेतावनी दी है कि यदि उसने गैरकानूनी प्रवास और नशीले पदार्थों की तस्करी पर सख्त कदम नहीं उठाए तो 25% आयात शुल्क लगाया जाएगा। इस चेतावनी के बाद कनाडा ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए $900 मिलियन की योजना का ऐलान किया है। गिर रहा है डंकी रूट का भरोसा गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में प्रवेश के लिए दक्षिणी सीमा यानी अमेरिका-मेक्सिको सीमा का उपयोग लंबे समय से होता आ रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में उत्तर की ओर कनाडा की सीमा पर बढ़ते दबाव के कारण वहां भी गैरकानूनी गतिविधियां बढ़ने लगी थीं। कनाडा और अमेरिका के बीच आसान रास्ता मानकर हजारों प्रवासी, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों की है, इस ‘डंकी रूट’ का उपयोग कर रहे थे। 2023 में करीब 30,000 भारतीयों ने इस रास्ते से अमेरिका में प्रवेश की कोशिश की, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 43,000 तक पहुंच गया। कनाडा की सख्ती, भारतीयों की मुश्किलें डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने का ऐलान किया है। अब ड्रोन, हेलीकॉप्टर, और स्निफर डॉग्स की मदद से सीमा पर हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है। कनाडा की नई नीति न केवल ‘डंकी रूट’ को बंद कर देगी बल्कि प्रवासियों की जोखिमभरी यात्रा के विकल्प भी खत्म कर देगी। यह कदम उन भारतीय परिवारों के लिए बड़ा झटका है जो अपनी पूरी जमा पूंजी बेचकर अमेरिका में बेहतर जीवन की तलाश में निकलते हैं। खतरों से भरी डंकी रूट की यात्रा यह यात्रा न केवल महंगी बल्कि बेहद खतरनाक भी है। मानव तस्कर एक व्यक्ति से 40-80 लाख रुपये तक लेते हैं। प्रवासी अक्सर जंगली इलाकों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और कड़ी जलवायु का सामना करते हैं। 2022 में पटेल परिवार की ठंड से मौत हो जाने जैसी घटनाएं इन खतरों को उजागर करती हैं। कनाडा की नई सख्त नीतियां और अमेरिका की कड़ी निगरानी के बीच, यह स्पष्ट है कि डंकी रूट अब ‘अमेरिकी सपने’ को पूरा करने का आसान विकल्प नहीं रहेगा।

जान बचाने के लिए 14 करोड़ की जरूरत, इलाज का खर्च उठाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में 11 महीने की बच्ची की गुहार

नई दिल्ली भावुक याचिका दायर की गई है, जिसमें 11 महीने की एक बच्ची के इलाज के लिए 14 करोड़ रुपये की आवश्यकता की बात की गई है। बच्ची स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी (SMA) नामक एक दुर्लभ और खतरनाक बीमारी से जूझ रही है, जो अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो 24 महीने की उम्र तक जानलेवा हो सकती है। इस बीमारी में बच्चों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है और शरीर के अन्य अंगों का कार्य प्रभावित होता है। इस गंभीर स्थिति में बच्ची को बचाने के लिए उसकी मां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी (SMA) क्या है? स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी (SMA) एक जीन से संबंधित बीमारी है, जिसमें मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका कोशिकाओं में कमी आ जाती है। इससे मांसपेशियों की ताकत घटने लगती है और धीरे-धीरे मांसपेशियां कार्य करना बंद कर देती हैं। SMA के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनमें से सबसे गंभीर प्रकार में बच्चे की मौत 2 साल की उम्र से पहले हो सकती है। इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में **ज़ोलजेंस्मा** नामक एक इंजेक्शन को इस बीमारी के इलाज के लिए मंजूरी दी गई है, जो बेहद महंगा है और इसका असर बच्चे की स्थिति को स्थिर करने और मांसपेशियों को फिर से सक्रिय करने में मदद करता है। क्या है याचिका में मांग? याचिका में बच्ची की मां ने सुप्रीम कोर्ट से यह अपील की है कि उनकी बच्ची को इलाज के लिए ज़ोलजेंस्मा इंजेक्शन की तत्काल आवश्यकता है, जिसकी कीमत 14 करोड़ 20 लाख रुपये है। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने इस इंजेक्शन के लिए यही राशि निर्धारित की है, जो एक सामान्य परिवार के लिए जुटाना नामुमकिन है। याचिका में बताया गया है कि इस इंजेक्शन के बिना बच्ची की जान को गंभीर खतरा है, और समय की कमी के कारण किसी प्रकार की देरी से उसकी जान जा सकती है। क्या कहती है बच्ची के परिवार की स्थिति? याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि बच्ची के पिता भारतीय वायुसेना में एक नॉन-कमीशंड अधिकारी हैं। वायुसेना में सैनिकों और उनके आश्रितों के इलाज के लिए एक प्रावधान है, लेकिन दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता में इस बीमारी का इलाज शामिल नहीं है। इस कारण से बच्ची के परिवार को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। सैनिकों के बीच क्राउड फंडिंग (आपसी चंदे से राशि जुटाने) के लिए उच्च अधिकारियों ने अनुमति देने से मना कर दिया। याचिकाकर्ता ने उदाहरण देते हुए बताया कि बीकानेर में एक अन्य बच्चे के इलाज के लिए, जो इसी बीमारी से पीड़ित था, उसके शिक्षक पिता ने विभाग से कर्मचारियों के वेतन से कुछ राशि काटने की अनुमति ली थी, ताकि इलाज के लिए आवश्यक राशि जुटाई जा सके। लेकिन वायुसेना के अधिकारियों ने इस तरह की पहल को अस्वीकार कर दिया और सैनिकों को किसी प्रकार का संदेश भेजने की अनुमति भी नहीं दी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मांगी? याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह केंद्र सरकार को आदेश दे कि वह बच्ची के इलाज का खर्च उठाए। साथ ही, उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि कोर्ट रक्षा मंत्रालय और वायुसेना प्रमुख को निर्देश दे कि वे सैनिकों को क्राउड फंडिंग के लिए संदेश भेजने की अनुमति दें, ताकि बच्ची का इलाज संभव हो सके। याचिकाकर्ता ने यह भी अपील की है कि केंद्र सरकार ज़ोलजेंस्मा इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए, ताकि इलाज में कोई देरी न हो। याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून की नज़र में समानता) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का हवाला भी दिया गया है, जिसमें यह कहा गया है कि अगर समय रहते इलाज नहीं किया गया, तो बच्ची की जान को खतरा हो सकता है, और उसे इस दुर्लभ बीमारी से बचाने के लिए त्वरित कदम उठाए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह आग्रह किया है कि वह इस मामले में तुरंत दखल दे और बच्ची को जीवन बचाने का अधिकार दिलवाए। सुप्रीम कोर्ट का संभावित कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर त्वरित सुनवाई की आवश्यकता जताई और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि वह इस गंभीर स्थिति में बच्ची के इलाज के लिए कैसे मदद करेगा। इस मामले में अदालत का निर्णय बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह न केवल एक बच्चे की जिंदगी से जुड़ा है, बल्कि यह देश के स्वास्थ्य और अधिकारों के बुनियादी सिद्धांतों को भी चुनौती देता है। भारत में दुर्लभ बीमारियों का इलाज और उसकी लागत इस मामले से एक बार फिर यह तथ्य सामने आया है कि भारत में दुर्लभ बीमारियों का इलाज अत्यधिक महंगा है, और सरकारी योजनाओं के तहत ऐसी बीमारियों के इलाज के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान नहीं किया गया है। ज़ोलजेंस्मा इंजेक्शन की कीमत इतनी अधिक है कि इसे एक सामान्य परिवार के लिए वहन करना संभव नहीं है। यह मुद्दा यह भी उजागर करता है कि सरकारी संस्थाओं और स्वास्थ्य मंत्रालयों को इस तरह की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कुछ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। साथ ही, यह भी साबित करता है कि ऐसे मामलों में क्राउड फंडिंग जैसी मदद से इलाज के खर्च को पूरा करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सरकारी समर्थन का अभाव महसूस किया जा रहा है। 

प्रदेश में जनजातीय विकास के लिये सामाजिक, आर्थिक प्रगति की लिखी जा रही नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में जनजातीय विकास के लिये सामाजिक और आर्थिक प्रगति की नई इबारत लिखी जा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा जनजातीय वर्ग के उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों से राज्य में जनजातीय समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आर्थिक जीवन में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार के सतत् प्रयासों से यहाँ के जनजातीय समुदाय अब प्रगति की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह विकास न केवल राज्य के लिए बल्कि देश के लिए भी एक प्रेरणा है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) के जरिए प्रदेश की तीन विशेष पिछड़े जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के समग्र विकास एवं कल्याण के लिए अभूतपूर्व काम हो रहा है। मध्यप्रदेश पीएम जन-मन के क्रियान्वयन में देश में अव्वल स्थान पर है। ड्रॉप-आउट में कमी और रोजगार में वृद्धि राज्य में शिक्षा संबंधी प्रोत्साहन योजनाओं के प्रभाव से जनजातीय विद्यार्थियों की साक्षरता दर 51 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। उच्च शिक्षा के लिए शत-प्रतिशत छात्रवृत्ति मिलने से छात्रों के ड्रॉप-आउट में उल्लेखनीय कमी आई है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थानों में जनजातीय छात्रों की भागीदारी में वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही सरकार के प्रयासों से अब युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। स्वरोजगार और ऋण योजनाओं का लाभ सरकार द्वारा चलाई जा रही स्वरोजगार और आर्थिक कल्याण योजनाओं से जनजातीय हितग्राहियों को बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराए गए हैं। इससे वे विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर बेहतर जीवन यापन कर रहे हैं, माध्यम से वे अपने रोजगार सफलतापूर्वक चला रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। वन अधिकार अधिनियम से मिला भूमि का अधिकार वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन से लगभग 2 लाख 75 हजार जनजातीय परिवारों को उनकी जमीनों पर अधिकार प्रदान किया गया है। इससे उन्हें अपनी भूमि पर खेती करने और जीवन स्तर को सुधारने का मौका मिला है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान जनजातीय अनुसंधान और विकास संस्थान द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले जनजातीय सेनानियों की वीर गाथाओं को संरक्षित करने के लिए म्यूजियम बनाए गए हैं। यह पहल न केवल उनके बलिदान को सम्मानित करती है, बल्कि युवा पीढ़ी को प्रेरित भी करती है। साहूकारों से मिली आजादी मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति साहूकार विनियम 1972 को 2021 में संशोधित कर लागू किया गया, जिससे जनजातीय समुदाय को गैरकानूनी साहूकारों के शोषण से मुक्ति मिली है। आधुनिक सुविधाओं का विस्तार जनजातीय क्षेत्रों में कृषि, सिंचाई, विद्युत, सड़क, और संचार सुविधाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जिससे इन क्षेत्रों का विकास तीव्र गति से हो रहा है।  

भारत मोबाइल बनाने के मामले में आत्मनिर्भर , चौंका देगा ये आंकड़ा; मंत्री जितिन प्रसाद ने दिया जवाब

नई दिल्ली मोबाइल फोन का इस्तेमाल वर्तमान समय में हर कोई रहा है। भारत जैसी बड़ी जनसंख्या वाले देश में ये आंकड़ा काफी अधिक है। मगर दिलचस्प बात ये है कि भारतमोबाइल यूज करने के साथ-साथ इसका उत्पादन करने में भी आगे है। जी हां, भारत ने मोबाइल हैंडसेट निर्माण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, देश में इस्तेमाल होने वाले लगभग 99% डिवाइस घरेलू स्तर पर बनाए जा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने संसद के साथ यह जानकारी साझा की, कि पिछले एक दशक में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में काफी वृद्धि देखी गई है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन मूल्य वित्त वर्ष 2014-15 में 1,90,366 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 9,52,000 करोड़ रुपये हो गया। यह 17% से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्शाता है। देश मोबाइल फोन के प्रमुख आयातक से निर्यातक बन गया है। मोबाइल विनिर्माण और निर्यात वृद्धि वित्त वर्ष 2014-15 में, भारत में बेचे गए लगभग 74% मोबाइल फोन आयात किए गए थे। अब, भारत अपने 99.2% मोबाइल हैंडसेट घरेलू स्तर पर बनाता है। यह बदलाव इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत की बढ़ती क्षमताओं और मोबाइल निर्यातक देश के रूप में इसके उभरने को दर्शाता है। प्रसाद ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 25 लाख नौकरियां पैदा की हैं। इस वृद्धि का श्रेय उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी पहलों को जाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में पैदा हुईं 25 लाख नौकरियां वित्त वर्ष 2014-15 में भारत में बिकने वाले लगभग 74% मोबाइल फोन आयात किए गए थे। वहीं, अब भारत अपने 99.2% मोबाइल हैंडसेट घरेलू स्तर पर बनाता है। यह बदलाव इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग में भारत की बढ़ती क्षमताओं के साथ ही मोबाइल एक्सपोर्टर देश के रूप में इसके उभरने को दिखाता है। जितिन प्रसाद ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 25 लाख नौकरियां पैदा की हैं। इस वृद्धि का श्रेय उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई विभिन्न सरकारी पहलों को जाता है। मोबाइल फोन के इम्पोर्टर से एक्सपोर्टर बना भारत भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन मूल्य वित्त वर्ष 2014-15 में 1,90,366 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 9,52,000 करोड़ रुपये हो गया। यह 17% से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) को दिखाता है। देश मोबाइल फोन के प्रमुख आयातक से निर्यातक बन गया है। 76 हजार करोड़ की लागत से शुरू हुआ ‘सेमीकॉन इंडिया’ सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य देश के भीतर सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम डेवलप करना है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी हार्डवेयर मैन्यूफैक्चरिंग को समर्थन देने के लिए अन्य योजनाएं भी हैं। प्रोडक्शन लिंक्ड इनीशिएटिव स्कीम (PLI) और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स व सेमीकंडक्टर्स की मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की योजना (SPECS) इन्हीं कोशिशों में से एक है। इस तरह की तमाम पहलों का उद्देश्य ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में भारत की प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना है। हालांकि, ग्लोबल प्लेयर्स के साथ क्वालिटी और प्राइसिंग कॉम्पिटीशन कई चुनौतियां भी पेश करता है। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहल सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य देश के भीतर सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। इसके अतिरिक्त, बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी हार्डवेयर विनिर्माण का समर्थन करने के लिए अन्य योजनाएं भी हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत की प्रगति पर चर्चा करते हुए प्रसाद ने इन मुद्दों पर प्रकाश डाला। इन चुनौतियों का समाधान विकास को बनाए रखने और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।

लोक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए ‘SocialEpidemiology’ का प्रयोग बहुत जरूरी है: डॉ प्रशांत केशरवानी

भोपाल अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, भोपाल के तत्वाधान में  शंकरदयाल आयुर्वेद कॉलेज,भोपालके परिसर में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यलय, भोपाल में पब्लिक हेल्थ विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक श्री  प्रशांत केसरवानी जी ने ‘SocialEpidemiology’ विषयपर व्याख्यान दिया।  एस व्याख्यानश्रृंखला के प्रभारी राजीव शर्मा ने बताया की  आज का सेमीनार अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय,भोपाल द्वारा शुरू की गयी व्याख्यानश्रृंखलाके अन्तेर्गत था । आगामी महीनों में अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, भोपाल ऐसे अन्य विषयों और मुद्दों पर मध्य प्रदेश के समस्त जिला मुख्यालयों पर व्याख्यान आयोजित करेगा। शंकरदयाल आयुर्वेद कॉलेज,के सेमिनार हाल में सम्पन्न हुए इस व्याख्यान में आयुर्वेद, नर्सिंग और एडुकेशन के 200 से आधिक छात्र-छात्राओं ने भागीदारी की। श्री प्रशांत केशरवानीने उन्हें भविष्य के हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स के तौर पर स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं को सामाजिक-आर्थिक, राजनैतिक और तकनीति के तौर पर समझने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि –“स्वास्थ्य के सामाजिक पहलुओं को नज़रअंदाज़ करके इसकी मूल समस्याओं को नहीं समझा जा सकता। लोगो को स्वस्थ्य रखना एक सतत प्रक्रिया है और इस सतत प्रक्रिया के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण कारक है वो ये जानना कि समाज के किस तबके को स्वास्थ्य को लेकर किस तरह की जरूरतें है। क्या ऐसी कोई बीमारी है जो किसी समुदाय या किसी क्षेत्र विशेष में ज्यादा बढ़ गयी है या समाज का कोई ऐसा वर्ग है,  जहां पर मृत्यु दर बहुत ज्यादा है। साथ ही साथ इस वर्ग विशेष के पास किस तरह के स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध है। क्या ये सुविधाएं काफी है, या फिर इनमें कुछ सुधार की गुंजाइश है। ऐसे क्या सामाजिक और दूसरे कारक हैं, जो किसी समुदाय को ज्यादा बीमार कर रहे है। इस तरह के कई प्रश्नों के उत्तर SocialEpidemiology बेहतर तरीके से देती है। SocialEpidemiology ना सिर्फ व्यक्ति, स्थान और स्थल (Person,Place,andTime) के बीच के संबंधों को बेहतर तरीके से देखती है, अपितु वो इन सम्बन्धों की व्याख्या सामाजिक कारकों के साथ मिल जुल के देती है। SocialEpidemiology प्राथमिकता तय करने में भी काफी मददगार साबित होती है, खासकर कब, कहाँ, किसे, किस तरह कि स्वास्थ्य सेवाओं किअधिक  जरूरत है।   छात्र-छात्राओं के साथ हुए सवाल-जबाव के दौरान श्री प्रशांत केशरवानी ने समाज में व्याप्त तमाम मिथ और भ्रम को वैज्ञानिक नज़रिये से देखने और समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित किया। इस व्याख्यान में करीब 200 छात्र -छात्राओं के अलावा कॉलेज के प्राध्यापकों ने भी शिरकत की।  

सुशासन सप्ताह अंतर्गत जिला पंचायत सभागार में जल संवाद कार्यक्रम का किया गया आयोजन

सिंगरौली सिंगरौली जिले में स्थापित जल शक्ति केंद्र के माध्यम से जल संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देने एवं जन जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से सुशासन सप्ताह अंतर्गत जिला श्री चंद्र शेखर शुक्ला के निर्देशन एवं  जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गजेंद्र सिंह के मार्गदर्शन से जिले में जन भागीदारी से जल संरक्षण हेतु जल संवाद कार्यक्रम का आयोजन जिला पंचायत सभागार में किया गया। जल संवाद कार्यक्रम में सिंगरौली जिले के अंतर्गत जल के विभिन्न आयामों ,चुनौतियों, सभी को स्वच्छ जल की उपलब्धता के साथ सतत जल प्रबंधन और संरक्षण में समाज के सभी वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु सिंगरौली जिले में उपलब्ध नदी, नाला ,तालाब तथा जिले की भौगोलिक स्थिति एवं वर्षा जल की जानकारी देते हुए वर्षा जल को विभिन्न प्रकार से संरक्षित करने की तकनीक एवं उपाय के बारे में चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में जल प्रबंधन के साथ-साथ जल संरक्षण संरचनाओं जैसे कंटूर ट्रेंच, गली प्लग, ग्रेवियन, पर्कॉयलेशन टैंक, रिचार्ज पिट , वृक्षारोपण कार्य का रीज टू वैली सिद्धांत पर कार्य किये जाने के महत्व को साझा किया गया। इस दौरान मनरेगा, जल निगम,  पी.एच.ई, जन अभियान परिषद,  सीएफपी के जीआईएस एवं एनआरएम विशेषज्ञ के साथ-साथ अन्य विभागों द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों योगदान से अवगत कराया गया।      जल संवाद के दौरान जिले के विभिन्न ग्राम पंचायत से आए सरपंचों ने जल संरक्षण के क्षेत्र में उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों को साझा किया जिनमें से जल संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले ग्राम पंचायत गडहरा, आमो , पूर्वा और उर्ती के सरपंचों को साल एवं श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।जल संवाद कार्यक्रम से एक ओर जहां जन समुदाय को जन भागीदारी से जल संरक्षण करने की प्रेरणा मिल रही है वहीं दूसरी ओर लोगों का यह मानना है कि जल संवाद कार्यक्रम निश्चित ही आने वाले  समय मे सिंगरौली जिले में जल संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु क्रांति के रूप में परिलक्षित होगा और इसी भावना के साथ उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने जल संरक्षण हेतु जल शपथ भी लिया।  जल संवाद कार्यक्रम में जिला पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती अर्चना सिंह, जिला पंचायत सदस्य यशोदा पनिका, सविता प्रजापति, संदीप शाह, अशोक सिंह पैगाम, श्रीमती सत्यवती सिंह, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुराग मोदी, लेखा अधिकारी प्रियंका सिंह, जल निगम के महा प्रबंधक पंकज वाधवानी, जन अभियान के जिला समन्यवयक राजकुमार विश्वकर्मा, आजीविका मिशन प्रबंधक मंगलेश्वर सिंह, अवनीश पाठक सहित ग्राम पंचायतो के सरपंच गण उपस्थित रहे।

राहुल गांधी ने अपनी सफाई में कहा- बीजेपी के लोग हमें अंदर जाने से रोक रहे थे

नई दिल्ली गुरुवार को संसद परिसर में एक बड़ा विवाद हुआ, जिसमें दोनों प्रमुख दलों बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बन गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी के सांसदों ने उनके नेताओं के साथ धक्का-मुक्की की, जबकि बीजेपी ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी पर धक्का देने का आरोप लगाया। बीजेपी के लोग हमें अंदर जाने से रोक रहे थे- राहुल गांधी राहुल गांधी ने अपनी सफाई में कहा कि जब वह और उनके साथी संसद के मकर द्वार से अंदर जा रहे थे, तब बीजेपी के सांसदों ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने कहा, “बीजेपी के लोग हमें अंदर जाने से रोक रहे थे और इस दौरान धक्का-मुक्की हुई। कुछ लोग गिर भी गए।” राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी संविधान पर हमला कर रही है और अंबेडकर का अपमान कर रही है। उन्होंने कहा, “मुख्य मुद्दा यह है कि ये लोग संविधान पर हमला कर रहे हैं।” खरगे जी के साथ धक्का-मुक्की की राहुल ने आगे कहा कि मकर द्वार पर बीजेपी के सांसदों ने उन्हें और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे नेताओं को रोकने की कोशिश की और उनके साथ धक्का-मुक्की की। उन्होंने कहा कि कैमरे में सब कुछ रिकॉर्ड हो गया है और बीजेपी सांसद उन्हें संसद में जाने से रोक नहीं सकते हैं। राहुल गांधी ने धक्का दिया- प्रताप सारंगी वहीं, बीजेपी सांसद प्रताप चंद्र सारंगी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने एक सांसद को धक्का दिया, जिससे वह सांसद गिरकर उनके ऊपर आ गिरा और उनके सिर में चोट लग गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया और बीजेपी के नेता उन्हें देखने पहुंचे। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने भी कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के साथ भी धक्का-मुक्की हुई थी और यह सब कैमरे में रिकॉर्ड हो गया है। विपक्षी सांसद संसद में निकाल रहे थे प्रोटेस्ट मार्च इस विवाद के बीच, इंडिया ब्लॉक के सांसद संसद में प्रोटेस्ट मार्च निकाल रहे थे। यह मार्च बीते दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के खिलाफ निकाला जा रहा था। शाह ने बीआर आंबेडकर को लेकर कुछ टिप्पणी की थी, जिसे विपक्ष ने आंबेडकर का अपमान करार दिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने शाह के इस्तीफे और माफी की मांग की है। विरोध के दौरान इंडिया ब्लॉक के नेता आंबेडकर की प्रतिमा से लेकर मकर द्वार तक मार्च कर रहे थे। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अमित शाह ने जानबूझकर आंबेडकर का अपमान किया और उनका यह अपराध माफ नहीं किया जा सकता। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी पूरे तंत्र के जरिए शाह को बचाने में लगी है, जबकि वे माफी मांगने के बजाय धमकियां दे रहे हैं।

संसद परिसर विवाद मामले में किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और राहुल गांधी के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए

नई दिल्ली संसद परिसर में हाल ही में हुए विवाद ने राजनीति को गरमा दिया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनके दो सांसदों, प्रताप चंद्र सारंगी और मुकेश राजपूत, को धक्का दिया। इस घटना के बाद भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी को निशाने पर लिया, जबकि कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से नकारा। इस बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और राहुल गांधी के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए। क्या हुआ था घटनाक्रम? बीजेपी सांसदों का कहना है कि राहुल गांधी ने उनके दो सांसदों को शारीरिक रूप से धक्का दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत को धक्का देने के बाद भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी की आलोचना की और कहा कि अगर भाजपा सांसद भी इस तरह की शारीरिक ताकत का इस्तेमाल करते, तो स्थिति और बिगड़ सकती थी। भाजपा नेताओं का आरोप था कि राहुल गांधी ने संसद में एक अस्वीकार्य व्यवहार का प्रदर्शन किया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का बयान इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “संसद कोई कुश्ती का अखाड़ा नहीं है, जहां शारीरिक ताकत दिखाई जाए। राहुल गांधी ने दो सांसदों को धक्का दिया, क्या आपने (राहुल गांधी) कराटे और कंफू सीखा है ताकि आप दूसरे सांसदों को मार सकें?” उन्होंने कहा कि यह संसद की मर्यादा के खिलाफ है, और सवाल उठाया कि राहुल गांधी को कौन से कानून ने यह अधिकार दिया कि वे किसी सांसद को धक्का देकर चोट पहुंचाएं। रिजिजू ने यह भी कहा कि अगर सभी सांसद अपनी ताकत दिखाकर संसद में मारपीट करने लगेंगे, तो संसद की कार्यवाही कैसे चलेगी? उन्होंने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि वे लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और उन्हें अपने आचरण के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का विरोध प्रदर्शन रिजिजू ने यह भी बताया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के सदस्य संसद में लगातार प्रदर्शन करते हैं, जबकि एनडीए के सांसदों का यह विरोध प्रदर्शन एक विशेष कारण से था। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन इसलिए हुआ क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का अपमान किया है। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने झूठ फैलाया और गृह मंत्री अमित शाह के वीडियो को तोड़-मरोड़कर दिखाया, जिससे गलत संदेश गया। बीजेपी सांसदों का संयम केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा सांसदों ने पूरी घटना के दौरान संयम दिखाया है। उन्होंने कहा, “हमने कभी शारीरिक हिंसा का सहारा नहीं लिया। हम हमेशा अपनी बात को शांति से रखते हैं।” रिजिजू ने यह भी कहा कि भाजपा-एनडीए के सांसद धक्का-मुक्की या किसी प्रकार की हिंसा में शामिल नहीं होते हैं, बल्कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने विचार व्यक्त करते हैं। कांग्रेस का जवाब कांग्रेस ने भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से नकारा और इसे भाजपा की राजनीति का हिस्सा बताया। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा हमेशा ऐसे मुद्दों को उठाकर असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। कांग्रेस का कहना था कि राहुल गांधी ने कभी किसी सांसद को जानबूझकर धक्का नहीं दिया और यह आरोप पूरी तरह से झूठे हैं।

बालासोर से सांसद प्रताप सारंगी और फर्रुखाबाद से सांसद मुकेश राजपूत को चोटें आई हैं, पीएम ने पूछा हाल-चाल

नई दिल्ली संसद भवन के बाहर हुई धक्का-मुक्की में भाजपा के दो सांसद घायल हुए हैं। बालासोर से सांसद प्रताप सारंगी और फर्रुखाबाद से सांसद मुकेश राजपूत को चोटें आई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों सांसदों को फोन करके उनसे हाल-चाल पूछा है। बता दें कि प्रताप सारंगी ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने एक अन्य सांसद को धक्का मारा। इसके बाद वह सांसद प्रताप सारंगी के ऊपर गिर पड़े। इससे प्रताप सारंगी के माथे पर गहरी चोटें लगी हैं। बाद में पता चला कि सांसद मुकेश राजपूत को भी चोट लगी है। दोनों सांसद फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं। इस बीच भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी के ऊपर हमला बोला है। भाजपा इस मामले में कानूनी रास्ता भी देख रही है। वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने संवाददाताओं से बातचीत में कहाकि राहुल गांधी मारपीट करने के लिए बीच में घुसे थे। उनका व्यवहार मानो गुंडे का व्यवहार था, यह देश गुंडे को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने हमारे एक बुजुर्ग सांसद को धक्का देकर गिरा दिया। गौरतलब है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने बाबासाहेब आंबेडकर पर टिप्पणी को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ संसद परिसर में प्रदर्शन किया। वहीं भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने मुख्य विपक्षी दल पर संविधान निर्माता के अपमान का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच कथित तौर धक्का-मुक्की भी हुई। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने धक्का-मुक्की की जिसमें उसके सांसद प्रताप सारंगी के सिर पर चोट लग गई। दूसरी तरफ, राहुल गांधी ने दावा किया कि भाजपा सांसदों ने उन्हें संसद भवन में जाने से रोका और धक्का-मुक्की की। राहुल गांधी ने कहाकि मैं अंदर जाने की कोशिश कर रहा था। भाजपा के सांसद मुझे रोकने की कोशिश कर रहे थे, मुझे धमका रहे थे। अक्सर सफेद रंग टी-शर्ट पहनने वाले राहुल गांधी गुरुवार को नीले रंग की टी-शर्ट पहनकर संसद पहुंचे। उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दा यह है कि संविधान और बाबासाहेब की स्मृति का अपमान हुआ है।

भाजपा ने आतिशी का आरक्षण पर एक पुराना बयान निकालकर बड़ा पलटवार किया, चुनाव में आंबेडकर पर घमासान

नई दिल्ली दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले बाबा साहब भीमराव आंबेडकर को लेकर घमासान छिड़ गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर आंबेडकर के अपमान का आरोप लगाकर आम आदमी पार्टी (आप) और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल बेहद आक्रामक हैं। इस बीच भाजपा ने दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी का आरक्षण पर एक बुराना बयान निकालकर बड़ा पलटवार किया है। भाजपा ने 10 साल पुराने बयान की याद दिलाकर ‘आप’ पर आरक्षण और दलित विरोधी होने का आरोप लगाया है। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आतिशी के पुराने ट्वीट के स्क्रीनशॉट को साझा करते हुए एक्स पर लिखा, ‘आम आदमी पार्टी ने हमेशा से आरक्षण के खिलाफ अपनी मानसिकता को जाहिर किया है। मुख्यमंत्री आतिशी का यह ट्वीट इसका सबसे बड़ा प्रमाण है, जिसमें उन्होंने आरक्षण का खुलकर विरोध किया था। यह साफ दर्शाता है कि ‘आम आदमी’ का झूठा मुखौटा पहनने वाली AAP वास्तव में दलितों, पिछड़ों और वंचितों के हक के खिलाफ काम करती रही है।’ भाजपा के और भी नेता और कार्यकर्ता आतिशी का पुराना बयान दिखाकर ‘आप’ से सवाल दाग रहे हैं। भाजपा इसके साथ हैशटैग ‘आप अगेंस्ट रिजर्वेशन’ का इस्तेमाल कर रही है। आतिशी का पुराना बयान भाजपा आतिशी के जिस बयान को सामने आई है वह 4 अप्रैल 2014 का है। तब #askatishiaap के जरिए आतिशी एक्स (तब ट्विटर) पर सोशल मीडिया यूजर्स के सवालों का जवाब दे रही थीं। सुधांशु नाम के एक एक्स यूजर ने आतिशी से पूछा, ‘नौकरी और उच्च शिक्षा में आरक्षण को लेकर आम आदमी पार्टी की राय क्या है?’ इसके जवाब में आतिशी ने जवाब दिया, ‘जिन लोगों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है, उनकी अगली पीढ़ी को कतार में सबसे पीछे रखना चाहिए।’

राहुल गांधी के खिलाफ जिन भी धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई , वो जमानती अपराध, क्या जाएगी सांसदी

नई दिल्ली संसद में हुए धक्का-मुक्की कांड के बाद बीजेपी ने नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दिल्ली के संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। बीजेपी ने हत्या की कोशिश का भी आरोप लगाया है। इसके साथ ही, भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, 115 और 117 के तहत केस दर्ज करवाया गया है। दरअसल, गुरुवार सुबह संसद में अमित शाह द्वारा आंबेडकर पर की गई टिप्पणी को लेकर कांग्रेस विरोध प्रदर्शन कर रही थी। बीजेपी सांसद भी प्रदर्शन कर रहे थे, तभी कांग्रेस और बीजेपी सांसद आमने-सामने आ गए और प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत चोटिल हो गए। भाजपा ने राहुल गांधी पर धक्का देने का आरोप लगाया है। संसद में शिकायत दर्ज करवाने के बाद बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि हमने राहुल गांधी के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। उनके द्वारा शारीरिक हमला और उकसाने को लेकर है यह शिकायत हुई है। इसमें विस्तार में बताया है कि आज घटनाक्रम जो हुआ, जहां एनडीए के सांसद शांतिपूर्वक तरीके से कांग्रेस के झूठ के प्रोपेगैंडा को बेनकाब कर रहे थे, उसी समय राहुल गांधी अपने गठबंधन के सांसदों के साथ उस तरफ कूच करते हैं। जब सिक्योरिटी फोर्सेस के लोग कहते हैं कि ये संसद में जाने का रास्ता है तो जिस तरह का राहुल गांधी का रवैया था, उन्होंने गुस्सा दिखाया। इस परिवार को अपने आप को कानून से ऊपर मानने की आदत पड़ गई है। बीजेपी की महिला सांसद ने भी लगाया गंभीर आरोप वहीं, बीजेपी की नगालैंड से महिला सांसद फांनोन कोन्याक ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी बेहद करीब आकर खड़े हो गए, जिससे मैं असहज हो गई थी। हम बेहद शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान राहुल गांधी आए और मेरे ऊपर चिल्लाने लगे। किसी महिला सांसद पर इस तरह चिल्लाना राहुल को शोभा नहीं देता है। मैं बहुत दुखी हूं और सुरक्षा चाहती हूं। राहुल की गिरफ्तारी में हायर अथॉरिटी से लेनी होगी परमिशन अनिल सिंह कहते हैं कि पुलिस इस मामले में सीरियस धाराओं में केस रजिस्टर नहीं करेगी। यह सिंपल मारपीट का मामला बनेगा। इन सब मामले में 7 साल तक की जेल का प्रावधान है। हालांकि, राहुल गांधी को गिरफ्तार करने के मामले में हायर अथॉरिटी से परमिशन लेने की जरूरत है। अगर, ये तय हो जाए कि इससे शांति भंग हो सकती है और दंगे भड़क सकते हैं। ऐसे में पुलिस राहुल को अरेस्ट कर सकती है। केस दर्ज हुआ तो 7 साल तक की हो सकती है जेल एडवोकेट अनिल सिंह श्रीनेत के अनुसार, राहुल पर जो भी केस दर्ज होगा, वो अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अनुसार होगा। पहले इंडियन पीनल कोड की धारा 151 के तहत जो केस दर्ज होता। वह अब BNS के 189(5) के तहत दर्ज होगा। यानी इसके तहत 5 से अधिक लोग गैरकानूनी तरीके से एक जगह जुटते हैं तो यह केस दर्ज होगा। सिंपल चोट लगने पर 115(2) और गंभीर चोट लगने पर 117(2) लगेगा। इन दोनों ही मामलों में 7 साल तक की सजा हो सकती है। प्रदर्शन शाह के खिलाफ, चोट दूसरे सांसद को, ये जमानती अपराध सु्प्रीम कोर्ट में एडवोकेट अलिल कुमार सिंह श्रीनेत के अनुसार, धक्का-मुक्की के मामले में राहुल गांधी के खिलाफ जिन भी धाराओं में एफआईआर दर्ज होगी, वो जमानती अपराध होंगे। दरअसल, राहुल गांधी अमित शाह के बयान को लेकर उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। ऐसे में अगर किसी दूसरे सांसद को चोट लगती है तो यह संज्ञेय यानी जानबूझकर किया गया अपराध नहीं होगा। ऐसे अपराध में उन्हें तुरंत जमानत मिल सकती है। अगर, यही चोट अमित शाह को लगती तो यह माना जाता कि राहुल ने जान-बूझकर यह अपराध किया होगा। तब उन पर गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज हो सकता था। सिंपल धाराओं में केस दर्ज तो 1 सााल तक की सजा वहीं, जान से मारने की धमकी या कोशिश पर बीएनएस की धारा 110 के तहत केस दर्ज होगा। इसमें 3 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है। तुम्हारा जो है! वहीं, बीएनएस की धारा 115(2) के तहत सामान्य केस दर्ज हुआ तो 1 साल तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि, ये भी जमानती ही होगा। संसद के सदस्यों को ये मिले हैं विशेषाधिकार, राहुल को भी मिले संसद के सदस्यों को ये विशेषाधिकार मिले हुए हैं। इनमें है-संसद में बोलने की स्वतंत्रता। संसद या उसकी किसी समिति में कुछ कहने या वोट देने पर सदस्य को अदालत में किसी भी कार्यवाही से छूट। संसद से प्रकाशित किसी रिपोर्ट, कागजात या कार्यवाही पर किसी व्यक्ति के खिलाफ अदालत में कोई कार्यवाही नहीं हो सकती। ये भी विशेषाधिकार मिले हुए हैं संसद की कार्यवाही की वैधता को लेकर अदालतों की ओर से कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता है। संसद की कार्यवाही को बनाए रखने के लिए जो अधिकारी या सांसद शक्तियों का प्रयोग करते हैं, वे अदालत के अधिकारक्षेत्र से बाहर होते हैं। संसद की कार्यवाही से संबंधित किसी सत्य रिपोर्ट का समाचार पत्रों में प्रकाशित होने पर उसे किसी न्यायिक कार्यवाही से छूट दी जाती है, जब तक यह साबित न हो कि यह बदनीयती से किया गया है। हालांकि, किसी भी ऐसे मामले में वीडियो सबूत जरूरी होता है।

राज्य शिक्षा केंद्र ने एमपी बोर्ड कक्षा 5वीं और 8वीं वार्षिक परीक्षा का टाइम टेबल जारी किया

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य शिक्षा केंद्र ने एमपी बोर्ड कक्षा 5वीं और 8वीं वार्षिक परीक्षा का टाइम टेबल जारी कर दिया है। एमपी बोर्ड 5वीं, 8वीं की वार्षिक परीक्षाएं 24 फरवरी से शुरू होंगी। 5वीं की परीक्षा 1 मार्च को और 8वीं की परीक्षा 5 मार्च को समाप्त 2025 होगी। दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं एक ही शिफ्ट दोपहर 2 बजे से साढ़े 4 बजे तक में होंगी। कुल ढाई घंटे का एग्जाम होगा। दिव्यांग विद्यार्थियों को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत अतिरिक्त समय और लेखक की सुविधा मिलेगी। प्रथम भाषा के रूप में हिंदी/ उर्दू/ मराठी का चयन करने पर द्वितीय भाषा अंग्रेजी एवं प्रथम भाषा के रूप में अंग्रेजी का चयन करने पर द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी का चयन करना अनिवार्य होगा। 8वीं कक्षा का टाइम टेबल ( MP Board 8th Class Time Table 2025 ) परीक्षा तिथि                             विषय 24 फरवरी, 2025 – प्रथम भाषा : सहायक वाचन सहित हिंदी/अंग्रेजी/उर्दू/मराठी 25 फरवरी, 2025– गणित या संगीत (केवल दृष्टि बाधितों के लिए)) 1 मार्च, 2025 – सामाजिक विज्ञान 4 मार्च, 2025- दूसरी भाषा: अंग्रेजी (जिनकी प्रथम भाषा हिंदी /उर्दू /मराठी है) या हिंदी (जिनकी प्रथम भाषा अंग्रेजी है) 5 मार्च, 2025- तीसरी भाषा: संस्कृत/हिंदी/उर्दू/मराठी/पंजाबी/उड़िया/गुजराती। एमपी बोर्ड कक्षा 5वीं का टाइम टेबल (MP Board Class 5th Time Table 2025) परीक्षा तिथि                                    विषय 24.02.2025 प्रथम भाषा: हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, मराठी 25.02.2025 गणित या संगीत (दृष्टिबाधितों हेतु) 27.02.2025 अतिरिक्त भाषा: हिन्दी, संस्कृत, उर्दू, पंजाबी 28.02.2025 पर्यावरण अध्ययन 01.03.2025 द्वितीय भाषा: अंग्रेजी (जिनकी प्रथम भाषा हिन्दी/उर्दू/मराठी है) हिन्दी ((जिनकी प्रथम भाषा अंग्रेजी है) एमपी बोर्ड ने शुरू किया हेल्पलाइन नंबर 10वीं-12वीं की स्टेट और सेंट्रल बोर्ड की परीक्षाओं में अब सिर्फ दो माह का समय बचा है। ऐसे में परीक्षाओं से जुड़े डाउट क्लियर करने के लिए बोर्ड ने हेल्पलाइन नंबर 1800-233-0175 शुरू किया है। इस पर छात्र और उनके परिजन सुबह 8 से रात 8 बजे तक कॉल कर गाइडेंस ले सकते हैं। कब होगी एमपी बोर्ड 10वीं 12वीं की परीक्षा मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल पहले ही एमपी बोर्ड परीक्षा 2025 कैलेंडर जारी कर चुका है। इसके अनुसार, प्रैक्टिकल परीक्षाएं 10 फरवरी से 15 मार्च 2025 तक चलेंगी। एमपी बोर्ड 10वीं की परीक्षाएं 27 फरवरी, 2025 से 19 मार्च 2025 के बीच आयोजित की जाएंगी । वहीं, एमपी बोर्ड 12वीं की परीक्षाएं 25 फरवरी से 25 मार्च 2025 के बीच होंगी । मध्य प्रदेश बोर्ड परीक्षा 2025 सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच सिंगल शिफ्ट में होगी। एमपी बोर्ड 10वीं की परीक्षा तिथियां – 27 फरवरी 2025 – हिंदी – 1 मार्च 2025 – NSQF के समस्य विषय व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – 03 मार्च 2025 – अंग्रेजी – 5 मार्च 2025 – मराठी, गुजराती, पंजाबी, सिंधी – 06 मार्च 2025 – संस्कृत – 13 मार्च 2025 – सामाजिक विज्ञान एमपी बोर्ड 12वीं की परीक्षा तिथियां 25 फरवरी – हिन्दी 4 मार्च – फिजिक्स, इकोनॉमिक्स, भारतीय कला का इतिहास 6 मार्च – ड्राइंग एंड डिजाइन 11 मार्च – इंफोर्मेटिक प्रैक्टिस 17 मार्च – केमिस्ट्री, इतिहास, बिजनेस स्टडीज, ड्राइंग पेंटिंग 19 मार्च – शारीरिक शिक्षा, एनएसक्यूएफ 22 मार्च – एग्रीकल्चर, होम साइंस, बुक कीपिंग 24 मार्च – राजनीति शास्त्र

इजराइल-हमास जंग में अब तक 45000 मौतें, फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताई सच्चाई

गाजा गाजा में चल रहे इजराइल और हमास जंग को लेकर फिलिस्तीन के स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा दावा किया है. फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि गाजा में इजराइल और हमास के बीच जंग में अब तक 45000 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में बमबारी वाले क्षेत्र के अस्पतालों में 50 से अधिक मृतकों को लाया गया. एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से 45,028 लोग मारे गए हैं और 106,962 अन्य घायल हुए हैं. इसके अलावा चेतावनी दी है कि वास्तविक मौत का आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है क्योंकि हजारों की संख्या में शव उन मलबे के नीचे दबे हुए हैं जहां पर डॉक्टरों की टीम नहीं पहुंच पाई है. अमेरिका लगातार इजरायल को जंग के दौरान मदद मुहैया करा रहा है। इसके खिलाफ आवाज उठाते हुए 5 फिलिस्तीनियों ने उस पर मानवाधिकार के हनन में शामिल होने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। मंगलवार को घोषित किए गए इस मुकदमे में अमेरिका पर केंद्रीय कानून को लागू करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया गया है, जो न्यायेतर हत्याओं और यातना जैसे घोर उल्लंघनों में शामिल विदेशी सेनाओं को पैसा देने पर रोक लगाता है। मुकदमे में क्या लिखा है? मुकदमे में लिखा है, ”7 अक्टूबर, 2023 को गाजा जंग शुरू होने के बाद से इज़रायली मानवाधिकारों के उल्लंघन में तेजी आने के मद्देनजर लीही कानून को लागू करने में अमेरिका की तरफ से जानबूझकर की गई नाकामी चौंकाने वाली है।” मुकदमे में कहा गया है कि अक्टूबर 2023 की शुरुआत से गाजा में इज़रायल की बमबारी और जमीनी कार्रवाइयों में 45,000 से ज्यादा फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं। साथ ही संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के प्रमुख अधिकार समूहों ने इज़रायली फौज पर नरसंहार समेत युद्ध अपराध करने का भी आरोप लगाया है। वादी शिक्षिका ने बयां किया दुख इस मामले में अमल गाजा नाम से जानी जाने वाली एक गाजा शिक्षिका वादी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जंग शुरू होने के बाद से उसे सात बार जबरन विस्थापित किया गया है और उसके परिवार के 20 सदस्य इजरायली हमलों में मारे गए हैं। मुकदमे के साथ दिए गए एक बयान में उसने कहा, ”अगर अमेरिका मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करने वाली इजरायली इकाइयों को सैन्य सहायता देना बंद कर दे, तो मेरी पीड़ा और मेरे परिवार को होने वाला अकल्पनीय नुकसान काफी हद तक कम हो जाएगा।” 45 हजार से ज्यादा लोगों की मौत पिछले 14 महीने से जंग में 45 हजार से अधिक फिलिस्तीनी इजरायली सैन्य कार्रवाई में मारे जा चुके हैं। वहीं, घायलों की तादाद भी एक लाख के ऊपर है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़े के मुताबिक इजरायली हमले में अब तक 45 हजार 25 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जबकि एक लाख 9 हजार 62 घायल हुए हैं। मारे गए और घायलों में सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं और बच्चों की है। स्वास्थ्य मंत्रालय का ये भी कहना है कि गाजा की 23 लाख की आबादी में से करीब 2 फीसदी आबादी को इजरायल मार चुका है, जबकि 4 फीसदी आबादी घायल है। मृतकों में महिलाएं और बच्चे ज्यादा मौत को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जो आंकड़े दिए गए हैं उसमें महिलाओं और पुरुषों की संख्या नहीं बताई गई है, लेकिन इतना जरूर कहा गया है कि मरने वालों में आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं. दूसरी ओर से इजराइली सेना का कहना है कि उसने बिना कोई सबूत दिए 17,000 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया है. यह युद्ध इजराइल और हमास के बीच लड़ाई का अब तक का सबसे बुरे दौर में है, जिसमें मरने वालों की संख्या गाजा की लगभग 2.3 मिलियन की युद्ध-पूर्व आबादी का लगभग 2 फीसदी है. इजराइल मौत के लिए हमास को ठहराता रहा है जिम्मेदार इजराइल का दावा है कि नागरिकों की मौत के लिए हमास जिम्मेदार है क्योंकि यह घनी आबादी वाले गाजा पट्टी में नागरिक क्षेत्रों के भीतर से काम करता है. अधिकार समूहों और फिलिस्तीनियों का कहना है कि इजराइल नागरिकों की मौतों से बचने के लिए पर्याप्त सावधानी बरतने में विफल रहा है. 7 अक्टूबर, 2023 को शुरू हुई थी जंग युद्ध तब शुरू हुआ जब हमास के नेतृत्व वाले आतंकवादियों ने 7 अक्टूबर, 2023 को दक्षिणी इजराइल में हमला किया, जिसमें लगभग 1200 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर नागरिक थे, और अन्य 250 का अपहरण कर लिया. इजराइल ने भारी बमबारी और फिलिस्तीनी क्षेत्र में जमीनी घुसपैठ का जवाब दिया. लगभग 100 बंधक अभी भी गाजा के अंदर हैं, कम से कम एक तिहाई को मृत माना जा रहा है. बाकियों में से अधिकांश को पिछले साल युद्धविराम के दौरान रिहा कर दिया गया था.  

अश्विन का सीखने का जुनून अंत तक कम नहीं हुआ : मुरलीधरन

मुंबई क्रिकेट के इतिहास में सबसे सफल गेंदबाज, श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन ने बुधवार को भारत के ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन की प्रशंसा की, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की और उन्हें महत्वाकांक्षी क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा बताया। अश्विन ने बुधवार को ब्रिस्बेन में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी श्रृंखला के तीसरे टेस्ट के समापन के बाद 106 टेस्ट में 537 विकेट के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। अश्विन ने अनिल कुंबले (619) के बाद भारत के लिए दूसरे सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज के रूप में अपने करियर को अलविदा कह दिया और मुरली ने कहा कि यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। मुरलीधरन ने बुधवार को टेलीकॉम एशिया स्पोर्ट को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा, “आपको याद होगा कि अश्विन ने अपने करियर की शुरुआत बल्लेबाज के तौर पर की थी, और पार्ट-टाइम विकल्प के तौर पर स्पिन में हाथ आजमाया था। उन्हें जल्द ही एहसास हो गया कि उनकी बल्लेबाजी की आकांक्षाओं पर विराम लग चुका है और उन्होंने अपना ध्यान गेंदबाजी पर केंद्रित कर लिया। इस साहसिक कदम को उठाने और जो हासिल किया है, उसके लिए उन्हें सलाम। 500 टेस्ट विकेट तक पहुंचना कोई आसान काम नहीं है।” मुरलीधरन ने 133 मैचों में 800 विकेट लेकर टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। उन्होंने अश्विन को उनके शुरुआती दिनों में देखा था और पाया था कि वह हमेशा सीखने के लिए उत्सुक एक चतुर युवा थे। टेलीकॉम एशिया स्पोर्ट ने मुरली के हवाले से कहा, “जब वह मैदान में आए, तब मैं अपने करियर के अंतिम चरण में था, लेकिन मुझे लगा कि वह सीखने के लिए उत्सुक एक चतुर युवा थे। उन्होंने सलाह मांगी, सोच-समझकर सवाल पूछे और खुद को बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत की। उनकी यही लगन और भूख उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।” 537 टेस्ट विकेट के साथ अश्विन टेस्ट इतिहास में सातवें सबसे सफल गेंदबाज हैं और मुरली के बाद दूसरे सबसे सफल ऑफ स्पिनर हैं। मुरली ने कहा, “टेस्ट में भारत के दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज के रूप में संन्यास लेना एक बड़ी उपलब्धि है। अश्विन ने खुद को, तमिलनाडु क्रिकेट को और पूरे देश को गौरवान्वित किया है। मैं उनकी दूसरी पारी में उनकी सफलता की कामना करता हूं।” मुरली को इस बात ने प्रभावित किया कि अश्विन का सीखने का जुनून हमेशा मजबूत रहा। श्रीलंकाई दिग्गज ने कहा, “जबकि उनका करियर खत्म हो रहा था, सीखने का उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने जो विविधताएं विकसित कीं, उन्हें देखें – यह इस बात का सबूत है कि वह अपनी उपलब्धियों से संतुष्ट नहीं थे। वह हमेशा आगे बढ़ते रहे।”  

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