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पीएम मोदी ने महाकुंभ पर लिखा ब्लॉग में कहा- ‘हे मां गंगा अगर सेवा में कुछ कमी रह गई हो तो माफ करना’

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को विशाल महाकुंभ समागम की तुलना गुलामी की मानसिकता की बेड़ियों को तोड़कर स्वतंत्र रूप से सांस लेने वाले राष्ट्र की नई जागृत चेतना से की। महाकुंभ के समापन के एक दिन बाद उन्होंने एक ब्लॉग में लिखा, “महाकुंभ समाप्त हो गया है। एकता का ‘महायज्ञ’ संपन्न हो गया है।” उन्होंने कहा कि देश को अब ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को पूरा करने के लिए आत्मविश्वास और एकता की इसी भावना के साथ आगे बढ़ना है। मोदी ने कहा कि संगम में जितनी उम्मीद थी, उससे कहीं अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाई। उन्होंने कहा कि भारत अब नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है और यह युग परिवर्तन की ओर इशारा करता है जो भारत के लिए एक नया भविष्य लिखेगा। प्रधानमंत्री ने सेवाओं में कमी के लिए क्षमा मांगी प्रधानमंत्री ने “माँ गंगा, माँ यमुना, माँ सरस्वती” के साथ-साथ लोगों से, जिन्हें उन्होंने भगवान का रूप बताया, सेवाओं में किसी भी कमी के लिए क्षमा मांगी। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी व्यवस्था करना आसान नहीं था। महाकुंभ में भगदड़ के दौरान कम से कम 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जिसमें देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि 13 जनवरी को महाकुंभ शुरू होने के बाद से प्रयागराज में 65 करोड़ से अधिक लोग पवित्र स्थल पर आए हैं। पीएम मोदी ने ब्लॉग में सीएम योगी की प्रशंसा की अपने ब्लॉग में मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के सांसद के रूप में वह गर्व से कह सकते हैं कि आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार, प्रशासन और लोगों ने सामूहिक रूप से इस “एकता के महाकुंभ” को सफल बनाया। उन्होंने प्रयागराज के निवासियों की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि सफाई कर्मचारी, पुलिस कर्मी, नाविक, ड्राइवर और रसोइया सभी ने भक्ति और सेवा की भावना के साथ अथक परिश्रम करके इसे सफल बनाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले कुछ दशकों में जो कभी नहीं हुआ, वह इस बार हुआ। उन्होंने कहा, “इसने आने वाली कई शताब्दियों की नींव रखी है।” मोदी ने कहा कि महाकुंभ का आयोजन प्रबंधन पेशेवरों, योजना और नीति विशेषज्ञों के लिए एक अध्ययन का विषय बन गया है, क्योंकि दुनिया में इस तरह के विशाल आयोजन का कोई दूसरा उदाहरण नहीं है। उन्होंने कहा, “जब किसी राष्ट्र की चेतना जागृत होती है, जब वह सैकड़ों वर्षों की गुलामी की सभी बेड़ियों को तोड़कर एक नई चेतना के साथ सांस लेती है, तो ऐसा नजारा सामने आता है, जैसा हमने 13 जनवरी के बाद प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में देखा।” मोदी ने कहा कि महाकुंभ की परंपरा हजारों वर्षों से भारत की राष्ट्रीय चेतना को पुनर्जीवित करती रही है, देश और समाज को नए रास्ते सुझाती रही है। महाकुंभ ने भारत की विकास यात्रा में एक नए अध्याय का संदेश दिया उन्होंने कहा, “इस बार इस तरह का महाकुंभ 144 वर्षों के बाद आया है और इसने भारत की विकास यात्रा में एक नए अध्याय का संदेश दिया है। यह संदेश ‘विकसित भारत’ का है।” उन्होंने कहा कि महाकुंभ में विदेश सहित हर क्षेत्र, जाति और विचारधारा के लोग एक थे, उन्होंने लोगों से ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए इसी तरह एक साथ आने का आह्वान किया। मोदी ने कहा कि एक समय में 140 करोड़ देशवासियों की आस्था इस पर्व से जुड़ी थी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की संख्या ने निश्चित रूप से एक रिकॉर्ड बनाया है क्योंकि अमेरिका की आबादी से लगभग दोगुने लोगों ने इस पवित्र स्नान में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने पिछले कुंभों के अनुभव के आधार पर अपना अनुमान लगाया था। उन्होंने कहा कि वास्तविक संख्या अनुमान से कहीं अधिक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में युवा श्रद्धालुओं को पवित्र समागम में शामिल होते देखना उनके लिए बहुत सुखद अनुभव था। उन्होंने कहा, “इससे यह विश्वास बढ़ता है कि भारत की युवा पीढ़ी हमारे मूल्यों और संस्कृति की वाहक है और इसे आगे बढ़ाने में अपनी जिम्मेदारी समझती है। वे इसके लिए प्रतिबद्ध हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रयागराज की यह तीर्थयात्रा एकता और सद्भाव का संदेश देती है। उन्होंने महाकाव्य रामायण की एक घटना का जिक्र किया जिसमें नाविक राजा निषाद राज ने उत्तर प्रदेश के शहर के आसपास के एक स्थान पर भगवान राम से मुलाकात की थी। आनंदित लोगों के दृश्य को कभी नहीं भूल सकते प्रधानमंत्री ने कहा कि करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु बिना किसी आमंत्रण के पवित्र संगम पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि वह वहां स्नान करने के बाद आनंदित लोगों के दृश्य को कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा कि महिलाएं हों, बुजुर्ग हों या दिव्यांग, हर कोई अपने साधन से यहां आया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से श्रद्धालुओं का उनके घर लौटने पर श्रद्धा के साथ स्वागत किया गया, वह भी यादगार है। मोदी ने कहा कि इस बड़े आयोजन ने नदियों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के उनके संकल्प को मजबूत किया है, चाहे वह बड़ी हो या छोटी। उन्होंने कहा कि गंगा, यमुना या किसी भी अन्य नदी की पवित्रता लोगों की जीवन यात्रा से जुड़ी है।  

कर्नाटक के होटलों में इडली को लेकर बड़ा खुलासा, हो रहा प्लास्टिक शीट का इस्तेमाल,52 पर हुई कार्रवाई

बेंगलुरु आमतौर पर लोग दक्षिण भारतीय व्यंजन इडली को बेहद चाव से खाते हैं लेकिन इसको लेकर कर्नाटक में एक बड़ा खुलासा हुआ है जिसके बाद  राज्य सरकार ने 52 होटलों पर कार्रवाई की है. कर्नाटक खाद्य सुरक्षा विभाग ने राज्यभर में 52 होटलों में इडली बनाने के लिए पॉलीथीन शीट के अवैध इस्तेमाल का खुलासा किया है जिससे लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है. इसको लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने गुरुवार को जानकारी दी. प्लास्टिक शीट से इडली बनाने पर सख्ती स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इडली बनाने में विशेष रूप से पतली पॉलीथीन शीट का उपयोग स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, क्योंकि यह कैंसरकारी (कार्सिनोजेनिक) होती है. सरकार इस तरह की हानिकारक चीजों के इस्तेमाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है. दरअसल खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने कर्नाटक के 250 स्थानों से इडली के नमूने एकत्र किए थे. स्वास्थ्य मंत्री राव ने कहा, ‘पहले पारंपरिक रूप से इडली पकाने के लिए कपड़े का उपयोग किया जाता था, लेकिन हमें कुछ होटलों में प्लास्टिक शीट का उपयोग किए जाने की शिकायत मिली थी. इसी आधार पर हमने जांच की और 52 होटलों में प्लास्टिक का अवैध उपयोग पाया.’ प्लास्टिक से सेहत को गंभीर खतरा जांच के दौरान मिले चौंकाने वाले नतीजों से स्वास्थ्य विभाग चिंतित है. मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि ‘गर्म होने पर प्लास्टिक के हानिकारक तत्व इडली में मिल सकते हैं, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती है.’ सरकार की सख्त कार्रवाई मंत्री ने कहा कि दोषी होटलों पर पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है, और सरकार खाद्य व्यंजनों में प्लास्टिक के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाएगी. उन्होंने जनता से अपील की कि यदि वो किसी होटल या रेस्टोरेंट में प्लास्टिक का उपयोग होता देखें तो तुरंत अधिकारियों को इसकी सूचना दें. रंगीन फूड कलर पर भी प्रतिबंध स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि 2024 में कर्नाटक सरकार ने रॉडामिन-बी नामक खतरनाक खाद्य रंग पर प्रतिबंध लगाया था, जिसका व्यापक रूप से गोभी मंचूरियन और कॉटन कैंडी जैसे खाद्य पदार्थों में उपयोग किया जाता था. राव ने कहा, ‘हमने गोभी मंचूरियन की जांच के दौरान पाया कि इसमें खतरनाक रॉडामिन-बी रंग का उपयोग किया जा रहा था. यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है, इसलिए हमने इसे प्रतिबंधित कर दिया है. यदि कोई इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसे सात साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है, और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा.’  

दिल्ली कैपिटल्स ने खेला बड़ा दांव, आईपीएल से पहले हुई इस दिग्गज की वापसी, केविन पीटरसन बने मेंटर

नई दिल्ली दिल्ली कैपिटल्स ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2025 के लिए इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन को अपना मेंटर घोषित किया है। फ्रैंचाइजी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर घोषणा की।  आईपीएल 2025 की शुरुआत में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। टूर्नामेंट के 18वें सत्र का कार्यक्रम भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) जारी कर चुका है। इससे पहले दिल्ली कैपिटल्स ने बड़ी घोषणा कर दी है। गुरुवार को फ्रेंचाइजी की तरफ से बताया गया कि इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन आगामी टूर्नामेंट से पहले टीम से जुड़ेंगे। वह आईपीएल 2025 में बतौर मेंटर टीम का हिस्सा बनेंगे। दिल्ली की कोचिंग यूनिट में शामिल हुए पीटरसन आईपीएल की शुरुआत 22 मार्च से होगी। दिल्ली कैपिटल्स अपने अभियान का आगाज 24 मार्च से लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ मुकाबले से केरगी। इससे पहले दिल्ली कैपिटल्स की कोचिंग यूनिट में एक नया नाम जुड़ गया है। आगामी संस्करण में पीटरसन टीम के मुख्य कोच हेमंग बदानी, सहायक कोच मैथ्यू मॉट, गेंदबाजी कोच मुनाफ पटेल और डॉयरेक्टर ऑफ क्रिकेट वेणुगोपाल राव के साथ काम करते नजर आएंगे। पहले भी दिल्ली का हिस्सा रह चुके पीटरसन 44 वर्षीय बल्लेबाज आईपीएल में वापसी के लिए तैयार हैं। वह दिल्ली कैपिटल्स के लिए पहले भी क्रिकेट खेल चुके हैं, लेकिन इस बार बतौर मेंटर टीम से जुड़े हैं। बात करें उनके आईपीएल करियर की तो उन्होंने पांच टीमों के लिए इस टूर्नामेंट में क्रिकेट खेला। वह दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स), रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, डेक्कन चार्जर्स, सनराइजर्स हैदराबाद और राइजिंग पुणे सुपरजाएंट का हिस्सा रहे। दिल्ली ने नहीं किया कप्तान का एलान दिल्ली कैपिटल्स ने अब तक अपने कप्तान का एलान नहीं किया है। मेगा नीलामी से पहले फ्रेंचाइजी ने ऋषभ पंत को रिटेन नहीं किया था। अब टीम  को आगामी टूर्नामेंट से पहले कप्तान के नाम की घोषणा करनी है। इस दौड़ में अक्षर पटेल, केएल राहुल और फाफ डुप्लेसिस का नाम सबसे आगे शामिल है।  

यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को जलाने का रास्ता साफ, आज खोले जाएंगे कंटेनर, जलाने की प्रक्रिया शुरू

इंदौर यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को जलाने का रास्ता साफ हो गया है। भोपाल से यह कचरा पीथमपुर लाया जा चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता चिन्मय मिश्र ने इस पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया। गुरुवार सुबह मामले को लेकर हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो इस संबंध में हाई कोर्ट के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। कोर्ट ने शासन के उस जवाब को भी रिकॉर्ड पर ले लिया है, जिसमें कहा है कि कचरा जलाने के दौरान सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। पिछली सुनवाई में सरकार से मांगा था जवाब पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से पूछा था कि धार जिले के पीथमपुर में भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का कचरा जलाने के दौरान कोई घटना होगी, तो उससे निपटने के लिए उसके पास क्या इंतजाम हैं। गुरुवार को सरकार ने जवाब दाखिर कर दिया। याचिका में आरोप था कि कचरा जलाने के दौरान अकस्मात आपदा होने की स्थिति में आपदा प्रबंधन के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। पीथमपुर में रि-सस्टेनेबिलिटी कंपनी के परिसर में पिछले दो माह से रखे यूनियन कार्बाइड के 337 टन कचरे के 12 कंटेनर में चार से पांच कंटेनर को गुरुवार को खोला जाएगा। कंटेनर से कचरे को निकालकर उसमें मौजूद हानिकारक तत्वों पर नियंत्रण के लिए सोडियम सल्फाइड जैसे रसायन मिलाए जाएंगे। गुरुवार को इंसीनरेटर में ड्राई रन शुरू किया जाएगा और 12 घंटे तक इंसीनरेटर को चालू कर इसके प्रथम चेम्बर में 850 से 900 डिग्री सेल्सियस व दूसरे चेम्बर में 1100 से 1200 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंचाया जाएगा। इसके बाद यूनियन कार्बाइड के कचरे को इंसीनरेटर में डालकर जलाने की प्रक्रिया शुरू होगी। संभागायुक्त दीपक सिंह ने कहा कि कोर्ट के निर्देश के अनुसार गुरुवार से कचरे को जलाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। याचिकाकर्ता की आपत्तियां खारिज याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता चिन्मय मिश्र ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि पर्यावरण और स्वास्थ्य नियमों का पालन किए बगैर यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा जलाने की तैयारी की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि जिस जगह कचरा जलाया जाना है, वहां से 250 मीटर दूर एक गांव है। एक किमी के दायरे में तीन अन्य गांव हैं, लेकिन स्थानीय नागरिकों को वैकल्पिक स्थान तक उपलब्ध नहीं करवाया गया। कचरा जलाने के दौरान कोई हादसा होता है तो पीथमपुर में अस्पताल भी नहीं है।   हाई कोर्ट के आदेश पर जलाया जा रहा कचरा उल्लेखनीय है कि भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार यूनियन कार्बाइड के कचरे का निस्तारण करा रही है। इसके लिए जनवरी में 337 टन कचरे को भोपाल से धार जिले के पीथमपुर स्थित संयंत्र में लाकर उसे जलाने की तैयारी कर ली गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने कचरे के जलने से उसकी जहरीले तत्वों का जलवायु पर दुष्प्रभाव होने की आशंका जताते हुए विरोध कर दिया था।

संजय राउत ने महायुति सरकार पर साधा निशाना, पुणे में बस में दुष्कर्म के आरोपी को बख्शेंगे नहीं

मुंबई पुणे में स्वारगेट बस अड्डे पर खड़ी बस में 26 वर्षीय महिला के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद महाराष्ट्र में राजनीति तेज हो गई है। शिवसेना (उबाटा) के नेता संजय राउत ने घटना को 2012 में दिल्ली में हुए सामूहिक दुष्कर्म जैसा करार दिया है। पुणे की कानून व्यवस्था को लेकर जिले के संरक्षक मंत्री अजित पवार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में महिलाओं के खिलाफ अपराध में काफी तेजी से इजाफा हुआ है।   पुणे में स्वारगेट बस अड्डे पर खड़ी बस में 26 वर्षीय महिला के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद महाराष्ट्र में राजनीति तेज हो गई है। शिवसेना (उबाटा) के नेता संजय राउत ने घटना को 2012 में दिल्ली में हुए सामूहिक दुष्कर्म जैसा करार दिया है। साथ ही पुणे की कानून व्यवस्था को लेकर जिले के संरक्षक मंत्री अजित पवार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में महिलाओं के खिलाफ अपराध में काफी तेजी से इजाफा हुआ है। संजय राउत ने कहा कि अगर राज्य में विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी की सरकार के समय यह घटना हुई होती तो अब तक भाजपा की महिला कार्यकर्ता मंत्रालय के बाहर हंगामा कर रहीं होतीं। उन्होंने कहा कि क्या भाजपा नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने लाडकी बहिन योजना के तहत 1500 रुपये देकर महिलाओं का आत्म सम्मान खरीद लिया है? मुख्यमंत्री फडणवीस को इस मामले में डिप्टी सीएम और पुणे के संरक्षक मंत्री अजित पवार से जवाब मांगना चाहिए। संजय राउत ने कहा कि यह घटना दिल्ली के निर्भया कांड जैसी है। सौभाग्य से इस मामले में महिला बच गई। पुणे में गैंगस्टरों को कानून का कोई डर नहीं है। गृह मंत्रालय राजनीतिक उद्देश्यों और राजनीतिक विरोधियों पर शिकंजा कस रहा है। अगर गृह मंत्रालय राज्य की महिला और लड़कियों की सुरक्षा के लिए काम करे तो यह बड़ा उपकार होगा। आरोपी फरार है, बख्शेंगे नहीं: शिंदे घटना को उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने निंदनीय करार दिया। उन्होंने कहा कि आरोपी फरार है, लेकिन उसे बख्शा नहीं जाएगा। मैंने पुणे के पुलिस आयुक्त से बात की है। उनको आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार आरोपी को मौत की सजा देने की मांग करेगी। उन्होंने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से भी बात की। उनको खराब खड़ी बसों को नीलाम करने के लिए कहा है। शिंदे ने कहा कि परिवहन मंत्री के निर्देश पर तीन सुरक्षा कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।  एमएसआरटीसी आरोपी को बख्शेगी नहीं। सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

17 वर्षीय युवक चार पैरों के साथ जी रहा था, दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने सर्जरी कर दिया नया जीवन

नई दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के सर्जन एक अभूतपूर्व सर्जिकल केस में सफल रहे हैं। उन्होंने उन्नाव (उत्तर प्रदेश) के 17 वर्षीय युवक से उसके परजीवी जुड़वां भाई के अवशेषों को निकालने में सफलता हासिल की। इस युवक के शरीर में एक अविकसित जुड़वां भाई था, जिसकी एक जोड़ी पैर और अविकसित पुरुष जननांग युवक के धड़ से बाहर निकले हुए थे। यह जन्मजात समस्या थी, जिससे युवक को 17 वर्षों तक परेशानियों का सामना करना पड़ा था। जटिल सर्जरी युवक के शरीर में जुड़वां भाई के अविकसित अवशेष होने के कारण उसकी जीवनशैली में कई कठिनाइयां थीं। इसके कारण युवक को शारीरिक और मानसिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता था और उसकी पढ़ाई भी आठवीं कक्षा में ही छूट गई थी। ऐसे मामलों में सर्जरी एक कठिन चुनौती होती है, क्योंकि इसमें नसों का जाल और अंगों को अलग करने की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है। इस मामले में, एम्स के सर्जनों को छाती की दीवार, आंतों और किडनी के पास के टिशूज को अलग करना था। इस विशेष सर्जरी में युवक के अविकसित अंग न केवल बाहर निकले थे, बल्कि उनमें स्पर्श और दर्द का अहसास भी होता थाऔर समय के साथ यह अंग बढ़ते जा रहे थे। इनमें अविकसित पुरुष जननांग भी शामिल थे, जो युवक के लिए एक मानसिक चुनौती बन गए थे। सफल ऑपरेशन एम्स के डॉक्टरों की एक टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को आठ फरवरी 2024 को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह सर्जरी विशेष रूप से महत्वपूर्ण और दुर्लभ मानी जा रही है, क्योंकि दुनिया में इस तरह के केवल 40 मामले ही सामने आए हैं। इस प्रकार के ऑपरेशन में एक जुड़वां भाई विकसित हो जाता है, जबकि दूसरा अविकसित रहता है और शरीर में अलग तरह की जटिलताएं पैदा करता है। अब, युवक को एक नया जीवन मिला है और वह शारीरिक और मानसिक रूप से पहले से अधिक स्वतंत्र महसूस कर रहा है। उसे अब न केवल अपनी जिंदगी में एक नया मौका मिला है, बल्कि उसकी आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हुई है।  

राज्यपाल बागडे ने फुलंब्री में महिला छात्रावास, ग्रंथालय और सभागृह निर्माण के भूमि पूजन समारोह में भाग लिया

जयपुर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने गुरुवार को महाराष्ट्र के  फुलंब्री में श्री संत सावता माळी ग्रामीण महाविद्यालय में पी.एम.उषा योजना के अंतर्गत निर्मित होने वाले महिला छात्रावास, ग्रंथालय और सभागृह निर्माण के भूमि पूजन समारोह में भाग लिया। उन्होंने इससे पहले भूमि पूजन करते हुए इन भवनों के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान रखने पर जोर दिया। उन्होंने गांवो में उच्च शिक्षा के प्रभावी प्रसार के साथ वहां आधारभूत सुविधाओं को महत्वपूर्ण बताया।

मुख्य सचिव सुधांश पंत ने ‘राइजिंग राजस्थान’ ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट, 2024 में हुए एमओयू के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की

जयपुर  मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत ने ‘राइजिंग राजस्थान’ ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 के दौरान हस्ताक्षरित एमओयू के कार्यान्वयन की गुरूवार को समीक्षा बैठक ली। गत 13 फरवरी को हुई समीक्षा बैठक के बाद एमओयू के कार्यान्वयन में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए श्री पंत ने अधिकारियों को उपलब्ध सरकारी भूमि का लैंड बैंक बनाने और इसे निवेशकों को आसानी से उपलब्ध कराने हेतु ऑनलाइन करने के निर्देश दिए। रीको द्वारा भूमि बैंक विकसित करने और निवेशकों को तेजी से भूमि आवंटित करने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए श्री पंत ने राजस्व, नगरीय विकास एवं आवास और स्थानीय स्वशासन  जैसे अन्य भूमि आवंटन संबंधित विभागों को भी अलग-अलग ऑनलाइन भूमि बैंक बनाने की संभावनाओं को तलाशने के निर्देश दिए।   मुख्य सचिव ने एमओयू की अधिक संख्या वाले जिलों में लैंड बैंक बनाने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिये। रीको के डायरेक्ट लैंड अलॉटमेंट पोर्टल के लॉन्च से पहले उन्होंने विभिन्न विभागों को शेष निवेशकों के लिए भूमि आवंटन से संबंधित टास्क क्रिएट करने के निर्देश दिए।   मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में बड़े सौर पार्क विकसित करने की संभावनाओं को तलाशा जाना चाहिए जहां उन ऊर्जा कंपनियों को स्थापित किया जा सके, जिन्होंने निवेश समिट के दौरान एमओयू हस्ताक्षरित किए थे। श्री सुधांश पंत ने कहा कि भूमि आवंटन किसी भी व्यावसायिक इकाई की स्थापना में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिन प्रमुख विभागों के पास बड़े सरकारी लैंड पार्सल हैं, उन्हें पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ऑनलाइन लैंड बैंक बनाने की प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए। ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी संख्या में हस्ताक्षरित एमओयू को ध्यान में रखते हुए विभागों को ऐसे बड़े सोलर पार्क स्थापित करने की संभावनाएं तलाशनी चाहिए, जो रीको औद्योगिक क्षेत्रों की तर्ज पर ऊर्जा कंपनियों को समायोजित कर सकें और उनके एमओयू कार्यान्वयन में तेजी ला सकें। श्री पंत ने विभागीय सचिवों को निर्देश दिए कि वे एमओयू के कार्यान्वयन की साप्ताहिक समीक्षा करें और उनकी प्रगति से संबंधित जानकारी एमओयू इम्प्लीमेंटेशन पोर्टल पर अपलोड करें।  उल्लेखनीय है कि गत 9-11 दिसंबर को आयोजित निवेश समिट के दौरान कुल 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर किए गये। इनमें से 1.66 लाख करोड़ रुपये मूल्य के एमओयू का कार्यान्वयन मात्र दो महीने की रिकॉर्ड अवधि में शुरू किया जा चुका है। बैठक में  उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रमुख सचिव श्री अजिताभ शर्मा, राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव श्री दिनेश कुमार, स्थानीय स्वशासन विभाग के प्रमुख सचिव श्री राजेश यादव, नगर विकास एवं आवासन विभाग के प्रमुख सचिव श्री वैभव गालरिया, खनन एवं खान विभाग के प्रमुख सचिव श्री टी. रविकांत, रीको की प्रबंध निदेशक श्रीमति शिवांगी स्वर्णकार, बीआईपी के अतिरिक्त आयुक्त श्री सौरभ स्वामी सहित राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

एक राष्ट्र एक चुनाव: एक नई दिशा की ओर: न्यायमूर्ति रोहित आर्य (सेवानिवृत)

भोपाल प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स ने एक बार कहा था, ‘कठिनाई नए विचारों को विकसित करने में नहीं, बल्कि पुराने विचारों से मुक्त होने में है।‘ संभवत: एक देश एक चुनाव का विरोध कर रहे राजनीतिक दल और नेता पुराने विचारों से मुक्‍त होने में ही कठिनाई महसूस कर रहे हैं, या सिर्फ विरोध की राजनीति के तकाजे उन्‍हें इस अभिनव प्रयास का समर्थन करने से रोक रहे हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसकी नीव विविधता में एकता की अवधारणा पर टिकी हुई है। “एक राष्ट्र, एक चुनाव” इसी विचारधारा को सशक्त बनाता है, जिससे संसद और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जा सकें। यह विषय न केवल प्रशासनिक सुधार से जुड़ा है, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र को अधिक संगठित, कुशल और प्रभावी बनाने की दिशा में एक एतिहासिक कदम भी है। यह प्रणाली चुनावी प्रक्रिया को सरल बनायेगी, शासन को स्थिरता प्रदान करेगी और अर्थव्यस्था पर पड़ने वाले अनावश्यक बोझ को कम करेगी। पहले भी होते रहे हैं एक साथ चुनाव हालांकि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस दिशा में की गई पहल के बाद से चर्चा का विषय बना है, लेकिन यह कोई नया विचार नहीं है। भारत में 1952 के पहले आम चुनाव से ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराये जाते थे, इसके बाद राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव होते थे। उससे पहले यही प्रकिया ब्रिटिश सरकार द्वारा 1935 के भारत शासन अधिनियम में भी अपनाई गई थी। हालांकि, 1967 के बाद राजनैतिक और सामाजिक बदलावों के कारण यह व्यवस्था टूट गई। 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने संसद को भंग कर समय से पहले चुनाव कराए, जिसके बाद यह प्रवृत्ति और मजबूत हो गई। नतीजा यह हुआ कि आज हम वर्षभर में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलग-अलग चुनाव होते हुए देखते हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव शासन व्यवस्था, आर्थिक संसाधनों और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ा है। 1962 में भारतीय चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि “अगर संभव हो तो प्रयास और खर्च की पुनरावृत्ति से बचना चाहिये “। 1983 की वार्षिक रिपोर्ट में भी संसदीय और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की आवश्यकता को दोहराया गया। 170वीं विधि आयोग की रिपोर्ट ने तो इसे और आगे बढ़ाते हुये अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग को इसका प्रमुख कारण बताया। इस अनुच्छेद का अत्यधिक प्रयोग भारत के संघीय ढांचे के लिये चिन्ता का विषय बना रहा है। 2015 में 79वी स्थाई समिति की रिपोर्ट ने भी एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन किया। दूषित हो गई लोकतांत्रिक प्रणाली देश में होने वाले बहु-चरणीय चुनावों ने कई समस्याओं को जन्म दिया है और इनके कारण पैदा हुई बुराईयों ने हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही दूषित कर दिया है। चुनावों में बाहुबल का बढ़ता प्रयोग लोकतंत्र के लिये खतरा बन गया है। मतदान के दौरान होने वाली हिंसा जैसी घटनाएं चुनावी प्रक्रिया को बाधित करती हैं। बहु-चरणीय चुनावों में कानून व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ता है। चुनावों में फर्जी समाचार, सोशल मीडिया में दुष्प्रचार और मतदाताओं को गुमराह करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है। बार-बार होने वाले चुनावों के कारण ध्यान शासन से हटकर चुनाव प्रचार पर  चला जाता है, जिससे नीतियों के कियान्वयन में देरी होती है। इससे मुफ्तखोरी की राजनीति की शुरुआत हुई जो राज्‍य की वित्‍तीय स्थिति को नुकसान पहुंचाती है। बार-बार होने वाले चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता विकास कार्यक्रमों और प्रशासन को बाधित करती है, जिससे नीतिगत गतिरोध उत्पन्न होता है और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती है। हर बार के चुनावों में भारी सुरक्षा बल और कर्मचारियों की तैनाती होती है, जो न सिर्फ सरकारी संसाधनों पर दबाव डालती है, बल्कि‍ आवश्‍यक सेवाओं को भी बाधित करती है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में ही 70 लाख अधिकारियों की तैनाती हुई थी। बार-बार के चुनावों से मतदाताओं पर सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पडता है। वे उदासीनता और थकान महसूस करने लगते हैं। जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी सीमित हो जाती है। देश के लिए हितकारी केन्द्र सरकार ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के विचार को आगे बढ़ाने के लिये पूर्व राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्‍यक्षता में “कोविन्द समिति ” का गठन किया था। इस समिति के सुझावों के आधार पर 129वां संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एक साथ चुनाव होने से खर्च और प्रशासनिक लागत की  बचत होगी। कम चुनाव निर्बाध शासन और नीतियों का क्रियान्‍वयन सुनिश्‍चित करेंगे। एक साथ होने वाले चुनाव केन्द्र और राज्य की नीतियों के बीच समन्वय में सुधार करेंगे। मतदान प्रतिशत बढेगा और एक साथ होने वाले चुनावों से राजनीतिक स्थिरता तथा आर्थिक विकास की राह प्रशस्‍त होगी, जो निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा देगी। समिति ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव का अनुमानित खर्च 1.35 लाख करोड बताया है। समिति के अनुसार एक देश, एक चुनाव से कम से कम 12000 करोड읧 की बचत तो होगी ही, काले धन और भ्रष्‍टाचार पर भी रोक लगेगी। समिति के अनुसार ‘एक देश, एक चुनाव’ देश के जीडीपी के 1.5 प्रतिशत की बचत कर सकता है। इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, अप्रत्याशित प्रचार खर्च कम होंगे और चुनाव के बाद मुद्रास्फीति में कमी होगी। यदि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएँ, तो सरकार को पूरे पाँच साल तक निर्बाध रूप से कार्य करने का अवसर मिलेगा। इससे विकास की गति तेज होगी, सामाजिक योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जा सकेगा और जनता को वास्तविक लाभ मिलेगा। सबका साथ, सबका विश्‍वास के साथ आगे बढ읧ी प्रक्रिया कोविंद समिति ने एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर व्‍यापक विचार विमर्श किया। समिति ने कुल 62 राजनीतिक दलों से इस प्रस्ताव पर सुझाव मांगे। इनमें से 47 दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी, जिनमें से 32 दलों ने इसका समर्थन किया और 15 ने इसका विरोध किया। इसके अतिरिक्त, भारत के चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने भी अपनी राय दी और सभी ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि यह संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं है। उच्च न्यायालयों के 9 पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकी 3 … Read more

पशुपालन डिप्लोमा कार्यक्रम के सैद्धांतिक और व्यवहारिक परीक्षाओं की सत्यनिष्ठा

जयपुर पशुपालन, डेयरी, गोपालन और मत्स्य विभाग के शासन सचिव  डॉ समित शर्मा ने कहा है कि पशुपालन डिप्लोमा कार्यक्रम के सैद्धांतिक और व्यवहारिक परीक्षाओं की सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना बहुत आवश्यक है। यह देखा गया है कि इन परीक्षाओं में पर्यवेक्षक और निरीक्षक के रूप में सेवानिवृत अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है जिससे कई बार परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठते हैं। शासन सचिव ने परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इन भूमिकाओं में सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति की प्रथा को बंद करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अब  प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर कम से कम दो पर्यवेक्षक/ परीक्षक की नियुक्ति की जाए जिनमें से एक अधिकारी राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (राजूवास) से तथा दूसरा पशुपालन विभाग से नामित हो। अगर किसी कारणवश राजूवास के अधिकारी उपलब्ध नहीं है तो पशुपालन विभाग के दो अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है। उन्होंने परीक्षा के दौरान नैतिक मानकों को बनाए रखने और किसी भी प्रकार के कदाचार को रोकने के लिए सभी नामित पर्यवेक्षकों और निरीक्षकों को नकद उपहार, मुफ्त या किसी प्रकार के भौतिक लाभ सहित किसी भी प्रकार केे आतिथ्य को स्वीकार करने से बचने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्रों के लीक होने और परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों के प्रयोग को रोकने के लिए सभी स्तर पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संस्थान की संबद्धता और एनओसी निरस्त कर दी जाएगी। शासन सचिव ने बताया कि सभी परीक्षा केंद्र अधीक्षक, डीन और प्रिंसीपल को परीक्षा हॉल में रिकॉर्डिंग सिस्टम के साथ सीसीटीवी कैमरा लगाने के निर्देश दिए गए हैं जिसकी अधिसूचना राजूवास, बीकानेर द्वारा जारी की जा चुकी है। उन्होंने निर्देश दिया कि परीक्षा हॉल में कैमरा इस तरह लगाया जाए  कि प्रश्न पत्र के लिफाफे खोलने से लेकर उत्तर पुस्तिका के लिफाफे सील करने तक की पूरी प्रक्रिया बिना किसी रूकावट के रेकार्ड हो सके। साथ ही परीक्षा कक्ष का प्रत्येक विद्यार्थी कैमरे की जद में रहे। सभी रिकॉर्डिंग को दैनिक आधार पर डीवीडी में स्थानांतरित करना भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक होगा जिसकी एक प्रति संबंधित संस्थान अथवा कॉलेज के पास रहेगी तथा दूसरी प्रति राजूवास के परीक्षा नियंत्रक को भिजवाना होगा। किसी  भी प्रकार की अपूर्ण अथवा अनुचित रिकार्डिंग के लिए कोई बहाना स्वीकार्य नहीं होगा। डॉ शर्मा ने निष्पक्ष, पारदर्शी और नकल मुक्त परीक्षा आयोजित करने तथा परीक्षा की सत्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को तत्काल और उचित कार्रवाई करते हुए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए निर्देश दिए।

प्राकृतिक खेती के इच्छुक राज्य के किसानों के पंजीयन के लिए पोर्टल प्रारंभ किया गया : कृषि मंत्री श्री कंषाना

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि किसान कल्याण मिशन अंतर्गत किसानों की आय में वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह मिशन कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने का प्रमुख माध्यम बनेगा। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा प्राकृतिक कृषि के प्रसार एवं किसानों को प्रोत्साहन प्रदान करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड का गठन किया गया है। प्राकृतिक खेती कर रहे एवं प्राकृतिक खेती के इच्छुक राज्य के किसानों के पंजीयन के लिए पोर्टल प्रारंभ किया गया है।पोर्टल पर प्राकृतिक खेती करने के इच्छुक कुल 72 हजार 967 किसानों ने पंजीयन करवाया है। प्रत्येक पंचायत में पीएम किसान समृद्धि केन्द्र की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में 81 लाख से अधिक किसानों को गत वर्ष चार हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि का अंतरण किया गया है। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना में किसानों को एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 3 हजार 900 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जा रही है। शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन फसल ऋण के लिए इस वर्ष 600 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। विगत वर्ष में किसानों को समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ पर प्रति क्विंटल 125 रुपये का बोनस प्रदाय किया गया। देश में पहली बार राज्य सरकार ने सोयाबीन का 4 हजार 892 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर उपार्जन करने का निर्णय लिया। लगभग 2 लाख किसानों से प्रदेश में पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सोयाबीन का उपार्जन कर 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि का भुगतान किया गया। खरीफ-2024 में 1.23 लाख क्विंटल से अधिक प्रमाणित बीज का वितरण किया गया। किसानों को उर्वरक प्रदाय करने के लिए केन्द्रों की संख्या बढ़ाने के साथ ही अमानक उर्वरक बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने और उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोग शालाओं की भूमिका को सक्रिय बनाकर किसान हित सुनिश्चित किया गया। मध्यप्रदेश को कृषि उत्पादन में निरंतर अग्रणी स्थान मिला है। सात बार कृषि कर्मण अवॉर्ड भी प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना अब प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के नाम से लागू है। कृषकों को सौर ऊर्जा के लाभ से लाभांवित करने के लिए प्रदेश में अस्थाई विद्युत कनेक्शन लेने वाले लगभग सवा लाख किसानों को सौर ऊर्जा के पम्प प्रदाय किये जाएँगे। अगले चार वर्ष में सौर ऊर्जा पम्प प्रदाय कर किसानों को विद्युत आपूर्ति में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। किसानों को अधिक दाम प्रदान करने वाली फसलों को लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा तथा फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रदेश के सिंचित क्षेत्र का रकबा अगले पाँच वर्ष में 50 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर एक करोड़ लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य है। मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों का रकबा 26 लाख हेक्टेयर से अधिक है। संतरा, टमाटर, धनिया, लहसुन और मसाला उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में प्रथम है। प्रदेश में 50 हाइटेक नर्सरी बनाई जा रही हैं। नर्सरियों के कुशल प्रबंधन के लिए ई-नर्सरी पोर्टल भी तैयार किया गया है।  

चैम्पियंस ट्रॉफी में हार का मुद्दा पाकिस्तानी संसद में उठेगा, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ देंगे बयान

इस्लामाबाद ICC चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 में पाकिस्तान क्रिकेट टीम की बड़ी फजीहत हुई है. यह टूर्नामेंट पाकिस्तान की ही मेजबानी में खेला जा रहा है. मगर यह मेजबान टीम ग्रुप स्टेज से भी आगे नहीं बड़ सकी है. बड़ी बात ये है कि पाकिस्तान टीम बगैर कोई मैच जीते टूर्नामेंट से बाहर हो गई है. ऐसे में अब बड़ी खबर सामने आ रही है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अब अपनी टीम की हार का मुद्दा संसद में उठाएंगे. वो इस मामले को व्यक्तिगत तौर पर संसद में रखेंगे. पीएम शरीफ के राजनीतिक और सार्वजनिक मामलों के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने एक निजी चैनल पर यह जानकारी दी है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज (PML-N) के नेता राणा सनाउल्लाह ने कहा कि चैम्पियंस ट्रॉफी में पाकिस्तानी टीम की अपमानजनक हार हुई और वो टूर्नामेंट से जल्दी बाहर हो गई. इस पर शरीफ सरकार संज्ञान लेगी. चैंपियंस ट्रॉफी में भारत से हारते ही कटोरा थामने की नौबत चैंपियंस ट्रॉफी से बाहर होती ही टीम के लिए स्पॉन्सर तलाशना भी असंभव नजर आ रहा है. कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारत ने रविवार को दुबई में पाकिस्तान को छह विकेट से रौंदा था फिर न्यूजीलैंड ने बांग्लादेश को हराकर खुद तो सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया ही भारत भी टॉप-4 में पहुंच गया. इसी के साथ ग्रुप ए से पाकिस्तान और बांग्लादेश बाहर हो गए. टूर्नामेंट से बाहर हुआ पाकिस्तान भारत से हारने से एक दिन पहले ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड मैच के लिए गद्दाफी स्टेडियम में लोगों की शानदार भीड़ को देखकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अधिकारी आत्मविश्वास से भरे हुए थे. बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, ‘लोगों की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान से इतर मैच का आनंद लेते देखना एक उत्साहवर्धक अनुभव था.’ लोग स्टेडियम आएंगे या नहीं 1996 के विश्व कप के बाद पाकिस्तान पहली बार किसी आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा था. फैंस को उम्मीद थी कि आठ टीमों की इस प्रतियोगिता में घरेलू टीम टीम अच्छा प्रदर्शन करेगी. अब पीसीबी के सामने एक समस्या ये भी है कि पाकिस्तान में बचे हुए मैच में दर्शकों की भीड़ स्टेडियम पहुंचती है या नहीं. ब्रांड वैल्यू पर पड़ेगा असर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के वाणिज्यिक इकाई के एक विश्वसनीय सूत्र ने कहा कि अगर पाकिस्तान सेमीफाइनल में नहीं भी खेलता है तो भी पीसीबी को वित्तीय रूप से कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा क्योंकि केवल गेट पर्ची और मैदान की आय के अन्य स्रोत ही प्रभावित होंगे, लेकिन संकटग्रस्त टीम की ‘ब्रांड वैल्यू’ पर असर पड़ने वाला है. भारत ने मारी पेट पर लात पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी ने कहा,’हमें मेजबानी शुल्क, टिकट बिक्री सहित आईसीसी राजस्व में हमारा हिस्सा मिलने की गारंटी है, लेकिन अन्य मुद्दे भी हैं जैसे कि लोगों का इस बड़े टूर्नामेंट में रुचि खत्म होना और प्रसारणकर्ता द्वारा आधे भरे हुए स्टेडियम दिखाना आदि. और सबसे बड़ी चिंता यह है कि यहां क्रिकेट के प्रति दीवानगी के बावजूद भविष्य में पाकिस्तान क्रिकेट को एक ब्रांड के रूप में बेचना आसान नहीं होगा.

अमेरिकी संघीय अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार पन्नू ने याचिका की प्रति अजीत डोभाल को सौंपी

अमेरिका सिख कार्यकर्ता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश से जुड़े मामले में एक नया खुलासा हुआ है। अमेरिकी संघीय अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार, पन्नू ने अपनी याचिका की प्रति भारत के शीर्ष खुफिया अधिकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को सौंप दी है। पन्नू की याचिका में आरोप लगाया गया है कि भारत सरकार, अजीत डोभाल और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने निखिल गुप्ता को पन्नू की हत्या के लिए हायर किया था। यह साजिश उस वक्त विफल हो गई जब गुप्ता द्वारा हायर किया गया शूटर असल में एक अंडरकवर अमेरिकी एजेंट निकला। याचिका में यह भी कहा गया कि यह “मर्डर फॉर हायर” साजिश भारत सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा थी, जिसमें सिख कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। इनमें वे लोग शामिल हैं जो पंजाब में सिखों के आत्मनिर्णय के अधिकार की मांग कर रहे हैं, धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित उत्पीड़न की आलोचना कर रहे हैं और भारत में मानवाधिकार हनन के मामलों को उजागर कर रहे हैं। डोभाल को समन देने के लिए निजी जांचकर्ताओं की मदद अदालत में पेश किए गए नए दस्तावेजों के मुताबिक, पन्नू ने दो कानूनी एजेंसियों और एक निजी जांचकर्ता की मदद से अमेरिका में डोभाल के दौरे के दौरान उन्हें समन सौंपने की व्यवस्था की। अमेरिकी अदालत में दायर घोषणाओं के अनुसार, अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने समन स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, हालांकि इसे उस स्थान पर भी भिजवाया गया जहां डोभाल ठहरे हुए थे। इसके बावजूद, अमेरिकी अदालत के 12 फरवरी 2025 के आदेश के तहत, डोभाल को वैकल्पिक माध्यमों से समन जारी किया गया। दस्तावेजों में कहा गया है, “पन्नू सम्मानपूर्वक अदालत को सूचित करते हैं कि प्रतिवादी (डोभाल) को समन देने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।”   डोभाल को 21 दिनों के भीतर देना होगा जवाब अगर समन देने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो अजीत डोभाल को 21 दिनों के भीतर अमेरिकी अदालत में पन्नू के मुकदमे का जवाब देना होगा। पन्नू ने आरोप लगाया, “प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर, डोभाल और उनके सहयोगियों ने अमेरिकी संप्रभुता का उल्लंघन करते हुए एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की साजिश रची, सिर्फ इसलिए कि उसने अपने राजनीतिक विचार व्यक्त किए।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे अमेरिकी न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है और मुझे यकीन है कि सीमा-पार दमन (ट्रांसनेशनल रेप्रेशन) में शामिल अपराधियों को आपराधिक और दीवानी अदालत में न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।” पन्नू के वकील का बयान पन्नू के वकील मैथ्यू बोर्डन (BraunHagey & Borden, LLP) ने कहा, “हमने अजीत डोभाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वह इस मामले में एक प्रमुख प्रतिवादी हैं और अब अपनी संलिप्तता को छिपा नहीं सकते। हम उनसे सबूत जुटाने और अपने मुवक्किल के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए तत्पर हैं।”  

पश्चिमी बांग्लादेश में विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रद्द, ईद पर 2 दिनों की लीव; भड़की भाजपा

कोलकाता कोलकाता नगर निगम ने एक आदेश जारी कर विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रद्द कर दी और ईद की एक दिन की छुट्टी बढ़ाकर दो दिन कर दी. निगर निगम के इस आदेश पर जमकर बवाल हुआ. कोलकाता नगर निगम का ये आदेश हिंदी मीडियम स्कूलों के लिए था. बवाल इतना बढ़ा कि कोलकाता नगर निगम (KMC) ने इस आदेश को रद्द कर दिया. इसके बाद कोलकाता नगर निगम ने इस आदेश को जारी करने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. कोलकाता नगर निगम ने कहा है कि ये अनजाने में हुई टाइपिंग मिस्टेक (Typographical mistakes) थी. 25 फरवरी को जारी इस नोटिस पर केएमसी के शिक्षा विभाग के मुख्य प्रबंधक के नाम से हस्ताक्षर किए गए हैं. बता दें कि विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी 17 सितंबर को दी जाती है. कोलकाता नगर निगम की ओर से जारी आदेश में साफ साफ लिखा गया था कि 17 सितंबर 2025 को विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी नहीं रहेगी क्योंकि इस छुट्टी के बदले ईद उल फितर की छुट्टी बढ़ा दी गई है. इस आदेश के अनुसार राज्य में ईद उल फितर की छुट्टी 31 मार्च 2025 और 1 अप्रैल 2025 को घोषित की गई थी. KMC का पुराना आदेश. छुट्टियों में बदलाव के पहले के ज्ञापन की आलोचना करते हुए विपक्षी भाजपा ने आरोप लगाया कि यह राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए तुष्टिकरण का एक उदाहरण है. मीडिया को दिए गए नोट में म्यूनिसिपल कमीश्नर ने कहा कि ये आदेश सक्षम प्राधिकारी की सहमति लिए बिना जारी किए गए थे. कोलकाता नगर निगम अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई कर रहा है. विवाद के बाद रद्द किया गया आदेश कोलकाता नगर निगम का कहना है कि चूंकि ये आदेश बिना परमिशन के जारी किए गए थे. इसलिए इस आदेश को रद्द कर दिया गया है. कोलकाता नगर निगम ने कहा है कि अब छुट्टियों की नई लिस्ट जारी की जाएगी. मीडिया नोट में कहा गया है, “राज्य सरकार की छुट्टियों की सूची को मौजूदा मानदंडों के अनुसार बनाए रखते हुए एक संशोधित और सटीक आदेश आने वाले समय में जारी करेगी.” बीजेपी का कहना है कि जब उन्होंने इस मुद्दे को उठाया तभी KMC को इस आदेश को रद्द करने के लिए बाध्य होना पड़ा. बंगाल बीजेपी के महासचिव जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने पत्रकारों को कहा कि, “यह विश्वास करने योग्य नहीं है कि नगर निगम अधिकारी विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रोकने और ईद-उल-फितर की छुट्टी बढ़ाने के निर्णय से अनभिज्ञ थे.” उन्होंने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद दक्षिण कोलकाता के एक कॉलेज में पुलिस सुरक्षा के साथ सरस्वती पूजा आयोजित की गई थी. कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम पर हमला बता दें कि TMC नेता फिरहाद हकीम कोलकाता नगर निगम के मेयर हैं. बीजेपी इस मामले को इसलिए भी उठा रही है. जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि शिक्षा विभाग के चीफ मैनेजर को ऐसा आदेश जारी करने के लिए किससे हुकुम मिला, क्योंकि बंगाल का कोई भी अधिकारी अपने दम पर ऐसा आदेश नहीं जारी कर सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कोलकाता नगर निगम का प्रशासन फिरहाद हकीम के हाथों में है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कहा कि ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और आधुनिक सुहरावर्दी फिरहाद हकीम ने कोलकाता नगर निगम के स्कूलों में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मिलने वाली छुट्टी को खत्म करने का आदेश दिया है – जो हिंदुओं, विशेष रूप से प्रमुख ओबीसी के लिए बहुत महत्व का अवसर है – और इसकी जगह इसे ईद-उल-फितर के लिए आवंटित कर दिया है, जिससे छुट्टी एक दिन से बढ़कर दो दिन हो गई है. महाकुंभ को ‘मत्युकुंभ’ कहने पर विवाद इससे पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी महाकुंभ को ‘मृत्युकुंभ’ कहकर एक विवाद पैदा कर दिया था. ‘मृत्युकुंभ’ से जुड़ा ये विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने 18 फरवरी 2025 को पश्चिम बंगाल विधानसभा में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले को ‘मृत्युकुंभ’ कहकर संबोधित किया था. ममता ने आरोप लगाया था कि आयोजन में वीआईपी लोगों को विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं, जबकि गरीब और सामान्य श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. उन्होंने कहा कि महाकुंभ अब अपनी मूल भावना खो चुका है और ‘मृत्युकुंभ’ में बदल गया है.  

अपने साथियों के साथ रोहित का करीबी रिश्ता है टीम के लिए अच्छा, कप्तानी के इस अंदाज पर फिदा हैं शिखर धवन

नई दिल्ली पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन का मानना ​​है कि रोहित शर्मा पिछले कुछ वर्षों में कप्तान के रूप में परिपक्व हुए हैं। उन्होंने कहा कि अपने साथियों के साथ रोहित का करीबी रिश्ता है जो भारतीय टीम के लिए अच्छा है। काफी समय तक रोहित के सलामी जोड़ीदार रहे धवन ने कहा कि मुंबई का यह बल्लेबाज टीम को संभालने के लिए काफी अनुभवी है। धवन ने ‘स्टार स्पोर्ट्स’ और ‘जियोहॉटस्टार’ पर विशेष सीरीज ‘द शिखर धवन एक्सपीरियंस’ में कहाकि 2013 से 2025 तक, 12 साल का अनुभव बहुत है। रोहित ने बहुत कुछ देखा है। वह जानता है कि दबाव की स्थिति में कैसे काम करना है, लड़कों को कैसे एकजुट करना है। शिखर धवन ने कहाकि एक कप्तान के रूप में वह परिपक्व हो गया है। वह जानता है कि कब नरमी बरतनी है और कब पीछे हटना है। यह एक अच्छा संतुलन है और लड़कों के साथ रोहित का रिश्ता अद्भुत है। धोनी ने बनाई थी ओपनिंग जोड़ी धवन ने 2013 आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफी के अपने सफर के बारे में भी बात की और रोहित के साथ अपनी नौ साल की सलामी साझेदारी को याद किया जो उसी टूर्नामेंट में शुरू हुई थी। बाएं हाथ के इस 39 वर्षीय पूर्व बल्लेबाज ने कहा कि रोहित को उनके साथ सलामी जोड़ीदार के रूप उतारने का विचार महेंद्र सिंह धोनी का था। धवन ने कहाकि उस सलामी जोड़ी पर फैसला उस मैच से आधे दिन पहले किया गया था। उस समय मैं भी नया था और मैं अपनी ही दुनिया में था। मैंने वापसी की थी और अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत थी। लेकिन महेंद्र सिंह धोनी ने यह फैसला किया और रोहित को पारी का आगाज करने का निर्देश दिया। तब सोचा नहीं था ऐसा होगा शिखर ने कहाकि मैंने इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचा। मैंने सोचा कि अगर रोहित पारी का आगाज करते हैं तो हम साथ में बल्लेबाजी का आनंद लेंगे। हमें पहले मैच में बहुत अच्छी शुरुआत मिली। हमने बिना विकेट खोए 100 रन बनाए थे। धवन ने कहाकि हमने 10वें ओवर तक 30-35 रन ही बनाए क्योंकि विकेट से तेज गेंदबाजों को मदद मिल रही थी। लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि हमारी जोड़ी इतनी बड़ी होगी और हम 10 साल तक साथ खेलेंगे। धवन ने रोहित के साथ अपनी दोस्ती के बारे में भी बात की और कहा कि उनकी दोस्ती जूनियर क्रिकेट के दिनों से है। उन्होंने कहाकि हम एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं और हमारी आपसी समझ और संवाद का स्तर बहुत ऊंचा है। मैदान पर और मैदान के बाहर हमारा रिश्ता एक जैसा है। हमने साथ खेला है, हमने कई श्रृंखला जीतने के बाद साथ में पार्टी की है। हम एक टीम के रूप में खेले हैं।

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