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औरिया ग्रुप के अधिकारी अक्षय कुलकर्णी ने मुख्यमंत्री साय से मुलाकात कर हॉस्पिटैलिटी परियोजनाओं में जताई निवेश की इच्छा

रायपुर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज मुंबई में औरिया ग्रुप के मुख्य व्यवसाय अधिकारी अक्षय कुलकर्णी ने मुलाकात कर राज्य में पांच सितारा और सात सितारा स्तर की हॉस्पिटैलिटी परियोजनाओं में निवेश की इच्छा जताई। श्री कुलकर्णी ने बताया कि औरिया ग्रुप हिमाचल प्रदेश में एक प्रतिष्ठित प्रीमियम होटल का संचालन कर रहा है और अब छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता को वैश्विक लक्जरी हॉस्पिटैलिटी से जोड़ना चाहता है। उन्होंने कहा कि समूह राज्य में लक्जरी पर्यटन और परिवहन के क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश की योजना पर विचार कर रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने उन्हें छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति की जानकारी दी, जिसमें पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार निवेशकों को नीति समर्थन, भूमि की उपलब्धता, एकल खिड़की स्वीकृति, और अनुकूल वातावरण जैसी सुविधाएं दे रही है।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने रचा नया इतिहास, बिक्री में 447% और उत्पादन में 347% का रिकॉर्ड उछाल

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के मार्गदर्शन में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2024-25 में खादी और ग्रामोद्योग का कुल कारोबार ₹1,70,551.37 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक कारोबार है। केवीआईसी के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने नई दिल्ली स्थित राजघाट कार्यालय में वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए यह जानकारी दी। उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि केवीआईसी के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने बताया कि वर्ष 2013-14 की तुलना में बीते 11 वर्षों में खादी और ग्रामोद्योग के उत्पादन में 347% और बिक्री में 447% की वृद्धि हुई है। उत्पादन ₹26,109.07 करोड़ से बढ़कर ₹1,16,599.75 करोड़ तक पहुंचा, जबकि बिक्री ₹31,154.19 करोड़ से बढ़कर ₹1,70,551.37 करोड़ हो गई। इस प्रगति के साथ खादी और ग्रामोद्योग ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में एक नया अध्याय रचा है। रोजगार सृजन में 49.23% की वृद्धि केवीआईसी ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में भी उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। वर्ष 2013-14 में जहां संचयी रोजगार 1.30 करोड़ था, वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा 1.94 करोड़ तक पहुंच गया, जो कि 49.23% की वृद्धि को दर्शाता है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक अहम कदम है। खादी वस्त्र उत्पादन और बिक्री में ऐतिहासिक उछाल खादी वस्त्रों के उत्पादन और बिक्री में भी शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। उत्पादन ₹811.08 करोड़ से बढ़कर ₹3,783.36 करोड़ (366% वृद्धि) और बिक्री ₹1,081.04 करोड़ से बढ़कर ₹7,145.61 करोड़ (561% वृद्धि) तक पहुंची है। यह बढ़ोतरी प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा खादी को जनआंदोलन में बदलने की अपील और प्रचार के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। खादी ग्रामोद्योग भवन ने बनाया नया रिकॉर्ड नई दिल्ली स्थित खादी ग्रामोद्योग भवन ने भी पहली बार ₹110.01 करोड़ का कारोबार किया है, जो वर्ष 2013-14 में ₹51.02 करोड़ था। इसमें 115% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो शहरी उपभोक्ताओं के बीच खादी के प्रति बढ़ते रुझान को दर्शाता है। पीएमईजीपी के माध्यम से 90 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) योजना के तहत अब तक 10.18 लाख इकाइयों की स्थापना हो चुकी है। इन इकाइयों के लिए ₹27,166.07 करोड़ की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई है और इससे 90,04,541 लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ है। यह योजना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने में सहायक रही है। ग्रामोद्योग विकास योजना से ग्रामीण भारत को बल ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत अब तक कुल 2,87,752 मशीनें, उपकरण और टूलकिट वितरित किए गए हैं। इसमें मधुमक्खी पालन बॉक्स, विद्युत चालित चाक, अगरबत्ती निर्माण मशीन, फुटवियर टूलकिट, सिलाई व मरम्मत टूल्स शामिल हैं। वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना का बजट बढ़ाकर ₹60 करोड़ कर दिया गया है, जो वर्ष 2021-22 की तुलना में 134% अधिक है। महिला सशक्तिकरण में केवीआईसी की अहम भूमिका महिलाओं को स्वरोजगार और प्रशिक्षण से जोड़ने के क्षेत्र में भी केवीआईसी ने उल्लेखनीय कार्य किया है। बीते 10 वर्षों में 7,43,904 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 57.45% महिलाएं हैं। इसके अलावा, 5 लाख से अधिक खादी कारीगरों में 80% महिलाएं कार्यरत हैं। पारिश्रमिक में 275% और पिछले तीन वर्षों में 100% तक की वृद्धि कर महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सशक्त किया गया है। ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प की ओर मजबूत कदम अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने इस सफलता का श्रेय पूज्य बापू की प्रेरणा, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी, एमएसएमई मंत्रालय के सहयोग और देशभर के करोड़ों कारीगरों की मेहनत को दिया है। उन्होंने कहा कि केवीआईसी की यह ऐतिहासिक उपलब्धियाँ भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को मजबूती देती हैं।  

छत्तीसगढ़ ने वस्त्र उद्योग क्षेत्र में निवेश के नए द्वार खोले : मुख्यमंत्री साय

कहा टेक्सटाइल के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की नई पॉलिसी देश में सबसे बेहतर मुंबई, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित सीएमएआई फैब शो 2025  में भाग लेकर राज्य में वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर जोर दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने निवेशकों और टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े उद्योगपतियों से संवाद कर छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा हमने वस्त्र उद्योग क्षेत्र में निवेश के नए द्वार खोले हैं। इस मौके पर छत्तीसगढ़ सरकार ने सीएमएआई (क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के साथ एमओयू भी साइन किया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ ने वस्त्र, गारमेंट और हैंडलूम सेक्टर में एक उभरता हुआ केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए कहा कि हाल ही में हमने कैबिनेट में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फैशन डिजाइन के संस्थान को नवा रायपुर में खोलने की मंजूरी दी है। 271 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होने वाले इस संस्थान से छत्तीसगढ़ में टैक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ में चांपा की कोसा साड़ियां अपने शिल्प में बेमिसाल हैं। सीएमएआई से एमओयू और निफ्ट की स्थापना से चांपा के कोसा जैसे वस्त्रों की ब्रांडिंग, प्रमोशन में बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कपड़ा उद्योग प्रत्यक्ष रूप से ग्रामीण स्वरोजगार, तकनीक और कौशल विकास से जुड़ा है। नई औद्योगिक नीति में हमने इन सभी सुविधाओं का ख्याल रखते हुए, टैक्सटाइल सेक्टर से जुडे़ एमएसएमई को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। हम 1000 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार देने वाले उद्यमों को विशेष अनुदान दे रहे हैं। 100 करोड़ के इन्वेस्टमेंट में 252 करोड़ की प्रतिपूर्ति हमारी सरकार द्वारा किया जा रहा है। टेक्सटाइल के क्षेत्र में देश में इतनी अच्छी पॉलिसी किसी भी राज्य में नहीं है। इसका लाभ कपड़ा उद्योग से जुड़े छोटे और मझोले उद्यमों को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में उद्यम शुरू करने पर विशेष रियायतें दी गई हैं। उन्होंने कहा सिंगल विंडो सिस्टम, इज आफ डूइंग बिजनेस और स्पीड आफ डूइंग बिजनेस की नीतियों के चलते बहुत तेजी से निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति दी जा रही है। ईज ऑफ डूईंग बिजनेस से अब हम स्पीड और बिजनेस की ओर बढ़ चुके हैं। हमने 350 से अधिक रिफार्म्स किये हैं और निवेश का वातावरण बेहद सहज कर दिया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ के स्टॉल का अवलोकन भी किया और जानकारी ली। उन्होंने बताया कि हमारे पारंपरिक हस्तशिल्प को टेक्सटाइल उद्योग से जोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव राहुल भगत, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, संचालक  प्रभात मलिक, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक अभिषेक अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सेंट्रल इंडिया की लोकेशन, बेहतर कनेक्टिविटी मुख्यमंत्री ने बताया सेंट्रल इंडिया की हमारी लोकेशन आपको देश भर में सबसे अच्छी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराती है। इसी साल से रायपुर एयरपोर्ट में कार्गो की सुविधा आरंभ हो गई है। हमारे यहां 48 हजार करोड़ रूपए की कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। रेल्वे नेटवर्क के विस्तार का सबसे अधिक लाभ उद्योग जगत को मिलेगा। रायपुर से विशाखापट्नम तक एक्सप्रेस वे का निर्माण तेजी से हो रहा है। विशाखापट्नम जैसे पोर्ट से हमारी सीधी कनेक्टिविटी रायपुर में बिजनेस को बहुत विस्तार देगी। टैक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए प्रशिक्षित युवा हो रहे तैयार मुख्यमंत्री ने कहा टैक्सटाइल इंडस्ट्री को स्किल्ड मैनपावर भी चाहिए। प्रदेश के आईटीआई में टेक्नालॉजी और इनोवेशन पर आधारित एडवांस कोर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे टैक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए भी प्रशिक्षित युवा तैयार हो रहे हैं। हमारे यहां आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी तथा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान हैं जिससे दक्ष मानव संसाधन इंडस्ट्री के लिए उपलब्ध हैं।

BHEL में भीषण आग, एक के बाद एक हो रहे धमाके, कई किलोमीटर दूर दिख से रहा धुआं

Huge fire in BHEL, explosions happening one after another, smoke visible several kilometers away Huge Fire in BHEL : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है। शहर के पिपलानी थाना क्षेत्र में स्थित हिंदुस्तान के 9 रत्नों में से एक भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड ( BHEL ) में गुरुवार की दोपहर भीषण आग लग गई। बताया गया कि आग भेल के 9 नंबर गेट के पास कॉमर्शियल ग्रीन बेल्ट एरिया में लगी थी, जिसपर अब और अपडेट सामने आया है।जानकारी के अनुसार, संबंधित क्षेत्र में स्थापित ऑयल की टंकियों में ब्लास्ट हुआ है। आग इतनी भयावह है कि कई किलोमीटर दूर से उसका काला धुआं देखा जा सकता है। आग बुझाने के लिए दमकल की 8 फायर गाडियां और 4 टैंकर मौके पर भेजे जा चुके हैं। अबतक की गई कार्रवाई के अनुसार, तेज गर्मी के चलते आग तेजी से फैली है। आग लगने से बीएचईएल के साथ-साथ आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई है। घटना के बाद एक तरफ तो बीएचईएल का अपना अग्निशमन यंत्र सक्रीय कर आग बुझाने का प्रयास किया गया, लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण दमकल विभाग को सूचना दी गई। जानकारी लगते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुट गई हैं। फिलहाल, खबर लिखे जाने के दौरान आग पर काबू पाने का प्रयास जारी है। इधर, भेल परिसर में स्थित जिस कारखाने के नजदीक आग लगी है, विशेष रूप से उसके अधिकारी-कर्मचारियों को परिसर से बाहर सुरक्षित स्थान पर कर दिया गया है, ताकि किसी अप्रीय घटना से बचा जा सके।चुनौती साबित हो रहा आग पर काबू पाना प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो आग लगने के कुछ देर में ही धुए का बड़ा गुबार आसमान पर छा गया, जिसने विशेष रूप से स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया। लोगों में असमंजस की स्थिति बन गई। बेल परिसर के बाहर सड़क पर स्थित कुछ लोग तो एहतियाद के तौर पर अपनी दुकानें भी बंद कर चुके हैं, ताकि समय रहते किसी अनहोनी से बच सकें। फिलहाल, आग पर काबू पाने की कोशिश जारी है। दमकल दल की मानें तो गर्म हवाओं के कारण आग पर काबू पाना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। प्रशासन ने दिए जांच के आदेशफिलहाल, आग लगने के कारणों का अबतक कोई पता नहीं चल सका है। हालांकि, प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट से आगजनी की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं, साथ लोगों से घटनास्थल के आसपास तक न जाने की अपील की है।

अब ओरछा रेलवे स्टेशन पर रूकेंगी ग्वालियर बनारस बुंदेलखंड एक्सप्रेस और खजुराहो उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस

ओरछा विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ओरछा को दो प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टॉपेज का तोहफा मिला है। ग्वालियर बनारस बुंदेलखंड एक्सप्रेस और खजुराहो उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस अब ओरछा रेलवे स्टेशन पर रूकेंगी, यह दोनों ट्रेन कब से ओरछा रुकेंगी यह अभी तय नहीं हुआ है। भाजपा नेता विकास यादव ने 12 नवंबर 2024 को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात के द्वारा उक्त ट्रेनों के ओरछा ठहराव की मांग रखी थी। मंत्री सिंधिया ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर इस मांग को आगे बढ़ाया।       रेलवे बोर्ड के संयुक्त निर्देशक विवेक कुमार सिंह ने दोनों ट्रेनों के ठहराव के आदेश जारी कर दिए हैं।     मंत्री सिंधिया ने फेसबुक पोस्ट के जरिये रेल मंत्री का आभार जताया है।     दोनों ट्रेनों के ओरछा स्टॉपेज के इस फैसले से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।     ओरछा आने वाले देशी व विदेशी पर्यटकों और श्रद्धालुओं को ट्रेन की बेहतर सुविधा मिलेगी।     केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने फेसबुक पर पोस्ट कर रेलमंत्री का आभार जताया।     अब कुल पांच बड़ी ट्रेनों का ओरछा रेलवे स्टेशन पर ठहराव होगा।     इन दो ट्रेनों के ठहराव के साथ ओरछा में रुकने वाले ट्रेनों की संख्या 5 हो गई है।     इससे पहले फतेहपुर, प्रयागराज एक्सप्रेस, झांसी बांदा मैमू और झांसी मानिकपुर मैमू यहां रुकती थीं।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व पुस्तक दिवस की प्रदेशवासियों को बधाई दी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व पुस्तक दिवस की प्रदेशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने आशा की है कि सभी पुस्तक मेले का भरपूर लाभ उठाएँगे। उन्होंने आह्वान किया कि विश्व पुस्तक दिवस पर प्रत्येक व्यक्ति कोई न कोई पुस्तक अपने पास अवश्य रखे। पुस्तक पढ़ने का जो आनंद है, वह सबसे श्रेष्ठ है। खासकर जब हमारी लाइब्रेरी समृद्ध होती है, तो वह ज्ञानार्जन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वप्न, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना तथा केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की दूरदर्शिता से, देश के इतिहास में पहली बार मेडिकल एजुकेशन सहित समस्त तकनीकी शिक्षा को क्षेत्रीय भाषाओं, राष्ट्रीय भाषा में पढ़ाने का अभियान चलाया गया है, उसमें पुस्तकें एक सशक्त माध्यम बन रही हैं। चिकित्सा शिक्षा को हिंदी भाषा में पढ़ाने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन को मूर्त रूप देते हुए तकनीकी शिक्षा में मातृभाषा हिंदी को प्राथमिकता दी है, जिससे प्रत्येक छात्र को बिना भाषायी अवरोध के गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त हो सके। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बन गया है जिसने चिकित्सा शिक्षा को हिंदी भाषा में पढ़ाने का ऐतिहासिक कार्य किया है। मेडिकल, डेंटल, पैरामेडिकल आदि सभी संकायों की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र अब हिंदी एवं अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में छात्रों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे वे छात्र जो विषयवस्तु में निपुण होते हुए भी अंग्रेज़ी में कमजोर होते हैं, अब आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में सम्मिलित हो पा रहे हैं। छात्रों को उत्तर पुस्तिकाओं में हिंदी में उत्तर लिखने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा प्रायोगिक परीक्षाओं में भी हिंदी भाषा में उत्तर देने की अनुमति प्रदान की गई है। इस पहल से विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान का मूल्यांकन उनकी भाषायी सुविधा के अनुरूप संभव हो रहा है। इसके अतिरिक्त, राज्य के समस्त चिकित्सा महाविद्यालयों की पुस्तकालयों में हिंदी भाषा में चिकित्सा विषयक पुस्तकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे छात्रों को विषय के गहन अध्ययन में कोई कठिनाई न हो।

मध्यप्रदेश सरकार पूरे देश में सर्वाधिक 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर गेहूं खरीद रही

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार पूरे देश में सर्वाधिक 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर गेहूं खरीद रही है, ताकि प्रदेश के गेहूं उत्पादक किसानों को सर्वाधिक लाभ मिले। इस उपार्जन राशि में सरकार द्वारा किसानों को दी जा रही 175 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि भी शामिल है। उन्होंने कहा कि गेहूं उत्पादन एवं उपार्जन के मामले में हम पंजाब और हरियाणा जैसे खाद्यान्न उत्पादक राज्यों से भी आगे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी प्रकार के राशन कार्डधारकों की ई-केवाईसी जल्द से जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता अधिकार संरक्षण विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के सभी प्रकार के राशन कार्ड धारकों को समय पर और बिना किसी कठिनाई के पात्रतानुसार राशन सामग्री उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को राशन पाने में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक खाद्यान्न वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यवस्थाओं को बेहतर और त्रुटिरहित बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि कोई भी पात्र लाभार्थी राशन पाने से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़ी सभी योजनाएं, विशेषकर खाद्यान्न वितरण, उज्जवला गैस योजना की सब्सिडी वितरण और घर-घर घरेलू गैस पाइप लाइन डालने का काम पूरी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ किये जाएं, ताकि प्रदेश के नागरिकों को सरकार की सुविधाओं का भरपूर लाभ मिल सके। हर जरूरतमंद तक खाद्यान्न पहुंचाना हमारी प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि त्रुटिरहित राशन वितरण, किसानों को उपार्जन राशि का समय पर भुगतान और हर जरूरतमंद तक खाद्यान्न पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी प्रबंध और जरूरी कदम उठाये जायें। घरेलू गैस की पाइप लाइन डालने का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि मक्का, कोदो-कुटकी जैसे श्रीअन्न भी स्व-सहायता समूह एवं शासकीय उचित मूल्य की दुकानों को दिये जायें, ताकि इनकी मांग (खपत) में वृद्धि हो और श्रीअन्न पैदा करने वाले किसानों को प्रोत्साहन मिले। गेहूं उपार्जन का काम 5 मई तक पूरा कर लें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में चल रही गेहूं उपार्जन व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गेहूं की खरीदी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता का पालन किया जाए और किसानों को गेहूं उपार्जन का भुगतान कम से कम समय में कर दिया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग की अवधि 30 अप्रैल तक करें। इस अवधि तक बुकिंग कराने वाले सभी किसानों से गेहूं उपार्जन का समस्त कार्य 5 मई 2025 तक हर हाल में पूराकिया जाए। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता अधिकार संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बैठक में बताया कि गोदामों में खाद्यान्न स्कंध की हेरा-फेरी पर अंकुश लगाने के लिए अब खाद्य विभाग द्वारा खाद्यान्नों के सभी बारदानों (बोरों) में क्यूआर कोड लगाये जायेंगे। इसी तरह एमपी वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के अधीन सभी वेयरहाउस को भी क्यूआर कोडयुक्त किया जा रहा है। इनमें सीसीटीव्ही कैमरे भी लगवाये जाएंगे। खाद्यान्न वितरण, शासकीय उचित मूल्य दुकानों पर नजर रखने एवं फूड-स्टॉकिंग के सभी कामों की मुख्यालय से निगरानी के लिए भोपाल में एक कंट्रोल कमांड सेंटर भी बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग स्वयं के 1596 गोदामों का क्रमबद्ध तरीके से आधुनिकीकरण एवं उन्नयन कर रहे हैं। सभी गोदाम में भंडारित स्टॉक एवं अन्य संसाधनों के अधिकतम रिस्क कवर के लिए नवीनतम प्रावधानों के तहत बीमा पॉलिसी भी लागू की जा रही है। मंत्री श्री राजपूत बताया कि उपार्जित स्कंध की साफ-सफाई के लिए उपार्जन केन्द्रों पर मैकेनाइज्ड क्लीनिंग मशीनों की स्थापना की गई है। स्कंध की गुणवत्ता परीक्षण के लिए ग्रेन एनालाईजर के साथ-साथ विभाग के अधीन सभी वेयर हाउसेस में संकेतक (साइनेज) भी लगाये जा रहे हैं। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा (मुख्यमंत्री कार्यालय), अपर मुख्य सचिव सहकारिता श्री अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता अधिकार संरक्षण श्रीमती रश्मि अरुण शमी, आयुक्त खाद्य विभाग श्री कर्मवीर शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। अधिकारियों ने विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं और व्यवस्थाओं की प्रगति से मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अवगत कराया।  

किंग कोबरा के बदले मध्य प्रदेश सरकार वन विहार से बाघ और बाघिन का जोड़ा कर्नाटक को देगी

भोपाल प्रदेश में किंग कोबरा की आबादी बढ़ाने की दिशा में कर्नाटक से लाए गए दो मेल किंग कोबरा को वन विहार भोपाल में रखा गया है। इसके बदले में प्रदेश सरकार वन विहार से बाघ और बाघिन का जोड़ा कर्नाटक को देगी। इसके लिए पहले ही अनुबंध कर लिया गया था। वर्षाकाल के बाद बाघ का जोड़ा कर्नाटक भेजा जाएगा। वहीं वन विहार में दो मेल किंग कोबरा में से एक किंग कोबरा इंदौर चिड़ियाघर भेजा जाएगा। इंदौर चिड़ियाघर में एक मादा किंग कोबरा है। प्रदेश सरकार कर्नाटक के साथ ही छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा को भी बाघ देगी। राज्य सरकार इन तीनों राज्यों को 15 बाघ देगी। इनमें छत्तीसगढ़ को आठ बाघ (दो बाघ, छह बाघिन), राजस्थान को चार बाघिन एवं ओडिशा को तीन (एक बाघ, दो बाघिन) दिए जाएंगे। इसको लेकर सहमति बन गई है। बांधवगढ़, पेंच एवं कान्हा टाइगर रिजर्व से ये बाघ भेजे जाएंगे। इसके लिए यह शर्त भी रखी गई है कि बाघ एवं बाघिन को भेजने की प्रक्रिया पशु चिकित्सकों की टीम की देखरेख में की जाए। बाघों के जीवन को किसी प्रकार का खतरा न हो, इसका विशेष रूप से ध्यान रखा जाए। बाघों को भेजने का पूरा खर्च संबंधित राज्य को ही उठाना होगा और इसकी विधिवत अनुमति भारत सरकार से लेनी होगी। वन विहार से मेल किंग कोबरा इंदौर चिड़ियाघर भेजने या वहां से मादा किंग कोबरा वन विहार लाने को लेकर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। हमारा प्रयास अन्य राज्य से एक मादा किंग कोबरा लाने का भी है।  एल कृष्णमूर्ति, एपीसीसीएफ वन्यप्राणी मुख्यालय, भोपाल।

अब डॉक्टरों को नहीं जाना होगा अदालत, मामलों की होगी ऑनलाइन पेशी

भोपाल  भोपाल शहर में अब न्यायालयीन प्रकरणों में डॉक्टरों को कोर्ट तक नहीं जाना पड़ेगा। अब ऑनलाइन पेशी होगी और अपना पक्ष भी रख सकेंगे। भोपाल का जेपी अस्पताल प्रदेश का ऐसा पहला जिला अस्पताल होगा, जिसमें कॉन्फ्रेंस हॉल तैयार किया जा रहा है। विभाग के मुताबिक हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि हर जिला अस्पताल में कॉन्फ्रेंस हॉल तैयार किया जाए।  जेपी में कॉन्फ्रेंस हॉल अधीक्षक के बगल वाले कमरे में बनाया जा रहा है। यह काम लगभग एक सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक विभाग प्रत्येक जिले से यह रिपोर्ट मंगा रहा है कि कितने जिलों में यह कार्य हुआ है और नहीं हुआ तो आखिर वजह क्या है। इस बारे में डॉ. राकेश श्रीवास्तव, चिकित्सा अधीक्षक, जेपी अस्पताल का कहना है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर कॉन्फ्रेंस हॉल तैयार किया जा रहा है। इसके माध्यम से डॉक्टरों की पेशी होगी। इससे उनका समय बचेगा।

सरकार योजनाओं की ऑडिट की रिपोर्ट के आधार पर योजनाओं में सुधार या बदलाव करेगी

भोपाल मध्य प्रदेश की करोड़ों लाड़ली बहनों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। मोहन सरकार अब लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्मी  जैसी कई फ्लैगशिप योजनाओं का सोशल ऑडिट कराने की तैयारी में है।इसके तहत पता लगाया जाएगा कि इन योजनाओं से लोगों के जीवन पर क्या असर पड़ा, इनमें क्या खामियां व खूबियां है। इस ऑडिट की रिपोर्ट तैयार कर फिर राज्य शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर योजनाओं में सुधार या बदलाव किए जाएंगे।खबर है कि जल्द ही विभाग द्वारा इसका प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा और स्वीकृति मिलने पर विभागों से समन्वय कर सोशल आडिट की प्रक्रिया शुरू होगी। खास बात ये है कि ये ऑडिट सिर्फ कागजों पर नहीं होगा बल्कि इसमें खुद अधिकारी कर्मचारी घर-घर जाकर योजना के लाभार्थियों से संपर्क करेंगे। ऑडिट में इन योजना पर रहेगा फोकस खबर है कि सोशल आडिट के लिए केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं का विभागवार खाका तैयार किया जाएगा, जिसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इनमें प्रधानमंत्री मातृवंदना, पीएम आवास, निशुल्क खाद्यान्न वितरण, पथ विक्रेता योजना, लाड़ली बहना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना सहित तमाम ऐसी योजनाओं के लाभार्थियों से संपर्क किया जाएगा। मई में 15 तारीख तक आएगी लाड़ली बहना योजना की 24वीं किस्त 16 अप्रैल को सीएम डॉ. यादव ने प्रदेश की 1 करोड़ 27 लाख बहनों के खातों में 23वीं किस्त के 1552 करोड़ 38 लाख जारी कर दिए है।इसके तहत प्रत्येक लाभार्थी के खाते में 1250 भेजे गए है।25 लाख से अधिक बहनों को सिलेंडर रिफिलिंग की 57 करोड़ भी खातों में भेजे गए है।अब योजना की 24वीं किस्त मई में जारी होगी। ध्यान रहे अगली किस्त 15 तारीख तक आएगी क्योंकि अंतरण की तारीख में सदैव एकरूपता लाने के लिए राज्य सरकार ने फैसला किया है कि वह प्रतिमाह 15 तारीख के आसपास बहनों के खाते में राशि भेजेगी।     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से अप्रैल 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 23 किश्तों का अंतरण किया गया है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। लाड़ली बहना योजना : आयु/पात्रता/नियम     इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है।     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी।     विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं।जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए।     जिनके परिवार का कोई सदस्य वर्तमान अथवा भूतपूर्व सांसद, विधायक हो या फिर किसी सरकारी पद का लाभ ले रहा है, उस परिवार की महिलाएं भी लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं होंगी।     यदि महिला के पति के पास सरकारी योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता नहीं है, तो वह भी इस योजना का लाभ नहीं उठा पाएगी।

आज से चलेगी सहरसा – लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस

भोपाल रेल प्रशासन द्वारा आम यात्रियों को कम किराए में आधुनिक सुविधाओं से युक्त यात्रा अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की शुरुआत की जा रही है। इसी क्रम में, देश की तीसरी और मध्यप्रदेश की पहली अमृत भारत ट्रेन गाड़ी संख्या 05595 सहरसा – लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (उद्घाटन सेवा) का संचालन किया जा रहा है, जो भोपाल मंडल के इटारसी स्टेशन पर ठहरकर गंतव्य तक जाएगी। गाड़ी संख्या 05595 सहरसा – लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (उद्घाटन सेवा) गाड़ी संख्या 05595 अमृत भारत एक्सप्रेस दिनांक 24 अप्रैल 2025 (गुरुवार) को सहरसा स्टेशन से सुबह 11:40 बजे प्रस्थान कर, अगले दिन मार्ग के अन्य स्टेशनों से होते हुए सुबह 10:50 बजे इटारसी स्टेशन एवं अन्य स्टेशनों पर ठहराव के बाद रात 23:30 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी। गाड़ी के हाल्ट: रास्ते में यह उद्घाटन ट्रेन सहरसा जंक्शन, खगड़िया जंक्शन, सालौना, हसनपुर रोड, समस्तीपुर जंक्शन, मुजफ्फरपुर जंक्शन, हाजीपुर जंक्शन, सोनपुर, पाटलिपुत्र, दानापुर, आरा, बक्सर, पं. दीन दयाल उपाध्याय जं., मिर्जापुर, प्रयागराज छिवकी, मानिकपुर जं., सतना, जबलपुर, इटारसी जं., भुसावल जं., जलगांव जं., नासिक रोड, कल्याण जं., ठाणे, लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशनों पर रुकेगी। यात्रियों से अनुरोध है कि गाड़ी से संबंधित सटीक जानकारी प्राप्त करने हेतु रेलवे की अधिकृत पूछताछ सेवा NTES/139 का उपयोग करें। विस्तृत समय-सारणी एवं ठहराव की जानकारी के लिए www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाएं या NTES ऐप डाउनलोड करें।

प्रदेश में 4 हजार ग्रामों और 356 शहरी वार्डों में हुआ योग समितियों का गठन

भोपाल प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा योग के प्रति जागरूकता और प्रचार-प्रसार का कार्य किया जा रहा है। इसके लिये मध्यप्रदेश योग आयोग का गठन भी किया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह योग आयोग के अध्यक्ष हैं। प्रदेश के 52 जिलों में जिला योग समितियां और 313 विकासखंडों में विकासखंड योग समितियों के गठन का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इन जिलों में लगभग 4 हजार ग्रामों में और शहरी क्षेत्र के 356 वार्डों में योग समितियों का गठन किया गया है। योग आयोग पोर्टल मध्यप्रदेश योग आयोग का पोर्टल www.mpyogaayog.in तैयार कर एनआईसी पर संचालित किया जा रहा है। पोर्टल पर योग आयोग की समस्त जानकारियां, जिला योग प्रभारियों एवं विकासखंड योग प्रभारियों की व्यक्तिगत जानकारी, योग से निरोग कार्यक्रम में सहयोग देने वाले योग शिक्षकों की जानकारी को प्रदर्शित है। मुख्यमंत्री जिला योग प्रशिक्षण केन्द्रों के सुव्यवस्थित संचालन के लिये उपयुक्त भवन और भूमि उपलब्ध कराने के लिये कलेक्टर्स को पत्र लिखा गया है। वर्तमान में 14 जिलों ग्वालियर, मुरैना, दतिया, राजगढ़, रायसेन, सीहोर, शाजापुर, देवास, नीमच, सिवनी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, दमोह और शहडोल में मुख्यमंत्री जिला योग प्रशिक्षण केन्द्र संचालित हो रहे हैं। स्कूल छात्र-छात्राओं के लिये तैयार किया गया प्रोटोकॉल स्कूल के छात्र-छात्राओं के लिये 10 मिनट का प्रोटोकॉल मध्यप्रदेश योग आयोग द्वारा तैयार किया गया है। इसमें आसन, प्राणायाम एवं ध्यान शामिल किये गये हैं। प्रोटोकॉल जिला योग प्रभारियों को विद्यालयों में प्रार्थना सत्र के दौरान अभ्यास कराने के लिये उपलब्ध करा दिया गया है। जिलों में गठित योग समितियों द्वारा संचालित निशुल्क योग कक्षा के लिये एक घंटे का योगाभ्यास प्रोटोकॉल तैयार कर संबंधित एजेंसी को उपलब्ध कराया गया है, जिसके आधार पर योग समितियों द्वारा संचालित निशुक्ल योग कक्षाओं में आम नागरिकों को योगाभ्यास कराया जा रहा है। संस्था की पूरे वर्ष की योग गतिविधियों का वार्षिक योग पंचांग आयुक्त लोक शिक्षण द्वारा प्रति वर्ष जारी किया जाता है। जारी कैलेण्डर के अनुसार प्रदेश में योग गतिविधियां संचालित हो रही हैं। प्रदेश में 21 जून 2025 को मनाये जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।  

भारत ने बांग्लादेश में ₹5,000 करोड़ के रेल प्रोजेक्ट पर लगाई रोक, भूटान और नेपाल के रास्ते वैकल्पिक रास्तों की तलाश

नई दिल्ली  इस समय पड़ोसी देश बांग्लादेश (Bangladesh) से रिश्ते कुछ सहज नहीं हैं। इसलिए भारत ने वहां चल रहे कुछ रेलवे प्रोजेक्ट (Railway Project) रोक दिए हैं। वहां हो रही राजनीतिक उथल-पुथल और वहां काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भारत को चिंता है। एक खबर के अनुसार, लगभग ₹5,000 करोड़ के रेल प्रोजेक्ट का इस समय काम रुक गया है। कई प्रोजेक्ट पर काम ठप  एक रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम तीन प्रोजेक्ट पर पहले काम चल रहा था, जिसे अब रोक दिया गया है। इसके अलावा, पांच अन्य प्रोजेक्ट के लिए सर्वे का काम भी बंद कर दिया गया है। ये रेलवे प्रोजेक्ट पूर्वोत्तर राज्यों को बांग्लादेश के रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए बहुत जरूरी थे। इनका मकसद सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भरता को कम करना था। सिलिगुड़ी कॉरिडोर एक पतला सा रास्ता है जो पूर्वोत्तर भारत को बाकी भारत से जोड़ता है। कौन कौन से प्रोजेक्ट रुके जिन रेलवे प्रोजेक्ट को रोका गया है, उनमें अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक, खुलना-शाहबाजपुर रेल लाइन, खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लाइन और ढाका-टोंगी-जयदेबपुर रेल एक्सटेंशन प्रोजेक्ट शामिल हैं। अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक प्रोजेक्ट पर भारत बांग्लादेश को लगभग ₹400 करोड़ की मदद दे रहा था। यह 12.24 किलोमीटर लंबा है। इसमें बांग्लादेश में 6.78 किलोमीटर और त्रिपुरा में 5.46 किलोमीटर की दोहरी रेल लाइन बननी थी। खुलना-शाहबाजपुर रेल लाइन, जो अखौरा-अगरतला प्रोजेक्ट का हिस्सा है, असम के लिए कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए बनाई जा रही थी। खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लाइन प्रोजेक्ट को रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत बनाया जा रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत $388.92 मिलियन (₹3,300 करोड़) है। इसमें बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट और खुलना में मौजूदा रेल नेटवर्क के बीच लगभग 65 किलोमीटर का रेल मार्ग बनाया जाना था। काम बहुत धीरे ‘बिजनेस लाइन’ की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका-टोंगी-जयदेबपुर रेलवे एक्सटेंशन प्रोजेक्ट जून 2027 तक पूरा होना था। लेकिन, पिछले साल तक इसका 50% से भी कम काम हो पाया था। मतलब, काम बहुत धीरे चल रहा था। प्रोजेक्ट पर काम क्यों धीमा था, इस बारे अभी तक कुछ खास सामने नहीं आया है। भारत विकल्प देख रहा है अब भारत भूटान और नेपाल के रास्ते वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहा है ताकि उत्तर तथा पूर्वोत्तर भारत में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा सके। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है, “‘₹3500 – 4000 करोड़ की कनेक्टिविटी योजना भूटान और नेपाल के माध्यम से तलाशी जा रही है, लेकिन भारतीय क्षेत्रों में निर्माण कार्य योजना के अनुसार चल रहा है।” इसके साथ ही, भारत उत्तर प्रदेश और बिहार में सिंगल रेल लाइनों को डबल और जहां डबल रेल लाइन है, वहां चार लाइनें बिछाने की संभावना भी तलाश रहा है।

प्रदेश के आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारियों के DA में हुई बढ़ोत्तरी

भोपाल एमपी में महंगाई भत्ते में फिर बढ़ोत्तरी की गई है। इसे बढ़ाकर 55 प्रतिशत कर दिया गया है। महंगाई भत्ता यानि डीए में बढ़ोत्तरी का लाभ प्रदेश के आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारियों को मिलेगा। इसके साथ ही प्रदेश में प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारियों को भी बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता मिलेगा। इस संबंध में वित्त विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। राज्य सरकार द्वारा इसका नकद भुगतान किया जाएगा।  भारत सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता बढ़ाया है। केंद्रीय कर्मचारियों को बढ़ा हुआ भत्ता 1 जनवरी 2025 से मंजूर किया गया है। इस संबंध में 2 अप्रेल को आदेश जारी किया गया था जिसके अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों और अधिकारियों को 55 प्रतिशत प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जाएगा। महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत बढ़ोत्तरी की केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत बढ़ोत्तरी की। अभी तक उन्हें मूल वेतन का 53 प्रतिशत डीए दिया जा रहा था। केंद्रीय कर्मचारियों अधिकारियों के लिए जारी किए गए इस आदेश के आधार पर मध्यप्रदेश सरकार ने भी केंद्र के कर्मचारियों, अधिकारियों को 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने का आदेश जारी कर दिया है। एक जनवरी 2025 से 53 की बजाय 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता मध्यप्रदेश के वित्त विभाग ने आदेश जारी किए। इसमें एक जनवरी 2025 से 53 की बजाय 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की बात कही गई है। प्रदेश के आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों के साथ ही राज्य में प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।

एम.पी. ट्रांसको ने नई तकनीकों के समावेश को आगे बढ़ाते हुए डिजिटाइजेशन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की

भोपाल एम.पी. ट्रांसको (मध्य प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी) ने अपने कार्यालयीन प्रक्रियाओं में नई तकनीकों के समावेश को आगे बढ़ाते हुए डिजिटाइजेशन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के कार्यों के बिलों का भुगतान, जो पूर्व में भौतिक मापन पुस्तिका में मैन्युअल प्रविष्टि के बाद होता था, अब वह डिजिटल एम.बी. के माध्यम से ही होगा। एम.पी. ट्रांसको के विभिन्न विभागों में इसका उपयोग करना अनिवार्य कर दिया गया है। मंत्री श्री तोमर ने बताया कि अब संपूर्ण मध्यप्रदेश में एम.पी. ट्रांसको के कार्यालयों में शत प्रतिशत पारदर्शिता के साथ वेंडर, ठेकेदारों आदि के बिल डिजिटल एम.बी. के माध्यम से भुगतान किये जा रहे हैं। इससे न केवल भुगतान की प्रक्रिया आसान हुई है बल्कि वेंडर, कॉन्ट्रेक्टर आदि भी अपने बिलों की करंट स्टेट्स से अवगत रहते हैं। साथ ही उन्हें निर्धारित समय पर भुगतान प्राप्त भी हो रहा है। इन हाउस विकसित किया एम.पी. ट्रांसको के अधीक्षण अभियंता श्री अजय पांडे ने बताया कि इस डिजिटल एम.बी. को कंपनी की आई.टी. एवं ई.आर.पी. सेल ने कंपनी के वित्तीय विभाग से समन्वय बनाकर इनहाउस विकसित किया है। डिजिटल एम.बी. में वेंडर और कॉन्ट्रेक्टर की उनके द्वारा किए गए कार्यों के पार्ट पेमेंट का नियमानुसार भुगतान करने की भी सुविधा दी गई है। सॉफ्टवेयर से किए गए कार्य, उपयोग हुआ मटेरियल और शेष कार्य तथा मटेरियल की गणना कर भुगतान की राशि निकल आती है। क्या है डिजिटल एम.बी. डिजिटल एम.बी. एक डिजिटल मापन पुस्तिका है। यह सरकारी कार्यालयों में बाहरी एजेंसी द्वारा किए गए कार्यों, सप्लाई किये गए मटेरियल के बदले भुगतान प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण अभिलेख होता है। यह किए गए कार्य की वास्तविक माप या गिनती का मूल अभिलेख कहलाता है।  

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