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दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति पद रिक्त होने के 60 दिनों के भीतर नए चुनाव कराना अनिवार्य, 3 जून को होगा राष्ट्रपति चुनाव

सोल दक्षिण कोरियाई सरकार ने औपचारिक रूप से ऐलान किया कि राष्ट्रपति चुनाव 3 जून को होगा। पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को पद से हटाए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है। यह घोषणा कैबिनेट बैठक में की गई जो कि यून महाभियोग केस में संवैधानिक न्यायालय के फैसले के चार दिन बाद हुई। न्यायालय ने यून के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव जारी रखा जिसका मतलब था कि उन्हें अपना पद छोड़ना होगा और नए राष्ट्रपति चुनाव कराए जाएंगे। संविधान के अनुसार, देश में राष्ट्रपति पद रिक्त होने के 60 दिनों के भीतर नए चुनाव कराना अनिवार्य है। जब पूर्व राष्ट्रपति पार्क ग्यून-हे को 10 मार्च, 2017 को पद से हटाया गया, तो चुनाव ठीक 60 दिन बाद, 9 मई को आयोजित किए गए। सरकार ने 3 जून को अस्थायी सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया है। पिछले शुक्रवार को संवैधानिक न्यायालय के फैसले के तुरंत बाद राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों का पंजीकरण शुरू कर दिया था। योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, चुनाव के तुरंत बाद नए राष्ट्रपति बिना किसी ट्रांजिशन टीम के पदभार ग्रहण करेंगे। बता दें राष्ट्रपति यून ने 03 दिसंबर की रात को दक्षिण कोरिया में आपातकालीन मार्शल लॉ की घोषणा की, लेकिन संसद द्वारा इसके खिलाफ मतदान किए जाने के बाद इसे निरस्त कर दिया गया। मार्शल लॉ कुछ घंटों के लिए ही लागू रहा लेकिन इसने देश की राजनीति को हिला कर रख दिया। नेशनल असेंबली ने राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया। प्रधानमंत्री हान डक-सू ने उनकी जगह ली लेकिन उनके खिलाफ भी महाभियोग पारित हुआ। इसके बाद उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री चोई सांग-मोक कार्यवाहक राष्ट्रपति और कार्यवाहक प्रधानमंत्री दोनों की जिम्मेदारी संभालने लगे। हालांकि 24 मार्च को संवैधानिक न्यायालय ने प्रधानमंत्री हान डक-सू के महाभियोग को खारिज कर दिया और उन्हें कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में बहाल कर दिया।

RBI का बड़ा एलान, सभी बैंकों को अब पेंशन भुगतान में किसी भी देरी के लिए 8% प्रति वर्ष का ब्याज देना अनिवार्य

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक हालिया निर्देश में रिटायर केंद्रीय और राज्य सरकार के कर्मचारियों को पेंशन बांटने के लिए जिम्मेदार सभी बैंकों को अब पेंशन भुगतान में किसी भी देरी के लिए 8% प्रति वर्ष का ब्याज देना अनिवार्य है। RBI के मास्टर सर्कुलर में बढ़ोतरी इस आवश्यकता का उद्देश्य पेंशनभोगियों को उनके बकाया के देर से भुगतान के लिए क्षतिपूर्ति करना है। सर्कुलर के अनुसार, ‘पेंशन भुगतान करने वाले बैंकों को पेंशन/बकाया राशि जमा करने में देरी के लिए पेंशनभोगी को भुगतान की नियत तिथि के बाद 8 प्रतिशत प्रति साल की निश्चित ब्याज दर पर मुआवजा देना चाहिए।’ क्या है डिटेल? निर्देश में आगे स्पष्ट किया गया है कि यह मुआवजा पेंशनभोगियों से किसी भी दावे की आवश्यकता के बिना ऑटोमेटिक रूप से प्रदान किया जाएगा। तय पेमेंट डेट के बाद होने वाली किसी भी देरी के लिए मुआवजा 8% प्रति साल की निश्चित ब्याज दर पर प्रदान किया जाना चाहिए। ब्याज उसी दिन पेंशनभोगी के खाते में जमा किया जाएगा जिस दिन बैंक संशोधित पेंशन या पेंशन बकाया राशि संसाधित करेगा, जो 1 अक्टूबर, 2008 से सभी लेट भुगतानों पर लागू होगा। क्या है सर्कुलर में? सर्कुलर में बैंकों द्वारा पेंशन डिस्बर्समेंट के लिए एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है, ताकि संबंधित पेंशन भुगतान अधिकारियों से पेंशन आदेशों की कॉपीज तुरंत प्राप्त करके देरी से बचा जा सके। बैंकों को आरबीआई से निर्देशों की वेट किए बिना पेंशन भुगतान पूरा करने का निर्देश दिया गया है, इस प्रकार यह सुनिश्चित किया जाता है कि पेंशनभोगियों को अगले महीने के भुगतान चक्र में उनका लाभ मिले। इसके अलावा, RBI ने बैंकों से बेहतर ग्राहक सेवा प्रदान करने का आग्रह किया है, खासकर बुजुर्ग पेंशनभोगियों को, ताकि सहज बातचीत की सुविधा मिल सके। सर्कुलर में कहा गया है, “पेंशन डिस्ट्रिब्यूट करने वाले सभी एजेंसी बैंकों को सलाह दी जाती है कि वे पेंशनभोगियों, खासकर उन पेंशनभोगियों को जो वृद्ध हैं, विचारशील और सहानुभूतिपूर्ण ग्राहक सेवा प्रदान करें।” इस कदम से पेंशनभोगियों को प्रदान की जाने वाली बेहतर सर्विस मिलने की उम्मीद है, जिससे उनके लिए बैंकिंग अनुभव कम बोझिल हो जाएगा।  

सोने के दाम में आ रही बड़ी गिरावट: इस महीने पहुंचेगा 56,000 रुपये तोला, एक्सपर्ट्स की भविष्यवाणी

मुंबई सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है, और निवेशक जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या सोने का भाव 56,000 रुपये तक गिर सकता है। हालिया घटनाओं और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए कई Gold Market एक्सपर्ट्स इस संभावना को लेकर अपने विचार साझा कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कुछ महीनों में सोने के दामों में और गिरावट आने की संभावना है, और अगर ये ट्रेंड जारी रहता है, तो सोने का भाव 56,000 रुपये तक पहुंच सकता है। इसका मुख्य कारण अमेरिका के tariff chart, वैश्विक शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव, और डॉलर की मजबूत स्थिति को माना जा रहा है। इसके अलावा, मांग में कमी और अधिक खनन के कारण भी सोने के दामों में गिरावट आ सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ चार्ट ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। अमेरिका ने भारत समेत 16 देशों पर टैरिफ लगाने का फैसला किया, जिसके बाद इन देशों ने भी जवाबी कार्रवाई में टैरिफ बढ़ा दिए। इसका असर वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ा, और कहीं न कहीं हर देश में महंगाई बढ़ने की आंशका जताई जा रही है। इसी बीच, सोने की कीमतों को लेकर एक नया अनुमान सामने आया है। गोल्ड एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप के टैरिफ की वजह से अगले महीने सोने की कीमतों में भारी गिरावट आने वाली है। कब तक आएगी सोने में गिरावट? रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने के दाम 40% तक गिर सकते हैं, और ये गिरावट अगले महीने तक महसूस हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो सोने का दाम 90,000 रुपये से घटकर महज 50-55 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। क्या है सोने के दाम गिरने की वजह? सोने के दाम में यह गिरावट अमेरिका के टैरिफ चार्ट, अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव, और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण हो सकती है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों की नीतियों में बदलाव और सोने की मांग में कमी भी इसकी वजह हो सकती है। अगर आप सोने में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए बेहतरीन हो सकता है। मगर, क्या यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहेगी, या यह महज एक अस्थायी बदलाव है? क्यों गिरेगा सोने का भाव? अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थितियां: वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव सोने के दाम को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती: डॉलर के मजबूत होने से सोने के दाम में गिरावट हो सकती है, क्योंकि डॉलर की तुलना में सोने की मांग घट सकती है। सार्वभौमिक खनन और आपूर्ति: सोने के ज्यादा खनन और कम डिमांड के चलते भी इसकी कीमतों में कमी हो सकती है। निवेशकों के लिए क्या है सही समय? अगर आप सोने में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए अच्छा हो सकता है, खासकर अगर सोने के दाम में गिरावट आती है। लेकिन, जैसा कि एक्सपर्ट्स का कहना है, सोने की कीमतों में गिरावट की संभावना है, तो आपको सावधानी से काम करना चाहिए और बाजार की स्थिति को ध्यान से देखना चाहिए।  

सुशासन तिहार को लेकर लोगों में भारी उत्साह, कलेक्टर ने स्वयं आवेदन लेकर दी पावती

रायपुर राज्य शासन के निर्देशानुसार आज बलौदाबाजार जिले में सुशासन तिहार 2025 के प्रथम चरण के तहत आवेदन लेने का शुभारंभ आज जिले के  ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में हुआ। आवेदन प्राप्त करने के स्थल को रंगोली  एवं बैनर से आकर्षक ढंग से सजाया गया तथा प्रथम आवेदक का तिलक लगाकर व गुलदस्ता देकर स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया।  कलेक्टर दीपक सोनी ने संयुक्त जिला कार्यलय में आवेदन प्राप्ति स्थल  पर स्वयं आवेदको से आवेदन प्राप्त किया और पंजी में आवश्यक प्रविष्टि कर पावती दिया।उन्होंने इस दौरान सुशासन तिहार में सबकी सहभागिता हेतु लोगों को प्रोत्साहित किया। जिले में सुशासन तिहार को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला।  सुशासन तिहार के उद्देश्य को जन- जन तक पहुंचने के लिए सायकिल रैली, नारा लेखन  सहित अन्य जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। विकासखंड कसडोल के ग्राम पंचायत गिरौद में एसडीएम की उपस्थिति में प्रथम आवेदक श्रीमती प्रेमलता पटेल का तिलक लगाकर व गुलदस्ता भेंट कर अभिनन्दन किया गया। प्रेमलता के आवेदन को पंजी में प्रविष्टि उपरांत पावती दी गई और आवेदन को समाधान पेटी में डाला गया। प्रेमलता पटेल ने बताया कि सुशासन तिहार राज्य शासन की बहुत अच्छी पहल है। इसके माध्यम से लोगों की समस्याओं और मांग से सम्बंधित आवेदनों का उपयुक्त निराकरण तय समय पर होगा। उन्होंने बताया कि  एक सामाजिक भवन मांग के लिए आवेदन दिया है।    नगर पालिका परिषद बलौदाबाजार में एसडीएम की उपस्थिति में वार्ड क्रमांक 3 में प्रथम आवेदक सूरज पटेल का गुलाब फूल देकर स्वागत किया गया। विकासखंड भाटापारा के ग्राम पंचायत देवरी में मंडल अध्यक्ष की उपस्थिति में प्रथम आवेदक का स्वागत किया गया।  इसीतरह सभी नगरीय निकायों के वार्डो और ग्राम पंचायतों में  सुशासन तिहार का आगाज हुआ।

सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए स्पेशल कैजुअल लीव का नियम बनाया, अपना अंगदान करने वाले को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली  केंद्रीय कर्मचारी अब 42 दिन की अतिरिक्त छुट्टी (स्पेशल कैजुअल लीव) ले सकते हैं। हालांकि इन छुट्टियों के लिए शर्त जोड़ी गई है। ये छुट्टियां उन्हीं कर्मचारियों को मिलेंगी जो अपना अंगदान करेंगे। इस दौरान कर्मचारियों की सैलरी में कुछ भी कटौती नहीं होगी। यानी उन्हें छुट्टियां भी मिलेंगी और उतने दिनों की सैलरी भी। 42 दिन की छुट्टियों से जुड़े इन नियमों के बारे में सरकार ने संसद में भी बताया है। हाल ही में लोकसभा में एक सवाल के जवाब में इन छुट्टियों के बारे में जानकारी दी गई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए स्पेशल कैजुअल लीव का नियम बनाया है। यह नियम सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने अपने कर्मचारियों को अंगदान करने पर अधिकतम 42 दिनों की स्पेशल कैजुअल लीव देने का फैसला किया है। 2023 में आया था आदेश इन छुट्टियों के बारे में साल 2023 में आदेश आया था। यह आदेश पर्सनेल मिनिस्ट्री (Personnel Ministry) ने जारी किया था। इस आदेश के मुताबिक अंगदान करने वाले कर्मचारी को 42 दिनों तक की छुट्टी मिल सकती है। हालांकि यह छुट्टी इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि ऑपरेशन कैसा था। किसी भी स्थिति में 42 दिन से ज्यादा की छुट्टी नहीं मिलेगी। फिर चाहे ऑपरेशन छोटा हो या बड़ा। वहीं इन छुट्टियों के लिए डॉक्टर की मंजूरी जरूरी है। यानी बिना डॉक्टर की मंजूरी के छुट्टी नहीं मिलेगी। ये छुट्टियां अस्पताल में भर्ती होने वाले दिन से शुरू होंगी। बढ़ाया जा सकता है समय सरकारी नियमानुसार छुट्टियों के समय में इजाफा किया जा सकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में 42 दिन से ज्यादा की छुट्टियां नहीं मिलेंगी। अगर किसी सर्जरी के लिए डॉक्टर 7 दिन की छुट्टी की मंजूरी देता और उसे बाद में लगता है कि मरीज को और छुट्टियों की जरूरत है तो वह छुट्टियों के दिनों में इजाफा कर सकता है। हालांकि इसके लिए डॉक्टर को लिखित में देना होगा। वहीं नियमानुसार छुट्टियों उस दिन से लागू होंगी जिस दिन अंगदान करने वाला शख्स अस्पताल में भर्ती होगा। लेकिन यहां भी कुछ राहत दी गई है। अगर डॉक्टर को लगता है कि अंगदान के लिए उस शख्स की सर्जरी से पहले उसे अस्पताल में कुछ दिन भर्ती करना जरूरी है तो ऐसे मामले में छुट्टियां सर्जरी से अधिकतम एक सप्ताह पहले से उपलब्ध हो सकती हैं।

राज्य का पूर्ण विकास नागरिकों की मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक उन्नति तथा प्रसन्नता से ही संभव

भोपाल नागरिकों की खुशहाली एवं बेहतर जीवन के लिए आंतरिक तथा बाह्य सकुशलता आवश्यक है। राज्य का पूर्ण विकास नागरिकों की मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक उन्नति तथा प्रसन्नता से ही संभव है। नागरिकों के लिये इस प्रकार वातावरण तैयार करना होगा जो उनके लिए आनंद का कारक बनें। विकास का मापदण्ड भौतिक सुविधाओं पर आधारित होने के साथ-साथ नागरिकों के आनंद के आधार पर भी होना चाहिए। इस उदद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा आनंद संस्थान का गठन अगस्त 2016 में किया गया था। यह संस्थान, मध्यप्रदेश शासन के आनंद विभाग अन्तर्गत संचालित है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी राज्य आनंद संस्थान आशीष कुमार ने बताया कि अपनी स्थापना के समय से ही राज्य आनंद संस्थान, प्रदेश के नागरिकों की खुशहाली और मानसिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करने के लिए सतत कार्यरत है। संस्थान का यह दृढ़ विश्वास है कि सुख बाहरी प्रभाव नहीं, बल्कि एक आंतरिक अनुभूति और एक स्वाभाविक अवस्था है, जिसे सही दृष्टिकोण, जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। इसी दिशा में कार्य करते हुए, संस्थान अपने विभिन्न कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और आनंदम गतिविधियों से नागरिकों में सकारात्मकता और आत्मिक आनंद की भावना विकसित करने का प्रयास कर रहा है। राज्य आनंद संस्थान द्वारा विगत माह भोपाल में एक नेशनल सेमिनार ऑन हैप्पीनेस का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाली से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहन चर्चा करना था। इस सेमिनार में देश के प्रमुख मनोवैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, समाजशास्त्रियों और नीति निर्माताओं को आमंत्रित किया गया, ताकि वे अपने अनुभवों और शोध निष्कर्षों को साझा कर सकें। आयोजन ने आनंद के विविध आयामों एवं तत्वों पर केंद्रित विभिन्न विषयों पर चर्चा करने और इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक मंच प्रदान किया। सेमिनार में आतंरिक आनंद की अनुभूति, आनंद और स्वास्थ्य के बीच संबंध, खुशहाल परिवार एवं कार्य स्थल, विद्यार्थियों और युवाओं में मानवीय मूल्य को बढ़ावा देने की रणनीतियों और भारतीय परंपरा में आनंद के स्त्रोतों पर चर्चा की गई।  

रायपुर : राज्य शासन के सहयोग से गौ पालक राजाराम का जीवन हुआ खुशहाल

रायपुर जरूरतमंद को समय पर मिली एक छोटी सी मदद भी उसकी राह आसान बना देती है। जिला कोरिया के जनपद पंचायत मुख्यालय की ग्राम पंचायत सोनहत में रहने वाले किसान राजाराम के परिवार के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। पेशे से किसान और महात्मा गांधी नरेगा में अकुशल श्रम के लिए पंजीकृत मनरेगा श्रमिक श्री राजाराम के परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे सहित कुल पाँच सदस्य हैं। इनकी थोड़ी सी कृषि भूमि है और उसमें परंपरागत धान की फसल लगाकर यह परिवार अपना जीवन यापन करता है। साथ ही मनरेगा के अकुशल श्रम पर निर्भर इस परिवार के पास अतिरिक्त कोई आय का साधन नहीं था। अपने छोटे से मकान में राजाराम दो-तीन गाय पालने का कार्य भी करते थे, जिससे उनके घर का दैनिक खर्च बमुश्किल चलता रहा। अपनी आर्थिक स्थिति से संघर्ष कर रहे राजाराम के परिवार को पंजीकृत श्रमिकों को पशुपालन के लिए मिलने वाले शेड की जानकारी प्राप्त हुई। इसके बाद उन्होंने ग्राम पंचायत में आवेदन देकर पशु शेड बनाए जाने की मांग रखी। उनके आवेदन के आधार पर ग्राम पंचायत की अनुशंसा पर कलेक्टर एवं जिला कार्यक्रम समन्वयक मनरेगा द्वारा दो साल पहले महात्मा गांधी नरेगा के तहत एक लाख बीस हजार रूपए से बनने वाले एक पशु शेड की स्वीकृति प्रदान की गई। इस कार्य के लिए ग्राम पंचायत सोनहत को ही निर्माण एजेंसी बनाया गया। शेड का कार्य लगभग तीन माह में पूरा होने के बाद राजाराम को ज्यादा संख्या में पशु पालन की सहूलियत मिल गई। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे कुल छह दुधारू गाय पाल ली हैं। अब उनके घर पर औसतन पंद्रह से बीस लीटर दूध का उत्पादन होने लगा है। इससे इस परिवार के पास स्वरोजगार के साथ आर्थिक उन्नति का रास्ता बन गया है। अपने संघर्ष और उसके बाद मनरेगा की सहूलियत से आजीविका का एक नया साधन पाकर राजाराम और उनका परिवार बेहद खुश हैं और अब उनकी मनरेगा के अकुशल श्रम पर निर्भरता भी काफी कम हुई है।

नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार वर्ष 2027 तक तैयार किया गया है कार्यक्रम

भोपाल प्रदेश में नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप साक्षरता कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। साक्षरता कार्यक्रम वर्ष 2022 से 2027 तक की अवधि के लिये तैयार किया गया है। प्रदेश में निरक्षरता उन्मूलन के लिये उल्लास-नव साक्षरता कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 5 व्यापक उद्देश्य को लेकर संचालित किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता प्रदान करना महत्वपूर्ण जीवन कौशल बुनियादी शिक्षा व्यावसायिक शिक्षा और सतत् शिक्षा प्रदान करना है। यह कार्यक्रम 15 वर्ष से अधिक आयु समूह के व्यक्तियों के लिये है। पठन-पाठन प्रदेश के परिदृश्य को ध्यान में रखकर राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा अक्षर पोथी नाम से प्रवेशिका बनाई गई है। यह प्रवेशिका सीखने की परिष्कृत गति एवं विषय वस्तु पर आधारित है। इस प्रवेशिका में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता के साथ महत्वपूर्ण जीवन कौशल जैसे वित्तीय, कानूनी, डिजिटल साक्षरता और आपदा प्रबंधन जैसे विभिन्न मुद्दों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम का क्रियान्वयन प्रदेश में असाक्षरों के पठन-पाठन के लिये छात्र-छात्राओं, सरकारी-गैर सरकारी संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जा रहा है। सहयोग देने वाले व्यक्ति को अक्षर साथी का नाम दिया गया है। बुनियादी साक्षरता परीक्षा राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष में 2 बार नवसाक्षरों के लिये बुनियादी साक्षरता परीक्षा लिये जाने का प्रावधान है। सितम्बर 2024 में नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में आयोजित परीक्षा में 16 लाख 49 हजार से अधिक नवसाक्षर शामिल हुए थे। शामिल नवसाक्षरों में से 90 प्रतिशत नवसाक्षरों ने परीक्षा में उत्तीर्ण होकर प्रमाण-पत्र हासिल किये हैं।  

मध्यप्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ी सौगात मिली, नेशनल हाईवे होगा अपग्रेड

भोपाल मध्यप्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ी सौगात मिल गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश से गुजर रहे नेशनल हाईवे-34 के हिस्से को अपग्रेड करने का प्रस्ताव पास कर दिया है। इसकी जानकारी उन्होंने खुद एक्स पर साझा की है। 531.84 करोड़ रुपए की स्वीकृति केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जानकारी साझा करते हुए लिखा कि मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के शाहगढ़-बक्सवाहा-नरसिंहगढ़-दमोह से 63.50 किमी लंबाई के खंड को पेव्ड शोल्डर के साथ 2-लेन में अपग्रेड करने के लिए 531.84 करोड़ रुपए की लागत के साथ स्वीकृति दी गई है। बनाए जाएंगे 4 बाईपास आगे जानकारी देते हुए लिखा है कि नेशनल हाईवे-34 उत्तराखंड के गंगोत्री धाम को मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर) पर लखनादौन से जोड़ता है। शाहगढ़-दमोह खंड के उन्नयन में 5 प्रमुख पुल, बक्सवाहा, भटेरा, नरसिंहगढ़ और पिपरिया चंपत में 4 बाईपास और दमोह के निर्मित क्षेत्रों में सर्विस/स्लिप रोड (दोनों तरफ 1.3 किलोमीटर) शामिल हैं। इस राजमार्ग के जुड़ने से कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी और आर्थिक विकास को भी तेजी से बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय से चल रही थी मांग नेशनल हाईवे 34 प्रदेश के नरसिंहपुर, सागर, दमोह और राजगढ़ से निकलता है। इस मार्ग को लंबे समय से अपग्रेड करने की मांग की जा रही थी। बता दें कि, 63.50 किलोमीटर का हिस्सा एमपी से गुजरता है। इस मार्ग के अपग्रेड होने से कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी।

12 अप्रैल को है हनुमान प्रकटोत्सव? जानें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में हनुमान जयंती का विशेष महत्व है। साथ ही यह दिन बजरंगबली को समर्पित होता है। वहीं यह दिन हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। बजरंगबली को शक्ति, भक्ति और सेवा का प्रतीक माना जाता है। पंचांग के मुताबिक हर साल चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर हनुमान जयंती को मनाने की परंपरा है। मान्यता है जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखकर हनुमान जी की उपासना करता है, उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। साथ ही कष्टों से छुटकारा मिलता है। इस साल हनुमान जयंती का पर्व 12 अप्रैल को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त… हनुमान जयंती 2025 तिथि  वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल 2025 को प्रात: 03 बजकर 20 मिनट पर होगा। साथ ही अगले दिन 13 अप्रैल 2025 को सुबह 05 बजकर 52 मिनट पर इसका अंत होगा। इसलिए हनुमान जयंती 12 अप्रैल को मनाया जाएगा। हनुमान जन्मोत्सव शुभ मुहूर्त 2025 इस बार हनुमान जन्मोत्सव पर पूजा के लिए दो शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। पहला मुहूर्त 12 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 34 मिनट से सुबह 9 बजकर 12 मिनट तक है। इसके बाद दूसरा शुभ मुहूर्त शाम को 6 बजकर 46 मिनट से लेकर रात  8. 8 मिनट तक रहेगा। हनुमान जी के मंत्र 1. ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट 2. ॐ नमो भगवते हनुमते नमः 3. ॐ महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते. हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये। नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा। 4. ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा। हनुमान जयंती का धार्मिक महत्व धर्म ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी ही एक ऐसे देव हैं जो आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं। इसलिए हनुमान जंयती के दिन बजरंगबली की पूजा- अर्चना करने से बल और बुद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। हनुमान जी की आरती आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके। अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुधि लाए। लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे। लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। पैठी पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे। बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संत जन तारे। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें। कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई। जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

एक दशक में दूसरी बार भारतीय प्रधानमंत्री ने यात्रा के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया

नई दिल्ली  श्रीलंका की सफल यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत लौट आए हैं। थाईलैंड के बाद श्रीलंका पहुंचे पीएम मोदी का जोरदार स्‍वागत किया गया। इस दौरान श्रीलंका के राष्‍ट्रपति अनूरा कुमार दशनायके ने शनिवार को पीएम मोदी को देश का सर्वोच्‍च नागर‍िक सम्‍मान ‘श्रीलंका मित्र व‍िभूषण’ दिया। पीएम मोदी ने बौद्ध धर्मस्‍थलों का भी दौरा किया जिनका भारत से करीबी नाता रहा है। पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान एक दुर्लभ घटना घटी। पीएम मोदी ने श्रीलंका में अनुराधापुरम की अपनी यात्रा के लिए भारतीय वायुसेना के बेहद शक्तिशाली हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया। एक दशक में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब भारतीय प्रधानमंत्री ने श्रीलंका के अंदर यात्रा के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया। बताया जा रहा है कि कभी तमिल विद्रोही गुट लिट्टे का गढ़ रहे श्रीलंका में सुरक्षा कारणों से पीएम मोदी के लिए यह फैसला लिया गया। यही नहीं पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंका के अंदर कई आतंकी हमले भी हो चुके हैं। इसी खतरे को देखते हुए पीएम मोदी के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया गया। पीएम मोदी ने अनुराधापुरम में भारत के वित्‍तपोषण वाले कई रेलवे प्राजेक्‍ट का उद्घाटन किया। इसमें माहो- ओमानथाई लाइन और हाल ही में बनाया गया माहो- अनुराधापुरम खंड शामिल है। इसके अलावा माहो- अनुराधापुरम खंड के सिग्‍नल को भी दुरुस्‍त किया गया। पीएम मोदी ने क‍िया वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल वरिष्‍ठ पत्रकार येशी सेली ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि सुरक्षा कारणों से भारतीय हेलिकॉप्‍टर इस्‍तेमाल करने का यह फैसला लिया गया था। एक सूत्र ने कहा, ‘यह किसी राष्‍ट्राध्‍यक्ष के लिए ऐसी जगहों पर जिन्‍हें सुरक्षित नहीं माना जाता है, वहां पर अपनी सेना के हेलिकॉप्‍टर या विमान का इस्‍तेमाल करने में कुछ भी असामान्‍य नहीं है। इसके लिए काफी पहले ही हवाई क्लियरेंस ले लिया जाता है।’ उन्‍होंने कहा कि निश्चित रूप से भारतीय प्रधानमंत्री के इस हेलिकॉप्‍टर के लिए पहले ही मंजूरी ले ली गई होगी। दुनियाभर में हाल के वर्षों में राष्‍ट्राध्‍यक्षों के साथ कई ऐसी घटनाएं हुई हैं। माना जा रहा है कि इसी वजह से भी पीएम मोदी को किसी खतरे से बचाने के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया गया। प‍िछले साल 19 मई को ईरानी एयरफोर्स का एक हेलिकॉप्‍टर अजरबैजान की सीमा के पास क्रैश हो गया था और इसमें ईरान के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत हो गई थी। सूत्र ने कहा, ‘श्रीलंका में हालांकि हालात सुधर गए हैं लेकिन फिर भी हम खतरा नहीं उठा सकते हैं।’ माना जा रहा है कि उनका इशारा श्रीलंका के गृहयुद्ध की ओर था जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। पीएम मोदी ने एसपीजी के साथ अपनी लैंड रोवर में क‍िया सफर लिट्टे नेता प्रभाकरण की मौत के बाद तमिल हिंसक आंदोलन खत्‍म हो गया। लिट्टे के ही आत्‍मघाती हमले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत हो गई थी। इससे पहले साल 2015 में जब पीएम मोदी श्रीलंका के अनुराधापुरम, जाफना और तलाईमनार की यात्रा पर गए थे तब उन्‍होंने भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया था। पीएम मोदी की यात्रा को देखते हुए श्रीलंका की सरकार ने कुछ समय के लिए अनुराधापुरम के एयरफोर्स बेस को रविवार को इंटरनैशनल एयरपोर्ट घोषित कर दिया था ताकि भारतीय प्रधानमंत्री यहां से आसानी से स्‍वदेश रवाना हो सकें। पीएम मोदी अपनी खास लैंडरोवर कार से इस एयरपोर्ट पर पहुंचे थे जिसे खासतौर पर श्रीलंका पहुंचाई गई थी। पूरी सुरक्षा का जिम्‍मा एसपीजी कमांडो के हवाले था। यह शक्तिशाली कार हर तरह के हमले झेल सकती है।

वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 7700 संपत्तियों की जानकारी दी, कब्रिस्तानों पर बने सरकारी दफ्तरों पर चलेंगे बुलडोजर

भोपाल नए वक्फ बिल के बाद राजधानी में जल्द ही वक्फ की जमीनों पर कब्जे हटाने शुरू होगें। वक्फ रेकॉर्ड के अनुसार सबसे ज्यादा कब्जे कब्रिस्तानों पर हैं। करीब 100 कब्रिस्तान खत्म हो चुके हैं। इनमें कहीं बस्तियां हैं तो कहीं काम्पलेक्स तो सरकारी दफ्तर भी काबिज हैं।  बोर्ड के रेकॉर्ड में राजधानी में 7700 वक्फ सम्पत्तियां हैं इसमें 135 कब्रिस्तान हैं। लेकिन इनमें से 30 ही बचे हैं। कब्रिस्तानों के संरक्षण के लिए काम कर रहे जमीयत के सचिव इमरान हारून के मुताबिक वर्तमान में भोपाल टॉकीज चौराहा, पुराना आरटीओ ऑफिस, नरेला संकरी, कोलार, जहांगीराबाद सहित कई इलाकों में कब्रिस्तानों के नामोनिशान भी नहीं बचा। पीएचक्यू के पास सरकारी दफ्तर के पीछे कब्रों के निशान अब भी हैं। वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 7700 संपत्तियों की जानकारी दी है। राजस्व रेकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है। इसके आधार पर बोर्ड का रिकॉर्ड भी अपडेट होगा। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल के मुताबिक प्रशासन को सभी की जानकारी दी चुकी है। इमरान हारून ने बताया कि शहर में करीब 70 प्रतिशत कब्रिस्तान खत्म हो गए हैं। कब्रिस्तान पर बस्तियां बस गई हैं तो कहीं लोगों ने अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया है। नए बिल से निजी कब्जों पर तो कार्रवाई संभव है सरकारी के लिए क्या होगा कुछ पता नहीं। उसके बदले बोर्ड क्या सरकार से जमीन लेेगी। मुस्लिम महासभा के मुन्नवर अली ने बताया कि ये भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। बीते साल ही शहर के कब्रिस्तानों में दफनाने के लिए जगह की कमी की बात सामने आई। निजी कब्जेधारियों पर तो कार्रवाई हुई लेकिन जिन जमीनों पर सरकार का कब्जा है उनके बदले क्या होगा। कब्रिस्तान के बदले जमीन मिलनी चाहिए। जानें वक्फ के नए कानून में क्या है वक्फ का नया कानून बनने के बाद होने वाले बदलावों को लेकर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने शनिवार को विस्तृत जानकारी दी है। इसमें लोगों के बीच बनी धारणा और कानून के प्रावधानों की सच्चाई को सामने रखते हुए सरकार ने साफ किया है कि नया कानून बनने के बाद न तो वक्फ संपत्तियां वापस ली जाएंगी और न ही निजी भूमि पर कब्जा किया जाएगा। इसी पर एक नजर… सवाल : वक्फ संपत्तियां वापस ले ली जाएंगी? सच्चाई : वक्फ कानून 1995 के तहत पंजीकृत कोई भी संपत्ति वक्फ के रूप में वापस नहीं ली जाएगी। क्योंकि एक बार जब कोई संपत्ति वक्फ की घोषित हो जाती है तो स्थायी रूप से उसी रूप में रहती है। विधेयक जिला कलेक्टर को उन संपत्तियों की समीक्षा करने की अनुमति देता है जिन्हें वक्फ के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया जा सकता है, खासकर अगर सरकारी संपत्ति है तो। वैध वक्फ संपत्तियां संरक्षित रहती हैं। सवाल : क्या वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण नहीं होगा? सच्चाई : एक सर्वेक्षण होगा। कानून सर्वेक्षण आयुक्त की पुरानी भूमिका के स्थान पर जिला कलेक्टर को नियुक्त करता है। जिला कलेक्टर मौजूदा राजस्व प्रक्रियाओं का उपयोग करके सर्वेक्षण करेंगे। इसका उद्देश्य सर्वेक्षण प्रक्रिया रोके बिना रिकॉर्डों की सटीकता में सुधार करना है।   सवाल : क्या मुसलमानों की निजी भूमि अधिग्रहित की जाएगी? सच्चाई : कोई निजी भूमि अधिग्रहित नहीं की जाएगी। यह केवल उन संपत्तियों पर लागू होता है जिन्हें वक्फ घोषित किया गया है। निजी या व्यक्तिगत संपत्ति को प्रभावित नहीं करता है जिसे वक्फ के रूप में दान नहीं किया गया है। केवल स्वैच्छिक और कानूनी रूप से वक्फ के रूप में समर्पित संपत्तियां ही नए नियमों के अंतर्गत आती हैं। सवाल : क्या वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएंगे? सच्चाई : बोर्ड में गैर-मुस्लिम शामिल होंगे लेकिन वे बहुमत में नहीं होंगे। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में पदेन सदस्यों को छोड़कर दो गैर-मुस्लिमों को सदस्य के रूप में शामिल करने की आवश्यकता होगी, जिससे परिषद में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य और वक्फ बोर्ड में अधिकतम तीन सदस्य हो सकते हैं। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्डों में कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होने चाहिए। इसका उद्देश्य समुदाय के प्रतिनिधित्व को कम किए बिना विशेषज्ञता को जोड़ना है। सवाल : क्या सरकार इस विधेयक का उपयोग वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए करेगी? सच्चाई : कानून जिला कलेक्टर के पद से ऊपर के एक अधिकारी को यह समीक्षा करने और सत्यापित करने का अधिकार देता है कि क्या सरकारी संपत्ति को गलत तरीके से वक्फ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। लेकिन यह वैध रूप से घोषित वक्फ संपत्तियों को जब्त करने के लिए अधिकृत नहीं करता है। क्या कानून गैर-मुसलमानों को मुस्लिम समुदाय की संपत्ति पर नियंत्रण या प्रबंधन की अनुमति देता है? सच्चाई : संशोधन में प्रावधान किया गया है कि केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्ड में दो कुछ ही गैर-मुस्लिम होंगे। चूंकि अधिकांश सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे, जिससे धार्मिक मामलों पर समुदाय का नियंत्रण बना रहेगा। धारणा : क्या उपयोगकर्ता  द्वारा वक्फ का प्रावधान हटाने से लंबे समय से स्थापित परंपराएं खत्म हो जाएंगी? सच्चाई : यह प्रावधान हटाने का उद्देश्य संपत्ति पर अनधिकृत या गलत दावों को रोकना है। उपयोगकर्ता संपत्तियों (जैसे मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान) द्वारा ऐसे वक्फ को सुरक्षा प्रदान की गई है जो वक्फ संपत्ति के रूप में बनी रहेंगी, सिवाय इसके कि संपत्ति पूरी तरह या आंशिक रूप से विवाद में है या सरकारी संपत्ति है। उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जहां किसी संपत्ति को सिर्फ इसलिए वक्फ माना जाता है क्योंकि उसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है, भले ही मालिक द्वारा कोई औपचारिक, कानूनी घोषणा न की गई हो। सवाल : क्या मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान की पारंपरिक स्थिति प्रभावित होगी? सच्चाई : वक्फ संपत्तियों के धार्मिक या ऐतिहासिक चरित्र में हस्तक्षेप नहीं करता। इन स्थलों की पवित्र प्रकृति में बदलाव करना नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना ही इसका उद्देश्य है।

मनगवां विधानसभा में जल्द ही मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम बनने वाला, 71 करोड़ होंगे खर्च !

रीवा  मनगवां विधानसभा में जल्द ही मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम बनने वाला है. गौधाम का क्षेत्रफल तकरीबन 1303 एकड़ का होगा. जिसकी लागत तकरीबन 71 करोड़ रुपए से भी अधिक है. वर्तमान में इस गौधाम में 30 हजार गौवंशो की देखरेख और भरण पोषण की व्यवस्था की जा रही है. इसके अलावा गौधाम के विस्तार होने के बाद यहां 50 हजार से भी ज्यादा गौवंशों को आश्रय मिल जाएगा. गौधाम में 100 से अधिक गौ सेवकों को रोजगार तो मिलेगा ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी. बेसहारा गौवंशों को मिलेगा सहारा मध्य प्रदेश में बेसहारा गौवंश आम आदमी के साथ ही सड़क में चलने वाले बड़े और छोटे वाहनों के आलावा किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है. सड़कों में घूम रहे गौवंश अक्सर सड़क हादसे का शिकार होकर घायल हो जाते हैं और उनकी दर्दनाक मौत हो जाती है. इसके अलावा सड़क पर घूम रहे बेसहारा गौवंशो से टकराकर अक्सर वाहन भी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. जिसमें सवार यात्रियों को अपनी जान तक गंवानी पड़ जाती है. प्रदेश की सड़कों पर हैं 10 लाख से अधिक गौवंश गौवंश की सड़क पर होने की समस्या से निजात पाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में गौशाला खोलने की योजना तैयार की है. कई गौशाला भी बनाई गई हैं. जहां पर लाखों गौवंशो को रखा भी जा रहा है. यहांं पर उनके भरण पोषण की व्यवस्था भी बनाई गई. लेकिन प्रदेश मे बेसहारा गौवंशो की संख्या 10 लाख से भी अधिक है. जिसके चलते प्रदेश सरकार ने गौशालाओं के बाद गौधाम बनाने का निर्णय लिया गया. ये गौधाम गौशालाओं से काफी विशाल होंगे. जिसमें अधिक संख्या में बेसहारा गौवंशो को रखकर उनकी देखभाल की जाएगी. रीवा में होगा प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम मध्य प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा गौधाम ग्वालियर लाल टिपारा गौधाम है लेकिन अब रीवा के मनगवां विधानसभा में स्थित हिनौती ग्राम पंचायत में जिस गौधाम का निर्माण हो रहा है वह प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम होगा. इस गौधाम की लागत तकरीबन 71 करोड़ रुपए से अधिक होगी. जबकी इसका क्षेत्रफल 1303 एकड़ का होगा. वर्तमान में यहां पर 30 हजार से ज्यादा गौवंशो को रखा गया है. जिनके भरण पोषण के साथ ही देखरेख की जा रही है. जल्द ही यहां पर गौवंशो की संख्या बढ़ाकर 50 हजार से अधिक कर दी जाएगी. वर्तमान में हैं 30 हजार गौवंश प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के प्रयासों से मनगवां विधानसभा के हिंनौती ग्राम पंचायत में गौधाम बनाए जाने की सौगात मिली. जिसके बाद बीते कुछ माह पूर्व ही उप मुख्यमंत्री के द्वारा हिंनौती मे भूमि पूजन किया गया था. वर्तमान में इस गौशाला का निर्माण कार्य चल रहा है. अभी इस गौधाम में 30 हजार से अधिक गौवंशो को रखा गया गया है, जिनकी देख रेख की जा रही है. जल्द ही गौधाम विस्तार करते हुए अधिक क्षमता वाला गौधाम बनाया जाएगा, जहां पर 50 हजार से भी अधिक गौवंशो को रखा जाएगा. ‘एशिया का सबसे बड़ा गौधाम बनाने का होगा प्रयास’ मनगवां विधायक नरेन्द्र प्रजापति ने बताया कि “हिंनौती ग्राम पंचायत में गौधाम का निर्माण कार्य चल रहा है. उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के दिशा निर्देशन मे गौधाम बनाया जा रहा है. वर्तमान में 30 हजार गौवंश वहां पर रखे गए हैं. गौधाम में जल्द ही एक रेस्ट हाउस का भी निर्माण होगा. यहां से एक प्रतिनिधि मंडल राजस्थान के पथमेड़ा गया था और वहां के गौधाम को देखकर उसी के आधार पर मनगवां में गौधाम का निर्माण कार्य किया जा रहा है. प्रयास किया जाएगा की यह गौधाम एशिया का सबसे बड़ा गौधाम बने.”

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना के लिए 120 बीघा जमीन की सहमति मिल चुकी

इंदौर  एमपी में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के किसान जमीन देने पर सहमत होते जा रहे हैं। बीते दिन दो विधायकों और जमीन मालिकों के साथ एमपीआइडीसी की बैठक हुई। मौके पर ही कुछ जमीन मालिकों ने करीब 40 बीघा जमीन देने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। अब तक 120 बीघा जमीन देने पर सहमति बन गई है।  एमपीआइडीसी के ऑफिस में हुई बैठक में विधायक उषा ठाकुर, मधु वर्मा और इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के 50 से अधिक जमीन मालिक व किसान मौजूद थे। प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन देकर कई लोगों की शंका का समाधान किया गया। सवाल किया गया कि यह कब पूरा होगा तो एमपीआइडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बताया कि जमीन मिलने के बाद दो साल में प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। पहली बार सरकार 60 फीसदी विकसित भूखंड किसी योजना में दे रही है। कॉरिडोर के तैयार होने से क्षेत्र और इंदौर के विकास को नई उड़ान मिलेगी। बच्चों को रोजगार मिलेगा। समय पर पूरी होने की उम्मीद एमपीआईडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बैठक में जमीन मालिकों के हर सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यह परियोजना तय समय सीमा में पूरी होगी, जिससे किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही, उन्हें मिलने वाले विकसित भूखंडों का उपयोग वे तुरंत शुरू कर सकेंगे। जमीन मालिकों ने भी इस बात पर संतोष जताया कि परियोजना समय पर पूरी होने की उम्मीद है। मिलेंगे रोजगार के अवसर उनका कहना था कि इससे उन्हें न सिर्फ आर्थिक लाभ होगा, बल्कि उनके बच्चों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। किसानों का कहना है पहले डर था कि जमीन चली जाएगी और बदले में जो मिलेगा, वो पर्याप्त नहीं होगा, लेकिन अब स्थिति साफ हो गई है, और अब जब हमें 60त्न विकसित प्लॉट मिलने की गारंटी दी जा रही है, तो हम इस परियोजना का हिस्सा बनने को तैयार हैं। समय पर दर्ज कराएं सहमति राजेश राठौड़ ने कहा हमारा लक्ष्य किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इस परियोजना को मूर्त रूप देना है। यह एक ऐसा मॉडल है, जिसमें किसान न केवल अपनी जमीन का उचित प्रतिफल प्राप्त करेंगे, बल्कि औद्योगिक विकास के साझेदार भी बनेंगे। इसलिए समय रहते अपनी सहमति दर्ज कराएं और इस ऐतिहासिक परिवर्तन का हिस्सा बनें।  जिला प्रशासन द्वारा भी इस परियोजना को सफल बनाने के लिए तेजी से कार्रवाई की जा रही है। ग्राम रिजलाय में एसडीएम राऊ गोपाल वर्मा ने एक अलग बैठक ली, जिसमें कई जमीन मालिक शामिल हुए। इस बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई और किसानों ने परियोजना के प्रति उत्साह दिखाया। प्रशासन का यह प्रयास है कि हर किसान की सहमति बिना किसी दबाव के, उनकी मर्जी से ली जाए। सरकार और प्रशासन का पूरा समर्थन बैठक में महू विधायक उषा ठाकुर ने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों की हर मांग को पूरा किया है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि जमीन देने वाले किसानों को 60 फीसदी विकसित प्लॉट मिलेगा। यह योजना स्वर्णिम भारत के निर्माण का एक कदम है। उद्योगीकरण आज की जरूरत है और इसके जरिए हमारे युवाओं को रोजगार मिलेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसानों की छोटी-छोटी शंकाओं का समाधान करने के लिए प्रशासन और एमपीआईडीसी के अधिकारी हर कदम पर उनके साथ हैं। राऊ विधायक मधु वर्मा भी इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने परियोजना को क्षेत्र के लिए अतिमहत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह परियोजना न सिर्फ क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि किसानों के लिए भी आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगी। जिस गांव में जमीन वहीं मिलेंगे प्लॉट पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर 19.6 किलोमीटर लंबी और 75 मीटर चौड़ी सडक़ के दोनों ओर 300-300 मीटर के बफर जोन में विकसित की जाएगी। इसमें 17 गांवों- नैनोद, कोर्डियाबर्डी, रिजलाय, बिसनावदा, नावदापंथ, श्रीरामतलावली, सिन्दोड़ा, सिन्दोड़ी, शिवखेड़ा (रंगवासा), नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, धन्नड़ और टिही की कुल 1331 हेक्टेयर जमीन शामिल है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2410 करोड़ रुपये है और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे विकास कार्य में कोई बाधा न आए। किसानों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि उन्हें अपनी जमीन के बदले 60त्न विकसित भूखंड मिलेंगे। ये भूखंड फ्री होल्ड होंगे, यानी किसान इनका पूरा मालिकाना हक रख सकेंगे। ये भूखंड यथासंभव उसी गांव में आवंटित किए जाएंगे, जहां उनकी मूल जमीन स्थित है। इससे किसानों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का मौका मिलेगा और वे इन भूखंडों का उपयोग आवास, व्यवसाय या बिक्री के लिए कर सकेंगे। सहमति देने की प्रक्रिया जमीन मालिक अपनी सहमति एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय कार्यालय, इंदौर में जमा कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रारूप में दस्तावेज जमा करने होंगे, जिसकी पावती उन्हें दी जाएगी। सहमति मिलने के बाद एमपीआईडीसी और राजस्व विभाग की टीम जमीन का भौतिक निरीक्षण करेगी और इसके आधार पर रजिस्ट्री एमपीआईडीसी के पक्ष में होगी। रजिस्ट्री से पहले किसानों को यह शपथ-पत्र देना होगा कि उनकी जमीन पर कोई विवाद या ऋ ण नहीं है। यदि जमीन पर ऋण है, तो संबंधित बैंक से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देना होगा। रजिस्ट्री के बाद किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार भूखंड आरक्षित कर सूचित किया जाएगा और परियोजना पूरी होने पर इनका कब्जा और रजिस्ट्री उनके नाम होगी। समस्या आई तो हम रहेंगे साथ विधायक ठाकुर ने किसानों से कहा कि औद्योगीकरण आज की जरूरत है और इसके जरिए युवाओं को रोजगार मिलेगा। किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए हमेशा खड़ी हूं। वर्मा ने योजना को क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगी। दावे-आपत्तियों का अंतिम निराकरण कॉरिडोर को लेकर एमपीआइडीसी ने दावे-आपत्ति बुलाए थे, जिसमें 700 लोगों ने उपस्थिति दर्ज कराई थी। पहले चरण में सभी दावे-आपत्तियों को सुना गया था। अब सरकार 60 फीसदी विकसित भूखंड देकर जमीन ले रही है तो बड़ी संख्या में किसान जमीन देने को राजी हो गए हैं। मंगलवार को आपत्तिकर्ताओं की आखिरी सुनवाई होगी। बताया गया है कि कुछ कॉलोनाइजरों की भी जमीन है और वे अड़े हुए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी 11 अप्रैल को अशोक नगर जिले के आनंदपुर धाम आयेंगे

PM Modi will visit Anandpur Dham in Ashok Nagar district on April 11 केंद्रीय मंत्री अमित शाह इस माह दो बार आएंगे मध्यप्रदेशकेंद्रीय मंत्री गडकरी 10 अप्रैल को प्रदेश की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का बदनावर (धार) से करेंगे लोकार्पण और भूमि-पूजननई दिल्ली में 12-13-14 अप्रैल को होगी सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की प्रस्तुतिकेन्द्र सरकार ने ग्वालियर पश्चिमी बायपास और सागर बायपास सहित प्रदेश की 4 सड़क परियोजनाओं को दी स्वीकृतिकेंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्रालय ने दी 4 हजार 303 करोड़ रुपए की सौगातप्रदेश में समर्थन मूल्य पर फसलों का उपार्जन जारीमुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रिपरिषद की बैठक के पहले मंत्रीगण को किया संबोधित भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 11 अप्रैल को अशोकनगर जिले की ईसागढ़ तहसील स्थित श्री आनंदपुर धाम पधार रहे हैं। केंद्रीय गृह तथा सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह का भोपाल में 13 अप्रैल को और 17 अप्रैल को नीमच में आगमन हो रहा है। उनकी उपस्थिति में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और दुग्ध संघ के बीच रवीन्द्र भवन में अनुबंध पर हस्ताक्षर होंगे, साथ ही प्रदेश में जारी सहकारिता गतिविधियों की समीक्षा भी की जाएगी। इसी प्रकार 17 अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नीमच दौरा भी प्रस्तावित है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी धार जिले के बदनावर से 10 अप्रैल को प्रदेश की विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 12-13-14 अप्रैल को दिल्ली के लाल किला प्रांगण में आयोजित विक्रमोत्सव के अंतर्गत सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की प्रस्तुति होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंत्रि-परिषद के साथी इस कार्यक्रम में सहभागिता कर आयोजन की गरिमा बढ़ाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रीय राजमार्ग स्वीकृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्रालय द्वारा प्रदेश को 4 हजार 303 करोड़ से अधिक की सौगातें मिली हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के अंतर्गत 4 कार्यों की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें 1227 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला 28.5 किलोमीटर लंबा ग्वालियर पश्चिमी बायपास, 1426 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला संदलपुर- नसरूल्लागंज बायपास, 330 करोड़ रुपए लागत का राहतगढ़ बरखेड़ी बायपास और 688 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला सागर बायपास शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मंदसौर, दमोह, मुरैना और नरसिंहपुर में इस वर्ष एग्रोविजन का आयोजन किया जाएगा। इसमें कृषि, कृषि अभियांत्रिकी, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण, कृषि विश्वविद्यालय, दुग्ध महासंघ, सहकारिता, पशुपालन और पंचयत एवं ग्रामीण विभाग सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उनके उपार्जन का सही दाम दिलवाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। चना, मसूर, सरसों, तुअर और गेहूं का उपार्जन आरंभ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य व बोनस मिलाकर 2600 रूपए प्रति क्विंटल की दर पर गेहूं उपार्जित किया जा रहा है। अब तक 21.36 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है और 2 लाख 49 हजार किसानों को 4 हजार 12 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। गेहूं का उपार्जन 5 मई तक चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मसूर, सरसों, तुअर उपार्जन के लिए जारी गतिविधियों की भी जानकारी दी।

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