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महाकुंभ को सफल बनाने उप्र सरकार और भारत सरकार मिलकर व्यापक स्तर पर काम कर रही : गजेंद्र सिंह शेखावत

जोधपुर  केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने  कहा कि इस बार का महाकुंभ दिव्य और भव्य होगा। इस दौरान भारत की सांस्कृतिक धरोहर की झलक देखने को मिलेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वैदिक सभ्यता से लेकर के महाभारत काल में गुप्त शासन काल में चालुक्य वंश के समय में और उसके बाद पूरे मध्यकालीन भारत इतिहास में कुंभ का उल्लेख मिलता है। पिछले कुंभ में लगभग 20 करोड़ लोगों ने स्नान किया था। इस बार लगभग 45 करोड़ लोग महाकुंभ का गवाह बनेंगे। इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार मिलकर व्यापक स्तर पर काम कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि वहां डेढ़ लाख से ज्यादा शौचालय बनाए गए हैं। कुंभ में आने वाले कल्पवासी जो पूरे समय में रहकर के वहां पर कल्प साधना करते हैं, उनकी संख्या 10 लाख की बजाय 20 लाख के आसपास रहने वाली है। जो पूरे समय में एक स्थान पर रहेंगे। उन सबके लिए कुंभ एक अच्छा अनुभव देने वाला ऐसा कुंभ बने, इसको लेकर के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय कम कर रहा है। वहीं 20 लाख विदेशी सैलानी महाकुंभ में आने वाले है। इस बार का कुंभ दुनिया के लिए ऐसा अवसर होगा, जहां भारत की सांस्कृतिक धरोहर की झलक देखने को मिलेगी। हर 12 साल में एक बार आयोजित होने वाला महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी 2025 को प्रयागराज में समाप्त होने वाला है। महाकुंभ मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता और श्रद्धा का भी प्रतीक है। इस बार महाकुंभ मेला 2025 में प्रयागराज में आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले 2013 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन हुआ था। महाकुंभ में विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत भी जुटते हैं। इस दौरान वह हवन, पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। महाकुंभ में कुछ विशिष्ट दिनों को शाही स्नान के रूप में मनाया जाता है। इसमें श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है।    

लोकसभा चुनाव में महिला मतदाताओं का मतदान % 65.78 रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 65.55 था : निर्वाचन आयोग

नई दिल्ली  निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में हुए लोकसभा चुनाव में 64.64 करोड़ मतदाताओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया और इन मतदाताओं में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक रही। निर्वाचन आयोग ने कहा कि महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 65.78 रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 65.55 था। आयोग ने कहा कि इस बार चुनाव लड़ने वाली महिला उम्मीदवारों की संख्या 800 रही जबकि 2019 के चुनावों में यह संख्या 726 थी। निर्वाचन आयोग ने कहा, ‘‘स्वतः संज्ञान लेकर की गई इस पहल का मकसद जनता का विश्वास बढ़ाना है, जो भारत की चुनावी प्रणाली का आधार है।’’ ये आंकड़े इन आरोपों की पृष्ठभूमि में जारी किए गए हैं कि लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान के आंकड़ों में हेराफेरी की गई थी। ये आंकड़े चार विधानसभा चुनावों – अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम से भी संबंधित हैं। निर्वाचन आयोग ने बताया कि 2019 में 540 की तुलना में कुल 10.52 लाख मतदान केंद्रों में से 40 मतदान केंद्रों या 0.0038 प्रतिशत केंद्रों पर पुनर्मतदान किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इस चुनाव में महिला मतदाताओं ने अपनी उपस्थिति और भागीदारी से लोकतंत्र को नई ऊंचाई दी, जो महिलाओं के मताधिकार के नए मानक का संकेत है। महिला मतदाताओं का मतदान औसत 65.78 प्रतिशत रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का यह औसत 65.55 प्रतिशत था। महिला उम्मीदवारों की संख्या 800 थी जबकि 2019 में यह संख्या 726 थी। 2019 की तुलना में थर्ड-जेंडर मतदाताओं में 46.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2024 में जहां 90,28,696 पंजीकृत दिव्यांग मतदाता रहे वहीं 2019 में यह संख्या 61,67,482 थी। वर्ष 2019 में 540 मतदान केंद्रों की तुलना में वर्ष 2024 में केवल 40 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हुआ। दरअसल, भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव 2024 पर 42 सांख्यिकीय रिपोर्ट और एक साथ कराए गए चार राज्य विधानसभा चुनावों पर 14-14 रिपोर्टें जारी की हैं। आयोग का कहना है कि ये लगभग 100 सांख्यिकीय रिपोर्ट गहन विश्लेषण और नीतिगत अंतर्दृष्टि के लिए दुनिया भर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और चुनाव पर्यवेक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण खजाने की तरह होंगी। आयोग के अनुसार इस रिपोर्ट में उपलब्ध डेटा सेट संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों, विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों और राज्यवार मतदाताओं, मतदान केंद्रों की संख्या, राज्य तथा संसदीय निर्वाचन क्षेत्रवार मतदाता मतदान, पार्टी के आधार पर वोट शेयर, लिंग आधारित मतदान व्यवहार, महिला मतदाताओं की राज्यवार भागीदारी, क्षेत्रीय विविधताएं, निर्वाचन क्षेत्र डेटा सारांश रिपोर्ट, राष्ट्रीय पार्टियों, राज्य स्तरीय पार्टियों, पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (आरयूपीपी) का प्रदर्शन, जीतने वाले उम्मीदवारों का विश्लेषण, निर्वाचन क्षेत्रवार विस्तृत परिणाम और बहुत कुछ का विवरण प्रदान करते हैं। यह विस्तृत डेटा सेट हितधारकों को भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर पहले से उपलब्ध पिछले चुनावों के डेटा सेट से तुलना के साथ बारीक स्तर के विश्लेषण के लिए डेटा को काटने-छांटने का अधिकार देता है। आयोग का कहना है कि ये रिपोर्ट चुनावी और राजनीतिक परिदृश्य में दीर्घकालिक दृष्टिकोण और बदलावों को ट्रैक करने के लिए समय-शृंखला विश्लेषण की सुविधा प्रदान करेगी।    

खंडवा मेंअब रविवार के दिन भी शहर के मुख्य मार्गों की सफाई होगी, साथ ही अब घर घर वाहन डोर टू डोर कचरा लेने जाएंगे

खंडवा शहर में बेहतर सफाई के लिए निगम ने नया प्रयास शुरू किया. अब रविवार छुट्टी के दिन भी शहर के मुख्य मार्गों की सफाई होगी. साथ ही रविवार को भी अब घर घर वाहन डोर टू डोर कचरा लेने जाएंगे. इसका यह फायदा होगा कि रविवार के दिन लोग ज्यादा कचरा इकट्ठा कर बाहर फेंक देते हैं, लेकिन अब वह गाड़ी में ही डालेंगे, जिससे शहर स्वच्छ सुंदर बनेगा. पूर्व पार्षद सुनील जैन ने कहा कि शहर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए निगम आयुक्त एवं प्रशासन नित नए प्रयोग कर रहे हैं, जिससे शहर को साफ सुथरा रखा जा सके. इन सभी प्रयासों का एक ही उद्देश्य है कि खंडवा शहर भी स्वच्छता के मामले में नंबर वन बने. अलग-अलग प्रयोग करके आम जनता के साथ मिलकर स्वच्छता की इस मुहिम को आगे बढ़ाया जा रहा है. पहले रविवार के दिन छुट्टी होने की वजह से कचरा इकट्ठा हो जाता था. कई लोग कचरा बाहर फेंक देते थे जिसकी वजह से परेशानियां होती थीं, लेकिन अब नगर निगम प्रशासन एवं महापौर के आदेश अनुसार रविवार के दिन भी डोर टू डोर कचरा वाहन जाएंगे और कचरा इकट्ठा करेंगे. प्रशासन की मुहिम यही है कि खंडवा शहर को फिर से नंबर वन बनाया जाए और साफ सफाई  हर जगह रखी जाए. हालांकि यह समस्या कई दिनों से थी, रविवार अवकाश होने की वजह से लोगों को मजबूरन कचरा बाहर इकट्ठा करना पड़ता था, लेकिन प्रशासन की इस मुहिम की वजह से अब लोगों को कचरा इकट्ठा नहीं करना पड़ेगा और वाहन डोर टू डोर जाकर कचरा इकट्ठा करके इसका निष्पादन करेगा. इससे यह कह सकते हैं कि सप्ताह भर कचरा वाहन चलने की वजह से कहीं ना कहीं शहर में साफ सफाई जरूर बढ़ेगी.

बगैर ठोस सबूत EVM पर सवाल उठाना गलत, युगेंद्र पवार से भी अपील वापसी को कहा, MVA से अलग सुप्रिया सुले के सुर

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महाविकास अघाडी (MVA) की करारी हार के बाद कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) लगभग हर दिन ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाकर बीजेपी को घेरती है। हालाँकि, एमवीए में शामिल शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने ईवीएम के मुद्दे पर अपने सहयोगियों से अलग रुख अपनाया है।  वरिष्ठ नेता शरद पवार की बेटी व बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि बिना किसी पुख्ता सबूत के हार के लिए ईवीएम को दोष देना सही नहीं है. एनसीपी (एसपी) नेता सुले ने बुधवार को पुणे में मीडिया से बात करते हुए कहा, जब तक ईवीएम में छेड़छाड़ के ठोस सबूत नहीं मिलते, तब तक ईवीएम को दोष देना गलत है। ईवीएम के खिलाफ कोई भी आरोप तभी उचित हो सकते हैं जब उसके बारे में ठोस और विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध हों। मैं खुद ईवीएम से चार बार चुनाव जीत चुकी हूं। ईवीएम पर सवाल उठाने वालों से असहमती जताते हुए सुप्रिया सुले कहा कि ओडिशा के बीजू जनता दल (बीजेडी) और आम आदमी पार्टी (आप) जैसे कुछ राजनीतिक दलों ने ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोपों को साबित करने के लिए डेटा होने का दावा किया है। पुणे के दौरे पर आईं सुप्रिया सुले ने पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने, ‘मुझे लगता है कि जब तक मेरे पास कुछ ठोस सबूत नहीं हैं, तब तक आरोप लगाना मेरे लिए सही नहीं है। मैंने एक ही ईवीएम से चार चुनाव जीती हूं।’ बीजेडी नेता के डेटा पर सवाल हालांकि, बारामती की सांसद ने कहा कि कई लोगों और ओडिशा के बीजू जनता दल (बीजेडी) और आप जैसे राजनीतिक दलों ने ईवीएम में छेड़छाड़ के अपने दावों को साबित करने के लिए डेटा होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि बीजेडी के अमर पटनायक ने मंगलवार को उन्हें लिखे एक पत्र में ईवीएम के इस्तेमाल के विरोध का समर्थन करने के लिए कुछ डेटा शेयर किए, लेकिन इस बारे में विस्तार से नहीं बताया। अरविंद केजरीवाल का जिक्र इसी तरह, खड़कवासला से विधानसभा चुनाव हारने वाले एनसीपी (शरद पवार) उम्मीदवार सचिन दोडके के पास भी ईवीएम के खिलाफ अपने दावे का समर्थन करने के लिए कुछ डेटा है। सुप्रिया सुले ने कहा, आम आदमी पार्टी चीफ अरविंद केजरीवाल ने भी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने और जोड़ने पर आपत्ति जताई है। ‘माहौल परेशान करने वाला’ लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, ‘कुल मिलाकर माहौल परेशान करने वाला है। चाहे कोई तकनीकी समस्या हो या मतदाता सूची से जुड़ी कोई बात हो, इन बातों का जवाब बिना चर्चा के नहीं दिया जा सकता।’ उन्होंने कहा, ‘इन सभी आपत्तियों का अध्ययन किया जा रहा है।’ युगेंद्र पवार से कहा, आयोग से वापस लें आवेदन सुप्रिया सुले ने कहा कि उन्होंने बारामती में अपने चाचा अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले युगेंद्र पवार से वोटों की पुनर्गणना के लिए अपना आवेदन वापस लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, ‘हम पहले से ही कई अन्य जगहों पर इस मामले को उठा रहे हैं। अगर कुछ (हेरफेर से संबंधित) है, तो वह सामने आ जाएगा।’

इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना सबसे बड़ी अड़चन 2.9 किमी लंबी सुरंग, टनल में फिनिशिंग का काम जारी

इंदौर इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना को शुरू हुए करीब 11 साल हो चुके हैं, लेकिन 205 किमी लंबी रेल लाइन के प्रोजेक्ट में पिछले दो वर्षों में ही तेजी आई है। इस पूरी परियोजना में सबसे बड़ी अड़चन पीथमपुर स्थित 2.9 किमी लंबी सुरंग का प्रारंभिक कार्य पूरा हो चुका है। अब फिनिशिंग का कार्य शुरू किया गया है। हर दिन सिर्फ छह मीटर हिस्से में ही फिनिशिंग की जा रही है। इस कारण इस परियोजना में देरी हो रही है। जल्द ही रेलवे यहां पांच मशीनें लगाकर हर दिन 48 मीटर फिनिशिंग का काम शुरू करेगा, ताकि मार्च माह तक यह काम पूरा किया जाकर ट्रैक बिछाने काम शुरू हो सके। टनल में फिनिशिंग का काम जारी जून माह में सुरंग के दोनों हिस्सों को आपस में मिला दिया गया था। इसके बाद टनल से पानी निकालने का काम शुरू कर दिया गया था। करीब दो माह पहले टनल के आंतरिक हिस्से में सीमेंट लेयर तैयार की गई। इसके बाद पिछले सप्ताह ही फिनिशिंग का काम शुरू किया गया है। पानी का रिसाव रोकने का काम इसमें पानी का रिसाव रोकने के लिए जेंट्री मशीन के माध्यम से वाटरप्रूफ जियो टैक्सटाइल और मेमरीन लगाई जा रही है। इसके बाद भी पानी का रिसाव हो तो ड्रेन लाइन भी बनाई गई है। शुरुआत में एक छह मीटर की जेंट्री मशीन के माध्यम से हर दिन छह मीटर हिस्से में फिनिशिंग का काम किया जा रहा है। इस गति से काम होता है तो वर्षभर में ही टनल का काम पूरा नहीं होगा। इसलिए छह मीटर की एक अन्य जेंट्री मशीन और 12 मीटर की तीन जेंट्री मशीन जल्द शुरू की जाएगी, ताकि यह काम मार्च तक पूरा हो सके। दुर्घटना होने पर रेस्क्यू के लिए बनेगी लिफ्ट सुरंग के सेंटर पाइंट को फिलहाल खुला ही रखा गया है। फिनिशिंग और ट्रैक का काम पूरा होने पर इसे कवर कर दिया जाएगा। इसी जगह पर एक लिफ्ट भी लगाई जाएगी। जिसका उपयोग आपातकाल स्थिति में कर्मचारियों को नीचे भेजने और यात्रियों को बाहर निकालने के लिए होगा। बता दें कि इस बार बजट में प्रोजेक्ट के लिए 600 करोड़ रुपये मिले हैं। पूरी परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य इस परियोजना का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी अंचल को रेल सेवाओं से जोड़ेगा। परियोजना में पीथमपुर, सागौर, गुणावद, नौगांव, झाबुआ, पिटोल में नए रेलवे स्टेशन भवन, प्लेटफार्म आदि का निर्माण शुरू कर दिया है। इसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। साल 2008 में प्रोजेक्ट का शुभारंग हुआ था और काम साल 2013 में शुरू हुआ था। वर्तमान में 205 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट में अलग-अलग हिस्सों में काम चल रहा है। इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन प्रोजेक्ट (205 किमी) को इंदौर-टिही (29 किमी), टिही-गुणावद (28 किमी), गुणावद-नौगांव (14 किमी), धार-अमझेरा (20 किमी), अमझेरा-सरदारपुर (20 किमी), सरदारपुर-झाबुआ (60 किमी) सेक्शन में बांटकर काम किया जा रहा है।

UGC ने स्टूडेंट्स के लिए साइबर हाइजीन को लेकर गाइडलाइंस जारी की , पब्लिक USB चार्जर घोटाले से सावधान रहें

नई दिल्ली अगर आप भी सार्वजनिक वाई-फाई इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाएं, क्योंकि इससे आप साइबर फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं और आपका बैंक अकाउंट खाली भी हो सकता है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने स्टूडेंट्स के लिए साइबर हाइजीन को लेकर गाइडलाइंस जारी की है. ‘Stay Cyber-Safe!’ के माध्यम से यूजीसी ने हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स (HEIs) और स्टूडेंट्स लिए एक हैंडबुक भी जारी की है. हैंडबुक में साइबर फ्रॉड से बचने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए की जानकारी दी गई है. पब्लिक USB चार्जर घोटाले से सावधान रहें सार्वजनिक स्थानों पर अपना फ़ोन चार्ज करने से बचें. साइबर अपराधी सार्वजनिक स्थानों जैसे कि हवाई अड्डों, कैफ़े, होटल और बस स्टैंड आदि पर लगे USB चार्जिंग पोर्ट का इस्तेमाल दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों के लिए कर सकते हैं. ऐसे USB चार्जिंग स्टेशनों पर अपने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को चार्ज करने से आप जूस-जैकिंग साइबर हमले का शिकार हो सकते हैं. जूस जैकिंग की वजह से दुर्भावनापूर्ण ऐप इंस्टॉल हो सकता है, आपके डिवाइस का एन्क्रिप्शन और अपराधी इसे रिस्टोर करने के लिए फिरौती मांग सकते हैं या आपके डिवाइस से डेटा चुरा कर आपसे पैसे ऐंठ सकते हैं. कैसे बचें?     सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों या पोर्टेबल वॉल चार्जर पर प्लग करने से पहले दो बार सोचें.     अपने मोबाइल डिवाइस को चार्ज करने के लिए इलेक्ट्रिकल वॉल आउटलेट का इस्तेमाल करें.     अपने साथ अपना खुद का केबल या पावर बैंक ले जाने की कोशिश करें.     सॉफ़्टवेयर सुरक्षा सुविधा का उपयोग करके अपने मोबाइल डिवाइस को लॉक करें, यह सुनिश्चित करते हुए कि यह किसी कनेक्टेड डिवाइस के साथ पेयर न हो सके.     अपने फोन को तब चार्ज करने की कोशिश करें जब वह स्विच ऑफ हो. क्या न करें?     पब्लिक Wi-Fi: पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते समय अपनी पर्सनल या प्रोफेशनल ईमेल आईडी, ऑनलाइन बैंक अकाउंट न खोलें.     पायरेटेड सॉफ़्टवेयर: पायरेटेड सॉफ़्टवेयर का उपयोग करने से बचें, क्योंकि इसमें अक्सर मैलवेयर होता है. वेलिड सोर्स से ही कॉन्टेक्ट करें.     संदिग्ध ईमेल: अनजान सेंडर्स या संदिग्ध ईमेल से अटैचमेंट न खोलें.     सिक्योरिटी सॉफ़्टवेयर: अपने सुरक्षा सॉफ़्टवेयर को डिसेबल न करें.     जोखिम भरी वेबसाइटें: ऐसी वेबसाइट से बचें जो मैलवेयर वितरित करने के लिए जानी जाती हैं जैसे कि अनवेलिड डाउनलोडिंग साइट. क्या करें?     ईमेल सावधानी: ईमेल अटैचमेंट या इमेज खोलते समय बहुत सावधान रहें, खासतौर पर अनजान सेंडर्स से.     रेगुलर बैकअप: साइबर अटैक की स्थिति में रिकवरी के लिए महत्वपूर्ण फ़ाइलों का रेगुलर बैकअप लेते रहें.     विश्वसनीय सॉफ़्टवेयर: एंटी-मैलवेयर/एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर केवल ऑथराइज्ड प्रोवाइडर जैसे, प्ले स्टोर, ऐप स्टोर, आधिकारिक वेबसाइट से इंस्टॉल करें.     अपडेट और फ़ायरवॉल: अपने OS और सॉफ़्टवेयर को सुरक्षा पैच के साथ अपडेट रखें. अपने सिस्टम के फायरवॉल को अनेबल करें.     डाउनलोड सिक्योरिटी: केवल विश्वसनीय सोर्स से फाइलें डाउनलोड करें. अनजान सेंडर्स और संदिग्ध लिंक से अटैचमेंट से बचें. दरअसल, हाल के समय में उच्च शिक्षण संस्थान (HEIs) विभिन्न प्रकार के साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील रहे हैं. COVID-19 महामारी के दौरान HEI समुदाय को ‘ऑनलाइन’ पर शिफ्ट होना पड़ा, जिसमें कुलपति, शिक्षक, छात्र और सहयोगी स्टाफ शामिल थे. साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी और साइबरस्पेस में भरोसे की कमी के कारण HEIs को ‘ऑनलाइन’ शिक्षा की ओर सुचारू रूप से शिफ्ट होने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसलिए, साइबर खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और स्वस्थ साइबर आदतों का पालन करना HEIs के साइबर सुरक्षा तंत्र (cyber security ecosystem) को मजबूत करने के लिए अनिवार्य है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, जो शिक्षा में डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देती है, शिक्षण में तकनीक के उपयोग की आवश्यकता को पहचानती है और इसके संभावित जोखिमों और खतरों को भी स्वीकार करती है. यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ऑनलाइन/डिजिटल शिक्षा के लाभों का पूरा लाभ उठाते हुए डिजिटल विभाजन की चिंताओं का समाधान किया जा सके. हमारे हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स को भी अच्छे साइबर स्वच्छता आदतों को विकसित करने और साइबर सुरक्षा के नए सामान्य मानकों को अपनाने की आवश्यकता है. यह शिक्षार्थियों और संगठनों को एक सुरक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण और व्यवहार के माध्यम से संभावित साइबर खतरों को कम करने में मदद करेगा.

युगपुरुष धाम आश्रम की मान्यता रद्द, 10 बच्चों की मौत के बाद प्रशासन ने उठाया कदम

Recognition of Yugpurush Dham Ashram cancelled, administration took action after death of 10 children इंदौर। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर शहर में संचालित युग पुरुष बौद्धिक विकास केंद्र (युगपुरुष धाम आश्रम) की मान्यता शासन ने रद्द कर दी है। सामाजिक न्याय विभाग संचनालय द्वारा मान्यता निरस्त करने का आदेश जारी किया गया है। आश्रम में 10 बच्चों की मौत के बाद कलेक्टर इंदौर ने जांच के आदेश जारी किए थे। जांच में कई लापरवाही सामने आई थी। बच्चों के खाने पीने को लेकर गंभीर लापरवाही मिली थी। बता दें युगपुरुष धाम आश्रम सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाला निजी आश्रम है। वहां प्रदेश से करीब 200 से अधिक मानसिक-शारीरिक दिव्यांग अनाथ बच्चों को रखा जाता था। युगपुरुष धाम आश्रम पर दिव्यांग बच्चों के आश्रम के अलावा अस्पताल भी संचालित किया जाता है। वहां करीब हर तरह के प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध होने का दावा किया जाता था। पिछले दो महीनों में आश्रम के 10 बच्चों की मौत हुई थी। बच्चों में खून की कमी और इंफेक्शन के कारण मौत की बातें सामने आई थी।

राजस्थान के 90 हजार छात्रों को सर्जरी की जरूरत, शिक्षा और चिकित्सा विभाग मिलकर कराएगा उपचार

जयपुर  सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले करीब 90 हजार छात्रों को किसी न किसी तरह की सर्जरी की जरूरत है. इनमें से अधिकतर के हृदय की स्थिति, कटे होंठ, क्लब्स पैर जैसी समस्याएं पाई गई हैं. जिनका उपचार अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग मिलकर करवाएगा. प्रदेश के छात्रों के सर्वांगिण विकास को ध्यान में रखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने अगस्त-सितंबर महीने में पैपरलैस डिजीटल स्वास्थ्य सर्वे कराया था. जिसमें सरकारी स्कूलों के सभी विद्यार्थियों का हैल्थ सर्वे कर ऐसे छात्रों की पहचान की गई जिन्हें मेडिकल नीड्स है. इस डिजीटल सर्वे से मिले आंकड़ों के अनुसार करीब 90 हजार छात्रों में हृदय की स्थिति, कटे होंठ, क्लब्स पैर जैसी समस्याएं सामने आई है. सर्जिकल रिक्वायरमेंट वाले इन छात्रों का डेटा स्थानीय स्तर पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उपलब्ध करवा दिया गया है. इस संबंध में शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब चिकित्सीय सहायता के लिए पहले चरण में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ शिक्षा विभाग के समन्वय से सर्जरी की आवश्यकता वाले छात्रों की कार्ययोजना बनाकर त्वरित रूप से क्रियान्वयन किया जाना है. इसके लिए ब्लॉक स्तर पर मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी चिह्नित छात्रों की सर्जरी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की टीम के जरिए करवाया जाना सुनिश्चित करेंगे. वहीं मुख्य शिक्षा अधिकारी और जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी ब्लॉक स्तर से जिले पर भेजे गए चिह्नित विद्यार्थियों की सर्जरी जिला अस्पतालों में कराएंगे और जो सर्जरी जिला अस्पताल स्तर पर उपलब्ध न हो उसे राज्य स्तर पर करवाया जाएगा. उन्होंने बताया कि यदि किसी छात्र का परिवार RBSK के अन्तर्गत पात्र नहीं है, तो उन्हें आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत जोड़कर योजनाबद्ध तरीके से लाभ पहुंचाया जाएगा. इस कार्ययोजना के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग हर 15 दिन में जिला कलेक्टर करेंगे. आपको बता दें कि शाला स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम के तहत लगभग 75 लाख छात्रों का स्वास्थ्य और स्वच्छता स्थितियों से संबंधित 70 प्रश्नों के जरिए सर्वेक्षण किया गया. जिसमें विद्यार्थियों के प्रमुख लक्षणों, पोषण संबंधी कमियों, शारीरिक मापदंडों और भावनात्मक मुद्दों सहित महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी ली गई थी. 15 दिन में कलेक्टर करेंगे मॉनिटरिंग शिक्षा विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया- इसके साथ ही मुख्य शिक्षा अधिकारी और जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी ब्लॉक स्तर से जिले पर भेजे गए स्टूडेंट्स की सर्जरी जिला हॉस्पिटल में कराएंगे। इसके साथ ही जो सर्जरी जिला हॉस्पिटल स्तर पर उपलब्ध नहीं है, उसे राज्य स्तर पर करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगर किसी स्टूडेंट का परिवार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के पात्र नहीं है। उन्हें आयुष्मान भारत योजना से जोड़कर इलाज कराया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग हर 15 दिन में जिला कलेक्टर करेंगे। बता दें कि शाला स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम के तहत लगभग 70 लाख छात्रों का स्वास्थ्य और स्वच्छता स्थितियों से संबंधित 70 सवालों के जरिए सर्वे किया गया था। इनमें स्टूडेंट्स को अलग-अलग तरह की समस्या आई थी। इसके बाद 90 हजार स्टूडेंट्स की अलग-अलग तरह से सर्जरी कराने का फैसला किया था।

होटल और रेस्टॉरेंट असोसिएशन ने शराब परोसने के नियम सख्त किए, शराब पीने वाले ग्राहकों के लिए ड्राइवर और ओला-उबर की व्यवस्था होगी

मुंबई नए साल के जश्न के दौरान लोगों को फुल नाइट पार्टी करने की छूट सरकार ने प्रदान कर दी है। 31 दिसंबर की रात फुल नाइट पार्टी के दौरान किसी भी प्रकार का खलल रोकने का प्लान होटल असोसिएशन ने तैयार कर लिया है। जश्न के दौरान लोगों के पैर लड़खड़ाने से पहले असोसिएशन ने ग्राहकों को अलर्ट करने का निर्णय लिया है। इसके लिए होटल असोसिएशन ने ग्राहकों को चार लार्ज पैक देने के बाद ग्राहकों को शराब नहीं पीने की अपील करने का फैसला लिया है, जिससे शराब के नशे में पार्टी के दौरान या पार्टी से घर लौटे वक्त ग्राहकों से कोई गलती न हो जाए। होटल एंड रेस्टॉरेंट असोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया ( एचआरएडब्ल्यूआई ) के सचिव प्रदीप शेट्टी के मुताबिक, 31 दिसंबर की पार्टी के संदर्भ में लिए गए फैसले की जानकारी सभी सदस्यों को दे दी गई है। ग्राहकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी निर्णय लिए गए हैं। चार पैक पीने के बाद ग्राहकों के टल्ली होने पर होटल मालिकों को ग्राहकों को सुरक्षित घर पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। चेक होगी आईडी नए साल का स्वागत करने के लिए मुंबई के कई होटलों में बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। इस साल कम उम्र के ग्राहकों को शराब परोसने और होटल से बाहर निकलने के बाद ग्राहक द्वारा एक्सिडेंट करने का मामला सामने आने के बाद असोसिएशन अधिक सतर्क हो गया है। शेट्टी के अनुसार, पार्टी के लिए बार टेंडर को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया गया है। अप्रिय घटना को रोकने के लिए ग्राहकों की आईडी कार्ड की जांच करने के लिए सदस्यों को कहा गया है। विशेषकर के युवाओं के आईडी कार्ड जरूर देने को कहा गया है। किराए पर ड्राइवर एचआरएडब्ल्यूआई के पूर्व अध्यक्ष कमलेश बरोट के अनुसार, पार्टी के दौरान ग्राहकों को शराब परोसने के साथ ही उन पर नजर भी रखी जाएगी। ग्राहकों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए होटल की तरफ से गाड़ी मालिकों को किराये पर ड्राइव उपलब्ध करवाया जाएगा। वहीं, जिन ग्राहकों के पास गाड़ी नहीं है उन्हें ओला-उबर बुक कर घर भेजा जाएगा। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए होटल परिसर में डोंट ड्रिंक एंड ड्राइव के पोस्टर लगाए गए हैं। सरकार ने 31 दिसंबर की रात होटल और रेस्टॉरेंट को सुबह 5 बजे तक खुले रखने की अनुमति दी है। हादसों के बाद लेना पड़ा ऐसा फैसला कुछ महीने पहले पुणे में एक होटल में तय उम्र की सीमा से कम आयु के युवा को शराब परोसने का मामला सामने आया था। शराब के नशे में तेज रफ्तार से कार चलाते हुए युवा ने दो लोगों को टक्कर मार दी थी। नामी परिवार से होने और परिवार द्वारा कार चालक को बचाने के प्रयास के कारण यह केस पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था। 31 दिसंबर की रात बहुत से लोग शराब पीकर जश्न मनाते हैं। इस वजह से असोसिएशन शराब परोसते वक्त आयु की जांच करने के लिए आई कार्ड चेक करने और शराब पी चुके लोगों के लिए किराए का ड्राइवर मुहैया कराने की योजना बनाई है।  

डेढ़ लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को मिलेंगे जमीन के पट्टे, पीएम मोदी करेंगे शिरकत

नई दिल्ली  केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय की ओर से दस राज्यों और दो केन्द्र शासित प्रदेशों के 50 हजार गांवों में 58 लाख स्वामित्व संपत्ति कार्ड वितरणआज  शुक्रवार को होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कार्ड का ई-तिरण करेंगे। वहीं राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ समेत 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों समेत कई केन्द्रीय मंत्री अलग-अलग शहरों में कार्ड वितरण समारोह में शामिल होंगे।  पंचायती राज मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से गांवों की संपत्तियों का ड्रोन सर्वे व उनके स्वामित्व संपत्ति कार्ड बनाने का कार्यक्रम पिछले चार साल से चला रखा है। इसके तहत अब तक 31 राज्यों के 3 लाख 17 हजार से अधिक गांवों में करीब 2.19 करोड़ स्वामित्व संपत्ति कार्ड बन चुके हैं। इसके तहत शुक्रवार को देश भर में लगभग 20 हजार स्थानों पर अभिविन्यास कार्यक्रम आयोजित कर कार्ड वितरित किए जाएंगे। मोदी के साथ केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, केंद्रीय पंचायतीराज राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज मौजूद रहेंगे। समारोह में प्रदेशो के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और हितधारक भी वर्चुअल रूप से शामिल होंगे। 6 केन्द्रीय मंत्री कल राजस्थान में रहेंगे केन्द्र सरकार की ओर से 13 केन्द्रीय मंत्रियों को राज्यों में जाकर इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भेजा जा रहा है। इनमें से 6 मंत्री राजस्थान के शहरों में रहेंगे। इनमें केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा जयपुर, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जोधपुर, वन व पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव अलवर, महिला बाल विकास मंत्री अनपूर्णा देवी कोटा, कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल बीकानेर, कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी अजमेर में रहकर इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। जबकि संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर में इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जयपुर, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सियोनी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री धामतारी में होने वाले इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। कहां कितने कार्ड तैयार प्रदेश     गांवों की संख्या     कार्ड संख्या (लाखों में) मध्यप्रदेश     43014                 32.53 राजस्थान          36312                7.18 छत्तीसगढ़     15791              1.84   राजस्थान के 1.50 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को स्वामित्व योजना के तहत जमीन के पट्टे दिए जाएंगे। 27 दिसंबर को राज्य के सभी 33 जिला मुख्यालयों पर संपत्ति कार्ड का वितरण किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली शामिल होकर लाभार्थियों को संबोधित करेंगे। इस अवसर पर प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय आयोजन किया जाएगा, जहां लाभार्थियों को बुलाकर उनके नाम संपत्ति कार्ड सौंपे जाएंगे। जानकारी के अनुसार, राजस्थान की 3526 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 7522 गांवों के निवासियों को ये पट्टे वितरित किए जाएंगे। 27 दिसंबर को केंद्र सरकार की पहल पर देशभर की 29,127 ग्राम पंचायतों के 46,251 गांवों में कुल 58 लाख संपत्ति कार्ड वितरित किए जाएंगे। इनमें से राजस्थान के 1,50,778 लाभार्थियों को भी संपत्ति कार्ड मिलेंगे। राजस्थान में यह कार्यक्रम मुख्य रूप से 33 जिला मुख्यालयों पर आयोजित होगा। हालांकि, अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में बने नए जिलों की समीक्षा प्रक्रिया अभी जारी है। स्वामित्व योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने 24 अप्रैल 2020 को की थी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन का सीमांकन ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक से करना है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को उनके अधिकारों का रिकॉर्ड (संपत्ति कार्ड) प्रदान किया जाता है। इन कार्ड्स का उपयोग ग्रामीण परिवार बैंक से ऋण लेने और अन्य वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कर सकते हैं। इससे उनकी संपत्ति को वित्तीय संपत्ति के रूप में मान्यता मिलेगी। अब तक इस योजना के तहत देशभर में 1.37 करोड़ संपत्ति कार्ड जारी किए जा चुके हैं।

महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2023 की तुलना में हुई कम

उज्जैन उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर के विस्तार का कार्य तेजी से जारी है। यह परिसर पहले 25 हजार वर्गफीट में फैला हुआ था, लेकिन अब इसका क्षेत्रफल बढ़ाकर 78 हजार वर्गफीट कर दिया गया है। महाकाल महालोक के निर्माण और जीर्णोद्धार कार्यों पर बड़े पैमाने पर धनराशि खर्च की जा रही है। पहले चरण में 351.55 करोड़ रुपए, लोकार्पण से पहले के कार्यों पर 44.32 करोड़ रुपए, और दूसरे चरण में 755.82 करोड़ रुपए का खर्च किया गया है। इस तरह कुल 1 हजार151 करोड़ रुपए की लागत से यह परियोजना आकार ले रही है। हालांकि पिछले साल की तुलना में इस बार कम श्रद्धालु बाबा के दरबार में आए। श्रद्धालुओं की संख्या में कमी     महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2023 की तुलना में 2024 के आखिरी पांच महीनों (अगस्त से दिसंबर) में कुछ कम हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, 1 अगस्त से 31 दिसंबर 2023 तक मंदिर में 3 करोड़ 91 लाख 94 हजार 796 श्रद्धालु पहुंचे थे। वहीं, 2024 में 1 अगस्त से 22 दिसंबर तक यह संख्या घटकर 3 करोड़ 09 लाख 49 हजार 193 पर आ गई।       हालांकि, मंदिर प्रशासन का कहना है कि दिसंबर के आखिरी 9 दिनों में करीब 25 लाख श्रद्धालु आने की संभावना है। मंदिर प्रशासक गणेशकुमार धाकड़ के अनुसार, श्रद्धालुओं के लिए नवीनतम तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उनके दर्शन का अनुभव बेहतर हो।   2023 में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक क्यों रही?     अधिकमास का प्रभाव: वर्ष 2023 में श्रावण माह में अधिकमास होने के कारण सावन 59 दिनों का था। इस दौरान 10 शाही सवारियां निकाली गईं, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई।       महालोक का आकर्षण: महाकाल महालोक के पहले चरण का कार्य पूरा होने के बाद श्रद्धालु न केवल ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने आए, बल्कि महालोक के भव्य नजारों का आनंद लेने भी पहुंचे।       भस्म आरती में बदलाव: भस्म आरती को ऑनलाइन, ऑफलाइन और चलित स्वरूप में संचालित किया गया, जिससे ज्यादा श्रद्धालु आकर्षित हुए। इस व्यवस्था को पहले केवल 2016 के सिंहस्थ मेले में लागू किया गया था।   2024 में आधुनिक तकनीकों का उपयोग श्रद्धालुओं के अनुभव को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए 2024 में आरएफआईडी (रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) बैंड का उपयोग शुरू किया गया। यह व्यवस्था भस्म आरती में प्रवेश के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और बिना अनुमति वाले लोगों को परिसर में आने से रोकती है। मंदिर प्रशासन का दावा है कि अब केवल उन्हीं भक्तों को प्रवेश मिल रहा है, जिन्होंने पहले से अनुमति प्राप्त की है।   भविष्य की योजनाएं और प्रशासन की तैयारी मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगातार नई योजनाओं पर काम कर रहा है। दर्शन के दौरान भीड़ प्रबंधन से लेकर हाई-टेक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा, महालोक के दूसरे चरण का कार्य भी प्राथमिकता पर है।

मध्य प्रदेश में वर्ष 2030 तक कुल बिजली की खपत के 50% हिस्से की पूर्ति सौर, पवन और जल विद्युत से करने का लक्ष्य रखा

भोपाल  मध्य प्रदेश में वर्ष 2030 तक कुल बिजली की खपत के 50 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति सौर, पवन और जल विद्युत से करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब सरकार ने तय किया है कि पांच मेगावाट तक का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने वालों से उत्पादित बिजली खरीदी जाएगी। इतना ही नहीं, परियोजना लागत पर 30 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाएगा। इसके लिए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के कुसुम सी योजना के प्रस्ताव पर गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। दिल्ली मेट्रो को दी जा रही बिजली वर्ष 2012 में प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 500 मेगावाट थी। वर्तमान में यह सात हजार मेगावाट हो गई है, जो राज्य की कुल ऊर्जा क्षमता का 21 प्रतिशत है। रीवा सौर ऊर्जा परियोजना से दिल्ली मेट्रो को बिजली दी जा रही है तो अप्रैल 2024 से भारतीय रेल को प्रतिदिन 195 मेगावाट बिजली दी जा रही है। इसका उपयोग वह गोवा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में ट्रेनों के संचालन में कर रहा है। दिन में उत्पादित इस ऊर्जा का उपयोग अधिक से अधिक करने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी औद्योगिक इकाइयों को दिन में खपत बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। एक अप्रैल 2025 से घरेलू उपभोक्ताओं को भी दिन में विद्युत की खपत पर ऊर्जा प्रभार में 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इस तरह के अन्य कदम भी उठाए जा रहे हैं। अब कुसुम सी योजना में पांच मेगावाट तक के सौर ऊर्जा संयंत्रों से उत्पादित बिजली सरकार खरीदेगी। 30 प्रतिशत तक अनुदान भी दिया जाएगा। इसके साथ ही पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना का शिलान्यास होने के बाद इसे प्रशासकीय स्वीकृति के लिए कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। 3 हजार से ज्यादा गांवों को मिलेगा लाभ परियोजना से श्योपुर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोक नगर, आगर, इंदौर, धार, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, सीहोर जिले में पीने के पानी और सिंचाई की व्यवस्था होगी। इसका लाभ प्रदेश के 3,217 ग्रामों को लाभ मिलेगा। मालवा और चंबल क्षेत्र में छह लाख 13 हजार 520 हेक्टेयर में सिंचाई होगी और 40 लाख की आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा।

एम्स भोपाल ने किया देश का दूसरा सफल हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट

 भोपाल  एम्स भोपाल ने बच्चों में रक्त कैंसर के इलाज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने हाल ही में एक सात वर्षीय बच्ची का सफल हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया है, जो रिलेप्स्ड एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (बाल्य रक्त कैंसर) से पीड़ित थी। पहले एम्स दिल्ली में ऐसा प्रत्यारोपण किया जा चुका है एम्स भोपाल यह सफल ऑपरेशन करने वाला दूसरा अस्पताल बन गया है। इसके पहले एम्स दिल्ली में ऐसा प्रत्यारोपण किया जा चुका है। यह जटिल प्रक्रिया एम्स भोपाल के चिकित्सा ऑन्कोलॉजी और हीमेटोलॉजी विभाग के डॉ. गौरव ढींगरा और डॉ. सचिन बंसल के नेतृत्व में की गई। बच्ची का इलाज बाल्य आन्कोलाजी विभाग में डॉ. नरेंद्र चौधरी की देखरेख में हो रहा था। ट्रांसप्लांट के लिए मरीज के भाई को डोनर के रूप में चुना गया, जो आधे एचएलए (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) में मेल खाते थे। क्या है हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट एम्स के हीमेटोलाजी विभाग के डा. गौरव ढींगरा ने बताया कि यह सामान्य बोन मैरो ट्रांसप्लांट से कई गुना अधिक जटिल प्रक्रिया है। इसमें रोगी को आधे एचएलए मिलान वाले डोनर से स्टेम सेल दिए जाते हैं। जहां एक तरफ मैच्ड बोन मैरो ट्रांसप्लांट में डोनर और रिसीवर के 12 के 12 जीन मेल खाते हैं और सफलता दर 60 फीसद होती है, वहीं हापलो आइडेंटिकल में सिर्फ छह जीन ही मेल खाते हैं। ट्रांसप्लांट के सफल होने की दर सिर्फ 30 प्रतिशत रहती है। भाई को डोनर के रूप में चुना गया बच्ची का इलाज एम्स भोपाल के बाल्य आन्कोलाजी विभाग में डॉ. नरेंद्र चौधरी की देखरेख में हो रहा था। ट्रांसप्लांट के लिए मरीज के भाई को डोनर के रूप में चुना गया, जो आधे एचएलए (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) में मेल खाते थे। एम्स के हीमेटोलाजी विभाग के डॉ. गौरव ढींगरा ने बताया कि यह सामान बौनमेरौ ट्रांसप्लांट से कई गुना अधिक जटिल प्रक्रिया है। जहां एक तरफ मैच्ड बोनमैरो ट्रांसप्लांट में 12 के 12 जीन डोनर और रिसीवर के मेल खाते हैं। इसमें भी सफलता दर 60 फीसदी होती है। हेप्लो आइडेंटिकल में सिर्फ छह जीन ही मेल खाते हैं। इस ट्रांसप्लांट के सफल होने की दर सिर्फ 30 प्रतिशत के करीब रहती है। ऐसे हुआ प्रत्यारोपण सबसे पहले पीड़ित बच्चे के भाई से स्टेम सेल निकाले गए। इसके बाद बच्चे को फुल बाडी रेडिएशन दिया गया। इससे उसकी बाडी इंफेक्शन मुक्त और इम्यूनिटी भी बेहद कम हो जाए। इससे रिसीवर की बाडी डोनर से आए स्टेम सेल को खत्म नहीं कर पाती है। इसके साथ ध्यान रखा गया कि डोनर के स्टेम सेल रिसीवर के सेल्स को मारने का कार्य न करें। यह एक बेहद और बहु स्तरीय प्रक्रिया है। इसमें कई फैक्टर्स को एक साथ निगरानी करना होता है। क्या है हापलो आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें रोगी को आधे एचएलए मिलान वाले डोनर से स्टेम सेल दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया उन रोगियों के लिए एक आशा की किरण है, जिनके लिए पारंपरिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट उपलब्ध नहीं है। मरीज को माइलो-अब्लेटिव कंडीशनिंग रेजिमेन के तहत संपूर्ण शरीर की रेडियोथेरेपी (टोटल बाडी इरैडिएशन) दी गई, जिसे रेडिएशन आन्कोलाजी विभाग के डॉ. सैकत दास, डॉ. विपिन खराडे और भौतिक विज्ञानी (आरएसओ) अवनीश मिश्रा द्वारा सफलतापूर्वक संचालित किया गया। रक्त कैंसर के इलाज में नई उम्मीद जगाएगा     यह एम्स भोपाल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने से यह स्पष्ट होता है कि हमारे संस्थान में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह बच्चों में रक्त कैंसर के इलाज में एक नई उम्मीद जगाएगा। – प्रो. डॉ. अजय सिंह, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल  

MP में जमीन रजिस्ट्री पर बड़ा बदलाव, 24 घंटे स्लॉट, उसी दिन रजिस्ट्री; एक दिन का भी इंतजार नहीं

भोपाल मध्य प्रदेश में घर प्लॉट की रजिस्ट्री को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. इस नए सिस्टम के तहत अब लोगों को घर प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. दरअसल, एमपी में रेलवे के तत्काल टिकट सिस्टम की तरह घर-प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए भी तत्काल सिस्टम लागू होने जा रहा है. यह सिस्टम आने वाले तीन महीने में शुरू हो जाएगा. इस सुविधा के शुरू हो जाने से न तो पंजीयन कार्यालय जाने की जरूरत पड़ेगी और न ही स्लॉट के लिए इंतजार करना पड़ेगा. बल्कि नए सिस्टम के लागू होने के बाद स्लॉट की औपचारिकता पूरी होने पर तत्काल रजिस्ट्री हो जाएगी. देना होगा अतिरिक्त चार्ज इसके लिए प्रॉपर्टी खरीदने वाले को अतिरिक्त चार्ज देना होगा. हालांकि यह चार्ज कितना होगा, यह तय नहीं हुआ है. लेकिन माना जा रहा है कि यह एक्स्ट्रा चार्ज 3000 रुपए तक हो सकता है. बताते चले कि छत्तीसगढ़ में तत्काल रजिस्ट्री के लिए 25 हजार रुपए चार्ज लगता है. जबकि गोवा में तत्काल रजिस्ट्री के लिए 50 हजार से 2 लाख रुपए तक एक्स्ट्रा चार्ज देना पड़ता है. इन राज्यों में है सबसे अधिक फीस गौरतलब है कि गोवा और छत्तीसगढ़ के अलावा कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा में भी लोगों को तत्काल रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध है. लेकिन इन प्रदेशों में तत्काल रजिस्ट्री की फीस बहुत अधिक ली जाती है. पंजीयन से जुड़े अधिकारियों की मानें तो मध्य प्रदेश में बाकि राज्यों की तुलना में बहुत कम फीस लगेगी. एमपी में तत्काल रजिस्ट्री की सुविधा लागू होने के बाद ऑनलाइन ही स्लॉट बुक हो जाएगा और उसी दिन रजिस्ट्री भी हो जाएगी. प्रकिया जैसे ही पूरी होगी वैसे ही रजिस्ट्री का पीडीएफ आपके मोबाइल पर चला जाएगा. जानिए क्या है रजिस्ट्री का प्रोसेस जिल जिले में जमीन खरीद-फरोख करनी होगी, उस जिले के पंजीयन कार्यलम में कम से कम एक दिन पहले स्लॉट बुक करना होता है. यह स्लॉट सरकार के चिह्नित सर्विस प्रोवाइडर के जरिए बुक होता है. इसके अगले दिन दोनों पक्षों को गवाहों और दस्तावेजों के साथ हाजिर होना पड़ता है. ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग के लिए भी एक दिन पहले सर्विस प्रोवाइडर के जरिए स्लॉट बुक करना होता है. इसके बाद इसकी डिटेल रजिस्टार के लॉग इन पर चली जाएगी. इसके बाद अगले दिन निर्धारित समय पर संपदा-2 पोर्टल के जरिए ऑनलाइन जुड़ना होता है. लेकिन इसमें दोनों पक्ष का एक जगह-एक साथ होना अनिवार्य होता है. तत्काल बुकिंग की प्रकिया तत्काल स्लॉट बुकिंग के लिए आईजी पंजीयन कार्यालय में एक सेंटर बनाया जा रहा है. इसमें तत्काल रजिस्ट्री के लिए अलग टीम बनाई जाएगी. शुरुआत में तत्काल रजिस्ट्री प्रकिया के लिए 5 सब-रजिस्ट्रार तैनात रहेंगे. बाद में डिमांड को देखते हुए इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है. जो व्यक्ति तत्काल स्लॉट बुक करेगा, उसे ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से जोड़ा जाएगा. तत्काल रजिस्ट्री की सबसे खास बात यह है कि इसके जरिए दुनिया के किसी भी कोने से उसी दिन रजिस्ट्री संभव हो सकेगी. तीन तरीके से हो सकेगी रजिस्ट्री… तत्काल के लिए पंजीयन ऑफिस में बनेगा अलग सेटअप 1. पंजीयन कार्यालय से : जिस जिले में जमीन की खरीद-फरोख्त करना होती है, उस जिले के पंजीयन कार्यालय में कम से कम एक दिन पहले स्लॉट लेना होता है। सरकार द्वारा चिह्नित सर्विस प्रोवाइडर के जरिए स्लॉट बुक होता है। अगले दिन दोनों पक्षों को गवाहों के साथ दस्तावेज के साथ उपस्थित होना पड़ता है। 2.ऑनलाइन वीडियो कांफ्रेंसिंग से एक दिन पहले सर्विस प्रोवाइडर के माध्यम से स्लॉट बुक करना होता है। यह सब रजिस्टार के लॉगइन पर चला जाएगा। अगले दिन तय समय पर संपदा-2 पोर्टल के जरिए ऑनलाइन जुड़ना होता है। इसमें दोनों पक्ष का एक जगह एक साथ होना अनिवार्य होता है। 3. तत्काल स्लॉट से : इसके लिए आईजी पंजीयन कार्यालय में एक सेंटर बनाया जा रहा है। इसमें तत्काल रजिस्ट्री के लिए अलग टीम रहेगी। शुरुआत में 5 सब-रजिस्ट्रार तैनात रहेंगे। बाद में इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। जो व्यक्ति तत्काल स्लॉट बुक करेगा, वह ऑनलाइन वीडियो के जरिए जुड़ जाएगा। ये फायदे… 1. ऑनलाइन ही स्लॉट बुक हो जाएगा और उसी दिन रजिस्ट्री भी हो जाएगी। 2. प्रक्रिया पूरी होते ही रजिस्ट्री की पीडीएफ आपके मोबाइल पर होगी। देश में प्रदेश में यह व्यवस्था है अभी ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से रजिस्ट्री की सुविधा है। हमारा प्रयास है कि लोगों को रजिस्ट्री के लिए एक दिन का भी इंतजार न करना पड़े। – स्वप्नेश शर्मा, वरिष्ठ जिला पंजीयक भोपाल तत्काल में इस तरह होगी प्रक्रिया जो भी व्यक्ति तत्काल रजिस्ट्री के लिए स्लॉट बुक करेगा, वह संपदा 2 पोर्टल के जरिए ऑनलाइन वीडियो से जुड़ जाएगा। इसमें जमीन बेचने वाला और खरीदने वाला, दोनों पक्ष एक साथ एक ही जगह होना अनिवार्य रहेगा। उन्हें अपने साथ अपना पहचान पत्र भी रखना होगा। लॉगइन करते ही ही संबंधित पक्ष के आधार नंबर से लिंक मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा। यह ओटीपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े सब-रजिस्ट्रार को बताना होगा। ओटीपी के सत्यापित होते ही रजिस्ट्री के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। सब कुछ सही होने पर रजिस्ट्री पूरी हो जाएगी।

भाजपा को 2244 करोड़, BRS को मिला कांग्रेस से ज्यादा चंदा, जानें किस पार्टी को मिला कितना डोनेशन

नई दिल्ली राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी शेयर कर की है। ECI द्वारा जारी डाटा के मुताबिक 2023-2024 में BJP को अन्य पार्टियों मुकाबले 2,244 करोड़ का चंदा मिला है। पिछले 10 साल से केंद्र की सत्ता पर काबिज BJP को पिछले साल के मुताबिक तीन गुना ज्यादा चंदा मिला है। इसके अलावा कांग्रेस को 255 करोड़ रुपये का डोनेशन मिला है। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस की बात करें तो उसे भी पिछले साल के मुकाबले तगड़ा मुनाफा हुआ है। पार्टी को पिछले साल 79 करोड़ रुपये का चंदा मिला था, जबकि इस साल 255 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। चुनाव आयोग ने जारी की है रिपोर्ट चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध 2023-24 की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी को प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से 723.6 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जबकि इसी ट्रस्ट ने कांग्रेस को 156.4 करोड़ रुपए दिए। 2023-24 में BJP को मिले चंदे का लगभग एक तिहाई और कांग्रेस को मिले चंदे का आधे से ज्यादा हिस्सा प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से आया है। इसके अलावा 2022-23 में प्रूडेंट को चंदा देने वालों में मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रा लिमिटेड, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, आर्सेलर मित्तल ग्रुप और भारती एयरटेल जैसी बड़ी कंपनियां शामिल थीं। 2023-24 के लिए प्रूडेंट ने अभी अपने चंदा देने वालों की लिस्ट जारी नहीं की है। क्षेत्रीय पार्टियों ने भी दी है चंदे की जानकारी बता दें कि देश की कुछ क्षेत्रीय पार्टियों ने भी अपनी मर्जी से चंदे का हिसाब किताब दिया है और बताया है कि उन्हें इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए कितना चंदा मिला है। इनमें बीआरएस भी शामिल है, जिसे बॉन्ड के जरिए 495.5 करोड़ रुपये मिले। वहीं डीएमके को 60 करोड़ रुपये और वाईएसआर कांग्रेस को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए से 121.5 करोड़ रुपये मिले हैं। जेएमएम ने बॉन्ड के जरिए 11.5 करोड़ रुपये मिलने की घोषणा की है। कांग्रेस पार्टी को ट्रस्टों के जरिए 156 करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा मिला है। प्रूडेंट ने 2023-24 में BRS और YSRCP को 85 करोड़ रुपये और 62.5 करोड़ रुपये डोनेशन दिया था। आंध्र प्रदेश की वर्तमान सत्ताधारी पार्टी की बात करें तो टीडीपी को प्रूडेंट से 33 करोड़ रुपये मिले। वहीं डीएमके को ट्राइंफ इलेक्टोरल ट्रस्ट और जयभारत ट्रस्ट से 8 करोड़ रुपये मिले। चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु: – बीजेपी को प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से 723.6 करोड़ रुपये का चंदा मिला। यह पार्टी को मिले कुल चंदे का लगभग एक-तिहाई है। – कांग्रेस को प्रूडेंट ट्रस्ट से 156.4 करोड़ रुपये मिले, जो उसके कुल चंदे का आधे से अधिक है। – प्रूडेंट ट्रस्ट को 2022-23 में मेघा इंजीनियरिंग, सीरम इंस्टीट्यूट, आर्सेलर मित्तल और भारती एयरटेल जैसी कंपनियों से चंदा मिला था। 2023-24 के लिए दानदाताओं की सूची अभी जारी नहीं की गई है। क्षेत्रीय दलों की स्थिति: – बीआरएस को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 495.5 करोड़ रुपये मिले। – वाईएसआर कांग्रेस को 121.5 करोड़ रुपये का चंदा मिला। – डीएमके को 60 करोड़ रुपये और **जेएमएम** को 11.5 करोड़ रुपये का बॉन्ड मिला। – प्रूडेंट ट्रस्ट ने 2023-24 में बीआरएस को 85 करोड़ और वाईएसआर कांग्रेस को 62.5 करोड़ रुपये दिए। – टीडीपी को प्रूडेंट से 33 करोड़ रुपये का चंदा मिला। – डीएमके को ट्राइंफ इलेक्टोरल ट्रस्ट और जयभारत ट्रस्ट से 8 करोड़ रुपये मिले।

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