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हिमाचल में पिछले एक साल में 6 हजार लोगों ने अपनी गाड़ियों के लिए फैंसी नंबर लिए, करोड़ों की हुई कमाई: परिवहन विभाग

शिमला हिमाचल के लोग भी फैंसी नंबर के दिवानें हैं। लोग अपनी गाड़ियों के लिए रूटीन का नंबर लेने के बजाए फैंसी नंबर ले रहे हैं। भले ही इसके लिए उन्हें अपनी जेब क्यों न ढीली करनी पड़े। परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल में 6 हजार लोगों ने अपनी गाड़ियों के लिए फैंसी नंबर लिए हैं। इससे परिवहन विभाग को 23.57 करोड़ की कमाई हुई है। 0001 सीरिज के नंबरों से ही विभाग ने 3.26 करोड़ रुपये कमाए 0001 सीरिज के नंबरों से ही विभाग ने 3.26 करोड़ रुपए कमा लिए हैं। फैंसी नंबरों की ई नीलामी होती है। जिसकी सबसे ज्यादा बोली होती है उसे यह नंबर मिल जाता है। परिवहन विभाग के मुताबिक पिछले साल छह हजार लोगों ने फैंसी नंबर लिए हैं। फैंसी नंबर के लिए बढ़ते क्रेज को देखते हुए परिवहन विभाग ने अब इस वित्त वर्ष के लिए इसका भी टारगेट तय कर दिया है। विभाग ने तय किया है कि इस साल 31.58 करोड़ रुपए फैंसी नंबरों को बेचकर कमाया जाएगा। शिमला के व्यक्ति ने लिया था 12.50 लाख का नंबर शिमला के ठियोग आरएलए (रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग अथारिटी) का नंबर 12.50 लाख में, जबकि श्री नयनादेवी के स्वारघाट आरएलए का नंबर 9 लाख में बिका है। परिवहन विभाग ने गाड़ियों के लिए फैंसी नंबर लेने के लिए पिछले साल नियमों में बदलाव किया था। 0001 लेने के लिए 5 लाख से बोली शुरू करने का नियम बनाया गया था। ई ऑक्शन में सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को यह नंबर मिलेगा। स्कूटी के लिए विशेष नंबर लेने के लिए एक करोड़ रुपये से ज्यादा रुपये की बोली लगाने के विवाद के बाद अब सरकार विशेष नंबरों में पारदर्शिता और अधिक राजस्व प्राप्त करने के लिए नियमों में बदलाव किया था। अतिरिक्त आयुक्त परिवहन व सचिव एसटीए नरेश ठाकुर ने बताया कि परिवहन विभाग ने फैंसी नंबर बेचकर 23.57 करोड़ की कमाई की है। अगले साल के लिए विभाग ने इसका टारगेट भी तय कर दिया गया है। इसके लिए नियम तय है। जो सबसे ज्यादा बोली लगाएगा उसे ही यह नंबर मिलेगा।

चीन अब लहुंजे एयरबेस को विकसित कर रहा, अरुणाचल प्रदेश से लगी है सीमा

बीजिंग  चीन एक बार फिर भारत से सटी सीमा के करीब इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड कर रहा है। चीन ने इस काम के लिए अबकी बार अरुणाचल प्रदेश से लगी सीमा को चुना है। हाल की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीन तवांग से सिर्फ 100 किलोमीटर दूर स्थित लहुंजे एयरबेस को विकसित कर रहा है। इसमें नए शेल्टर, हैंगर और एप्रन को अपग्रेड करने का काम चल रहा है। अपग्रेड करने के बाद यहां से भारी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को भी ऑपरेट किया जा सकेगा, जिससे चीनी सेना भारतीय सीमा के करीब बड़े हथियारों को जल्दी तैनात कर सकेगी। सैटेलाइट तस्वीर में क्या दिखा? ओपन सोर्स इंटेलीजेंस @detresfa_ के एक्स पर पोस्ट किए गए तस्वीर के अनुसार, लहुंजे एयरबेस तवांग से सिर्फ 100 किमी दूर है। चीनी मिलिट्री इस एयरबेस को तेजी से विकसित कर रही है। सैटेलाइट तस्वीर के अनुसार, लहुंजे एयरबेस पर नए शेल्टर, हैंगर और एप्रन को बड़ा बनाया जा रहा है। यह एक ऐसा कदम जो पूर्वी क्षेत्र में LAC के साथ वायुशक्ति संतुलन को फिर से संतुलित करेगा। चीन की मंशा क्या है चीन इस एयरबेस का इस्तेमाल भारत के साथ भविष्य में होने वाले किसी भी युद्ध के समय कर सकता है। एयरबेस को अपग्रेड करने से यहां से कई तरह के लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और ड्रोन को आसानी से ऑपरेट किया जा सकेगा। इसके अलावा इस एयरबेस को सैनिकों के ट्रांसफर, फील्ड मेडिकल हॉस्पिटल और हथियारों के ट्रांसपोर्ट के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। भारत की सीमा के नजदीक चीन की चाल जानें पिछले कुछ वर्षों में चीन ने तिब्बत और शिनजियांग में कई हवाई अड्डों और हेलीपोर्टों का निर्माण और अपग्रेड किया है। इसके मौजूदा एयरबेसों का अपग्रेडेशन और नए निर्माण चीन की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने की महत्वकांक्षा को प्रदर्शित करते हैं। अरुणाचल प्रदेश में चीनी सीमा से सटा इलाका ऊबड़-खाबड़ है, जहां ऊंचे पहाड़ और गहरी घाटियां वाहनों के परिवहन में रुकावट डालती हैं। यही कारण है कि चीन संघर्ष की स्थिति में भारत पर बढ़त बनाने और आक्रामक और जवाबी कार्रवाई के लिए तेजी से हवाई अड्डों का विस्तार कर रहा है।

वैशाली नदी के जीर्णोद्धार को लेकर हाईकोर्ट ने नगर निगम को दिया नोटिस

ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने वैशाली नदी मुरार को लेकर दायर जनहित याचिका में सुनवाई की है. कोर्ट ने सुनवाई के बाद नगर निगम को नोटिस जारी कर नदी जीर्णोद्धार से जुड़ी जानकारी मांगी है. याचिकाकर्ता ने इस जनहित याचिका के जरिए मांग की है कि नदी के जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा है जिसके लिए अब नगर निगम की सहायता की आवश्यकता है. हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से भी कहा है कि नगर निगम इस मामले में सहयोग करेगी. जिसके लिए उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं. वहीं इस काम को याचिकाकर्ता भी गंभीरता से करते रहे, जैसे अभी कर रहे हैं. अब इस मामले की सुनवाई 5 मई को होगी.

जल गंगा संवर्धन अभियान : कुओं, बावड़ियों और तालों के पुनर्जीवित होने से बढ़ने के साथ सुरक्षित रहेगा भूजल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में जन-आंदोलन बन चुका है। मध्यप्रदेश में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान में जन सहयोग उमड़ रहा है। इसमें निरंतर जन सहभागिता बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के माँ क्षिप्रा के तट रामघाट से 30 मार्च को प्रदेश स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत की थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि जल संरक्षण के लिए जन भागीदारी जुटने से स्पष्ट है कि प्रदेश प्रधानमंत्री मोदी के ‘जन सहयोग से जल संरक्षण’ की मुहिम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेकर अग्रिम पंक्ति में आ गया है। राज्य सरकार ‘खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में’ के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है। इसे सफल बनाने के लिए “जल गंगा संवर्धन अभियान” में वर्षा जल संचयन, पुराने जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार का यह अभियान जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उज्जैन में जन सहभागिता से आगे बढ़ रहा अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उज्जैन से प्रारंभ किये गये अभियान में जल संरक्षण, जल स्त्रोंतो के पुनरूद्धार, भू-जल स्तर सुधार, पुराने कुओं-बावड़ियों के जीर्णोद्धार, जल स्त्रोतों की साफ-सफाई, पौध-रोपण, छोटी नदियों, तालाब जैसी जल संरचनाओं के संरक्षण करने के लिए चल रहे इस अभियान में अब जन सहयोग भी उमड़ने लगा है। उज्जैन जिला पंचायत सीईओ श्रीमति जयति सिंह के साथ जनपद पंचायत उज्जैन की टीम ने भी जन सहयोग से चिंतामण बावड़ी, गोठड़ा बावड़ी, राणावड़ बावड़ी और बामोरा बावड़ी की साफ-सफाई की। इंदौर में धर्मगुरु बता रहे हैं जल की महत्ता इंदौर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में जल संरक्षण की महत्ता जन-जन तक पहुँचाने के लिए धर्मगुरु भी जुड़ रहे हैं। धर्मगुरु अपने उपदेशों से जल की महत्ता जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। इनकी प्रेरणा से नागरिक श्रमदान कर बावड़ी, कुँओं और तालाबों को संवार रहे हैं। इन्दौर जिले के बरलाई जागीर गांव में चारभुजा नाथ मंदिर सांवेर के गुरु आनंदाचार्य ने आश्रम के बटुकों के साथ पूजन-अर्चन किया। मंत्रोच्चार के साथ जल का पूजन भी किया गया। उन्होंने उपस्थित जनों को जल की महत्ता समझाते हुए कहा कि जल की एक-एक बूँद जीवनदायी होती है। हमारी धार्मिक मान्यताओं में भी जल का विशेष स्थान है। इसलिए सभी को मिलकर जल को सहेजने चाहिये। आनंदाचार्य के आह्वान पर श्रद्धालुओं ने बरलाई जागीर की बावड़ी के लिये श्रमदान किया। उन्होंने कहा कि “जल गंगा संवर्धन अभियान”, प्रदेश में जल की प्रचुर उपलब्धता और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। सीधी में जन श्रमदान से जल संरचनाओं की सफाई, चौपाल संगोष्ठियों से जन जागरण मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद ने महाविद्यालयों के विद्यार्थियौं के सहयोग से सीधी की सबसे महत्वपूर्ण जल संरचना गोपालदास तालाब में से गाद निकाल कर उसकी साफ-सफाई के लिए श्रमदान का क्रम प्रारंभ किया है, जो अलग-अलग जल संरचनाओं की सफाई के रूप में निरंतर जारी है। इसके साथ ही जल संरक्षण के प्रति जन सामान्य को जागरुक बनाने के लिए चौपाल संगोष्ठी, दीवार लेखन और निबंध-कविता आदि साहित्यिक प्रतियोगिताओं के आयोजन भी कराए जा रहे हैं। नवांकुर संस्था जन-चेतना ग्राम विकास समिति ने सीधी जिले के आदर्श ग्राम नदहा की तिरचुली नदी में श्रमदान से स्वच्छता अभियान चलाया। जनता ने श्रमदान कर गांव के हैंडपम्पों के आसपास और जलाशय की सफाई एवं गहरीकरण किया। श्योपुर में सीप नदी के गिर्राज घाट पर श्रमदान से शुरू हुआ नदी सफाई का क्रम श्योपुर में जल गंगा संवर्धन अभियान में जन-अभियान परिषद की नवांकुर संस्था ने समाजसेवियों एवं स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से सीप नदी के गिर्राज घाट पर साफ-सफाई के लिए श्रमदान किया। सिवनी में जन-सहयोग के लिए जागरुकता रैली औऱ श्रमदान सिवनी जिले में जल गंगा संवर्धन-अभियान में ग्रामीण क्षेत्रों में नदी, कुंओं, तालाबों, बावड़ियों सहित अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही इस अभियान में जनसमुदाय को जोडने के लिए जागरूकता रैली और दीवार लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।  

केंद्र सरकार इस माह 26 राफेल-मैरीटाइम स्ट्राइक फाइटर्स की खरीद को मंजूरी देने के लिए तैयार

नई दिल्ली  केंद्र सरकार इस महीने 26 राफेल-मैरीटाइम स्ट्राइक फाइटर्स की खरीद को हरी झंडी देने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार डिफेंस खरीद के ट्रेंड को बरकरार रखे हुए है। 2024-25 में एनडीए सरकार डिफेंस इक्यूपमेंट की खरीद 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। राफेल मरीन विमान इतने खतरनाक और क्षमताओं से लैस हैं कि यह चीन के पास मौजूद F-16 और चीन के पास मौजूद J-20 से बेहतर है। ऐसे में दुश्मन नेवी की तरफ की तरफ आंख उठाने से पहले कई बार सोचेंगे। रिपोर्ट के अनुसार 7.6 अरब डॉलर के फाइटर प्लेन डील को इस महीने के अंत में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) के समक्ष रखा जाएगा। इसके साथ ही सभी हितधारकों को एकमत करने के बाद तीन अतिरिक्त डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के लिए सरकार की मंजूरी मिल जाएगी। नौसेना को मिलेगी मजबूती राफेल-एम लड़ाकू विमानों का यूज भारत के दो विमान वाहक पोतों पर समुद्र में भारतीय नौसेना को अधिक शक्ति प्रदान करने के लिए किया जाएगा। वहीं, अतिरिक्त पनडुब्बियां हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में पारंपरिक प्रतिरोध को मजबूत करेंगी। राफेल मरीन का वजन करीब 10,300 किलोग्राम है। यह एक मिनट में 18 हजार मीटर की ऊंचाई पर जा सकता है। पारंपरिक राफेल के विपरित मरीन राफेल के विंग मुड़ सकते हैं। राफेल मरीन में पनडुब्ब्यिों को खोजने और मार गिराने के लिए एडवांस राडार लगाए गए हैं। इसमें एंटी शिप मिसाइल भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा ये विमान मीटियोर, स्कैल्प और हैमर जैसी मिसाइल से भी लैस होंगे। यह प्लेन मैक2 की स्पीड से दुश्मन पर हमला करने में सक्षम है। यह स्टील्थ से लैस है, ऐसे में यह दुश्मन को आसानी से चकमा दे सकता है। एक दशक में डिफेंस इक्यूपमेंट पर खर्च रक्षा मंत्रालय ने 2024-2025 में ₹209059.85 करोड़ के खर्च के साथ 193 कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए। जबकि 2023-2024 में ₹104855.92 करोड़ के 192 कॉन्ट्रैक्ट्स पर साइन किए गए। 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से, मंत्रालय ने लगभग ₹10 लाख करोड़ के 1096 कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए हैं। भारत के पड़ोसियों, विशेष रूप से चीन की तरफ से 3488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को एडवांस करने और भारतीय उपमहाद्वीप के देशों द्वारा गंभीर राजनीतिक और वित्तीय तनाव के संकेत दिए जाने के मद्देनजर, मोदी सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर ध्यान केंद्रित किया है। इसके तहत सैन्य क्षमता निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का फैसला किया है।

जापान की बाबा वेंगा ने भविष्यवाणी की जापान की 2011 की सुनामी से तीन गुना ज्यादा तबाही जुलाई में

टोक्यो  जापान की पूर्व आर्टिस्ट और भविष्यवक्ता रयो तत्सुकी इन दिनों चर्चा में है। रयो को उनकी सटीक भविष्यवाणियां करने के लिए पहले ही पहचान मिल चुकी है। रयो की हालिया चर्चा की वजह ये है कि उन्होंने इस साल एक बड़ी तबाही की भविष्यवाणी की है। जापान की बाब वेंगा कही जाने वाली रयो के बारे में दावा है कि 1980 के दशक से उन्हें दुनिया में होने वाली आपदाओं के सपने आ रहे थे। इनको उन्होंने एक डायरी में दर्ज कर दिया। साल 1999 में ‘द फ्यूचर आई सॉ’ नाम से इसे प्रकाशित किया गया। इसे उनकी भविष्यवाणियों की किताब कहा सकता है। इस किताब मेंदर्ज उनकी कई भविष्यवाणियां सच होने का दावा किया जाता है। रयो ने ‘द फ्यूचर आई सॉ’ में इस साल जुलाई में जापान और आसपास के देशों में एक बड़ी सुनामी आने और इससे भारी तबाही होने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जापान के दक्षिण में समुद्र उबल रहा है और वहां बड़े बुलबुले उठ रहे हैं। यह पानी के नीचे ज्वालामुखी फटने का संकेत हो सकता है। रयो की मानें तो इस साल आने वाली ये सुनामी बेहद भयावह होगी। ये 13 साल पहले 2011 मेंआई सुनामी से तीन गुना बड़ी सुनामी होगी। कैसे मिली रयो को पहचान रयो तत्सुकी पहले कॉमिक्स बनाती थीं लेकिन बाद में अपनी भविष्यवाणियों के लिए उनको दुनियाभर में पहचान मिली। उनकी भविष्यवाणियां लोगों को हैरान भी करती हैं और डराती भी हैं। पहले भी तत्सुकी के कई सपने सच हो चुके हैं। इसलिए लोग उनकी नई चेतावनी को गंभीरता से ले रहे हैं। नोस्ट्रैडमस और बाबा वेंगा जैसे कई भविष्यवक्ताओं की लिस्ट में अब रयो तातसुकी का नाम जुड़ गया है। साल 1991 में रयो ने क्वीन के गायक फ्रेडी मर्करी के बारे में बुरा सपना देखा था। कुछ महीनों बाद उनकी बीमार होकर मौत हो गई। 1995 में उन्होंने कोबे, जापान में एक बड़े भूकंप की भविष्यवाणी की थी। ये भी सच साबित हुया और 6,000 से अधिक लोग मारे गए। उनकी सबसे प्रसिद्ध भविष्यवाणी 2011 में आई थी। उन्होंने कहा था कि मार्च 2011 में एक बड़ी आपदा आएगी। ये सही साबित हुआ, जब जापान ने तोहोकू भूकंप और सुनामी का सामना किया । भविष्यवाणी पर क्यो बोले एक्सपर्ट तत्सुकी की नई भविष्यवाणी यह है कि जुलाई 2025 में सुनामी बड़ी तबाही मचाएगी। यह सुनामी जापान और आसपास के देशों को प्रभावित कर सकती है। फिलीपींस, ताइवान, इंडोनेशिया और जापान के कुछ तटीय इलाके इससे प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक इस साल ऐसी सुनामी आने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ऐसे में जुलाई में क्या होगा, ये आने वाला वक्त ही तय करेगा।

TATA Capital आ रही 15000Cr का IPO, SEBI के पास कॉन्‍फिडेशियल प्री-फाइलिंग रूट के जरिए पेपर जमा किया

मुंबई नमक से सॉफ्टवेयर प्रोवाइडर टाटा ग्रुप (Tata Group) अपने एक और कंपनी का IPO लाने की तैयारी कर रहा है. इस आईपीओ का साइज 15000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का होने वाला है. टाटा की इस कंपनी ने सेबी के पास डॉक्‍यूमेंट्स सबमिट किया है. टाटा की यह कंपनी TATA Capital है, जो फाइनेंशियल सर्विस प्रोवाइड कराती है.  रिपोर्ट के मुताबिक, नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल सर्विस फर्म और Tata Sons की सहायक फर्म ने मार्केट रेग्‍युलेटर SEBI के पास कॉन्‍फिडेशियल प्री-फाइलिंग रूट के जरिए पेपर जमा किया है. IPO के जरिए कितने जारी होंगे शेयर? 25 फरवरी को टाटा कैपिटल (Tata Capital) के बोर्ड ने IPO प्‍लान अप्रूव किया था. इस आईपीओ के जरिए 23 करोड़ शेयर फ्रेश इश्‍यू के जरिए जारी किए जाएंगे. ऑफर फॉर सेल पर मौजूदा शेयर होल्‍डर्स द्वारा इक्विटी जारी किया जाएगा. कंपने के मुताबिक, स्टॉक मार्केट के कंडीशन और रेग्‍युलेटरी क्लियरेंस के आधार पर IPO जारी किया जाएगा. अभी आईपीओ लाने का क्लियर डेट नहीं है. टाटा कैपिटल में इन फर्मों की हिस्‍सेदारी 31 मार्च तक टाटा संस (Tata Sons) के पास टाटा कैपिटल लिमिटेड (Tata Capital) के 92.83% शेयर होल्डिंग थी. इसमें टाटा ग्रुप की और कंपनियों और IFC की भी हिस्‍सेदारी है. पहले बताया गया था कि टाटा कैपिटल गोपनीय प्री-फाइलिंग सिस्‍टम का यूज करते हुए मार्च के आखिरी या अप्रैल की शुरुआत तक पेपर को अंतिम रूप देकर पेश कर देगा. IPO के लिए इन बैंकों की ली मदद कंपनी ने IPO की तैयारी में सलाहकार सहायता के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल (Kotak Mahindra Capital), सिटी, जेपी मॉर्गन (JP Morgan), एक्सिस कैपिटल (Axis Capital), ICICI सिक्योरिटीज, SBC सिक्योरिटीज, IIFL कैपिटल, बीएनपी पारिबा (BNP Paribas), SBI कैपिटल और HDFC बैंक समेत 10 निवेश बैंकों की सेवाएं ली हैं. क्‍यों आ रहा टाटा का ये IPO? टाटा ग्रुप की ओर से लिया गया है ये फैसला RBI के उस निर्देश के अनुरूप है, जिसमें टॉप एनबीएफसी को अधिसूचना के तीन साल के भीतर सार्वजनिक होने का निर्देश दिया गया है, जो सितंबर 2025 तक निर्धारित है. टाटा कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसेज, जो अब जनवरी 2024 तक टाटा कैपिटल के साथ विलय हो चुकी है, को नियामक सूची में शामिल किया गया है. इसके अलावा, जून 2024 में, टाटा मोटर्स लिमिटेड (TML), टाटा कैपिटल लिमिटेड (TCL) और टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड (TMFL) के निदेशक मंडल ने एनसीएलटी व्यवस्था योजना के माध्यम से TMFL के साथ टीसीएल के विलय को मंजूरी दे दी है. विलय समझौते के हिस्से के रूप में, टीसीएल अपने इक्विटी शेयर TMFL शेयरधारकों को जारी करेगा, जिससे TML के पास संयुक्त इकाई में 4.7 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी. क्रिसिल रेटिंग्‍स की रिपोर्ट क्‍या कहता है? क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Tata Sons ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों में टाटा कैपिटल लिमिटेड में कुल 6,097 करोड़ रुपये का निवेश किया है. इसमें वित्त वर्ष 2019 में 2,500 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2020 में 1,000 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2023 में 594 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024 में 2,003 करोड़ रुपये शामिल हैं, जो समूह के कर्ज कारोबार पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है. इस फैसले से टाटा कैपिटल, टाटा प्ले, ओयो, स्विगी, विशाल मेगा मार्ट, क्रेडिला फाइनेंशियल सर्विसेज, इंदिरा आईवीएफ और फिजिक्सवाला के बाद गोपनीय प्री-फाइलिंग मार्ग को चुनने वाली आठवीं प्रमुख भारतीय फर्म बन गई है.

मध्य प्रदेश में कर्मचारियों की लगी लॉटरी, वेतन-भत्ते में 10% तक का इजाफा, जानिए कितना होगा फायदा?

भोपाल   मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को डॉ. मोहन यादव की सरकार ने चैत्र नवरात्रि त्योहार के दौरान खुशियों की एक सौगात दी है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों ने के वेतन में 5 से 10 प्रतिशत तक का इजाफा किया है। कर्मचारियों को  मासिक वाहन भत्ता, दैनिक भत्ता, हाउस रेंट भत्ता के साथ ही अनुग्रह राशि का भी लाभ मिलेगा। मासिक वाहन भत्ता     इसके तहत 201 से 300 किमी की यात्रा अगर कर्मचारी अपने वाहन से करेंगे तो उन्हे  1350 रुपये का भत्ता मिलेगा जबकि दूसरे साधन से इतनी यात्रा करने पर 550 रुपये मिलेंगे।     301 से 405 किमी की यात्रा अगर कर्मचारी अपने वाहन से करेंगे तो उन्हे  2050 रुपये का भत्ता मिलेगा जबकि दूसरे साधन से इतनी यात्रा करने पर 750 रुपये मिलेंगे।     451 से 600 किमी की यात्रा अगर कर्मचारी अपने वाहन से करेंगे तो उन्हें  2500 रुपये का भत्ता मिलेगा जबकि दूसरे साधन से इतनी यात्रा करने पर 950  रुपये मिलेंगे।     601 से 800 किमी की यात्रा अगर कर्मचारी अपने वाहन से करेंगे तो उन्हें  3000 रुपये का भत्ता मिलेगा जबकि दूसरे साधन से इतनी यात्रा करने पर 1100 रुपये मिलेंगे।     800 किमी से ज्यादा की यात्रा अगर कर्मचारी अपने वाहन से करेंगे तो उन्हें  3700 रुपये का भत्ता मिलेगा जबकि दूसरे साधन से इतनी यात्रा करने पर 1250 रुपये मिलेंगे। दैनिक भत्ता     A श्रेणी- 375 रुपये (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के लिए550 रुपये)     B श्रेणी- 300, रुपये (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के लिए 440 रुपये)     C श्रेणीः 225 रुपये(भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के लिए 330 रुपये)      D श्रेणी: 185 रुपये (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के लिए 280 रुपये)     E श्रेणी: 125, (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के लिए 190 रुपये) हाउस रेंट भत्ता     7 लाख या इससे अधिक जनसंख्या वाले शहरों में मूल वेतन का 10%     3 लाख से अधिक पर 7  लाख से कम जनसंख्या वाले शहरों में  मूल वेतन का 7%     3 लाख से कम जनसंख्या वाले शहरों में मूल वेतन का 5% इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने अधिकारी-कर्मचारियों की श्रेणियों के हिसाब से हवाई, रेल और बस यात्रा पर भत्ता, भोजन भत्ता, यात्रा के दौरान ठहरने की पात्रता, ट्रांसफर होने पर सामान परिवहन और शासकीय सेवकों को स्थाई यात्रा भत्ते में भी वृद्धि की है। यह उन्हें वेतन व श्रेणी के हिसाब से मिलेंगे। अनुग्रह राशि भी बढ़ी वहीं राज्य सरकार ने नौकरी के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को वेतनमान में बैंड वेतन के योग के छह माह के बराबर अधिकतम 50 हजार रुपए तक अनुग्रह राशि दी जाती है। अब इसे बढ़ाकर 125000 रुपए स्वीकृत की गई है। वहीं सरकार डॉक्टरों को वेतन बैंड में समान वेतन तथा ग्रेड वेतन में नॉन प्रक्टिस एलांउस 25 प्रतिशत था, अब यह 20 प्रतिशत मिलेगा।

MPIDC के इंदौर-पीथमपुर इकॉनोमिक कॉरिडोर को लेकर सरकार ने 60% विकसित भूखंड देने का फैसला किया

इंदौर  इंदौर-पीथमपुर इकॉनोमिक कॉरिडोर(Indore-Pithampur Economic Corridor) के लिए सरकार ने अपनी लैंड पुलिंग पॉलिसी बदल दी। किसानों को जमीन के बदले 60 फीसदी विकसित भूखंड मिलेंगे। अब एमपीआइडीसी भी बदलाव करने जा रहा है। विभाग किसानों तक पहुंचने जा रहा है। गांव-गांव में शिविर लगाकर सहमति पत्र लिया जाएगा।  एमपीआइडीसी के इस कॉरिडोर को लेकर सरकार ने 60% विकसित भूखंड देने का फैसला किया है। 20.24 किमी लंबे कॉरिडोर में 1291 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। अब तक सवा सौ बीघा जमीन के पत्र आए असर यह हुआ कि नियमित एमपीआइडीसी के दफ्तर में किसान सहमति पत्र लेकर पहुंच रहे हैं। अब तक सवा सौ बीघा जमीन के पत्र आ गए हैं तो रोज बड़ी संख्या में किसानों के मिलने का सिलसिला जारी है। मालूम हो, 1291 हेक्टेयर जमीन के करीब 3500 से अधिक मालिक हैं। कई लोगों के पास जमीन के अलग-अलग हिस्से भी हैं। कार्यालय आना आसान भी नहीं होता, जिसको देखते हुए गांवों में शिविर लगाए जाएंगे। कलेक्टर ने ली बैठक  एमपीआइडीसी कार्यालय पर कलेक्टर आशीष सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने और जमीन मालिकों से बात कर सहमति लेने के निर्देश दिए। भूमि अधिग्रहण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में एमपीआइडीसी के राजेश राठौड़, जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन, एडीएम ज्योति शर्मा, एसडीएम गोपाल वर्मा, राकेश मोहन त्रिपाठी, राकेश परमार आदि मौजूद है।

EV दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में मध्य प्रदेश देश में आठवें स्थान पर

भोपाल  मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से होने वाली दुर्घटनाओं में 2024 में 89 लोगों की जान चली गई। 868 लोग घायल हुए। यह आंकड़ा राज्यसभा में पेश किया गया। इसके अनुसार ईवी दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में मध्य प्रदेश देश में आठवें स्थान पर है। हालांकि, 2022 से मौतों की संख्या में कमी आई है, लेकिन दुर्घटनाएं 2023 से स्थिर हैं। सरकार ईवी बैटरी की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित है और उसने सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए हैं। कुल 663 EV दुर्घटनाएं हुईं। उत्तराखंड 369 मौतों के साथ पहले स्थान पर है। मध्य प्रदेश से ऊपर अन्य राज्य बिहार (230 मौतें), महाराष्ट्र (154 मौतें), राजस्थान (144 मौतें), पश्चिम बंगाल (133 मौतें), असम (117 मौतें) और कर्नाटक (99 मौतें) हैं। भारत में सड़क दुर्घटनाएं रिपोर्ट में खुलासा अच्छी बात यह है कि मध्य प्रदेश में EV दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की संख्या में पिछले तीन सालों में कमी आई है। यह जानकारी राज्यसभा में दी गई। पूरे देश में 2024 में EV से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 7,575 थी। इनमें 1,947 लोगों की जान गई और 9,318 लोग घायल हुए। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार सरकार ‘भारत में सड़क दुर्घटनाएं’ नाम से एक वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करती है। यह रिपोर्ट राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मिले आंकड़ों पर आधारित होती है। राज्य सरकारें डालती हैं डाटा मंत्रालय ने बताया है कि एमओआरटीएच द्वारा ईवी से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं के बारे में अलग से कोई जानकारी नहीं जुटाई जा रही है। हालांकि, MoRTH के पास एक इलेक्ट्रॉनिक वेब पोर्टल है – eDAR। यह सड़क दुर्घटना के आंकड़ों की रिपोर्टिंग और निगरानी के लिए एक केंद्रीय जगह है। इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू कर दिया गया है। पोर्टल पर डेटा राज्य सरकारें डालती हैं। मध्य प्रदेश में EV से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में काफी कमी आई है। 2022 में, EV दुर्घटनाओं की कुल संख्या 1067 थी, जिसमें 250 लोगों की जान चली गई। 2023 में यह संख्या घटकर 670 हो गई, जिसमें 140 लोगों की जान गई। 2024 में दुर्घटनाओं की संख्या 663 रही और 89 लोगों की जान गई। सुझाव से संशोधन सरकार ने राज्यसभा में यह भी बताया कि EV बैटरी में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। MoRTH ने बैटरी और उसके घटकों, BMS (बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम) और संबंधित प्रणालियों के लिए सुरक्षा मानकों का सुझाव देने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई थी। समिति के सुझावों के आधार पर MoRTH ने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स (AIS) में संशोधन किया है। ये संशोधन 1 दिसंबर, 2022 से लागू हैं। AIS के कुछ नियम 31 मार्च, 2023 से प्रभावी हैं। इन संशोधनों से EV बैटरी और उसके घटकों के लिए मानकों और तकनीकी आवश्यकताओं को बढ़ाया गया है। इसके अलावा, MoRTH ने 19 दिसंबर, 2022 को एक नोटिफिकेशन जारी किया है। यह नोटिफिकेशन सभी प्रकार के EV, जिनमें क्वाड्रिसाइकिल, ई-रिक्शा, दोपहिया और चार पहिया वाहन शामिल हैं, के लिए उत्पादन की अनुरूपता (COP) की आवश्यकताओं से संबंधित है। सरकार ने यह जवाब दिया।

अपने राजा के जन्मोत्सव के लिए पूरा शहर सजकर तैयार हो गया

 ओरछा बेतवा नदी पर बसा ऐतिहासिक शहर ओरछा रामनवमी के लिए सजकर तैयार हो गया है। इसे छोटी अयोध्या भी कहा जाता है क्योंकि यहां राजा राम का भव्य व विश्वभर में मशहूर मंदिर(Ram Raja Sarkar Mandir) है। हर साल रामराजा सरकार के दर्शन के लिए 7-8 लाख श्रद्धालु आते हैं। रामनवमी पर यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। राम नवमी को लेकर शहर में अब उत्साह चरम पर है। पूरा शहर सजकर तैयार अपने राजा के जन्मोत्सव(Ram Navami 2025) के लिए पूरा शहर सजकर तैयार हो गया है। राम जन्मोत्सव परिवार द्वारा सुबह से प्रभातफेरी निकाल कर हर घर में आमंत्रण दिए जा रहे है तो शाम को भगवान राम की जगह-जगह महाआरती की जा रही है। शुक्रवार की शाम 8.30 बजे संगम गार्डन में राम जन्मोत्सव परिवार ने महाआरती का आयोजन किया। वहीं अयोध्या में विराजमान रामलला की 5 फीट की सुंदर प्रतिमा की आरती की गई। ये प्रतिमा इस बार 6 अप्रैल को शोभायात्रा में मुंबई की ढोल पार्टी के साथ निकाली जाएगी। ऐसी हैं तैयारियां रामराजा सरकार के मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है। इसकी सजावट के लिए देश की राजधानी दिल्ली से दो ट्रक भरकर फूल मंगवाए गए। रामनवमी पर रामराजा सरकार पालने में विराजमान होंगे, जो भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा।

तमिलनाडु को रामनवमी पर मिलेगी बड़ी सौगात! PM Modi करेंगे नए पंबन रेल पुल का उद्घाटन

 रामेश्वरम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 अप्रैल, रामनवमी को तमिलनाडु के दौरे पर जा रहे हैं. रामनवमी के अवसर पर दोपहर करीब 12 बजे वे भारत के पहले वर्टिकल लिफ्ट समुद्री पुल – नए पंबन रेल पुल का उद्घाटन करेंगे और सड़क पुल से एक ट्रेन और एक जहाज को रवाना करेंगे तथा पुल के संचालन को देखेंगे. इसके बाद दोपहर करीब 12:45 बजे वे रामेश्वरम में रामनाथस्वामी मंदिर में दर्शन और पूजा करेंगे. रामेश्वरम में दोपहर करीब 1:30 बजे वे तमिलनाडु में 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न रेल और सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे. इस अवसर पर वे उपस्थित जनसमूह को भी संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री नए पंबन रेल पुल का उद्घाटन करेंगे और रामेश्वरम-तांबरम (चेन्नई) नई ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाएंगे. रामायण में वर्णित अख्यान के अनुसार रामेश्वरम के पास राम सेतु का निर्माण धनुषकोडी से शुरू हुआ था. वर्टिकल लिफ्ट समुद्री पुल का पीएम करेंगे उद्घाटन रामेश्वरम को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला यह पुल वैश्विक मंच पर भारतीय इंजीनियरिंग की एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में खड़ा है. इसे 700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाया गया है. इसकी लंबाई 2.08 किमी है, इसमें 99 स्पैन और 72.5 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है जो 17 मीटर की ऊंचाई तक उठता है. स्टेनलेस स्टील सुदृढीकरण, उच्च श्रेणी के सुरक्षात्मक पेंट और पूरी तरह से वेल्डेड जोड़ों के साथ निर्मित, पुल में अधिक स्थायित्व और कम रखरखाव की आवश्यकता है. भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए इसे दोहरी रेल पटरियों के लिए डिज़ाइन किया गया है. एक विशेष पॉलीसिलोक्सेन कोटिंग इसे जंग से बचाती है, जिससे कठोर समुद्री वातावरण में दीर्घायु सुनिश्चित होती है. 8300 करोड़ की परियोजना की देंगे सौगात प्रधानमंत्री तमिलनाडु दौरे के दौरान राज्य में 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न सड़क और रेल परियोजनाओं की आधारशिला रखेंग. इन परियोजनाओं में एनएच-332 के 29 किलोमीटर लंबे विलुप्पुरम-पुडुचेरी खंड को चार लेन का बनाने का काम, एनएच-40 के 28 किलोमीटर लंबे वालाजापेट-रानीपेट खंड को चार लेन का बनाने का शिलान्यास और एनएच-32 के 57 किलोमीटर लंबे पूंडियनकुप्पम-सत्तनाथपुरम खंड और एनएच-36 के 48 किलोमीटर लंबे चोलापुरम-तंजावुर खंड को राष्ट्र को समर्पित करना शामिल है. ये राजमार्ग कई तीर्थस्थलों और पर्यटन स्थलों को जोड़ेंगे, शहरों के बीच की दूरी कम करेंगे और मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, बंदरगाहों तक तेजी से पहुंच को सक्षम करेंगे, इसके अलावा स्थानीय किसानों को कृषि उत्पादों को नजदीकी बाजारों तक पहुंचाने और स्थानीय चमड़ा और लघु उद्योगों की आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देने में सशक्त बनाएंगे. पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल पुल है पंबन यह नया पुल 2,078 मीटर लंबा और पुराने पुल की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक और मजबूत बनाया गया है. यह देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल पुल है, जो समुद्री यातायात को सुगम बनाने के लिए ऊपर उठ सकता है. इसका निर्माण बेहतर सुरक्षा और अधिक भार सहन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जिससे यह भविष्य में तेज रफ्तार ट्रेनों को भी सुचारू रूप से संचालित करने में सक्षम होगा. 1914 में बना था पुराना पंबन पुल इससे पहले केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था, “1914 में निर्मित पुराने पंबन रेल पुल ने 105 वर्षों तक मुख्य भूमि को रामेश्वरम से जोड़ा. दिसंबर 2022 में जंग लगने के कारण इसे बंद कर दिया गया, जिसने आधुनिक नए पंबन पुल के लिए मार्ग प्रशस्त किया, जो कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरुआत करेगा!” इस पुल के चालू होने से रामेश्वरम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी. साथ ही, यह पुल दक्षिण भारत के रेलवे नेटवर्क को और अधिक मजबूत करेगा. इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन राम नवमी जैसे शुभ दिन पर किया जाना इसे और भी खास बना देता है.

पूर्वजों का आशीर्वाद चाहिए तो चैत्र पूर्णिमा के दिन करें पिंडदान

हिंदू धर्म में पूर्णिमा की तिथि बहुत पावन मानी गई है. हर माह में एक पूर्णिमा पड़ती है. अभी चैत्र का महीना चल रहा है. इस महीने की समाप्ति पूर्णिमा के दिन होगी. फिर अगले दिन से वैशाख का महीना शुरू हो जाएगा. चैत्र पूर्णिमा के दिन स्नान दान किया किया जाता है. चैत्र पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु गंगा समेत पावन नदियों में स्नान करते हैं. साथ ही दान-पुण्य करते हैं. चैत्र पूर्णिमा के दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन होता है. इस दिन पूजा के समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को श्रीफल और चावल की खीर चढ़ानी चाहिए. चैत्र पूर्णिमा की तिथि पूजा-पाठ के साथ-साथ पितरों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है. इस दिन पितरों का तर्पण और पिंंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनको मोक्ष की प्राप्ति होती है. पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि चैत्र पूर्णिमा के दिन किस विधि से पिंडदान करना चाहिए. कब है चैत्र पूर्णिमा ? हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल को देर रात 3 बजकर 21 मिनट पर हो जाएगी. वहीं इस तिथि की समाप्ति 13 अप्रैल को सुबह सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर हो जाएगी. हिंदू धर्म में उदया तिथि मानी जाती है. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, 13 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा मनाई जाएगी. पिंडदान की विधि चैत्र अमावस्या के दिन सर्व प्रथम स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें. फिर एक वेदी बनाएं और उस पर पूर्वजों की तस्वीर रखें. फिर वेदी पर काले तिल, जौ, चावल और कुश रखें. इसके बाद गाय के गोबर, आटे, तिल और जौ से एक पिंड बना लें. फिर उस पिंड को पितरों को अर्पित को अर्पित करें. पितरों के मंत्रों का जाप करें. उनको जल अर्पित करें. ध्यान रखें कि पूर्वजों का पिंडदान हमेशा जानकार पुरोहित की उपस्थिति में ही करें. पिंडदान के बाद ब्राह्मणों को भोजन अवश्य कराएं और उनको दान भी दें. पिंडदान के नियम पूर्वजों का पिंडदान गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी के तट पर जाकर करें. पिंडदान हमेशा दोपहर के समय करें. पूर्वजों के पिंडदान के लिए दोपहर का समय सबसे अच्छा माना जाता है. पिंडदान करते समय, पितरों का ध्यान करें. उनसे आशीर्वाद देने की प्रार्थना करें.

इंदौर सहित पांच जिलों को मिलाकर IMR तैयार किया जा रहा, पर्यावरण और कनेक्टिवटी पर रहेगा जोर

इंदौर  इंदौर सहित पांच जिलों को मिलाकर इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (आइएमआर) तैयार किया जा रहा है। कंसल्टेंट कंपनी ने प्राथमिक रिपोर्ट पेश कर दी है, जिसमें क्षेत्र के इकट्ठा हुए डाटा के आधार पर खाका खींचा गया है। अब उसमें मंत्री व कलेक्टर के सुझाव को शामिल किया जाएगा, जिसके बाद कंपनी फाइनल रिपोर्ट पेश करेगी। इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, शाजापुस के हजारों गांव जुड़ेंगे इंदौर, उज्जैन, धार, देवास और शाजापुर की 29 तहसीलों के 1756 गांवों को मिलाकर 2051 के हिसाब से इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन का प्लान तैयार किया जा रहा है। 9336 वर्ग किमी एरिया में कनेक्टिविटी, उद्योग और पर्यावरण का संतुलन बनाया जाएगा ताकि बेतरतीब विकास पर नियंत्रण किया जा सके। इसको तैयार करने का काम इंदौर की मेहता एंड एसोसिएट कंपनी को दिया गया है, जिसने प्रारंभिक रिपोर्ट पेश कर दी है। दूसरी रिपोर्ट के लिए तैयारी शुरू प्लान तैयार करने के काम में कंपनी के डेढ़ दर्जन से अधिक विशेषज्ञ पिछले दो माह से जुटे हुए हैं जिन्होंने सभी जिलों से 26 बिंदुओं पर डाटा इकट्ठा किया। बिखरी हुई जानकारी होने की वजह से टीम को पसीने छूट गए। फिर भी बाद में शामिल हुए शाजापुर की जानकारी पूरी नहीं आई है। हालांकि मोटी मोटी जानकारी के आधार पर पूरे क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है जिसे कलेक्टर आशीष सिंह को सौंप दी गई। अब कम्पनी ने दूसरे चरण का काम शुरू कर दिया है जिसमें भौगोलिक स्थिति के साथ क्षेत्र की विशेषता और सामने आए डाटा के आधार पर विश्लेषण किया जा रहा है तो साथ में मैपिंग भी हो रही है। दूसरी रिपोर्ट में रीजन की पिक्चर सामने आ जाएगी। 1. इंदौर जिला क्षेत्रफल – 3901.6 वर्ग किमी प्रतिशत – 100 तहसील – बिचौली हप्सी, देपालपुर, महू, हातोद, इंदौर, कनाड़िया, खुड़ैल, मल्हारगंज, राऊ और सांवेर गांव – 690 2. उज्जैन जिला क्षेत्रफल – 2740.5 वर्ग किमी प्रतिशत – 44.99 तहसील – बड़नगर, घटिया, खाचरौद, कोठीमहल, नागदा, तराना, उज्जैन, उज्जैन नगर और उन्हेल गांव – 512 3. देवास जिला क्षेत्रफल – 2086.3 वर्ग किमी प्रतिशत – 29.72 तहसील – बागली, देवास, देवास नगर, हाटपिपल्या, सोनकच्छ और टोक खुर्द, गांव – 444 4. धार जिला क्षेत्रफल – 574.4 वर्ग किमी प्रतिशत – 7.04 तहसील – बदनावर, धार और पीथमपुर, गांव – 107 5. शाजापुर जिला क्षेत्रफल – 33.3 वर्ग किमी प्रतिशत – 0.54 तहसील – शाजापुर, गांव – 03 मंत्री और कलेक्टर ने दिए सुझाव पिछले माह इंदौर कलेक्टोरेट में आइएमआर में शामिल जिलों के संभागायुक्त, कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई थी। प्रेजेंटेशन देकर उन्हें जानकारी दी गई तो उस दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों ने मौके पर ही सुझाव दिए थे तो बाकी से लिखित में सुझाव अपेक्षित किए गए थे। उसमें मंत्री तुलसीराम सिलावट व देवास कलेक्टर ने सुझाव दिए हैं। अब उन पर विचार किया जाएगा।    

पीएम ई-बस योजना के तहत प्रदेश के 6 शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में ई-बसें चलाई जाएंगी

भोपाल  मध्यप्रदेश के छह शहरों में 582 ई-बसों(E-Bus) का संचालन जल्द शुरू करने की तैयारी चल रही है। लेकिन इन बसों का संचालन नगरीय निकायों को महंगा पड़ सकता है क्योंकि इनके संचालन के लिए जीसीसी यानी ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रेक्ट मॉडल अपनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक बस, ड्राइवर, कंडक्टर और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की ही रहेगी। सरकार केवल प्रति किलोमीटर के हिसाब से उसे भुगतान करेगी। प्रतिदिन न्यूनतम 180 किलोमीटर का भुगतान किया जाएगा। इंदौर में अभी एक एजेंसी 65 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से ई-बसें संचालित कर रही है।  भोपाल की सड़कों पर अगले छह महीनों में दो बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। पहला बदलाव जुलाई तक भोपाल मेट्रो की शुरुआत है। दूसरा बदलाव शहर की बसों के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों का जुड़ना है। पीएम ई-बस योजना के तहत राज्य के 6 शहरों (भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर) में पीपीपी मॉडल पर 552 शहरी ई-बसें चलाई जाएंगी। इसे पिछले फरवरी में मंजूरी मिली थी। शहरी विकास और आवास विभाग के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. परीक्षित जाडे ने हमारे सहयोगी टीओआई को बताया कि हम उम्मीद करते हैं कि पीएम ई-बस योजना के तहत ये इंट्रासिटी बसें 2025 के मध्य या अंत तक शुरू हो जाएंगी। इस बदलाव का उद्देश्य हजारों छात्रों और अन्य सार्वजनिक परिवहन उपयोगकर्ताओं के लिए सार्वजनिक परिवहन के वित्तीय बोझ को कम करना है। महामारी की समाप्ति के बाद से ये लोग सब्सिडी वाले बस पास का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।  यदि नई ई-बसों का कॉन्ट्रेक्ट 60 रुपए प्रति किलोमीटर में होता है तो एक बस को 180 किमी का प्रतिदिन 10800 रुपए का भुगतान होगा, चाहे उसमें सवारियां बैठे या नहीं। इस प्रकार बसों का संचालन करने वाली एजेंसी को 582 बसों का प्रतिदिन 62 लाख 85 हजार 600 रुपए मिलेगा। एक महीने में यह राशि 18 करोड़ 85 लाख 68 हजार रुपए होगी। टेंडर जारी पीएम ई-बस योजना के तहत प्रदेश के 6 शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में ई-बसें चलाई जाएंगी। इसके लिए कंपनी की तलाश शुरू हो गई है। रेट तय करने के लिए सरकार ने टेंडर जारी किया है। जो कंपनी सबसे कम रेट देगी उसे संचालन का काम मिलेगा। यह सुविधा तीन माह के अंदर शुरू करने की तैयारी की जा रही है। कुल 582 ई-बसें चलेंगी। इनमें से 472 बसें नौ मीटर वाली होंगी जिनमें लगभग 32 सीट होंगी। जबकि 110 बसें सात मीटर वाली होंगी जो 21 सीटर होंगी। कहां कितनी ई-बसें चलेंगी     भोपाल – 100     इंदौर – 150     जबलपुर – 100     उज्जैन – 100     ग्वालियर – 100     सागर – 32 टिकट एजेंसी का जिम्मा निकाय का इन बसों के चार्जिंग की व्यवस्था भी मिलजुलकर की जा रही है। चार्जिंग स्टेशन और डिपो राज्य सरकार बनवाएगी। इसकी 60 फीसदी राशि केन्द्र और 40 प्रतिशत राशि राज्य को देना होगी। सरकार सिर्फ जमीन और इंफ्रा विकसित करेगी। चार्जिंग गन बसों का संचालन करने वाली कंपनी ही लगाएगी और बिजली का बिल भी कंपनी ही चुकाएगी। ऐसे 11 चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जबकि टिकटिंग एजेंसी संबंधित निकाय द्वारा तय की जाएगी। टिकट का पैसा निकाय के पास जाएगा, इसी से बसों का भुगतान होगा। केंद्र 12 साल तक राशि देगी बसों के संचालन के लिए प्रति किलोमीटर के अनुसार भुगतान होगा। इसके लिए केंद्र सरकार प्रति किलोमीटर के अनुसार 22 रुपए देगी। केंद्र यह राशि 2037 तक यानी 12 साल तक देगी। जो राशि बचेगी वह किराए से कवर होगी। जहां किराए से कवर नहीं हो पाएगी उसका भुगतान संबंधित नगरीय निकाय को करना होगा। तीन महीने का अग्रिम भुगतान केंद्र ने इसकी भी पुख्ता व्यवस्था की है कि ई-बसों को नियमित भुगतान होता रहे। इसके लिए बैंक में एक एस्क्रो अकाउंट खुलवाया जाएगा। इसमें राज्य सरकार को कम से कम तीन माह का एडवांस पेमेंट जमा कराना होगा। यदि निकाय भुगतान करने में विफल रहते हैं तो इस अकाउंट में से संचालनकर्ता कंपनी को भुगतान हो जाएगा। बीसीएलएल को मिलेंगी 100 ई-बसें सूत्रों के अनुसार एमपी यूएडीडी यात्रियों की यात्रा लागत को सब्सिडी देने के लिए एक स्थिरता मॉडल पर काम कर रहा है। इसके साथ ही बेड़े की व्यवहार्यता को भी बनाए रखा जाएगा। भोपाल नगर निगम की सहायक कंपनी भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड आर्थिक रूप से संघर्ष कर रही है। यह राज्य सरकार के समर्थन और वायबिलिटी गैप फंडिंग पर निर्भर है। बीसीएलएल को इस योजना के तहत 100 ई-बसें मिलेंगी। एमपी नगर में 5000 से ज्यादा छात्रों का आना जाना महामारी से पहले भोपाल में 35,000 से अधिक बस यात्री मेयर के बस पास से असीमित यात्रा का लाभ उठाते थे। मिसरोद से एमपी नगर आने-जाने वाले जेईई कोचिंग के छात्र सार्थक और हर्षित ने इस लाभ का अनुभव कभी नहीं किया। एमपी नगर में लगभग 5,000 छात्र 5 किमी के दायरे में कोचिंग क्लासेस आते-जाते हैं। ये छात्र प्रति माह यात्रा पर अनुमानित 35 लाख रुपए खर्च करते हैं। प्रति छात्र औसतन 25 रुपये प्रतिदिन खर्च होता है। महामारी से पहले इस्तेमाल किए जाने वाले मेयर पास के समान एक स्टूडेंट बस पास इन यात्रा लागतों को आधे से भी कम कर सकता है। स्टूडेंट्स के लिए बड़ी सौगात हर्षित ने कहा कि अगर स्टूडेंट पास लागू होता है, तो केवल कोचिंग क्लासेस के लिए छात्रों की बचत 50% से अधिक हो जाएगी। जिन छात्राओं की कोचिंग क्लासेस देर शाम को खत्म होती हैं, उन्हें परिवहन पर अधिक खर्च करना पड़ता है। जल्दी आने-जाने के लिए ई-रिक्शा लेने से खर्च तीन गुना बढ़ जाता है। इससे आर्थिक तंगी बढ़ जाती है। भोपाल की मेयर मालती राय से संपर्क करने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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