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9 साल से टी20 टीम से बाहर चल रहे अजिंक्य रहाणे का आईपीएल में भौकाल

नई दिल्ली आईपीएल में भारतीय क्रिकेट के सभी बड़े सितारे खेल रहे हैं। टीम इंडिया में खेल रहे खिलाड़ी के साथ ही संन्यास ले चुके नाम भी लीग में नजर आते हैं। इसके साथ कुछ ऐसे भी खिलाड़ी है, जो लंबे समय से टीम इंडिया से बाहर हैं। आईपीएल से उनके इंटरनेशनल में कमबैक की उम्मीद न के बराबर है लेकिन फिर भी अपना 110 प्रतिशत दे रहे हैं। इसमें एक नाम अजिंक्य रहाणे का है। रहाणे 2016 से भारत की टी20 टीम के लिए नहीं खेले हैं। आईपीएल की नीलामी में अनसोल्ड रहने के बाद कोलकाता नाइटराइडर्स ने उन्हें खरीदा। उनका बेस प्राइस 1.5 करोड़ था और वह उतने में ही खरीदे गए। रहाणे का आईपीएल 2025 में प्रदर्शन केकेआर को मजबूरी में अजिंक्य रहाणे को कप्तान बनाना पड़ा। टीम के पास टी20 के एक से बढ़कर एक विस्फोटक बल्लेबाज हैं लेकिन आईपीएल 2025 में उनके लिए अब तक सबसे ज्यादा रन अजिंक्य रहाणे के हैं। 8 मैचों में रहाणे ने करीब 39 की औसत और 146.48 की स्ट्राइक रेट से 271 रन बनाए हैं। इसमें तीन फिफ्टी भी शामिल है। रहाणे के बल्ले से 24 चौके और 15 छक्के निकले हैं। केकेआर के लिए किसी ने भी उनसे ज्यादा छक्के या चौके नहीं मारे हैं। विराट और रोहित पर भी भारी रहाणे अजिंक्य रहाणे भारतीय कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली पर भी भारी हैं। रोहित ने अभी तक 7 मैचों में 26 की औसत और 155 की स्ट्राइक रेट से 158 रन ही बनाए हैं। उनके 10 चौके और 12 छक्के हैं। आरसीबी के लिए खेलने वाले विराट कोहली ने रहाणे से ज्यादा रन बनाए हैं लेकिन स्ट्राइक रेट के साथ ही छक्के मारने में पीछे हैं। 8 पारियों में विराट के 322 रन हैं। उन्होंने 140 की स्ट्राइक रेट से बैटिंग करते हुए 11 छक्के ही मारे हैं। टी20 में वापसी की उम्मीद भी खत्म अजिंक्य रहाणे के लिए भारतीय टी20 टीम में वापसी की उम्मीद लगभग खत्म है। वनडे में भी वह लंबे समय से नहीं खेल रहे। टेस्ट में आखिरी बार 2023 में उन्हें मौका मिला था। टेस्ट में शायद उनकी वापसी हो भी जाए लेकिन वनडे और टी20 में लगभग नामुमकिन है। इसके बाद भी रहाणे आईपीएल में लगातार नए नवेले खिलाड़ियों पर भारी पड़ रहे हैं।

भारत के तीर्थ स्थानों में श्री अमरनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है, यात्रा से प्राप्त होता है 23 तीर्थों का पुण्य

नई दिल्ली श्री अमरनाथ आदिदेव भगवान शंकर की पवित्र उपाधि है। धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में स्थित प्राकृतिक भव्य एवं चमत्कारिक गुफा में प्रत्येक वर्ष हिमशिवलिंग के दर्शन करने से सुखद अनुभव की प्राप्ति होती है। भारत के तीर्थ स्थानों में श्री अमरनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है । कश्मीर के हिमाच्छादित पर्वतों के आगोश में बनी इस पवित्र गुफा के दर्शन हेतु यात्रा जुलाई में प्रारम्भ होकर अगस्त में रक्षाबंधन तक चलती है । अमरनाथ यात्रा को कुछ लोग मोक्ष प्राप्ति का तो कुछ स्वर्ग की प्राप्ति का जरिया बतलाते हैं ।   इस पवित्र धाम की यात्रा से 23 तीर्थों का पुण्य प्राप्त होता है । गुफा के एक छोर में प्राकृतिक रूप से बना हिमशिवलिंग पक्की बर्फ का होता है जबकि गुफा के बाहर मीलों तक कच्ची बर्फ ही देखने को मिलती है । गुफा में पक्की बर्फ से गणेश पीठ तथा पार्वती पीठ भी बनती हैं। भारत भूमि का कण-कण तीर्थ है । कश्मीर को तीर्थों का घर कहा जाता है । कश्मीर में 49 शिवधाम, 60 विष्णुधाम, 3 ब्रह्माधाम, 22 शक्तिधाम, 700 नागधाम हैं । अमरनाथ में स्थित पार्वती पीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है । अमरनाथ जी की यात्रा कैलाश मानसरोवर के बाद भारत में सबसे ज्यादा रोमांचक यात्रा है । काशी में लिंगदर्शन एवं पूजन से दस गुणा फल देने वाला श्री अमरनाथ का पूजन है । देवताओं की हजार वर्ष तक स्वर्ण, पुष्प, मोती एवं पट्ट वस्त्रों से पूजा का जो फल मिलता है वह श्री अमरनाथ जी की इस लिंग पूजा से एक ही दिन में प्राप्त हो जाता है।   एक दंत कथानुसार रक्षाबंधन की पूर्णिमा के दिन जो सामान्यत: अगस्त मास में पड़ती है भगवान शंकर स्वयं श्री अमरनाथ गुफा में पधारते हैं । रक्षा बंधन के दिन ही पवित्र छड़ी मुबारक गुफा में बने हिमशिवलिंग के पास स्थापित कर दी जाती है। अमरनाथ यात्रा का प्रचलन ईसा से भी एक हजार वर्ष पूर्व का है । अमरनाथ गुफा में भगवान शंकर ने मां पार्वती को अमरकथा सुनाई थी । मां पार्वती ने अमरत्व प्राप्त करने के लिए भगवान शंकर से अमरकथा सुनाने का हठ किया था ।   प्राचीन कथानुसार इस पावन गुफा की खोज बूटा मलिक नाम के मुसलमान गडरिए ने की थी । एक दिन वह भेड़ें चराते दूर निकल गया जहां उसकी एक साधु से भेंट हुई। साधु ने बूटा मलिक को एक कोयले से भरी कागड़ी दी । घर जाकर जब उसने देखा तो उस कागड़ी में सोना था जिसे देखकर वह हैरान हो गया । उस साधु का धन्यवाद करने वह वापस उस स्थान पर गया परन्तु साधु उसे मिला नहीं । उसने वहां एक विशाल गुफा देखी । उसी दिन से यह गुफा एक तीर्थ स्थान बन गई। माता पार्वती ने अमरकथा कथा इसी गुफा में सुनी थी।   इसी कारण देश-विदेश से हजारों की संख्या में शिव भक्त इस हिमशिवलिंग के दर्शन हेतु आते हैं । चातुर्मास की प्रतिपदा को हिमलिंग का निर्माण अपने आप प्रारम्भ होता है और धीरे-धीरे शिवलिंग का आकार ले लेता है तथा पूर्णिमा को परिपूर्ण होकर दूसरे पक्ष में घटने लगता है। अमावस्या या शुक्लपक्ष की प्रतिपदा को यह लिंग पूर्णत: अदृश्य हो जाता है। कुछ लोग इस किंवदंती को झुठलाते हैं ।   सत्य है कि हिमनिर्मित शिवलिंग कभी पूर्णतया लुप्त नहीं होता । आकार छोटा या बड़ा हो सकता है। कहा जाता है कि भगवान शिव इस गुफा में पहले-पहल श्रावण की पूर्णिमा को आए थे इसीलिए इस दिन अमरनाथ की यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है । रावण पूर्णिमा (रक्षा बंधन) का सर्वाधिक महत्व होने से लोग इसी माह में यात्रा करते हैं ।पहलगांव की तरफ से इस यात्रा पर जाने से मार्ग में चंदनबाड़ी, शेषनाग झील, पंचतरणी के दर्शन होते हैं ।

देश में सबसे ज़्यादा शराब पीने वाली महिलाओं वाले शीर्ष 7 राज्य, बीयर है पहली पसंद

नई दिल्ली दुनिया में शराब के शौकीनों की कमी नहीं है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। हालांकि, जब भी शराब का जिक्र आता है, तो इसे पुरुषों के शौक के रूप में बताया जाता है। अब परिस्थिति बदलती नजर आ रही है। महिलाएं भी जाम से जाम टकरा रही हैं। सांस्कृतिक और आदिवासी परंपराएं जैसी इसकी कई वजह हैं। एक सर्वे से पता चलता है कि भारत में कम से कम 7 राज्य ऐसे हैं, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं शराब का सेवन करती हैं।भारत में पारंपरिक रूप से शराब सेवन को पुरुषों से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के ताज़ा आंकड़े इस धारणा को बदलते दिखते हैं. 2019-2021 के बीच हुए इस सर्वे में कई राज्यों में महिलाओं द्वारा शराब सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति सामने आई है. कुछ राज्यों में यह प्रतिशत पुरुषों के लगभग बराबर या उससे अधिक हो गया है. रिपोर्ट में NFHS-5 यानी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि इस लिस्ट में सबसे पहला नाम पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश का है। ये आंकड़े साल 2019 से 2021 के बीच जुटाए गए थे। अरुणाचल प्रदेश आंकड़े बताते हैं कि अरुणाचल प्रदेश में 24.2 फीसदी महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। राज्य में मेहमानों को चावल से बनी स्थानीय बीयर पेश करना बेहद आम बात है। साथ ही शराब यहां सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं में अहम भूमिका निभाती है। सिक्किम लिस्ट में दूसरा स्थान सिक्किम को मिला है। यहां घर में बनी छांग जैसे पेय पदार्थ काफी मशहूर हैं। यहां करीब 16.2 प्रतिशत महिलाएं शराब पीती हैं। असम पूर्वोत्तर के ही एक और राज्य को इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर रखा गया है। असम में 7.3 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। कहा जाता है कि यहां व्हिस्की काफी लोकप्रिय है। तेलंगाना तेलंगाना में व्हिस्की और बीयर को पसंद करने वालों की संख्या ज्यादा मानी जाती है। आंकड़े बताते हैं कि यहां 6.7 फीसदी महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। झारखंड मुख्य रूप से आदिवासी इलाकों में झारखंड में 6.1 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। अंडमान एंड निकोबार आईलैंड्स हांडिया, टोडी और जंगली। ये सारे पेय अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में काफी लोकप्रिय हैं। यहां करीब 5 प्रतिशत महिलाएं शराब पीती हैं। छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से सटे छत्तीसगढ़ शराब पीने वाली महिलाओं की संख्या 4.9 प्रतिशत है। कहा जाता है कि यहां व्हिस्की और वोडका को ज्यादा पसंद किया जाता है।

एम्स भोपाल ने कैंसर की AI आधारित स्क्रीनिंग में दक्षता हासिल की, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस करेगा कैंसर का इलाज

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एम्स और राजस्थान में स्थित जोधपुर एम्स मिलकर कैंसर की पहचान और रोकथाम के लिए काम करने वाले हैं। एम्स भोपाल ने कैंसर की एआई आधारित स्क्रीनिंग में दक्षता हासिल की है। इसका इस्तेमाल जोधपुर एम्स में भी किया जाएगा। इससे कैंसर का निदान और अधिक सटीक और व्यापक रूप से सुलभ हो जाएगा।  यह तकनीक बिना लक्षण वाले मरीजों में भी प्रारंभिक चरण में कैंसर का पता लगाने में सक्षम है। एम्स निदेशक प्रो. अजय सिंह का कहना है कि, कैंसर की स्क्रीनिंग को तेज और अधिक सुलभ बनाकर, दूर दराज और पिछड़े क्षेत्रों में कई जानें बचा सकते हैं। विकसित करेंगे शीर्ष केंद्र दोनों एम्स मिलकर कैंसर देखभाल के लिए शीर्ष केंद्र विकसित करना चाहते हैं। यह केंद्र टियर 2 जैसे शहरों में कैंसर के इलाज में मददगार साबित होंगे। स्नोफ्लेक मॉडल दिया है नाम एम्स ने कैंसर के उपचार का जो मॉडल विकसित किया है। उसे स्नोफ्लेक मॉडल नाम दिया है। इसे आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (एबी-एचडब्ल्यूसी), राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड (एनसीजी) और हब-एंड-स्पोक मॉडल के साथ जोड़ा जाएगा।

सतना से उड़ा गिद्ध, राजस्थान होते हुए पाकिस्तान और अफगानिस्तान पहुंचा, अब किर्गिस्तान बता रहा लोकेशन

सतना  मध्य प्रदेश से एक अच्छी खबर आई है। एक घायल गिद्ध को इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया था। अब वह गिद्ध किर्गिस्तान पहुंच गया है। यह गिद्ध पहले सतना में घायल मिला था, जिसके बाद वन विभाग ने उसका इलाज कराया फिर उसे भोपाल के वन विहार में रखा गया। वहां से उसे छोड़ा गया था। छोड़ने से पहले लगाया गया था ट्रैकर गिद्ध के शरीर पर जीपीएस ट्रैकर लगाया गया था। इससे पता चला कि वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान होते हुए किर्गिस्तान पहुंच गया है। मध्य प्रदेश सरकार गिद्धों को बचाने के लिए कई काम कर रही है, जिससे इनकी संख्या भी बढ़ रही है। जनवरी में मिला था घायल जनवरी महीने में सतना जिले के एक खेत में घायल गिद्ध की सूचना वन विभाग को मिली थी। वन विभाग ने इलाज देने के बाद गिद्ध को बचा लिया। फिर उसे भोपाल के वन विहार के वल्चर कंजर्वेशन सेंटर में भेजा गया। यहां दो महीने तक उसका इलाज और प्रशिक्षण हुआ। 29 मार्च को उसे हलाली डैम क्षेत्र में खुले आकाश में उड़ने के लिए छोड़ दिया गया। गिद्ध ने बना दिया उड़ने का रिकॉर्ड इस गिद्ध ने उड़ते ही एक नया रिकॉर्ड बना दिया। यह विदिशा की पहाड़ियों से राजस्थान होते हुए पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ तक पहुंच गया। जीपीएस ट्रैकर से पता चला कि फिलहाल यह गिद्ध किर्गिस्तान में सुरक्षित है। वन्यजीव चिकित्सक डॉ. श्रवण मिश्रा ने बताया कि गिद्ध थोड़ा परेशान था और रास्ता भटक गया था। इलाज के बाद जीपीएस टैगिंग की गई थी। अब उसकी लोकेशन किर्गिस्तान में ट्रैक हो रही है। वल्चर स्टेट बन रहा मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश को अब ‘वल्चर स्टेट’ भी कहा जाने लगा है। यहां पन्ना टाइगर रिजर्व से लेकर गांधी सागर तक गिद्धों के लिए अच्छा वातावरण बनाया गया है। केरवा डैम में गिद्ध प्रजनन केंद्र बनाया गया है। यहां से अब तक सैकड़ों गिद्धों को खुले वातावरण में छोड़ा जा चुका है। हाल ही में भोपाल के हलाली जंगल क्षेत्र से छह गिद्धों को छोड़ा गया था। इन पर सौर ऊर्जा से चलने वाले जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं। इन गिद्धों का जन्म केरवा के गिद्ध संवर्धन और प्रजनन केंद्र में हुआ था। एमपी में अब कितने गिद्ध हैं 2019 में राज्य में 8397 गिद्ध थे। 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 10,845 हो गई है। पन्ना क्षेत्र में सबसे ज्यादा गिद्ध हैं। यहां 900 से ज्यादा गिद्ध पाए गए हैं। राज्य में गिद्धों की सात प्रजातियां देखी गई हैं। इनमें चार स्थानीय और तीन प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं। 16 सर्कल के 64 डिवीजन में जो गिनती हुई, उसके मुताबिक आज की तारीख में प्रदेश में 12,981 गिद्ध हैं। गिद्ध बचाने के लिए सावधानी जरूरी गिद्धों को बचाने के लिए सावधानी बरतना भी जरूरी है। जानवरों में इस्तेमाल होने वाली ‘डायक्लोफेनाक’ दवा गिद्धों के लिए खतरनाक है। इस दवा पर रोक लगा दी गई है लेकिन जहरीले भोजन का खतरा अभी भी बना हुआ है। पर्यावरणविद रशीद नूर ने चेतावनी दी है कि ‘गौशालाओं और खुले मैदानों में जहरीले इंजेक्शन लगे मृत जानवर अब भी मौजूद हैं। इनके सेवन से गिद्धों की मौत हो सकती है. इसलिए लगातार निगरानी रखना बहुत जरूरी है।’ धरती के सफाई कर्मी कहलाते हैं गिद्ध गिद्धों को धरती का सफाई कर्मी कहा जाता है। इनका संरक्षण करना बहुत जरूरी है। इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहता है। जब गिद्ध उड़ते हैं, तो उनके साथ जीवन का चक्र भी चलता रहता है। सतना से उठी एक छोटी सी उम्मीद आज किर्गिस्तान तक पहुंच गई है। पन्ना के जंगलों में, सतना के खेतों में, हलाली के आसमान में, हर जगह गिद्ध दिखाई दे रहे हैं।

अमेरिका में हर चौथा मुसलमान इस्लाम छोड़ चुका, अपना धर्म छोड़ने में ईसाई सबसे आगे

नई दिल्ली भारत के लिए धर्म परिवर्तन बहुत बड़े राजनीतिक विवाद का मसला रहा है। लेकिन, हकीकत ये है कि अपना धर्म छोड़कर दूसरा धर्म अपनाने या किसी भी धर्म को न मानने वाले लोगों के मामले में अमेरिका और यूरोप के देश ज्यादा आगे हैं। तथ्य यह भी है कि जब धर्म परिवर्तन की बात आती है या अपना धर्म छोड़ने की बात आती है तो इसमें ईसाई सबसे आगे हैं। उनके बाद बौद्ध हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन करने में दिलचस्पी दिखाई है। एक बड़ा तथ्य यह भी है कि ऐसा करने वालों में अधिकतर ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपना धर्म तो छोड़ दिया है, लेकिन वह किसी अन्य धर्म से जुड़े भी नहीं। इसके बाद वे लोग हैं, जिन्होंने न सिर्फ अपना धर्म बदला है, बल्कि नई आस्था भी कबूल की है। दक्षिण कोरिया में 50% ने छोड़ा अपना धर्म प्यू रिसर्च सेंटर दुनिया के 36 देशों में सर्वे के आधार पर इस नतीजे पर पहुंचा है कि अगर दक्षिण कोरिया जैसे देश की आधी आबादी अपना धर्म छोड़ चुकी है, वहीं हिंदू और मुसलमानों की यह विशेषता है कि वह जिस धर्म में पैदा होते हैं, उसे बिरले ही छोड़ते हैं। मतलब, उनकी आस्था अपने धर्म से आमतौर पर हमेशा जुड़ी रहती है। इस सर्वे के अनुसार अपना धर्म बदलने वाले लोगों में एक बड़ा ट्रेंड ये है कि इनमें ज्यादातर जनसंख्या उन लोगों की है, जो किसी दूसरे धर्म को अपनाने की जगह खुद को नास्तिक, अनिश्वरवादी (atheists),अज्ञेयवादी (agnostics) या ‘नथिंग इन पर्टिक्युलर’कहलाना ज्यादा पसंद करते हैं। दक्षिण कोरिया के बाद सबसे ज्यादा लोगों ने अपना धर्म स्पेन में बदला है। इस लिस्ट में कुल 15 देशों के नाम हैं, जिसमें भारत 14वें स्थान पर है, जहां मात्र 2% लोग आज उस धर्म का पालन नहीं करते, जिस आस्था में उनका जन्म हुआ था। अपना धर्म छोड़ने में ईसाई सबसे आगे हमने ऊपर बात की ईसाई धर्म मानने वालों की, जो सबसे ज्यादा धर्म बदल रहे हैं। यह इस तरह से देखा जा सकता है कि स्पेन में जहां करीब 100 में से 90 लोग ईसाई बनकर पैदा हुए, लेकिन अब उनमें से 54 ही इस धर्म को मानते हैं। यानी कुल 36% क्रिश्चियन अपना धर्म छोड़ चुके हैं। इसमें कुल 10 ईसाई बहुल देशों का जिक्र है, जिसमें दूसरे नंबर पर स्वीडन और आखिर में इटली का नाम है। इटली में भी 20 क्रिश्चियन आज उस धर्म को नहीं मानते, जिसमें उनका जन्म हुआ था। अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या 22% है। धर्म छोड़ने वालों में ईसाइयों के बाद बौद्ध हजारों साल पहले भारत में बौद्ध धर्म का रंग फीका पड़ने लगा था। दुनिया भर में ईसाइयों के बाद आज जिस धर्म के लोग अपने मूल धर्म से मुंह फेर रहे हैं तो वे बौद्ध हैं। मसलन, जापान में अगर 58 लोगों ने बौद्ध धर्म में जन्म लिया तो आज उनमें से मात्र 34 ही इस धर्म को मानते हैं। कुल मिलाकर 26% ने अपना मूल धर्म छोड़ दिया है। यह स्थिति दक्षिण कोरिया, सिंगापुर से लेकर श्रीलंका तक में दिखाई दे रही है। अमेरिका में 23% मुसलमानों ने छोड़ा इस्लाम जैसा कि पहले बताया गया कि इस सर्वे के अनुसार आज भी हिंदू और मुसलमानों में ऐसे लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है, जो अपने धर्म में ही बने रहना पसंद करते हैं, और अपना धर्म छोड़कर दूसरे को अपनाने वालों की संख्या इनमें सबसे कम है। जैसे बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया जैसे मुस्लिम बहुल देशों में एक भी मुसलमान ने इस्लाम नहीं छोड़ा। यही स्थिति ट्यूनिशिया की भी है। भारत में सिर्फ 1% मुसलमान अपना धर्म छोड़कर दूसरे धर्म में शामिल हुए हैं। भारत से ज्यादा तुर्की में मुसलमानों ने इस्लाम छोड़ा है। यहां इस्लाम में पैदा होने वाले 4% लोग अब खुद को मुस्लिम नहीं मानते और इनमें से 1% दूसरा धर्म अपना चुके हैं। सिंगापुर में यह संख्या 3% है, जो अब मुस्लिम नहीं हैं। सबसे ज्यादा मुसलमानों ने अमेरिका में इस्लाम छोड़ा है। यहां अगर 100 लोग इस्लाम में पैदा हुए थे तो अब उनमें से सिर्फ 77 ही इसका पालन करते हैं। यानी 23% ने इस्लाम छोड़ दिया है। 10% ने कोई अन्य धर्म अपना लिया है और 13% किसी भी धर्म का पालन नहीं करते। अमेरिका में 18% हिंदुओं ने हिंदुत्व छोड़ा मुसलमान ही नहीं अमेरिका में रहने वाले सबसे ज्यादा हिंदुओं ने भी अपना धर्म छोड़ा है। आज अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या 18% है, जो पैदा तो हिंदू धर्म में हुए थे, लेकिन अब इस धर्म को नहीं मानते। ऐसा करने वाले श्रीलंका में 11% हैं। श्रीलंका में जिन लोगों ने हिंदू धर्म छोड़ा है, उनमें से अधिकांश अब ईसाई बन चुके हैं। लेकिन, अमेरिका में हिंदुत्व छोड़ने वाले अधिकतर आज कोई धर्म नहीं मानते और बाकी ईसाई बन चुके हैं। दुनिया में 14.4% लोग किसी धर्म को नहीं मानते इस सर्वे का एक बड़ा नतीजा ये रहा है कि 2022 के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में अगर 31.6% ईसाई, 25.8% मुसलमान और 15.1% हिंदू थे तो ऐसे लोगों की तादाद 14.4% हो चुकी थी, जो किसी धर्म से नहीं जुड़े थे। इनके बाद 6.6% बौद्ध,5.4% फोक रिलिजनिस्ट, 0.8% अन्य और 0.2% यहूदी थे। एक और महत्वपूर्ण बात जो इस सर्वे से सामने आई है, वह यह कि धर्म से मुंह मोड़ने वालों में ज्यादातर युवा हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा तादाद पढ़े-लिखे और पुरुषों की है, जो उस धर्म से निकल रहे हैं, जिसमें वे पैदा हुए थे।

500 करोड़ की लागत से भोपाल में बनेगा नया कलेक्ट्रेट भवन, 90 घरों को नोटिस दिए

भोपाल  भोपाल शहर की प्रोफेसर कॉलोनी में नए कलेक्ट्रेट भवन के लिए 90 घरों को नोटिस दिए गए। बीते दिन इस पर कलेक्टर ने पूछताछ की, जिसमें बताया गया कि जिन्हें नोटिस दिए वे खाली है। सरकारी मकान है जो बेहद जर्जर है। यहां कोई नहीं रहता, लेकिन ये आवंटित है। इन पर नोटिस चस्पा किए गए हैं।  गौरतलब है कि जारी किए नोटिस पर सांसद आलोक शर्मा ने आपत्ति ली थी। टेंडर जारी होने से पहले ही मकान खाली कराने के नोटिस जारी होने पर रहवासियों में तो नाराजगी है ही, सांसद आलोक शर्मा ने कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से इन मकानों में रहने वालों को नोटिस जारी करने पर तीखी नाराजगी जताई है। मामले में प्रोफेसर कॉलोनी रहवासी संघ भी सक्रिय हुआ। संघ के त्रिभुवन मिश्रा ने बताया वे मामले में मंगलवार को हाउसिंग बोर्ड पहुंचकर उच्चाधिकारियों को ज्ञापन देंगे। सांसद शर्मा ने मामले में संभवत: बुधवार या गुरुवार को संबंधित प्रशासनिक अफसरों के साथ जनप्रतिनिधियों की बैठक तय करने की बात कही। यहां कुल 149 घर है। इसके अलावा अन्य भवन है। शिफ्ट होने है कई ऑफिस रीडें​सीफिकेशन प्रोजेक्ट लगभग 500 करोड़ रुपए का है। इससे यहां संभागायुक्त, आईजी देहात, कलेक्टर, चार एडीएम कार्यालय, नाजिर शाखा, खनिज शाखा, आबकारी विभाग, खाद्य विभाग, निर्वाचन के लिए अलग से कार्यालय, खाद्य विभाग व इनसे संबंधित कार्यालय, बाबुओं के बैठने की व्यवस्था, कांफ्रेंस हाल, रिकॉर्ड रूम, लोकसेवा गारंटी केंद्र, एसएलआर, अधिवक्ता कक्ष, महिला बाल विकास, आदिम जाति कल्याण विभाग, सामाजिक न्याय विभाग सहित अन्य दफ्तर शिफ्ट होने हैं। इसके साथ ही मौजूदा ओल्ड सेक्रेटरिएट की खाली होने वाली जमीन पर हाउसिंग और कमर्शियल प्रोजेक्ट लाने की योजना है। शिफ्टिंग के साथ वैकल्पिक व्यवस्था के लिए भी आदेश जारी हो गया है। सीबीआई व्यापम स्कैम b1, सीबीआई व्यापम स्कैम b8, 10 समेत साइन मंदिर और गीतांजलि होस्टल भी खाली होगा। सर्किट हाउस समेत क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं मेरेलिया नियंत्रक ऑफिस चंबल बेतवा विषय मुख्य अभियंता कार्यालय भी खाली होगा। 500 करोड़ की लागत से भोपाल का नया कलेक्ट्रेट कार्यालय भवन बनेगा। प्रोजेक्ट भी तालाब से 60 से 150 मीटर दूर बनाय जा रहा है। हाउसिंग बोर्ड के अधिवक्ता शांतनु सक्सेना ने बताया कि एनजीटी के जज एसके सिंह और एक्सपर्ट मैंबर अफरोज अहमद ने हाउसिंग बोर्ड के तर्कों को स्वीकार करते हुए सिटीजंस फोरम की याचिका को निरस्त कर दिया है। एनजीटी ने इसका ऑर्डर अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया है। सोलर एनर्जी से लेकर प्राकृतिक प्रकाश की व्यवस्था कलेक्टोरेट की इमारत को पूरी तरह से जनता से जुड़ा हुआ बनाया जाएगा। उनके लिए यहां अलग से कक्ष भी बनाया जाएंगे। जनसुनवाई कक्ष अत्याधुनिक होगा, वहीं अलग-अलग इमारतों में अधिकारियों की बैठक के लिए भव्य कक्ष बनाए जाएंगे। भविष्य को देखकर इस बिल्डिंग में सोलर एनर्जी से लेकर प्राकृतिक प्रकाश तक की व्यवस्था की गई है। प्रोेफेसर कालोनी के साथ सर्किट हाउस व मंत्री बंगलों को तोड़कर नई कलेक्टोरेट व कुछ अन्य दफ्तरों को यहां शिफ्ट किया जाना है। ये काम रीडेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट के तहत हो सकेगा। इसको लेकर पीएस रेवेन्यू के यहां तक बैठकें हो चुकी हैं। इसके बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। बदल जाएगी पुराने शहर की तस्वीर चार बंगला ऑफिस और मकान टूटकर कलेक्ट्रेट और अन्य ऑफिस ब्लॉक बनेंगे। पॉलिटेक्निक चौराहा .. .यहां अर्बन फॉरेस्ट और पोडियम पार्किंग बनाई जाएगी। किलोल पार्क मलेरिया ऑफिस को तोड़कर पार्क का विस्तार होगा और नई सड़कें बनेंगी। पुराने शहर में पहला बड़ा प्रोजेक्ट… यह प्रोजेक्ट सिर्फ नए कलेक्ट्रेट के निर्माण तक सीमित नहीं है। इसमें प्रोफेसर कॉलोनी, कलेक्ट्रेट, चूना भट्टी और मेन रोड नंबर 2 के 58.94 एकड़ जमीन का रिडेंसिफिकेशन होगा। 42.63 एकड़ में सरकारी दफ्तर और अन्य सुविधाएं बनेंगी, जबकि 16.31 एकड़ पर प्राइवेट रेसीडेंशियल और कमर्शियल डेवलपमेंट होगा। शहर के बड़े डेवलपमेंट की रूपरेखा ऐसी होगी     बी टाइप अपार्टमेंट : 20 टॉवर (जी+11)     हॉस्टल ब्लॉक : जी+3 और जी+4 के ब्लॉक     रवींद्र भवन के सामने शॉपिंग : 3000 वर्ग मीटर     अरबन फॉरेस्ट : 7.3 एकड़     स्टेट गेस्ट हाउस : 68 कमरे और 5 सुइट्स बनेंगे। चूना भट्‌टी पर जी एफ सरकारी फ्लैट बनेंगे चूना भट्टी : जी+6 के 5 ब्लॉक। इसमें 3 जी टाइप (72 फ्लैट), 2 एफ टाइप (48 फ्लैट) यानी कुल-120 फ्लैट बनेंगे। कुल जमीन 15,000 वर्ग मीटर। ओल्ड सेक्रेटरिएट : यहां 2.24 हेक्टेयर पर ई टाइप जी+6 के 3 ब्लॉक, 72 फ्लैट व एफ। कलेक्ट्रेट के लिए 9 बार तलाशी जगह… 1972 से अब तक कलेक्ट्रेट के लिए 9 बार अलग-अलग जगहों पर विचार हुआ, लेकिन हर बार कोई न कोई अड़चन आ गई। अब जाकर 2024 में इस नई साइट को मंजूरी मिली है।

सिंहस्थ में रास्ते में खराब हुए वाहनों को हटाने के लिए 5 बड़ी क्रेन लगेंगी, पूरे सांवेर रोड को सीसीटीवी सर्विलेंस में लाएंगे

उज्जैन  एमपी में सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन की तैयारियां चल रही हैं। इंदौर शहर में अलग-अलग जगह होल्डिंग जोन बनाने का प्रस्ताव है, ताकि उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर बाहरी लोगों को यहां रोका जाए। जमीन हासिल करने के बाद सभी विभाग यहां हर तरह की सुविधा का इंतजाम करेंगे। पुलिस ने बल व अन्य संसाधनों के साथ हाई-वे चौकियां, सहायता केंद्र व इंट्रीग्रेटेड कमांड सेंटर स्थापित करने की अनुमति मांगी है। एक-दो दिन तक रोकने की रहेगी व्यवस्था होल्डिंग जोन बनाने के लिए कुछ जगह चिन्हित की है। यहां 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोकने के लिए विश्राम स्थल, कुर्सियां, सुविधागृह, पंखे, कूलर, पेयजल आदि की व्यवस्था की जाएगी। उज्जैन में भीड़ अधिक होने पर बाहरी लोगों को यहां ठहराया जाएगा। एक-दो दिन तक रोकने की व्यवस्था रहेगी। एडिशनल कमिश्नर मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक, लवकुश चौराहे पर लेफ्ट साइड की खाली जमीन, रिंग रोड पर रोबोट चौराहे के पास आइडीए की जमीन, मांगलिया व तेजाजी नगर में भी होल्डिंग एरिया के लिए जमीन मांगी है। उज्जैन में हुई बैठकों में कई प्रस्ताव मंजूर हो चुके हैं। इतने इंतजाम की दरकार -सुपर कॉरिडोर, लवकुश चौराहे के पास करीब 7 एकड़ जमीन इंट्रीगेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर के लिए रहेगी, ताकि वहां से नजर रखी जा सके। पुलिस, प्रशासन व निगम के अफसर यहां से सभी गतिविधियां संचालित करेंगे। -पूरे सांवेर रोड को सीसीटीवी सर्विलेंस में लाएंगे। -महालक्ष्मी नगर, सुपर कॉरिडोर व धार रोड को थाने के रूप में मंजूर करने की मांग है। -7 हाई-वे चौकियां चाहिए। देवगुराड़िया, नेमावर रोड, खंडवा रोड पर तेजाजी नगर, एबी रोड पर राऊ के पास व अन्य जगह लगेगी। -रिंग रोड, बायपास पर ट्रैफिक सहायता केंद्र स्थापना की अनुमति मांगी है। -करीब 2 हजार पुलिसकर्मियों का अतिरिक्त बल दो महीने पहले चाहिए। साथ ही 20 जीप, 20 बसें व ट्रक फोर्स व सामान के परिवहन के लिए चाहिए। -रास्ते में खराब हुए वाहनों को हटाने के लिए 5 बड़ी क्रेन लगेंगी। शिप्रा के जल से उगाए 50 हजार बांस उज्जैन में सिंहस्थ 2028 में इस बार बहुत कुछ अलग देखने को मिलेगा. इस बार धर्मध्वजाओं को लहराने के लिए पूरे उज्जैन में 50 हजार से ज्यादा बांस उगाए गए हैं, शिप्रा नदी के किनारे 10.72 हेक्टेयर में पूरा जंगल उगाया गया है, यहां शिप्रा नदी के पानी से बांस उगाए हैं, जहां 30 फीट ऊंचे बांस लगाए गए हैं, यह बांस उज्जैन वन मंडल की तरफ से निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इन बांसों से सिंहस्थ में आने वाले सभी अखाड़े और साधु संतों को धर्मध्वजा लहराने के लिए दिया जाएगा. इन बांसों की बारीकी से वन विभाग की तरफ से देखरेख भी की जा रही है. उज्जैन में 7 साल पहले लगे थे यह बांस बताया जा रहा है कि उज्जैन में शिप्रा नदीं के किनारे यह बांस 7 साल पहले ही लगा दिए गए थे. जिन्हें 30 फीट की ऊंचाई तक जाने देना है, हालांकि अभी इनकी ऊंचाई 20 से 25 फीट ही हुई है. अभी अगले दो साल और यह बांस लगे रहेंगे, जिससे इनकी लंबाई 30 फीट से ज्यादा हो जाएगी. वन विभाग की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक सिंहस्थ महाकुंभ शुरू होने से तीन महीने पहले ही इन बांसों की कटाई शुरू हो जाएगी और उन्हें व्यवस्थित कर वन विभाग की देखरेख में रखा जाएगा, जबकि बाद में कलेक्टर और मेला अधिकारी को यह बांस सौंप दिए जाएंगे, जहां सिंहस्थ मेला में 13 अखाड़ों समेत जितने भी साधु-संत आएंगे उन्हें यह बांस धर्म ध्वजा लहराने और अपने-अपने शिविरों में झंडा लगाने के लिए दिए जाएंगे. वन विभाग ने भैरवगढ़ मार्ग पर शिप्रा नदी के पास फिलहाल इन बांसों की पूरी देखरेख की जा रही है. बांस का धार्मिक महत्व बता दें कि बांस का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है, हिंदू धर्म में बांस पर ही ध्वजा लगाई जाती है. ऐसे में सिंहस्थ के दौरान धर्मध्वजाएं इन्हीं बांसों पर लगेगी, क्योंकि यह आस्था का भाव माना जाता है. 10.72 हेक्टेयर में बांस का यह पूरा जंगल फैला है, बताया जा रहा है कि यह बांस बेंबोसा बाल्कोअ प्रजाति, जिसका बीज 2018 में रीवा की फ्लोरीकल्चर लेब से लाया गया था, जहां उज्जैन में कुल 5600 बांस के पौधों का प्लाटेंशन किया गया था, बताया जा रहा है कि यहां वन मंडल की तरफ से धार्मिक महत्व का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है और बांस के सभी झुंडों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. क्योंकि एक बांस के पेड़ से 20 से 25 बांस निकलते हैं, लेकिन यह सब बिना कटे फटे होने चाहिए, इसलिए यहां पूरी देखरेख की जा रही है. क्योंकि 50 हजार से ज्यादा बांसों में केवल शिप्रा नदीं का ही जल सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया गया है. 

डेयरी क्षेत्र में अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है मध्यप्रदेश, सहकारिता से सरल हुई सशक्तिकरण की राह

भोपाल विशेष लेख संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम है “सहकारिता एक बेहतर दुनिया का निर्माण करती है”। स्व से सब का भाव हो जाना ही सहकार है। भारतीय संस्कृति स्वयं से ऊपर उठकर हम की भावना रखना सिखाती है और इसी भावना से जन्म हुआ है सहकार का। सनातन संस्कृति में जब हम प्रार्थना करते हैं तो सर्वे भवन्तु सुखिनः की कामना करते हैं। सबके सुख और मंगल की यही कामना सहकारिता का मूल भाव हैI हम लाभ से ज्यादा सेवा को महत्त्व देते हैं। एक से ज्यादा समूह को महत्त्व देते हैं। प्रतिस्पर्धा से ज्यादा परस्पर सहयोग को महत्व देते हैं और यही सहकारिता है। भारत का सहकारिता आंदोलन सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में गहराई से निहित है। यह आंदोलन समावेशी विकास, सामुदायिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में विकसित हुआ है। सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और इसकी नवीनतम पहलों के माध्यम से सरकार ने एक सहकारिता-संचालित मॉडल को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, जो देश के हर कोने तक पहुंचेगा और समाज की मुख्य धारा से अलग पड़े समुदायों के लिए स्थायी आजीविका और वित्तीय समावेशन की सुविधा प्रदान करेगा। सहकारी समितियों को पुनर्जीवित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस क्षेत्र को मजबूत और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक नीतिगत ढांचा, कानूनी सुधार और रणनीतिक पहल शुरू की। सरकार ने सहकारी समितियों के लिए ‘व्यापार करने में आसानी’, डिजिटलीकरण के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित करने और वंचित ग्रामीण समुदायों के लिए समावेशिता को बढ़ावा देने की अपनी पहल पर काफी जोर दिया है। केन्द्रीय मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत का सहकारिता आंदोलन एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। अपनी दूरदर्शी सोच को आधार बनाकर उन्होंने सहकारिता के लिए नई विचारधारा को जन्म दिया है। उनके नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय ने भारतीय सहकारी आंदोलन में उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) का विस्तार, पैक्स के लिए बेहतर प्रशासन और व्यापक समावेशिता, पैक्स को कम्प्यूटरीकृत करने एवं पैक्स को नाबार्ड से जोड़ने का काम किया है । नई श्वेत क्रांति की ओर अग्रसर मध्यप्रदेश प्रदेश में सहकार से समृद्धि की पहल के तहत केन्द्रीय मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और स्टेट डेयरी को-ऑपरेटिव फेडरेशन तथा फेडरेशन से संबद्ध दुग्ध संघों के बीच कोलेबोरेशन एग्रीमेंट हुआ। इस कोलेबोरेशन एग्रीमेंट के माध्यम से सहकारी डेयरी नेटवर्क को सशक्त बनाने का लक्ष्य है, जिससे दुग्ध उत्पादकों की आय में वृद्धि हो सके और सांची ब्रांड का उत्थान और विस्तार किया जा सके। यह नई श्वेत क्रांति की ओर प्रदेश का महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इसका लाभ दुग्ध उत्पादकों और दुग्ध उपभोक्ताओं दोनों को मिलेगा। दुग्ध उत्पादक राज्यों में मध्यप्रदेश टॉप-थ्री में है, हमारे यहां देश का करीब 9 प्रतिशत दुग्ध-उत्पादन होता है। प्रदेश में रोजाना करीब 551 लाख किलोग्राम दूध का उत्पादन होता है, जिसमें से मध्यप्रदेश स्टेट को-आपरेटिव डेयरी फेडरेशन और इससे जुड़े संघ करीब 10 लाख किलोग्राम दूध जमा करते हैं।  डेयरी क्षेत्र में अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश देश का फ़ूड बास्केट तो है ही, हममें डेयरी कैपिटल बनने की क्षमता भी है। देश का डेयरी कैपिटल बनने के लिए हमारे पास पर्याप्त संसाधन हैं। प्रदेश में सहकारी डेयरी नेटवर्क को हाइटेक बनाने के लिए एक डेयरी डेवलपमेंट प्लान तैयार करने की योजना है, जिसमें लगभग 1450 करोड़ रुपए का निवेश होगा। प्रदेश में औसत दुग्ध संकलन को दोगुना किया जाएगा, दुग्ध संकलन को 10 लाख किलो से बढ़ाकर 20 लाख किलो प्रतिदिन करने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। प्रदेश में दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या 6 हजार से बढ़ाकर 9 हजार की जाएगी। प्रदेश भर के 18 हजार गांवों के दुग्ध-उत्पादन से जुड़े किसान भाइयों को सहकारी डेयरी नेटवर्क से जोड़ेंगे। ग्राम स्तर पर दुग्ध शीतलीकरण की क्षमता विकसित करेंगे, औसत पैकेट दुग्ध विक्रय 7 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 15 लाख लीटर प्रतिदिन करेंगे। मिल्क प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए नए हाइटेक संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे दुग्ध संकलन और दुग्ध विक्रय में वृद्धि हो सके। सभी दुग्ध संघों का व्यवसाय 1944 करोड़ से बढ़ाकर 3500 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष किया जाएगा। एनडीडीबी द्वारा एमपीसीडीएफ एवं दुग्ध‍संघों के प्रबंधन, संचालन, तकनीकी सहयोग, नवीन प्रसंस्कररण एवं अन्य अधोसंरचनाएं विकसित करेंगे। एनडीडीबी द्वारा दुग्ध सहकारी समितियों के सभी सदस्यों, सचिवों, प्रबंधन समिति के सदस्यों और दुग्ध संघों के कर्मचारियों को स्वच्छ और गुणवत्तायुक्त दुग्ध उत्पादन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सहकारिता से सरल हुई सशक्तिकरण की राह प्रदेश में डेयरी गतिविधियों के लिए त्रि-स्तरीय सहकारी संस्थाओं का गठन कर, ग्रामीण दुग्ध सहकारी समितियां, सहकारी दुग्ध संघ और राज्य स्तर पर एमपीसीडीएफ (मध्यप्रदेश स्टेट कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड) की स्थापना की गई। ये दुग्ध सहकारी समितियां किसानों से दूध संग्रह, गोवंश के कृत्रिम गर्भाधान, संतुलित पशु आहार, तकनीकी पशु प्रबंधन, उन्नत चारा बीज, पशु उपचार और टीकाकरण जैसी सुविधाएं देने की जिम्मेदारी निभा रही हैं। दुग्ध उत्पादक किसानों के साथ मध्यप्रदेश सरकार डेयरी क्षेत्र विकसित करने के संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रदेश में श्वेतक्रांति मिशन के अंतर्गत 2500 करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य है। प्रदेश में निराश्रित गौवंश की समस्या के निराकरण के लिए स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की नीति : 2025 की स्वीकृति दी है। गौ-शालाओं को पशु चारे और आहार के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि को भी 20 रुपये प्रति गौवंश प्रति दिवस से बढ़ाकर 40 रूपये प्रति गौवंश प्रति दिवस करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना अब डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना के नाम से जानी जाएगी। डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना अंतर्गत 25 दुधारू गाय अथवा भैंस की इकाई स्थापित करने का प्रावधान किया गया। प्रदेश की गौ शालाओं को हाइटेक बनाया जा रहा है। ग्वालियर स्थित आदर्श गौ-शाला में देश के पहले 100 टन क्षमता वाले सीएनजी प्लांट की स्थापना की गई है। भोपाल के बरखेड़ी-डोब में 10 हजार गौ-वंश क्षमता वाली हाइटेक गौ-शाला बनाई जा रही है। प्रदेश के सवा 2 लाख किसानों एवं दुग्ध उत्पादकों को सहकारिता के माध्यम से जोड़ा गया है। सरकार द्वारा दुग्ध सहकारी … Read more

केबल स्टे ब्रिज के साथ ही भोपाल को विकास की रफ्तार देगा ये नया प्रोजेक्ट, मनीषा मार्केट से चूनाभट्टी चौराहा, इतना आ रहा खर्च

भोपाल भोपाल के मनीषा मार्केट चौराहा से बंसल हॉस्पिटल के पास से काली मंदिर तक एक और केबल स्टेब्रिज बनेगा। 15 मीटर चौड़े इस ब्रिज को बनाने में 60 करोड़ की लागत आएगी। यह ब्रिज मनीषा मार्केट से चूना भट्टी को जोड़ेगा। हालांकि, इसके लिए पीडब्ल्यूडी को केंद्रीय वेटलैंड अथॉरिटी से एनओसी लेनी होगी। मंजूरी मिलते ही काम शुरू होगा। डीपीआर बनकर तैयार है। अभी बड़ा तालाब पर एक ब्रिज शाहपुरा तालाब पर यह शहर का दूसरा केबल स्टेब्रिज होगा। ये मनीषा मार्केट चौराहा से बंसल हॉस्पिटल के पास से चूनाभट्टी में काली मंदिर पर उतरेगा। इसके बनने से मनीषा से सीधे चूनाभट्टी या कोलार की ओर पहुंचा जा सकेगा। यह करीब 1.20 किमी लंबा होगा। यह शाहपुरा से लेकर मनीषा मार्केट, अरेरा हिल्स का क्षेत्र चूनाभट्टी, कोलार, माता मंदिर, पीएंडटी, नेहरू नगर की ओर से सीधा जुड़ेगा। अभी बड़ा तालाब पर केबल स्टेब्रिज है। छोटा तालाब पर भी आर्च ब्रिज है। अब शाहपुरा पर भी ऐसा ही ब्रिज होगा। केबल स्टे ब्रिज का काम जल्द शुरू करेंगे। कुछ जरूरी अनुमतियां व एनओसी की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।- संजय मस्के, सीई, पीडब्ल्यूडी 30 करोड़ की सीसी रोड, 5 करोड़ का पैविंग ब्लॉक लोक निर्माण विभाग देवी अहिल्या तिराहा से सीआइ तिराहा तक 30 करोड़ रुपए की लागत से सात किमी लंबी चार लेन सीसी रोड बना रहा है। अब इसके किनारे पैविंग ब्लॉक लगाने के लिए पांच करोड़ का अलग से ठेका दिया है। जबकि सीसी से ही किनारे पर रोड की पैकिंग होती है। मौजूदा ठेकेदार को पूरी चार लेन रोड, डक्ट के साथ ही रोड किनारे पर पैकिंग का काम दिया गया था। शाहपुरा बाबानगर से सीआइ तिराहा कोलार रोड तक काम 90 फीसदी हो चुका है। किनारे पर करीब दो-दो मीटर की पैकिंग की जगह बची, लेकिन इस कार्य को अन्य ठेकेदार को दिया गया है। 1.20 किलोमीटर होगी ब्रिज की लंबाई शाहपुर तालाब पर बनने वाला यह शहर का दूसरा केबल स्टे ब्रिज होगा. ये मनीषा मार्केट चौराहा से बंसल हॉस्पिटल के पास से चूनाभट्टी में काली मंदिर पर उतरेगा. इस ब्रिज का निर्माण होने से मनीषा से सीधे चूनाभट्टी या कोलार की ओर पहुंचा जा सकेगा.  यह करीब 1.20 किमी लंबा होगा. यह शाहपुरा से लेकर मनीषा मार्केट, अरेरा हिल्स का क्षेत्र चूनाभट्टी, कोलार, माता मंदिर, पीएंडटी, नेहरू नगर की ओर से सीधा जुड़ेगा. वर्तमान में बड़े तालाब पर केबल स्टेब्रिज है. छोटा तालाब पर भी आर्च ब्रिज है. अब शाहपुरा पर भी ऐसा ही ब्रिज होगा. 5 करोड़ का पैविंग ब्लॉक लोक निर्माण विभाग देवी अहिल्या तिराहा से सीआइ तिराहा तक 30 करोड़ रुपए की लागत से सात किमी लंबी चार लेन सीसी रोड बनाया जा रहा है. अब इसके किनारे पैविंग ब्लॉक लगाने के लिए पांच करोड़ का अलग से ठेका दिया है. जबकि सीसी से ही किनारे पर रोड की पैकिंग होती है. मौजूदा ठेकेदार को पूरी चार लेन रोड, डक्ट के साथ ही रोड किनारे पर पैकिंग का काम दिया गया था. शाहपुरा बाबानगर से सीआइ तिराहा कोलार रोड तक काम 90 प्रतिशत हो चुका है. किनारे पर करीब दो-दो मीटर की पैकिंग की जगह बची, लेकिन इस कार्य को अन्य ठेकेदार को दिया गया है. 60 करोड़ का आएगा खर्च लोक निर्माण अधिकारियों ने शहर के विकास के लिए इस प्रोजेक्ट के महत्व पर जोर दिया है। कुछ स्थानीय निवासियों को इससे अपने रूटीन पर पॉजीटिव इफेक्ट पड़ने की उम्मीद है। शाहपुरा झील को चूनाभट्टी से जोड़ने वाले पुल पर करीब 60 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने कहा, यह मनीषा मार्केट को जोड़ेगा, सिंचाई विभाग की भूमि के किनारे से होकर, एक निजी अस्पताल के पीछे से गुजरेगा और चूनाभट्टी में चौराहे से जुड़ेगा। भोपाल में दो केबल पुल भोपाल में हाल ही में दो केबल वाले पुलों का निर्माण देखा गया है। एक ऊपरी झील तक फैला है, और दूसरा लोअर लेक पर ट्रैफिक को जोड़ता है। चूनाभट्टी को मनीषा मार्केट से जोड़ने वाली सड़क पर अक्सर ट्रैफिक जाम रहता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, अधिकांश अव्यवस्था सड़क किनारे पार्किंग के कारण होती है। ट्रैफिक संबंधी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद इसका उद्देश्य ट्रैफिक में सुधार करना और शहरी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को बढ़ाना है। मॉडर्न पुल डिजाइन को लागू करने से, शहरों को ट्रैफिक संबंधी समस्याओं में काफी हद तक कमी आने की उम्मीद है। केबल स्टे ब्रिज कॉन्सेप्ट में ब्रिज डेक का सपोर्ट करने के लिए केबलों का उपयोग करना होता है, जिससे इसका ड्यूरेशन बढ़ जाता है। यह डिज़ाइन शहर में विशेष रूप से प्रभावी है जहां स्थान सीमित है और पारंपरिक पुल मॉडल संभव नहीं हो सकते हैं। इसके अलावा, केबल स्टे ब्रिज से शहर का सौंदर्य भी बढ़ता है। योजनाकार मान रहे ट्रैफिक सुगम होगा शहर के योजनाकारों का मानना है कि केबल स्टे ब्रिज को ट्रैफिक सिस्टम में जोड़ने से आवागमन सुगम हो सकता है और भीड़भाड़ कम हो सकती है। सपोर्ट पियर्स की संख्या में कमी का मतलब है मौजूदा सड़कों पर कम रुकावट और लंबे समय के लिए कम मेंटिनेंस कॉस्ट। अपर लेक केबल स्टे ब्रिज ट्रैफिक को सुगम बनाने में प्रभावी रहा है। पुल के डिज़ाइन और निर्माण ने ट्रैफिक को सुविधाजनक बनाया है। गिन्नोरी ब्रिज पर हो रहीं समस्याएं दूसरी ओर गिन्नोरी केबल स्टे ब्रिज के ट्रैफिक डिजाइन में गलतियां हैं। इससे समस्याएं पैदा हो रही हैं। पॉलिटेक्निक से आने वाले वाहनों को पुल पर लेन बदलने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पुल एक तरफ़ा मार्ग बन गया है, जो अतिक्रमण से घिरा हुआ है।

धूप की कमी आपकी सेक्स लाइफ बिगाड़ रही है? जानिए चौंकाने वाली स्टडी

लंदन  क्या आपको इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है? अगर हां, तो समय आ चुका है कि आप एक बार अपना विटामिन डी लेवल चेक करवा लें. शरीर में विटामिन डी की कमी होने पर थकान, हड्डियों में दर्द, मसल्स में कमजोरी और मूड स्विंग्स जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. लेकिन हाल ही में आई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि शरीर में इस पोषक तत्व की कमी से आपकी सेक्सुअल लाइफ पर भी काफी बुरा असर पड़ सकता है. ब्रिटिश जर्नल ऑफ फार्माकोलॉजी में छपी एक स्टडी में  विटामिन डी की कमी और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के बीच में लिंक का खुलासा किया है. स्टडी में सुझाव दिया गया है कि विटामिन डी की कमी से सिर्फ हड्डियों की सेहत और इम्यून हेल्थ पर बुरा असर नहीं पड़ता बल्कि इससे पुरुषों की सेक्सुअल परफॉर्मेंस भी प्रभावित होती है. क्या होता है इरेक्टाइल डिस्फंक्शन? इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को नपुंसकता भी कहा जाता है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुषों को यौन संबंध के दौरान उत्तेजना नहीं होती या फिर उसे बनाए रखने में परेशानी होती है. कभी कभार इस समस्या का सामना सभी पुरुषों को करना पड़ सकता है. लेकिन अगर आपको हर बार इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो जरूरी है कि आप इसकी जांच करवाएं. ब्लड फ्लो के रुकने, नर्व डैमेज, साइकोलॉजिकल स्ट्रेस या सेहत से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी के कारण आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है. जीवन की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे से कहीं ज्यादा, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को खराब हार्ट हेल्थ के शुरुआती संकेत के रूप में पहचाना जाता है, जिसमें दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा भी शामिल है. अब विटामिन डी की कमी डायबिटीज, मोटापा और मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसी कंडिशन के साथ-साथ एक अन्य खतरे के रूप में उभर रही है. क्या कहती है स्टडी ब्रिटिश जर्नल ऑफ फार्माकोलॉजी में पब्लिश इस  स्टडी में शोधकर्ताओं ने पुरुषों और चूहों के प्राइवेट पार्ट्स के टिश्यूज की जांच की. उन्होंने पाया कि विटामिन डी की कमी से इरेक्शन में समस्या आती है. चूहों में देखा गया कि विटामिन डी की कमी के कारण लिंग के ऊतकों (Tissues) में 40% तक अधिक कोलेजन जमा हो गया, जिससे फाइब्रोसिस यानी ऊतक का कठोर होने की समस्या बढ़ी. मनुष्यों में भी यह पाया गया कि जिन लोगों में विटामिन डी कम था, उनके प्राइवेट पार्ट के ब्लड वेसेल्स में प्रोक्रेस्टिनेशन कम थी, और उनका शरीर नर्व स्टिमुलेटर पर सही रिएक्शन नहीं दे पा रहा था. इसके अलावा, विटामिन डी की कमी से ईडी के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाइयां भी कम असरदार हो जाती हैं. भारत में विटामिन डी की कमी भारत में विटामिन डी की कमी एक आम समस्या बन गई है. ICRIER के एक एनालिसिस के मुताबिक, भारत में हर पांच में से एक व्यक्ति विटामिन डी की गंभीर कमी से पीड़ित है. खासकर पूर्वी भारत में विटामिन डी की कमी का स्तर 38.81% तक है. भारत में विटामिन डी का सही डोज खुराक 400-600 IU है. ज्यादा उम्रदराज को 800 IU तक की जररूत हो सकती है. कैसे बढ़ाएं विटामिन D का लेवल सुबह की धूप रोज 15-20 मिनट तक लें. विटामिन D से भरपूर डाइट जैसे अंडा, मछली, दूध, मशरूम खाएं. डॉक्टर से सलाह लेकर सप्लीमेंट लें. कभी-कभी डाइट से पूरा नहीं हो पाता, तो डॉक्टर विटामिन D की गोलियां या सिरप सजेस्ट कर सकते हैं.   स्टडी में क्या बताया गया है? स्टडी के लिए, शोधकर्ताओं ने इंसानों और लेबोरेर्टीरी में रखे गए जानवरों दोनों के प्राइवेट पार्ट के टिशू का विश्लेषण किया और पाया कि विटामिन डी की कमी से उत्तेजना (इरेक्शन) में कमी आती है. विटामिन डी की कमी वाले चूहों में, इरेक्शन टिशू में 40% तक ज्यादा कोलेजन जमा हुआ था जो फाइब्रोसिस का संकेत है, जो टिशू को कठोर बनाता है और इरेक्शन को ट्रिगर करने वाले संकेतों को कम प्रभावी बनाता है. इंसानों में, शोधकर्ताओं ने अलग-अलग विटामिन डी लेवल वाले लोगों पर शोध किया. शोध में जिन पुरुषों के शरीर में विटामिन डी के लेवल को कम पाया गया उन पुरुषों में प्राइवेट पार्ट तक ब्लड का फ्लो काफी कम पाया गया. हालांकि यह रिसर्च काफी कम लोगों पर की गई थी इसलिए स्टडी के परिणाम कितने सही इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकती है. इसे लेवल और भी कई रिसर्च होने अभी जरूरी हैं.  

29 करोड़ के वाहन खरीदी में गड़बड़झाला होने की चर्चा, बिना वाहन प्राप्त किए ही कर दिया पूरा भुगतान

There is talk of irregularities in the purchase of vehicles worth Rs 29 crores, full payment was made without receiving the vehicles भोपाल । 29 करोड़ के वाहनों की खरीदी में नियम-प्रक्रिया और पारदर्शिता का पालन नहीं होने पर गड़बड़झाला की आशंका को बल मिल रहा है। वह भी तब जब वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव गिनती बिरादरी में ईमानदार अफसर की है। अब वाहनों की खरीदी पर शिकवे-शिकायतों का दौर शुरू हो गया है और मांग की जा रही है कि एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर जांच कराई जाए। भंडार क्रय नियम की अनदेखी कर वाहन प्राप्त किए बिना ही पूरा भुगतान कर दिया।वन विभाग ने 29 करोड़ में गाडियों की खरीदी की गई। जिसमें लगभग 108 बुलोरों नियों, 27 बुलेरों, 65 स्कार्पियों, 4 सियाज, 10 ट्रक की खरीदी की गई। खरीदी की नियत पर शंका इसलिए पैदा हो रही है, क्योंकि खरीदी Gem से हुई है, परन्तु बिना निविदा बुलाए। यदि नियत ठीक थी तो निविदा क्यों नहीं आमंत्रित किया गया। बिना संचालक के आए बैठक संपन्न कर ली गई। इसके पहले लघु वनोपज संघ में एमडी रहे सेवानिवृत वन बल प्रमुख जव्वाद हसन और पुष्कर सिंह के कार्यकाल में क्रमशः 145 करोड़ और 200 करोड़ की कीमत के जूते-चप्पल, छाते और पानी बोतल की खरीदी हुई पर भंडार क्रय नियमों और गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा गया। यही वजह रही कि खरीदी पर कभी सवाल नहीं उठे। जबकि पूर्व विभाग प्रमुख स्वर्गीय आरडी शर्मा के कार्यकाल में वायरलेस की खरीदी हुई जिस पर खूब बवाल मचा। विधानसभा में प्रश्नों की झड़ी लग गई। वैसे तो स्वर्गीय शर्मा की ईमानदारी पर शक नहीं किया जा रहा था किंतु उनके स्टेनों की कलाकारी से विवाद शुरू हुआ। यहां भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। न तो एक्सपर्ट कमेटी की राय ली गई और न ही शाखा प्रमुखों से उनकी रिटायरमेंट पूछी गई। शाखा प्रमुखों के लिए खरीदी गए वहां में जो एसेसरी चाहिए थी वह भी नहीं उपलब्ध कराए गए। मोटर साइकिल, कार जिप्सी के बदले में luxury वाहन खरीदेवन विभाग के विजिलेंस शाखा में आईटीआई कार्यकर्ता पुनीत टंडन ने शिकायत दर्ज कराई है कि वाहनों की खरीदी में गड़बड़ी की गई है। अपनी शिकायत में ठंडन ने कहा है कि अपलिखित वाहनों के बदले क्रय की स्वीकृति मिली हैं। इसमें 50 वाहनों 15 वर्ष पुराने हैं तथा 60 अपलिखित होकर नीलाम हुऐ हैं, तो स्वीकृति 110 वाहन की मिलनी थी। यह भी ज्ञात हुआ है कि चालू गाडियों को नीलाम बताकर अधिक गाडियों की खरीदी की है। शिकायत के प्रमुख बिन्दू

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