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झाबुआ कलेक्टर सुश्री नेहा मीणा लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार 2024 से सम्मानित

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज विज्ञान भवन में आयोजित सिविल सेवा दिवस कार्यक्रम में झाबुआ कलेक्टर सुश्री नेहा मीणा को वर्ष 2024 के प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया। कार्यक्रम में केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। झाबुआ जिले को आकांक्षी ब्लाक श्रेणी में ब्लाक रामा में मोटी आई अभियान, सिकल सेल उन्मूलन के लिए जनजातीय क्षेत्रों में 3000 से अधिक स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, ब्लाक के 100% किसानों को मृदा कार्ड जारी करने, हर घर जल योजना के अंतर्गत 26 हजार से अधिक घरेलू नल कनेक्शन और पीएम आवास योजना में 83.5% से अधिक लक्ष्य प्राप्ति जैसे कार्यक्रमों के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया है। सम्मान के रूप में ट्रॉफी, स्क्रॉल और जिले में परियोजनाओं के लिए 20 लाख रुपए प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावित परिवारों को स्वीकृत की आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावित परिवारों को स्वीकृत की आर्थिक सहायता रायसेन, टीकमगढ़ और राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में हुई दुर्घटना में 14 नागरिकों का असामयिक निधन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के रायसेन, टीकमगढ़ और चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) में हुई दुर्घटनाओं में प्रदेश के नागरिकों के असामयिक निधन पर दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से सभी मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए एवं गंभीर घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि वे दुःख की इस घड़ी में शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन सड़क दुर्घटनाओं में दिवंगत नागरिकों की आत्मा की शांति के लिए बाबा महाकाल से प्रार्थना है। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी प्रार्थना है। संबंधित जिलों के प्रशासनिक अमले को प्रभावित परिवारों की सहायता के निर्देश दिए गए हैं।  उल्लेखनीय है कि चित्तौड़गढ़ के निंबाहेड़ा क्षेत्र में रविवार रात एक कार अनियंत्रित होकर ट्रक से टकरा गई, जिससे कार में सवार सात में से चार नागरिकों का निधन हो गया। दुर्घटना में मृत सभी लोग उज्जैन के निवासी थे, जो धार्मिकि यात्रा के लिए सांवलिया सेठ मंदिर जा रहे थे।   इसी तरह टीकमगढ़ जिले में रविवार को एक एसयूवी और दो मोटरसाइकिल की टक्कर में 4 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक ही परिवार के तीन सदस्य भी शामिल हैं। इस दुर्घटना में बाइक सवार एक अन्य युवक की भी उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। तीसरी दुर्घटना रायसेन जिले में भोपाल-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोमवार सुबह हुई, जिसमें 6 लोगों की जान चली गई। यहां एक टेम्पो ट्रैक्स (तूफान) पहले पुलिया से टकराई, इसके बाद 10 फीट गहरी खाई में गिर गई। दुर्घटना में दूल्हा-दुल्हन समेत 3 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। ये सभी शादी समारोह से इंदौर लौट रहे थे।  

एमपी में 1 मई से होंगे कर्मचारियों के तबादले: अगले हफ्ते आएगी ट्रांसफर नीति

Employees will be transferred in MP from May 1: Transfer policy will come next week भोपाल । मध्यप्रदेश में करीब ढाई साल बाद 1 से 31 मई तक कर्मचारियों के तबादले होंगे। मंगलवार को डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कैबिनेट बैठक की ब्रीफिंग के दौरान यह जानकारी दी। बैठक शुरू होने से पहले एक न्यूज एजेंसी से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी तबादलों से रोक हटाने के संकेत दिए थे। सीएम ने कहा, हमारी कोशिश रहेगी कि तबादला नीति अगली कैबिनेट बैठक तक आ जाए। से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी तबादलों से रोक हटाने के संकेत दिए थे। सीएम ने कहा, हमारी कोशिश रहेगी कि तबादला नीति अगली कैबिनेट बैठक तक आ जाए। बता दें, मध्यप्रदेश के कर्मचारी लंबे समय से तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। पिछले साल के अंत में कुछ विशेष मामलों में तबादलों की छूट दी गई थी, लेकिन इससे कई कर्मचारी वंचित रह गए थे। सीएम चाहते थे शैक्षणिक सत्र के बाद हों तबादलेएक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि पिछले साल मुख्यमंत्री की यह मंशा थी कि शैक्षणिक सत्र के बीच में तबादले न हों। इसकी दो वजह भी बताईं… सत्र के बीच किसी शिक्षक का तबादला होता है, तो उस स्कूल के छात्रों का कोर्स प्रभावित होता है। शिक्षक को भी नई संस्था में जाने के बाद रुटीन में आने में समय लगता है। दूसरे विभागों के कर्मचारियों के बीच में तबादले होते हैं, तो उनके बच्चों को स्कूल शिफ्ट करने में परेशानी होती है। कर्मचारी और परिवार सत्र खत्म होने तक दूर-दूर रहते हैं। आखिरी बार अक्टूबर 2022 में हुए थे तबादलेबता दें, एमपी में 2022 के बाद अब तबादले हाेंगे। तब जून 2021 की तबादला नीति के आधार पर तबादले हुए थे। प्रदेश में 7.50 लाख कर्मचारी हैं। इनमें से डेढ़ से दो लाख कर्मचारी तबादलों से प्रभावित होते हैं। जनवरी 2025 में सरकार ने गंभीर बीमारी या कारण वाले मामलों में तबादले में छूट दी थी। ये तबादले प्रभारी मंत्री की सहमति से किए गए थे।

मुख्यमंत्री साय बोले- नए कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा छत्तीसगढ़

नई दिल्ली, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली स्थित नॉर्थ ब्लॉक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।  शाह की अध्यक्षता आयोजित बैठक में राज्य में तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन को लेकर समीक्षा की गई। इसके साथ ही  नक्सलवाद के उन्मूलन, बस्तर के समग्र विकास और राज्य में सुरक्षा व न्याय तंत्र को और अधिक सशक्त बनाने पर भी चर्चा हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा सहित केन्द्रीय गृह मंत्रालय एवं राज्य सरकार के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम पर चर्चा की गई। इसके साथ ही पुलिस, जेल, अदालतों, अभियोजन और फोरेंसिक से संबंधित विभिन्न नए प्रावधानों के कार्यान्वयन और वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक में जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशासनिक व तकनीकी तैयारियाँ पूरी की जा चुकी हैं। राज्य में 27 प्रकार की एसओपी (Standard Operating Procedures) और दिशा-निर्देश तैयार कर लागू किए गए हैं। इसके साथ ही लगभग 37,385 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। न्यायालयों, पुलिस थानों और जेलों को ई-साक्ष्य और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम से लैस किया गया है। राज्य में अब तक 53,981 एफआईआर नए कानूनों के तहत दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें से लगभग 50% मामलों में चालान प्रस्तुत हो चुके हैं। बैठक में नक्सल समस्या के स्थायी समाधान के लिए भी विशेष रणनीति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल के महीनों में राज्य में चलाए गए ऑपरेशनों में कई वांछित नक्सली मारे गए, गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। नियद नेलानार योजना, बस्तर ओलंपिक, महिला सुरक्षा केंद्र, और आदिवासी क्षेत्रों में होमस्टे व पर्यटन ढांचे का विकास जैसे प्रयासों से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का सार्थक प्रभाव पड़ा है। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार वर्ष 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने के लिए कटिबद्ध है और बस्तर को भारत के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी आश्वासन दिया कि छत्तीसगढ़ केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करेगा और देशभर में कानूनी सुधार की इस पहल को प्रभावी ढंग से लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अब तक किए गए कार्यों की सराहना करते हुए गृह मंत्री ने शीघ्र नए क़ानूनों को राज्य में शत प्रतिशत लागू करने पर बल दिया। गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ से समन्वय और तत्परता की अपेक्षा जताई और कहा कि नए कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को सरल, तेज़ और अधिक जनोन्मुखी बनाना है। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पुलिस महानिरीक्षक सुशील द्विवेदी, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, प्रमुख सचिव विधि रजनीश श्रीवास्तव, सचिव गृह, नेहा चंपावत सहित अन्य अधिकारी भी शामिल हुए।

जनजातीय बहुल झाबुआ जिले में स्वास्थ्य, कृषि और आवास क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हुआ सम्मानित

जनजातीय बहुल झाबुआ जिले में स्वास्थ्य, कृषि और आवास क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हुआ सम्मानित लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए कलेक्टर झाबुआ को मिला पुरस्कार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिविल सेवा दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले को प्राप्त पुरस्कार पर प्रसन्नता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह निश्चित ही गर्व का अवसर है, जब सिविल सेवा दिवस पर नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से एस्पिरेशनल ब्लॉक प्रोग्राम (एबीपी) श्रेणी के अंतर्गत मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के रामा ब्लॉक को पुरस्कृत किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर झाबुआ सुनेहा मीणा को प्राप्त पुरस्कार के लिए बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के माध्यम से झाबुआ जिले के सुदूर और कम विकसित क्षेत्र में नागरिकों के गुणवत्तापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार के कार्य में सफलता प्राप्त की गई है। एबीपी के अंतर्गत योजनाओं को एकीकृत कर विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति के प्रयास किए जाते हैं। इस पुरस्कार से अन्य लोक सेवकों को भी कठोर परिश्रम और विकास के संकल्प के माध्यम से कार्य की प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने झाबुआ कलेक्टर के साथ ही समस्त टीम को भी बधाई दी है। झाबुआ में क्या हुआ विशेष एबीपी के अंतर्गत देश के 16 जिलों के लोक सेवकों को उत्कृष्ट कार्य के लिए चयनित किया गया। झाबुआ को प्राइम मिनिटर्स अवार्डस फॉर एक्सिलेंस इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन : 2024 की एस्पिरेशनल ब्लॉक प्रोग्राम श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। झाबुआ जिले में दूरस्थ क्षेत्रों में विकास को गति मिली है। रामा ब्लॉक में पोषण आहार, किसानों की समृद्धि के लिए प्रयास, पेयजल प्रबंध के अंतर्गत हर घर जल एवं हर वंचित को पक्के मकान का संकल्प साकार हो रहा है। झाबुआ में नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में जनजातीय वर्ग को लाभान्वित करने, किसानों को मृदा कार्ड उपलब्ध करवाने और आवास के क्षेत्र में विशेष प्रयास किए गए।  

कोलकाता की शर्मनाक हार, गुजरात ने उसे 158 रन पर रोका

कोलकाता  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 में सोमवार को खेले गए मैच में गुजरात टाइटंस ने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को 39 रनों से करारी शिकस्त दी. दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स में हुआ. इस मैच में टॉस जीतकर केकेआर के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया था. गुजरात ने पहले बल्लेबाजी करते हुए गिल की 90 और साई सुदर्शन की शानदार फिफ्टी के दम पर केकेआर के सामने 199 रनों का लक्ष्य रखा था. इसके जवाब में उतरी केकेआर 8 विकेट गंवाकर 158 रन ही बना सकी. ऐसी रही केकेआर की बल्लेबाजी 199 रनों के जवाब में उतरी केकेआर की शुरुआत बेहद खराब रही. पहले ही ओवर में सिराज ने गुरबाज को चलता किया, उनके बल्ले से केवल एक रन ही निकला. इसके बाद नरेन और रहाणे ने पारी को संभालने की कोशिश की . लेकिन राशिद खान ने छठे ओवर में नरेन का विकेट झटक लिया. नरेन ने 12 गेंदों में 17 रन बनाए. इसके बाद वेंकटेश अय्यर और अजिंक्य रहाणे के बीच एक छोटी साझेदारी हुई लेकिन 23.75 करोड़ के अय्यर एक बार फिर फ्लॉप रहे. वो 14 रन बनाकर 12वें ओवर में साई किशोर का शिकार हो गए. इसके बाद अजिंक्य रहाणे ने फिफ्टी लगाई.लेकिन 13वें ओवर में ही उनका विकेट साई किशोर ने लिया. रहाणे ने 37 गेंद में 50 रन बनाए. इसके बाद रसेल का बल्ला एक बार फिर खामोश रहा. रसेल सिर्फ 21 रन बना सके और राशिद खान का शिकार हो गए. इसके बाद प्रसिद्ध कृष्णा ने एक ही ओवर में रमनदीप और मोईन अली को आउट कर केकेआर की उम्मीदें भी खत्म कर दीं. कोलकाता की टीम 20 ओवर में 8 विकेट गंवार 158 रन ही बना सकी. ऐसी रही है गुजरात की बल्लेबाजी टॉस के बाद पहले बैटिंग करने उतरी गुजरात टाइटंस की शुरुआत कमाल की रही. सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल और साई सुदर्शन दोनों ही टच में दिखे. दोनों ने आतिशी शुरुआत की और केकेआर के गेंदबाजों की जमकर खबर ली. 10 ओवर में दोनों ने बिना विकेट गंवाए 89 रन जोड़े. गिल ने महज 34 गेंदों पर अर्धशतक जमाया. वहीं, साई सुदर्शन ने 33 गेंदों में 50 रन बनाए. हालांकि, 13वें ओवर में गुजरात को पहला झटका लगा जब साई सुदर्शन 52 के निजी स्कोर पर आउट हुए. लेकिन इसके बाद बटलर और गल ने मोर्चा संभाला. दोनों ने तेजी से रन बनाने शुरू किए. गिल ने 55 गेंदों पर 90 रनों की पारी खेली और 18वें ओवर में आउट हुए. इसके बाद राहुल तेवतिया खाता भी नहीं खोल सके और आउट हो गए. हालांकि, बटलर एक छोर पर टिके रहे. जिनकी आतिशी पारी के दम पर गुजरात ने 20 ओवर में 3 विकेट खोकर 199 रनों का टारगेट केकेआर के सामने रखा था.

3 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ की यात्रा, श्रद्धालुओं को ऐसे कराना होगा पंजीयन

श्रीनगर अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से 9 अगस्त तक चलेगी। इस बार 5 से 8 चरणों में जत्था जाएगा। इसके लिए पंजीयन की 14 अप्रैल से शुरू हो गई है, जो 31 मई तक चलेगी। पंजीयन हर दिन सुबह 10 से शाम 4 बजे तक बैंकों में की जा रही है। बैंकों को प्रतिदिन 19 सीट के कोटे के हिसाब से रजिस्ट्रेशन स्लॉट दिया गया है। वहीं पंजीयन कराने वालों की संख्या तीन गुना पहुंच रही है। प्रत्येक सदस्य का रजिस्ट्रेशन शुल्क 150 रुपए है। इस बार 38 दिन की है यात्रा इस बार यात्रा की अवधि 38 दिन की है। दुर्ग-भिलाई से प्रतिवर्ष 5 हजार से ज्यादा भक्त अमरनाथ यात्रा के लिए जाते हैं। इस बार भी उनमें खासा उत्साह है, लेकिन पंजीयन के लिए बैंक की सुविधा दुर्ग-भिलाई में नहीं होने से उनमें निराशा है। इस बार रायपुर में तीन और राजनांदगांव में एक बैंक अधिकृत किया गया है। रायपुर के तीन बैंकों में पीएनबी कटोरा तालाब, जम्मू एंड कश्मीर बैंक जीई रोड, एसबीआई जय स्तंभ चौक शामिल है। राजनांदगांव में पीएनबी का रामदीन मार्ग शामिल है। वेबसाइट से करते हैं आवेदन फार्म डाउनलोड, 31 मई तक रजिस्ट्रेशन नियमित रूप से अमरनाथ यात्रा करने वाले ज्ञानेश्वर ताम्रकार ने बताया कि वेबसाइट से फार्म डाउनलोड किया जाता है। उसमें मापदंड के अनुसार मेडिकल टेस्ट भी कराना होगा। इसके बाद आधार कार्ड की कॉपी लेकर फॉर्म जमा कराने बैंक जाना होगा है। यहां पर बायोमैट्रिक फिंगर से रजिस्ट्रेशन हो रहा है। अमरनाथ शाइन बोर्ड ने ग्रुप रजिस्ट्रेशन भी शुरू किए हैं, जो कि 31 मई तक होंगे। समूह में प्रति व्यक्ति रजिस्ट्रेशन शुल्क 250 रुपए है। ग्रुप में रजिस्ट्रेशन में 5 से 30 व्यक्तियों का समूह हो सकता है। अमरनाथ में पहलगांव और बालटाल में आवास, भोजन की निःशुल्क व्यवस्था है। अमरनाथ यात्रा के लिए दुर्ग से पहला जत्था 30 जून और 1 जुलाई को निकलेगा। क्या है रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस? इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2025 से 9 अगस्त 2025 तक चलेगी. यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन 14 अप्रैल 2025 से शुरू हो चुके हैं. तीर्थयात्री श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से ऑफलाइन और ऑनलाइल रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के पूरे भारत में 540 से ज्यादा बैंक ब्रांच हैं जहां से आप रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाइए और वहां ‘ऑनलाइन सर्विसेज’ पर क्लिक करें. उसके बाद ड्रॉपडाउन मेन्यू में ‘यात्रा पर्मिट रजिस्ट्रेशन’ पर क्लिक करें. सभी दिशा-निर्देशों का ध्यान से पढ़ें, शर्तों से सहमत रहें और रजिस्ट्रेशन के लिए आगे बढ़ें. अपनी निजी जानकारी जैसे नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर और अपनी यात्रा की तारीख लिखें. अपनी एक पासपोर्ट साइज फोटो और हेल्थ सर्टिफिकेट की स्कैन कॉपी अपलोड करें. उसके बाद, आपके रजिस्टर्ड नंबर पर आए ओटीपी को बताकर अपना मोबाइल वेरिफाई करवाएं. फिर, 220 रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस भरें. पेमेंट हो जाने के बाद आप पोर्टल से अपना यात्रा रजिस्ट्रेशन पर्मिट डाउनलोड कर सकते हैं. ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस अगर तीर्थयात्री ऑफलाइन रजिस्टर करना चाहते हैं तो वो रजिस्ट्रेशन सेंटर या फिर बैंक ब्रांच पर जा सकते हैं. आमतौर पर यात्रा के चुने गए दिन से तीन दिन पहले वैष्णवी धाम, पंचायत भवन और महाजन हॉल जैसे स्थानों पर टोकन पर्चियां बांटी जाती हैं. तीर्थयात्री अगले दिन ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन और मेडिकल जांच के लिए सरस्वती धाम जाएं. तीर्थयात्रियों को जम्मू में विशिष्ट स्थानों से अपने आरएफआईडी कार्ड लेने होंगे. बाबा बर्फानी का महत्व बाबा बर्फानी की महिमा अपरंपार है. बाबा बर्फानी को अमरनाथ और अमरेश्वर भी कहा जाता है. अमरनाथ जी के शरणागत साधकों को शिव लोक में स्थान मिलता है. साथ ही पृथ्वी लोक पर सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है. हर साल बड़ी संख्या में लाखों श्रद्धालु देश और विदेश से मनोकामना पूर्ति के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन हेतु अमरनाथ यात्रा करते हैं. बाबा बर्फानी, जो अमरनाथ गुफा में विराजमान हैं, एक प्रमुख धार्मिक स्थल हैं. हिंदू धर्म में इसे विशेष महत्व दिया जाता है और एक पवित्र यात्रा माना जाता है. अमरनाथ गुफा में एक प्राकृतिक शिवलिंग है, जो बर्फ से बनता है और चंद्रमा के चरणों के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है. पौराणिक मान्यतानुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरता की कथा इसी गुफा में सुनाई थी, जिससे यह गुफा और भी पवित्र हो गई. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा बर्फानी के दर्शन करने और अमरनाथ यात्रा करने से भक्तों के पाप नष्ट होते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन करके अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की आशा रखते हैं. सनातन शास्त्रों में कहा गया है कि अमरनाथ यात्रा करने से अश्वमेघ यज्ञ करने जितना पुण्य मिलता है. यह भी कहा जाता है कि अमरनाथ की यात्रा करने से व्यक्ति को 23 तीर्थों के दर्शन करने जितना पुण्य प्राप्त होता है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव दम्पति को दिया आशीर्वाद

बुरहानपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुरहानपुर विधायक एवं पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस के यहां आयोजित विवाह समारोह में शामिल होकर चिं. समर्थ और सौ.कां. नम्रता को आशीर्वाद दिया। उन्होंने उनके सुखद, स्वस्थ एवं सफल दांपत्य जीवन की मंगलकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव विवाहित जोड़े को रामचरित मानस महाकाव्य की प्रति भी भेंट की। समारोह में जल संसाधन एवं जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, सांसद ज्ञानेश्वर पाटील, नेपानगर विधायक सुमंजू दादू, महापौर श्रीमति माधुरी पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष गंगाराम मार्को सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

समर हॉलिडे वीकली स्पेशल ट्रेन, 23 अप्रैल से भगत की कोठी से दानापुर के बीच चलेगी

जोधपुर गर्मी की छुट्टियों में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे द्वारा भगत की कोठी से दानापुर के बीच समर हॉलिडे वीकली स्पेशल ट्रेन का संचालन बुधवार से प्रारंभ किया जा रहा है। यह ट्रेन 26 जून तक कुल 10 फेरे लगाएगी और मेड़ता रोड व जयपुर होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेगी। गर्मियों के मौसम में जब ट्रेनों में भारी भीड़ होती है और वेटिंग लिस्ट काफी लंबी होती है, ऐसे में यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से यह विशेष ट्रेन शुरू की जा रही है। जोधपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि ग्रीष्मावकाश के दौरान यात्रियों की अधिक संख्या को देखते हुए ट्रेन संख्या 04813/ 04814 भगत की कोठी-दानापुर-भगत की कोठी वीकली स्पेशल का संचालन 23 अप्रैल से शुरू किया जाएगा। ट्रेन संख्या 04813 हर बुधवार को भगत की कोठी से शाम 5:20 बजे रवाना होगी और अगले दिन गुरुवार को शाम 5:15 बजे दानापुर पहुंचेगी। वहीं वापसी में ट्रेन संख्या 04814 प्रत्येक गुरुवार को दानापुर से शाम 6:45 बजे रवाना होकर शनिवार की रात 1 बजे भगत की कोठी पहुंचेगी। सीनियर डीसीएम विकास खेड़ा के अनुसार यह ट्रेन अपने मार्ग में गोटन, मेड़ता रोड, डेगाना, मकराना, कुचामन सिटी, नावां सिटी, फुलेरा, जयपुर, गांधीनगर जयपुर, दौसा, बांदीकुई, भरतपुर, ईदगाह, टूंडला, इटावा, गोविंदपुरी, फतेहपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर, बक्सर और आरा स्टेशनों पर ठहराव करेगी। यात्रियों की सुविधा के लिए इस ट्रेन में 16 स्लीपर, 4 जनरल और 2 गार्ड (एसएलआर) सहित कुल 22 डिब्बे लगाए जाएंगे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार गर्मियों में जोधपुर और मारवाड़ क्षेत्र में बड़ी संख्या में यात्री आते हैं और यहां आने-जाने का प्रमुख साधन ट्रेन ही है। दक्षिण भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों में भी लंबी प्रतीक्षा सूची बनी रहती है, ऐसे में यह विशेष ट्रेन यात्रियों के लिए काफी राहत लेकर आएगी।

लखनऊ में 33 और 11 केवी की ओवरहेड लाइनें होंगी भूमिगत, आंधी और बारिश के दौरान मिलेगी रहत

लखनऊ देश के रक्षामंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने राजधानी की बिजली आपूर्ति बेहतर और टिकाऊ बनाने के लिए सभी 33 व 11 केवी ओवरहेड बिजली की लाइनों को भूमिगत करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए उन्होंने रविवार को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के नवनियुक्त निदेशक (तकनीकी) हरीश बंसल और लखनऊ सेंट्रल जोन के मुख्य अभियंता रवि कुमार अग्रवाल के साथ अपने आवास पर बैठक की। बैठक में बिजली की बढ़ती मांग, पोलों पर लटकते तारों के मकड़जाल और ओवरहेड लाइनों की समस्याओं को गंभीरता से उठाया गया। निदेशक ने बताया कि केंद्र सरकार की योजना के तहत ओवरहेड 33 केवी और 11 केवी लाइनों, ट्रांसफार्मरों आदि को दुरुस्त करने और सुधारने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस परियोजना पर लगभग 3000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। रक्षामंत्री ने इस प्रस्ताव को ऊर्जा मंत्रालय तक पहुंचाने का आश्वासन देते हुए कहा कि वे स्वयं केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से इसके लिए धनराशि स्वीकृत करवाने का प्रयास करेंगे। बैठक के दौरान पूर्व आईएएस अधिकारी एवं उनके निजी सचिव अमित किशोर और जनप्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी भी मौजूद थे।   आंधी-तूफान में नहीं जाएगी बिजली राजनाथ सिंह ने अधिकारियों से पूछा कि लाइनें भूमिगत होने पर क्या आंधी-तूफान के समय बिजली गुल नहीं होगी? इस पर अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि भूमिगत नेटवर्क से ऐसी परिस्थितियों में भी बिजली आपूर्ति बनी रहेगी। आंधी से प्रभावित होते हैं ये क्षेत्र वर्तमान में गोमतीनगर, चिनहट, सीतापुर रोड, हरदोई रोड, सरोजनीनगर, मोहनलालगंज, निगोहा, अमेठी, दुबग्गा आदि क्षेत्रों में आंधी आने पर ओवरहेड लाइनें और खंभे टूट जाते हैं, जिससे बिजली कई घंटे तक बाधित रहती है। 1200 वर्गफीट में बनेगा उपकेंद्र मुख्य अभियंता ने बताया कि नए 33/11 केवी उपकेंद्रों के निर्माण में भूमि की कमी बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। नगर निगम, आवास विकास परिषद और जिला पंचायत जैसी संस्थाएं जमीन उपलब्ध नहीं करा रही हैं। ऐसे में अब 1200 वर्गफीट में गैस आधारित उपकेंद्र बनाने की योजना पर काम हो रहा है। इस तरह के उपकेंद्र पर लगभग 12 से 15 करोड़ रुपये की लागत आती है। राजधानी का पहला गैस आधारित उपकेंद्र विक्रमादित्य मार्ग पर स्थापित किया गया है। रक्षामंत्री ने दिए हैं निर्देश रक्षामंत्री ने ओवरहेड तारों को भूमिगत करने का निर्देश दिया है। इससे आंधी-बारिश के दौरान बिजली गुल नहीं होगी। उन्होंने केंद्र से तीन हजार करोड़ रुपये की दिलाने का वादा किया है।- रवि कुमार अग्रवाल, मुख्य अभियंता, लखनऊ सेंट्रल जोन राजधानी में बिजली व्यवस्था 13.50 लाख जिले में उपभोक्ता 20 हजार छोटे-बड़े ट्रांसफार्मर 156 उपकेंद्र से बिजली आपूर्ति

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में लगेंगी मस्ती की पाठशाला, मोहन सरकार का आनंद प्लान

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार अब सरकारी स्कूलों में मस्ती की पाठशाला लगाने जा रही है. दरसअल, सरकारी स्कूल की पढ़ाई बेहतर बनाने के साथ सराकार बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है. इसी के तहत मोहन सरकार शासकीय स्कूलों के लिए आनंद योजना लेकर आ रही है. इसके तहत अब स्कलों में कोर्स की पढ़ाई के साथ बच्चों को जीवन जीने की कला और स्ट्रेस मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी दी जाएगी. सरकारी स्कूलों में लगेगा आनंद पीरियड इसके लिए सरकारी स्कूलों में अलग से आनंद का एक पीरियड लगाया जाएगा, जिसमें हायर सेकंडरी के बच्चों को जीवन जीने और तनाव मुक्त रहने की कला सिखाई जाएगी. दरअसल, स्कूली बच्चों में स्ट्रेस और प्रतिस्पर्धा को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने आनंद विभाग के साथ अनुबंध किया है. 2 हजार सरकारी स्कूलों से होगी आनंद क्लास की शुरुआत इसमें आनंद विभाग शिक्षकों को पहले ट्रेनिंग देगा, फिर वही शिक्षक बच्चों को प्रशिक्षित करेंगे. ऐसे में इसे मस्ती की पाठशाला भी कहा जा रहा है, जो बच्चों के लिए काफी फायदेमंद भी होगी. 2 हजार सरकारी स्कूलों से होगी शुरुआत बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग पहले भी सीएम राइज और मॉडल स्कूलों में मस्ती की पाठशाला का प्रयोग कर चुका है. इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अन्य सरकारी स्कूलों में भी मस्ती की पाठशाला लगाने का फैसला लिया गया है. हालांकि, पहले चरण में 2 हजार स्कूलों में मस्ती की पाठशाला की शुरुआत होगी. इसके बाद प्रदेश के अन्य सरकारी स्कूलों के हायर सेकंडरी के बच्चों के लिए आनंद क्लास लगाई जाएगी. इंजीनियरिंग और मेडिकल कालेजों में भी आनंद पीरियड सरकार की मंशा है कि जिस तरह सरकारी स्कूलों में आनंद की कक्षाएं शुरु की जा रही है. इसी तरह प्रदेश के इंजीनियरिंग, मेडिकल, एनटीटीटीआर और अन्य कालेजों में भी स्ट्रेस मैनेजमेंट और आर्ट आफ लिविंग की शिक्षा दी जाए. इसके लिए राज्य आनंद संस्थान ने पूरी तैयारी कर ली है. इधर सरकारी स्कूलों में बच्चों को ट्रेनिंग देने के लिए 4 हजार सरकारी शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा. बता दें कि अभी 24 से 29 मार्च तक सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए वर्चुअल क्लासेस भी लगाई गई थी, जिसमें 3500 से 4 हजार बच्चों ने भाग लिया था. पहली बार हायर सेकंडरी स्कूलों में मस्ती की पाठशाला राज्य आनंद संस्थान के डायरेक्टर सत्य प्रकाश आर्य ने बताया, ” पहली बार सरकारी स्कूलों में आनंद की क्लास लगाई जाएगी. नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों को स्कूली शिक्षा देने के साथ उनको मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा देना भी अनिवार्य है. इसी के तहत स्कूलों में आर्ट ऑफ लिविंग और स्ट्रेस मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है. इसके साथ ही शिक्षकों को भी 6 दिनों का प्रशिक्षण आनंद संस्थान द्वारा किया जाएगा.”  

महाराजा छत्रसाल की घोड़े पर सवार, अष्टधातु की ये मूर्ति देश में सबसे ऊंची

छतरपुर  इतिहास के पन्नों में बुंदेलखंड के महाराजा छत्रसाल को वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसके वे हकदार थे. ये बात अलग है कि छतरपुर जिले में लोगों के मन में महाराजा छत्रसाल के प्रति अलग ही सम्मान है. तभी तो छतरपुर में महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान ने 52 फीट ऊंची अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित कर उनकी वीरता, पराक्रम और शौर्य को देश के सामने रखा. इस प्रतिमा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और महाराजा छत्रसाल के पराक्रम और इतिहास को जानकर हैरान हो जाते हैं. घोड़े पर सवार इतनी बड़ी प्रतिमा देश में कहीं नहीं है. छतरपुर के मऊसहानियां में स्थापित विशाल प्रतिमा इतनी विशाल प्रतिमा बनने की कहानी भी रोचक है. छतरपुर के युवा आर्टिस्ट दिनेश कुमार शर्मा द्वारा महाराजा छत्रसाल का करीब डेढ़ फुट लंबा मास्टर पीस को तैयार किया गया. इस पीस को यूपी के लखनऊ ले जाया गया. पीस को देखकर लखनऊ के कलाकारों ने मिट्टी का मॉडल तैयार किया. मॉडल पीस के करीब सौ टुकड़ों में बनाई गई डाई को ट्रकों से छतरपुर लाया गया. राजस्थान के कारीगरों ने महाराजा छत्रसाल की मूर्ति की ढलाई की. अब 52 फीट की अष्टधातु की मूर्ति सीना तानकर खड़ी है, जिसे देखने पूरे देश से लोग आ रहे हैं. छतरपुर के मऊसहानियां में ये प्रतिमा स्थापित है. छतरपुर जिले से 15 किलामीटर दूर महाराजा छत्रसाल की कर्मभूमि मऊसहानियां रही है. 1.10 करोड़ से बनी अष्टधातु की प्रतिमा महाराजा छत्रसाल की ये प्रतिमा को बनवाने में लोगों ने हर स्तर पर आर्थिक मदद की. एक करोड़ से ज्यादा राशि प्रतिमा बनवाने में खर्च हुई. इसमें से 67 लाख रुपए से ज्यादा नगद राशि 10-10 रुपए के कूपन से एकत्र की गई. महाराजा छत्रसाल की विशाल प्रतिमा बनवाने के लिए RSS के पूर्व विभाग प्रचारक पवन तिवारी ने संकल्प लिया था. इसके बाद 2 जून 2015 को महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान का गठन करवाया गया. महाराजा छत्रसाल के इतिहास, त्याग, बलिदान की गाथाओं की पुस्तकें निकलवाईं. कैलेंडर, डायरी, प्रतियोगिता से लेकर हर वह पहल शुरू की, जिससे घर-घर में लोग छत्रसाल की वीरता की गाथा जान सकें. महाराजा छत्रसाल की वीरता जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य इसके बाद अभियान को मूल रूप देते हुए संस्थान के लोगों ने महाराजा छत्रसाल की अष्टधातु से विशाल प्रतिमा स्थापना का संकल्प लिया. 27 अक्टूबर 2015 को प्रतिमा निर्माण के लिए पूजन हुआ और फिर यह काम शुरू हो गया. 21 मार्च 2018 में आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत द्वारा प्रतिमा का लोकार्पण किया गया. छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान के अध्यक्ष राधे शुक्ला का कहना है “साल 2015 में हम लोगों ने छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान बनाया था, जिसमे संकल्प लिया गया था कि महाराजा छत्रसाल की वीरगाथा जन-जन तक पहुंचाई जाएगी.”

डाॅ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी को भारत सरकार ने बड़ी सौगात, 434 करोड़ से होगा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट

सागर  डाॅ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी को भारत सरकार ने बड़ी सौगात दी है और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 434 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि की मंजूरी दी है. इस राशि से यूनिवर्सिटी में अकादमिक भवन, अस्पताल, आईटी लैब, कन्वेंशन सेंटर और लड़के और लड़कियों के लिए छात्रावास के साथ यूनिवर्सिटी के नए कैंपस, वैली कैंपस का निर्माण होगा. भारत सरकार की इस सौगात पर यूनिवर्सिटी के शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता के प्रयासों की सराहना की है. यूनिवर्सिटी की प्रगति की नई उड़ान डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी के लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने बड़ी सौगात दी है. यूनिवर्सटी के अकादमिक भवनों, छात्रावासों और अन्य सुविधाओं के लिए 434.77 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं. यूनिवर्सटी में इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के नवीन भवन के निर्माण के लिए 99.71 करोड़ रुपए, होटल एंड कैटरिंग मैनेजमेंट, इंस्टिट्यूट ऑफ हॉस्पिटलिटी एंड टूरिज्म मैनेजमेंट, वाणिज्य विभाग और प्रबंधन विभाग के एकीकृत भवन के लिए 67.60 करोड़ रुपए, बालक और बालिकाओं के लिए एक-एक हजार सीट की क्षमता वाले दो नए छात्रावास के लिए 194.50 करोड़ रुपए, यूनिवर्सटी के नए अस्पताल भवन के लिए 15.42 करोड़, कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र, प्रयोगशाला, आईटी सेल एवं ऑनलाइन सेंटर के लिए 33.58 करोड़ और इसके अलावा मल्टीपर्पस कन्वेंशन सेंटर के लिए 23.96 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं. खास बात ये है कि इन सभी भवनों का निर्माण सागर रहली मार्ग पर वैली कैम्पस में किया जाएगा. कुलपति के प्रयासों की सराहना दरअसल, यूनिवर्सिटी की इन जरूरतों को लेकर कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने बैठक में यूनिवर्सिटी के मौजूदा संसाधनों, छात्रों और छात्रावास की संख्या, सुविधाओं का उल्लेख करते हुए विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया था और यूनिवर्सिटी में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की आवश्यकताओं पर भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय का ध्यान खींचा था. भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के शास्त्री भवन में हुई इस बैठक में सागर यूनिवर्सिटी के सभी प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. बैठक में कुलपति ने वर्ष 2023 में यूनिवर्सिटी को नैक से मिली ए प्लस ग्रेड, यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या, संचालित कोर्स, शिक्षक और कर्मचारियों की संख्या, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के क्रियान्वयन में अग्रणी रहने और भारतीय सेना के महार रेजीमेंट के साथ अकादमिक समझौता कर अग्निवीरों के लिए डिग्री प्रदान करने जैसी उपलब्धियों को रेखांकित किया. यूनिवर्सिटी के विशाल परिसर में बनेंगी इमारतें गौरतलब है कि सागर यूनिवर्सिटी का क्षेत्रफल करीब 1400 एकड़ है. यहां फिलहाल वैली कैंपस में विस्तार की संभावनाएं है. कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा है कि “यूनिवर्सटी लगातार परिसर का विस्तार कर रहा है. यहां कई नवीन अकादमिक भवन, इंटीग्रेटेड लैब और कई विभागों के विस्तारित भवन बनकर तैयार हो चुके हैं. भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने 434.77 करोड़ रुपए की नवीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है. यूनिवर्सटी प्रगति की दिशा में नई उड़ान भरने जा रही है. 2 नए छात्रावासों के बनने से छात्र-छात्राओं को सुविधा होगी. हमारा विश्वविद्यालय एक तरह से पूर्णतः आवासीय विश्वविद्यालय बनने की ओर अग्रसर है. आधुनिक अस्पताल, आई टी सेंटर और कम्प्यूटर लैब बनाया जाएगा. कॉमर्स एवं मैनेजमेंट डिपार्टमेंट बड़े भवन में संचालित होगा.”

प्रधानमंत्री मोदी 24 अप्रैल को देश की तीसरी अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखयेंगे, सतना से खंडवा होकर गुजरेगी

जबलपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अप्रैल को देश की तीसरी अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने वाले हैं. यह ट्रेन मध्य प्रदेश में सतना से खंडवा होकर गुजरेगी. इस बीच में यह कटनी जबलपुर और इटारसी रेलवे स्टेशन से भी जाएगी, लेकिन फिलहाल यह तय नहीं है कि इसका स्टॉपेज कहां होगा. वंदे भारत के बाद यह दूसरी महत्वाकांक्षी ट्रेन है, जो मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. एमपी से गुजरेगी तीसरी अमृत भारत एक्सप्रेस 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की तीसरी अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने वाले हैं. यह ट्रेन बिहार के सहरसा से शुरू होकर मुंबई जाएगी. सहरसा से अमृत भारत एक्सप्रेस शाम 4:00 बजे निकलेगी और 24 घंटे में 1956 किलोमीटर का सफर तय करके यह मुंबई पहुंचेगी. अमृत भारत एक्सप्रेस सहरसा से खगड़िया, हसनपुर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, पाटलिपुत्र और दानापुर होते हुए वाराणसी के दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंचेगी. दीनदयाल जंक्शन से ये ट्रेन मध्य प्रदेश में इंटर करेगी और सतना, कटनी जबलपुर से होती हुई यह इटारसी, खंडवा और भुसावल के रास्ते मुंबई जाएगी. जल्द तय होंगे मध्य प्रदेश के स्टॉपेज पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारी अभी यह बताने की स्थिति में नहीं है कि यह जबलपुर से कितने बजे गुजरेगी और मध्य प्रदेश के कौन से स्टेशन पर रुकेगी, क्योंकि इस ट्रेन का पूरा नियंत्रण ईस्ट सेंट्रल रेलवे के पास में है. अभी यह भी तय नहीं है कि यह मध्य प्रदेश के किस स्टेशन पर रुकेगी. इसके पहले भी बिहार के दरभंगा से नई दिल्ली के बीच में पहली अमृत भारत एक्सप्रेस चलाई गई थी. यह ट्रेन लगभग 1137 किलोमीटर की यात्रा 21 घंटे में पूरी करती है. दूसरी अमृत भारत एक्सप्रेस पश्चिम बंगाल की मालदा टाउन से बेंगलुरु के लिए चलती है. वहीं इस बारे में पश्चिम मध्य रेलवे के सीपीआरओ हर्षित श्रीवास्तव ने बताया है कि “अमृत भारत एक्सप्रेस के मध्य प्रदेश में सतना और जबलपुर स्टॉपेज होने की संभावना है, क्योंकि अभी इसके स्टॉपेज का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है.” अमृत भारत एक्सप्रेस की बढ़ी स्पीड अमृत भारत एक्सप्रेस 2247 किलोमीटर की यात्रा 42 घंटे में पूरी करती है. इन ट्रेन की अधिकतम स्पीड 130 किलोमीटर प्रति घंटा है, लेकिन फिलहाल यह 106 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड पर चल पा रही है. बता दें अमृत भारत एक्सप्रेस में वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ही सुविधाएं हैं, लेकिन इसमें अभी तक एसी कोच शामिल नहीं किया गया है. हालांकि इस ट्रेन में बाकी सारी सुविधा पुरानी ट्रेनों की अपेक्षा अपग्रेड कर दी गई हैं. साथ ही इसकी स्पीड भी बढ़ा दी गई है. इसकी वजह से यात्रा करने वाले लोगों का समय बच रहा है.

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति के कार्यकाल में वृद्धि

भोपाल राज्य शासन द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत खाद्य प्र-संस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पी.एम.एफ.एम.ई. योजना) के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति के कार्यकाल को एक वर्ष (वित्तीय वर्ष 2025-26) के लिए बढ़ा दिया गया है। योजना के दिशा-निर्देशों अनुसार समिति का गठन वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक 5 वर्षों की अवधि के लिए किया गया था। राज्य शासन द्वारा इस समिति के कार्यकाल में एक वर्ष की वृद्धि करते हुए इसे आगामी वित्तीय वर्ष तक विस्तारित किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिये गये हैं।  

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