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महाकुंभ 2025: साइबर अटैक और श्रद्धालुओं को ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने, जमीन की निगहबानी का काम ड्रोन के जरिए किया जाएगा

लखनऊ प्रयागराज महाकुंभ को साइबर अटैक और श्रद्धालुओं को ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने के लिए प्रदेश पुलिस ने पुख्ता बंदोबस्त किए हैं। साइबर स्पेस पर केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की मदद से पैनी नजर रखी जा रही है तो जमीन की निगहबानी का काम ड्रोन के जरिए किया जाएगा। इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। बता दें कि महाकुंभ में साइबर सिक्योरिटी के लिए साइबर थाना बनाया गया है, जिसमें तकनीकी रूप से दक्ष लोगों को तैनात किया गया है। आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस, डार्क वेब और सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वालों पर इसके जरिए नजर रखी जाएगी। श्रद्धालुओं को ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने को चुनिंदा अफसरों की एक स्पेशल टीम बनाई गई है। साथ ही तमाम साइबर एक्सपर्ट्स भी साइबर सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं। संदिग्ध वेबसाइट्स पर नजर अधिकारियों के मुताबिक डार्क वेब के जरिए महाकुंभ में खलल डालने का प्रयास करने वालों का सामना करने और उनकी साजिशों को नाकाम करने की तैयारी हो चुकी है। पूरे आयोजन के दौरान एआई, एक्स, फेसबुक और गूगल का दुरुपयोग करना आसान नहीं होगा। ठगी के लिए साइबर अपराधियों द्वारा वायरल किए जाने वाले लिंक को निष्क्रिय कर दिया जाएगा। साइबर एक्सपर्ट की टीम 40 से अधिक संदिग्ध् वेबसाइट पर भी नजर बनाए हुए हैं। सोशल मीडिया पर पैसे मांगने वालों पर भी नजर जो साइबर अपराधी एआई, फेसबुक, एक्स या इंस्टाग्राम के माध्यम से लोगों से पैसे मांगते हैं, उन पर भी साइबर एक्सपर्ट नजर रख रहे हैं। कोई भी शिकायत मिलने पर उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के साथ लोगों की रकम को भी वापस कराया जाएगा। इसके लिए मोबाइल साइबर टीम भी बनाई गई है।  

बहराइच की हल्दी का आयुर्वेदिक दवाओं में होगा इस्तेमाल, विश्वपटल पर मिलेगी पहचान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडेक्ट (ओडीओपी) योजना का असर लगातार दिख रहा है. अन्नदाता किसानों के लिए सीएम योगी के प्रयासों का ही नतीजा है कि योगगुरु स्वामी रामदेव बहराइच की हल्दी खरीदने के लिए आगे आए हैं. इसका इस्तेमाल वे आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में करेंगे. बता दें कि बहराइच की हल्दी की गुणवत्ता काफी अच्छी होती है, इस कारण इसकी डिमांड भी काफी रहती है. यही वजह है कि योगगुरु की कंपनी और बहराइच के तीन एफपीओ के बीच एमओयू साइन किया गया है. बहराइच की जिलाधिकारी मोनिका रानी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरुप जिले के उत्पादों को विश्वस्तर पर पहचान दिलाने और अन्नदाता किसानों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं. इसके तहत बहराइच में 86 कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित किये गये हैं. जिलाधिकारी ने बताया कि सीएम योगी के निर्देश पर हल्दी और अन्नदाताओं को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए योगगुरु स्वामी रामदेव की कंपनी के साथ बहराइच की तीन एफपीओ के बीच एमओयू साइन किया गया है. यह एमओयू बहराइच की 3 एफपीओ प्रत्युष बायोएनर्जी फॉर्मर प्रोड्‌यूसर कंपनी लिमिटेड, वीरांगना लक्ष्मीबाई महिला किसान निर्माता कंपनी लिमिटेड और सीएससी राज किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड ने साइन किया है. हरिद्वार में हुए एमओयू में योगगुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण, बहराइच जिलाधिकारी मोनिका रानी, उप कृषि निदेशक टीपी शाही, सीएससी राज किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड मिहिंपुरवा के निदेशक अखिलेश सिंह आदि मौजूद रहे. हर साल 50 हजार टन हल्दी खरीदेंगे स्वामी रामदेव जिलाधिकारी मोनिका रानी ने बताया कि बहराइच का मिहिंपुरवा क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, उपजाऊ भूमि और अनुकूल जलवायु होने के कारण कृषि के लिए काफी उपयुक्त है. यही वजह है कि यहां हल्दी, जिमीकन्द और हरी सब्जियों की काफी अधिक मात्रा में खेती की जाती है. इसे कई राज्यों के साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी भेजा जाता है. इसके बावजूद अन्नदाताओं को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था. इसे देखते हुए अन्नदाताओं की आय बढ़ाने के लिए प्रति वर्ष 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगभग 2000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 45-50 हजार टन हल्दी के विक्रय/विपणन स्वामी रामदेव की कंपनी से कराया गया है. उप कृषि निदेशक टीपी शाही ने बताया कि एफपीओ के 1,880 पुरुष किसान तथा 975 महिला किसान हल्दी उत्पादन से जुड़े हैं. इसी तरह यहां 150 हेक्टेयर में जिमीकन्द की खेती की जा रही है, जिसमें 30-35 टन प्रति हेक्टेयर में कुल 5,250 टन जिमीकन्द का उत्पादन हो रहा है. स्थानीय और राष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग ज्यादा है. इसी प्रकार लगभग 600 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में हरी सब्जियों की भी यहां खेती हो रही है.

नवगठित पाठ्य-पुस्तक स्थायी समिति की प्रथम बैठक सम्‍पन्‍न

प्रचलित पाठ्य-पुस्तकों के पुनरीक्षण के संबंध में हुआ विचार-विमर्श भोपाल राज्य सरकार द्वारा हाल ही में पुर्नगठित मध्यप्रदेश पाठ्य-पुस्तक स्थायी समिति की प्रथम बैठक सोमवार 30 दिसम्बर को भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र में सम्‍पन्‍न हुई। बैठक की अध्‍यक्षता समिति के नव-नियुक्‍त अध्‍यक्ष डॉ. अलकेश चतुर्वेदी ने की। नवगठित समिति की प्रथम बैठक में पाठ्य-पुस्तकों में सम्मिलित करने के लिये विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। एनसीईआरटी स्वीकृत कक्षा-10वीं और 11वीं की अंग्रेजी पाठ्य-पुस्तक के विभिन्न पाठों और अंशों पर विचार किया गया। राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश से जुड़ी सामग्री भी पुस्तकों में शामिल करने की दृष्टि से कक्षा 1, 2, 3 और कक्षा-6 की प्रचलित पुस्तकों के पुनरीक्षण और सामग्री तैयार करने के संबंध में भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के प्रारंभ में संचालक राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र श्री हरजिंदर सिंह ने पुर्नगठित समिति‍के अध्‍यक्ष डॉ. अलकेश चतुर्वेदी एवं अन्‍य सदस्‍यों का पुष्‍प-गुच्‍छ भेंटकर स्‍वागत किया। बैठक में समिति सदस्य डॉ. आशीष भारती, डॉ. बालाराम परमार, डॉ. रविन्द्र कुमार सोहोनी, डॉ. अनुपम जैन, डॉ. प्रेमलता नीलम, श्री रामकुमार वैद्य, डॉ. विनय सिंह चौहान, अपर संचालक लोक शिक्षण श्री आर.के. सिंह एवं सचिव, मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल के प्रतिनिधि तथा राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र के संयुक्‍त संचालक एवं नियंत्रक पाठ्यक्रम तथा पाठ्यपुस्तक डॉ. संजय पटवा सहित अकादमिक प्रकोष्‍ट के अन्‍य अधिकारी गण भी शामिल हुए।  

उत्तर प्रदेश के नगर निगमों के कार्यों के आधार पर रैंकिंग, दस करोड़ का मिलेगा पुरस्कार

उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के नगर निगमों के कार्यों के आधार पर उनकी रैंकिंग की जाएगी। प्रदेश सरकार ने म्यूनिसिपल परफॉरमेंस रैंकिंग व्यवस्था शुरू की है। जिसमें पहला स्थान प्राप्त करने पर दस करोड़ रुपये पुरस्कार के रूप में दिए जाएंगे। पहली बार प्रदेश में नगर निगमों के बीच रैंकिंग हो रही है। शासन ने छह विषयों के आधार पर 30 मानक निर्धारित किए हैं और सभी के अलग-अलग अंक निर्धारित हैं। रैंकिंग का एक अहम आधार बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के साथ शहरवासियों के जीवन स्तर में सुधार भी है। शासन स्तर पर जो फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। उसमें स्वच्छता, जीवन की गुणवत्ता, आत्मनिर्भरता, सतत पर्यावरण, सुशासन और नागरिक सुरक्षा शामिल हैं। स्वच्छता पर 24 प्रतिशत, आत्मनिर्भरता पर 25, जीवन की गुणवत्ता पर 18, सतत पर्यावरण और सुशासन पर 12, नागरिक सु्रक्षा पर 9 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। इन मानकों पर रैंकिंग शुरू हो गई है और जुलाई-अगस्त 2025 में परिणाम घोषित किए जाएंगे। नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के क्रम में नगर निकायों को जवाबदेह बनाने में रैंकिंग कारगर साबित होगी। इन मानकों के आधार पर मिलेंगे अंक घरों में पेयजल कनेक्शन, पार्कों और शहर में हरियाली, नाइट शेल्टर, सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को रोकने और जब्तीकरण अभियान, घर-घर कूड़ा उठान, नियमित सफाई व्यवस्था, आर्गेनिक कचरे का निस्तारण, कचरा निस्तारण प्लांट पर कूड़े के ढेर न होना, स्ट्रीट लाइटों के अभाव में डार्क स्पॉट न होना, जनसंख्या की तुलना में सफाईकर्मियों की संख्या, सीवर कनेक्शन की स्थिति आदि। मई-जून में डाटा का सत्यापन विभिन्न नगर निगमों की ओर से शासन को जो डाटा भेजा जाएगा। उसका सत्यापन मई-जून 2025 में किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के आधार पर तैयार डाटा रैंकिंग में शामिल किया जाएगा।

महाकुम्भ 2025 में सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की बारीकियों से समझने MP पुलिस इन दिनों प्रयागराज में

 उज्जैन उज्जैन में 2028 में लगने वाले कुम्भ की तैयारियों के लिए मध्य प्रदेश पुलिस इन दिनों महाकुम्भ 2025 में उत्तर प्रदेश पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के मॉडल का अध्ययन कर रही है। एसीपी राजकुमार मीणा ने बताया कि मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रयागराज का दो दिनों का दौरा किया। महाकुम्भ 2025 में सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण समेत अन्य व्यवस्थाओं को बारीकियों से समझने के लिए दोनों प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों के बीच बैठक हुई। उन्होंने बताया कि इस बैठक में मध्य प्रदेश पुलिस ने महाकुम्भ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल, साइबर क्राइम से निपटने की प्रणाली आदि की जानकारी ली। उज्जैन के पुलिस अधिकारियों ने मेला क्षेत्र के विभिन्न स्थानों का भ्रमण करके उत्तर प्रदेश पुलिस की तैयारियों को देखा तथा समझा। अन्य प्रदेशों को भी यूपी पुलिस का मॉडल अपनाना चाहिए : तरुण कौशिक मध्य प्रदेश के पुलिस उपमहानिरीक्षक (एटीएस) तरुण कौशिक ने कहा कि अन्य प्रदेशों की पुलिस को उत्तर प्रदेश पुलिस के मॉडल को अपनाना चाहिए। मध्य प्रदेश पुलिस उज्जैन कुम्भ के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस से समन्वय बनाकर काम करेगी। कौशिक ने उत्तर प्रदेश पुलिस तथा प्रयागराज पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारी सभी स्तर के पुलिस कर्मियों के रहने, खान-पान और उनकी छोटी से छोटी जरूरतों का ध्यान रख रहे हैं, जो सीखने लायक है। राजकुमार मीणा ने बताया कि मध्य प्रदेश के पुलिस महानिरीक्षक (उज्जैन जोन) उमेश जोगा, पुलिस उपमहानिरीक्षक (उज्जैन रेंज) नवनीत भसीन और पुलिस उपाधीक्षक (उज्जैन) भारत सिंह यादव को कानून व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, कृत्रिम मेधा का विभिन्न तरह से इस्तेमाल, साइबर अपराध के खतरों से बचाव, जल पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था आदि कई तरह की जानकारी दी गईं। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश पुलिस से आए हुए अधिकारियों को आईसीसीसी और कुम्भ मेला क्षेत्र के विभिन्न स्थानों का भ्रमण भी कराया गया।

नए साल का स्वागत करने सभी बेसब्री से इंतजार, ग्वालियर, शिवपुरी, चंदेरी और ओरछा तक सभी होटलों की बुकिंग पूरी तरह फुल

 ग्वालियर नए साल का स्वागत करने के लिए सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और हर कोई इस न्यू ईयर को सेलिब्रेट करने के लिए प्लान तैयार कर रहे हैं। अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि नई साल की स्वागत के लिए ग्वालियर, शिवपुरी, चंदेरी और ओरछा तक सभी होटलों की बुकिंग पूरी तरह फुल हो चुकी है। वहीं, एमपी टूरिज्म ने भी खास तैयारी की है। एमपी टूरिज्म ने चंदेरी ओरछा से लेकर चंबल सफारी तक तीन सर्किट तैयार किए हैं, जहां कपल्स और फैमिलीज न्यू ईयर को सेलिब्रेट कर सकते हैं। एमपी पर्यटन विभाग के जनरल मैनेजर नितिन कटारे ने बताया है कि नई साल को टूरिस्ट ऐतिहासिक स्थानों के साथ-साथ वन्य जीव भी देख सकेंगे, यह स्पेशल पैकेज दो दिन से लेकर सात दिन तक की है। उनकी बुकिंग लगभग पूरी तरह फुल हो चुकी है। वहीं, अंचल में माधव नेशनल पार्क, कूनो नेशनल पार्क, सफारी पार्क और मुरैना जिले में चंबल नदी पर बने राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण में टूरिस्ट की संख्या सबसे अधिक होती है। क्योंकि यह चारों ही वन्य जीवों और पशु पक्षियों के लिए बेहतर हैबिटेट माने जाते हैं, इसलिए इन स्थानों की डिमांड सबसे ज्यादा आ रही है। इन टूरिस्ट डेस्टिनेशन को पैकेज में किया है शामिल ग्वालियर: यहां कई ऐतिहासिक विरासत है। इसमें किला, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई समाधि, तानसेन की समाधि, तिघरा मोती महल है। इसके साथ ही दतिया की हेरिटेज स्थलों को भी शामिल किया है। मुरैना श्योपुर: मुरैना में शनिचरा मंदिर, मितावली, पड़ावली, ककनमठ को शामिल किया गया है। वहीं, श्योपुर का मानपुर किला, बंजारा डैम और सहरिया संग्रहालय को देख सकते हैं। शिवपुरी: ग्वालियर के ऐतिहासिक स्थल देखने के बाद दूसरे दिन पर्यटक शिवपुरी जा सकते हैं। यहां रियासत काल में कहीं ऐतिहासिक स्थल और मध्यम नेशनल पार्क है। चंदेरी ओरछा: इसमें चंदेरी की मानुमेट्स,ओरछा का रामलला मंदिर सहित कई ऐतिहासिक पर्यटन स्थल खास है। ग्वालियर के हवाई और रेल मार्ग से देश वर्ष से जुड़े होने का फायदा यहां पर्यटकों को खूब मिलता है और भारी संख्या में पर्यटक नई साल में पहुंचने वाले हैं। आपको बता दें कि ग्वालियर-चंबल संभाग में पिछले दो साल से विदेशी पर्यटकों की संख्या काफी अधिक बढ़ी है। वहीं, देश के पर्यटकों की संख्या में चार गुना ज्यादा हुआ है। ऐसे में नई साल में भारी संख्या में पर्यटकों की आने की उम्मीद है और इसको लेकर मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। संभावना जताई जा रही है कि ग्वालियर चंदेरी और ओरछा में सबसे ज्यादा इस बार नई साल को लानियों की भीड़ मौजूद रहेगी।

युवाओं में जागरूकता पैदा करने, सुरक्षा को बढ़ावा देने, नए साल के जश्न में कंडोम और ORS बांटेगा ये पब

पुणे  पुणे का एक पब अपने द्वारा आयोजित नए साल की पार्टी में आमंत्रित लोगों को कंडोम और ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) के पैकेट बांटने जा रहा है. पब का दावा है कि इन सामानों के वितरण का उद्देश्य युवाओं में जागरूकता पैदा करना, सुरक्षा को बढ़ावा देना और जिम्मेदारी को प्रोत्साहन करना है. फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर बवाल मच गया है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. साथ ही पुलिस ने पब प्रबंधन से भी पूछताछ शुरू कर दी है. लेकिन आयोजकों ने कहा कि कंडोम बांटना कोई अपराध नहीं है. दूसरी ओर पूरे मामले को लेकर युवा कांग्रेस ने पुणे पुलिस आयुक्त के पास शिकायत दर्ज कराई है. पुणे के मुंधवा में एक रेस्तरां-सह-पब, हाई स्पिरिट्स कैफे है. यह पब अपने नियमित युवा ग्राहकों को नए साल के जश्न के निमंत्रण के रूप में ओआरएस के साथ कंडोम के पैकेट बांट रहा है. पुणे कांग्रेस का कहना है कि ऐसा कृत्य पुणे की शैक्षिक और सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप नहीं है. पुणे युवा कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की चीजों से युवाओं में गलत संदेश जाने का खतरा है. जिससे गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं और समाज में अनुचित आदतों को बढ़ावा मिल सकता है.  

प्रयागराज महाकुंभ में आने वाले पर्यटक के लिए ऐतिहासिक भवन का दीदार होंगा रोमाँचक

 प्रयागराज महाकुंभ भारत की सनातनी परंपरा का धार्मिक और सांस्कृतिक महापर्व है। जनवरी 2025 में प्रयागराज में आयोजित होने जा रहे इस महापर्व को दिव्य और भव्य स्वरूप देने में जुटी प्रदेश की योगी सरकार इसकी परंपराओं का संरक्षण करते हुए कुंभ नगरी की सांस्कृतिक धरोहरों का भी संरक्षण कर रही है। प्रयागराज शहर की एक धार्मिक पहचान होने के साथ ही कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के साथ भी इसका नाम जुड़ा है। इसी के अंतर्गत आता है नगर निगम परिसर स्थित भवन, जिसके जीर्णोद्धार का कार्य प्रयागराज नगर निगम द्वारा करवाया जा रहा है। ब्रिटिश काल में सन् 1865 के करीब संगम नगरी में बने सबसे पुराने ‘ग्रेट नॉर्दर्न’ होटल और बाद में नगर निगम कार्यालय में तब्दील इस 150 वर्ष से अधिक पुराने भवन का 9 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। कायाकल्प के बाद प्रयागराज वासियों समेत महाकुंभ में आने वाले पर्यटक भी यह ऐतिहासिक भवन देख सकेंगे। नगर आयुक्त चंद्र मोहन गर्ग का कहना हैं कि यह भवन प्रयागराज की धरोहर है, इसे संरक्षित रखने की पहल नगर निगम ने की है। महाकुंभ से पहले इस भवन के जीर्णोद्धार का काम पूरा हो जाएगा। अपने नए रंग रूप में यह भवन पर्यटकों को आकर्षित करेगा। इस ऐतिहासिक इमारत में आजादी के पूर्व देश की आजादी में हिस्सा लेने वाले बुद्धिजीवी समाज की बैठकें होती थीं। 1930 के दशक में ब्रिटिश सरकार ने इस भवन को प्रशासनिक भवन में तब्दील कर दिया था। प्रयागराज नगर निगम के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सलाहकार सूरज वीएस ने बताया कि दिसंबर 2020 में नगर निगम के भवन में एक कमरे की छत गिर गई थी, इसके बाद इस पूरे भवन को गिराकर नया भवन बनाने पर विचार किया गया था। डेढ़ सौ साल से अधिक पुराने भवन को गिराने से पहले पुरातत्व विभाग से राय ली गई। एएसआई, एमएनआईटी प्रयागराज और आईआईटी मुम्बई से इस भवन के विषय में परामर्श लिया गया। 2020-21 में एएसआई की रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम की इस बिल्डिंग को धरोहर बताते हुए इसका संरक्षण करने की सलाह दी गई। 150 वर्ष पहले इस भवन का निर्माण ईको फ्रेंडली चीजों से करवाया गया था, इसलिए अब इसका कायाकल्प इन्हीं चीजों से करवाया जा रहा है। इस भवन में पहले मरम्मत के दौरान जो भी नई चीजें लगाई गई थीं, जैसे सीमेंट का प्लास्टर, फर्श की टाइलें, खिड़कियां-दरवाजे, उन्हें अब हटाया जा रहा है, ताकि भवन को असली स्वरूप में वापस लाया जा सके। इससे भवन का तापमान प्राकृतिक रूप से ठंडा रहेगा और गर्मी में भी एयर कंडीशनर का कम इस्तेमाल किया जाएगा। यह तरीका पर्यावरण के अनुकूल भी है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुंबई की सवानी हेरिटेज जीर्णोद्धार का काम कर रही है, जो दिसंबर के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद इस भवन में ‘फसॉड लाइटिंग’ भी लगवाई जाएंगी। महाकुंभ में आने वाले पर्यटक इस ऐतिहासिक भवन को एक नए कलेवर में देखेंगे । सवानी हेरिटेज के जितेश पटेल ने बताया कि नगर निगम के इस पुराने भवन का जीर्णोद्धार, पुराने जमाने में निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से किया जा रहा है। निर्माण सामग्री के लिए लाइम मध्य प्रदेश के कटनी से और बाकी चीजें अलग-अलग राज्यों और लोकल मार्केट से मंगवाई जा रही हैं। सीमेंट बालू की जगह चूना, सुरखी, बालू, बेल गिरि, गुड़, उड़द की दाल, गुगुल और मेथी के मिश्रण से निर्माण सामग्री तैयार की जा रही है। इस बिल्डिंग के विषय में रोचक बात यह भी है कि एक समय में इसी बिल्डिंग में प्रयागराज म्यूजियम हुआ करता था। म्यूजियम से जुड़े साक्ष्य अब भी इस बिल्डिंग में मौजूद है।

मध्य प्रदेश में बीजेपी ने परिवारवाद पर लगाम लगा दी, एक परिवार से एक ही व्यक्ति को मौका, अधर में लटका है नेतापुत्रों का भविष्य

भोपाल मध्य प्रदेश में बीजेपी ने परिवारवाद पर लगाम लगा दी है। कई नेतापुत्रों के राजनीतिक सपने टूट गए हैं। बुधनी उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय को टिकट नहीं मिला। इसके बाद से दूसरे नेता निराश हो गए। अब भाजपा संगठन चुनाव में भी इन नेता पुत्रों की कोई पूछपरख नहीं हुई। बीजेपी का परिवारवाद विरोधी रुख नेताओं के बच्चों के लिए मुसीबत बन गया है। विधानसभा और लोकसभा जाने की उनकी राह मुश्किल हो गई है। कई नेता अपने बच्चों को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते थे। लेकिन पार्टी के नए नियमों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। क्या है पार्टी का स्टैंड भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अपनी जीत का श्रेय परिवारवाद न फैलाने को दिया है। पार्टी का मानना है कि परिवारवाद से प्रतिभा दब जाती है। इसलिए पार्टी ने एक परिवार से एक ही व्यक्ति को टिकट देने का फैसला किया है। इससे कई नेता पुत्रों का राजनीतिक करियर खतरे में पड़ गया है। पहले ये नेता पुत्र राजनीति में काफी सक्रिय थे। अब वे कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। नए नियमों के बाद से गायब हैं नेतापुत्र ऐसे नेता पुत्रों में पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक भार्गव भी शामिल हैं। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र सिंह तोमर भी इसी सूची में हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय भी राजनीति में सक्रिय थे। पूर्व मंत्री जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ, पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन की बेटी मौसम और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के बेटे तुष्मुल भी इसी श्रेणी में आते हैं। बीजेपी ने पहले इन पर की कार्रवाई भाजपा ने आकाश विजयवर्गीय और जालम सिंह पटेल के टिकट पहले ही काट दिए थे। कार्तिकेय सिंह चौहान 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले से बुधनी में सक्रिय थे। उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें उपचुनाव में टिकट मिलेगा। प्रदेश भाजपा चुनाव समिति ने उनका नाम दूसरे नंबर पर भेजा भी था। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें टिकट नहीं दिया। नरेंद्र तोमर के बेटे भी थे एक्टिव पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र सिंह तोमर लगभग 10 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। उन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने की उम्मीद थी। लेकिन पार्टी ने नरेंद्र सिंह तोमर को ही मैदान में उतार दिया। इससे देवेंद्र का सपना टूट गया। सागर जिले की रहली सीट से नौ बार विधायक रहे गोपाल भार्गव अपने बेटे अभिषेक को राजनीति में स्थापित करना चाहते थे। अभिषेक दमोह या खजुराहो से लोकसभा टिकट के लिए भी कोशिश कर रहे थे। जयंत मलैया भी खाली हाथ दमोह से सात बार विधायक रहे जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ भी टिकट की दौड़ में थे। उन्होंने विधानसभा चुनाव का टिकट भी मांगा था। लेकिन पार्टी ने उन्हें तवज्जो नहीं दी। 2021 के उपचुनाव में सिद्धार्थ ने दमोह से टिकट मांगा था। लेकिन पार्टी ने कांग्रेस से आए राहुल लोधी को टिकट दे दिया। राहुल हार गए तो मलैया परिवार पर भितरघात का आरोप लगा। सिद्धार्थ को पार्टी से निकाल दिया गया। बाद में वे वापस पार्टी में आ गए। बालाघाट में भी यही हाल बालाघाट से विधायक रहे गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी मौसम को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते थे। मौसम को विधानसभा का टिकट भी मिला था। लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। इसलिए गौरीशंकर बिसेन को ही चुनाव लड़ना पड़ा। अब गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी को जिलाध्यक्ष बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

समूहों के माध्यम से छोटे-छोटे व्यवसायों की शुरुआत, नवीनतम तकनीकी और उद्योग आधारित आजीविका अवसर

भोपाल प्रदेश सरकार का महिला मिशन महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और राजनैतिक विकास को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें सम्मान और सुरक्षा प्रदान करने के लिए समर्पित है। सरकार ने महिलाओं के समग्र विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है। इस मिशन के तहत, महिलाओं को उद्यमिता, कौशल विकास, शिक्षा और रोजगार के अधिक अवसर दिये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) ने ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं का प्रभाव ग्रामीण परिवारों के जीवन में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत गरीब परिवार के लगभग 62 लाख सदस्यों को, लगभग 5 लाख स्व-सहायता समूहों से जोडा गया है। इनमें से लगभग 15 लाख परिवारों की सालाना आय न्यूनतम 1 लाख से अधिक अथवा करीब 10-12 हजार रुपये महीने तक पहुंची है। यह आंकडे मध्यप्रदेश में आर्थिक उन्नयन के प्रयासों की सफलता को दर्शाते हैं। समूहों के माध्यम से छोटे-छोटे व्यवसायों की शुरुआत इस मिशन के तहत महिलाओं को स्व सहायता समूह बनाकर कई प्रकार के व्यवसायों की शुरुआत करने का अवसर मिला। इन व्यवसायों में स्कूली ड्रेस सिलाई, पोषण आहार का संचालन, टोल टैक्स बैरियर प्रबंधन, राशन की दुकानों का संचालन, जल प्रबंधन, पंचायतों में कर संग्रहण और सड़कों के रख-रखाव जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। इससे महिला सशक्तिकरण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली। मिशन के समूहों से जुड़े परिवारों को आजीविका के एक से अधिक विकल्प उपलब्ध कराने के लिये लगातार प्रशिक्षण, मार्गदर्शन के साथ-साथ वित्तीय सहयोग भी दिया जा रहा है। विगत एक वर्ष में मिशन के अंतर्गत 48,655 महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है। इसके साथ ही 479 ग्राम संगठन (व्ही.ओ.) और 35 संकुल स्तरीय संगठन (सी.एल.एफ) स्थापित किए गए हैं, जो ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान में योगदान दे रहे हैं। मिशन ने 21,860 स्व-सहायता समूहों को कुल 43.57 करोड़ रुपये परिक्रामी निधि (रिवाल्विंग फण्ड) और 14,657 समूहों को 129.92 करोड़ रुपये सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) प्रदान की है। इसके अलावा, विभिन्न बैंकों से 1,38,192 समूहों को 3,115 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त हुआ है, जो इन समूहों के आर्थिक विकास में सहायक बन रहा है। नवीनतम तकनीकी और उद्योग आधारित आजीविका अवसर  स्वयं सहायता समूहों को स्थायी व्यवसाय और आजीविका के उद्देश्य से नमो ड्रोन दीदी योजना प्रारम्भ की गयी। यह योजना महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि प्रयोजनों के लिए किसानों को ड्रोन किराए पर देने में सक्षम बनाती है  नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे नवीन तरल उर्वरकों के पत्तों पर छिड़काव के लिए ड्रोन का उपयोग से कृषि में उन्नत तकनीक की शुरुआत करती है। योजना मे इस वर्ष प्रदेश की 89 महिलाओं को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा, फर्टिलाइजर कंपनियों द्वारा ड्रोन भी उपलब्ध कराए गए हैं, जो कृषि कार्यों में आधुनिक तकनीकी का उपयोग बढ़ा रहे हैं। कृषि और पशुपालन में नई दिशा कृषि, पशुपालन, दुग्ध उत्पादनतथा गैर वानकी लघु वनोपज संग्रहणके क्षेत्र में भी आजीविका मिशन द्वारा बडे पैमाने पर समूह सदस्यों को संगठित कर प्रोड्यूसर कंपनियों से जोड कर लाभान्वित किया गया है। प्रदेश में गठित 135 प्रोड्यूसर कंपनियों के माध्यम से कृषि, कुक्कुट पालन, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, लघु वनोपज आदि के क्षेत्र में नई क्रांति लाने में कामयावी मिली है। मध्यप्रदेश में आजीविका मिशन द्वारा 2,84,000 परिवारों को कृषि और पशुपालन आधारित आजीविका गतिविधियों से जोड़ा गया है। किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 10.83 लाख टन अनाज का उपार्जन किया गया है, जिससे किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल सका है। इसके अलावा, 7 किसान उत्पादक कंपनियों का गठन किया गया है, जिनमें 928 समूह सदस्यों को जोड़ा गया है। ये कंपनियां किसानों को उनके उत्पादों के बेहतर विपणन और मूल्य में वृद्धि के लिए सहायता प्रदान कर रही हैं। दीदी कैफे केन्द्र सरकार के सौ दिनों में लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य मिलने के बाद मध्यप्रदेश में 96 हजार 240 बहनें लखपति दीदी बन गईं। इनको मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से वित्तीय सहायता, बाज़ार सहायता एवं तकनीकी सहायता दी गई है। इनके स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की पहुंच बड़े बाजारों तक बनाने के लिये डिजीटल प्लेटफार्म पर लाकर ऑनलाईन मार्केटिंग की जा रही है। प्रदेश में लगभग 46,000 परिवारों को गैर कृषि आधारित लघु उद्यम गतिविधियों से जोड़ा गया है और 20 नए दीदी कैफे की शुरुआत की गई है। इन कैफे के माध्यम से महिलाएं अपनी आजीविका चला रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में नई रोजगार के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। यह गर्व का विषय है कि 25 अगस्त 2024 को जलगांव (महाराष्ट्र) में हुए लखपति दीदी सम्मेलन मे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुना जिले की लखपति दीदी श्रीमती गंगा अहिरवार को सम्मानित किया गया । आजीविका मार्ट और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण योजना आजीविका मार्ट, भोपाल द्वारा पिछले एक वर्ष में 9.73 करोड़ रुपये की बिक्री की गई है, जो ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार में स्थापित करने का एक सफल उदाहरण है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) के तहत 1,217 समूह सदस्यों को 348.38 लाख रुपये का सीड कैपिटल अनुदान प्रदान किया गया है, जिससे उनके छोटे-छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यम को बढ़ावा मिला है। लखपति दीदी और मिलेट आधारित आजीविका संवर्धन लखपति दीदी इनिशिएटिव कार्यक्रम के तहत 13.69 लाख महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जिनका उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।  लखपति दीदी संगीता मालवीय ने 25 अगस्त 2024 को जलगांव (महाराष्ट्र) में हुए लखपति दीदी सम्मेलन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से संवाद करने का अवसर मिला। इसके साथ ही मिलेट आधारित आजीविका संवर्धन के तहत 9,000 महिला समूहों को मिलेट उपार्जन और प्रसंस्करण गतिविधियों से जोड़ा गया है। जिले डिण्‍डौरी और सिंगरौली में आधुनिक मिलेट प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की गई हैं, जो इन महिलाओं के लिए नई आजीविका के अवसर पैदा कर रही हैं। ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर आजीविका मिशन के तहत 79,634 ग्रामीण युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं। डी.डी.यू.जी.के.वाई. और आरसेटी के माध्यम से इन युवाओं को रोजगारोन्मुखी और स्वरोजगार प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे उनकी जीवनशैली में … Read more

संक्रांति तक कम से कम आधे राज्यों को नए अध्यक्ष मिल जाएंगे और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा

नई दिल्ली जेपी नड्डा बीते 4 सालों से अधिक समय से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हुए हैं। उनका कार्यकाल बीते साल ही समाप्त हो गया था, लेकिन लोकसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें विस्तार मिल गया था। अब इलेक्शन के नतीजे आए भी 6 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा ही हैं। इस बीच पार्टी में संगठन बदलने की कवायद तेज हो गई है और सूत्रों का कहना है कि संक्रांति के बाद भाजपा को नया अध्यक्ष मिल जाएगा। इसे लेकर बैठकें शुरू हो चुकी हैं और जल्दी ही किसी नेता के नाम पर मुहर लग सकती है। सूत्रों का कहना है कि भूपेंद्र यादव, अनुराग सिंह ठाकुर, शिवराज सिंह चौहान समेत कई ऐसे नेता हैं, जिन्हें अध्यक्ष बनाने का फैसला हो सकता है। फिलहाल पार्टी 15 जनवरी तक जिला और राज्य के अध्यक्ष बना लेना चाहती है। संक्रांति तक कम से कम आधे राज्यों को नए अध्यक्ष मिल जाएंगे और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा। खबर है कि महीने के अंत तक पार्टी को नया अध्यक्ष मिल सकता है। रविवार को भाजपा ने इस संबंध में मुख्यालय में मीटिंग भी बुलाई थी। इस मीटिंग में संगठन महामंत्री बीएल संतोष के अलावा जेपी नड्डा समेत कई अधिकारी मौजूद थे। इस मीटिंग में संगठन पर्व को लेकर भी चर्चा हुई है। इसके तहत सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि एक फुल प्रूफ व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे पता चल सके कि कौन संगठन से जुड़ रहा है। पार्टी नेताओं के अनुसार यह तैयारी है कि घर-घर जाकर भी सदस्य बनाए जाएं। इससे लोगों तक पहुंच बनाने का एक मौका पार्टी को मिल सकेगा। बता दें कि इसी साल अक्टूबर में भाजपा ने 10 करोड़ सदस्यों का आंकड़ा पार कर लिया था। रविवार को जेपी नड्डा और बीएल संतोष ने संगठन चुनाव का जायजा लिया। एक अधिकारी ने कहा कि यह सफल मीटिंग थी। हमने संगठन के सभी पहलुओं पर विचार किया। इस मीटिंग में यह भी तय हुआ है कि अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती को पूरे वर्ष मनाया जाएगा। साल भर इस अवसर पर अलग-अलग कार्य़क्रम का आयोजन होगा। पूरे साल अटल जी की जयंती को सुशासन वर्ष के तौर पर मनाया जाएगा। फिलहाल पार्टी का जोर इस बात पर है कि संक्रांति तक जिला और राज्यों के अध्यक्ष तय कर लिए जाएं। उसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाए। बता दें कि आमतौर पर किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत संक्रांति के बाद ही की जाती है। हिंदू धर्म की इस मान्यता का भाजपा की ओर से भी पालन होता रहा है।

देवास पुलिस ने अपराधों की रोकथाम के लिए ऑपरेशन त्रिनेत्रम किया शुरू

 देवास मध्य प्रदेश की देवास पुलिस ने अपराधों की रोकथाम के लिए ऑपरेशन त्रिनेत्रम शुरू किया है. इस अभियान के तहत लोगों ने 10 लाख रुपए खर्च किए हैं. अभी भी अभियान जारी है. इस अभियान का उद्देश्य देवास जिले में अपराधों की रोकथाम करना है. एसपी पुनीत गहलोद ने बताया कि यह अभियान के जरिए पूरे जिले में 275 कैमरे लगाए गए हैं. देवास एसपी पुनीत गहलोद ने बताया कि देवास जिले में ऑपरेशन त्रिनेत्रम के जरिए लोगों और व्यापारियों को सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए पुलिस द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसी कड़ी में लगभग 10 लाख रुपए कीमत के 275 नए कैमरे पूरे जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्र में स्थापित किए गए. उन्होंने बताया कि कैमरा कानून व्यवस्था का पालन करने और अपराधों पर नियंत्रण रखने के लिए काफी महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है. कैमरा स्थापित करने के लिए लोगों को जागरूक और प्रोत्साहित भी किया जा रहा है. इसके अलावा जो इस अभियान में आगे बढ़कर कैमरा लगा रहे हैं, उन्हें पुलिस सम्मानित भी कर रही है. यह अभियान 1 नवंबर से शुरू किया गया था. वैज्ञानिक साक्षी के रूप में अहम भूमिका पुलिस अधीक्षक में चर्चा के दौरान बताया कि सीसीटीवी कैमरा अपराध रोकने के साथ-साथ अपराध निराकरण एवं न्यायालयीन विचाराधीन प्रकरणों में वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में अहम भूमिका निभा रहा है. पुलिस द्वारा प्रतिदिन चौपाल के माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक कैमरा स्थापित करने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है, जिससे प्रभावित होकर लोगों द्वारा सकारात्मक सहयोग दिया जा रहा है. चोरी और गंभीर अपराधों पर नकेल पुलिस अधीक्षक ने बताया कि चोरी और गंभीर अपराधों में सीसीटीवी कैमरा लगने से कहीं ना कहीं कमी आती है. इसके अलावा जहां अपराध घटित होता है, वहां सबूत के रूप में कैमरे के फुटेज सामने आ जाते हैं, जिससे आरोपी को पकड़ने में पुलिस को मदद मिलती है. इसके अलावा इसे वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में न्यायालय भी काफी महत्व दे रही है,  इसलिए लोगों को  लगातार सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है.

अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों को हर माह 10 हजार के साथ जमीन, मकान और रोजगार से जुड़े संसाधन भी दिए जाएंगे

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने नई एंटी नक्सल नीति में विस्तार किया है. बीजेपी की राज्य सरकार सरेंडर करने वाले नक्सलियों की सुविधाओं को बढ़ाने जा रही है. गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में नक्सल नीति को लेकर बात करते हुए बताया अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों को हर माह 10 हजार की राशि दी जाएगी. साथ ही रहने के लिए जमीन, मकान और रोजगार से जुड़े संसाधन भी दिए जाएंगे. सरकार का प्लान है कि घर जमीन के साथ ही नक्सलियों को खास ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिससे उन्हें रोजगार हासिल करने में आसानी हो. नई नीति के तहत नक्सलियों पर जो इनाम की राशि होती है वो भी नक्सलियों को दी जाएगी. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को रखने के लिए पांच जिलों में भवन बन रहे हैं. शर्मा ने बताया  नक्सलवाद को कम करने के लिए कई आयामों पर काम हो रहे हैं. आगे की जिंदगी जीने के लिए तमाम सुविधाएं दी जाएगी। फिर चाहे वह रहने के लिए जमीन-मकान हो या फिर रोजगार से जुड़े संसाधन। अलग खास भवनों में रखकर नक्सलियों को ट्रेंड किया जाएगा। उन्हें काम सिखाया जाएगा ताकि वह आगामी जीवन में रोजगार हासिल कर सकें। शर्मा बोले- मुझसे किसी ने कहा, नक्सली बनना अच्छा नई नीतियों को बेहतर बताते हुए विजय शर्मा  सुविधाएं गिनाते हुए बोले- ये फायदे सुनने के बाद मुझसे एक सीनियर पत्रकार ने कहा था कि ऐसे में तो नक्सली बनना ही अच्छा है। यह कहकर गृहमंत्री मुस्कुराए। मांझी तय करेंगे गांव में क्या बनेगा गृहमंत्री ने बताया कि, पंचायती राज के माध्यम से बस्तर के विकास का काम हम करने जा रहे हैं। गांवों के मांझियों (बस्तर के अंदरूनी इलाकों के जनप्रतिनिधि) की भागीदारी सुनिश्चित की जाने की मांग उठी थी, तो अब बस्तर के जिला पंचायत के सभागृह में मांझियों की बैठक होगी। जिलेवार ये बैठकें होंगी और मांझी बताएंगे कि उनको क्या-क्या निर्माण कार्य करवाने हैं। इन सभी आयामों को मिलाकर नया सॉल्यूशन समाज को देने की कोशिश है। नक्सल नीति से जुड़ी गृहमंत्री की कुछ बड़ी बातें-     हम अनेक आयामों में काम हो रहे हैं। हम ये भी कर रहे हैं कि सरेंडर बढ़े, लोग नक्सलवाद में न जाए।     अब बस्तर के पांच जिलों में ऐसे भवन तैयार हैं, जहां पर सरेंडर करने वाले नक्सलियों को रखा जाएगा।     इन भवनों में उनका स्किल डेवलपमेंट किया जाएगा। वहां उनके रहने खाने के लिए 3 साल की व्यवस्था होगी।     जो हथियार वह लेकर के आएंगे उस हथियार से जुड़ी जो राशि घोषित है वह भी उनको दी जाएगी।     उनको प्लॉट दिया जाएगा, उनको प्रधानमंत्री आवास दिया जाएगा।     ये पॉलिसी इस उद्देश्य के साथ तैयार हुई है कि लोग मुख्यधारा में आएं। सरकार एक भी गोली नहीं चलाना चाहती।     IED ब्लास्ट कर और बंदूक के दम पर गांव की उन्नति को रोक देना कब तक सहा जाएगा।     नक्सल घटनाओं से पीड़ित और प्रभावितों के लिए अलग योजना बनी है, केंद्र से भी और राज्य की भी।     बस्तर के युवाओं को लगातार रायपुर लाया जाएगा, उनके एजुकेशन और स्पोर्ट्स को लेकर कार्यक्रम चलाए जाएंगे। मार्च 2026 तक खत्म करना है नक्सलवाद हाल ही में छत्तीसगढ़ दौरे पर आए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। इसके बाद से ही प्रदेश में एनकाउंटर और नक्सलियों के खिलाफ दूसरे तरीकों की कार्रवाई बढ़ी है। प्रदेश सरकार का दावा है कि एक साल में 212 से अधिक नक्सली एनकाउंटर में मारे गए हैं। इतने एनकाउंटर पिछली सरकारों के 5-5 साल के कार्यकाल में भी नहीं हुए थे।

UPI से जुड़ा नया नियम 1 जनवरी से होगा लागू, ज्यादा पैसे कर पाएंगे ट्रांसफर

नई दिल्ली 1 जनवरी से नियमों में कुछ बदलाव होने वाले हैं। लेकिन एक सबसे बड़ा बदलाव होने वाला है UPI नियमों में। आज हम आपको यूपीआई के नियमों की जानकारी देने वाले हैं। साथ ही बताएंगे कि इसमें क्या नया मिलने वाला है। RBI ने फैसला लिया है कि UPI 123Pay की ट्रांजैक्शन लिमिट में बदलाव किया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने लिमिट में इजाफा करने का फैसला लिया है। UPI 123Pay का इस्तेमाल करके यूजर्स 5 हजार की जगह 10 हजार रुपए की ट्रांजैक्शन कर पाएंगे। क्या होती है UPI 123Pay UPI 123Pay सर्विस यूजर्स को दी जाती है। ये एक ऐसी सर्विस है जिसमें यूजर्स को बिना इंटरनेट कनेक्शन पेमेंट करने का ऑप्शन दिया जाता है। यही वजह है कि आरबीआई की तरफ से ऐसी ट्रांजैक्शन को कंट्रोल करने के लिए पूरा प्रयास किया जाता है। लेकिन अब इसमें भी बदलाव कर दिया गया है। UPI 123Pay में यूजर्स को पेमेंट करने के अधिकतम 4 ऑप्शन दिए जाते हैं। इसमें IVR नंबर्स, मिस्ड कॉल्स, OEM-embedded Apps और साउंड बेस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। क्या है डेडलाइन UPI के नए नियमों को लेकर डेडलाइन जारी हो चुकी है। इसमें यूजर्स को 1 जनवरी 2025 तक का समय दिया जाएगा। यानी यूजर्स आसानी से इसके बाद 10 हजार रुपए तक की ट्रांजैक्शन कर पाएंगे। हालांकि इसके साथ ही OTP बेस्ड सर्विस को ऐड कर दिया गया है। यानी आपको पेमेंट करने के लिए OTP की जरूरत होगी। अगर आप पेमेंट करना चाहते हैं तो OTP का इस्तेमाल करना होगा। क्योंकि सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए इसका फैसला लिया गया है। विदेश में पहुंच चुकी है UPI श्रीलंका समेत कई देशों में भी UPI सर्विस की शुरुआत हो चुकी है। भारतीय सिस्टम ने देखते ही देखते बाहर तक पैर पसार लिए हैं। सरकार की तरफ से इसको लेकर नए फैसले लिए जाते हैं।

LPG सिलेंडर का दाम 1 जनवरी से बदल रहा! जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा भारी

LPG GAS CYLINDER PRICE 2025 नए साल के मौके पर आपकी रसोई के बजट को या तो झटका लग सकता है या फिर बड़ी राहत भी मिल सकती है. दरअसल, हर महीने की एक तारीख को गैस कंपनियां एलपीजी के दामों का रिव्यू कर उन्हें घटाने बढ़ाने का फैसला लेती हैं. लंबे समय से कंपनियों द्वारा घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में परिवर्तन नहीं किया गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि 1 जनवरी 2025 को LPG गैस के दामों में बदलाव हो सकता है. 2025 में कितने बढ़ सकते हैं घरेलू LPG सिलेंडर के दाम? नए साल की पहली तारीख को घरेलू LPG सिलेंडर के दाम घटेंगे या बढ़ेंगे, ये फैसला तो 1 जनवरी 2025 को ही होगा, लेकिन अगर कीमतें बढ़ती हैं तो इसमें आमतौर पर 50 से 100 रु का अंतर किया जाता है. बात करें पिछले जनवरी 2023 औरक जनवरी 2024 की तो नव वर्ष की पहली तारीखों को घरेलू गैस सिलेंडर समेत सभी गैस सिलेंडरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था. ऐसे में माना जा रहा है कि इस वर्ष घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ाई जा सकती हैं. 2024 में कितनी बढ़ी-घटीं एलपीजी की कीमतें? मार्च 2024 में घरेलू गैस सिलेंडर में और जुलाई 2024 में कर्मशियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती की गई थी. इसके बाद अगस्त, सितंबर और नवंबर 2024 में कर्मशियल एलपीजी की कीमतों को बढ़ाया गया. वहीं घरेलू गैस सिलेंडर के दाम मार्च 2024 से ही स्थिर बने हुए हैं. मध्यप्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में 31 दिसंबर 2024 को 14.2kg वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 808 रु 50 पैसे हैं. मध्यप्रदेश में सिलेंडर का ये रेट मार्च 2024 से ही स्थिर हैं. यानी लगभग 9 महीनों से घरेलू गैस सिलेंडर के दामों ये बदलाव नहीं हुआ है. इससे पहले इसमें बदलाव मार्च 2024 में हुआ था, जब घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में 100 रु की कटौती की गई थी. मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में घरेलू व कमर्शियल सिलेंडर के दाम शहर कीमतें (घरेलू सिलेंडर) कीमतें (कमर्शियल सिलेंडर) भोपाल 808 रु 50 पैसे 1824 रु जबलपुर 809 रु.50 पैसे 2036 रु 50 पैसे इंदौर 831 रु 1926 रु ग्वालियर 886 रु 2047 रु 50 पैसे

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