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सेंट्रल इंडिया में 1100 करोड़ की लागत से बन रहे पार्क को वर्ष 2026 अंत तक पूरा कर लिया जायेगा

इंदौर  धार और पीथमपुर(Pithampur) में करीब 255 एकड़ में सेंट्रल इंडिया के सबसे बड़े व प्रदेश के पहले मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क बनाने की राह में सभी बाधाएं हट गई हैं। अब तेजी से विकास कार्य चल रहे हैं। करीब 1100 करोड़ की लागत से बन रहे पार्क को वर्ष 2026 अंत तक पूरा कर ऑपरेशन शुरू करने का दावा है। लॉजिस्टिक पार्क शुरू होनेे से पीथमपुर व आसपास के उद्योगों को अपने उत्पाद भेजने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। ट्रांसपोर्टेशन कास्ट में करीब 30 प्रतिशत कमी करने का दावा भी किया जा रहा है। इसके बाद रतलाम व उज्जैन में लॉजिस्टिक पार्क बनेगा, जिसके लिए सर्वे शुरू हो गया है। देश के पांच स्थानों पर मल्टी मॉड लॉजिस्टिक पार्क(Multi Modal Logistics Park ) बनाने की घोषणा सालों पहले हुई थी, लेकिन जमीन के अधिग्रहण में आ रहे पेंच से पीथमपुर का पार्क अन्य शहरों से काफी पिछड़ गया था। बेंगलूरु, चेन्नई, गुवाहाटी और नागपुर में पार्क बनाने का काम चल रहा है। यह पार्क एमपीआइडीसी और एनएचएआइ मिलकर बना रहे हैं, वहीं निर्माण एजेंसी भी तय हो गई है। पीथमपुर के ग्राम सागौर, खेड़ा, जामोदी और अकोलिया की करीब 255 एकड़ जमीन पर यह पार्क बन रहा है। इसमें करीब 1100 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। 2 हजार से ज्यादा उद्योगों को मिल सकेगा फायदा सांसद शंकर लालवानी के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण के बाद पार्क निर्माण शुरू कर दिया है। पीथमपुर व आसपास के इलाके में करीब 2 हजार उद्योग हैं। कई एक्सपोर्ट करते हैं। पोर्ट तक ले जाने में परिवहन में परेशानी होती थी। केंद्र सरकार की भारत माला योजना के तहत यहां पार्क बनाया जा रहा है। यहां से सड़क, रेल व हवाई मार्ग से उत्पादनों को गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। पास ही टीही स्टेशन है, जहां से पार्क तक रेल लाइन डाली जाएगी, एयर कार्गो से भी सामान भेजने में आसानी होगी। 8-10 रुपए किमी तक लाने की तैयारी विशेषज्ञों के मुताबिक, अभी उद्योगों को सबसे ज्यादा खर्च ट्रांसपोर्टेशन पर करना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 7 रुपए प्रति किलोमीटर का औसतन खर्च परिवहन पर आता है, लेकिन यहां पर यह करीब 14 रुपए प्रति किलोमीटर पड़ रहा है, जिससे उद्योग परेशान हैं। अफसरों का दावा है कि मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क(Multi Modal Logistics Park ) बनने से यह खर्च 8 से 10 रुपए प्रति किलोमीटर अथवा उससे कम हो जाएगा और उद्योगों को अच्छा फायदा होगा। टीही के करीब, एयर कार्गो का मिलेगा लाभ एमपीआइडीसी के कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर के मुताबिक, कंपनी बैसिक डेवलपमेंट का काम कर रही है। यहां आधुनिक मशीनों से लोडिंग, अनलोडिंग की व्यवस्था रहेगी। कस्टम, कंटेनर डिपो आदि सुविधा रहेगी, जिससे उत्पादों का एक्सपोर्ट आसानी से हो पाएगा। वर्ष 2026 के अंत तक पहला चरण पूरा कर ऑपरेशन शुरू किया जाएगा। अभी उद्योगों को अपना माल मुंबई आदि पोर्ट से एक्सपोर्ट के लिए भेजना पड़ता है, लेकिन अब वह सीधे पीथमपुर से हो जाएगा और उन्हें बड़ी सुविधा मिलेगी। रतलाम में मिली मंजूरी, उज्जैन में सर्वे अफसरों ने बताया कि केंद्र सरकार की योजना के तहत मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस-वे बन रहा है। यह एक्सप्रेस-वे रतलाम से गुजर रहा है। रतलाम एक्सप्रेस-वे के पास लॉजिस्टिक पार्क बनाने को मंजूरी हो गई है। साथ ही एक लॉजिस्टिक पार्क(Multi Modal Logistics Park ) उज्जैन में बनेगा। एमपीआइडीसी के राजेश राठौर के मुताबिक, उज्जैन के लॉजिस्टिक पार्क के लिए सर्वे भी शुरू कर दिया गया है। जल्द ही परिणाम दिखेंगे।

भोपाल में अंबानी-अडाणी समेत देश-विदेश के उद्योगपतियों का लगेगा जमावड़ा, चकाचक होंगी राजधानी की सड़कें

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 24 और 25 फरवरी 2025 को ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (GIS) का आयोजन होगा. राजधानी भोपाल में आयोजित होने वाली दो दिवसीय ग्लोबल समित के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं. इसके लिए शहर को संवारने और सड़कों के रिपेयरिंग काम शुरू हो गया है. ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में देश विदेश से करीब 20 हजार मेहमान आएंगे. इसके लिए अंबानी, अडाणी, महिंद्रा, टाटा समेत देश के तमाम बड़े उद्योगपतियों को आमंत्रित किया जाएगा. इन प्रमुख उद्योगपतियों को किया जाएगा आमंत्रित राजधानी भोपाल में 24-25 फरवरी को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आठवां संस्करण आयोजित होगा. इस समिट का मुख्य उद्देश्य  माहौल और औद्योगिक ढांचे को दिखाना जो साझेदारी के लिए असीमित अवसर प्रदान करना है. इस ग्लोबल समित के लिए जिन प्रमुख उद्योगपतियों को आमंत्रित किया जाएगा,  उनमें मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, एन. चंद्रशेखरन, नोएल एन. टाटा, आनंदजी महिंद्रा, जमशेद एन. गोदरेज, संजीव पुरी, संजीव बजाज, सतीश रेड्‌डी, नादिर गोदरेज, पवन मुंजाल, एसएन सुब्रह्मण्यम, रिशद प्रेमजी, अजीज प्रेमजी, सलिल एस. पारेख, दिलीप संघवी, वेणु श्रीनिवासन, सुनील भारत मित्तल, बाबा एन. कल्याणी, उदय कोटक शामिल हैं इन सड़कों की होगी रिपेयरिंग देश विदेश से आने वाले प्रमुख उद्योगपति जिन रास्तों से गुजरेंगे, उन्हें 45 करोड़ रुपए में संवारा जा रहा है. राजधानी भोपाल को संवारने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंप दी गई है. जिला कलेक्टर की निगरानी में भोपाल नगर निगम सौंदर्यीकरण, सड़कों की रिपेयरिंग कराएगा. वहीं, पीडब्ल्यूडी विभाग ने भी 26 सड़कों की लिस्ट बना ली है. जिन पर  15 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. राजधानी की जिन 26 सड़कों को संवारा जाएगा, उसमें  एयरपोर्ट रोड, लिंक रोड नंबर-1, 2 और 3, वीआईपी रोड, एमपी नगर, वन विहार, रोशनपुरा, रंगमहल, श्यामला हिल्स जैसे प्रमुख सड़कें भी शामिल हैं. ‘एक जिला, एक उत्पाद’ की लगेगी प्रदर्शनी इस समिट में ‘एक जिला, एक उत्पाद’ प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें हर जिले की खासियत को उजागर किया जाएगा। खासकर, मध्य प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए इसे जनजातीय थीम पर सजाया जाएगा। जापान होगा कंट्री पार्टनर इस बार की समिट में जापान कंट्री पार्टनर होगा, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूती मिलेगी। जापानी निवेशकों के अलावा अन्य देशों के भी निवेशक इस समिट में भाग लेंगे। मध्य प्रदेश सरकार इस मौके को भुनाने के लिए 21 नई नीतियों पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी होंगे शामिल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समिट में 24 फरवरी को शामिल होंगे। यह पहली बार है जब भोपाल में इतनी भव्य इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की जा रही है। सीएम यादव ने कहा कि इस आयोजन से मध्य प्रदेश को नई पहचान मिलेगी और यह निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरेगा। समिट में शामिल होंगे ये उद्योगपति इस समिट के कई उद्योगपतियों जैसे मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, एन. चंद्रशेखरन, नोएल एन. टाटा, आनंदजी महिंद्रा, जमशेद एन. गोदरेज, संजीव पुरी, संजीव बजाज, सतीश रेड्‌डी, नादिर गोदरेज, पवन मुंजाल, एसएन सुब्रह्मण्यम, रिशद प्रेमजी, अजीज प्रेमजी, सलिल एस. पारेख, दिलीप संघवी, वेणु श्रीनिवासन, सुनील भारत मित्तल, बाबा एन. कल्याणी, उदय कोटक को इस समिट में आने और मध्य प्रदेश में निवेश करने के लिए निमंत्रण दिया गया है। भोपाल में विशेष इंतजाम भोपाल को इस समिट के लिए एक आदर्श स्थल बनाने के लिए प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। शहर के प्रमुख होटलों, गेस्ट हाउसों, और एयरपोर्ट पर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। चार्टर्ड प्लेन के लिए अलग व्यवस्था की गई है ताकि निवेशकों और वीआईपी मेहमानों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। इस आयोजन की तैयारियों पर मुख्य सचिव अनुराग जैन और भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह विशेष ध्यान दे रहे हैं। इस थीम पर होगी समिट समिट को जनजातीय थीम पर सजाया जाएगा। सभी मेहमानों को प्रदेश की जनजातियों के व्यंजन खिलाए जाएंगे। इसके अलावा उन्हें भीमभेटका, भोजपुर जैसे पर्यटन स्थल की भी सैर कराई जाएगी। निवेश और विकास को मिलेगा बढ़ावा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 मध्य प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगी। इस आयोजन से नए उद्योगों की स्थापना, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और राज्य की औद्योगिक छवि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की उम्मीद है। यह समिट मध्य प्रदेश को निवेश के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी।

मोदी सरकार की योजना 3 करोड़ महिलाएं बनेंगी ‘लखपति दीदी’, जानिए क्या है; कैसे उठा सकते हैं इसका लाभ?

नईदिल्ली लखपति दीदी योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई है. इसके जरिए सरकार महिलाओं को फाइनेंशियली सपोर्ट करती है. सरकार की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाने की योजना में बिना ब्याज के लाखों रुपये का लोन दिया जाता है. ये योजना सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी है. इस ग्रुप में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं. सेल्फ हेल्प ग्रुपों में बैंक वाली दीदी, आंगनबाड़ी दीदी, दवाई वाली दीदी शामिल हैं. लखपति दीदी योजना एक स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम है. इसके जरिए देश की सभी दीदियों को स्किल ट्रेनिंग दी जाती है. ताकी वो खुद पैसे कमा सकें. लखपति दीदी योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई है। इस योजना के तहत सरकार महिलाओं को आर्थिक मदद देती है। योजना के जरिए 3 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें बिना ब्याज के लाखों रुपये का लोन दिया जाता है। यह योजना सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी है। जिसमें बैंक वाली दीदी, आंगनबाड़ी दीदी और दवाई वाली दीदी जैसी महिलाएं शामिल हैं। लखपति दीदी योजना क्या है? यह एक स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम है। जिसमें महिलाओं को तरह-तरह की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वे खुद कमाई कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। योजना की शुरुआत लखपति दीदी योजना 15 अगस्त 2023 को शुरू की गई थी। इसका मकसद देश की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए प्रेरित करना है। योजना के लिए जरूरी शर्तें 1. योजना का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं को मिलेगा, जिनके परिवार में कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं है। यदि वेरिफिकेशन के दौरान परिवार में कोई सरकारी नौकरी करता पाया गया, तो योजना का फायदा नहीं मिलेगा। 2. यह योजना केवल उन महिलाओं के लिए है जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपये या उससे कम है। यदि परिवार की आय 3 लाख से ज्यादा है, तो वे इस योजना का लाभ नहीं ले सकतीं। आवेदन कैसे करें? 1. योजना में शामिल होने के लिए महिलाओं को पहले सेल्फ हेल्प ग्रुप के माध्यम से एक बिजनेस प्लान बनाना होगा। 2. यह प्लान सरकार को भेजा जाएगा, जहां अधिकारी इसकी समीक्षा करेंगे। 3. अगर आवेदन स्वीकार कर लिया जाता है, तो महिलाओं को योजना का लाभ मिलेगा और 5 लाख रुपये तक का लोन दिया जाएगा। इन दो शर्तों को करना होगा पूरा लखपति दीदी योजना के लिए अप्लाई करने के लिए महिलाओं के लिए कुछ टर्म्स और कंडीशन भी दी गई हैं. इस योजना में जो सबसे जरूरी शर्त है कि कोई भी महिला अगर इस योजना के लिए अप्लाई करती है तो उसके परिवार में कोई भी सरकारी नौकरी करने वाला सदस्य नहीं होना चाहिए. अगर उस महिला के घर में वेरिफिकेशन के दौरान कोई भी सदस्य सरकरी नौकरी वाला मिलता है तो उसे इस स्कीम का फायदा नहीं मिलेगा. इसके अलावा इस योजना के लिए केवल वही महिला अप्लाई कर सकती है जिसकी फैमिली ईयरली इनकम 3 लाख रुपये या उससे कम है. 3 लाख रुपये से ज्यादा ईयरली इनकम वाली महिलाएं योजना का हिस्सा नहीं बन सकती हैं. ऐसे करें अप्लाई लखपति दीदी योजना में अप्लाई करने के लिए महिलाओं को एक सेल्फ हेल्प ग्रुप के जरिए बिजनेस प्लान तैयार करना होगा. जब उनका बिजनेस प्लान बन जाएगा तो उस प्लान को सरकार को भेजा जाएगा. इसके बाद सरकार के अधिकारी एप्लीकेशन को अच्छी तरह से रिव्यू करेंगे. अगर एप्लीकेशन एक्सेप्ट हो जाता है तो योजना का बेनिफिट दिया जाएगा. इसके साथ 5 लाख रुपये तक का लोन भी दिया जाएगा. क्या है पात्रता? अगर आप भी लखपति दीदी बनना चाहता हैं और योजना का फायदा उठाना चाहती हैं, तो पहले जान लें कि इसके लिए एलिजिबिलीटी क्या होगी। योजना का फायदा वहीं महिलाएं उठा सकती हैं, जो प्रदेश की स्थाई नागरिक हो। इसके अलावा महिला की उम्र 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए। वहीं, महिला की वार्षिक आय 3 लाख रुपए से कम होनी चाहिए। इसके साथ ही उस महिला को स्वयं सहायता समूह से जुड़ी होनी चाहिए। जरूरी दस्तावेज योजना का लाभ पाने के लिए कई तरह के दस्तावेजों की जरूरत होगी। इसके लिए आधार कार्ड राशन कार्ड बैंक खाता पासबुक, स्वयं सहायता समूह का प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर, इमेल आईडी और पासपोर्ट साइज फोटो की जरूरत होगी। योजना के तहत स्‍वयं सहायता समूहों से जुड़ी उन महिलाओं को चुना जाता है, जिनकी सालाना आमदनी कम होती है। इसके बाद उन्‍हें 1-5 लाख रुपये तक का ब्‍याजमुक्‍त कर्ज दिया जाता है। ऐसे करें आवेदन इसके लिए आपको स्वयं सहायता के कार्यालय जाना होगा। यहां आपकी एप्लीकेशन और बिजनेस प्लान तैयार होगा। दस्तावेजों के साथ एप्लीकेशन और बिजनेस प्लान स्वयं सहायता कार्यालय में जमा कर दें। यहां आपकी एप्लीकेशन रिव्यू होगी और फिर इसे आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार रिव्यू करेगी। अप्रूव होने के बाद लोन के लिए कॉन्ट्रेक्ट किया जाएगा। आप चाहें तो ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं।    

मध्यप्रदेश सरकार हर माह पेंशन ले रहे साढ़े 5 लाख पेंशनर्स की तलाश में जुटी, अब तक इनका वैरीफिकेशन नहीं हो सका

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार हर माह पेंशन ले रहे साढ़े 5 लाख पेंशनर्स की तलाश करने में जुटी है. दरअसल, इन पेंशनर्स के खातों में हर माह पेंशन की राशि तो पहुंच रही है, लेकिन अब तक इनका वैरीफिकेशन नहीं हो सका है. जबकि वैरीफिकेशन का काम तीन स्तर पर किया जा चुका है. अब राज्य सरकार पेंशन ले रहे इन हितग्राहियों की घर-घर जाकर खोजने का अभियान शुरू किया है. यह अभियान 15 फरवरी तक चलेगा. इसमें यदि हितग्राही नहीं मिले तो अब इनके खातों को बंद करा दिया जाएगा. अभी प्रदेश के 5 जिलों में चलाया जा रहा अभियान सामाजिक न्याय विभाग द्वारा वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत 6 सौ रुपए हर माह आर्थिक मदद दी जाती है. प्रदेश में 56.5 लाख बुजुर्गों को इस योजना के तहत आर्थिक लाभ दिया जाता है. राज्य सरकार द्वारा इन बुजुर्ग हितग्राहियों के वैरीफिकेशन की प्रक्रिया की जा रही है. सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा पेंशन हितग्राहियों का समग्र पोर्टल पर सत्यापन किया गया. इसके बाद आधार नंबर से नाम, आयु और पता अपडेट कराया गया है. 15 फरवरी तक तक सरकार चलाएगी अभियान इसके बाद प्रदेश के करीबन 5 लाख पेंशनर्स अपात्र हो गए. इसके बाद सभी हितग्राहियों को आयु की पुष्टि और अन्य दस्तावेज के साथ आवेदन करने के लिए कहा गया था, लेकिन इन हितग्राहियों का इसके बाद से सत्यापन ही नहीं हो पा रहा है. इधर, अब विभाग ने 15 फरवरी तक गायब सभी पेंशनधारियों का सत्यापन करने का अभियान चलाया है. गायब अधिकांश हितग्राही नीमच, सिवनी, अलीराजपुर, अनूपपुर और बालाघाट जैसे आदिवासी जिलों के हैं. इसको देखते हुए विभाग द्वारा अब घर घर जाकर इन्हें खोजने का अभियान शुरू किया है. इसके लिए अधिकारियों की टीम बनाकर भेजी गई है. वैरीफिकेशन न होने पर बंद होगी पेंशन फिजीकल वैरीकिकेशन के लिए 15 फरवरी तक की समयसीमा निर्धारित की गई है. इसके बाद भी ऐसे हितग्राही न मिलने पर उनके खातों में पेंशन की राशि पहुंचना बंद हो जाएगी. इधर सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा का कहना है “पेंशनर्स का वैरीफिकेशन कराना एक सामान्य प्रक्रिया है. अपात्र को पेंशन देने का प्रावधान नहीं है, इसलिए समय-समय पर हितग्राहियों का वैरीफिकेशन कराया जाता है. यदि वैरीफिकेशन में कोई समस्या आ रही है तो ऐसे हितग्राहियों से संपर्क कर उनका वैरीफिकेशन कराया जाएगा.”

प्रदेश में बिछेगा सड़कों का जाल, NH के लिए नितिन गड़करी ने दी 414 करोड़ रुपए की सौगात

भोपाल  मध्यप्रदेश के विकास को गति प्रदान करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 414 करोड़ 84 लाख रुपए मंजूर किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और उन्नयन के लिए दी गई स्वीकृति के लिए आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माना आभार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस स्वीकृति से सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन के महत्वपूर्ण कार्य होंगे। निश्चित ही शिवपुरी और अशोक नगर के साथ अन्य जिलों को भी इसका लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और नागरिकों को सुगम यातायात सुविधा मिल जाएगी। 414 करोड़ 84 लाख रुपए की दी स्वीकृति उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश के शिवपुरी और अशोक नगर जिलों में चंदेरी, बामोर कलां, अचरोनी और चंदेरी लिंक बायपास सहित राष्ट्रीय राजमार्ग-346 के खंड (कुल लंबाई 55.80 किमी) चंदेरी-पिछोर रोड के पेव्ड शोल्डर के साथ 2-लेन के उन्नयन और निर्माण के लिए 414 करोड़ 84 लाख रुपए की स्वीकृति दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-346 (कुल लंबाई 334.55 किलोमीटर) झारखेड़ा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-46 आगरा के साथ अपने जंक्शन से शुरू होता है मुंबई रोजड जो बैरसिया (SH-23), विदिशा (NH-86 एक्सटेंशन), कुरवाई (SH-14), मुंगावली, चंदेरी, पिछोर को जोड़ता है और राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर दिनारा में समाप्त होता है। MP-UP Inter-State Connectivity होगी प्रस्तावित परियोजना का विस्तार प्रदेश के शिवपुरी और अशोक नगर जिलों से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में ऐतिहासिक चंदेरी किला और स्थानीय वस्त्र शिल्प कला केंद्र अशोक नगर जिले में स्थित हैं। यह खंड चंदेरी, गोधन, बुढ़ानपुर, बिजरावां, नया गांव, पिपरा अछरौनी, शिवपुरी, हीरापुर, नायगांव और सुजवाहा गांवों से होकर गुजरता है और उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश से अंतर्राज्यीय-कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करता है। पहले भी साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए हुए है मंजूर परियोजना के क्रियान्वयन से इस खंड पर यातायात सघनता कम होगी और सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा। उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के निर्माण और सुदृढ़ीकरण के लिए साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई और एक महत्वपूर्ण स्वीकृति भोपाल-कानपुर इकोनामिक कॉरीडोर को फोरलेन में अपग्रेड करने के लिए भी प्रदान की जा चुकी है।

कंसोटिया बने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव: तीन आईएएस की जिम्मेदारी बदली; मुखर्जी को बनाया राजस्व मंडल का अध्यक्ष

भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जापान दौर से लौटने से पहले तीन सीनियर आईएएस अफसरों की जिम्मेदारी में बदलाव किया गया है। जेएन कंसोटिया को गृह विभाग को अपर मुख्य सचिव बनाया है। वहीं दो दिन पहले एसीएस बनाए गए अनिरुद्ध मुखर्जी को राजस्व मंडल का अध्यक्ष बनाया गया है। राजस्व मंडल में प्रशासकीय सदस्य और प्रमुख सचिव सचिन सिन्हा को ग्वालियर से भोपाल लाया है। सिन्हा को प्रशासन अकादमी का महानिदेशक बनाया है। बता दें कि एसीएस एसएन मिश्रा शुक्रवार को रिटायर हो गए। जिसके बाद कंसोटिया की उनके पद पर नियुक्ति की गई। वे मोहन सरकार में करीब 1 साल बाद बड़े विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे। कंसोटिया अभी प्रशासन अकादमी के डीजी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। शमी को आवासीय आयुक्त नई दिल्ली का अति. प्रभार अनिरुद्ध मुखर्जी को दो दिन पहले एसीएस बनाकर आवासीय आयुक्त नई दिल्ली की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्हें लोक परिसंपत्ति विभाग का जिम्मा भी सौंपा था। अब उनके पास लोक परिसंपत्ति विभाग की जिम्मेदारी यथावत रखी है। वहीं आवासीय आयुक्त नई दिल्ली का अतिरिक्त प्रभार खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग की प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी को सौंपा गया है। परिवहन और जेल विभाग की जिम्मेदारी किसी को नहीं परिवहन और जेल विभाग की जिम्मेदारी अभी किसी को नहीं दी गई है। रिटायर एसीएस एसएन मिश्रा के पास गृह विभाग के एसीएस के साथ परिवहन और जेल विभाग का अतिरिक्त प्रभार था।

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