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प्रदेश में बुनियादी साक्षरता मूल्यांकन 16 फरवरी को, 17 लाख से अधिक नवसाक्षर परीक्षा में होंगे शामिल

उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम भोपाल प्रदेश के समस्त जिलों में संचालित उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता परीक्षा का आयोजन रविवार 16 फरवरी 2025 को किया जा रहा है। परीक्षा में लगभग 17 लाख से अधिक नवसाक्षर शामिल होंगे। केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के निरक्षर व्यक्तियों को बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्रदान कर साक्षर करने के लिये उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के अनुसार प्रदेश में साक्षरता दर बढ़ाने के लिये 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के ऐसे निरक्षर को साक्षर करने के लिये उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यूनेस्को की परिभाषा अनुसार जिन लोगों में मुद्रित एवं लिखित सामग्री का उपयोग करके पहचानने, समझने, व्याख्या करने, बनाने, संवाद करने और गणना करने की क्षमता नहीं है, उन्हें साक्षर करने के लिये देशभर में यह कार्यक्रम वर्ष-2022 से वर्ष-2027 तक संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम में वर्ष में 2 बार “बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की जाती है। परीक्षा में शामिल होने वाले नवसाक्षर वह शिक्षार्थी होते हैं, जिन्हें सर्वे के माध्यम से चिन्हांकित किया गया हो और उन्होंने राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा आईपीसीएल पद्धति से तैयार की गई उल्लास-अक्षर पोथी प्रवेशिका” से अध्ययन कार्य किया हो। साक्षरता कार्यक्रम में डिजिटल तकनीक का उपयोग उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश में डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिये प्रदेश में गठित राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा मोबाइल ऐप और पोर्टल भी विकसित किया गया है। कार्यक्रम में डोर-टू-डोर सर्वे एवं साक्षरता कक्षाओं की मॉनिटरिंग जियो टैग के माध्यम से की जा रही है। रविवार 16 फरवरी को होने वाली परीक्षा में शामिल परीक्षार्थियों के स्पॉट मूल्यांकन के बाद रिजल्ट तथा अन्य विवरणों की ऑनलाइन एंट्री भी मोबाइल ऐप तथा पोर्टल पर दर्ज की जायेगी। इस कार्यक्रम में अभी तक 4 मूल्यांकन परीक्षाओं का आयोजन किया जा चुका है। साक्षरता से जुड़े पाठ्यक्रमों को वीडियो के जरिये व्हाट्स-ऐप ग्रुप, यू-ट्यूब और पोर्टल के माध्यम से पहुँचाया गया है। नवभारत साक्षरता परीक्षा गाँव, कस्बों और नगरों में निरक्षरों के घरों के नजदीकी स्कूलों में आयोजित की जा रही है। परीक्षा के लिये राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा परीक्षा से संबंधित समस्त तैयारियाँ की गई हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने समस्त जिलों के कलेक्टर व जिलों के विभागीय अधिकारियों को परीक्षा के आयोजन के संबंध में निर्देश जारी किए है। बुनियादी साक्षरता मूल्यांकन परीक्षा में उत्तीर्ण नव साक्षरों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (एनआईओएस) द्वारा साक्षरता परीक्षा का प्रमाण-पत्र भी जारी किया जायेगा।  

फिर 6000 करोड़ का कर्जा लेने की तैयारी मोहन सरकार, 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज तले दबा प्रदेश

भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से ठीक पहले एक बार फिर 6000 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने जा रही है। यह कर्ज तीन अलग-अलग हिस्सों में 20 फरवरी को लिया जाएगा। जिसकी भरपाई 12, 15 और 23 वर्षों की अवधि में की जाएगी। इससे पहले, 1 जनवरी 2025 को सरकार ने 5,000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। नए कर्ज के बाद, चालू वित्त वर्ष में सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 41,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।बता दें कि पिछले साल 4 महीने में चार बार लगातार सरकार ने 20 हजार करोड़ का कर्ज़ लिया था। मध्य प्रदेश सरकार पर अब तक 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज़ हो चुका है। बता दें कि प्रदेश सरकार, अभी 24 और 25 फरवरी को आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारी कर रही है। इस समिट के आयोजन के लिए विशेष तैयारियां की हैं। इस समिट में देश-विदेश से निवेशक भाग लेंगे, जिनके लिए सरकार ने यात्रा, ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं की योजना बनाई है। इन तैयारियों में करोड़ों रुपए खर्च होने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से केंद्रीय राज्यमंत्री नाईक ने की उज्जैन में सौजन्य भेंट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से केंद्रीय विद्युत तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्रीपाद येसो नाईक ने उज्जैन में सौजन्य भेंट की। उन्होंने प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे बेहतर कार्य की सराहना की केन्द्रीय राज्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि प्रदेश को सभी आवश्यक सहयोग मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में किये जा रहे उल्लेखनीय कार्य के लिये बधाई और शुभकामनाएँ दी।  

मंत्री सारंग ने किया नेशनल गेम्स में मध्यप्रदेश के पदक विजेता खिलाड़ियों से संवाद

भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने अपने निवास पर 38वें नेशनल गेम्स में पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों से आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों से उनके अनुभव साझा किए और उनकी मेहनत, समर्पण और सफलता की सराहना की। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ की कड़ी मेहनत और समर्पण भाव के कारण ही प्रदेश ने 38वें नेशनल गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 82 पदकों के साथ राज्यों की सूची में तृतीय स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने सभी विजेता खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ के अध्यक्ष एवं विधायक श्री रमेश मेंदोला, संघ के सचिव श्री दिग्विजय सिंह, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। मंत्री श्री सारंग ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि प्रत्येक खिलाड़ी अपने खेल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने का संकल्प लें और स्वर्ण पदक हासिल करने को अपना लक्ष्य बनाएं। उन्होंने कहा, “आपकी मेहनत, आत्मविश्वास और समर्पण ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। खुद पर विश्वास रखें, हर चुनौती को अवसर में बदलें और विजय के शिखर तक पहुंचें!” मंत्री श्री सारंग ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए यह भी कहा कि प्रदेश सरकार हर स्तर पर खिलाड़ियों को सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर है, जिससे वे अपने खेल कौशल को निखारकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकें। खेलों के विकास के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं और प्रशिक्षण देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य में खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। इस दिशा में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है, जिससे भविष्य में और अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। प्रदेश के विजयी खिलाड़ियों को बधाई देते हुए मंत्री श्री सारंग ने आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश के खिलाड़ी देश और दुनिया में अपनी सफलता की नई गाथा लिखेंगे। संवाद के दौरान बॉक्सिंग खिलाड़ियों ने साझा किया कि उत्तराखंड में हाई एल्टिट्यूड पर खेलना आसान नहीं था, लेकिन आयोजन से पांच दिन पहले वहां पहुंचकर विशेष ट्रेनिंग करने से प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार हुआ। उन्होंने बताया कि ऊंचाई पर अनुकूलन की इस रणनीति ने न केवल उनकी फिटनेस को बेहतर बनाया बल्कि मुकाबलों में अतिरिक्त बढ़त भी दिलाई। खिलाड़ियों ने उत्तराखंड में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे उनका ध्यान केवल अपने खेल पर केंद्रित रह सका। उल्लेखनीय है कि इस बार मध्यप्रदेश की बॉक्सिंग टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 5 पदक जीते—1 स्वर्ण, 1 रजत और 3 कांस्य। यह जीत खिलाड़ियों की मेहनत, सही रणनीति और विभाग की प्रभावी योजना का परिणाम है, जिसने मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय पटल पर एक बार फिर गौरव दिलाया है। मध्यप्रदेश के इन खिलाड़ियों से की भेंट मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों की इस उत्कृष्ट उपलब्धि ने प्रदेश का मान बढ़ाया है और युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई प्रेरणा दी है। सरकार खेलों के विकास और खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। बॉक्सिंग 54 किग्रा महिला वर्ग – दिव्या पवार (स्वर्ण पदक) 50 किग्रा महिला वर्ग – मलिका मोर (कांस्य पदक) 57 किग्रा पुरुष वर्ग – हिमांशु श्रीवास (कांस्य पदक) 57 किग्रा महिला वर्ग – माहि लामा (कांस्य पदक) 92 किग्रा पुरुष वर्ग – पारस (रजत पदक) एथलेटिक्स 1500 मीटर पुरुष वर्ग – रितेश ओहरे (रजत पदक) शॉटपुट पुरुष वर्ग – समरदीप सिंह गिल (रजत पदक) पोल वॉल्ट पुरुष वर्ग – देव मीना (स्वर्ण पदक)।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से अन्तर्राष्ट्रीय मंदिर प्रबंधक परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने सौजन्य भेंट की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अन्तर्राष्ट्रीय मंदिर प्रबंधक परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष राजेश यादव ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को त्रिशूल भेंट कर उनका अभिन्नदन किया। कार्यकारी अध्यक्ष राजेश यादव ने 21 फरवरी को दिल्ली में आयोजित महा संगम यात्रा के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ यादव को आमंत्रित किया।  

पीएम मोदी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में मरने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त

नई दिल्ली नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात मचे भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई तो दर्जनों लोग घायल हो गए। घटना में जान गंवाने वाले अधिकतर लोग बिहार के हैं। 7 साल के बच्चे से लेकर 79 साल के बुजुर्गों तक ने घटना में अपनी जान गंवाई है। मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया गया है। मृतकों में 12 महिलाएं शामिल हैं तो 4 बच्चों को भी जान चली गई। भगदड़ में मारे गए बच्चों की उम्र 7 साल से लेकर 15 साल तक की है। 18 मृतकों में से 9 की पहचान बिहार निवासी के रूप में हुई है। बक्सर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और पटना के कई लोगों ने हादसे में अपनी जान गंवा दी। इनकी गई जान 1. आहा पत्नी पति रविंदे नाथ, निवासी बक्सर, उम्र- 79 साल 2. पिंकी पत्नी पति उपेंद्र शर्मा, निवासी संगम विहार दिल्ली, उम्र- 41 साल 3. शीला पत्नी पति उमेश गिरी, निवासी सरिता विहार दिल्ली, उम्र 50 साल 4. व्योम पुत्र धर्मवारी, निवासी बवाना दिल्ली, उम्र- 25 साल 5. पूनम देवी पत्नी मेघा नाथ, निवासी सारन बिहार, उम्र- 40 साल 6. ललिता देवी पत्नी संतोश, निवासी- पटना बिहार, उम्र- 35 साल 7. सुरुचि पुत्री मनोज शाह निवासी मुजफ्फरपुर बिहार, उम्र- 11 साल 8. कृष्णा देवी पत्नी विजय शाह, निवासी- समस्तीपुर बिहार, उम्र- 40 साल 9. विजय शाह पुत्र राम स्वरूप शाह निवासी- समस्तीपुर बिहार, उम्र- 15 साल 10. नीरज पुत्र इंद्रजीत पासवान, निवासी वैशाली बिहार, उम्र- 12 साल 11. शांति देवी पत्नी राज कुमार मांझी, निवासी- नवादा बिहार, उम्र 40 साल 12. पूजा कुमार पुत्री राज कुमार मांझी, नवादा बिहार, उम्र- 8 साल 13. संगीता मलिक पत्नी मोहित मलिक, निवासी- भिवानी हरियाणा, उम्र 34 साल 14. पूनम पत्नी वीरेंद्र सिंह, निवासी महावीर एनक्लेव उम्र 34 साल 15. ममता झा पत्नी विपिन झा, निवासी- नांगलोई दिल्ली, उम्र 40 साल 16. रिया सिंह पुत्री ओपिल सिंह, निवासी- सागरपुर दिल्ली, उम्र 7 साल 17. बेबी कुमारी पुत्री प्रभु शाह, निवासी- बिजवासन दिल्ली, उम्र- 24 साल 18. मनोज पुत्र पंजदेव कुशवाहा, निवासी नांगलोई दिल्ली, उम्र 47 साल प्रयागराज होते हुए बिहार जाने वाली स्वतंत्रता सेनानी भी थी लेट शनिवार रात महाकुंभ जाने वाले यात्रियों की रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। प्लेटफॉर्म 14, 15 के बीच पुल पर भीड़ के अनियंत्रित हो जाने से सीढ़ियों पर खड़े लोग हादसे का शिकार हो गए। एक अधिकारी ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस और भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस देरी से चल रही थीं और इन ट्रेन के यात्री भी प्लेटफार्म नंबर 12, 13 और 14 पर मौजूद थे। स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस प्रयागराज होते हुए बिहार जाती है। बड़ी संख्या में लोग स्वतंत्रता सेनानी में बैठना चाहते थे। कई गाड़ियों के लेट होने के बीच जब एक स्पेशल ट्रेन की घोषणा हुई तो अधिक से अधिक लोग उसकी तरफ बढ़ना चाहते थे, जिससे यह हादसा हुआ। पीड़ितों के लिए मुआवजे का ऐलान रेलवे ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजन को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने घोषणा की। रेलवे ने कहा कि गंभीर रूप से घायलों को ढाई-ढाई लाख रुपये और मामूली रूप से घायल हुए लोगों को एक-एक लाख रुपए दिए जाएंगे। भगदड़ की पुलिस ने शुरू की जांच दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ की घटना की रविवार को जांच शुरू कर दी जिसके तहत सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि अफरातफरी क्यों मची। पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार देर रात भगदड़ मचने से कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और 12 से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने कहा, ‘हमारा मुख्य लक्ष्य भगदड़ के मुख्य कारण की जांच करना है। हम सीसीटीवी फुटेज और उस दौरान की गई घोषणाओं का सारा डेटा एकत्र करेंगे।’  नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात मची भगदड़ में 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में कई लोग घायल हैं, जिनका दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में इलाज चल रहा है। रेलवे ने हादसे की जांच के लिए कमिटी गठित कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, रेलवे की रिपोर्ट में सामने आया है कि स्टेशन पर इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ। रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। घंटेभर में 1500 जनरल टिकट बेचे गए रिपोर्ट में सामने आया है कि नई दिल्ली स्टेशन पर प्रयागराज के लिए ट्रेन आने वाली थी। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के लिए भारी संख्या में लोग शाम से ही स्टेशन पहुंचना शुरू हो गए थे। जिन लोगों के पास ट्रेन का कंफर्म टिकट था, उनके अलावा भी हजारों की तादाद में लोग प्लेटफॉर्म पर पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली स्टेशन पर एक घंटे में 1500 जनरल टिकट बेचे गए। ये संख्या बताती है कि स्टेशन पर यात्रियों की कितनी भारी भीड़ थी। अचानक कैसे मची भगदड़? जानकारी के अनुसार, भगदड़ स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर हुई। दरअसल 14 नंबर प्लेटफॉर्म पर प्रयागराज एक्सप्रेस आने वाली थी। वहीं 13 नंबर प्लेटफॉर्म पर बिहार के लिए आने वाली ट्रेन देरी से चल रही थी। इसके बाद अनाउंसमेंट हुआ कि प्लेटफॉर्म नंबर 16 से एक स्पेशल ट्रेन प्रयागराज के लिए चलेगी। घोषणा के बाद ही लोग प्लेटफॉर्म नंबर 14 से 16 की ओर बढ़ने लगे। प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर पहले से ही ओवर क्राउड था। भीड़ सीढ़ियों की मदद से ऊपर की ओर बढ़ी, वहीं सीढ़ियों पर पहले से ही पैर रखने की जगह नहीं थी। ऐसी धक्का-मुक्की में कुछ लोग बेहोश हो गए और नीचे गिर गए। लोगों को कुचलते हुए भीड़ आगे बढ़ने लगी। प्लेटफॉर्म पर भगदड़ की स्थिति हो गई।   रेलवे अधिकारी ने बताई भगदड़ की वजह उत्तर रेलवे के CPRO हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा, “कल जब यह दुखद घटना हुई, उस समय नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 14 पर पटना की ओर जाने वाली मगध एक्सप्रेस और प्लेटफार्म नंबर 15 पर जम्मू की ओर जाने वाली उत्तर संपर्क क्रांति खड़ी थी। इसी दौरान फुट ओवर ब्रिज से प्लेटफार्म नंबर 14-15 की ओर आने वाली सीढ़ियों पर यात्रियों के फिसलकर गिरने से उनके पीछे खड़े कई यात्री इसकी चपेट … Read more

आंदोलन का केंद्र रहे कोकराझार में लगेगा एक दिवसीय विधानसभा सत्र , पीएम मोदी ने जताई खुशी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में आंदोलन के केंद्र रहे कोकराझार में 17 फरवरी को आयोजित होने वाले ऐतिहासिक एक दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र का स्वागत किया है। पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि केंद्र और असम दोनों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकारें बोडो समुदाय को सशक्त बनाने और बोडो आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं। सीएम सरमा ने बताया सत्र का प्रमुख एजेंडा वहीं, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने विकास के बारे में जानकारी दी और कहा कि सत्र का एक प्रमुख एजेंडा छठी अनुसूची क्षेत्रों के प्रशासन को मजबूत करना होगा। इस पल को अपने राजनीतिक करियर का सबसे महत्वपूर्ण क्षण बताते हुए सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन के लिए भी धन्यवाद दिया है। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ’17 फरवरी को असम ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल करेगा, क्योंकि कोकराझार, जो कभी बोडोलैंड आंदोलन का केंद्र था, एक दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र आयोजित करेगा। मुख्य एजेंडा छठी अनुसूची क्षेत्रों के प्रशासन को मजबूत करना होगा, जिसमें राज्यपाल का अभिभाषण एक प्रमुख आकर्षण होगा।’ उन्होंने कहा, यह माननीय प्रधानमंत्री के असम के प्रति अटूट प्रेम और माननीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन से संभव हुआ है। उनका नेतृत्व शांति, स्थिरता और प्रगति की ओर हमारी यात्रा को आगे बढ़ाता रहेगा। मैंने जीवंत बोडो संस्कृति देखी थी- पीएम मोदी मुख्यमंत्री के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री ने इसका स्वागत किया और कोकराझार की अपनी यात्रा को भी याद किया। पीएम मोदी ने लिखा- ‘केंद्र और असम दोनों में एनडीए सरकारें बोडो समुदाय को सशक्त बनाने और बोडो आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं। ये कार्य और भी अधिक जोश के साथ जारी रहेंगे। मुझे कोकराझार की अपनी यात्रा याद आती है, जहां मैंने जीवंत बोडो संस्कृति देखी थी।’  

वन विहार, भोपाल में एशियाई सिंह को देख सकेंगे पर्यटक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के वन विहार में ‘एशियाटिक सिंहों’ के आगमन के बाद अब पर्यटकों द्वारा सिंहों को देखने की व्यवस्था प्रारंभ होने का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में वन्य प्राणी आदान-प्रदान योजना के अंतर्गत लगभग दो महीने पहले जूनागढ़, गुजरात से लाये गये “एशियाटिक सिंह” को भोपाल के वन विहार में क्वारेन्टाइन बाड़े से पर्यटकों के अवलोकन के लिए छोड़ दिया गया है। अब यहां आने वाले स्थानीय और देशी-विदेशी पर्यटक इनकी दहाड़ सुनने के साथ इनके विचरण का अनोखा आनंद भी ले सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में वन्य प्राणी पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही वन्य जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। एशियाई सिंह गुजरात में ही पाए जाते हैं। वन्य प्राणियों में विशिष्ट माने गए एशियाई सिंह की वन विहार भोपाल में मौजूदगी मध्यप्रदेश में वन्य जीव पर्यटन के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। वन विहार, भोपाल में आए एशियाई सिंह में एक नर “जूना” एवं एक मादा “गिरी” है। इन दोनों को बाड़े में क्वारेन्टाइन रखने के बाद इनकी सतत निगरानी की जा रही थी। वर्तमान में ये दोनों एशियाई सिंह पूर्णत: स्वस्थ हैं।  

भारत को अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान के ऑफर से चीन बिफरा गया

नई दिल्ली/ बीजिंग  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एफ-35 लड़ाकू विमान ऑफर किया। इस पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि एशिया-पैसिफिक (इंडो-पैसिफिक) “शांति और विकास का शानदार उदाहरण है, भू-राजनीतिक खेलों का अखाड़ा नहीं।” चीन ने यह भी कहा कि “विशेष समूह” बनाने और भू-राजनीतिक खेलों में शामिल होने से सुरक्षा नहीं मिलेगी। इंडो-पैसिफिक को बताया विकास और शांति का उदाहरण शुक्रवार को एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, “किसी को भी देशों के बीच संबंधों और सहयोग में चीन को मुद्दा नहीं बनाना चाहिए, या गुटबाजी और टकराव को भड़काने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।” उन्होंने कहा, “एशिया-प्रशांत शांति और विकास का एक शानदार उदाहरण है, न कि भू-राजनीतिक खेलों का अखाड़ा। विशेष समूह बनाने और गुटबाजी और टकराव में शामिल होने से सुरक्षा नहीं आएगी, और किसी भी तरह से एशिया-प्रशांत और पूरी दुनिया शांतिपूर्ण और स्थिर नहीं रहेगी।” भारत-अमेरिका संबंधों पर भी बोला चीन जब अमेरिका और भारत के बीच अपने रक्षा संबंधों को मजबूत करने और सैन्य साझेदारी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से यूएस-इंडिया कॉम्पैक्ट पहल शुरू करने के समझौते के बारे में पूछा गया, तो गुओ ने कहा कि देशों के बीच सहयोग किसी तीसरे पक्ष को लक्षित नहीं होना चाहिए या दूसरों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं दोहराना चाहता हूं कि चीन का मानना है कि देशों के बीच संबंधों और सहयोग को किसी तीसरे पक्ष को लक्षित नहीं करना चाहिए या दूसरों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए, और क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अनुकूल होना चाहिए।” पाकिस्तान ने भी जताई चिंता पाकिस्तान ने शुक्रवार को भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम क्षेत्रीय सैन्य संतुलन को बाधित करेगा, रणनीतिक स्थिरता को कमजोर करेगा और दक्षिण एशिया में स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न करेगा। नाराज पाकिस्तान ने अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से “एकतरफा दृष्टिकोण न अपनाने का आग्रह किया, जो जमीनी हकीकत से अलग हो।” शुक्रवार को साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय (एमओएफए) के प्रवक्ता ने कहा, “भारत को उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकियों के नियोजित हस्तांतरण पर पाकिस्तान बहुत चिंतित है। इस तरह के कदम क्षेत्र में सैन्य असंतुलन को बढ़ाते हैं और रणनीतिक स्थिरता को कमजोर करते हैं।” अमेरिका से एकतरफा रुख अपनाने से बचने का आग्रह उन्होंने कहा, “वे दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के उद्देश्य को प्राप्त करने में सहायक नहीं हैं। हम अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा के मुद्दों पर समग्र और वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण अपनाने और एकतरफा और जमीनी हकीकत से अलग रुख अपनाने से बचने का आग्रह करते हैं।” गुरुवार को ट्रंप ने द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “इस साल से हम भारत को कई अरब डॉलर की सैन्य बिक्री बढ़ाएंगे। हम अंततः भारत को F35, स्टेल्थ लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने का मार्ग भी प्रशस्त कर रहे हैं।”

पार्वती नदी पर नया पुल बनाया जाएगा, एमपीआरडीसी ने 15 करोड़ की लागत का प्रस्ताव भेजा

 राजगढ़  मध्यप्रदेश में पार्वती नदी पर नया पुल बनाया जाएगा। इसके लिए एमपीआरडीसी ने 15 करोड़ रुपए की लागत के पुल का प्रस्ताव भोपाल भेजा है। नरसिंहगढ़ भोपाल रोड पर पार्वती का पुल क्षतिग्रस्त हो चुका है। फिलहाल पार्वती नदी में ही वैकल्पिक मार्ग बनाया गया है, जिससे आवाजाही चल रही है। बारिश में यह वैकल्पिक मार्ग बंद हो जाएगा जिससे लोगों को 100 किमी तक का फेरा लगाकर आना जाना करना होगा। नया पुल ये फेर खत्म कर देगा लेकिन बारिश के पहले इसका निर्माण नामुमकिन सा काम है। क्षतिग्रस्त पार्वती पुल के कारण नरसिंहगढ़ क्षेत्र के लिए परेशानी बढ़ी है। वर्तमान में नदी में बनाए गए वैकल्पिक मार्ग से वाहन निकल रहे हैं पर बरसात के समय यह पूरा ट्रैफिक बंद हो जाएगा और रूट डायवर्ट होगा। दरअसल, नरसिंहगढ़ से बैरसिया होते हुए भोपाल, विदिशा पहुंचाने वाला यह प्रमुख मार्ग है। साथ ही आसपास के कई गांवों के किसानों का आनाजाना भी इसी मार्ग से है। ऐसे में पुल बंद रहने से काफी काम प्रभावित होगा। नरसिंहगढ़ के व्यापार और मंडी जगत में भी इससे खासी दिक्कत होगी। एमपीआरडीसी ने इस बीच 15 करोड़ की लागत से नया पुल प्रस्तावित किया है। यह प्रस्ताव भोपाल भेज दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार अभी विभागीय स्तर पर डीपीआर बनवाई जा रही है। इसमें स्वीकृति के बाद लगभग छह माह का समय लगना है। ऐसी स्थिति में बरसात में लोगों को वैकल्पिक मार्गों से कई किमी का चक्कर लगाकर ही जाना होगा। नदी में बना मार्ग सिर्फ गर्मी के सीजन तक ही चालू रहेगा। बरसात चालू होते ही पावर्ती में पानी आते ही पूरा रूट डायवर्ट करना होगा। नरसिंहगढ़ मंडी प्रभावित होगी प्रमुख मार्ग बंद रहने के कारण नरसिंहगढ़ के कारोबार में खासी दिक्कत आ सकती है। किसानों की बड़ी फजीहत होगी। वे सीधे पार्वती नदी से होकर नरसिंहगढ़ नहीं पहुंच पाएंगे, जिसके चलते यहां की मंडी भी प्रभावित होगी। डायवर्टेड रूट पर आने में भी उन्हें परेशानी होगी, इतनी दूरी तक उपज लेकर पहुंचना भी मुश्किल होगा। विदिशा के लिए 80 से 100 किमी का चक्कर पार्वती नदी पुल के एक छोर पर राजगढ़ जिला और दूसरे पर भोपाल जिला आ जाता है। नरसिंहगढ़ से करीब आठ किलोमीटर दूरी पर यह पुल क्षतिग्रस्त हुआ है। दूसरी पार के कई गांवों के किसानों का सीजन के दौरान मंडी में आनाजाना लगा रहता है। उनके सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो जाएगी। बारिश के दौरान जब रूट डायवर्ट होगा तब यदि किसी को विदिशा जाना है तो भोपाल या ब्यावरा होकर जाना होगा। भोपाल होकर जाने में विदिशा की नरसिंहगढ़ से 80 किमी की दूरी बढ़कर 135 किमी की हो जाएगी। यदि ब्यावरा होकर जाएं तो यह दूरी और भी बढ़कर 165 किमी की हो जाएगी। स्वीकृति के बाद भी कम से कम छह माह लगेंगे एमपीआरडीसी, भोपाल के ईई सोनल सिन्हा ने बताया कि करीब 15 करोड़ की लागत से नया पुल प्रस्तावित है। यह वरिष्ठ कार्यालय में प्रोसेस में है। स्वीकृति के बाद भी कम से कम छह माह का समय इसमें लगता ही है। ऐसे में फिलहाल वैकल्पिक मार्ग ही एक माध्यम है। बारिश के दौरान रूट डायवर्ट करना ही एक मात्र विकल्प है।

सरकार ने नई आबकारी नीति की लागू, POS मशीन के बिना शराब बेचने पर लगेगा जुर्माना

भोपाल मध्य प्रदेश में सरकार ने नई आबकारी नीति लागू की है। इस नीति के तहत 19 धार्मिक शहरों और गांवों में शराब की दुकानें बंद होंगी। POS मशीन के बिना शराब बेचने पर जुर्माना लगेगा। नई नीति 1 अप्रैल से लागू होगी। धार्मिक क्षेत्र में शराबबंदी के बाद दूसरे जगह पर दुकान खोलने का फैसला लिया गया है। बंद हो चुकी दुकानों की भरपाई के लिए शराब अब महंगी हो जाएगी। 19 पवित्र शहरों और गांव में 1 अप्रैल से शराब की दुकान बंद होगी। ई गारंटी के तहत साइबर ट्रेजरी चालान बैंक खातों में जमा होगा।   POS मशीन से होगी निगरानी बता दें कि मध्य प्रदेश में 20 साल में 37% शराब की दुकानें बढ़ चुकी हैं। रेस्टोरेंट और बार में भी जगह बढ़ाने के लिए अब अतिरिक्त शुल्क देना होगा। POS मशीन लगाने का फैसला शराब की बिक्री पर नजर रखने के लिए लिया गया है। इससे सरकार को टैक्स चोरी रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह भी पता चल सकेगा कि कौन सी दुकान कितनी शराब बेच रही है। यह पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1 अप्रेल से 19 क्षेत्रों में शराबबंदी मध्य प्रदेश सरकार ने 1 अप्रेल से 19 धार्मिक व पवित्र क्षेत्रों में शराबबंदी का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इसके तहत उज्जैन नगर निगम, ओंकारेश्वर नगर पंचायत, मंडलेश्वर नगर पंचायत, ओरछा नगर पंचायत, महेश्वर नगर पंचायत, दतिया नगर पालिका, मैहर नगर पालिका, चित्रकूट नगर पंचायत, पन्ना नगर पालिका, मुलताई नगर पालिका, मंदसौर नगर पालिका, मंडला नगर पालिका, अमरकंटक नगर पंचायत, सलकनपुर ग्राम पंचायत, बरमान कला ग्राम पंचायत, लिंगा ग्राम पंचायत, कुंडलपुर ग्राम पंचायत, बांदकपुर ग्राम पंचायत और बरमान खुर्द ग्राम पंचायत शामिल हैं. बिना पीओएस मशीन नहीं चलेगी शराब दुकान नई आबकारी नीति में यह भी कहा गया है कि बिना पीओएस यानी प्वाइंट ऑफ सेल मशीन के शराब नहीं बेची जा सकेगी. वहीं रेस्टोरेंट और बार में सिटिंग स्पेस बढ़ाने पर अतिरिक्त शुल्क भी चुकाना होगा. गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में पिछले 20 सालों में 37 प्रतिशत शराब दुकानें बढ़ चुकी हैं. शराबदुकानों और रेस्टोरेंट बार की टाइमिंग नई आबकारी नीति 2025 की गाइडलाइन के मुताबिक शराब दुकान खुलने का समय सुबह 9:30 बजे से रात 11:30 बजे तक रहेगा. वहीं रेस्टोरेंट बार, होटल, रिसॉर्ट, क्लब आदि के लिए शराब बेचे जाने की टाइमिंग सुबह 10 बजे से रात 11.30 बजे तक रहेगी. हालांकि, बार-रेस्टोरेंट, क्लब, रिसॉर्ट आदि में 12 बजे तक शराब पी जा सकेगी. बार-क्लब या रेस्टोरेंट ओनर अतिरिक्त शुल्क देकर शराब बेचने और पीने की टाइम लिमिट बढ़वा सकते हैं. गौरतलब है कि शुक्रवार को सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में शराब नीति के साथ कुल 4 नीतियों पर संशोधन हुआ है.

दिल्ली के नए सीएम का नाम सभी जानना चाहते, 15 नाम तय किए जा चुके हैं, 9 मंत्री बनेंगे

नई दिल्ली दिल्ली के नए सीएम के लिए लगातार कयासों का दौर जारी है. बीजेपी में बैठकों का दौर जारी है. पीएम मोदी विदेश दौरे पर थे. वे अब भारत लौट आए हैं. अब विधायक दल के लिए पर्यवेक्षक की नियुक्ति की जा सकती है. इसके बाद ही नए मुख्यमंत्री के नाम का फैसला होगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को बीजेपी के बैठक में 48 विधायकों में से 15 विधायकों की एक लिस्ट तैयार की गई है. इस लिस्ट से 9 विधायकों को सलेक्ट किया जाएगा, जो दिल्ली के मुख्यमंत्री और मंत्री होंगे. मुख्यमंत्री बनने के रेस में कौन-कौन? सूत्रों के हवाले से मीडिया में खबर है कि दिल्ली के सीएम रेस में रेखा गुप्ता का नाम सबसे आगे है. वो एक महिला विधायक है. इनके अलावा आशीष सूद, जितेंद्र महाजन और राजकुमार भाटिया बीजेपी के पुराने पंजाबी चेहरे हैं. ब्राह्मण और संगठन के पुराने व्यक्ति में पवन शर्मा और सतीश उपाध्याय हैं. प्रवेश वर्मा जाट चेहरा हैं. विजेंद्र गुप्ता और मोहन सिंह बिष्ट के स्पीकर के लिए चुने की संभावना है. खबर है कि दिल्ली में 19 या 20 फरवरी को शपथग्रहण हो सकता है. आज 15 जनवरी है. इसका मतलब ये कि दिल्ली को 5 दिनों के अंदर नया मुख्यमंत्री मिल जाने की पूरी पूरी संभावना है. जानकारी ये भी है कि 17 या 18 फरवरी को बीजेपी विधायक दल की बैठक हो सकती है, उसमें सीएम के नाम पर मुहर लग सकती है. सूत्रों से खबर है कि 48 में से 15 विधायकों के नाम छांटे गए हैं, उसमें से 9 नाम शॉर्ट लिस्ट किए जाएंगे. फिर उन 9 में से ही मुख्यमंत्री, मंत्री और स्पीकर का नाम तय किया जाएगा. इन नामों की चर्चा तेज फिलहाल जिन नामों की चर्चा मुख्यमंत्री को लेकर हो रही है… उनमें रेखा गुप्ता, शिखा राय, प्रवेश वर्मा, मोहन सिंह बिष्ट, विजेंद्र गुप्ता, सतीश उपाध्याय, आशीष सूद और पवन शर्मा जैसे नाम शामिल हैं… पहले बात रेखा गुप्ता और शिखा राय की… रेखा गुप्ता आरएसएस के बैकग्राउंड से हैं. वो शालीमार बाग सीट से पहली बार विधायक बनीं हैं. दिल्ली नगर निगम में तीन बार की पार्षद हैं. वहीं एक और नाम है शिखा राय का.. जो तीन बार से विधायक हैं. इस बार उन्होंने ग्रेटर कैलाश सीट से कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज को हराया है. प्रवेश वर्मा भी रेस में दिल्ली की लड़ाई में इस बार सबसे अहम चेहरा रहे प्रवेश वर्मा भी रेस में हैं. नई दिल्ली सीट से उन्होंने केजरीवाल को चुनाव में हराया है. 2 बार के विधायक और 2 बार सांसद रह चुके हैं. दिल्ली के पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं. 6 बार के विधायक हैं मोहन सिंह विष्ट एक नाम मोहन सिंह बिष्ट का है जो 6 बार के विधायक हैं. मूल रुप से उत्तराखंड के रहने वाले बिष्ट छात्र जीवन में ही आरएसएस से जुड़ गए थे. विजेंदर गुप्ता का नाम भी… दिल्ली बीजेपी का बड़ा चेहरा माने जाने वाले विजेंदर गुप्ता भी रेस में हैं. वो लगातार 3 बार के विधायक हैं. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं. बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं. कौन हैं सतीश उपाध्याय वहीं, सतीश उपाध्याय भी दावेदारों में हैं. वो ब्राह्मण चेहरा होने के साथ इस बार चुनाव भी जीता है. पहले वो दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इसके अलावा एक नाम आशीष सूद का है जो पहली बार विधायक बने हैं. फिलहाल वे गोवा बीजेपी के प्रभारी हैं और जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के सह-प्रभारी हैं. नवनिर्वाचित विधायक पवन शर्मा का नाम भी सामने आ रहा है. वो इस बार उत्तम नगर से विधायक चुने गए हैं. दरअसल, दिल्ली में बीजेपी का सीएम कौन होगा, ये चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि चुनाव के वक्त बीजेपी ने कोई चेहरा घोषित नहीं किया था. और आम आदमी पार्टी बार-बार बीजेपी पर सीएम के चेहरे को लेकर प्रहार कर रही थी. बीजेपी ने 48 सीट जीती दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में बीजेपी ने 48 सीट पर जीत दर्ज की. जबकि आम आदमी पार्टी (आप) को 22 सीट से संतोष करना पड़ा. वहीं, कांग्रेस 2015 और 2020 के बाद एक बार फिर अपना खाता नहीं खोल पाई.

निवेशक महाकुंभ में होगा देश-विदेश से आए उद्यमियों का समागम

भोपाल भारत का हृदय मध्यप्रदेश, समृद्ध अर्थव्यवस्था, विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर, राज्य सरकार की निवेशक-अनुकूल नीतियों और विशेष प्रोत्साहन योजनाओं के साथ निवेश के असीमित अवसरों की उपलब्धता से देश-विदेश के उद्यमियों के लिए निवेश का प्रमुख स्थल बन गया है। देश-विदेश के उद्यमियों को निवेश के अवसरों से रूबरू कराने के उद्देश्य से राजधानी भोपाल में दो दिवसीय जीआईएस-2025 का आयोजन किया जा रहा है। इसका शुभांरभ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। इस ‘महाकुंभ’ में दुनिया भर से आने वाले निवेशकों का समागम होगा। व्यापार और उद्योग अनुकूल माहौल बनाने के लिये प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश सभी उद्यमियों के लिए निवेश के अपार अवसर और उसके बाद दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के प्रति संकल्पित है। मध्यप्रदेश पर्यटन, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल, खनन, डेयरी और खाद्य प्र-संस्करण जैसे क्षेत्रों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास की असीमित संभावनाएं मध्यप्रदेश एक्सपोर्ट प्रिपेअर्डनेस इंडेक्स में देश के शीर्ष़-10 राज्यों में और विश्व बैंक द्वारा आयोजित ईज़-ऑफ-डूइंग बिज़नेस में चौथे स्थान पर है। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के प्रभाव क्षेत्र में आने से मध्यप्रदेश में लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास के असीम अवसर उपलब्ध हैं। मजबूत रेल और सड़क नेटवर्क के अलावा राज्य में 6 व्यावसायिक एयरपोर्ट हैं, जहां से 100 से अधिक उड़ानें संचालित होती हैं। इससे यहां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आवागमन सुगम हुआ है। खनिज संसाधन और औद्योगिक समृद्धि मध्यप्रदेश में कोयला, हीरा, तांबा, लौह अयस्क और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों का भण्डार है। प्रदेश तांबा, मैंगनीज, मोलिब्डेनम और हीरे का देश का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य सरकार कृषि और खाद्य प्र-संस्करण, आईटी, आईटीईएस, पर्यटन, वस्त्र उद्योग, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल, दवाइयां एवं फार्मास्युटिकल्स और रक्षा एवं एयरोस्पेस सेक्टर पर प्रमुखता से ध्यान दे रही है। राज्य में 8 फूड पार्क, लगभग 15 मिलियन मीट्रिक टन की वेयरहाउसिंग क्षमता और 3 लाख 54 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र कवर करने वाले कोल्ड-स्टोरेज के साथ मध्यप्रदेश उद्योगों के लिए एक आकर्षक निवेश स्थल बनता जा रहा है। शिक्षा, पर्यटन और हरित क्षेत्र में अग्रणी मध्यप्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। यहां देश भर के सबसे बड़े क्षेत्र में जैविक खेती की जाती है। भारत के कुल जैविक उत्पादन का 27% मध्यप्रदेश में होता है। भारत के सबसे स्वच्छ राज्य मध्यप्रदेश का इंदौर शहर लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है और भोपाल स्वच्छतम राजधानी। राज्य की बड़ी जनसंख्या इसे विशाल उपभोक्ता बाजार भी बनाती है। इन्फ्रास्ट्रक्चर मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए 1.25 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की औद्योगिक भूमि-बैंक है। इसमें से 19,011 हेक्टेयर क्षेत्र उद्योगों के लिए पहले ही विकसित किए जा चुके हैं। राज्य में 76 विकसित, 19 विकासाधीन और 13 प्रस्तावित भूमि-बैंक हैं, जो 5 ग्रोथ सेंटर्स में फैले 79 भूखंडों में वितरित हैं। राज्य में 6 प्रमुख ड्राई इनलैंड कंटेनर डिपो हैं, इनकी वेयरहाउसिंग क्षमता 240 लाख मीट्रिक टन है। मध्यप्रदेश ऊर्जा सरप्लस राज्य है, जहां 31 गीगावाट विद्युत का उत्पादन होता है, जिसमें 20 प्रतिशत क्लीन एनर्जी है। मध्यप्रदेश किसी भी औद्योगिक क्षेत्र की मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति करने में सक्षम है। सड़क नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स मध्यप्रदेश ने अपने सड़क नेटवर्क के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है। राज्य में 5 लाख किलोमीटर से अधिक लंबाई का सड़क नेटवर्क है, जिसमें 46 राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। यह देश के राष्ट्रीय राजमार्गों का 6.6% और राज्य-राजमार्गों का लगभग 6.4% है। राज्य में प्रतिदिन 550 से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है। इसके साथ ही 2,32,344 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों के साथ, मध्यप्रदेश 5वां सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क वाला राज्य है। राज्य में अटल प्रोग्रेस-वे और नर्मदा एक्सप्रेस-वे के साथ ही दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा, पीथमपुर-धार-महू, रतलाम-नागदा, शाजापुर-देवास, और नीमच-नयागांव जैसे औद्योगिक एवं निवेश क्षेत्रों का निर्माण किया गया है। औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश में 4 निवेश गलियारों का विकास किया जा रहा है। इनमें भोपाल-इंदौर, भोपाल-बीना, जबलपुर-कटनी-सतना-सिंगरौली और मुरैना-ग्वालियर-शिवपुरी-गुना शामिल हैं। मध्यप्रदेश ईज़-ऑफ-डूइंग बिजनेस रैंकिंग में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में से एक है। यहां व्यापार संचालन और निवेश के लिये माहौल को अत्यधिक अनुकूल बनाया गया है। इसके साथ ही नियामकीय प्रक्रियाओं को अत्यंत सरल किया गया है। इससे आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिल रहा है। प्रदेश में किये गए मुख्य सुधारों में ऑनलाइन पंजीकरण, लाइसेंसिंग और अनुमति स्वीकृति जैसी व्यावसायिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और इन्वेस्ट मध्यप्रदेश विंडो प्रमुख हैं। इन्वेस्ट पोर्टल को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम के साथ एकीकृत किया गया है। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ रहा है। प्रमुख सेक्टर्स और उद्योग प्रोत्साहनकारी नीतियां राज्य में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए आकर्षक नीतियां बनाई गई हैं। इनमें संयंत्र और मशीनरी में निवेश पर 40% तक इन्वेस्टमेंट प्रोत्साहन सहायता, रोजगार सृजन पर 1.5 गुना पूंजी सब्सिडी, निर्यात पर 1.2 गुना पूंजी सब्सिडी और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए 1.2 गुना पूंजी सब्सिडी शामिल है।

कांग्रेस के सूत्र गांधी परिवार के महाकुंभ में जाने पर चुप! सोनिया गांधी को गंगा में स्नान करते हुए देखा गया था

नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के द्वारा महाकुंभ को लेकर दिए गए बयान पर विवाद गहरा गया था। इसके बावजूद उनकी पार्टी के कई नेताओं ने पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद लोगों की नजर गांधी परिवार के अगले कदम पर जा टिकी है। आपको बता दें कि एक रैली के दौरान खरगे ने यह सवाल उठाया था कि क्या गंगा में पवित्र स्नान करने से देश में गरीबी समाप्त हो सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था। उनका दावा था कि उन्होंने भाजपा नेताओं की आलोचना के लिए ऐसे बयान दिए थे। उनके बयान के बीच INDIA गठबंधन के सहयोगी अखिलेश यादव और उनकी पत्नी ने सबसे पहले कुंभ में स्नान किया। हाल ही में कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह, उनके बेटे, राजस्थान कांग्रेस के कद्दावर नेता सचिन पायलट सहित कई कांग्रेसी स्नान करने के लिए प्रयागराज की यात्रा कर चुके हैं। दिग्विजय सिंह और उनके बेटे, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और सचिन पायलट ने कुंभ में जाकर स्नान किया। इन सभी नेताओं को यह समझ है कि ‘हिंदू आस्था’ एक ऐसा विषय है जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान जो गलती हुई थी, उसे दोहराया नहीं जा सकता। आपको बता दें कि कांग्रेस ने इसे सरकारी आयोजन कहकर छोड़ दिया था। हालांकि पार्टी ने बाद में मंदिर जाने का दावा किया था, लेकिन अब तक कोई प्रमुख नेता अयोध्या में नहीं दिखाई दिए हैं। कांग्रेस के सूत्र गांधी परिवार के महाकुंभ में जाने पर चुप हैं। 2001 में सोनिया गांधी को गंगा में पवित्र स्नान करते हुए देखा गया था। उस समय भाजपा उनके धर्म और उनकी जाति को लेकर सवाल उठाती थी। आपको बता दें कि इंदिरा गांधी हिंदू थीं और हमेशा ‘रुद्राक्ष’ पहनती थीं।

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