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अनुराग कश्यप पर पायल घोष भड़कीं, ‘बॉलीवुड आपके बिना खुश’

मुंबई, फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप के ब्राह्मणों पर दिए गए विवादित बयान को लेकर मामला बढ़ता जा रहा है। ब्राह्मण रक्षा मंच के साथ ही फिल्म जगत के कई सितारे उनकी कड़ी आलोचना कर रहे हैं। कश्यप के बयान से नाराज अभिनेत्री पायल घोष ने पोस्ट शेयर कर कहा कि वह बॉलीवुड से दूर रहें, इंडस्ट्री उनके बिना खुश है। इंस्टाग्राम के स्टोरीज सेक्शन पर पोस्ट शेयर कर अभिनेत्री ने कैप्शन में लिखा, “बॉलीवुड से भाग जाना और दूर रहना एक अच्छा ऑप्शन है अनुराग कश्यप। बॉलीवुड आपके बिना खुश है, तो आप यहां से दूर रहो। कर्म बुरा होगा तो फल भी बुरा ही मिलेगा।’’ अनुराग कश्यप के बयान पर सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा है। ब्राह्मण रक्षा मंच ने रविवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हाल ही रिलीज होने वाली फिल्म ‘फुले’ पर सरकार से रोक लगाने की मांग की। उन्होंने फिल्म के जरिए ब्राह्मणों को अपमानित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “अनुराग कश्यप के विवादित बयान के बाद से ब्राह्मण समाज गुस्से में है और वह उनकी फिल्म ‘फुले’ को बॉयकॉट करेगा। हम चुप नहीं बैठेंगे और हमारा विरोध जारी रहेगा, अनुराग कश्यप को सबक सिखाने का काम करेंगे।’’ बयान को लेकर लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर भी अनुराग कश्यप की निंदा करते नजर आए। इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर कश्यप को कड़ी चेतावनी देते हुए मनोज ने कहा, “तुम्हारे जैसे हजारों नफरती खत्म हो जाएंगे, लेकिन ब्राह्मणों की परंपरा और गौरव अटल रहेगा। आमदनी कम हो तो खर्चों पर और जानकारी कम हो तो शब्दों पर कंट्रोल रखना चाहिए। अनुराग कश्यप तुम्हारी तो आमदनी भी कम है और जानकारी भी, इसलिए दोनों पर कंट्रोल रखो। तुम्हारे शरीर में इतना पानी नहीं है कि ब्राह्मणों की विरासत को एक इंच भी दूषित कर पाओ।’’ मनोज मुंतशिर ने अनुराग कश्यप को ह‍िदायत दी, ”रहने के लिए दुनिया में कई अच्छी जगहें हैं, लेकिन सबसे अच्छा यही है कि औकात में रहो।’’ ब्राह्मण समुदाय पर “अपमानजनक” टिप्पणी के मामले में अनुराग कश्यप के खिलाफ दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। यह विवाद शुक्रवार को तब शुरू हुआ, जब अनुराग कश्यप ने इंस्टाग्राम पर एक यूजर को जवाब देते हुए ब्राह्मणों को लेकर बेहद शर्मनाक बात लिखी, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर जमकर बवाल मचा और लोगों ने उनकी आलोचना की। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद शुक्रवार को अनुराग कश्यप ने इस टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।  

प्रशांत किशोर ने की तीन प्रमुख मांगें, पूरी नहीं हुई तो सरकार के खिलाफ करेंगे आंदोलन

पटना  जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सोमवार को कहा कि जाति आधारित गणना पर श्वेत पत्र जारी करने सहित उनकी तीन प्रमुख मांगें एक महीने के अंदर पूरी नहीं की गई तो वह बिहार में नीतीश कुमार सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगे। प्रशांत किशोर ने राज्य में जारी भूमि सर्वेक्षण भी ‘‘तुरंत रोकने” की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। पूर्व चुनावी रणनीतिकार ने दलित और महादलित समुदायों के सदस्यों को तीन डिसमिल जमीन मुहैया करने संबंधी वादे को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। पत्रकारों से बात करते हुए किशोर ने कहा, ‘‘अगर राज्य की राजग (NDA) सरकार हमारी तीन मांगें नहीं मानती है तो जन सुराज 11 मई से राज्य के 40,000 राजस्व गांवों में हस्ताक्षर अभियान शुरू करेगा।” उन्होंने कहा, ‘‘11 जुलाई को, हम एक करोड़ लोगों के हस्ताक्षर के साथ सरकार को एक ज्ञापन सौंपेंगे। अगर तब भी हमारी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो हम मानसून सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव करेंगे, जो इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आखिरी सत्र होगा।”   किशोर ने कहा, ‘‘हमारी पहली मांग राज्य सरकार द्वारा कराई गई जाति आधारित गणना से संबंधित है। मुख्यमंत्री ने 7 नवंबर 2023 को विधानसभा में पेश जाति आधारित गणना रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर 6,000 रुपये प्रति माह से कम आय वाले 94 लाख परिवारों को 2 लाख रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता देने का वादा किया था। लेकिन एक भी परिवार को यह सहायता नहीं मिली है। हम सरकार से एक महीने के भीतर इस पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हैं।” उन्होंने सवाल किया, ‘‘इस सर्वेक्षण के आधार पर, आरक्षण बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने का वादा किया गया था, उसका क्या हुआ?” किशोर के अनुसार, दूसरी मांग दलित और महादलित परिवारों से जुड़े 50 लाख बेघर/भूमिहीन परिवारों को घर बनाने के लिए तीन डिसमिल जमीन देने के सरकार के वादे से संबंधित है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, केवल 2 लाख परिवारों को भूमि आवंटित की गई है और वह भी केवल कागजों पर है और जमीन का कब्जा नहीं दिया गया है। नीतीश कुमार सरकार ने इस मुद्दे पर दलित और महादलित समुदायों के लोगों को धोखा दिया है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन परिवारों को भूमि पर वास्तविक कब्जा कब मिलेगा।” अपनी तीसरी मांग के तहत किशोर ने राज्य में जारी भूमि सर्वेक्षण को स्थगित करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘हम सरकार से इस प्रक्रिया को तत्काल रोकने का आग्रह करते हैं। भूमि सर्वेक्षण के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। अधिकारी लोगों से पैसे ऐंठ रहे हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने 80 प्रतिशत भूमि का सर्वेक्षण कर लिया है और राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर दिया है, जबकि 2013 में प्रक्रिया शुरू होने के बाद से बिहार में केवल 20 प्रतिशत ही सर्वेक्षण हो पाया है। इस धीमी प्रगति के कारण भूमि संबंधी विवादों में वृद्धि हुई है, जिसमें हत्या और हत्या के प्रयास के मामले भी शामिल हैं।”  

छत्तीसगढ़ में गर्मी ने अपना कहर दिखाना शुरू कर दिया, लोगों को दोपहर 12 बजे से 4 घर से बाहर न निकलने की सलाह

 रायपुर  छत्तीसगढ़ में गर्मी ने अपना कहर दिखाना शुरू कर दिया है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे आमजन का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और भी अधिक गर्मी और लू की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 48 घंटों में कई जिलों में लू चलने के आसार बन रहे हैं। 43 डिग्री तापमान के साथ जबलपुर सबसे गर्म     प्रदेश में सबसे गर्म जिला बिलासपुर रहा। यहां अधिकतम तापमान 43.0 डिग्री दर्ज किया गया। उधर, सुकमा में दिनभर उमस और गर्मी के बाद देर शाम मौसम का मिजाज बदल गया। आंधी और तेज वर्षा हुई और लोगों ने राहत की सांस ली।     राजनांदगांव में 41.5, महासमुंद में 42.5, दुर्ग में 42.1 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। बिलासपुर और महासमुंद में तापमान सामान्य से पांच डिग्री तक अधिक रहा। गर्मी के कारण दोपहर के समय बाजारों में भीड़ नहीं दिख रही है।     कामकाजी लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले 48 घंटों में भीषण गर्मी से राहत की कोई उम्मीद नहीं जताई है। कहीं-कहीं रात के आसार भी प्रदेश में एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा होने की संभावना है। एक-दो स्थानों पर मेघ गर्जन, तेज हवा तथा वज्रपात होने के आसार है। पश्चिमी विक्षोभ मध्य क्षोभमंडलीय पश्चिमी हवाओं में एक गर्त के रूप में बना हुआ है। पूर्व-पश्चिम गर्त मध्य पाकिस्तान और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी राजस्थान पर चक्रवाती परिसंचरण से लेकर दक्षिण उत्तर प्रदेश, झारखंड और उत्तर गंगीय पश्चिम बंगाल होते हुए मध्य बांग्लादेश तक औसत समुद्र तल से 0.9 किमी ऊपर बना हुआ है।

नीरज चोपड़ा क्लासिक भाला फेंक स्पर्धा अब 24 मई को पंचकूला से बेंगलुरु स्थानांतरित

बेंगलुरू नीरज चोपड़ा क्लासिक जैवेलिन थ्रो इवेंट का पहला चरण पर्याप्त रोशनी की कमी के कारण 24 मई को पंचकुला की बजाय बेंगलुरू में कराया जाएगा.कांतिरावा स्टेडियम में होने वाली भाला फेंक प्रतियोगिता में कई स्टार एथलीट हिस्सा लेंगे. एंडरसन पीटर्स और थॉमस रोहलर ने भागीदारी की पुष्टि कर दी है. ग्रेनेडा के पीटर्स दो बार के विश्व चैम्पियन हैं और रोहलर 2016 ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता हैं. चोपड़ा ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तानी ओलंपिक चैम्पियन अरशद नदीम को भी आमंत्रित किया है, जिन्होंने अभी तक भागीदारी की पुष्टि नहीं की है. चोपड़ा ने ‘वर्चुअल मीडिया’ बातचीत में पत्रकारों से कहा, ‘मैंने अरशद को आमंत्रण भेजा है और उन्होंने कहा है कि वह अपने कोच से चर्चा करने के बाद मुझसे संपर्क करेंगे. अभी तक उन्होंने भागीदारी की पुष्टि नहीं की है.’ विश्व एथलेटिक्स द्वारा इस प्रतियोगिता को श्रेणी-ए का दर्जा दिया गया है. चोपड़ा ने कहा, ‘मैं चाहता था कि यह प्रतियोगिता पंचकुला में आयोजित हो, लेकिन वहां स्टेडियम में रोशनी की व्यवस्था से संबंधित कुछ मुद्दे हैं. विश्व एथलेटिक्स 600 ‘लक्स’ (प्रकाश की तीव्रता का माप) चाहती थी, लेकिन पंचकुला में इतनी रोशनी उपलब्ध नहीं थी और इसे तैयार करने में समय लगेगा.’ 27 साल के खिलाड़ी ने कहा, ‘इसलिए हमने प्रतियोगिता को बेंगलुरु के कांतिरावा स्टेडियम में स्थानांतरित करने का फैसला किया है. हमारे पास वहां एक टीम है और वहां इसका आयोजन करना बहुत आसान होगा.’ इस कार्यक्रम का आयोजन चोपड़ा और जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स द्वारा भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) और विश्व एथलेटिक्स के सहयोग से संयुक्त रूप से किया जाएगा, जिसमें शीर्ष वैश्विक और भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी भाग लेंगे. पीटर्स ने 2024 पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और रोहलर के अलावा कीनिया के जूलियस येगो (2016 रियो ओलंपिक में रजत पदक विजेता और 2015 विश्व चैम्पियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता भी हैं) और अमेरिका के कर्टिस थॉम्पसन (87.76 मीटर से मौजूदा सत्र में शीर्ष पर) की भागीदारी की भी पुष्टि की गई है. चोपड़ा ने नाम बताए बिना कहा, ‘पेरिस ओलंपिक में फाइनल के लिए क्वालिफाई करने वाले एक ब्राजीलियाई एथलीट ने भी भागीदारी की पुष्टि की है.’ हालांकि यह लुइस दा सिल्वा हो सकते हैं जो पेरिस में 80.67 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ 11वें स्थान पर रहे थे.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री मुरुगन ने की सौजन्य भेंट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री एल. मुरुगन ने सोमावार को मंत्रालय में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर एवं अंग वस्त्रम ओढ़ाकर केंद्रीय मंत्री मुरुगन का स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय राज्य मंत्री मुरुगन ने मध्यप्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की।  

साउथ एक्टर यश आज महाकालेश्वर के मंदिर पहुंचे, बाबा महाकाल के न सिर्फ दर्शन-पूजन किए

उज्जैन  मध्य प्रदेश में स्थित महाकाल की नगरी उज्जैन में सोमवार तड़के बाबा के भक्तों में उस समय उत्साह और भी बढ़ गया, जब उनके बीच साउथ की सुपरहिट फिल्म केजीएफ फेम रॉकी भाई उर्फ अभिनेता यश भी बाबा के दर्शन-पूजन करते नजर आए। जी हां, साउथ एक्टर यश आज उज्जैन स्थित महाकालेश्वर के मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा महाकाल के न सिर्फ दर्शन-पूजन किए, बल्कि भस्म आरती में भी शामिल हुए। वहीं, मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने महाकाल के दरबार में आने का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा- यहां आना अविश्वसनीय रहा।  भस्म आरती में शामिल होने के बाद यश ने चांदी द्वार से बाबा महाकाल के दर्शन-पूजन किए, साथ ही माथा टेका। पूजन आकाश पुजारी ने संपन्न कराया। मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर अभिनेता शिव साधना करते नजर आए। चांदी द्वार से उन्होंने माथा टेककर बाबा का आशीर्वाद लिया। दर्शन के बाद पुजारी ने अभिनेता को प्रसाद स्वरूप लाल रंग का महाकाल नाम का छपा पटका भेंट किया। बोले- दर्शन करने का अनुभव अविश्वसनीय रहा वहीं, मीडिया से चर्चा के दौरान सुपरस्टार यश ने कहा, महाकाल का दर्शन करके बहुत अच्छा लगा। यहां दर्शन करने का अनुभव अविश्वसनीय रहा। मैं यहां की व्यवस्थाएं देखकर बेहद खुश हूं। सभी श्रद्धालुओं को देखकर बहुत अच्छा लगा।

जयदीप बिहाणी का बड़ा आरोप, बोले – क्रीड़ा परिषद रच रही आरसीए को कमजोर करने की साजिश

जयपुर राजस्थान क्रिकेट संघ की एडहॉक कमेटी के अध्यक्ष और विधायक जयदीप बिहाणी ने जयपुर में चल रहे आईपीएल आयोजनों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्रीड़ा परिषद अध्यक्ष आईपीएल के आयोजन को निजीकरण की ओर ले जाकर न केवल आरसीए को इस प्रक्रिया से अलग कर रहे हैं, बल्कि राज्य सरकार द्वारा नियुक्त आरसीए एडहॉक कमेटी को अस्थिर करने की साजिश भी रच रहे हैं। बिहाणी ने कहा कि राज्य सरकार ने खेलों के विकास और पारदर्शिता हेतु आरसीए एडहॉक कमेटी का गठन किया था, जो बीसीसीआई की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं सहित पुरुष व महिला खिलाड़ियों के लिए विभिन्न आयु वर्गों में सफलतापूर्वक आयोजन कर रही है। उन्होंने कहा कि आरसीए हमेशा से आईसीसी और बीसीसीआई के अंतरराष्ट्रीय मैचों की सफल मेजबानी करता आया है, लेकिन अब उसे जान-बूझकर आयोजन से बाहर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्रीड़ा परिषद ने आरसीए एडहॉक कमेटी को न केवल आयोजन प्रक्रिया से बाहर रखा, बल्कि उन्हें एक्रिडेशन कार्ड तक नहीं दिए गए, जबकि मनमाने तरीके से एक जिला संघ के सचिव को कार्ड जारी कर दिया गया। यह आरसीए की अवहेलना और साजिश का प्रतीक है। बिहाणी ने यह भी कहा कि पूर्व में आरसीए ही जयपुर में आईपीएल मैचों का आयोजन करता था और सीएमओ, मंत्रिमंडल, अधिकारियों, पूर्व खिलाड़ियों और जिला संघों को पास उपलब्ध कराता था। अब आरसीए को दरकिनार कर कॉम्प्लीमेंटरी पास निजी लोगों को और पसंदीदा जिला संघों को दिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्रीड़ा परिषद अध्यक्ष आरसीए को अस्थिर करने के लिए कभी नई कमेटियां गठित कर रहे हैं, तो कभी एडहॉक कमेटी को सिर्फ चुनाव कराने तक सीमित बताकर उसकी भूमिका को कम कर रहे हैं। यदि ऐसा होता तो सरकार द्वारा इस कमेटी का कार्यकाल पांच बार क्यों बढ़ाया जाता? आरसीए एडहॉक कमेटी ने पूर्व आरसीए कार्यकारिणी द्वारा की गई वित्तीय अनियमितताओं की 368 पृष्ठों की ऑडिट रिपोर्ट तैयार कर एफआईआर दर्ज करवाई थी। उन्होंने सवाल किया कि यदि क्रीड़ा परिषद इतनी ही सजग थी, तो उस एफआईआर पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? बिहाणी ने कहा कि आरसीए के पिच क्यूरेटर तपोश चटर्जी और ग्राउंड स्टाफ अपने उच्च स्तरीय उपकरणों के साथ दिन-रात स्टेडियम की देखरेख में जुटे हैं, लेकिन आरसीए को उनके उपकरणों और स्टाफ के लिए कोई भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान रॉयल्स और क्रीड़ा परिषद की यह हठधर्मिता आरसीए को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। राजस्थान रॉयल्स पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जयपुर में राजस्थान रॉयल्स का पिछला मैच जिस तरह से हारा गया, वह संदेह के घेरे में है और इससे राज्य के युवा खिलाड़ियों के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। बिहाणी ने कहा कि आरसीए एडहॉक कमेटी ने राज्य में सफल और ऐतिहासिक प्रतियोगिताएं आयोजित की हैं और खिलाड़ियों के भविष्य को संवारने का कार्य किया है। क्रीड़ा परिषद द्वारा उसे केवल चुनाव की भूमिका तक सीमित करना और नई कमेटियों का गठन करना न केवल खेल हितों के विरुद्ध है, बल्कि सरकार के आदेशों की भी अवमानना है।

बिजनौर में एकतरफा प्यार में युवक ने गोली मारकर की युवती की हत्या

बिजनौर उत्तर प्रदेश के बिजनौर के कोतवाली देहात इलाक में एकतरफा प्यार में सिरफिरे युवक शिवांग ने कहीं और शादी तय होने पर युवती भावना (25) की गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या करने के बाद आरोपी खुद ही थाने पहुंच गया। पुलिस ने आरोपी के पिता सुशील त्यागी को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, रविवार की सुबह करीब 9:20 बजे गांव करौंदा चौधर निवासी वेदप्रकाश शर्मा अपनी बेटी भावना उर्फ नीशू और छोटी बेटी आकांक्षा को लेकर बाइक से नगीना के बाजार जाने के लिए घर से निकले। गांव हीमपुर मानक उर्फ बढ़ापुर के पास जंगल की ओर से बाइक पर आए शिवांग ने भावना को गोली मार दी। वेदप्रकाश शर्मा तथा बहन आकांक्षा बाइक से ही घायल भावना को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोतवाली देहात ले आए। जहां चिकित्सकों ने उसको मृत घोषित कर दिया। पुलिस को मृतका के भाई ने बताया कि चार महीने पहले भावना की शादी नूरपुर निवासी एक युवक से तय कर दी थी। 25 अप्रैल को भावना का लग्न रिश्ता जाना था और एक मई को बरात आने की तारीख तय हुई। अब शादी की तैयारियों के लिए वे नगीना बाजार में खरीदारी करने जा रहे थे। एएसपी सिटी संजीव वाजपेयी ने बताया कि आरोपी शिवांग समेत चार लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। आरोपी युवक और उसके पिता को पकड़ लिया गया है। पूछताछ में शिवांग ने कहना था कि वह चार साल से भावना को प्रपोज कर रहा था। जब वह ब्याह के लिए नहीं मानी तो उसे मार डाला। ओवरटेक करते हुए भावना के सिर में मारी गोली वेदप्रकाश शर्मा दोनों बेटियों को लेकर गांव बढ़ापुर के पास पहुंचे तो टूटी सड़क और बिखरी बजरी के कारण बाइक की गति धीमी करनी पड़ी। तभी पीछे से आए बाइक सवार आरोपी शिवांग ने ओवरटेक करते हुए सटाकर भावना की कनपटी पर गोली मार दी। वेदप्रकाश शर्मा ने आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया। बीस से तीस मीटर तक उसके पीछे दौड़े भी मगर आरोपी शिवांग तेजी से बाइक चलाते हुए भाग निकला जोकि सीधे थाने में आकर रुका।   मृतका भावना और आरोपी शिवांग दोनों ही करौंदा चौधर के रहने वाले हैं। जिनके घरों में करीब 300 मीटर का अंतर ही है। हालांकि शिवांग की करतूत और परेशान करने की वजह से दोनों परिवारों के दिलों के बीच दूरियां काफी बढ़ चुकी थी।  आरोपी शिवांग अपने माता पिता की इकलौती संतान है। बताया जा रहा है कि वह बिगड़ैल हो गया। आरोपी खेती करने के साथ-साथ लोगों को ब्याज पर पैसा देने का काम भी करता है। हत्यारोपी शिवांग तथा मृतका भावना के घर पर भारी पुलिस बल तैनात है। पोस्टमार्टम के बाद शाम के समय शव गांव में पहुंचा। इस दौरान पुलिस मुस्तैद रही। भावना की हत्या के बाद गांव के सभी जाति वर्गों के लोग मृतका के घर पहुंचे तथा अपनी संवेदनाएं व्यक्त की। पूरा गांव भावना के परिवार के साथ खड़ा हुआ दिखाई दिया। पूरे गांव में हत्यारोपी के विरुद्ध गुस्सा दिखाई दिया। मृतका के भाई देवराज ने हत्यारोपी शिवांग के लिए फांसी की मांग की। मृतका के पिता ने दर्ज कराई रिपोर्ट मृतका के पिता वेदप्रकाश शर्मा की ओर से आरोपी शिवांग, उसके पिता सुशील त्यागी, मां शैली त्यागी और फुफेरा बहनोई नितिन त्यागी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।

हमारी सरकार OBC वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के निर्णय पर पूरी तरह कायम: मुख्यमंत्री यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण देने के स्टैंड पर पूरी तरह कायम है। उन्होंने कहा कि सॉलिसिटर जनरल से भी इस विषय में चर्चा की गई है और उन्हें सरकार का स्पष्ट पक्ष रखा गया है। डॉ. यादव ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में ओबीसी आयोग द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही ओबीसी आरक्षण से जुड़ी सभी लंबित याचिकाओं को लेकर भी गंभीर संवाद की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ काम हो रहा है और प्रदेश सरकार भी सर्वहारा वर्ग के सर्वांगीण विकास को लेकर प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार न्यायपूर्ण और समावेशी नीतियों के माध्यम से सभी वर्गों को समान अवसर देने के संकल्प पर अडिग है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- रिट लगाइए, चयनित अभ्यर्थियों को होल्ड करने का मामला भी सुनेंगे सुनवाई के दौरान एमपी के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट से कहा- कि ये 50 फीसदी आबादी से जुड़ा मामला है। उन्होंने कोर्ट से इस मामले की जल्द सुनवाई करने की मांग की। वहीं, सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं को बुलाकर संवाद करेंगे। एससी बोला– आप पिटीशन लगाइए, हम सुनेंगे इस दौरान ओबीसी महासभा के वकीलों ने कोर्ट से कहा कि एमपी में अलग-अलग विभागों में जिन पदों पर भर्ती हुई उनमें से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोर्ट में 27% ओबीसी आरक्षण का मामला लंबित होने का हवाला देकर उन्हें नियुक्ति से वंचित रखा जा रहा है। जबकि 27% ओबीसी आरक्षण पर किसी भी कोर्ट ने कानूनी रोक नहीं लगाई। इसके बावजूद प्रक्रिया के नाम पर चयनित अभ्यर्थियों को जॉइन नहीं कराया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने ओबीसी महासभा के वकील से कहा- अगली सुनवाई की तारीख चीफ जस्टिस तय करेंगे ओबीसी महासभा के वकील वरुण ठाकुर ने बताया कि आज की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता भी मौजूद थे। कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख चीफ जस्टिस तय करेंगे। सीएम बोले- आरक्षण को लेकर सरकार पूरी तरह स्पष्ट भोपाल के प्रशासन अकादमी में आयोजित सिविल सेवा दिवस समारोह में शामिल होने के बाद सीएम मोहन यादव ने इस मामले को लेकर कहा कि OBC आरक्षण को लेकर हमारी सरकार पूरी तरह स्पष्ट है। हम हर हाल में 27% आरक्षण के पक्ष में कायम हैं। हमने अटॉर्नी जनरल को यह भी कहा है कि शिवराज सरकार के समय आई ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का परीक्षण किया जाए। जल्द ही इस पर सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे सीएम डॉ. यादव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना के साथ हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि सभी वर्गों का हित साधा जा सके। मुझे विश्वास है कि जल्द ही इस मुद्दे पर सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। कमलनाथ सरकार ने 27% किया था OBC आरक्षण कमलनाथ सरकार ने 2019 में ओबीसी वर्ग का आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27% कर दिया था। इसके बाद विधानसभा में इससे जुड़े विधेयक को पारित कर दिया गया। 2 सितंबर 2021 को सामान्य प्रशासन विभाग ने ओबीसी को भर्ती में 27% आरक्षण देने का सर्कुलर जारी किया था। इसके खिलाफ यूथ फॉर इक्वेलिटी संगठन हाईकोर्ट गया। 4 अगस्त 2023 को हाईकोर्ट ने सरकार के सर्कुलर पर रोक लगा दी।

उत्कृष्ट नवाचार पर राज्य सरकार का बड़ा सम्मान, 14 अधिकारियों को मिलेगा एक लाख नकद पुरस्कार

भोपाल  मध्य प्रदेश के तेजतर्रार आईएएस अधिकारियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा पूरे देश में मनवाया है। सिविल सर्विस डे पर मध्य प्रदेश के चार दिग्गज आईएएस अधिकारियों के बारे में बताएंगे, जिनकी सोच ने देश को एक नई गति दी है। यही नहीं, इनकी योजनाओं को दूसरे राज्यों ने भी कॉपी किया है। ये चारों अफसर आज भी मध्य प्रदेश की सरकार में स्तंभ हैं। मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन जब केंद्र में थे तो पीएम मोदी भी उनके मुरीद थे। उन्हें गति शक्ति प्रोजेक्ट के लिए पीएम मोदी से सम्मान मिल चुका है। आइए इन चार अफसरों की कहानी आपको बताते हैं। एमपी में 382 आईएएस अफसर मध्य प्रदेश कैडर में अभी 382 आईएएस अफसर हैं। यह प्रदेश के साथ-साथ देश के लिए भी काम कर रहे हैं। प्रदेश के कई सीनियर अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। देश के अहम मंत्रालयों में सचिव पद को संभाल रहे हैं। सभी अपनी प्रतिभा का लोहा राष्ट्रीय स्तर पर मनवा रहे हैं। वहीं, प्रदेश में रहकर भी आईएएस अधिकारी कई नवाचार के साथ बेहतरीन काम कर रहे हैं। चार दिग्गजों ने मनवाया अपना लोहा सिविल सर्विस डे पर मध्य प्रदेश के चार आईएएस अफसरों की योजनाओं की चर्चा हो रही है। इन अफसरों ने ऐसे काम किए, जिन्हें देश और दुनिया ने सराहा। लाड़ली लक्ष्मी योजना को 15 राज्यों ने अपनाया। पीएम गतिशक्ति ने प्रोजेक्ट्स को रफ़्तार दी। ‘ज्ञानदूत’ से गांव-गांव ऑनलाइन सेवाएं पहुंचीं। इन अफसरों को प्रतिष्ठित अवॉर्ड भी मिले। अनुराग जैन ने पीएम गतिशक्ति पोर्टल को प्लानिंग का टूल बनाया। डॉ. राजेश राजौरा ‘ज्ञानदूत’ लेकर आए। पी. नरहरि ने लाडली लक्ष्मी योजना को आकार दिया। दीपक सक्सेना ने निजी स्कूलों पर एनसीईआरटी की किताबें चलाने का दबाव बनाया। अनुराग जैन गति शक्ति प्रोजेक्ट को दी रफ्तार मध्य प्रदेश के वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग जैन ने पीएम गतिशक्ति योजना में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने इस योजना को प्लानिंग का एक शानदार टूल बनाया। प्रोजेक्ट्स में देरी होने का एक बड़ा कारण विभागों में तालमेल की कमी है। सड़क, रेल, मेट्रो, बिजली जैसे कामों में तालमेल जरूरी है। इसी को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पीएम गतिशक्ति पोर्टल को प्लानिंग का टूल बनाया गया। अनुराग जैन ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया। जीआईएस बेस्ड पोर्टल से विभागों और सरकारों को जरूरी डेटा एक साथ मिलने लगा। इस काम के लिए उन्हें पीएम एक्सीलेंस अवॉर्ड मिला। ज्ञानदूत से गांव-गांव तक पहुंची सूचना डॉ. राजेश राजौरा ने ई-गवर्नेंस का पहला प्रोजेक्ट ‘ज्ञानदूत’ शुरू किया। साल 2000 में वे धार के कलेक्टर थे। तब उन्होंने यह प्रोजेक्ट शुरू किया। उन्होंने मॉडम को सर्वर से जोड़कर ज्ञानदूत सूचना के 28 सेंटर सिर्फ 51 दिनों में अलग-अलग गांवों में खोल दिए। इसमें खसरा-खतौनी की नकल से लेकर 20 तरह की सेवाएं दी गईं। राजौरा को आईटी का सबसे बड़ा ‘स्टॉकहोम चैलेंज’ अवार्ड मिला। लाडली लक्ष्मी योजना बनी मिसाल एमपी के सीनियर आईएएस अधिकारी पी. नरहरि ने लाडली लक्ष्मी योजना को लिंगानुपात सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2006-07 में एक बैठक में शिशु लिंगानुपात गिरने पर चिंता जताई गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ऐसी योजना लाएं, जो जन्म के लिए प्रोत्साहित करे। उस समया महिला बाल विकास विभाग के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहे पी. नरहरि ने तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा का दौरा किया। एक साल की मेहनत के बाद योजना ने आकार लिया। इसका नाम ‘लाडली लक्ष्मी’ रखा गया। यह योजना 1 अप्रैल 2007 को शुरू हुई। स्कूलों की मनमानी पर कसा शिकंजा दीपक सक्सेना ने निजी स्कूलों पर एनसीईआरटी की किताबें चलाने का दबाव बनाया। वे जबलपुर के कलेक्टर हैं। निजी स्कूल महंगी किताबें बेच रहे थे। वे एनसीईआरटी की जगह प्राइवेट पब्लिशर की किताबें चला रहे थे। स्कूलों का कहना था कि उनका कंटेंट बेहतर है। कलेक्टर सक्सेना ने जांच की तो यह दावा गलत निकला। उन्होंने आदेश दिया कि अगर प्राइवेट किताबें चलानी हैं तो उनकी खासियत बताओ। सख्ती बढ़ने पर स्कूल एनसीईआरटी की किताबें चलाने लगे। जहां पहले किताबों पर 6-7 हजार खर्च होते थे, अब 800-900 में काम चलने लगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले आनंदपुर धाम के पदाधिकारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले आनंदपुर धाम के पदाधिकारी मुख्यमंत्री को भेंट किया श्रीप्रसाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सोमवार को स्टेट हैंगर पर अशोकनगर जिले के आनंदपुर धाम के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को गुरु महाराज का श्रीप्रसाद प्रदान किया और आनंदपुर धाम पधारने के लिए आभार व्यक्त कर पुनः पधारने का आग्रह भी किया।  

मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने वाहनों की जांच के लिए नए दिशा-निर्देश जारी, जांच प्रक्रिया में निजी व्यक्तियों की उपस्थिति भी प्रतिबंधित

इंदौर  मध्य प्रदेश में परिवहन जांच चौकियों को बंद किए जाने के बावजूद वाहनों से अवैध वसूली की शिकायतें लगातार परिवहन विभाग के पास पहुंच रही थीं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें परिवहन चेक प्वाइंट और संभागीय परिवहन सुरक्षा स्क्वाड(MP transport squads) को 15 मिनट में वाहन की जांच पूरी करना होगी। बगैर वाजिब कारण के वाहन को इससे अधिक समय तक नहीं रोका जा सकेगा। अधिक समय तक रोके जाने पर इसका कारण बताना होगा। एक वाहन की जांच पूरी होने के बाद ही दूसरे वाहन को उड़नदस्ते रोक सकेंगे। जांच के दौरान बॉडी वार्न कैमरे भी अनिवार्य किए गए हैं। वर्दी पर नाम की प्लेट भी अनिवार्य परिवहन आयुक्त के नए आदेश के अनुसार(New Vehicle Inspection Rule) अब जांच केवल अधिकृत वर्दीधारी अधिकारियों की उपस्थिति में ही की जा सकेगी। जांच के दौरान कम से कम एक सहायक परिवहन उप निरीक्षक का मौजूद होना अनिवार्य होगा। कर्मचारियों को वर्दी में रहना होगा और वर्दी पर नाम की प्लेट भी अनिवार्य होगी। निर्देशों का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई जांच प्रक्रिया के दौरान किसी भी निजी व्यक्ति की उपस्थिति को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। रात में जांच करने के दौरान ऐसे स्थान का चयन अनिवार्य होगा, जहां पर पर्याप्त रोशनी हो। स्टाफ को एलईडी बैटन और रिफ्लेक्टिव जैकेट उपलब्ध कराए जाएंगे। परिवहन आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पीओएस मशीन से ही बनेंगे चालान नए निर्देशानुसार जांच के दौरान परिवहन चेक प्वाइंट और संभागीय परिवहन सुरक्षा स्क्वाड के पास प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन की उपलब्धता अनिवार्य की गई है। इन मशीनों के माध्यम से ही वाहनों के चालान बनाने होंगे। नकद का लेन-देन पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। जहां मशीन उपलब्ध नहीं है, वहां प्राथमिकता से मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। दो बॉडी वार्न कैमरे चालू रखने होंगे परिवहन विभाग के परिवहन चेक प्वाइंट और संभागीय उड़नदस्तों द्वारा की जाने वाली जांच की पूरी रिकार्डिंग की जाएगी। जांच दल को बॉडी वार्न कैमरे लगाने होंगे। जांच के दौरान दो कमरे चालू रहेंगे। इनमें से एक लाइव मोड में होगा। अन्य कैमरे स्टैंड बाय मोड में रहेंगे। कैमरों की निगरानी और रिकार्डिंग की जिम्मेदारी संबंधित यूनिट प्रभारी पर होगी। जांच की रिकॉर्डिंग संभालकर रखना होगी और कैमरों को पूरी तरह से चार्ज रखना होगा। 45 चेक प्वाइंट कर रहे जांच करीब एक साल पहले मध्य प्रदेश में गुजरात माडल को लागू करते हुए परिवहन चौकियों को बंद कर दिया गया था। इसके स्थान पर अंतरराज्यीय सीमा पर 45 चेक प्वाइंट बनाए गए हैं, लेकिन यहां पर ट्रकों और वाहनों से अवैध वसूली की शिकायतें आने लगी थीं। शिकायतों को देखते हुए परिवहन आयुक्त ने जांच में पारदर्शिता के लिए नए निर्देश जारी किए गए। जांच में पारदर्शिता आएगी     कुछ समय से वाहनों को रोककर वसूली की जाने लगी थी। इसे लेकर परिवहन आयुक्त को शिकायत भी की गई थी। इस मामले में नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इससे जांच में पारदर्शिता आएगी और वाहन मालिक को बेवजह की वसूली से मुक्ति मिलेगी। वसूली की शिकायत के बाद विगत दिनों चेक प्वाइंट सागर-1 के प्रभारी परिवहन उप निरीक्षक को हटाया भी जा चुका है। – सीएल मुकाती, अध्यक्ष, इंदौर ट्रक आपरेटर्स एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन  

पत्रकारों के लिए वरिष्ठ पत्रकार माथुर की स्मृति में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया की श्रेणी में पुरस्कारों का ऐलान

जयपुर वरिष्ठ पत्रकार रहे  मनोज माथुर की स्मृति में पत्रकारिता पुरस्कार का ऐलान किया गया है। मनोज माथुर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए जाएंगे। प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल मीडिया की श्रेणी में वर्ष 2024–25 के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। राजस्थान में काम करने वाले पत्रकारों के लिए यह पुरस्कार होगा। इसमें 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 की अवधि के बीच छपी/प्रसारित हुई खबरों को शामिल किया जा सकेगा। इच्छुक पत्रकार अपनी खबर की कटिंग, लिंक या वीडियो क्लिप भेजकर manojmathurjournalismawards@gmail.com पर 25 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। पत्रकारिता जगत में मनोज माथुर का लंबा अनुभव रहा है और राजस्थान के कई संस्थानों से जुड़कर उन्होंने अपनी पत्रकारिता की। राजस्थान के एक बेहतरीन पॉलिटिकल एनालिस्ट के तौर पर भी उनकी पहचान रही। पत्रकारिता जगत के कई नामचीन पुरस्कार भी मनोज माथुर को मिले। इसमें जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से उन्हें सवाई जयपुर अवार्ड भी दिया गया था। करीब दो वर्ष पहले साइलेंट अटैक के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी।

पटना में जदयू नेत्री को मारी गोली, हालत गंभीर, जांच में जुटी पुलिस

पटना पटना में बाइक सवार अपराधियों ने जदयू नेत्री सोनी देवी को गोली मार दी। उनके हाथ और सीने में गोली लगी है। गंभीर हालत में उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घटना बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र के उत्तरी मंदिरी में हुई। बताया जा रहा है कि रविवार देर रात बाइक सवार तीन अपराधियों ने महिला को गोली मार दी। गोली लगते ही महिला बेहोश होकर गिर गईं। आननफानन में उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इधर, घटना सूचना मिलते ही बुद्धा कॉलोनी थाना अध्यक्ष सदानंद साह के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू कर दी। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने में भी जुटी है। पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ चल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुरानी रंजिश में इस वारदात को अंजाम दिया गया है। वहीं कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि शराब माफियाओं द्वारा इस वारदात को अंजाम दिया गया है। वहीं परिजनों का कहना है कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले और आरोपियों की गिरफ्तारी करे।

सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, गुना एसपी संजीव कुमार सिन्हा को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया

 गुना  हनुमान जयंती के मौके पर गुना जिले के कर्नलगंज क्षेत्र में हुए सांप्रदायिक तनाव और पत्थरबाजी के विवाद के बाद सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है. इसके तहत गुना एसपी संजीव कुमार सिन्हा को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है. उनकी जगह 2017 बैच के तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी अंकित सोनी को गुना का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है. मोहन यादव सरकार ने जारी किया आदेश यह फैसला देर रात राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के तहत लिया गया. एसपी संजीव कुमार सिन्हा को पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) भोपाल में पदस्थ किया गया है. वहीं, नए एसपी अंकित सोनी इससे पहले इंदौर नगरीय पुलिस में उपायुक्त (आसूचना एवं सुरक्षा) के पद पर कार्यरत थे. उनकी छवि एक सख्त लेकिन संवेदनशील और संतुलित प्रशासनिक अधिकारी के रूप में मानी जाती है. क्या है पूरा मामला? घटना 12 अप्रैल की है, जब हनुमान जयंती पर कर्नलगंज क्षेत्र में निकाले जा रहे जुलूस के दौरान एक मस्जिद के सामने दो पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बन गई. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पत्थरबाजी की भी खबरें सामने आईं. हालांकि, तत्कालीन एसपी संजीव कुमार सिन्हा ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि “सीसीटीवी फुटेज में पत्थरबाजी की पुष्टि नहीं हुई है.”   बयान से भड़के संगठन एसपी के इस बयान पर कई हिंदू संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई और सोशल मीडिया से लेकर प्रशासन तक विरोध दर्ज कराया. साथ ही प्रशासन द्वारा हनुमान जयंती की शोभायात्रा की अनुमति को लेकर भी सवाल खड़े किए गए. इसके बाद से ही प्रशासनिक हलकों में बदलाव की चर्चा शुरू हो गई थी, जिसे अब शासन ने आधिकारिक रूप दे दिया है. जिले में कानून व्यवस्था को लेकर सख्ती की तैयारी नए एसपी अंकित सोनी के सामने अब गुना जिले में शांति, सद्भाव और कानून-व्यवस्था को पुनः स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती होगी. साथ ही, विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाल कर एक निष्पक्ष और प्रभावी पुलिसिंग की आवश्यकता भी है.

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