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रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट के 11,127 पदों पर वैकेंसी, जल्द ही शुरू होंगे आवेदन

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे में शामिल होने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए एक शानदार मौका सामने आया है। रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (आरआरबी) ने असिस्टेंट लोको पायलट (एएलपी) के कुल 11,127 पदों पर भर्ती के लिए एक शॉर्ट ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी किया है। आरआरबी की ओर से जारी पदों के लिए ऑनलाइन मोड में आवेदन प्रक्रिया 15 मई से शुरू होगी और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 14 जून निर्धारित की गई है। ऐसे में जो योग्य और इच्छुक उम्मीदवार असिस्टेंट लोको पायलट के पदों के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरने की सोच रहे हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट पर लिंक एक्टिव होने के बाद तय लास्ट डेट तक अपना रजिस्ट्रेशन फॉर्म जमा कर सकेंगे। अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 18 साल और अधिकतम आयु 30 साल निर्धारित की गई है, जिसकी गणना 1 जुलाई के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित वर्ग से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त संस्थान या यूनिवर्सिटी से संबंधित पद अनुसार निर्धारित डिग्री होनी चाहिए। आरआरबी की ओर से असिस्टेंट लोको पायलट पद के लिए डिटेल्ड नोटिफिकेशन जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जाएगा, जिसमें आवेदनकर्ताओं की योग्यता, चयन प्रक्रिया, आवेदन शुल्क के साथ अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध होंगी। ऑनलाइन आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले आरआरबी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर जाने के बाद जारी पद से संबंधित आवेदन लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद रजिस्ट्रेशन कर लॉगिन करें। फिर फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियों को दर्ज करें। मांगे गए सभी डॉक्यूमेंट्स, फोटो और सिग्नेचर को सही साइज और फॉन्ट में अपलोड करें। इसके बाद निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान करें। फिर फॉर्म को चेक कर सबमिट कर दें। लास्ट में एप्लीकेशन फॉर्म को डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट भविष्य के लिए निकाल लें।

रेलवे में 22,195 नौकरियाँ: ग्रुप D फॉर्म भरने की अंतिम तिथि आज, 10वीं पास न चूकें मौका

नई दिल्ली भारतीय रेलवे में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे लाखों युवाओं के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की ग्रुप डी (लेवल-1) भर्ती 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि आज, 9 मार्च 2026 है। 22,195 रिक्त पदों पर निकली इस विशाल भर्ती के लिए आवेदन विंडो आज रात 11:59 बजे बंद हो जाएगी। बोर्ड की ओर से अब समय सीमा आगे बढ़ने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए जो अभ्यर्थी अभी तक फॉर्म नहीं भर पाए हैं, उनके पास अब केवल कुछ ही घंटों का समय बचा है। यह भर्ती भारतीय रेलवे के विभिन्न जोन्स और विभागों में ‘लेवल-1’ के पदों को भरने के लिए आयोजित की जा रही है। इसमें ट्रैक मेंटेनर ग्रेड-IV, पॉइंट्समैन-बी, असिस्टेंट (सिग्नल और टेलीकॉम), असिस्टेंट (लोको शेड) और असिस्टेंट (कैरिज और वैगन) जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी और सहायक पद शामिल हैं। योग्यता और आयु सीमा रेलवे ने इस भर्ती के लिए पात्रता मापदंडों को सरल रखा है ताकि अधिक से अधिक युवा इसमें भाग ले सकें। उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास (मैट्रिक) होना अनिवार्य है। इसके अलावा, कुछ विशेष तकनीकी पदों के लिए आईटीआई (ITI) या नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट (NAC) रखने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन के पात्र हैं। आयु सीमा की बात करें तो 1 जनवरी 2026 तक उम्मीदवार की उम्र 18 से 33 वर्ष के बीच होनी चाहिए। सरकारी नियमों के अनुसार, आरक्षित श्रेणियों जैसे ओबीसी (OBC) को 3 साल और एससी/एसटी (SC/ST) वर्ग को 5 साल की अधिकतम आयु सीमा में छूट दी गई है। आवेदन शुल्क और रिफंड प्रक्रिया रेलवे भर्ती बोर्ड ने आवेदन शुल्क के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था अपनाई है। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस (EWS) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शुल्क 500 रुपये निर्धारित है। हालांकि, कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) परीक्षा में शामिल होने के बाद इनमें से 400 रुपये उम्मीदवार के बैंक खाते में वापस कर दिए जाएंगे। वहीं, एससी/एसटी, महिला, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए शुल्क 250 रुपये है, जो परीक्षा में बैठने के बाद पूरा रिफंड कर दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया के चरण ग्रुप डी की इस भर्ती में अंतिम चयन के लिए उम्मीदवारों को चार प्रमुख चरणों को सफलतापूर्वक पार करना होगा: कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT): यह प्रारंभिक लिखित परीक्षा होगी जिसमें सामान्य विज्ञान, गणित, रीजनिंग और सामान्य ज्ञान के सवाल होंगे। शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET): लिखित परीक्षा पास करने वालों को शारीरिक फिटनेस टेस्ट देना होगा, जिसमें वजन उठाकर दौड़ना और एक निश्चित समय में दौड़ पूरी करना शामिल है। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन(DV): सफल उम्मीदवारों के सभी ओरिजनल प्रमाणपत्रों की कड़ाई से जांच की जाएगी। मेडिकल परीक्षण: अंत में, रेलवे के कड़े स्वास्थ्य मानकों के आधार पर उम्मीदवार का मेडिकल टेस्ट होगा। अंतिम समय के लिए जरूरी सलाह इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकते हैं। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि अंतिम घंटों में वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक होने के कारण सर्वर धीमा हो सकता है, जिससे भुगतान या फॉर्म सबमिशन में दिक्कत आ सकती है। इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे रात होने का इंतजारर किए बिना अभी अपना आवेदन सुनिश्चित करें।  

ग्रुप-डी के 22,195 पदों पर आवेदन की तिथि बढ़ाई, अब 9 मार्च तक करें ऑनलाइन आवेदन

नईदिल्ली रेलवे में नौकरी करने के लिए तैयारी करने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर हैं। रेलवे भर्ती बोर्ड ने ग्रुप डी के पदों पर आवेदन करने की अंतिम तिथि को बढ़ा दिया है। अब युवा आफिशियल वेबसाइट पर जाकर नौ मार्च तक आवेदन प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। ग्रुप-डी के पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास आखिरी मौका है। ऐसे में सभी उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे तय समय से पहले आवेद प्रक्रिया को अवश्य पूरा कर लें।  यह कर सकते हैं इस भर्ती के लिए आवेदनः ग्रुप-डी के पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों ने भारत के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से कक्षा 10वीं उत्तीर्ण की हो। आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष व अधिकतम आयु 33 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही उम्मीदवारों की आयु की गणना 01 जनवरी, 2026 के आधार पर की जाएगी। आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को कैटेगरी के आधार पर आयु-सीमा में छूट भी प्रदान की जाएगी। रजिस्ट्रेशन फीसः जो उम्मीदवार इन पदों पर आवेदन करना चाहते हैं। उन्हें रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान करना अनिवार्य है। आवेदन करने के लिए जनरल, ओबीसी एवं ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में 500 रुपये और एससी/एसटी उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में 250 रुपये का भुगतान करना होगा। ऐसे करें खुद अप्लाईः आरआरबी की ओर से ग्रुप-डी के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि को एक्सटेंड कर दिया गया है। ऐसे में उम्मीदवार यहां बताए गए स्टेप्स की मदद से ग्रुप-डी के लिए अप्लाई कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर विजिट करें। अब वेबसाइट के होमपेज पर न्यू रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद अपना नाम, पिता का नाम, माता का नाम, मोबाइन नंबर आदि को दर्ज करके रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरा करें। इसके बाद जरूरी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी को अपलोड करके रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान करें। फॉर्म भरने के बाद दर्ज की गई सभी जानकारी को ध्यान से दर्ज कर लें।

ट्रेन रफ्तार में होगा इजाफा, ‘डायरेक्ट ड्राइव’ सिस्टम से 33.86 किमी. पर बढ़ेगी गति

भोपाल  पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल ने रेलवे सिग्नलिंग में बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। कुरवाई केथोरा-मंडी बामोरा-कालहार खंड के कुल 33.86 किमी. डबल लाइन पर ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली को कमीशन किया है। इस सेक्शन में ट्रेन के प्रवेश करते ही सुरक्षित सिग्नल रिसीव और फॉरवर्ड होंगे। इसी के साथ जैसे-जैसे ट्रेन आगे जाएगी, वैसे सिग्नल क्लीयर होते जाएंगे। कुल मिलाकर एआइ सिस्टम जैसी इस तकनीक में मानवीय त्रुटि की आशंका काफी कम होगी। खास बात यह है कि यहां पहली बार डायरेक्ट ड्राइव मॉड्यूल आधारित तकनीक उपयोग की है। इस प्रणाली में ब्लॉक सेक्शन के ऑटो सिग्नलों को सीधे वे साइडकैबिनेट के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। इससे पहले की पारंपरिक व्यवस्था पर निर्भरता कम होगी। इससे सिस्टम तेज, भरोसेमंद और रखरखाव में आसान बनेगा। दो नए ऑटो हट बनेंगे भोपाल मंडल के कुरवाई- कैथोरा मंडी बामोरा के बीच इस सिस्टम के लगने के बाद नए ऑटो हट बनाए जाएंगे। ऑटो हट में मॉनीटरिंग सिस्टम होगा, जो पूरा डेटा ट्रांसमिशन स्पीड और साइबर अटैक से सुरक्षा दिलाएगा। भोपाल-बीना-इटारसी बनेगा फ्रेट कॉरिडोर भोपाल रेल मंडल के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल इटारसी-भोपाल-बीना सेक्शन पर चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। 237 किमी लंबी इस परियोजना पर 4,329 करोड़ खर्च होंगे, जिससे यात्री और मालगाडिय़ों के संचालन में सुधार होगा। यह नया रेल कॉरिडोर इटारसी से शुरू होकर भोपाल होते हुए बीना तक जाएगा। यह मार्ग नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, भोपाल, विदिशा और सागर जिलों से होकर गुजरेगा। वर्तमान में यह सेक्शन अत्यधिक व्यस्त है, जहां यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी मात्रा में मालगाडिय़ों का संचालन होता है। चौथी लाइन बनने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा और ट्रेनें 220 किमी. की स्पीड से दौड़ सकेंगी। भोपाल मंडल में डायरेक्ट ड्राइव सिस्टम को लागू किया है। बाकी सेक्शनों में भी इस तकनीक को इंस्टाल किया जाएगा। सौरभ कटारिया, सीनियर डीसीएम

मध्य प्रदेश की महू-खंडवा रेललाइन से साउथ और महाराष्ट्र का कनेक्शन मजबूत, पटरियों की बिछाई जल्द शुरू

महू   मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के डॉ. आंबेडकर नगर (महू) से खंडवा तक गेज कन्वर्जन में तेजी आने वाली है। महू से बलवाड़ा तक के महत्वपूर्ण घाट सेक्शन के लिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा रेलवे को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। डॉ. आंबेडकर नगर से बलवाड़ा के बीच लगभग 454 हेक्टेयर वन भूमि पर रेलवे द्वारा निर्माण कार्य किया जाना है। वन विभाग से भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया चल रही थी। वन विभाग ने भेजा अंतिम प्रस्ताव रेलवे द्वारा वन विभाग की सभी शर्तों के पालन की सहमति के बाद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-प्रबंधन) द्वारा मंत्रालय को सैद्धांतिक स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजा गया था। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि मंत्रालय से सैद्धांतिक अनुमति प्राप्त होने के बाद रेलवे द्वारा संबंधित क्षेत्र में कार्य शुरू करने के लिए वन विभाग से अंतिम अनुमति का प्रस्ताव भेजा है। वन विभाग से स्वीकृति प्राप्त होते ही निर्माण प्रारंभकर दिया जाएगा। महू-खंडवा गेज कन्वर्जन इंदौर के लिए खास है। इस लाइन से शहर का जुड़ाव महाराष्ट्र और साउथ से होगा। घाट सेक्शन के लगभग 454 हेक्टेयर वन भूमि के अधिग्रहण के लिए रेलवे निर्माण विभाग द्वारा पूर्व में 100.08 करोड़ वन विभाग को जमा कराए गए हैं। बीते दिनों, महू स्टेशन के विस्तार और महू-खंडवा नई रेल लाइन परियोजना के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। लंबे समय से यहां बने मकानों के कारण काम अटका हुआ था। कल भी पक्के निर्माणों पर मशीनें चलीं तो कई परिवारों ने सामान समेटने की मशक्कत की। प्रशासन ने पहले ही नोटिस जारी कर दिए थे, इसलिए अधिकतर लोगों ने खुद ही घर खाली कर दिए थे। बचे हुए हिस्सों को भी पूरी तरह हटाकर क्षेत्र समतल कर दिया गया।

रेल प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर वन कटान, मध्य प्रदेश में केंद्र से अंतिम स्वीकृति की मांग

इंदौर मध्यप्रदेश में महत्वाकांक्षी महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना के तहत घने जंगलों में निर्माण शुरू करने के लिए रेलवे ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति मांगी है। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद दो जिलों में फैले घने जंगलों में बड़ी रेल लाइन के निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा। दरअसल, भारतीय रेलवे ने मध्य प्रदेश में महू-खंडवा लाइन का गेज बदलने का काम शुरू करने के लिए केंद्र से आखिरी मंजूरी मांगी है। इस काम में 1.24 लाख से ज्यादा पेड़ों को काटा जाएगा। एक बार केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी मिल जाने के बाद, दो जिलों के जंगलों में ब्रॉड गेज लाइन के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि 156 km की ब्रॉड-गेज लाइन, आज़ादी से पहले रियासतों के समय बिछाए गए 118 km के नैरो-गेज ट्रैक की जगह लेगी.गेज बदलने का काम चल रहा है और अगले दो साल में पूरा होने की उम्मीद है.एक बयान में वेस्टर्न रेलवे के रतलाम डिवीजन के PRO मुकेश कुमार ने कहा, लगभग 90 km के महू (डॉ. अंबेडकर नगर)-ओंकारेश्वर रोड सेक्शन के बाकी गेज बदलने के काम के लिए केंद्रीय मंत्रालय से आखिरी मंज़ूरी की जरूरत है.उन्होंने कहा, “महू और मुख्त्यारा-बलवाड़ा के बीच करीब 454 हेक्टेयर जंगल की जमीन पर कंस्ट्रक्शन होगा. जमीन खरीदने के लिए, रेलवे ने पहले ही फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में 100.08 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं और मिनिस्ट्री से इन-प्रिंसिपल मंजूरी ले ली है.” दो साल में पूरा होगा काम अधिकारियों ने बताया कि 156 किमी की ब्रॉड-गेज लाइन, आजादी से पहले रियासतों के समय बिछाए गए 118 किमी के नैरो-गेज ट्रैक की जगह लेगी। गेज बदलने का काम चल रहा है और अगले दो साल में पूरा होने की उम्मीद है। वन विभाग को मिले 100.08 करोड़ एक बयान में वेस्टर्न रेलवे के रतलाम डिवीजन के पीआरओ मुकेश कुमार ने कहा कि लगभग 90 किमी के महू (डॉ. अंबेडकर नगर)-ओंकारेश्वर रोड सेक्शन के बाकी गेज बदलने के काम के लिए केंद्रीय मंत्रालय से आखिरी मंजूरी की जरूरत है। महू और मुख्त्यारा-बलवाड़ा के बीच 454 हेक्टेयर जंगल की जमीन पर कंस्ट्रक्शन होगा। जमीन खरीदने के लिए, रेलवे ने पहले ही वन विभाग में 100.08 करोड़ रुपए जमा कर दिए हैं और मिनिस्ट्री से इन-प्रिंसिपल मंजूरी ले ली है। मुआवजे के तौर पर लगाएंगे डबल पौधे रेलवे अधिकारियों ने कहा कि महू-खंडवा गेज कन्वर्जन से उत्तरी और दक्षिणी भारत के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे पैसेंजर सर्विस और माल ढुलाई दोनों में सुधार होगा। वहीं वन विभाग के एक अधिकारी ने अनुमान लगाया कि इंदौर और पड़ोसी खरगोन जिलों में बाकी कंस्ट्रक्शन के लिए 1.24 लाख पेड़ काटने पड़ सकते हैं। डिपार्टमेंट ने पर्यावरण पर असर कम करने और बड़ी संख्या में पेड़ों को बचाने के लिए एक डिटेल्ड प्लान तैयार किया है। एनवायरनमेंटल नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावित एरिया से दोगुने एरिया में मुआवजे के तौर पर पेड़ लगाए जाएंगे।

1.5 लाख पदों पर रेलवे में भर्ती का मौका, युवाओं के लिए जानें पूरी डिटेल

 नई दिल्ली भारतीय रेल में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बड़ा ऐलान किया है. राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों में भारतीय रेलवे की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है. उन्होंने यह भी बताया कि सभी खर्च पूरे करने के बाद भी अब रेलवे के पास साल के अंत में छोटा राजस्व अधिशेष बच भी रहा है. ये न केवल आर्थिक मजबूती लेकर आया है बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके भी लेकर आया है.  राशियों का दिया जायजा  रेल मंत्री ने बताया कि साल 2024-2025 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियों 99.22 फीसदी रहा. इसका साफ मलतब यही है कि रेलवे अपने खर्चों को अच्छी तरह से बैलेंस कर रहा है. इस बीच रेलवे की ग्रॉस ट्रैफिक रेवेन्यू 2 लाख 65 हजार करोड़ से ज्यादा रही, जिसमें से 2,660 करोड़ रुपये अधिशेष रहे.  पिछले 10 सालों में दी इतनी नौकरी  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पिछले 10 सालों में यानी 2024 से 2024 के बीच रेलवे में करीब 5 लाख से अधिक भर्ती की गई हैं. इनमें ट्रैक मेंटेनेंस, लोको पायलट, टेक्नीशियन, क्लर्क, इंजीनियर और ग्रुप-डी समेत कई पद शामिल हैं.  इस साल 1.5 लाख नौकरियों पर फोकस  उन्होंने आगे बताया कि तीसरे कार्यकाल में रेलवे में 1.5 लाख नौकरियां देने की प्रोसेस जारी है. मंत्री के मुताबिक, कई भर्तियों की परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. हालांकि, कई पदों के लिए जल्द ही नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा.  इस तरह से बढ़ेगा रोजगार  पूर्वोत्तर राज्यों में रेलवे बजट को बढ़ाकर 11,486 करोड़ रुपये कर दिया गया है. इससे नई लाइनें, स्टेशन और परियोजनाओं की शुरुआत होगी. इनसे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा. पंजाब, केरल, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में भी नई रेल परियोजनाओं से आने वाले समय में नौकरियों के मौके बढ़ने की उम्मीद है.      

रेल यात्रियों को राहत: RAC टिकट पर रिफंड की संभावना, जानें कैसे मिलेगा फायदा

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे में सफर करने वाले लाखों यात्रियों को आने वाले समय में एक बड़ी राहत मिल सकती है। संसद की एक शक्तिशाली समिति ने रेल मंत्रालय को सुझाव दिया है कि आरएसी (RAC) टिकट पर यात्रा करने वाले वैसे यात्रियों को किराये का कुछ हिस्सा वापस करना चाहिए जिन्हें पूरा किराया देने के बावजूद ट्रेन में पूरी बर्थ नहीं मिल पाती है। संसद में 4 फरवरी को पेश की गई लोक लेखा समिति (PAC) की रिपोर्ट ‘भारतीय रेलवे में ट्रेनों के संचालन की समयबद्धता और यात्रा समय’ में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है। वर्तमान नियमों के अनुसार, आरएसी श्रेणी के यात्रियों को कंफर्म टिकट के बराबर ही पूरा किराया देना पड़ता है, लेकिन यात्रा के दौरान उन्हें केवल बैठने के लिए आधी सीट (बर्थ) ही मिलती है। समिति ने इस व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि बिना बर्थ सुविधा के पूरा किराया वसूलना न्यायोचित नहीं है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा, “समिति का मानना है कि चार्ट तैयार होने के बाद भी यदि यात्री आरएसी श्रेणी में ही रहता है और उसे पूरी बर्थ नहीं मिलती है तो उससे पूरा किराया लेना गलत है। मंत्रालय को एक ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे ऐसे यात्रियों को किराये का आंशिक हिस्सा वापस मिल सके।” फिलहाल, आईआरसीटीसी (IRCTC) के नियमों के मुताबिक यदि आरएसी ई-टिकट को ट्रेन छूटने के निर्धारित समय से 30 मिनट पहले तक कैंसिल नहीं किया जाता या ऑनलाइन टीडीआर (TDR) फाइल नहीं की जाती। ऐसे में कोई रिफंड नहीं मिलता है। समिति का तर्क है कि जब यात्री आधी सीट पर सफर करने को मजबूर है तो उसे सर्विस भी आधी ही मिल रही है, इसलिए भुगतान भी उसी अनुपात में होना चाहिए। यह सिफारिश अगर लागू होती है तो यह रेलवे के दशकों पुराने किराये ढांचे में एक बड़ा बदलाव होगा। इन 13 ट्रेनों में RAC पर पाबंदी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि रेलवे ने इस साल की शुरुआत से आरएसी नियमों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। अब वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी 13 आधुनिक ट्रेनों में आरएसी टिकट धारकों को बोर्डिंग यानी ट्रेन में चढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इन ट्रेनों में केवल कंफर्म टिकट वाले यात्री ही सफर कर सकते हैं। गुवाहाटी (कामाख्या)-रोहतक अमृत भारत एक्सप्रेस डिब्रूगढ़-लखनऊ (गोमती नगर) अमृत भारत एक्सप्रेस न्यू जलपाईगुड़ी-नागरकोइल अमृत भारत एक्सप्रेस न्यू जलपाईगुड़ी-तिरुचिरापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस अलीपुरद्वार – एसएमवीटी बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस अलीपुरद्वार-मुंबई (पनवेल) अमृत भारत एक्सप्रेस कोलकाता (संतरागाछी) – ताम्बरम अमृत भारत एक्सप्रेस कोलकाता (हावड़ा)-आनंद विहार टर्मिनल अमृत भारत एक्सप्रेस कोलकाता (सियालदह)-बनारस अमृत भारत एक्सप्रेस तिरुवनंतपुरम सेंट्रल-तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस तिरुवनंतपुरम उत्तर-चार्लापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस नागरकोइल जंक्शन-मंगलुरु जंक्शन अमृत भारत एक्सप्रेस संसदीय समिति की सिफारिश के बाद अब गेंद रेल मंत्रालय के पाले में है। मंत्रालय को अब यह तय करना है कि वह इस पार्शियल रिफंड की गणना कैसे करेगा और इसे यात्रियों के खातों में डिजिटल रूप से वापस भेजने के लिए अपने सॉफ्टवेयर (CRIS/IRCTC) में क्या बदलाव करेगा।

भोपाल मंडल का बड़ा कदम: 9 महीनों में ट्रैक कायाकल्प से सुरक्षित सफर की तैयारी

भोपाल  पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल में अधोसंरचना विकास के साथ-साथ अनुरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देते हुए रेलवे ट्रैक नवीनीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। पंकज त्यागी के मार्गदर्शन में इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से ट्रैक अनुरक्षण से जुड़े संरक्षा-आधारित कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। भोपाल मंडल में कंप्लीट ट्रैक रिन्यूअल (सीटीआर), थ्रू रेल रिन्यूअल (टीआरआर), थ्रू स्लीपर रिन्यूअल (टीएसआर), थ्रू टर्नआउट रिन्यूअल (टीटीआर) तथा डीप स्क्रीनिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य आवश्यक ट्रैफिक ब्लॉक लेकर उच्च संरक्षा मानकों के अनुरूप निष्पादित किए जा रहे हैं। नौ माह में हुआ व्यापक ट्रैक नवीनीकरण वित्तीय वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर तक नौ माह की अवधि में 100.741 ट्रैक किलोमीटर में सीटीआर, 121.23 ट्रैक किलोमीटर में टीआरआर, 80.245 ट्रैक किलोमीटर में टीएसआर तथा 80.250 समतुल्य यूनिट्स में टीटीआर का कार्य पूर्ण किया गया है। इसके अतिरिक्त 55 टर्नआउट्स एवं 168.391 ट्रैक किलोमीटर प्लेन ट्रैक की डीप स्क्रीनिंग भी की गई।  

भोपाल स्टेशन पर खुला MP का पहला और देश का दूसरा होटल, सिर्फ 200 रुपए में मिलेगी AC रूम की सुविधा

भोपाल  रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए एक नई सुविधा शुरू हो गई है। अब यहां यात्री कम दाम में आराम से ठहर सकेंगे। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर प्रदेश का पहला पॉड होटल खुल गया है। इस होटल में यात्रियों को 200 रुपए प्रति घंटे से ठहरने की सुविधा मिलेगी। यह होटल जापान से प्रेरित है और इसमें छोटे-छोटे कैप्सूल जैसे कमरे बने हैं। IRCTC की वेबसाइट और स्टेशन पर ही इसकी बुकिंग की जा सकती है। देश का दूसरा सबसे बड़ा होटल यह पॉड होटल उन यात्रियों के लिए बहुत अच्छा है जो कम पैसे में आरामदायक जगह ढूंढ रहे हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे भोपाल स्टेशन पर यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा। मुंबई सेंट्रल के बाद यह देश का दूसरा सबसे बड़ा पॉड होटल है। मुंबई में यह होटल 2021 में शुरू हुआ था। पॉड होटल क्या होता है? पॉड होटल को कैप्सूल होटल भी कहते हैं। यह जापान से आया ट्रेंड है। इसमें छोटे-छोटे कैप्सूल जैसे कमरे होते हैं। इन कमरों में यात्रियों को ठहरने की सुविधा मिलती है। कम जगह में भी यहां अच्छी सुविधाएं दी जाती हैं। भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। इसे देखते हुए यह सुविधा शुरू की गई है। इसकी योजना 20 अक्टूबर 2019 को बनी थी। लगभग 6 साल बाद यह यात्रियों के लिए उपलब्ध हो रहा है। बुकिंग के लिए यात्री के पास पीएनआर नंबर होना जरूरी है। कमरों का किराया हुआ तय रेलवे ने उद्घाटन से पहले होटल को पूरी तरह से तैयार कर लिया है। कमरों का किराया भी तय कर दिया गया है। भोपाल रेलवे स्टेशन पर दो तरह के पॉड रूम हैं: सिंगल और फैमिली पॉड। पहले खबर आई थी कि इसका उद्घाटन अप्रैल में होगा। उस समय रेलवे के जीएम शोभना बंदोपाध्याय और डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी भी आने वाले थे। क्या क्या मिलेंगी सुविधाएं रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पॉड होटल में यात्रियों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। पूरे होटम में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और सुरक्षाकर्मी भी तैनात रहेंगे। गर्मी से बचने के लिए AC लगा है। इंटरनेट के लिए हाई-स्पीड वाई-फाई भी है। पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय हैं। सर्दियों में गर्म पानी के लिए गीजर भी लगा है। सामान रखने के लिए लॉकर और लगेज रूम भी हैं। मोबाइल और दूसरे डिवाइस चार्ज करने के लिए चार्जिंग पॉइंट भी दिए गए हैं। किसी भी खतरे से निपटने के लिए होटल में फायर फाइटिंग सिस्टम भी है। मनोरंजन के लिए हर पॉड में टीवी भी लगा है। तैयार होने के लिए मेकअप मिरर भी है।

वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के मार्गदर्शन में भोपाल से बीना के बीच विशेष चैकिंग अभियान चलाया

भोपाल वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के मार्गदर्शन में भोपाल से बीना के बीच विशेष चैकिंग अभियान चलाया गया। यह अभियान यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और यात्रा के दौरान स्वच्छता एवं टिकटिंग प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। इस विशेष चैकिंग अभियान का नेतृत्व मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री पंकज कुमार दुबे द्वारा किया गया। अभियान के तहत प्लेटफॉर्म और गाड़ियों में सघन टिकट जांच की गई, साथ ही बीना स्टेशन पर कैटरिंग स्टॉल्स की गुणवत्ता और स्वच्छता की भी गहनता से जांच की गई। इस कार्रवाई में कुल 88 यात्रियों से 38,440 रुपये का जुर्माना वसूला गया। इनमें 39 यात्री बिना टिकट यात्रा कर रहे थे, जबकि 42 यात्री अनियमित पाए गए। इसके अतिरिक्त 7 यात्रियों को गंदगी फैलाने के आरोप में 1,300 रुपये का चालान भी किया गया। जांच के दौरान खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, जनता खाने की उपलब्धता और अन्य यात्री सुविधाओं की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा यात्रियों को एटीवीएम (ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन) से क्यूआर कोड स्कैन कर डिजिटल माध्यम से टिकट लेने के लिए जागरूक किया गया, जिससे टिकटिंग प्रक्रिया और सरल और पारदर्शी हो सके। इस विशेष अभियान में मुख्य टिकट निरीक्षक मुख्यालय श्री अरुण कुमार श्रीवास्तव, मुख्य टिकट निरीक्षक बीना श्री आर. के. गोस्वामी, स्टेशन प्रबंधक (वाणिज्य) श्री आशीष अवस्थी, मंडल वाणिज्य निरीक्षक श्री मधुकर निगम, मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक श्री सुशील पांडेय सहित टिकट चैकिंग स्टाफ, आरपीएफ एवं सीएचआई की टीम शामिल रही। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि “रेलवे यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। बिना टिकट यात्रा करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करके न केवल राजस्व की हानि को रोका जा रहा है, बल्कि ईमानदार यात्रियों को भी एक सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल प्रदान किया जा रहा है।”

इटारसी-बुदनी-खातेगांव होकर बन रही नई रेल लाइन, इंदौर -देवास रेल लाइन में मांगलिया गांव के पास जुड़ेगी, रास्ते में भोपाल नहीं पड़ेगा

जबलपुर जबलपुर से इंदौर के बीच नई रेल लाइन गाडवारा-बुदनी होकर नहीं इटारसी-बुदनी-खातेगांव होकर बन रही। ये लाइन इंदौर-देवास रेल लाइन में मांगलिया गांव के पास जुड़ेगी। इस रास्ते में भोपाल नहीं पड़ेगा। इस नई लाइन के बनने के बाद जबलपुर से इंदौर के सफर का समय दो घंटे तक कम हो जाएगा। जबलपुर-इंदौर (गाडरवारा एवं बुदनी होकर) नई रेल लाइन की प्रगति पर नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी द्वारा पूछे गए सवाल पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में ये जानकारी दी। रेल मंत्री ने बताया कि बुदनी से इंदौर के बीच नई रेल लाइन निर्माण कार्य प्रक्रिया में है। इस परियोजना के गाडरवारा-बुदनी रेलखंड के दोनों अंतिम स्टेशन पूर्व से इटारसी होकर रेलमार्ग से जुड़े हुए हैं। आठ साल पुरानी परियोजना दोनों के मध्य नवीन रेल लाइन से उनकी दूरी में ज्यादा अंतर नहीं आ रहा है। इसलिए गाडरवारा-बुदनी के मध्य नई रेल लाइन बिछाना तर्कसंगत नहीं है। आठ वर्ष पुरानी परियोजना- जबलपुर(गाडरवारा)-इंदौर (मांगलियागांव) नई रेल लाइन की घोषणा वर्ष 2016-17 के बजट में हुई थी। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में था। वर्ष 2021-22 के बजट में एक हजार रुपये के आवंटन से परियोजना की बंद फाइल फिर खुल गई। उसके बाद के बजट में भी परियोजना को आवंटन जारी हुए। गत दो बजट में आवंटन बढ़ने के बाद परियोजना के इंदौर-बुदनी रेलखंड में रेल लाइन निर्माण प्रक्रिया ने गति पकड़ी। इंदौर-बुदनी का कार्य जारी लोकसभा में रेल मंत्री ने बताया कि इंदौर (मांगलियागांव) और बुदनी के बीच (205 किलोमीटर) नई रेल लाइन का कार्य 3261.82 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है। मार्च-2024 तक 948.37 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। वर्ष 2024-25 के लिए इस परियोजना को 1107.25 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। रेल लाइन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की जा रही है। चार किमी का अंतर इटारसी होकर गाडरवारा से बुदनी रेल मार्ग से जुड़ा है, जिसकी दूरी 141 किमी है। इंदौर नई रेल लाइन परियोजना में प्रस्तावित गाडवारा-बुदनी रेलखंड की दूरी 137 किमी है। मात्र चार किलोमीटर की दूरी कम करने के लिए अलग से लाइन बिछाना रेलवे को अब खर्चीला लग रहा है।

रेलवे के इंजीनियरों का कमाल: खराब मदरबोर्ड की मरम्मत कर बचाए लाखों रुपये

रेलवे के इंजीनियरों का कमाल: खराब मदरबोर्ड की मरम्मत कर बचाए लाखों रुपये आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम: रेलवे कर्मचारियों ने किया इन-हाउस समाधान भोपाल मंडल रेल प्रबंधक श्री देवाशीष त्रिपाठी के कुशल मार्गदर्शन में पश्चिम मध्य रेलवे, भोपाल मंडल के अंतर्गत इलेक्ट्रिक लोको शेड, इटारसी ने एक अभिनव पहल करते हुए रेलवे के संसाधनों का न केवल कुशलतापूर्वक उपयोग किया, बल्कि उल्लेखनीय आर्थिक बचत भी सुनिश्चित की है। वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता(कर्षण चल स्टॉक) इटारसी शेड  श्री नीरज कुमार शर्मा के अनुसार इलेक्ट्रिक लोको शेड, इटारसी में वर्तमान में 269 थ्री-फेज इलेक्ट्रिक इंजनों का रखरखाव किया जाता है, और प्रत्येक लोकोमोटिव में लगा स्पीडोमीटर ट्रेन की वर्तमान गति दर्शाकर चालक दल को सुरक्षित परिचालन में मदद करता है। वर्ष 2024-25 के दौरान, गलत तरीके से मेमोरी कार्ड लगाने के कारण कुल 65 स्पीडोमीटर (55 AAL मेक एवं 10 Laxven मेक) के मदरबोर्ड के पिन क्षतिग्रस्त हो गए थे। इन कार्डों की बाजार से नई खरीद के बजाय, शेड के अनुभवी तकनीकी दल ने इन-हाउस मरम्मत का सराहनीय निर्णय लिया। इस महत्वपूर्ण पहल का नेतृत्व इलेक्ट्रिक लोको शेड इटारसी के E-5 सेक्शन के एसएसई श्री दीपक यादव, जेई श्री अनुराग बढ़खने, टेक्निशियन-I श्री नितिन पटेल एवं टेक्निशियन-II श्री धर्मेंद्र चौरे ने किया। शेड अधिकारियों के निर्देशन में इस टीम ने अपने तकनीकी ज्ञान और उपलब्ध संसाधनों का श्रेष्ठ उपयोग करते हुए क्षतिग्रस्त मदरबोर्ड की सफल मरम्मत की। इस अभिनव प्रयास से भारतीय रेलवे को ₹13,22,675/- की उल्लेखनीय बचत हुई है। बाजार में AAL मेक के एक मदरबोर्ड की कीमत ₹18,685 और Laxven मेक की कीमत ₹29,500 है। टीम ने अपने कुशल प्रबंधन, तकनीकी दक्षता और संसाधनों के समुचित उपयोग से रेलवे की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने कहा कि भोपाल मंडल की यह पहल न सिर्फ तकनीकी नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि रेलवे कर्मचारियों की प्रतिबद्धता, लगन और कर्तव्यनिष्ठा का परिचायक भी है। पश्चिम मध्य रेलवे भोपाल मंडल, इलेक्ट्रिक लोको शेड इटारसी के इस उल्लेखनीय प्रयास की सराहना करता है।  

अमृत स्टेशन योजना के तहत विदिशा एवं साँची रेलवे स्टेशनों का होगा कायाकल्प, बनेगें देश के आधुनिक स्टेशन

 विदिशा / साँची विदिशा एवं साँची रेलवे स्टेशनों का अधिकारियों ने निरीक्षण किया। ये दोनों स्टेशन “अमृत स्टेशन योजना” के तहत पुनर्विकास के अंतर्गत हैं, और इस निरीक्षण का उद्देश्य निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लेना था। विदिशा रेलवे स्टेशन का निरीक्षण – यात्री सुविधाओं एवं पुनर्विकास कार्यों की समीक्षा निरीक्षण के दौरान डीआरएम एवं पीसीई ने विदिशा रेलवे स्टेशन पर चल रहे पुनर्विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने प्लेटफार्म विस्तार, यात्री प्रतीक्षालय, फुट ओवर ब्रिज, लिफ्ट एवं एस्केलेटर की प्रगति का मूल्यांकन किया। इसके अलावा, स्टेशन पर यात्री सूचना प्रणाली, पेयजल सुविधाओं एवं स्वच्छता व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया गया। डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी ने बताया कि अमृत स्टेशन योजना के तहत विदिशा स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किया जाए और गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए। साँची रेलवे स्टेशन का निरीक्षण – ऐतिहासिक शहर में उन्नत रेलवे सुविधाओं की दिशा में कदम इसके बाद निरीक्षण दल साँची रेलवे स्टेशन पहुंचा, जहां स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों का गहन निरीक्षण किया गया। साँची, जो अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, यहां स्टेशन को विश्व स्तरीय सुविधाओं से युक्त किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्माणाधीन यात्री हॉल, स्वच्छता सुविधाएं, टिकट काउंटर, पार्किंग एरिया और स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। प्रमुख मुख्य अभियंता अशुतोष ने कहा कि साँची रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने के साथ-साथ इसकी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखते हुए सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कार्यों में पर्यावरणीय पहलुओं एवं यात्रियों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। जल्द पूरा होगा काम विदिशा एवं साँची स्टेशन के पुनर्विकास कार्य प्रगति पर हैं और निर्धारित समयसीमा में इन्हें पूरा किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि सभी कार्यों को उच्च गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के अनुसार संपन्न किया जाए ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक रेल यात्रा का अनुभव मिल सके।

कोरोना के बाद AC कोचो का बड़ा चलन, रेलवे ने जारी किया आकड़ा

नई दिल्ली भारतीय रेलवे के जरिए रोजाना करोड़ों की संख्या में यात्री सफर करते हैं. यात्रियों के लिए रेलवे हजारों की संख्या में ट्रेन चलाता है. भारतीय रेलवे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल व्यवस्था है. सामान्य तौर पर बात की जाए तो अगर कोई कहीं जाना चाहता है और दूर का सफर तय करना चाहता है. तो ऐसे में ज्यादातर लोगों की पहली पसंद ट्रेन होती है. बीते कुछ सालों में ट्रेन में सफर करने वालों की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिला है. लेकिन जब पूरी दुनिया की तरह भारत भी कोविड-19 की चपेट में था. तो महामारी के बाद जब चीजें सामान्य हुईं. तो ट्रेन से जाने वाले यात्रियों की संख्या में काफी बदलाव देखने को मिला. थर्ड एसी में ट्रैवल करने वाले यात्रियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है. हैरान कर देंगे रेलवे के जारी किए गए आंकड़े. कोरोना के बाद बढ़े थर्ड एसी के यात्री साल 2019 में जब कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था. तब से ही लोग साफ सफाई को लेकर सजग रहने लगे. इसके बाद लोगों की जिंदगी में कई आदते पूरी तरह से बदल गईं. वहीं कोरोना महामारी के बाद बात की जाए तो भारतीय रेलवे में सफर करने वालों यात्रियों की संख्या में भी काफी बदलाव हुआ. हाल ही में रेलवे की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में यह बात सामने निकल कर आई कि कोरोना महामारी के बाद ट्रेनों में पहले जो यात्री स्लीपर में सफर करते थे. वह यात्री थर्ड एसी में सफर करने लगे हैं. कोविड के बाद थर्ड एसी पैसेंजर्स की संख्या में तगड़ा उछाल देखने को मिला है. आंकडे कर देंगे हैरान कोरोना महामारी के बाद से लेकर अब तक के 5 सालों में एसी थर्ड से सफर करने वाले मुसाफिरों की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिला है. साल 2019-20 में 11 करोड़ यात्री थर्ड एसी से सफर करते थे. यानी कुल यात्रियों का 1.4% ही. वहीं साल 2024-25 की बात की जाए तो इसमें 19% का इजाफा हुआ है. और यात्रियों की संख्या 26 करोड़ हो गई है. साल 2019-20 में जहां थर्ड एसी से भारतीय रेलवे ने 12,370 करोड रुपये का राजस्व कमाया था. तो वहीं साल 2024 25 में यह बढ़कर 30,089 करोड़ हो गया है. यह आंकड़े वाकई चौंकाने वाले हैं. बता दें कोरोना महामारी से पहले यानी 2019-20 तक रेलवे के राजस्व में सबसे ज्यादा योगदान स्लीपर क्लास के यात्रियों में हुआ करता था. लेकिन इस बार थर्ड एसी के यात्रियों का राजस्व सबसे ज्यादा है.

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