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युवा दिवस के मौके पर विद्यालयों, महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थाओं में सामूहिक सूर्य-नमस्कार का आयोजन होगा

भोपाल प्रदेश में स्वामी विवेकानंद के जन्म-दिवस 12 जनवरी को प्रतिवर्ष युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। युवा दिवस के मौके पर विद्यालयों, महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थाओं में सामूहिक सूर्य-नमस्कार का आयोजन किया जाता है। सामूहिक सूर्य-नमस्कार के साथ स्वामी विवेकानंद पर केन्द्रित प्रेरणादायी शैक्षिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने आयुक्त लोक शिक्षण को सामूहिक सूर्य-नमस्कार और इससे जुड़े कार्यक्रमों में स्वयंसेवी संगठनों और आम लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित करने के लिये कहा है। विभाग द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि प्रदेश की समस्त विद्यालयीन संस्थाओं में 12 जनवरी को प्रात: 9 से प्रात: 10:30 बजे तक सामूहिक सूर्य-नमस्कार का आयोजन हो। कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत वंदे-मातरम और मध्यप्रदेश गान का सामूहिक गायन होगा। इसी दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का रेडियो पर संदेश प्रसारित होगा। सामूहिक सूर्य-नमस्कार समस्त शिक्षण संस्थाओं में एक साथ, एक संकेत पर किया जायेगा। कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति का गठन किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। शिक्षण संस्थाओं में होने वाले सामूहिक सूर्य-नमस्कार में मंत्रीगण, सांसद, महापौर, अध्यक्ष जिला पंचायत, विधायक, अध्यक्ष नगरपालिका एवं स्थानीय जन-प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। सामूहिक सूर्य-नमस्कार में कक्षा-6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी शामिल होंगे। सामूहिक सूर्य-नमस्कार में शामिल विद्यार्थियों को योग और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के महत्व के बारे में भी बताया जायेगा।  

अब छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि का भुगतान बालिका के खाते में सीधे UNIPAY के माध्यम से हो सकेगा

भोपाल महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि नव वर्ष से मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत पंजीकृत पात्र बालिकाओं को छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि का भुगतान UNIPAY के माध्यम से किया जायेगा। यह व्यवस्था लागू हो जाने से अब छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि का भुगतान बालिका के खाते में सीधे UNIPAY के माध्यम से हो सकेगा। भुगतान की सूचना भी मोबाईल में एसएमएस से बालिका को प्राप्त हो सकेगी। इस तरह भुगतान की प्रकिया अब और अधिक सटीक हो गयी है। मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना में बालिका को कक्षा 6, कक्षा 9, कक्षा 11 एवं कक्षा 12 में छात्रवृत्ति देने एवं स्नातक प्रथम एवं अंतिम वर्ष में प्रोत्साहन राशि दिये जाने का प्रावधान है। अब तक लगभग 29 लाख से अधिक बालिकाओं को 813.64 करोड़ रूपये की छात्रवृत्ति स्वीकृत की जा चुकी है। पूर्व में यह राशि जिलों के द्वारा आहरित कर सम्बंधित बालिका के खाते में डिपोजिट की जाती थी, इसमें समय लगता था और बालिका को सूचना भी नहीं प्राप्त हो पाती थी। UNIPAY के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया प्रभावी और पारदर्शी हो गयी है। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि विभाग लाड़ली बहना योजना की हितग्राहियों को UNIPAY पेमेंट पोर्टल के माध्यम से सहायता राशि का हस्तांतरण करता है। इसके लिए प्रत्येक हितग्राही का बैंक खाता आधार लिंक एवं डीबीटी इनेबिल्ड होना चाहिए, इसके पोर्टल का संचालन एमपीएसईडीसी द्वारा किया जा रहा है। इसमें कोई मैन्युअल हस्तक्षेप नहीं है। एमपीएसईडीसी के पोर्टल पर पेमेंट आर्डर जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी द्वारा जनरेट किया जाता है। पेमेंट आर्डर जनरेट होने के बाद एमपीएसईडीसी के UNIPAY पेमेंट पोर्टल से बैंकिंग पार्टनर को हितग्राही के आधार के रेफरेंस नंबर के साथ पेमेंट भेजा जाता है। इसके बाद बैंक यह पेमेंट आर्डर और NPCI को भेजता है NPCI इसे हितग्राही के पसम्बंधित बैंक को भेजता है।  

तरूण प्रकाश ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक का पदभार ग्रहण किया

बिलासपुर  आज दिनांक 01 जनवरी 2025 को तरूण प्रकाश ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक के पद पर  पदभार ग्रहण किया । इस नियुक्ति से पहले वे रेलवे बोर्ड में प्रधान कार्यकारी निदेशक (सिग्नल एवं दूरसंचार)/विकास के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे ।   तरूण प्रकाश भारतीय रेल सिग्नल इंजीनियरिंग सेवा (IRSSE) के 1988 बैच के अधिकारी हैं। उन्होंने आईआईटी रुड़की से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में बी.टेक. और आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में एम.टेक. की डिग्री प्राप्त की है । प्रबंधन क्षेत्र में उन्होंने बिकोन्नी मेलॉन और आईएसबी हैदराबाद से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है । उन्होने मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों के ख्याति प्राप्त संस्थानों से अध्ययन और प्रशिक्षण प्राप्त किया है  । तरूण प्रकाश, महाप्रबंधक ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में पहले भी प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर के पद पर कार्यरत रहे हैं । उनके नेतृत्व और तकनीकी दक्षता से रेलवे को उस समय व्यापक लाभ प्राप्त हुआ था ।  उन्होंने अपनी रेल सेवा की शुरुआत उत्तर रेलवे में सहायक सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर के रूप में की थी और इसके बाद विभिन्न महत्वपूर्ण पदों जैसे उत्तर रेलवे में मुख्य संचार इंजीनियर, मुरादाबाद मंडल में मंडल रेल प्रबंधक, और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर के रूप में अपनी सेवाएं दीं है ।   दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे वर्तमान में प्रमुख स्टेशनों के पुनर्विकास और “अमृत भारत स्टेशन योजना” के तहत स्टेशनों के उन्नयन कार्यों को गति दे रहा है । साथ ही, रेलवे की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के लिए दोहरीकरण, तीसरी और चौथी रेल लाइनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा सभी महत्वपूर्ण रेलखंडों में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग के कार्य भी तीव्र गति से किए जा रहे है । महाप्रबंधक के रूप में तरूण प्रकाश के नेतृत्व में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे अधोसंरचना और यात्री सुविधाओं के कार्यो को और भी अधिक ज्यादा गति मिल सके ।                               

2 जनवरी को 68वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का मंत्री उदय प्रताप सिंह करेंगे शुभारंभ

भोपाल स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह 2 जनवरी को 68वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता 2024-25 का शुभारंभ करेंगे। शुभारंभ समारोह गुरुवार को दोपहर एक बजे भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शिवाजी नगर में होगा। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएँ हॉकी अंडर-14 बालक और शूटिंग अंडर-14-19 बालक-बालिका वर्ग की होंगी। राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2 से 7 जनवरी, 2025 तक चलेगी। राष्ट्रीय क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन लोक शिक्षण, स्कूल शिक्षा विभाग कर रहा है।  

दिल्ली सीएम आतिशी का शिवराज को जवाब , यह वैसे ही जैसे दाऊद इब्राहिम अहिंसा पर प्रवचन दे

Delhi CM Atishi’s reply to Shivraj is like Dawood Ibrahim giving sermon on non-violence. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को पत्र लिखकर किसानों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार केंद्र की किसान-कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में विफल रही है, जिससे दिल्ली के किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को पत्र लिखा है. उन्होंने दिल्ली में किसानों की स्थिति पर चिंता जताई है. शिवराज ने कहा है कि आम आदमी पार्टी की सरकार किसानों के प्रति बेहद उदासीन है. किसानों के लिए आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार में कोई संवेदना नहीं. शिवराज सिंह की चिट्ठी पर सीएम आतिशी का जवाब आया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी का किसानों के बारे में बात करना वैसे ही है जैसे दाऊद अहिंसा पर प्रवचन दे रहा हो. जितना बुरा हाल किसानों का बीजेपी के समय हुआ, उतना कभी नहीं हुआ. आतिशी ने कहा कि पंजाब में किसान आमरण अनशन पर बैठे हैं, मोदी जी से कहिए उनसे बात करें. किसानों से राजनीति करना बंद करिए. बीजेपी राज में किसानों पर गोलियां, लाठियां चलाई गईं. शिवराज ने क्या कहा था?चिट्ठी में शिवराज ने लिखा, दिल्ली में केजरीवाल और आतिशी ने कभी किसानों के हित में उचित निर्णय नहीं लिए. केजरीवाल ने हमेशा चुनावों से पहले बड़ी बड़ी घोषणाएं कर राजनैतिक लाभ लिया है. केजरीवाल ने सरकार में आते ही जनहितैषी निर्णयों को लेने के स्थान पर अपना रोना रोया है. उन्होंने आगे लिखा, 10 वर्षो से दिल्ली में आप की सरकार है, लेकिन पूर्व सीएम केजरीवाल ने हमेशा किसानों के साथ केवल धोखा किया है. केंद्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं को आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली में लागू नहीं किया. दिल्ली के किसान केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं. ‘किसानों के प्रति गैर जिम्मेदाराना रवैया’केंद्रीय मंत्री चिट्ठी में आगे लिखते हैं, दिल्ली में आप सरकार का किसानों के प्रति गैर जिम्मेदाराना रवैया है. एकीकृत बागवानी मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, बीज ग्राम कार्यक्रम सहित अनेक योजनाओं का लाभ किसान नहीं ले पा रहे हैं. दिल्ली में केंद्र की कृषि योजनाएं लागू नहीं होने से किसान भाई-बहन नर्सरी और टिशू कल्चर की स्थापना, रोपण सामग्री की आपूर्ति, फसल उपरांत प्रबंधन के इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, नए बाग़, पाली हाउस एवं कोल्ड चैन की सब्सिडी सहित अनेक योजनाओं के लाभ नहीं ले पा रहे हैं. उन्होंने लिखा, कृषि विकास योजना को लागू नहीं होने से कृषि मशीनीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य, फसल अवशेष प्रबंधन, परंपरागत कृषि विकास योजना, कृषि वानिकी और फसल डायवर्सिफिकेशन के लिए सब्सिडी जैसी योजनाओं का लाभ दिल्ली के किसान नहीं ले पा रहे हैं. बीज ग्राम कार्यक्रम के दिल्ली में क्रियान्वयन नहीं होने से बीजों के वितरण, बीज परीक्षण, प्रयोगशालाओं के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, बीज प्रमाणीकरण एजेंसियों की सहायता, बीजों की पारंपरिक किस्म के लिए सहायता और बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सब्सिडी जैसे लाभ नहीं मिल पा रहे हैं. ‘किसानों की आजीविका पर संकट’शिवराज सिंह चौहान ने आगे लिखा, दिल्ली में ट्रैक्टर, हार्वेस्टर सहित किसान उपकरण का पंजीकरण कमर्शियल व्हीकल श्रेणी में किया जा रहा है, जिससे किसानों को अधिक दाम देना पड़ रहा है. आप की सरकार फ्री बिजली की बात करती है, लेकिन दिल्ली में किसानों के लिए बिजली की उच्च दरें निर्धारित कर रखी है. यमुना से लगे गांवों में सिंचाई उपकरणों के बिक़ली कनेक्शन काटे जा रहे हैं, जिससे किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है. कृषि मंत्री ने पत्र में लिखा, राजनैतिक प्रतिस्पर्धा किसान कल्याण में बाधा नहीं बननी चाहिए, किसान कल्याण सभी सरकारों का कर्तव्य हैं. दलगत राजनीति से उठकर आप की सरकार को किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए. आम आदमी पार्टी की सरकार को केंद्र की योजनाओं को लागू कर दिल्ली के किसानों को राहत प्रदान करनी चाहिए.

सरकार प्रदेश की बंद हुई मिलों के मजदूरों को ब्याज सहित उनका हक दिलाएगी, जल्द मिलेगी बकाया राशि: सीएम मोहन यादव

बुरहानपुर बीते पच्चीस साल से बकाया वेतन और ग्रेज्युटी पाने के लिए तरस रहे बंद हुई बहादरपुर सूत मिल के मजदूरों को अब जल्द उनका हक मिल जाएगा। नया साल शेष बचे मिल के करीब एक हजार मजदूरों के लिए भी खुशखबरी लेकर आया है। दरअसल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन में आयोजित बैरवा जयंती समारोह के दौरान घोषणा की है, कि सरकार प्रदेश की बंद हुई मिलों के मजदूरों को ब्याज सहित उनका हक दिलाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने उज्जैन की विनोद मिल के मजदूरों को उनका हक दिलाया। इंदौर की हुकुमचंद मिल के मामले का भी समाधान किया।ग्वालियर की जेसी मिल्स के मजदूरों को उनका हक दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके साथ शेष मिलों के मजदूरों को भी उनका हक दिलाया जाएगा। ज्ञात हो कि वर्तमान में 56.55 करोड़ रुपये है देनदारी मिल के परिसमापन को 25 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। मिल के 1200 से अधिक कर्मचारियों में से करीब 200 की बकाया राशि मिलने की आस में मृत्यु तक हो चुकी है।     इन श्रमिकों की 1999 में देयता एक करोड़ 51 लाख बताई गई थी। वर्तमान में 31 मार्च 2024 की स्थिति में श्रमिकों की देनदारी ब्याज सहित 56 करोड़ 55 लाख 14 हजार 212 रुपये हो चुकी थी। ज्ञात हो कि फरवरी 1998 में दिग्विजय सिंह की कांग्रेस सरकार के समय इस चालू मिल को कार्यशील पूंजी का अभाव बता कर बंद कर दिया गया था। इसके पश्चात अक्टूबर 1999 में संस्था को परिसमापन में ले लिया गया था। मिल का भवन तक हो चुका चोरी संस्था को परिसमापन में लिए जाने के दौरान मिल का भवन, मशीनरी, वाहन, तार फेंसिंग, अधिकारियों के बंगले, श्रमिकों के क्वार्टर आदि सभी सही स्थिति में थे। सुरक्षा के अभाव में वर्ष 1998 से 2003 के बीच मिल की मशीनों से लेकर दीवारें, ईंट,मिट्टी तक चोरी हो गई। वर्तमान में वहां केवल 57.83 एकड़ भूमि ही शेष बची है। इसका वर्तमान सरकारी मूल्य 81 करोड़ रुपये है। यह भूमि इंदौर-अंकलेश्वर मार्ग से लगी होने के कारण बहुमूल्य है। वर्तमान में यह भूमि जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को हस्तांतरित कर दी गई है। अब इसे औद्योगिक उपयोग के अतिरिक्त अन्य शासकीय उपयोग में लेने पर विचार चल रहा है।  

अब एमपी ऑनलाइन से जमा कर सकेंगे बिजली बिल, जनवरी के अंतिम सप्ताह में ही शुरू हो जाएगी सुविधा

भोपाल अब आपको बिल जमा करने के लिए बिजली कार्यालय के चक्कर नहीं लगाना होंगे। बिल जमा करने की प्रक्रिया को अत्यधिक आसान बनाने की दिशा में मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जल्द ही महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। दरअसल अब जनवरी 2025 के अंतिम सप्ताह यानि इसी महीने से एमपी ऑनलाइन पर भी बिल जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही नये कनेक्शन के लिए भी उपभोक्ता आवेदन कर सकेंगे। बिजली कंपनी नये साल में उपभोक्ताओं को सौगात दे रही है। बता दें कि बिजली कंपनी द्वारा भोपाल सहित अपने कार्यक्षेत्र के 16 जिलों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम शुरू कर दिया है। इसी के चलते यह नई सुविधा भी शुरू की जा रही है। हुआ कंपनी का अनुबंध मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने आनलाइन बिजली बिल जमा करने की सुविधा शुरू करने के लिए एमपी आनलाइन से अनुबंध हस्ताक्षरित किया है। इस दौरान कंपनी के प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल, निदेशक वाणिज्य सुधीर कुमार श्रीवास्तव और एमपी ऑनलाइन के चीफ ऑपरेटिंग अधिकारी प्रशांत राठी मौजूद थे। कंपनी के वरिष्ठ प्रकाशन अधिकारी मनोज द्विवेदी ने बताया कि कंपनी अपने कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग के अंतर्गत आने वाले 16 जिलों के बिजली उपभोक्ताओं को सौगात दी है। बिजली उपभोक्ता अब एमपी आनलाइन के माध्यम से भी आवेदन कर नया बिजली कनेक्शन ले सकेंगे।  

मंदिर-मस्जिद विवाद पर ओवैसी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा, शीर्ष अदालत से की बड़ी मांग

नई दिल्ली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। याचिका में ओवैसी ने देश में पूजा स्थल कानून लागू करने की मांग की है। ओवैसी ने अधिवक्ता फुजैल अहमद अय्यूबी के माध्यम से 17 दिसंबर को याचिका दाखिल की। कानून को सख्ती से लागू करने की मांग ओवैसी ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार को कानून को प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की है। ओवैसी के वकील ने हवाला दिया कि कई अदालतों ने हिंदू वादियों की याचिकाओं पर मस्जिदों का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था। उधर, मुस्लिम पक्ष की दलीलों में सांप्रदायिक सौहार्द और मस्जिदों की मौजूदा स्थिति को बनाए रखने के लिए 1991 के पूजा स्थल कानून को लागू करने की मांग की गई है। हिंदू पक्ष ने कानून की संवैधानिक वैधता को दी चुनौती हिंदू पक्ष का दावा है कि आक्रमणकारियों के हमले से पहले इन स्थानों पर मंदिर थे। कई याचिकाओं में पूजा स्थल कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई। इसके खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति ने शीर्ष अदालत का रुख किया है। समिति ने मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद, दिल्ली के कुतुब मीनार के पास कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, मध्य प्रदेश में कमाल मौला मस्जिद समेत अन्य दरगाहों से जुड़े दावों को सूचीबद्ध किया है। समिति का कहना है कि कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं इन धार्मिक स्थलों के खिलाफ मुकदमों को सुविधाजनक बनाने के शरारती इरादे से दाखिल की गई। नए मुकदमे पर शीर्ष अदालत की रोक 12 दिसंबर को मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कई याचिकाओं पर सुनवाई की और सभी अदालतों को नए मुकदमों पर विचार करने और धार्मिक स्थलों विशेषकर मस्जिदों और दरगाहों पर पुनः अधिकार के लिए लंबित मामलों में अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने पर रोक लगा दी थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था कि चूंकि मामला इस अदालत में विचाराधीन है। इसलिए हम यह समझते हैं कि कोई नया मुकदमा दर्ज न किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्षों द्वारा दायर लगभग 18 मुकदमों की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। इनमें वाराणसी में ज्ञानवापी, मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद और संभल में शाही जामा मस्जिद समेत 10 मस्जिदों के सर्वेक्षण की मांग की गई थी। अश्विनी उपाध्याय ने भी दाखिल की याचिका विशेष पीठ में न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन भी शामिल थे। पीठ ने छह याचिकाओं पर सुनवाई की। इसमें एक याचिका वकील अश्विनी उपाध्याय की है। उन्होंने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि कानून के प्रावधान किसी व्यक्ति या धार्मिक समूह के पूजा स्थल को पुनः प्राप्त करने के लिए न्यायिक उपचार के अधिकार को छीन लेते हैं। क्या है पूजा स्थल अधिनियम? पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप में बदलाव से रोकता है। कानून के तहत कोई भी पूजा स्थल ठीक वैसा ही रहेगा जैसा जैसा वह 15 अगस्त 1947 को था। भाजपा सरकार पर साधा निशाना असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला बोला। उन्होंने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुवैत के नेताओं को संभल में मस्जिद के पास वक्फ की जमीन पर बनाई जा रही पुलिस चौकी दिखा सकते हैं। ओवैसी ने आरोप लगाया कि संभल में जामा मस्जिद के पास पुलिस चौकी का निर्माण वक्फ की जमीन पर किया जा रहा है। हालांकि जिला मजिस्ट्रेट ने इस आरोप को खारिज कर दिया।

,,,, में नहीं रहेगी केंद्र में मोदी सरकार… संजय राउत के बयान से मची खलबली

,,,, Modi government will not remain at the center… Sanjay Raut’s statement created panic उद्धव शिवसेना सांसद संजय राउत ने मोदी सरकार को लेकर बड़ा दावा किया है, उन्होंने कहा कि मेरे मन में संदेह है कि साल 2026 के बाद केंद्र सरकार बचेगी या नहीं. मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेंगे. केंद्र सरकार अस्थिर हो गई, तो इसका असर महाराष्ट्र पर भी पड़ेगा. राज्यसभा सांसद और उद्धव शिवसेना के नेता संजय राउत अपने बयानों को लेकर खासे चर्चा में रहते हैं, आज यानी कि गुरुवार को उन्होंने एक बयान में दावा किया कि केंद्र की मोदी सरकार 2026 में नहीं बचेगी. संजय राउत ने कहा कि मुझे संदेह है कि केंद्र सरकार 2026 के बाद बचेगी या नहीं, मुझे लगता है कि मोदी अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेंगे. और केंद्र सरकार अस्थिर हो जाएगी. उन्होंने कहा कि इसका असर महाराष्ट्र पर भी पड़ेगा. महाराष्ट्र में कैसे पड़ेगा असर? महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 132 सीटों पर जीत दर्ज की है, तो वहीं शिवसेना ने 57 एनसीपी ने 41 पर जीत दर्ज की है. इन तीनों दलों ने मिलकरमहाराष्ट्र में सरकार बनाई है. संजय राउत का दावा अगर सही साबित होता है तो महाराष्ट्र में भी बीजेपी मुश्किल में पड़ सकती है. यही कारण है कि राउत ने दावा किया कि केंद्र के अस्थिर होने के बाद महाराष्ट्र पर भी असर पड़ेगा. सियासी बयानबाजी के बीच राउत का दावा बिहार में भी आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने कहा कि नीतीश के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं, नीतीश को भी खोलकर रखना चाहिए. लालू ने कहा कि नीतीश कुमार साथ में आएं, मिलकर काम करें. नीतीश कुमार ही हमेशा भाग जाते हैं, हम माफ कर देंगे. लालू के इस बयान के पहले भी नीतीश को लेकर कई तरह के बयान सामने आए हैं. इन बयानों के बाद ऐसा कहा जा रहा है कि राजनीतिक गलियारों में कुछ तो पक रहा है. जिसके कारण ये बयान सामने आ रहे हैं.

श्रद्धालुओं के लिए होंगे ‘हाईटेक इंतजाम’, छह मोटर हाउसबोट का किया गया इंतजाम, बच्चों-बुजुर्गों को देंगे बड़ी राहत

प्रयागराज   महाकुंभ में श्रद्धालुओं को संगम तट पर हाईटेक हाउसबोट और आधुनिक आइसोलेटेड चेंजिंग रूम बड़ी राहत देंगे। हाउसबोट तट से संगम जाएंगे। जहां बोट के अंदर बने एंक्लोज्ड एरिया में श्रद्धालु सीढ़ी की मदद से नीचे उतरेंगे और संगम में डुबकी लगाएंगे। हाईटेक हाउसबोट की यह सुविधा बच्चों और बुजुर्ग के लिए कारगर साबित होगी। साथ ही साथ उन लोगों के लिए भी जो लोग पानी में उतरने से डरते हैं। छह मोटर हाउसबोट का किया गया इंतजाम आपको बता दें संगम के तट पर श्रद्धालुओं के लिए खास हाउसबोट का इंतजाम मेला प्रशासन ने किया है। मेला प्रशासन की तरफ से छह मोटर हाउसबोट का इंतजाम किया गया है। जिसमें कई तरह की आधुनिक सुविधा रहेगी। यह सभी हाउसबोट किसी भी कोने में जा सकती हैं। मतलब की घाट के किनारे से श्रद्धालुओं को बैठना होगा उसके बाद यह हाउसबोट मोटर की मदद से संगम तक पहुंचेगी। हाइटेक हाउसबोट में श्रद्धालुओं को सोफा सेट और चेंजिंग रूम भी मिलेगा। जिसमें श्रद्धालु डुबकी लगाने के बाद कवर्ड चेंजिंग रूम में कपड़े पहन सकेंगे। 144 आइसोलेटेड चेंजिंग रूम बनकर तैयार हाउसबोट के मैनेजर हर्ष अग्रवाल बताते हैं कि फिलहाल हाउसबोट का रेट डिसाइड नहीं किया गया है, लेकिन सबसे ज्यादा मदद उन श्रद्धालुओं को मिलेगी जिनको नदी में जाने से डर लगता है। वह सुरक्षित बैठकर संगम में जाकर डुबकी लगा सकते हैं। इसके साथ ही 144 आइसोलेटेड चेंजिंग रूम भी तैयार किए गए हैं। जो पहली बार संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए हैं। यह चेंजिंग रूम अंदर से गर्म रहेंगे और श्रद्धालुओं को बड़ी राहत देंगे। महिलाओं को खास ध्यान में रखते हुए इन चेंजिंग रूम को बनाया गया है।

इंदौर में जनवरी ने या फरवरी महीने से मेट्रो रेल दौड़ना शुरू हो जाएगी

इंदौर इंदौर में मेट्रो रेल परियोजना के शुरू होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। मेट्रो चलाने के लिए अब मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की हरी झंडी का इंतजार है और सब कुछ ठीक रहा, तो शहर में इस महीने या अगले महीने से मेट्रो रेल दौड़ना शुरू कर सकती है। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) ने तैयारी पूरी कर ली है। मेट्रो के अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि एमपीएमआरसीएल द्वारा सीएमआरएस को जरूरी दस्तावेज जमा किए जाने का काम अंतिम दौर में है। उन्होंने इसके बाद सीएमआरएस का दल मेट्रो रेल के डिपो और स्टेशनों के निरीक्षण की तारीख तय करके सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेगा। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के बाद सीएमआरएस की हरी झंडी मिलने की स्थिति में शहर में मेट्रो रेल का वाणिज्यिक परिचालन इस महीने या फरवरी से शुरू हो सकता है। मेट्रो अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में शहर के गांधी नगर स्टेशन से सुपर कॉरिडोर के स्टेशन क्रमांक-तीन के बीच 5.90 किलोमीटर के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले गलियारे पर मेट्रो रेल चलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस गलियारे पर मेट्रो रेल प्रायोगिक परीक्षण (ट्रायल रन) सितंबर 2023 में किया गया था। बहरहाल, जानकारों का कहना है कि इस मार्ग पर छितराई आबादी के कारण मेट्रो रेल को शुरुआत में यात्रियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। एमपीएमआरसीएल अधिकारी ने कहा कि शहर में एक बार मेट्रो रेल शुरू हो जाने और इसके मार्ग की लम्बाई बढ़ने के बाद यात्रियों की कोई कमी नहीं होगी। इस बारे में जानकारी देते हुए एक मेट्रो अधिकारी ने बताया कि शहर में मेट्रो रेल के स्टेशन इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि इनके जरिये छह डिब्बों की रेल चलाई जा सकती है। उन्होंने हालांकि बताया कि शुरुआत में हम तीन डिब्बों की रेल चलाएंगे। यात्रियों की तादाद बढ़ने पर इसमें तीन और डिब्बे जोड़े जा सकते हैं। अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि मेट्रो रेल के एक डिब्बे में करीब 300 यात्री सफर कर सकते हैं जिनमें सीट पर बैठने वाले 50 लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इंदौर में 7,500.8 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण की नींव 14 सितंबर 2019 को रखी गई थी। इसके तहत शहर में गोल आकार वाला करीब 31.50 किलोमीटर लम्बा मेट्रो रेल गलियारा बनाया जाना है।

राजधानी से प्रयागराज महाकुंभ जाएगी फायर फाइटिंग बोट, घाटों पर रहेंगी तैनात

 भोपाल/प्रयागराज यूपी के प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन होने जा रहा है. इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. संगम नगरी में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए भी तमाम इंतजामात किए गए हैं. इसी के मद्देनजर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में फायर फाइटिंग बोट बनाई गई हैं. भोपाल से अब फायर फाइटिंग बोट प्रयागराज रवाना की जाएंगी. फायर सेफ्टी के लिहाज से ये बोट महाकुंभ के दौरान घाटों पर तैनात की जाएंगी. लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच आग लगने की आपात कालीन स्थिति में घाटों तक फायर ब्रिगेड न पहुंचने की परेशानी के लिहाज से रेस्क्यू का काम करेंगी. फायर बोट पर उत्तर प्रदेश अग्निशमन और आपात सेवा लिखा गया है. बोट में 6-8 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है. नाव के पिछले हिस्से में लगी मोटर से नदी का पानी खींचकर आग लगने की आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकेगा. फायर बोट पर सायरन सिस्टम भी लगाया गया है. इस तरह की करीब 6 फायर बोट प्रयागराज भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है. फायर फाइटिंग बोट की खासियत फायर बोट पर उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपात सेवा लिखा गया है। बोट में 6-8 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। डीजल से चलने वाली मोटर लगाई गई है जो आग लगने की आपात स्थिति में नोजल से गंगा-यमुना का पानी फेंकेगी। साथ ही इसमें सायरन सिस्टम भी लगाया गया है। इस तरह की करीब 6 फायर बोट प्रयागराज भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है। यूपी ने सौंपा था काम मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि यूपी फायर सर्विस की तरफ से टेंडर जारी कर भोपाल के पीएस ट्रेडर्स को इस बोट के निर्माण का काम सौंपा था. जिसके बाद इसे भोपाल में बनाया गया है, ये देश की पहली फायर फाइटिंग बोट है जिसे खासतौर पर यूपी के प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ के लिए तैयार किया गया है. आज भोपाल में इसकी टेस्टिंग भी की गई है, बता दें कि टेस्टिंग के लिए उत्तर प्रदेश फायर सर्विस से टीम भी आई थी.  

‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’ में यात्रियों के लिए ट्रेन टिकट बुकिंग की सुविधा भी होगी, मिलेगी आवश्यक जानकारी

प्रयागराज  महाकुम्भ 2025 के दौरान श्रद्धालुओं के सुगम और आरामदायक सफर के लिए भारतीय रेलवे ने विशेष प्रबंध किए हैं। रेलवे की ये पहल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने और समय की बचत करने के उद्देश्य से की गई है। कुम्भ रेल सेवा ऐप महाकुम्भ 2025 के दौरान श्रद्धालुओं का स्मार्ट साथी उत्तर मध्य रेलवे ने महाकुंभ 2025 के दौरान श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है – ‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’। इस ऐप का उद्देश्य महाकुंभ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को रेलवे से जुड़ी सभी जानकारी एक ही स्थान पर प्रदान करना है। यह ऐप यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल संसाधन होगा, जो उनकी यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएगा।   यात्रियों को मिलेगी सभी आवश्यक जानकारी ‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’ के माध्यम से यात्रियों को महाकुंभ से जुड़ी सारी आवश्यक जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी। इसमें ट्रेनों की समय-सारणी, टिकट बुकिंग, स्टेशन से मेला क्षेत्र तक पहुंचने के मार्ग, और रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा, ऐप में महाकुंभ के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की जानकारी भी दी जाएगी, जिससे श्रद्धालु अपनी यात्रा की योजना बेहतर तरीके से बना सकेंगे।   आपातकालीन सेवाएं और सुरक्षा की व्यवस्था महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में सुरक्षा और आपातकालीन सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। इस ऐप में आपातकालीन संपर्क नंबरों की जानकारी भी उपलब्ध होगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में यात्री तुरंत सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा, आरपीएफ द्वारा रेलवे स्टेशनों और मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर यात्रियों को सभी आवश्यक जानकारी प्रदान की जाएगी, जिससे वे सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा पूरी कर सकें।   विशेष सुविधाएं और डिजिटल टिकट बुकिंग ‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’ में यात्रियों के लिए ट्रेन टिकट बुकिंग की सुविधा भी होगी, जिससे वे ऐप के माध्यम से सीधे टिकट बुक कर सकेंगे। यह सुविधा यात्रियों के लिए बहुत सहायक होगी, क्योंकि उन्हें अलग से काउंटर या वेबसाइट पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके अलावा, ऐप में रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं की जानकारी भी दी जाएगी, जैसे वेटिंग रूम, रेस्ट रूम, फूड स्टॉल्स, पीने के पानी की व्यवस्था और सफाई जैसी सुविधाएं।   हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध जानकारी यात्रियों की सुविधा के लिए इस ऐप को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को भाषा संबंधी कोई परेशानी न हो। इसके माध्यम से वे अपनी यात्रा को बेहतर तरीके से योजना बना सकेंगे और ऐप का पूरा लाभ उठा सकेंगे।   महाकुंभ से जुड़ी तस्वीरें और ऐतिहासिक जानकारी इस ऐप में महाकुंभ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और तस्वीरें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें अतीत के महाकुंभ के फोटो गैलरी, महाकुंभ के इतिहास, आयोजनों और धार्मिक महत्व की जानकारी भी दी जाएगी। इससे श्रद्धालु महाकुंभ के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बेहतर समझ सकेंगे।   उत्तर मध्य रेलवे का यह प्रयास श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान, सुरक्षित और आरामदायक बनाने में मदद करेगा। ‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’ महाकुंभ 2025 के आयोजन को एक नया डिजिटल दृष्टिकोण प्रदान करेगा, जिससे यात्रियों को पूरी यात्रा के दौरान आवश्यक जानकारी और सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।

उत्तर भारत की बर्फबारी का मध्यप्रदेश पर असर, जनवरी में 22 दिन शीतलहर, कोल्ड डे रहेगा

भोपाल मध्यप्रदेश में नए साल का स्वागत घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के साथ हुआ। भोपाल और उज्जैन समेत कई शहरों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी 100 मीटर तक सीमित हो गई। मौसम विभाग ने जनवरी में 20 से 22 दिन तक शीतलहर चलने का अनुमान लगाया है। प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में कोल्ड-डे की स्थिति बनी रहेगी।   नर्मदापुरम, इंदौर, रायसेन में 500 से 1000 मीटर और ग्वालियर, राजगढ़, शिवपुरी, जबलपुर में 1-2 किमी की विजिबिलिटी रही। छतरपुर के नौगांव की रात सबसे ठंडी रही। यहां पारा 6.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बर्फबारी की वजह से बढ़ेगी ठंड जम्मू, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख में बर्फबारी हो रही है। आने वाले दिनों में बर्फ पिघलेगी। जिससे उत्तरी हवा चलेगी और मध्यप्रदेश में ठंड का असर बढ़ जाएगा। इस कारण जनवरी में प्रदेश का मौसम ठंडा ही रहेगा। जनवरी में 20-22 दिन चल सकती है शीतलहर मौसम विभाग के अनुसार, जनवरी में 20 से 22 दिन तक शीतलहर और कोल्ड डे का असर रह सकता है। शुरुआती दो दिन में ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के जिलों में शीतलहर का असर देखने को मिलेगा। इसके बाद पूरे प्रदेश में असर बढ़ जाएगा। गुना में 6.5 डिग्री, सागर में 6.7 डिग्री, राजगढ़ में 7.6 डिग्री, मंडला में 7.7 डिग्री, टीकमगढ़ में 7.9 डिग्री, मलाजखंड में 8 डिग्री, रतलाम-रायसेन में 8.3 डिग्री, उमरिया में 8.5 डिग्री, नरसिंहपुर में 9 डिग्री, खजुराहो-सतना में 9.4 डिग्री दर्ज किया गया। बाकी शहरों में भी पारे में गिरावट देखने को मिली। 2 जनवरी  ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, शिवपुरी, दतिया और भोपाल समेत अन्य जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का अनुमान है। मंदसौर, जबलपुर और पन्ना जैसे जिलों में शीतलहर का असर बना रहेगा।   3 जनवरी   नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर और सतना जैसे जिलों में कोहरे की स्थिति बनी रहेगी।   राजधानी भोपाल में पारा 8.4 डिग्री, जबलपुर में 9 डिग्री, ग्वालियर में 9.9 डिग्री, उज्जैन में 11.8 डिग्री और इंदौर में 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नवंबर-दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ने वाली ठंड जनवरी में भी जमकर असर दिखाएगी। मौसम विभाग का कहना है कि जनवरी में 20 से 22 दिन तक शीतलहर चल सकती है। उत्तरी हिस्से यानी, ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के जिलों में कोल्ड-डे की स्थिति बनेगी। शुरुआती 3 दिन प्रदेश के आधे हिस्से में कोहरा रहेगा। कुछ जिलों में शीतलहर भी चलेगी। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की एक्टिविटी के चलते दिसंबर के आखिरी दिनों में बारिश और ओले का दौर रहा। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन समेत 45 से अधिक जिलों में बारिश हुई। वहीं, 20 जिले ऐसे रहे, जहां ओले भी गिरे। बारिश का दौर खत्म होते ही ठंड का असर बढ़ गया। ऐसा मौसम जनवरी में पूरे महीने ही बना रहेगा। इससे पहले साल 2024 की आखिरी रात भी ठंडी रही। नवंबर-दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी ठंड इस बार कड़ाके की ठंड पड़ रही है। नवंबर-दिसंबर में ठंड रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। नवंबर की बात करें तो भोपाल में तो 36 साल का रिकॉर्ड टूटा है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में भी पारा सामान्य से 7 डिग्री तक नीचे रहा। वहीं, दिसंबर में भी ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ा। स्थिति यह रही कि पूरे प्रदेश में जनवरी से भी ठंडा दिसंबर रहा। भोपाल समेत कई शहरों में ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 9 दिन से शीतलहर चली। भोपाल में दिसंबर की सर्दी ने 58 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदल दी गई है, जबकि भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए हीटर लगाए गए। भगवान को भी ठंड से बचाने के लिए जतन किए गए।

मध्यप्रदेश ने सबसे पहले लागू किया वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम

भोपाल मध्यप्रदेश, देश में वन और वृक्ष आवरण में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की संस्कृति वाला हमारा देश सम्पूर्ण जीव-जगत को भी अपना कुटुम्ब ही मानता है। हम सदियों से वनों, पहाड़ों और नदियों को पूजते चले आ रहे हैं। पूर्वजों की इस परंपरा को सहेजे जाने के लिए जैव-विविधता का संरक्षण आवश्यक है। आने वाली पीढ़ियों के लिये वन जीवन को सहेजकर रखना हमारी जिम्मेदारी है। मध्यप्रदेश कुल वन और वृक्ष आवरण 85 हजार 724 वर्ग किलोमीटर और वनावरण 77.073 वर्ग किलोमीटर के साथ देश का अग्रणी राज्य है। यहां वनों को प्रकृति ने अकूत सम्पदा का वरदान देकर समृद्ध किया है। प्रदेश में 30.72 प्रतिशत वन क्षेत्र है जो देश के कुल वन क्षेत्र का 12.30 प्रतिशत है। यहां कुल वन क्षेत्र 94 हजार 689 वर्ग किलोमीटर (94 लाख 68 हजार 900 हेक्टेयर) है। प्रदेश में 24 अभयारण्य, 11 नेशनल पार्क और 8 टाईगर रिजर्व हैं, जिसमें कान्हा, पेंच, बाँधवगढ़, पन्ना, सतपुड़ा और संजय डुबरी टाईगर रिजर्व बाघों के संरक्षण में लैंडमार्क बन गए हैं। बाघों को सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिये उठाए जा रहे महत्वपूर्ण कदम मध्यप्रदेश में बाघों की सुरक्षा और संरक्षण के लिये महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं। हाल ही में राजधानी भोपाल से सटे रातापानी अभयारण्य को प्रदेश का 8वां टाईगर रिजर्व घोषित कर दिया गया है। शिवपुरी के माधव वन्य जीव उद्यान को भी टाईगर रिजर्व घोषित के जाने की तकनीकी अनापत्ति जारी कर दी गई है, उम्मीद है कि शीघ्र ही यह प्रदेश का 9वां टाईगर रिजर्व बन जाएगा। रातापानी हमेशा से ही बाघों का घर रहा है। रायसेन एवं सीहोर जिले में रातापानी अभयारण्य का कुल 1272 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अधिसूचित है। टाईगर रिजर्व बनने के बाद कुल क्षेत्रफल में से 763 वर्ग किलोमीटर को कोर क्षेत्र घोषित किया गया है। यह वह क्षेत्र है, जहाँ बाघ मानवीय हस्तक्षेप के बिना स्वतंत्र विचरण कर सकेंगे। शेष 507 वर्ग किलोमीटर को बफर क्षेत्र घोषित किया गया है। यह क्षेत्र कोर क्षेत्र के चारों ओर स्थित है। इसका उपयोग कुछ प्रतिबंधों के साथ स्थानीय रहवासी कर सकेंगे, इनकी आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। रातापानी की अर्बन फॉरेस्ट से समीपता के कारण भोपाल को अब टाईगर राजधानी के रूप में पहचान मिलेगी। रातापानी के टाईगर रिजर्व बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिये रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे। मध्यप्रदेश ने सबसे पहले लागू किया वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम मध्यप्रदेश ने देश में सबसे पहले वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम लागू किया। प्रदेश में वर्ष 1973 में वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम लागू किया गया था। प्रदेश के सतपुड़ा टाईगर रिजर्व को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की संभावित सूची में शामिल किया गया है। मध्यप्रदेश में सफेद बाघों के संरक्षण के लिये मुकुंदपुर में महाराजा मार्तण्ड सिंह जू देव व्हाइट टाईगर सफारी की स्थापना की गई है, इसे विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है। वन्य जीव विशेषज्ञों ने सतपुड़ा टाईगर रिजर्व को बाघ सहित कई वन्य-जीवों के प्रजनन के लिए सर्वाधिक अनुकूल स्थान माना है, इसलिए यह इनके लिए आदर्श आश्रय स्थली है। पेंच टाईगर रिजर्व की ‘कॉलर वाली बाघिन’ के नाम से प्रसिद्ध बाघिन को सर्वाधिक 8 प्रसवों में 29 शावकों को जन्म देने के अनूठे विश्व-कीर्तिमान के कारण ‘सुपर-मॉम’ के नाम से भी जाना जाता है। इसी तरह कान्हा टाईगर रिजर्व में पाए जाने वाले हार्ड ग्राउण्ड बारहसिंगा का संरक्षण भी देश ही नहीं दुनिया भर के लिए विशेष है। इसलिए मध्यप्रदेश में इसे राजकीय पशु का दर्जा दिया गया है। चीतों की पुनर्स्थापना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष रुचि एवं अथक प्रयासों के फलस्वरूप कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अफ्रीकी चीतों की पुनर्स्थापना की गई। अब इनका कुनबा बढ़ने भी लगा है, जो हमारे लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है। भारत में 13 हजार से भी अधिक तेंदुए हैं, जिसमें से 25 प्रतिशत तेंदुए मध्यप्रदेश में हैं। प्रदेश में तेंदुओं की संख्या 3300 से अधिक है। देश में तेंदुओं की आबादी में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि मध्यप्रदेश में यह वृद्धि 80 प्रतिशत आंकी गई है। घड़ियाल, गिद्धों, भेड़ियों, तेंदुओं और भालुओं की संख्या में भी मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। मध्यप्रदेश बाघों का घर होने के साथ ही तेंदुओं, चीतों, गिद्धों और घड़ियालों का भी आँगन है। दुर्लभ स्तनपायी मछली डॉल्फिन भी अत्यंत साफ-सुथरी चंबल में संरक्षित की जा रही है। इस तरह मध्यप्रदेश अन्य राज्यों की जैव-विविधता को सम्पन्न बनाने में भी अपना योगदान दे रहा है। वन्य जीव कॉरिडोर बनने से कम होगा मानव-वन्य जीव संघर्ष बाघ एवं तेंदुआ स्टेट का सम्मान मध्यप्रदेश को मिला हुआ है। हमारे प्रदेश में संरक्षित क्षेत्रों के अतिरिक्त खुले वनों में भी 30 प्रतिशत से अधिक बाघ विचरण कर रहे हैं। इससे मानव-वन्य जीव संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। मानव-वन्य जीव संघर्ष को कम करने के लिये विशेष वन्यजीव कॉरिडोर बनाये गये हैं। साथ ही 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वॉड और एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वॉड का गठन किया गया है। वन्य जीवों को मानव-वन्य जीव संघर्ष के लिए संवेदनशील क्षेत्रों से रेस्क्यू कर संरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जायेगा, जिससे वन्य जीवों का प्रबंधन एवं संरक्षण अधिक प्रभावी रूप से हो सकेगा। इन संघर्षों में प्रतिवर्ष औसतन 80 प्रतिशत जनहानि, 15 हजार पशु हानि होती है और 1300 नागरिक घायल होते हैं। मानव-वन्य जीव संघर्ष को कम करने के लिये शासन ने जनहानि के प्रकरणों में क्षतिपूर्ति राशि को 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का निर्णय लिया है। इन प्रकरणों में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत 30 दिवस के अंदर क्षति-पूर्ति राशि का भुगतान किया जाता है। प्रदेश में हाथियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एक एलीफेंट-टॉस्कफोर्स का गठन किया गया है। हाथी प्रबंधन के लिये योजना तैयार की जा रही है। इसमें एआई तकनीक के उपयोग से स्थानीय समुदायों की सहभागिता को भी प्रबंधन में सम्मिलत किया जा रहा है। हाथी विचरण क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों से स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।  

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