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मुख्यमंत्री योगी 3 दिवसीय उत्तराखंड दौरे के चलते कल भतीजी की शादी में होंगे शामिल

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 3 दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर जाएंगे। वह अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए पौड़ी जिले के अपने पैतृक गांव पंचूर जा रहे हैं। शादी समारोह में भाग लेने के बाद वह अपने गांव के पास आयोजित कुछ स्थानीय कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शाम 5 बजे पंचूर पहुंचने की उम्मीद है, जहां वह रात्रि विश्राम करेंगे। 6 फरवरी को यमकेश्वर ब्लॉक के बनास तल्ला गांव का दौरा करेंगे CM योगी मिली जानकारी के मुताबिक, 6 फरवरी को वह यमकेश्वर ब्लॉक के बनास तल्ला गांव का दौरा करेंगे। जहां वह यमकेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करेंगे, और इसके बाद पौड़ी जिले के विथ्याणी गांव स्थित गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय में आयोजित किसान मेले में भाग लेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाविद्यालय में 100 फीट ऊंचे तिरंगे का उद्घाटन भी करेंगे और एक जनसभा को संबोधित करेंगे। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 8 फरवरी की शाम लखनऊ लौटने का कार्यक्रम है। 2022 में उन्होंने अपनी मां से आशीर्वाद लिया था, लेकिन कोविड महामारी के कारण वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके थे। 5 जून 1972 को पौड़ी के पंचूर गांव में हुआ था सीएम योगी का जन्म योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को पौड़ी के पंचूर गांव में हुआ था। उनका असली नाम अजय मोहन सिंह बिष्ट था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चामकोटखाल के स्कूल से प्राप्त की थी और फिर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में स्नातक की डिग्री पूरी की। योगी आदित्यनाथ ने 1990 के दशक में अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में शामिल होने के बाद संन्यास ले लिया था और गोरखपुर स्थित गुरु गोरक्षनाथ मठ में निवास करने लगे। CM के 7 भाई-बहन हैं, जिनमें 3 बहनें और 4 भाई शामिल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 7 भाई-बहन हैं। उनकी तीन बहनें और चार भाई हैं। उनके बड़े भाई मानवेंद्र मोहन सरकारी कॉलेज में नौकरी करते हैं, जबकि शैलेंद्र मोहन भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं और महेंद्र मोहन एक स्कूल में कार्यरत हैं। यह दौरा योगी आदित्यनाथ के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह अपने पैतृक गांव में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के बाद परिवार और राज्य के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

सिवनी कॉन्फ्रेंस में 25 राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त शामिल होंगे

भोपाल राज्य निर्वाचन आयुक्त  मनोज श्रीवास्तव ने बताया हैकि विभिन्न राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तों की 31वीं वार्षिक कॉन्फ्रेंस पेंच जिला सिवनी में एक से 4 मार्च तक आयोजित की जायेगी। इस कॉन्फ्रेंस में लगभग 25 राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त शामिल होंगे। राज्य निर्वाचन आयुक्त श्रीवास्तव ने बताया है कि कॉन्फ्रेंस में विभिन्न राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त स्थनीय निकायों के निर्वाचन के दौरान आयीं चुनौतियों तथा उनसे निपटने के उपायों पर चर्चा करेंगे। साथ ही नवाचारों और सुधारों से भी अवगत करायेंगे। इस दौरान स्थानीय निकायों के निर्वाचन में नई तकनीकों के उपयोग पर भी चर्चा होगी।  

ई-मंडी योजना, ई-अनुज्ञा प्रणाली का विस्तारित रूप , मंडियों में योजना के लागू होने से मैनुअली संधारित रिकॉर्ड धीर-धीरे समाप्त हो रहा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के कल्याण एवं समस्याओं के निराकरण के लिये प्रतिबद्ध है। किसानों की उपज का भुगतान आसान बनाने के लिये प्रदेश में ई-अनुज्ञा प्रणाली लागू की गई है। कृषकों को इस प्रणाली से जोड़कर प्रत्येक भुगतान की एंट्री ई-अनुज्ञा पोर्टल पर हो रही है। व्यापारियों द्वारा इस प्रणाली का इस्तेमाल कर क्रय की गई कृषि उपज के परिवहन के लिये गेट पास बनाये जा रहे हैं। रिकॉर्ड संधारण में इस प्रणाली से बहुत लाभ हुआ है। ई-मंडी योजना, ई-अनुज्ञा प्रणाली का विस्तारित रूप है। मंडियों में इस योजना के लागू होने से मैनुअली संधारित रिकॉर्ड धीर-धीरे समाप्त हो रहा है। ई-मंडी योजना मंडी प्रांगण के अंदर कृषकों को प्रवेश से लेकर नीलामी, तौल और भुगतान की प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिकली कैप्चर करने की प्रक्रिया है। योजना को स्कॉच आर्डर ऑफ मेरिट वर्ष 2023 प्रदान किया गया है।      

जल प्रदाय योजना के लिए नर्मदा नदी के किनारे लम्हेटाघाट में इंटैकवैल स्थापित किया

जबलपुर मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा जबलपुर परियोजना इकाई के अतंर्गत 7 नगरीय निकायों में जल प्रदाय योजना का काम पूरा कर लिया गया है। यह कंपनी नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के अंतर्गत कार्य कर रही है। एशियन डेवपलमेंट बैंक की सहायता से नर्मदा पेयजल योजना तैयार की गई है। इस योजना को नर्मदा पेयजल योजना भेड़ाघाट के नाम से जाना जा रहा है। इस पेयजल योजना से जिन निकायों को पेयजल उपलब्ध हो रहा है, उनमें भेड़ाघाट, पाटन, कटंगी, मझौली, पनागर, सिहोरा और दमोह जिले का तेंदूखेड़ा शामिल हैं। जल प्रदाय योजना के लिए नर्मदा नदी के किनारे लम्हेटाघाट में इंटैकवैल स्थापित किया गया है। वहीं जल शोधन के लिए 31 एमएलडी का जल शोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। सभी 7 निकायों में जल संग्रहण के लिए कुल 13 उच्च स्तरीय टंकियों का निर्माण किया गया है। हर घर नल से शुद्ध जल पहुँचे, इसके लिए 159 किलोमीटर की मुख्य पाईप लाईन और 328 किलोमीटर की वितरण पाईप लाईन बिछाई गई है। भेड़ाघाट जल प्रदाय योजना से 7 नगरों में 32 हजार से अधिक घरों को नल कनेक्शन दिए गए हैं। इन नगरों की 1 लाख 62 हजार की आबादी लाभन्वित हो रही है। योजना की विशेष बात यह है कि आगामी 30 वर्षों की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रख कर योजना डिजाइन की गई है। दस वर्षों के संचालन और संधारण के साथ योजना की लागत लगभग 257 करोड़ रूपये है। पहले इन निकायों में जल प्रदाय की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं थी। महिला हो या बच्चे पानी लेने के लिए घर से दूर जाकर कठिन कार्य करते थे। पूर्व में इन नगरों में हैंडपंप के आस-पास लंबी कतारें होती थीं और जनसामान्य तकलीफों का सामना करता था। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी की कोशिशों से शोधन उपरांत शुद्ध पानी घर घर पहुँचाने की व्यवस्था की जा रही है। शोधित पानी होने के कारण जल से होने वाली बीमारियों से भी जनसामान्य को छुटकारा मिला है।

2050 तक पाकिस्तान की जनसंख्या 38 करोड़ से अधिक हो जाएगी, प्रजनन दर 2.5 तक

इस्लामाबाद  कंगाली में डूबा पाकिस्तान तमाम सूचकांकों में पीछे है, लेकिन बच्चा पैदा करने के मामले में यह काफी आगे है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि साल 2050 तक पाकिस्तान जनसंख्या के मामले में अमेरिका को भी पीछे छोड़ देगा और दुनिया की तीसरा सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा। ऐसा तब हुआ है जब पिछले तीन दशक के दौरान पाकिस्तान में जन्म दर में बड़ी गिरावट देखी गई है। 3.6 है पाकिस्तान की प्रजनन दर संयुक्त राष्ट्र विश्व प्रजनन रिपोर्ट 2024 के अनुसार, पाकिस्तान की प्रजनन दर साल 2024 में 3.6 पर है, जो एशिया के तमाम देशों से बहुत ज्यादा है। हालांकि, 1994 में पाकिस्तान की अपनी ही प्रजनन दर की तुलना में यह काफी कम हुई है। साल 1994 में पाकिस्तान में प्रति महिला जीवित प्रजनन दर 6 थी। इसका मतलब है कि हर महिला औसतन छह बच्चों को जन्म देती थी। तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश बनेगा इस गिरावट के बावजूद, अनुमान है कि साल 2050 तक पाकिस्तान अमेरिका, इंडोनेशिया,ब्राजील और रूस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। साल 1947 में पाकिस्तान बनने के समय देश की जनसंख्या 3.1 करोड़ थी, जो 2023 की जनगणना के अनुसार 24.1 करोड़ हो गई है। कितनी हो जाएगी पाकिस्तान की जनसंख्या? संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2050 तक पाकिस्तान की जनसंख्या 38 करोड़ से अधिक हो जाएगी। वहीं, 2054 तक प्रजनन दर में और गिरावट आने की उम्मीद है, जो घटकर 2.5 तक हो जाएगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान के साथ-साथ इथियोपिया, नाइजीरिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे मुस्लिम देशों में 2024 में वैश्विक जन्म का 43 प्रतिशत हिस्सा रहा। देश की बढ़ती आबादी ने पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ा दिया है। जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए देश परिवार नियोजन कार्यक्रमों,गर्भनिरोधक वितरण और ग्रामीण शिक्षा अभियानों समेत विभिन्न उपायों का सहारा ले रहा है। हालांकि, धार्मिक कट्टरता, सांस्कृतिक बाधाएं और शिक्षा तक सीमित पहुंच इसमें बाधा डाल रही है। धार्मिक कट्टरता के चलते परिवार नियोजन उपायों को देश में बुरी नजर से देखा जाता है।

मिलावटी दूध के विक्रय की रोकथाम के लिए कलेक्टर का महत्वपूर्ण आदेश, उपभोक्ताओं को एसएनएफ की मात्रा बतानी होगी

इंदौर मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में दूध की गुणवत्ता और उपभोक्ता स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। इसके तहत सभी दूध विक्रेताओं और डेयरी संचालकों को अपने प्रतिष्ठानों पर फैट (वसा) मापक यंत्र रखना अनिवार्य किया गया है।  यह कदम अपमिश्रित और मिलावटी दूध के विक्रय की रोकथाम और संक्रामक रोगों की रोकथाम के उद्देश्य से उठाया गया है। कलेक्टर ने बताया, भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया गया है। दूध में फैट व एसएनएफ की मात्रा, आवक व विक्रय की जानकारी डिस्प्ले करना भी जरूरी है। कैन पर लिखनी होगी मात्रा की जानकारी उपभोक्ताओं के सामने विक्रेता को दूध का परीक्षण कर फैट और एसएनएफ की मात्रा बतानी होगी। इस यंत्र के इस्तेमाल और संचालन की जानकारी भी उपभोक्ताओं को देने का दायित्व विक्रेताओं का रहेगा। जो दूध विक्रेता डोर-टू-डोर सप्लाय करते हैं उन्हें अपने साथ मापक यंत्र रखना होगा या दूध के डिब्बों, कैन पर मात्रा को प्रतिदिन लिखकर प्रदर्शित करना होगा। आदेश 3 अप्रेल तक लागू रहेगा। इस कारण लिया फैसला नए नियम की जानकारी देते हुए कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि दूध में मिलावट के कई मामले सामने आ रहे हैं. दूध में जहरीली चीजें मिलाकर बेची जा रही है. ऐसे में मिलावटी दूध पर रोक लगाने के लिए ये फैसला लिया गया है. इससे संक्रामक रोगों पर भी लगाम लगाई जा सकेगी. भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2023 की धारा 163 के तहत इस आदेश को जारी किया गया है. अब दूध में मौजूद फैट की मात्रा से लेकर कई जानकारी देना जरुरी है. भरना पड़ेगा जुर्माना नए आदेश के मुताबिक़, अगर दुग्ध उत्पादकों ने नियमों को नहीं माना तो उन्हें इसके लिए सजा दी जाएगी. विक्रेता को बताना होगा कि दूध में कितना फैट है. साथ ही इसमें मौजूद एसएनएफ की मात्रा भी बतानी होगी. इसके लिए यंत्र जारी किया गया है जिसमें दूध डालते ही उसकी सारी असलियत सामने आ जाएगी. वहीं जो उत्पादक लोगों को घर पर दूध की सप्लाई करते हैं, उन्हें डिब्बे पर इसकी जानकारी देना जरुरी है. सिर्फ 10 रुपए में कीजिए दूध में मिलावट की जांच  जो न केवल सस्ती हो, बल्कि कोई भी इसका इस्तेमाल बिना किसी परेशानी के कर सके। एनडीआरआई करनाल ने एक दूध परीक्षण किट विकसित की है जो काफी सस्ती है और बहुत कम समय में दूध में मिलावट का पता लगा सकती है। स्ट्रिप की मदद से दूध में यूरिया, स्टार्टर, डिटर्जेंट पाउडर, ग्लूकोज न्यूट्रलाइजर, रिफाइंड तेल और हाइड्रोजन परऑक्साइड की मात्रा की जांच की जा सकती है। मिलावट की जांच के लिए संस्थान ने आठ तरह की स्ट्रिप विकसित की है।  स्ट्रिप को दूध में डुबोया जाता है। इससे सिर्फ 8-10 मिनट में दूध में मिलावट की जांच की जा सकती है। हर मिलावटी तत्व के लिए अलग स्ट्रिप होती है। दूध में मिलावट हो तो स्ट्रिप का रंग बदल जाता है, जिसके आधार पर पता लगाया जा सकता है कि दूध में कितनी मिलावट है। उन्होंने कहा कि दूध में फैट प्रतिशत बढ़ाने के लिए वनस्पति तेल मिलाया जाता है लेकिन वनस्पति तेल दूध में नहीं घुल सकता है। इसे दूध में मिलाने के लिए डिटर्जेंट पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। दूध में अगर डिटर्जेंट पाउडर मिलाया  गया है तो स्ट्रिप का रंग नीला हो जाता है। दूध में यूरिया का पता लगाने के लिए एक पीले कागज की स्ट्रिप विकसित की गई है। इसे दूध में डुबोया जाता है। अगर दूध में यूरिया का मिलावट है  तो पीली स्ट्रिप लाल रंग की हो जाती है।  अगर दूध में यूरिया की मिलावट नही है तो स्ट्रिप गुलाबी या पीले रंग की हो जाती है । इसका परिणाम तीन मिनट में आ जाता है।

उज्जैन सिंहस्थ मेला 3360 हेक्टेयर में लगेगा, 15 करोड़ लोग जुटेंगे, 15 अप्रैल तक डीपीआर तैयार

उज्जैन उज्जैन सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के लिए आगामी 15 अप्रैल तक डीपीआर तैयार कर ली जाएगी। भवन अनुज्ञा का कार्य आगामी 15 जून तक कर लिया जाएगा और 25 जून से कार्य प्रारंभ होगा। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में नगर विकास योजना की कार्ययोजना तैयार कर कार्य की शुरु हुआ। यहां 200 एमएलडी पेयजल क्षमता का मेला क्षेत्र में विकास किया जाएगा। सीवर नेटवर्क डिजाइन के अंतर्गत सिंहस्थ के दौरान मेला क्षेत्र में 160 एमएलडी का सीवरेज जनरेशन होगा जिसमें 100 एमएलडी क्षमता के स्थाई एसटीपी निर्माण किए जाएंगे और अस्थाई रूप से 60 एमएलडी क्षमता के सीवरेज का निष्पादन किया जाएगा। यहां होने वाले विकास कार्यों की तैयारियों की समीक्षा जापान से लौटने के बाद अपर मुख्य सचिव डॉ राजेश राजौरा ने की। उन्होंने उज्जैन में चल रहे कई निर्माण कार्यों का निरीक्षण भी किया है। पानी का इंतजाम कैसे करेंगे यह भी तय कर रही सरकार सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की मौजूदगी के चलते प्रतिदिन उज्जैन शहर में पानी की कितनी डिमांड होगी। इसके आधार पर भी व्यवस्था बनाने पर सरकार फोकस कर रही है। वर्तमान में उज्जैन शहर की जनसंख्या लगभग 8.65 लाख है। इसमें प्रतिदिन पेयजल की मांग 178.28 एमएलडी है। अम्बोदिया, गऊघाट, साहिबखेड़ी और उंडासा के जलाशयों को मिलाकर कुल पानी की क्षमता 151.01 एमएलडी है। प्रस्तावित सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना से 51 एमसीएम, नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना से 58.34 एमसीएम पेयजल की सप्लाई की जा सकेगी। इसके अलावा न्यू अम्बोदिया की 68 एमएलडी पेयजल क्षमता की परियोजना प्रस्तावित है। साथ ही 860 करोड़ रुपए की लागत से हरियाखेड़ी परियोजना पर 100 एमएलडी पेयजल क्षमता की परियोजना का विकास भी किया जा रहा है। 6 सेक्टर में बंटेगा सिंहस्थ मेला जोन: मेडिसिटी बना रहे, 550 बिस्तर का मिलेगा अस्पताल उज्जैन में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार पर भी सरकार ने ध्यान केंद्रित किया है। बीडीसी (भवन विकास निगम) के द्वारा मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है। इसकी लागत कुल 592.3 करोड़ रुपए है। इसमें 550 बिस्तर की क्षमता होगी। सिंहस्थ में जनसंख्या के पीक लोड वाले दिनों में विस्तार योग्य क्षमता जोड़ी जाएगी तथा सामान्य दिनों में स्वास्थ्यकर्मियों और संसाधनों की क्षमता के अनुरूप कार्य योजना बनाई जाएगी। इसके अंतर्गत 500 अस्थायी अस्पताल बनाए जाएंगे और कैम्प लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सिंहस्थ मेला क्षेत्र के अनुसार 6 जोन में बांटा जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटल रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग आयोजित की जाएगी। सिंहस्थ के गर्मी के मौसम में आयोजन को दृष्टिगत रखते हुए इलेक्ट्रोलाइट की उपलब्धता समस्त मेला क्षेत्र में जगह-जगह तय की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आपदा की स्थिति में कार्ययोजना स्टेट यूनिट के साथ मिलकर बनाई जाएगी। मेले के दौरान बर्न यूनिट, एम्बुलेंस की सुविधा, ब्लड बैंक, ट्रॉमा सेंटर आदि की सम्पूर्ण तैयारी रखने पर फोकस किया जा रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग का विशेष ध्यान हैजा और अन्य मौसम जनित बीमारियों और आपदा प्रबंधन के रिस्पांस पर भी ध्यान रखा जाएगा। स्वास्थ्य प्लान में आयुष विभाग को भी जोड़ा जाएगा। साफ सफाई के लिए 16220 सफाई कर्मियों के जरूरत सिंहस्थ में साफ-सफाई व्यवस्था की कार्ययोजना की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि सड़क एवं अन्य सफाई कर्मियों को मिलाकर 11 हजार 220 सफाईकर्मियों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा कचरा संग्रहण के लिए लगभग 5 हजार सफाई कर्मियों की आवश्यकता होगी। कुल मिलाकर 16 हजार 220 सफाई कर्मियों की आवश्यकता सिंहस्थ में होगी। इस स्थिति को ध्यान में रखने के साथ ऑउटसोर्स एजेंसी के कार्यों की मॉनिटरिंग की जाने तथा इसका समय-समय पर फॉलोअप पर भी फोकस किया जाएगा। फेस रिकग्नीशन, एलर्ट सिस्टम के साफ्टवेयर डेवलप होंगे वर्तमान में आईटीएमएस जंक्शन सिस्टम सिंहस्थ को दृष्टिगत रखते हुए डेवलप किया जा रहा है। सिंहस्थ के समय आईटीएमएस पुलिस विभाग को सौंपा जाएगा। सिंहस्थ में फेस रिकग्निशन, अलर्ट सिस्टम, फायर अलार्म के सभी सॉफ्टवेयर एमपीएसईडीसी के द्वारा विकसित किए जाएंगे। यह कार्य 31 दिसंबर 2025 तक पूर्ण किया जाना निर्धारित है। इसके अलावा सिंहस्थ 2028 के लिए ऑल इन वन ऐप भी बनाया जाएगा जिसमें ड्रोन सर्विस, यातायात और वाहन प्रबंधन, मानव संसाधन और कार्य प्रगति की जानकारी की सुविधा मिल सकेगी। सिंहस्थ में वाहनों की पार्किंग की उपलब्धता के लिए ऑनलाइन डेटा तैयार किया जाएगा। इसके अलावा जीआईएस आधारित उपयोगिता सिस्टम बनाया जाएगा। सिंहस्थ मेला क्षेत्र का वर्चुअल टूर ऐप के माध्यम से कराया जाएगा। पर्यटन की दृष्टि से भी विकास सिंहस्थ में पर्यटन की दृष्टि से किए जाने वाले विकास कार्यों की समीक्षा में महाराजवाड़ा हेरिटेज होटल, ओमकार सर्किट, ग्रांड होटल उज्जैन का उन्नयन एवं नवीन कक्षों का विस्तार होटल क्षिप्रा रेसीडेंसी के उन्नयन कार्य, देवी अहिल्या लोक महेश्वर, गंभीर डेम में जलक्रीडा सुविधाएं, बोट क्लब एवं रेस्टोरेंट, 10 करोड़ रुपए की लागत से पंचकोशी यात्रा मार्ग के पड़ावों का विकास, सिंहस्थ टेंट सिटी विकास, अष्ट भैरव मंदिरों के विकास कार्यों को पूरा कराया जा रहा है। महाकाल महालोक में मूर्तियों के नीचे होगा पौराणिक कथाओं का वर्णन श्रीकृष्ण पाथेय न्यास अंतर्गत नारायणा धाम के श्रीकृष्ण सुदामा मंदिर के विकास कार्य भी कराए जाएंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए श्री महाकाल लोक की मूर्तियों के नीचे पौराणिक कथाओं का वर्णन किया जाएगा। श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्टोन क्लेडिंग और न्यू वेटिंग हॉल, श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रवेश टनल मार्बल क्लेडिंग और फ्लोरिंग कार्य, आपातकालीन निर्गम, पालकी हॉल, मार्बल क्लेडिंग और फ्लोरिंग के कार्य, विजिटर फेसिलिटेशन सेंटर और श्री महाकालेश्वर भक्त निवास निर्माण कार्य जल्द पूरा कराया जाएगा। रोड रेस्टोरेशन की लगातार मानिटरिंग हो उज्जैन में अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत रोड रेस्टोरेशन के कार्यों की सतत मॉनिटरिंग कर सभी रिस्टोरेशन कार्य मार्च 2025 तक पूर्ण किए जाएं। रोड रेस्टोरेशन के पूर्ण कार्यों का पुन: निरीक्षण अगले एक सप्ताह में जनप्रतिनिधियों एवं एसडीएम की टीम के साथ किए जाने के बाद ही कार्य पूर्णता का सर्टिफिकेट दिया जाए। जल जीवन मिशन अंतर्गत रोड रेस्टोरेशन, रोड खुदाई एवं योजना के संपूर्ण कार्यों की जानकारी सतत रूप से स्थानीय विधायकों को दी जाए। अफसरों के ये भी निर्देश सड़क दुर्घटना से बचाव के लिए सड़क के दोनों तरफ लेवलिंग के कार्य के बाद ही कार्य पूर्णता का प्रमाण-पत्र दिया जाए। वर्षा ऋतु में सड़कों के रख-रखाव की कार्ययोजना पर अभी … Read more

MP में हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर जापान से सहयोग लिया जाएगा

मध्यप्रदेश में जापान की मदद से बनेगा हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में  हुई मोहन कैबिनेट की बैठक में सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कैबिनेट के फैसलों के बारे में जानकारी दी। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि जापान सरकार से कनेक्टिंग के लिए मध्य प्रदेश में कार्यालय स्थापित होगा और हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर जापान से सहयोग लिया जाएगा। जापान के सहयोग से हाईस्पीड रेल कॉरिडोर  जापान सरकार से कनेक्टिंग के लिए मध्य प्रदेश में कार्यालय स्थापित होगा। हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर जापान से सहयोग लेंगे। कपास से कपड़ा, कपड़ा से रेडिमेड इंड्रस्ट्री में जापान सहयोग करेगा। ई-वी निर्माण में जापान सहयोग देगा। जापान के सहयोग से मध्यप्रदेश को बनाएंगे आइडियल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  कहा कि यात्रा में उन्होंने जापानी निवेशकों और उद्योगपतियों को भोपाल में 24-25 फरवरी को होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में शामिल होने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जापानी कंपनियों ने मध्यप्रदेश में निवेश करने की गहरी रुचि दिखाई है और कई प्रमुख कंपनियां आगामी समिट में हिस्सा लेंगी। उन्होंने जापान के विभिन्न उद्योगपतियों, निवेशकों के साथ बिजनेस टू बिजनेस (बी-टू-बी) और जापान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट (जी-टू-जी) मुलाकात की और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से बात की। जापान-मध्यप्रदेश औद्योगिक सहयोग फोरम की स्थापना के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली, जिससे प्रदेश में जल्द ही जापानी इंडस्ट्रियल पार्क, कौशल विकास केंद्र और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए जापान प्लस सेल की भी स्थापना की जाएगी, जो जापानी निवेशकों के साथ निरंतर संपर्क और फॉलोअप करेगी। मुख्यमंत्री ने जापान के उद्योगपतियों और निवेशकों को फरवरी में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2025) में आमंत्रित किया, जिससे निवेश के नए अवसर खुलेंगे। जापान होगा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का कंट्री पार्टनर मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार जापान, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में कंट्री पार्टनर के रूप में शामिल होगा। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। डॉ. यादव ने बताया कि जापानी कंपनियों ने मध्यप्रदेश में मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल्स, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल (रेडिमेड गारमेन्ट्स) सेक्टर में निवेश करने की इच्छा जताई है। जापानी कंपनियों का निवेश मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक होगा। जापानी कंपनियों के सहयोग से हम प्रदेश को इन्वेस्टमेंट के लिए एक ‘आइडियल डेस्टिनेशन’ और ‘इंडस्ट्री फ्रेंडली स्टेट’ बनाने की ओर आगे बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार उद्योगों के विकास के लिए बेहतर अधोसंरचनाएं, सरल निवेश नीतियां और निवेशकों को एक बेहद अनुकूल वातावरण उपलब्ध करा रही है। उन्होंने जापानी निवेशकों को विश्वास दिलाया कि वे बेहिचक यहां निवेश करें, राज्य सरकार उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। इस सफल यात्रा से जापानी कंपनियों द्वारा मध्यप्रदेश में किया जाने वाला निवेश यहां रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और औद्योगिक विकास को गति भी देगा। जापान यात्रा मध्यप्रदेश को “निवेश का हब” बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 का आयोजन भोपाल के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में होगा, जहां विभिन्न देशों के निवेशक और उद्योगपति भाग लेंगे।     जापान भारत का पांचवा सबसे बड़ा निवेशक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्तमान में जापान, भारत का पांचवां सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने पिछले दो दशकों में भारत में 38 बिलियन डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 बिलियन डॉलर का है, जो निरंतर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में पहले से ही कई प्रमुख जापानी कंपनियां सफलतापूर्वक कार्यरत हैं। ब्रिजस्टोन ने पीथमपुर में अपना विश्वस्तरीय टायर उत्पादन संयंत्र स्थापित किया है, जो रोजगार सृजन और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। पैनासोनिक जैसी दिग्गज कंपनी ने मध्यप्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। एनएसके, सानोह और कामात्सु जैसी जापानी कंपनियां भी प्रदेश में कार्यरत हैं, जो ऑटोमोटिव और मशीनरी क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं। व्यापार के क्षेत्र में मध्य प्रदेश से जापान को होने वाला निर्यात निरंतर बढ़ रहा है। यह दोनों क्षेत्रों के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों का प्रमाण है। मोहन कैबिनेट का बड़े फैसले — भोपाल-इंदौर के बीच मेट्रो रेल प्रौद्योगिकी में शहरी विकास प्लानिंग, हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर जापान से सहयोग लिया जाएगा। — मध्यप्रदेश में कपास से कपड़ा, कपड़ा से रेडिमेड के वैल्यू एडीशन में जापान मध्यप्रदेश में अपना सहयोग प्रदान करेगा। — सिसमेक्स कार्पोरेशन के साथ उज्जैन मेडिकल डिवाइस में निवेश और अनुसंधान का आश्वासन भी जापान ने दिया है। — आटोमोटी सेक्टर और ईवी मैनिफेक्चरिंग के लिए भी जापान ने सहयोग करने की सहमति दी है। — सीएम जनकल्याण के दौरान 30 हजार 716 शिविर 42.96 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 41.7 लाख के करीब लोगों के आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। — सर्वाधिक 9 लाख आयुष्मान भारत योजना के आवेदन मिले थे जिनमें से 99 प्रतिशत आवेदनों को स्वीकृत कर निराकरण कर दिया गया। सबसे ज्यादा आवेदन भोपाल में 2.40 लाख , छिंदवाड़ा 2.18 लाख, उज्जैन में 2.13 लाख आवेदन आए। — प्रधानमंत्री आवास योजना में प्रथम चरण में एमपी में साढ़े 9.5 लाख मकान मिले थे जिनमें से 8.5 बनाकर मकान आवंटित किए हैं जिसके कारण मध्यप्रदेश को पुरस्कृत किया गया है। — पीएम आवास योजना 2.0 स्वीकृत हुई है जिसमें 10 लाख मकान मध्यप्रदेश में बनाए जाएंगे। BLC के तहत मकान बनाकर देंगे। अफॉर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप में अगर किसी व्यक्ति का प्लॉट या पट्टा है तो उसके खाते में पैसे भेजे जाएंगे। सिंगल वुमेन, ट्रांसजेंडर, दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिक के लिए बनेंगे मकान — अफॉर्डेबल रेंटल हाउसिंग योजना के तहत ऐसे लोगों को मकान बनाकर दिया जाएगा जो शहरी क्षेत्रों में आते हैं, या कहीं काम करते हैं। उनके लिए 10 लाख मकान बनाए जाएंगे। इनमें सिंगल वुमेन, ट्रांसजेंडर, दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं। — पीएम आवास योजना के जरिए एमपी को झुग्गी मुक्त बनाने की ओर काम किया जाएगा। — सेमी कंडक्टर में भी जापान के उद्योगपतियों ने निवेश … Read more

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को लेकर तैयारी शुरू, विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना को प्राथमिकता से किया जा रहा

 उज्जैन  धर्मधानी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा बीते दो दिनों से लगातार अधिकारियों के साथ बैठक कर योजना बना रहे हैं। शिप्रा स्नान, महाकाल दर्शन व भीड़ नियत्रंण को लेकर बिंदुवार चर्चा हो रही है, लेकिन इन सब के अलावा शहर के प्राचीन मंदिरों के उन्नयन का प्लान भी तैयार किया जा रहा है। इनमें महाकाल वन में स्थित चौरासी महादेव के मंदिर विशेष हैं। उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वार करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से इन्हें संवारने का प्लान तैयार किया जा रहा है। हजारों भक्त आते हैं 84 महादेव के दर्शन करने उज्जैन विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप कुमार सोनी ने बताया कि चौरासी महादेव मंदिरों का विकास प्राथमिकता से किया जा रहा है। प्रतिवर्ष देशभर से हजारों भक्त चौरासी महादेव के दर्शन करने उज्जैन आते हैं। श्रावण व अधिक मास में चौरासी महादेव दर्शन यात्रा भी निकाली जाती है। देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्राप्त हों इसको लेकर समग्र योजना बनाई जा रही है। सलाहकार से मंदिरों का अध्ययन कराकर डिजाइन तैयार कराई गई है। इन चीजों का होगा निर्माण विचार-विमर्श के बाद, जो योजना तैयार हुई है, उसमें मंदिरों का विकास, आसपास की खाली जमीन का विकास, बाउंड्रीवाल, पहुंच मार्ग, रंगरोगन, लाइटिंग, हरियाली तथा नाली आदि का निर्माण शामिल है। जिन मंदिरों में जिस प्रकार के काम की आवश्यकता होगी, वह कराया जाएगा। कुल मिलाकर मंदिरों के संपूर्ण विकास की योजना बनाई गई है। पिछले सिंहस्थ में भी हुआ था काम चौरासी महादेव मंदिरों को लेकर सिंहस्थ 2016 में भी योजना बनाई गई थी। इसके तहत कई मंदिरों में परिसर आदि का निर्माण भी कराया गया था। प्राचीन मंदिर काले पत्थरों से निर्मित हैं, लेकिन शिखर पर रंग-रोगन तथा मरम्मत आदि के काम किए गए थे। इस बार महापर्व के पहले से संधारण शुरू होगा, इससे काम में गुणवत्ता भी बनी रहेगी। भोपाल के लाल परेड मैदान में दिखी थी झलक इस वर्ष भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में उज्जैन के चौरासी महादेव मंदिरों की झलक दिखाई दी थी। महाराज विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी के मार्गदर्शन में विरासत से विकास के अमर नायक राजा भोज देव के स्वर्णिम कालखंड पर बनाई गई झांकी में लघु फिल्म के माध्यम से उज्जैन के चौरासी महादेव के मंदिरों को भी दिखाया गया था। इससे स्पष्ट है कि इन मंदिरों का विकास मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार की प्राथमिकता सूची में शामिल है।

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