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आईपीएल में डेब्यू के बाद यह नाम हर क्रिकेट प्रेमी की जुबां पर, विपराज निगम ने ऑलराउंड परफॉर्मेंस से जीता दिल

नई दिल्ली विपराज निगम…कल तक इस नाम को बहुत कम ही लोग जानते थे। लेकिन आईपीएल में डेब्यू के बाद यह नाम हर क्रिकेट प्रेमी की जुबां पर है। लखनऊ सुपरजायंट्स के लिए आशुतोष शर्मा ने कमाल किया। लेकिन उससे पहले विपराज ने अपने पहले ही मैच में जो धमाल किया, उसे कम आंकना भूल होगी। अपने डेब्यू मैच ऑलराउंड प्रदर्शन से विपराज छा गए हैं। पहले तो उन्होंने लखनऊ सुपर जायंट्स के ओपनर एडेन मारक्रम को चलता कर बड़ा झटका दिया। विपराज ने निकोलस पूरन को भी चलता कर दिया होता, लेकिन समीर रिजवी ने प्वॉइंट पर कैच छोड़ दिया। गेंदबाजी के बाद बल्लेबाजी में भी विपराज ने अपना दम दिखाया और 15 गेंद में 39 रनों की धुआंधार पारी खेल डाली। जमकर की धुलाई विपराज निगम 13वें ओवर में आए, जब आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे ट्रिस्टन स्टब्स आउट होकर पवेलियन जा चुके थे। इसके बाद दिल्ली की उम्मीदें भी डूबने लगी थीं। लेकिन विपराज के इरादे कुछ और ही थे। शुरू में वह थोड़े सतर्क दिखे, लेकिन 14वें ओवर में उन्होंने गियर बदल लिया। रवि बिश्नोई के इस ओवर में विपराज ने दो चौके और एक छक्का लगाया। अगला ओवर करने आए शाहबाज नदीम को भी विपराज ने एक चौके और एक छक्के के लिए भेजा। इसके बाद 16वें ओवर में भी दो चौके लगाए। 15 गेंदों पर 39 रन बनाने के बाद विपराज आउट हो गए, लेकिन तब तक वह सुनिश्चित कर चुके थे कि जरूरी नेट रन रेट का दबाव आशुतोष शर्मा पर हावी न होने पाए। कौन हैं विपराज विपराज निगम की उम्र 20 साल है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। विपराज लेग स्पिन ऑलराउंडर हैं। मेगा ऑक्शन में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 50 लाख रुपए में खरीदा था। उन्होंने यूपी टी-20 लीग में अपने प्रदर्शन से अच्छी छाप छोड़ी थी। इसके बाद सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2024-25 में वह सुर्खियों में आए। विपराज ने यहां पर सात से थोड़ी सी ज्यादा इकॉनमी से आठ विकेट हासिल किए। पहले भी किया है कमाल सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान विपराज बहुत ज्यादा बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। लेकिन आंध्र प्रदेश के खिलाफ उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया था। रिंकू सिंह के साथ बैटिंग करते हुए विपराज ने 8 गेंद में 27 रन की पारी खेली थी। दोनों ने मिलकर उत्तर प्रदेश को जीत दिलाई थी। इसके अलावा सीजन से पहले दिल्ली के इंट्रा स्क्वॉड मैच में विपराज ने 29 गेंदों में 54 रन बनाए थे, जिसमें सात चौके और दो छक्के थे।

आशुतोष शर्मा ने दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से खेलते हुए लखनऊ सुपर जाइंट्स के जबड़े से छीनी जीत, अब बना नई सनसनी

नई दिल्ली दो साल पहले घरेलू क्रिकेट में एक युवा खिलाड़ी ने सबसे तेज फिफ्टी जड़कर सनसनी मचा दी थी। 2023 की सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी। रेलवे बनाम अरुणाचल प्रदेश का मैच। रेलवे की तरफ से खेलते हुए एक लड़के ने गर्दा मचा दिया। सिर्फ 11 गेंदों में पचासा ठोक डाला। किसी भी भारतीय बैटर की सबसे तेज हाफ सेंचुरी। लड़के का नाम आशुतोष शर्मा। वही जिसने दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से खेलते हुए सोमवार को लखनऊ सुपर जाइंट्स के जबड़े से जीत छीन ली। आईपीएल में शर्मा की ये कोई पहली आतिशी पारी नहीं है। पिछले सीजन में भी उन्होंने बल्ले से धूम-धड़ाका किया था लेकिन तब उनकी टीम दिल्ली कैपिटल्स नहीं, बल्कि पंजाब किंग्स थी। दिल्ली के हाथ इस हीरे के लगने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। 2023 में मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनके जबरदस्त प्रदर्शन ने पंजाब किंग्स के बैटिंग कोच संजय बांगर का ध्यान खींचा था। नतीजा ये हुआ कि आईपीएल ऑक्शन में पंजाब किंग्स ने आशुतोष शर्मा को 20 लाख की बेस प्राइस में खरीद लिया। इस तरह शुरू हुआ शर्मा का आईपीएल सफर। पिछले सीजन में जब भी उन्हें बल्लेबाजी का मौका मिला, उन्होंने भुनाने में कोई कोताही नहीं बरती। बल्ले से एक अलग ही छाप छोड़ी। 17 गेंद में 31 रन, 15 गेंदों में नाबाद 33, 16 गेंद में 31 रन…ये आंकड़े उनके विध्वंसक रूप की गवाही दे रहे। मुंबई इंडियंस के खिलाफ एक मैच में तो शर्मा ने महज 28 गेंदों में 61 रनों की जबरदस्त पारी खेली। इस दौरान 2 चौके जड़े और 7 छक्के उड़ाए लेकिन कसर रह गई। टीम को जिता नहीं पाए। इसके बाद आया 2025 का आईपीएल ऑक्शन। ‘कौड़ियों’ के भाव में मिले आशुतोष शर्मा को पंजाब किंग्स ने रिलीज कर दिया। उनके लिए बोली की शुरुआत की आरसीबी ने। राजस्थान रॉयल्स भी शर्मा को लेना चाहती थी, लिहाजा वह भी कूद गई बोली में। उन्हें लेने के लिए टीमों में जैसे होड़ मच गई। दिल्ली कैपिटल्स भी रेस में कूद गई तो उन्हें रिलीज करने वाली पंजाब किंग्स भी बोली में शामिल हो गई। आखिरकार दिल्ली कैपिटल्स ने 3.8 करोड़ की बोली लगाकर आशुतोष शर्मा को खरीद लिया। अब शर्मा अपनी दिलेर पारी से टीम को रोमांचक जीत दिलाकर आईपीएल 2025 की नई सनसनी बनकर उभरे हैं। उन्होंने 31 गेंदों में नाबाद 66 रन बनाए। आशुतोष शर्मा ने सोमवार को लखनऊ के खिलाफ असंभव सी दिख रही जीत को संभव कर दिखाया। लखनऊ ने जीत के लिए 210 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था। जवाब में दिल्ली के 7 रनों पर ही 3 विकेट गिर चुके थे। 13वें ओवर तक 6 विकेट जा चुके थे। उसके बाद शर्मा और विपराज निगम के बीच 55 रनों की साझेदारी हुई लेकिन 17वें ओवर की पहली गेंद पर ही निगम आउट हो गए। तब दिल्ली का स्कोर था 7 विकेट परप 168 रन। अगले ओवर में स्टार्क भी आउट हो गए। आखिरी 2 ओवर में दिल्ली को जीत के लिए 22 रन की दरकार थी लेकिन 19वें ओवर में कुलदीप यादव के रूप में नौवां विकेट भी गिर गया। टीम का स्कोर था 192 रन। एक छोर से आशुतोष शर्मा अकेले किला लड़ा रहे थे। याद के आउट होते ही अब आखिरी जोड़ी मैदान में थी। जीत के लिए 9 गेंदों में 18 रन चाहिए थे। लखनऊ की जीत तय दिख रही थी लेकिन आशुतोष ने कमाल कर दिया। 3 गेंद शेष रहते ही छक्के के साथ टीम को जीत दिला दी।

15 दिनों में 13 हजार राशन दुकानों की जांच मुश्किल, CG में चावल घोटाला छुपाने को कर रहे लेटलतीफी

रायपुर प्रदेश की 13 हजार राशन दुकानों में ऑनलाइन स्टॉक और गोदाम में रखे स्टॉक में अंतर की जांच अब तक शुरू नहीं हो पाई है। यह स्थिति तब है जब बचत स्टॉक के सत्यापन और डेटा एंट्री 10 अप्रैल, 2025 तक पूरा की जानी है। राशन दुकानों की जांच दल में खाद्य विभाग के साथ गृह विभाग और सहकारिता के सदस्यों को रखा जाएगा। इसके लिए 13 फरवरी को आदेश जारी किया गया था। यह सत्यापन एक मार्च 2025 की स्थिति में किया जाना है। इस तरह 13 हजार राशन दुकानों की जांच 15 दिनों में किया जाना मुश्किल है। लेटेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज जांच में देरी का फायदा गड़बड़ी करने वाले राशन दुकान संचालक उठा रहे हैं। बता दें कि राजधानी की अधिकांश राशन दुकानों में वास्तविक स्टॉक में गड़बड़ी है। इसलिए जांच को अटकाया जा रहा है। महिला समितियों ने कलेक्टर से की शिकायत सोमवार को कई महिला समितियों ने कलेक्टर से मिलकर फर्जी अध्यक्ष का वीडियो दिखाकर जांच की मांग की है। वीडियो में संघ का फर्जी अध्यक्ष महिलाओं को धमका कर खुद राशन दुकान चालने का दवाब बना रहा है। मामले में कलेक्टर ने खाद्य नियंत्रक को जांच करने के लिए कहा है। महिलाओं ने बताया कि फर्जी अध्यक्ष पूर्व विधायक के नाम से दुकानों पर कार्रवाई करवाने की धमकी देकर खुद दुकानें हथिया लेता था। इसके बाद दुकानों से लाखों की चावल की हेराफेरी करता था। इसके बाद खाद्य अधिकारियों से मिलकर दुकानें निलंबित करकर अपनी संस्था में जुड़वाता है।   फिर हुई करोड़ों के चावल घोटाले की शिकायत खमतराई राशन दुकान में एपीएल घोटला और बिना स्टॉक के वितरण दिखाने वाले राशन दुकान संचालक के खिलाफ दो साल पहले की गई शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। अब फिर से मामले की शिकायत ईओडब्लू में की गई है।  

आईपीएल के 18वें सीजन का ये 5वां मैच आज, पहला मैच खेलने उतरेगी गुजरात और पंजाब की टीम

नई दिल्ली गुजरात टाइटन्स और पंजाब किंग्स आज आईपीएल 2025 का अपना पहला मुकाबला खेलने उतरेंगी। आईपीएल के 18वें सीजन का ये 5वां मैच है। गुजरात ने एक बार खिताब जीता है, जबकि पंजाब किंग्स नए कप्तान की अगुआई में नए सीजन की शुरुआत करना चाहेगी। कप्तान के तौर पर शुभमन गिल के लिए पिछला सीजन अच्छा नहीं रहा, लेकिन गुजरात की टीम अपने घर पर कमाल की क्रिकेट खेलती रही है। ऐसे में पंजाब के लिए यहां चुनौती भरा सफर होगा। इस मैच में दोनों की प्लेइंग इलेवन कैसी होगी, ये जान लीजिए। सबसे पहले बात मेजबान गुजरात टाइटन्स की करते हैं, जिसमें कुछ नए चेहरे शामिल हुए हैं। शुभमन गिल के साथ पारी की शुरुआत जोस बटलर करेंगे। ग्लेन फिलिप्स मध्य क्रम में होंगे। स्पिनर में राशिद खान का साथ वॉशिंगटन सुंदर देंगे। कगिसो रबाडा, प्रसिद्ध कृष्णा और मोहम्मद सिराज पेस बॉलिंग में होंगे। इस तरह टीम हर मोर्चे पर मजबूत है। क्या मैदान पर भी खिलाड़ी दमदार प्रदर्शन करेंगे? ये देखने वाली बात होगी। पंजाब किंग्स की बात करें तो कप्तान से लेकर ऑलराउंडर तक पूरी टीम बदली-बदली नजर आएगी। श्रेयस अय्यर कप्तान हैं, लेकिन इस बार सवाल ये होगा कि ओपन कौन करेगा। एक तो प्रभसिमरन होंगे, दूसरे क्या मार्कस स्टोइनिस होंगे? ये देखना दिलचस्प होगा। पंजाब किंग्स काफी मजबूत लग रही है, क्योंकि उनके पास ऑलराउंडर से लेकर पेसर और स्पिनर सब दमदार हैं। मोटी-मोटी कीमत पर पंजाब किंग्स ने खिलाड़ियों को खरीदा है, क्योंकि उनके पास सबसे बड़ा पर्स था। दोनों टीमों का 18वें सीजन में यह पहला मुकाबला है। जीटी और पीबीकेएस की शाम साढ़े सात बजे से अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भिड़ंत होगी। टॉस सात बजे होगा। जीटी की कमान स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल के हाथों में है। जीटी पिछले सीजन में आठवें स्थान पर रही थी। वहीं, पंजाब का नेतृत्व श्रेयस अय्यर करेंगे। अय्यर आईपीएल के सफल कप्तानों में शामिल हैं। उनकी कप्तानी में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने पिछले साल ट्रॉफी जीती थी। हालांकि, खिताब जीतने के बावजूद केकेआर ने अय्यर को रिटेन नहीं किया। अय्यर की अगुवाई में दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) ने 2020 में फाइनल में जगह बनाई थी। अब अय्यर की नजर पंजाब को पहला खिताब जिताने पर होगी। गिल को इसलिए चाहिए 29 रन जीटी कैप्टन शुभमन गिल टी20 क्रिकेट में 4,500 रन पूरे करने के करीब हैं। उन्हें यह आंकड़ा छूने के लिए 29 रनों की जरूरत है। हेड-टू हेड रिकॉर्ड आईपीएल में गुजरात और पंजाब के बीच कुल 5 पांच खेले गए हैं। जीटी ने तीन और पीबीकेएस ने दो मैचों में जीत हासिल की। गुजरात ने पिछले साल पंजाब के खिलाफ आखिरी मैच में तीन विकेट से विजयी परचम फहराया था। गुजरात टाइटंस की संभावित प्लेइंग इलेवन शुभमन गिल (कप्तान), जोस बटलर, साई सुदर्शन, शाहरुख खान, ग्लेन फिलिप्स, वॉशिंगटन सुंदर, राहुल तेवतिया, राशिद खान, कगिसो रबाडा, प्रसिध कृष्णा और मोहम्मद सिराज पंजाब किंग्स संभावित प्लेइंग इलेवन श्रेयस अय्यर (कप्तान), प्रभसिमरन सिंह, मार्कस स्टोइनिस, ग्लेन मैक्सवेल, शशांक सिंह, नेहल वढेरा/प्रियांश आर्य, मार्को यानसेन, हरप्रीत बराड़, लॉकी फर्ग्यूसन, अर्शदीप सिंह और युजवेंद्र चहल

मुख्यमंत्री निवास पर उत्साह और शालीनता के साथ मनाया गया जन्म दिवस

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नवाचारों से बेहतर हुआ प्रदेशवासियों का जीवन : प्रधानमंत्री मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने दी मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जन्मदिन की बधाई दी केंद्रीय गृहमंत्री शाह, केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और संगठन पदाधिकारियों ने दी बधाई प्रदेश मंत्री मंडल के सदस्यों, वरिष्ठ अधिकारियों, समाजिक व स्वयं सेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी किया अभिवादन मुख्यमंत्री निवास पर उत्साह और शालीनता के साथ मनाया गया जन्म दिवस मुख्यमंत्री ने सपरिवार पूजा-अर्चना और गौमाता की सेवा कर की दिन की शुरूआत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों के कल्याण के लिए की प्रार्थना तथा विकसित मध्यप्रदेश के सभी संकल्प पूर्ण करने के लिए मांगा आशीर्वाद मुख्यमंत्री निवास पर उत्साह और शालीनता के साथ मनाया गया जन्म दिवस भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को उनके जन्म दिवस की बधाई देते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किए गए नवाचारों से प्रदेशवासियों का जीवन बेहतर हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यही कामना है कि ईश्वर मुख्यमंत्री डॉ. यादव को दीर्घ और स्वस्थ जीवन प्रदान करें और वे जन सेवा में इसी प्रकार निरंतर सक्रिय रहे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की डबल इंजन सरकार विकास और सुशासन के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। केंद्रीय मंत्री शाह ने बाबा महाकाल से मुख्यमंत्री डॉ. यादव के उत्तम स्वास्थ्य और सुदीर्घ जीवन की मंगलकामना की है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने बधाई संदेश में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास और उन्नति के नव शिखर को स्पर्श करे, यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रीगण का आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री ने बधाई दी। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा, हितानंद शर्मा सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और संगठन पदाधिकारी ने जन्म दिवस की बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के जन्म दिवस पर मुख्यमंत्री निवास पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा एवं राजेंद्र शुक्ल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, विश्वास सारंग, एंदल सिंह कंषाना, इंदर सिंह परमार, राकेश शुक्ला, श्रीमती कृष्णा गौर, धर्मेंद्र सिंह लोधी, विधायकगण, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, आयुक्त जनसंपर्क डॉ. सुदाम खाड़े सहित वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं, सामाजिक और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने पुष्प वर्षा, मिष्ठान वितरण और वाद्ययंत्रों के माध्यम से अपनी प्रसन्नता और उत्साह का प्रकटीकरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को गदा और कृपाण भी भेंट की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कार्यकर्ताओं ने विशाल पुष्प हार पहनाकर जन्म दिन की बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिन की शुरुआत मुख्यमंत्री निवास स्थित मंदिर में सपरिवार पूजा अर्चना कर की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवास स्थित गौशाला में सर्व सुखदायिनी गौ माता की सेवा कर प्रदेशवासियों के कल्याण के लिए प्रार्थना की तथा विकसित मध्यप्रदेश के सभी संकल्प पूर्ण करने के लिए गौ माता से आशीर्वाद प्राप्त किया।  

उप मुख्यमंत्री ने खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता प्रबंधन की समीक्षा में दिये निर्देश

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा “मन की बात” में देशवासियों को उचित खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया गया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि संतुलित और स्वच्छ भोजन नागरिकों के स्वास्थ्य का आधार है। उन्होंने निर्देश दिए कि स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और खाद्य संस्थानों को सही खाद्य पदार्थों का उपयोग और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिये की जा रही कार्यवाहियों और गतिविधियों की वृहद समीक्षा की। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, आयुक्त फूड सेफ्टी संदीप यादव, नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन दिनेश कुमार मौर्य, संयुक्त नियंत्रक श्रीमती माया अवस्थी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। हर ज़िले में हेल्दी और हाईजीनिक फ़ूड स्ट्रीट बनायें उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि प्रदेश में एक महीने का विशेष जन जागरूकता अभियान चलाया जाये। जिसमें सभी जिलों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच हो साथ ही अच्छी प्रैक्टिस की जानकारी भी दी जाये। एक माह बाद खाद्य गुणवत्ता में सुधार के प्रभाव की समीक्षा कर आगामी कार्य योजना का निर्धारण किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा संबंधी बेहतर तरीकों के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल करने का प्रयास किया जाए ताकि वे अपने क्षेत्रों में जन-जागरूकता का प्रसार कर सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हर ज़िले में हेल्दी और हाईजेनिक फ़ूड स्ट्रीट प्रमाणन के प्रयास किए जायें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “ईट राइट इंडिया अभियान” को गति देगा और नागरिकों को सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश को आगे ले जाएगा। उन्होंने कहा कि हेल्दी और हाइजीनिक फूड की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। 3 नवीन संभागीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशालाओं का किया जा रहा है निर्माण खाद्य पदार्थों की जाँच में तेज़ी लाने के लिये 3 नई संभागीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशालाओं का निर्माण इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में किया जा रहा है। इंदौर और जबलपुर में मशीनें स्थापित कर मानव संसाधन उपलब्ध कराकर परीक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। ग्वालियर में 60% सिविल कार्य पूरा हो चुका है। भोपाल में हाइटेक माइक्रो बॉयोलॉजी प्रयोगशाला का 80% निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। संयुक्त नियंत्रक श्रीमती अवस्थी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 अंतर्गत प्रदेश में 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2024 तक 10,670 लीगल नमूने और 31,387 सर्विलेंस नमूने लिए गए, जिनमें से 30,692 नमूनों का विश्लेषण किया गया। इनमें 1,663 नमूने असुरक्षित, अवमानक या मिथ्या छाप पाए गए। विभाग ने 1,729 प्रकरण दायर किए और 2,015 प्रकरणों का निपटारा किया, जिनमें से 2,000 प्रकरणों में दोष सिद्धि हुई। इस अवधि में 24,485 लाइसेंस और 1,46,258 रजिस्ट्रेशन जारी किए गए। लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन से ₹12.47 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि ₹9.02 करोड़ का अर्थदंड अधिरोपित कर ₹2.98 करोड़ की वसूली की गई। 13 हज़ार से अधिक खाद्य कारोबारियों को किया जा चुका है प्रशिक्षित खाद्य पदार्थों में मिलावट के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु 270 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर 13,588 खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षित किया गया है। चलित खाद्य प्रयोगशाला के माध्यम से 563 जनजागरूकता कार्यक्रमों में 15,185 नागरिकों को प्रशिक्षण दिया गया। फोर्टिफाइड राइस कर्नेल निर्माताओं को भारत सरकार के सहयोग से प्रशिक्षित किया गया। ‘ईट राइट’ गतिविधि के तहत 10 ईट राइट कैंपस, 9 ईट राइट स्कूल, 3 क्लीन वेजिटेबल मार्केट, 4 सेफ भोग प्लेस, 188 हाईजीन रेटिंग और 2 ईट राइट स्टेशनों को प्रमाणित किया गया है। अवमानक असुरक्षित खाद्य पदार्थों के नियंत्रण के वैधानिक प्रावधान संयुक्त नियंत्रक श्रीमती अवस्थी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत खाद्य पदार्थों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। अवमानक खाद्य (सब स्टैंडर्ड) वह होता है जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता, लेकिन इससे मानव स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं होता। मिथ्या छाप खाद्य (मिस ब्रांड) वह खाद्य पदार्थ है, जिसके संबंध में आवश्यक जानकारी या गुण-दोष लेवल पर सही तरीके से अंकित नहीं किए गए हों। वहीं, असुरक्षित खाद्य (अनसेफ) ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं, जिनकी प्रकृति, गुणवत्ता या सामग्री मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। अधिनियम के तहत दो प्रकार के प्रकरण अभियोजित किए जाते हैं। सिविल प्रकरण (धारा 51 से 58 एवं 61, 63) में अवमानक या मिथ्या छाप से संबंधित अपराध या नियमों का उल्लंघन होने पर मामले न्याय निर्णायक अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं। आपराधिक प्रकरण (धारा 59, 60, 62, 64, 65) में असुरक्षित खाद्य या बिना लाइसेंस व्यापार से जुड़े मामले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत होते हैं, जिनमें अधिकतम आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।  

अल्पसंख्यक का दर्जा मिलने के बाद भी जैन कपल हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत तलाक ले सकते हैं?

इंदौर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सोमवार को अपने एक फैसले के जरिये स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक का दर्जा मिलने के बाद भी जैन समुदाय हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के दायरे में बरकरार है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणियों के साथ इंदौर के फैमिली कोर्ट के एक अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश के आठ फरवरी के बहुचर्चित फैसले को रद्द कर दिया। इस फैसले में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने जैन समुदाय के 37 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और उसकी 35 वर्षीय पत्नी के आपसी सहमति से तलाक लेने की अर्जी को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। फैमिली कोर्ट ने किया था खारिज अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा था कि जैन समुदाय को 2014 में अल्पसंख्यक का दर्जा मिलने के बाद इस धर्म के किसी अनुयायी को ‘‘उसके धर्म से विपरीत मान्यताओं वाले किसी धर्म’’ से संबंधित व्यक्तिगत कानून का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने फैमिली कोर्ट के इस फैसले को हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में अपील दायर करके चुनौती दी थी। अपील पर सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया था। हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस संजीव एस. कलगांवकर ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की अपील मंजूर कर ली। इस मामले में हाईकोर्ट ने क्या कहा? हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश के इस निष्कर्ष को ‘‘गंभीर रूप से अवैध’’ और ‘‘स्पष्ट तौर पर अनुचित’’ करार दिया कि हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधान जैन समुदाय के लोगों पर लागू नहीं होते हैं। बेंच ने अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश को निर्देश भी दिया कि वह जैन समुदाय के दम्पति की तलाक की याचिका पर कानून के अनुसार कार्यवाही करें। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जैन समुदाय को अल्पसंख्यक के रूप में मान्यता देने के लिए 11 साल पहले जारी की गई अधिसूचना किसी भी मौजूदा कानून के प्रावधानों को न तो संशोधित या अमान्य करती है, न ही इन प्रावधानों का स्थान लेती है। बेंच ने कहा कि भारतीय संविधान के संस्थापकों और विधायिका ने अपने साझा विवेक के जरिये हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख समुदायों को हिंदू विवाह अधिनियम के दायरे में रखकर एकता के सूत्र में पिरोया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि जैन समुदाय के दम्पति के मौजूदा मामले में फैमिली कोर्ट के अतिरिक्त अपर प्रधान न्यायाधीश के लिए कानून के स्पष्ट प्रावधानों के विरुद्ध अपने विचार और धारणाएं प्रस्तुत करने का कोई अवसर नहीं था। बेंच ने यह भी कहा कि अगर फैमिली कोर्ट ने इस सवाल पर विचार किया था कि जैन समुदाय के लोगों पर हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं, तो वह इस मामले को हाई कोर्ट भेजकर अदालत की राय जान सकता था। यह है मामला इंदौर फैमिली कोर्ट के सामने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की तरफ से तलाक की याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की शादी 2017 में हुई थी। साल 2024 में दंपती ने फैमिली कोर्ट में हिंदू विवाह अधिनियम (हिंदू मैरिज एक्ट) की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक की मांग की। महिला ने अपने पति के खिलाफ क्रूरता का आरोप लगाया था। हालांकि, सुनवाई में कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका वापस कर दी कि वर्ष 2014 में जैन समाज अल्पसंख्यक हो चुका है ऐसे में हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के तहत अब जैन समाज इसका लाभ नहीं ले सकता। फैमिली कोर्ट ने कहा कि 27 जनवरी 2014 को केंद्र सरकार जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की अधिसूचना जारी कर चुकी है। इस धर्म के अनुयायियों को अब हिंदू विवाह अधिनियम के तहत राहत पाने का कोई अधिकार नहीं है। जैन समुदाय परिवार न्यायालय अधिनियम की धारा 7 के तहत अपने वैवाहिक विवादों को समाधान के लिए पेश करने के लिए स्वतंत्र है।

माध्यमिक शिक्षा मंडल में भी अब CBSE मॉडल की तरह होंगी बोर्ड परीक्षाएं, अधिसूचना जारी

भोपाल मध्य प्रदेश में अब शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सीबीएसई (CBSE) की तरह, अब एमपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा साल में दो बार होगी। यह नई व्यवस्था 2024-25 सत्र से शुरू होगी। पहली परीक्षा फरवरी-मार्च में होगी और दूसरी परीक्षा जुलाई-अगस्त में होगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस बदलाव के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल 1965 में अमेंडमेंट कर नोटिफिकेशन जारी की है। राजपत्र के अनुसार ऐसे छात्रों को जो द्वितीय परीक्षा में बैठने वाले हों, द्वितीय परीक्षा का रिजल्ट आने तक अगली उच्चतर कक्षा में अस्थायी प्रवेश ले सकेंगे। ऐसे छात्र जो मंडल की प्रथम परीक्षा के परिणाम में एक या एक से अधिक विषयों में अनुपस्थित एवं अनुत्तीर्ण रहे है, वह द्वितीय परीक्षा में सम्मलित हो सकेंगे। किसी विषय में उत्तीर्ण भी अंक सुधार सकेंगे। एक से ज्यादा विषय में श्रेणी सुधार संभव ● प्रथम परीक्षा में उत्तीर्ण रहे छात्र एक या एक से अधिक विषयों की द्वितीय परीक्षा में सम्मलित होने के पात्र होंगे। ● प्रायोगिक विषयों में कोई छात्र प्रथम परीक्षा की प्रयोगिक व आंतरिक परीक्षा में केवल अनुत्तीर्ण भाग में सम्मलित होने के लिए पात्र होगा। ● द्वितीय परीक्षा में सम्मलित होने के लिए छात्र को निर्धारित शुल्क के साथ परीक्षा आवेदन पत्र भरना अनिवार्य होगा, पर द्वितीय परीक्षा के दौरान छात्र द्वारा प्रथम परीक्षा में लिए गए विषय में परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जाएगी। विद्यार्थियों के लिए नई प्रक्रिया द्वितीय परीक्षा (Second Exam) में शामिल होने के लिए विद्यार्थियों को एप्लीकेशन लेटर भरना अनिवार्य होगा। लेकिन, परीक्षा के समय विषय में कोई बदलाव की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, जिन छात्रों ने पहले परीक्षा में एक या एक से अधिक विषयों में एब्सेंट या फेल्ड पाया हो, वे अब द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। कैसे तैयार होगा वार्षिक परिणाम? दोनों परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर छात्रों का वार्षिक परिणाम तय किया जाएगा। द्वितीय परीक्षा में केवल वही छात्र शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने पहली परीक्षा दी हो। छात्र अंक सुधार या फेल हुए विषयों में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। अस्थायी प्रवेश और अन्य नियम द्वितीय परीक्षा देने वाले छात्र अगली कक्षा में अस्थायी प्रवेश ले सकेंगे, लेकिन अंतिम परिणाम आने तक उनकी उपस्थिति प्रोविजनल होगी। प्रायोगिक विषयों में केवल अनुत्तीर्ण भाग की ही दोबारा परीक्षा दी जा सकेगी। छात्र परीक्षा शुल्क भरकर ही द्वितीय परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे। पहली परीक्षा में चुने गए विषय बदलने की अनुमति नहीं होगी। CBSE की तर्ज पर MP बोर्ड का कदम इससे पहले, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (CBSE) ने भी अगले सत्र से 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित करने का फैसला किया था। MP बोर्ड ने भी इसी मॉडल को अपनाया है। हर साल MP बोर्ड की परीक्षाओं में लगभग 18 लाख छात्र शामिल होते हैं। पूरक परीक्षा की जगह द्वितीय परीक्षा पहले बोर्ड की मुख्य परीक्षा के बाद जुलाई में पूरक परीक्षा होती थी, लेकिन अब इसकी जगह द्वितीय परीक्षा ली जाएगी। इससे छात्रों को अधिक मौका मिलेगा और रिजल्ट की प्रक्रिया भी पहले से बेहतर होगी। इस नई व्यवस्था पर 15 दिनों के भीतर सुझाव या आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। उसके बाद इसे अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाएगा। दोनों परीक्षाओं के आधार पर तैयार होगा रिजल्ट     द्वितीय परीक्षा में वही विद्यार्थी शामिल होंगे, जिन्होंने पहली परीक्षा दी है। इसके बाद बोर्ड की पहली परीक्षा और दूसरी परीक्षा में प्राप्त अंक के आधार पर वार्षिक परीक्षा का परिणाम तैयार किया जाएगा।     उल्लेखनीय है कि हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीबीएसई) ने भी अगले शैक्षणिक सत्र से दो बार 10वीं और 12वीं की परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। इसी तर्ज पर मप्र बोर्ड भी आगे बढ़ा है।     मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं व 12वीं परीक्षा में हर साल करीब 18 लाख विद्यार्थी शामिल होते हैं। बोर्ड की अभी तक एक ही परीक्षा फरवरी या मार्च में होती थी। मुख्य परीक्षा के रिजल्ट के बाद जुलाई में पूरक परीक्षा आयोजित की जाती थी, जिसे अब नई व्यवस्था में नहीं कराने का निर्णय लिया गया है। अब ऐसी रहेगी व्यवस्था द्वितीय परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थी पूर्ण परीक्षा परिणाम घोषित होने तक माध्यमिक शिक्षा मंडल या महाविद्यालय द्वारा संबद्धता प्राप्त संस्था के प्रधानाचार्यों से अनुमति प्राप्त कर अगली कक्षा में अस्थायी प्रवेश ले सकेंगे। ऐसे विद्यार्थियों के लिए, जो मंडल की प्रथम परीक्षा के परीक्षा परिणाम में एक या एक से अधिक विषयों में अनुपस्थित अथवा अनुत्तीर्ण रहे हों, द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। ऐसे अभ्यर्थी, जो किसी विषय में उत्तीर्ण हो गए हों, वे भी अंक सुधार के लिए द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। प्रथम परीक्षा में उत्तीर्ण रहे विद्यार्थी भी एक या एक से अधिक विषयों में द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। प्रायोगिक विषयों में कोई विद्यार्थी प्रथम परीक्षा की प्रायोगिक/आंतरिक परीक्षा के केवल अनुत्तीर्ण भाग में शामिल होने के लिए पात्र होगा। द्वितीय परीक्षा में शामिल होने के लिए विद्यार्थी को आवेदन-पत्र भरना अनिवार्य होगा, लेकिन द्वितीय परीक्षा के दौरान विद्यार्थी द्वारा प्रथम परीक्षा में लिए गए विषय में परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी।

मध्यप्रदेश में विधायकों को एक सौगात मिल सकती, वेतन में बढ़ोतरी की न होकर कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाने

 भोपाल सोमवार को केंद्र सरकार ने सांसदों और पूर्व सांसदों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी का आदेश जारी कर दिया है और अब जल्द ही मध्यप्रदेश में भी विधायकों को एक सौगात मिल सकती है. हालांकि, यह सौगात वेतन में बढ़ोतरी की न होकर कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाने की है. एमपी के विधायकों को जल्द ही कर्ज लेने की सीमा दोगुनी करने पर फैसला हो सकता है. जिसके बाद विधायक घर के लिए 50 लाख और गाड़ी के लिए 30 लाख रुपए तक का लोन ले सकेंगे. दरअसल, विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने विधायकों के लिए लोन की सीमा को डबल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है. वहां से मंज़ूरी मिलने के बाद इसे संसदीय कार्य विभाग को भेजा जाएगा और इसके बाद प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया जा सकता है. वर्तमान में विधायक घर के लिए 25 लाख रुपए और गाड़ी के लिए 15 लाख रुपए तक का लोन ले सकते हैं, लेकिन कैबिनेट से मंज़ूरी मिलने के बाद यह लिमिट बढ़कर सीधा डबल हो जाएगी यानी घर के लिए 50 लाख और गाड़ी के लिए 30 लाख रुपए तक का लोन विधायक ले सकेंगे. यही नहीं, विधायक अगर पुरानी लिमिट यानी 25 लाख और 15 लाख तक का लोन लेंगे तो उन्हें 4% की दर से ब्याज देना होगा और शेष ब्याज राशि का भुगतान सरकार की ओर से किया जाएगा. विधानसभा सचिवालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो सदस्य सुविधा समिति की ओर से प्रस्ताव तो भेजा जा चुका है, लेकिन अभी इसपर जल्द निर्णय होने की संभावना कम है. बता दें कि मध्य प्रदेश में विधायकों को वेतन और भत्ते मिलाकर हर महीने 1 लाख रुपए से ज्यादा राशि मिलती है. इसके अलावा पूरे प्रदेश में वे मुफ्त यात्रा कर सकते हैं और सालाना 10 हज़ार किलोमीटर की हवाई यात्रा मुफ्त होती है. वहीं, विधानसभा सत्र के दौरान क्षेत्र से भोपाल आने का खर्चा भी दिया जाता है.  

संपत्ति कर, जल प्रभार एवं अन्य उपभोक्ता प्रभार के अधिभार में उपभोक्ताओं को छूट का निर्णय

भोपाल  नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की अवधि में संपत्ति कर, जल प्रभार एवं अन्य उपभोक्ता प्रभार के अधिभार में उपभोक्ताओं को छूट देने का निर्णय लिया है। यह छूट उपभोक्ताओं को 31 मार्च तक ऑनलाइन भुगतान की दशा में की जाएगी। इस संबंध में विभाग ने नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर परिषद को पत्र लिखकर निर्देश जारी किए हैं। आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास ने बताया कि वर्ष 2024-25 वित्तीय वर्ष की कर वसूली 31 मार्च तक ही हो सकेगी। वर्तमान में 15वें वित्त आयोग की शर्तों के अनुसार प्रतिवर्ष संपत्ति कर की वसूली में राज्य की ग्रास स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीएसडीपी) की औसत वृद्धि के अनुरूप वृद्धि किया जाना अनिवार्य है। इस स्थिति को देखते हुए वृद्धि न किए जाने की स्थिति में संबंधित नगरीय निकायों को 15वें वित्त आयेाग के अनुदान से वंचित होना पड़ सकता है। नगरीय निकायों को अपने क्षेत्र के उपभोक्ताओं को समस्त प्रकार के करों की वसूली नियत समय में किए जाने के लिए जागरूक करने के लिए कहा गया है। नागरिक इस संबंध में विस्तृत जानकारी अपने क्षेत्र के नगरीय निकाय के वार्ड कार्यालय से भी प्राप्त कर सकते हैं।

पति के प्रेम संबंध से परेशान थी डॉक्टर रिचा, पुलिस ने पति अभिजीत के खिलाफ दर्ज किया केस

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में डॉक्टर रिचा पांडे सुसाइड मामले में पति के प्रेम संबंध का खुलासा हुआ है। पति के प्रेम संबंध से डॉक्टर रिचा पांडे परेशान थी। पति अभिजीत पांडे का एक लड़की से प्रेम संबंध था। शादी के बाद भी अभिजीत पांडे लड़की के संपर्क में था। इसी बात को लेकर दोनों पति-पत्नी के बीच में अक्सर विवाद होता था। इसी से परेशान होकर रिचा पांडे ने एनीस्थीसिया के पांच इंजेक्शन लगाकर खुदकुशी कर ली थी। पुलिस ने आरोपी पति अभिजीत पांडे के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना का केस दर्ज किया है। आरोपी से पूछताछ और मोबाइल से मिले सबूत के आधार पर FIR दर्ज की गई है। बता दें कि मृतका मूलतः लखनऊ की निवासी थी। एमपी सतना निवासी अभिजीत पांडेय से 4 माह पूर्व शादी हुई थी। बीडीएस डॉक्टर पति की एम पी नगर में प्राइवेट क्लीनिक है। मौत के बाद मौके पर पहुंची एफएसएल (FSL) की टीम और मृतका के हाथ में इंजेक्शन के मिले निशान के बाद जांच आगे बढ़ी थी। मामले में पुलिस ने पति से पूछताछ की थी। वहीं मृतका के पिता ने भी दामाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस के हाथ रिचा पांडे की वॉट्सऐप चैट लगी, जांच में सामने आया कि डॉ. अभिजीत किसी और महिला के साथ रिश्ते में था, जिसकी भनक उसकी पत्नी को लग चुकी थी। रिचा ने कई बार पति को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। चैट में कई बार पति ने रिचा को आत्महत्या के लिए उकसाया था। वह बार-बार कहता था, “मर जाओ”, जिससे रिचा मानसिक रूप से बेहद परेशान रहने लगी थी। बेवफाई के साथ अत्याचार भी जांच में यह भी सामने आया कि डॉ. अभिजीत अपनी कथित प्रेमिका पर खूब पैसे खर्च करता था। जब रिचा को यह बात पता चली, तो उसने विरोध किया, लेकिन पति ने उसकी एक न सुनी। इसके चलते दोनों के बीच अक्सर झगड़े होने लगे। पति न केवल उसे धोखा दे रहा था, बल्कि मानसिक रूप से भी प्रताड़ित कर रहा था। पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार पुलिस ने डॉ. अभिजीत के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही, पुलिस अब आरोपी के मोबाइल डेटा और क्लिनिक के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपी के मोबाइल से और भी सच्चाइयां सामने आ सकती हैं। रिचा के परिवार वालों ने कड़े कदम उठाने की मांग की है, ताकि उनकी बेटी को न्याय मिल सके।    

15 दिवसीय विशेष अभियान : हैंडपंप और सार्वजनिक नलों की मरम्मत

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि ग्रीष्मकाल में प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक निर्बाध और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी विभागों के बीच समन्वय और जनसहभागिता अनिवार्य है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जल संकट से निपटने के लिए जल संरक्षण की दिशा में ठोस और निर्णायक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, जिससे आने वाले समय में प्रदेश जल संकट की किसी भी स्थिति से सुरक्षित रह सके। मुख्यमंत्री साय मंत्रालय में आयोजित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं जल संसाधन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रीष्म ऋतु के दौरान प्रदेशभर में पेयजल की समुचित और सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी उपायों को प्राथमिकता पर क्रियान्वित किया जाए। मुख्यमंत्री साय ने ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर में पेयजल की उपलब्धता को राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित किया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जल संकट की किसी भी संभावना को गंभीरता से लेते हुए त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन, ऊर्जा, वन एवं कृषि विभाग को परस्पर तालमेल के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उत्पन्न हो रही पेयजल समस्याओं के समाधान हेतु अल्पकालिक और दीर्घकालिक रणनीतियाँ समान रूप से आवश्यक हैं। इसके लिए उन्होंने जल संरक्षण के प्रभावी उपायों जैसे रिचार्ज पिट, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और सौर ऊर्जा आधारित पंपों को तेजी से बढ़ावा देने पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने भूजल के अनियंत्रित दोहन पर सख्त निगरानी रखने और कम जल-खपत वाली फसलों की खेती को प्रोत्साहन देने के निर्देश दिए, जिससे जल संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे केवल कार्यालयों तक सीमित न रहते हुए, फील्ड में जाकर स्वयं स्थिति का आकलन करें और स्थल पर ही पेयजल संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आगामी 15 दिनों के भीतर प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर सभी हैंडपंपों और सार्वजनिक नलों की मरम्मत सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अनेक स्थानों पर हैंडपंपों में केवल मामूली तकनीकी समस्याएँ होती हैं, जिन्हें यदि समय रहते स्थानीय मैकेनिक द्वारा दुरुस्त किया जाए, तो नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकता है। बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि राज्य सरकार ने इस कार्य के त्वरित निष्पादन हेतु पूरे प्रदेश में मोबाइल वैन यूनिट्स की विशेष व्यवस्था की है, जो आगामी चार महीनों तक फील्ड में सक्रिय रहकर रखरखाव और मरम्मत का कार्य प्राथमिकता से संपादित करेंगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इसके लिए स्थानीय भू-प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण उपायों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि दीर्घकालिक समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने वन्य प्राणियों के लिए गर्मी के मौसम में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी स्पष्ट निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देशित किया कि प्रदेशभर में अमृत सरोवरों को जल प्रबंधन के मॉडल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि वे जल संग्रहण, वर्षा जल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के सफल उदाहरण बन सकें। उन्होंने तालाबों और जलाशयों के आसपास हो रहे अतिक्रमण को प्राथमिकता से हटाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जलस्रोतों की रक्षा करना केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। मुख्यमंत्री साय ने सौर ऊर्जा आधारित पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव की प्रक्रिया को तीव्र गति से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन से जल स्रोतों के अपव्यय को नियंत्रित किया जा सकता है और ऊर्जा की बचत भी सुनिश्चित होती है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि सोलर पेयजल योजनाओं में ‘सेंसर आधारित स्वचालित प्रणाली’ लागू की जाए, जिससे जल वितरण की निगरानी और नियंत्रण तकनीकी रूप से संभव हो सके और स्मार्ट जल प्रबंधन प्रणाली की दिशा में राज्य एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाए। मुख्यमंत्री ने पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका को जल संरक्षण के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ग्राम स्तर पर जनजागरूकता और सहभागिता ही जल संकट का दीर्घकालिक समाधान है। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं में जल संरक्षण, भूजल प्रबंधन और निस्तारी जल योजनाओं पर व्यापक चर्चा सुनिश्चित की जाए, ताकि समुदाय स्तर पर ठोस पहल हो सके। मुख्यमंत्री ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को इन गतिविधियों के सुनियोजित क्रियान्वयन और ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से निर्देशित किया। इस उच्चस्तरीय बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक और कृषि, वन, जलवायु परिवर्तन एवं ऊर्जा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

VFJ को 600 करोड़ का मिला ऑर्डर, सेना ने मांगे 590 स्टेलियन और 800 LTPA; बीएसएफ को भी सप्लाई होंगे 400 वाहन

जबलपुर जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री (VFJ) को बड़ा ऑर्डर मिला है। भारतीय सेना ने 590 स्टेलियन और 800 एलटीपीए बनाने का काम दिया है। जिसकी कीमत करीब 600 करोड़ रुपए है। नया काम मिलने से फैक्ट्री में उत्पादन की रफ्तार बढ़ गई है। वीएफजे की शान है स्टेलियन-एलपीटीए जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री आजादी के बाद से सेना के लिए वाहन तैयार कर रही है। शक्तिमान, जोंगा जैसी शक्तिशाली गाड़ियों के बाद फैक्ट्री में स्टेलियन और एलपीटीए बनने की शुरुआत हुई थी। 2025-26 वित्तीय वर्ष में 1390 गाड़ियों का ऑर्डर मिला है। बीएसएफ ने फैक्ट्री में डाला डेरा बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की बटालियन भी अपने ऑर्डर के हिसाब से उत्पादन कराने के लिए निर्माणी में डेरा डाले हुए हैं। फैक्ट्री के पास 423 वाटर ब्राउजर के ऑर्डर पेंडिंग है। बीएसएफ को कुछ मॉडिफिकेशन भी चाहिए है। फोर्स के तीन कर्नल और सात जवानों को ऑफिसर्स मेस में ठहराया गया है। ये सभी काम के दौरान मौके पर मौजूद रहते हैं। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की बटालियन भी अपने ऑर्डर के हिसाब से उत्पादन कराने के लिए निर्माणी में डेरा डाले हुए हैं। फैक्ट्री के पास 423 वाटर ब्राउजर के ऑर्डर पेंडिंग है। बीएसएफ को कुछ मॉडिफिकेशन भी चाहिए है। फोर्स के तीन कर्नल और सात जवानों को ऑफिसर्स मेस में ठहराया गया है। ये सभी काम के दौरान मौके पर मौजूद रहते हैं।

बिहार में15000 होमगार्ड पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, 10वीं पास करें आवेदन

15000 होमगार्ड पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के योग्य व इच्छुक उम्मीदवार 27 मार्च से ऑफिशियल वेबसाइट onlinebhg.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर करते है। विभाग का नाम: बिहार गृह रक्षा वाहिनी पदों की संख्या: 1500 पद का नाम: होमगार्ड पदों का विवरण : नालन्दा: 812 पद भोजपुर: 511 पद रोहतास: 559 पद बक्सर: 312 पद कैमूर/भभुआ: 241 पद गया: 909 पद पटना: 1479 पद नवादा: 361 पद जहानाबाज: 317 पद औरंगाबाद: 217 पद मोतिहारी: 474 पद बेतिया: 311 पद दरभंगा: 741 पद समस्तीपुर: 731 पद मुजफ्फरनगर: 296 पद सीतामढी: 439 पद शिवहरी: 78 पद छपरा: 690 पद सिवान: 231 पद गोपालगंज: 395 पद मधुबनी: 607 पद पूर्णियां: 280 पद कटिहार: 484 पद अररिया: 122 पद किशनगंज: 280 पद सहरसा: 74 पद सुपौल: 144 पद लखीसराय: 123 पद शेखपुरा: 192 पद खगड़िया: 111 पद बेगूसराय: 422 पद मधेपुरा: 193 पद भागलपुर: 666 पद बांका: 294 मुंगेर: 171 पद जमुई: 257 पद योगयता : मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं या 12वीं पास एज लिमिट : 18 से 25 साल चयन प्रकिया : लिखित परीक्षा पीईटी/पीएसटी डॉक्यूमेंट वेरिफिकिशन मेडिकल टेस्ट वेतन : विभाग के नियमों के अनुसार आवेदन प्रकिया : ऑफिशियल वेबसाइट onlinebhg.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन करें।

हम अपने देश से बांग्लादेशियों को भगा नहीं सकते , उनका आर्थिक बहिष्कार होना चाहिए: रणजीत सावरकर

इंदौर इंदौर में वीर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण हुआ। इस मौके पर मुख्यमंत्री मोहन यादव के अलावा सावरकर के पोते रणजीत सावरकर भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हम अपने देश से बांग्लादेशियों को भगा नहीं सकते , लेकिन उनका आर्थिक बहिष्कार होना चाहिए। अब तो वे पहचान छुपाकर रहने लगे है। उनका बहिष्कार होगा तो वे संकट में आएंगे औ देश से उन्हें जाना पड़ेगा।  रणजीत ने कहा कि  आजादी के समय देश में 8 प्रतिशत मुस्लिम थे, जो अब 22 प्रतिशत हो गए। वर्ष 1970 में बांग्लादेश से एक-डेढ़ करोड़ मुस्लिम देश में आए थे। अब उनकी संख्या भी काफी बढ़ गई है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कहा कि कई प्रदेशों मेें हिन्दूवादी सरकार है। कई सीटों पर कम अंतरों से जीत हुई है। वहां अब बांग्लादेशी मुस्लिम को बसाया जा रहा है, ताकि भविष्य में उनके उम्मीदवार जीत सके। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि वीर सावरकर ने अनेक कष्ट सहे। जेल में उन्हें यातनाएं दी गई। देश को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इतिहास को सही रुपों में समझने की जरुरत है। मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर के प्रगति नगर में जनसहयोग से वीर सावरकर की प्रतिमा लगाई गई है। विधायक मधु वर्मा ने प्रारंभ में स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे।   वीर सावरकर के पोते रणजीत सावरकर ने कहा कि आजादी के समय देश में 8 फीसदी मुस्लिम थे, जो अब 22 फीसदी हो गए हैं। 1970 में डेढ़-दो करोड़ बांग्लादेशी मुस्लिम आ गए। अब यह 10 करोड़ हो गए हैं। उन्होंने आगे कहा- देखने में लगता है कि आज अधिकांश जगह हिंदुत्व वादी सरकार है। लेकिन कम मार्जिन से जीत वाली सीटों की संख्या अधिक है। इन बांग्लादेशी मुस्लिमों को वहां बसाया जा रहा है, जहां कम मार्जिन था। ताकि आगे जाकर उनके उम्मीदवार जीत सकें। ऐसा हुआ तो जो हिंदुत्व वादी सरकार हम देख रहे हैं वह आने वाले समय में आखरी सरकार सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर भारत के महान क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी, चिन्तक, समाज सुधारक, इतिहासकार, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता थे। अपने कृतित्व से वे वीर सावरकर के नाम से लोकप्रिय हुए। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर सावरकर को याद करते ही आनंद एवं रोमांच की अनुभूति होती है। उन्होंने अनेक कष्ट एवं प्रताड़ना सह कर देश को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन आदर्श है। काला पानी जैसी सबसे कठिन सजा पाकर भी वे अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटे। वीर सावरकर के इतिहास को सही रूप में समझने की आवश्यकता है। हमारा लक्ष्य है कि उनके इतिहास को सही रूप में जन-जन तक पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस स्थान की स्थापना जिस महापुरुष के नाम से होती है वह स्थान उन्हीं के नाम से जाना और पहचाना जाए। इसके लिए सूचना पटल लगाने सहित शासकीय पत्राचार और अन्य कार्यों में भी उनके नाम का उपयोग किया जाए।

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