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खाटू श्याम मंदिर के दो दिन बंद रहेंगे कपाट

सीकर सीकर जिले के प्रसिद्ध खाटू श्यामजी मंदिर के दर्शन के लिए अगर आप दूर-दराज के इलाकों से आ रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. सीकर से लगभग 43 किलोमीटर दूर स्थित खाटू गांव में बाबा श्याम का भव्य मंदिर है, जहां भगवान कृष्ण और बर्बरीक की पूजा होती है. यह मंदिर हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है. नए साल के अवसर पर भी हजारों भक्त बाबा श्याम के दर्शन करने के लिए 14 लाइनों में खड़े रहे. हालांकि, लगातार दर्शन का आनंद लेने वाले भक्तों को इस बार थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा क्योंकि 6 और 7 जनवरी को बाबा श्याम के दर्शन बंद रहेंगे. दो दिन बंद रहेंगे बाबा श्याम के कपाट अमावस्या पर स्नान और विशेष पूजा-अर्चना के कारण 6 और 7 जनवरी को बाबा श्याम के पट बंद रहेंगे. श्री श्याम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष पृथ्वी सिंह चौहान द्वारा जारी प्रेस नोट में बताया गया है कि 6 जनवरी, सोमवार को रात 9:30 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे. 7 जनवरी, मंगलवार को बाबा श्याम के तिलक श्रृंगार और विशेष पूजा-अर्चना के बाद शाम 5 बजे पट श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोले जाएंगे. अध्यक्ष ने सभी भक्तों से अपील की है कि वे बाबा श्याम के पट खुलने के बाद ही खाटू धाम पहुंचें.

कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने गंगा में चलने वाली सभी मोटर बोट पर रेट लिस्ट लगाने का फैसला किया

वाराणसी महाकुंभ को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। आस्था की संगम नगरी प्रयागराज में 13 जनवरी को लगने जा रहे महाकुंभ को लेकर एक पूरा महाकुंभ नगर बसा दिया गया है। प्रयागराज में विभिन्न अखाड़ों का छावनी प्रवेश भी शुरू हो चुका है। भव्य और दिव्य पेशवाई ने आमजन को मुग्ध किया है तो वहीं वाराणसी में भी कुंभ का व्यापक असर देखा जा रहा है। महाकुंभ की तैयारियों के लिए केवल प्रयागराज ही नहीं, बल्कि वाराणसी में भी लगातार अधिकारियों की बैठक हो रही है। पूरे कुंभ के दौरान वाराणसी में 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने गंगा में चलने वाली सभी मोटर बोट पर रेट लिस्ट लगाने का फैसला किया है जो नाव चलाने वालों के साथ पर्यटकों के लिए भी बहुत फायदे का सौदा साबित होने जा रहा है। किसी भी तीर्थ पर विशेष अवसर के समय जुटने वाली बड़ी भीड़ स्थानीय साधन और संसाधनों की मांग बहुत बढ़ा देती है। ऐसे में श्रद्धालुओं की ओर से भी कई बार यह शिकायत आती है कि उनसे किसी सेवा और चीज के बदले बहुत अधिक चार्ज कर लिया गया। उनको ठगी का शिकार होने का भय रहता है। वहीं, मांग में वृद्धि के कारण स्थानीय दुकानदारों या सेवा प्रदाताओं को शिकायत होती है कि उनको ग्राहकों से उचित रकम नहीं मिल पा रही है। ऐसे में सरकार का ये फैसला सभी पक्षों के लिए सही है। इस बारे में बात करते हुए स्थानीय निवासी गौरव द्विवेदी ने आईएएनएस को बताया, “काशी के घाटों पर अब नाव पर रेट लिस्ट चिपकेगी। यह सरकार की तरफ से बहुत अच्छी पहल है। क्योंकि अभी यह सीजन चल रहा है और बनारस में अगर देखा जाए तो कुछ दिनों से पर्यटन एकाएक बढ़ रहा है। यदि कोई ऐसा पर्यटक बनारस आता है जिसकी कोई जान-पहचान नहीं होती है तो सबसे बड़ी शिकायत यही सामने आती है कि नाव वालों ने ओवरचार्ज कर दिया। ऐसे में यह सरकार की बड़ी अच्छी पहल है।” उन्होंने आगे कहा कि रेट लिस्ट के हिसाब से पेमेंट तय हो जाएगा। पर्यटकों की सुविधाओं को अगर देखा जाए तो ये बहुत अच्छी चीज है। साथ ही इसमें नाव वालों का भी पक्ष देखते हुए दाम को मार्केट रेट से थोड़ा सा ऊपर रखा गया है। क्योंकि सीजन के समय में बहुत पर्यटक आते हैं जिससे डिमांड बढ़ते ही रेट काफी ज्यादा हो जाते हैं। ऐसे में नाव वालों को भी इस रेट लिस्ट से शिकायत नहीं होगी। सरकार ने काफी अच्छे से रेट तय किए हैं और देखा जाए तो टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मध्यप्रदेश में तबादलों पर दो वर्ष से लगा प्रतिबंध मार्च से हटेगा, कलेक्टर-कमिश्नर के इसी माह होंगे स्थानांतरण

भोपाल प्रदेश में तबादलों पर दो वर्ष से लगा प्रतिबंध अब मार्च में ही हटेगा। हालांकि, कलेक्टर-कमिश्नर सहित अन्य अधिकारियों के तबादले जनवरी में होंगे। छह जनवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होने के बाद कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, एसडीएम तहसीलदार सहित 65 हजार कर्मचारियों के तबादले पर लगा प्रतिबंध हट जाएगा। प्रदेश में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने तबादला नीति घोषित नहीं की थी, तब से तबादले केवल मुख्यमंत्री समन्वय के माध्यम से ही हो रहे हैं। चुनाव के बाद से लगातार मंत्री और जनप्रतिनिधि तबादला नीति जारी करने की मांग भी कर रहे हैं।   मार्च से हटाया जा सकता है प्रतिबंध मुख्यमंत्री ने अनौपचारिक कैबिनेट में मंत्रियों को आश्वस्त भी किया है कि तबादले पर से प्रतिबंध जल्द ही हटाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि मार्च से प्रतिबंध हटाया जा सकता है। इसमें भी सीमित संख्या में ही तबादले करने के अधिकार मंत्रियों को दिए जाएंगे। प्रभार के जिले में पूरा अधिकार प्रभारी मंत्री का रहेगा। प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा पदस्थ उधर, सरकार जनवरी में मैदानी स्तर पर जमावट करेगी। इसमें उन अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर जिलों में पदस्थ किया जाएगा, जिन्हें दो वर्ष तक काम करने का मौका दिया जा सके। इसके लिए मुख्यमंत्री जन कल्याण अभियान में प्रदर्शन के साथ जनप्रतिनिधियों से समन्वय को भी आधार बनाया जाएगा। वही मंत्रालय स्तर पर भी कुछ परिवर्तन होंगे अपर मुख्य सचिव गृह एसएन मिश्रा एक फरवरी को सेवानिवृत हो जाएंगे। कई अधिकारी सचिव और प्रमुख सचिव के पद पर पदोन्नति हो चुके हैं। उनकी जिम्मेदारियां में भी परिवर्तन किया जाएगा।

महाकुंभ: श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हर श्रेणी के लिए अलग-अलग ई-पास जारी किए जा रहे

प्रयागराज महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम व्यवस्था और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए छह अलग-अलग रंग के ई-पास जारी किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार, इस बार श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हर श्रेणी के लिए अलग-अलग ई-पास जारी किए जा रहे हैं। ई-पास को विभिन्न कैटेगिरी के आधार पर वितरित किया जाएगा, जैसे कि उच्च न्यायालय, वीआईपी, विदेशी राजदूत, विदेशी नागरिक और अप्रवासी भारतीयों के लिए सफेद रंग का पास, अखाड़ों और संस्थाओं के लिए केसरिया रंग का पास, कार्यदायी संस्थाओं, वेंडर, फूड कोर्ट, और मिल्क बूथ के लिए पीला रंग का पास, मीडिया के लिए आसमानी रंग का पास, पुलिस बल के लिए नीला रंग का पास, और आपातकालीन सेवाओं के लिए लाल रंग का पास जारी किया जाएगा। सुरक्षा के साथ-साथ व्यवस्थाओं की सुचारु कार्यप्रणाली के लिए प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी नामित किए जा रहे हैं, जो आवश्यकताओं और अनुमोदन के आधार पर पास जारी करेंगे। इसके अतिरिक्त, महाकुंभ के दौरान वाहनों के लिए भी ई-पास जारी किए जाएंगे। इन पासों का वितरण विभागीय स्तर पर होगा और प्रत्येक वाहन पास के लिए आवेदक को अपना व्यक्तिगत विवरण, कलर्ड पासपोर्ट फोटो, आधार कार्ड अथवा पैन कार्ड, वाहन रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र, और ड्राइविंग लाइसेंस की स्वहस्ताक्षरित छाया प्रति प्रस्तुत करनी होगी। बाइक या कार के लिए पास प्राप्त करने प्रक्रिया 1. पास की श्रेणियाँ और रंग: महाकुंभ में विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग-अलग रंग के ई-पास जारी किए जाएंगे: सफेद रंग: उच्च न्यायालय, वीआईपी, विदेशी राजदूत, विदेशी नागरिक, अप्रवासी भारतीय, केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लिए। केसरिया रंग: अखाड़ों और संस्थाओं के लिए। पीला रंग: कार्यदायी संस्थाओं, विक्रेताओं, फूड कोर्ट और मिल्क बूथ के लिए। आसमानी रंग: मीडिया कर्मियों के लिए। नीला रंग: पुलिस बल के लिए। लाल रंग: आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं के लिए। 2. आवेदन प्रक्रिया: आवेदन पत्र: ऑनलाइन आवेदन पत्र भरें, जिसमें व्यक्तिगत विवरण, वाहन की जानकारी और आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें। दस्तावेज़: आवेदक का आधार कार्ड या पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, वाहन का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस की स्वहस्ताक्षरित छाया प्रति आवश्यक होगी। प्रक्रिया: यूपी डेस्को (यूपी राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम) के माध्यम से ई-पास प्रणाली लागू की जाएगी। विभागीय स्तर पर नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे, जो पास के अनुमोदन के लिए जिम्मेदार होंगे। 3. पास की प्राप्ति: स्वीकृति: आवेदन की स्वीकृति के बाद, ई-पास संबंधित विभाग द्वारा जारी किया जाएगा। प्रिंटिंग: ई-पास को प्रिंट करके मेला पुलिस कार्यालय से प्राप्त किया जा सकेगा। 4. सुरक्षा और नियंत्रण: बार कोड: ई-पास पर बार कोड होगा, जिससे पासधारक और वाहन की जानकारी सत्यापित की जा सकेगी। रंग कोडिंग: पास के रंग से यह पता चलेगा कि पासधारक मेला क्षेत्र में कहां तक जा सकता है, जिससे अनावश्यक भीड़ से बचा जा सकेगा। उत्तर प्रदेश की नोडल आईटी संस्था यूपीडेस्को द्वारा ई-पास प्रणाली की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे वाहनों के पास के लिए ऑनलाइन आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित किया जाएगा। विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारी, मेला पुलिस और संस्थाओं के प्रतिनिधि वाहन पासों के आवेदनों की सत्यता की जांच करेंगे। इस व्यवस्था से महाकुंभ के आयोजन को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं।  

EPFO नया सिस्‍टम बैंकिंग सिस्‍टम्‍स के बराबर सुविधाएं प्रोवाइड कराएगी, वेबसाइट इंटरफेस अधिक यूजर्स-अनुकूल होगा

नईदिल्ली ईपीएफ खाताधारकों के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है. केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने ऐलान किया है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) इस साल जून तक अपना नया सॉफ्टवेयर सिस्टम, EPFO 3.0 शुरू करने के लिए तैयार है.  पत्रकारों से बात करते हुए मंडाविया ने कहा कि नया सिस्‍टम देश में बैंकिंग सिस्‍टम्‍स के बराबर सुविधाएं प्रोवाइड कराएगी. साथ ही वेबसाइट इंटरफेस अधिक यूजर्स-अनुकूल होगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि EPFO 3.0 के लॉन्च के बाद ईपीएफओ अपने सदस्यों को ATM कार्ड जारी करेगा. उन्होंने आगे बताया कि वेबसाइट और सिस्टम में सुधार के शुरुआती चरण को जनवरी 2025 के अंत तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा. EPFO 3.0 कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) सदस्यों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए तैयार है. इसका उद्देश्य पहुंच में सुधार, प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और कर्मचारियों को उनके रिटायरमेंट फंड पर अधिक कंट्रोल देने के लिए नई सुविधाएं पेश करना है. कबसे निकाल सकेंगे एटीएम से पैसा? नए EPF विड्रॉल दिशा-निर्देशों के साथ कर्मचारियों को जल्द ही ATM कार्ड का उपयोग करके अपनी EPF सेविंग तक तेजी से पहुंचने की क्षमता मिल सकती है. इससे वे फाइनेंशियल इमरजेंसी या अप्रत्याशित खर्चों को प्रभावी ढंग से मैनेज कर सकेंगे. पिछले महीने श्रम सचिव सुमिता डावरा ने घोषणा की थी कि EPFO के कस्‍टमर्स साल 2025 तक ATM के माध्यम से अपने PF की निकासी कर सकेंगे. डावरा ने बताया कि श्रम मंत्रालय वर्तमान में ईपीएफओ से संबद्ध भारत के कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के लिए आईटी सेवाओं को बढ़ाने पर काम कर रहा है. कितना निकाल सकते हैं पैसा? डावरा के अनुसार, सभी सदस्‍य और बीमित व्यक्ति एटीएम के माध्यम से अपने भविष्य निधि (PF) को निकाल सकेंगे. हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि लाभार्थी के खाते में कुल शेष राशि के 50% तक निकासी सीमित होगी. इसी तरह, ईपीएफओ पेंशन कंट्रीब्‍यूशन में अधिक लचीलापन पेश करने के लिए एक नई योजना लागू करने पर विचार कर रहा है. इस प्रस्ताव के तहत, कर्मचारियों के पास कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में मौजूदा 12 प्रतिशत सीमा से अधिक या कम अंशदान करने का विकल्प होगा. मोबाइल ऐप की भी होगी सुविधा मोबाइल बैंकिंग की तरह ईपीएफ खातों के लिए एक विशेष ऐप भी तैयार हो रहा है जिसके जरिए सदस्य अपने खाते में आने वाले मासिक योगदान, पेंशन फंड से लेकर पूर्व की नौकरियों के कंट्रीब्‍यूशन आदि चीजें देख सकते हैं. इतना ही नहीं वे मोबाइल ऐप के जरिए अपने पीएफ अकाउंट को मॉनिटर भी कर सकते हैं. अभी कितना है कंट्रीब्‍यूशन? वर्तमान में, कर्मचारी और नियोक्ता दोनों ही कर्मचारी के मूल वेतन, महंगाई भत्ते और किसी भी रिटेनिंग भत्ते का 12 प्रतिशत EPF में योगदान करते हैं. कर्मचारी का पूरा योगदान EPF में आवंटित किया जाता है, जबकि नियोक्ता का 12 प्रतिशत योगदान EPF में 3.67 प्रतिशत और EPS में 8.33 प्रतिशत के रूप में विभाजित किया जाता है. इसके अतिरिक्त भारत सरकार 15,000 रुपये से कम कमाने वालों के लिए कर्मचारी पेंशन में 1.16 प्रतिशत का योगदान देती है.  

पूरा उत्तर भारत शीतलहर की चपेट में, दिल्ली में छाया घना कोहरा, कई राज्यों में कड़ाके की ठंड, ऑरेंज अलर्ट जारी

नई दिल्ली भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दिल्ली में ठंड और कोहरे को लेकर चेतावनी जारी की है। जम्मू कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इसके चलते कहीं ऑरेंज तो कहीं येलो अलर्ट जारी किया गया है। आईएमडी के मुताबिक उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में अगले 2 दिन तक शीत दिवस और कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है। हरियाणा, चंडीगढ़ एवं दिल्ली के अलग-अलग स्थानों में 3 और 4 जनवरी को देर रात/सुबह के समय बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना पहले ही जताई गई थी। वहीं उत्तर प्रदेश में भी जबरदस्त ठंड पड़ रही है। विजिबिलिटी भी काफी कम है। कई जगहों पर विजिबिलिटी घटकर 50-100 मीटर रह गई है। यूपी में अति घना कोहरा छाए रहने की चेतावनी जारी कर दी गई थी। राजधानी दिल्ली से सटे बहादुरगढ़ में भी विजिबिलिटी महज 10 मीटर रही। 5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवा चल रही है। यहां वायु प्रदूषण का स्तर भी बेहद खराब रिकॉर्ड किया गया। एक्यूआई 300 पार पहुंच गया है। वहीं, दिल्ली एनसीआर में ठंड के कारण लोग संभल कर निकल रहे हैं। सड़क पर वाहन रेंगते देखे जा सकते हैं। इसका असर हवाई और रेल सेवा पर भी पड़ा है। घने कोहरे की वजह से आईजीआई पर फ्लाइट्स परिचालन प्रभावित हुआ है। आवाजाही और प्रस्थान रोक दिया गया। इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से शुक्रवार को संचालित होने वाली 100 से ज्यादा विमान देरी से रवाना हुईं। रनवे पर लो विजिबिलिटी प्रोसीजर लागू कर विमानों की आवाजाही कराई गई। इससे कई विमानों के संचालन में देरी हुई। दिल्ली-एनसीआर में भी घना कोहरा छाया हुआ है। गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम में भी शीतलहर का प्रकोप जारी है। तापमान लगातार गिर रहा है। मौसम पूर्वानुमान में न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस रहने का संकेत दिया गया है। वहीं शनिवार सुबह बहादुरगढ़ का न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  

केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के तहत कोचिंग सेंटर्स का करें पंजीकरण-High Court

जयपुर  राजस्थान हाईकोर्ट ने कोचिंग विद्यार्थियों की ओर से आए दिन आत्महत्या करने से जुडे मामले में कहा है कि कोचिंग सेंटर्स के लिए केन्द्र सरकार की ओर से बनाई गई गाइडलाइन के तहत उनका पंजीकरण किया जाए। वहीं गाइड लाइन में बताए पैरामीटर की पालना भी सुनिश्चित की जाए। सीजे एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस उमाशंकर व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश प्रकरण में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से पूछा कि क्या केन्द्र सरकार की ओर से बनाए गए रेगुलेशन लागू हो सकते हैं या नहीं, क्योंकि इनमें सजा और जुर्माने का प्रावधान है और यह कानून बनने पर ही लागू किया जा सकता है। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कोचिंग सेंटरों के लिए बिल बन चुका है और जल्दी कानून भी बना लिया जाएगा। वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालती आदेश की पालना में 33 जिलों के कोचिंग सेंटरों की सूची पेश की। इस पर अदालत ने शेष जिलों के कोचिंग सेंटरों की सूची भी पेश करने को कहा है। दूसरी ओर कोचिंग सेंटर्स की ओर से कहा गया कि गाइडलाइन की पालना नहीं करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं कोचिंग सेंटरों की बढती संख्या को विनियमित करने के लिए उनका पंजीकरण किया जाना चाहिए। कोचिंग सेंटर्स की ओर से यह भी कहा गया कि गाइड लाइन के बजाए इस संबंध में कानून बने तो बेहतर होगा। इस पर अदालत ने कहा कि फिलहाल गाइडलाइन के तहत कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण कर उसमें बताए पैरामीटर की पालना सुनिश्चित की जाए। गौरतलब है कि कोचिंग सेंटरों के विद्यार्थियों की ओर से आए दिन आत्महत्या करने को लेकर हाईकोर्ट ने कुछ वर्षो पहले स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया था।  

कोटक, एयू स्मॉल और कैपिटल स्मॉल बैंक की 9.5% तक हिस्सेदारी खरीदेगा HDFC Bank

नई दिल्ली  नए साल में बैंकिंग सेक्टर में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक तीन बैंकों में 9.5% तक हिस्सेदारी खरीदने जा रहा है। इसके लिए उसे आरबीआई से हरी झंडी मिल गई है। इनमें कोटक महिंद्रा बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक शामिल हैं। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने आज एक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे आरबीआई की तरफ से एक पत्र मिला है। इसमें कहा गया है कि एचडीएफसी बैंक और ग्रुप की अन्य कंपनियों एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, एचडीएफसी पेंशन मैनेजमेंट, एचडीएफसी अर्गो जनरल इंश्योरेंस और एचडीएफसी सिक्योरिटीज को एयू स्मॉल फाइनेंस में 9.50% तक हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी मिल गई है। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक एक शेड्यूल्ट कमर्शियल बैंक है जो बीएसई 100 इंडेक्स में लिस्टेड है। इसका मार्केट कैप 42,678.04 करोड़ रुपये है। एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप 13,37,919.84 करोड़ है। यह मार्केट कैप के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज और टीसीएस के बाद देश की तीसरी बड़ी कंपनी है। एचडीएफसी बैंक ने भी एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा कि उसे कोटक महिंद्रा बैंक और कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक में 9.5 फीसदी एग्रीगेट होल्डिंग खरीदने के लिए आरबीआई की मंजूरी मिल गई है। एक साल की वैलिडिटी एचडीएफसी बैंक को इन बैंकों में यह हिस्सेदारी खरीदने के लिए मिली मंजूरी एक साल तक वैलिड रहेगी। साथ ही एचडीएफसी बैंक को एग्रीगेट होल्डिंग सुनिश्चित करनी होगी। यानी इन बैंकों में एचडीएफसी बैंक और ग्रुप की अन्य कंपनियों की होल्डिंग उन बैंकों की चुकता शेयर पूंजी या वोटिंग राइट्स के 9.5 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। आरबीआई के 2023 के दिशानिर्देशों के मुताबिक एग्रीगेट होल्डिंग में बैंक के शेयर, उसकी सहयोगी कंपनियां, म्यूचुअल फंड्स, ट्रस्टीज और प्रमोटर ग्रुप एंटिटीज शामिल हैं। एचडीएफसी बैंक की इन बैंकों में निवेश की योजना नहीं है लेकिन ग्रुप की एग्रीगेट होल्डिंग 5% की लिमिट से अधिक हो सकती है। इसलिए एचडीएफसी बैंक ने इनवेस्टमेंट लिमिट बढ़ाने के लिए आरबीआई से मंजूरी मांगी थी।  

छत्तीसगढ़ बीजेपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा इसे लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया

रायपुर छत्तीसगढ़ बीजेपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा इसे लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ में मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी है, वहीं जिला अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति अभी बाकी है। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की है। महाराष्ट्र बीजेपी के सीनियर नेता विनोद तावडे को छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश अध्यक्ष बनने की रेस में पार्टी के कई सीनियर नेता हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी इस बार ओबीसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश बीजेपी संगठन अगले तीन से चार दिनों में सभी जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा कर सकती है। जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा के बाद प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा। हालांकि छत्तीसगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव कब होंगे इसको लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है। कौन-कौन हैं दावेदार प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर बीजेपी के दावेदारों के भी नाम सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ बीजेपी में चर्चा है कि पार्टी इस बार किसी ओबीसी वर्ग के नेता को प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है। साय कैबिनेट में सभी वर्गों को साधा गया है। ऐसे में प्रदेश की ओबीसी राजनीति पर फोकस करते हुए बीजेपी बड़े चेहरे पर दांव लगा सकती है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के लिए सीनियर नेताओं के नाम की चर्चा है। जिन नामों की चर्चा है उसमें पार्टी के सीनियर विधायक धरमलाल कौशिक का नाम सबसे आगे है। कौशिक पहले भी यह जिम्मेदारी संभाल चुके हैं उसके साथ ही रमन सिंह की कैबिनेट में मंत्री भी रह चुके हैं। बड़ी के बड़े नेता हैं। इसके अलावा मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव के भी रिपीट होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि अगर किरण सिंहदेव को रिपीट नहीं किया जाता है तो उन्हें कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। विष्णुदेव साय कैबिनेट में अभी दो विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। ऐसे में किरण सिंहदेव के नाम की अटकलें लगाई जा रही हैं। सामान्य वर्ग से शिवरतन शर्मा का भी नाम प्रदेश अध्यक्ष की रेस में है। इसके अलावा विक्रम उसेंडी और पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल का भी नाम शामिल है। कैबिनेट विस्तार भी है संभावित छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार की भी अटकलें हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जिस सीनियर नेता को कैबिनेट में शामिल नहीं किया जाएगा। उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने की संभावना है। हालांकि कैबिनेट विस्तार को लेकर अभी तर सीएम विष्णुदेव साय ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

MPMRCL ने विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी, 17 जनवरी, 2025 तक अपने ऑनलाइन आवेदन जमा होंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। भर्ती अभियान का उद्देश्य वरिष्ठ पर्यवेक्षक/संचालन, पर्यवेक्षक/संचालन और वरिष्ठ पर्यवेक्षक/पर्यवेक्षक (सुरक्षा) के 26 रिक्त पदों को भरना है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट mpmetrorail.com पर जाकर इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार 17 जनवरी, 2025 तक अपने ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है कि MPMRCL रेलवे/रेलवे PSU/मेट्रो संगठनों/मेट्रो PSU या मेट्रो संगठनों की सेवा करने वाली निजी फर्मों/मेट्रो संगठनों की सेवा करने वाली सलाहकार फर्मों के योग्य और अनुभवी उम्मीदवारों से मानक नियमों और शर्तों पर निम्नलिखित पदों के लिए ‘अनुबंध’ के आधार पर बैकलॉग/नए पदों के लिए आवेदन आमंत्रित करता है। नियुक्ति शुरू में 3 साल के लिए है, जिसे 5 साल या 60 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, या परियोजना की जरूरतों के अनुसार बढ़ाया जा सकता है।” पदों का विवरण और कार्य अनुभव   क्रमांक     पद का नाम     रिक्तियों की संख्या (बैकलॉग/नए पद)     कार्य अनुभव 1     वरिष्ठ पर्यवेक्षक/संचालन     4     रेलवे/रेलवे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों/मेट्रो संगठन/मेट्रो सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के परिचालन विभाग में योग्यता-पश्चात अनुभव होना चाहिए अथवा मेट्रो संगठन को सेवा प्रदान करने वाली मान्यता प्राप्त निजी फर्म/मेट्रो संगठन को सेवा प्रदान करने वाली परामर्शदाता फर्म में अनुभव होना चाहिए। 2     पर्यवेक्षक/संचालन     16     रेलवे/रेलवे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों/मेट्रो संगठन/मेट्रो सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के परिचालन विभाग में योग्यता-पश्चात अनुभव होना चाहिए अथवा मेट्रो संगठन को सेवा प्रदान करने वाली मान्यता प्राप्त निजी फर्म/मेट्रो संगठन को सेवा प्रदान करने वाली परामर्शदाता फर्म में अनुभव होना चाहिए। 3     वरिष्ठ पर्यवेक्षक/पर्यवेक्षक (सुरक्षा)     06     सशस्त्र बलों / सीआरपीएफ / सीआईएसएफ / पुलिस / बीएसएफ / आरपीएफ / अन्य अर्धसैनिक संगठन / रेलवे / रेलवे पीएसयू / मेट्रो संगठन / मेट्रो पीएसयू में सुरक्षा एजेंसी या मेट्रो संगठन की सेवा करने वाली निजी फर्म / मेट्रो संगठन की सेवा करने वाली सलाहकार फर्मों में सुरक्षा प्रबंधन में योग्यता के बाद का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थी। MP Metro Recruitment 2025: योग्यता     वरिष्ठ पर्यवेक्षक/संचालन और पर्यवेक्षक/संचालन: किसी सरकारी विश्वविद्यालय/संस्थान से किसी भी इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री या डिप्लोमा या बीएससी ऑनर्स (भौतिकी/रसायन विज्ञान/गणित) या बीएससी (भौतिकी/रसायन विज्ञान/गणित)।     वरिष्ठ पर्यवेक्षक/पर्यवेक्षक (सुरक्षा): किसी भी विषय में सरकारी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/संस्थान से स्नातक की डिग्री MP Metro Recruitment 2025: वेतनमान वरिष्ठ पर्यवेक्षक ग्रेड I: 46,000 से 1,45,000 रुपये ग्रेड II: 40,000 से 1,25,000 रुपये पर्यवेक्षक ग्रेड I: 35,000 से 1,10,000 रुपये ग्रेड II: 30,000 से 1,00,000 रुपये उम्मीदवारों को पात्रता के प्रमाण के रूप में अपने ऑनलाइन आवेदन को जमा करने के दौरान निम्नलिखित प्रासंगिक दस्तावेजों की स्व-सत्यापित प्रतियां अपलोड करनी होंगी: आयु प्रमाण: मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र या समकक्ष। आवश्यक योग्यता: अधिसूचना में निर्धारित प्रमाण पत्र। अनुभव: पिछले नियोक्ताओं से प्रमाण पत्र, साथ ही वर्तमान संगठन में शामिल होने का नियुक्ति/कार्यालय आदेश। वर्तमान वेतन विवरण: वर्तमान वेतनमान और वर्तमान ग्रेड में पदोन्नति को दर्शाने वाला कार्यालय आदेश। अनुभव सारांश: प्रासंगिक अनुभव का संक्षिप्त, सारांशित विवरण। नवीनतम वेतन पर्चियां: पिछले तीन महीनों की वेतन पर्चियों की प्रतियां।  

मप्र उच्च शिक्षा विभाग ने फरवरी तक के‍ लिए खोला पोर्टल, कॉलेज छात्राओं को 10 महीने तक 500 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश के कॉलेजों में पढ़ रहीं छात्राओं को प्रोत्साहन राशि देने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रतिभा किरण और गांव की बेटी योजना में पंजीयन करने के लिए पोर्टल खोल दिया है। अब छात्राएं दोनों में से एक योजना में 500-500 रुपये प्रतिमाह लेने के लिए पंजीयन करा सकेंगी। पोर्टल फरवरी तक खुला रहेगा, इसमें पूर्व छात्राओं का नवीनीकरण किया जाएगा और वर्तमान सत्र में प्रवेश लेने वालीं छात्राओं के नवीन पंजीयन होंगे। 12वीं में 60 फीसदी अंक और बीपीएल बता दें, गांव की बेटी योजना के लिए ग्रामीण छात्रा को ग्रामीण निवासी होना अनिवार्य है। वहीं 12वीं में 60 फीसद अंक होने के साथ उसका गरीबी रेखा के नीचे होना जरूरी है। इसके बाद विभाग उसे साल के 10 महीने 500-500 रुपये देगा। वहीं प्रतिभा किरण योजना के लिए शहरी क्षेत्र की छात्राओं को 12वीं में 60 फीसद अंक लाना अनिवार्य है। उसे भी 10 महीने तक 500-500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। दोनों ही योजनाओं की लाभार्थी छात्राएं प्रदेश के किसी भी निजी या सरकारी कॉलेज में प्रवेश ले सकती हैं। इसके बाद में विभाग के द्वारा उसको साल के 10 महीने पांच ₹500 की रकम दी जाती है और यहां प्रतिभा किरण योजना जो कि शहरी क्षेत्र की छात्राओं के लिए है । बताया जा रहा है कि यह स्कीम में 12वीं में 60 फिसदी तक के अंक आना जरूरी होते हैं जिसमें यह ₹500 की रकम हर महीने दी जाती है दोनों ही योजना का फायदा लाभार्थी छात्राओं को निजी तथा सरकारी कॉलेज में प्रवेश के बाद में मिलता है।  

प्रतिबंधों की मार झेल रहे ईरान ने भारत से अपने रिश्ते सुधारने और सहयोग बढ़ाने की अपील की

नई दिल्ली अमेरिकी प्रतिबंधों की मार झेल रहे ईरान ने भारत से अपने रिश्ते सुधारने और सहयोग बढ़ाने की अपील की है। ईरानी अधिकारियों ने भारत से फिर से कच्चे तेल की खरीद शुरू करने और ईरानी नागरिकों को वीजा देने में राहत देने की मांग की है। ईरान का कहना है कि इन कदमों से दोनों देशों के बीच दोस्ती और आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे। मगर इसके पीछे क्या ईरान की कोई मंशा है? आइए जानते हैं। ईरान की इस गुहार के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी प्रतिबंध हैं, जिनकी वजह से उसकी अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव है। 2019 में भारत ने अमेरिकी दबाव में ईरान से कच्चे तेल की खरीद बंद कर दी थी। हालांकि, अब ईरान चाहता है कि भारत एक बार फिर तेल खरीदने के लिए रास्ता निकाले। ईरानी अधिकारी ने साफ कहा कि भारत और ईरान को मिलकर इस मुद्दे का हल ढूंढना होगा। चाबहार बंदरगाह पर भी ईरान की खास नजर है। यह बंदरगाह अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे से बाहर है और भारत ने इसके विकास में काफी निवेश किया है। ईरानी अधिकारी ने कहा कि चाबहार के आसपास पेट्रो-रसायन उद्योगों में सहयोग के लिए भारत ने रुचि दिखाई है। यह बंदरगाह दोनों देशों के लिए व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने का एक अहम जरिया हो सकता है। ईरानी अधिकारी ने यह भी कहा कि रूस और ईरान पर लगे प्रतिबंध अलग हैं, और भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा है। ऐसे में ईरान उम्मीद कर रहा है कि भारत उसके लिए भी ऐसा ही कोई रास्ता निकालेगा। ईरान ने यह भी संकेत दिया कि चीन के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक राजनीति में बदलाव के चलते अमेरिका का रुख ईरान के प्रति नरम हो सकता है। ऐसे में भारत के लिए यह मौका हो सकता है कि वह ईरान के साथ अपने रिश्तों को फिर से पटरी पर लाए। भारत के लिए ईरान की अहमियत सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है। चाबहार बंदरगाह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जोड़ने का सीधा रास्ता देता है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह भारत के लिए किसी तरह की मुश्किल खड़ी नहीं करना चाहता, बल्कि आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहता है। ऐसे में देखना है कि क्या भारत अपने चाबहार वाले दोस्त के साथ कच्चे तेल का सौदा करता है या नहीं।

मप्र उच्च शिक्षा विभाग ने फरवरी तक के‍ लिए खोला पोर्टल, कॉलेज छात्राओं को 10 महीने तक 500 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश के कॉलेजों में पढ़ रहीं छात्राओं को प्रोत्साहन राशि देने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रतिभा किरण और गांव की बेटी योजना में पंजीयन करने के लिए पोर्टल खोल दिया है। अब छात्राएं दोनों में से एक योजना में 500-500 रुपये प्रतिमाह लेने के लिए पंजीयन करा सकेंगी। पोर्टल फरवरी तक खुला रहेगा, इसमें पूर्व छात्राओं का नवीनीकरण किया जाएगा और वर्तमान सत्र में प्रवेश लेने वालीं छात्राओं के नवीन पंजीयन होंगे। 12वीं में 60 फीसदी अंक और बीपीएल बता दें, गांव की बेटी योजना के लिए ग्रामीण छात्रा को ग्रामीण निवासी होना अनिवार्य है। वहीं 12वीं में 60 फीसद अंक होने के साथ उसका गरीबी रेखा के नीचे होना जरूरी है। इसके बाद विभाग उसे साल के 10 महीने 500-500 रुपये देगा। वहीं प्रतिभा किरण योजना के लिए शहरी क्षेत्र की छात्राओं को 12वीं में 60 फीसद अंक लाना अनिवार्य है। उसे भी 10 महीने तक 500-500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। दोनों ही योजनाओं की लाभार्थी छात्राएं प्रदेश के किसी भी निजी या सरकारी कॉलेज में प्रवेश ले सकती हैं। इसके बाद में विभाग के द्वारा उसको साल के 10 महीने पांच ₹500 की रकम दी जाती है और यहां प्रतिभा किरण योजना जो कि शहरी क्षेत्र की छात्राओं के लिए है । बताया जा रहा है कि यह स्कीम में 12वीं में 60 फिसदी तक के अंक आना जरूरी होते हैं जिसमें यह ₹500 की रकम हर महीने दी जाती है दोनों ही योजना का फायदा लाभार्थी छात्राओं को निजी तथा सरकारी कॉलेज में प्रवेश के बाद में मिलता है।

MP में महंगी होगी बिजली, कंपनियों ने 7% से ज्यादा दर बढ़ाने का दिया प्रस्ताव

जबलपुर  मध्यप्रदेश की विद्युत (बिजली) कंपनियों ने अपने वित्तीय वर्ष 2025-26 की कुल राजस्व आवश्यकता और उनकी आय में हो रहे भारी भरकम अंतर को पूरा करने के लिए एक बार फिर से जनता के ऊपर बोझ डालने का निर्णय लिया है। जी हां मध्य प्रदेश की विद्युत कंपनियों ने आय और व्यव के भारी अंतर का उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा। फिर से जनता पर बोझ डाला जाएगा मध्य प्रदेश की विद्युत कंपनियों की वित्त वर्ष 2025-26 की कुल राजस्व आवश्यकता की बात की जाए तो 58744 करोड रुपए है, जबकि प्रदेश की विद्युत कंपनियों आय 54637 करोड़ रुपए है। ऐसे में 4 हजार करोड़ से ज्यादा के अंतर को पूरा करने या यू कहे कि खर्च और आए में संतुलन बनाने के लिए फिर से जनता पर बोझ डाला जाएगा। रिटायर्ड अभियंता और विद्युत मामलों की जानकार राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि इस तरह से बिजली कंपनियां सीधे तौर पर जनता पर बोझ डालने की तैयारी कर रही है। कंपनियों को होगी अतिरिक्त आय कंपनियों द्वारा दिए गए प्रस्ताव में घरेलू, कृषि, चार्जिंग स्टेशन, रेलवे, कोयला खदान, औद्योगिक, शॉपिंग मॉल से लेकर मेट्रो, सार्वजनिक जलप्रदाय संयंत्र, सिंचाई व अन्य तमाम कार्यों के लिए ली जाने वाली बिजली की कीमत बढ़ जाएगी। घरेलू उपभोक्ताओं से ही दर वृद्धि के बाद 988 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय बिजली कम्पनियों को होगी, तो गैर घरेलू से 218 करोड़ रुपए और सार्वजनिक जल प्रदाय संयंत्रों और स्ट्रीट लाइट से 104 करोड़, निम्न दाब उद्योगों से 62, कृषि संबंधित गतिविधियों से डेढ़ हजार करोड़ रुपए की राशि प्राप्त होना है। इसी तरह कोयला खदानें, शॉपिंग मॉल और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं से बढ़ी हुई दरें वसूलकर 4107 करोड़ रुपए अतिरिक्त हासिल किए जाएंगे।  घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं को अभी 151-300 यूनिट के मौजूदा टेरिफ स्लैब का लाभ मिलता है। उसे अब संशोधित कर 150 यूनिट तक ही सीमित किया जाएगा। यानी इससे अधिक बिजली जलाने वाले छोटे उपभोक्ताओं को  भी बिजली की कीमत अधिक चुकानी पड़ेगी। झुग्गी-झोपड़ी में डीटीआर मीटर फिलहाल झुग्गी झोपड़ी समूह के लिए डीटीआर मीटर के माध्यम से जो टैरिफ अभी है उसे तब तक जारी रखा जाएगा जब तक कि घोषित और अघोषित अवैध कॉलोनियों में विद्युतीकरण के साथ सभी उपभोक्ताओं का मीटरीकरण नहीं हो जाता। स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए सुबह 9 से 5 बजे ऑफ पीक अवधि के दौरान खपत की गई ऊर्जा के लिए सामान्य दर पर 20 फीसदी की टीओडी छूट प्रस्तावित की गई है। इसी तरह रात 10 से सुबह 6 बजे के दौरान टैरिफ की सामान्य दरों पर ही भुगतान करना पड़ेगा। हरित ऊर्जा शुल्क भी वर्ष 2025-26 के लिए दो तरह से प्रस्तावित किया गया है। पहला कार्बन चिन्ह को कम करने और दूसरा ऊर्जा के नवीकरणीय स्त्रोतों से बिजली हासिल करने वाले उपभोक्ताओं की श्रेणी में लिया जाएगा। वहीं एचवी-3 टैरिफ के तहत उच्च दाब उपभोक्ताओं को वर्तमान में लागू सभी छूट आगामी वित्त वर्ष में भी जारी रहेगी। इन याचिकाओं के खिलाफ 24 जनवरी तक आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकेंगी। टैरिफ में बढ़ोतरी न कर घाटे को रोका रहा राजेंद्र अग्रवाल का मानना है कि विघुत कंपनियो ने बीते वित्त वर्ष 2023-24 का घाटा 4344 करोड बताकर उसे अगले वर्ष यानि 2025-26 में वसूलने का प्रस्ताव किया है, जो कि पूणतः गलत है। उनका यह तक दावा है कि विद्युत कंपनियां जो 4000 करोड़ से ज्यादा का घाटा बता रही है वह घाटा हुआ ही नहीं। उनका मानना है कि विद्युत कंपनियों की आई और व्यय में कहीं भी कोई अंतर नहीं है लेकिन वह पिछले साल के बीते वर्ष के घाटे को पूरा करने के लिए इस तरह से चीज कर रही है। उनका कहना है कि विद्युत वितरण कंपनियों ने चुनाव के समय जनता को लुभाने के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी न करके उस घाटे को रोके रहा और अब जाकर 2 साल बाद जनता से उसे वसूल किया जा रहा है। बिजली की दरों में 7.52 फीसदी का इजाफा जानकारों का मानना है कि, आयोग को पहले वर्ष 2023-24 की सत्यापन याचिका का निराकरण करना चाहिए उसके बाद अगला कदम उठाना चाहिए। नए साल पर प्रदेश के करोडों बिजली उपभोक्ताओं को बिजली का झटका लगने वाला है। विद्युत कंपनियां प्रदेश में बिजली की दरों में 7.52 फीसदी का इजाफा करना चाहती है। जिसके लिए नियामक आयोग के समक्ष सभी विद्युत कंपनियों ने टैरिफ याचिका दायर कर दी है, जिसमें मध्य प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तकरीबन 7.52 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। औसतन प्रति यूनिट बड़ा झटका बिजली उपभोक्ताओं को देने की तैयारी है। स्लैब के हिसाब से इस तरह बढ़ोतरी का प्रस्ताव -50 यूनिट तक -वर्तमान दर 4.27/- प्रस्तावित दर 4.59/-(32 पैसे बढ़ोतरी ) 51- 150 यूनिट तक– वर्तमान दर 5.23/- प्रस्तावित दर 5.62/-(39 पैसे बढ़ोतरी ) 150-300 यूनिट तक– वर्तमान दर 6.61/- प्रस्तावित दर 7.11/-(50 पैसे बढ़ोतरी ) 300 यूनिट से ज़्यादा– वर्तमान दर 6.80/- प्रस्तावित दर 7.11/-(31 पैसे बढ़ोतरी ) सबसे ज्यादा मध्यम वर्गीय परिवार को बिजली का झटका देने की तैयारी है।

यूनियन कार्बाइड का जहरीले कचरे की राख जमीन में डंप करने से दुष्प्रभाव

भोपाल यूनियन कार्बाइड का कचरा जलने से कई तरह की गंभीर बीमारियों की आशंका है।  विशेषज्ञ डॉक्टरों से रासायनिक कचरे(Union Carbide Waste) के जलने से उत्पन्न स्थिति के बारे में जाना। विशेषज्ञों ने कहा, अगर रासायनिक पदार्थ जलता है तो धुआं निकलता है। वैसे अलग-अलग तरह के धुएं होते हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। धुएं बनते हैं कैंसर की वजह कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. दिगपाल धारकर के मुताबिक, ‘कुछ धुएं कैंसर का कारण बन सकते हैं। इन्हें कार्सिनोजेनिक धुआं कहा जाता है, जिनमें ऐसे पदार्थ होते हैं जो कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। तंबाकू के धुएं से फेफड़ों, गले और अन्य प्रकार के कैंसर तो डीजल के धुएं से फेफड़े और मूत्राशय के कैंसर का खतरा होता है। रासायनिक धुएं में वाष्पशील कार्बनिक यौगिक होते हैं, जो कैंसरकारी हो सकते हैं। कई मामलों में तो सालों बाद भी कैंसर का खतरा रहता है। लोगों को सुझाव दिया जाता हैै कि अगर वे कार्सिनोजेनिक धुएं के संपर्क में आते हैं तो किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।’ कचरे की राख जमीन में डंप करने से दुष्प्रभाव डॉ. पीयूष जोशी(एमडी )के मुताबिक, ‘रासायनिक कचरे की राख को जमीन में डंप करने से दुष्प्रभाव की आशंका रहती है। राख को जमीन में डंप करने से भूमिगत जल के दूषित होने की पूरी आशंका रहती है। पीथमपुर से यशवंत सागर जुड़ा है, बेटमा इलाका भी लगा है, जहां तक प्रभाव हो सकता है। इस तरह का दूषित जल पीने से कैंसर का खतरा रहता है। साथ ही गर्भवती महिला संपर्क में आती है तो गर्भस्थ बच्चा प्रभावित हो सकता है और पैदा होने पर उसमें विकृति की आशंका रहती है। त्वचा रोग का भी खतरा रहता है।’ एक्सपर्ट व्यू डॉ. योगेंद्र व्यास, शिशु रोग विशेषज्ञ व फिटनेस कोच के मुताबिक, ‘पीथमपुर पहुंचा यूनियन कार्बाइड का कचरा(Union Carbide waste) 40 साल पुराना है। इसमें कोई केमिकल बचा नहीं है। विशेषज्ञ एनालिसिस भी कर रहे हैं। भोपाल से पीथमपुर इसलिए आया है, क्योंकि यहां मौजूद रामकी कंपनी इंटरनेशनल होने के साथ वेस्ट मैनेजमेंट का अनुभव भी रखती है। कई लोग बोल रहे हैं कि कचरे से नुकसान होगा व पर्यावरण प्रदूषित होगा। इसके बारे में कहूंगा कि भोपाल में यूनियन कार्बाइड की 70 एकड़ जमीन है। इसमें से 30 एकड़ पर कई सालों से अतिक्रमण है। वहां लोग रह रहे हैं। उन्हें असर हुआ या नहीं, इसकी स्टडी पहले कर ली जाए। रामकी कंपनी नौ माह में पूरे मापदंड के साथ इसका निष्पादन करेगी। सभी उत्सर्जित गैसों की निगरानी होगी। फिल्टर भी लगा है। इसलिए चिंतित नहीं होना चाहिए।’

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