LATEST NEWS

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने बस चालकों की कमी को दूर करने के लिए सीधी भर्ती करने जा रहा

मऊ उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने बस चालकों की कमी को दूर करने के लिए सीधी भर्ती करने जा रहा है। निगम द्वारा चालकों को प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था की गई है। एक माह में 5000 किलोमीटर तक बस चलाने पर चालकों को 3000 हजार रुपये प्रोत्शाहन राशि भी दी जाएगी। इसके तहत जनपद में कुल 105 चालकों की भर्ती की जाएगी। मऊ डिपो में 50 तो दोहरीघाट डिपो में 55 चालकों की भर्ती की जानी है। भर्ती के लिए चालक का दो वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है। परिवहन निगम ने युवाओं को दिया सुनहरा मौका परिवहन निगम ने जनपद के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर प्रदान किया है। बस चालकों की भर्ती होने के पश्चात चालक की कमी दूर होने के साथ ही डिपो की सभी बसें पूरी क्षमता के साथ चलेंगी तथा अतिरिक्त बसें भी बढाई जा सकती है। इससे जनपद से आस-पास के जनपदों सहित लखनऊ, कानपुर व दिल्ली रूट पर यात्रियों का आवागमन सुलभ हो जाएगा। मऊ डिपो में आगामी दो मई व दोहरीघाट डिपों में छह मई को चालों की भर्ती की जाएगी। जनपद के युवा इन तिथियों पर डिपो में पहुंच कर भर्ती प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।

मध्य प्रदेश में कई बड़े नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण अध्यक्ष का मामला अटका हुआ

भोपाल मध्य प्रदेश में BJP के नए अध्यक्ष का नाम अभी तक तय नहीं हो पाया है। कई बड़े नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण यह मामला अटका हुआ है। जनवरी में चुनाव अधिकारी बनाए गए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का दौरा भी नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष का नाम भी घोषित किया जाएगा। बढ़ता जा रहा इंतजार दिग्गजों के बीच खींचतान और रायशुमारी न हो पाने के कारण यह मामला उलझा हुआ है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सहमति भी इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिलाध्यक्षों के नाम घोषित होने के बाद उम्मीद थी कि प्रदेश को नया अध्यक्ष मिल जाएगा। लेकिन, यह इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। जाति, राजनीति और क्षेत्र जैसे कई समीकरणों पर विचार किया जा रहा है। जो नाम सामने आए थे, उन पर भी अब चर्चा नहीं हो रही है। चुनाव अधिकारी बने पर दौरा नहीं कर पाए केंद्रीय मंत्री जनवरी में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चुनाव अधिकारी बनाया गया था लेकिन, उनका प्रदेश दौरा नहीं हो पाया। उन्होंने किसी नाम पर सहमति बनाने की कोशिश की हो या रायशुमारी की हो, ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर सहमति बनने के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों के अध्यक्षों के नाम घोषित किए जाएंगे लेकिन, अभी तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम भी तय नहीं हो पाया है। पहली बार हुआ ऐसा यह पहली बार है जब BJP के संगठन चुनाव में बूथ अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों के चुनाव के चार महीने बाद भी प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बड़े नेता कम हैं। इसलिए वहां हाईकमान ने फैसला कर लिया। लेकिन, मध्य प्रदेश में स्थिति अलग है। यहां कई बड़े नेता हैं जिनकी राय लेना जरूरी है। एमपी में बड़े नेताओं से सलाह-मशवरा जरूरी मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, जयभान सिंह पवैया, कैलाश विजयवर्गीय और राकेश सिंह जैसे नेताओं की राय को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। देरी की एक वजह इन बड़े नेताओं से रायशुमारी न होना भी है। सत्ता और संगठन में बदलाव के बाद पुराने नेता अपनी जगह बचाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, नए नेता अपनी जमीन मजबूत करने में लगे हैं। सीएम और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के बीच बात पक्की मुख्यमंत्री मोहन यादव की सहमति भी प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर बहुत मायने रखती है। पार्टी नेताओं के अनुसार, मुख्यमंत्री यादव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच भी प्रदेश अध्यक्ष को लेकर बातचीत हो चुकी है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष या राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।  

‘मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए वर्ष 2024-25 में किये गए नवाचारों हेतु आवेदन आमंत्रित किए गये

भोपाल शासकीय सेवाओं में नवाचार एवं उत्कृष्ट कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा प्रतिवर्ष ‘मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार (नवाचार)’ प्रदान किया जाता है। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए वर्ष 2024-25 में किये गए नवाचारों हेतु आवेदन आमंत्रित किए गये हैं। आवेदन वेबसाइट www.awards.mp.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन किये जा सकेंगे। आवेदन की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2025 निर्धारित की गई है। शासकीय सेवाओं में नवाचार एवं उत्कृष्ट कार्यों को बढ़ावा देने प्रदान किये जाने वाले वार्षिक ‘मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार (नवाचार)’ के लिए प्रदेश के शासकीय और सार्वजनिक संस्थानों के अधिकारी-कर्मचारी एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक किये गए नवाचारों के आधार पर आवेदन कर सकेंगे। पुरस्कार के लिए राज्य शासन के विभाग एवं उनके अधीनस्थ कार्यालयों के उल्लेखनीय नवाचारों को मान्यता दी जाएगी। पुरस्कार के लिए ऐसे कार्यों का चयन किया जाएगा, जिनसे जनसेवा में गुणवत्ता, दक्षता और नवाचार दृष्टिगोचर होता हो। चयन के मुख्य क्षेत्र मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार (नवाचार) महिला एवं बाल विकास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, कृषि एवं ग्रामीण विकास, सामाजिक समावेशन और समावेशी विकास के क्षेत्र में किये गये नवाचारों को प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक चयनित प्रविष्टि को एक लाख रूपये का नगद पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के विषय में अधिक जानकारी के लिए सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल, मध्यप्रदेश से संपर्क किया जा सकता है। संबंधित सूचनाएं वेबसाइट www.awards.mp.gov.in पर भी प्रकाशित हैं।  

रेल प्रशासन ने कानपुर सेंट्रल-SMVB बेंगलुरु-कानपुर सेंट्रल के बीच साप्ताहिक विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया

जबलपुर गर्मी के मौसम में यात्रियों की अतिरिक्त आवाजाही को देखते हुए और उनकी यात्रा संबंधी मांग को पूरा करने के उद्देश्य से रेल प्रशासन ने कानपुर सेंट्रल-एसएमवीबी बेंगलुरु-कानपुर सेंट्रल के बीच साप्ताहिक विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह गाड़ी विशेष किराये पर 6-6 ट्रिप के लिए संचालित की जाएगी। ट्रेन में वातानुकूलित एवं शयनयान श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे। यह विशेष ट्रेन पश्चिम मध्य रेल के सतना, कटनी, जबलपुर और इटारसी स्टेशनों से होकर अपने गंतव्य तक पहुंचेगी।   कानपुर से कब छूटेगी गाड़ी संख्या 04131, कानपुर सेंट्रल से एसएमवीबी बेंगलुरु के बीच संचालित साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन, 27 अप्रैल से 1 जून 2025 तक प्रत्येक रविवार को कानपुर सेंट्रल स्टेशन से रात 19:50 बजे प्रस्थान करेगी। यह ट्रेन अगले दिन सतना में मध्यरात्रि 02:50 बजे, कटनी में भोर 04:15 बजे, जबलपुर में सुबह 05:35 बजे तथा इटारसी में सुबह 09:25 बजे पहुंचेगी और तीसरे दिन मंगलवार को शाम 18:30 बजे एसएमवीबी बेंगलुरु स्टेशन पहुंचेगी। बेंगलुरु से कब छूटेगी इसी प्रकार, गाड़ी संख्या 04132, एसएमवीबी बेंगलुरु से कानपुर सेंट्रल के बीच संचालित साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन, 30 अप्रैल से 4 जून 2025 तक प्रत्येक बुधवार को एसएमवीबी बेंगलुरु स्टेशन से सुबह 07:10 बजे प्रस्थान करेगी। यह ट्रेन अगले दिन इटारसी में दोपहर 12:30 बजे, जबलपुर में दोपहर 15:45 बजे, कटनी में शाम 17:05 बजे और सतना में शाम 18:30 बजे पहुंचेगी तथा तीसरे दिन शुक्रवार को मध्यरात्रि 02:00 बजे कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंचेगी। कहां-कहां होगा ठहराव यात्रा के दौरान यह ट्रेन दोनों दिशाओं में फतेहपुर, प्रयागराज, शंकरगढ़, मानिकपुर, सतना, कटनी, जबलपुर, इटारसी, नागपुर, बल्लारशाह, सिरपुर कागजनगर, बेल्लमपल्ली, मंचेरियल, वारंगल, खम्मम, विजयवाड़ा, चीराला, ओंगोल, नेल्लूर, गुडूर, पेरम्बूर, अरक्कोणम जंक्शन, काटपाडी, जोलारपेट्टई, बांगरपेट और कृष्णराजपुरम स्टेशनों पर ठहरेगी।  

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 686.14 अरब डॉलर पर पहुंचा, 7 हफ्तों में 47.45 अरब डॉलर बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार

नई दिल्ली अमेरिकी टैरिफ से दुनिया भर की अर्थव्यस्था परेशान है लेकिन भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर इसका कोई असर अभी तक नहीं दिखा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से  जारी लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, 18 अप्रैल, 2025 को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.31 अरब डॉलर बढ़कर 686.14 अरब डॉलर पर पहुंच गया. ये लगातार सातवां हफ्ता है, जब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी देखने को मिली है. देश में सोने के भंडार में भी इजाफा हुआ है. उधर, पड़ोसी देश पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार (Pakistan Foreign Exchange Reserve) में कमी की खबर है. इसके पहले 11 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 1.57 अरब डॉलर बढ़कर 677.83 अरब डॉलर हो गया था. सितंबर, 2024 में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 704.89 अरब डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था. 3.52 अरब डॉलर बढ़ी एफसीए रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) 3.52 अरब डॉलर बढ़कर 578.49 अरब डॉलर हो गईं. डॉलर में बताई जाने वाली एफसीए में विदेशी मुद्रा भंडार में रखी यूरो, पाउंड और येन जैसी दूसरी फॉरेन करेंसी के मूल्य में बढ़ोतरी या कमी का प्रभाव भी शामिल होता है. खास बात तो ये है कि अब भा​रत के विदेशी मुद्रा भंडार को अपना रिकॉर्ड तोड़ने के लिए 19 अरब डॉलर से भी कम की जरुरत है. जो उसने 27 सितंबर को बनाया गया था. जिस तरह से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफा देखने को मिल रहा है. ऐसा लग रहा है कि मई का महीना खत्म होने से पहले भारत अपने फॉरेक्स रिजर्व के पुरे रिकॉर्ड के आंकड़े को पार कर लेगा. अगर बात लेटेस्ट आंकड़ों की करें तो 18 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 8 अरब डॉलर से ज्यादा का इजाफा देखने को मिला है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर​ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से किस तरह का डाटा जारी किया गया है. लगातार 7वें हफ्ते हुआ इजाफा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 18 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 8.31 अरब डॉलर बढ़कर 686.14 अरब डॉलर हो गया. लगातार सातवें सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि हुई है. इसके पहले 11 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 1.57 अरब डॉलर बढ़कर 677.83 अरब डॉलर हो गया था. इन 7 हफ्तों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 47.45 अरब डॉलर का इजाफा देखने को मिल चुका है. 27 सितंबर, 2024 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 704.89 अरब डॉलर के लाइफ टाइम हाई पर पहुंच गया है. खास बात तो ये है कि इस लेवल पर पहुंचने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को 18.74 अरब डॉलर यानी 1.60 लाख करोड़ रुपए की जरुरत है. गोल्ड रिजर्व में इजाफा रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 18 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का एक प्रमुख हिस्सा फॉरेन करेंसी असेट्स 3.52 अरब डॉलर बढ़कर 578.49 अरब डॉलर हो गईं. डॉलर के संदर्भ में उल्लेखित फॉरेन करेंसी असेट्स में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी नॉन-अमेरिकी करेंसीज की घट-बढ़ का प्रभाव शामिल होता है. समीक्षाधीन सप्ताह में गोल्ड रिजर्व का मूल्य 4.57 अरब डॉलर बढ़कर 84.57 अरब डॉलर हो गया. विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 21.2 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.57 अरब डॉलर हो गया. केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, आलोच्य सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार 70 लाख डॉलर बढ़कर 4.51 अरब डॉलर हो गया. पाकिस्तान के फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट देखने को मिली है. पिछले सप्ताह बाहरी ऋण चुकौती के कारण देश के कुल तरल विदेशी मुद्रा भंडार में 226 मिलियन डॉलर की गिरावट आई. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) द्वारा जारी साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल, 2025 तक देश का कुल तरल विदेशी मुद्रा भंडार 15.436 बिलियन डॉलर रहा, जबकि 11 अप्रैल, 2025 को यह 15.662 बिलियन डॉलर था. समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान, बाहरी ऋण चुकौती के कारण एसबीपी भंडार 367 मिलियन डॉलर घटकर 10.206 बिलियन डॉलर रह गया. कमर्शियल बैंकों के भंडार में 140.5 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई, जो 5.09 बिलियन डॉलर से बढ़कर 5.23 बिलियन डॉलर हो गया.

आज एमपी टेक ग्रोथ कान्क्लेव का शाम 5 बजे उद्घाटन करेँगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

इंदौर उद्योग, निवेश और रोजगार के साथ आज  इंदौर में विकास की नई इबारत लिखने जा रही है। आज होने वाले एमपी टेक ग्रोथ कान्क्लेव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।  ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में प्रशासनिक अधिकारियों ने दौरा किया और तैयारियों का जायजा लिया। यह आयोजन प्रदेश के विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कान्क्लेव में देश के आईटी उद्यमों, स्टार्टअप्स, यूनिकॉर्न कंपनियों और इनोवेशन हब्स के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन स्थल पर अत्याधुनिक तकनीकी प्रदर्शनियों, पैनल चर्चाओं और स्टार्टअप पिचिंग सेशन्स का आयोजन भी किया जाएगा। शाम 5 बजे उद्घाटन सत्र शाम 5 बजे मुख्यमंत्री कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय दुबे प्रजेंटेशन के माध्यम से मप्र में निवेश के अवसर और संभावनाओं की जानकारी देंगे। इसके बाद प्रमुख उद्योगपतियों को उद्बोधन होगा और फिर मप्र में होने वाले निवेश प्रस्तावों की जानकारी दी जाएगी। अंत में मुख्यमंत्री मोहन यादव कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। एमपी टेक ग्रोथ कान्क्लेव के पहले दिव्यांगजनों को उपकरण देंगे सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिव्यांगजनों के उपकरणों का वितरण 27 अप्रैल को शाम 4 बजे ब्रिलियंट कन्वेशन सेन्टर स्कीम नम्बर 78 विजय नगर में करेंगे। यह आयोजन आईडीबीआई बैंक के सीएसआर एक्टिविटी तथा भारतीय रेडक्रास सोसायटी के सहयोग से किया जा रहा है। यह जानकारी देते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि इस आयोजन के सुचारू संचालन के लिए नगर निगम आयुक्त सहित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदि को विभिन्न दायित्व सौंपे गए हैं।

सिंगरौली जिले की जमीन जल्द ही कोयले के साथ सोना भी उगलने लगेगी, खदानों की नीलामी के बाद खुदाई शुरू

 सिंगरौली कोयले के भंडारण के चलते देशभर में ऊर्जाधानी के नाम से मशहूर मध्य प्रदेश के सिंगरौली के नाम अब एक और उपलब्धि जुड़ गई है। जिले की जमीन जल्द ही कोयले के साथ सोना भी उगलने लगेगी। यहां सोने की खदानों की नीलामी पूरी कर ली गई है, जिसके बाद ठेका लेने वाली एजेंसियों द्वारा खुदाई का काम शुरू भी कर दिया है। खदानों में मशीनों ने काम करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि, सोने की चार खदानों की नीलामी की गई है। चारों खदानें अलग-अलग कंपनियों को आवंटित की गई हैं। इन कंपनियां ने मशीनों से खदानों में काम तेज गति से सोना निकालने में जुट गई हैं।  बता दें कि जिले ने कोयला खदानों और विद्युत तापीय परियोजनाओं से देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। खनिज संपदा से भरपूर सिंगरौली जिला देश के कई क्षेत्रों में कोयला सप्लाई कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है। अब सिंगरौली में कोयले के साथ सोना भी उगलने जा रहा है। इसके लिए 4 खदाने नीलाम की गई हैं। शुरुआती दौर की खुदाई का कार्य भी खनिज विभाग के देखरेख में शुरू हुआ है। सर्वे रिपोर्ट के बाद सिंगरौली जिले में ये 4 खदानें स्वीकृत की गई थीं। सोने की चारों खदानों में मशीनों से खुदाई शुरू सिंगरौली जिले में चकरिया गोल्ड ब्लॉक और सिल्फोरी सिधार गांव का गूढहर पहाड़ की नीलामी पिछले साल की जा चुकी है. 2 अन्य खदानें अमिलहवा गोल्ड ब्लॉक और चुनपुरवा गोल्ड ब्लॉक यानी कुल 4 खदानों की नीलामी पूरी हो चुकी है। खुदाई के कार्य के लिए स्पॉट पर मशीनों ने अपना काम करना शुरू कर दिया है। इन खदानों में प्रति टन मैटेरियल से 1.02 से 1.5 ग्राम तक सोना निकलने की संभावना जताई गई है। सरकार को हर साल मिलेगा 250 करोड़ राजस्व आपको बता दें कि, सिंगरौली जिले से कोयले की खदानों से हाल ही में मोटा राजस्व मिलता है। इस मामले में सिंगरौली जिला प्रदेश में अव्वल रहा है। अब सोने की खदानों से राजस्व की प्राप्ति और बढ़ जाएगी। सहायक खनिज अधिकारी कपिल मुनि शुक्ला का कहना है ‘सोने की खदानों से राज्य सरकार को हर साल लगभग 250 करोड़ तक राजस्व वसूलेगी।

पहलगाम हमले के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत, लोगों में उत्साह, सरकार से हथियार देने की कर रहे मांग

भोपाल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बावजूद, भोपाल के लोग अमरनाथ यात्रा के लिए उत्साहित हैं। वे बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। युवाओं में यात्रा को लेकर खास उत्साह है। कुछ युवा सरकार से हथियार देने की मांग कर रहे हैं ताकि वे अपनी सुरक्षा कर सकें। वहीं, कुछ का कहना है कि उन्हें सरकार और सेना पर भरोसा है। उन्हें विश्वास है कि बाबा महादेव की कृपा से सब ठीक रहेगा।ई गम और गुस्से का माहौल देश में गम और गुस्से का माहौल है। लेकिन भोपाल के लोगों का हौसला अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए अभी भी बुलंद है। भोपाल से जम्मू तक रजिस्ट्रेशन सेंटरों पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। रजिस्ट्रेशन कराने वाले श्रद्धालु कह रहे हैं कि आतंकियों ने निर्दोष लोगों पर हमला किया लेकिन इससे डरने की कोई बात नहीं है। वे कहते हैं कि जैसे हर साल यात्रा होती है, वैसे ही इस साल भी होगी। उन्हें भारतीय सेना, PM मोदी और सरकार पर पूरा भरोसा है। सरकार से हथियार देने की मांग कुछ श्रद्धालु बहुत उत्साहित दिख रहे हैं। उनका कहना है कि वे निहत्थे यात्रा पर नहीं जाना चाहते। वे चाहते हैं कि उन्हें हथियार दिए जाएं। ताकि जरूरत पड़ने पर वे सेना का साथ दे सकें। उनका मानना है कि अगर वे सशस्त्र रहेंगे तो कोई उन पर हमला करने की हिम्मत नहीं करेगा। एक श्रद्धालु ने कहा, ‘हमें सरकार हथियार दे दे ताकि अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकेंगे।’ एक और श्रद्धालु ने कहा, ‘उन्हें सरकार और सेना पर भरोसा है और बाबा महादेव की कृपा से सब कुशल रहेगा।’ इस हमले के बाद इतना परिवर्तन     अब लोग जत्थों में यात्रा की प्लानिंग कर रहे हैं। इसके साथ बाबा बर्फानी समिति व अमरनाथ सेवा समिति के पदाधिकारियों का दावा है कि उनका भंडारा निश्चित समय पर निर्धारित स्थान पर लगेगा।     श्रद्धालु अब और उत्साह के साथ खाद्य सामग्री का दान कर रहे हैं। मोहना निवासी विवेक शर्मा का कहना है कि पहली बार अमरनाथ यात्रा पर जाने की प्लानिंग की थी। पहले परिवार के एक-दो लोग भी साथ जा रहे थे।     पहलगाम हुए आतंकी हमले के बाद अब उनका विचार अकेले ही जाने का है। कोशिश है कि अब किसी जत्थे के साथ यात्रा के लिए जायें। क्योंकि पूर्व यात्रा कर चुके श्रद्धालु को भौगोलिक स्थिति के साथ सुरक्षा इंतजामों की जानकारी होती है।     प्रोफेसर डॉ. संजय पांडे ने बताया कि हमले के बाद से युवा यात्रा के लिए अधिक जानकारी ले रहे हैं और बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए उत्साह दिखा रहे हैं। पहली बार यात्रा पर जाने वाले उनसे जरूर सवाल कर रहे हैं कि.यात्रा के दौरान किस तरीके की सुरक्षा व्यवस्था होती है।     जो पूर्व में यात्रा कर चुके हैं, उन्हें पता है कि हर यात्री पर सेना के जवान की नजर होती है और सुरक्षा मापदंड अपनाते हुए यात्रा कराई जाती है। उन्होंने बताया कि 500 से अधिक यात्रियों का जत्था ले जाने की योजना थी। अब तक 150 लोगों के रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।     उनका जत्था दो जुलाई को अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना होना हैं, अगर रजिस्ट्रेशन में कोई परेशानी आई, तो एक-दो दिन कार्यक्रम आगे पीछे हो सकता है। भंडारे की तैयारियां शुरू कर दी है शुक्रवार से दानदाताओं ने खाद्य सामग्री देने का सिलसिला शुरू कर दिया है। लोगों के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आ रही है। नया बाजार स्थित पंजाब नेशनल बैंक में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किये जा रहे हैं। गुरुवार को 170 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। बैंक कर्मचारी पप्पू वर्मा ने बताया कि आतंकी हमले के बाद लोग पहलगाम से यात्रा शुरू करने के लिए अधिक रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं, क्योंकि यहां से यात्रा ज्यादा सुगम है। हर दिन हो रहे 200 तक रजिस्ट्रेशन भोपाल में जम्मू-कश्मीर बैंक में अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन हो रहा है। यह केंद्र सुबह 10 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक खुला रहता है। यहां हर दिन लगभग 100 से 200 लोग रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। इससे पता चलता है कि आतंक के डर के बावजूद लोगों की श्रद्धा और साहस कम नहीं हुआ है।

मुख्यमंत्री यादव की स्वीकृति मिलते ही वित्त विभाग ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते बढ़ाने की प्रक्रिया की शुरू

भोपाल राज्य कर्मचारियों को जल्द ही सरकार की ओर से तोहफा मिलने वाला है। इन कर्मचारियों का 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता ( Dearness Allowance ) बढ़ाने की कवायद चल रही है। आपको बता दें कि, इसका लाभ प्रदेश के 7 लाख अधिकारी और कर्मचारियों को मिलेगा।  आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश वित्त विभाग की ओर से महंगाई भत्ता बढ़ाने की प्रक्रिया को शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इसपर स्वीकृति मिलते ही इस एकमुश्त बढ़ोतरी को लागू कर दिया जाएगा। मौजूदा समय में राज्य के कर्मचारियों को 50 फीसदी महंगाई भत्ता मिल रहा है और ये नई बढ़ोतरी उनके आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में मददगार साबित होगी।  कर्मचारियों का कहना है कि प्रदेश कार्यरत प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का महंगाई भत्ता 55 प्रतिशत प्रदान करने के आदेश जारी हो गए है। मगर प्रदेश में ही कार्यरत कर्मचारी 50 फीसदी महंगाई भत्ता एवं राहत प्राप्त कर रहे हैं। जबकि महंगाई सबके लिए बराबर है। तृतीय कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार के द्वारा कर्मचारियों को 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता और महंगाई राहत प्रदान की जा रही है। प्रदेश में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा वन सेवा पुलिस सेवा के अधिकारियों को भी 55 प्रतिशत डीए और डीआर दी गई है, लेकिन प्रदेश के कर्मचारियों को महंगाई भत्ता और महंगाई रात से वंचित रखा गया है। सरकार ने बचा लिए 900 करोड़ रुपए आगे तिवारी ने बताया कि प्रदेश सरकार के द्वारा कई बार घोषणा की गई है कि केंद्र दर और तिथि से ही महंगाई भत्ता प्रदेश के कर्मचारियों प्रदान किया जाएगा, लेकिन जब ज्यादा समय जाता है तो सरकार पिछला बकाया नहीं दे पाती है। सरकार ने महंगाी भत्ता न देकर लगभग 900 करोड़ बचा लिए। वाहन और दिव्यांग भत्ता बढ़ाने के आदेश नहीं हुए जारी     प्रदेश सरकार ने लंबे समय बाद कर्मचारियों के वर्षों से लंबित विभिन्न भत्ते बढ़ाने का निर्णय लिया है। कुछ भत्तों में वृद्धि के आदेश भी जारी हो गए पर सामान्य प्रशासन विभाग ने वाहन और दिव्यांग भत्ते में वृद्धि के अभी तक आदेश जारी नहीं किए हैं।     जबकि, वित्त विभाग ने आदेश का प्रारूप तक उपलब्ध करा दिया है। सूत्रों का कहना है कि अब अगले सप्ताह दोनों भत्तों में वृद्धि के आदेश जारी करने की तैयारी हो गई है।   इस प्रकार की जाएगी नई बढ़ोतरी बढ़ोतरी का प्रतिशत : नई बढ़ोतरी 5 फीसदी की जाएगी। लाभार्थियों की संख्या : लगभग 7 लाख राज्य कर्मचारी और अधिकारियों का इसका फायदा मिलेगा। तारीख : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हरी झंडी मिलने के बाद एकमुश्त ये वृद्धि लागू कर दी जाएगी।

भारत की जल Strike से Pakistan की हुई हालत पतली, बाढ़ या सूखा… दोनों से पाकिस्तान में हाहाकार मचना फाइनल

नई दिल्ली पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव गहरा गया है. भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है और 1960 की ऐतिहासिक सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया है. भारत की मार से पाकिस्तान अंदर तक हिल गया है और नेता गीदड़भभकी देने लगे हैं. सिंधु जल संधि सस्पेंड होने के बाद पाकिस्तान पर संकट के बादल हैं. बाढ़ या सूखा… दोनों से पाकिस्तान में हाहाकार मचना तय है. हालात कुछ ऐसे हैं कि PAK को खुद पता नहीं है कि आगे क्या होने वाला है? दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान चली गई है. हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है, जिसे पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी माना जाता है. भारत भी साफ कर चुका है कि ‘सीमा पार आतंकवाद’ की जड़ें मिट्टी में मिला दी जाएंगी. भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए बड़े फैसले लिए हैं. भारत ने पाकिस्तान को कर दिया सूचित भारत ने पाकिस्तान को एक आधिकारिक पत्र के जरिए सूचित किया है कि सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा रहा है. पत्र में भारत ने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान द्वारा निरंतर हो रहे सीमा-पार आतंकवाद के चलते यह निर्णय लिया गया है. क्या है सिंधु जल संधि? साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में जल बंटवारा हुआ था. संधि के तहत भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों पर पूर्ण नियंत्रण दिया गया था. जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चेनाब नदी पर अधिकार दिया गया था, जो जम्मू-कश्मीर से होकर बहती हैं. सवाल उठ रहा है कि जल-बंटवारे के समझौते के निलंबन से पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा? अब क्या बदलेगा? 1. इंडस जल आयुक्तों की बैठकें बंद अब दोनों देशों के जल आयुक्तों की सालाना बैठकें नहीं होंगी, जिससे संवाद और विवाद निपटाने के रास्ते बंद हो जाएंगे. दरअसल, संधि के तहत दोनों देशों के दो आयुक्तों को साल में एक बार बारी-बारी से मिलने की व्यवस्था दी गई थी. भारत द्वारा संधि को निलंबित करने के बाद अब ऐसी कोई बैठक नहीं होगी. 2. जल संबंधी आंकड़े नहीं मिलेंगे भारत अब पाकिस्तान को नदियों का प्रवाह, बाढ़ की चेतावनी और ग्लेशियर पिघलने की जानकारी नहीं देगा. इससे पाकिस्तान में बाढ़ या सूखे की संभावना बढ़ सकती है. संधि के तहत भारत, पाकिस्तान को समय पर हाइड्रोलॉजिकल डेटा सर्कुलेट करता आ रहा था. इसमें बाढ़ की चेतावनी जारी की जाती थी. नदी के प्रवाह को साझा करना और ग्लेशियर पिघलने के पैटर्न पर अलर्ट दिया जाता था. अब पाकिस्तान को सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल स्तर के बारे में जानकारी की कमी के कारण संभावित सूखे या बाढ़ का खतरा है. 3. परियोजनाओं के बारे में नहीं मिलेगी जानकारी भारत अब पश्चिमी नदियों पर अपने जलविद्युत परियोजनाओं को बिना पाकिस्तान से सलाह-मशविरा किए आगे बढ़ा सकेगा. यानी दोनों देशों के बीच सूचना का प्रवाह रुक जाएगा. इस संधि ने पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों पर भारतीय जलविद्युत परियोजनाओं के डिजाइन को चिह्नित करने का अधिकार दिया था. 4. पाकिस्तानी आयुक्त को जम्मू-कश्मीर में प्रवेश नहीं पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त अब भारतीय क्षेत्रों का निरीक्षण नहीं कर सकेंगे, जिससे उन्हें भारतीय परियोजनाओं की जानकारी नहीं मिलेगी. इससे पहले पाकिस्तान के आयुक्त पश्चिमी नदियों और भारतीय जलविद्युत परियोजनाओं की स्थिति या रिपोर्ट लेने के लिए जम्मू-कश्मीर का दौरा करते आ रहे थे. 5. वार्षिक रिपोर्ट का प्रकाशन नहीं अब स्थायी सिंधु आयोग (Permanent Indus Commission) कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं करेगा, जिससे पाकिस्तान की सिंचाई और कृषि योजनाएं प्रभावित होंगी. सिंधु जल संधि के अनुसार, स्थायी सिंधु आयोग (PIC), सिंधु प्रणाली के बंटवारे का प्रबंधन करने के लिए द्विपक्षीय निकाय है. इसे नदियों के साझा उपयोग पर वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करनी होती है. लेकिन भारत द्वारा समझौते को सस्पेंड किए जाने के कारण वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की जाएगी, जिससे पाकिस्तान की सिंचाई और कृषि प्रणालियों के लिए जोखिम पैदा होगा. पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा? पाकिस्तान पहले से ही वित्तीय और राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहा है. इस फैसले से उस पर दूरगामी असर पड़ने वाला है. पाकिस्तान कृषि के लिए सिंधु नदी पर बहुत ज्यादा निर्भर है, जो इसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. पाकिस्तान की 90% सिंचाई प्रणाली सिंधु नदी पर आधारित है. जल आपूर्ति में किसी भी प्रकार का व्यवधान उसके कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है. पश्चिमी नदियों से पानी की आपूर्ति में कोई भी व्यवधान या भविष्य में व्यवधान पाकिस्तान में पानी की कमी को बढ़ा सकती है. फसल की पैदावार को कम कर सकती हैं और घरेलू अशांति को बढ़ावा दे सकती हैं. खासकर पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे पंजाब और सिंध जैसे प्रांतों में हालात बदतर हो सकते हैं. कृषि उत्पादन के अलावा बिजली आपूर्ति पर भी भारी असर पड़ेगा. पहले से ही पानी की कमी के कारण पाकिस्तान सालाना लगभग 19 मिलियन टन कोयला आयात करता है, लेकिन आगे कोयला आयात का वित्तीय बोझ और बढ़ सकता है. आज पाकिस्तान की जीडीपी का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कर्ज में डूबा हुआ है. पाकिस्‍तान के बिलबिलाने की वजह समझ‍िए जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि (IWT) को निलंबित करने का फैसला किया है। इस फैसले से पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। यही कारण है क‍ि वह ब‍िलब‍िला गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जल डेटा साझाकरण में रुकावट, फसल के मौसम में पानी की कमी और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान हो सकता है। हालांकि, इसका दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत पश्चिमी नदियों के पानी का पूरा इस्‍तेमाल करने के लिए कितने समय में बुनियादी ढांचा विकसित कर पाता है। इसमें एक दशक या उससे अधिक समय लग सकता है। सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर यह एक महत्वपूर्ण समझौता है। इस संधि के अनुसार, पूर्वी नदियां – सतलज, ब्यास और रावी – भारत को दी गईं। वहीं, पश्चिमी … Read more

उच्च शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: संविधान की पढ़ाई अनिवार्य, विभाग ने जारी की अधिसूचना

भोपाल मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने स्नातकोत्तर (Post Graduation) के सभी विद्यार्थियों के लिए संविधान (Constitution), मानवीय मूल्य (Human Values) और नैतिक शिक्षा (Ethics Education) की पढ़ाई जरूरी कर दी गई है। पहले यह विषय केवल आर्ट डिपार्टमेंट के छात्रों तक सीमित था। लेकिन अब विज्ञान, गणित और वाणिज्य (Science, Mathematics and Commerce) सहित सभी डिपार्टमेंट के विद्यार्थियों को इसे पढ़ना जरूरी कर दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी करते हुए इसे सत्र 2025-26 से लागू करने का निर्णय लिया है। बता दें कि नई अधिसूचना के बाद विज्ञान, गणित और वाणिज्य संकाय वालों को भी संविधान का पाठ पढ़ना होगा. संविधान, मानवीय मूल्य और नैतिक शिक्षा को वैल्यू एडेड पाठ्यक्रम के तौर पर एक अलग प्रश्न पत्र में शामिल किया जा रहा है. अधिकारियों की मानें तो विस्तृत संविधान का कितना हिस्सा और उसका कौन सा प्रविधान पढ़ाया जाएगा यह अध्ययन मंडल बाद में तय करेगा. अध्ययन मंडल इन तीनों विषयों को मिलाकर कर एक पाठ्यक्रम तैयार करेगा. संविधान का सिलेबस कैसे लागू होगा     यह नया वैल्यू एडेड सिलेबस (Value-Added Course) पोस्टग्रेजुएट के दूसरे या चौथे सेमेस्टर में पढ़ाया जाएगा। अगर कोई छात्र एक वर्ष का पीजी प्रोग्राम कर रहा है , तो उसे दूसरे सेमेस्टर में यह सिलेबस पढ़ाया जाएगा, जबकि दो वर्षीय कार्यक्रम करने वाले छात्रों को इसे चौथे सेमेस्टर में पढ़ाया जाएगा।     सिलेबस दो क्रेडिट डिजिट्स का होगा और इसमें पास होना अनिवार्य किया गया है। विषय की ब्रॉड आउटलाइन और पाठ्यविषय अध्ययन मंडल (Curriculum Study Board) के तहत तय किया जाएगा। तीनों विषयों को मिलाकर एक पाठ्यक्रम तैयार होगा अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत संविधान का कितना हिस्सा और उसका कौन सा प्रविधान पढ़ाया जाएगा यह अध्ययन मंडल बाद में तय करेगा। अध्ययन मंडल इन तीनों विषयों को मिलाकर कर एक पाठ्यक्रम तैयार करेगा। इस अधिसूचना के अनुसार स्नातकोत्तर चार सेमेस्टर का होगा। संविधान वाले वैल्यू एडेड विषय को दूसरे अथवा चौथे सेमेस्टर में पढ़ाया जाएगा। ऐसा इसलिए कि अगर कोई विद्यार्थी एक वर्ष का स्नातकोत्तर करता है तो उसे भी यह पढ़ा दिया जाए। दो वर्ष पढ़ाई का विकल्प चुनने वालों को यह चौथे सेमेस्टर में पढ़ाया जाएगा। यह पाठ्यक्रम दो क्रेडिट अंक का होगा, जिसमें विद्यार्थियों के लिए उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा। पीजी में मूल्यांकन प्रणाली में भी बदलाव स्नातकोत्तर कक्षाओं में मूल्यांकन प्रणाली बदली जाएगी। अब 60 प्रतिशत अंक लिखित परीक्षा और 40 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन से मिलेंगे। दोनों में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक पाना जरूरी होगा। प्रोजेक्ट, सेमिनार या लघु शोध प्रबंध में फेल होने पर दो सेमेस्टर में दोबारा मौका मिलेगा। अभी तक 85 प्रतिशत अंक मुख्य परीक्षा और 15 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन पर मिलते थे। अप्रैजल सिस्टम में भी बदलाव नई सिस्टम के मुताबिक, पोस्टग्रेजुएट स्तर पर अब कुल डिजिट्स में से 60% अंक लिखित परीक्षा (Written Examination) और 40% अंक आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) के आधार पर दिए जाएंगे। दोनों में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक अर्जित करना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, अगर कोई छात्र प्रोजेक्ट, सेमिनार या डिसर्टेशन में असफल होता है, तो उसे दो सेमेस्टरों के भीतर फिर से अवसर मिलेगा। कर्रेंटली रेटेड 85% मुख्य परीक्षा और 15% आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है। इसका उद्देश्य केया है अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग अनुपम राजन के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य विद्यार्थियों को संविधान की व्यापक जानकारी देना और उनमें ह्यूमन वैल्यूज और नैतिक शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इससे सभी फैकल्टीज के छात्रों में समान रूप से संवैधानिक समझ और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास होगा। क्या है हमारा भारतीय संविधान भारतीय संविधान (Indian Constitution) हमारे देश का सबसे बड़ा कानून है, जो यह बताता है कि देश कैसे चलेगा। इसमें लिखा है कि, सरकार कैसे काम करेगी और हर नागरिक के क्या अधिकार और कर्तव्य हैं। हमारा संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ। इसमें लोकतंत्र, समानता, आजादी और धर्मनिरपेक्षता जैसे बड़े सिद्धांतों को जगह दी गई है। इसमें सरकार के तीन हिस्से — संसद, सरकार और अदालत — के काम भी बताए गए हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जो सबको बराबरी का हक देता है।

ग्वालियर के सभी गेहूं खरीदी केंद्रों पर शीतल पेय पदार्थ भी किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे

भोपाल मध्य प्रदेश में इस समय गेहू खरीदी की जा रही है, उपार्जन केंद्रों पर किसानों से सरकार के प्रतिनिधि गेहूं खरीद रहे हैं, अब तक सरकार ने 6 लाख से अधिक किसानों से 56 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीद लिया है और अभी तक लगभग 4000 करोड़ रुपये का भुगतान भी किसानों को किया जा चुका है। खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं जिससे उन्हें कोई परेशानी ना ही इतना ही नहीं  किसानों का स्वागत भी वेलकम ड्रिंक्स से किया जा रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)  पर मध्य प्रदेश में अभी तक 6 लाख 44 हजार 878 किसानों से 56 लाख 85 हजार 477 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि किसानों को उपार्जित गेहूं का भुगतान भी लगातार किया जा रहा है। अभी तक लगभग 4000 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। खाद्य मंत्री ने बताया कि गेहूं  का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये है और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 175 रुपये प्रति क्विंटल इस पर बोनस दिया जा रहा है। इस तरह से गेहूं की खरीदी 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। किसान गेहूं उपार्जन के लिये 30 अप्रैल तक स्लाट बुक करा सकते हैं। प्रदेश के कई जिलों में लू जैसे हालात प्रदेश में गर्मी बहुत तेज पड़ रही है, कई जिलों में लू जैसे हालत हैं मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किये हैं मौसम को देखते हुए गेहूं उपार्जन केंद्रों पर सरकार के निर्देश पर किसानों के लिए ठंडा पानी, कूलर, छायादार बैठने की जगह की व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्था दी जा रही हैं, ग्वालियर जिले में तो किसानों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। किसानों का स्वागत नींबू की शिकंजी, ओआरएस व शरबत से ग्वालियर में बढ़ते हुए तापमान को ध्यान में रखकर जिले के उपार्जन केंद्रों पर किसानों और हम्मालों को शीतल जल के साथ-साथ वैलकम ड्रिंक के रूप में नींबू की शिकंजी, ओआरएस व शरबत जैसे पेय पदार्थ उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शुक्रवार को हरि लीला विपणन संस्था घाटीगाँव द्वारा संचालित उपार्जन केंद्र  एवं मोहना स्थित खरीदी केंद्र पर किसानों व हम्माल भाईयों को शरबत पिलाया गया। उपार्जन केंद्रों पर हुए स्वागत व अच्छी व्यवस्थायें पाए जाने पर किसानों ने सरकार के प्रति धन्यवाद जताया। उपार्जन केंद्रों पर किसानों का विशेष ध्यान कलेक्टर रुचिका चौहान ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए। सभी केंद्रों पर शीतल पेयजल व छाया सहित अन्य बुनियादी सुविधायें भी पुख्ता रहें। इसी कड़ी में अत्यधिक गर्मी को ध्यान में रखकर सभी खरीदी केंद्रों पर ओआरएस की व्यवस्था की गई है। साथ ही सुविधा के अनुसार अन्य शीतल पेय पदार्थ भी किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब तक की गई गेहूं खरीदी शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक प्रदेश में अभी तक सीहोर में 6 लाख 9 हजार 192 मीट्रिक टन , उज्जैन में 5 लाख 98 हजार 610, विदिशा में 4 लाख 63 हजार 658, रायसेन में 4 लाख 63 हजार 338, शाजापुर में 3 लाख 26 हजार 19, भोपाल में 3 लाख 12 हजार 598, राजगढ़ में 3 लाख 01 हजार 900, देवास में 2 लाख 64 हजार 84, नर्मदापुरम में 2 लाख 61 हजार 47, इंदौर में 2 लाख 16 हजार 494, सागर में 1 लाख 97 हजार 658, आगर मालवा में 1 लाख 64 हजार 280, सिवनी में 1 लाख 57 हजार 254, मंदसौर में 1 लाख 44 हजार 379, हरदा में 1 लाख 3 हजार 663, रतलाम में 86 हजार 565, दमोह में 85 हजार 705, नरसिंहपुर में 74 हजार 855 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इन जिलों में भी जारी है गेहूं उपार्जन इसी तरह श्योपुर में 50 हजार 190 मीट्रिक टन, दतिया में 46 हजार 310, शिवपुरी में 42 हजार 812, खण्डवा में 40 हजार 149, छतरपुर में 36 हजार 501, ग्वालियर में 35 हजार 229, कटनी में 34 हजार 48, गुना में 33 हजार 200, रीवा में 31 हजार 689, जबलपुर में 30 हजार 940, अशोकनगर में 30 हजार 876, नीमच में 30 हजार 241, पन्ना में 29 हजार 433, मण्डला में 29 हजार 340, भिण्ड में 26 हजार 204, बैतूल में 21 हजार 442, झाबुआ में 21 हजार 195, मैहर में 19 हजार 643, छिन्दवाड़ा में 17 हजार 896, मुरैना में 15 हजार 60, टीकमगढ़ में 8 हजार 628, शहडोल में 2 हजार 943, खरगौन में 2595, निवाड़ी में 1557, सिंगरौली में 1370, उमरिया में 1360, डिण्डोरी में 1254, मऊगंज में 1227, सीधी 874, बालाघाट में 636, अनूपपुर में 463 अलीराजपुर 214 और पांढुर्णा में 44 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है।

पेंच नेशनल पार्क में सनसनीखेज घटना: बाघिन पीएन-42 की रहस्यमयी तरीके से मौत, पंजे और दांत गायब

Sensational incident in Pench National Park: Tigress PN-42 died mysteriously, claws and teeth missing पेंच नेशनल पार्क के रुखड़ बफर क्षेत्र में शनिवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने वन विभाग को हिला कर रख दिया। रुखड़ बीट के मासूरनाला इलाके में गश्त कर रहे दल को तेज दुर्गंध ने सतर्क किया। जांच करने पर नाले की रेत में आंशिक रूप से दबा हुआ एक बाघिन का शव बरामद हुआ। टाइगर रिजर्व के फोटो डेटाबेस से उसकी पहचान बाघिन पीएन-42 के रूप में हुई, जो 2016 में पहली बार कैमरा ट्रैप में कैद हुई थी। उस समय उसकी उम्र करीब 2-3 वर्ष थी और अब वह लगभग 12 साल की हो चुकी थी। प्राकृतिक मौत या कोई साजिश? वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा के नेतृत्व में एनटीसीए प्रोटोकॉल के तहत शव का पोस्टमार्टम किया गया। प्रारंभिक जांच में बाघिन के शरीर पर न तो जहर, करंट और न ही गोली लगने के कोई निशान मिले। इससे उसकी प्राकृतिक मौत का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं होता। पोस्टमार्टम के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बाघिन के चारों पंजे कुल्हाड़ी या किसी धारदार हथियार से काटे गए थे और तीन कैनाइन दांत भी गायब थे। इस हरकत से वन्यजीव अपराध की आशंका गहरा गई है। 10 हजार रुपये का इनामपेंच टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक देवप्रसाद ने इस अपराध के पीछे जिम्मेदार लोगों को पकड़वाने में मददगार सूचना देने पर 10 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है। वन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है और हर पहलू से पड़ताल जारी है। सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्थायह घटना न केवल पेंच नेशनल पार्क की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के लिए भी गंभीर चेतावनी है। आखिर कौन हैं वे लोग, जिन्होंने मृत बाघिन के साथ ऐसी क्रूरता की? क्या यह किसी तस्करी गिरोह की करतूत है? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। पेंच टाइगर रिजर्व, जो बाघों के संरक्षण के लिए विश्व प्रसिद्ध है, अब इस सनसनीखेज मामले के चलते सुर्खियों में है। वन्यजीव प्रेमी और स्थानीय लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हमारी नजर इस जांच पर बनी हुई है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live