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पाकिस्‍तान साइबर हमले की ‘हवा’ बनाने में जुटा, जिसका कोई फायदा नहीं

नई दिल्ली भारत से युद्ध की आशंका में डरा पाकिस्‍तान दर-दर की ठोंकरे खाकर दुनिया के अन्‍य देशों में मदद के लिए ग‍िड़‍डिड़ा रहा है। धमकी तो वह न्‍यूक्लियर हमले की देता है, लेकिन बचकानी हरकत के रूप में भारत पर साइबर हमले कर रहा है। इन साइबर हमलों में वह पहलगाम आतंकी हमले से अपना पल्‍ला झाड़ रहा है। भारत को धमकियां दे रहा है। हकीकत यह है कि पाकिस्‍तान ऐसी ‘हवा’ बनाने में जुटा है, जिसका कोई फायदा उसे नहीं हुआ है। पड़ोसी की ऐसी हरकतों पर देश की सरकार रिएक्‍ट करना तक सही नहीं समझती। लेकिन हम और आप इसी बहाने साइबर अटैक की गुत्‍थी को समझते हैं। क्‍या होते हैं साइबर अटैक एक्‍सपर्ट के अनुसार, साइबर अटैक में किसी देश के नेटवर्क, उसके कंप्‍यूटर सिस्‍टम और डिजिटल डिवाइस को टार्गेट किया जाता है। उन तक पहुंचने की कोशिश की जाती है और सिस्‍टम में स्‍टोर डेटा, ऐप्‍स या बाकी चीजों को चुराने का प्रयास होता है। कई बार सिस्‍टम में मौजूद डेटा को बर्बाद करने के लिए भी ऐसे अटैक किए जाते हैं। साइबर हमला करने वाले किसी भी देश से हो सकते हैं। वो सरकारी वेबसाइटों से लेकर प्राइवेट कंपनियों की वेबसाइटों को निशाना बना सकते हैं। क्‍याें किया जाता है साइबर अटैक एक्‍सपर्ट के अनुसार, साइबर अटैक के पीछे तीन तरह की मानसिकताएं होती हैं। यह क्र‍िमिनल एक्टिविटी के लिए किया जाता है। राजनीतिक वजह या फ‍िर पर्सनल वजहों से भी साइबर अटैक होता है। क्र‍िमिनल एक्टिवि‍टी में पैसे चुराने या बैंक अकाउंट हैक करने की कोशिश होती है। या फ‍िर डेटा को चुराकर पैसों के लिए उसे डार्क वेब पर बेचा जाता है। लोगों से उनकी जानकारी बदलने पैसे भी ऐंठे जाते हैं। जो साइबर अटैक पर्सनल वजहों से होता है, उसमें कई बार कंपनियों के पूर्व कर्मचारी ही ऑफ‍िसेज को टार्गेट करते हैं। वह संवेदनशील डेटा में सेंध लगाते हैं। वहीं, पॉलिटिकल कारणों में साइबर वॉर जैसी चीज को अंजाम दिया जाता है। इसमें एक देश अपने दुश्‍मन देशों की सरकारी एजेंसियों से जुड़ी वेबसाइटों को टार्गेट करता है। पाकिस्‍तान भी इन दिनों यही करने की कोशिश में जुटा है। इसका कोई खास फायदा उसे होता हुआ नहीं दिख रहा। किसे टार्गेट करता है साइबर अटैक साइबर अटैक में मुख्‍य तौर पर एक कंप्‍यूटर नेटवर्क को टार्गेट किया जाता है। नेटवर्क में सेंध लगाने का मकसद होता है पैसा चुराना, फाइनेंशल डेटा चुराना, क्‍लाइंट लिस्‍ट पर कब्‍जा करना, कस्‍टमर डेटा चुराना जिसमें ग्राहकों की पर्सनल जानकारी भी शामिल होती है। इसके साथ ही इमेल अड्रेस, लॉगइन क्रेडेंशियल को हथियाने की कोशिश होती है। कई मामलों में हमलवार कुछ भी चोरी नहीं करते, बल्कि सिस्‍टम को बाधित करके गलत सूचनाएं फैलाते हैं जैसा कि मौजूदा केस में हुआ है। कई हैकर्स वेबसाइटों के होम पेज को टार्गेट करके वहां अपना मैसेज दिखाते हैं।

अंतराष्ट्रीय लॉ मूट कोर्ट प्रतियोगिता ऑक्सफोर्ड में जज बनी छत्तीसगढ़ की सुगंधा जैन

अंतराष्ट्रीय लॉ मूट कोर्ट प्रतियोगिता ऑक्सफोर्ड में जज बनी छत्तीसगढ़ की सुगंधा जैन विश्व पटल पर भारत का नाम रोशन किया संपूर्ण भारत से बतौर जज अकेले हुई शामिल मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं सांसद ने दी बधाई एवं शुभकामनाएं! रायपुर बोनवेरो इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन राइट्स की ओर से 21 अप्रैल से शुक्रवार 25 अप्रैल 2025 के बीच ऑक्सफोर्ड में आयोजित हुए 18वें वार्षिक मोनरो ई. प्राइस मीडिया लॉ मूट कोर्ट प्रतियोगिता के अंतर्राष्ट्रीय राउंड में छत्तीसगढ़ की बेटी और सुप्रीम कोर्ट की वकील सुगंधा जैन संपूर्ण भारत से बतौर जज अकेले शामिल हुई। यह पहला अवसर था जब विधि से जुड़ा छत्तीसगढ़ का कोई व्यक्ति अंतराष्ट्रीय लॉ से संबद्ध आयोजन में जज बनी है। इस प्रतिष्ठित आयोजन में दुनिया भर के लगभग 150 देशों के लॉ यूनिवर्सिटी के छात्र शामिल हुए थे। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय लॉ से संबंधित बारीकियों विशेष तौर पर मानवाधिकार पर भी जज के रूप में  सुगंधा ने दुनियाभर के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। रायपुर छत्तीसगढ़ की रहने वाली 30 वर्षीय सुगंधा जैन पिछले 8 सालों से सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रही है। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के शासकीय संस्थानों से संबद्ध है। वह महिला उत्थान एवं कानूनी जागरूकता को लेकर जन जागरण अभियान में भी अपना योगदान देती रही है। आज लॉ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अंतर्राष्ट्रीय मंच में पहुंचकर भारत का मान बढ़ाने वाली सुगंधा की  इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय,उप मुख्यमंत्री अरुण साव एवं सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उन्हें छत्तीसगढ़ का गौरव बताते हुए बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी है। और उन्हें नौजवान पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया है।

धोनी की CSK ने रचा शर्मनाक इतिहास, प्लेऑफ की रेस से हुई बाहर

चेन्नई इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल 2025) के 49वें मैच में पंजाब किंग्स ने चेन्नई सुपरकिंग्स को 4 विकेट से करारी शिकस्त दी. इस हार के साथ ही सीएसके की प्लेऑफ में पहुंचने की उम्मीद भी खत्म हो गई है. इस मुकाबले में टॉस जीतकर पंजाब किंग्स ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया था. सीएसके की टीम पूरे 20 ओवर नहीं खेल सकी और 190 पर सिमट गई थी. चहल ने 19वें ओवर में हैट्रिक लगाई और एक ओवर में 4 विकेट झटके थे. इसके जवाब में उतरी पंजाब ने अय्यर की तूफानी पारी के दम पर ये मैच 20वें ओवर में चेज कर लिया. ऐसी रही पंजाब की बल्लेबाजी 191 के जवाब में उतरी पंजाब की शुरुआत अच्छी रही. प्रियांश आर्य और प्रभसिमरन ने कमाल की शुरुआत की. दोनों के बीच 44 रनों की साझेदारी हुई. लेकिन 5वें ओवर में खलील ने प्रियांश का विकेट झटका. प्रियांश ने 23 रनों की पारी खेली. लेकिन इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर और प्रभसिमरन के बीच शानदार साझेदारी हुई. दोनों ने 10 ओवर में पंजाब का स्कोर 90 के पार पहुंचा दिया. लेकिन 13वें ओवर में प्रभसिमरन का विकेट गिर गया. प्रभसिमरन ने 54 रनों की पारी खेली. लेकिन एक छोर पर कप्तान श्रेयस अय्यर टिके रहे. उन्होंने 32 गेंदों पर फिफ्टी लगाई. इसके बाद नेहाल वढ़ेरा भी सस्ते में आउट हो गए. लेकिन अय्यर ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी जारी रखी. अय्यर ने 42 गेंद में 72 रनों की आतिशी पारी खेली और 19वें ओवर में उनका विकेट गिरा. लेकिन उनकी इस पारी के दम पर पंजाब ने ये मुकाबला 4 विकेट से जीत लिया. इस हार के साथ ही चेन्नई की प्लेऑफ में पहुंचने की उम्मीद भी खत्म हो गई है. ऐसी रही चेन्नई की बल्लेबाजी पहले बल्लेबाजी करने उतरी चेन्नई की शुरुआत अच्छी नहीं रही. तीसरे ही ओवर में चेन्नई को पहला झटका लगा जब शेख रसीद को अर्शदीप ने अपना शिकार बनाया. रसीद के बल्ले से केवल 11 रन ही निकले. इसके बाद अगले ही ओवर में आयुष म्हात्रे भी अपना विकेट गंवा बैठे. आयुष के बल्ले से 7 रन आया. इसके बाद जडेजा अच्छी लय में दिख रहे थे. लेकिन छठे ही ओवर में बरार ने उन्हें पवेलियन का रास्ता दिखाया. जडेजा के बल्ले से 17 रन आए. हालांकि, इसके बाद सैम करन और डेवाल्ड ब्रेविस के बीच एक अच्छी साझेदारी पनपी. हालांकि, 15वें ओवर में ब्रेविस का विकेट गिरा और 78 रनों की पार्टनरशिप टूट गई. लेकिन दूसरे छोर पर सैम करन टिके रहे. सैम करन ने 30 गेंद में अर्धशतक जड़ा. फिफ्टी जड़ने के बाद करन ने तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी की. 18वें ओवर में उनका विकेट गिरा. करन ने 47 गेंद में 88 रनों की तूफानी पारी खेली. दुबे के साथ भी उनकी 46 रनों की साझेदारी हुई. एमएस धोनी के बल्ले से 11 रन निकले. उन्होंने चहल के ओवर में एक छक्का लगाया. लेकिन इसके बाद चहल ने हैट्रिक लगाई. 19वें ओवर में चहल ने कुल 4 विकेट झटके. चेन्नई की टीम 20 ओवर भी नहीं खेल सकी और 190 रन पर ही सिमट गई. चेपॉक में लगाई रिकॉर्ड्स की झड़ी चहल ने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ चेपॉक स्टेडियम में खेलते हुए एक ही ओवर में चार विकेट लेकर इतिहास रच दिया. इस ओवर में उन्होंने हैट्रिक भी पूरी की, जो आईपीएल में उनकी दूसरी हैट्रिक थी. इससे पहले उन्होंने 2022 में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ ब्रेबोर्न स्टेडियम में हैट्रिक ली थी. एक ओवर में 4 विकेट लेने वाले गेंदबाज अमित मिश्रा (SRH vs PWI, पुणे 2013) – युजवेंद्र चहल (RR vs KKR, ब्रेबोर्न 2022) – आंद्रे रसेल (KKR vs GT, नवी मुंबई 2022) – युजवेंद्र चहल (PBKS vs CSK, चेन्नई 2025) आईपीएल में सर्वाधिक हैट्रिक – अमित मिश्रा – 3 (2008, 2011, 2013) – युवराज सिंह – 2 (2009) – युजवेंद्र चहल – 2 (2022, 2025) आईपीएल में सर्वाधिक 4+ विकेट हॉल – युजवेंद्र चहल – 9 – सुनील नारायण – 8 – लसिथ मलिंगा – 7 – कगिसो रबाडा – 6 पंजाब किंग्स के लिए हैट्रिक लेने वाले गेंदबाज – युवराज सिंह – 2 – अमित मिश्रा – 1 – सैम करन – 1 – युजवेंद्र चहल – 1 चहल का यह प्रदर्शन न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि उनकी टीम के लिए भी गेम-चेंजर साबित हुआ है. उनकी गेंदबाजी ने पंजाब किंग्स को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाई हैं और उन्हें प्लेऑफ की दौड़ में बनाए रखा है. बता दें कि इस मुकाबले में टॉस जीतकर पंजाब किंग्स ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया था. सीएसके की टीम पूरे 20 ओवर नहीं खेल सकी और 190 पर सिमट गई थी. चहल ने 19वें ओवर में हैट्रिक लगाई और एक ओवर में 4 विकेट झटके थे. इसके जवाब में उतरी पंजाब ने अय्यर की तूफानी पारी के दम पर ये मैच 20वें ओवर में चेज कर लिया. प्लेऑफ की दौड़ से हुई बाहर चेन्नई सुपर किंग्स की टीम 10 मैच में 8वीं हार के साथ ही आईपीएल 2025 के प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई है। सीएसके ने मुंबई के खिलाफ जीत के साथ सीजन की शुरुआत की थी लेकिन उसके बाद उसका हाल बेहाल हो गया। सीएसके उसके बाद नौ मुकाबलों में से केवल एक लखनऊ के खिलाफ लखनऊ में जीत दर्ज कर सकी और 8 मुकाबले गंवा दिए। इसके साथ ही उसका आईपीएल 2025 में सफर खत्म हो गया।​ चेपॉक में मिली लगातार पांच हार सीएसके ने आईपीएल इतिहास में पहली बार अपने घरेलू मैदान में लगातार पांच मैच गंवाए हैं। इससे पहले साल 2008 में चेन्नई ने अपने घरेलू मैदान पर 7 में से चार मैच गंवाए थे। 18 साल बाद घर पर सीएसके का हाल बेहाल हुआ है। चेन्नई को आरसीबी, दिल्ली कैपिटल्स, केकेआर, सनराइजर्स हैदराबाद और पंजाब किंग्स के खिलाफ घर पर हार मिली है।​ लगातार दूसरी बार प्लेऑफ में नहीं हुई एंट्री चेन्नई सुपर किंग्स 18 साल के आईपीएल के इतिहास में लगातार दूसरी बार प्लेऑफ से बाहर हो गई है। पिछले सीजन आखिरी वक्त में आरसीबी ने नेट रन रेट के आधार पर सीएसके को पीछे छोड़ दिया था। 2020 के बाद तीसरी बार सीएसके प्लेऑफ में पहुंचने में … Read more

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में 317 पदों पर निकली भर्ती

प्रयागराज सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए खुशखबरी है। University of Allahabad में एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, और प्रोफेसर पदों के लिए भर्ती निकली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार विश्वविद्यालय की ऑफिशियल वेबसाइट allduniv.ac.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में कुल 317 पदों पर वैकेंसी निकली है। जिनमें प्रोफेसर के 64 और एसोसिएट प्रोफेसर के लिए 126 पदों पर भर्ती होनी है। साथ ही सहायक प्रोफेसर के कुल 127 पदों पर भी भर्ती निकली है। इन पदो के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गया है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार allduniv.ac.in पर जाकर 2 मई 2025 तक आवेदन कर सकते है। शिक्षा और योग्यता सहायक प्रोफेसर के पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर की डिग्री होनी चाहिए। उम्मीदवारों को जेआरएफ, पीएचडी या फिर नेट में से कोई एक योग्यता होनी चाहिए। तभी इस पद पर आवेदन करने के लिए आप पात्र होंगे। एसोसिएट प्रोफेसर के लिए उम्मीदवारों को संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर की डिग्री होनी चाहिए। ध्यान रखे कि इस पद के लिए अनुसंधान कार्य और अनुभव की शर्तें भी लागू हो सकती हैं। इसलिए अपनी तैयारी पूरी रखे। इसके अलावा प्रोफेसर पद के लिए संबंधित विषय में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक होने चाहिए। साथ ही मास्टर डिग्री और उच्च स्तर के शैक्षणिक अनुभव भी होनी चाहिए। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार आवेदन करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट allduniv.ac.in पर जाएं। उसके बाद होमपेज पर allduniv.ac.in पर क्लिक करें। जिसके बाद अपना रजिस्ट्रेशन कराएं और आवेदन में मांगी गई सारे डिटेल्स को सावधानी पूर्वक भरे। अंत में एक बार सारी चीजों को चेक करे और आवेदन शुल्क का भुगतान करके फॉर्म सबमिट कर दें।

छत्तीसगढ़ में लोगों को गर्मी से राहत, गरज-चमक के साथ बारिश के आसार

रायपुर छत्तीसगढ़ में लोगों को गर्मी से राहत बने रहेगी। पिछले कुछ दिनों से अधिकांश क्षेत्रों में बारिश, गरज-चमक और ओलावृष्टि हुई। इससे तापमान में गिरावट हुई है। मौसम विभाग ने अगले 5 दिनों तक प्रदेश में अधिकतम तापमान में कोई विशेष बदलाव नहीं होने की संभावना जताई है। आज भी कई जिलों में अंधड़ चलने, व्रजपात और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। बीते 24 घंटों में सबसे अधिकतम तापमान दुर्ग में 39.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, एक उत्तर दक्षिण द्रोणिका उत्तर पश्चिम मध्य प्रदेश से उत्तर तमिलनाडु 1.5 किमी ऊंचाई तक विस्तारित है। उत्तर-दक्षिण द्रोणिका उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उसके आसपास के क्षेत्रों से ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण से विदर्भ, मराठवाड़ा, आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु होते हुए दक्षिण तमिलनाडु तक औसत समुद्र तल से 0.9 किमी ऊपर स्थित है। जिसके चलते आज कुछ इलाकों में हल्की वर्षा होने अथवा गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। साथ ही गरज चमक के साथ अंधड़ चलने, वज्रपात होने और ओलावृष्टि होने की संभावना है। वहीं कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवा (40-50 किमी/प्रति घंटे) चलने की संभावना है। पिछले 24 घंटों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 18.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रायपुर में गरज-चमक के साथ बौछारें रायपुर में आज आकाश आंशिक मेघमय रहने तथा बादल गरजने और चमकने के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। अधिकतम 39°C और न्यूनतम तापमान 23°C के आसपास रहने की संभावना है।

गांधी सागर से राणा प्रताप सागर में आएगा लगभग 892 एमसीयूएम पानी, कोटा, बूंदी, बारां, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर की बुझेगी प्यास

जयपुर मध्यप्रदेश के गांधी सागर बांध से रावतभाटा स्थित राणा प्रताप सागर बांध में लगभग 892 मिलियन घन मीटर जल आएगा। राजस्थान सरकार ने मध्यप्रदेश सरकार की मांग पर उनकी महत्वाकांक्षी पंप स्टोरेज परियोजना के निर्माण के लिए गांधी सागर बांध का जलस्तर घटाने के परिप्रेक्ष्य में यह अहम निर्णय लिया है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आगामी सप्ताह में ही गांधी सागर बांध से जल प्रवाह कार्य शुरू किए जाने की संभावना है। इस निर्णय से राजस्थान के कोटा, बूंदी, बारां, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर को सिंचाई व पेयजल संकट से निजात मिल सकेगी। राणा प्रताप सागर बांध की कुल भराव क्षमता 352.81 मीटर है और मौजूदा समय में यह अपनी क्षमता का लगभग 70 प्रतिशत भरा हुआ है। इसमें कुल 2905 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी आ सकता है और फिलहाल यह 2026 मिलयन क्यूबिक मीटर के स्तर तक भरा हुआ है। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में प्रमुख अभियंता जल संसाधन विभाग, मध्यप्रदेश ने 29 मार्च को जल संसाधन विभाग, राजस्थान को पत्र लिखा था। इसमें गांधी सागर बांध के जलस्तर को कम करने के लिए राजस्थान सरकार से अनुरोध किया गया था। वर्तमान में गांधी सागर बांध का जलस्तर 395.003 मीटर है। राणा प्रताप सागर में ही गुंजाइश चंबल नदी प्रणाली के तहत राजस्थान में राणा प्रताप सागर बांध, जवाहर सागर बांध और कोटा बैराज स्थित हैं। तीनों ही जगह जल भंडारण की क्षमता सीमित है। वर्तमान में उपलब्ध जलस्तर के अनुसार राणा प्रताप सागर बांध में लगभग 892 एमसीयूएम, जवाहर सागर बांध में 10.76 एमसीयूएम और कोटा बैराज में 3.60 एमसीयूएम तक ही जल संग्रहीत किया जा सकता है। ऐसे में गांधी सागर बांध से राणा प्रताप सागर बांध में उपलब्ध शेष भराव लगभग 892 एमसीयूएम की सीमा तक ही जल प्रवाहित किया जा सकेगा।   ग्रीष्मकाल के दृष्टिगत रहेगा उपयोगी राजस्थान सरकार ने व्यापक विश्लेषण एवं भविष्य की आवश्यकताओं के दृष्टिगत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राणा प्रताप सागर बांध में संग्रहित जल आगामी ग्रीष्मकाल में पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित होगा। राणा प्रताप सागर बांध से विद्युत उत्पादन के लिए भी जल का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।   यह निर्णय हमारी सरकार की दूरदर्शी नीति, जल आवश्यकताओं और परस्पर सहयोग की दृष्टि से लिया गया है। भविष्य में भी दोनों राज्यों के बीच जल संसाधनों के समुचित प्रबंधन और उपयोग के लिए समन्वय बना रहेगा। -सुरेश सिंह रावत, जल संसाधन मंत्री

836 करोड़ की लागत से भोपाल के 16 KM लंबे अयोध्या बाइपास मार्ग के चौड़ीकरण का काम 1 जून से

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रत्नागिरी इलाके से लेकर आशाराम तिराहे तक 16 किलोमीटर लंबे अयोध्या बाइपास मार्ग के चौड़ीकरण का काम 1 जून 2025 से शुरू होने जा रहा है। काम की लागत 836 करोड़ रुपए आने की संभावना है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंयक कल्याण राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने इस संबंध में मंत्रालय में निर्माण एजेंसी एनएचएआई के अधिकारियों और संबंधित विभागों के अन्य अधिकारियों निर्माण कार्य की प्रगति को लेकर समीक्षा बैठक की।  इस दौरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवांश नरवाल ने बताया कि, सबसे पहले सर्विस रोड बनाई जाएगी, ताकि यातायात बाधित न हो। चौड़ीकरण में आने वाले पेड़ों को हटाया जाएगा। साथ ही, इनके बदले में इसी सड़क पर चार गुना से ज्यादा पेड़ लगाए जाएंगे। सड़क चौड़ीकरण में आने वाले बिजली पोल- पाइप लाइन को शिट करने के लिए भी समय सीमा तय की गई है। 6 प्लस 2 यानी 8 लेन होगी सड़क राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि, करीब 2 साल में इस परियोजना को पूरा किया जाएगा। निर्माण कार्य का दायित्व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंपा गया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 836 करोड़ रुपए है। चौड़ीकरण का काम 1 जून से शुरू होगा। मुख्य सड़क निर्माण से पहले सर्विस रोड बनाई जाएगी, ताकि शहर का यातायात बाधित न हो। यह बायपास वर्तमान में 6 लेन है। 2 सर्विस रोड निर्माण के बाद यह 8 लेन हो जाएगा। आनंद नगर में बनेगा फ्लाई ओवर बैठक में आनंद नगर लाई ओवर निर्माण, रत्नागिरी तिराहे पर मैट्रो रेल लाई ओवर निर्माण व अन्य निर्माण कार्यों उकी समीक्षा की गई। आनंद नगर फ्लाई ओवर निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण अगले एक सप्ताह में पूरा करने के निर्देश दिए गए। मेट्रो के लिए भी यहां काम होगा और एलिवेटेड लेन बनेगी। उन्होंने बायपास चौड़ीकरण के दौरान 8 हजार पेड़ों की कटाई के बदले 4 गुना अधिक पौधों का रोपण करने का दावा किया हैं। इस बायपास के दोनों ओर 8 हजार पेड़ काटे जाएंगे। यह प्रदेश की आदर्श सड़क बनेगी राज्यमंत्री गौर ने स्पष्ट कहा हैं कि निर्माण में किसी भी प्रकार की अड़चन को जल्द रूप से हल किया जाएं। कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो जल्द से जल्द कार्य को पूरा करना हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रदेश की एक आदर्श सड़क बनेगी, जिसमें फ्लाईओवर और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी शामिल होंगी।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और रीजनल कॉन्क्लेव के निवेशकों को MP में प्लॉट लेना महंगा हो गया

भोपाल  मध्यप्रदेश में मई में निवेशक और उद्योगपति औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉट के लिए आवेदन कर सकेंगे। अब नई कलेक्टर गाइडलाइन के रेट लागू होने के बाद प्लॉट 30 से 50% तक महंगे हो गए हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और रीजनल कॉन्क्लेव में आए निवेशकों को भी प्लॉट लेना महंगा हो गया है। मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने अपने औद्योगिक पार्कों में 319 प्लॉट निकाले हैं। एमएसएमई पोर्टल के जरिए प्लॉट आवंटन प्रक्रिया एक मई से शुरू होने जा रही है। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्ययम उद्यमों के लिए लगभग 1100 प्लॉट उपलब्ध होंगे। एमएसएमई में प्रक्रिया में बदलाव के चलते पिछले करीब सात माह से प्लॉट(Property Rate) आवंटन बंद था। इस संबंध में उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार ने बताया कि भूमि आवंटन के लिए पोर्टल बनाया गया है। इसी पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। ऑनलाइन ही प्रस्ताव मंगाकर ई-ऑक्शन के माध्यम से प्लॉट आवंटन किया जाएगा। अब पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर प्लॉट आवंटन बंद कर दिया गया है। प्लॉट्स की नई दरें जारी कर दी गई हैं। इसी के अनुसार आवंटन होगा। पीथमपुर में जमीन सबसे ज्यादा महंगी नई कलेक्टर गाइडलाइन में प्रदेश में जमीन के औसतन रेट 30% तक बढ़े हैं। कुछ स्थानों पर 50% तक। एमपीआइडीसी के इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन, देवास, जबलपुर, ग्वालियर के औद्योगिक क्षेत्रों में रेट ज्यादा बढ़े हैं। पीथमपुर में 50% तक रेट बढ़े हैं। जीआइएस, रीजनल कॉन्क्लेव में इन्हीं क्षेत्रों में निवेश के प्रस्ताव ज्यादा आए हैं। निवेशक यदि अब जमीन आवंटन कराएंगे तो 50% ज्यादा रेट देना होगा। एमएसएमई के औद्योगिक क्षेत्रों में भी मक्सी, उज्जैन, ग्वालियर, सुभाषनगर सागर, भोपाल के गोविंदपुरा आदि क्षेत्रों मेंरेट ज्यादा बढ़े हैं। एमपीआइडीसी के प्लॉट 15 जिलों में एमपीआइडीसी ने धार, झाबुआ, भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर, उज्जैन, नीमच, रतलाम, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, राजगढ़, विदिशा, कटनी, मंडला और जबलपुर जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों में कुल 319 प्लॉट निकाले हैं। एमपीआइडीसी से प्लॉट आवंटन के लिए 9 मई को ऑनलाइन ऑक्शन होगा।

नक्सली सफाए अभियान के अंतर्गत तेंदूपत्ता ठेकेदार सूचना दिए बगैर जंगल में कैश और वाहन नहीं ले जा सकेंगे

बालाघाट एमपी की बालाघाट पुलिस ने तेंदूपत्ता सीजन में नक्सलियों के फंडिंग रोकने के लिए विशेष प्लान बनाया है. अब ठेकेदार पुलिस को सूचना दिए बगैर जंगल में कैश और वाहन नहीं ले जा सकेंगे. दरअसल, बालाघाट जिले में इस बार 21 ठेकेदार और 58 से अधिक तेंदूपत्ता समितियां काम करेंगी. करीब 720 फड़ों में तुड़ाई और संग्रहण का काम होगा. पुलिस ने 250 तेंदूपत्ता फड़ को नक्सल प्रभावित संवेदनशील श्रेणी में शामिल किया है. नक्सली तेंदूपत्ता के सीजन में अवैध वसूली करते हैं. लेकिन इस पर अंकुश लगाने के लिए बालाघाट पुलिस-प्रशासन ने 2026 नक्सली सफाए अभियान के अंतर्गत विशेष कार्य योजना बनाई है. बता दें कि जिले के दक्षिण और उत्तर सामान्य वनमंडल में तेंदूपत्ता तुड़ाई और संग्रहण का काम होता है. इस काम से स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों को रोजगार मिलता है. शासन के निर्देश पर मजदूरों को बोनस भी दिया जाता है. बालाघाट का तेंदूपत्ता अच्छी क्वालिटी का होने से महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के ठेकेदार वहां आते हैं.

धन कुबेर सौरभ के करीबियों पर भी कसेगा शिकंजा, एक इंस्पेक्टर व चार आरक्षकों को लोकायुक्त ने भेजा नोटिस

भोपाल  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बहुचर्चित RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा (Saurabh Sharma)  से मिली अकूत सम्पत्ति के मामले में भले ही उसके परिजनों को कोर्ट से जमानत की राहत मिल गई हो, लेकिन अब लोकायुक्त की रडार पर सौरभ के करीबी भी आ रहे हैं. इसी कड़ी में मंगलवार को लोकायुक्त (Loka Yukta) ने प्रदेश के विभिन्न  RTO चेक पोस्टों पर तैनात रहे एक इंस्पेक्टर और चार आरक्षकों को लोकायुक्त ने नोटिस भेजकर इस मामले में पूछताछ के लिए तलब किया है. एक मई को पेश होने के दिए आदेश लोकायुक्त भोपाल के जांच अधिकारी डीएसपी वीरेंद्र सिंह ने परिवहन विभाग जरिए  सौरभ शर्मा मामले में परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर किशोर सिंह बघेल, सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर वीरेश कुमार और तुमराम सहित 4 आरक्षकों को  नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है. सौरभ शर्मा के नजदीकी कहे जाने परिवहन आरक्षकों में गौरव पाराशर, हेमंत जाटव, धनंजय चौबे, नरेंद्र सिंह भदौरिया को भी लोकायुक्त ने नोटिस जारी किया है.   इस नोटिस में कहा गया है कि सौरभ शर्मा प्रकरण में जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि आपसे तथ्यों के सम्बन्ध और परिस्थितियों को सुनिश्चित करने के लिए प्रश्न पूछने के पास ठोस युक्तियुक्त आधार है. लिहाजा, आपको एक मई को सुबह 11 बजे युक्तियुक्त कार्यालय भोपाल में उपस्थित हों.  गौरतलब है कि भोपाल के जंगल में एक कार में 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये कैश मिलने के बाद भोपाल आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा सुर्खियों में आए थे. इसके बाद उनके खिलाफ लोकायुक्त, ईडी और इनकम टैक्स की जांच चल रही है. फिलहाल शर्मा अपने सहयोगियों के साथ जेल में बंद है. 

देश में 12 नदियों को पुनर्जीवित करने वाले ‘जलपुरूष’ राजेन्द्र सिंह आज राजधानी भोपाल में

भोपाल भारत समेत दुनियाभर में ‘जलपुरूष’ के नाम से मशहूर राजेन्द्र सिंह आज  यानी 1 मई को भोपाल प्रवास पर रहेंगे। इन्होंने 12 नदियों को पुनर्जीवित किया, जल संरक्षण के लिए 60 देशों की यात्रा की। यहां तक कि राजेन्द्र सिंह ने सरकारी नौकरी छोड़ अपना जीवन जल संरक्षण के कार्यों में लगा दिया। इनके प्रयासों के ही कारण देशभर में अरवरी, रुपारेल, सरसा, भगानी, महेश्वरा, साबी, तबिरा, सैरनी, जहाजवाली, अग्रणी, महाकाली व इचनहल्ला समेत 12 नदियों को नया जीवन मिला। बता दें कि राजेंद्र सिंह को जल संचयन और जल प्रबंधन में समुदाय-आधारित प्रयासों में अग्रणी कार्य के लिए 2001 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 1 मई को राजेन्द्र सिंह राजधानी भोपाल में रहेंगे। सुबह साढ़े दस बजे मानस भवन श्यामला हिल्स में राजेन्द्र सिंह ,”जल संसाधन, संरक्षण और संवर्धन पर व्याख्यान देंगे। ऐसे हुई बड़ी शुरूआत बता दें कि 1975 में राजेंद्र सिंह ने राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में अग्निकांड पीड़ितों की सेवा के लिए ‘तरुण भारत संघ’ की स्थापना की थी। इसी दौरान जब वह अलवर के एक गांव पहुंचे तो उन्हें एक बुजुर्ग ने बड़ी चुनौती दे डाली। दरअसल बुजुर्ग ने उनसे कहा कि अगर गांव का इतना ही विकास करना है तो बातें छोड़ गेंती और फावड़ा पकड़ो। हम लोगों की मदद ही करनी है तो गांव में पानी लाओ। राजेंद्र सिंह(Waterman Rajendra Singh) ने यह चुनौती स्वीकार कर ली और अपने दोस्तों के साथ फावड़ा पकड़ इस काम में जुड़ गए। उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि राजस्थान में 11800 जल संरचनाएं बनवाई गई। इसके साथ ही उन्होंने 60 देशों में जल संरक्षण के लिए यात्रा भी की।

मई में 11 दिन बैंकों में रहेगा अवकाश, देख लीजिए पूरी लिस्ट

नई दिल्ली आज  गुरुवार को बैंक बंद रहने वाले हैं। 1 मई 2025 को बैंक देश के ज्यादतर राज्यों में बंद रहेंगे। यानी ग्राहक गुरुवार को बैंक जाकर अपना काम नहीं निपटा सकते।  यहां जानें RBI ने कल गुरुवार 1 मई 2025 की छुट्टी क्यों दी है और किन राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। 1 मई को क्यों बंद रहेंगे बैंक? गुरुवार 1 मई को बैंक महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, कोलकाता, गोवा, आंधप्रदेश जैसे तमाम राज्यों में बंद रहेंगे। महाराष्ट्र में बैंक महाराष्ट दिवस के कारण बैंक बंद हैं। वहीं, बाकि सभी राज्यों में बैंक लेबर डे के कारण नहीं खुलेंगे। यहां बैंक लेबर डे के कारण बंद हैं। 1 मई को बंद रहेंगे बैंक 1 मई (गुरुवार) – मजदूर दिवस / महाराष्ट्र दिवस: बेलापुर, बेंगलुरु, चेन्नई, गुवाहाटी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, इंफाल, कोच्चि, कोलकाता, मुंबई, नागपुर, पणजी, पटना और तिरुवनंतपुरम में बैंक बंद रहेंगे। मई में छुट्टियों की पूरी लिस्ट 4 मई (रविवार) – रविवार 9 मई (शुक्रवार) – रवींद्रनाथ टैगोर जयंती: कोलकाता में बैंक बंद रहेंगे। 10 मई (शनिवार) – मई महीने का दूसरा शनिवार 11 मई (रविवार) – रविवार 12 मई (सोमवार) – बुद्ध पूर्णिमा: अगरतला, आइज़ोल, बेलापुर, भोपाल, देहरादून, ईटानगर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, रायपुर, रांची, शिमला और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 16 मई (शुक्रवार) – राज्य दिवस: गंगटोक में बैंक अवकाश रहेगा। 18 मई (रविवार) – रविवार 24 मई (शनिवार) – चौथा शनिवार 25 मई (रविवार) -रविवार 26 मई (सोमवार) – काजी नजरुल इस्लाम की जयंती: अगरतला में बैंक बंद रहेंगे। 29 मई (गुरुवार) – महाराणा प्रताप जयंती: शिमला में बैंक बंद रहेंगे। क्या ऑनलाइन बैंकिंग सर्विस मिलेंगी? हालांकि बैंक शाखाएं इन छुट्टियों पर बंद रहेंगी, लेकिन ग्राहकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे UPI, IMPS, नेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप्स सामान्य रूप से काम करते रहेंगे। ग्राहक फंड ट्रांसफर, बिल पेमेंट और अन्य ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी बैंक शाखा से जुड़े काम समय से पहले निपटा लें, ताकि छुट्टियों के दौरान कोई असुविधा न हो। 46 दिन तक स्कूलों में छूट्टी मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों(School Holiday) में गर्मी की छु‌ट्टी की घोषणा कर दी है। इस बीच छात्रों को गर्मी से राहत मिलेगी और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन छुट्टियों की घोषणा हुई है। 1 मई से लेकर 15 जून तक स्टूडेंट्स को 46 दिन की छुट्टी मिलने वाली है। जबकि शिक्षकों को एक महीने की छुट्टी मिलेगी

राजधानी भोपाल में 100 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी, मैनिट के एक्सपर्ट ने तैयार किया रूट प्लान

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 100 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड और मैनिट के एक्सपर्ट हैदराबाद की तर्ज पर भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मॉडल तैयार कर रहे हैं। पिछले दिनों हैदराबाद से लाकर कुछ बसों को ट्रॉयल किया गया।   24 लाख आबादी के बीच 200 बसें करीब 24 लाख की आबादी वाले भोपाल शहर में अभी 200 लो लोर बसें संचालित हैं। इनके अलावा कुछ बसें स्थानीय ऑपरेटर्स संचालित करते हैं, इन बसों में क्षमता से 3 गुना ज्यादा यात्री सफर करते हैं। इलेक्ट्रिक बसों के सीमित संख्या में चलते यह समस्या और बढ़ सकती है। अरेरा हिल्स, राज भवन और न्यू मार्केट मैनिट के विशेषज्ञ यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि भोपाल के पहाड़ी इलाकों में ओवरलोडेड बसों के संचालन में कोई समस्या न हो। खासकर, अरेरा हिल्स, राज भवन और न्यू मार्केट जैसे चढ़ाई वाले रूट पर इलेक्ट्रिक बसों को आने जाने में परेशनी न हो।    मैनिट के विशेषज्ञों की टीम शहर के पहाड़ी इलाकों के हिसाब से इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की पूरी संख्या भरने के बाद लोडेड व्हीकल को पहाड़ी की ऊंचाई पर चलने योग्य रूट का चयन करेगी। अरेरा हिल्स, राज भवन, न्यू मार्केट जैसे घाट क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों ने बेहतर प्रदर्शन किया था। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड अब इस बात को सुनिश्चित करना चाह रहा है की दोगुनी संख्या में यात्रियों को लेकर चलने के दौरान इन बसों के संचालन में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो। इसलिए परीक्षण जरूरी भोपाल शहर 24 लाख की आबादी वाला शहर है। इसके मुकाबले भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड एकमात्र ऐसी संस्था है जो सस्ता पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराती है। शहर में बीसीएलएल के अलग-अलग ठेकेदार 200 लो लोर बसों को संचालित करते हैं जिनमें क्षमता से तीन गुना तक ज्यादा यात्री सफर करते हैं। इलेक्ट्रिक बसों के सीमित संख्या में चलने के बाद भी यही हश्र हो सकता है। बीसीएलएल चला रही लो फ्लोर बसें भोपाल में लो फ्लोर बसों के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही कंपनी बीसीएलएल के डायरेक्टर मनोज राठौर ने ई-बसों के संचालन की तैयारियां की जा रही हैं। विषय विशेषज्ञों से भी इसके लिए सलाह ली जा रही है। EV हब बनेंगे इंदौर-भोपाल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल और इंदौर को ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) हब के रूप में विकासित करने का ऐलान किया है। इन शहरों में ई-रिक्शा और ई-बसों के संचालन पर जोर दिया जा रहा है। आम नागरिकों को भी ई-कार और ई-बाइक खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इनके लिए चार्जिंग स्टेशन सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराए जाने का प्रयास जारी है।

भेल की 4 हजार एकड़ जमीन पर लगेंगे उद्योग, मोहन सरकार ने जमीन लेने के लिए बनाई कार्ययोजना

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बीचों-बीच हजारों एकड़ जमीन खाली पड़ी है। इस पर चाहकर भी मध्यप्रदेश सरकार विकास कार्य नहीं कर पा रही है। यहां पर हजारों एकड़ भूमि खुले रूप में मौजूद है। जिस पर अवैध कब्जा हो चुका है। लेकिन अब प्रदेश सरकार ने इसे लेने के लिए नए सिरे से प्रयास शुरू कर दिया है। दरअसल, यह भूमि भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) की है। पूर्व में यह जमीन सरकार मांग चुकी है, लेकिन भेल ने इसे देने से मना कर दिया। अब सरकार इस जमीन को भेल से लेकर उसका पुनर्विकास करने का प्लान बना रही है। मुख्य सचिव अनुराग जैन की निगरानी में यहां प्लान तैयार हो रहा है। 4000 एकड़ पर विकास कार्य का मॉडल यह जमीन थोड़ी बहुत नहीं, बल्कि 4 हजार एकड़ है। जब तक जमीन नहीं मिल जाती, तब तक विकास मॉडल के आधार पर यहां काम किया जाएगा। ये ऐसे मॉडल होंगे, जिनमें भेल की अतिक्रमण वाली खाली पड़ी जमीनों पर भोपाल के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट जैसे हाईराइज बिल्डिंग व औद्योगिक इकाईयों का निर्माण किया जाएगा। सीएम मोहन यादव ने कहा कि यह पहल भोपाल के विकास के साथ भेल को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में काम करेगी। राजस्व का होगा 50-50 बंटवारा सरकार भेल से यह जमीन यूं ही नहीं लेने वाली। इसके बदले में जमीन का कुछ हिस्सा भेल को भी विकसित करके दिया जाएगा। यही नहीं, इस जमीन में लगने वाले उद्योग या अन्य साधनों से मिलने वाले राजस्व को भेल और शासन के बीच 50-50 फीसदी बांटे जाने का प्लान है। क्या है भेल करीब 62 वर्ष पहले भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (भेल) को भोपाल में 6000 एकड़ जमीन मिली थी। इसमें से करीब 764 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है। करी 700 एकड़ पर निजी खेती की जा रही है। 90 एकड़ जमीन पर जंबूरी मैदान है और करीब 12 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से अन्ना नगर बसा है। कुछ वर्ष पहले राज्य शासन ने भेल से जमीन मांगी थी, लेकिन भेल प्रशासन ने साफ-साफ मना कर दिया था। केंद्र सरकार से ऐसे मांगेगे जमीन दरअसल, भोपाल को मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है। लेकिन भोपाल के एक ओर वन क्षेत्र की बड़ी सीमा है, जिसे टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया है। यहां विकास नहीं किया जा सकता। दूसरा भोपाल झीलों की नगरी है, बड़ा तालाब रामसर साइट है। यह भोपाल की बड़ी सीमा को घेरता है। दूसरे तालाब व नदियां भी हैं, उन्हें प्रभावित नहीं किया जा सकता। वहीं, भोपाल का बड़ा हिस्सा भेल को दी जमीन से लगा है। उक्त जमीन का बड़ा हिस्सा खाली है। भोपाल से लगे बाकी जो क्षेत्र बचे हैं, उनमें लगातार विकास हो रहा है, आबादी बस रही है। ऐसे में भेल की जमीन सरकार के लिए उपयोगी हो सकती है। यहां विकास के ऐसे कार्य किए जाए जिससे राजस्व की प्राप्ति हो सके। खाली जमीन पर हो रहा अतिक्रमण भेल को मिली 6 हजार एकड़ जमीन में से अभी तक 2000 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। इस खाली पड़ी जमीन पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। भेल की 700 अधिक अतिक्रमण वाली जमीन पर निजी लोग खेती कर रहे हैं। वहीं, यहां के खाली पड़े जर्जर आवासों का लोग अवैध तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं।

भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का काम अब सिर्फ BDA द्वारा ही नहीं कराया जाएगा, PWD को प्लानिंग बनाने का जिम्मा

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का काम अब सिर्फ भोपाल विकास प्राधिकरण द्वारा ही नहीं कराया जाएगा। बीडीए की वित्तीय और तकनीकी तौर पर बदहाल स्थिति को देखते हुए अब टीएंडसीपी, हाउसिंग बोर्ड, पीडब्ल्यूडी को भी इसमें काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मेट्रोपॉलिटन रीजन की प्लानिंग टीएंडसीपी की सुनीता सिंह के निर्देशन में होगी। जन-उपयोगी भवन व अन्य निर्माण के लिए हाउसिंग बोर्ड काम करेगा, जबकि क्षेत्रों के आपसी जुड़ाव को बेहतर करने के लिए पीडब्ल्यूडी को प्लानिंग बनाने के लिए कहा गया है।  गौरतलब है कि, बीडीए के पास प्लानिंग शाखा में कोई नहीं है, जबकि इंजीनियरिंग में अधीक्षण यंत्री स्तर के दो ही इंजीनियर बचे हुए हैं। आउटसोर्स व निजी एजेंसियों से यहां काम कराया जा रहा है। ऐसे में प्रोजेक्ट को पूरी तरह से बीडीए के हवाले नहीं किया गया। मेट्रोपॉलिटन रीजन की तय की जा रही प्लानिंग में भोपाल से पास के जिलों से 2000 हेक्टेयर जमीन निकाली जानी है। भोपाल की बढ़ती आबादी को इसी 2000 हेक्टेयर में नई टाउनशिप में बसाया जाएगा। मेट्रो प्रस्तावित करेंगे, अभी रोड से ही कनेक्टिविटी तय प्लानिंग के अनुसार पीडब्ल्यूडी को भोपाल से किनारे जिलों की सड़कों पर प्लानिंग के लिए कहा गया है। करीब 600 किमी लंबाई की सड़कों को लेकर प्लानिंग होगी। सड़कों की चौड़ाई औसतन 24 मीटर करने का कहा गया है। मेट्रोपॉलिटन रीजन वाले क्षेत्र तक ये बनेगी, उसके बाद संबंधित जिले के विभागों का जिमा होगा कि वे आगे कहां तक लेकर जाते हैं। शासन ने कहा- जनप्रतिनिधियों को दें प्रजेंटेशन बीडीए मेट्रोपॉलिटन रीजन जैसे महत्वपूर्ण काम की प्लानिंग अपने ही स्तर पर करने की कोशिश कर रहा था। बीडीए ने अपना बजट भी जाहिर नहीं किया। इसकी शिकायत शासन स्तर पर हुई। इसके बाद सीईओ श्यामबीर सिंह और टीम को पूरी प्लानिंग जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकर करने का कहा गया। प्लानिंग किसी एक एजेंसी के जिम्में नहीं- PS इस संबंध में शहरी आवास एवं विकास के पीएस संजय शुक्ला का कहना है कि, मेट्रोपॉलिटन रीजन की प्लानिंग किसी एक एजेंसी के जिम्में नहीं रखी जाएगी। समग्रता के साथ काम किया जाएगा, जिसका लाभ सबको मिलेगा।

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