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तेल और आटा की कमी, अब अफगानिस्तान से पाकिस्तान पर क्या होगा युद्ध और तबाही का ट्रिपल अटैक?

  नई दिल्ली अमेरिका और ईरान में युद्ध (US-Iran War) जारी है, जिससे दुनिया में तेल संकट गहराया हुआ है और पाकिस्तान इससे पहले ही बेहाल नजर आ रहा है, दूसरी ओर पड़ोसी देश पर कर्ज (Pakistan Debt) भी लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच अफगानिस्तान के साथ जंग (Pakistan-Afghanistan War) से उसे तगड़ी मार पड़ी है. एक साथ ट्रिपल अटैक ने पाकिस्तान का तेल निकाल दिया है. पहले से ही आर्थिक संकट के चलते भारी भरकम कर्ज के बोझ तले देश का ईरान युद्ध से तेल बंद हुआ, तो अफगानिस्तान से साथ जंग ने देश की महंगाई बढ़ाकर इकोनॉमी पर संकट बढ़ा दिया है। लगातार बढ़ रहा कर्ज का बोझ  पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहा है और इससे उबरने के लिए वो तमाम मित्र देशों के साथ ही आए दिन आईएमएफ और विश्व बैंक के सामने कटोरा लेकर मदद मांगता नजर आता रहा है. हालांकि, भारी भरकम आर्थिक मदद मिलने के बाद भी देश के हालात बदतर ने हुए हैं. पाकिस्तानी मीडिया की एक रिपोर्ट को देखें, तो Pakistan पर जनवरी 2026 तक कुल कर्ज 79,322 अरब पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान द्वारा जारी डॉक्युमेंट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के कर्ज में घरेलू उधार में तेज उछाल आया है. केंद्रीय बैंक (SBP)  के आंकड़ों को देखें, देश की संघीय सरकार का घरेलू कर्ज जनवरी 2026 तक 55,978 पाकिस्तानी अरब रुपये तक पहुंच गया था. इसके अलावा  बाहरी कर्ज 23,344 अरब पाकिस्तानी रुपये हो गया. जो जीडीपी का करीब 70% है और पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली का बड़ा उदाहरण है। यहां बता दें कि पाकिस्तान आईएमएफ का सबसे बड़ा कर्जदार है और 1958 से अब तक 26 आईएमएफ बेलआउट कार्यक्रमों के जरिए 34 अरब डॉलर के आसपास की मदद ले चुका है. तमाम रिपोर्ट्स में पाकिस्तानी इकोनॉमिस्ट बताते नजर आए हैं, कि IMF के कर्ज के सहारे चल रहा पाकिस्तान पहले से ही दिवालिया स्थिति में है और वर्तमान के बिगड़े ग्लोबल हालात इकोनॉमी को गहरी चोट पहुंचा सकते हैं। मिडिल ईस्ट में युद्ध, PAK में कोहराम पाकिस्तान पर दूसरा अटैक मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध से हुआ है. दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग से तेल संकट गहरा गया है और पूरी तरह तेल के आयात पर निर्भर पाकिस्तान में कोहराम मचा है. हालात ये है कि पाकिस्तान में तेल की कमी के चलते पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए गए, सरकारी गाड़ियों में 60% कटौती, सांसदों और मंत्रियों की सैलरी कट, सरकारी विभागों के गैर-जरूरी खर्च में 20% की कटौती, मीटिंगों को वर्चुअल और पढ़ाई को ऑनलाइन में शिफ्ट करना समेत अन्य उपाय लागू किए गए हैं, जो कोरोना काल जैसे ही हैं। Middle East War से पाकिस्तान की बदहाल इकोनॉमी को और झटका लग सकता है. डॉन की बीते दिनों आई रिपोर्ट के मुताबिक, खुद पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री पूर्व वित्त मंत्री हाफिज पाशा ने चेतावनी दी है कि अगर ये युद्ध जारी रहा और क्रूड प्राइस 100 डॉलर के पार बने रहे, तो Pakistan GDP पर 1-1.5% का निगेटिव इम्पैक्ट पड़ सकता है. पेट्रोलियम आयात में बढ़ोतरी के चलते अगले साल पाकिस्तान को 12-14 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने एक और संकट की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के बराबर 120 डॉलर के हाई पर पहुंचती हैं, तो पाकिस्तान में महंगाई कोहराम मचा सकती है और फिर उसी दौर के करीब 30% पर पहुंच सकती है. उस समय लोग आटा, दाल के लिए अपनी जान पर खेलते नजर आए थे, तो वहीं अब फिर से फ्यूल की कमी पाकिस्तान का तेल निकालती नजर आ रही है। पाकिस्तान में मिडिल ईस्ट की जंग के ताजा असर की बात करें, तो पाकिस्तान के ब्‍यूरो ऑफ स्‍टैटिस्टिक्‍स के साप्ताहिक महंगाई के आंकड़े के मुताबिक, बीते 11 मार्च को समाप्त सप्ताह में महंगाई सूचकांक SPI सालाना आधार पर 6.44% बढ़ गया. पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल के दाम बढ़ने के साथ ही खाद्य पदार्थों की महंगाई दर में तेज इजाफा हुआ है. ब्रेड, दूध से लेकर आटा-दाल-चावल तक खाने-पीने की तमाम चीजों के दाम बेतहाशा बढ़े हैं। अफगानिस्तान से युद्ध ने बढ़ाई मुसीबत पहले से ही बदहाल पाकिस्तान के लिए मुसीबत अफगानिस्तान के साथ चल रहे उसके युद्ध ने और भी बढ़ा दी है. हालांकि, ये संघर्ष 2025 के अंत में ही सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद शुरू हो गया था और अब ये भीषण रूप ले चुका है. युद्ध की टेंशन में आयात और निर्यात सुस्त पड़ गया है. सीमा पर तनाव ने जरूरी सामानों की आवाजाही बाधित कर दी है, जिससे पाकिस्तान में तमाम जरूरी चीजों के दाम में तेज इजाफा हुआ है और देश के लोगों पर महंगाई की तगड़ी मार पड़ रही है। खासतौर पर तोरखम और चमन जैसे बॉर्डर रूट्स बंद होने से ताजे सामान बंद हो गए हैं, तो वहीं पाकिस्तान में कारोबारियों की मुसीबत को अफगान कोयले की कमी ने बढ़ा दिया है. सीमेंट निर्माता कंपनियों की टेंशन भी कोयले की आपूर्ति बंद होने से चरम पर पहुंच गई है।

पाकिस्तान ने काबुल में आतंकी ठिकाने को निशाना बनाकर 400 लोगों की जान ले ली, मरीज भी थे शामिल

काबुल अफ़गानिस्तान के उप-सरकारी प्रवक्ता ने मंगलवार सुबह बताया कि अफ़गान राजधानी काबुल में नशा करने वालों का इलाज करने वाले एक अस्पताल पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 400 हो गई है।  सोशल मीडिया पोस्ट में हमदुल्ला फितरत ने कहा कि सोमवार देर रात हुए इस हमले में अस्पताल का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया. उन्होंने बताया कि अब तक 400 लोग मारे जा चुके हैं और करीब 250 अन्य के घायल होने की खबर है।  फितरत ने आगे कहा कि बचाव दल इमारत में लगी आग पर काबू पाने और मलबे से शवों को निकालने का काम कर रहे हैं।  पाकिस्तान क्या बोला? पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के दावे को झूठा और जनता की राय को गुमराह करने के मकसद से किया गया बताकर खारिज कर दिया. पाकिस्तान ने कहा कि उसने सोमवार को काबुल और नंगरहार प्रांत में केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था।  अफ़गानिस्तान की तालिबान सरकार के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्ला फ़ितरत के मुताबिक, काबुल के उमर एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर हमला स्थानीय समय के अनुसार रात लगभग 9 बजे (16:30 GMT) हुआ. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह हॉस्पिटल 2,000 बेड की सुविधा वाला है और इस हमले में इमारत का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया।  ‘हम फिर से उठ खड़े होंगे…’ अफगानिस्तानी क्रिकेटर राशिद खान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “काबुल में पाकिस्तानी हवाई हमलों के कारण आम नागरिकों के हताहत होने की ताज़ा रिपोर्टों से मुझे गहरा दुख हुआ है. आम नागरिकों के घरों, शिक्षण संस्थानों या चिकित्सा सुविधाओं को निशाना बनाना एक युद्ध अपराध है. इंसानी जानों के प्रति इस तरह की शदीद गफलत, खासकर रमज़ान के पवित्र महीने में, बेहद घिनौनी और गहरी चिंता का विषय है. इससे केवल फूट और नफ़रत ही बढ़ेगी।  उन्होंने आगे कहा कि मैं संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली अन्य एजेंसियों से अपील करता हूं कि वे इस ताज़ा जुल्म जांच करें और इसके दोषियों को जवाबदेह ठहराएं. इस मुश्किल घड़ी में मैं अपने अफ़ग़ान लोगों के साथ खड़ा हूं. हम इस सदमे से उबरेंगे और एक राष्ट्र के रूप में हम फिर से उठ खड़े होंगे. हम हमेशा ऐसा ही करते आए हैं।  ‘जेट ने बम गिराए…’ स्थानीय टेलीविज़न चैनलों ने ऐसे फुटेज दिखाए, जिनमें दमकलकर्मी एक इमारत के मलबे के बीच उठ रही लपटों को बुझाने के लिए संघर्ष करते नज़र आ रहे थे।  हॉस्पिटल में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करने वाले 31 साल के ओमिद स्तानिकज़ई ने AFP समाचार एजेंसी को बताया कि हमले से पहले उन्होंने आसमान में लड़ाकू विमानों को गश्त करते हुए सुना था. हमारे चारों ओर सैन्य टुकड़ियां थीं. जब इन सैन्य टुकड़ियों ने जेट पर गोलीबारी की, तो जेट ने बम गिराए और आग लग गई. सभी मृतक और घायल नागरिक थे।  पाकिस्तान के द्वारा यह हमला अफ़ग़ान अधिकारियों के उस बयान के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच उनकी साझा सीमा पर गोलीबारी हुई थी और अफ़ग़ानिस्तान में चार लोग मारे गए थे. यह घटना ऐसे वक्त में हुई है, जब इन पड़ोसी देशों के बीच पिछले कई वर्षों की सबसे भीषण लड़ाई तीसरे हफ़्ते में प्रवेश कर गई है।  ‘इंसानियत के खिलाफ जुर्म…’ अफ़ग़ान सरकार के एक और प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने इससे पहले सोशल मीडिया पर अस्पताल पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है और काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र को निशाना बनाया है. उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान सरकार इस तरह के कृत्य को सभी सिद्धांतों के खिलाफ और इंसानियत के खिलाफ जुर्म मानती है।  ‘आतंकवादियों को मदद देने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर…’ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के प्रवक्ता मुशर्रफ़ ज़ैदी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि काबुल में किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया।  सोशल मीडिया पोस्ट में पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों में सैन्य ठिकानों और आतंकवादियों को मदद देने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर को सटीक रूप से निशाना बनाया गया, जिसमें अफ़ग़ान तालिबान के तकनीकी उपकरणों और गोला-बारूद के गोदाम शामिल हैं. इसके साथ ही काबुल और नंगरहार में मौजूद अफ़ग़ानिस्तान-स्थित पाकिस्तानी लड़ाकों को भी निशाना बनाया गया. मंत्रालय ने आगे कहा कि इन ठिकानों का इस्तेमाल बेकसूर पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था। 

राजस्थान में IED से बम ब्लास्ट की साजिश, पाकिस्तान से भेजे गए विस्फोटक का 4 दिन तक इंतजार

अजमेर  सरहद पार से ड्रोन के जरिए भेजे गए मौत के सामान (RDX) ने राजस्थान से लेकर हरियाणा तक खौफनाक साजिश का जाल बुना था। अंबाला में करीब 2 किलो विस्फोटक के साथ पकड़े गए तीन आतंकियों ने जो खुलासे किए हैं, उसने राजस्थान पुलिस और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। इस साजिश का मुख्य सिरा अजमेर के लौंगिया मोहल्ला से जुड़ा है, जहां का निवासी अली अकबर उर्फ बाबू इस आतंकी नेटवर्क का अहम मोहरा निकला। हनुमानगढ़ था ‘टारगेट नंबर-1’ पूछताछ में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि आतंकियों की पहली पसंद अंबाला नहीं, बल्कि राजस्थान का हनुमानगढ़ था। साजिश के मुताबिक, हनुमानगढ़ में बम धमाका करने के लिए आईईडी (IED) तो वहां पहुंचा दी गई थी, लेकिन ऐन वक्त पर पाकिस्तान से आरडीएक्स की खेप नहीं पहुंच पाई। इस ‘सप्लाई फेलियर’ की वजह से राजस्थान एक बड़े धमाके से बाल-बाल बच गया। योजना विफल होने पर चार दिन बाद आईईडी को वापस मंगा लिया गया था। अजमेर के ‘बाबू’ ने भेजी थी लोकेशंस की वीडियो गिरफ्तार आरोपी अली अकबर उर्फ बाबू ने कुबूला है कि उसने पाकिस्तान में बैठे आतंकी शहजाद भट्टी के इशारे पर राजस्थान, दिल्ली और पंजाब के महत्वपूर्ण ठिकानों की रेकी की थी। इन जगहों के वीडियो बनाकर बाकायदा व्हाट्सएप के जरिए पाकिस्तान भेजे गए थे, ताकि बड़े टारगेट चुने जा सकें। अंबाला में ‘एक्टिव बम’ के साथ पकड़े गए हनुमानगढ़ का प्लान फेल होने के बाद आतंकियों ने अंबाला के सैन्य ठिकानों और माता बाला सुंदरी मंदिर को निशाने पर लिया। आरोपी पैशन प्रो मोटरसाइकिल पर टिफिन बम लेकर जा रहे थे, जो पूरी तरह एक्टिव था। एसटीएफ ने समय रहते इन्हें दबोच लिया, वरना 2 किलो आरडीएक्स 200 मीटर के दायरे में तबाही मचाने और लगभग 250 लोगों की जान लेने के लिए काफी था। NIA की एंट्री, राजस्थान में अलर्ट मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी इस केस को अपने हाथ में ले सकती है। चूंकि एक आरोपी अजमेर का है और हनुमानगढ़ को निशाना बनाने की कोशिश हुई थी, इसलिए राजस्थान के सुरक्षा घेरे को और कड़ा कर दिया गया है। फिलहाल आरोपी 7 दिन के रिमांड पर हैं, जिनसे और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

ड्रोन हमलों के जवाब में पाकिस्तान की कंधार में एयरस्ट्राइक, सैन्य ठिकाने को किया लक्षित

कंधार पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कंधार इलाके में तालिबान से जुड़े सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है. पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई हाल ही में उसके शहरों के ऊपर देखे गए ड्रोन हमलों के जवाब में की गई। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में कई ड्रोन पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों के ऊपर देखे गए थे. सुरक्षा एजेंसियों ने इन ड्रोन को समय रहते रोक लिया, इसलिए वे अपने निशाने तक नहीं पहुंच पाए. हालांकि कुछ जगहों पर ड्रोन के मलबे गिरने से नुकसान हुआ. क्वेटा में मलबा गिरने से दो बच्चे घायल हो गए, जबकि कोहाट और रावलपिंडी में भी कुछ लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। ड्रोन की गतिविधि सामने आने के बाद एहतियात के तौर पर इस्लामाबाद के आसपास का हवाई क्षेत्र कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया. इसके बाद पाकिस्तान ने कहा कि नागरिक इलाकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना “रेड लाइन पार करने” जैसा है। कंधार में मौजूद ठिकाने से ड्रोन हमले की प्लानिंग का दावा पाकिस्तान का आरोप है कि इन ड्रोन हमलों की योजना अफगानिस्तान के कंधार में मौजूद ठिकानों से बनाई गई थी. इसी वजह से पाकिस्तान ने वहां एयरस्ट्राइक करते हुए तकनीकी ठिकानों और हथियारों के भंडार को निशाना बनाया. समा टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इन ठिकानों का इस्तेमाल तालिबान से जुड़े लड़ाके करते थे। UN के लिए इस्तेमाल होने वाले फ्यूल डिपो पर PAK का हमला इस बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने भी पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं. काबुल का कहना है कि शुक्रवार को पाकिस्तान ने राजधानी काबुल और पूर्वी अफगानिस्तान के कुछ इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम छह आम लोगों की मौत हो गई और करीब 15 लोग घायल हो गए। अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तानी विमानों ने कंधार एयरपोर्ट के पास मौजूद निजी एयरलाइन Kam Air के फ्यूल डिपो को भी निशाना बनाया. उनके मुताबिक यह ईंधन नागरिक और संयुक्त राष्ट्र की उड़ानों के लिए इस्तेमाल होता है। ड्रोन हमलों के बीच बम धमाका पाकिस्तान ने आम लोगों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है. पाकिस्तान का कहना है कि उसकी कार्रवाई सिर्फ पाकिस्तानी तालिबान (TTP) के लड़ाकों और उनके नेटवर्क के खिलाफ है. इसी बीच पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी जिले लक्की मरवत में सड़क किनारे हुए एक बम धमाके में सात पाकिस्तानी पुलिसकर्मियों की मौत हो गई. इस घटना ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को X पर दावा किया कि पूर्वी प्रांत कुनार और नंगरहार में सीमा पर तैनात उसकी सेना ने पाकिस्तान की एक चौकी पर कब्जा कर लिया और 14 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया. हालांकि इस्लामाबाद में पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने इस दावे को बेबुनियाद बताया और कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

समुद्र में भारत की गुप्त ढाल: पनडुब्बियों का नेटवर्क, चीन-पाकिस्तान बेबस

नई दिल्ली भारत ने अपने दुश्मनों से निपटने के लिए समुद्र के भीतर पनुडुब्बियों का अभेद्य किला बना लिया है। यह किला इतना ताकतवर है यह अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों से पार पाने में बेहद कारगर और मारक साबित होगा। भारत के इस किले में न्यूक्लियर पॉवर्ड समेत हर तरह की पनडुब्बियां हैं, जो दुश्मन की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। भारत ने अपने दोनों तरफ के समुद्र में पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है। भारत ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर स्वदेशी पनडुब्बियां बनाने के लिए भी तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं, मगर उसके नौसेना के बेड़े में शामिल होने में अभी एक दशक लग सकता है। भारत ने अपने पश्चिमी और पूर्वी तट पर समंदर के पास पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है, जिससे भारत के चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन अपनी हद पार करने से पहले सौ बार सोचेंगे। इसमें हर तरह की पनडुब्बियां शामिल हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय नौसेना के बेड़े में करीब 20-21 मारक पनडुब्बियां हैं। इनमें से 17 तो डीजल पॉवर्ड अटैक पनडुब्बियां हैं। इसके अलावा, कम से कम 2 न्यूक्लियर पॉवर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी हैं। इसके अलावा, एक पनडुब्बी रूस से लीज पर ले रखी है। वहीं, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) आईएनएस अरिदमन (S-4) को अप्रैल या मई तक सेवा में शामिल किए जाने की उम्मीद है। पनडुब्बी वर्तमान में समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में सेवा में शामिल होने की संभावना है। आईएनएस अरिदमन के शामिल होने के साथ ही भारत के पास सामरिक बल कमान (एसएफसी) के तहत पहली बार तीन परिचालन एसएसबीएन हो जाएंगे। NTI पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां पश्चिमी तट मुंबई और पूर्वी तट पर विशाखापत्तनम के पास समंदर में तैनात हैं। भारत ने हाल ही में दो पनडुब्बी अड्डे बनाए हैं। पहला मुंबई से 500 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कारवार है। दूसरा, आईएनएस वर्षा नामक एक गुप्त नौसैनिक अड्डा है, जो चीन के हालिया उन्नयन के जवाब में भारत की नौसैनिक परमाणु क्षमताओं को बढ़ाने की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है। यह अड्डा पूर्वी तट पर काकीनाडा के पास स्थित है और इसमें पनडुब्बियों के लिए भूमिगत ठिकाने होंगे। फरवरी, 2015 में भारत सरकार ने स्वदेशी 6 न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक सबमरींस को अपने जंगी बेड़े में शामिल करने की परियोजना को मंजूरी दी थी। ये पनडुब्बियां विशाखापत्तनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में बननी हैं। भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर है, जिसकी सीमा पाकिस्तान को छूती है। वहीं, पूर्वी तट के पास बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर है, जहां चीन के जासूसी जहाज अक्सर मंडराते रहते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक क्लास की पनडुब्बी की स्वदेशी क्षमता हासिल करना अभी भी एक दशक दूर का लक्ष्य है। माना जा रहा है कि इस तरह की पहली पनडुब्बी 2036 तक ही तैयार हो पाएगी। भारत के पास पहले से ही अरिहंत श्रेणी की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली और परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियां (एसएसबीएन) मौजूद हैं।

महिलाओं के सहारे आतंक फैलाने की कोशिश, लश्कर-ए-तैयबा की रणनीति उजागर

नई दिल्ली पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा महिलाओं के लिए दो नए ट्रेनिंग सेंटर बनाने की तैयारी कर रहा है. इन सेंटर को ‘मरकज’ के रूप में डेवलप किया जाएगा, जहां महिलाओं को संगठन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के लिए ट्रेनिंग दिया जाएगा. यह कदम इस संगठन की रणनीति में संभावित बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि अब तक लश्कर-ए-तैयबा अपने महिला विंग का उपयोग मुख्य रूप से राजनीतिक लामबंदी और प्रचार से जुड़े कामों के लिए करता रहा है. महिला विंग की प्रमुख इफ्फत सईद की हालिया टिप्पणियां इस बदलाव की तरफ इशारा करती हैं. माना जा रहा है कि आने वाले समय में महिलाओं को ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) जैसी भूमिकाओं में शामिल किया जा सकता है.  OGW नेटवर्क वे लोग होते हैं जो सीधे हथियारबंद गतिविधियों में शामिल नहीं होते, लेकिन संगठन के लिए जमीन पर सहयोग, सूचना को इकट्ठा और अन्य सहायता प्रदान करते हैं. महिलाओं को इस नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश लश्कर के रणनीतिक विस्तार के रूप में देखी जा रही है. इस क्रम में संगठन के वरिष्ठ आतंकी अब्दुर रऊफ ने इस्लामाबाद स्थित मरकज कुबा अल इस्लाम का दौरा किया है. जानकारी के अनुसार, इस केंद्र का विस्तार किया जा रहा है और इसमें महिलाओं के लिए ख़ास ट्रेनिंग सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं. सुरक्षा एजेंसियां इस पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और सतर्कता बरत रही हैं. महिलाओं के लिए इन नए कैम्पों के जरिए लश्कर-ए-तैयबा अपने नेटवर्क को नए और व्यापक तरीकों से मजबूत करने की कोशिश कर सकता है. यह विकसित होती स्थिति क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. भारत में सुरक्षाबल लश्कर-ए-तैयबा की हर नए कदम पर खास नजर बनाई हुई है.   

भारत के कदम से पाकिस्तान में हड़कंप, कहा– अब भूख-प्यास का खतरा बढ़ा

इस्लामाबाद पलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऐसे रणनीतिक कदम उठाए हैं जो कि उसकी टेंशन बढ़ाते ही चले जा रहे हैं। झेलम और चिनाब के बहाव कम करने को लेकर शहबाज सरकार एकदम से बिलबिला गई है। हाल ही में पाकिस्तान में प्रांतीय स्तर की एक बड़ी बैठक हुई और इसमें वॉटर ऐंड पावर डिवेलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन मोहम्मद सईद ने कहा कि भारत झेलम और चिनाब प्रोजेक्ट पर 60 अरब डॉलर खर्च कर रहा है और इससे पाकिस्तान में हाहाकार मचने वाला है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद इन निदियों के जल रोकने की कैपिसीटी 15 दिन से बढ़कर सीधे 60 दिन हो जाएगी। घबरा गया पाकिस्तान पाकिस्तान भारत के इस प्रोजेक्ट से बुरी तरह घबराया हुआ है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान को सूखे का डर सताने लगा है। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि जब फसलों की पानी की जरूरत होगी तो नदियों का बहाव बेहद कम हो जाएगा। वहीं मॉनसून में भारत ज्यादा पानी छोड़ सकता है इससे पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा डूब जाएगा। भारत के इस कदम से परेशान पाकिस्तान के अधिकारियों ने सरकार को सलाह दी है कि वहां भी बड़े बांध बनाने की जरूरत है जिससे पानी को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि समस्या यही है कि ये नदियां भारत से ही होकर पाकिस्तान में जाती हैं। ऐसे में बांध बनाने के बाद भी उसकी मुसीबत कम होने वाली नहीं है। पाकिस्तान का जल मंत्रालय नदियों के पानी को लेकर बेहद परेशान है। महीने भर पहले पाकिस्तान ने इसको लेकर भारत से जवाब मांगने शुरू कर दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने बगलिहार डैम पर पानी रोक लिया है दिसंबर महीने में देखा गया था कि बगलिहार में पानी की कमी हो गई है। झेलम और चिनाब में कम हआ पानी पाकिस्तान का कहना है कि भारत झेलम और चिनाब का पानी कभी रोकता है और कभी छोड़ता है। इससे पाकिस्तान में पानी की कमी देखी जा रही है। सिंधु जल पर पाकिस्तान के एक अधइकारी ने कहा कि पाकिस्तान में मंगला बांध तक पानी का बहाव काफी कम हो गया है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक शहबाज सरकार झेलम के बहाव पर नजर रख रही है। परेशान पाकिस्तान बार-बार पत्र भेजकर भारत के आगे गिड़गिड़ा रहा है। बता दें कि पहलगाम महले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता निलंबित करदिया था। यह पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा घाव साबित हो रहा है। जानकारी के मुताबिक भारत अब रावी का पानी भी रोकने का प्लान बना रहा है। जानकारी के मुताबिक शहपुर कंडी डैम का काम भी जल्द पूरा होने वाला है। इससे रावी का पानी रोककर इसे कठुआ और सांबा भेजा जाएगाय़ पाकिस्तान को जाने वाला ज्यादातर पानी रोक लिया जाएगा। पाकिस्तान की लगभग 90 फीसदी खेदी सिंदु नदी सिस्म पर ही निर्भर है। पाकिस्तान के पास पानी रोकने की क्षमता ना के बराबर है।

वर्ल्ड कप में भारत से हार के बाद पाकिस्तान के हर खिलाड़ी पर 50 लाख का जुर्माना, नकवी के बयान ने मचाई हलचल

इस्लामाबाद  आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में खराब प्रदर्शन का खामियाजा अब पाकिस्तान टीम के खिलाड़ियों को सीधे अपनी जेब से भुगतना पड़ेगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने सख्त रुख अपनाते हुए टीम के हर खिलाड़ी पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है. वर्ल्ड कप के सुपर-8 से बाहर होने और टीम इंडिया से ग्रुप स्टेज में मिली करारी हार के बाद यह कार्रवाई की गई है. हर खिलाड़ी पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टी20 विश्व कप खेलने वाले पाकिस्तान के हर खिलाड़ी पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये (करीब 16 लाख भारतीय रुपये) का जुर्माना लगाया गया है. यह रकम खिलाड़ियों की सैलरी या मैच फीस से काटी जाएगी. यानी पीसीबी खुद यह पैसा वसूल करेगा. लगातार चौथे आईसीसी टूर्नामेंट में पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच पाई है. ऐसे में बोर्ड ने साफ संदेश दिया है कि खराब प्रदर्शन अब सीधे आर्थिक नुकसान में बदलेगा. पाकिस्तान क्रिकेट में पहले भी नतीजों को लेकर सख्ती हुई है, लेकिन इस बार इतनी बड़ी रकम का जुर्माना चर्चा का विषय बन गया है. टूर्नामेंट में कैसा रहा प्रदर्शन पाकिस्तान ने अपने सभी मैच श्रीलंका में खेले, लेकिन घरेलू जैसे हालात का भी फायदा नहीं उठा सका. शुरुआत में उसने नीदरलैंड्स को 3 विकेट से हराया, हालांकि वह मैच भी काफी करीबी था. इसके बाद अमेरिका को 32 रन से हराया. लेकिन भारत के खिलाफ 61 रन की बड़ी हार ने टीम की कमजोरियां उजागर कर दीं. इसके बावजूद पाकिस्तान किसी तरह सुपर-8 में पहुंच गया. सुपर-8 में भी मुंह की खाई  सुपर-8 में कहानी पूरी तरह बदल गई. न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबला बारिश में रद्द हो गया. फिर इंग्लैंड ने 2 विकेट से हरा दिया. श्रीलंका के खिलाफ जीत जरूर मिली, लेकिन खराब नेट रन रेट के कारण टीम अगले दौर में जगह नहीं बना सकी. कुल मिलाकर, टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा और अब खिलाड़ियों को इसकी सजा आर्थिक रूप से भी झेलनी पड़ेगी.  भारत से हार ने बना दिया नकवी का मजाक दरअसल, इस वर्ल्ड कप से पहले पाकिस्तान ने जमकर ड्रामेबाजी की थी. पाकिस्तान ने टीम इंडिया के साथ अपने मुकाबले के बायकॉट का ऐलान किया था. कई दिनों तक पीसीबी चीफ नकवी की नौटंकी चली. लेकिन आखिरकार पाकिस्तान मान गया और जब भारत से भिड़ा तो टीम इंडिया ने उसे बुरी तरह से हरा दिया. पाकिस्तान की इस हार ने उसे अपने ही देश में मजाक का पात्र बना दिया. इसलिए पीसीबी अपने खिलाड़ियों से बुरी तरह से खिसियाया हुआ है. 

सीमेंट सूखा नहीं, अफगानियों ने फिर से हमला कर खोदा PAK का नूर खान बेस

लाहौर  पाकिस्तान के सबसे महत्वपूर्ण नूर खान एयरबेस की हालत इस समय बहुत खराब हो गई है. सोशल मीडिया पर लोग मजाक उड़ा रहे हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन हमले के बाद अभी सीमेंट भी सूखा नहीं था कि अफगानों ने फिर खोद दिया. यह मजाक इसलिए बन रहा है क्योंकि मई 2025 में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान पर सटीक हमले किए थे. उस समय नूर खान एयरबेस को भी निशाना बनाया गया था. बेस पर काफी नुकसान हुआ था.  पाकिस्तान की सेना दिन-रात मेहनत करके उसे ठीक कर रही थी. लेकिन अब मार्च 2026 में अफगानिस्तान की तालिबान सेना ने अचानक हवाई हमला कर दिया. अफगान रक्षा मंत्रालय ने साफ कहा कि यह हमला पाकिस्तान के हाल के हवाई हमलों का जवाब था. नतीजा यह हुआ कि नूर खान बेस की मरम्मत अधूरी रह गई और उसकी हालत पहले से भी ज्यादा खराब हो गई. आम पाकिस्तानी नागरिक भी डर रहे हैं कि उनकी सेना अब कितने दिनों तक टिक पाएगी. नूर खान एयरबेस पर अफगान हमला, रावलपिंडी का दिल दहल गया नूर खान एयरबेस रावलपिंडी शहर के पास स्थित है. यह पाकिस्तान एयर फोर्स का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बेस माना जाता है. यहां कमांड सेंटर, फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट प्लेन और कई गोला-बारूद के गोदाम हैं. 2 मार्च 2026 को अफगान एयर फोर्स ने सटीक हवाई हमले किए. अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उनके पायलटों ने बिना किसी गलती के निशाना साधा. हमले में बेस के कई हिस्से पूरी तरह तबाह हो गए. स्थानीय लोगों ने रात भर विस्फोटों की तेज आवाजें सुनीं. पाकिस्तान की तरफ से अभी तक पूरा नुकसान बताना बाकी है लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें धुआं और आग दिख रही है. यह हमला इसलिए ज्यादा चौंकाने वाला है क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने दावा किया था कि बेस को जल्दी ठीक कर लिया जाएगा. लेकिन अफगानों ने इतनी जल्दी जवाब दे दिया कि पाकिस्तानी सेना हैरान रह गई. अब बेस की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है लेकिन लोग कह रहे हैं कि हालत पूरी तरह से बेहाल है. क्वेटा में 12वीं डिवीजन मुख्यालय पर हमला, बलूचिस्तान में अफरा-तफरी अफगान हमलों का दूसरा बड़ा निशाना बलूचिस्तान प्रांत का क्वेटा शहर है. यहां पाकिस्तान आर्मी की 12वीं डिवीजन का मुख्यालय है. यह मुख्यालय पूरे बलूचिस्तान की सुरक्षा देखता है. यहां हजारों सैनिक तैनात रहते हैं. अफगान रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उनके ड्रोन और हवाई हमलों ने इस मुख्यालय को भी सीधा नुकसान पहुंचाया. हमला इसलिए किया गया क्योंकि पाकिस्तान ने पहले काबुल और कंधार पर बमबारी की थी. क्वेटा में हमले के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर दौड़ने लगे. 12वीं डिवीजन का मुख्यालय बलूच अलगाववादियों से भी लड़ता है इसलिए इसका नुकसान पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका है. अफगान पक्ष कह रहा है कि यह हमला सिर्फ बदला है और वे आगे भी पाकिस्तानी ठिकानों पर नजर रख रहे हैं. पाकिस्तान सरकार ने क्वेटा में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं ताकि खबरें ज्यादा न फैलें. मोहमंद एजेंसी में ख्वाजाई मिलिट्री कैंप पर हमला, सीमा पर तनाव चरम पर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की मोहमंद एजेंसी में ख्वाजाई मिलिट्री कैंप भी अफगान हमलों का शिकार बना. यह कैंप अफगानिस्तान की सीमा से सिर्फ कुछ किलोमीटर दूर है. यहां पाकिस्तान की फौज की कई यूनिट्स तैनात रहती हैं जो सीमा पर निगरानी करती हैं. अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह हमला पाकिस्तान के सीमा उल्लंघन का सीधा जवाब था. हमले में कैंप के कई टेंट और वाहन क्षतिग्रस्त हो गए. दोनों तरफ से गोलीबारी भी हुई. स्थानीय आदिवासी लोग अब डर के मारे घरों में छिपे बैठे हैं। स्कूल और बाजार बंद हैं. ख्वाजाई कैंप का महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि यहां से टीटीपी जैसे समूहों पर कार्रवाई होती है. अफगानिस्तान का आरोप है कि पाकिस्तान इन समूहों को मदद देता है. इस हमले के बाद सीमा पर तनाव और बढ़ गया है. दोनों देशों की फौजें अलर्ट पर हैं और हर घंटे नई खबरें आ रही हैं. पेशावर एयरबेस और अन्य सीमा ठिकानों पर भी हमले  अफगान सेना ने सिर्फ तीन ठिकानों तक हमले नहीं रोके. उनके बयान के मुताबिक पेशावर एयरबेस और सीमा के पास कई छोटे-बड़े मिलिट्री पोस्ट भी निशाने पर आए. पेशावर एयरबेस पाकिस्तान एयर फोर्स का दूसरा बड़ा केंद्र है जहां कई लड़ाकू विमान रखे जाते हैं. अफगानों ने यहां भी ड्रोन हमले किए जिससे कुछ इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं. इसके अलावा बन्नू और वाना जैसे इलाकों के कैंपों पर भी गोलीबारी हुई.  अफगान रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ये सब हमले पाकिस्तान के काबुल और कंधार पर किए गए हमलों का बदला हैं. पिछले छह महीनों में दोनों देशों के बीच झड़पें बढ़ गई हैं. इन सब हमलों से पाकिस्तान की पूरी रक्षा व्यवस्था चरमरा गई है. सेना को अब कई मोर्चों पर एक साथ लड़ना पड़ रहा है. तनाव क्यों बढ़ रहा है और आगे क्या हो सकता है? अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पुरानी दुश्मनी अब खुलकर सामने आ गई है. दोनों देशों की सीमा को डूरंड लाइन कहते हैं लेकिन इसे लेकर बहुत विवाद है. पाकिस्तान कहता है कि अफगानिस्तान से टीटीपी आतंकी आकर हमले कर रहे हैं. तालिबान सरकार पाकिस्तान पर आरोप लगाती है कि वह उनके खिलाफ ग्रुपों को मदद देता है.  अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पुरानी दुश्मनी अब खुलकर सामने आ गई है. दोनों देशों की सीमा को डूरंड लाइन कहते हैं लेकिन इसे लेकर बहुत विवाद है. पाकिस्तान कहता है कि अफगानिस्तान से टीटीपी आतंकी आकर हमले कर रहे हैं. तालिबान सरकार पाकिस्तान पर आरोप लगाती है कि वह उनके खिलाफ ग्रुपों को मदद देता है.  मई 2025 के भारतीय हमले के बाद पाकिस्तान कमजोर हुआ तो अफगानिस्तान ने इसका फायदा उठाते हुए जवाबी हमले शुरू कर दिए. अब मार्च 2026 में स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि दोनों तरफ से हवाई हमले हो रहे हैं. आम लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं. हजारों परिवार सीमा से भाग रहे हैं.      

पाकिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी दूतावास पर किया हंगामा, 23 मौतें, तनाव बढ़ा

 कराची इजरायली-अमेरिकी हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में जमकर हंगामा हुआ. कराची में शिया संगठनों ने अमेरिकी कॉन्सुलेट के पास तोड़फोड़ और आगजनी की थी, जिसके बाद यूएस मिलिट्री ने फायरिंग कर दी थी. इस झड़प में मारे जाने वाले पाकिस्तानियों का आंकड़ा 10 पहुंच गया है. प्रदर्शनकारी सुल्तानाबाद से माई कोलाची होते हुए कॉन्सुलेट की ओर बढ़ रहे थे. भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस पर जमकर पथराव किया. कराची के अलावा पाकिस्तान के स्कार्दु और लाहौर में भी खामेनेई की मौत को लेकर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन हुए. स्कार्दू में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी कार्यालय में आग लगा दी थी, इस दौरान 11 लोगों की मौत हो गई. वहीं, इस्लामाबाद में भी प्रदर्शनकारियों में से दो लोगों की जान चली गई. कराची में कड़ी सुरक्षा हिंसा के बाद कराची प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है. पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात किया गया है. एमटी खान रोड और माई कोलाची रोड को पूरी तरह बंद कर दिया है. ट्रैफिक पुलिस ने आम जनता को प्रभावित इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी है.  खामेनेई की मौत के बाद जगह-जगह प्रदर्शन ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत से कई जगहों पर शोक का माहौल है. कराची में मस्जिदों और इमामबाड़ों में खामेनेई की मौत का मातम मनाने के लिए शोक सभाएं आयोजित की गईं. ईरान की राजधानी तेहरान और इस्फहान में भी खामेनेई समर्थक सड़कों पर उतरे और अमरिका-इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

खामेनेई के निधन पर उबाल, कराची में भीड़ का तांडव, अमेरिकी दूतावास जलाया, 9 लोगों की गई जान

ईरान यूएस-इजरायल हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही पाकिस्तान के कराची शहर में अमेरिकी दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। अमेरिका के खिलाफ बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी लाठी डंडे लेकर जमा हो गए और तोड़फोड़ शुरू कर दी। इससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद लोकल पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा और चेतावनी के तौर पर गोलियां चलानी पड़ीं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इसमें कम से कम 9 प्रदर्शनकारियों की मौत की खबर है।   आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े प्राप्त जानकारी के अनुसार हालात को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इसके अलावा, पुलिस ने एहतियातन चेतावनी के तौर पर हवाई फायरिंग भी की। यातायात प्रभावित, लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने सुल्तानाबाद को माई कोलाची से जोड़ने वाली सड़कों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। जिन्ना ब्रिज से आने वाले ट्रैफिक को I.I. चुंदरीगर रोड की ओर डायवर्ट किया गया, ताकि स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखा जा सके और जाम की स्थिति न बने। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे फिलहाल उस क्षेत्र से दूर रहें, क्योंकि सुरक्षा बल विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में भीड़ एंट्रेंस पर तोड़-फोड़ करती और कथित तौर पर बिल्डिंग के कुछ हिस्सों में आग लगाती दिख रही है। ईरान ने बदला लेने की कसम खाई बता दें कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने सार्वजनिक रूप से बदला लेने की कसम खाई है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिका के समर्पण तक कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है और क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को फिर दी चेतावनी वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमला किया गया तो अमेरिका, ऐसा जवाब देगा जो पहले कभी नहीं देखा गया। ट्रंप के अनुसार, अगर ईरान ने हमारी रेड लाइन पार की, तो उसे इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा।

सुपर-8 का गणित और रोमांचक, अगर पाकिस्तान नामीबिया से हारा तो क्या होगा T20 वर्ल्ड कप में?

 कोलंबो आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को 61 रनो से हराकर सुपर-8 में आधिकारिक तौर पर जगह पक्की कर ली. रविवार (15 फरवरी) को कोलंबो के आर. प्रेमदासा में खेले गए इस मुकाबले में 176 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तानी टीम 114 रन पर सिमट गई. भारत से पहले वेस्टइंडीज की टीम ने नेपाल को मात देकर सबसे पहले सुपर-8 का टिकट कटाया था. चारों ग्रुप से शीर्ष दो-दो टीमें सुपर-8 में जगह बनाने वाली हैं. भारतीय टीम के हाथों मिली हार के बाद पाकिस्तान के लिए सुपर-8 की राह कठिन हो गई है. अब उसे अपने आखिरी ग्रुप मुकाबले में नामीबिया को हराना ही होगा. जीत की स्थिति में वो 6 अंकों के साथ सुपर-8 में पहुंच जाएगा, जबकि हार की सूरत में वो टूर्नामेंट से आउट हो जाएगा. वैसे भी नामीबिया सुपर-8 की रेस से बाहर हो चुका है, ऐसे में उसके लिए खोने को कुछ नहीं बचा है. कुल मिलाकर देखा जाए तो पाकिस्तान के लिए अब अगला मुकाबला वर्चुअल नॉकआउट बन गया है. ग्रुप-ए में भारत 6 अंकों के साथ शीर्ष पर है और सुपर-8 में उसकी जगह पूरी तरह सुनिश्चित हो चुकी है. भारत का नेट रनरेट (NRR) +3.050 है. भारत से हार के बाद पाकिस्तानी टीम तीसरे नंबर पर आ गई है, वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) दूसरी पोजीशन पर आ चुका है. यूएसए और पाकिस्तान दोनों के ही 4-4 अंक हैं, लेकिन नेट रनरेट पाकिस्तानी टीम का उससे खराब है. पाकिस्तानी टीम का नेट रनरेट -0.403 है, जबकि यूएसए का नेट रनरेट +0.787 है. अब पाकिस्तान यदि नामीबिया से हारता है तो उसके 4 ही अंक होंगे. ऐसे में  यूएसए बेहतर नेट रनरेट के चलते सुपर-8 के लिए क्वालिफाई कर सकता है. यदि नामिबिया के खिलाफ मुकाबला धुलता है, तो पाकिस्तानी टीम 5 अंकों के साथ सुपर-8 में जाएगी.  उधर नीदरलैंड्स भी सुपर-8 की रेस से पूरी तरह बाहर नहीं हुआ है, लेकिन उसे अपने आखिरी मुकाबले में भारतीय टीम पर बहुत बड़ी जीत दर्ज करनी होगी, ताकि उसका नेट रनरेट यूएसए से अच्छा हो जाए. साथ ही उसे दुआ करनी होगी कि नामीबियाई टीम पाकिस्तान को हरा दे. नीदरलैंड्स के 3 मैचों से 2 अंक हैं और उसका नेट रनरेट -1.352 है. ग्रुप-ए में अब केवल दो मुकाबले बचे हैं. भारत-नीदरलैंड्स के बीच 18 फरवरी (बुधवार) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मुकाबला होना है. वहीं पाकिस्तान-नामीबिया का मुकाबला 18 तारीख को ही कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में होगा. ग्रुप A की मौजूदा स्थिति इस प्रकार है भारत (IND)- 3 मैच, 3 जीत, 6 अंक, NRR +3.050 (सुपर 8 के लिए क्वालिफाई) संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)-4 मैच, 2 जीत, 4 अंक, NRR +0.787 पाकिस्तान (PAK)- 3 मैच, 2 जीत, 4 अंक, NRR -0.403 नीदरलैंड्स (NED)- 3 मैच, 1 जीत, 2 अंक नामीबिया (NAM)- 3 मैच, 0 जीत, 0 अंक, NRR -2.443 (बाहर) भारत के खिलाफ मुकाबले में लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की शुरुआत बेहद खराब रही. हार्दिक पंड्या ने साहिबजादा फरहान को डक पर आउट किया, जबकि जसप्रीत बुमराह ने एक ही ओवर में सैम अयूब और कप्तान सलमान अली आगा को पवेलियन भेज दिया. इसके बाद बाबर आजम भी जल्दी आउट हो गए और टीम दबाव से उबर नहीं सकी. इससे पहले भारतीय टीम ने टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए 7 विकेट पर 175 रन बनाए थे. सलामी बल्लेबाज ईशान किशन ने 40 गेंदों पर 77 रन की शानदार पारी खेली और मैच का रुख तय कर दिया. उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया. देखा जाए तो टी20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की पाकिस्तान पर 9 मैचों में ये 8वीं जीत रही. यानी स्कोर अब भारत ने 8-1 कर दिया है.

ना ड्रामा काम आया, ना दांव… करारी हार के बाद आफरीदी का गुस्सा फूटा, टीम PAK की खुलकर लगाई क्लास

 नई दिल्ली/ इस्लामाबाद    भारतीय टीम के खिलाफ करारी हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट में भूचाल आ गया है. रविवार (15 फरवरी) को कोलंबो में खेले गए आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 के अहम मुकाबले में 61 रनों से मिली शिकस्त के बाद पूर्व पाकिस्तानी कप्तान शाहिद आफरीदी ने अपनी टीम के सीनियर खिलाड़ियों पर खुलकर निशाना साधा है. आफरीदी ने अपने दामाद शाहीन आफरीदी को भी नहीं बख्शा.  शाहिद आफरीदी ने साफ तौर पर कहा कि अब बार-बार नाकाम हो रहे वरिष्ठ खिलाड़ियों को आराम देकर युवाओं को मौका दिया जाना चाहिए. उन्होंने बाबर आजम, शाहीन आफरीदी और शादाब खान को बेंच पर बैठाने की बात कही. शाहिद का मानना है कि इन खिलाड़ियों को लगातार मौके मिले हैं, लेकिन बड़े मैचों में ये नाकाम हो जाते हैं. शाहिद आफरीदी ने समा टीवी पर कहा, ‘अगर फैसला मुझे लेना हो तो मैं शाहीन, बाबर और शादाब तीनों को बैठा दूं. नए लड़कों को मौका दूं, उन पर भरोसा दिखाऊं. नामीबिया के खिलाफ मैच में युवाओं को खिलाकर आत्मविश्वास देना चाहिए. हम इतने अरसे से इन खिलाड़ियों को मौके देते आ रहे हैं. जहां उम्मीद रहती है कि वो इस टीम के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करेंगे. अगर सीनियर खिलाड़ी डिलीवर नहीं कर रहे, तो बेंच पर बैठे जूनियर खिलाड़ियों को क्यों नहीं आजमाया जाए.’   मैदान पर शिकस्त के साथ PAK का घमंड भी हुआ चकनाचूर  टीम इंडिया ने एक बार फिर वर्ल्ड कप के मुकाबले में पाकिस्तान को आसानी से पटखनी दे दी. इस जीत के साथ ही भारत ने पाकिस्तान को ये भी बता दिया कि मैदान पर जवाब प्रदर्शन से दिया जाता है. कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में टीम इंडिया ने हर विभाग में पाकिस्तान को पीछे छोड़ दिया. लेकिन ये हार केवल पाकिस्तान के लिए एक मैच की हार तक सीमित नहीं है. बल्कि इस जीत से भारत ने पाकिस्तान की तमाम रणनीतियों, ड्रामेबाजी और प्लान की धज्जियां उड़ा दी.   दरअसल, इस मैच से पहले माहौल कुछ और था. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ और गृहमंत्री  मोहसिन नकवी की ओर से इस मैच का बायकॉट किया गया. पाकिस्तानी सरकार ने इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और बांग्लादेश को मोहरा बनाया. बीसीसीआई को बदनाम करने की नापाक साजिश रची. करीब दो हफ्ते तक पाकिस्तान ने ड्रामेबाजी की. लगातार बयानबाजी की. हालांकि, बाद में पाकिस्तान ने पलटी मारी और मैच खेलने के लिए राजी हो गया.   इसके साथ ही पाकिस्तान ने उस्मान तारिक की मिस्ट्री स्पिन को लेकर भी बड़ा हाइप बनाया. कप्तान सलमान आगा ने उन्हें टीम का ‘ट्रंप कार्ड’ बताया था. लेकिन मैदान पर कहानी अलग निकली. नकवी ने अपनी ड्रामेबाजी के जरिए इस मैच को सियासी संग्राम बनाया. कई देशों को साधने की कोशिश की. लेकिन नकवी की एक न चली और आखिरकार मेदान पर जब पाकिस्तान भारत के सामने आया तो हर बार की तरह एक बार फिर उसे धूल चाटनी पड़ी. सूर्या की कप्तानी, भारत की समझदारी भारतीय कप्तान सूर्यकुमार ने मैच को शांत दिमाग से संभाला. शुरुआती झटके के बाद भारतीय बल्लेबाजों ने जल्दबाजी नहीं की. जोखिम भरे शॉट्स से बचते हुए टीम ने मजबूत स्कोर खड़ा किया. जिस उस्मान तारिक को लेकर इतनी चर्चा थी, वह असर छोड़ने में नाकाम रहे. भारतीय बल्लेबाजों ने उन्हें संभलकर खेला और कोई बड़ा मौका नहीं दिया. उनकी मिस्ट्री गेंदबाजी भारत के खिलाफ बेअसर साबित हुई. गेंदबाजी में भी भारत भारी जब पाकिस्तान लक्ष्य का पीछा करने उतरा तो भारतीय गेंदबाजों ने दबाव बनाए रखा. पावरप्ले में विकेट गिरे और पाकिस्तान संभल नहीं सका. बड़े शॉट खेलने की कोशिश में बल्लेबाज लगातार आउट होते गए. भारत ने दिखाया कि बड़े मैच सिर्फ बयानबाजी से नहीं, बल्कि संयम और रणनीति से जीते जाते हैं. पाकिस्तान की तरफ से बनाए गए माइंडगेम मैदान पर टिक नहीं सके. बयान बनाम प्रदर्शन मैच से पहले जो शोर था, वह मैदान पर शांत हो गया. न तो बायकॉट की चर्चा काम आई और न ही मिस्ट्री स्पिन का दांव. भारत ने एक बार फिर साबित किया कि दबाव में खेलने का अनुभव और मैच की समझ ही असली ताकत है. इस जीत के साथ टीम इंडिया ने टूर्नामेंट में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली, जबकि पाकिस्तान के लिए यह हार कई सवाल छोड़ गई. भारत-पाकिस्तान मुकाबला हमेशा खास होता है, लेकिन इस बार संदेश साफ था-ड्रामा नहीं, प्रदर्शन मायने रखता है. शाहीन की जमकर हुई धुनाई, बाबर-शादाब फेल भारत के खिलाफ मुकाबले में शाहीन आफरीदी सबसे महंगे गेंदबाज साबित हुए. उन्होंने सिर्फ दो ओवर में 31 रन लुटाए. इनिंग्स के आखिरी ओवर में शाहीन ने 16 रन खर्च किए, जिससे भारत को 170 प्लस स्कोर बनाने का मौका मिला. बता दें कि शाहीन का निकाह 3 फरवरी 2023 को पूर्व ऑलराउंडर शाहिद आफरीदी की बेटी अंशा से हुआ था. शादाब खान का भी दिन खराब रहा. गेंदबाजी में एक ओवर में 17 रन दिए और बल्लेबाजी में 14 रन बनाकर आउट हो गए. कप्तान बाबर आजम भी टीम को संभालने में नाकाम रहे. कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान पर अपना दबदबा साबित किया. इस जीत के साथ टी20 वर्ल्ड कप में भारत का पाकिस्तान पर हेड टू हेड रिकॉर्ड 8-1 हो गया है. भारत की जीत के हीरो ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ ईशान किशन रहे, जिन्होंने 40 गेंदों पर 77 रनों की तूफानी पारी खेली. गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या, वरुण चक्रवर्ती और अक्षर पटेल ने दो-दो विकेट लेकर पाकिस्तान को 114 रनों पर समेट दिया. इस शर्मनाक हार के बाद पाकिस्तान में सीनियर खिलाड़ियों को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं. शाहिद आफरीदी के बयान ने यह साफ कर दिया है कि अब टीम चयन को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है…  

टीम कॉम्बिनेशन पर मंथन, भारत मुकाबले के लिए नई प्लेइंग XI ला सकता है पाकिस्तान

कोलंबो. पाकिस्तान रविवार को कोलंबो में चिर-प्रतिद्वंद्वी भारत के खिलाफ टी20 विश्व कप के बड़े मुकाबले में चार विशेषज्ञ गेंदबाजों ( दो स्पिनर और दो तेज गेंदबाज) के साथ उतर सकता है। टीम के करीबी एक सूत्र ने बताया कि मुख्य कोच माइक हेसन और कप्तान सलमान अली आगा इस मैच में दोनों विशेषज्ञ स्पिनरों अबरार अहमद और उस्मान तारिक के साथ-साथ दो विशेषज्ञ तेज गेंदबाजों शाहीन शाह अफरीदी और सलमान मिर्जा को खिलाने के इच्छुक हैं। टीम प्रबंधन शादाब खान, मोहम्मद नवाज और फहीम अशरफ में से एक ऑलराउंडर को बाहर करने पर भी विचार कर सकता है। सूत्र ने कहा, ”टीम प्रबंधन के सामने एकमात्र समस्या यह है कि यदि वे चार विशेषज्ञ गेंदबाजों के साथ जाते हैं तो फहीम, शादाब और नवाज में से किसे बाहर बिठाना है, इस पर फैसला लेना होगा। ” उन्होंने बताया कि सईम अयूब, साहबजादा फरहान, सलमान अली आगा, बाबर आजम और उस्मान खान बल्लेबाजी क्रम में शीर्ष पांच स्थान पर हैं। ऐसे में टीम प्रबंधन को छठे और सातवें नंबर के लिए खिलाड़ियों का चयन करना होगा जिसके बाद चार गेंदबाज होंगे। सूत्र ने कहा कि नवाज के बाहर बैठने की संभावना है क्योंकि वह बाएं हाथ के स्पिनर हैं और भारत के पास अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, तिलक वर्मा, शिवम दूबे, रिंकू सिंह, वॉशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव और अर्शदीप सिंह जैसे बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं। सूत्र ने कहा, ”माहौल यह है कि फहीम को खिलाना बेहतर होगा क्योंकि वह अच्छी फॉर्म में हैं और जरूरत पड़ने पर तीसरे तेज गेंदबाज की भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही शादाब की लेग स्पिन बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ उपयोगी होगी। ” उन्होंने कहा कि अबरार, उस्मान, शादाब और सईम अयूब स्पिन विकल्प के रूप में उपलब्ध हैं इसलिए टीम प्रबंधन को भरोसा है कि इस ‘हाई-प्रोफाइल’ मैच में नवाज के बिना भी काम चलाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि रविवार को आर प्रेमदासा स्टेडियम की पिच का अंतिम मुआयने और मौसम की स्थिति देखने के बाद अंतिम फैसला बदल भी सकता है। पाकिस्तान इस टूर्नामेंट में पहली बार प्रेमदासा स्टेडियम में खेलेगा। पिछले महीने पाकिस्तान ने श्रीलंका में टी20 सीरीज जीती थी लेकिन सभी मैच दांबुला में खेले गए थे जबकि टीम ने अपने दोनों टी20 विश्व कप मुकाबले नीदरलैंड और अमेरिका के खिलाफ सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब मैदान में खेले हैं। पाकिस्तान की संभावित प्लेइंग इलेवन: सईम अयूब, साहबजादा फरहान, सलमान अली आगा (कप्तान), बाबर आजम, उस्मान खान, शादाब खान, फहीम अशरफ, शाहीन शाह अफरीदी, सलमान मिर्जा, अबरार अहमद, उस्मान तारिक।

पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ डबल खेला: पहले बायकॉट, फिर खुद लिया यू-टर्न!

 नई दिल्ली    भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) का ताजा यू-टर्न सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि उसकी विफल राजनीति की खुली स्वीकारोक्ति है. 2026 टी20 विश्व कप से पहले जिस बायकॉट की धमकी को सिद्धांत, स्वाभिमान और सुरक्षा का मुद्दा बनाकर उछाला गया, वही अंततः पाकिस्तान की कमजोरी बन गई. मैच अब खेला जाएगा- बिना शर्त, बिना रियायत…. और यही इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सच है. धमकी की शुरुआत, लेकिन दिशा विहीन PCB ने जिस आक्रामक भाषा में भारत के खिलाफ खेलने पर आपत्ति जताई, उसने शुरू से यह संकेत दे दिया था कि यह फैसला कम और दबाव की राजनीति ज्यादा है. सुरक्षा जैसे पुराने तर्क दोहराए गए, लेकिन कोई नई परिस्थिति, कोई नया खतरा या कोई ठोस रिपोर्ट सामने नहीं रखी गई यह बायकॉट कोई अंतिम निर्णय नहीं था, बल्कि सौदेबाजी का औजार था और यही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बनी. सीधे टकराव से बचने की चाल भारत के खिलाफ सीधे खड़े होने की हिम्मत PCB में नहीं दिखी. इसकी बजाय बांग्लादेश की मांगों को आगे कर दिया गया, ताकि विवाद को क्षेत्रीय सहमति का रूप दिया जा सके. यह एक सोची-समझी रणनीति थी- खुद पीछे रहो, माहौल दूसरों के जरिए बनाओ और ICC पर दबाव डालो. … लेकिन यह चाल ज्यादा देर नहीं चल सकी. ICC के भीतर यह स्पष्ट हो गया कि बांग्लादेश का नाम केवल ढाल है, असली एजेंडा पाकिस्तान की अपनी राजनीतिक जिद है. बांग्लादेश के साथ ‘डबल गेम’ यही वह मोड़ था, जहां पाकिस्तान की राजनीति पूरी तरह बेनकाब हो गई.जिस बांग्लादेश को PCB ने बायकॉट की मुहिम में आगे किया, उसी को यू-टर्न के वक्त पूरी तरह किनारे कर दिया गया. न कोई साझा बयान, न कोई संयुक्त विरोध, न कोई नैतिक जिम्मेदारी.दबाव बनाने के लिए बांग्लादेश का इस्तेमाल हुआ, लेकिन जब ICC के सामने चाल नाकाम हुई, तो पाकिस्तान ने अकेले पीछे हटना बेहतर समझा. यह ‘साझा चिंता’ नहीं, बल्कि सुविधाजनक साझेदारी थी- काम निकलते ही खत्म. यहीं PCB का दोहरा चरित्र उजागर होता है.पहले बांग्लादेश को ढाल बनाना और फिर हालात बिगड़ते ही उसे मैदान में अकेला छोड़ देना. क्रिकेट नहीं, आर्थिक हकीकत ने तोड़ा भ्रम PCB शायद यह भूल बैठा कि आधुनिक क्रिकेट भावनाओं और नारों से नहीं चलता. भारत–पाक मुकाबला किसी भी ICC टूर्नामेंट की आर्थिक रीढ़ है. इस एक मैच से जुड़े प्रसारण अधिकार, विज्ञापन, प्रायोजन और वैश्विक दर्शक संख्या पूरे आयोजन की दिशा तय करते हैं. इस मैच के न होने से ICC को झटका जरूर लगता, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान पाकिस्तान को ही उठाना पड़ता- आर्थिक रूप से भी और क्रिकेटिंग प्रासंगिकता के लिहाज से भी. ICC के सामने नहीं चलीं शर्तें PCB की उम्मीद थी कि हाइब्रिड मॉडल, विशेष प्रावधान या राजनीतिक सहानुभूति के जरिए वह ICC को झुका लेगा. लेकिन परिषद ने इस बार साफ कर दिया कि टूर्नामेंट किसी एक बोर्ड की जिद से नहीं चलेगा. जब यह संदेश स्पष्ट हो गया कि न तो ढांचा बदलेगा और न ही भारत पर कोई दबाव बनेगा, PCB का सख्त रुख अचानक पिघल गया. भारत–पाक मैच खेलने पर सहमति बन गई, लेकिन यह सहमति किसी समझौते की जीत नहीं, बल्कि मजबूरी की स्वीकारोक्ति है. PCB न तो कोई शर्त मनवा सका, न किसी तरह की नैतिक या कूटनीतिक बढ़त हासिल कर पाया. जिस बायकॉट को ‘सिद्धांत’ बताया गया था, वह अंततः खोखली बयानबाजी साबित हुआ. … साख पर गहरा दाग इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा नुकसान पाकिस्तान क्रिकेट की विश्वसनीयता को हुआ. बार-बार राजनीतिक दबाव की रणनीति अपनाकर PCB ने यह संदेश दिया कि वह क्रिकेट को खेल की बजाय मंच के रूप में इस्तेमाल करता है. इसका असर सिर्फ बोर्ड की छवि पर नहीं, बल्कि खिलाड़ियों, प्रशंसकों और अंतरराष्ट्रीय भरोसे पर भी पड़ता है. नतीजा पहले से तय था भारत-पाक मुकाबले को लेकर PCB की रणनीति हर मोर्चे पर विफल रही. बायकॉट की धमकी बेअसर रही, बांग्लादेश की आड़ बेनकाब हुई और ICC पर दबाव नहीं बन सका.अंततः वही हुआ, जो शुरू से तय था- मैच खेला जाएगा, नियम ICC तय करेगी और झुकना पाकिस्तान को ही पड़ा.

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