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नर्मदापुरम के गांव दे रहे 5 स्टार होटलों को टक्करम, होम स्टे में पर्यटक ग्रामीण जीवन का अनुभव कर सकेंगे

नर्मदापुरम  मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए एक्सपेरिमेंट किए जा रहे हैं. इसी के तहत प्रदेशभर में होमस्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे योजना से पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ रोजगार और ग्रामीण विकास पर सरकार का खासा फोकस है. सोमवार को नर्मदापुरम के मढ़ई पर्यटन स्थल के नजदीक बन रही 15 होमस्टे में से बनकर तैयार हो गाए हैं, जहां अब पर्यटक विलेज लाइफ का एक्सपीरियंस ले सकेंगे. ये होम स्टे ग्राम छेड़का, ढाबा ओर उरदौन में बनकर तैयार हुए हैं. होमस्टे के साथ लें विलेज लाइफ का मजा मढ़ई को पास ग्राम छेड़का और ढाबा में बने होम स्टे में पर्यटक ग्रामीण जीवन का अनुभव (Village Life Experience) कर सकेंगे. बेहद किफायती दरों पर यहां ठहरने की व्यवस्था के साथ लोकल फूड का भी मजा ले सकेंगे. होम स्टे के उद्घाटन अवसर पर पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों ने भी होम स्टे का जायजा लिया. इसके साथ ही यहां बैलगाड़ी की सवारी, जनजातीय सैतम और डंडा नृत्य, गौंड पेंटिंग, मड आर्ट, जिप्सी राइड और लजीज स्थानीय व्यंजनों का मजा लिया. होम स्टे में मिलेगा देसी खाना विलेज लाइफ एक्सपीरियंस के साथ यहां देसी जायके का भी मजा मिलेगा. इन होमस्टे में खासतौर पर मक्के और बाजरे की रोटी, चने की भाजी, कोदो की खीर और महुए की डुबरी समेत स्थानीय भोजन मिलेगा, जो खासतौर पर चूल्हों पर पकाया जाएगा. यहां का आदिवासी समाज इन होम स्टे में पर्यटकों का कला, प्रथा और स्नेह के साथ सहर्ष स्वागत करने के लिए तैयार हैं. टूरिज्म बोर्ड की एएमडी ने किया आदिवासी नृत्य होम स्टे के उद्घाटन अवसर पर ग्रामीणों द्वारा शानदार सैतम और डंडा नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें पर्यटन बोर्ड की एएमडी विदिशा मुखर्जी ने भी स्थानीय महिलाओं के साथ नृत्य किया. इसके बाद उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त महिला ड्राइवर्स की जिप्सी में की जंगल की सैर की. कार्यक्रम के दौरान पर्यटन सलाहकार जुबिन, जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद से जिला पर्यटन प्रबंधक मनोज सिंह ठाकुर, आईजीएस से रीना साहू, जयपाल सिंह, रोहित व होमस्टे संचालकों के साथ ग्रामीण मौजूद रहे. क्या होता है होम स्टे? होम स्टे के नाम से ही साफ है कि यह रहने की या आराम करने की ऐसी जगह होती है, जो घर की तरह होती है. होम स्टे एक होटल रूम की तरह किराए पर लिया जा सकता है. बस फर्क सिर्फ इतना होता है कि होम स्टे होटल की तरह चमक-धमक वाला न होकर पूरी तरह से घर जैसा होता है. होम स्टे में रहकर, आप स्थानीय संस्कृति, परंपराओं को जानने के साथ स्थानीय भोजन का लुत्फ उठा सकते हैं.

चाइल्ड एब्यूज कंटेंट के लिए किया AI का इस्तेमाल तो मिलेगी सख्त सजा, पहली बार ब्रिटेन ने बनाया कानून

लंदन आर्टिफिशल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल जैसे-जैसे बढ़ रहा है, इसके गलत इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ब्रिटेन दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जो AI से चाइल्ड एब्यूज कंटेंट के खिलाफ कानून लेकर आया है। इस कानून में बाल यौन शोषण कंटेंट को बनाने के लिए AI प्रोडक्ट को रखना, बनाना या उनकी किसी भी तरह से डिस्ट्रीब्यूशन को अवैध श्रेणी में रखा गया है। ऐसे करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इसे एआई के गलत इस्तेमाल के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त कानून माना जा रहा है। रॉयटर की खबर के मुताबिक AI को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। इसके गलत इस्तेमाल को लेकर भी लोगों में चिंता है। ब्रिटेन सरकार में होम सेक्रेटरी यवेट कूपर ने बताया कि AI द्वारा जनरेट चाइल्ड पोर्नोग्राफी इमेज जैसे खतरों को रोकने के लिए चार नए कानून को पेश किया जाएगा। इसमें सख्त सजा का प्रावधान किया जाएगा। ऐसी सामग्री के साथ पकड़े जाने पर 5 साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है। AI पीडोफाइल मैनुअल रखना भी गैर-कानूनी कैटेगरी में पाया है और इसमें अपराधियों को तीन साल तक सजा होगी। कूपर ने चाइल्ड एब्यूज को कूपर ने बाल शोषण के बढ़ते ऑनलाइन पहलू पर भी प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि एक जांच में पाया गया कि पूरे ब्रिटेन में लगभग 500,000 बच्चे हर साल किसी न किसी तरह के दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं, जिसमें इंटरनेट से जुड़े मामलों की संख्या बढ़ रही है। सरकार उन लोगों पर भी निशाना साध रही है जो बाल यौन शोषण सामग्री को वितरित करने या साझा करने की सुविधा देने वाली वेबसाइट चलाते हैं। ऐसी वेबसाइट चलाते हुए पकड़े जाने वाले किसी भी व्यक्ति को 10 साल तक की जेल हो सकती है। UK होम मिनिस्ट्री ने दी जानकारी ब्रिटेन की होम मिनिस्ट्री ने इसको लेकर कहा कि ब्रिटेन दुनिया का पहला देश बनने जा रहा है, जो चाइल्ड एब्यूज कंटेंट बनाने AI प्रोडक्ट को रखना, बनाना या उनको डिस्ट्रीब्यूट करने को अवैध बनाता है. सिखाना भी होगा गैर कानूनी AI पीडोफाइल मैनुअल रखना भी गैर-कानूनी कैटेगरी में पाया है और इसमें अपराधियों को तीन साल तक सजा होगी. AI पीडोफाइल मैनुअल के तहत लोगों को यौन शोषण के लिए AI का उपयोग करना सिखाया जाता हैं. वेबसाइट भी होंगी शामिल नए कानून के तहत चाइल्ड एब्यूज कंटेंट के तहत वे वेबसाइट भी आएंगी, जो चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ा कंटेंट शेयर करती हैं. नए कानून में वे वेबसाइट भी शामिल होंगी, जो यौन शोषण के लिए बच्चों को कैसे तैयार किया जाए उसके लिए सलाह देने का काम करती हैं. क्राइम एजेंसी ने बताया मीडिया रिपोर्ट्स में नेशनल क्राइम एजेंसी के हवाले से बताया गया है कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए और उससे संबंधित हर महीने 800 गिरफ्तारियां होती हैं. इसमें कहा कि 8.40 लोग देशभर में बच्चों के लिए खतरा हैं, जो वयस्क आबादी का 1.6 परसेंट है. ऑनलाइन और ऑफलाइन खतरा पैदा करते हैं.

हर घर में पाइप लाइन से पहुंचेगी रसोई गैस, केंद्र सरकार की बढ़ी तैयारी

नईदिल्ली केंद्र सरकार उज्जवला योजना के तहत हर घर में एलपीजी पहुंचाने के बाद देश में गैस पाइपलाइन के दायरे में विस्तार कर रही हैं। पाइप लाइन के माध्यम से घर-घर गैस आपूर्ति के लिए सरकार कदम उठा रही है। पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए 34 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 733 जिलों में फैले देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 100 प्रतिशत को कवर करने वाले 307 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए) को अधिकृत किया है। यह जानकारी केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि सरकार ने देश में सीजीडी क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। इनमें अन्य बातों के अलावा ये उपाय शामिल हैं-     सीजीडी क्षेत्र को घरेलू प्राकृतिक गैस का आवंटन     पीएनजी प्रयोजन के लिए उपलब्ध मोड (कैस्केड मोड सहित) के माध्यम से घरेलू गैस की आपूर्ति के लिए अधिसूचना।     सीजीडी परियोजनाओं को सार्वजनिक उपयोगिता का दर्जा प्रदान करना ।     रक्षा आवासीय क्षेत्र/यूनिट लाइनों में पीएनजी के उपयोग के लिए दिशानिर्देश।     सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को अपने-अपने आवासीय परिसरों में पीएनजी की व्यवस्था करने के लिए दिशानिर्देश।     सीपीडब्ल्यूडी और एनबीसीसी सभी सरकारी आवासीय परिसरों में पीएनजी की व्यवस्था करेंगे। सरकार इस विषय में संबंधित राज्यों में सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए राज्य सरकारों के साथ नियमित रूप से बातचीत और बैठकें आयोजित करती है तथा इस संबंध में चुनौतियों का समाधान करती है। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विकास के तहत प्रदान किए जाते हैं। पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) द्वारा अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से ये कनेक्शन दिए जाते हैं। आपको बता दें, पीएनजीआरबी ने सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 733 जिलों में फैले देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 100 प्रतिशत को कवर करने वाले 307 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए) को अधिकृत किया है। इसके अतिरिक्त पीएनजीआरबी ने सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए पूरे झारखंड राज्य को कवर करने वाले 11 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए) (बिहार और झारखंड में फैले 3 जीए सहित) को अधिकृत किया है। हर घर में आएगी रसोई गैस के लिए पाइप लाइन उन्होंने कहा कि गैस पाइप लाइन का विस्तार हो जाने के बाद देश के 82 प्रतिशत से अधिक भूमि क्षेत्र और 98 प्रतिशत आबादी को पाइप लाइन के जरिये रसोई गैस सप्लाई कर दी जाएगी। गैस पाइप लाइन बिछाने के लिए बोल का प्रोसेस 12 मई से शुरू होगा। 98 फीसदी आबादी को मिलेगी पाइप के जरिये रसोई गैस हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि बोली प्रक्रिया के बाद बेसिक इंफ्रास्ट्रक्टर का खाका बनाने पर काम किया जाएगा। इसमें एक तय समय लगेगा। मंत्री ने बताया कि 11वीं बोली के बाद 82 फीसदी लैंड एरिया और 98 फीसदी आबादी को रसोई गैस पाइप लाइन के जरिये मिलेगी। इन एरियो को नहीं मिल पाएगी गैस पाइप लाइन वहीं, पहाड़ी इलाकों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि देश के पूर्वी इलाके और जम्मू कश्मीर के कुछ दुर्गम एरिया में गैस पाइप लाइन नहीं आ पाएगी। उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर की तुलना में पाइप के माध्यम से मिलने वाली रसोई गैस सस्ती और ज्यादा बेहतर होगी। बनेंगे 1000 एलएनजी स्टेशन कोविड महामारी के दौरान उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर दिये गए। आज गैस सिलेंडरों की संख्या 30 करोड़ से अधिक है जबकि साल 2014 में 14 करोड़ थी। मंत्री ने कहा कि हमारी कोशिश होगी की पूरा आबादी को इसमें कवर किया जाए और काम तेजी से किया जाएगा। इसी योजना के तहत 1000 एलएनजी स्टेशन लगाए जाएंगे।

चंबल अंचल के लिए एक बड़ी उपलब्धि, ग्वालियर और शिवपुरी में हीरा मिलने की संभावना: सर्वे

ग्वालियर मध्य प्रदेश में पन्ना जिले की धरती से ‘हीरा’ निकलता है जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, अब पन्ना के बाद चंबल की धरती भी हीरा उगल सकती है. क्योंकि यहां भी हीरा मिलने की संभावना जताई गई है. जियोलॉजी विभाग के सर्वे में ग्वालियर-शिवपुरी जिले के 421 वर्ग किलोमीटर एरिया में हीरा मिलने की संभवना हैं, अगर ऐसा होता है तो यह ग्वालियर चंबल अंचल के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी. चंबल की मिट्टी अब हीरा उगलेगीं…जी हां, आपने सही सुना है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने ग्वालियर ओर शिवपुरी जिले के राजस्व, वन और आरक्षित वन भूमि की जानकारी मांगी है। जिसके बाद लगभग 35 लोकेशन के टेंडर होंगे। फिर उसकी नीलामी होगी। दरअसल, पन्ना में हीरा पाया जाता है। यह विंध्य ग्रुप का हिस्सा है। ग्वालियर भी विंध्य ग्रुप के तहत आता है। मिट्टी और पहाड़ों की एक जैसी स्थिति को देखते हुए जीएसआई ने सर्वे किया था। इसमें ग्वालियर और शिवपुरी में हीरा मिलने की संभावना नजर आई है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के तहत इन गांव की पहाड़ियों पर हीरे संभावना है घाटीगांव ब्लॉक: करई, दुर्गसी, बन्हेरी, सेकरा, चुही, बराहना, पटपरी, उम्मेदगढ़, ओबरा, पाटई, मानपुरा, कलवाह, सेमरी, चनगोरा, डागोर, तघई, बडक़ागांव, मोहना, आदि गांव में खनन किया जाएगा भितरवार ब्लॉक: भितरी, गधोटा, मावथा, हरसी, खोर, मुसाहरी, सेबई, जतरथी, रिछारी खुर्द, जखवार, बेलगड़ा, डोंगरपुर, मुधारी, रुअर, तालपुर वीरन, बमोर, रिछारी कला, हुरहुरी, रिठोदन, गाजना, श्याऊ, चिटोली, देवरी कला, कैथोड, धोबट, लोढी, करहिया, बैना। घाटीगांव क्षेत्र के अधिकतर गांव में 100 फीसदी क्षेत्र में खनन को ब्लॉक कर दिया जाएगा। भितरवार के लोढी में 2 फीसदी जगह पर ही खनन ब्लॉक मिलेगा। रिछारी कला में 1 फीसदी जगह पर ब्लॉक मिलेगा। वहीं हीरे की खबर को लेकर ग्रामीण भी काफी खुश नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर हीरे की खान यहां पर संचालित होती है तो यहां के लोगों को रोजगार मिलेगा और आमदनी बढ़ेगी। अभी ग्वालियर ओर शिवपुरी में सफेद और लाल पत्थर का खनन हो रहा है। इसके अलावा आयरन की भी खदान आवंटित है। पनिहार के पास नई खदान आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही कांच की खदान डबरा में दी गई हैं। यहां से निकलने वाले खनिज से कांच तैयार किया जा रहा है। वहीं अब हीरा खनन के लिए ब्लॉक दिया जाना है। ऐसे में कहा जा सकता है कि हीरा मिलने पर ग्वालियर की पहचान भी पन्ना की तरह होगी। रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। ग्वालियर खनिच विभाग ने भी किया सर्वे बता दें कि पन्ना में हीरा पाया जाता है जो विंध्य ग्रुप का हिस्सा है, ग्वालियर भी विंध्य ग्रुप के तहत आता है, मिट्टी और पहाड़ों की एक जैसी स्थिति को देखते हुए जीएसआइ ने सर्वे किया था. इसमें ग्वालियर और शिवपुरी में हीरा मिलने की संभावना नजर आई है, हीरा मिलने पर ग्वालियर की पहचान भी पन्ना की तरह होगी, ग्वालियर के जिला खनिज अधिकारी प्रदीप भूरिया ने बताया कि हीरा खनन के लिए ब्लॉक दिया जाना है. इसके लिए राजस्व, वन और संरक्षित वन की भूमि की जानकारी मांगी गई है. जनाकरी मिलने के बाद भूमि रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी. ग्वालियर-शिवपुरी जिले के इन गांवों में होगा खनन ! घाटीगांव क्षेत्र के अधिकतर गांव में 100 फीसदी क्षेत्र में खनन का ब्लॉक दिया जाएगा, यहां करई, दुर्गसी, बन्हेरी, सेकरा, चुही, बराहना, पटपरी, उम्मेदगढ़, ओबरा, पाटई, मानपुरा, कलवाह, सेमरी, चनगोरा, डागोर, तघई, बडक़ागांव, मोहना, आदि गांव में खनन किया जाएगा, इसके अलावा ग्वालियर के भितरवार ब्लॉक के भितरी, गधोटा, मावथा, हरसी, खोर, मुसाहरी, सेबई, जतरथी, रिछारी खुर्द, जखवार, बेलगड़ा, डोंगरपुर, मुधारी, रुअर, तालपुर वीरन, बमोर, रिछारी कला, हुरहुरी, रिठोदन, गाजना, श्याऊ, चिटोली, देवरी कला, कैथोड, धोबट, लोढी, करहिया, बैना में कुछ फीसदी ब्लॉक दिया जाएगा. अगर यहां हीरा मिलता है तो इस इलाके की किस्मत चमक सकती है. 

इंदौर के रेल प्रोजेक्ट के लिए निश्चित राशि रखने के बजाय जैसे-जैसे काम होते जाएगा, भुगतान भी लगातार किया जाएगा

इंदौर  इंदौर रेलवे स्टेशन के दिन फिरेंगे। केन्द्रीय बजट में 480 करोड रुपए रेलवे स्टेशन के री-डेवलेपमेंट के लिए मिलेंगे। पिछले साल के मुकाबले ज्यादा राशि इस बार मिली है। बीते साल इंदौर के खाते में 2990 करोड की राशि थी।  सांसद शंकर लालवानी ने दिल्ली में रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की, जिसमें बताया गया कि इंदौर के लिए अभी तक का सर्वाधिक 5200 करोड़(Rail Budget in MP) की राशि का प्रावधान किया गया है। इस बार प्रोजेक्ट के लिए निश्चित राशि रखने के बजाय जैसे-जैसे काम होते जाएगा, भुगतान भी लगातार किया जाएगा। इंदौर-खंडवा गेज कन्वर्शन, इंदौर-दाहोद, इंदौर-बुधनी के साथ-साथ इंदौर-मनमाड़ नई लाइन में बजट की कमी नहीं आएगी। इंदौर-बुधनी-जबलपुर प्रोजेक्ट: इंदौर-बुधनी नई रेल लाइन प्रोजेक्ट 2018 में स्वीकृत हुआ था। इस लाइन के लिए 1600 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है। जल्द शुरू होगा काम मुख्य स्टेशन के री-डेवलेपमेंट की डेढ़ साल पहले योजना बनी थी। इसके लिए बजट(Rail Budget in MP) में 480 करोड़ रुपए शामिल किए गए हैं। निर्माण के लिए टेंडर भी फाइनल भी हो गए है। एक माह में काम शुरू हो जाएगा। मुख्य बिल्डिंग सात मंजिला बनाई जाएगी। स्टेशन पर आने वाले 50 साल के अनुरूप व्यवस्था जुटाई जाएगी। एयरपोर्ट की तर्ज पर स्टेशन का निर्माण होगा। इन पर नजर इंदौर-मनमाड़ प्रोजेक्ट : इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट वर्ष 2017 में स्वीकृत हुआ। हाल ही में इस केंद्रीय केबिनेट से प्रोजेक्ट के लिए अनुमति मिली है। मप्र के हिस्से में डीपीआर का काम हो चुका है। दाहोद-इंदौर रेल प्रोजेक्ट : वर्ष-2007 में दाहोद-इंदौर रेल प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया था। इंदौर-दाहोद रेल लाइन में सबसे महत्वपूर्ण टीही टनल में इन दिनों तेजी से काम चल रहा है। रतलाम-महू-खंडवा-अकोला प्रोजेक्ट रतलाम-महू-खंडवा-अकोला ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट को 2008 में विशेष दर्जा मिला। लागत करीब 2 हजार करोड़ के आसपास है। पातालपानी से बलवाड़ा तक डायवर्टेड रेल लाइन के 468.65 करोड़ के टेंडर जारी कर दिए हैं। मध्यप्रदेश को रेल बजट में 14,745 करोड़ रुपए आवंटित मध्यप्रदेश के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जहां रेल बजट 2025-26 घोषित कर दिया गया है। इस बजट में राज्य को 14,745 करोड़ रुपए मिले हैं। जिससे रेल नेटवर्क का विस्तार और आधुनिकीकरण होगा। इसमें 31 नई रेल परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। जिससे रेल की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रियों को सुविधा मिलेगी। इन स्टेशनों का हो रहा रीडेवलपमेंट रीडेवलपमेंट परियोजनाओं के तहत रानी कमलापति स्टेशन, ग्वालियर, खजुराहो, सतना, इंदौर, बीना और जबलपुर जैसे मुख्य स्टेशनों के रीडेवलपमेंट यानी पुनर्विकास में 1950 करोड़ रुपए की लागत से काम जारी है। 80 स्टेशनों पर खर्च किए जाएंगे 2708 करोड़ रुपए प्रदेश के आमला, अनूपपुर, अशोकनगर, बालाघाट, बनापुरा, बरगवां, ब्योहारी, बेरछा, बैतूल, भिंड, भोपाल, बिजुरी, बीना, गुना, ग्वालियर, हरदा, हरपालपुर, इंदौर जंक्शन, इटारसी जंक्शन, जबलपुर, सतना, जुन्नारदेव, करेली, कटनी जंक्शन, कटनी मुरवारा, कटनी साउथ, ब्यावरा राजगढ़, छिंदवाड़ा, डबरा, दमोह, दतिया, देवास, गाडरवारा, गंजबासौदा, घोड़ाडोंगरी शामिल हैं। जिसमें 2708 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। साथ ही सागर, सीहोर, सिवनी, शहडोल, शाजापुर, श्यामगढ़, श्योपुर कलां, शिवपुरी, श्रीधाम, शुजालपुर, सिहोरा रोड, सिंगरौली, टीकमगढ़, उज्जैन, उमरिया, विदिशा, विक्रमगढ़, आलोट, खाचरोद, खजुराहो जंक्शन, खंडवा, खिरकिया, लक्ष्मीबाई नगर, मैहर, मक्सी जंक्शन, मंडला फोर्ट, मंदसौर, एमसीएस छतरपुर, मेघनगर, मुरैना, मुलताई, नागदा जंक्शन, नैनीपुर जंक्शन, नर्मदापुरम (होशंगाबाद), नरसिंहपुर, नेपनागर, नीमच, ओरछा, पांढुर्णा, पिपरिया, रतलाम, रीवा, रुथियाई, सांची और संत हिरदाराम नगर जैसे स्टेशन शामिल हैं।

इंदौर में मास्टर प्लान की 23 सड़कें बनेगी, 8 पर पहले फोकस

इंदौर  मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में निगमायुक्त शिवम वर्मा ने स्मार्ट सिटी कार्यालय में मास्टर प्लान के पहले चरण में बनने वाली 8 सड़कों के निर्माण कार्य की समीक्षा की। इस दौरान अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर, अधीक्षण यंत्री डीआर लोधी मौजूद रहे। वर्मा ने बताया कि मास्टर प्लान के तहत 23 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है।  बिचौली हप्सी से भूरी टेकरी होते हुए नायता मुंडला तक का कार्य जारी है। प्रथम चरण में 8 सड़कों के लिए सेंट्रल लाइन डालने, नोटिस जारी करने संबंधी कार्य इस सप्ताह से शुरू कर दिए जाएंगे। इसके अलावा देवगुराडिया स्थित 500 टीडीपी बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 800 टीडीपी करने, प्लांट के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने, इस प्लांट के अत्याधुनिकरण करने, मुख्य मार्गों की सफाई के लिए रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदने को लेकर चर्चा हुई। 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे महापौर ने बताया कि इन सड़कों के निर्माण पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह पैसा केंद्र सरकार ने पहले ही इंदौर नगर निगम के खाते में ट्रांसफर कर दिया है। हमने केंद्र सरकार से 14 अन्य सड़कों के लिए भी 400 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की है। हम इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजेंगे। इन 8 सड़कों का होगा काम -सुभाष मार्ग (गोल मंदिर से रामबाग पुल तक): लंबाई 1300 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -लिंक रोड (एमआर-10 से एमआर-12 तक): लंबाई 1800 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -एमआर-5 (बड़ा बांगड़दा से पीएमएवाय मल्टी तक): लंबाई 1700 मीटर, चौड़ाई 24 मीटर। -भमोरी चौराहे से एमआर-10 व राजशाही गार्डन से होटल वॉच तक: लंबाई 1100 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -वीर सावरकर प्रतिमा से अटल गेट तक: लंबाई 1310 मीटर, चौड़ाई 18 मीटर। एडवांस एकेडमी से रिंग रोड तक: लंबाई 3650 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। जमजम चौराहे से स्टार चौराहा तक: लंबाई 1920 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। खजराना मंदिर द्वार से जमजम चौराहा तक: लंबाई 1120 मीटर, चौड़ाई 18 मीटर। बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ेगी, अतिरिक्त जमीन भी देंगे बैठक में एशिया के सबसे बड़े 500 टीडीपी क्षमता वाले बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 800 टीडीपी करने और इस प्लांट को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने, प्लांट के लिए अतिरिक्त जमीन देने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। 24 मीटर या इससे चौड़ी सड़क पर बेच सकेंगे टीडीआर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि बैठक में टीडीआर सर्टिफिकेट पोर्टल के माध्यम से जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। मास्टर प्लान की 23 सड़कों सहित अन्य सड़कें जहां नगर निगम ने चौड़ीकरण के लिए निजी जमीन ली है, वहां जमीन मालिकों को ट्रांसफरेबल डेवलमेंट राइट्स (टीडीआर) सर्टिफिटेक जारी किए जाएंगे।

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