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SSC CGL और MTS भर्ती परीक्षा का फाइनल रिजल्ट घोषित, कट-ऑफ भी जारी, ऐसे चेक करें स्कोर

 कर्मचारी चयन आयोग ने कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा 2024 और एसएससी एमटीएस परीक्षा का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। कैटेगरी-वाइज़ कट-ऑफ भी जारी हो चुका है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर परिणाम और योग्यता अंक चेक कर सकते हैं। बता दें एसएससी एमटीएस भर्ती परीक्षा का आयोजन 30 सितंबर से लेकर 4 नवंबर के बीच किया देशभर के विभिन्न शहरों में आयोजित किया गया था। वहीं एसएससी सीजीएल टियर-1 भर्ती परीक्षा देशभर के विभिन्न शहरों में 5 दिसंबर 2024 को आयोजित हुई थी। टियर-2 एग्जाम 18, 19, 20 और 31 जनवरी को हुई थी।  कितने उम्मीदवारों का हुआ चयन? एसएससी सीजीएल परीक्षा में कुल 18, 174 उम्मीदवार सफल हुए हैं। विभिन्न कारणों को लेकर 1267 उम्मीदवारों के रिजल्ट को रोका गया है। टायर 2 में शामिल 253 उम्मीदवारों के रिजल्ट को रिजेक्ट कर दिया गया है। एसएससी एमटीएस भर्ती परीक्षा में कुल 3428 उम्मीदवार सफल हुए हैं। जिसमें से 500 उम्मीदवारों का रिजल्ट कैंसिल कर दिया गया है। कदाचार के लिए 179 उम्मीदवारों के रिजल्ट पर रोक लगाई गई है। वहीं 198 उम्मीदवार डिसेबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करने में विफल  रहे। बता दें 5 से 12 फरवरी के बीच सीबीआईसी द्वारा फिजिकल टेस्ट का आयोजन किया गया था।   एनटीएस और हवलदार पदों के लिए आयोजित पीईटी/पीएसटी में 20,959 उम्मीदवारों का चयन हुआ था। ऐसे चेक करें रिजल्ट     सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट ssc.gov.in पर जाएं।     होमपेज पर “Result” के टैब पर क्लिक करें।     अब एसएससी एमटीएस/एसएससी सीजीएल 2024 फाइनल रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें।     स्क्रीन पर पीडीएफ़ पेज खुलेगा। इसमें अपना रोल नंबर चेक करें।     भविष्य के संदर्भ में उम्मीदवार रिजल्ट को डाउनलोड या प्रिन्ट करके अपने पास रख सकते हैं।

फ्लाइट में 30 हजार फीट की ऊंचाई पर एक-एक कर कपड़े उतारने लगी महिला

ह्यूस्टन “इस तरह की घटनाएं पहले कभी-कभार ही सुनने को मिलती थी, पर आज कल तो यह आम ही हो गया है।” अमेरिका के एक विमान में एक महिला की हरकतों से परेशान हो कर लोग ऐसा ही कुछ कह रहे हैं। यहां ह्यूस्टन से फीनिक्स जा रही एक फ्लाइट यात्रियों के लिए यादगार बन गई। हालांकि यात्री इसे जल्द ही भुलाना चाहेंगे। दरअसल इस फ्लाइट में एक महिला ने कोहराम मचा दिया। महिला 30 हजार फीट की ऊंचाई पर जा कर अचानक विमान से उतरने की जिद करने लगी। मना करने पर उसने जो किया उसे देख कर सब दंग रह गए। इस महिला ने विमान में बैठे लोगों के सामने एक-एक कर सारे कपड़े उतार दिए। नग्न अवस्था में वह विमान में परेड भी करने लगी। महिला ने कथित तौर पर जोर-जोर से चिल्लाते हुए कॉकपिट में घुसने की भी कोशिश की। एक यात्री ने बताया, “उसने सब कुछ उतारना शुरू कर दिया, टोपी, उसके जूते, सब कुछ।” महिला की हरकतों से पूरे विमान में कोहराम मच गया। उस वक्त वहां कई बच्चे भी मौजूद थे। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि वह कॉकपिट के दरवाजे को पीट-पीट कर अंदर आने देने की जिद करने लगी। स्थिति बिगड़ने पर आखिरकार पायलट को विमान को वापसी की ओर मोड़ना पड़ा। यह पूरा ड्रामा लगभग 25 मिनट तक चला। एक कर्मचारी ने महिला को कंबल से ढकने की कोशिश भी की, लेकिन वह किसी के काबू में नहीं आई। ह्यूस्टन पुलिस ने बाद में उसे हिरासत में लिया है और उसकी मेडिकल जांच की जा रही है।

टी-72 टैंक को मिलेगा अधिक शक्तिशाली इंजन, भारत और रूस के बीच 248 मिलियन डॉलर की डील

नई दिल्ली रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के टी-72 टैंकों के लिए अधिक शक्तिशाली 1000 एचपी इंजन की खरीद के लिए रूस के  सोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ 248 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया। इस सौदे में रोसोबोरोनएक्सपोर्ट से आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (हैवी व्हीकल फैक्ट्री), अवाडी, चेन्नई को ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) भी शामिल है। टी-72 भारतीय सेना के टैंक बेड़े का मुख्य आधार है। वर्तमान में इसमें 780 एचपी इंजन लगा हुआ है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि टी-72 टैंकों के मौजूदा बेड़े को 1000 एचपी इंजन से लैस करने से भारतीय सेना की युद्धक्षेत्र गतिशीलता और आक्रामक क्षमता में वृद्धि होगी। रूस में निर्मित टी-72 भारतीय सेना के बेड़े का मुख्य टैंक है, जो अभी 780 हॉर्स पावर इंजन से संचालित है। भारत के पास टी-72 टैंक के कुल तीन वेरिएंट हैं। टी-72 टैंकों के मौजूदा बेड़े को अब 1000 एचपी इंजन से लैस किया जाएगा, जिससे भारतीय सेना की युद्धक गतिशीलता और आक्रामक क्षमता बढ़ेगी। इस टैंकको 1960 के दशक में सोवियत रूस ने विकसित और निर्मित करके रूसी सेना ने तमाम मोर्चों पर इसका इस्तेमाल शुरू किया। चीन के साथ 1962 में लड़ाई के बाद भारतीय सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने की योजना बनी। इसी क्रम में 1970 के आसपास भारत ने रूस से टी-72 टैंक खरीदा। यह यूरोप से बाहर भारत का पहला टैंक सौदा था और तबसे यह भारतीय सेना का भरोसेमंद साथी है। वहीं मजबूत सरकारी समर्थन के दम पर, भारत का रक्षा उत्पादन 2023-24 में 1.27 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से 174 प्रतिशत अधिक है। देश का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा कि भारत का आत्मनिर्भर अभियान ‘वांछित परिणाम दे रहा है’ और देश 2029-30 तक रक्षा निर्यात में 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की ओर अग्रसर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता हासिल करने के सरकार के प्रयास बेहद सफल साबित हो रहे हैं। रक्षा निर्यात, जो 10 साल पहले सिर्फ 600 करोड़ रुपये था, वित्त वर्ष 2023-24 में 21,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया। उन्होंने भरोसा जताया कि यह प्रगति जारी रहेगी और 2029-30 तक रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत सरकारी समर्थन और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से भारत का रक्षा क्षेत्र का उत्पादन वित्त वर्ष 24-29 के दौरान लगभग 20 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने वाला है। भारत के रक्षा क्षेत्र में सरकारी और निजी क्षेत्र की संस्थाओं के बीच सहयोग से हथियार और गोला-बारूद, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और नौसेना प्रौद्योगिकियों में प्रगति हुई है।  

होली के त्यौहार पर जानिए सतयुग की है सबसे पुरानी और प्रचलित कथा

होली मनाने की शुरुआत कब और कैसे हुई, इस प्रश्न पर ज्योतिषाचार्य कहते हैं, इस बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। किंतु, सबसे पुरानी और प्रचलित कथा सतयुग है। ऐसे में कह सकते हैं कि होली सतयुग से मनाई जाती रही है। वह आगे कहते हैं, चार युग होते हैं- सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग। हमारे शास्त्रों में 1 युग लाखों वर्षों का बताया गया है। सतयुग करीब 17 लाख 28 हजार वर्ष, त्रेतायुग 12 लाख 96 हजार वर्ष, द्वापर युग 8 लाख 64 हजार वर्ष, तो कलियुग 4 लाख 32 हजार वर्ष का होना है। इस हिसाब से ही गणना कहती है कि होली 39 लाख वर्ष पहले, सतयुग से मनाई जा रही है। तब, भगवान ने नृसिंह अवतार लिया था और हिरण्यकश्यप का वध किया था। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, त्रिदेव इस सृष्टि का संचालन करते हैं। ब्रह्मा सृजक हैं, विष्णु पालनहार, तो शिव संहारक। इसके साथ ही विष्णु संतुलन बनाए रखने के लिए भी समय-समय पर अवतार लेते रहते हैं। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु के 10 अवतारों का जिक्र है। सतयुग में उन्होंने मत्स्य, हयग्रीव, कूर्म, वाराह और नृसिंह अवतार लिया, तो त्रेता में वामन, परशुराम और श्रीराम का। द्वापर में वह श्रीकृष्ण रूप में भक्तों के बीच आए। कलियुग में वह कल्कि अवतार लेंगे। वह समय कलियुग और सतयुग के संधिकाल का होगा। अभी तो कलियुग की शुरुआत ही हुई है। प्रभु अपने सभी अवतारों में दुष्टों का संहार करते हैं, तो अपनी लीलाओं से जीवन जीने का तरीका भी सिखाते हैं। होली का त्योहार भी कुछ ऐसा ही है, जिसका आरंभ सतयुग में भगवान के नृसिंह अवतार के समय हुआ। क्या है सबसे प्रचलित कथा? ज्योतिषाचार्य कहते हैं, सतयुग में एक अति पराक्रमी दैत्य राजा था- हिरण्यकश्यप। हिरण्यकश्यप के भाई हिरण्याक्ष का भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर वध किया था। इस कारण हिरण्यकश्यप उन्हें दुश्मन मानता था। हिरण्यकश्यप का विवाह कयाधु से हुआ, जिससे उसे प्रह्लाद नामक पुत्र की प्राप्ति हुई। हिरण्यकश्यप ने मनचाहे वरदान के लिए ब्रह्मा की तपस्या शुरू की। इस दौरान देवताओं ने उसकी नगरी पर आक्रमण कर दिया और वहां अपना शासन स्थापित कर लिया। उस समय देवर्षि नारद मुनि ने कयाधु की रक्षा की और अपने आश्रम में स्थान दिया। वहीं पर हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद का जन्म हुआ। देवर्षि नारद मुनि की संगत में रहने के कारण प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त बन गया। उधर, कई वर्षों तक तपस्या के बाद हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा ने दर्शन दिए। हिरण्यकश्यप ने वरदान मांगा कि मेरी मृत्यु मनुष्य या पशु के हाथों न हो, न किसी अस्त्र-शस्त्र से, ना दिन व रात में, ना भवन के बाहर और ना ही अंदर, न भूमि ना आकाश में हो मेरी मृत्यु हो। कुल मिलाकर, अपनी समझ में उसने अमरता का वरदान मांगा। ब्रह्मा ने उसे यह वरदान दे दिया। किंतु, इसके बाद वह निरंकुश हो गया। वह ऋषि-मुनियों की हत्या करवाने लगा और स्वयं को भगवान घोषित कर दिया। किंतु, स्वयं उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्ति में लीन रहता। यह बात हिरण्यकश्यप को पता चली तो वह गुस्से से फट पड़ा। बार-बार समझाने के बाद भी प्रह्लाद ने जिद नहीं छोड़ी तो उसने उसे मारने का फ़ैसला कर लिया। अब शुरू होती है होलिका की कहानी हिरण्यकश्यप की एक बहन थी होलिका। होलिका को भी भगवान ब्रह्मा से एक वरदान मिला था। यह कि उसे अग्नि नहीं जला सकती। हिरण्यकश्यप ने होलिका को कहा कि वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए, ताकि प्रह्लाद भाग न सके और वह उसी अग्नि में जलकर ख़ाक हो जाए। होलिका ने किया तो ऐसा ही, किंतु वह ख़ुद भस्म हो गई और प्रह्लाद बच गया। कहा जाता है कि होलिका के एक वस्त्र में न जलने की शक्तियां समाहित थीं, किंतु भगवान विष्णु की कृपा से चली तेज आंधी से वह वस्त्र होलिका से हटकर, प्रह्लाद के शरीर से लिपट गया था। होलिका के जलने और प्रह्लाद के बच जाने पर नगरवासियों ने उत्सव मनाया, जिसे छोटी होली के रूप में भी जानते हैं। इसके बाद जब यह बात फैली तो विष्णु भक्तों ने अगले दिन और भी भव्य तरीके से उत्सव मनाया। होलिका से जुड़ा होने के कारण आगे इस उत्सव का नाम ही होली पड़ गया। उधर, हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए उसे एक खंभे में बांध दिया। वह प्रह्लाद को मारने ही वाला था कि भगवान विष्णु खंभा फाड़कर नरसिंह अवतार में प्रकट हुए। उन्होंने हिरण्यकश्यप को उसके भवन की चौखट पर ले जाकर, संध्या के समय, अपने गोद में रखकर नाखूनों की सहायता से उसका वध कर दिया। इस तरह ब्रह्मा का वरदान भी नहीं टूटा और आततायी का अंत हो गया। भगवान को भक्त प्रह्लाद को उसका उत्तराधिकारी बना दिया। भगवान शिव और कामदेव की कथा सबसे प्रचलित कथा सतयुग में होलिका दहन की ही है, लेकिन बाद के युगों में भी यह उत्सव अलग-अलग समय पर मनाया जाता रहा और इससे अन्य कथाएं भी जुड़ती गईं। होली की एक कहानी कामदेव की भी है। पार्वती शिव से विवाह करने के लिए उनकी तपस्या में लीन थीं लेकिन खुद ध्यानमग्न शिव ने काफी समय तक ध्यान नहीं दिया। ऐसे में कामदेव से रहा न गया और उन्होंने भगवान शिव पर पुष्प बाण चला दिया। ध्यान भंग होने से शिव को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी और कामदेव भस्म हो गए। कामदेव के भस्म होने पर उनकी पत्नी रति रोने लगीं और कामदेव को जीवित करने की गुहार लगाई। इसके अगले दिन क्रोध शांत होने पर शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित कर किया। माना जाता है कि कामदेव के भस्म होने पर होलिका जलाई जाती है, तो उनके जीवित होने की खुशी में रंगों का त्योहार होली मनाई जाती है। महाभारत काल की कथा जानते हैं? महाभारत काल, यानि द्वापर में युधिष्ठिर को प्रभु श्रीकृष्ण ने एक कहानी सुनाई। एक बार श्रीराम के पूर्वज रघु के शासन मे एक असुर महिला थी। उसे कोई नहीं मार सकता था, क्योंकि उसे एक वरदान था। एक दिन, गुरु वशिष्ठ ने बताया कि उसे मारा जा सकता है, यदि बच्चे अपने हाथों में लकड़ी के छोटे टुकड़े लेकर शहर के बाहरी इलाके के … Read more

सिंगापुर वालों ने खरीदी हल्दीराम में 9% हिस्सेदारी, पता चली कंपनी की सही कीमत

नागपुर भारत के मशहूर नमकीन और स्नैक्स ब्रांड हल्दीराम (Haldiram’s) के साथ सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक (Temasek) ने एक बड़ा करार की खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि टेमासेक ने हल्दीराम के स्नैक्स बिजनेस में लगभग 9 फीसदी हिस्सेदारी 8,000 करोड़ रुपये में खरीदने का समझौता किया है. इस सौदे के बाद हल्दीराम की कुल वैल्यूएशन लगभग 90,000 करोड़ रुपये आंकी गई है. लंबी चर्चा और कई महीनों की बातचीत के बाद यह समझौता हुआ है. टेमासेक ने हल्दीराम को एक “मूल्यवान संपत्ति” माना है, जो भारत के उपभोक्ता क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करेगी. इससे पहले, प्राइवेट इक्विटी फर्म ब्लैकस्टोन ने हल्दीराम में निवेश करने से मना कर दिया था, क्योंकि उन्हें कंपनी के मूल्यांकन को लेकर चिंता थी. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, हल्दीराम स्नैक्स 9 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी अन्य निवेशकों को बेचने पर भी विचार कर रहा है. पहले की खबरों के मुताबिक, हल्दीराम अपनी कंपनी में 20 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच सकता है. 1937 में राजस्थान के बीकानेर में स्थापित हल्दीराम आज भारत के स्नैक्स बाजार में एक बड़ा नाम है. यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल के अनुसार, हल्दीराम भारत के 6.2 अरब डॉलर के स्नैक्स बाजार में लगभग 13 फीसदी हिस्सेदारी रखता है. इसकी सबसे प्रसिद्ध उत्पाद “भुजिया” है, जो आटे, जड़ी-बूटियों और मसालों से बनी एक कुरकुरी नमकीन है. यह छोटे दुकानों पर सिर्फ 10 रुपये में उपलब्ध है. टेमासेक ने पहले कहां-कहां किया है निवेश टेमासेक ने पहले भी भारत में मणिपाल हॉस्पिटल्स और देवयानी इंटरनेशनल (केएफसी और पिज़्ज़ा हट के ऑपरेटर) जैसी कंपनियों में निवेश किया है. हल्दीराम में हिस्सेदारी खरीदकर टेमासेक अब भारत के पैकेज्ड स्नैक्स इंडस्ट्री पर दांव लगा रहा है. हल्दीराम ग्रुप ने हाल ही में अपने एफएमसीजी बिजनेस का बंटवारा किया है. इसके तहत हल्दीराम स्नैक्स प्राइवेट लिमिटेड (एचएसपीएल या हल्दीराम दिल्ली ग्रुप) और हल्दीराम फूड्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (एचएफआईपीएल या हल्दीराम नागपुर ग्रुप) को एक नई कंपनी हल्दीराम स्नैक्स फूड्स प्राइवेट लिमिटेड (एचएसएफपीएल) में शामिल किया गया है. इसमें एचएसपीएल और एचएफआईपीएल के मौजूदा शेयरधारकों को क्रमशः 56 फीसदी और 44 फीसदी हिस्सेदारी मिलेगी. क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, हल्दीराम ग्रुप का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो काफी विविध है, जिसमें स्नैक्स, नमकीन, मिठाई, रेडी-टू-ईट/प्री-मिक्स फूड, फ्रोजन फूड, बिस्कुट, नॉन-कार्बोनेटेड ड्रिंक, पास्ता आदि शामिल हैं. ग्रुप का भारत में व्यापक प्रभाव है और यह अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों में निर्यात करता है.

स्कूल शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दे रहा

भोपाल प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लागू की जा रही नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रत्येक बिंदु को ठोस तरीके से लागू किये जाने के प्रयास किये जा रहे है। नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में तेजी से बढ़ती हुई विश्व की अर्थव्यवस्था में भारतीयों का किस प्रकार से योगदान हो उसकी चिंता की गई है। बढ़ती हुए आबादी के साथ जनता के लिये उनकी शिक्षा, कौशल और आकांक्षाओं के अनुरूप रोजगार का सृजन एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दे रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने नये शैक्षणिक सत्र में 700 नये उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में नये ट्रेड एवं जॉब रोल्स शुरू करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के शिक्षा विभाग को भेजा है। यह ट्रेड 21वीं सदी के नवीन कौशल उन्नयन पर आधारित है। वर्तमान में 2383 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा के कोर्स चल रहे है। इन्हें मिलाकर प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा देने वाले स्कूलों की संख्या 3 हजार से अधिक हो जायेगी। इन कोर्स में उन्नत कृषि को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है। डेयरी विकास से जुड़े कोर्स कन्स्ट्रशन ट्रेड अंतर्गत मेशन सहायक, कंस्ट्रशन पेन्टर, असिस्टेंट डिजाइनर, फैशन, हाउसकीपिंग, ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन एण्ड मैनेजमेंट के जॉब रोल्स भी प्रारंभ किये जायेंगे। वर्तमान में संचालित कोर्स में कक्षा 9 और 10 में डाटाएंट्री ऑपरेटर, जूनियर फील्ड टेकनिशियन, असिस्टेंट ब्यूटी थेरेपिस्ट, रिटेलस्टोर, ऑपरेशन असिस्टेंट, प्रायवेट सिक्योरिटी गॉर्ड, फूड एण्ड बेवरीज, सर्विस असिस्टेंट, माइक्रो फ़ाइनेंस एग्ज़ीक्यूटिव, असिस्टेंट प्लम्बर, सिलाई मशीन ऑपरेटर, फोर व्हीलर सर्विस असिस्टेंट, इलेक्ट्रॉनिक सर्विस असिस्टेंट और फिजिकल एजूकेशन असिस्टेंट विषय प्रमुख है, कक्षा 11 और 12 में जिन कोर्स को प्राथमिकता दी गई है। उनमें जूनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर, सौलर पैनल टेक्नीशियन, ड्रोन सर्विस टेक्नीशियन, सीसीटीबी, फुटेज ऑपरेटर, फ्लोरीकल्चर, सेल्फ एम्प्लॉयड टेलर प्रमुख है। 4 लाख से अधिक विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा प्रदेश में वर्तमान में 2383 विद्यालयों में 4 लाख से अधिक विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है। व्यावसायिक शिक्षा देने के लिये 4 हजार 700 से अधिक शिक्षकों को विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है। लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रदेश में संचालित व्यावसायिक शिक्षा के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिये है।  

WhatsApp की बड़ी तैयारी, बदल जाएगा ऐप का डिजाइन

वॉट्सऐप एक के बाद एक यूजर्स के लिए तगड़े फीचर रोलआउट कर रहा है। बीते कुछ दिनों से कंपनी ने नए फीचर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। अब कंपनी इस और फीचर रोलआउट करने की तैयारी कर रही है, जिससे आपके वॉट्सऐप कॉलिंग का अंदाज बदल जाएगा। WABetaInfo की रिपोर्ट के वॉट्सऐप चैट्स और ग्रुप्स के लिए रिडिजाइन्ड कॉल मेन्यू लाने वाला है। रिडिजाइन्ड कॉल मेन्यू को WABetaInfo ने गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद वॉट्सऐप बीटा फॉर ऐंड्रॉयड 2.25.5.8 में देखा है। WABetaInfo ने पोस्ट में इस नए फीचर का एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में दिखा वॉट्सऐप का नया फीचर शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में आप रिडिजाइन्ड कॉल ऑप्शन को इंडिविजुअल और ग्रुप चैट्स के अंदर टॉप ऐप बार में देख सकते हैं। अभी की बात करें, तो वॉट्सऐप में यूजर्स को वॉइस और वीडियो कॉल के लिए दो अलग बटन मिलते हैं। नए अपडेट में कंपनी इन दोनों बटन को एक में करके एक सिंगल मेन्यू ऑफर करने की तैयारी कर रही है। नए डिजाइन से यूजर्स को कॉल्स को मैनेज करने में आसानी होगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा ग्रुप चैट्स में होगा क्योंकि अक्सर ग्रुप में गलती से कॉल बटन टैप होने पर न चाहते हुए भी कॉल शुरू हो जाती है। ग्लोबल यूजर्स के लिए जल्द आ सकता है स्टेबल अपडेट नया फीचर यूजर्स को मेन्यू में कॉल टैब और अटैचमेंट मेन्यू को ओपन किए बिना कॉल लिंक जेनरेट और शेयर करने का ऑप्शन देगा। नए फीचर की खासियत है कि यह ऐक्सिडेंटल कॉल्स की समस्या को खत्म कर देगा। इस फीचर के आने से यूजर्स को पहले वॉइस या वीडियो कॉल में से किसी एक को मेन्यू में से सेलेक्ट करना होगा। कुल मिलाकर कहा जाए यह फीचर यूजर्स को कॉलिंग एक्सपीरियंस को पहले से काफी बेहतर करने वाला है। कंपनी इस फीचर को अभी बीटा वर्जन में ऑफर कर रही है। बीटा टेस्टिंग पूरी होने के बाद इसके स्टेबल वर्जन को ग्लोबल यूजर्स के लिए रोलआउट किया जाएगा।

एक झटके में माफ हो जाएंगे हजारों के ट्रैफिक चालान, यहाँ से करें रजिस्ट्रेशन

दिल्ली ट्रैफिक नियमों के पालन न करने पर काटे गए पेंडिंग चालान अगर आपके भी कलेजे को चुभ रहे हैं और आप भी इनसे छुटकारा पाना चाहते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है. जी हां, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस इस हफ्ते शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन करने जा रही है. दिल्ली राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण की मदद से दिल्ली की 7 जिला अदालतों में लोक अदालतें लगेंगी, जिसमें आप अपने चालान को आसानी से माफ करवा पाएंगे. ये अदालत कोर्ट में काफी वक्त से पेंडिंग चल रहे चालानों के निपटारे के लिए लगाई जा रही है. इस तरह माफ होंगे चालान इसके लिए आपको दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट पर दिए गए लिंक से पेंडिंग चालान की स्लिप डाउनलोड करनी होगी. कोर्ट केवल इसी स्लिप के आधार पर आपके चालान पर फैसला सुना पाएगा. इस स्लिप के ना होने पर आप इस अदालत का फायदा नहीं उठा पाएंगे. अगर आपका चालान 1000 रुपये का है, तो आप कोर्ट से माफी मांग सकते हैं और नरम रुख अपनाने की अपील कर सकते हैं. कोर्ट अपने विवेक से चालान 500 रुपये या 200 रुपये कर सकती है. आपका चालान पूरा भी माफ हो सकता है. हालांकि, यह पूरी तरह से जज के विवेक पर निर्भर करता है. इवनिंग कोर्ट नियमित कोर्ट की तरह काम करती है, जिसमें महीने के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाई जाती है. यहां लगेंगी अदालतें ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक इस लोक अदालत में कुल 1 लाख 80 हजार के पेंडिंग चालानों का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है. चालान स्लिप डाउनलोड करने के लिए आपको दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट https://traffic.delhipolice.gov.in/notice/lokadalat पर जाना होगा. आपको बता दें कि यह अदालत दिल्ली की रोहिणी, साकेत, कड़कड़डूमा, पटियाला हाउस, द्वारका, तीस हजारी और राउज एवेन्यू कोर्ट में लगेगी. इनमें केवल उन्हीं चालान वाले मामलों का निपटारा होगा जो 30 नवंबर 2024 तक वर्चुअल कोर्ट में पेंडिंग थे. लोक अदालत का समय सुबह 10 से शाम 4 बजे तक होगा.

वजन कम करने के लिए डाइट में शामिल न करें ये चीजें

सही डाइट और एक्सरसाइज करना बेहद जरूरी है। अक्सर लोग वेट लॉस के लिए सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करते हैं, क्योंकि इनमें कैलोरी कम और पोषक तत्व ज्यादा होते हैं। हालांकि, कुछ सब्जियां ऐसी भी हैं, जो वजन बढ़ाने का कारण बन सकती हैं। यदि आप वेट लॉस करना चाह रहे हैं, तो इन सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं उन 6 सब्जियों के बारे में, जो वजन बढ़ा सकती हैं। आलू आलू एक ऐसी सब्जी है, जो लगभग हर घर में इस्तेमाल की जाती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है, जो शरीर में एनर्जी लेवल को बढ़ाती है। हालांकि, अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो आलू को सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। आलू में स्टार्च की मात्रा ज्यादा होती है, जो वजन बढ़ाने का कारण बन सकता है। इसके अलावा, तले हुए आलू या फ्रेंच फ्राइज तो बिल्कुल नहीं खाने चाहिए। मटर मटर एक पौष्टिक सब्जी है, जिसमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। हालांकि, इसमें कार्बोहाइड्रेट भी काफी होता है, जो वजन बढ़ा सकता है। अगर आप वेट लॉस के लिए डाइट फॉलो कर रहे हैं, तो मटर सीमित मात्रा में ही खाएं। इसे ज्यादा मात्रा में खाने से कैलोरी इनटेक बढ़ सकता है। शकरकंद शकरकंद को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें विटामिन-ए, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट और शुगर की मात्रा भी ज्यादा होती है। अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो शकरकंद को सीमित मात्रा में खाना चाहिए। इसे ज्यादा मात्रा में खाने से कैलोरी इनटेक बढ़ सकता है। कॉर्न (मक्का) कॉर्न यानी मक्का एक स्वादिष्ट सब्जी है, जिसे लोग उबालकर या भूनकर खाना पसंद करते हैं। हालांकि, इसमें कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी की मात्रा ज्यादा होती है। अगर आप वेट लॉस के लिए डाइट फॉलो कर रहे हैं, तो कॉर्न कम ही खानी चाहिए। इसके अलावा, बटर कॉर्न या क्रीमी कॉर्न जैसी डिशेज से, तो बिल्कुल दूर रहना चाहिए। अरबी अरबी एक ऐसी सब्जी है, जिसमें स्टार्च की मात्रा ज्यादा होती है। यह वजन बढ़ाने का कारण बन सकती है। अगर आप वेट लॉस करना चाह रहे हैं, तो अरबी सीमित मात्रा में खानी चाहिए। इसके अलावा, अरबी को तलकर या घी में पकाकर खाने से बचना चाहिए। प्याज प्याज का इस्तेमाल ज्यादातर सब्जियों में स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। हालांकि, प्याज में कार्बोहाइड्रेट और शुगर की मात्रा ज्यादा होती है। अगर आप वेट लॉस के लिए डाइट फॉलो कर रहे हैं, तो प्याज कम खाना चाहिए। इसके अलावा, प्याज को तलकर या भूनकर खाने से बचना चाहिए।

मध्य प्रदेश में 5 साल में बनेंगी 1 लाख KM सड़कें, शहरों से गांवों तक मिलेगी नई रफ्तार; बजट में क्या-क्या ऐलान

भोपाल मध्य प्रदेश में इस बार वित्त वर्ष 2025-26 का बजट शहरों से लेकर गांवों तक पूरे प्रदेश को नई रफ्तार देने वाला है। इसमें नई सड़कों से लेकर फ्लाईओवर बनाने तक के लिए बजट रखा गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री के साथ ही वित्त मंत्री का प्रभार संभाल रहे जगदीश देवड़ा ने बुधवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 4.21 लाख करोड़ रुपयों से अधिक का बजट पेश किया। इस बार के बजट में ग्रामीणों की सुविधा के लिए मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना प्रारंभ की जा रही है, इसके लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री देवड़ा ने अपने बजट भाषण में कहा कि प्रदेश में अगले 5 सालों में 1 लाख किलोमीटर सड़क बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह प्रदेश में आगामी 5 वर्षों में 500 रेल ओवर ब्रिज एवं फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। इस वर्ष 3500 किलोमीटर नई सड़कें तथा 70 पुल बनाए जाने का लक्ष्य है। वहीं, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 1 हजार किलोमीटर सड़कों के निर्माण एवं लगभग 5200 किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य पूर्ण होगा। 8631 गांवों को बारहमासी मार्ग से जोड़ा गया मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत अब तक 8631 गांवों को 19,472 किलोमीटर लंबाई की सड़कें बनाकर, बारहमासी मार्ग से जोड़ा जा चुका है। हालांकि, अब भी कुछ गांवों में मेन रोड से ग्राम पंचायतों में पहुंचने के लिए सड़क उपलब्ध नहीं है। अतः ग्रामवासियों को सुविधाजनक मार्ग उपलब्ध कराने के लिए नई योजना “मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना” प्रारंभ की जा रही है। इस योजना के लिए वर्ष 2025-26 में रुपये 100 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अलावा एक नई योजना ‘क्षतिग्रस्त पुलों का पुनर्निर्माण योजना’ प्रारम्भ की जा रही है। इस योजना के लिए वर्ष 2025-26 में रुपये 100 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। वहीं, सड़कों एवं पुलों के निर्माण एवं रखरखाव के लिए वर्ष 2025-26 में रुपये 16,436 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है, जो वर्ष 2024-25 से 34 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि रोड नेटवर्क, एक्सप्रेसवे, मेट्रो, एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी अनेक परियोजनाओं के साथ प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भोपाल, देवास, ग्वालियर, जबलपुर, सतना और इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। उज्जैन-जावरा 4 लेन सड़क के निर्माण से उज्जैन, इंदौर एवं आसपास के क्षेत्र, दिल्ली-मुंबई 8 लेन कॉरिडोर से जुड़ जाएंगे। वहीं, 1692 करोड़ की अनुमानित लागत वाले उज्जैन-इंदौर 6 लेन रोड का भूमि पूजन हो चुका है। 116 नए रेलवे ओवरब्रिज बनाने का काम प्रगति पर देवड़ा ने कहा कि रेलवे क्रॉसिंग पर यातायात बाधित होने से समय एवं ईंधन की बर्बादी रोकने के लिए रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) एवं रेलवे अंडरब्रिज (आरयूबी) के निर्माण कार्य रेलवे के साथ मिलकर प्राथमिकता से कराए जा रहे हैं। प्रदेश में 4251 करोड़ रुपये की लागत के कुल 116 नए रेलवे ओवरब्रिज बनाने का काम प्रगति पर हैं।

YouTube के पीछे हाथ धोकर पड़ीं Meta, लगवानी चाहती हैं बैन

लंदन Meta और Snap समेत दूसरी कंपनियां हाथ धोकर YouTube के पीछे पड़ गई हैं. इन कंपनियों ने ऑस्ट्रेलिया सरकार से यूट्यूब पर भी बैन लगाने की मांग की है. दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 16 साल के कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर बैन लगा दिया था, लेकिन यूट्यूब को इससे बाहर रखा गया था. अब बाकी कंपनियों का कहना है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यूट्यूब पर भी बैन लगना चाहिए. YouTube को क्यों बैन करवाना चाहती हैं बाकी कंपनियां? टिकटॉक, फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा और स्नैप आदि का कहना है कि YouTube के कारण बच्चों को वही खतरे हैं, जो दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से थे. यूट्यूब भी बच्चों को एल्गोरिद्मिक कंटेट रिकमंडेशन, सोशल इंटरेक्शन फीचर और खतरनाक कंटेट तक एक्सेस देती है. मेटा का कहना है कि यूट्यूब की वजह से भी बच्चे हानिकारक कंटेट से एक्सपोज होते हैं. इसी तरह टिकटॉक का कहना है कि यूट्यूब को इस नियम से बाहर रखने से यह कानून विसंगत बन गया है. स्नैप ने भी इससे सहमति जताते हुए कहा है कि कानून को निष्पक्ष होना चाहिए और बिना किसी भेदभाव के इसके पालन किया जाना चाहिए. YouTube पर क्यों नहीं लगाई थी पाबंदी? ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल नवंबर में एक नया कानून पारित किया था. इसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस नहीं कर सकते. अगर कोई प्लेटफॉर्म उन्हें लॉग-इन करने देगा तो उस पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है. हालांकि, यूट्यूब पर यह कानून लागू नहीं होता. इसके एजुकेशनल कंटेट और पेरेंटल सुपरविजन के साथ फैमिली अकाउंट के चलते इसे पाबंदी से बाहर रखा गया है. दूसरी कंपनियों के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए यूट्यूब ने कहा कि अपनी कंटेट मॉडरेशन पॉलिसी को मजबूत कर रही है और ऑटोमेटेड टूल्स के जरिए हार्मफुल कंटेट की पहचान कर रही है.

बीपी और क‍िडनी के मरीजों को नहीं पीना चाहिए ये जूस

मार्च का महीना शुरू हो चुका है, लेकिन मौसम में हल्की ठंडक अब भी बनी हुई है। ऐसे में सेहतमंद रहने के लिए सही डाइट लेना जरूरी है। चुकंदर, आंवला और गाजर का जूस इस समय भी काफी फायदेमंद माना जाता है। यह जूस आयरन, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। इससे इम्युनिटी बढ़ाने में मदद म‍िलती है। वहीं खून की कमी दूर होती है। त्‍वचा भी चमकदार बनती है। इसके अलावा जि‍न्‍हें तेजी से वजन कम करना होता है वह भी इसका जूस पीते हैं। हालांकि, हर किसी के लिए यह जूस फायदेमंद नहीं होता है। कुछ ऐसे भी लोग होते हैं ज‍िन्‍हें इस जूस को पीने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि यह उनकी सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। अगर आप भी इस जूस को अपनी डाइट में शामिल करने की सोच रहे हैं, तो पहले आपको यह जान लेना जरूरी है कि किन लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। लो बीपी वाले मरीज न पिएं ये जूस आपको बता दें क‍ि ज‍िन लोगों को लो ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या हाेती है उन्‍हें चुकंदर, गाजर और आंवला का जूस भूल से भी नहीं पीना चाह‍िए। अगर आप इस जूस को पीते हैं तो ब्लड प्रेशर की समस्या और बढ़ सकती है। जिस वजह से आपको अचानक से चक्कर आ सकता है। वहीं सिरदर्द की समस्‍या भी आपको परेशान कर सकती है। क‍िडनी की परेशानी से जूझ रहे मरीज अगर आपको किडनी से संबंध‍ित कोई बीमारी है तो इस स्थित‍ि में चुकंदर का जूस आपकी बीमारी काे और भी बढ़ा सकता है। ये आपके ल‍िए जहर के समान है। खासकर, किडनी स्टोन वाले लोगों को चुकंदर, आंवला और गाजर का जूस पीने से परहेज करना चाहिए क्‍योंकि चुकंदर में मौजूद ऑक्सलेट किडनी में पथरी की समस्या काे और बढ़ा सकता है। प्रेग्‍नेंट मह‍िलाएं न प‍िएं ये जूस गाजर, चुकंदर और आंवले के जूस से प्रेग्‍नेंट म‍ह‍िलाओं को दूरी बना लेनी चाह‍िए। ये वही समय होता है जब खाने-पीने का खास ध्यान रखा जाता है। साथ ही यह उनके लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। अगर आप प्रेग्‍नेंट हैं और ऐसे में ये जूस पीने का सोच रहीं हैं तो आपको डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही इसे प‍िएं। एलर्जी होने पर अगर आप क‍िसी भी एलर्जी से परेशान हैं तो चुकंदर, आंवला और गाजर का जूस बिल्कुल न पिएं। इस जूस को पीने से एलर्जी बढ़ सकती है। दरअसल, एलर्जी से जूझ रहे लोगों को यह कॉम्‍बिनेशन जल्दी सूट नहीं करता है। इससे त्‍वचा में सूजन, खुजली या उल्टी जैसी समस्या हो सकती है।

मोदी सरकार किसानों से एमएसपी पर खरीद रही तुअर दाल, पहले के मुकाबले तेजी दर्ज

नईदिल्ली केंद्र सरकार द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर तुअर (अरहर) की खरीद में तेजी आई है। 11 मार्च तक आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना सहित प्रमुख उत्पादक राज्यों में कुल 1.31 लाख मीट्रिक टन तुअर की खरीद की गई है, जिससे इन राज्यों के 89,219 किसानों को लाभ मिला है। यह जानकारी गुरुवार को कृषि मंत्रालय की ओर से दी गई। इंटीग्रेटेड प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान(पीएम-आशा) की मूल्य समर्थन योजना के तहत निर्धारित उचित औसत गुणवत्ता के अनुरूप अधिसूचित दलहन, तिलहन और खोपरा की खरीद केंद्रीय नोडल एजेंसियों द्वारा राज्य स्तरीय एजेंसियों के जरिए प्री-रजिस्टर्ड किसानों से सीधे एमएसपी पर की जाती है। इंटीग्रेटेड पीएम-आशा योजना को जारी रखने की मंजूरी दी भारत सरकार ने 15वें वित्त आयोग साइकल के दौरान 2025-26 तक इंटीग्रेटेड पीएम-आशा योजना को जारी रखने को मंजूरी दी। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इंटीग्रेटेड पीएम-आशा योजना खरीद के कार्यान्वयन में अधिक प्रभावशीलता लाने के लिए संचालित की जाती है, जो न केवल किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य प्रदान करने में मदद करती है, बल्कि उपभोक्ताओं को सस्ती कीमतों पर उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करती है और आवश्यक वस्तुओं की कीमत में उतार-चढ़ाव को भी नियंत्रित करती है। तुअर, उड़द और मसूर की खरीद करने के लिए दी मंजूरी दलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में योगदान देने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने और आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए, सरकार ने खरीद वर्ष 2024-25 के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत तुअर, उड़द और मसूर के पूरे उत्पादन की खरीद को मंजूरी दी है। सरकार ने बजट 2025-26 में यह भी घोषणा की है कि देश में दालों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से 2028-29 तक चार साल के लिए राज्य के उत्पादन के लिए तुअर (अरहर), उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत खरीद की जाएगी। 2024-25 सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश को खरीद की मंजूरी दी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तुअर (अरहर) मसूर और उड़द की खरीद को क्रमश: 13.22 एलएमटी, 9.40 एलएमटी और 1.35 एलएमटी की सीमा तक मंजूरी दी। उन्होंने खरीफ 2024-25 सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश राज्यों में कुल 13.22 एलएमटी मात्रा के लिए तुअर (अरहर) की खरीद को मंजूरी दी। तुअर की खरीद नेफेड के ई-समृद्धि पोर्टल और एनसीसीएफ के संयुक्ति पोर्टल पर पहले से रजिस्टर्ड किसानों से भी की जाती है। केंद्र केंद्रीय नोडल एजेंसियों नैफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से किसानों से 100 प्रतिशत तुअर खरीदने के लिए कमिटेड है।

प्रयागराज महाकुंभ में रेलवे ने दोगुनी संख्या में यात्री ट्रेनों का संचालन किया, जिससे श्रद्धालुओं सहायता मिली

जबलपुर  प्रयागराज महाकुंभ के दौरान पश्चिम मध्य रेलवे (पमरे) ने भारी यात्री दबाव के मध्य ट्रेनों को निर्धारित समय पर संचालित करने जोर दिया। इस समयबद्धता से रेलपथ पर अतिरिक्त ट्रेनों के लिए जगह बनी। दोगुनी संख्या में यात्री ट्रेनों के संचालन की सफलता प्राप्त की, जिससे श्रद्धालुओं को प्रयागराज तक पहुंचाने में सहायता मिली। पमरे का यह प्रयास अब दूसरे रेल जाने के लिए भी मॉडल बन गया है। अब प्रत्येक पर्व एवं मेला के दौरान यात्रियों की भीड़ बढ़ने पर पमरे की नीति पर समस्त रेल जोन में ट्रेन संचालन की तैयारी है। इसके लिए रेलवे की ओर से तैयारी की जा रही है। वहीं, पमरे के प्रमुख स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था भी कारगर रही है, जिसके कारण कहीं पर भी कोई अराजकता की स्थिति निर्मित नहीं हुई। सौ की जगह दो सौ से ज्यादा ट्रेनें चलाई पश्चिम मध्य रेल के जबलपुर और भोपाल रेल मंडल होकर रेलपथ महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात सहित दक्षिण भारत के राज्यों को प्रयागराज से जोड़ता है। इन राज्यों से आने वाली ट्रेनें कटनी-मानिकपुर के रास्ते प्रयागराज पहुंचती हैं। कटनी-मानिकपुर के मध्य सामान्य दिनों में 100-125 यात्री ट्रेनें संचालित होती हैं, जहां पर महाकुंभ के दौरान प्रतिदिन दो सौ से ढाई सौ ट्रेनें संचालित हुईं। नियमित ट्रेनों के साथ ही स्पेशल ट्रेनों को निर्धारित समय पर संचालित करके पमरे ने अतिरिक्त ट्रेनों के लिए रेलपथ में गुंजाइश बनाया। महाकुंभ में रेल जोन में सबसे अधिक ट्रेनों को चलाया जा सका। पहले से की तैयारी, सामंजस्य बैठाया महाकुंभ के दौरान भीड़ बढ़ने और प्रयागराज से नजदीकी को ध्यान में रखकर पमरे ने अतिरिक्त ट्रेन के रैक तैयार किए। आवश्यकता होने पर कम यात्री संख्या वाली ट्रेनों को चिह्नित करके रखा। इसके कारण प्रयागराज में जब भी भीड़ बढ़ी और आवश्यकता होने पर तुरंत ट्रेन के अतिरिक्त रैक उपलब्ध कराने में सफल रहा। इससे यात्री परिवहन की निरंतरता बनाई रखी जा सकीं। भीड़ का आंकलन करके सतना, मैहर, कटनी रेलवे स्टेशन पर स्टेशन के बाहर तीन से चार हजार वर्गफीट के अस्थाई यात्री विश्राम स्थल विकसित किए। वहां पेयजल, शौचालय से लेकर चिकित्सा एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराया। बेहतर सुविधा मिलने से यात्री स्टेशन के बाहर ही रुके। ट्रेन आने पर प्लेटफार्म में प्रवेश दिए जाने से कहीं पर भी भीड़ अनियंत्रित नहीं हुई।

कोरोना के बाद AC कोचो का बड़ा चलन, रेलवे ने जारी किया आकड़ा

नई दिल्ली भारतीय रेलवे के जरिए रोजाना करोड़ों की संख्या में यात्री सफर करते हैं. यात्रियों के लिए रेलवे हजारों की संख्या में ट्रेन चलाता है. भारतीय रेलवे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल व्यवस्था है. सामान्य तौर पर बात की जाए तो अगर कोई कहीं जाना चाहता है और दूर का सफर तय करना चाहता है. तो ऐसे में ज्यादातर लोगों की पहली पसंद ट्रेन होती है. बीते कुछ सालों में ट्रेन में सफर करने वालों की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिला है. लेकिन जब पूरी दुनिया की तरह भारत भी कोविड-19 की चपेट में था. तो महामारी के बाद जब चीजें सामान्य हुईं. तो ट्रेन से जाने वाले यात्रियों की संख्या में काफी बदलाव देखने को मिला. थर्ड एसी में ट्रैवल करने वाले यात्रियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है. हैरान कर देंगे रेलवे के जारी किए गए आंकड़े. कोरोना के बाद बढ़े थर्ड एसी के यात्री साल 2019 में जब कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था. तब से ही लोग साफ सफाई को लेकर सजग रहने लगे. इसके बाद लोगों की जिंदगी में कई आदते पूरी तरह से बदल गईं. वहीं कोरोना महामारी के बाद बात की जाए तो भारतीय रेलवे में सफर करने वालों यात्रियों की संख्या में भी काफी बदलाव हुआ. हाल ही में रेलवे की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में यह बात सामने निकल कर आई कि कोरोना महामारी के बाद ट्रेनों में पहले जो यात्री स्लीपर में सफर करते थे. वह यात्री थर्ड एसी में सफर करने लगे हैं. कोविड के बाद थर्ड एसी पैसेंजर्स की संख्या में तगड़ा उछाल देखने को मिला है. आंकडे कर देंगे हैरान कोरोना महामारी के बाद से लेकर अब तक के 5 सालों में एसी थर्ड से सफर करने वाले मुसाफिरों की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिला है. साल 2019-20 में 11 करोड़ यात्री थर्ड एसी से सफर करते थे. यानी कुल यात्रियों का 1.4% ही. वहीं साल 2024-25 की बात की जाए तो इसमें 19% का इजाफा हुआ है. और यात्रियों की संख्या 26 करोड़ हो गई है. साल 2019-20 में जहां थर्ड एसी से भारतीय रेलवे ने 12,370 करोड रुपये का राजस्व कमाया था. तो वहीं साल 2024 25 में यह बढ़कर 30,089 करोड़ हो गया है. यह आंकड़े वाकई चौंकाने वाले हैं. बता दें कोरोना महामारी से पहले यानी 2019-20 तक रेलवे के राजस्व में सबसे ज्यादा योगदान स्लीपर क्लास के यात्रियों में हुआ करता था. लेकिन इस बार थर्ड एसी के यात्रियों का राजस्व सबसे ज्यादा है.

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