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मध्यप्रदेश की ऊर्जा तस्वीर अब बदलने वाली, लगेगा 2800 मेगावाट की क्षमता वाले न्यूक्लियर पावर प्लांट, चार यूनिट लगाई जाएंगी

भोपाल मध्यप्रदेश की ऊर्जा तस्वीर अब बदलने वाली है। केंद्र सरकार ने शिवपुरी जिले के नरवर तहसील स्थित भीमपुर गांव में देश के एक बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र (nuclear power plant) को हरी झंडी दे दी है। न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) को भेजे गए आधिकारिक पत्र के मुताबिक, 2800 मेगावाट की क्षमता वाला यह संयंत्र मडीखेड़ा डैम के पास स्थापित किया जाएगा, जिसमें 700-700 मेगावाट की चार यूनिट लगाई जाएंगी।  यह परियोजना न सिर्फ प्रदेश, बल्कि पूरे देश की ऊर्जा ज़रूरतों को नई शक्ति देगी। भीमपुर क्षेत्र में ठंडा मौसम, स्थिर वातावरण और पर्याप्त जलस्रोत जैसे प्राकृतिक संसाधन पहले से ही मौजूद हैं, जिससे इस हाई-टेक प्लांट को पंख मिलेंगे। मडीखेड़ा का पानी करेगा न्यूक्लियर यूनिट को पॉवरफुल इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए जरूरी जल आपूर्ति मडीखेड़ा डैम से की जाएगी। इसके लिए 120 एमसीएम वाटर बैराज और 40 एमसीएम बैलेंसिंग रिजर्व वेल की भी योजना तैयार हो चुकी है। जमीन की पहचान और तकनीकी सर्वेक्षण का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है। प्रदेश को मिल रही है पहली न्यूक्लियर पहचान गौरतलब है कि अभी मध्यप्रदेश में कोई सक्रिय परमाणु संयंत्र नहीं है। लेकिन भीमपुर प्रोजेक्ट के साथ मप्र का नाम अब देश की न्यूक्लियर मैप पर चमकने को तैयार है। केंद्र सरकार की योजना के तहत राज्य के चार जिलों—शिवपुरी, मंडला, देवास और नीमच—में परमाणु परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। अधिकारियों की प्रतिक्रिया में संशय हालांकि शिवपुरी के कलेक्टर रविन्द्र चौधरी का कहना है कि उन्हें अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर चल रहे पत्र की जांच करवाई जा रही है। अगर भोपाल स्तर से कोई पत्र आया हो, तो उसकी जानकारी मुझे फिलहाल नहीं है।”

ऑर्डनेंस फैक्ट्री ने पांच महीने में ही 250 किग्रा और 120 किग्रा एयर बम के डेढ़ हजार से अधिक खोल की ढलाई का रिकॉर्ड बनाया

जबलपुर जबलपुर की ऑर्डनेंस की फैक्ट्री(ओएफजे) से तैयार ढाई क्विंटल के बम से भारतीय वायुसेना(एयरफोर्स) को बड़ा दम मिलने वाला है। एयरफोर्स के सबसे ताकतवर बमों में शामिल 250 किग्रा और 120 किग्रा एयर बम के खोल की ढलाई में इस बार ऑर्डनेंस फैक्ट्री जबलपुर (ओएफजे) ने बड़ी उपलिब्ध हासिल की है। नवंबर में इनकी ढलाई का ऑर्डर फैक्ट्री को मिला था। गत वित्तीय वर्ष के पांच महीने में ही दोनों एयर बम के डेढ़ हजार से अधिक खोल की ढलाई का रिकॉर्ड बनाया है। इसका फायदा यह हुआ कि ऑर्डनेंस फैैक्ट्री खमरिया में इन बमों में बारूद की फिलिंग तेज हो गई है। ऐसे में एयरफोर्स को समय पर सप्लाई हो रही है। ओएफजे को मिला है बड़ा लक्ष्य, पांच महीने में तैयार कर दिए 1500 शेल ओएफजे को लंबे समय के बाद एयरफोर्स से एयरबम के लिए बड़ा ऑर्डर मिला था। निगम अभी तक ओएफजे के अलावा दूसरी आयुध निर्माणियों से बम बॉडी तैयार करवाती है। कुछ निजी कंपनियां भी यह काम कर रही हैं। लेकिन ओएफजे अकेले दम ही रेकॉर्ड उत्पादन की ओर बढ़ रहा है। जो ऑर्डर मिला है, उसके पूरा होने से एयरफोर्स के भंडारण में बढ़ोत्तरी हो जाएगी। ओएफजे को एक वित्तीय में 60 से 80 करोड़ रुपए कीमत का वर्कलोड मिलता है। दिया गया है। दरअसल, ओएफजे को ढलाई का काम ओएफके की ओर से दिया गया है। जो सालभर के वर्कलोड के बराबर है। उसे तीन हजार से ज्यादा बम के खोल तैयार करना है। इसके लिए इस साल नवंबर तक का समय दिया गया है। लेकिन पिछले वित्तीय वर्ष के वित्तीय वर्ष समाप्त होते-होते फैक्ट्री ने 250 किग्रा बम बॉडी का 70 तो 120 किग्रा एरियल बम का लक्ष्य पूरा ही कर दिया है। अभी भी इसमें निरंतरता बनी हुई है। अब ओएफके की बारी बता दें, ऑर्डनेंस फैक्ट्री जबलपुर जहां खोल का निर्माण करता है, वहीं ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (ओएफके) इसमें बारूद की फिलिंग कर पूर्णता प्रदान करता है। ओएफजे से खोल तैयार होते ही अब बारी ओएफके की है, जिसे बम के खोल की फिलिंग काम शुरू कर दिया है।  भारी मात्रा में रहता है विस्फोटक 250 किग्रा एयर बम का इस्तेमाल सुकोई या जगुआर एयक्राफ्ट के जरिए किया जाता है। दुश्मन के इलाके में गिरने से हुए विस्फोट में आठ से 10 फीट का गहरा गड्ढा बन जाता है। जानकारों ने बताया कि इसमें 6 से 7 किलो अति विस्फोटक बारूद भरा होता है। बारूद के साथ छोटी स्टील की बॉल रहती है जो कि काफी घातक साबित होती हैं। इसी प्रकार 120 किग्रा एयर बम भी सबसे विश्वसनीय हथियारों में शामिल है। यह दुश्मन के बंकर, पुल और इमारतों केा तबाह कर देता है।

आगरा नगर निगम ने अपने पहले नगरपालिका बॉन्ड के माध्यम से सफलतापूर्वक 50 करोड़ रुपये जुटाए

आगरा शहरी बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण में मिसाल पेश करते हुए आगरा नगर निगम ने अपने पहले नगरपालिका बॉन्ड के माध्यम से सफलतापूर्वक 50 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस बॉन्ड को 3.5 गुना अधिक सब्सक्राइब किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के इलेक्ट्रॉनिक मंच के माध्यम से कुल 174 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं। निगम के बॉन्ड को दो क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की तरफ से एए का दर्जा दिया गया था। तीन परिवर्तनकारी परियोजनाओं ने निगम को 7.5 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना सहित उम्मीदों को पार करने में मदद की। इसी तरह, निगम द्वारा प्रदान की गई सह-कार्य स्थल, उच्च मांग में एक शहरी सुविधा, लोगों को उच्च गति इंटरनेट कनेक्टिविटी, सम्मेलन कक्ष और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के साथ एक सुरक्षित और अनुकूल स्थान में काम करने का विकल्प देगी। सरकारी सेवा वितरण को बदलने के लिए एक मनोरंजन केंद्र के साथ एक नागरिक सुविधा केंद्र इनडोर खेलों, एक व्यायामशाला, एक योग हॉल और एक पुस्तकालय के साथ नगरपालिका सेवाओं तक पहुंचने के लिए एक-स्टॉप समाधान प्रदान करेगा। सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए धन लगाया जा रहा प्रधान सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि यूपी सरकार का ध्यान राज्य भर में शहरी सेवाओं को मजबूत करने पर रहा है। सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए धन लगाया जा रहा है, और आगरा ने राज्य के अन्य शहरी स्थानीय निकायों के लिए एक उदाहरण स्थापित किया है। ये जिले भी जारी कर चुके हैं बॉन्‍ड निगम के नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने कहा कि हमारे बॉन्ड को जबरदस्त प्रतिक्रिया आगरा नागरिक निकाय के वित्तीय प्रबंधन में निवेशकों के विश्वास को दर्शाती है। इस धन का उपयोग शहरी सेवाओं को और उन्नत करने और परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए अतिरिक्त राजस्व स्रोत बनाने के लिए किया जा रहा है। जहां गाजियाबाद और लखनऊ ने अतीत में नगरपालिका बांड जारी किए थे, वहीं आगरा, वाराणसी और प्रयागराज को पिछले साल बॉन्ड के माध्यम से धन जुटाने के लिए सरकार से मंजूरी मिली थी, जिसमें से आगरा सबसे आगे रहा।  

गौमाता अपने बच्चों को तो पालती है, इंसान का भी ध्यान रखती, गौमाता का अमृततुल्य दूध पीकर हम बड़े हुए : CM यादव

इंदौर इंदौर के समीप महू के आशापुर गांव में नगर निगम गौशाला का निर्माण कर रहा है। इसका भूमिपूजन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गौमाता अपने बच्चों को तो पालती है। इंसान का भी ध्यान रखती है। गौमाता का अमृततुल्य दूध पीकर  हम बड़े होते है। हमारी संस्कृति में पहली रोटी गौमाता के लिए रखी जाती है। आखरी रोटी कुत्ते के लिए बनाई जाती है। हमारे पूर्वजों ने प्रकृति से जुड़ने के नियम बनाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौमाता की रक्षा का संकल्प युगों-युगों से हमारी संस्कृति से जुड़ा है। पहले माना जाता था कि भारत में दूध-दही की नदियां बहती है। खेती-बाड़ी में गौमाता की पहले काफी मदद ली जाती थी, लेकिन बाद में ट्रैक्टर, नए उपकरणों का उपयोग किया जाने लगा। इसकी मार हमारी गौमाता पर पड़ी। जाने-अंजाने हमसे गलतियां भी हुई, लेकिन हमे वापस ध्यान में आ गया कि रासायनिक खाद के उपयोग से नुकसान हो रहा है। जैविक खाद से किसान की लागत भी कम हो रही है और पौष्टिक अन्न का उत्पादन हो रहा है। हमने संकल्प लिया है कि गौमाता को लावारिस नहीं रहने दिया जाएगा। सभी नगर निगम को बड़ी गौशालाएं बनाने के लिए कहा गया है। इसके लिए राज्य सरकार भी मदद करेगी। उन्होंने कहा कि हमारा देश भगवान राम और कृष्ण की धरती है। देश की पहचान उनसे भी होती है। प्रदेश में जहां भी राम और कृष्ण की लीलाएं हुई है। उसे हम तीर्थ बनाएंगे। महू के जाना पाव को भी तीर्थ स्थल का रुप दिया जाएगा। मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि सवा सौ बीघा में गौशाला तैयार की जा रही है। हम इस गौशाला को आत्मनिर्भर बनाएंगे। यहां दस हजार गौवंश के रहने की व्यवस्था की जाएगी। एक साल के भीतर यह गौशाला बनकर तैयार हो जाएगी।  

नए फाइनेंसियल ईयर में ‘कैश लिक्विडिटी मैनेटमेंट’ के कारण अटक गई लाडली बहना योजना की 23वीं किस्त, आया अपडेट

भोपाल मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना के तहत मिलने वाला पैसा इस महीने अभी तक नहीं आया है। आमतौर पर यह पैसा हर महीने की 10 तारीख को महिलाओं के खाते में जमा हो जाता है। हालांकि इस बार देरी हो रही है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि नए फाइनेंसियल ईयर में ‘कैश लिक्विडिटी मैनेटमेंट’ के कारण ऐसा हुआ है। उम्मीद है कि 13 अप्रैल के आसपास 1.2 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के खाते में 1,250 रुपये जमा कर दिए जाएंगे। केंद्र सरकार से मिलता है यह पैसा राज्य सरकार को यह पैसा केंद्र सरकार से मिलता है। सूत्रों के अनुसार, लाडली बहना योजना का पैसा तभी दिया जाएगा जब केंद्र से पैसा आएगा। इस योजना के लिए वित्त विभाग ही पैसा जारी करता है। क्या है लाडली बहना योजना लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश की एक बड़ी योजना है। इसमें महिलाओं को हर महीने 1,250 रुपये मिलते हैं। यह योजना पिछली सरकार, यानी शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने 2023 में शुरू की थी। यह योजना चुनाव जीतने में काफी मददगार साबित हुई थी लेकिन इस योजना से मध्य प्रदेश सरकार पर हर महीने 1500 करोड़ रुपये का बोझ पड़ रहा है। क्यों हो रही इस बार देरी इस बार लाडली बहना योजना के पैसे में देरी क्यों हो रही है, इस बारे में कोई भी खुलकर बात नहीं कर रहा है। वित्त विभाग के अधिकारी और महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) विभाग के अधिकारी भी इस बारे में कुछ नहीं कह रहे हैं। ज्यादातर वित्त अधिकारियों का यही कहना है कि ‘कोई जानकारी नहीं।’ कुछ दिनों में जारी हो जाएगा पैसा सूत्रों का कहना है कि डब्ल्यूसीडी विभाग ने बड़े अधिकारियों को वित्त विभाग के ‘फंड प्रबंधन’ के बारे में बता दिया है। कुछ वित्त अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इस योजना के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस महीने पैसा जरूर जारी कर दिया जाएगा, भले ही कुछ दिन की देरी हो जाए। उन्होंने कहा, ‘इस योजना के लिए कोई फंड संकट नहीं है और इस महीने पैसा जारी कर दिया जाएगा, हालांकि कुछ दिन बाद।’

अयोध्या में राम दरबार 6 जून से श्रद्धालुओं के लिए खुलेगा, राम, सीता और अन्य देवताओं की प्रतिमाएं 23 मई को स्थापित होंगी

अयोध्या श्रीराममंदिर के निर्माण कार्य में तेजी देखने को मिल रही है। योगी सरकार की निगरानी में यह ऐतिहासिक राम मंदिर निर्माण कार्य अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। बुधवार को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि अयोध्या में राममंदिर में रामलला के अलावा 18 और मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा जून में होगी। ये मूर्तियां राजस्थान के जयपुर में बनाई जा रही हैं। ये मूर्तियां 15 अप्रैल के बाद अयोध्या पहुंच जाएंगी। इसके बाद 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के मौके पर सिंहासन पर मूर्तियों को रखा जाएगा। फिर जून में प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा। उन्होंने कहा कि मंदिर के प्रथम तल पर राम दरबार और परकोटा में छह मंदिरों की स्थापना होगी। इनमें सूर्य, भगवती, अन्नपूर्णा, शिवलिंग, गणपति और हनुमान जी की मूर्तियां शामिल हैं। इसके अलावा, शेषावतार मंदिर में लक्ष्मण जी की मूर्ति स्थापित की जाएगी। सप्त मंडप में महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य मुनि, निषाद राज, शबरी और अहिल्या की मूर्तियां स्थापित होंगी। ये सभी प्रतिमाएं सफेद मकराना मार्बल से तैयार की गई हैं, जिनका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। मूर्तियों के श्रृंगार, वस्त्र और आभूषणों की तैयारी भी जोरों पर है। चंपत राय ने बताया कि तुलसीदास की मूर्ति पहले ही स्थापित की जा चुकी है और यात्री सुविधा केंद्र के मंडप में श्रद्धालु उनके दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर राम दरबार को प्रथम मंजिल के गर्भगृह में स्थापित कर दिया जाएगा। जून में ट्रस्ट के सभी सदस्यों की उपस्थिति में तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित होगा, जिसमें जलवास, अन्नवास, औषधिवास और शैय्यावास जैसे अनुष्ठान शामिल होंगे। शेषावतार मंदिर का कार्य बाद में शुरू होगा, जिसके लिए अंदर के टावर क्रेन से हटाए जाएंगे। मिश्र ने बताया, ‘रामलला की प्राण प्रतिष्ठा इस मंदिर के भूतल पर 2024 में हो चुकी है। अब राजा राम को प्रथम तल पर राम दरबार में विराजमान करने की बारी है। अनुमान है कि भगवान राम, उनके भाइयों और माता सीता की प्रतिमाएं अयोध्या पहुंचेंगी और 23 मई को मंदिर के प्रथम तल पर इन्हें स्थापित किया जाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘जब भगवान राम की प्रतिमा उनके दरबार में स्थापित होगी तो स्वभाविक है कि एक धार्मिक समारोह के बाद ही यह होगा। यहां पूजा होगी, लेकिन इसे प्राण प्रतिष्ठा कहना ठीक नहीं होगा क्योंकि प्राण प्रतिष्ठा पहले ही हो चुकी है। हां, राम दरबार को आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने से पूर्व अलग-अलग तरह की पूजा होगी। यह पूजा 5 जून को संपन्न होगी।’ 23 मई को होगी प्रतिमा स्थापित मिश्र ने कहा कि 23 मई और 5 जून की तिथियों का अपना ज्योतिषीय योग है। इसलिए 23 मई को स्थापना करने और 5 जून को पूजा संपन्न होने के बाद राम दरबार को आम लोगों के लिए खोलने का फैसला किया गया है। करीब पांच फुट की राम की प्रतिमा जयपुर में सफेद संगमरमर से तैयार की गई है और इसे राम दरबार में स्थापित किया जाएगा। यहां सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान की भी प्रतिमाएं होंगी। यह पूछने पर क्या पूरा मंदिर 5 जून तक तैयार हो जाएगा और 6 जून से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा, मिश्र ने कहा, ‘हां, यह हो जाएगा क्योंकि दूसरा फ्लोर भी उसी दिन तैयार हो जाएगा। मुख्य मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा, लेकिन परिसर की दीवार का निर्माण पूरा होने में कुछ और माह लगेंगे। हालांकि, 6 जून तक राम मंदिर के बाहर महर्षि वाल्मिकी मंदिर जैसे अन्य सात मंदिरों का निर्माण पूरा हो जाएगा।’ राय ने कहा, ‘जून में कोई पावन तिथि तय करके सभी विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा होगी।’ राय ने बालक राम लला के सूर्य तिलक की व्यवस्था के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने यह भी कहा कि सूर्य तिलक की परिकल्पना पीएम नरेंद्र मोदी की थी। ‘सभी मूर्तियां लगभग तैयार हैं’ राय ने कहा, ‘सभी मूर्तियां लगभग तैयार हैं। वस्त्र और आभूषण तैयार कराए जा रहे हैं। 15 अप्रैल के बाद मूर्तियों को लाने का क्रम शुरू हो जाएगा। सफेद मकराना पत्थर की मूर्तियां भारी हैं, इसलिए उन्हें लाकर निर्धारित स्थान पर स्थापित कर दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘इसमें संत तुलसीदास की मूर्ति स्थापित हो चुकी है। कुल 18 मूर्तियां जयपुर से आनी हैं। सप्तमंडप की महर्षि बाल्मीकि, गुरु वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, शबरी, अहिल्या आदि की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं।’ उन्होंने बताया कि अप्रैल तक टावर क्रेन हट जाएगी तब उत्तर, दक्षिण में अधूरे छोड़े गए परकोटे का निर्माण होगा। इसके बाद परकोटा के उत्तर और दक्षिण हिस्से का निर्माण शुरू होगा। राम मंदिर का निर्माण कार्य अक्तूबर 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है। चंपत राय ने बताया कि शिखर का पूजन हो चुका है और भुज दंड सहित अन्य हिस्सों की स्थापना क्रमिक रूप से की जाएगी। योगी सरकार की सक्रिय भागीदारी से यह परियोजना न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से भी अयोध्या को नई पहचान दे रही है। सरकार का लक्ष्य है कि यह मंदिर संपूर्ण भारत के लिए एकता और श्रद्धा का प्रतीक बने। जन्मभूमि में तांबे की गिलहरी स्थापित होगी राम जन्मभूमि में तांबे की गिलहरी की बड़ी मूर्ति रखी जाएगी। इसे ऐसी जगह रखा जाएगा, जिससे सभी की नजर पड़े। बता दें कि भगवान राम ने लंका तक पहुंचने के लिए रामसेतु का निर्माण शुरू किया, तब गिलहरी ने भी इसमें मदद करने की कोशिश की थी। वह रेत और मिट्टी के छोटे-छोटे ढेले उठाकर पुल में जोडऩे की कोशिश करती थी। भारत की आध्यात्मिक एकता दर्शाएंगे द्वार मंदिर में चार द्वार बनाए जा रहे हैं। उत्तरी दिशा का द्वार, क्रॉसिंग 11 का द्वार, क्रॉसिंग 3 का द्वार और राम जन्मभूमि का मुख्य प्रवेश द्वार। इन द्वारों के नाम रामानुज, शंकराचार्य, माधवाचार्य और रामानंदाचार्य की परंपराओं के आधार पर रखे जाएंगे, जो भारत की आध्यात्मिक एकता को दर्शाएंगे।

हमें दूसरों की पूजा के तरीकों से कोई विरोध नहीं है, जब तक कि यह इस देश की संस्कृति के खिलाफ न हो- दत्तात्रेय होसबाले

नई दिल्ली  भारत में नए मंदिर-मस्जिद विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसा कोई सप्ताह नहीं जाता जब किसी नए शहर में मंदिर के नीचे मस्जिद होने का दावा सामने न आए और तनाव बढ़ जाए। हालात इतने नाजुक हो गए हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी इससे चिंतित दिखाई दे रहा है। RSS ने पहले अयोध्या, मथुरा और काशी जैसे बड़े मंदिर-मस्जिद विवादों में ही हिंदू पक्ष के दावों का समर्थन किया था। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कई बार मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज को रोकने की अपील की है। अब संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भी इसी तरह की चिंता जताई है। होसबाले ने पूछा है कि अगर हम 30,000 मस्जिदों को खोदना शुरू कर दें, यह दावा करते हुए कि वे मंदिरों को तोड़कर बनाई गई हैं, तो भारत किस दिशा में जाएगा? उन्होंने RSS की कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका ‘विक्रमा’ को दिए एक इंटरव्यू में पूछा, ‘क्या इससे समाज में और अधिक शत्रुता और नाराजगी नहीं पैदा होगी? क्या हमें एक समाज के रूप में आगे बढ़ना चाहिए या अतीत में फंसे रहना चाहिए? कथित तौर पर नष्ट किए गए मंदिरों को पुनः प्राप्त करने के लिए हमें इतिहास में कितना पीछे जाना चाहिए?’ राम मंदिर आंदोलन पर भी बोले होसबाले RSS के शताब्दी वर्ष के मौके पर हुए इस इंटरव्यू में होसबाले ने कई विषयों पर संगठन के विचार स्पष्ट किए। इनमें से कई विचार भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संघ से जुड़े अन्य संगठनों के विचारों से मेल नहीं खाते हैं। मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज पर होसबाले ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन RSS ने शुरू नहीं किया था। RSS के स्वयंसेवक सांस्कृतिक महत्व के कारण इस आंदोलन में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा, ‘उस समय, विश्व हिंदू परिषद और धार्मिक नेताओं ने तीन मंदिरों का उल्लेख किया था। अगर कुछ RSS स्वयंसेवक इन तीन मंदिरों को फिर से प्राप्त करने के प्रयासों में शामिल होना चाहते थे, तो RSS ने इसका विरोध नहीं किया। लेकिन अब स्थिति बहुत अलग है।’ संघ को भी सता रही दुश्मनी और नफरत की चिंता उन्होंने पूछा, ‘देश में 30,000 मस्जिदों के नीचे मंदिरों के दावे हैं। अगर हम इतिहास को पलटने के लिए उन सभी को खोदना शुरू कर दें, तो क्या इससे समाज में और अधिक दुश्मनी और नफरत नहीं पैदा होगी?’ होसबाले ने कहा कि मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज करने से हम अस्पृश्यता को खत्म करने, युवाओं में जीवन मूल्यों को स्थापित करने, संस्कृति की रक्षा करने और भाषाओं को संरक्षित करने जैसे अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने से वंचित रह जाएंगे। ‘हिंदू धर्म की जड़ों को जगाने से दूर होगी चिंता’ उन्होंने कहा, ‘जब मंदिरों की बात आती है, तो क्या किसी इमारत में जो अब एक मस्जिद है, कोई दिव्यता है? क्या हमें इमारत में हिंदू धर्म की तलाश करनी चाहिए, या हमें उन लोगों में हिंदू धर्म को जगाना चाहिए जो खुद को हिंदू नहीं मानते हैं? इमारतों में हिंदू धर्म के अवशेषों की खोज करने के बजाय, अगर हम समाज में हिंदू धर्म की जड़ों को जगाते हैं, तो मस्जिद का मुद्दा अपने आप हल हो जाएगा।’ भारतीय मुसलमानों के लिए संघ का संदेश होसबाले ने दावा किया कि भारत में लोग एक ही नस्ल के हैं और हिंदू धर्म अनिवार्य रूप से मानवतावाद है। उन्होंने कहा, ‘भारतीय मुसलमानों ने अपनी धार्मिक प्रथाओं को बदल दिया होगा, लेकिन उन्हें अपनी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक जड़ों को नहीं छोड़ना चाहिए। यह RSS का रुख है।’ हालांकि, उन्होंने कहा कि मुसलमानों या ईसाइयों को हिंदू होने के लिए अपना धर्म छोड़ने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमें दूसरों की पूजा के तरीकों से कोई विरोध नहीं है, जब तक कि यह इस देश की संस्कृति के खिलाफ न हो।’ होसबाले ने कहा कि RSS ने हमेशा शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनी मातृभाषा को बढ़ावा दिया है। ‘हम मानते हैं कि बच्चों के लिए सीखना आसान और अधिक स्वाभाविक है जब उन्हें उनकी मातृभाषा में पढ़ाया जा रहा हो।’ उन्होंने कहा कि शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने को न केवल एक व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में देखा जाना चाहिए, बल्कि संस्कृतियों को संरक्षित करने के साधन के रूप में भी देखा जाना चाहिए। ‘अंग्रेजी के प्रति आकर्षण समझ में आता है। लेकिन हमें एक स्थायी समाधान की आवश्यकता है।’ भाषा विवाद पर भी बोले संघ के नेता होसबाले ने ऐसी आर्थिक योजनाएं बनाने का भी आह्वान किया जो क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षित लोगों के लिए नौकरियां प्रदान करें। उन्होंने कहा, ‘बुजुर्गों, न्यायाधीशों, शिक्षा विशेषज्ञों, लेखकों, राजनेताओं और धार्मिक नेताओं को इस पर सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए। तीन-भाषा फॉर्मूले का उचित कार्यान्वयन 95% समस्या का समाधान कर सकता है। समस्याएं तब पैदा होती हैं जब भाषा का राजनीतिकरण किया जाता है। हमारे देश ने हजारों वर्षों से भाषाई विविधता के भीतर एकता बनाए रखी है।’ सियासी दलों को लेकर संघ के नेता ने कही बड़ी बात होसबाले ने कहा कि यह गलत है कि किसी विशेष राजनीतिक समूह से संबंधित लोगों को देशभक्त के रूप में पहचाना जाए और दूसरों को गद्दार कहा जाए। ‘देशभक्ति और राष्ट्रवाद सामान्य लक्षण हैं।’ उन्होंने कहा, ‘देश में कई राजनीतिक दलों का अस्तित्व इसकी एकता में बाधा नहीं है। हालांकि, राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से, हम सभी को कुछ सार्वभौमिक सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।’ होसबाले से पूछा गया कि क्या RSS का केवल एक राजनीतिक दल का समर्थन करना एक समस्या है। उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि RSS केवल एक राजनीतिक दल का समर्थन करता है। उन्होंने कहा, ‘स्वयंसेवक किसी भी सामाजिक या राजनीतिक व्यवस्था में काम करने के लिए स्वतंत्र हैं। स्वयंसेवक स्वाभाविक रूप से उन दलों के साथ जुड़ते हैं जिनके RSS के साथ संबंध हैं।’ उन्होंने कहा कि ‘अन्य दलों को स्वयंसेवकों को RSS और उनकी पार्टी दोनों का हिस्सा बनने की अनुमति देनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि RSS के स्वयंसेवकों के अल्पसंख्यकों, जाति, एकता, धर्मांतरण और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों पर कुछ विश्वास हैं, जो उनके लिए ऐसी पार्टी में काम करना मुश्किल बना देंगे जो इन सिद्धांतों के खिलाफ है। ‘जबकि कई राजनीतिक दलों ने खुले तौर पर RSS … Read more

एमपी में वक्फ की 15000 से अधिक संपत्तियां, 2000 संपत्तियों पर अवैध कब्जा, अब होगी कार्रवाई

भोपाल  वक्फ संशोधन अधिनियम के लागू होने के बाद, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष संवर पटेल ने बोर्ड की भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने लगभग 2000 लोगों की पहचान की है, जिन्होंने वक्फ संपत्तियों पर कब्जा कर रखा है। इन सभी को जल्द ही नोटिस भेजा जाएगा। नोटिस में उनसे संपत्ति खाली करने या कानूनी किराएदार बनने के लिए कहा जाएगा। ऐसा न करने पर नए कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। कांग्रेस नेताओं पर लगाया कब्जे का आरोप पटेल ने कांग्रेस के नेताओं पर वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता स्वदेश शर्मा ने वक्फ संशोधन अधिनियम को विभाजन की राजनीति करने का एजेंडा बताया है। मध्य प्रदेश मुस्लिम त्योहार कमेटी के बैनर तले कई लोगों ने वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और अधिनियम को वापस लेने की मांग की। सख्त कार्रवाई की तैयारी मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड अब वक्फ संपत्तियों को लेकर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। बोर्ड के अध्यक्ष संवर पटेल ने बताया कि राज्य में 15,008 वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें से ज्यादातर पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। हमने काम शुरू कर दिया उन्होंने कहा कि अब कानून आ गया है, तो काम भी होगा। हमने कमर कस ली है, और राज्य बोर्ड ने इस पर काम शुरू कर दिया है। राज्य में 15,008 वक्फ संपत्तियों में से ज्यादातर पर कब्जा है। हमने 2000 लोगों की पहचान की है और उन्हें जल्द ही नोटिस भेजने जा रहे हैं। हम उन्हें नोटिस में संपत्ति खाली करने या कानूनी किरायेदार बनने के लिए कहेंगे। यदि कोई दोनों विकल्पों पर कार्रवाई करने में विफल रहता है, तो नए कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। खुद को बचाने के लिए कर रहे प्रदर्शन पटेल ने यह भी कहा कि बोर्ड सरकार और प्रशासन से कब्जे हटाने में मदद मांगेगा। उन्होंने कांग्रेस के नेताओं पर वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता विरोध प्रदर्शन इसलिए कर रहे हैं ताकि वे खुद को बचा सकें। इसके साथ ही पटेल ने कहा कि जहां तक वक्फ संपत्तियों पर कब्जे की बात है, तो ज्यादातर लोग जो इस पर कब्जा किए हुए हैं, वे कांग्रेस से है।. यहां तक कि उनके (कांग्रेस) राष्ट्रीय अध्यक्ष पर भी वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने का आरोप है। एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी पर भी कब्जा करने का आरोप है। कई कांग्रेस नेताओं और उनके परिवार के सदस्यों पर वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने का आरोप है। वे (कांग्रेस) खुद को बचाने के लिए विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में हमने जो आर.आर.सी. जारी किए हैं, उनमें से सबसे बड़ा आर.आर.सी. रियाज खान के खिलाफ 7.11 करोड़ रुपये का है, और वह एक कांग्रेस नेता हैं। पटेल ने कहा कि इसी तरह, जब 2000 लोगों की सूची आएगी, तो आप देखेंगे कि उनमें से ज्यादातर कांग्रेस के नेता होंगे। विभाजन की राजनीति कांग्रेस नेता स्वदेश शर्मा ने वक्फ संशोधन अधिनियम को विभाजन की राजनीति करने का एजेंडा बताया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार इस कानून के जरिए वक्फ की जमीनों को अपने पसंदीदा उद्योगपतियों को देना चाहती है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने ‘अबकी बार, 400 पार’ का नारा दिया था और इसके पीछे केवल एक ही मकसद था कि जिस तरह से हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन और सरकारी संगठन अपने पसंदीदा उद्योगपतियों को बेचे गए, उसी तरह जमीन के लिए एक कानून लाया जाए जो वक्फ या अन्य को दान कर दी गई थी, जिसका उद्देश्य उन जमीनों को अपने उद्योगपति दोस्तों को प्रदान करना था। ये जमीनें (वक्फ संपत्तियां) वे जमीनें हैं जो लोगों द्वारा दान की गई थीं, और सरकार को उन्हें किसी को भी देने का अधिकार नहीं है। मुस्लिमों ने किया प्रदर्शन इसके अलावा, मध्य प्रदेश मुस्लिम त्योहार कमेटी के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ राज्य की राजधानी में इकबाल मैदान के पास विरोध प्रदर्शन किया और अधिनियम को वापस लेने की मांग की। गौरतलब है कि वक्फ संशोधन अधिनियम, 2013 में पारित किया गया था। इस अधिनियम का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और नियंत्रण को बेहतर बनाना है। अधिनियम वक्फ बोर्ड को वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे को हटाने और इन संपत्तियों का उपयोग मुस्लिम समुदाय के लाभ के लिए करने के लिए अधिक अधिकार देता है।

गृहमंत्री अमित शाह आज 13 अप्रैल को भोपाल आएंगे, इन कार्यक्रमों में होंगे शामिल

भोपाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद केंद्रीय गृहमंत्री मध्यप्रदेश के दौरे पर आएंगे। आज 13 अप्रैल को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड सहकारिता विभाग के कार्यक्रम में शामिल होंगे। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड, राज्य शासन और दुग्ध संघ के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर करेंगे। वहीं सहकारिता गतिविधियों की भी समीक्षा होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद केंद्रीय गृहमंत्री मध्यप्रदेश के दौरे पर आएंगे। वे आज 13 अप्रैल को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड सहकारिता विभाग के कार्यक्रम में शामिल होंगे। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड, राज्य शासन और दुग्ध संघ के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर करेंगे। वहीं सहकारिता गतिविधियों की भी समीक्षा होगी। पीएम मोदी के बाद अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मध्यप्रदेश आएंगे। वे आज 13 अप्रैल को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड सहकारिता विभाग के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। अमित शाह दुग्ध उत्पादकों के लिए आयोजित गोपाल सम्मेलन में शामिल होंगे। राज्य शासन और दुग्ध संघ के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर करेंगे। यह कार्यक्रम भोपाल के रविंद्र भवन में आयोजित किया जाएगा। सोसायटी को देंगे सौगात, सहकारिता के क्षेत्र में विकास की बात मध्यप्रदेश के जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक खरगोन से संबंद्व बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था, गोगावां जिसका पंजीयन कमांक-112 दिनांक 08 अप्रैल 1963 है। खरगोन सनावद मुख्य मार्ग पर 13800 वर्गफीट में ग्राम गोगावां में संस्था का मुख्यालय संचालित है। संस्था द्वारा वाणिज्यिक दृष्टि से सुपर मार्केट स्थापित करने की योजना बनायी गयी है। इस योजना के अन्तर्गत संस्था द्वारा 120 लाख रुपये की लागत से सुपर मार्केट का निर्माण किया जाना है। गोगांवा सुपर मार्केट बनाने वाली प्रदेश की पहली सोसायटी होगी। इस तरह की सुविधाएं प्रदेश की अन्य सोसायटियों में उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बैंक प्रबंध संचालक पीएस धनवाल द्वारा बताया गया कि, अंतराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के अन्तर्गत 13 अप्रैल को भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय सहकार सम्मेलन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 120 लाख रुपये का स्वीकृति आदेश गोगांवा संस्था को प्रदान करेंगे। 11625 वर्ग फीट के भु-खण्ड पर 12675 वर्ग फीट सुपर बिल्टप क्षैत्र में सुपर मार्केट का भुतल एंव प्रथम मंजिल पर निर्माण होगा। संस्था गोगांव, विकासखण्ड एवं तहसील मुख्यालय गोगांवा पर स्थित है, जहा कि जनसंख्या 20 हजार से अधिक है। संस्था के कार्य क्षेत्र में 09 गांव है। जिनमें कुल 04 हजार संस्था के सदस्य है। जिनमें से 1900 ऋणी सदस्य एवं 2100 अऋणी सदस्य है। इस प्रकार कुल 24 हजार सदस्य है जो सुपर मार्केट के संभावित ग्राहक है। संस्था निरन्तर अ वर्ग में वर्गीकृत होकर 183.48 लाख के लाभ में है। संस्था मुख्यालय पर संस्था द्वारा बचत काउण्टर संचालित है। जहां प्रतिदिन 150 से 200 ग्राहक अपना लेन-देन करने के लिए आते है। सुपर मार्केट में किसानों के उपयोग में आने वाली सामग्रियों यथा खाद, बीज, दवाई, मशिनरी आदि का विक्रय किया जाएगा तथा संस्था द्वारा सुपर मार्केट में जन औषधि केन्द्र एवं कृषक सुविधा केन्द्र का संचालन भी किया जाएगा। साथ ही सुपर मार्केट में 20 दुकानों का निर्माण किया जाकर उनको इलेक्ट्रीक सामान, कपडा मार्केट, किराना स्टोर्स, जनरल स्टोर्स, मेडिकल स्टोर्स आदि का व्यापार के लिए किराये से दिया जावेगा। संस्था द्वारा सुपर मार्केट आकार लेने पर संस्था को प्रतिवर्ष 20 लाख की अतिरिक्त आय होना संभावित है। जिले में एक से अधिक आनंद ग्राम बनाए मप्र शासन आनंद विभाग के निदेशक प्रवीण कुमार गंगराड़े द्वारा 11 अप्रैल को पुराने कलेक्ट्रेट कार्यालय में 11 अप्रैल को आनंद विभाग से जुड़े आनंद क्लब सदस्यों, आनंदम सहयोगी एवं आनंदको की समीक्षा बैठक आयोजित की। इस दौरान गंगराड़े ने कहा कि, खरगोन जिले में आनंद विभाग की गतिविधियां बेहतर है लेकिन और कोशिश करें कि स्वयं भी आनंदित हो दूसरों को भी आनंद संस्थान से जोड़े। गांव स्तर पर आनंद अल्पविराम गतिविधियों को बढ़ाने में आप जैसे सक्रिय हेप्पीनेस वालिंटियर की महत्वपूर्ण भूमिका हैं। एक से अधिक आनंद ग्राम बनाए।  बदले रहेंगे रास्ते; कहीं भी जाने से पहले देखें पुलिस का ट्रैफिक प्लान अमित शाह रविंद्र भवन में होने वाले सहकारिता सम्मेलन में शामिल होंगे। शाह की सुरक्षा में 900 जवान तैनात रहेंगे। मध्यप्रदेश पुलिस ने गृह मंत्री की सुरक्षा को देखते हुए ट्रैफिक डायवर्ट किया है। राजाभोज एयरपोर्ट से रविंद्र भवन तक शहर की कई प्रमुख सड़कों पर रविवार सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक यातायात प्रतिबंधित रहेगा। कहीं भी जाने से पहले पुलिस का डायवर्ट ट्रैफिक प्लान जरूर देख लें…। बाइक और कार वाले यहां से नहीं जा पाएंगे रोशनपुरा चौराहे से पॉलिटेक्निक चौराहा, कमला पार्क, रेतघाट, वीआईपी रोड, लालघाटी, गांधीनगर तिराहा और गांधीपार्क तिराहा तक दोपहिया और चारपहिया वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। दोपहिया और चारपहिया वाहन (जीप/कार) रोशनपुरा चौराहा, कंट्रोल रूम, लिली चौराहा से भारत टॉकीज की ओर जा सकेंगे। इन रास्तों पर आवागमन प्रतिबंधित रोशनपुरा चौराहे से पॉलिटेक्निक चौराहा, कमला पार्क, रेतघाट, वीआईपी रोड, लालघाटी, गांधीनगर तिराहा और पॉलिटेक्निक चौराहा से गांधीपार्क तिराहा तक मालवाहक और व्यवसायिक वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। ये वाहन भारत माता चौराहा, भदभदा चौराहा, साक्षी ढाबा तिराहा, नील बड़ तिराहा, नाथू बरखेड़ा रोड, मुगालिया छाप, खजूरी सड़क, खजूरी बायपास तिराहा और मुबारकपुर चौराहा होकर आ-जा सकेंगे। हलालपुर तक जाएंगी बसें हलालपुर बस स्टैंड से लालघाटी तरफ जाना प्रतिबंधित रहेगा। इंदौर, उज्जैन की ओर से आने-जाने वाली बसें हलालपुर बस स्टैंड पर रोकी जाएंगी। राजगढ़-ब्यावरा से आने वाली बसें मुबारकपुर बायपास तिराहा, खजूरी बायपास तिराहा, बैरागढ़ मार्ग से होकर हलालपुर बस स्टैंड तक जा सकेंगी। सीहोर और इंदौर जाने वाला रास्ता भोपाल से सीहोर और इंदौर की तरफ जाने के लिए भारतमाता चौराहा, भदभदा चौराहा, साक्षी ढाबा तिराहा, नील बड़, राती बड़, झागरिया का रास्ता चुनना पड़ेगा। प्रभात चौराहा, जेके रोड, रत्नागिरी, अयोध्या बायपास मार्ग, भानपुर, करौंद चौराहा, नई जेल से  गांधीनगर तिराहा होते हुए शहर से सीहोर-इंदौर, राजगढ़-ब्यावरा, राजा भोज एयरपोर्ट की ओर जा सकेंगे।   

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