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IMF के अनुसार पिछले दशक में भारत की GDP दोगुनी हुई, 2025 में अर्थव्यवस्था $4.3 ट्रिलियन होगी, जापान और जर्मनी से आगे निकल जाएगी.

नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था बीते 10 वर्षों में तेजी से बढ़ी है और इसकी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में दोगुनी हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत की जीडीपी 2015 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर थी, जो 2025 में बढ़कर 4.3 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है। नीतिगत सुधार और स्थिर आर्थिक विकास से सम्भव हुई तेज आर्थिक वृद्धि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के चलते भारत 2025 में जापान और 2027 में जर्मनी को पीछे छोड़ देगा। इससे भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। IMF ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि का मुख्य कारण मजबूत नीतिगत सुधार और स्थिर आर्थिक विकास है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि साहसिक आर्थिक नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और व्यापार करने में आसानी पर फोकस के कारण भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद किसी भी सरकार को यह सफलता हासिल नहीं हुई थी। 2025 तक जर्मनी, 2027 तक जापान को छोड़ देगी पीछे बीजेपी नेता अमित मालवीय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की गई पोस्ट में कहा गया कि विकास की यह गति भारत को एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करती है, जो 2025 तक जापान और 2027 तक जर्मनी को पीछे छोड़ देगी. मालवीय ने आगे कहा कि यह असाधारण उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और उनकी सरकार के अथक प्रयासों का प्रमाण है. सक्रिय आर्थिक नीतियों, साहसिक संरचनात्मक सुधारों और व्यापार करने में आसानी पर निरंतर फोकस के माध्यम से मोदी सरकार ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना दिया है. शानदार वृद्धि के पीछे कई अन्य कारक मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। मजबूत स्टार्टअप तंत्र और आईटी क्षेत्र की निरंतर प्रगति ने भी आर्थिक विकास को गति दी है। 10 साल में कोई और देश भी आसपास नहीं देश 2015 में जीडीपी 2025 में जीडीपी वृद्धि दर जर्मनी 3.4 4.9 44% जापान 4.4 4.4 0% यूके 2.9 3.7 28% फ्रांस 2.4 3.3 38% इटली 1.8 2.5 39% कनाडा 1.6 2.3 44% ब्राजील 1.8 2.3 28% रूस 1.4 2.2 57% द. कोरिया 1.5 1.9 27% ऑस्ट्रेलिया 1.2 1.9 58% स्पेन 1.2 1.8 50%   महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में करता है मदद   अमित मालवीय ने साथ ही कहा कि यह एक ऐसी उपलब्धि जो आजादी के बाद से किसी भी पिछली सरकार को हासिल नहीं हुई थी. इस महीने की शुरुआत में, भारत की विवेकपूर्ण नीतियों की सराहना करते हुए आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा है कि देश का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में मदद कर सकता है.आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा कि संरचनात्मक सुधार देश में उच्च-गुणवत्ता की नौकरियां पैदा करने और निवेश के लिए काफी जरूरी हैं. इस महीने की शुरुआत में IMF के कार्यकारी बोर्ड ने भी भारत की आर्थिक नीतियों की तारीफ की। बोर्ड ने कहा कि भारत का मजबूत प्रदर्शन उसे 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने में मदद कर सकता है। IMF ने यह भी सुझाव दिया कि भारत को लेबर मार्केट में सुधार करने और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों का सृजन हो सके।  

इंदौर में 200 स्कूल 31 मार्च से बंद होंगे, हजारों विद्यार्थी प्रभावित

इंदौर इंदौर में लगभग 200 स्कूल बंद होने वाले हैं। यह स्कूल नए नियमों का पालन नहीं कर पाए। इस कारण 2025-26 के सत्र से इन्हें बंद किया जा रहा है। इससे हजारों छात्र प्रभावित होंगे। छात्रों और अभिभावकों को स्कूल बंद होने की जानकारी नहीं दी गई है। प्रशासन ने इन छात्रों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की है। छात्रों को दूसरे स्कूलों में दाखिला लेने में परेशानी हो सकती है। खासकर गरीब परिवारों के बच्चों को दिक्कत आएगी। ये 200 स्कूल 31 मार्च से बंद हो जाएंगे। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उन्होंने मान्यता के नए नियमों का पालन नहीं किया। राज्य सरकार ने कहा था कि 2025-26 सत्र के लिए मान्यता नवीनीकरण 20 मार्च तक कराना होगा। जिले के 1684 स्कूलों में से केवल 1478 ने ही नवीनीकरण के लिए आवेदन किया। अब उनका निरीक्षण चल रहा है। 1 अप्रैल से बंद हो जाएंगे ये स्कूल जिन 206 स्कूलों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया, वे 31 मार्च से बंद हो जाएंगे। इससे हजारों छात्र सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। ज्यादातर स्कूलों ने अभिभावकों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। कई छात्र परीक्षा दे चुके हैं और अगली कक्षा में जाने का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि उनका स्कूल 1 अप्रैल से बंद हो जाएगा। एडमिशन के लिए बच्चे होंगे परेशान स्कूल बंद होने की वजह से अभिभावकों ने दूसरे स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इससे स्थिति और भी मुश्किल हो गई है। सरकार ने 1 अप्रैल से सरकारी स्कूलों में ‘एडमिशन फेस्टिवल’ शुरू करने की घोषणा की है। लेकिन बंद हो रहे स्कूलों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। गरीब बच्चों के लिए खासी परेशानी अधिकारियों का कहना है कि छात्र अपनी पसंद के किसी भी स्कूल में दाखिला ले सकते हैं। लेकिन गरीब परिवारों के छात्रों के लिए यह आसान नहीं होगा। कई स्कूल जो बंद होने वाले हैं, वे पिछड़े इलाकों में हैं। वहां प्राइवेट स्कूल कम हैं या छात्रों के घरों से बहुत दूर हैं। प्राइवेट स्कूलों में सीटें भी कम हैं। इसलिए सभी छात्रों को दाखिला मिलना मुश्किल है। ऐसे में सरकारी स्कूल ही एकमात्र विकल्प हैं। अधिकारी का कहना जिला परियोजना समन्वयक संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रभावित छात्रों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए 25 अप्रैल के बाद एक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिन स्कूलों को मान्यता नहीं मिली है, उन्हें भी कहा गया है कि वे अभिभावकों को दूसरे स्कूल चुनने के लिए कहें। प्रशासन ने अधिकारियों को 25 मार्च तक 100% नामांकन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। नए छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी और सीनियर छात्र उनका स्वागत करेंगे।  

आटा गूंथने के बाद उस पर क्यों बनाते हैं उंगलियों के निशान? क्या है इसके पीछे की वजह? कैसे शुरू हुई परंपरा?

 घर के बड़े बुजुर्गों की बताई हुई बातें अक्सर हमारे लिए समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, खासकर जब हम इन्हें सिर्फ एक पुरानी परंपरा या मान्यता के रूप में देखते हैं. लेकिन जब हम इनकी गहराई में जाकर समझते हैं, तो पाते हैं कि इन बातों में कुछ खास वजहें और तर्क छिपे होते हैं. एक ऐसी ही बात जो अक्सर हमारे घर के बड़े बुजुर्ग हमें बताते हैं, वह है – “आटा गूंथने के बाद उसमें उंगलियों के निशान जरूर बनाओ.” क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे का कारण क्या है और शास्त्रों में इसके बारे में क्या कहा गया है? आइए, जानते हैं आटा गूंथने का महत्व हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में आटा गूंथना एक सामान्य काम लगता है, लेकिन इस सामान्य से काम का भी कुछ खास महत्व है. विशेष रूप से घर की महिलाएं दिन में कई बार आटा गूंथती हैं, जिससे रोटियां, परांठे और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार होते हैं. लेकिन शास्त्रों में इस कार्य को लेकर कुछ खास निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि ये कार्य न सिर्फ भोजन तैयार करने से जुड़ा है, बल्कि हमारी मानसिकता और भक्ति से भी संबंधित है. हिंदू धर्म में भोजन को सिर्फ एक आहार नहीं, बल्कि एक प्रकार का प्रसाद माना जाता है, और इसी कारण रसोई में हर कदम को ध्यान से उठाना जरूरी होता है. उंगलियों के निशान बनाने की परंपरा अब हम आते हैं उस खास परंपरा पर, जिसमें दादी-नानी हमें आटा गूंथने के बाद उंगलियों के निशान बनाने की सलाह देती हैं. क्या यह सिर्फ एक रिवाज है या इसके पीछे कोई गहरी वजह है? दरअसल, इसका कारण शास्त्रों और पुरानी मान्यताओं में छिपा हुआ है. हमारे पूर्वजों के अनुसार, पिंडदान का कार्य पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है. पिंड को चावल के आटे से बनाया जाता है, और वह गोल आकार में होता है. आटा गूंथने के बाद जो गोल आकार बनता है, उसे पिंड से जोड़कर देखा जाता है. इस वजह से आटे को पितरों का भोजन माना जाता है. लेकिन एक महत्वपूर्ण बात यह है कि आटे के गोले से रोटी बनाना शुभ नहीं माना जाता. इसे पितरों का आहार मानते हुए, यह आवश्यक है कि आटे में उंगलियों के निशान लगाए जाएं, ताकि वह पिंड के रूप में न लगे. यही कारण है कि दादी-नानी हमसे यह कहती हैं कि आटा गूंथते समय उंगलियों के निशान जरूर बनाएं. यह एक प्रकार से आटे को खाने योग्य और शुभ बनाता है. गोल आकार वाले अन्य पकवानों में भी यह परंपरा है आटे के अलावा, कई अन्य पकवानों जैसे बाटी, बाफले, वड़ा आदि में भी गोल आकार बनाए जाते हैं. इन पकवानों में भी उंगलियों के निशान लगाकर गड्ढे बनाए जाते हैं. इसका उद्देश्य यह होता है कि ये पकवान पिंड के आकार से भिन्न दिखें और शास्त्रों के अनुसार शुभ माने जाएं.  

HAPPY birthday cm : ‘जल पुरुष’ डॉ. मोहन यादव का संकल्प हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाना, सिंचाई के क्षेत्र में हासिल की अभूतपूर्व उपलब्धियां

Happy birthday mohan yadav: ‘Water Man’ Dr. Mohan Yadav’s resolve to deliver water to every farmer’s field, achieved unprecedented achievements in the field of irrigation भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अक्सर कहते हैं कि प्राचीन काल में भारत में पारस पत्थर हुआ करता था, जिसके स्पर्श से लोहा सोना हो जाता था। इस पारस पत्थर का काम पानी करता है जब वह सूखे खेतों पर पहुंचता है। जल के स्पर्श से खेतों में सुनहरी फसलें लहलहाती हैं। Happy birthday mohan yadav पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने दो दशक पहले देश की नदियों को जोड़कर हर खेत तक पानी पहुंचाने का सपना देखा था, जो राज्यों के बीच जल विवाद के चलते दो दशकों से अधिक समय से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी महत्वाकांक्षी अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाएं मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बीच सहमति न बन पाने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। दो बड़ी परियोजनाओं में मिली सफलतामुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार और राज्यों से निरंतर चर्चा कर इन परियोजनाओं के गतिरोध को समाप्त किया और प्रदेश ने दो बड़ी परियोजनाओं के रूप में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई जी की 100वीं जयंती पर मध्यप्रदेश आकर देश की पहली नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना केन-बेतवा का शिलान्यास किया। Happy birthday mohan yadav मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि अब महाराष्ट्र सरकार के साथ वार्ता के बाद विश्व की सबसे बड़ी ग्राउंड वाटर रिचार्ज अंतर्राज्यीय संयुक्त परियोजना “ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना” का अवरोध दूर हो गया है। मध्यप्रदेश शीघ्र ही महाराष्ट्र सरकार के साथ इस संबंध में करार करने की ओर बढ़ रहा है। जल्द ही केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भोपाल आमंत्रित कर करार की कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि “ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना के जरिए हम महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर ताप्ती नदी की तीन धाराएं बनाकर राष्ट्रहित में नदी जल की बूंद-बूंद का उपयोग सुनिश्चित कर कृषि भूमि का कोना-कोना सिंचित करेंगे।” जानिए केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के बारे मेंकेन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना है, जिसमें केन नदी पर दौधन बांध एवं लिंक नहर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।रुपये 44 हजार 605 करोड़ लागत की इस परियोजना के पूर्ण होने पर मध्य प्रदेश के सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 08 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और प्रदेश की 44 लाख आबादी को पेयजल सुविधा प्राप्त होगी।साथ ही परियोजना से 103 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा, जिसका पूर्ण उपयोग मध्यप्रदेश करेगा। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिले-छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा एवं सागर के लगभग 02 हजार ग्रामों के लगभग 07 लाख 25 हजार किसान परिवार लाभांवित होंगे।सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भू-जल स्तर की स्थिति सुधरेगी। औद्योगीकरण, निवेश एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों में आत्मनिर्भरता आयेगी तथा लोगों का पलायन रुकेगा। परियोजना के साकार रूप लेने पर मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी।पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतरराज्यीय नदी लिंक परियोजनासंशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतरराज्यीय नदी लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों एवं केंद्र के मध्य 28.01.2024 को त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ और दोनों राज्यों एवं केंद्र के मध्य 05.12.2024 को जयपुर में अनुबंध सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना की अनुमानित लागत 72 हजार करोड़ रुपये की है, जिसमें मध्यप्रदेश 35 हजार करोड़ एवं राजस्थान 37 करोड़ की हिस्सेदारी होगी। परियोजना से मध्यप्रदेश में मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 11 जिले क्रमशः गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, देवास, इंदौर, आगर-मालवा, शाजापुर एवं राजगढ़ जिलों में कुल 6.14 लाख हेक्टेयर नवीन सिंचाई एवं चंबल नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण से भिंड मुरैना एवं श्योपुर के 3.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। परियोजना से लगभग 03 हजार 150 ग्रामों की 40 लाख आबादी लाभान्वित होगी एवं इस समेकित परियोजना में मध्य प्रदेश की 19 सिंचाई परियोजनाओं को शामिल किया गया है। क्षिप्रा स्वच्छ और निरंतर प्रवाहमान होगीमुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प है कि क्षिप्रा स्वच्छ और निरंतर प्रवाहमान बने और सिंहस्थ 2028 में क्षिप्रा के जल में ही श्रद्धालुओं को स्नान कराया जाए। क्षिप्रा नदी के जल को शुद्ध रखने के लिए 900 करोड़ रुपये की लागत की “कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना” के द्वारा कान्ह नदी के दूषित जल को क्षिप्रा नदी में मिलने से रोका जायेगा। वर्ष-2028 से पहले यह योजना पूर्ण कर ली जायेगी। Happy birthday mohan yadav क्षिप्रा को वर्ष भर अविरल, प्रवहमान बनाने के लिए उज्जैन जिले की सेवरखेडी एवं सिलारखेडी (लागत लगभग 615 करोड़) योजना का कार्य भी आरंभ हो गया है। इससे आमजन एवं श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष भर विशेष पर्वों पर उनकी धार्मिक भावनाओं के अनुरूप क्षिप्रा नदी में स्नान करने का अवसर मिलेगा। क्षिप्रा नदी पर सिंहस्थ में स्नान सुविधा के लिये क्षिप्रा नदी के दोनों तटों पर लगभग 29 किलोमीटर लंबाई में घाटों का निर्माण किया जाएगा, जिसकी राशि रू. 778.91 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है। Read more: Kuno National Park sheopur: चीतों ने गाय को पकड़ा तो ग्रामीणों ने मारे पत्थर, वन विभाग के मना करने पर भी नहीं माने बुन्देलखण्ड में दूर होगा जलसंकटमध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भू-जल स्तर को बढ़ाने, पेयजल संकट को दूर करने एवं सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “अटल भू-जल योजना” प्रारंभ की गई है। यह योजना प्रदेश के 06 जिलों के 09 विकासखण्डों में क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना से चयनित क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार होने से स्थानीय किसानों को लाभ प्राप्त होगा तथा किसानों की आय बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त जल जीवन मिशन के अंतर्गत जल प्रदाय के लिये टिकाऊ जल स्रोत भी उपलब्ध हो सकेंगे। बांधों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। बांधों की सुरक्षा को लेकर मध्यप्रदेश सरकार पूरी सजगता के साथ काम कर रही है। इसके लिये प्रदेश में “डैम सेफ्टी रिव्यू पेनल” गठित है, जो प्रतिवर्ष संवेदनशील बांधों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। आने वाले 05 वर्षों में प्रदेश के 27 बांधों की सुरक्षा एवं मरम्मत … Read more

Kuno National Park sheopur: चीतों ने गाय को पकड़ा तो ग्रामीणों ने मारे पत्थर, वन विभाग के मना करने पर भी नहीं माने

When the leopards caught the cow, the villagers threw stones at it, they did not listen even after the forest department’s warning Kuno National Park sheopur श्योपुर ! Kuno National Park sheopur से बाहर निकले पांच चीतों पर ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। हालांकि, मौके पर मौजूद वन विभाग की रेस्क्यू टीम ग्रामीणों से चीतों से दूर रहने की बात कहती रही, लेकिन वे नहीं माने, घटना सोमवार की है। दरअसल, एक महीने पहले खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावक शनिवार शाम को पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे। चीते रविवार दोपहर बाद फिर कूनो के जंगल की ओर लौट गए थे। रविवार रात को ये चीते वीरपुर तहसील के ग्राम श्यामपुर के पास देखे गए। वे निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेल ट्रैक से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर थे। सोमवार सुबह ये पांचों चीते कूनो सायफन के पास से होते हुए कूनो नदी में पहुंचे। Kuno National Park sheopur वे निर्माणाधीन रेलवे पुल के नीचे काफी देर तक बैठे रहे। इस दौरान कूनो सायफन से गुजरने वाले राहगीरों की भीड़ चीतों को देखने के लिए जमा हो गई। मादा चीता और शावक एक-एक कर रास्ता पार कर रहे थे, तभी उन्होंने गाय पर झपट्टा मारा। मादा चीता और शावकों को भगाने के लिए ग्रामीण लाठी लेकर दौड़े और पत्थर मारना शुरू कर दिए। चीता ज्वाला काफी देर तक गाय का गला पकड़े रही। जैसे ही उसे पत्थर लगा, उसने गाय को छोड़ दिया और शावकों के साथ भाग निकली। घटना के बाद करीब 10 बजे चीता दल, कूनो पुल क्षेत्र से निकलकर वीरपुर के तिललिडेररा क्षेत्र पहुंचा है। Read more: डुकरसता बीट के जंगल में भीषण आग, वन विभाग की मशीनें खराब, कर्मचारियों ने गीली टहनियों से बुझाई ज्वाला और उसके शावकों को 21 फरवरी को खजूरी क्षेत्र के जंगल में छोड़ा गया था। एक महीने तक वे पार्क की सीमा में ही रहे। चीतों के बाहर निकलने पर क्षेत्र के चीता मित्र और उनकी टीम ने आसपास के लोगों को जागरुक किया। उन्होंने बताया कि चीते लोगों पर हमला नहीं करते हैं। उन्होंने लोगों से चीतों को न भगाने और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील की।

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