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कश्मीर में बर्फीले तूफान के कारण पर्यटक फंसे, सेना ने 68 लोगों को बचाया

 जम्मू भारतीय सेना ने गुलमर्ग जाते वक्त रास्ते में फंसे कई पर्यटकों को बचाया है। भारतीय सेना की चिनार कोर ने इस मिशन को अंजाम दिया है। चिनार वॉरियर्स को सिविल प्रशासन से पर्यटकों के फंसे होने की जानकारी मिली थी। इसके मुताबिक पर्यटक गुलमर्ग और तानमार्ग जा रहे थे। इसी दौरान भारी बर्फबारी के चलते पर्यटक यहां पर फंस गए थे। चिनार कोर के मुताबिक इस दौरान कुल 68 लोगों को बचाया गया। इनमें 30 महिलाएं, 30 पुरुष और 8 बच्चे शामिल हैं। इसके बाद सभी 137 पर्यटकों को गर्म खाना, शेल्टर और दवाएं भी मुहैया कराई गईं। चिनार वॉरियर ने इसको लेकर ट्वीट में जानकारी दी है। इसमें बताया है कि चिनार कोर को सिविल एडमिनिस्ट्रेशन से कॉल मिली थी। इसके बाद इस बचाव कार्य को अंजाम दिया गया। इसके मुताबिक चिनार वॉरियर्स ने कुलगाम के मुनाद गांव से एक गर्भवती महिला को निकालने के लिए एक आपातकालीन संकट कॉल का जवाब दिया। भारी बर्फबारी के बीच बचाव दल समय पर घटनास्थल पर पहुंच गया। तत्काल जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और रोगी को यारीपोरा के सरकारी अस्पताल में ले जाया गया। गौरतलब है कि चिनार कोर का नाम यहां के चिनार वृक्ष के नाम पर रखा गया है। सेना का यह दल जम्मू कश्मीर के पूर्वी और उत्तरी इलाकों में सुरक्षा इंतजाम देखती है। बता दें कि जम्मू कश्मीर में मौसम खराब है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग स्थित काजीगुंड कस्बे में बर्फबारी में करीब 2000 वाहन फंस गए हैं। सीएम ने बताया कि उन्होंने अनंतनाग के डिप्टी कमिश्नर से बात की है। उन्होंने लिखा कि डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि भारी वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जा रही है और बाकी फंसे हुए वाहनों को निकालने के प्रयास जारी हैं। सीएम ने आगे लिखा कि बर्फीले मौसम के कारण यातायात का बैक अप लेना पड़ा है। फंसे हुए वाहन, दोनों दिशाओं में, धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं और जहां आवश्यक हो, सहायता की जा रही है।

28 एवं 29 दिसंबर को होने वाली आरक्षण की कार्यवाही स्थगित

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी  सर्वसाधारण को सूचनार्थ किया जाता है कि त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन 2024-25 के आरक्षण के संबंध में इस कार्यालय द्वारा 28 दिसंबर एवं 29 दिसंबर 2024 को होने वाले आरक्षण की कार्यवाही को छत्तीसगढ़ शासन एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर अटल नगर द्वारा 27 दिसंबर 2024 को जारी नवीन समय सारणी के कारण स्थगित किया जाता है। त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के पदों के आरक्षण की कार्यवाही हेतु जारी समय सारणी को संशोधित कर नवीन समय सारणी जारी की जाती है। जो इस प्रकार है- जिला पंचायत सदस्य, जनपद अध्यक्ष, जनपद सदस्य एवं पंच पद के प्रवर्गवार आरक्षण की कार्यवाही 03 जनवरी 2025 को, जिला पंचायत सदस्य, जनपद अध्यक्ष, जनपद सदस्य, सरपंच एवं पंच पद के प्रवर्गवार आरक्षण की कार्यवाही 08 जनवरी 2025 एवं 10 जनवरी 2025 को जिला पंचायत सदस्य प्रवर्गवार आरक्षण की कार्यवाही कलेक्टर के द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के आरक्षण की सूचना 03 जनवरी 2025 तथा आरक्षण की कार्यवाही एवं जानकारी 11 जनवरी 2025 को प्रेषित करना संचालक पंचायत के द्वारा किया जाना प्रस्तावित है।

इंदौर युगपुरुष धाम पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, जिला प्रशासन ने मान्यता रद्द करने के साथ लिया बडा एक्शन

इंदौर  इंदौर में स्थित युगपुरुष धाम आश्रम की मान्यता जिला प्रशासन ने रद्द कर दी है। आश्रम में पिछले 6 महीनों में 10 मासूम बच्चों ने अपनी जान गंवाई थी। जांच में यह खुलासा हुआ कि इन मौतों का मुख्य कारण खून की कमी और गंभीर संक्रमण था, जो आश्रम की घोर लापरवाही के कारण हुआ। कलेक्टर ने कहा कि इस मामले में आश्रम को नोटिस जारी किया गया था। साथ ही आश्रम के प्रबंधन में भी परिवर्तन किया गया था। इसके बाद सहमति मिलने पर गुरुवार को इस आश्रम में रह रहे 86 दिव्यांग बच्चों को उज्जैन स्थित सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट कर दिया गया है। बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ जांच में पाया गया कि आश्रम में बच्चों को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं दिया जा रहा था। वहीं इस मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी की रिपोर्ट में यह पाया गया कि युग पुरुष धाम संस्था ने लापरवाही बरती है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ बच्चों के शवों को बिना पोस्टमार्टम के ही परिजनों को सौंप दिया गया, जो कि बेहद गंभीर लापरवाही है। इसके बाद संस्था के अध्यक्ष, सचिव और संचालिका को पद से हटाने के आदेश जारी किए गए थे। मामले में उच्च स्तरीय जांच कमेटी ने रिपोर्ट में बताया कि बच्चों की मौत का सिलसिला जून के तीसरे हफ्ते में शुरू हो गया था, लेकिन इसे छिपाया गया था। इलाज के दौरान पता चला था कि वे डिहाइड्रेशन और कुपोषण के शिकार थे। कुछ बच्चों के शव को बिना पोस्टमार्टम किए ही परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद संस्था के अध्यक्ष, सचिव और संचालिका को हटाने के आदेश जारी किए गए थे। कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि मामले में आश्रम को नोटिस दिया था। प्रबंधन में भी बदलाव किया गया था। फिर सहमति के बाद गुरुवार से आश्रम के 86 दिव्यांग (34 बालक और 52 बालिकाएं) बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट करने की प्रक्रिया जारी थी, जो पूरी हो चुकी है। उज्जैन के आश्रम के संस्थापक सुधीर भाई गोयल ने बताया कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में 86 दिव्यांग और बहु-दिव्यांग बच्चे संस्था में स्थानांतरित होकर आए हैं। झूठे दावों की खुली पोल युगपुरुष धाम आश्रम ने दिव्यांग और अनाथ बच्चों को आश्रय, शिक्षा और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने का दावा किया था। पर जांच में यह सब झूठा साबित हुआ। अस्पताल और बच्चों की देखभाल के नाम पर बड़ी लापरवाही सामने आई, जिसमें बच्चों की मौतों को अनदेखा किया गया। 86 बच्चों को किया गया शिफ्ट जिला कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि जांच में मिली अनियमितताओं के कारण आश्रम की मान्यता रद्द कर दी गई है। 86 दिव्यांग बच्चों को उज्जैन स्थित सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट कर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ पंचायत निर्वाचन नियम 1995 (2024) संशोधन नियम के तहत् होगी अजजा व अजा के पदों का आरक्षण

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में पहली बार जिला पंचायत के 10 सदस्यों का निर्वाचन प्रस्तावित है। छत्तीसगढ़ पंचायत निर्वाचन नियम 1995 (2024) संशोधन नियम के अनुसार, नियम 04 के बिंदु क्र. 03 के तहत सबसे पहले अनुसूचित जनजाति का आरक्षण किया जाएगा, इसके बाद अनुसूचित जाति का आरक्षण किया जाएगा। आरक्षण प्रवर्गवार अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति का अवरोही क्रम के प्रतिशत के आधार पर किया जाएगा। इस प्रक्रिया में कुल 10 जिला पंचायत सदस्यों में से अनुसूचित जनजाति के 07, अनुसूचित जाति के 01 और अनारक्षित के 02 पद आरक्षित होंगे। अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के लिए आरक्षित क्षेत्र में अधिकतम प्रतिशत वाले निर्वाचन क्षेत्रों को सर्वप्रथम आरक्षित किया जाएगा। यदि यह निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति प्रवर्ग में उच्चतम स्तर पर आता है तो इस क्षेत्र को छोड़कर निचले क्रम वाले क्षेत्र को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 30 के अंतर्गत जिला पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या में से कम से कम 50 प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। इनमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की महिलाओं के लिए आरक्षित स्थान भी शामिल हैं। इस प्रक्रिया के तहत अनुसूचित जनजाति की कुल 07 सीटों में से 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के आधार पर 04 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। अनुसूचित जाति की कुल 01 सीट में से 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के आधार पर यह 01 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी। अनारक्षित की कुल 02 सीटों में से 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के आधार पर 01 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी। इस प्रकार कुल 10 सीटों में से 06 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। जिला पंचायत में पहली बार निर्वाचन प्रक्रिया संपन्न की जा रही है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में महिलाओं के आरक्षण की प्रक्रिया प्रत्येक प्रवर्ग में लाटरी के माध्यम से की जाएगी। अनुसूचित जाति की 01 सीट होने के कारण यह नियमानुसार महिला के लिए आरक्षित रहेगी। पेसा (PESA) नियम लागू होने के कारण जिले की तीनों जनपद पंचायतों में अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रहेंगे। इनमें से 02 महिला सीटें लाटरी के माध्यम से आरक्षित की जाएंगी।

विज्ञान और समाज के बीच सेतु निर्माण आवश्यक, विज्ञान को व्यवहारिक जीवन के साथ सामंजस्य स्थापित कर कैसे आगे बढ़ सकते है

भोपाल विज्ञान और समाज के बीच सेतु निर्माण आवश्यक है। विज्ञान को व्यवहारिक जीवन के साथ सामंजस्य स्थापित कर कैसे आगे बढ़ सकते है, इस बात को सभी वैज्ञानिक एवं अकादमिक संस्थानों को समझना चाहिए। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सह संगठन सचिव प्रवीण रामदास 11 वें भोपाल विज्ञान मेला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और अन्य महान वैज्ञानिकों के योगदान को हमेशा याद रखते हुए देश हित में विज्ञान से विकास के बारे में कार्य करना चाहिए। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित 11वें भोपाल विज्ञान मेले का शुभारंभ शुक्रवार को जंबूरी मैदान में किया गया। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने ‘विज्ञान की बात, जन-जन के साथ’ की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि विज्ञान को मातृभाषा में समझाना आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। विज्ञान भारती मध्य भारत के अध्यक्ष डॉ. अमोध गुप्ता ने ‘स्वदेशी विज्ञान आंदोलन’ पर प्रकाश डालते हुए स्वदेशी विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सुधीर भदौरिया, विज्ञान भारती ने विज्ञान मेले को ‘एक उत्सव’ की संज्ञा देते हुए कहा कि विज्ञान को समाज में एक सशक्त माध्यम के रूप में अपनाना चाहिए। भोपाल विज्ञान मेले का पहला दिन नवाचार और स्वदेशी विज्ञान के संगम पर आधारित रहा। विद्यालयीन और महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर अपने वैज्ञानिक मॉडल का प्रेजेंटेशन दिया। मेले में 150 से अधिक वैज्ञानिक मॉडल प्रस्तुत किए गए हैं। इस अवसर पर विज्ञान प्रतिभा पुरस्कार से सम्बंधित सत्र आयोजित किया गया जो कि विद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए था। इसमें एम्प्री के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एन. सतीश ने छात्रों के रोचक प्रश्नों के उत्तर दिए। मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना पर भी एक व्याख्यान सत्र हुआ। इसमें विज्ञान के क्षेत्र में युवाओं के लिए कैरियर निर्माण के बारे में भी बात की गयी। 18 से 29 वर्ष के मध्यप्रदेश के युवाओं को विज्ञान एवं कौशल-आधारित प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है। 12वीं या आईटीआई उत्तीर्ण युवा 46 क्षेत्रों और 1,134 पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। प्रबंधन, मीडिया, विधिक सेवाएं, पर्यटन और वित्त जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के साथ किया गया। शनिवार के प्रमुख आकर्षण विज्ञान मेले के दूसरे दिन 28 दिसंबर को विज्ञान के छात्रों के लिए विद्यार्थी विज्ञान संवाद, विज्ञान शिक्षक कार्यशाला, अगरिया जनजाति द्वारा लोहा बनाने की भट्टी का प्रदर्शन, बेल मेटल निर्माण का प्रदर्शन भी किया जायेगा। विद्यार्थियों की मॉडल प्रदर्शनी, कारीगर विज्ञान के प्रदर्शन, क्रिएटिव लर्निंग सेंटर, प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी पेवेलियन, हस्तशिल्प पेवेलियन, औषधीय पौधों का पेवेलियन, कृषि-प्रौद्योगिकी पेवेलियन, प्रमुख वैज्ञानिकों की जीवनी पर पेवेलियन, विभिन्न सरकारी योजनाओं पर पेवेलियन आदि भी होंगे। विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य स्तर के संगठन/संस्थाएँ जैसे डीएई, इसरो, डीआरडीओ, ब्रह्मोस, एनटीपीसी, एनएचडीसी, सीआईएल, सीएसआईआर प्रयोगशालाएँ और कृषि परिषदें अपने सफलतापूर्वक किए गए कार्यों और नवाचारों को प्रदर्शित किया जायेगा।  

पार्क स्ट्रीट इलाके से एक बांग्लादेशी नागरिक को फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया

 कोलकाता कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके से एक बांग्लादेशी नागरिक (Bangladeshi national) को फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने बताया कि वह अवैध रूप से भारत में रह रहा था. यहां फर्जी पहचान पत्र बनवाकर रहने की कोशिश कर रहा था. फिलहाल पुलिस फर्जी दस्तावेजों को बनाने वालों की भी तलाश में जुटी है. एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार शख्स बांग्लादेश के नारैल जिले का रहने वाला है. गुरुवार को इस मामले में सूचना के आधार पर उसे कोलिन्स लेन से पकड़ा गया. जांच में पता चला कि वह साल 2023 से कोलकाता के खिद्दरपुर इलाके में एक किराए के मकान में रह रहा था. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने एक फर्जी आधार कार्ड बनवाया था, जिसमें उत्तर 24 परगना का पता दिया गया था. इसके अलावा आरोपी ने अपने नाम पर एक पैन कार्ड भी बनवाया था. पुलिस ने बताया कि हाल ही में पार्क स्ट्रीट के पास के मार्क्विस स्ट्रीट इलाके से एक अन्य बांग्लादेशी नागरिक को भी फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया था. अब जांच एजेंसियां फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह की तलाश कर रही हैं. वहीं गिरफ्तार व्यक्तियों से पूछताछ जारी है. इससे पहले असम पुलिस ने एक प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन के आठ मिलिटेंट्स को गिरफ्तार किया था, जिनमें से दो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से पकड़े गए थे. यह मामला भारत में विदेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ और उनकी गतिविधियों को लेकर चिंताओं को बढ़ा रहा है. पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी के बाद अवैध रूप से रह रहे अन्य विदेशी नागरिकों की पहचान करने और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क को खत्म करने में मदद मिलेगी.  

क्या बोतल बंद पानी सेफ? वैज्ञानिकों की यह रिसर्च उड़ा देगी आपकी नींद

Is bottled water safe? This research by scientists will blow your mind कुछ साल में हुए रिसर्च में पाया गया कि औसतन एक लीटर पानी की बोतल में 240,000 प्लास्टिक कण पाए जाते हैं.यह एक बहुत ही चिंताजनक आंकड़ा है, क्योंकि नल के पानी के एक लीटर में औसतन 5.5 प्लास्टिक कण होते हैं. नैनोप्लास्टिक के कारण कैंसर, जन्म दोष और प्रजनन जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है. नैनोप्लास्टिक अपने छोटे आकार के कारण खतरनाक होते हैं – जिससे वे सीधे रक्त कोशिकाओं और मस्तिष्क में प्रवेश कर सकते हैं. बोतलों को बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक में आमतौर पर थैलेट्स होते हैं, जिन्हें विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायर्नमेंटल हेल्थ साइंसेज के अनुसार, थैलेट्स ‘विकासात्मक, प्रजनन, मस्तिष्क, प्रतिरक्षा और अन्य समस्याओं से जुड़े हैं’. पॉलियामाइड नामक एक प्रकार का नायलॉन पानी की बोतलों में पाया जाने वाला एक और प्लास्टिक कण था. हाल ही में हुए एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. एक लीटर के पानी की बोतल में लगभग 2, 40,000 प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं. नॉर्मल एक लीटर के पानी की बोतल में पानी पी रहे हैं तो हो सकता है आप प्लास्टिक के टुकड़े पी रहे होंगे. हो सकता है आप प्लास्टिक के कण भी पी रहे होंगे. प्लास्टिक की बोतल में पानी पीना क्योंकि है नुकसानदायक? हमारी खराब लाइफस्टाइल के कारण अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक का खूब इस्तेमाल करते हैं. घर हो या ऑफिस प्लास्टिक बंद बोतल में पानी पीना हम खूब पसंद करते हैं. अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं तो संभल जाएं क्योंकि आपके शरीर में धीमा जहर पहुंच रहा है. प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नाम की संस्थान ने एक स्टडी में डराने वाला खुलासा किया है. जिसमें बताया गया है कि एक लीटर बोतलबंद पानी में करीब 2.40 लाख प्लास्टिक के महीन टुकड़े मौजूद होते हैं.जिसकी वजह से सेहत को गंभीर और जानलेवा खतरे (Bottled Water Harmful Effects) हो सकते हैं.प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नाम की ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक प्लास्टिक के बोतल में पानी पीने के कारण कई गंभीर जानलेवा बीमारी हो सकती है. क्या है रिसर्च हाल ही में कुछ रिसर्च के मुताबिक बोतल में मौजूद बोतल बंद पानी में 100,000 से ज्यादा नैनोप्लास्टिक मिले हैं. यह इतने छोटे कण होते हैं कि ब्लड सर्कुलेशन तक को खराब कर सकते हैं. यह दिमाग और सेल्स को भी नुकसान पहुंचाते हैं. प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से इन बीमारियों का बढ़ता है खतरा? डायबिटीज और दिल की बीमारी हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिसर्च के अनुसार, पॉली कार्बोनेट की बोतलों के पानी में बिस्फेनॉल ए केमिकल होता है, जो जब शरीर में जाता है तो दिल की बीमारियों और डायबिटीज का खतरा कई गुना तक बढ़ा सकता है. कैंसर का खतरा एक्सपर्ट्स के मुताबिक प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ता है. इससे ब्रेस्ट और ब्रेन कैंसर का जोखिम बढ़ता है. प्लास्टिक बर्तन में रखी गर्म चीजों को खाने से बचना चाहिए. Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- ई-मंडी योजना एक जनवरी से प्रदेश की बी-क्लास की 41 मंडियों में विस्तारित की जा रही है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ई-मंडी योजना एक जनवरी 2025 से प्रदेश की बी-क्लास की 41 मंडियों में विस्तारित की जा रही है। मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मंडी बोर्ड) अपनी महत्वपूर्ण ई-मंडी योजना का विस्तार कर रहा है। पूर्व से ई-मंडी योजना 42 मंडियों में क्रियाशील है। मंडियों को सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिये प्रदेश में निरंतर कार्य किया जा रहा है। ई-मंडी योजना से किसान मंडियों में अपनी उपज के विक्रय के लिये स्वयं अपनी पर्ची बना सकेंगे। मंडी ऐप से किसानों को सुविधा होगी। उन्हें उपज विक्रय के लिये या प्रवेश पर्ची के लिये लाईन में नहीं लगना होगा। ई-मंडी योजना के तहत मंडी प्रांगण में प्रवेश से लेकर नीलामी, तौल तथा भुगतान तक की कार्यवाही कंप्यूटराइज्ड रहेगी। मंडियों को हाईटेक बनाया जा रहा है। लक्ष्य रखा गया है कि 01 अप्रैल 2025 से सभी 259 मंडियां ई-मंडी के रूप में कार्य करें। मोबाइल ऐप से प्रक्रिया होगी सरल मंडी ऐप के द्वारा किसान भाइयों के लिये प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। किसानों को यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है कि वह मंडी आने से पहले मंडी में अपनी प्रवेश पर्ची स्वयं अपने मोबाइल से बना सकते हैं। एक बार प्रवेश पर्ची बन जाने पर बार-बार उन्हें अपना संपूर्ण डाटा मंडी में देने की आवश्यकता नहीं रहेगी। प्रवेश पर्ची बन जाने से किसान सीधे मंडी प्रांगण के नीलामी स्थलों पर जाकर अपनी कृषि उपज की नीलामी करा सकते हैं। नीलामी की कार्यवाही भी मिलेगी मोबाइल पर नीलामी की कार्यवाही की जानकारी किसानों को मोबाइल पर भी प्राप्त होगी। तुलावटी भाईयों को ई-मंडी योजना का प्रशिक्षण दिया गया है। वे एंड्रॉयड मोबाइल पर की गई तौल का फाइनल वजन दर्ज करेंगे और उन्हें कोई भी जानकारी लिखने की आवश्यकता नहीं रहेगी। साथ ही व्यापारी साथियों को भी भुगतान पत्रक बनाने की आवश्यकता नहीं रहेगी। ई-मंडी योजना में व्यापारी की आईडी पर रेडीमेड भुगतान पत्रक प्रदर्शित होगा। व्यापारी को उनके द्वारा किसानों को किये जा रहे भुगतान की सिर्फ एंट्री ही करनी होगी। रियल टाइम होगा उपज रिकार्ड का संधारण ई-मंडी योजना से किसानों द्वारा मंडी में विक्रय की जा रही कृषि उपज का रिकार्ड संधारण रियल टाइम ऑनलाइन होगा। इससे मंडियों में भीड़-भाड़ भी नहीं होगी और असुविधा भी नहीं होगी। किसान भाइयों को प्रवेश, अनुबंध, तौल तथा भुगतान करने के बाद उनके मोबाइल पर एसएमएस तथा व्हाट्सएप मैसेज प्राप्त होगा। किसानों को यह जानकारी रहेगी कि उनकी उपज किस व्यापारी द्वारा कितने दाम पर खरीदी गई है।  

दोनों प्रदेशों के निर्माण विभाग के अधिकारियों ने नवीन तकनीकों पर विस्तार से की चर्चा

भोपाल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के नेतृत्व में गुजरात अध्ययन यात्रा पर गए दल ने दूसरे दिन गांधीनगर स्थित भास्कराचार्य संस्थान (BISAG-N) एवं अहमदाबाद साबरमती रिवर फ्रंट परियोजना का दौरा किया। अध्ययन दल ने गुजरात सड़क एवं भवन विकास विभाग के अधिकारियों के साथ निर्माण क्षेत्र में उपयोग की जा रही नवीनतम तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा की। भास्कराचार्य संस्थान की सेवाओं की सराहना  मंत्री सिंह ने भास्कराचार्य संस्थान द्वारा प्रदान की जा रही आईटी सेवाओं की सराहना करते हुए इन्हें अनुकरणीय बताया। मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग में इन्हें लागू करने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने भास्कराचार्य संस्थान की तकनीकी क्षमताओं और सेवाओं को बेहतरीन बताया। मंत्री सिंह ने मुख्य अभियंता एवं अधिकारियों को एक दिन और रुककर संस्थान में प्रशिक्षण लेने और इन तकनीकों को बेहतर तरीके से समझने के निर्देश दिए। भू-सूचना विज्ञान संस्थान संस्थान के प्रमुख टीपी सिंह ने प्रतिनिधि मंडल को संस्थान की विभिन्न गतिविधियों और जी.आई.एस तकनीक पर आधारित पीएम गतिशक्ति परियोजना की विस्तृत जानकारी प्रदान की। इस दौरान BISAG-N संस्थान ने मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग को विभिन्न प्रकार के आईटी समाधानों और जीआईएस बेस्ड एप्लीकेशन की सेवाएं कम लागत पर प्रदान किए जाने की जानकारी दी। साबरमती रिवर फ्रंट परियोजना का दौरा  मंत्री सिंह ने अहमदाबाद स्थित साबरमती रिवर फ्रंट परियोजना का भी दौरा किया। उन्होंने 1200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना को शहरी विकास, नदी संरक्षण, पर्यावरण सुधार और सौंदर्य के साथ नवीनतम निर्माण तकनीकों का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना ने शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है।  भ्रमण के दौरान रिवर फ्रंट निर्माण के लिये गठित कंपनी के कार्यालय में दिये गये प्रेजेंटेशन में रिवर फ्रंट की शुरुआत, निर्माण में आने वाली चुनौतियां, चरणबद्ध निर्माण प्रक्रिया, और भविष्य की योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में साबरमती रिवर फ्रंट की कुल लंबाई 22 किलोमीटर से भी अधिक होगी और यह दुनिया का सबसे लंबा रिवर फ्रंट बनेगा।  मंत्री सिंह ने साबरमती नदी पर बने अटल ब्रिज की भी सराहना की। उन्होंने इसे निर्माण तकनीक का एक अनूठा उदाहरण बताते हुए कहा कि 80 करोड़ रुपये की लागत से बना यह ब्रिज आधुनिक तकनीकी, अद्भुत सौंदर्य और कलाकृति का शानदार नमूना है। गुजरात सड़क एवं भवन विकास के अधिकारियों के साथ की मीटिंग  दूसरे दिन सत्र की शुरुआत मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के प्रेजेंटेशन से हुई। लोक निर्माण विभाग ने अपने संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण में प्रदेश में अपनाई गयी नई तकनीकों, नवाचारों और आईटी परियोजनाओं की जानकारी दी। गुजरात सड़क एवं भवन विकास के अधिकारियों ने भी मध्यप्रदेश में नियोजित एवं क्रियान्वित नवाचारों को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव दिए। सड़क पुल एवं भवन निर्माण के दौरान आने वाली सामान्य समस्याओं पर दोनों राज्यों के अधिकारियों ने चर्चा कर अपने समाधान एक-दूसरे से साझा किये।  मंत्री सिंह ने गुजरात के दो दिवसीय अध्ययन के अनुभवों और तकनीकों को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा इस तरह की अध्ययन यात्राओं और परिचर्चाओं को भविष्य में भी निरंतर जारी रखा जाएगा, जिससे प्रदेश में विकास कार्यों में नई तकनीकों और सर्वोत्तम प्रेक्टिसेज़ का समावेश हो सके।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कर्मचारी हित में लिया गया निर्णय: कर्मचारियों के मासिक भत्तों में किया गया संशोधन

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कर्मचारियों के हित में नई पहल करते हुए शासन द्वारा कर्मचारियों के मासिक भत्तों में संशोधन किया गया है। इससे कर्मचारियों का कार्य प्रदर्शन बेहतर हो सकेगा। इस संबंध में वित्त विभाग द्वारा आदेश जारी किया गया है।     राज्य सरकार द्वारा संशोधित भत्ते के लिए राजस्व निरीक्षकों, विक्रय अमीन, सहायक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (ग्राम सेवक), सहायक विकास विस्तार अधिकारी, पशु चिकित्सा के क्षेत्र सहायक,लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के हैंड पंप तकनीशियनों के वर्तमान दर 350 रुपए प्रति माह को संशोधित कर 1200 रुपए प्रति माह यात्रा भत्ता दिया जाएगा। इसी तरह जिला और तहसील स्तर के राजस्व विभाग के भृत्य एवं जमादार,वन विभाग और राजस्व विभाग के चेन मैन, न्यायिक एवं वाणिज्यक कर विभाग के प्रोसेस सर्वर तथा ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत पटवारियों के वर्तमान दर 300 रुपए प्रति माह में संशोधन कर 1000 रुपए प्रति माह यात्रा भत्ता दिया जाएगा। यात्रा भत्ता की अन्य शर्तें एवं नियम यथावत रहेंगे।

मनमोहन सिंह की अंत्येष्टि को लेकर राजनीति शुरू, कांग्रेस की मांग डॉ. मनमोहन सिंह का भी स्मारक बनाया जाए

नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अंत्येष्टि को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने डॉ. मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार का स्थान निगमबोध घाट में तय कर दिया गया है। वहीं कांग्रेस ने इसपर नाराजगी जताते हुए कहा है कि जिस स्थान पर उनका अंतिम संस्कार हो वहीं पर स्मारक भी बनना चाहिए। कांग्रेस के कहना है कि जिस तरह से राजघाट में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार हुआ और उनका स्मारक बनाया गया, उसी तरह डॉ. मनमोहन सिंह का भी स्मारक बनाया जाए। केंद्र का कहना है कि स्मारक के लिए ट्रस्ट बनाया जाएगा और फिर भूमि भी आवंटित की जाएगी। वहीं कांग्रेस के आरोपों के बाद लोग पार्टी के नरसिम्हा राव की याद दिला रहे हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को अपने पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को याद करना चाहिए कि किस तरह से उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में नहीं करने दिया गया और फिर 10 साल की सरकार के दौरान उनका स्मारक भी नहीं बनवाया गया। पीवी नरसिम्हा राव और कांग्रेस में क्यों आ गई थी खटास पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी किताब ‘1991 हाउ पीवी नरसिम्हा राव मेड हिस्ट्री’ में लिखा कि नरसिम्हा राव ही देश के पहले एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर थे। उन्हे भी नहीं पता था कि वह प्रधानमंत्री बनने वाले थे। राजीव गांधी की हत्या के बाद वह अपना बैग पैक कर हैदराबाद जाने को तैयार थे। लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया गया। हालांकि प्रधानमंत्री बनने के बाद ही कांग्रेस के साथ उनके रिश्ते खराब होने लगे। हालात ऐसे हो गए कि 2004 में उनके निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार भी दिल्ली में नहीं किया जा सका। इसके अलावा कांग्रेस के अन्य प्रधानमंत्रियों की तरह उनके शव को कांग्रेस मुख्यालय में भी नहीं रखा गया। उनका शव अंतिम यात्रा के वाहन पर कांग्रेस मुख्यालय के बाहर ही आधा घंटा इंतजार करता रहा लेकिन मुख्यालय के गेट नहीं खुले। 23 दिसंबर 2004 को नरसिम्हा राव का निधन हुआ था। उस समय यूपीए की सरकार थी और डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे। नरसिम्हा राव ही वह शख्स थे जिन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह को डायरेक्ट एंट्री से वित्त मंत्री बना दिया था। उस समय के गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने नरसिम्हा राव के बेटे प्रभाकरा से कहा कि उनका अंतिम संस्कार हैदराबाद में किया जाए। हालांकि परिवार का कहना है किअन्य प्रधानमंत्रियों की तरह उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में ही होना चाहिए क्योंकि उनकी कर्मभूमि दिल्ली ही रही है। नरसिम्हा राव के परिवार से कई बड़े नेताओं ने अपील की कि उनका अंतिम संस्कार हैदारबाद में ही करवाया जाए। जब परिवार नहीं तैयार हुआ तो सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस के दिग्गज प्रणव मुखर्जी 9 मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित उनके आवास पर पहुंचे। डॉ. मनमोहन सिंह ने उनके बेटे से पूछा कि उन्होंने अंत्येष्टि को लेकर क्या सोचा है। जब उन्होंने दिल्ली में अंत्येष्टि करने की इच्छा जताई तो डॉ. सिंह ने सोनिया गांधी से कुछ बात की। कांग्रेसी नेताओं ने आश्वासन दिया कि उनका स्मारक दिल्ली में बनवाया जाएगा। इसके बाद परिवार उनके शव को हैदराबाद ले जाने को तैयार हो गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के लिए अलग से स्मारक बनाने की मांग पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कड़ी आलोचना की है। शर्मिष्ठा ने कहा कि जब उनके पिता (प्रणब मुखर्जी) का 2020 में निधन हुआ था, तब कांग्रेस नेतृत्व ने न तो कोई शोक सभा आयोजित की और न ही कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक बुलाई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस मामले में उन्हें गुमराह किया था। आपको बता दें कि डॉ. मनमोहन सिंह का निधन 92 वर्ष की आयु में 27 दिसंबर को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में हुआ। खरगे ने प्रधानमंत्री से उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए एक स्मारक बनाने की अपील की थी। शर्मिष्ठा ने बताया कि एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने उन्हें यह बताया था कि भारत के राष्ट्रपति के लिए शोक सभा का आयोजन नहीं किया जाता है। उन्होंने इसे पूरी तरह बेतुका और निराधार करार दिया और कहा कि वह अपने पिता के डायरी में पढ़ चुकी हैं कि जब पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन का निधन हुआ था, तो कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई थी और शोक संदेश खुद प्रणब मुखर्जी ने तैयार किया था। इसके अलावा शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सीआर केसवन के एक पोस्ट का हवाला दिया, जिसमें यह बताया गया था कि कांग्रेस ने पार्टी के अन्य नेताओं को सिर्फ इसलिए नजरअंदाज किया क्योंकि वे गांधी परिवार के सदस्य नहीं थे। इस मुद्दे पर डॉ. मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे डॉ. संजय बारू की किताब ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ पुस्तक का भी उल्लेख किया गया, जिसमें यह जिक्र किया गया था कि कांग्रेस नेतृत्व ने कभी पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के लिए दिल्ली में कोई स्मारक नहीं बनाया, जिनका 2004 में निधन हो गया था। पुस्तक में यह भी दावा किया गया था कि कांग्रेस ने नरसिम्हा राव के दाह संस्कार को दिल्ली में करने के बजाय हैदराबाद में करने की कोशिश की थी। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर इंतजार करता रहा शव पूर्व पीएम नरसिम्हा राव का शव वाहन सजाया गया। तिरंगे से लिपटी उनके पार्थिव शरीर को तोप गाड़ी में रखा गया और वाहन कांग्रेस मुख्यालय के बाहर रुक गया। आधा घंटा शव वाहन वहीं खड़ा रहा लेकिन कांग्रेस मुख्यालय के गेट नहीं खुले। सोनिया गांधी समेत अन्य नेताओं ने बाहर आकर उन्हें श्रद्धांजलि दे दी। इसके बाद उनका वाहन एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गया। ‘द हाफ लायन’ में विनय सीतापति लिखते हैं कि कांग्रेस और गाँधी परिवार को यह नहीं पसंद था कि आर्थिक सुधारों का क्रेडिट उन्हें दिया जाए। इसके अलावा उनका मानना था कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरने के पीछे भी नरसिम्हा राव की मिलीभगत थी। ऐसे में कांग्रेस के साथ उनके रिश्ते अच्छे नहीं थे। 2004 के बाद 2014 तक यूपीए की सरकार रही लेकिन नरसिम्हा राव का स्मारक दिल्ली में नहीं बनाया गया। बाद में मोदी … Read more

गाने के शौकीन सिर्फ 10:30 बजे तक ही तेज आवाज में म्यूजिक बजा सकते हैं, नए वर्ष पर जश्न मनाने वालों को पुलिस ने चेताया

इंदौर नए वर्ष पर जश्न मनाने वालों को पुलिस ने चेताया है। नाच-गाना और शराब पार्टी के लिए पुलिस ने कई पाबंदियां लगाई हैं। गाने के शौकीन सिर्फ 10:30 बजे तक ही तेज आवाज में म्यूजिक बजा सकते हैं। इसके बाद तो पुलिस खुद बंद करवाने पहुंच जाएगी। थर्टी फर्स्ट को लेकर पुलिस आयुक्त संतोष कुमारसिंह ने चारों जोन के डीसीपी के साथ ट्रैफिक और मुख्यालय के डीसीपी को तैयारी के निर्देश दिए हैं। आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि पार्टी और नाच गाने के नाम पर हुड़दंग बर्दास्त नहीं होगा। होटल, रिसोर्ट और गार्डन में इवेंट के लिए अनुमति लेना होगी। पुलिस ने इसके लिए कई तरह की शर्ते लगाई है। डीसीपी ने रात 10:30 बजे तक ही म्यूजिक बजाने अनुमति दी है। शराब के लिए लाइसेंस की शर्तों का पालन जरूरी है। रात 11:30 बजे बाद शराब बिलकुल नहीं चलेगी। पुलिस खाना खाने वालों को जबरदस्ती नहीं उठाएगी, लेकिन शराब मिली तो होटल-बार बंद करवा दिया जाएगा। इसी तरह खुले में म्यूजिक की अनुमति ही नहीं होगी। डीसीपी जोन-2 अभिनय विश्वकर्मा के मुताबिक पुलिस प्रमुख चौराहा पर सख्ती से चैकिंग करेगी। शराब पीकर वाहन चलाना मंजूर नहीं है। पुलिसकर्मी जगह-जगह ब्रिथएनालाइजर से चैकिंग करेगी। बायपास के फार्म हाऊस और रिसोर्ट के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जाएगी। पब में युवती पर बीयर की बोतल से जानलेवा हमला विजय नगर थाना क्षेत्र में बुधवार रात मुस्लिम युवकों ने हिंदू युवती पर हमला कर दिया। सूचना पर हिंदू संगठन के पदाधिकारी पहुंचे और एक आरोपित की पिटाई कर दी। आरोपित खुद को गैंगस्टर सलमान लाला गैंग के सदस्य बता रहे थे। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पंचम की फेल निवासी 22 वर्षीया युवती भमौरी स्थित फिचर्स पब में पार्टी करने आई थी। आरोपित शोएब पुत्र नौशाद खान निवासी सिल्वर कॉलोनी खजराना, शोएब उर्फ अरहान उर्फ सौयब पुत्र मो. सईद निवासी मेवाती मोहल्ला, हर्षोल उर्फ कान्हा पुत्र गोपाल पिपलोदिया निवासी काछी मोहल्ला ने युवती के सिर में बीयर की बोतल से हमला कर दिया।

विश्वास कैलाश सारंग ने कहा- नेशनल गेम्स-2025 के लिये खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के साथ बेहतर सुविधा भी प्रदान करें

भोपाल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि नेशनल गेम्स-2025 के लिये खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के साथ बेहतर सुविधा भी प्रदान करें। उन्होंने कहा कि सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाये। मंत्री श्री सारंग ने शुक्रवार को मंत्रालय में नेशनल गेम्स-2025 के लिये खेल विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा की। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि नेशनल गेम्स क्वालीफाई करने वाले खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएँ प्रदान की जायें। उन्हें ट्रेण्ड प्रशिक्षकों से ट्रेनिंग दिलवायी जाये। सभी खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन कर गोल्ड मैडल हासिल करने के लिये प्रोत्साहित किया जाये। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि एक जैसे गेम्स को ग्रुप में शामिल कर 4-5 ग्रुप बनाकर अलग-अलग खेल अधिकारियों को उस ग्रुप की जिम्मेदारी दी जाये। इससे खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होगी और वह खेल अधिकारी लगातार खिलाड़ियों से सम्पर्क में रहेगा। खिलाड़ियों से निरंतर संवाद से उनको मोटिवेशन मिलेगा और उनकी समस्याओं का तत्काल निराकरण होता रहेगा। बैठक में बताया गया कि पिछली बार कुल 112 मैडल हासिल हुए थे, जिसमें 38 स्वर्ण, 33 रजत और 39 काँस्य पदक जीतकर मध्यप्रदेश चौथे स्थान पर रहा। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि संभावनाएँ बहुत हैं, प्रोत्साहन की जरूरत है। इस बार मध्यप्रदेश के खिलाड़ी और बेहतर प्रदर्शन कर अग्रणी स्थान हासिल करेंगे। मंत्री श्री सारंग ने नेशनल गेम्स में शामिल होने वाले सभी खेलों में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भागीदारी करने वाले कोच और खिलाड़ियों को पहले से निर्धारित स्थान पर भिजवाने की व्यवस्था की जाये। बैठक में बताया गया कि आगामी नेशनल गेम्स उत्तराखण्ड में होंगे। इसमें 36 गेम्स को शामिल किया गया है। ओपनिंग सेरेमनी 28 जनवरी को देहरादून में होगी। देहरादून के साथ हरिद्वार, शिवपुरी ऋषिकेष, कोटी कॉलोनी तेहरी, रुद्रपुर, उत्तमसिंह नगर, सात ताल (भीम ताल), हल्दवानी, अल्मोड़ा, पिथोरगढ़ और टनकपुर में नेशनल गेम्स के लिये जगह निर्धारित की गयी है। बैठक में 38वें राष्ट्रीय खेल उत्तराखण्ड-2025 की आवश्यक तैयारियों, राष्ट्रीय खेल पात्रता, खेल प्रशिक्षण शिविर, किट, रेल आरक्षण आदि पर भी चर्चा की गयी। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री मनु श्रीवास्तव, खेल संचालक श्री रवि कुमार गुप्ता, संयुक्त संचालक श्री बी.एल. यादव, उप सचिव श्री संजय जैन सहित अन्य खेल अधिकारी उपस्थित थे।  

वर्ष-2024 में ऊर्जा क्षेत्र में एम.पी. ट्रांसको ने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हॉसिल की: ऊर्जा मंत्री

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने बताया कि वर्ष-2024 में ऊर्जा क्षेत्र में एम.पी. ट्रांसको (मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी) ने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हॉसिल की है ।एम.पी. ट्रांसको ने कैलेंडर वर्ष-2024 में प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क (पारेषण प्रणाली) के अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, विस्तारीकरण एवं विश्वसनीयता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए अनेक नए आयाम स्थापित किए। ट्रांसफॉर्मेशन केपेसिटी हुई 80 हजार एम.व्ही.ए. से ज्यादा ऊर्जा मंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश में इस वर्ष एम.पी. ट्रांसको ने अपने नेटवर्क में 1729 एम.व्ही.ए. क्षमता की अतिरिक्त वृद्धि की। इससे प्रदेश में कुल ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता बढ़कर 80 हजार 774 एमवीए की हो गई है। इस वर्ष 47 नये पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किये गये, जिससे एम.पी. ट्रांसको के ऊर्जीकृत पॉवर ट्रांसफार्मर की संख्या बढकर 1023 हो गई है। इसमें 400 के.व्ही. के 37,220 के.व्ही. के 215 एवं 132 के.व्ही. के 771 ट्रांसफॉर्मर क्रियाशील हैं। 176 सर्किट कि.मी. लाइनों का हुआ निर्माण इस वर्ष मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन लाइनों की लंबाई बढ़कर 42133 सर्किट कि.मी. की हो गई है, जो प्रदेश के 416 अति उच्चदाब सब-स्टेशनों में विद्युत पारेषण करती है। इस वर्ष प्रदेश में 176 सर्किट किलोमीटर लाइनों का निर्माण कर ऊर्जीकृत किया गया। पहली बार 18 हजार मेगावाट से ऊपर की डिमांड को किया हैंडल ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि एम.पी. ट्रांसको के सिस्टम ने प्रदेश में पहली बार 18 हजार मेगावाट से ऊपर विद्युत डिमांड बिना किसी व्यवधान के हैंडल करने में सफलता प्राप्त की। 20 दिसम्बर 2024 को प्रदेश में आज तक की अधिकतम 18913 मेगावॉट डिमांड दर्ज की गई। इसी तरह प्रदेश में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए एक दिन में 3368.56 लाख यूनिट विद्युत खपत की सफलतापूर्वक आपूर्ति करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। ट्रांसमिशन सिस्टम में नई टेक्नोलॉजी का हुआ समावेश श्री तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश के अपने ट्रांसमिशन सिस्टम में नई तकनीकों का समावेश करते हुये सिस्टम को अपग्रेड किया। विभिन्न ट्रांसमिशन एलीमेंटस को एच.एम.आई. (हयूमन मशीन इंटरफेस) तकनीक से ऊर्जीकृत और नियंत्रित किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश के पुराने तीन 132 के.व्ही. सब-स्टेशनों को रिमोट से संचालित करने का कार्य प्रारंभ किया जा चुका है। 400 व 132 के व्ही लाइनों की भी होगी ड्रोन पेट्रोलिंग 220 के.व्ही. ट्रांसमिशन लाइनों की ड्रोन पेट्रोलिंग में मिली सफलता के बाद अब प्रदेश में 400 एवं 132 के.व्ही. के 23000 ट्रांसमिशन टॉवरों की ड्रोन पेट्रोलिंग भी की जा रही है। मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने ट्रांसमिशन टॉवरों की पेट्रोलिंग ड्रोन के माध्यम से प्रारंभ की है। पेंशनर्स को ऑनलाइन सुविधा एम.पी. ट्रांसको ने अपने पेंशनर्स के लिये वेबसाइट के माध्यम से कई सुविधाएं ऑनलाइन करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। अब एम.पी. ट्रांसको के सेवानिवृत्त कार्मिक विश्व के किसी भी कोने से लाईफ सर्टिफिकेट अपलोड कर सकते हैं। साथ ही वेबसाइट के माध्यम से ही अपने पेंशन स्लिप और अपने बैंक खातों में किये गये लेन-देन की जानकारी ली जा सकती है। 2024 में एम.पी. ट्रांसको ने ऑनलाइन वेबिनारों और नॉलेज शेयरिंग कार्यशालाओं से ट्रांसको के युवा इंजीनियरों को अपडेट करने का एक सफल अभियान चलाया। इसके कारण एम.पी. ट्रांसको के वर्क कल्चर में महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव आया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- प्रदेश में सोयाबीन फसल उत्पादन में बीते वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सोयाबीन फसल उत्पादन में बीते वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार सोयाबीन का उपार्जन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि सोयाबीन के अलावा किसानों को दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जायेगा। इसके लिए किसानों के साथ चर्चा कर योजना बनाई जाएगी। उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में अधिक लाभ है, इसलिए किसानों को उद्यानिकी फसलों की ओर प्रवृत्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास में सोयाबीन उपार्जन की समीक्षा बैठक में यह बात कही। सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग, किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव एवं कृ‍षि उत्पादन आयुक्त श्री मोहम्मद सुलेमान, अपर मुख्य सचिव सहकारिता श्री अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी, सचिव किसान-कल्याण तथा कृषि विकास श्री एम. सेलवेन्द्रन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उपार्जन के बाद भुगतान भी जल्द से जल्द हो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी सोयाबीन उत्पादक किसानों से उपार्जन कर उन्हें जल्द से जल्द भुगतान भी सुनिश्चित किया जाए। उपार्जन में किसानों को किसी भी प्रकार की कठिनाई या बारदाने की समस्या न आने पाए। उपार्जित सोयाबीन का उठाव और भंडारण विधिवत तरीके से हो और उपज को ओला-पाला एवं बारिश से बचाया जाये। 31 दिसम्बर तक होगा सोयाबीन उपार्जन बैठक में सचिव किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने जानकारी दी कि प्रदेश में सोयाबीन उपार्जन 25 अक्टूबर से किया जा रहा है, जो 31 दिसम्बर तक चलेगा। गत 26 दिसम्बर तक 2 लाख 4 हजार किसान अपना सोयाबीन बेच चुके हैं। इन किसानों से 5 लाख 89 हजार मीट्रिक टन सोयाबीन उपार्जित किया गया है। आगामी 31 दिसम्बर तक करीब साढ़े 6 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन उपार्जन का अनुमान है। प्रदेश में भोपाल संभाग में सर्वाधिक 180198.04 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन उपार्जित किया गया है। उज्जैन संभाग में 149974.54 लाख मीट्रिक टन, सागर संभाग में 93495.33 लाख मीट्रिक टन एवं नर्मदापुरम संभाग में 93287.44 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन उपार्जित किया गया है। सोयाबीन का समर्थन मूल्य 4 हजार 892 रूपए प्रति क्विंटल है। किसानों को 1957.1 करोड़ रूपए उपार्जन राशि का भुगतान अब तक किया जा चुका है।  

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