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लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल हुआ पास, पक्ष में 288; विरोध में 232 वोट पड़े

नई दिल्ली बुधवार को देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने लोकसभा में सफलतापूर्वक वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 को पारित करा लिया। आज इसे राज्यसभा में पारित कराने के लिए पेश किया जाएगा। 543 सदस्यों वाले लोकसभा में बिल के पक्ष में 288 मत पड़े। वहीं, इसके विरोध में 233 वोट डाले गए। इसके बाद सदन ने दोनों ही बिल को मंजूरी दे दी। राज्यसभा की जहां तक बात है तो यहां कुल 236 सदस्य हैं। बिल को पास कराने के लिए डाले गए मतों में से सर्वाधिक मतों की आवश्यकता होगी। इन दिनों भाजपा यहां सबसे बड़ी पार्टी है। उसके पास कुल 98 सांसद हैं। एनडीए की जहां तक बात करें तो उसके पास 125 सांसद हैं। भाजपा के अलावा जेडीयू के 4, अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के 3 और टीडीपी के 2 सांसद शामिल हैं। नंबर गेम को देखते हुए एनडीए को इस सदन में भी इस बहुचर्चित संशोधन विधेयक को पारित कराने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। ऐसा इसलिए भी क्योंकि एनडीए ने लोकसभा में एकजुटता दिखाया है। राज्यसभा में क्या है नंबर गेम? संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा की बात करें तो यहां सदन की मौजदा स्ट्रेंथ 236 सदस्यों की है. इसमें बीजेपी का संख्याबल 98 है. गठबंधन के लिहाज से देखें तो एनडीए के सदस्यों की संख्या 115 के करीब है. छह मनोनीत सदस्यों को भी जोड़ लें जो आमतौर पर सरकार के पक्ष में ही मतदान करते हैं तो नंबरगेम में एनडीए 121 तक पहुंच जा रहा है जो विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी 119 से दो अधिक है. कांग्रेस के 27 और इंडिया ब्लॉक के अन्य घटक दलों के 58 सदस्य राज्यसभा में हैं. कुल मिलाकर विपक्ष के पास 85 सांसद हैं. वाईएसआर कांग्रेस के नौ, बीजेडी के सात और एआईएडीएमके के चार सदस्य राज्यसभा में हैं. छोटे दलों और निर्दलीय मिलाकर तीन सदस्य हैं जो न तो सत्ताधारी गठबंधन में हैं और ना ही विपक्षी गठबंधन में. किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त 2024 को ये बिल लोकसभा में पेश किया था, जिसे विपक्ष के हंगामे के बाद संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था. जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली जेपीसी की रिपोर्ट के बाद इससे संबंधित संशोधित बिल को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी थी. सत्तापक्ष का कहना है कि वक्फ संशोधन बिल के माध्यम से इसकी संपत्तियों से संबंधित विवादों के निपटारे का अधिकार मिलेगा. वक्फ की संपत्ति का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और इससे मुस्लिम समाज की महिलाओं को भी मदद मिल सकेगी. बता दें कि इससे पहले वक्फ संशोधन बिल लोकसभा से पारित हो गया है. वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में वोटिंग हुई, जिसमें 464 कुल वोटों में से 288 पक्ष में और 232 विरोध में रहे. लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर 12 घंटे से ज्यादा समय तक बहस चली. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और विपक्ष के सांसदों ने अपने-अपने पक्ष रखे. अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा और फिर राष्ट्रपति के पास अप्रूवल के लिए भेजा जाएगा. इससे पहलो केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सरकार के इस कदम को मुस्लिम विरोधी बताने के कई विपक्षी सदस्यों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि इस विधेयक को मुसलमानों को बांटने वाला बताया जा रहा है, जबकि सरकार इसके जरिए शिया, सुन्नी समेत समुदाय के सभी वर्गों को एक साथ ला रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार तो देश में सबसे छोटे अल्पसंख्यक समुदाय पारसी को भी बचाने के लिए प्रयास कर रही है। रिजिजू ने कहा, ‘‘विपक्ष सरकार की आलोचना कर सकता है, लेकिन यह कहना कि हिंदुस्तान में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है, सही नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं खुद अल्पसंख्यक हूं और कह सकता हूं कि भारत से ज्यादा अल्पसंख्यक कहीं सुरक्षित नहीं हैं। हर अल्पसंख्यक समुदाय शान से इस देश में जीवन जीता है।’’ उन्होंने विपक्षी सदस्यों को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘सदन में इस तरह देश को बदनाम करना….आने वाली पीढ़ियां आपको माफ नहीं करेंगी।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विधेयक के पारित होने के बाद देश के करोड़ों मुसलमान प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देंगे। रिजिजू के जवाब के बाद सदन ने अनेक विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए 232 के मुकाबले 288 मतों से वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित किया। सदन ने मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 को भी ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल भाजपा के सहयोगी दलों जदयू, तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जनसेना और जनता दल (सेक्यूलर) ने वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन किया। झारखंड में भाजपा की सहयोगी आजसू ने भी विधेयक का समर्थन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक एवं अन्य विपक्षी दलों ने विधेयक को असंवैधानिक और मुसलमानों की जमीन हड़पने वाला बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया। ऐसे में ये भी सवाल हैं कि क्या एक बिल से मोदी सरकार ने देश में धर्मनिरपेक्षता की राजनीति का गणित बदल दिया? क्या एक बिल से मोदी सरकार ने दिखाया कि मुस्लिमों को डराकर वोट की सियासत नहीं चलेगी? क्या एक बिल ने बता दिया कि मुस्लिमों के हित में बदलाव का मतलब सेक्युरिज्म का विरोध नहीं होता? क्या सरकार ने दिखा दिया कि सीटें घटने से संसद में आक्रामक फैसले लेने की गति नहीं घटी है? क्या वक्फ बिल पर मुहर के साथ अब देश में सियासत की नई सेक्युलरिज्म देखी जाएगी? फैसला लेने में पीएम मोदी का कोई सानी नहीं विपक्ष को ये लगता रहा होगा कि बिहार में नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के सांसदों के भरोसे चलती सरकार वक्फ पर फैसला लेने में हिचकिचाएगी, लेकिन 240 सीट के साथ भी संसद में बीजेपी वैसी ही दिखी जैसे 303 सीट के साथ रही थी. 2019 में जब मोदी सरकार दूसरी बार सत्ता में आई तो 6 महीने के भीतर सरकार ने तीन तलाक, आर्टिकल 370 से आजादी और CAA कानून तीनों को पास करा दिया. तब बीजेपी के पास अपने दम पर 303 सीट का बहुमत था. अबकी बार जब … Read more

रामनवमी पर घर बैठे होंगे रामलला के दर्शन, जियो हॉटस्टार पर आएगा LIVE

अयोध्‍या रामनवमी पर अगर घर बैठे अयोध्‍या में विराजमान रामलला के दर्शन हो जाएं तो कैसा रहेगा! करोड़ों भारतीयों की यह मुराद OTT पर पूरी होने वाली है। जी हां, 6 अप्रैल 2025 को सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक अयोध्‍या राम मंदिर से रामनवमी के उत्‍सव का LIVE टेलीकास्‍ट होने वाला है। यानी आप घर बैठे, परिवार के साथ बिना अयोध्‍या गए, रामलला के दर्शन कर सकते हैं। देश के दिग्‍गज ओटीटी प्‍लेटफॉर्म ‘जियो हॉटस्टार’ इस LIVE स्ट्रीमिंग के अनुभव को खास बनाने की तैयारी में है। इससे पहले महाशिवरात्रि के मौके पर भी 12 ज्‍योतिर्लिंगों से आरती को लाइव स्‍ट्रीम किया गया था। जबकि अहमदाबाद में कोल्डप्ले के ‘म्यूज‍िक ऑफ द स्फीयर्स’ की भी लाइवस्ट्रीम हुई थी। 6 अप्रैल को सुबह 8 बजे से होगा LIVE प्रसारण JioHotstar ने घोषणा की है कि 6 अप्रैल को सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक अयोध्या से एक स्‍पेशल लाइव स्ट्रीम के जरिए दर्शकों के लिए राम नवमी का उत्सव मनाया जाएगा। खास बात यह कि इस समारोह में LIVE स्‍ट्रीमिंग के साथ महानायक अमिताभ बच्चन राम कथा की प्रेरक कहानियां भी सुनाएंगे। अमिताभ बच्‍चन सुनाएंगे भगवान राम की कहानियां रामनवमी पर अमिताभ बच्चन भगवान राम के मूल्यों पर कालातीत ज्ञान और विचार शेयर करेंगे। ओटीटी प्‍लेटफॉर्म का कहना है कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। इसमें भगवान राम के जन्म, उनकी जीवन यात्रा, रामायण के सात कांडों को दर्शाया जाएगा, और यह सब राम जन्मभूमि से लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान होगा। पूजा, भद्राचलम, पंचवटी, चित्रकूट और आरती भी इतना ही नहीं, अमिताभ बच्चन इस दौरान बच्चों के साथ एक इंटरैक्टिव सत्र की मेजबानी भी करेंगे, जिसमें कांडों की चुनिंदा कहानियों और दोहों को वह अपने अंदाज में बताएंगे। लाइव स्‍ट्रीमिंग में अयोध्या में की जाने वाली विशेष पूजा से लेकर, मंदिरों में पवित्र अनुष्ठान, भद्राचलम, पंचवटी, चित्रकूट और आरती की स्‍ट्रीमिंग होगी। इसके अलावा कैलाश खेर और मालिनी अवस्थी जैसे प्रतिष्ठित कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दिखाई जाएंगी। JioHotstar ने अपने बयान में कहा, ‘रामनवमी हमारे देश में एक बहुत ही पूजनीय अवसर है। देश के हर कोने में लाखों लोगों तक इसके पवित्र उत्सव को लाने के लिए हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं। महानायक अमिताभ बच्चन द्वारा भगवान राम की यात्रा का वर्णन इस अनुभव को यादगार बना देगा। अमिताभ बच्‍चन बोले- यह जीवनभर का सम्मान है दूसरी ओर, अमिताभ बच्चन ने कहा, ‘ऐसे पवित्र अवसर का हिस्सा बनना जीवनभर का सम्मान है। रामनवमी एक त्योहार से कहीं अधिक है। यह गहन चिंतन का क्षण है, धर्म, भक्ति और धार्मिकता के आदर्शों को अपनाने का समय है।’

घंटों रील्स देखने की है लत, सेहत के लिए कैसे बन रही है खतरनाक, डॉक्टर ने दी अंधेपन की चेतावनी

नई दिल्ली मानसिक स्वास्थ्य पर रील के प्रभाव के बारे में चिंताओं के बाद, डॉक्टर अब एक नए बढ़ते संकट के बारे में चेतावनी दे रहे हैं। अत्यधिक स्क्रीन टाइम, विशेष रूप से इंस्टाग्राम, टिकटॉक, फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील देखने से सभी आयु समूहों में, विशेष रूप से बच्चों और युवा वयस्कों में आंखों से जुड़ी बीमारियों की वृद्धि हो रही है। यह बात एशिया पैसिफिक एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी और ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की यशोभूमि – इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर, द्वारका, नई दिल्ली में चल रही संयुक्त बैठक के दौरान प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई है। ड्राई आई सिंड्रोम क खतरा बढ़ा एशिया पैसिफिक एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के कांग्रेस अध्यक्ष डॉक्टर ललित वर्मा ने अत्यधिक स्क्रीन एक्सपोजर के कारण होने वाली ‘डिजिटल आई स्ट्रेन की महामारी’ के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा, “हम ड्राई आई सिंड्रोम, मायोपिया प्रोग्रेस, आई स्ट्रेन और यहां तक ​​कि शुरुआती दौर में ही भेंगापन के मामलों में तेज वृद्धि देख रहे हैं, खासकर उन बच्चों में जो घंटों रील देखते रहते हैं।” “हाल ही में एक छात्र लगातार आंखों में जलन और धुंधली दृष्टि की शिकायत लेकर हमारे पास आया था। जांच के बाद, हमने पाया कि घर पर लंबे समय तक मोबाइल पर रील देखने के कारण उसकी आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं आ रहे थे। उसे तुरंत आई ड्रॉप दी गई और 20-20-20 नियम का पालन करने की सलाह दी गई। इस नियम में हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लेकर 20 फीट दूर किसी चीज को देखना होता है। आयोजन समिति के अध्यक्ष और अखिल भारतीय नेत्र रोग सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. हरबंश लाल ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझाया, “छोटी, आकर्षक रीलें लंबे समय तक ध्यान खींचने और बनाए रखने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। हालांकि, लगातार स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने से पलकें झपकने की दर 50% कम हो जाती है, जिससे ड्राई आई सिंड्रोम और एकोमोडेशन स्पाज़्म (निकट और दूर की वस्तुओं के बीच फ़ोकस बदलने में कठिनाई) की समस्या हो सकती है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अगर यह आदत अनियंत्रित रूप से जारी रहती है, तो इससे दीर्घकालिक दृष्टि संबंधी समस्याएं और यहां तक ​​कि स्थायी रूप से आंखों में तनाव हो सकता है। डॉ. हरबंश लाल ने आगे कहा कि “जो बच्चे रोजाना घंटों तक रील से चिपके रहते हैं, उनमें शुरुआती मायोपिया विकसित होने का जोखिम होता है, जो पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रहा है। वयस्कों को भी नीली रोशनी के संपर्क में आने से अक्सर सिरदर्द, माइग्रेन और नींद संबंधी विकार का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, हाल के अध्ययनों के अनुसार 2050 तक दुनिया की 50% से ज़्यादा आबादी मायोपिक होगी, जो अंधेपन का सबसे आम कारण है। अब स्क्रीन टाइम बढ़ने के साथ हम 30 साल की उम्र तक चश्मे का नंबर में बदलाव देख रहे हैं, जो कुछ दशक पहले 21 साल था। अध्ययनों से पता चलता है कि बढ़ती संख्या में लोग, विशेष रूप से छात्र और कामकाजी पेशेवर, उच्च गति, दृष्टि उत्तेजक सामग्री के लंबे समय तक संपर्क के कारण डिजिटल आंखों के तनाव, स्क्विंटिंग और खराब दृष्टि से जूझ रहे हैं। डॉक्टर लगातार रील से जुड़े सामाजिक अलगाव, मानसिक थकान और संज्ञानात्मक अधिभार की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति को भी देखते हैं। AIOS के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. समर बसाक ने अत्यधिक स्क्रीन समय के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान पर प्रकाश डाला: “हम एक चिंताजनक पैटर्न देख रहे हैं जहां लोग रील में इतने लीन हो जाते हैं कि वे वास्तविक दुनिया की बातचीत को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे पारिवारिक रिश्ते खराब हो जाते हैं और शिक्षा और काम पर ध्यान कम हो जाता है। AIOS के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ और आने वाले अध्यक्ष डॉ. पार्थ बिस्वास ने कहा, “कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था, तेजी से दृश्य परिवर्तन और लंबे समय तक निकट-फोकस गतिविधि का संयोजन आंखों को अत्यधिक उत्तेजित कर रहा है, जिससे एक ऐसी दिक्कत हो रही है जिसे हम ‘रील विजन सिंड्रोम’ कहते हैं। समय आ गया है कि हम इसे गंभीरता से लें, इससे पहले कि यह एक पूर्ण विकसित सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन जाए।” अत्यधिक रील देखने के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए, नेत्र रोग विशेषज्ञ 20-20-20 नियम का पालन करने की सलाह देते हैं, जो कहता है कि हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर देखें। पलक झपकने की दर बढ़ाएं, स्क्रीन देखते समय अधिक बार पलकें झपकाने का सचेत प्रयास करें, स्क्रीन का समय कम करें और डिजिटल डिटॉक्स लें क्योंकि नियमित स्क्रीन ब्रेक निर्भरता को कम करने और दीर्घकालिक नुकसान को रोकने में मदद कर सकता है। अनियमित रील खपत के कारण नेत्र विकारों में वृद्धि के साथ, स्वास्थ्य विशेषज्ञ माता-पिता, शिक्षकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से तत्काल निवारक उपाय करने का आग्रह करते हैं। डॉ लाल चेतावनी देते हैं, “रील छोटी हो सकती है, लेकिन आंखों के स्वास्थ्य पर उनका प्रभाव जीवन भर रह सकता है।” “यह समय है कि हम दृष्टि खोने से पहले नियंत्रण करें।

मध्यप्रदेश में ईवी खरीदने पर मोहन सरकार खास फायदा दे रही, पार्किंग की समस्या से मिलेगी निजात

भोपाल मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) खरीदने पर प्रदेश की मोहन सरकार खास फायदा देने जा रही है. दरअसल, ईवी मालिकों को सरकार कार पार्किंग की विशेष सुविधा मुहैया कराएगी. ऐसे में भीड़भाड़ वाले इलाके व शहर के मार्केट में आम कारों की तुलना में ईवी पार्किंग आसान होगी और कार मालिकों को परेशान नहीं होना पड़ेगा ईवी पॉलिसी के जल्द जारी होंगे निर्देश राज्य सरकार का प्लान है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बाजारों की सार्वजनिक पार्किंग और रहवासी सोसायटियों में पार्किंग की अलग से व्यवस्था की जाएगी. इसके लिए नगरीय विकास व आवास विभाग जल्द ही नई ईवी पॉलिसी के तहत निर्देश करने जा रहा है. ईवी के लिए दी जा रहीं विशेष सुविधाएं प्रदेश में सार्वजनिक पार्किंग में फिलहाल महिलाओं और दिव्यांगों के वाहनों की अलग से व्यवस्था होती है. वहीं अब नगरीय विकास व आवास विभाग ईवी यानी इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए भी अलग से पार्किंग की व्यवस्था करेगा. ईवी पॉलिसी 2025 के तहत विभाग इसके लिए निर्देश जारी करने जा रहा है. विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला के मुताबिक, ” ईवी पॉलिसी की अधिसूचना जारी हो चुकी है और अब जल्द ही नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं. इसमें कई तरह के प्रावधान किए जाएंगे.” नई ईवी पॉलिसी में ये प्रावधान     सड़क किनारे सार्वजनिक पार्किंग में ईवी के लिए 25 फीसदी पार्किंग रिजर्व की जाएगी.     बाजार, मॉल, कमर्शियल कॉम्पलेक्स आदि में इलेक्ट्रिक वाहनों की पार्किंग के लिए अलग से रिजर्व पार्किंग व्यवस्था की जाएगी.     रिजर्व स्थानों पर ईवी वाहनों के स्थान पर अन्य कोई वाहन खड़े नहीं किए जा सकेंगे.     आवासीय कॉलोनियों में भी ईवी वाहनों के लिए अलग से वाहन पार्किंग व्यवस्था की जाएगी.     सभी सरकारी दफ्तरों में भी ईवी वाहनों के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी. मध्य प्रदेश में ईवी को बढ़ावा देना मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार फरवरी माह में नई ईवी पॉलिसी जारी कर चुकी है. इसमें प्रदेश में ईवी वाहनों को बढ़ावा देने के लिए हर 20 किलो मीटर पर चार्जिंग स्टेशन बनाने की तैयारी की जा रही है. वहीं ई व्हीकल खरीदने के लिए इलेक्ट्रिक कारों पर 25 हजार रुपए और दो पहिया ईवी वाहनों पर 5 हजार रुपए की छूट दिए जाने का ऐलान किया गया है.

बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष में अब और देरी नहीं होगी, अप्रैल महीने में चेहरे से सस्पेंस खत्म हो जाएगा

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघ मुख्यालय के दौरे के बाद अब बीजेपी के नए राष्ट्रीय के ऐलान को काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष में अब और देरी नहीं होगी। अप्रैल महीने में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चेहरे से सस्पेंस खत्म हो जाएगा। संसद के बजट सत्र के बाद बीजेपी के संगठन चुनावों में तेजी की उम्मीद है। संसद का बजट सत्र 4 अप्रैल को खत्म हो रहा है। संघ के सूत्रों की मानें तो नए अध्यक्ष के चयन में संघ, पीएम मोदी और अमित शाह के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की भूमिका अहम हो सकती है। 2009 से 2013 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे नितिन गडकरी अभी भी संघ नेतृत्व की गुडबुक में बने हुए हैं। नागपुर दौरे में नितिन गडकरी पूरे दौरे में फडणवीस के साथ पीएम और संघ नेताओं के साथ मौजूद रहे थे। कब हो सकता है ऐलान? बीजेपी ने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान की यूं तो कई डेडलाइन निकल चुकी हैं। अप्रैल महीने में 6 अप्रैल को बीजेपी का स्थापना दिवस है लेकिन 6 अप्रैल तक ऐलान हो पाएगा। इसकी संभावना बेहद कम है। इसके बाद बीजेपी ने 18 अप्रैल को राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद (BJP National Executive Council Meet) की बैठक रखी है। इस बैठक में नए अध्यक्ष का ऐलान हो सकता है। अगर कुछ देरी होती है तो भी अप्रैल में जेपी नड्‌डा के उत्तराधिकारी का ऐलान हो जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी में कहा गया है कि अगले कुछ दिनों में संगठन चुनाव पूरा हो जाएगा। 13 राज्यों में अध्यक्षों का ऐलान हो चुका है। 19 राज्यों में ऐलान बाकी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए 19 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना जरूरी है। कैसे नड्‌डा बने थे अध्यक्ष? 2019 में अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद जेपी नड्‌डा बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष बने थे। छह महीने बाद 30 जनवरी 2020 को उन्हें सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। नड्‌डा का कार्यकाल जनवरी 2023 में खत्म हो गया था, लेकिन लोकसभा चुनावों के लिए उन्हें जून, 2024 तक एक्सटेंशन दे दिया गया था। इसके बाद भी नड्‌डा एक्सटेंशन पर हैं। ऐसे में बतौर अध्यक्ष लंबी पारी खेल चुके हैं। नड्‌डा वर्तमान में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी हैं। नए अध्यक्ष की अगुवाई में 12 चुनाव सूत्रों का कहना है कि बीजेपी का जो भी नया अध्यक्ष होगा उसके सामने 2025 में बिहार, फिर 2026 में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के साथ असम और केरल में मोर्चा संभालना होगा। इसके बाद 2027 में पांच राज्यों के चुनाव के साथ राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव भी होंगे। ऐसे में अगले तीन साल के कार्यकाल में कुल 12 अहम चुनाव होंगे। सूत्रों की मानें तो बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद की बैठक में बेंगलुरु में 18 अप्रैल से 20 अप्रैल तक प्रस्तावित है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान इसमें हो सकता है। अगर ये बैठक की तारीखें थोड़ी आगे भी खिसकती हैं तो भी अप्रैल के अंत तक बीजेपी को राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने की पूरी संभावना है।

Bhopal Nagar Nigam Budget: परिषद में वफ्फ संशोधन बिल का विरोध, विपक्ष ने किया हंगामा, बजट पर नहीं हुई चर्चा

bhopal municipal corporation budget

bhopal municipal corporation budget Bhopal Nagar Nigam Budget: भोपाल नगर निगम परिषद की शुरुआत हंगामे से हुई। बजट बैठक में प्रश्नकाल समाप्त हो चुका है। इसमें कुल 15 सवाल पूछे गए, जिसमें से 11 सवालों के ही जवाब दिए गए। हालांकि फिर भी हंगामा नहीं थमा। 32 मिनट देरी से शुरु हुई परिषद की 12वीं बैठकआईएसबीटी के परिषद हॉल में गुरुवार, 3 अप्रैल को 32 मिनट देरी से परिषद की बैठक शुरू हुई। वंदे मातरम गान के साथ शुरू की गई। परिषद की बैठक में अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने GIS का जिक्र किया। GIS की सफलता पर सभी अधिकारी, पार्षद, एमआईसी और महापौर को धन्यवाद दिया। फिर एमआईसी सदस्य रविंद्र यति ने वफ्फ संशोधन बिल के लिए पीएम मोदी को बधाई का प्रस्ताव रखा। जिसका नेता प्रतिपक्ष शब्सिता जाकी ने विरोध किया। इसके बाद वफ्फ संशोधन बिल पर विपक्ष का हंगामा शुरु हुआ। यह मौजूदा परिषद की यह 12वीं बैठक है। इसमें 3300 करोड़ रुपए का बजट पेश हो सकता है। मेट्रो के कारण सड़कों की हालात खराब, जा रही लोगों की जानविपक्ष ने भोपाल मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष ने कहा कि मेट्रो के कारण सड़कों की हालात खराब हो रही है। इससे कई लोगों की जान जा रही। मेट्रो की वजह से लोगों को असुविधा हो रही है। माइक प्रॉपर वर्क न करने पर कार्रवाई के निर्देशआयुक्त महोदय को जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा है। माइक प्रॉपर वर्क न करने पर कार्रवाई के निर्देश दिए। हर पार्षद के पास माइक ले जाना पड़ता है। पार्षद बोले टेबल पर लगे माइक काम नहीं कर रहे है। वन नेशन—वन इलेक्शन पर चर्चा जरुरी— अध्यक्षपरिषद में वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर प्रस्ताव रखा गया। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि देश के विधानसभा लोकसभा में अच्छे प्रस्ताव पारित होने है, ऐसे में इस पर परिषद में चर्चा जरूरी है। विपक्ष ने आसंदी के पास किया हंगामाबीजेपी पार्षदों वन नेशन वन इलेक्शन के प्रस्ताव का समर्थन किया तो विपक्ष ने आसंदी के पास जाकर हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष शकिता जकि ने कहा एजेंडे पर चर्चा की जाए। यह लोकसभा का मामला है, नगर निगम में इसे क्यों उठाया जा रहा है। पूर्व एमएल ने गलत लगाई थी याचिका— यतिनिगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा वन नेशन वन इलेक्शन प्रस्ताव पर बुराई क्यां हैं। एमआईसी सदस्य रविंद्र यति ने कहा कि पूर्व एमएलए ने जो याचिका लगाई थी, वो गलत लगाई थी। देश में एक चुनाव होना चाहिए। बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाए— विपक्षकांग्रेस पार्षद ने कहा बैलेट पेपर से चुनाव किया जाए। बीजेपी पार्षदों ने कहा कि नगर निगम के जनप्रतिनिधि की चुनाव लड़ते हैं। कांग्रेस को डर है कि स्टार प्रचारक कहा से लाएंगे। बीजेपी में कई सारे स्टार प्रचारक हैं। स्मार्ट सिटी मल्टी को अटल बिहारी वाजपेयी नाम दियापरिषद में भोपाल के न्यू मार्किट स्थित स्मार्ट सिटी मल्टी का नामकरण किया गया। परिषद की ओर से स्मार्ट सिटी मल्टी को अटल बिहारी वाजपेयी के नाम का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्ताव को परिषद में पारित कर लिया गया।

नक्सल गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश में एसआईए का गठन हुआ

भोपाल नक्सली गतिविधियों को रोकने, जांच व उनके विरुद्ध ऑपरेशन के लिए प्रदेश में स्टेट इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एसआईए) का गठन किया गया है। पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा के आईजी स्तर के अधिकारी को इसका प्रमुख बनाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि नक्सल प्रभावित अन्य राज्यों में भी इसी तरह की जांच एजेंसी बनाई गई है। यह केंद्र की नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) की तरह काम करेगी। एनआईए का गठन देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों पर कार्रवाई के लिए किया गया है। नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में आएगी तेजी केंद्र सरकार के निर्देश पर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में इसका गठन किया जा चुका है। नक्सलियों ने इन तीनों राज्यों को मिलाकर एक जोन (एमएमसी) बनाया हुआ है। एसआईए से इसमें नक्सलियों के विरुद्ध कार्रवाई में तेजी आएगी। बता दें, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च, 2026 तक देश से नक्सल समस्या पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। एसआईए का गठन इसी दिशा में एक प्रयास है। इसका मुख्य काम नक्सलियों के नेटवर्क का पता लगाना है। साथ ही, एजेंसी के अन्य कार्य नक्सलियों को आर्थिक सहायता कहां से मिल रही है, नक्सलियों द्वारा उपयोग किए जा रहे हथियार उन तक कैसे पहुंच रहे हैं, नए नक्सलियों की भर्ती का तरीका, ग्रामीणों से संपर्क की रणनीति, बड़ी नक्सली घटनाओं की जांच से संबंधित रहेगा। मध्य प्रदेश एसआईए नक्सल गतिविधियों की रोकथाम में एनआईए का भी सहयोग लेगी। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि एसआईए ने काम प्रारंभ कर दिया है। मध्य प्रदेश में सक्रिय हैं 65 से 70 नक्सली बता दें, मध्य प्रदेश में नक्सल प्रभावित बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में 65 से 70 नक्सली सक्रिय हैं। इनमें लगभग आधी महिलाएं हैं। ये नक्सली मूल रूप से छत्तीसगढ़ या महाराष्ट्र के हैं। मध्य प्रदेश के मात्र तीन ही हैं। पुलिस का प्रयास है कि ये नक्सली या तो आत्मसमर्पण कर दें या उन्हें मार दिया जाए। नक्सली संगठन में नई भर्ती नहीं होने पाए, यह भी पुलिस की कोशिश है। 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के संकल्प में मध्य प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक नक्सलियों पर लगातार नजर रखी जाए और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए। सुरक्षा बलों को सीएम की बधाई मुख्यमंत्री ने हाल ही में बालाघाट में हुए पुलिस ऑपरेशन की सराहना की, जिसमें चार नक्सलियों को मार गिराया गया था और भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में नक्सलवाद को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा और इसके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। सीएम ने इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया बैठक का भी जिक्र किया, जिसमें देश को 2026 तक नक्सल मुक्त बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। अब मध्य प्रदेश में नक्सलियों के लिए बचने का कोई रास्ता नहीं! सरकार पूरी ताकत से विकास और सुरक्षा पर काम कर रही है।

भोपालवासियों को बड़ी राहत मिलने वाली, जिले में बनेंगी 12 नई सड़कें, जाम की समास्या से मिलेगी निजात

भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है। जानकारी के लिए बता दें कि पीडब्ल्यूडी ने अपने बजट में नगर निगम के वार्डों की अंदरूनी सड़क को भी शामिल किया है। करीब 12 सड़कों के लिए पीडब्ल्यूडी ने प्रस्ताव तैयार किए हैं। इनका काम इसी माह शुरू किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी ने करीब 50 करोड़ रुपए का बड़ा बजट इनके लिए तय किया है। शासन स्तर से ये राशि मंजूर कराई जाएगी। बजट में हैं नगर निगम की ये सड़कें शामिल 05 करोड़ रुपए बरखेड़ी फाटक से महामाई का बाग, शंकराचार्य नगर, पुष्पानगर, चांदबड़ की सड़कों के लिए 05 करोड़ रुपए अशोका गार्डन समेत वार्ड 69-70 के एप्रोच रोड के लिए 4.80 करोड़ रुपए वार्ड क्रमांक 26 बरखेड़ी खूर्द सीसी रोड 05 करोड़ रुपए चेतक ब्रिज से वार्ड 45 व 47 में गौतम नगर होते हुए रचना नगर अंडरब्रिज से सुभाष नगर विश्राम घाट तक रोड के लिए 14.75 करोड़ रुपए सलैया से बावडिया खुर्द तक वार्ड 52 की पर रोड 2.20 किमी लंबाई 3.79 करोड़ रुपए वार्ड 82-84 में दशहरा मैदान स्टेडियम से अमरनाथ कॉलोनी गेट तक सीसी रोड 1.20 किमी लंबाई 4.50 करोड़ रुपए में वार्ड 54-55 में आशिमा मॉल से कटारा रोड जाटखेड़ी से बाग मुगालिया क्षेत्र की सड़कें 3.18 करोड़ रुपए वार्ड 83 में गिरधर परिसर से श्यामाप्रसाद मुखर्जी कॉलेज निर्मलादेवी मार्ग कोलार रोड तक 1.80 करोड़ रुपए वार्ड 26 में रातीबड़ हनुमान मंदिर से जवाहर नवोदय विद्यालय

शिवाजी महाराज एक नाम नहीं, बल्कि भारतमाता की आत्मा में रचा-बसा स्वाभिमान हैं : मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि (03 अप्रैल) पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज एक नाम नहीं, बल्कि भारतमाता की आत्मा में रचा-बसा वह स्वाभिमान हैं, जिन्होंने स्वराज्य का स्वप्न देखा और उसे यथार्थ में परिणत किया। वे साहस, संकल्प और राष्ट्रभक्ति की सजीव प्रतिमूर्ति थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिवाजी महाराज भारतीय संस्कृति, नीति और नेतृत्व के अमिट प्रतीक हैं। उन्होंने न केवल धार्मिक सहिष्णुता, जनकल्याण और न्यायप्रिय शासन की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत की, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि एक सच्चा शासक केवल तलवार से नहीं, नीति, मूल्य और जनसेवा से पहचाना जाता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज जब देश नए भारत के निर्माण की दिशा में बढ़ रहा है, तब शिवाजी महाराज की सोच, उनका साहस और स्वराज्य का दर्शन हमारे लिए प्रेरणापुंज बन सकता है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज के जीवन से हमे यह प्रेरणा मिलती है कि जब संकल्प अडिग हो और ध्येय राष्ट्रहित, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। मुख्यमंत्री साय ने युवाओं को प्रेरित किया कि शिवाजी महाराज के राष्ट्रप्रेम के आदर्श का अनुसरण करते हुए राष्ट्र की उन्नति में अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और समय को समर्पित कर सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहभागी बनें।

मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए नया वित्तीय वर्ष दोहरी खुशियां लाया, अब 7वें वेतनमान के हिसाब से DA

भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की झोली खुशियों से भर दी है. 01 अप्रैल से सातवें वेतनमान के अनुसार महंगाई भत्ता मिलने का आदेश जारी हुआ तो वहीं 9 साल से चली आ रही डिमांड भी पूरी हो गई. बता दें कि कर्मचारियों के प्रमोशन पर बीते 9 साल से रोक लगी थी. इस रोक को सरकार ने हटा दिया है. अब कर्मचारियों के धड़ाधड़ प्रमोशन होंगे. डीए बढ़ाने के प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई. सातवें वेतनमान के हिसाब से मिलेगा डीए बता दें कि अभी तक मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों छठे वेतनमान के अनुसार महंगाई भत्ता मिल रहा था. वहीं, केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के हिसाब से महंगाई भत्ता देना शुरू कर दिया था. इससे मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों में सरकार के प्रति रोष पनप रहा था. कर्मचारियों की मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी सरकारी कर्मचारियों को 01 अप्रैल से सातवें वेतनमान के हिसाब से महंगाई भत्ता देने का फैसला लिया है. कुछ दिनों पहले हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. अब अप्रैल माह की सैलरी बढ़ी हुई मिलेगी. कर्मचारियों के अब होंगे धड़ाधड़ प्रमोशन ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश में साल 2016 से सभी सरकारी विभागों में कर्मचारियों के प्रमोशन पर रोक लगी हुई थी. इस दौरान 9 साल बीत गए. कर्मचारियों ने इस रोक को हटाने के लिए कई बार आंदोलन किए. लेकिन सरकार ने रोक नहीं हटाई. सैकड़ों कर्मचारी प्रमोशन की बाट जोहते-जोहते रिटायर्ड हो चुके हैं. कर्मचारियों की बढ़ती नाराजगी को देखते हुए अब प्रमोशन पर रोक हटा ली गई है. कुछ दिन पहले हुए कैबिनेट की बैठक में इस बारे में निर्णय लिया गया. इससे कर्मचारियों में खुशी की लहर है. केंद्र के बराबर महंगाई भत्ता क्यों नहीं दिया मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी का कहना है “कर्मचारियों को ₹200 वाहन भत्ता पिछले 13 साल से मिल रहा था, जिसे बढ़ाकर 384 किया गया है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सातवें वेतनमान में 1800 रुपए वाहन भत्ता, अब 55% महंगाई भत्ते के साथ 2790 प्राप्त होंगे. 3 साल बाद मिले भत्ते भी बहुत कम हैं. बढ़े हुए मकान भाड़ा भत्ते में झुग्गी भी नहीं मिलेगी किराए पर. खुशी तो हुई है लेकिन कटौती स्वीकार्य नहीं.” खुशी तो है लेकिन अभी कसक बकाया है केंद्रीय कर्मचारी समन्वय समिति के महासचिव यशवंत पुरोहित ने कहा “केंद्र सरकार ने दो प्रतिशत महंगाई भत्ता और महंगाई राहत में बढ़ोतरी की है. इसके लिए हम सरकार का स्वागत करते हैं. लेकिन सरकार कर्मचारियों के महंगाई राहत भत्ते में निरंतर कटौती कर रही है. इसके पहले भी 4 प्रतिशत देने के बजाय सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों का केवल 3 प्रतिशत डीए और डीआर बढ़ाया था. अब एक बार फिर कर्मचारी और पेंशनर को निराशा हाथ लगी है.”

मध्य प्रदेश में शहर से लेकर गांव तक चलेंगी बसें, पीपीपी मॉडल पर होगा संचालन

भोपाल  एमपी में 20 साल बाद आखिरकार सरकारी लोक परिवहन सेवा को जमीन पर उतारने का निर्णय हो ही गया। 6 से 8 महीने में यह सेवा शुरू हो जाएगी। मॉडल बदला हुआ होगा। बाबूलाल गौर के मुख्यमंत्री रहते समय राज्य परिवहन निगम की सरकारी बसें दौड़ती थी। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत निजी ऑपरेटरों की बसें दौड़ेंगी, पर इन पर पूरा नियंत्रण सरकार का होगा।ये बसें प्रदेश में शहर से लेकर गांव तक पीपीपी मॉडल पर चलाई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। लोक परिवहन सेवा फिर शुरू करने का निर्णय जनता के लिए पत्रिका महाअभियान की बड़ी जीत है। पत्रिका ने लोक परिवहन सेवा नहीं होने से आमजन को नुकसान का मामला प्रमुखता से उठाया था। बनाई जाएगी योजना होल्डिंग कंपनी रूट व बस चलाने के लिए सर्वे, योजना बनाएगी। इसके साथ ऑपरेटर्स को परमिट दिलाना, आइटी प्लेटफॉर्म, कंट्रोल कमांड सेंटर तैयार करना, ई-टिकट, मोबाइल एप से बसों की ट्रेकिंग, कैशलेस, टेपऑन-टेपऑफ सुविधा देना, ऐप से पैसेंजर इन्फोर्मेशन सिस्टम विकसित कराना भी होल्डिंग कंपनी का कार्य होगा। अनुबंधित ऑपरेटर के लिए एप, वीडियो ऑडिट सॉफ्टवेयर, फील्ड ऑडिट एप, एमआईएस व डैशबोर्ड की सुविधा देना, ऑपरेटर स्टॉफ का प्रशिक्षण दिलवाना। इसके साथ वे राज्य एवं क्षेत्रीय सहायक कंपनी के लिए कंट्रोल एवं कमांड सेंटर सॉफ्टवेयर, बस, ऑटो, टैक्सी, मेट्रो के लिए बुकिंग प्लेटफॉर्म की सुविधा ऑनलाइन यात्री बुकिंग सुविधा, यात्री हेल्प डेस्क, कार्यालयों में ऑपरेशन डेशबोर्ड, स्टाफ की ट्रेनिंग की सुविधा देंगी। 101.20 करोड़ दिए, कंपनी गठन को मंजूरी 8 कंपनियां मिलकर सेवा शुरू करेंगी। एक होल्डिंग और 7 संभागीय कंपनियों होंगी। सेवा शुरू करने को 101.20 करोड़ रुपए और राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी गठन की स्वीकृति दी। सार्वजनिक परिवहन के लिए 20 शहरों में पंजीकृत 16 कंपनियां कार्यरत हैं। इन्हें 7 संभागीय कंपनियों में मर्ज करने और इनमें राज्य स्तरीय कंपनी बनाने की मंजूरी दी। रीवा एवं ग्वालियर की वर्तमान कंपनी बंद कर नई बनाने, संभागीय मुख्यालयों में सिटी बस ट्रांसपोर्ट कंपनी में संशोधन और जिला स्तरीय यात्री परिवहन समिति गठन के प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी। मोटरयान नियम 1994 में भी संशोधन और नए प्रावधान की स्वीकृति दी। माल ढोने की सुविधा भी मिलेगी सरकार बसें नहीं खरीदेगी: नई लोक परिवहन सेवा के लिए सरकार एक भी नई बसें नहीं खरीदेंगी। पीपीपी मॉडल: हर स्तर पर लागू होगा स्तर पर पीपीपी मॉडल होगा, जो समय पर बस चलाने, उन्हें डिपो की सुविधा देने, ऑनलाइन व्यवस्था में भ्रष्टाचार व गड़बड़ी रोकने और टिकटिंग व्यवस्था जैसे कामों पर लागू होगा। किराए पर नियंत्रणः निजी ऑपरेटर्स की बसों की तुलना में कम किराया लगेगा। यह सरकार तय करेगी। माल लेकर चल सकेंगे यात्री: बसों का एक हिस्सा यात्रियों के माल अर्थात सामग्री और डाक परिवहन के लिए आरक्षित रहेगा। ताकि किसी रूट पर यात्री कम मिले तो माल परिवहन कर उसकी भरपाई की जा सके। 5.बस चलाने वाले टिकट नहीं काटेंगे: बस ऑपरेटर टिकट नहीं काट सकेंगे, इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था होगी। इसके लिए अलग कंपनियों से अनुबंध किया जाएगा। इसके लिए अलग से डैशबोर्ड बनाया जाएगा। 2005 में सड़क परिवहन निगम में की गई थी तालाबंदी गौरतलब है कि भाजपा की बाबूलाल गौर सरकार ने ही वर्ष 2005 में साढ़े चार सौ करोड़ के घाटे में चल रहे राज्य सड़क परिवहन निगम में तालाबंदी की थी, तब से प्रदेश में परिवहन सेवाएं ठप हैं। केवल मुनाफे के मार्ग पर ही निजी बसें चलाई जा रही हैं। नई सेवाएं पहले आदिवासी अंचलों से आरंभ होगी। इस बार मॉडल बदला है परिवहन सेवा को पिछली सरकारों ने बंद कर दिया था, हमने परिवहन नीति बनाई है और इस बार मॉडल बदला है। हम पीपीपी मॉडल पर बसें चलवाएंगे। इसके लिए जिला स्तरीय समिति गठित की जाएगी। इसके समन्वयक कलेक्टर रहेंगे। समिति में जिले के सांसद, समस्त विधायकगण, महापौर, अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहेंगे। यह समिति बसों के संचालन की मॉनिटरिंग, संचालन, साधारण एवं ग्रामीण मार्गों पर बस स्टाप, चार्जिंग स्टेशन के निर्माण संबंधी सुझाव के साथ जिले के बस ऑपरेटर्स के मध्य आवश्यक समन्वय का कार्य करेगी। बस का उपयोग कार्गो सेवा के लिए भी किया जाएगा, नीति में इसका प्रविधान किया जाएगा। राज्य परिवहन निगम की संपत्तियां कंपनी के आधिपत्य में रहेगी। यात्रियों एवं बस ऑपरेटर्स के लिए एप और कंपनी की मॉनीटरिंग के लिए होगा डैशबोर्ड बसों पर प्रभावी नियंत्रण सरकार का होगा। यात्रियों एवं बस ऑपरेटर्स के लिए एप और कंपनी की मॉनीटरिंग के लिए एक डैशबोर्ड भी होगा। कंपनी के कार्यालयों में कंट्रोल एवं कमांड सेंटर बनाए जाएंगे। यात्रियों को मोबाइल एप से ई-टिकिट, सुविधा मिलेगी। इससे बसों की ट्रेकिंग, आक्युपेंसी तथा यात्रा प्लानिंग की जा सकेगी। पैसेंजर इन्फोर्मेशन सिस्टम की स्थापना भी बस स्टैंड, यात्री बसों पर रीयल टाइम बेसिस पर की जा सकती है। यह जानकारी मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से सीधे यात्रियों को मोबाइल पर मुहैया कराई जाएगी। यात्री बसों के संचालन की त्रि-स्तरीय होगी मॉनीटरिंग प्रदेश में यात्री बसों के संचालन की त्रि-स्तरीय मॉनीटरिंग की जाएगी। इसके लिए प्रदेश मुख्यालय स्तर पर एक राज्यस्तरीय होल्डिंग कंपनी गठित की जाएगी। प्रदेश के सात बड़े संभागों (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर एवं रीवा) में सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियां भी गठित की जाएगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय यात्री परिवहन समिति गठित भी की जाएंगी। रीवा एवं ग्वालियर के लिए वर्तमान प्रचलित कंपनी को बंद कर नई क्षेत्रीय कंपनी गठित की जाएगी। सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों की संपत्ति ट्रांसफर -सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों की चल-अचल संपति नई कंपनियों को देंगे। निगम, प्राधिकरण की निधि से तैयार बस टर्मिनल, बस स्टैंड, बस स्टॉप होल्डिंग कंपनी के अधीन होंगे। -मौजूदा सिटी बस कंपनियों के कार्यालय भवन का उपयोग नवीन सहायक कंपनियां करेंगी। -इनके कार्यालय की अचल सपंतियां का मूल्यांकन अलग से होगा, राशि की प्रतिपूर्ति परिवहन विभाग करेगा। -होल्डिंग कंपनी आइटी प्लेटफॉर्म स्थापित कर अधिसूचित रुट अनुसार निजी बस ऑपरेटरों से अनुबंधित करेगा। जिले में बनेगी समिति, कलेक्टर समन्वयक जिला स्तर पर समितियां होंगी, समन्वयक कलेक्टर होंगे। इनमें सांसद, विधायक, महापौर, नगर पालिका, जिपं, नप, जपं के अध्यक्ष, आयुक्त नगर निगम, जिला व जपं सीईओ, नपा … Read more

प्रदेश बनेगा देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब, जबलपुर की चमकी किस्मत, माल की लोडिंग-अनलोडिंग ऑटोमेटेड

 जबलपुर    रिंग रोड़ से शहर की तस्वीर बदल रही है। वर्षों से बड़े ट्रांसपोर्ट नगर की कमी से जूझ रहे जबलपुर में अब अत्याधुनिक लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण होगा। भेड़ाघाट के पास खैरी में 52 हेक्टेयर जमीन पर लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड (एनएचएलएमएल) सर्वे पूरा कर चुका है। इसमें लॉजिस्टिक पार्क को रेलवे ट्रेक से जोडऩे एक किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाई जाएगी। रिंग रोड से होकर डुमना एयरपोर्ट के लिए भी सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी। अब लॉजिस्टिक पार्क की डीपीआर तैयार होना है। इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू होगी। माल की लोडिंग-अनलोडिंग ऑटोमेटेड ऑटोमेटेड बनना है लॉजिस्टिक पार्क- लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण ऑटोमेटेड सिस्टम पर आधारित होना है। जिसमें माल की लोडिंग-अनलोडिंग ऑटोमेटेड होगी। विशेषज्ञों के अनुसार इस व्यवस्था से माल हैंडलिंग की लागत घटेगी और कीमतों में कमी आएगी। इसका सीधा फायदा आमजन को मिलेगा और कारोबारी सस्ते दामों पर सामान उपलब्ध करा सकेंगे। देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब, भोपाल, जबलपुर, इंदौर की चमकी किस्मत ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट से मध्यप्रदेश का देश में सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बनने का रास्ता साफ हो गया है. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, जबलपुर, इंदौर, रतलाम और कटनी में बड़े लॉजिस्टिक सेंटर को विकसित किया जाएगा. राजधानी भोपाल में मंडीदीप के पास विश्वस्तरीय सुविधाओं वाला लॉजिस्टिक पार्क जल्द ही आकार लेने जा रहा है. करीबन 34 एकड़ भूमि पर डेवलप होने वाले इस लॉजिस्टिक हब में हर माह करीबन 90 हजार टन माल की लोडिंग हो सकेगी. उधर दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे के पास रतलाम में भी एक बड़ा लॉजिस्टिक हब बनाने की तैयारी की जा रही है. भोपाल के इटायाकलां में मार्च से शुरू होगा काम राजधानी भोपाल से जल्द ही देश के किसी भी कोने में माल को पहुंचाना आसान होगा. भोपाल से सटे मंडीदीप के पास इटायाकलां में जल्द रेलवे द्वारा लॉजिस्टिक पार्क विकसित किया जा रहा है. इसका काम मार्च से शुरू हो जाएगा. इसके लिए रेलवे 98 करोड़ की राशि पहले ही मंजूर कर चुका है. इस लॉजिस्टिक हब की खासियत यह होगी कि यहां से देश के किसी भी कोने में लोड और अनलोड करना आसान हो जाएगा. इस स्थान का चयन भी इसलिए किया गया क्योंकि यह देश के सेंटर में स्थित है. लॉजिस्टिक पार्क बदलेंगे एमपी की तस्वीर मध्यप्रदेश में भौगौलिक स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश में कई स्थानों पर लॉजिस्टिक पार्क विकसित किए जाने की तैयारी है. मध्यप्रदेश के मुंबई दिल्ली एक्सप्रेस वे पर रतलाम के पास भी बड़े लॉजिस्टिक पार्क की तैयारी की जा रही है. इसके लिए मंजूरी मिल चुकी है. यहां से मुंबई-दिल्ली तक माल पहुंचाने के अलावा गुजरात, राजस्थान सहित दक्षिण के राज्यों तक माल लोडिंग-अनलोडिंग की व्यवस्था आसान होगी. इसी तरह मध्यप्रदेश के जबलपुर, कटनी में भी लॉजिस्टिक पार्क डेवलप किया जाएगा. धार और पीथमपुर के लिए 11 करोड़ का बजट मध्यप्रदेश के धार और पीथमपुर में 255 एकड़ में सेंट्रल इंडिया का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक पार्क बनाया जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यह प्रदेश का पहला मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क होगा. राज्य सरकार ने इसे 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए 1100 करोड़ का बजट रखा गया है. इसे एनएचएआई के साथ मिलकर बनाया जा रहा है. इससे आसपास के 2 हजार उद्योगों को फायदा मिलेगा. उज्जैन में भी एक लॉजिस्टिक पार्क बनाने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए राज्य सरकार ने सर्वे का काम शुरू कर दिया है. राज्य सरकार दे रही बड़ी रियायत उधर राज्य सरकार ने लॉजिस्टिक पॉलिसी में निवेशकों के लिए बड़ी रियायतें दी हैं. वहीं, निवेशकों ने भी मध्यप्रदेश में लॉजिस्टिक सेक्टर में निवेश को लेकर गहरी रूचि दिखाई है. वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ इंवेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर दुष्यंत ठाकुर के मताबिक, ” प्रदेश में लॉजिस्टिक उद्योग में निवेश फायदे का सौदा साबित होगा. आने वाले समय में यह निवेशकों के लिए बड़ा फायदा देगा.” लॉजिस्टिक पार्क में होंगी ये सुविधाएं ● बड़े गोदाम और भंडारण सुविधाएं होंगी ● ट्रकिंग, रेलवे की सुविधा होगी ● सीसीटीवी कैमरे, अलार्म सिस्टम, और सुरक्षा गार्ड होंगे ● वेयरहाउस मैनेजमेंट सिस्टम, ट्रैकिंग और ट्रेसिंग सिस्टम और ऑटोमेशन की सुविधा होगी ● पैकेजिंग और लेबलिंग की सुविधा ● इन्वेंट्री मैनेजमेंट सुविधा ● लॉजिस्टिक व सप्लाई चैन मैनेजमेंट सुविधा ● रेस्तरां, कैफेटेरिया की सुविधा ● वाहन पार्किंग सुविधा, यूल स्टेशन, वर्कशॉप की सुविधा लॉजिस्टिक पार्क बनने के शहर को ये होंगे लाभ ● रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे ● नया निवेश आएगा ● सडक़ और परिवहन के बुनियादी ढांचे का विकास होगा ● भंडारण और गोदाम की सुविधाएं होंगी ● व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी ● आधुनिक और विकसित शहर के रूप में होगी पहचान ● सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी  खैरी में रिंग रोड के किनारे लॉजिस्टिक पार्क के निर्माण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड ने सर्वे पूरा कर लिया है। रेल कनेक्टिविटी के लिए लगभग एक किलोमीटर का रेलवे ट्रेक भी बिछाया जाना है। वहीं रिंग रोड के माध्यम से एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी। अब एनएचएलएमएल को डीपीआर तैयार करना है इसके बाद निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया होगी।     अमृत लाल साहू, प्रोजेक्ट डायरेक्टर

मध्यप्रदेश : इंदौर-दाहोद रेल लाइन का अलग-अलग चरणों में काम चल रहा, 70 फीसदी काम पूरा

इंदौर  मध्यप्रदेश की इंदौर-दाहोद रेल लाइन का अलग-अलग चरणों में काम चल रहा है। कई जगह कार्यों में तेजी आई है। टीही से पीथमपुर के बीच मालगाड़ी के रूप में इंजन जब दौड़ने लगा तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हर कोई यह सोचने लगा कि रेलवे द्वारा ट्रायल किया जा रहा है। दरअसल, महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में इंदौर से टीही के बीच ट्रैक बनकर तैयार हो चुका है। रेलवे स्टेशन के साथ हाईवे पर चल रहा काम शहर में भी रेलवे के दो बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें नौगांव के क्षेत्र में आधुनिक रेलवे स्टेशन और इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाइवे पर ओवरब्रिज शामिल है। जानकारी के अुनसार धार रेलवे स्टेशन में दो मंजिला बिल्डिंग सहित वेटिंग हाल का काम 40 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके अलावा 660 मीटर का ट्रेक भी बन रहा है। इस पर रेल लाओ महासमिति के पूर्व प्रवक्ता डॉ. दीपक नाहर ने बताया कि टीही से टनल की ओर लुधियाना का इंजन एक मालगाड़ी से साबरमती से आयातित दर्जनों पटरियां लेकर चला, जो रविवार को पहुंचा। तकरीबन छह किमी के क्षेत्र में पटरी बिछाने का काम शुरू किया है। मालगाड़ी पर रखी पटरियों को नीचे उतारने के साथ ट्रैक पर रखा गया। इसमें 25 से अधिक कर्मचारी और मजदूर लगे हुए थे। सूत्रों की मानें तो पीथमपुर के समीप टनल में साढ़े तीन किमी में पटरी बिछाने का काम अभी चल रहा है। यह कार्य अभी 70 फीसदी पूरा हुआ और शेष 30 प्रतिशत हिस्से में चल रहा है। टनल का काम पूरा होने के बाद पटरी बिछेगी। रेलवे द्वारा 2026 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि जिस स्पीड से यह काम चल रहा है, उसमें अधिक समय लगने की संभावना है। रेलवे द्वारा बनाया जा रहे हैं ओवर ब्रिज, अर्थ वर्क सहित अन्य काम में तेजी आई है। ऐसे चल रहा काम पीथमपुर और धार के बीच कई स्थानों पर अर्थवक और पटरी बिछाने का काम चल रहा है। स्लीपर बिछाने के बाद उस पटरी डाली जाती है। यह पटरी पुरानी होती है, जिसे रेलवे द्वारा बिछाया जाता है। इसमें काम पूरा होने के बाद तय समय पर एक मीटर लंबी पटरी बिछाई जाती है। रेलवे ने टीही से पीथमपुर के बीच के काम शुरू कर दिया है। तीन किलोमीटर के क्षेत्र की पटरी बदलने का काम शुरू हुआ है।

टीकमगढ़-ओरछा हाईवे डबल लेन का टेंडर जारी, 499 करोड़ की आएगी लागत, यातायात होगा सुगम

टीकमगढ़  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मध्य प्रदेश में टीकमगढ़-ओरछा हाईवे (Tikamgarh-Orchha highway) डबल लेन का टेंडर जारी कर दिया है। 499 करोड़ की लागत से इस 79 किमी की सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में हाइवे के साथ ही मार्ग में पड़ने वाले दो बड़े पुल, एक रेलवे ओवर ब्रिज और 16 पुलियों का निर्माण किया जाएगा। इस सड़क का दो साल पूर्व केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने भूमिपूजन किया था। दिल्ली और मुंबई जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग शाहगढ़ से ओरछा हाईवे को जिले के यातायात की लाइफ लाइन कहा जाता है। देश की राजधानी दिल्ली के साथ ही आर्थिक राजधानी मुंबई को जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग है। 2006 में एमपीआरडीसी द्वारा इस सड़क का निर्माण किया गया था। इसके बाद पिछले 10 सालों से लगातार इस सड़क के उन्नयन करने की मांग की जा रही थी। इस सड़क पर जिले के यातायात का सबसे अधिक दबाव है। इस सड़क पर प्रतिदिन 2 हजार माल वाहक, यात्री वाहन के साथ ही कार आदि की आवाजाही होती है। वर्तमान में झा भड़क पर इतना ट्रैफिक रहता है कि लोगों को पृथ्वीपुर तक क्रॉसिंग के लिए भी परेशान होना पड़ता है। 10 मीटर चौड़ी होगी सड़क एनएच के अधिकारियों ने बताया कि यह टीकमगढ़ से ओरछा तक बनने वाली डबल सड़क में 10 मीटर डामर और डेढ़-डेढ़ मीटर की पटरी होगी। सड़क की कुल चौड़ाई 13 मीटर होगी। ऐसे में वाहनों की आवाजाही में सुविधा होगी। इसके साथ ही इस सड़क पर पड़ने वाले ग्राम दिगौड़ा, बहौरी बराना, ज्यौरा मौरा, पृथ्वीपुर में बायपास बनाया जाएगा। अब इन कस्बों से वाहन नहीं निकलेंगे। ऐसे में लोगों को दूरी तय करने में कम समय लगेगा। जल्द ही होगा दूसरा टेंडर इस मामले में एनएच के कार्यपालन यंत्री पंकज व्या ने बताया कि जल्द ही विभाग द्वारा शाहगढ़ से टीकमगढ़ तक का दूसरा टेंडर जारी किया जाएगा। इसमें शाहगढ़ और टीकमगढ़ बायपास भी शामिल किया जाएगा। ऐसे में इसकी लागत 1100 करोड़ रुपए होगी। उनका कहना था कि इसी सप्ताह के अंदर यह टेंडर भी जारी कर दिया जाएगा। बनेगा आरओबी यह सड़क बाबरी तिराहे से ओरछा तिराहा तक बनाई जाएगी। इसमें ओरछा के पास पड़ने वाली रेलवे लाइन के लिए ओवर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। यहां पर 1.2 किमी लंबा ओवर ब्रिज बनेगा। इसके साथ ही सालों से बारिश के समय समस्या बनने वाले पूनौल की पुलिया पर भी बड़े पुल का निर्माण किया जाएगा। वहीं इस सड़क पर आने वाले 16 छोटी पुलियों का भी निर्माण किया जाएगा।

बांग्लादेशी हिंदुओं के लिए अलग देश की चर्चा ने जोर पकड़ा, हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों को संरक्षण मिलेगा

ढाका बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ उत्पीड़न की घटनाएं हालिया समय में लगातार बढ़ी हैं। मोहम्मद यूनुस की सरकार में खासतौर से बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा भारत और विश्व के लिए मुद्दा बन रही है। इस समस्या से निपटने के लिए बांग्लादेशी हिंदुओं के लिए अलग देश की चर्चा ने जोर पकड़ा है। इससे एक ओर बांग्लादेशी हिंदुओं को नया देश मिल जाएगा तो वहीं भारत के सामने पूर्वोत्तर में सुरक्षा की चुनौती कम हो जाएगी। इस योजना में बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन और चटगांव डिवीजन को अलग करने का प्रस्ताव है। मोहम्मद यूनुस ने हाल ही में एक बयान में चिकन नेक के भारत की कमजोर कड़ी होने की ओर भी इशारा किया है। स्वराज्य वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में इस संभावना पर बात की है। स्वराज्य वेबसाइट के मुताबिक, रंगपुर और चटगांव को अलग करने से बांग्लादेश के हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों के लिए सुरक्षित घर बनाया जा सकता है। साथ ही पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर की समस्या भी हल हो जाएगी। इस योजना के स अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए आंदोलन को प्रोत्साहित करने और सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहने की बात कही गई है। इस योजना के बारे में कहा गया है कि यह विचार भले ही अभी काल्पनिक लगे लेकिन 1971 में बांग्लादेश बन सकता है तो ये भी संभव हो सकता है। पूर्वोत्तर की समस्या और बांग्लादेश पूर्वोत्तर भारत के सात राज्य गंभीर भौगोलिक चुनौती का सामना करते रहे हैं। यह क्षेत्र देश के बाकी हिस्सों से एक पतली पट्टी से जुड़ा हुआ है, जिसे ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर कहा जाता है। यह कॉरिडोर लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा है, जो बांग्लादेश, नेपाल और भूटान से घिरा हुआ है। चीन के कब्जे वाला तिब्बत भी इसके करीब है। ऐसे में ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर की सुरक्षा चिंता का विषय रही है। बांग्लादेश के कट्टरपंथी भी चिकननेक पर कब्जे की बात कहते रहे हैं। बांग्लादेश में हालिया महीनों में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अल्पसंख्यकों के पास देश छोड़ने या इस्लाम में परिवर्तित होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इन समस्याओं का समाधान बांग्लादेश में हिंदुओं के लिए एक अलग घर बनाना है। बांग्लादेश में 1.3 करोड़ हिंदू हैं, जो अपने लिए एक अलग घर की मांग कर रहे हैं। बांग्लादेशी हिंदुओं की समस्या का हल बांग्लादेश के अल्पसंख्यक शरण के लिए भारत का रुख करते रहे हैं। हालांकि भारत में प्रवास समाधान नहीं है। ये समाधान बांग्लादेश से काटकर उनके लिए एक अलग घर बनाना है। बांग्लादेश के दो प्रांत- उत्तरी रंगपुर डिवीजन और इसके दक्षिणपूर्वी चटगांव डिवीजन का एक बड़ा हिस्सा देश के उत्पीड़ित हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आदर्श घर होगा। रंगपुर के पश्चिम में बंगाल के उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर जिले हैं। उत्तर-पश्चिम में दार्जिलिंग जिले का सिलीगुड़ी उप-मंडल है। उत्तर में जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जिले हैं और पूर्व में असम के धुबरी और दक्षिण सालमारा जिले हैं। साथ ही मेघालय के पश्चिम और दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स हैं। यह तीन तरफ से भारतीय क्षेत्र से घिरा हुआ है। रंगपुर को भारत में शामिल करने से ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान हो जाएगा। इससे यह कॉरिडोर कम से कम 150 किलोमीटर चौड़ा हो जाएगा। इसी तरह चटगांव हिल ट्रैक्ट्स (CHT) जिसमें चटगांव डिवीजन के तीन जिले खगराछड़ी, रंगमती और बंदरबन हैं। ये त्रिपुरा और मिजोरम की सीमा से लगे हैं।

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