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ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा- एम.पी. ट्रांसको ने सृदृढ की पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में विद्युत पारेषण व्यवस्था

भोपाल एम.पी. ट्रांसको (म.प्र. पावर ट्रांसमिशन कंपनी) ने धार जिले के 220 के.व्ही. सबस्टेशन पीथमपुर सेक्टर –III में एक 200 एम.व्ही.ए. क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत किया है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि पीथमपुर क्षेत्र के लिये भविष्य में औद्योगिक उपभोक्ताओं की विद्युत की बढ़ती जरूरत और पारेषण विश्वसनीयता के मद्देनजर एम.पी. ट्रांसको ने सबस्टेशन की क्षमता वृद्धि करते हुए इस पावर ट्रांसफार्मर को स्थापित कर ऊर्जीकृत किया है। यह धार जिले का पहला 200 एम.व्ही.ए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर है। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि लगभग 20.5 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से स्थापित इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की पारेषण क्षमता को सुदृढ़ता प्रदान हुई है। इससे इस सबस्टेशन से जुडे़ अनेक औद्योगिक विद्युत उपभोक्ताओं को काफी फायदा पहुंचेगा, अब उन्हें गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति अतिरिक्त़ क्षमता के साथ उपलब्ध रहेगी । इस ट्रांसफार्मर के स्थापित हो जाने से पीथमपुर सबस्टेशन की क्षमता बढ़कर 819 एम.व्ही.ए. हो गई है। उन्होंने इस सफलता के लिए एम.पी. ट्रांसको के कार्मिकों को बधाई दी है। उल्लेखनीय है कि एम.पी. ट्रांसको के इस सब स्टेशन से सिर्फ औद्योगिक क्षेत्र के लिए ही विद्युत आपूर्ति की जाती है। धार जिले की ट्रांसफारमेशन कैपेसिटी में बढ़ोतरी इस क्षमता वृद्धि से धार जिले की ट्रांसफारमेशन कैपेसिटी बढ़कर 5414 एम.व्ही.ए. की हो गई है। धार जिले में एम.पी. ट्रांसको (मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी) अपने 400 के.व्ही. के दो सबस्टेशन पीथमपुर एवं बदनावर, 220 के.व्ही. के छह: सबस्टेशन धार, पीथमपुर सेक्टर -I, सेक्टर-III, कुक्षी , राजगढ़ धार व कानवान तथा 132 के.व्ही. के 11 सब स्टेशनो के माध्येम से विद्युत पारेषण करती है। एम.पी. ट्रांसको की ट्रांसफारमेशन कैपेसिटी हुई 80914 एम.व्ही.ए. मध्यप्रदेश में एम.पी. ट्रांसको (मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी) अपने 416 सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है। इस क्षमता .वृद्धि से मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की कुल ट्रांसफारमेशन क्षमता बढ़कर 80914 एम.व्ही.ए. की हो गई है । प्रदेश में एम.पी. ट्रांसको (मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी) के कुल 1022 पावर ट्रांसफार्मर क्रियाशील हैं।  

बिजली तार से हाथियों की मौत: ऊर्जा विभाग के सचिव से व्यक्तिगत शपथ पत्र में कोर्ट ने मांगा जवाब

बिलासपुर बिजली के तारों के कारण हाथियों की मौत के मामले में हाई कोर्ट में शुक्रवार को जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने ऊर्जा विभाग के सचिव से व्यक्तिगत शपथ पत्र में जवाब मांगा है. रायगढ़ वन प्रभाग के चुहकीमार जंगल में तीन मादा हाथियों, जिनमें एक शावक भी शामिल था, की मौत ढीले पड़े 11 केवी तार के संपर्क में आने से हो गई थी. यह खबर मीडिया में आने के बाद हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था. इस पूरे मामले में शुक्रवार को चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र अग्रवाल की डिवीजन बैंच में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने इस मामले में हस्तक्षेप याचिका दाखिल करने के बाद हुई हाथी की मौत के मामले में एक किसान पर की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी दी. वहीं कोर्ट ने अधिकारियों पर जांच कार्रवाई के बारे में भी पूछा. सुनवाई के दौरान यह तथ्य निकलकर आया कि एक याचिका में बिजली तारों की ऊंचाई को बढ़ाने का आदेश दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि 14 से बढ़ाना 20 फीट करना किस विभाग की जिम्मेदारी है..? इसके बाद बैंच ने इस मामले में ऊर्जा सचिव और सीएसपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक को नोटिस कर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किसानों के हित में कई नवाचार किऐ जा रहे

भोपाल राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिये कोई कसर नहीं छोड़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किसानों के हित में कई नवाचार किऐ जा रहे हैं और उपलब्धियाँ हासिल हो रहीं है। वर्ष 2024-25 में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मिशन अंतर्गत 2 लाख से अधिक किसानों को लाभांवित किया गया है। मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन अंतर्गत कृषकों को डेढ़ करोड़ रूपये से अधिक राशि का लाभ प्रदान किया गया है। वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजनांतर्गत 207 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट एवं 644 करोड़ रूपये की वार्षिक कार्ययोजना स्वीकृत की गई है। रबी विपणन वर्ष 2023-24 में कुल 81 लाख कृषक आवेदनों का 41.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के लिए बीमांकन किया गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत 25.79 लाख कृषकों को 755 करोड़ राशि के दावा भुगतान किये गये। किसानों को शीघ्रता से हरसंभव दावा भुगतान करने के प्रयास किये जा रहे हैं। बीज से संबंधित एक वर्ष की उपलब्धि     खरीफ 2024 में कुल 22.87 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का शासकीय, सहकारी एवं पंजीकृत निजी बीज उत्पादक संस्थाओं के माध्यम से वितरण किया गया।     प्रदेश के कृषकों को उच्च गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्धता के लिये संभाग स्तर पर 10 बीज परीक्षण प्रयोगशालाएं संचालित हैं।     वर्ष 2023-24 में 21920 बीज नमूना विश्लेषण के लक्ष्य के विरुद्ध कुल 17376 बीज नमूने लिये जाकर 14085 नमूने बीज परीक्षण प्रयोगशाला में विश्लेषित किये गये। जिसमें 12955 मानक तथा 1130 अमानक पाये गये। अमानक नमूनों में 1070 विक्रय प्रतिबंधित, 186 लाइसेंस निलंबन तथा 70 लाईसेंस निरस्त किये गये।     खरीफ 2024 में 13140 बीज नमूना विश्लेषण के लक्ष्य के विरूद्ध कुल 10235 नमूने लिये गये एवं 10212 विश्लेषित किये गये। जिसमें 9422 मानक तथा 790 अमानक पाये गये। अमानक नमूनों में 534 विक्रय प्रतिबंधित, 25 लाइसेंस निलंबन तथा 8 लाईसेंस निरस्त किये गये। राष्ट्रीय मिशन ऑन ईडीबल ऑईल तिलहन वर्ष 2024-25 में स्वीकृत कार्य योजना अनुसार 3629.05 लाख रूपये का आवंटन जिलों को जारी किया गया, जिसके विरुद्ध जिलों ‌द्वारा 1991.45 लाख रूपये का व्यय किया गया है। रेनफेड ऐरिया डेवेलपमेंट योजनान्तर्गत वर्ष 2023-24 में 144.35 लाख रूपये व्यय किये जाकर 1392 हेक्टेयर क्षेत्र के कृषको को लाभान्वित किया गया। सब मिशन ऑन एग्रोफारेस्ट्री योजना सब मिशन ऑन एग्रोफारेस्ट्री योजना में वर्ष 2023-24 में 141 लाख रूपये व्यय किये जाकर 4 नर्सरियों को लाभान्वित किया गया। बलराम तालाब प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनान्तर्गत बलराम तालाब योजना में कृषकों को स्वयं के व्यय पर तालाब निर्माण निर्माण पर सामान्य कृषकों को लागत राशि का 40 प्रतिशत अधिकतम राशि रु. 80 हजार रूपये, लघु सीमान्त कृषकों को लागत राशि का 50 प्रतिशत अधिकतम राशि, 80 हजार रूपये तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के कृषकों को लागत राशि का 75 प्रतिशत अधिकतम एक लाख रूपये का अनुदान दिए जाने का प्रावधान निहित है। वर्ष 2023-24 में 569.30 लाख व्यय किये जाकर 662 बलराम तालाब निर्मित किये गये गये हैं। विभाग ‌द्वारा वर्ष 2024-25 के लिये राशि रुपये 5308.34 का वित्तीय लक्ष्य एवं 6144 बलराम तालाब निर्मित किये जाने का भौतिक लक्ष्य रखा गया है। फसल विविधीकरण फसल विविधीकरण योजनान्तर्गत 6726 किसानों के साथ 4797 हेक्टेयर में विविधीकरण कार्य किया गया है एवं अभी तक लगभग 983.45 लाख रुपये का बायबैक किया गया है  

MP News: लाड़ली बहनों को जल्द मिल सकती है खुशखबरी, बजट में लाड़ली बहना योजना को ज्यादा राशि का प्रावधान!

 भोपाल मध्यप्रदेश की चर्चित योजनाओं में शुमार लाड़ली बहना योजना को मार्च 2025 में बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि मोहन सरकार फरवरी अंतिम या मार्च की शुरुआत में अपना पूर्ण बजट लेकर आ रही है। जिसमें लाड़ली बहना योजना को ज्यादा राशि का प्रावधान किया गया था।  दरअसल, सीएम बनने के बाद डॉ सीएम मोहन यादव ने अपना पहला पूर्ण बजट जुलाई 2024 में प्रस्तुत किया था। साल 2024-25 का बजट 3,65,067 करोड़ रुपये था। जो कि 2023-24 से 16 प्रतिशत ज्यादा था। साल 2024-25 बजट में सबसे ज्यादा ध्यान प्रदेश सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग को दिया था। जिसमें लाड़ली बहना योजना के लिए 18984 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया गया था। साल 2024 के बजट को देखते हुए 2025 में भी उम्मीद राज्य सरकार ने साल 2024 के बजट में लाड़ली बहना योजना को ज्यादा तव्वजो दी गई थी। अब साल 2025 के बजट में भी माना जा रहा है कि बहनों के बजट को बढ़ाया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो लाड़ली बहनों को मिलने वाली मासिक किस्त की राशि में बढ़ोत्तरी हो सकती है। साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर घोषणा की गई थी कि 1250 की राशि को बढ़ाकर 3 हजार रुपए किया जाएगा। ऐसे में अब पूरी निगाहें बजट पर टिकी हैं। आपको बता दें कि, लाड़ली बहना योजना की शुरुआत साल 2023 के मार्च में तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई थी। जिसमें बहनों को 1 हजार रुपए की सहायता दी जाती थी। इसके बाद रक्षाबंधन पर राशि को बढ़ाकर राशि को 1250 रुपए कर दिया गया। उसके बाद से ही राशि को नहीं बढ़ाया गया है। हालांकि, लाड़ली बहना योजना की किस्त न बढ़ाए जाने का एक कारण कर्ज का बोझ भी है। सरकार पर देश के कुल बकाया कर्ज का पांच प्रतिशत से अधिक बोझ है। लाड़ली बहना योजना चलाने के लिए सरकार को हर महीने 1600 करोड़ रुपए जरूरत रहती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि साल 2025 के बजट में सरकार लाड़ली बहना योजना के लिए कितने रुपए का प्रावधान करती है।

प्रयागराज महाकुंभ में मंत्री जयशंकर के साथ 116 देशों के राजनयिक संगम में आज लगाएंगे डुबकी

प्रयागराज संपूर्ण दुनिया के आकर्षण का केंद्र बना प्रयागराज महाकुंभ नित नए कीर्तिमान रच रहा है। विश्व के 116 देशों के राजनयिक कल महाकुंभनगर आ रहे हैं। सभी राजनयिक प्रयागराज के बमरौली एयरपोर्ट पर उतरेंगे। वहां से हेलीकाप्टर से अरैल पहुंचेंगे। राजनयिकों के साथ विदेशमंत्री एस.जयशंकर पहुंच रहे हैं।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभी का प्रयागराज में स्वागत करेंगे। सभी राजनयिक अरैल पहुंचने पर सबसे पहले अपने देश का झंडा फहरायेंगे। इसके बाद संगम में डुबकी लगाने पहुंचेंगे ।यह वैश्विक आयोजन मां गंगा के तट पर होगा। इस समागम में धुर विरोधी रूस और यूक्रेन के राजदूत भी शामिल होंगे। इसके अलावा अमेरिका, बांग्लादेश, जापान, जर्मनी, हंगरी, बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, मलेशिया, जिम्बाम्बे, कम्बोडिया, इटली, नेपाल, थाईलैंड, स्वीडन व स्विटजरलैंड समेत 116 देशों के राजनयिक अमृतकाल के साक्षी बनेंगे।मेला अधिकारी विजय किरन आनंद के अनुसार, इस संबंध में सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राजनयिक संगम में डुबकी लगाने के बाद अक्षयवट और लेटे हुए हनुमान जी का दर्शन करेंगे। इसके बाद डिजिटल अनुभूति केंद्र में प्रयागराज के महात्म्य के संबंध में जानकारी लेंगे। इस बार 116 देशों के राजनायिक आ रहे हैं। वे आज शनिवार को सुबह अरैल पहुंचेंगे। अरैल स्थित टेंट सिटी में उनका परंपरागत तरीके से स्वागत किया जाएगा। इसी क्रम में राजनायिक झंडे को सलामी देंगे। इसके बाद उन्हें क्रूज से वीआईपी घाट लाया जाएगा। संगम पर उनके स्नान की भी व्यवस्था रहेगी। इसके लिए जेटी तैयार की जा रही है। वे अक्षयवट, हनुमान मंदिर में दर्शन करेंगे और संतों से भी मिलेंंगे। विदेशी डेलीगेट्स कला कुंभ, डिजिटल अनुभूति केंद्र समेत अन्य प्रदर्शनियों का अवलोकन करेंगे। शाम को सांस्कृतिक आयोजन में भी शामिल होंगे। इसके बाद वे वाराणसी के लिए रवाना होंगे। मेले में वाटर एटीएम दे रहा है फ्री आरओ पानी यूपी जल निगम ने मेला क्षेत्र में 200 वाटर एटीएम लगाए हैं। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं को फ्री आरओ पानी मिल रहा है। प्रतिदिन 12 से 15 हजार लीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि मेला प्रशासन ने पहले इसके लिए एक रुपये का शुल्क लगाया था, पर अब यह पूरी तरह मुफ्त है। वाटर एटीएम पर ऑपरेटर बैठते हैं, जो श्रद्धालुओं के कहने पर बटन दबाकर शुद्ध जल उपलब्ध करा रहे हैं। इनकी सेंसर के माध्यम से निगरानी भी होती है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को डेढ़ करोड़ ने किए हस्ताक्षर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और मंदिर के भव्य निर्माण को लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास की ओर से मेले में चल रहे अभियान में डेढ़ करोड़ लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। एक फरवरी को सेक्टर-16 स्थित जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी राजेश्वर माऊली के पंडाल में महासंवाद होगा। इसमें आगे के आंदोलन की आधारशिला रखी जाएगी। अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की मूल जन्मस्थली (वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद) को मुक्त कराने के लिए अभियान की शुरुआत जन्मभूमि के मुख्य द्वार से की गई थी। इसमें अब तक डेढ़ करोड़ लोगों ने हस्ताक्षर कर आंदोलन को समर्थन दिया है। साधु-महात्मा, महामंडलेश्वर, जगद्गुरु और शंकराचार्य महासंवाद में शामिल होंगे।  

इंवेस्टर्स समिट में एमपी का जायका चख मेहमानों के मुंह में आ जाएगा पानी , दिल्ली-मुंबई से बुलाए जा रहे मसाले

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 24 और 25 फरवरी को होने जा रहे इंवेस्टर्स समिट में देश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों को बुलाया गया है. इसमें रिलायंस समूह के मुकेश अंबानी, अदाणी समूह के गौतम अडानी सहित कई बड़े उद्योगपति के अलावा विदेशी कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. समिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी होंगे. उधर समिट में आने वाले देशी-विदेशी मेहमानों को प्रदेश के अलग-अलग अंचलों के फूड से लुभाया जाएगा. इसके लिए एमपी टूरिज्म द्वारा खाने का मेन्यू तैयार कराया जा रहा है. देश-विदेश के मेहमानों को मालवा के दाल पानिये, मटर मोगरी की सब्जी परोसी जाएगी. वहीं बुंदेखंड के बरा और चंबल के बफोरी भी मेन्यु में शामिल किए जा रहे हैं. स्थानीय खानों के अलावा कॉन्टिनेंटल, चाइनीज फूड भी होंगे. 50 से ज्यादा व्यंजन परोसे जाएंगे ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में उद्योगपतियों के साथ मध्य प्रदेश में निवेश की संभावनाओं के साथ मध्य प्रदेश के आथित्य और अलग-अलग क्षेत्र के स्वाद से भी रू-ब-रू कराया जाएगा. समिट में देश के नामचीन उद्योगपतियों के अलावा दूसरे देशों की बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. समिट में करीबन 5 हजार निवेशकों और कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. इन मेहमानों के सामने मध्य प्रदेश के संस्कृति और खान-पान की ब्रांडिंग भी की जाएगी. इसके लिए मेहमानों के सामने 50 से ज्यादा व्यंजन परोसे जाएंगे. एमपी की खास डिश होगी सर्व इनमें मध्य प्रदेश की अलग-अलग क्षेत्रों की डिसेस को परोसा जाएगा. इसमें इंडियन और इंटरनेशनल फूड के अलावा स्थानीय डिसेस भी होंगी. इनके हिसाब से अलग-अलग फूड जोन बनाए जाएंगे. दाल बाफले, दाल पानिए परोसे जाएंगे देशी-विदेशी मेहमानों को मालवा क्षेत्र के प्रसिद्ध दाल बाफले परोसे जाएंगे. इसके अलावा दाल पानिये, आमड़ी की भाजी और मटर मोगरी की सब्जी परोसी जाएगी. बुंदेलखंड क्षेत्र के बरा, गक्कड़-भर्ता, चंबल का बफोरी के अलावा मिलेट्स की रोटी और मिलेट्स के स्वीट्स परोसे जाएंगे. मेन्यु में मध्य प्रदेश के अलग-अलग अंचलों के एक-एक स्पेशल व्यंजन को शामिल किया जाएगा. फूड जोन में व्यंजनों के साथ उनकी खासियत और क्षेत्र के नामों को प्रदर्शित किया जाएगा. दिल्ली-मुंबई से बुलाए जा रहे मसाले पर्यटन विकास निगम के कॉर्पोरेट शेफ सिद्धार्थ वीरेन्द्र बताते हैं कि “मेन्यू में विदेश से आने वाले मेहमानों के स्वाद का विशेष ख्याल रखा जाएगा. हमारी कोशिश है कि यहां आने वाले सभी मेहमान सभी डिसेस का स्वाद लेकर जाएं. व्यंजनों में स्थानीय के साथ इंडियन और इंटरनेशनल फूड को भी शामिल किया जाएगा. कई डिसेज के लिए मुंबई और पुणे से स्पेशल मसालों को बुलाया जा रहा है. इसमें स्नोपी, बूसल, स्प्राट खासतौर से बुलाए जा रहे हैं. इसके अलावा पांच अलग-अलग तरह की सलाद, 5 अलग-अलग डेजर्ट, तीन तरह से सूप और सादा रोटी के अलावा मिलेट्स तक की रोटी मिलेंगी.” मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के सीजीएम अमन मिश्रा बताते हैं कि “मेन्यू इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि मेहमानों को स्थानीय स्वाद से लेकर इंटरनेशनल डिसेज शामिल हों.” एमपी के स्वाद से सजेगा जीआईएस का मेन्यू ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के लिए ऐसा मेन्यू तैयार किया जा रहा है, जिससे मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और खानपान विरासत की ब्रांडिंग भी हो। मेन्यू को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की खास डिशेस के आधार पर तैयार किया जा रहा है। इसमें मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड और बघेलखंड की पारंपरिक और लोकप्रिय डिशेस शामिल होंगी। कुल 50 तरह के व्यंजन परोसे जाएंगे, जिनमें इंडियन, कॉन्टिनेंटल और चाइनीज जैसे इंटरनेशनल फूड भी रहेंगे। इस खास मेन्यू का उद्देश्य विदेशी और भारतीय मेहमानों को एमपी के स्वाद और व्यंजनों से रूबरू कराना है, ताकि राज्य की खानपान संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान मिले। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मेहमानों के लिए खास मेन्यू ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) में 25 देशों के करीब 1000 प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। इसे देखते हुए एमपी टूरिज्म बोर्ड मेहमानों के लिए लोकल, इंडियन और इंटरनेशनल फूड का खास मेन्यू तैयार कर रहा है। इसमें मध्य प्रदेश के पांचों प्रमुख क्षेत्रों – मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, बघेलखंड और महाकौशल की विशेष व्यंजन शामिल किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विदेश यात्राओं के बाद सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि विदेशी मेहमानों को एमपी के पारंपरिक स्वाद का अनुभव कराया जाए। इसके लिए बोर्ड के अधिकारी लोकल फ्लेवर के साथ पनीर और अन्य कॉमन डिशेस को भी शामिल कर रहे हैं। मप्र पर्यटन विकास निगम के कॉर्पोरेट शेफ सिद्धार्थ बीरेंद्र के मुताबिक, मेन्यू को विदेशी मेहमानों की पसंद के हिसाब से तैयार किया जा रहा है, ताकि हर अतिथि एमपी के स्वाद का आनंद लेकर जाए। समिट के लिए खास मसाले भी होंगे इस्तेमाल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के मेन्यू को खास बनाने के लिए कई मसाले और सामग्री मुंबई और पुणे से मंगाई जा रही हैं। कुछ डिशेज में स्नोपी और बूसल स्प्राउट्स जैसे खास इंग्रीडिएंट्स का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, इंटरनेशनल फूड्स के लिए कुछ आवश्यक सामग्री और मसाले विदेशों से भी आयात किए जा सकते हैं, ताकि हर व्यंजन का स्वाद और गुणवत्ता बरकरार रहे। एमपी टूरिज्म बोर्ड इस आयोजन को यादगार बनाने के लिए हर स्तर पर तैयारी कर रहा है।

प्रदेश में तीन जिलों की फोरलेन सड़क को क्रॉस करेगी नई रेल लाइन, साल 2025 पूरा हो जाएगा काम

भोपाल  ब्यावरा जिले के महत्वपूर्ण भोपाल-रामगंजमंडी रेल लाइन का काम अलग-अलग हिस्सों में भोपाल, सीहोर और राजगढ़ जिले में चल रहा है।ब्यावरा में देवास-ब्यावरा फोरलेन के ऊपर से होकर नई रेल लाइन गुजरेगी तो जयपुर-जबलपुर नेशनल हाइवे राजगढ़ रोड पर सड़क के नीचे से ट्रेन गुजरेगी। दरअसल, दोनों ही जगह काम चालू है। यहां ट्रैक को तैयार करने आसपास पटरियां बिछाई जा रही हैं और ओवरब्रिज के लिए सड़क के दोनों और पिलर खड़े कर दिए हैं।  वहीं, राजगढ़ रोड का उक्त हिस्से का ट्रैफिक डायवर्ट कर रोड को खोदना शुरू कर दिया है, जिसके बाद बड़ा ब्रिज बनेगा और नीचे से ट्रेन गुजरेगी। इसके अलावा अलग-अलग हिस्सों में रेलवे का काम चल रहा है। हालांकि जमीन से जुड़े मामलों को लेकर नरसिंहगढ़ ब्लॉक में कुछ अड़चने हैं, जिन्हें प्रशासन दूर नहीं कर पा रहा है। जमीनी स्तर पर उनका काम जारी है लेकिन निराकरण नहीं हो पाने से रेलवे काम नहीं कर पा रही। पूरे प्रोजेक्ट को यूं समझें एक नजर में भोपाल मंडल निशातपुरा डी-संत हिरदाराम नगर: करीब 10 माह पूर्व यह 10 किमी का ट्रैक तैयार हो चुका है। सीआरएस निरीक्षण हो चुका है। अब यहां से ट्रेन चालू होगी। संत हिरदाराम नगर- झरखेड़ा: यह ट्रैक भी लगभग तैयार है। खिलचीपुर में होने वाले सीआरएस निरीक्षण के साथ ही यहां भी फरवरी के आखिर में निरीक्षण का अनुमान है। राजगढ़ जिला कुरावर-नरसिंहगढ़: जमीन के मामले अटके होने से यहां काम सुस्त है। तुर्कीपुरा और बड़ोदिया तालाब के ग्रामीणों का प्रकरण कोर्ट में है। प्रशासन हल नहीं निकाल पा रहा। ब्यावरा-राजगढ़: स्टेशन बनने के साथ ही नेवच नदी पर ब्रिज बन रहा है। रास्ते में हाइवे को खोदकर नीचे से ट्रैक निकालने का काम किया जा रहा है। खिलचीपुर-नयागांव: पटरियां लगभग बिछाई जा चुकी हैं, फरवरी के आखिर तक इस वाले ट्रैक पर सीआरएस निरीक्षण की उम्मीद जताई जा रही है। कोटा मंडल झालावाड जिला घाटोली-झालावाड़: यह ट्रैक पूरी तरह से तैयार है। यहां ट्रेन चालू है। पैसेंजर गाडिय़ां आने लगी हैं। अब मप्र के नयापुरा तक का ट्रैक तैयार किया जा रहा है। जिले में यहां-यहां रोड क्रॉस करेगी रेल लाइन खिलचीपुर से चलकर जीरापुर रोड को क्रॉस कर राजगढ़ पहुंचेगी। यहां जयपुर-जबलपुर नेशनल हाइवे को क्रॉस कर ब्यावरा पहुंचेंगे। यहां से पड़ोनिया बायपास होकर देवास-गुना फोरलेन को क्रॉस करते हुए भोपाल की और जाएगी। नरसिंहगढ़ में फिर भोपाल-ब्यावरा फोरलेन को क्रॉस कर कुरावर पहुंचेगी। यहां से श्यामपुर जाएगी और फिर वहां दोबारा भोपाल-ब्यावरा फोरलेन को क्रॉस कर झरखेड़ा स्टेशन के लिए निकलेगी। तेजी से चल रहा है काम निशातपुरा से संत हिरदाराम नगर का ट्रैक तैयार है। अब झरखेड़ा वाला तैयार होगा। मप्र की सीमा में विभिन्न जगह काम चल रहे हैं। जमीनों के कुछ मामले शेष हैं। फिलहाल दिसंबर 2025 की डेडलाइन तय है। -हर्षित श्रीवास्तव, सीपीआरओ, पश्चिम मध्य रेल, जबलपुर काम में तेजी आई है, ज्यादा अड़चनें नहीं हैं। बजट को लेकर भी समस्या नहीं है। डेड लाइन की जहां तक बात है तो जल्द से जल्द ट्रैक तैयार करने पर फोकस है। जमीन के प्रकरणों के लिए प्रशासन से बात की है। -रोडमल नागर, सांसद, राजगढ़

पॉवर ट्रांसफार्मर से भोपाल के चौकसे नगर, शारदा नगर, लाबाखेड़ा परेवा खेड़ा, जगदीशपुर बाईपास सहित अनेक गांव होंगे लाभान्वित

भोपाल मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के क्षेत्रांतर्गत भोपाल वृत्त के लाम्बाखेड़ा स्थित 33/11 केवी उपकेंद्र पर 5 एमवीए पॉवर ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि कर 8 एमवीए नवीन पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) योजना के तहत इस पॉवर ट्रांसफार्मर की स्थापना से चौकसे नगर, शारदा नगर, लाम्बाखेड़ा परेवाखेड़ा, जगदीशपुर बायपास, देवल खेड़ी, बिशन खेड़ी, अरवलिया, परवलिया सानी, श्यामपुर आदि ग्रामों के उपभोक्ताओं को निर्बाध तथा गुणवत्तापूर्ण सतत बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल ने कहा है कि कंपनी कार्यक्षेत्र के अंतर्गत सभी श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कंपनी कृत संकल्पित है। उन्होंने बताया कि ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि से एक ओर जहॉं विद्युत वितरण प्रणाली मजबूत होगी वहीं दूसरी ओर विद्युत हानियां कम होकर प्रणाली की क्षमता वृद्धि से उपभोक्ताओं को पर्याप्त वोल्टेज पर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी।  

आज से नए नियम होंगे लागू, UPI ट्रांजेक्शन से लेकर LPG दाम में होंगे ये बड़े बदलाव

नई दिल्ली देश में आज केंद्रीय आम बजट होगा पेश, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में प्रस्तुत करेंगी। बजट को लेकर आम जनता और उद्योग जगत की नजरें टिकी हुई हैं, लेकिन इसके साथ ही कुछ अहम बदलाव भी आज से लागू हो रहे हैं, जो हर घर और जेब पर असर डाल सकते हैं।   1. एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव हर महीने की पहली तारीख को ऑयल मार्केटिंग कंपनियां एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों की समीक्षा करती हैं। बीते कुछ महीनों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कई बदलाव हुए हैं, जबकि 14 किलोग्राम घरेलू गैस सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए हैं। 1 फरवरी को नई दरें जारी होने की उम्मीद है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है या फिर कीमतों में बढ़ोतरी संभव हो सकती है। 2. एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में संशोधन महाकुंभ 2025 के चलते प्रयागराज जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण हवाई किराए में उछाल देखा गया, जिसके बाद सरकार और DGCA को हस्तक्षेप करना पड़ा। 1 फरवरी से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हवाई ईंधन (ATF) के दामों में संशोधन करेंगी। बीते महीनों में ATF की कीमतों में कटौती की गई थी, और इस बार भी ऐसी उम्मीद जताई जा रही है। यदि दाम घटते हैं तो हवाई यात्रा करना सस्ता हो सकता है, लेकिन बढ़ोतरी हुई तो यात्रियों की जेब पर असर पड़ेगा। 3. UPI ट्रांजेक्शन के नियमों में बदलाव यूपीआई पेमेंट से जुड़ा एक नया नियम 1 फरवरी से लागू होने जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई ट्रांजैक्शन आईडी को स्टैंडर्डाइज्ड करने का फैसला लिया है। अब केवल अल्फान्यूमेरिक कैरेक्टर्स वाली आईडी से ही ट्रांजैक्शन होंगे। यदि किसी ऐप की ट्रांजैक्शन आईडी में स्पेशल कैरेक्टर्स होंगे, तो वह पेमेंट अमान्य कर दी जाएगी। इस बदलाव का असर Paytm, PhonePe, Google Pay सहित अन्य यूपीआई ऐप के उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा। 4. मारुति सुजुकी की कारें होंगी महंगी देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने 1 फरवरी से अपनी कई कारों के दाम बढ़ाने की घोषणा की है। कंपनी ने लागत बढ़ने के कारण कुछ मॉडल्स की कीमतों में 32,500 रुपये तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। इसमें ऑल्टो K10, एस-प्रेसो, सेलेरियो, वैगन आर, स्विफ्ट, डिजायर, ब्रेजा, अर्टिगा, इग्निस, बलेनो, सियाज, XL6, फ्रोंक्स, इनविक्टो, जिम्नी और ग्रैंड विटारा शामिल हैं। अगर आप नई कार खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो इस बदलाव को ध्यान में रखना जरूरी है। 5. बैंकिंग नियमों में बदलाव कोटक महिंद्रा बैंक ने 1 फरवरी 2025 से अपने बैंकिंग नियमों में बदलाव करने की घोषणा की है। इसके तहत एटीएम ट्रांजेक्शन की फ्री लिमिट में कटौती की जा सकती है और कुछ अन्य सेवाओं पर शुल्क बढ़ाए जाने की संभावना है। यदि आप कोटक महिंद्रा बैंक के ग्राहक हैं, तो इन नए बदलावों का सीधा असर आपके बैंकिंग खर्चों पर पड़ेगा। निष्कर्ष: आज से देश में न सिर्फ बजट पेश होगा, बल्कि कई अहम बदलाव भी लागू हो रहे हैं। इनमें गैस सिलेंडर की कीमतें, हवाई ईंधन दरें, यूपीआई नियम, कारों के दाम और बैंकिंग सेवाओं में संशोधन शामिल हैं। इन बदलावों का असर हर व्यक्ति की जेब पर पड़ेगा, इसलिए पहले से तैयारी करना फायदेमंद रहेगा।  

सेंट्रल इंडिया में 1100 करोड़ की लागत से बन रहे पार्क को वर्ष 2026 अंत तक पूरा कर लिया जायेगा

इंदौर  धार और पीथमपुर(Pithampur) में करीब 255 एकड़ में सेंट्रल इंडिया के सबसे बड़े व प्रदेश के पहले मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क बनाने की राह में सभी बाधाएं हट गई हैं। अब तेजी से विकास कार्य चल रहे हैं। करीब 1100 करोड़ की लागत से बन रहे पार्क को वर्ष 2026 अंत तक पूरा कर ऑपरेशन शुरू करने का दावा है। लॉजिस्टिक पार्क शुरू होनेे से पीथमपुर व आसपास के उद्योगों को अपने उत्पाद भेजने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। ट्रांसपोर्टेशन कास्ट में करीब 30 प्रतिशत कमी करने का दावा भी किया जा रहा है। इसके बाद रतलाम व उज्जैन में लॉजिस्टिक पार्क बनेगा, जिसके लिए सर्वे शुरू हो गया है। देश के पांच स्थानों पर मल्टी मॉड लॉजिस्टिक पार्क(Multi Modal Logistics Park ) बनाने की घोषणा सालों पहले हुई थी, लेकिन जमीन के अधिग्रहण में आ रहे पेंच से पीथमपुर का पार्क अन्य शहरों से काफी पिछड़ गया था। बेंगलूरु, चेन्नई, गुवाहाटी और नागपुर में पार्क बनाने का काम चल रहा है। यह पार्क एमपीआइडीसी और एनएचएआइ मिलकर बना रहे हैं, वहीं निर्माण एजेंसी भी तय हो गई है। पीथमपुर के ग्राम सागौर, खेड़ा, जामोदी और अकोलिया की करीब 255 एकड़ जमीन पर यह पार्क बन रहा है। इसमें करीब 1100 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। 2 हजार से ज्यादा उद्योगों को मिल सकेगा फायदा सांसद शंकर लालवानी के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण के बाद पार्क निर्माण शुरू कर दिया है। पीथमपुर व आसपास के इलाके में करीब 2 हजार उद्योग हैं। कई एक्सपोर्ट करते हैं। पोर्ट तक ले जाने में परिवहन में परेशानी होती थी। केंद्र सरकार की भारत माला योजना के तहत यहां पार्क बनाया जा रहा है। यहां से सड़क, रेल व हवाई मार्ग से उत्पादनों को गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। पास ही टीही स्टेशन है, जहां से पार्क तक रेल लाइन डाली जाएगी, एयर कार्गो से भी सामान भेजने में आसानी होगी। 8-10 रुपए किमी तक लाने की तैयारी विशेषज्ञों के मुताबिक, अभी उद्योगों को सबसे ज्यादा खर्च ट्रांसपोर्टेशन पर करना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 7 रुपए प्रति किलोमीटर का औसतन खर्च परिवहन पर आता है, लेकिन यहां पर यह करीब 14 रुपए प्रति किलोमीटर पड़ रहा है, जिससे उद्योग परेशान हैं। अफसरों का दावा है कि मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क(Multi Modal Logistics Park ) बनने से यह खर्च 8 से 10 रुपए प्रति किलोमीटर अथवा उससे कम हो जाएगा और उद्योगों को अच्छा फायदा होगा। टीही के करीब, एयर कार्गो का मिलेगा लाभ एमपीआइडीसी के कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर के मुताबिक, कंपनी बैसिक डेवलपमेंट का काम कर रही है। यहां आधुनिक मशीनों से लोडिंग, अनलोडिंग की व्यवस्था रहेगी। कस्टम, कंटेनर डिपो आदि सुविधा रहेगी, जिससे उत्पादों का एक्सपोर्ट आसानी से हो पाएगा। वर्ष 2026 के अंत तक पहला चरण पूरा कर ऑपरेशन शुरू किया जाएगा। अभी उद्योगों को अपना माल मुंबई आदि पोर्ट से एक्सपोर्ट के लिए भेजना पड़ता है, लेकिन अब वह सीधे पीथमपुर से हो जाएगा और उन्हें बड़ी सुविधा मिलेगी। रतलाम में मिली मंजूरी, उज्जैन में सर्वे अफसरों ने बताया कि केंद्र सरकार की योजना के तहत मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस-वे बन रहा है। यह एक्सप्रेस-वे रतलाम से गुजर रहा है। रतलाम एक्सप्रेस-वे के पास लॉजिस्टिक पार्क बनाने को मंजूरी हो गई है। साथ ही एक लॉजिस्टिक पार्क(Multi Modal Logistics Park ) उज्जैन में बनेगा। एमपीआइडीसी के राजेश राठौर के मुताबिक, उज्जैन के लॉजिस्टिक पार्क के लिए सर्वे भी शुरू कर दिया गया है। जल्द ही परिणाम दिखेंगे।

भोपाल में अंबानी-अडाणी समेत देश-विदेश के उद्योगपतियों का लगेगा जमावड़ा, चकाचक होंगी राजधानी की सड़कें

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 24 और 25 फरवरी 2025 को ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (GIS) का आयोजन होगा. राजधानी भोपाल में आयोजित होने वाली दो दिवसीय ग्लोबल समित के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं. इसके लिए शहर को संवारने और सड़कों के रिपेयरिंग काम शुरू हो गया है. ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में देश विदेश से करीब 20 हजार मेहमान आएंगे. इसके लिए अंबानी, अडाणी, महिंद्रा, टाटा समेत देश के तमाम बड़े उद्योगपतियों को आमंत्रित किया जाएगा. इन प्रमुख उद्योगपतियों को किया जाएगा आमंत्रित राजधानी भोपाल में 24-25 फरवरी को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आठवां संस्करण आयोजित होगा. इस समिट का मुख्य उद्देश्य  माहौल और औद्योगिक ढांचे को दिखाना जो साझेदारी के लिए असीमित अवसर प्रदान करना है. इस ग्लोबल समित के लिए जिन प्रमुख उद्योगपतियों को आमंत्रित किया जाएगा,  उनमें मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, एन. चंद्रशेखरन, नोएल एन. टाटा, आनंदजी महिंद्रा, जमशेद एन. गोदरेज, संजीव पुरी, संजीव बजाज, सतीश रेड्‌डी, नादिर गोदरेज, पवन मुंजाल, एसएन सुब्रह्मण्यम, रिशद प्रेमजी, अजीज प्रेमजी, सलिल एस. पारेख, दिलीप संघवी, वेणु श्रीनिवासन, सुनील भारत मित्तल, बाबा एन. कल्याणी, उदय कोटक शामिल हैं इन सड़कों की होगी रिपेयरिंग देश विदेश से आने वाले प्रमुख उद्योगपति जिन रास्तों से गुजरेंगे, उन्हें 45 करोड़ रुपए में संवारा जा रहा है. राजधानी भोपाल को संवारने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंप दी गई है. जिला कलेक्टर की निगरानी में भोपाल नगर निगम सौंदर्यीकरण, सड़कों की रिपेयरिंग कराएगा. वहीं, पीडब्ल्यूडी विभाग ने भी 26 सड़कों की लिस्ट बना ली है. जिन पर  15 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. राजधानी की जिन 26 सड़कों को संवारा जाएगा, उसमें  एयरपोर्ट रोड, लिंक रोड नंबर-1, 2 और 3, वीआईपी रोड, एमपी नगर, वन विहार, रोशनपुरा, रंगमहल, श्यामला हिल्स जैसे प्रमुख सड़कें भी शामिल हैं. ‘एक जिला, एक उत्पाद’ की लगेगी प्रदर्शनी इस समिट में ‘एक जिला, एक उत्पाद’ प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें हर जिले की खासियत को उजागर किया जाएगा। खासकर, मध्य प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए इसे जनजातीय थीम पर सजाया जाएगा। जापान होगा कंट्री पार्टनर इस बार की समिट में जापान कंट्री पार्टनर होगा, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूती मिलेगी। जापानी निवेशकों के अलावा अन्य देशों के भी निवेशक इस समिट में भाग लेंगे। मध्य प्रदेश सरकार इस मौके को भुनाने के लिए 21 नई नीतियों पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी होंगे शामिल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समिट में 24 फरवरी को शामिल होंगे। यह पहली बार है जब भोपाल में इतनी भव्य इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की जा रही है। सीएम यादव ने कहा कि इस आयोजन से मध्य प्रदेश को नई पहचान मिलेगी और यह निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरेगा। समिट में शामिल होंगे ये उद्योगपति इस समिट के कई उद्योगपतियों जैसे मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, एन. चंद्रशेखरन, नोएल एन. टाटा, आनंदजी महिंद्रा, जमशेद एन. गोदरेज, संजीव पुरी, संजीव बजाज, सतीश रेड्‌डी, नादिर गोदरेज, पवन मुंजाल, एसएन सुब्रह्मण्यम, रिशद प्रेमजी, अजीज प्रेमजी, सलिल एस. पारेख, दिलीप संघवी, वेणु श्रीनिवासन, सुनील भारत मित्तल, बाबा एन. कल्याणी, उदय कोटक को इस समिट में आने और मध्य प्रदेश में निवेश करने के लिए निमंत्रण दिया गया है। भोपाल में विशेष इंतजाम भोपाल को इस समिट के लिए एक आदर्श स्थल बनाने के लिए प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। शहर के प्रमुख होटलों, गेस्ट हाउसों, और एयरपोर्ट पर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। चार्टर्ड प्लेन के लिए अलग व्यवस्था की गई है ताकि निवेशकों और वीआईपी मेहमानों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। इस आयोजन की तैयारियों पर मुख्य सचिव अनुराग जैन और भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह विशेष ध्यान दे रहे हैं। इस थीम पर होगी समिट समिट को जनजातीय थीम पर सजाया जाएगा। सभी मेहमानों को प्रदेश की जनजातियों के व्यंजन खिलाए जाएंगे। इसके अलावा उन्हें भीमभेटका, भोजपुर जैसे पर्यटन स्थल की भी सैर कराई जाएगी। निवेश और विकास को मिलेगा बढ़ावा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 मध्य प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगी। इस आयोजन से नए उद्योगों की स्थापना, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और राज्य की औद्योगिक छवि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की उम्मीद है। यह समिट मध्य प्रदेश को निवेश के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी।

मोदी सरकार की योजना 3 करोड़ महिलाएं बनेंगी ‘लखपति दीदी’, जानिए क्या है; कैसे उठा सकते हैं इसका लाभ?

नईदिल्ली लखपति दीदी योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई है. इसके जरिए सरकार महिलाओं को फाइनेंशियली सपोर्ट करती है. सरकार की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाने की योजना में बिना ब्याज के लाखों रुपये का लोन दिया जाता है. ये योजना सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी है. इस ग्रुप में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं. सेल्फ हेल्प ग्रुपों में बैंक वाली दीदी, आंगनबाड़ी दीदी, दवाई वाली दीदी शामिल हैं. लखपति दीदी योजना एक स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम है. इसके जरिए देश की सभी दीदियों को स्किल ट्रेनिंग दी जाती है. ताकी वो खुद पैसे कमा सकें. लखपति दीदी योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई है। इस योजना के तहत सरकार महिलाओं को आर्थिक मदद देती है। योजना के जरिए 3 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें बिना ब्याज के लाखों रुपये का लोन दिया जाता है। यह योजना सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी है। जिसमें बैंक वाली दीदी, आंगनबाड़ी दीदी और दवाई वाली दीदी जैसी महिलाएं शामिल हैं। लखपति दीदी योजना क्या है? यह एक स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम है। जिसमें महिलाओं को तरह-तरह की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वे खुद कमाई कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। योजना की शुरुआत लखपति दीदी योजना 15 अगस्त 2023 को शुरू की गई थी। इसका मकसद देश की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए प्रेरित करना है। योजना के लिए जरूरी शर्तें 1. योजना का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं को मिलेगा, जिनके परिवार में कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं है। यदि वेरिफिकेशन के दौरान परिवार में कोई सरकारी नौकरी करता पाया गया, तो योजना का फायदा नहीं मिलेगा। 2. यह योजना केवल उन महिलाओं के लिए है जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपये या उससे कम है। यदि परिवार की आय 3 लाख से ज्यादा है, तो वे इस योजना का लाभ नहीं ले सकतीं। आवेदन कैसे करें? 1. योजना में शामिल होने के लिए महिलाओं को पहले सेल्फ हेल्प ग्रुप के माध्यम से एक बिजनेस प्लान बनाना होगा। 2. यह प्लान सरकार को भेजा जाएगा, जहां अधिकारी इसकी समीक्षा करेंगे। 3. अगर आवेदन स्वीकार कर लिया जाता है, तो महिलाओं को योजना का लाभ मिलेगा और 5 लाख रुपये तक का लोन दिया जाएगा। इन दो शर्तों को करना होगा पूरा लखपति दीदी योजना के लिए अप्लाई करने के लिए महिलाओं के लिए कुछ टर्म्स और कंडीशन भी दी गई हैं. इस योजना में जो सबसे जरूरी शर्त है कि कोई भी महिला अगर इस योजना के लिए अप्लाई करती है तो उसके परिवार में कोई भी सरकारी नौकरी करने वाला सदस्य नहीं होना चाहिए. अगर उस महिला के घर में वेरिफिकेशन के दौरान कोई भी सदस्य सरकरी नौकरी वाला मिलता है तो उसे इस स्कीम का फायदा नहीं मिलेगा. इसके अलावा इस योजना के लिए केवल वही महिला अप्लाई कर सकती है जिसकी फैमिली ईयरली इनकम 3 लाख रुपये या उससे कम है. 3 लाख रुपये से ज्यादा ईयरली इनकम वाली महिलाएं योजना का हिस्सा नहीं बन सकती हैं. ऐसे करें अप्लाई लखपति दीदी योजना में अप्लाई करने के लिए महिलाओं को एक सेल्फ हेल्प ग्रुप के जरिए बिजनेस प्लान तैयार करना होगा. जब उनका बिजनेस प्लान बन जाएगा तो उस प्लान को सरकार को भेजा जाएगा. इसके बाद सरकार के अधिकारी एप्लीकेशन को अच्छी तरह से रिव्यू करेंगे. अगर एप्लीकेशन एक्सेप्ट हो जाता है तो योजना का बेनिफिट दिया जाएगा. इसके साथ 5 लाख रुपये तक का लोन भी दिया जाएगा. क्या है पात्रता? अगर आप भी लखपति दीदी बनना चाहता हैं और योजना का फायदा उठाना चाहती हैं, तो पहले जान लें कि इसके लिए एलिजिबिलीटी क्या होगी। योजना का फायदा वहीं महिलाएं उठा सकती हैं, जो प्रदेश की स्थाई नागरिक हो। इसके अलावा महिला की उम्र 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए। वहीं, महिला की वार्षिक आय 3 लाख रुपए से कम होनी चाहिए। इसके साथ ही उस महिला को स्वयं सहायता समूह से जुड़ी होनी चाहिए। जरूरी दस्तावेज योजना का लाभ पाने के लिए कई तरह के दस्तावेजों की जरूरत होगी। इसके लिए आधार कार्ड राशन कार्ड बैंक खाता पासबुक, स्वयं सहायता समूह का प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर, इमेल आईडी और पासपोर्ट साइज फोटो की जरूरत होगी। योजना के तहत स्‍वयं सहायता समूहों से जुड़ी उन महिलाओं को चुना जाता है, जिनकी सालाना आमदनी कम होती है। इसके बाद उन्‍हें 1-5 लाख रुपये तक का ब्‍याजमुक्‍त कर्ज दिया जाता है। ऐसे करें आवेदन इसके लिए आपको स्वयं सहायता के कार्यालय जाना होगा। यहां आपकी एप्लीकेशन और बिजनेस प्लान तैयार होगा। दस्तावेजों के साथ एप्लीकेशन और बिजनेस प्लान स्वयं सहायता कार्यालय में जमा कर दें। यहां आपकी एप्लीकेशन रिव्यू होगी और फिर इसे आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार रिव्यू करेगी। अप्रूव होने के बाद लोन के लिए कॉन्ट्रेक्ट किया जाएगा। आप चाहें तो ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं।    

मध्यप्रदेश सरकार हर माह पेंशन ले रहे साढ़े 5 लाख पेंशनर्स की तलाश में जुटी, अब तक इनका वैरीफिकेशन नहीं हो सका

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार हर माह पेंशन ले रहे साढ़े 5 लाख पेंशनर्स की तलाश करने में जुटी है. दरअसल, इन पेंशनर्स के खातों में हर माह पेंशन की राशि तो पहुंच रही है, लेकिन अब तक इनका वैरीफिकेशन नहीं हो सका है. जबकि वैरीफिकेशन का काम तीन स्तर पर किया जा चुका है. अब राज्य सरकार पेंशन ले रहे इन हितग्राहियों की घर-घर जाकर खोजने का अभियान शुरू किया है. यह अभियान 15 फरवरी तक चलेगा. इसमें यदि हितग्राही नहीं मिले तो अब इनके खातों को बंद करा दिया जाएगा. अभी प्रदेश के 5 जिलों में चलाया जा रहा अभियान सामाजिक न्याय विभाग द्वारा वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत 6 सौ रुपए हर माह आर्थिक मदद दी जाती है. प्रदेश में 56.5 लाख बुजुर्गों को इस योजना के तहत आर्थिक लाभ दिया जाता है. राज्य सरकार द्वारा इन बुजुर्ग हितग्राहियों के वैरीफिकेशन की प्रक्रिया की जा रही है. सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा पेंशन हितग्राहियों का समग्र पोर्टल पर सत्यापन किया गया. इसके बाद आधार नंबर से नाम, आयु और पता अपडेट कराया गया है. 15 फरवरी तक तक सरकार चलाएगी अभियान इसके बाद प्रदेश के करीबन 5 लाख पेंशनर्स अपात्र हो गए. इसके बाद सभी हितग्राहियों को आयु की पुष्टि और अन्य दस्तावेज के साथ आवेदन करने के लिए कहा गया था, लेकिन इन हितग्राहियों का इसके बाद से सत्यापन ही नहीं हो पा रहा है. इधर, अब विभाग ने 15 फरवरी तक गायब सभी पेंशनधारियों का सत्यापन करने का अभियान चलाया है. गायब अधिकांश हितग्राही नीमच, सिवनी, अलीराजपुर, अनूपपुर और बालाघाट जैसे आदिवासी जिलों के हैं. इसको देखते हुए विभाग द्वारा अब घर घर जाकर इन्हें खोजने का अभियान शुरू किया है. इसके लिए अधिकारियों की टीम बनाकर भेजी गई है. वैरीफिकेशन न होने पर बंद होगी पेंशन फिजीकल वैरीकिकेशन के लिए 15 फरवरी तक की समयसीमा निर्धारित की गई है. इसके बाद भी ऐसे हितग्राही न मिलने पर उनके खातों में पेंशन की राशि पहुंचना बंद हो जाएगी. इधर सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा का कहना है “पेंशनर्स का वैरीफिकेशन कराना एक सामान्य प्रक्रिया है. अपात्र को पेंशन देने का प्रावधान नहीं है, इसलिए समय-समय पर हितग्राहियों का वैरीफिकेशन कराया जाता है. यदि वैरीफिकेशन में कोई समस्या आ रही है तो ऐसे हितग्राहियों से संपर्क कर उनका वैरीफिकेशन कराया जाएगा.”

प्रदेश में बिछेगा सड़कों का जाल, NH के लिए नितिन गड़करी ने दी 414 करोड़ रुपए की सौगात

भोपाल  मध्यप्रदेश के विकास को गति प्रदान करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 414 करोड़ 84 लाख रुपए मंजूर किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और उन्नयन के लिए दी गई स्वीकृति के लिए आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माना आभार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस स्वीकृति से सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन के महत्वपूर्ण कार्य होंगे। निश्चित ही शिवपुरी और अशोक नगर के साथ अन्य जिलों को भी इसका लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और नागरिकों को सुगम यातायात सुविधा मिल जाएगी। 414 करोड़ 84 लाख रुपए की दी स्वीकृति उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश के शिवपुरी और अशोक नगर जिलों में चंदेरी, बामोर कलां, अचरोनी और चंदेरी लिंक बायपास सहित राष्ट्रीय राजमार्ग-346 के खंड (कुल लंबाई 55.80 किमी) चंदेरी-पिछोर रोड के पेव्ड शोल्डर के साथ 2-लेन के उन्नयन और निर्माण के लिए 414 करोड़ 84 लाख रुपए की स्वीकृति दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-346 (कुल लंबाई 334.55 किलोमीटर) झारखेड़ा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-46 आगरा के साथ अपने जंक्शन से शुरू होता है मुंबई रोजड जो बैरसिया (SH-23), विदिशा (NH-86 एक्सटेंशन), कुरवाई (SH-14), मुंगावली, चंदेरी, पिछोर को जोड़ता है और राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर दिनारा में समाप्त होता है। MP-UP Inter-State Connectivity होगी प्रस्तावित परियोजना का विस्तार प्रदेश के शिवपुरी और अशोक नगर जिलों से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में ऐतिहासिक चंदेरी किला और स्थानीय वस्त्र शिल्प कला केंद्र अशोक नगर जिले में स्थित हैं। यह खंड चंदेरी, गोधन, बुढ़ानपुर, बिजरावां, नया गांव, पिपरा अछरौनी, शिवपुरी, हीरापुर, नायगांव और सुजवाहा गांवों से होकर गुजरता है और उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश से अंतर्राज्यीय-कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करता है। पहले भी साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए हुए है मंजूर परियोजना के क्रियान्वयन से इस खंड पर यातायात सघनता कम होगी और सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा। उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के निर्माण और सुदृढ़ीकरण के लिए साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई और एक महत्वपूर्ण स्वीकृति भोपाल-कानपुर इकोनामिक कॉरीडोर को फोरलेन में अपग्रेड करने के लिए भी प्रदान की जा चुकी है।

कंसोटिया बने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव: तीन आईएएस की जिम्मेदारी बदली; मुखर्जी को बनाया राजस्व मंडल का अध्यक्ष

भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जापान दौर से लौटने से पहले तीन सीनियर आईएएस अफसरों की जिम्मेदारी में बदलाव किया गया है। जेएन कंसोटिया को गृह विभाग को अपर मुख्य सचिव बनाया है। वहीं दो दिन पहले एसीएस बनाए गए अनिरुद्ध मुखर्जी को राजस्व मंडल का अध्यक्ष बनाया गया है। राजस्व मंडल में प्रशासकीय सदस्य और प्रमुख सचिव सचिन सिन्हा को ग्वालियर से भोपाल लाया है। सिन्हा को प्रशासन अकादमी का महानिदेशक बनाया है। बता दें कि एसीएस एसएन मिश्रा शुक्रवार को रिटायर हो गए। जिसके बाद कंसोटिया की उनके पद पर नियुक्ति की गई। वे मोहन सरकार में करीब 1 साल बाद बड़े विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे। कंसोटिया अभी प्रशासन अकादमी के डीजी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। शमी को आवासीय आयुक्त नई दिल्ली का अति. प्रभार अनिरुद्ध मुखर्जी को दो दिन पहले एसीएस बनाकर आवासीय आयुक्त नई दिल्ली की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्हें लोक परिसंपत्ति विभाग का जिम्मा भी सौंपा था। अब उनके पास लोक परिसंपत्ति विभाग की जिम्मेदारी यथावत रखी है। वहीं आवासीय आयुक्त नई दिल्ली का अतिरिक्त प्रभार खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग की प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी को सौंपा गया है। परिवहन और जेल विभाग की जिम्मेदारी किसी को नहीं परिवहन और जेल विभाग की जिम्मेदारी अभी किसी को नहीं दी गई है। रिटायर एसीएस एसएन मिश्रा के पास गृह विभाग के एसीएस के साथ परिवहन और जेल विभाग का अतिरिक्त प्रभार था।

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