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अनूपपुर : एकलव्य आवासीय विद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र से 9वीं , 11वीं की कक्षाएं अंग्रेजी माध्यम मेें संचालित की जाएंगी

अनूपपुर जिला मुख्यालय में संचालित एकलव्य आवासीय विद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र से 9वीं तथा 11वीं की कक्षाएं अंग्रेजी माध्यम मेें संचालित की जाएंगी। इसकी तैयारी चल रही है। शिक्षकों व अन्य सहयोगी स्टाफ की पदस्थापना कर दी गई है। अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 9वीं में 60 और 11वीं में 90 छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाएगा। 1 अप्रेल से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। नेशनल एजुकेशन सोसायटी फॉर ट्राइबल के आदेशानुसार यह नवाचार जिले में किया जा रहा है। कक्षा नवमी और 11वीं में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा इस वर्ष से प्रारंभ की जाएगी। नवमी में 60 विद्यार्थियों की संख्या निर्धारित की गई है। आठवीं पास होने के बाद विद्यालय के ही छात्र-छात्राओं को इसमें दाखिला दिया जाएगा। वहीं 11वीं में 90 छात्र-छात्राओं की संख्या निर्धारित की गई है। दसवीं पास करने वाले स्कूल के ही 60 विद्यार्थियोंं को सीधे प्रवेश दिया जाएगा। वहीं 30 छात्र-छात्राओं के लिए प्रवेश प्रक्रिया की जाएगी। 90 में 30 कॉमर्स, 30 साइंस और 30 आर्ट के विद्यार्थी सम्मिलित रहेंगे। छात्र-छात्राओं को दिया जाएगा प्रशिक्षण अभी तक विद्यालय में हिंदी माध्यम से पढ़ाई हो रही थी। अब अंग्रेजी माध्यम से कक्षाएं संचालित की जाएगी इसके लिए विभाग ने छात्र-छात्राओं के लिए 10 दिनों का ब्रिज कोर्स रखा है। इसमें उन्हें अंग्रेजी माध्यम की प्रारंभिक जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही ऑनलाइन कंप्यूटर लैब और ऑनलाइन स्मार्ट क्लास की व्यवस्था भी विद्यालय में की गई है। विद्यालय में 50 प्रतिशत छात्र एवं 50 प्रतिशत छात्राओं को दाखिला दिया जाएगा। लाइब्रेरी के लिए अभी छात्रों को इंतजार करना पड़ेगा क्योंकि अभी तक अंग्रेजी माध्यम की पुस्तक यहां नहीं पहुंच पाई हैं। लाइब्रेरी में हिंदी माध्यम के ही पाठ्यपुस्तक ही उपलब्ध हंै। 28 शैक्षणिक व सहयोगी स्टाफ की पदस्थापना अंग्रेजी माध्यम से कक्षा 9 एवं 11वीं की कक्षाओं के संचालन के लिए विभाग ने 28 शैक्षणिक एवं सहयोगी स्टाफ की पदस्थापना यहां कर दी है। 24 शिक्षकों की पदस्थापन की गई है जिसमें 20 अंग्रेजी माध्यम के शिक्षक रहेंगे। इसके साथ ही तीन क्लर्क एक लाइब्रेरियन और दो छात्रावास अधीक्षक की नियुक्ति की गई है।

बारिश के कारण IPL के पहले मैच के साथ-साथ धमाकेदार ओपनिंग सेरेमनी पर भी खतरा मंडरा रहा

कोलकात  दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग (IPL) के 18वें सीजन की शुरुआत आज  यानी 22 मार्च से होगी. गत चैंपियंन कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के बीच कोलकाता के ईडन गार्डन्स में आईपीएल 2025 का पहला मैच खेला जाएगा. हालांकि, इस मैच पर संकट के काले बादल छा गए हैं. बारिश के कारण मैच के साथ-साथ धमाकेदार ओपनिंग सेरेमनी पर भी खतरा मंडरा रहा है. KKR vs RCB मैच पर मंडराया बारिश का खतरा दुनिया भर के फैंस क्रिकेट के उत्सव IPL के शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. फैंस पर आईपीएल का फीवर पूरे जोरों पर है. कैश रिच लीग का पहला मैच 22 मार्च को कोलकाता नाइट राइडर्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच खेला जाएगा. हालांकि, शनिवार को कोलकाता में पार्टी कम हो सकती है क्योंकि एक्यूवेदर ने मैच के दिन कोलकाता में 90% बारिश और 54% गरज के साथ बारिश की संभावना जताई है. 22 मार्च के लिए कोलकाता का मौसम पूर्वानुमान एक्यूवेदर की रिपोर्ट के अनुसार, 22 मार्च को कोलकाता में शाम को बारिश और गरज के साथ बारिश होने की संभावना जताई जा रही है. वेबसाइट ने बारिश की 90% संभावना जताई है – जो लगभग 2 घंटे तक चलेगी और गरज के साथ बारिश होने की 54% संभावना है. बंगाल में अगले कुछ दिनों तक तूफान और बारिश का अनुमान है. कोलकाता सहित पूरे राज्य में तेज हवाओं के साथ आंधी और ओलावृष्टि की संभावना है. पूरे राज्य में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इसके अलावा, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि बंगाल की खाड़ी से भारी मात्रा में जलवाष्प बंगाल की हवा में प्रवेश कर गई है, जिसके कारण 22 मार्च तक कोलकाता में बिजली, वर्षा और गरज के साथ तूफान की भविष्यवाणी की है. जिसके कारण सीएबी को मैच के धुलने का खतरा सता रहा है. मैदान को पूरी तरह से ढक दिया गया है. ओपनिंग सेरेमनी पर भी छाए संकट के काले बादल बता दें कि, ईडन गार्डन्स में आईपीएल की ओपनिंग सेरेमनी और पहले मैच की तैयारियां पूरी हो गई हैं. ड्रेस रिहर्सल चल रहा है. ओपनिंग सेरेमनी में श्रेया घोषाल, दिशा पटानी के साथ करण औजला परफॉर्म करने वाले हैं. लेकिन, तूफान और बारिश के कारण आईपीएल का सितारों से सजा जश्न फीका पड़ सकता है. 6 बजे से ओपनिंग सेरेमनी, 7 बजे होगा टॉस केकेआर और आरसीबी के बीच कल कोलकाता में खेले जाने वाले आईपीएल 2025 के उद्घाटन मैच के लिए टॉस शाम 7 बजे होगा. वहीं, मुकाबले की पहली गेंद शाम 7:30 बजे फेंकी जाएगी. वहीं, शाम 6 बजे से भव्य ओपनिंग सेरेमनी का आयोजन किया जाना है. लेकिन, इसी शाम के समय ही बारिश और तूफान की चेतावनी जारी की गई है. जिसके कारण मैच को रद्द भी किया जा सकता है.  

सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा, अतिक्रमण के कारण राज्यमार्ग की चौड़ाई हुई कम

जबलपुर  सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किये जाने के कारण राजमार्ग की चौड़ाई कम होने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी. मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की डबल बेंच ने बुरहानपुर कलेक्टर को याचिकाकर्ता के दावे की जांच कर चार सप्ताह में अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किए हैं. बुरहानपुर निवासी समाजिक कार्यकर्ता हर्ष चौकसे ने दायर की है याचिका बुरहानपुर निवासी समाजिक कार्यकर्ता हर्ष चौकसे की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि बुरहानपुर-अमरावती मार्ग पर डायफूडिया ग्राम की शासकीय भूमि पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है. जिसकी वजह से राजमार्ग की चौड़ाई काफी कम हो गई है और राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. याचिका में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायाल का स्पष्ट आदेश है कि अतिक्रमणकारियों को किसी प्रकार का बिजली कनेक्शन न दिया जाए. इसके बावजूद बिजली कंपनी ने अतिक्रमणकारियों को बिजली कनेक्शन दे दिए हैं. इस संबंध में जिला कलेक्टर व बिजली कंपनी के अधिकारियों से शिकायत की गई थी. शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है. जिला कलेक्टर होते हैं जिला स्तर पर गठित सार्वजनिक भूमि संरक्षण प्रकोष्ठ के चेयरमैन युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अतिक्रमण संबंधी मामले के लिए जिला स्तर पर सार्वजनिक भूमि संरक्षण प्रकोष्ठ (पीएलपीसी) का गठन किया गया है, जिसके चेयरमैन जिला कलेक्टर होते हैं. युगलपीठ ने कलेक्टर को निर्देश दिया है वह आवेदक के अभ्यावेदन पर जांच करें और यदि अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे चार सप्ताह के भीतर हटाएं. याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता धर्मेन्द्र सोनी ने पैरवी की.

मध्य प्रदेश में कर्मचारी को मनपसंद स्थानों पर मिलेगा ट्रांसफर ! जल्द तबादले से बैन खुल जाएंगे

भोपाल  एमपी में पुरानी तबादला नीति पर सामान्य प्रशासन विभाग ने नए सिरे से काम शुरू कर दिया है। सब कुछ ठीक रहा तो अप्रैल के अंत तक या उसके पहले बैन खुल जाएंगे। जिसके बाद कर्मचारी मनपसंद स्थानों पर तबादला की अर्जी लगा सकेंगे, उस पर सुनवाई होगी और तबादले किए जाएंगे।  कर्मचारी वर्ग 2 वर्षों से तबादलों का इंतजार कर रहा है, बीते साल चुनाव के चलते उक्त नीति अटकी थी। जबकि वर्ष 2023 में भी ज्यादातर कर्मचारी चुनाव की आपाधापी में तबादला अर्जी नहीं दे सके थे। जल्द ही उन्हें लाभ मिलेगा। नीति लगभग तैयार सामान्य प्रशासन विभाग के सूत्रों के मुताबिक तबादला नीति लगभग तैयार है, जिसमें कुछ बदलाव प्रस्तावित हैं, जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीएम डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन की मौजूदगी में एक बैठक होनी है। इसके बाद नीति कैबिनेट बैठक में जाएगी। बता दें, जनवरी में सरकार ने उच्च प्राथमिकता वाले तबादलों के रास्ते खोले थे।

कोर्ट ने कहा कि वेश्या के साथ पकड़ा जाना देह व्यापार और मानव तस्करी की श्रेणी में नहीं आता

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक आरोपी को राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट में शुरू हुई कार्यवाही को रद्द कर दिया। कार्यवाही रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि वेश्या के साथ रंगरलियां मनाना मानव तस्करी और देह व्यापार नहीं है। गाजियाबाद के रहने वाले विपुल कोहली की याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कार्यवाही रद्द कर दी। मामला दिल्ली से सटे गौतमबुद्ध नगर जिले के सेक्टर-49 थाना क्षेत्र का है। गाजियाबाद जिले में एलोरा थाई स्पा सेंटर में पुलिस ने 20 मई 2024 को छापेमारी की गई थी। इस दौरान पुलिस ने याचिकाकर्ता को महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था। पुलिस ने याचिकाकर्ता के खिलाफ मानव तस्करी और देह व्यापार का मुकदमा दर्ज किया था। एसीजेएम कोर्ट की ओर से मामले का संज्ञान लेते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ समन जारी किया गया था। जिसके खिलाफ याची ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में अपनी दलील रखी। वकील ने कोर्ट को बताया कि याची न तो स्पा सेंटर का मालिक है और न ही महिलाओं को देह व्यापार में ढकेलने का आरोपी है। याची ग्राहक है। उसने ली गई सेवाओं के बदले भुगतान किया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट में शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है।

इंदौर के एमवायएच और जिला अस्पताल के लिए 700 करोड़ रुपए मंजूर किए, मालवा के मरीजों को मिलेगी और बेहतर सुविधाएं

 इंदौर विधानसभा में गुरुवार को एमवाय अस्पताल को आदर्श बनाने के लिए 700 करोड़ रुपये की घोषणा हुई। इस राशि से नई बिल्डिंग बनाई जाएगी, जिससे संभागभर के मरीजों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने जिला अस्पताल और एमवायएच को आदर्श अस्पताल के रूप में उन्नयन और सुदृढ़ीकरण के लिए विभिन्न प्रविधानों की घोषणा की है। लंबे समय से इसे लेकर मांग की जा रही थी। इस घोषणा के बाद अब जिला अस्पताल के निर्माण कार्य में तेजी आ सकती है। कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि इस निर्णय से इंदौर की स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होंगी और यह चिकित्सा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इससे मालवा क्षेत्र के मरीजों को उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। एमवायएच परिसर में बनेगा नया सात मंजिला भवन मंत्री सिलावट के अनुसार, उन्होंने एमवायएच अस्पताल के विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से कई बार अनुरोध किया था। इसी के तहत 773 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से सात मंजिला नया भवन निर्माण किया जाएगा। भोपाल में अधिकारियों द्वारा तैयार की गई योजना के अनुसार, इंदौर और उज्जैन संभाग के मरीजों के लिए 1,450 नए बेड जोड़े जाएंगे। यह आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त होगा। नया भवन ओपीडी के पास बनाया जाएगा, जिसके लिए वर्तमान नर्सिंग हॉस्टल और अतिक्रमणों को हटाया जाएगा। इस भवन से चाचा नेहरू अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, एमआरटीबी और कैंसर अस्पताल तक पहुंचना भी आसान होगा। मौजूदा भवन में स्वास्थ्य सेवाएं पूर्ववत जारी रहेंगी विस्तार कार्य के दौरान वर्तमान अस्पताल भवन में सभी सेवाएं पूर्ववत जारी रहेंगी। परिसर में डॉक्टरों और मरीजों के लिए दो मल्टी-लेवल पार्किंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा, नर्सिंग स्टूडेंट्स के लिए 300 बिस्तरों वाला नया हॉस्टल भी बनाया जाएगा। वर्तमान में अस्पताल में 1,152 बेड हैं और हर दिन ओपीडी में औसतन 4,000 मरीजों का उपचार किया जाता है। विस्तार कार्य के पूरा होने के बाद यह क्षेत्र प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में से एक बन जाएगा। सात मंजिला होगा नया एमवायएच नई बिल्डिंग तल मंजिल के साथ सात मंजिला होगी। बिल्डिंग बनाने के लिए जिस जगह का चयन किया गया है, वहां से चाचा नेहरू, सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल, कैंसर अस्पताल काफी नजदीक रहेंगे। ऐसे में मरीजों को अस्पतालों में आने-जाने में भी सुविधाएं मिलने लगेगी। नई बिल्डिंग में दो मल्टीलेवल पार्किंग भी बनाई जाएगी। उम्मीद है कि घोषणा की राशि को बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में जिस बिल्डिंग में एमवाय अस्पताल संचालित हो रहा है, उसकी क्षमता 1152 बेड की है। यहां विभिन्न बीमारियों का इलाज किया जाता है। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब चार हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल की बिल्डिंग की दीवारों में अब जगह-जगह सीलिंग की समस्या आने लगी है।

नई लाइन के बनने के बाद जबलपुर से इंदौर के सफर का समय दो घंटे तक होगा कम

जबलपुर जबलपुर से इंदौर के बीच नई रेल लाइन गाडवारा-बुदनी होकर नहीं इटारसी-बुदनी-खातेगांव होकर बन रही। ये लाइन इंदौर-देवास रेल लाइन में मांगलिया गांव के पास जुड़ेगी। इस रास्ते में भोपाल नहीं पड़ेगा। इस नई लाइन के बनने के बाद जबलपुर से इंदौर के सफर का समय दो घंटे तक कम हो जाएगा। जबलपुर-इंदौर (गाडरवारा एवं बुदनी होकर) नई रेल लाइन की प्रगति पर नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी द्वारा पूछे गए सवाल पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में ये जानकारी दी। रेल मंत्री ने बताया कि बुदनी से इंदौर के बीच नई रेल लाइन निर्माण कार्य प्रक्रिया में है। इस परियोजना के गाडरवारा-बुदनी रेलखंड के दोनों अंतिम स्टेशन पूर्व से इटारसी होकर रेलमार्ग से जुड़े हुए हैं। आठ साल पुरानी परियोजना दोनों के मध्य नवीन रेल लाइन से उनकी दूरी में ज्यादा अंतर नहीं आ रहा है। इसलिए गाडरवारा-बुदनी के मध्य नई रेल लाइन बिछाना तर्कसंगत नहीं है। आठ वर्ष पुरानी परियोजना- जबलपुर(गाडरवारा)-इंदौर (मांगलियागांव) नई रेल लाइन की घोषणा वर्ष 2016-17 के बजट में हुई थी। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में था। वर्ष 2021-22 के बजट में एक हजार रुपये के आवंटन से परियोजना की बंद फाइल फिर खुल गई। उसके बाद के बजट में भी परियोजना को आवंटन जारी हुए। गत दो बजट में आवंटन बढ़ने के बाद परियोजना के इंदौर-बुदनी रेलखंड में रेल लाइन निर्माण प्रक्रिया ने गति पकड़ी। इंदौर-बुदनी का कार्य जारी लोकसभा में रेल मंत्री ने बताया कि इंदौर (मांगलियागांव) और बुदनी के बीच (205 किलोमीटर) नई रेल लाइन का कार्य 3261.82 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है। मार्च-2024 तक 948.37 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। वर्ष 2024-25 के लिए इस परियोजना को 1107.25 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। रेल लाइन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की जा रही है। चार किमी का अंतर इटारसी होकर गाडरवारा से बुदनी रेल मार्ग से जुड़ा है, जिसकी दूरी 141 किमी है। इंदौर नई रेल लाइन परियोजना में प्रस्तावित गाडवारा-बुदनी रेलखंड की दूरी 137 किमी है। मात्र चार किलोमीटर की दूरी कम करने के लिए अलग से लाइन बिछाना रेलवे को अब खर्चीला लग रहा है।

इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू, सात दिन शहर में रहेगी टीम, हर बिंदू पर करेगी जांच

इंदौर इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग शुक्रवार से शुरू हो गई। इस बार इंदौर की सफाई व्यवस्था को बारिकी से परखा जाएगा, क्योंकि इंदौर स्वच्छता की प्रीमियर लीग में शामिल है। अन्य शहरों की तुलना में इस लीग में शामिल शहरों के आंकलन का पैमाना अलग होगा। इसमें इंदौर के अलावा सूरत और नवी मुबंई भी शामिल है। यह दोनों शहर पिछले साल दूसरे और तीसरे नंबर पर थे। इससे इस बार मुकाबला और कड़ा है। दोनों शहरों से इंदौर को टक्कर मिल रही है, लेकिन इंदौर की सबसे बड़ी ताकत डोर टू डोर कचरा कलेक्शन है। इंदौर में शत प्रतिशत कचरा घरों से निकल कर ट्रेंचिंग ग्राउंड तक जाता है। वैसे तो स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए रविवार को ही इंदौर में टीम आ गई थी। टीम ने खजराना मंदिर का दौरा भी किया, लेकिन विधिवत सर्वेक्षण शुक्रवार से शुरू किया गया है। टीम शहर की बस्तियों में पहुंचेगी और लोगों से फीडबैक भी लेगी। इंदौर आई टीम को कहां जाना है और किस क्षेत्र का मुआयना करना है, इसके निर्देश दिल्ली में बैठी टीम गूगल मेप के जरिए देगी। सुबह इंदौर की सफाई व्यवस्था आम दिनों की तुलना में बेहतर नजर आई। गलियों को विशेष तौर पर साफ किया गया और गीले और सूखे कचरे को व्यस्थित तरिके से घरों से लिया गया। मिक्स कचरे को लेने में सख्ती दिखाई गई। स्वच्छता सर्वेक्षण में देशभर के चार हजार से ज्यादा शहरों में शुरू हो चुका है। सर्वे की तैयारी इंदौर नगर निगम ने चार माह पहले से की थी, लेकिन सर्वे देरी से होने के कारण बार-बार वाॅल पेटिंग, बेकलेन सफाई करना पड़ी। इस बार इंदौर को प्रिमियर लीग में रखा है। इस लीग में सूरत और नवी मुंबई से इंदौर को कड़ी टक्कर मिल रही है। पिछली बार सूरत ने इंदौर के साथ पहला पुरस्कार संयुक्त रुप से साझा किया था। इस बार मुकाबला और कड़ा है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए आई टीम सुबह खजराना मंदिर से की है। इस मंदिर में फूलों से खाद बनाने का काम बीते सात वर्षों से चल रहा है और सफाई भी काफी रहती है, हालांकि इंदौर का स्वच्छता सर्वेक्षण विधिवत रुप से शुक्रवार से शुरू होगा। टीम बस्ती व काॅलोनियों में जाकर सफाई व्यवस्था का आंकलन करेगी। स्वच्छ सर्वेक्षण क्या है? स्वच्छ सर्वेक्षण दुनिया का सबसे बड़ा शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण है, जिसे आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। यह सर्वेक्षण स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के विभिन्न मानकों पर शहरी क्षेत्रों का मूल्यांकन करता है, जिनमें शामिल हैं:     कचरा प्रबंधन (संग्रह, पृथक्करण और निपटान)     जनता की प्रतिक्रिया (नागरिक भागीदारी और संतोष स्तर)     स्थल निरीक्षण (स्वच्छता स्तरों का वास्तविक समय में सत्यापन)     स्वच्छता बुनियादी ढांचा (शौचालयों, जल आपूर्ति और जल निकासी प्रणालियों की उपलब्धता और रखरखाव)     प्रमाणीकरण (तृतीय-पक्ष एजेंसियों द्वारा दी गई रेटिंग)… Read more at: https://hindicurrentaffairs.adda247.com/top-cleanest-cities-in-india-indore-featured-for-the-7th-time/ इस बार इंदौर यहां कमजोर     शहर की बेकलेन में कचरा फिर नजर आने लगा है। पहले अर्थदंड के कारण लोग कचरा फेंकने से बचते थे।     शहर के पुराने हिस्से में अभी भी खुली नालियां, जलजमाव और नदियों में सीवरेज जल मिलता है। इस बार सर्वेक्षण में इसे भी जांचा जाएगा।     सफाई को लेकर लोगों में भी जागरुकता की कमी आई है। कई बस्तियों में कचरे के खुले ढेर नजर आते है।     डोर टू डोर वाहन फूल-पत्तियों के कचरे को ले जाने से मना करते है, इसलिए लोग अब उन्हें खुले में फेंकने लगे है।  

प्रदेश को एक और वंदेभारत की सौगात! 600 किमी के सफर में कई बड़े शहरों को जोड़ेगी नई ट्रेन

भोपाल  एमपी से यूपी के बीच सफर करनेवाले रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है। उन्हें अब न केवल ट्रेनों की जबर्दस्त भीड़ से निजात मिलेगी बल्कि उनके सफर में समय भी बेहद कम लगेगा। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से यूपी की राजधानी लखनऊ तक का सफर जल्द ही बहुत आसान होनेवाला है। इन दोनों महानगरों के बीच नई वंदेभारत एक्सप्रेस चलाने का प्रस्ताव है। करीब 600 किमी के सफर में नई ट्रेन लखनऊ और भोपाल सहित बीच के कई बड़े शहरों को जोड़ेगी। हालांकि नियमित ट्रेनों की तुलना में इसका किराया ढाई गुना से ज्यादा होगा। लखनऊ भोपाल वंदेभारत एक्सप्रेस यूपी के लखनऊ मंडल की ही ट्रेन होगी। यूपी की ओर जानेवाली ज्यादातर ट्रेनों में इतनी भीड़ रहती है कि कई यात्री तो कोच के अंदर प्रवेश ही नहीं कर पाते। इन ट्रेनों में महीनों की लंबी वेटिंग भी बनी रहती है। प्रस्तावित लखनऊ भोपाल वंदेभारत एक्सप्रेस इन झंझटों से यात्रियों को छुटकारा दिला देगी। भोपाल लखनऊ वंदे भारत में कितने कोच होंगे? पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को नई वंदे भारत ट्रेन मिलने वाली थी. लेकिन यूपी के यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए इस ट्रेन को भोपाल डिविजन की जगह लखनऊ डिविजन से चलाया जाएगा. लखनऊ भोपाल वंदे भारत एक्सप्रेस एकदम नए कोच वाली प्रीमियम ट्रेन होगी, जिसमें 8 कोच का रैक होगा. माना जा रहा है कि लखनऊ भोपाल वंदे भारत एक्सप्रेस में तकरीबन 564 सीटें होंगी और ये स्लीपर हो सकती है. लखनऊ भोपाल वंदे भारत का कितना होगा किराया? सूत्रों की मानें तो लखनऊ और भोपाल के बीच चलने वाली इस नई वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया प्रीमियम ट्रेनों की तरह ही रहेगा. यानी इस ट्रेन में भी राजधानी, दुरंतो आदि ट्रेनों के बराबर या उससे ज्यादा चार्ज किया जा सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह सेमी हाई स्पीड होने के साथ-साथ यात्रियों को प्रीमियम सुविधाएं और कंफर्ट देगी. भोपाल से लखनऊ के बीच कितनी दूरी? मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से उत्तर प्रदेश की राजधानी भोपाल का डिस्टेंस लगभग 720 किमी है. फिलहाल इस रूट पर 10 से ज्यादा ट्रेनें चलती हैं, जिन्हें दोनों शहरों के बीच 9 से 12 घंटे तक का ट्रेवल टाइम लगता है. हालांकि, इतनी ट्रेनें होने के बाद भी इस रूट पर यात्रियों की जबर्दस्त भीड़ होती है. कब शुरू होगी लखनऊ-भोपाल वंदे भारत सीनियर डीएमई आरपी खरे ने बताया, ” भोपाल रेल मंडल से पटना और लखनउ के लिए वंदे भारत चलेगी. वंदे भारत की एक रैक बनने में करीब एक से डेढ़ महीने का समय लगता है. ऐसे में अप्रैल या शुरुआती मई तक भोपाल रेल मंडल को स्लीपर वंदे भारत की एक रैक मिल सकती है.” गौरतलब है कि रेलवे ने हाल ही में देश को 2 और नई वंदे भारत जयपुर-उदयपुर-जयपुर और अजमेर दिल्ली अजमेर वंदे भारत दी हैं, जिसके बाद लखनऊ-भोपाल वंदे भारत के जल्द शुरू होने की उम्मीद की जा रही है. हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक घोषणा होना बाकी है.

1 मई को गढ़ाकोटा में 23वां पुण्य विवाह समारोह, एक ही विधानसभा में 25000 से अधिक कन्यादान लेने के पश्चात एक बार पुनः

 गढ़ाकोटा सागर जिले के गोपाल भार्गव ने अब तक 25,000 से अधिक कन्याओं का कन्यादान कर गिनीज बुक में नाम दर्ज कराया है. अब वे 1 मई को बुंदेलखंड स्तरीय विवाह सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं. इस भव्य समारोह में गढ़ाकोटा में सैकड़ों जोड़े सात फेरे लेंगे. यह गोपाल भार्गव का 23वां कन्यादान विवाह समारोह है. सरकार की कन्यादान योजना के तहत मिलने वाली राशि के अलावा दूल्हा-दुल्हन को विशेष उपहार भी दिए जाएंगे. रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 25 अप्रैल रखी गई है. मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहली विधानसभा से नौ बार विधायक रहे पंडित गोपाल भार्गव को राजनीति से कहीं ज्यादा पहचान मिली है उनके “कन्यादान संस्कार” से. 71 साल की उम्र में भी उनका जोश और जज़्बा इतना जीवित है कि वे आज भी बेटियों की शादी में खुद पिता की भूमिका निभाते हैं. 25,000 से अधिक कन्याओं के विवाह का आयोजन कर वे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुके हैं, लेकिन उनके इस मिशन का कारवां अब और बड़ा होने जा रहा है. कन्यादान नहीं, जीवन का उद्देश्य वर्ष 2001 से शुरू हुई यह यात्रा आज 23वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है. पंडित गोपाल भार्गव इस बार सिर्फ रहली विधानसभा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए विवाह सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं. यह ऐतिहासिक आयोजन 1 मई को गढ़ाकोटा के नटराज स्टेडियम में होगा, जहां सैकड़ों जोड़े एक ही छत के नीचे सात फेरे लेंगे. प्रत्येक वैवाहिक जोड़े को 49 हजार रुपए की राशि एवं उपहार सामग्री भेंट स्वरूप प्रदान की जाएगी। निकाह एवं विवाह एक साथ संपन्न होंगे। समारोह में पधारे सभी अतिथियों के लिए भोजन व्यवस्था रहेगी। 18 मार्च तक 4 दिन में लगभग 205 पंजीयन हो चुके हैं। पंजीयन करवाने की अंतिम तारीख 25 अप्रैल है। पंजीयन के लिए आवश्यक दस्तावेजों में मध्यप्रदेश के मूल निवासी होने का प्रमाण पत्र, वर एवं वधू की समग्र परिवार आईडी की छायाप्रति, वर एवं वधू की समग्र सदस्य आईडी की केवाईसी अनिवार्य है। वर एवं वधू के आधार कार्ड की छायाप्रति, आयु प्रमाण पत्र की छायाप्रति, पासपोर्ट साइज के चार-चार फोटोग्राफ, वधु की आयु न्यूनतम 18 वर्ष होना अनिवार्य है। वर की आयु न्यूनतम 21 वर्ष होना अनिवार्य है। कल्याणी (विधवा) होने की स्थिति में पूर्व पति का मृत्यु प्रमाण-पत्र, परित्यागता/तलाकशुदा महिला/पुरुष होने की स्थिति में कानूनी रूप से तलाक होने का न्यायालयीन आदेश अनिवार्य रूप से संलग्न करें। वर/वधु यदि दिव्यांग है तो दिव्यांगता का प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड अनिवार्य रूप से संलग्न करें। पंजीकृत श्रमिक परिवार होने की स्थिति में मध्यप्रदेश भवन एवं संनिर्माण कर्मकार मण्डल कार्ड की छायाप्रति, वधू के बैंक पासबुक की छायाप्रति, (जिसमें वधू का नाम पिता का नाम, खाता नम्बर एवं IFSC कोड स्पष्ट दिखाई दें), वधू के बैंक खाते की लिमिट 50 हजार से कम नहीं होना चाहिए। बैंक खाता बंद अथवा होल्ड लगा हुआ नहीं होना चाहिए, फार्म पूरा भरा होना अनिवार्य है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में दर्ज एक ही विधानसभा में सर्वाधिक 25 हजार से अधिक कन्याओं के कन्यादान लेने का रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में रहली विधानसभा का दर्ज है। रहली क्षेत्र का यह समारोह देश और विदेश में अपनी पहचान बना चुका है। सम्मान और सुविधा, दोनों का होगा संगम यह विवाह समारोह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं होता. इसमें सरकार की कन्यादान योजना के तहत मिलने वाली 49,000 रुपये की सहायता के साथ-साथ गोपाल भार्गव द्वारा दिया गया विशेष उपहार भी दूल्हा-दुल्हन को दिया जाता है. हल्दी, मेहंदी, संगीत जैसी हर रस्म को भव्य रूप में मनाया जाता है, और बारात भी पूरे शाही अंदाज़ में निकलती है. बेटियों के लिए बना एक पिता जो बेटियां किसी कारणवश अपने माता-पिता से ये सौभाग्य नहीं पा सकीं, उनके लिए गोपाल भार्गव एक धर्मपिता बनकर खड़े हुए. उनके द्वारा निभाई गई यह भूमिका अब एक समाजिक आंदोलन में तब्दील हो चुकी है. बुंदेलखंड स्तरीय सम्मेलन में पंजीयन शुरू इस बार छह जिलों के जोड़े पंजीयन कर इस सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं. पंजीयन की अंतिम तारीख 25 अप्रैल है. आवेदकों को आधार कार्ड, समग्र आईडी, जन्म प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेज देने होंगे. वधू की न्यूनतम उम्र 18 और वर की 21 वर्ष होना अनिवार्य है.

पटवारी ही क्यों? हर घोटाले में छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज, बड़े अधिकारी रहे सुरक्षित!

Why only Patwari? In every scam, the smaller employees were punished, the big officers remained safe! सिवनी ! जिले के एक खरीदी केंद्र में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ, लेकिन सवाल यह उठता है कि जब भी किसी विभाग में कोई गड़बड़ी होती है, तो सबसे पहले कार्रवाई केवल पटवारी पर ही क्यों होती है? क्या घोटाले केवल पटवारी ही करते हैं, या फिर बड़े अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाते हैं? इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिस घोटाले में खाद्य विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए थी, उसमें कार्रवाई एक निर्दोष पटवारी पर कर दी गई, जो उस समय अवकाश पर था और एक सड़क दुर्घटना में घायल होने के कारण अपनी ड्यूटी पर मौजूद भी नहीं था। बिना गहन जांच के, बिना किसी ठोस आधार के उसे निलंबित कर दिया गया। यह सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों? क्या केवल पटवारी ही जवाबदेह हैं? यह पहली बार नहीं हुआ है जब किसी घोटाले का ठीकरा पटवारी पर फोड़ा गया हो। ऐसा लगता है कि जैसे ही कोई मामला तूल पकड़ता है, तो विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए सबसे आसान शिकार पटवारी को ही बनाते हैं। बड़े अधिकारियों पर कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, न ही उनकी भूमिका की जांच की जाती है। सरकार और प्रशासन को यह तय करना होगा कि क्या न्याय केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित रहेगा? क्या हमेशा घोटालों का ठीकरा पटवारियों पर ही फोड़ा जाएगा? जब तक इस अन्यायपूर्ण परंपरा को रोका नहीं जाएगा, तब तक न तो पारदर्शिता आएगी और न ही कोई ठोस सुधार हो पाएगा। अब समय आ गया है कि दोषियों की सही पहचान हो और बिना पक्षपात के दोषियों पर कार्रवाई की जाए – चाहे वे किसी भी पद पर क्यों न हों!

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