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श्रद्धालुओं के लिए होंगे ‘हाईटेक इंतजाम’, छह मोटर हाउसबोट का किया गया इंतजाम, बच्चों-बुजुर्गों को देंगे बड़ी राहत

प्रयागराज   महाकुंभ में श्रद्धालुओं को संगम तट पर हाईटेक हाउसबोट और आधुनिक आइसोलेटेड चेंजिंग रूम बड़ी राहत देंगे। हाउसबोट तट से संगम जाएंगे। जहां बोट के अंदर बने एंक्लोज्ड एरिया में श्रद्धालु सीढ़ी की मदद से नीचे उतरेंगे और संगम में डुबकी लगाएंगे। हाईटेक हाउसबोट की यह सुविधा बच्चों और बुजुर्ग के लिए कारगर साबित होगी। साथ ही साथ उन लोगों के लिए भी जो लोग पानी में उतरने से डरते हैं। छह मोटर हाउसबोट का किया गया इंतजाम आपको बता दें संगम के तट पर श्रद्धालुओं के लिए खास हाउसबोट का इंतजाम मेला प्रशासन ने किया है। मेला प्रशासन की तरफ से छह मोटर हाउसबोट का इंतजाम किया गया है। जिसमें कई तरह की आधुनिक सुविधा रहेगी। यह सभी हाउसबोट किसी भी कोने में जा सकती हैं। मतलब की घाट के किनारे से श्रद्धालुओं को बैठना होगा उसके बाद यह हाउसबोट मोटर की मदद से संगम तक पहुंचेगी। हाइटेक हाउसबोट में श्रद्धालुओं को सोफा सेट और चेंजिंग रूम भी मिलेगा। जिसमें श्रद्धालु डुबकी लगाने के बाद कवर्ड चेंजिंग रूम में कपड़े पहन सकेंगे। 144 आइसोलेटेड चेंजिंग रूम बनकर तैयार हाउसबोट के मैनेजर हर्ष अग्रवाल बताते हैं कि फिलहाल हाउसबोट का रेट डिसाइड नहीं किया गया है, लेकिन सबसे ज्यादा मदद उन श्रद्धालुओं को मिलेगी जिनको नदी में जाने से डर लगता है। वह सुरक्षित बैठकर संगम में जाकर डुबकी लगा सकते हैं। इसके साथ ही 144 आइसोलेटेड चेंजिंग रूम भी तैयार किए गए हैं। जो पहली बार संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए हैं। यह चेंजिंग रूम अंदर से गर्म रहेंगे और श्रद्धालुओं को बड़ी राहत देंगे। महिलाओं को खास ध्यान में रखते हुए इन चेंजिंग रूम को बनाया गया है।

इंदौर में जनवरी ने या फरवरी महीने से मेट्रो रेल दौड़ना शुरू हो जाएगी

इंदौर इंदौर में मेट्रो रेल परियोजना के शुरू होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। मेट्रो चलाने के लिए अब मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की हरी झंडी का इंतजार है और सब कुछ ठीक रहा, तो शहर में इस महीने या अगले महीने से मेट्रो रेल दौड़ना शुरू कर सकती है। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) ने तैयारी पूरी कर ली है। मेट्रो के अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि एमपीएमआरसीएल द्वारा सीएमआरएस को जरूरी दस्तावेज जमा किए जाने का काम अंतिम दौर में है। उन्होंने इसके बाद सीएमआरएस का दल मेट्रो रेल के डिपो और स्टेशनों के निरीक्षण की तारीख तय करके सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेगा। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के बाद सीएमआरएस की हरी झंडी मिलने की स्थिति में शहर में मेट्रो रेल का वाणिज्यिक परिचालन इस महीने या फरवरी से शुरू हो सकता है। मेट्रो अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में शहर के गांधी नगर स्टेशन से सुपर कॉरिडोर के स्टेशन क्रमांक-तीन के बीच 5.90 किलोमीटर के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले गलियारे पर मेट्रो रेल चलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस गलियारे पर मेट्रो रेल प्रायोगिक परीक्षण (ट्रायल रन) सितंबर 2023 में किया गया था। बहरहाल, जानकारों का कहना है कि इस मार्ग पर छितराई आबादी के कारण मेट्रो रेल को शुरुआत में यात्रियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। एमपीएमआरसीएल अधिकारी ने कहा कि शहर में एक बार मेट्रो रेल शुरू हो जाने और इसके मार्ग की लम्बाई बढ़ने के बाद यात्रियों की कोई कमी नहीं होगी। इस बारे में जानकारी देते हुए एक मेट्रो अधिकारी ने बताया कि शहर में मेट्रो रेल के स्टेशन इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि इनके जरिये छह डिब्बों की रेल चलाई जा सकती है। उन्होंने हालांकि बताया कि शुरुआत में हम तीन डिब्बों की रेल चलाएंगे। यात्रियों की तादाद बढ़ने पर इसमें तीन और डिब्बे जोड़े जा सकते हैं। अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि मेट्रो रेल के एक डिब्बे में करीब 300 यात्री सफर कर सकते हैं जिनमें सीट पर बैठने वाले 50 लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इंदौर में 7,500.8 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण की नींव 14 सितंबर 2019 को रखी गई थी। इसके तहत शहर में गोल आकार वाला करीब 31.50 किलोमीटर लम्बा मेट्रो रेल गलियारा बनाया जाना है।

राजधानी से प्रयागराज महाकुंभ जाएगी फायर फाइटिंग बोट, घाटों पर रहेंगी तैनात

 भोपाल/प्रयागराज यूपी के प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन होने जा रहा है. इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. संगम नगरी में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए भी तमाम इंतजामात किए गए हैं. इसी के मद्देनजर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में फायर फाइटिंग बोट बनाई गई हैं. भोपाल से अब फायर फाइटिंग बोट प्रयागराज रवाना की जाएंगी. फायर सेफ्टी के लिहाज से ये बोट महाकुंभ के दौरान घाटों पर तैनात की जाएंगी. लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच आग लगने की आपात कालीन स्थिति में घाटों तक फायर ब्रिगेड न पहुंचने की परेशानी के लिहाज से रेस्क्यू का काम करेंगी. फायर बोट पर उत्तर प्रदेश अग्निशमन और आपात सेवा लिखा गया है. बोट में 6-8 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है. नाव के पिछले हिस्से में लगी मोटर से नदी का पानी खींचकर आग लगने की आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकेगा. फायर बोट पर सायरन सिस्टम भी लगाया गया है. इस तरह की करीब 6 फायर बोट प्रयागराज भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है. फायर फाइटिंग बोट की खासियत फायर बोट पर उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपात सेवा लिखा गया है। बोट में 6-8 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। डीजल से चलने वाली मोटर लगाई गई है जो आग लगने की आपात स्थिति में नोजल से गंगा-यमुना का पानी फेंकेगी। साथ ही इसमें सायरन सिस्टम भी लगाया गया है। इस तरह की करीब 6 फायर बोट प्रयागराज भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है। यूपी ने सौंपा था काम मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि यूपी फायर सर्विस की तरफ से टेंडर जारी कर भोपाल के पीएस ट्रेडर्स को इस बोट के निर्माण का काम सौंपा था. जिसके बाद इसे भोपाल में बनाया गया है, ये देश की पहली फायर फाइटिंग बोट है जिसे खासतौर पर यूपी के प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ के लिए तैयार किया गया है. आज भोपाल में इसकी टेस्टिंग भी की गई है, बता दें कि टेस्टिंग के लिए उत्तर प्रदेश फायर सर्विस से टीम भी आई थी.  

‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’ में यात्रियों के लिए ट्रेन टिकट बुकिंग की सुविधा भी होगी, मिलेगी आवश्यक जानकारी

प्रयागराज  महाकुम्भ 2025 के दौरान श्रद्धालुओं के सुगम और आरामदायक सफर के लिए भारतीय रेलवे ने विशेष प्रबंध किए हैं। रेलवे की ये पहल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने और समय की बचत करने के उद्देश्य से की गई है। कुम्भ रेल सेवा ऐप महाकुम्भ 2025 के दौरान श्रद्धालुओं का स्मार्ट साथी उत्तर मध्य रेलवे ने महाकुंभ 2025 के दौरान श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है – ‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’। इस ऐप का उद्देश्य महाकुंभ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को रेलवे से जुड़ी सभी जानकारी एक ही स्थान पर प्रदान करना है। यह ऐप यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल संसाधन होगा, जो उनकी यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएगा।   यात्रियों को मिलेगी सभी आवश्यक जानकारी ‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’ के माध्यम से यात्रियों को महाकुंभ से जुड़ी सारी आवश्यक जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी। इसमें ट्रेनों की समय-सारणी, टिकट बुकिंग, स्टेशन से मेला क्षेत्र तक पहुंचने के मार्ग, और रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा, ऐप में महाकुंभ के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की जानकारी भी दी जाएगी, जिससे श्रद्धालु अपनी यात्रा की योजना बेहतर तरीके से बना सकेंगे।   आपातकालीन सेवाएं और सुरक्षा की व्यवस्था महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में सुरक्षा और आपातकालीन सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। इस ऐप में आपातकालीन संपर्क नंबरों की जानकारी भी उपलब्ध होगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में यात्री तुरंत सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा, आरपीएफ द्वारा रेलवे स्टेशनों और मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर यात्रियों को सभी आवश्यक जानकारी प्रदान की जाएगी, जिससे वे सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा पूरी कर सकें।   विशेष सुविधाएं और डिजिटल टिकट बुकिंग ‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’ में यात्रियों के लिए ट्रेन टिकट बुकिंग की सुविधा भी होगी, जिससे वे ऐप के माध्यम से सीधे टिकट बुक कर सकेंगे। यह सुविधा यात्रियों के लिए बहुत सहायक होगी, क्योंकि उन्हें अलग से काउंटर या वेबसाइट पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके अलावा, ऐप में रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं की जानकारी भी दी जाएगी, जैसे वेटिंग रूम, रेस्ट रूम, फूड स्टॉल्स, पीने के पानी की व्यवस्था और सफाई जैसी सुविधाएं।   हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध जानकारी यात्रियों की सुविधा के लिए इस ऐप को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को भाषा संबंधी कोई परेशानी न हो। इसके माध्यम से वे अपनी यात्रा को बेहतर तरीके से योजना बना सकेंगे और ऐप का पूरा लाभ उठा सकेंगे।   महाकुंभ से जुड़ी तस्वीरें और ऐतिहासिक जानकारी इस ऐप में महाकुंभ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और तस्वीरें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें अतीत के महाकुंभ के फोटो गैलरी, महाकुंभ के इतिहास, आयोजनों और धार्मिक महत्व की जानकारी भी दी जाएगी। इससे श्रद्धालु महाकुंभ के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बेहतर समझ सकेंगे।   उत्तर मध्य रेलवे का यह प्रयास श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान, सुरक्षित और आरामदायक बनाने में मदद करेगा। ‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’ महाकुंभ 2025 के आयोजन को एक नया डिजिटल दृष्टिकोण प्रदान करेगा, जिससे यात्रियों को पूरी यात्रा के दौरान आवश्यक जानकारी और सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।

उत्तर भारत की बर्फबारी का मध्यप्रदेश पर असर, जनवरी में 22 दिन शीतलहर, कोल्ड डे रहेगा

भोपाल मध्यप्रदेश में नए साल का स्वागत घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के साथ हुआ। भोपाल और उज्जैन समेत कई शहरों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी 100 मीटर तक सीमित हो गई। मौसम विभाग ने जनवरी में 20 से 22 दिन तक शीतलहर चलने का अनुमान लगाया है। प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में कोल्ड-डे की स्थिति बनी रहेगी।   नर्मदापुरम, इंदौर, रायसेन में 500 से 1000 मीटर और ग्वालियर, राजगढ़, शिवपुरी, जबलपुर में 1-2 किमी की विजिबिलिटी रही। छतरपुर के नौगांव की रात सबसे ठंडी रही। यहां पारा 6.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बर्फबारी की वजह से बढ़ेगी ठंड जम्मू, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख में बर्फबारी हो रही है। आने वाले दिनों में बर्फ पिघलेगी। जिससे उत्तरी हवा चलेगी और मध्यप्रदेश में ठंड का असर बढ़ जाएगा। इस कारण जनवरी में प्रदेश का मौसम ठंडा ही रहेगा। जनवरी में 20-22 दिन चल सकती है शीतलहर मौसम विभाग के अनुसार, जनवरी में 20 से 22 दिन तक शीतलहर और कोल्ड डे का असर रह सकता है। शुरुआती दो दिन में ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के जिलों में शीतलहर का असर देखने को मिलेगा। इसके बाद पूरे प्रदेश में असर बढ़ जाएगा। गुना में 6.5 डिग्री, सागर में 6.7 डिग्री, राजगढ़ में 7.6 डिग्री, मंडला में 7.7 डिग्री, टीकमगढ़ में 7.9 डिग्री, मलाजखंड में 8 डिग्री, रतलाम-रायसेन में 8.3 डिग्री, उमरिया में 8.5 डिग्री, नरसिंहपुर में 9 डिग्री, खजुराहो-सतना में 9.4 डिग्री दर्ज किया गया। बाकी शहरों में भी पारे में गिरावट देखने को मिली। 2 जनवरी  ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, शिवपुरी, दतिया और भोपाल समेत अन्य जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का अनुमान है। मंदसौर, जबलपुर और पन्ना जैसे जिलों में शीतलहर का असर बना रहेगा।   3 जनवरी   नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर और सतना जैसे जिलों में कोहरे की स्थिति बनी रहेगी।   राजधानी भोपाल में पारा 8.4 डिग्री, जबलपुर में 9 डिग्री, ग्वालियर में 9.9 डिग्री, उज्जैन में 11.8 डिग्री और इंदौर में 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नवंबर-दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ने वाली ठंड जनवरी में भी जमकर असर दिखाएगी। मौसम विभाग का कहना है कि जनवरी में 20 से 22 दिन तक शीतलहर चल सकती है। उत्तरी हिस्से यानी, ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के जिलों में कोल्ड-डे की स्थिति बनेगी। शुरुआती 3 दिन प्रदेश के आधे हिस्से में कोहरा रहेगा। कुछ जिलों में शीतलहर भी चलेगी। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की एक्टिविटी के चलते दिसंबर के आखिरी दिनों में बारिश और ओले का दौर रहा। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन समेत 45 से अधिक जिलों में बारिश हुई। वहीं, 20 जिले ऐसे रहे, जहां ओले भी गिरे। बारिश का दौर खत्म होते ही ठंड का असर बढ़ गया। ऐसा मौसम जनवरी में पूरे महीने ही बना रहेगा। इससे पहले साल 2024 की आखिरी रात भी ठंडी रही। नवंबर-दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी ठंड इस बार कड़ाके की ठंड पड़ रही है। नवंबर-दिसंबर में ठंड रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। नवंबर की बात करें तो भोपाल में तो 36 साल का रिकॉर्ड टूटा है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में भी पारा सामान्य से 7 डिग्री तक नीचे रहा। वहीं, दिसंबर में भी ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ा। स्थिति यह रही कि पूरे प्रदेश में जनवरी से भी ठंडा दिसंबर रहा। भोपाल समेत कई शहरों में ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 9 दिन से शीतलहर चली। भोपाल में दिसंबर की सर्दी ने 58 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदल दी गई है, जबकि भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए हीटर लगाए गए। भगवान को भी ठंड से बचाने के लिए जतन किए गए।

मध्यप्रदेश ने सबसे पहले लागू किया वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम

भोपाल मध्यप्रदेश, देश में वन और वृक्ष आवरण में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की संस्कृति वाला हमारा देश सम्पूर्ण जीव-जगत को भी अपना कुटुम्ब ही मानता है। हम सदियों से वनों, पहाड़ों और नदियों को पूजते चले आ रहे हैं। पूर्वजों की इस परंपरा को सहेजे जाने के लिए जैव-विविधता का संरक्षण आवश्यक है। आने वाली पीढ़ियों के लिये वन जीवन को सहेजकर रखना हमारी जिम्मेदारी है। मध्यप्रदेश कुल वन और वृक्ष आवरण 85 हजार 724 वर्ग किलोमीटर और वनावरण 77.073 वर्ग किलोमीटर के साथ देश का अग्रणी राज्य है। यहां वनों को प्रकृति ने अकूत सम्पदा का वरदान देकर समृद्ध किया है। प्रदेश में 30.72 प्रतिशत वन क्षेत्र है जो देश के कुल वन क्षेत्र का 12.30 प्रतिशत है। यहां कुल वन क्षेत्र 94 हजार 689 वर्ग किलोमीटर (94 लाख 68 हजार 900 हेक्टेयर) है। प्रदेश में 24 अभयारण्य, 11 नेशनल पार्क और 8 टाईगर रिजर्व हैं, जिसमें कान्हा, पेंच, बाँधवगढ़, पन्ना, सतपुड़ा और संजय डुबरी टाईगर रिजर्व बाघों के संरक्षण में लैंडमार्क बन गए हैं। बाघों को सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिये उठाए जा रहे महत्वपूर्ण कदम मध्यप्रदेश में बाघों की सुरक्षा और संरक्षण के लिये महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं। हाल ही में राजधानी भोपाल से सटे रातापानी अभयारण्य को प्रदेश का 8वां टाईगर रिजर्व घोषित कर दिया गया है। शिवपुरी के माधव वन्य जीव उद्यान को भी टाईगर रिजर्व घोषित के जाने की तकनीकी अनापत्ति जारी कर दी गई है, उम्मीद है कि शीघ्र ही यह प्रदेश का 9वां टाईगर रिजर्व बन जाएगा। रातापानी हमेशा से ही बाघों का घर रहा है। रायसेन एवं सीहोर जिले में रातापानी अभयारण्य का कुल 1272 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अधिसूचित है। टाईगर रिजर्व बनने के बाद कुल क्षेत्रफल में से 763 वर्ग किलोमीटर को कोर क्षेत्र घोषित किया गया है। यह वह क्षेत्र है, जहाँ बाघ मानवीय हस्तक्षेप के बिना स्वतंत्र विचरण कर सकेंगे। शेष 507 वर्ग किलोमीटर को बफर क्षेत्र घोषित किया गया है। यह क्षेत्र कोर क्षेत्र के चारों ओर स्थित है। इसका उपयोग कुछ प्रतिबंधों के साथ स्थानीय रहवासी कर सकेंगे, इनकी आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। रातापानी की अर्बन फॉरेस्ट से समीपता के कारण भोपाल को अब टाईगर राजधानी के रूप में पहचान मिलेगी। रातापानी के टाईगर रिजर्व बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिये रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे। मध्यप्रदेश ने सबसे पहले लागू किया वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम मध्यप्रदेश ने देश में सबसे पहले वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम लागू किया। प्रदेश में वर्ष 1973 में वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम लागू किया गया था। प्रदेश के सतपुड़ा टाईगर रिजर्व को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की संभावित सूची में शामिल किया गया है। मध्यप्रदेश में सफेद बाघों के संरक्षण के लिये मुकुंदपुर में महाराजा मार्तण्ड सिंह जू देव व्हाइट टाईगर सफारी की स्थापना की गई है, इसे विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है। वन्य जीव विशेषज्ञों ने सतपुड़ा टाईगर रिजर्व को बाघ सहित कई वन्य-जीवों के प्रजनन के लिए सर्वाधिक अनुकूल स्थान माना है, इसलिए यह इनके लिए आदर्श आश्रय स्थली है। पेंच टाईगर रिजर्व की ‘कॉलर वाली बाघिन’ के नाम से प्रसिद्ध बाघिन को सर्वाधिक 8 प्रसवों में 29 शावकों को जन्म देने के अनूठे विश्व-कीर्तिमान के कारण ‘सुपर-मॉम’ के नाम से भी जाना जाता है। इसी तरह कान्हा टाईगर रिजर्व में पाए जाने वाले हार्ड ग्राउण्ड बारहसिंगा का संरक्षण भी देश ही नहीं दुनिया भर के लिए विशेष है। इसलिए मध्यप्रदेश में इसे राजकीय पशु का दर्जा दिया गया है। चीतों की पुनर्स्थापना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष रुचि एवं अथक प्रयासों के फलस्वरूप कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अफ्रीकी चीतों की पुनर्स्थापना की गई। अब इनका कुनबा बढ़ने भी लगा है, जो हमारे लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है। भारत में 13 हजार से भी अधिक तेंदुए हैं, जिसमें से 25 प्रतिशत तेंदुए मध्यप्रदेश में हैं। प्रदेश में तेंदुओं की संख्या 3300 से अधिक है। देश में तेंदुओं की आबादी में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि मध्यप्रदेश में यह वृद्धि 80 प्रतिशत आंकी गई है। घड़ियाल, गिद्धों, भेड़ियों, तेंदुओं और भालुओं की संख्या में भी मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। मध्यप्रदेश बाघों का घर होने के साथ ही तेंदुओं, चीतों, गिद्धों और घड़ियालों का भी आँगन है। दुर्लभ स्तनपायी मछली डॉल्फिन भी अत्यंत साफ-सुथरी चंबल में संरक्षित की जा रही है। इस तरह मध्यप्रदेश अन्य राज्यों की जैव-विविधता को सम्पन्न बनाने में भी अपना योगदान दे रहा है। वन्य जीव कॉरिडोर बनने से कम होगा मानव-वन्य जीव संघर्ष बाघ एवं तेंदुआ स्टेट का सम्मान मध्यप्रदेश को मिला हुआ है। हमारे प्रदेश में संरक्षित क्षेत्रों के अतिरिक्त खुले वनों में भी 30 प्रतिशत से अधिक बाघ विचरण कर रहे हैं। इससे मानव-वन्य जीव संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। मानव-वन्य जीव संघर्ष को कम करने के लिये विशेष वन्यजीव कॉरिडोर बनाये गये हैं। साथ ही 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वॉड और एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वॉड का गठन किया गया है। वन्य जीवों को मानव-वन्य जीव संघर्ष के लिए संवेदनशील क्षेत्रों से रेस्क्यू कर संरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जायेगा, जिससे वन्य जीवों का प्रबंधन एवं संरक्षण अधिक प्रभावी रूप से हो सकेगा। इन संघर्षों में प्रतिवर्ष औसतन 80 प्रतिशत जनहानि, 15 हजार पशु हानि होती है और 1300 नागरिक घायल होते हैं। मानव-वन्य जीव संघर्ष को कम करने के लिये शासन ने जनहानि के प्रकरणों में क्षतिपूर्ति राशि को 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का निर्णय लिया है। इन प्रकरणों में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत 30 दिवस के अंदर क्षति-पूर्ति राशि का भुगतान किया जाता है। प्रदेश में हाथियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एक एलीफेंट-टॉस्कफोर्स का गठन किया गया है। हाथी प्रबंधन के लिये योजना तैयार की जा रही है। इसमें एआई तकनीक के उपयोग से स्थानीय समुदायों की सहभागिता को भी प्रबंधन में सम्मिलत किया जा रहा है। हाथी विचरण क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों से स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।  

निर्देशों का पालन करके हितग्राही आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निःशुल्क उपचार का लाभ सहजता से प्राप्त कर सकते

भोपाल मुख्य कार्यपालन अधिकारी आयुष्मान भारत योजना डॉ. योगेश भरसट ने आयुष्मान भारत योजना में हितग्राहियों को निशुल्क उपचार प्रदान करने के लिए प्रक्रियाओं और निर्देशों की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इन प्रक्रियाओं और निर्देशों का पालन करके हितग्राही आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निःशुल्क उपचार का लाभ सहजता से प्राप्त कर सकते हैं। हितग्राही अस्पताल पहुँचने के बाद सबसे पहले आयुष्मान योजना के लिए पंजीकृत कियोस्क का पता करें और अपने दस्तावेज़, जैसे आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड, राशन कार्ड, समग्र आईडी, पात्रता पर्ची, संबल कार्ड या BoCW कार्ड को आयुष्मान मित्र को दिखाएं। पात्रता सत्यापन के दौरान आयुष्मान मित्र आपके आयुष्मान कार्ड और आधार/समग्र आईडी का मिलान करेगा और उपचार के लिए अस्पताल की पात्रता सुनिश्चित करेगा। सत्यापन के बाद, आयुष्मान मित्र आपको निःशुल्क उपचार की प्रक्रिया समझाएगा और चिकित्सीय परामर्श तथा उपचार की प्रक्रिया शुरू होगी। उपचार के दौरान हितग्राही को किसी भी प्रकार की राशि का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं उपचार के दौरान हितग्राही को किसी भी प्रकार की राशि का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। यदि किसी उपकरण, दवा या सेवा के लिए अस्पताल द्वारा अतिरिक्त राशि चार्ज की जाती है, तो हितग्राही को तुरंत हेल्पलाइन नंबर पर इसकी जानकारी देनी चाहिए। उपचार पूरा होने के बाद डिस्चार्ज के समय “निल (शून्य बकाया)” राशि का बिल प्राप्त करना सुनिश्चित करें और अस्पताल से मंगलकामना पत्र लेना न भूलें। एनएचए हेल्पलाइन नंबर 14555, एसएचए मध्यप्रदेश हेल्पलाइन नंबर 18002332085 पर कर सकते हैं शिकायत हितग्राही से अपेक्षा की जाती है कि वे उपचार के बाद फीडबैक फॉर्म को सही जानकारी के साथ भरें और हस्ताक्षर करें। यदि किसी स्तर पर अतिरिक्त राशि की मांग की जाती है या किसी प्रकार की असुविधा होती है, तो हितग्राही को तुरंत NHA हेल्पलाइन नंबर 14555 या SHA मध्यप्रदेश हेल्पलाइन नंबर 18002332085 पर शिकायत दर्ज करायें। हितग्राही को क्या करना है (Do’s): हितग्राही को चाहिए कि वे अपने आवश्यक दस्तावेज जैसे आयुष्मान कार्ड, पात्रता पर्ची, आधार कार्ड, राशन कार्ड और समग्र आईडी अपने साथ रखें। अस्पताल पहुँचते ही आयुष्मान कियोस्क पर जाएं और आयुष्मान मित्र से अपनी पात्रता की पुष्टि करवाएं। यह सुनिश्चित करें कि अस्पताल आपकी बीमारी से संबंधित स्पेशलिटी के लिए पैनल में शामिल है। पात्रता की पुष्टि होने के बाद निःशुल्क उपचार प्रक्रिया को समझें और उसका पालन करें। डिस्चार्ज के समय “निल (शून्य बकाया)” राशि का बिल प्राप्त करें और फीडबैक फॉर्म को सही जानकारी के साथ भरें। साथ ही, अस्पताल से मंगलकामना पत्र लेना न भूलें। हितग्राही को क्या नहीं करना है (Don’ts) हितग्राही को कभी भी आवश्यक दस्तावेजों को अस्पताल ले जाना नहीं भूलना चाहिए। निःशुल्क उपचार के दौरान किसी भी परिस्थिति में अस्पताल को अतिरिक्त राशि का भुगतान न करें। यदि किसी विशेष परिस्थिति में राशि मांगी जाती है, तो उसकी उचित रसीद प्राप्त करना सुनिश्चित करें। किसी भी प्रकार की असत्यापित जानकारी पर भरोसा न करें और किसी भ्रम की स्थिति में तुरंत आयुष्मान मित्र से संपर्क करें। फीडबैक फॉर्म को बिना पढ़े या अधूरी जानकारी के साथ हस्ताक्षर न करें। यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता हो, तो शिकायत दर्ज करने में देरी न करें।  

मोहन सरकार का पहला जनता दरबार 6 जनवरी को आयोजित किया जाएगा, हर समस्या की होगी सुनवाई

भोपाल मोहन सरकार का मध्य प्रदेश में नए साल पर एक नया प्रयोग देखने को मिलने वाला है. जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल के सीएम हाउस में ‘जनता दरबार’ की शुरुआत करेंगे. हालांकि मध्य प्रदेश की राजनीति में यह प्रयोग राजनीति में नया नहीं है, क्योंकि इससे पहले भी प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जनता दरबार लगा चुके हैं. जबकि दूसरे राज्यों के कई सीएम अभी भी जनता दरबार लगाते हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ का नाम भी शामिल है. सीएम मोहन यादव जनता दरबार के जरिए आम लोगों की समस्याओं को सुनेंगे और उनका समाधान करेंगे. बताया जा रहा है कि भोपाल में पहला जनता दरबार 6 जनवरी को लग सकता है, जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां की जा रही हैं. हालांकि सीएम के इस प्रयोग की चर्चा सियासी गलियारों में शुरू हो गई है. सीएम मोहन सुनेंगे जनता की समस्याएं सूत्रों के हिसाब से सीएम मोहन यादव का पहला जनता दरबार 6 जनवरी को हो सकता है, जो सुबह 10 से 12 बजे तक चलेगा. जहां सीएम हाउस पर पहुंचे लोगों से मुख्यमंत्री मिलेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान अधिकारियों के जरिए करेंगे. बताया जा रहा है कि इसके लिए सीएम के पास पहुंचने वाली शिकायतों की स्क्रूटनी होगी और उन्हीं के हिसाब से समस्याएं सुलझाई जाएगी. जनता दरबार में ट्रांसफर और पोस्टिंग जैसे मुद्दों की कोई सुनवाई नहीं होगी, यहां केवल बीमारी, जरूरतमंदों के आवेदनों पर ही सुनवाई होगी. जबकि ग्रामीण लोगों की समस्याओं को भी सुना जाएगा, माना जा रहा है कि एक बार के जनता दरबार में 500 से भी ज्यादा लोग आ सकते हैं. ऐसे में इसी हिसाब से व्यवस्थाएं की जाएगी. मध्यप्रदेश में मौजूदा समय में साप्ताहिक जनसुनवाई होती है, जहां जिला स्तर पर सभी जिला कलेक्टर और पुलिस कप्तान प्रत्येक मंगलवार को जनता की समस्याओं को सुनते हैं. इसके अलावा, सीधे जनता की समस्याओं को निपटाने के लिए सीएम हेल्पलाइन पोर्टल भी है. इस पर लोग अपनी शिकायतें और समस्याएं दर्ज करवाते हैं और उसके निराकरण के बाद पोर्टल पर ही शिकायत बंद भी करवा सकते हैं. हालांकि, सीएम हेल्पलाइन को लेकर बीच-बीच में शिकायतें आती रहती हैं. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अब खुद जनता से मिलकर यह देखना चाहते हैं कि सरकार की योजनाएं जनता तक पहुंच रही हैं या नहीं? जनता दरबार का आयोजन: कब और कैसे?     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पहला जनता दरबार 6 जनवरी को सीएम हाउस पर आयोजित होगा। यह दरबार सुबह 10 बजे से 12 बजे तक चलेगा, जिसमें लोग अपनी समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रख सकेंगे। इस कार्यक्रम में पहले से आई शिकायतों को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन ट्रांसफर-पोस्टिंग के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसमें मुख्य रूप से बीमार और जरूरतमंदों के आवेदन लिए जाएंगे। अनुमान है कि 500 से 600 लोग इस जनता दरबार में शामिल होंगे। सीएम हेल्पलाइन और अन्य समस्याओं के समाधान का तरीका मुख्यमंत्री ने इस पहल को लेकर दो मुख्य कारण बताए हैं। पहला, कि कई प्लेटफॉर्म्स होने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा था, जिससे लोग अफसरों और दफ्तरों के चक्कर काटते रहते थे। दूसरा, सीएम हेल्पलाइन जैसी योजनाओं में अक्सर शिकायतों को दबा दिया जाता था, जिससे समस्याओं का समाधान नहीं होता। पिछले नेताओं के जनता दरबार का इतिहास मध्यप्रदेश में जनता दरबार की परंपरा पहले भी रही है। उमा भारती और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने भी सीएम हाउस पर जनता दरबार लगाए थे। दिग्विजय सिंह के समय, मुख्यमंत्री हाउस में लोग सुबह 5 बजे से ही अपनी शिकायतें लेकर पहुंच जाते थे। उमा भारती के कार्यकाल में भी यह दरबार बहुत लोकप्रिय हुआ, हालांकि भीड़ को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती साबित हुआ था। शिवराज सिंह चौहान का तरीका और मोदी की सीख शिवराज सिंह चौहान ने भी अपनी सरकार के दौरान जनसुनवाई की व्यवस्था लागू की थी। उन्होंने जिला और प्रदेश स्तर पर जनसुनवाई की शुरुआत की और लोकसेवा गारंटी अधिनियम को लागू किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी तर्ज पर एक नया कदम उठाया है, ताकि जनता की समस्याओं का समाधान सीधे सीएम हाउस में किया जा सके। योगी आदित्यनाथ से प्रेरणा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में जनता दरबार की शुरुआत की थी, जिसे लखनऊ और गोरखपुर में आयोजित किया जाता है। वहां पर भी मुख्यमंत्री खुद लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान करते हैं। इस तर्ज पर डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में भी जनता दरबार की शुरुआत की है।

मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के हितग्राहियों को बड़ी सौगात, 14 लाख का बीमा कराएगी सरकार

भोपाल  युवा अन्नदूत योजना के अनुबंधित परिवहनकर्ता हितग्राहियों को 3064 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर 14 लाख रुपये का बीमा कराया जाएगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि इस योजना के हितग्राहियों की असामयिक मृत्यु पर कोई सहायता नहीं प्राप्त होने से परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था। मंत्री राजपूत ने बताया कि हितग्राहियों के बीमा के लिए तीन बीमा योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। इनमें से पहली सामूहिक बीमा योजना का क्रियान्वयन फरवरी-2025 से होगा। इसका वार्षिक प्रीमियम 2608 रुपये और बीमित राशि 10 लाख रुपये है। वहीं, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का क्रियान्वयन जून-2025 से होगा। इसका वार्षिक प्रीमियम 436 रुपये और बीमित राशि दो लाख रुपये है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का क्रियान्वयन जून-2025 से होगा। इसका वार्षिक प्रीमियम 20 रुपये और बीमित राशि दो लाख रुपये है। कब मिलेगा बीमा का लाभ योजना में पालिसी जारी होने की दिनांक से हितग्राही की दुर्घटना में मृत्यु होने पर पूरी बीमा राशि मिलेगी। पालिसी जारी होने की दिनांक से 30 दिन के बाद हितग्राही की अन्य कारण से (दुर्घटना को छोड़कर) मृत्यु होने पर पूरी बीमा राशि दी जाएगी। अन्य कारणों से 30 दिन में मृत्यु होने पर हितग्राही द्वारा देय प्रीमियम राशि का 80 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। बीमा पालिसी जारी होने के एक वर्ष की अवधि में आत्महत्या करने पर जीवन बीमा की राशि देय नहीं होगी, मात्र देय प्रीमियम राशि का 80 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। हितग्राही की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच होना चाहिए। जीवन बीमा एक वर्ष के लिए होगा, जिसका प्रतिवर्ष नवीनीकरण कराना होगा। हितग्राही की मृत्यु पर बीमा राशि परिवार को दी जाएगी। इन अधिकारियों को मिला उच्च पद का प्रभार मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की पहल पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में कार्यरत अधिकारियों को उच्च पद का प्रभार दिया गया है। विभाग के 65 कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारियों को वर्तमान पद स्थापना वाले जिले में ही उच्च पद का प्रभार देकर सहायक आपूर्ति अधिकारी का प्रभार सौंपा गया है। वहीं, नौ नापतौल निरीक्षकों को प्रभारी सहायक नियंत्रक नापतौल, एक सहायक नियंत्रक नापतौल को प्रभारी उप नियंत्रक नापतौल, एक उप नियंत्रक नापतौल को प्रभारी संयुक्त नियंत्रक नापतौल, नौ सहायक आपूर्ति अधिकारी प्रभारी को प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी और आठ जिला आपूर्ति अधिकारी को प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक बनाया गया है।

छत्तीसगढ़ में इस बार प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हो सकता, अध्यक्ष किरण सिंहदेव को कैबिनेट में शामिल किए जाने की अटकलें

रायपुर  नए साल 2025 में बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलेगा। बीजेपी में संगठन चुनाव का दौर चल रहा है। माना जा रहा है कि जनवरी महीने में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की लिस्ट जारी हो जाएगी। उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष का नाम घोषित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में इस बार प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हो सकता है। बीजेपी में ऐसी चर्चा चल रही है। हालांकि इस संबंध में किसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। वहीं, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव को कैबिनेट में शामिल किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। ओबीसी कार्ड खेलने की तैयारी में बीजेपी छत्तीसगढ़ बीजेपी के नेताओं और पदाधिकारियों में यह चर्ता है कि नया प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हो सकता है। क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री आदिवासी वर्ग से हैं और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव सामान्य वर्ग से आते हैं। विष्णुदेव साय की कैबिनेट में सभी वर्ग के नेताओं को शामिल किया गया है। बीजेपी अब राज्य की सियासत में ओबीसी कार्ड खेलने की तैयारी कर रही है। नए चेहरे को मिल सकती है जगह माना जा रहा है कि अब संगठन किसी ऐसे चेहरे को आगे करेगा जिसकी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पकड़ हो। चर्चा है कि इस बार प्रदेश अध्यक्ष रायपुर जिले से हो सकता है। अगर किरण सिंहदेव को कैबिनेट में शामिल किया जाता है तो उन नेताओं को मौका मिल सकता है जो कैबिनेट में शामिल होने की दौड़ में हैं। किस वर्ग से कौन से नेता हैं प्रबल दावेदार छत्तीसगढ़ बीजेपी सूत्रों के अनुसार, इस बार आदिवासी या फिर ओबीसी वर्ग के नेता को प्राथमिकता दी जाएगी। ओबीसी वर्ग का अध्यक्ष बनाकर बीजेपी भूपेश बघेल के सामने एक बड़ा चेहरा खड़ा कर सकती है। ऐसे में ओबीसी वर्ग से धरमलाल कौशिक, आदिवासी वर्ग से विक्रम उसेंडी औऱ सामान्य वर्ग से शिवरतन शर्मा का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। कैबिनेट विस्तार की अटकलें छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार की भी अटकलें लगाई जा रही हैं। विष्णुदेव साय की कैबिनेट में दो विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार और प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बीच बीजेपी ऐसे नेता को आगे बढ़ा सकती है जिसके नाम से किसी भी गुट को दिक्कत नहीं हो। दिल्ली में हुई थी बैठक हाल ही में सीएम विष्णुदेव साय दिल्ली के दौरे पर थे। सीएम विष्णुदेव साय ने दिल्ली दौरे में संगठन चुनाव को लेकर आयोजित बैठक में हिस्सा लिया था। इस बैठक नें प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी समेत पार्टी के सीनियर नेता मौजूद थे। कहा जा रहा है कि इसी बैठक में प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट विस्तार को लेकर फॉर्म्युला बनाया गया है।

राजाभोज एयरपोर्ट पर पहली बार दिसंबर में 1,50,976 यात्रियों का आवागमन हुआ, 1,373 उड़ानों का मूवमेंट दर्ज किया गया

 भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का राजा भोज विमानतल लोगों को काफी पसंद आ रहा है. यहां सेआने-जाने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. फ्लाइटों की संख्या में वृद्धि और विमानतल पर मिलने वाली सुविधाओं के चलते भोपाल एयरपोर्ट यात्रियों को रास आने लगा है.इसकी वजह से लगातार लाखों की संख्या में यात्री अब भोपाल से देश के कोने-कोने में यात्रा कर रहे हैं. संत हिरदाराम नगर स्थित राजाभोज एयरपोर्ट ने दिसंबर 2024 में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है।बता दें कि पहली बार इस महीने में 1,50,976 यात्रियों का आवागमन हुआ। इसके साथ ही 1,373 उड़ानों का मूवमेंट दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है। 2023 के दिसंबर में यह आंकड़ा 1,31,259 यात्रियों और 1,143 उड़ानों का था। इस तरह यात्रियों की संख्या में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यात्रियों की संख्या में इजाफा विंटर शेड्यूल में उड़ानों की संख्या बढ़ने से यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है। एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, पूरे साल 2024 में 14,711 उड़ानों का मूवमेंट हुआ, जो 2023 के 13,481 उड़ानों से 9 प्रतिशत अधिक है। साल 2023 में कुल 13,20,205 यात्रियों ने यात्रा की थी, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 15,26,629 तक पहुंच गई, जो 16 प्रतिशत की बढ़त है। बात करें नवंबर 2024 की तो इस महीने में 1,37,157 यात्रियों का आवागमन हुआ और 1,224 उड़ानों का मूवमेंट हुआ। आर्थिक रुप से मिली मजबूती इन आंकड़ों से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यात्रियों की संख्या में काफी अधिक बढ़ोतरी हुई है। इससे पिछले पूराने रिकॉर्ड टूट चुके हैं। यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होने पर राज्य सरकार को आर्थिक रुप से भी मजबूती मिली है।

सरकारी नौकरी में तलाश में लगे युवाओं के लिए खुशखबरी, आबकारी आरक्षक पदो की भर्ती परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन जारी, आवेदन 15 फरवरी से

भोपाल सरकारी नौकरी में तलाश में लगे युवाओं के लिए खुशखबरी है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (एमपीईएसबी) की ओर से आबकारी विभाग, मध्यप्रदेश के अन्तर्गत आबकारी आरक्षक पदो की सीधी एवं बैकलॉग भर्ती परीक्षा-2024 के लिए नोटिफिकेशन जारी कर भर्ती का एलान किया गया है। अधिसूचना के मुताबिक इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 फरवरी 2025 से शुरू कर दी जाएगी जो निर्धारित अंतिम तिथि 1 मार्च 2025 तक जारी रहेगी। आवेदन शुरू होने के बाद अभ्यर्थी ऑनलाइन माध्यम से भर्ती में शामिल होने के लिए फॉर्म भर सकेंगे। भर्ती से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथियां कार्यक्रम महत्वपूर्ण तिथियां एप्लीकेशन शुरू होने की तिथि 15 फरवरी 2025 आवेदन पत्र भरने की लास्ट डेट 1 मार्च 2025 एप्लीकेशन फॉर्म में संशोधन करने की तिथि 15 फरवरी से 8 मार्च 2025 परीक्षा की तिथि 8 जुलाई 2025 कौन ले सकेगा भर्ती में भाग एमपी एक्साइज कांस्टेबल भर्ती में भाग लेने के लिए अभ्यर्थी का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इसके साथ ही निर्धारित कटऑफ डेट से अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष से कम और अधिकतम आयु 33 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग को ऊपरी उम्र में नियमानुसार छूट दी जाएगी। इसके साथ ही उम्मीदवारों को शारीरिक मापदंड को भी पूरा करना होगा। ध्यान दें कि यह जानकारी पिछली भर्ती के अनुसार है, विस्तृत नोटिफिकेशन जारी होते ही नई जानकारी अपडेट कर दी जाएगी। परीक्षा के बारे में डिटेल एमपीईएसबी की ओर से जारी किये गए विज्ञापन के मुताबिक इस भर्ती के लिए परीक्षा की संभावित तिथि 8 जुलाई 2025 तय की गई है। परीक्षा का आयोजन दो शिफ्ट में करवाया जायेगा। पहली शिफ्ट का एग्जाम सुबह 9 से 11 बजे तक संपन्न होगा वहीं दूसरी शिफ्ट की परीक्षा का आयोजन दोपहर 2:30 से 4:40 तक करवाया जायेगा। पहली शिफ्ट के लिए उम्मीदवारों को सुबह 7 से 8 के बीच परीक्षा केंद्र पर रिपोर्टिंग करनी होगी वहीं दूसरी शिफ्ट के परीक्षार्थी दोपहर 1 से लेकर 2 बजे तक रिपोर्टिंग कर सकेंगे। आवेदन शुल्क इस भर्ती में आवेदन के साथ अनारक्षित अभ्यर्थियों के लिए 500 रुपये तय किया गया है। मध्य प्रदेश के मूल निवासी जो एससी/ एसटी/ ओबीसी/ दिव्यांगजन/ ईडब्ल्यूएस वर्ग से आते हैं उनको शुल्क के रूप में 250 रुपये का भुगतान करना होगा। कियोस्क के माध्यम से आवेदन करने पर आपको 60 रुपये पोर्टल शुल्क देना होगा वहीं रजिस्टर्ड सिटीजन यूजर के माध्यम से आवेदन करने पर पोर्टल शुल्क 20 रुपये देना होगा।

बिजली उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी: एक क्लिक में नया बिजली कनेक्शन

Good news for electricity consumers: New electricity connection in one click भोपाल। नए साल में मध्य प्रदेश के लोगों को बिजली विभाग की ओर से बड़ी सौगात मिली है। अब उपभोक्ता एमपी ऑनलाइन के माध्यम से भी नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकेंगे। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने कार्यक्षेत्र के 16 जिलों के उपभोक्ताओं के लिए यह सुविधा शुरू की है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने एमपी ऑनलाइन के साथ अनुबंध किया है, जिससे उपभोक्ताओं को जनवरी के अंतिम सप्ताह से यह सुविधा उपलब्ध होगी। इस सेवा के तहत उपभोक्ता न केवल नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकेंगे, बल्कि गैर-कृषि उपभोक्ताओं का ईकेवाईसी, पीएम-सीएम किसान सम्मान निधि लाभार्थियों का सत्यापन, भार वृद्धि, और नाम परिवर्तन जैसे कार्य भी ऑनलाइन ही करवा सकेंगे। यह अनुबंध कंपनी मुख्यालय में प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल, निदेशक (वाणिज्य) सुधीर कुमार श्रीवास्तव, मुख्य महाप्रबंधक (वाणिज्य) स्वाति सिंह, और एमपी ऑनलाइन के बिजनेस हेड संदीप राजपाल की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस नई सुविधा के साथ बिजली उपभोक्ताओं के काम और भी सरल हो जाएंगे। ऊर्जा मंत्री ने इसे डिजिटल युग में उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए एक बड़ा कदम बताया है।

प्रदेश में अपराधियों की शामत: अगले तीन महीने होगी ताबड़तोड़ कार्रवाई

There will be swift action against criminals in the state in the next three months भोपाल। मध्यप्रदेश में अब अगले 3 महीने तक अपराधियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई होगी। इसके लिए गृह विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिए हैं। जनवरी से लेकर मार्च के बीच प्रदेश में ला एंड आर्डर बनाए रखने के लिए अपराधियों के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई तेज होगी। वहीं आदतन अपराधियों के खिलाफ कलेक्टर रासुका लगाएंगे। सभी जिलों के एसपी अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर कलेक्टर को रिपोर्ट देंगे। मध्य प्रदेश में आपराधिक गतिविधियों में रोक लगाने के लिए प्रशासन एक्शन मोड पर है। ऐसे में अगले तीन महीने गुंडों-बदमाशों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की जाएगी।

सर्द हवाओं से ठिठुरा मध्यप्रदेश, कईं जिलों में अलर्ट: भोपाल, सहित  जिले शीतलहर की चपेट में 

Madhya Pradesh shivers due to cold winds, alert in many districts: Bhopal and other districts in the grip of cold wave भोपाल । सर्द हवाओं से मध्यप्रदेश ठिठुर रहा है। आलम यह है कि दिन में भी कंपकंपी छूट रही है। वहीं कई शहरों में रात का टेम्परेचर 7 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। नए साल के पहले दिन भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर-उज्जैन समेत पूरे प्रदेश में कड़ाके की ठंड रही। मौसम विभाग की माने तो अगले 3 दिन ऐसी ही ठंड पड़ेगी। गुरुवार को भोपाल, जबलपुर-ग्वालियर समेत 14 जिलों में शीतलहर का अलर्ट है। इससे पहले प्रदेश के 37 जिलों में सुबह मध्यम से घना कोहरा छाया रहा। भोपाल, उज्जैन और शाजापुर में इतना घना कोहरा था कि विजिबिलिटी 50 मीटर ही रह गई थी। आज, गुरुवार को जिन जिलों में शीतलहर का अलर्ट है, उनमें भोपाल, ग्वालियर-जबलपुर के अलावा मुरैना, भिंड, दतिया, राजगढ़, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, उमरिया और कटनी भी शामिल हैं। बर्फबारी हो रही, इसलिए बढ़ रही ठंड वर्तमान में जम्मू, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख में बर्फबारी हो रही है। जिससे प्रदेश में सर्द हवाएं आ रही हैं। आने वाले दिनों में बर्फ पिघलेगी। जिससे हवा की रफ्तार तेज होगी और प्रदेश में ठंड का असर बढ़ जाएगा। इस कारण जनवरी में प्रदेश का मौसम ठंडा ही रहेगा। 20 से 22 दिन तक शीतलहर चलने का अनुमान है। बारिश थमते ही ठंड का असर बढ़ा बता दें कि वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की एक्टिविटी के चलते दिसंबर के आखिरी दिनों में बारिश और ओले का दौर रहा। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन समेत 45 से अधिक जिलों में बारिश हुई। वहीं, 20 जिले ऐसे रहे, जहां ओले भी गिरे। बारिश का दौर खत्म होते ही ठंड का असर बढ़ गया। साल 2024 की आखिरी रात भी ठंडी रही। वहीं, नए साल 2025 के पहले दिन सर्दी का असर बना रहा। अगले 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम 2 जनवरी: भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोक नगर, सागर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, देवास, शाजापुर, सीहोर, हरदा, बैतूल, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, कटनी, उमरिया, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में मध्यम से घना कोहरा रहेगा। वहीं, भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, राजगढ़, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, जबलपुर, उमरिया, कटनी में शीतलहर भी चलेगी। 3 जनवरी: जबलपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह में शीतलहर चलने का अलर्ट है। वहीं, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, रायसेन, विदिशा, गुना, अशोकनगर, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, उमरिया, सतना, रीवा, मैहर, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में कोहरा छाया रहेगा। 4 जनवरी: निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में कोहरा रहेगा।

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