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सेहत के लिए खतरा! क्या पैकेट बंद खाना वाकई सेहतमंद है? नई रिसर्च ने उठाए सवाल

food why packaged food items under question items included in research भारत में लोगों के खाने-पीने का तरीका बदल रहा है और यह बदलाव सेहत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. ICMR ने बताया कि देश में 56.4% बीमारियां खराब खानपान की वजह से हो रही हैं. भारतीयों की पसंद और नापसंद बदल रही है, खासकर तब जब बात खाने की होती है. पहले के समय में लोग ज्यादातर कच्ची सब्जियां, फल और साबुत अनाज खाते थे, लेकिन आजकल पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड का चलन बढ़ गया है.कुछ डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने मिलकर भारत में बिकने वाले पैकेट बंद फूड की जांच की है. यह जानने के लिए कि ये फूड सेहत के लिए कितने अच्छे या बुरे हैं. उन्होंने यह भी देखा कि पैकेट पर जो कुछ लिखा है, वह सही है या नहीं. यह रिसर्च Plos One नाम की एक मशहूर मैगजीन में छपी है. इस रिसर्च को करने वालों में ये लोग शामिल थे: चेन्नई के मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के डॉक्टर, भारत के मेडिकल रिसर्च काउंसिल के विशेषज्ञ और इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रोफेसर. पैकेट बंद फूड: लेबल पर सही जानकारी, फिर भी सेहत के लिए खतरा! पैकेट बंद फूड के लेबल पर लिखी पोषण जानकारी हमें उस फूड में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में बताती है. यह जानकारी ग्राहकों के लिए बहुत जरूरी होती है क्योंकि इससे वे यह तय कर सकते हैं कि वह फूड उनकी सेहत के लिए कितना अच्छा या बुरा है.इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने भारतीय बाजार में उपलब्ध 432 पैकेट बंद फूड के लेबल की जांच की. इनमें इडली मिक्स, ब्रेकफास्ट सीरियल, दलिया मिक्स, बेवरेज मिक्स और फूले हुए स्नैक्स जैसे पैकेज्ड फूड शामिल थे.रिसर्च में पाया गया कि 80% पैकेट बंद फूड में लेबल पर लिखी जानकारी सही थी. यानी जो पोषक तत्व लेबल पर लिखे थे, वे प्रोडक्ट में मौजूद थे. ज्यादातर पैकेज्ड फूड में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. दरअसल, हमारे शरीर को एनर्जी के लिए कार्बोहाइड्रेट की जरूरत होती है, लेकिन अगर हम जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाते हैं, तो यह हमारी सेहत के लिए अच्छा नहीं है. ज्यादा कार्बोहाइड्रेट से मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारी हो सकती है. फूले हुए स्नैक्स में वसा की मात्रा ज्यादा मिली. वसा भी एनर्जी देता है, लेकिन ज्यादा वसा से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है. ज्यादा कार्बोहाइड्रेट से क्या होता है? जब हम खाना खाते हैं तो वह ग्लूकोज में बदल जाता है. यह ग्लूकोज हमारे खून में मिल जाता है. इंसुलिन ग्लूकोज को हमारे शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाता है, जहां इसका इस्तेमाल ऊर्जा बनाने के लिए किया जाता है.ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाने से हमारे अग्न्याशय को ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है. अगर यह ज्यादा समय तक चलता रहे, तो अग्न्याशय कमजोर हो सकता है और टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है. पैकेट बंद फूड की जांच: कैसे पता चला कौन सा सेहतमंद है? पैकेट बंद फूड की जांच करने के लिए विशेषज्ञों ने एक खास तरीका अपनाया. उन्होंने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के हिसाब से पैकेज के आगे और पीछे लिखी पोषण जानकारी की जांच की. इस अध्ययन में सिर्फ प्रोटीन, फाइबर, वसा, चीनी और कोलेस्ट्रॉल से जुड़े पोषण संबंधी दावों का मूल्यांकन किया गया. विशेषज्ञों ने पैकेट बंद फूड में मौजूद प्रोटीन, फाइबर, वसा, चीनी और कोलेस्ट्रॉल की जांच की. फिर उन्होंने एक खास सिस्टम का इस्तेमाल करके यह तय किया कि कौन सा फूड सेहतमंद है और कौन सा नहीं. यह जानकारी लोगों को सेहतमंद पसंद चुनने में मदद कर सकती है. पैकेट बंद फूड में क्या मिला? ज्यादातर पैकेट बंद फूड में 70% से ज्यादा एनर्जी कार्बोहाइड्रेट से मिल रही थी. सिर्फ फूले हुए स्नैक्स ही ऐसे थे जिनमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम थी. फूले हुए स्नैक्स में 47% से ज्यादा एनर्जी वसा से मिल रही थी. ज्यादा वसा से भी सेहत को नुकसान हो सकता है. सभी पैकेज्ड फूड में प्रोटीन की मात्रा 15% से कम थी. प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी होता है, इसलिए इसकी कमी सेहत के लिए अच्छी नहीं है.यह अध्ययन दिखाता है कि ज्यादातर पैकेट बंद फूड में कार्बोहाइड्रेट, वसा और चीनी की मात्रा ज्यादा होती है, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए हमें पैकेट बंद फूड का सेवन सीमित करना चाहिए. ताजा और पौष्टिक भोजन खाना चाहिए. सभी पैकेट बंद फूड के लेबल पर पूरी जानकारी नहीं भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के मुताबिक, पैकेट बंद फूड के लेबल पर एनर्जी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, चीनी और कुल वसा की मात्रा ‘प्रति 100 ग्राम’ या ‘100 मिलीलीटर’ या ‘प्रति सर्विंग’ के हिसाब से लिखी होनी चाहिए. लेकिन अध्ययन में पाया गया कि ज्यादातर पैकेट बंद फूड में यह जानकारी पूरी तरह से नहीं दी गई थी. सिर्फ कुछ ब्रेकफास्ट सीरियल और कुछ पेय पदार्थों में ही प्रति सर्विंग जानकारी दी गई थी.कुछ प्रोडक्ट ने यह दावा किया कि उनमें साबुत अनाज हैं लेकिन इंग्रेडिएंट्स लिस्ट में साबुत अनाज का जिक्र नहीं था. यह ग्राहकों को गुमराह करने वाला है. अध्ययन में यह बात कही गई है कि एक स्पष्ट लेबलिंग सिस्टम होना चाहिए ताकि ग्राहक आसानी से सेहतमंद प्रोडक्ट का चयन कर सकें. घरेलू खर्च के आंकड़े क्या कहते हैं? 2022-23 के घरेलू खर्च सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय अब पैकेट बंद फ़ूड, पेय पदार्थों और रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों पर ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं, जबकि घर पर बने खाने पर खर्च कम हो रहा है. यह बदलाव शहरों और गांवों दोनों जगह देखा जा रहा है.विशेषज्ञों का कहना है कि खानपान में यह बदलाव देश में मोटापा, डायबिटीज, हार्टअटैक जैसे बढ़ते बोझ का एक बड़ा कारण है. इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण में भी यह बात कही गई है कि भारत में 56.4% बीमारियां खराब खानपान की वजह से हो रही हैं. कितना बड़ा है पैकेज्ड फूड का बाजार भारत में पैकेट बंद फूड का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है. 2023 में ये बाजार करीब 76.28 बिलियन डॉलर का था और 2030 तक इसके 116 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इसका मतलब है कि … Read more

अलीगढ़ जेल में बने ताले देश-विदेश में प्रसिद्ध प्रयागराज महाकुंभ में उपयोग के लिए भेजे जाएंगे, श्रद्धालु खरीदेंगे ‘खास’ ताले

अलीगढ़ देश और दुनिया में अपने ताले और तालीम के लिए प्रसिद्ध अलीगढ़ अब एक नई पहचान बना रही है। अलीगढ़ जिला कारागार में बंद कैदी ताला बनाने के काम में जुट गए हैं। अलीगढ़ जेल में बने ताले देश-विदेश में प्रसिद्ध प्रयागराज महाकुंभ में उपयोग के लिए भेजे जाएंगे। जिला कारागार में रोजाना लगभग 1200 ताले बनाए जा रहे हैं, जिन्हें महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को सस्ते दामों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल से कैदियों को अपनी कला और कौशल को निखारने का मौका भी मिलेगा। जेल अधीक्षक ने आगे कहा कि इस बार महाकुंभ के आयोजन में जेल विभाग का एक स्टॉल भी लगाया जाएगा, जहां कैदियों द्वारा निर्मित ताले और लकड़ी से बने विभिन्न सामान की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। महाकुंभ में आए लोग इन सामानों को खरीद सकते हैं। यह एक बड़ी पहल है, जिससे महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु ताले और अन्य सामान सस्ते दामों पर प्राप्त कर सकेंगे। अलीगढ़ जेल के अधीक्षक विजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि जेल में कैदियों द्वारा विभिन्न प्रकार के सामान बनाए जा रहे हैं। इनमें शिवलिंग, ओम, संघ और अन्य धार्मिक प्रतीक शामिल हैं। अधीक्षक के मुताबिक जेल में तालों को असेंबल किया जा रहा है और इन तालों का इस्तेमाल न केवल अलीगढ़, बल्कि बाहर भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जेल में एक छोटी इकाई स्थापित की गई है, जहां कैदी रोजाना विभिन्न सामान तैयार कर रहे हैं, जिन्हें देशभर में भेजा जाता है। जेल में बंद कैदी विनोद कुमार ने बताया कि वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। करीब दस महीने से जेल में है। विनोद ने कहा, ” जेल में ही मैंने ताला बनाने का काम सीखा है। हमारे अलीगढ़ के जेल के ताले अब देश-विदेश में मशहूर हैं। हमारे ताले अब महाकुंभ में भेजे जाएंगे। तैयारी पूरी है। हम और हमारे सभी प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह से इस प्रयास में लगे हुए हैं कि जितने भी बंदी यहां हैं, वह रोजगार की ओर बढ़ें। इस मौके पर हम अपने अधिकारियों का दिल से धन्यवाद करना चाहते हैं।” विनोद ने आगे कहा कि हमें बहुत अच्छा लग रहा है। जब हमारे ताले देश-विदेश जाएंगे, तो हमारा और हमारे जिले का नाम रोशन होगा। हम सभी बंदियों के लिए यह एक बहुत अच्छा अवसर है। अब हम बड़े खुशनसीब महसूस करते हैं कि हम यहां से कुछ नया सीख रहे हैं और हमें अपने काम का सम्मान मिल रहा है। हम रोजाना लगभग बारह से तेरह सौ ताले तैयार करते हैं।  

महाकुंभ 2025 : भारत-नेपाल सीमा पर भी सघन चेकिंग अभियान जारी, सीमा पर पुलिस एसएसबी सतर्क

महराजगंज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में होने जा रहे भव्य महाकुंभ को लेकर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई है। भारत-नेपाल सीमा पर भी सघन चेकिंग अभियान जारी है। हाल ही में डीजीपी प्रशांत कुमार ने नेपाल सीमा पर पुलिस को एसएसबी के साथ समन्वय करके सघन चेकिंग सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद महराजगंज जिले के भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी और पुलिस के जवान पूरी तरह से अलर्ट हो गए हैं। महाकुंभ में किसी भी आतंकी खतरे को देखते हुए भारत-नेपाल के 84 किलोमीटर लंबे सीमा क्षेत्र में एसएसबी के जवान पेट्रोलिंग करते हुए नजर आ रहे हैं। इसके अलावा, सोनौली बॉर्डर पर नेपाल से भारत आने-जाने वाले सभी व्यक्तियों की सघन तलाशी के बाद ही उन्हें प्रवेश दिया जा रहा है। डॉग स्क्वॉड द्वारा उनके सामानों की जांच की जा रही है और सीसीटीवी से भी निगरानी रखी जा रही है ताकि कोई भी देश विरोधी तत्व भारत में प्रवेश न कर सके। पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीणा ने बताया कि महाकुंभ को लेकर सीमावर्ती पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे एसएसबी के साथ मिलकर पेट्रोलिंग करें और पगडंडियों पर भी निगरानी रखें। इसके साथ ही, जो सीसीटीवी कैमरे पहले से लगाए गए हैं, उन पर ध्यान रखा जा रहा है ताकि वे सही तरीके से काम करें। पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीणा ने मीडियाकर्मियों से बताया, “महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए सभी सीमावर्ती थाना प्रभारी को निर्देश दिया गया कि वे लगातार एसएसबी के साथ समन्वय बनाए रखें और संयुक्त रूप से पेट्रोलिंग करें। इसके अलावा, जिन पगडंडियों पर सीसीटीवी लगाए गए हैं, उनकी क्रियाशीलता की जांच करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सही ढंग से काम कर रहे हैं। कुछ अन्य पगडंडियों को भी चिन्हित किया गया है, जहां बिजली आपूर्ति नहीं है, और वहां सोलर पावर के माध्यम से सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “सीमावर्ती गांवों में ग्राम सुरक्षा समिति की बैठकें आयोजित की जा रही हैं और ग्रामीणों को यह बताया जा रहा है कि यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति या बाहरी व्यक्ति गांव में रुका हो, तो उसकी तत्काल सूचना पुलिस को दें और पुलिस सक्रिय रूप से कार्रवाई करेगी। हम लगातार एलआईयू और अन्य संबंधित सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क में हैं और जो भी सूचनाएं प्राप्त होती हैं, उस पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। सभी अधिकारी सतर्क रहते हुए अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।”  

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तत्वावधान में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के उद्घोष के साथ देश भर में चलाया गया

नई दिल्ली केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तत्वावधान में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के उद्घोष के साथ देश भर में चलाया गया वृक्षारोपण अभियान मंत्रालय की ओर से देश को वर्ष 2024 की एक बड़ी सौगात रही। पर्यावरण संरक्षण और कार्बन अवशोषण में वृक्षों की महती उपयोगिता के मद्देनजर इस अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा प्रोत्साहन मिला। मंत्रालय के अनुसार इस अभियान के तहत देश में अभी तक 102 करोड पेड़ लगाने की उपलब्धि हासिल हुई है और मार्च 2025 तक इसका लक्ष्य 140 करोड़ रखा गया है। श्री मोदी ने गत 05 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर इस अभियान का उद्घाटन किया और लोगों को अपनी माँ के प्रति प्रेम, आदर और सम्मान के प्रतीक के रूप में एक पेड़ लगाने का आह्वान किया। इस अभियान के अंतर्गत पेड़ों और धरती माँ की रक्षा करने का संकल्प भी लिया जाता है। मंत्रालय ने समाप्त हो रहे इस वर्ष के दौरान 26 सितंबर को ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ (लाइफ) के अनुरूप, इको-मार्क नियमावली अधिसूचित की है। यह 1991 की इको-मार्क योजना के स्थान पर है। यह योजना ‘लाइफ’ के सिद्धांतों के अनुरूप पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों की मांग को प्रोत्साहित करेगी, ऊर्जा की कम खपत, संसाधन दक्षता और सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी। इस योजना का उद्देश्य सटीक लेबलिंग सुनिश्चित करना और उत्पादों के बारे में भ्रामक जानकारी को रोकना है। देश की जलवायु के अनुकूल कार्रवाई उसके अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) और 2070 तक नेट जीरो तक पहुंचने की दीर्घकालिक रणनीति द्वारा निर्देशित है और यह अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। वैश्विक जीएचजी उत्सर्जन में मामूली योगदान के बावजूद भारत ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में सबसे आगे रहने की अपनी इच्छा दिखाई है। भारत में वैश्विक आबादी का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा रहता है लेकिन इसका ऐतिहासिक तौर पर कुल योगदान चार प्रतिशत से भी कम है। वर्ष 2005 से 2019 के बीच हमारे सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 33 प्रतिशत की कमी आई है। इसलिए उत्सर्जन तीव्रता में कमी का लक्ष्य तय समय से पहले ही हासिल कर लिया गया है। इस वर्ष 31 अक्टूबर तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से कुल विद्युत शक्ति स्थापित क्षमता कुल संचयी विद्युत शक्ति स्थापित क्षमता का 46.52 प्रतिशत है। देश ने 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 45 प्रतिशत की कमी और गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से संचयी विद्युत शक्ति स्थापित क्षमता का 50 प्रतिशत तक अपने एनडीसी लक्ष्यों को अद्यतन किया है। कार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस) की औद्योगिक और बिजली क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने में महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका रही है। मंत्रालय का भारत शीतलन कार्य योजना (आईसीएपी) में सामाजिक-आर्थिक लाभों को अधिकतम करने के लिए चल रहे सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के साथ तालमेल बिठाने पर बल है। केन्द्र सरकार ने आईसीएपी में दी गई सिफारिशों को लागू करने के लिए कई कदम उठाए हैं। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल कटौती कार्यक्रम के अनुसार 2020-24 के दौरान हाइड्रो क्लोरोफ्लोरोकार्बन (एचसीएफसी) के 35 प्रतिशत चरणबद्ध कटौती लक्ष्य के मुकाबले, भारत ने उपभोग क्षेत्र में हाइड्रो क्लोरोफ्लोरोकार्बन में 50 प्रतिशत की कमी हासिल की है। एसी और फ्रिज जैसे नए उपकरणों के निर्माण में एचसीएफसी का उपयोग इस साल के आखिरी दिन तक चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा। मैंग्रोव को एक अद्वितीय, प्राकृतिक इकोसिस्टम के रूप में बहाल करने और बढ़ावा देने तथा तटीय आवासों की स्थिरता को संरक्षित करने और बढ़ाने के लिए इस वर्ष 05 जून को ‘तटीय आवास और मूर्त आय मैंग्रोव पहल (मिष्टी)’ शुरू की गई है। इस योजना के लिए प्रारंभिक परियोजना परिव्यय के रूप में प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (सीएएमपीए) के माध्यम से 100 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। देश के 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 22,561 हेक्टेयर खराब मैंग्रोव क्षेत्र को पुनर्स्थापन के तहत लाया गया है और छह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 3,836 हेक्टेयर पुनर्स्थापन के लिए कुल 17.96 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। देश ने इस वर्ष 17 अगस्त को तीसरे वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिसका मुख्य विषय ‘एक सतत भविष्य के लिए सशक्त वैश्विक दक्षिण’ है। भारत ने वैश्विक दक्षिण के देशों को एकजुट होने, एक स्वर में साथ खड़े होने और एक दूसरे की ताकत बनने पर जोर दिया। पर्यावरण मंत्रियों के सत्र में वैश्विक दक्षिण के 18 देशों और एक बैंक ने भाग लिया। भारत ने टिकाऊ उपभोग और उत्पादन पैटर्न को प्रोत्साहित करने, टिकाऊ जीवन शैली को बढ़ावा देने, अपशिष्ट को कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। विचार-विमर्श में जलवायु न्याय और विकासशील देशों की जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण की मांग पर प्रकाश डाला गया। इस वर्ष असम में पहली बार गंगा नदी डॉल्फिन (प्लैटनिस्टा गैंगेटिका) को टैग किया गया। इस पहल को भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) ने असम वन विभाग और आरण्यक के सहयोग से राष्ट्रीय सीएएमपीए प्राधिकरण से वित्त पोषण के साथ लागू किया। यह न केवल भारत में, बल्कि इस प्रजाति के लिए भी पहली टैगिंग है, और यह मील का पत्थर प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रोजेक्ट डॉल्फिन की एक महत्वपूर्ण प्रगति है।  

दिल्ली रॉयल्स का फरवरी 2025 में शुरू होने वाली लीजेंड 90 लीग में नई फ्रेंचाइजी के रूप में किया अनावरण

नई दिल्ली दिल्ली रॉयल्स का फरवरी 2025 में शुरू होने वाली लीजेंड 90 लीग की नवीनतम फ्रेंचाइजी के रूप में आधिकारिक रूप से अनावरण किया गया है। टीम की घोषणा के साथ ही इसके आकर्षक लोगो का भी अनावरण किया गया, जो ताकत, लचीलापन और वीरता का प्रतीक कवच ढाल का चित्रण है। टीम की लड़ाई की भावना और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाने के लिए डिज़ाइन की गई यह ढाल रॉयल्स की चुनौतियों का दृढ़ संकल्प के साथ सामना करने की तत्परता को दर्शाती है। लीग में सात फ्रेंचाइजी शामिल होंगी और 90 दिग्गज खिलाड़ियों के कौशल का प्रदर्शन किया जाएगा। दिल्ली रॉयल्स फ्रेंचाइजी को उत्तर भारत के सबसे बड़े हाईवे हॉस्पिटैलिटी ब्रांड मन्नत ग्रुप ने अधिग्रहित किया है। मन्नत ग्रुप के चेयरमैन देवेंदर कादयान ने कहा, “मन्नत ग्रुप में हम युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें आगे बढ़ाने वाले अवसरों के माध्यम से सशक्त बनाने में विश्वास करते हैं। दिल्ली रॉयल्स सिर्फ़ एक टीम नहीं है; यह युवा दिमागों को क्रिकेट के जुनून, अनुशासन और विरासत से जोड़ने का एक मंच है। हमारा लक्ष्य लाखों प्रशंसकों को प्रेरित करना और उन्हें इस अभिनव प्रारूप के माध्यम से क्रिकेट की विरासत से जोड़ना है।” लीजेंड 90 लीग, अपने अभिनव 90-गेंद प्रारूप के साथ। इस महीने की शुरुआत में, पूर्व भारतीय क्रिकेटर और स्पिनर हरभजन सिंह ने लीग के लॉन्च कार्यक्रम में शिरकत की। लीजेंड 90 लीग के ब्रांड एंबेसडर के रूप में, हरभजन ने इस पहल के बारे में अपना उत्साह व्यक्त किया, प्रशंसकों को खेल और उनके पसंदीदा क्रिकेट दिग्गजों के करीब लाने की इसकी क्षमता पर प्रकाश डाला।  

महाकालेश्वर मंदिर में नव वर्ष पर श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा, दर्शन घोटाले के बीच बड़ा फैसला, अब होगी मुफ्त की VIP सेवा बंद

उज्जैन उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में मुफ्त की वीआईपी सेवा अब बंद हो गई है. महाकालेश्वर मंदिर की आमदनी में भी अब बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. श्रद्धालुओं से अवैध वसूली कर उन्हें कई प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराने वाले 10 लोग अभी तक जेल की हवा खा चुके हैं. उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में नए साल के आगाज पर दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यापक पैमाने पर तैयारी की गई है. महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष और उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के मुताबिक मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर बड़े पैमाने पर तैयारी की गई है. नव वर्ष पर श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हो जाता है. इस बार साल के अंतिम दिनों में भी श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. महाकालेश्वर मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल के मुताबिक शीघ्र दर्शन व्यवस्था के लिए मंदिर समिति की ओर से 250 रुपये की रसीद काटी जा रही है. इसके अलावा, प्रोटोकॉल दर्शन में भी शीघ्र दर्शन सुविधा का लाभ लेने पर प्रति श्रद्धालु 250 रुपये की रसीद बनाई जा रही है. इसी तरह मंदिर के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है. इससे मंदिर समिति की आमदनी में भी बढ़ोतरी हो गई है. श्रद्धालुओं से वसूली कर मंदिर समिति को लगाया चूना उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के मुताबिक महाकालेश्वर मंदिर में किलो सक्रिय था जो श्रद्धालुओं से अवैध वसूली कर उन्हें ऐसी सुविधा उपलब्ध कराता था जिसके लिए मंदिर समिति द्वारा अलग-अलग प्रकार के शुल्क तय किए गए हैं. अभी तक इस मामले में 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें आठ महाकालेश्वर मंदिर समिति के कर्मचारी हैं. इनमें से दो कर्मचारी राकेश और विनोद को पहले ही जेल भेज दिया गया है, जबकि राजेंद्र सिंह, अभिषेक भार्गव, राजकुमार सहित अन्य कर्मचारी भी इस मामले में पकड़े जा चुके हैं. महाकालेश्वर मंदिर में बैठक नए साल पर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति के प्रशासक अनुकूल जैन अधिकारियों की बैठक ली. उन्होंने बताया कि मंदिर में नए वर्ष के अवसर पर 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.

20 सीनियर IAS अफसरों की 2025 में विदाई, इनके रिटायरमेंट से कई अधिकारियों को प्रमोशन का अवसर मिलेगा

भोपाल मध्यप्रदेश कैडर के 20 वरिष्ठ आईएएस अधिकारी 2025 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इनमें वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग जैन समेत छह अपर मुख्य सचिव (एसीएस) स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इनके रिटायरमेंट से प्रदेश प्रशासनिक सेवा में महत्वपूर्ण बदलाव होंगे और कई अधिकारियों को प्रमोशन का अवसर मिलेगा। 2025 में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों में मुख्य सचिव अनुराग जैन के साथ अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी मो. सुलेमान, जेएन कंसोटिया, एसएन मिश्रा, अजीत केसरी और विनोद कुमार शामिल है। इसके अलावा फील्ड पोस्टिंग वाले अधिकारियों में सागर आयुक्त वीरेंद्र कुमार रावत, जबलपुर आयुक्त अभय कुमार वर्मा, दतिया कलेक्टर संदीप कुमार माकिन के नाम शामिल है। इसके अलावा कमिश्नर निशक्तजन डॉ. रामराव भोंसले, जनगणना निदेशालय एमपी भावना वालिम्बे और माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव केडी त्रिपाठी भी 2025 में सेवानिवृत्त होंगे।   इन अधिकारियों का होगा प्रमोशन इन अधिकारियों के रिटायरमेंट के बाद नए अधिकारियों को ACS और मुख्य सचिव स्तर पर प्रमोशन का मौका मिलेगा। मौजूदा ACS डॉ. राजेश राजौरा, 2026 तक सबसे वरिष्ठ अधिकारी होंगे और मई 2027 में रिटायर होंगे। प्रदेश के कई एसीएस और पीएस स्तर के अधिकारी दिल्ली में पदस्थ है। इनमें नीलम शमी राव, वीएल कांताराव, आशीष श्रीवास्तव, पंकज अग्रवाल, अलका उपाध्याय, मनोज गोविल, पल्लवी जैन गोविल, अनिरुद्ध मुखर्जी, दीप्ति  गौड़ मुखर्जी, विवेक अग्रवाल, हरिरंजन राव के नाम शामिल है। वहीं, प्रदेश के कई वरिष्ठ अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद कई अधिकारियों को मुख्य सचिव स्तर के वेतानमान में प्रमोशन मिलेगा। इसमें संजय कुमार शुक्ला, रश्मि अरुण शमी, मनीष रस्तोगी, दीपाली रस्तोगी, शिवशेखर शुक्ला और सचिन सिन्हा शामिल हैं।     जाने कौन किस माह होगा सेवानिवृत्त जनवरी – एसएन मिश्रा, डॉ. आरआर भेंसले, अक्षय सिंह। फरवरी- अजीत केसरी, ओपी श्रीवास्तव।  अप्रैल- अभय कुमार वर्मा, शैलबाला मार्टिन। मई- विनोद कुमार, संदीप माकिन। जून- वीरेंद्र सिंह रावत, अशोक कुमार चौहान। जुलाई- मो. सुलमेान, राजेश कुमार कौल, संजय गुप्ता, केडी त्रिपाठी। अगस्त- अनुराग जैन, जेएन कंसोटिया। सितंबर- भावना वालिम्बे। अक्टूबर- नियाज खान।  

आज से उत्तर पश्चिम भारत में शीतलहर चलने वाली है, इस दौरान नए साल में उत्तर भारत में पड़ेगी कड़ाके की ठंड

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इस बीच, मौसम विभाग ने नए साल को लेकर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने बताया है कि 30 दिसंबर से उत्तर पश्चिम भारत में शीतलहर चलने वाली है। यानी कि नए साल के मौके पर ठंड बढ़ने जा रही है। साथ ही, अगले दो से तीन दिनों तक उत्तर पश्चिम भारत में घने से बहुत घना कोहरा देखने को मिलने जा रहा है। यूपी में अगले पांच दिनों में न्यूनतम तापमान में छह डिग्री सेल्सियस की गिरावट देखने को मिलेगी। वहीं, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, राजस्थान आदि राज्यों में शीतलहर की चेतावनी दी गई है। पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहुत घना कोहरा देखने को मिला है। इसके अलावा, उत्तराखंड में तेज बरसात हुई। मौसम विभाग के अनुसार, अगले साल छह जनवरी से उत्तर पश्चिम भारत का मौसम बदल जाएगा, क्योंकि एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस दस्तक देने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू कश्मीर, लद्दाख में न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री से नीचे चल रहा है, जबकि उत्तर पश्चिम भारत के बाकी राज्यों में यह 6-12 डिग्री सेल्सियस के बीच में बना हुआ है। आज मैदानी इलाकों में सबसे कम तापमान राजस्थान के सीकर जिले में 5.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में न्यूनतम तापमान में एक से तीन डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज की गई है। वहीं, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिमी राजस्थान में यह तीन से छह डिग्री सेल्सियस कम हो गया है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, विदर्भ, पश्चिमी मध्य प्रदेश में मिनिमम टेम्प्रेचर औसत से ज्यादा चल रहा है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि उत्तर प्रदेश में अगले पांच दिनों तक न्यूनतम तापमान में बड़ी गिरावट आने वाली है। अगले पांच दिनों में यह चार से छह डिग्री सेल्सियस कम हो जाएगा, जबकि पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान में अगले तीन दिनों तक तीन से चार डिग्री सेल्सियस तापमान में कमी आएगी, उसके बाद कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। मध्य भारत की बात करें तो अगले पांच दिनों में इसमें भी तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने वाली है। वहीं, पूर्वी भारत में भी न्यूनतम तापमान 3-4 डिग्री सेल्सियस गिर जाएगा। महाराष्ट्र में अगले पांच दिनों में न्यूनतम तापमान दो से चार डिग्री सेल्सियस गिरने जा रहा है। शीतलहर की बात करें तो हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब में 31 दिसंबर से दो जनवरी तक शीतलहर चलने वाली है। वहीं, राजस्थान में भी 30 दिसंबर से दो जनवरी तक शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है।

रेलवे रिक्रूटमेंट सेल की ओर से जल्द ही ग्रुप डी के 32 हजार पदों पर नीकाली भर्ती

नई दिल्ली रेलवे रिक्रूटमेंट सेल (RRC) की ओर से जल्द ही ग्रुप डी के 32 हजार पदों पर भर्ती नीकाली जानी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस भर्ती के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया जनवरी/ फरवरी माह में शुरू की जा सकती है। ऐसे में जो भी रेलवे में सरकारी नौकरी पाने की चाह रखते हैं वे तय तिथियों में इंडियन रेलवे की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भर सकेंगे। भर्ती में शामिल होने के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन ही किया जा सकेगा। पात्रता एवं मापदंड इस भर्ती में भाग लेने के लिए उम्मीदवारों को निर्धारित योग्यता हासिल करना अनिवार्य होगा। ग्रुप डी पदों पर आवेदन के लिए अभ्यर्थियों का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड/ संस्थान से ग्रेजुएट होना आवश्यक होगा। इसके साथ ही अभ्यर्थी ने आईटीआई (NCVT/ SCVT) सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया हो। अभ्यर्थी की आयु निर्धारित कटऑफ डेट से न्यूनतम 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए वहीं अधिकतम आयु 33 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। आरक्षित श्रेणी से आने वाले उम्मीदवारों को ऊपरी उम्र में नियमानुसार छूट दी जाएगी। कैसे होगा ग्रुप डी पदों पर चयन आरआरसी ग्रुप डी भर्ती में चयनित होने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT-1) से होकर गुजरना होगा। जो अभ्यर्थी इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करेंगे वे भर्ती के अगले चरण की परीक्षा CBT 2 में भाग ले पाएंगे। सीबीटी 2 के बाद क्वालीफाई अभ्यर्थियों को डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन एवं मेडिकल एग्जामिनेशन के लिए आमंत्रित किया जायेगा। अंत में सभी चरणों के अनुसार उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट तैयार की जाएगी और सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की जाएगी। एप्लीकेशन प्रॉसेस आपको बता दें कि रिपोर्ट्स के मुताबिक इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया का जिम्मा प्रयागराज डिवीजन को दिया जा सकता है। आवेदन शुरू होते ही अभ्यर्थी ऑनलाइन माध्यम से आवेदन पत्र भर सकेंगे। आवेदन के लिए आपको पहले मांगी गई डिटेल दर्ज करके पंजीकरण करना होगा। रजिस्ट्रेशन होने के बाद अभ्यर्थी अन्य डिटेल भरकर आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर पाएंगे। एप्लीकेशन फीस आवेदन पत्र भरने के साथ अभ्यर्थियों को निर्धारित शुल्क का भुगतान अनिवार्य रूप से करना होगा। बिना शुल्क जमा किये आपके फॉर्म स्वीकार नहीं किये जाएंगे। जनरल, ओबीसी वर्ग के लिए एप्लीकेशन फीस 500 रुपये तय की गई है वहीं एससी, एसटी एवं महिला उम्मीदवारों को आवेदन के साथ 250 रुपये का भुगतान करना होगा। शुल्क के भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग आदि माध्यमों के किया जा सकता है। ध्यान रखें कि यह शुल्क पिछली भर्ती के मुताबिक है, नई नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इसमें किसी प्रकार का बदलाव होने पर फीस को अपडेट कर दिया जायेगा।

जनवरी के आखिरी तक शुरू हो जाएगी मेट्रो, शहरवासी मेट्रो के सफर के नए अनुभव के लिए इसमें बैठेंगे

इंदौर जनवरी के अंत तक शहरवासी मेट्रो में बैठकर सफर कर सकेंगे। हालांकि सुपर कॉरिडोर पर 5.9 किलोमीटर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर ही मेट्रो चलेगी। ऐसे में शहरवासी मेट्रो के सफर के नए अनुभव के लिए इसमें बैठेंगे। यह संभावना जताई जा रही है कि मेट्रो रेल प्रबंधन इस हिस्से में पांच से छह मेट्रो कोच के साथ संचालन शुरू करेगा। यात्रियों की संख्या के आधार पर मेट्रो कोच चलाने का समय तय किया जाएगा। यह संभावना जताई जा रही है कि मेट्रो रेल प्रबंधन गांधी नगर स्टेशन से सुपर कॉरिडोर स्टेशन नंबर 3 तक के लिए न्यूनतम 10 रुपये किराया तय करेगा।   कुछ समय के लिए फ्री में सफर कर सकेंगे शहरवासी ऐसे में 10 रुपये में लोग मेट्रो के सफर का अनुभव ले पाएंगे। हालांकि यह भी संभावना जताई जा रही है कि सीमित समय के लिए मेट्रो में निश्शुल्क सफर का मौका शहरवासियों को दिया जा सकता है। मेट्रो रेल प्रबंधन द्वारा यात्रियों को मेट्रो की सुविधा देने के लिए कमर्शियल रन शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके पहले जनवरी के दूसरे सप्ताह में दिल्ली की कमिश्नर आफ मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम मेट्रो कोच के निरीक्षण के लिए आएगी और उसके बाद तीसरे सप्ताह में 5.9 किलोमीटर के सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर पर बने मेट्रो के पांच स्टेशन का निरीक्षण करेगी। गौरतलब है कि 30 दिसंबर तक मेट्रो रेल प्रबंधन सीएमआरएस को दस्तावेज भेजने की प्रक्रिया को पूर्ण करेगा। इसके बाद भी जनवरी में मेट्रो कोच के निरीक्षण के लिए टीम का आना तय होगा। 11वां मेट्रो कोच सेट इंदौर पहुंचा, एमडी ने किया निरीक्षण मेट्रो के गांधीनगर डिपो पर वड़ोदरा से मेट्रो का 11वां कोच सेट भी इंदौर पहुंच चुका है। शनिवार को मेट्रो के एमडी एस. कृष्ण चैतन्य ने इस कोच सेट का अवलोकन किया। इसके साथ ही उन्होंने सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर पर चल रहे मेट्रो निर्माण कार्य का निरीक्षण कर प्रगति रिपोर्ट भी जानी। एमडी ने डिपो परिसर में हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परिसर में सजावटी के बजाए ऐसे पौधे लगाएं, जो जनोपयोगी हो। उन्होंने मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े सभी कांट्रेक्टर को मेट्रो स्टेशन, डिपो के बचे कार्य व बाहरी सुंदरीकरण के कार्य पूरे करने के निर्देश दिए। जुलाई तक रेडिसन चौराहे तक सफर कर सकेंगे शहरवासी जनवरी में भले ही कमर्शियल रन के तहत सुपर कॉरिडोर के 5.9 किमी हिस्से में मेट्रो का कर्मशियल रन शुरू किया जा रहा है। जुलाई 2025 तक गांधीनगर डिपो से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो का संचालन करने की योजना है। ऐसे में अगले सात महीने में शहरवासी मेट्रो में बैठ सुपर कॉरिडोर से रेडिसन चौराहे तक आ सकेंगे।   मेट्रो स्टेशन पर यात्रियों को मिलेंगी ये सुविधाएं प्लेटफार्म पर बैठने के लिए कुर्सियां सीसीटीवी कैमरों से होगी सुरक्षा लिफ्ट व एस्कलेटर से प्लेटफार्म पर पहुंच सकेंगे पेयजल व सुविधाघर टिकट काउंटर समय की जानकारी देती घड़ी ट्रेन के आने की जानकारी देते डिस्प्ले बोर्ड दृष्टिबाधितों के प्लेटफार्म पर विशेष प्रकार की लगाई गई टाइल्स।  

देवास पुलिस का ‘ऑपरेशन त्रिनेत्रम’, 10 लाख के CCTV कैमरों से अपराध पर लगेगी लगाम

Dewas Police’s ‘Operation Trinetram’, crime will be controlled with CCTV cameras worth Rs 10 lakh मध्य प्रदेश की देवास पुलिस ने अपराधों की रोकथाम के लिए ऑपरेशन त्रिनेत्रम शुरू किया है. इस अभियान के तहत लोगों ने 10 लाख रुपए खर्च किए हैं. अभी भी अभियान जारी है. इस अभियान का उद्देश्य देवास जिले में अपराधों की रोकथाम करना है. एसपी पुनीत गहलोद ने बताया कि यह अभियान के जरिए पूरे जिले में 275 कैमरे लगाए गए हैं. देवास एसपी पुनीत गहलोद ने बताया कि देवास जिले में ऑपरेशन त्रिनेत्रम के जरिए लोगों और व्यापारियों को सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए पुलिस द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसी कड़ी में लगभग 10 लाख रुपए कीमत के 275 नए कैमरे पूरे जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्र में स्थापित किए गए. उन्होंने बताया कि कैमरा कानून व्यवस्था का पालन करने और अपराधों पर नियंत्रण रखने के लिए काफी महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है. कैमरा स्थापित करने के लिए लोगों को जागरूक और प्रोत्साहित भी किया जा रहा है. इसके अलावा जो इस अभियान में आगे बढ़कर कैमरा लगा रहे हैं, उन्हें पुलिस सम्मानित भी कर रही है. यह अभियान 1 नवंबर से शुरू किया गया था. वैज्ञानिक साक्षी के रूप में अहम भूमिका पुलिस अधीक्षक में चर्चा के दौरान बताया कि सीसीटीवी कैमरा अपराध रोकने के साथ-साथ अपराध निराकरण एवं न्यायालयीन विचाराधीन प्रकरणों में वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में अहम भूमिका निभा रहा है. पुलिस द्वारा प्रतिदिन चौपाल के माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक कैमरा स्थापित करने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है, जिससे प्रभावित होकर लोगों द्वारा सकारात्मक सहयोग दिया जा रहा है. चोरी और गंभीर अपराधों पर नकेल पुलिस अधीक्षक ने बताया कि चोरी और गंभीर अपराधों में सीसीटीवी कैमरा लगने से कहीं ना कहीं कमी आती है. इसके अलावा जहां अपराध घटित होता है, वहां सबूत के रूप में कैमरे के फुटेज सामने आ जाते हैं, जिससे आरोपी को पकड़ने में पुलिस को मदद मिलती है. इसके अलावा इसे वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में न्यायालय भी काफी महत्व दे रही है, इसलिए लोगों को लगातार सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है.

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