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सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन जल्द तैनाती क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियानों में काफी मददगार

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में बढ़ती आतंकी गतिविधियों के बीच सुरक्षा अधिकारियों का मानना ​​है कि सीआरपीएफ के जंगल वारियर्स (कोबरा बटालियन) की जल्द तैनाती क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियानों में काफी मददगार हो सकती है. दरअसल, सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की चिंता है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए नरसंहार में शामिल आतंकवादियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. इस संबंध में सीआरपीएफ के पूर्व महानिदेशक सुजॉय लाल थाउसेन ने ईटीवी भारत से कहा, “कोबरा आतंकी गतिविधियों से लड़ने में काफी सक्षम है. उन्हें फिर से ट्रेन किया जा सकता है और वे आतंकवाद विरोधी अभियानों में जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की मदद कर सकते हैं.” कोबरा बटालियन कोबरा बटालियन, जिसे कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन के नाम से भी जाना जाता है, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की एक स्पेशल यूनिट है. यह मुख्य रूप से गुरिल्ला और जंगल युद्ध की रणनीति में अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती है, खासकर वामपंथी उग्रवाद (LWE) से निपटने में. कोबरा को जंगल के इलाकों में ऑपरेशन पर ध्यान केंद्रित करने के कारण ‘जंगल योद्धा’ भी कहा जाता है. थाओसेन ने कहा, “नक्सल इलाकों में अपनी प्रतिबद्धता से मुक्त होने के बाद कोबरा आतंकवाद विरोधी अभियानों में शामिल हो सकेंगे. झारखंड, ओडिशा, बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में कोबरा की प्रतिबद्धता कुछ साल पहले की तुलना में बहुत कम है. उन सभी इकाइयों को जम्मू-कश्मीर के माहौल के हिसाब से फिर से प्रशिक्षित किया जा सकता है और आतंकवादियों से लड़ने के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात किया जा सकता है.” जम्मू-कश्मीर में एक कंपनी पहले ही प्रशिक्षित हो चुकी है इससे पहले जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान में कोबरा बटालियन को तैनात करने की पहल की गई थी. हालांकि, इसे आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए नहीं रखा गया. सीआरपीएफ महानिदेशक के रूप में थाउसेन के कार्यकाल के दौरान एक कोबरा कंपनी को अनुकूलन प्रक्रिया के लिए जम्मू-कश्मीर भेजा गया था. थाउसेन ने कहा, “अपने कार्यकाल के दौरान मैंने जम्मू-कश्मीर में एक कोबरा कंपनी भेजी है. चूंकि नक्सल क्षेत्र में हमारी भागीदारी कम हो रही थी, इसलिए मैंने अपने कार्यकाल के दौरान जम्मू-कश्मीर में एक कंपनी को परिचित कराने के लिए भेजा था.” हालांकि, स्थानीय प्राधिकारी और स्थानीय पुलिस की इच्छा होने पर ऐसे केंद्रीय बलों को तैनात किया जाता है. थाउसेन ने कहा, “अगर स्थानीय प्राधिकारी और स्थानीय पुलिस मांग करती है, तो केंद्रीय बलों को विशिष्ट क्षेत्र में तैनात किया जाता है.” तैनाती प्रक्रिया तैनाती प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए थाउसन ने कहा कि तैनाती प्रक्रिया किसी विशिष्ट क्षेत्र में आतंकवादियों की गतिविधियों पर निर्भर करती है.उन्होंने कहा, “यह इस बात पर निर्भर करता है कि जम्मू-कश्मीर में कितनी यूनिट की आवश्यकता है. तैनाती प्रक्रिया जिलों या क्षेत्रों में आतंकवादी गतिविधियों पर भी निर्भर करती है.तैनाती आतंकवादियों की कुल संख्या की गणना पर निर्भर करती है.” पहलगाम में आतंकवादियों का ठिकाना सुरक्षा बलों का मानना ​​है कि पहलगाम हमले में शामिल आतंकवादी प्राकृतिक गुफाओं और वन क्षेत्रों में छिपे हो सकते हैं. पिछले 11 दिनों से बैसरन घाटी, तरानाउ हप्तगुंड, दावरू और अन्य निकटवर्ती क्षेत्रों के घने जंगलों में सघन तलाशी अभियान चल रहा है. कोबरा एक गेम चेंजर साबित हो सकता है भारत के सुरक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना ​​है कि कोबरा बल की तैनाती जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद विरोधी अभियान में गेम चेंजर साबित हो सकती है. प्रसिद्ध सुरक्षा विशेषज्ञ (सेवानिवृत्त) ब्रिगेडियर बीके खन्ना ने कहा, “बटालियन (कोबरा) को जंगल में युद्ध करने का अनुभव है. एक बार जब यह जम्मू-कश्मीर के इलाकों से लैस हो जाएगा, तो सुरक्षा एजेंसियों को अधिकतम लाभ मिलेगा.” कोबरा नक्सलियों से लड़ रहा है कोबरा यूनिट को नक्सली आंदोलन की रीढ़ तोड़ने का क्रेडिट दिया जाता है. यह सीआरपीएफ की एक विशेष गुरिल्ला युद्ध कमांडो यूनिट है, जिसे जंगल के इलाकों में लड़ने में व्यापक विशेषज्ञता हासिल है. कोबरा यूनिट के कमांडो मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत होते हैं. इनमें से ज़्यादातर कोबरा टीमें नक्सल हिंसा से प्रभावित विभिन्न राज्यों में तैनात हैं. साथ ही, कोबरा की कुछ यूनिटें आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए पूर्वोत्तर राज्यों में भी तैनात की गई हैं.

आज वीआइपी के शहर में मूवमेंट के दौरान यातायात को रोका और उसका रूट बदला जाएगा

ग्वालियर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर(Narendra Singh Tomar) के बेटे प्रबल सिंह तोमर के आशीर्वाद समारोह में शामिल होने आज 4 मई को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, राज्यपाल मंगू भाई पटेल, झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला सहित कई चार राज्यों के सीएम और केंद्रीय मंत्री ग्वालियर आएंगे। समारोह मेला मैदान में होगा। इसे लेकर सुरक्षा और यातायात इंतजाम को पुख्ता किया जा रहा है। शहर में वीआइपी मूवमेंट वीआइपी(VVIP) के शहर में मूवमेंट के दौरान यातायात को रोका और उसका रूट बदला जाएगा। ट्रैफिक पुलिस ने जो रूट प्लान बनाया उसमें वीआइपी के शहर भ्रमण के दौरान 10 से ज्यादा प्वाइंट पर यातायात डायवर्ट होगा। रविवार को नीट की परीक्षा है और करीब 11 परीक्षा केंद्र उस रूट पर हैं जहां से वीआइपी मेहमानों की आवाजाही रहेगी। यातायात पुलिस अधिकारियों का कहना है नीट के परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाना प्राथमिकता रहेगी। परीक्षार्थी एडमिट कार्ड दिखाकर किसी भी चौराहे से निकल सकते हैं। परीक्षार्थी भी समय पर सेंटर पर पहुंचने से घर से करीब दो घंटे पहले निकलें तो उन्हें भी राहत रहेगी। शनिवार को पुलिस काफिला निकाल कर रिहर्सल करेगी। रास्ता बदलकर चलेगा ट्रैफिक     वीआइपी भ्रमण के दौरान शहर में भारी वाहन की एंट्री बंद रहेगी।     भिंड व मालनपुर से आने वाले वाहनों को लक्ष्मणगढ़ पुल से बाइपास के रास्ते बड़ागांव पुल, हुरावली से सचिन तेंदुलकर मार्ग होकर शहर में आना पड़ेगा।     मुरार से भिंड जाने वाली वाहन गोला का मंदिर चौराहा होकर नहीं जाएंगे। इन्हें 7 नंबर, 6 नंबर चौराहे से आर्मी एरिया होकर बड़ागांव पुल होते हुए मुरैना और भिंड जाना होगा।     मुरैना से भिंड, डबरा और दतिया जाने के लिए निरावली बायपास का रास्ता रहेगा।     दतिया और डबरा से भिंड और मुरैना जाने वाले वाहन विक्की फैक्ट्री के रास्ते नहीं आएंगे इन्हें सिकरौदा तिराहा से डायवर्ट किया जाएगा।     पुरानी छावनी से बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सिटी सेंटर जाने के लिए मल्लगढ़ा चौराहे से वाहनों का रूट डायवर्ट होगा। चार शहर का नाका होकर तानसेन रोड, नया आरओबी क्रॉस कर स्टेशन बजरिया आएंगे।     गोला का मंदिर, पड़ाव और हजीरा से डीडीनगर , एयरपोर्ट और भिंड जाने के लिए हजीरा थाने के बाजू से नया पुल, महू जमाहर शनिचरा बाइपास होकर जाना पड़ेगा।     एयरपोर्ट, डीडीनगर से मुरार, रेलवे स्टेशन और बाड़ा के लिए पानी की टंकी तिराहा पिंटो पार्क, सात नंबर चौराहा, बारादरी से जाना रहेगा।     लश्कर से गोला का मंदिर और मुरैना जाने के लिए एलएनआइपीई के सामने से नयापुल होकर हजीरा, मलगढ़ा के रास्ते जाना रहेगा।     आकाशवाणी से मुरार जाने के लिए थाटीपुर, कुम्हरपुरा से बारादरी होकर जाना पड़ेगा।     मुरैना से बस स्टैंड, फूलबाग आने के लिए जलालपुर से सागरताल, बहोड़ापुर का रास्ता रहेगा।

शहपुरा का स्तावित मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क को केंद्र सरकार के भारत माला प्रोजेक्ट में शामिल कराने के लिए प्रयास शुरू

जबलपुर शहपुरा के ग्राम खैरी में प्रस्तावित मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क को केंद्र सरकार के भारत माला प्रोजेक्ट में शामिल कराने के लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में दो शहर भोपाल और इंदौंर में लॉजिस्टिक पार्क बनना हैं। इसमें इनलैंड कंटेनर डिपो भी शामिल है। इंदौर में काम शुरू हो गया है लेकिन भोपाल में जगह का संकट आ रहा है। ऐसे में मध्यप्रदेश इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कारपोरेशन ने जबलपुर को इसमें शामिल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। निर्यात इकाइयों की संभावनाएं बढ़ेंगी पार्क के निर्माण से जबलपुर में एक्सपोर्ट करने वाली औद्योगिक इकाइयों के आने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। इसमें इनलैंड कंटेनर डिपो तैयार होता है। इसमें कस्टम डिपार्टमेंट का कार्यालय भी चलता है। उसमें निर्यात की जाने वाली सामग्री को विदेश भेेजने की जांचें हो सकेंगी।  खैरी में 54 एकड़ भूमि चिन्हित भेड़ाघाट और सहजपुर के बीच ग्राम खैरी में इसके लिए 54 एकड़ भूमि चिन्हित की जा चुकी है। रिंग रोड के किनारे लॉजिस्टिक पार्क के निर्माण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड ने सर्वे पूरा कर लिया है। इसके निर्माण के साथ ही रेल कनेक्टिविटी के लिए मात्र एक किलोमीटर का रेलवे ट्रेक बिछाया जाना है। रिंग रोड के माध्यम से एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी मिल जाएगी। अब एनएचएलएमएल को डीपीआर तैयार करना है इसके बाद निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया होगी। केंद्र से ही मिल जाएगी राशि भारत माला प्रोजेक्ट में आधिकारिक रूप से जबलपुर को शामिल करने के लिए राज्य शासन को जद्दोजहद करनी पडेगी। इसके शामिल होने से बजट संबंधी समस्याएं सामने नहीं आएंगी। नियमित रूप से राशि मिल सकेगी। इससे कार्य समय सीमा में पूरा होने में भी मदद मिलती है।  मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क के लिए खैरी की जगह उपयुक्त है। सर्वे एजेंसियों ने इसे उचित पाया है। अब पार्क को भारत माला प्रोजेक्ट में शामिल करवाने के लिए राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।     सृष्टि प्रजापति, कार्यकारी संचालक, एमपीआइडीसी, जबलपुर

लाडली बहना योजना स कटे हजारो नाम, अब हर महीने की 16 तारीख तक आएगी किस्त

भोपाल  मध्यप्रदेश की लोकप्रिय और महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल ‘लाड़ली बहना योजना’ अक्सर चर्चा में रहती है। इसके तहत लाभार्थी महिलाओं के खाते में हर महीने 1250 रुपए की राशि ट्रांसफर की जाती है। मई में भी लाड़ली बहनों के खाते में 24वीं किस्त आने वाली है। लेकिन ‘लाड़ली बहना योजना’ ने कई जिलों की बहनों को बड़ा झटका दे दिया है। बता दें कि 10 हजार 963 महिलाएं अब इस योजना का लाभ नहीं उठा पाएंगी। 24वीं किस्त आने से पहले जान लीजिए कि मई में किन लाड़ली बहनों के खाते में नहीं आएंगे योजना के पैसे…। इस वजह से कई लाड़ली बहना हुई बाहर राज्य शासन की सबसे महत्वपूर्ण लाड़ली बहना योजना(Ladli Behna Yojana 24th Installment) में लगातार दूसरे साल 2025 में 60 वर्ष की आयु पार होने पर 10 हजार 963 महिलाएं के नाम स्वत: पोर्टल से हट गए हैं। इन्हें 1250 रुपए मासिक राशि के लाभ से अलग कर दिया गया। केवल 3,92,912 महिलाएं ही इस योजना में शेष बताई गई हैं। बाहर हुई महिलाएं अपात्र महिलाओं की संख्या: 690 लाभ परित्याग करने वाली महिलाएं: 890 मृत महिलाओं की संख्या: 646 समग्र से डिलीट महिलाएं: 426 आधार से समग्र डि-लिंक महिलाएं: 505 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं: 10963 कुल पात्र महिलाएं: 392912 अब हर महीने की 16 तारीख तक आएगी किस्त मध्य प्रदेश की महिलाएं लाडली बहना योजना की 24वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। मई का महीना शुरू होते ही महिलाएं उत्साहित हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार उनके खाते में जल्द ही पैसे आएंगे। पिछली बार 23वीं किस्त 16 अप्रैल को ट्रांसफर की गई थी। आमतौर पर हर महीने की 10 तारीख तक किस्त आ जाती थी। इसलिए, महिलाएं सोच रही हैं कि मई की किस्त कब आएगी। किस्त में देरी पर उठे थे योजना के बंद होने पर सवाल पिछले महीने लाडली बहना योजना के बंद होने की अफवाहें उड़ी थीं। इस पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि योजना बंद नहीं होगी। उन्होंने मोहन कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए ये बात कही थी। उन्होंने कहा था कि ‘लाडली बहना योजना बंद नहीं होगी और योजना के तहत दिए जाने वाली राशि 1250 को हर महीने की 10 से 16 तारीख के बीच ट्रांसफर किया जाएगा।’ एमपी सरकार ने शुरू की थी योजना लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार ने शुरू की थी। इसका मकसद महिलाओं को सशक्त बनाना और उनकी जिंदगी को बेहतर बनाना है। इस योजना से आज मध्य प्रदेश की लाखों महिलाओं को फायदा मिल रहा है। इस योजना के तहत हर महीने की 10 तारीख को महिलाओं के खाते में 1250 रुपये ट्रांसफर किए जाते हैं। इस तरह सरकार महिलाओं को सालाना 15000 रुपये की आर्थिक मदद देती है। पिछली बार हुई थी देरी अप्रैल 2025 की 23वीं किस्त जारी होने में देरी की वजह से इस योजना के बंद होने पर सवाल उठने लगे थे। विपक्ष ने भी इस पर खूब सवाल उठाए थे। इस पर सरकार की ओर से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब देते हुए कहा था कि किस्त के रूपए हर महीने की 10 से 16 तारीख के बीच में ट्रांसफर हो जाएंगे। कौन ले सकता है इस योजना का लाभ लाडली बहना योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें हैं। महिला मध्य प्रदेश की मूल निवासी होनी चाहिए। उसके परिवार में कोई आयकरदाता नहीं होना चाहिए। साथ ही, परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए। विधवा और तलाकशुदा महिलाएं भी इस योजना का लाभ ले सकती हैं। योजना की महत्वपूर्ण बातें     लाड़ली बहना योजना(Ladli Behna Yojana) 5 मार्च 2023 से शुरू हुई।     पंजीयन की अंतिम तारीख 30 अप्रेल 2023 थी। फिर योजना में संशोधन किया।     25 जुलाई 2023 से 20 अगस्त 2023 तक फिर पंजीयन किया।     अभी पंजीयन के निर्देश नहीं। जनप्रतिनिधि अनुरोध कर रहे। इन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ     अविवाहित महिलाएं लाड़ली बहना योजना का लाभ नहीं ले सकतीं।     जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष की आयु से ज्यादा है उन्हें, इस योजना का कोई लाभ नहीं मिलेगा।     जिनके परिवार की सालाना इनकम 2.5 लाख से अधिक है, वे भी योजना का लाभ नहीं ले सकतीं।     जिनके परिवार का कोई सदस्य वर्तमान या पूर्व सांसद-विधायक हो वे भी योजना के लिए आवेदन नहीं कर सकतीं।     जिन महिलाओं के परिवार का कोई सदस्य सरकारी पद का लाभ ले रहा है, वे महिलाएं भी लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं हैं। इन महिलाओं को ही मिलेगा लाभ     मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी     विवाहित, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता     21 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी महिलाएं     किसी भी वर्ग की महिलाएं ले सकती हैं लाभ     स्वयं या परिवार का कोई भी सदस्य आयकरदाता न हो     जिनके परिवार के पास 5 एकड़ से कम भूमि हो  

राज्य सरकार ने मंत्रालय में पद​स्थ कर्मचारियों, अधिकारियों के भत्ते में खासा इजाफा किया

भोपाल एमपी में सरकारी अमले के लिए राज्य सरकार की मेहरबानी लगातार जारी है। सरकार ने कर्मचारियों, अधिकारियों के भत्ते में फिर बढ़ोत्तरी की है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके आदेश भी जारी कर दिए हैं। राज्य सरकार ने मंत्रालय भत्ते में बढ़ोतरी की है। भत्ते में ढाई गुना से ज्यादा वृद्धि की गई है।प्रदेश में मंत्रालय भत्ता करीब डेढ़ दशक बाद बढ़ाया गया है। ऐसे में कर्मचारियों, अफसरों ने खुशी जाहिर की है। राज्य सरकार ने मंत्रालय में पद​स्थ कर्मचारियों, अधिकारियों के भत्ते में खासा इजाफा कर दिया है। इनमें मंत्रालय भत्ते में करीब 2.57 गुना वृद्धि की गई है। मंत्रालय के सभी संवर्गों के अधिकारियों, कर्मचारियों को भत्ता बढ़ोत्तरी का लाभ मिलेगा। सभी अधिकारियों, कर्मचारियों के मंत्रालय भत्ते में वृद्धि जिन अधिकारियों, कर्मचारियों के मंत्रालय भत्ते में वृद्धि की गई है उनमें अपर सचिव, उप सचिव, अवर सचिव, स्टाफ आफिसर, अनुभाग अधिकारी शामिल हैं। इनके साथ ही निज सचिव, निज सहायक, स्टेनोग्राफर, अनुभाग अधिकारी, सहायक ग्रेड-2 और सहायक ग्रेड-3 के भत्ते भी बढ़ाए गए हैं। मंत्रालय भत्ता में 1 अप्रैल 2025 से बढ़ोतरी की गई सामान्य प्रशासन विभाग ने मंत्रालय भत्ता बढ़ोत्तरी के आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के अनुसार मंत्रालय भत्ता में 1 अप्रैल 2025 से बढ़ोतरी की गई है जिसका भुगतान मई माह के वेतन में किया जाएगा। मंत्रालय कर्मचारियों, अधिकारियों को अभी सन 2013 में स्वीकृत मंत्रालय भत्ता दिया जा रहा था।

सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान, हर घाट होगा रामघाट, नहीं होगा कोई भी वीआईपी घाट

उज्जैन मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ लगेगा। वैसे इसके लिए अभी तीन वर्ष का समय है, लेकिन सरकार ने प्रयागराज महाकुंभ को देखकर कई सीख ली है। इसी के चलते उज्जैन के लिए खास तैयारियां शुरू हो गई हैं। उज्जैन में शिप्रा के दोनों किनारे पर बनाए जाने वाले नए 29 किमी सहित कुल सभी 35 किमी लंबे घाटों को रामघाट के रूप में ही प्रचारित किया जाएगा। यहां अगल से कोई भी वीआईपी घाट नहीं बनाया जायेगा। उज्जैन सिंहस्थ को लेकर रूपरेखा तैयार पूरी कर ली गई है, अब बस सीएम की हरी झंडी का इंतजार है। उज्जैन के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल बयान देते हुए कहा कि सिंहस्थ की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन का हर घाट रामघाट होगा। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किए हैं। ऐसा अनुमान लगया जा रहा है कि सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आ सकते हैं। ऐसे में हर दिन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 740 टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे नियंत्रित करने के लिए 50 हजार बायो-टॉयलेट भी बनाए जाएंगे। गैरजरूरी कामों के प्रस्ताव नहीं बनाएं कलेक्टर बैठक के पहले चरण में उज्जैन को छोड़ आसपास के जिलों के प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। इसमें डॉ. राजौरा ने कलेक्टरों को स्पष्ट किया कि नए निर्माण कार्यों के प्रस्तावों को श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं को ध्यान रख ही बनाएं। यानी गैर जरूरीकामों के प्रस्ताव नहीं बनाएं। किसी भी घाट को वीआईपी नाम नहीं दें, ताकि ज्यादा भीड़ केवल उसी दिशा जाने का प्रयास नहीं करें। बैठक की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने की। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा। मंत्री ने कहा कि काम ऐसे होने चाहिए कि वे बाद वाले सिंहस्थ में भी उपयोगी हों। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने सिंहस्थ के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर रहेगा विशेष जोर मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि निर्माण कार्य केवल इस एक सिंहस्थ तक सीमित न रहें, बल्कि वे भविष्य के सिंहस्थ आयोजनों में भी उपयोगी साबित हों। इसी दिशा में निर्देश दिया गया कि निर्माण कार्य स्थायी और गुणवत्तायुक्त हों। इसके लिए अच्छी सामग्री का इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया जाएगा। मास्टर प्लान तैयार होगा अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सिंहस्थ 2028 के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया जाए, जिसमें भीड़ प्रबंधन, यातायात, घाटों की व्यवस्था, जल-प्रबंधन और आपदा सुरक्षा की दृष्टि से सभी पहलुओं को शामिल किया जाए।

एमपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट 5 मई तक? मार्कशीट के लिए ये 3 वेबसाइटदेखें

भोपाल एमपी बोर्ड 10वीं, 12वीं परीक्षा में शामिल हुए 16 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स सरकारी रिजल्ट पर लेटेस्ट अपडेट का इंतजार कर रहे हैं. एमपी बोर्ड रिजल्ट 2025 इसी महीने जारी किया जाएगा. एमपी बोर्ड रिजल्ट 2025 से जुड़े सभी अपडेट्स मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की ऑफिशियल वेबसाइट mpresults.nic.in और mpbse.nic.in पर चेक किया जा सकेगा. मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल किसी भी वक्त रिजल्ट डेट का ऐलान कर सकता है. अप्रैल में मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 10 मई से पहले एमपी बोर्ड रिजल्ट 2025 जारी करने का निर्देश दिया था. ऐसे में एमपी बोर्ड 10वीं, 12वीं रिजल्ट 2025 के जल्द जारी होने की उम्मीद की जा रही है. एमपी बोर्ड रिजल्ट 2025 चेक करने के लिए रोल नंबर और डेट ऑफ बर्थ जैसी डिटेल्स की जरूरत पड़ेगी. MP Board Result 2025 Date: खत्म होने वाला है इंतजार मध्य प्रदेश बोर्ड रिजल्ट 2025 जारी करने से पहले नोटिफिकेशन जारी करेगा. इस साल भी एमपी बोर्ड रिजल्ट प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही रिलीज किया जाएगा. इस साल मध्य प्रदेश बोर्ड परीक्षा के लिए कुल 16,60,252 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया था. इनमें से 9,53,777 स्टूडेंट्स ने 10वीं की और 7,06,475 स्टूडेंट्स ने 12वीं की परीक्षा दी थी. अब सभी एमपी बोर्ड रिजल्ट 2025 घोषित होने का इंतजार कर रहे हैं, जोकि अगले कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा.  एमपी बोर्ड रिजल्ट कैसे चेक करें? एमपी बोर्ड रिजल्ट कई तरीकों से चेक किया जा सकता है. आप एमपी बोर्ड रिजल्ट की ऑफिशियल वेबसाइट mpbse.nic.in और mpresults.nic.in पर विजिट करके अपने मार्क्स चेक कर सकते हैं. इसके अलावा 56263 पर रोल नंबर भेजकर एसएमएस के जरिए भी रिजल्ट चेक किया जा सकता है. अगर किसी भी वजह से ये दोनों तरीके काम न करें तो स्टूडेंट्स डिजिलॉकर की वेबसाइट और ऐप पर भी सरकारी रिजल्ट चेक कर सकते हैं.  एमपी बोर्ड रिजल्ट चेक करने के से पहले तैयार रखें ये डिटेल्स मध्य प्रदेश कक्षा 10वीं 12वीं का रिजल्ट जारी होने से पहले स्टूडेंट्स ये डिटेल्स निकालकर रख सकते हैं. इनके बिना एमपी सरकारी रिजल्ट चेक नहीं कर पाएंगे: रोल नंबर डेट ऑफ बर्थ स्कूल कोड स्कूल का नाम एमपी बोर्ड की परीक्षा कब से कब तक हुई? मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कक्षा 10वीं परीक्षा का आयोजन 27 फरवरी से 21 मार्च 2025 के बीच हुआ था। इसके अलावा 12वीं एग्जाम 4 अप्रैल तक हुए थे।  एमपपी बोर्ड कक्षा 10वीं का बीते साल का रिजल्ट फर्स्ट डिवीजन पास करने वाले छात्र: 3,05,067 सेकेंड डिवीजन पाने वाले छात्र: 1,69,863 थर्ड डिवीजन से पास होने वाले छात्र: 2,145  एमपी बोर्ड की मार्कशीट में होंगी ये डिटेल्स     छात्र का नाम     उसकी तस्वीर     स्कूल नंबर     रोल नंबर     रजिस्ट्रेशन नंबर     एग्जाम सेंटर नंबर     हर विषय में मिले अंक     प्रैक्टिकल में हासिल अंक     कुल अंक     डिवीजन  एमपी बोर्ड रिजल्ट चेक करने के 3 तरीके     ऑफिशियल वेबसाइट्स – mpbse.nic.in 2025 या mpresults.nic.in 2025 या mpbse.mponline.gov.in     SMS पर चेक करें।     MP बोर्ड के ऐप पर चेक करें। क्या एमपी बोर्ड 10वीं 12वीं का रिजल्ट एक साथ आएगा? जी हां, पिछले सालों की तरह, इस वर्ष भी एमपी बोर्ड 10वीं रिजल्ट 2025 और एमपी बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2025 एक साथ जारी करेगा। एमपीबीएसई परिणाम जारी करने की सटीक तारीख और समय की घोषणा जल्द कर सकता है। पिछले 5 साल में एमपी बोर्ड का पास प्रतिशत 2020: कक्षा 12 – 68.81% 2021: कोविड-19 के कारण सभी छात्रों को प्रमोट किया गया 2022: कक्षा 12वीं – 72.72% 2023: कक्षा 12वीं – 55.28% 2024: कक्षा 12वीं – 64.48% 02:45 PM, May 02 2025  मध्यप्रदेश बोर्ड रिजल्ट की वेबसाइट्स     mpbse.nic.in 2025     mpresults.nic.in 2025     mpbse.mponline.gov.in2025  पिछले साल की एमपी बोर्ड रिजल्ट डेट साल 2024 में एमपी बोर्ड ने कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं के परिणामों की घोषणा 24 अप्रैल को की गई थी। इस साल परिणाम घोषित करने में थोड़ा समय लग रहा है हालांकि इसकी घोषणा जल्द किए जाने की संभावना है।  एमपी बोर्ड के ऐप से कैसे चेक करें रिजल्ट?     सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर से MPBSE मोबाइल ऐप या MP मोबाइल ऐप डाउनलोड करें।     इसके बाद अपने स्मार्टफोन पर ऐप खोलें।     ‘Know your Result’ विकल्प पर क्लिक करें।     अपना रोल नंबर और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करें।     ‘सबमिट’ बटन को क्लिक करने पर आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखेगा।  क्या एमपी बोर्ड ने की डेट्स की घोषणा? अभी तक, मध्य प्रदेश बोर्ड (MPBSE) ने आधिकारिक तौर पर MP बोर्ड 10वीं और 12वीं रिजल्ट 2025 की तारीख और समय की कोई भी पुष्टि नहीं की है। रिपोर्टों के अनुसार, मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, और परिणाम जल्द ही, संभवतः मई के पहले सप्ताह के खत्म होने तक जारी किया जा सकता है।  पिछले साल का 10वीं पास परसेंटेज पिछले साल एमपी बोर्ड में कक्षा 10वीं रिजल्ट में 58.10% छात्र पास हुए थे। इस साल इसमें कुछ सुधार होने की उम्मीद है। एसएमएस पर एमपी बोर्ड का रिजल्ट कैसे चेक करें? ऑफिशियल वेबसाइट पर परिणाम ना देख पाने या वेबसाइट के स्लो चलने पर कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं रिजल्ट SMS पर देख सकते हैं। कक्षा 10वीं के लिए: टाइप करें MPBSE10 और स्पेस देकर अपना रोल नंबर लिखें। कक्षा 12वीं के लिए: टाइप करें MPBSE12 और स्पेस देकर अपना रोल नंबर लिखें। इसके बाद मैसेज को 56263 पर भेज दें। एमपी बोर्ड का रिजल्ट कब आएगा? मध्य प्रदेश बोर्ड मई के पहले सप्ताह में जल्द ही एमपी बोर्ड 10वीं, 12वीं परिणाम 2025 की घोषणा कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार एमपी बोर्ड का रिजल्ट ड्राफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। छात्रों को लेटेस्ट अपडेट और आधिकारिक परिणाम घोषणा के लिए नियमित रूप से आधिकारिक एमपीबीएसई वेबसाइट या इस पेज पर बने रहने की सलाह दी जाती है।  एमपी बोर्ड परीक्षा कब से कब तक हुई थी? कक्षा 10वीं एमपी बोर्ड की परीक्षा कब से कब तक हुई – 27 फरवरी से 19 मार्च, 2025 एमपी बोर्ड कक्षा 12वीं परीक्षा कब से कब तक हुई – 25 फरवरी से 25 मार्च, 2025

महाकाल परिसर में एक हजार वर्ष पुराना मंदिर दोबारा बनेगा, एक साल पहले निर्माण के लिए निविदा जारी

उज्जैन महाकाल मंदिर परिसर में नवनिर्माण के लिए की जा रही खोदाई से निकले एक हजार साल पुराने शिव मंदिर को पुनर्निर्मित करने की पूरी तैयारी हो गई है। शुक्रवार को मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग की टीम महाकाल पहुंची और स्थल का निरीक्षण किया। बता दें बीते डेढ़ साल से विभाग केवल पत्थरों का नाप जोख और नंबरिंग ही करा रहा है, निर्माण की शुरुआत नहीं करा पाया है। बताया जाता है पुरातत्व विभाग ने करीब एक साल पहले मंदिर निर्माण के लिए निविदा जारी की थी। लेकिन किसी भी ठेकेदार ने निर्माण में रुचि नहीं दिखाई। इसी वजह से समय पर काम शुरू नहीं हो पाया। इसका असर उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा कराए जा रहे काम पर पड़ा और शहनाई गेट आदि के उन्नयन में देरी होने लगी। इसका असर डेढ़ माह बाद शुरू होने वाले श्रावण पर पड़ता देख मंदिर प्रशासन ने पुरातत्व विभाग को इस दिशा में ठोस कार्रवाई के लिए पत्र लिखा। इसके बाद विभाग के अफसर मंदिर पहुंचे तथा शीघ्र काम शुरू करने की बात की। 37 फीट ऊंचा बनेगा मंदिर पुनर्निर्मित मंदिर की ऊंचाई करीब 37 फीट रहेगी। निर्माण में भूगर्भ से पुरावशेषों के रूप में प्राप्त हुए पत्थरों का उपयोग होगा। कुछ पत्थर या खंभों को खड़ा करने में आवश्यकता लगी, तो उसी प्रकृति व रंग का पत्थर मालवा परिक्षेत्र से मंगवाया जाएगा। इसके निर्माण पर करीब 65 से 75 लाख रुपये का खर्च आएगा। पुरातत्व विभाग भोपाल के अधिकारी डॉ. रमेश यादव ने बताया कि करीब एक हजार वर्ष पुराने 37 फीट उंचे प्राचीन स्वरूप के शिव मंदिर निर्माण का कार्य वहीं से प्राप्त हुए पत्थरों से किया जाएगा। छह माह पहले मंदिर निर्माण की स्वीकृति विभाग से मिलने के बाद निर्माण की कवायद प्रारंभ हुई मंदिर का निर्माण पत्थरों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। जो पार्टस कम रहेंगे, उन्हे बनाने में समय लगेगा। हमारा अनुमान है कि यहां 90 प्रतिशत पत्थर उपलब्ध है। ऐसे में छह महिने में कार्य पूर्ण हो जाएगा। निर्माण के दौरान प्रतिदिन विशेषज्ञ विभाग को रिपोर्ट भी करेंगे। प्राचीन मूल स्वरूप में मंदिर निर्माण के लिए पुरातत्व विभाग ने प्रारंभिक रूप से अनुमानित करीब 65 लाख रूपए खर्च होने का आंकलन किया है। प्राचीन मंदिर का पुरातत्व विभाग की आयुक्त उर्मिला शुक्ला के निर्देशन में कार्य होगा। श्री महाकालेश्वर मंदिर आने वाले श्रद्धालु इस प्राचीन मंदिर से पौराणिक इतिहास जान सकेंगे। मंगलवार से यहां प्रारंभ हुए कार्य त्रिवेणी पुरातत्व संग्रहालय के संग्रहाध्यक्ष योगेश पाल की रेखरेख में शुरू हुआ है। मंदिर के लिए खोदाई होने व स्ट्रेक्चर तैयार करने के दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी विशेषज्ञ भी आएंगे। पुरातत्व विभाग मंदिर निर्माण के बाद मंदिर समिति को सौंप देगा। राजस्थान के कारीगर करेंगे निर्माण पुरातत्व विभाग की देखरेख में महाकाल मंदिर के प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण ताराचंद निवासी भरतपुर राजस्थान करेंगे। ताराचंद ने बताया कि इसके पहले वे पुरातत्व विभाग की देखरेख में अनूपपुर के गजा मंदिर, पीएचक्यू भोपाल, उदयपुर, देवबड़ला सिहोर में शिव मंदिर, औंकारेश्वर में शिव मंदिर, आशापुरी जिला रायसेन में सूर्य मंदिर में प्राचीन पत्थरों से विभाग की देखरेख में कार्य कर चुके है। अब महाकाल मंदिर परिसर में प्राचीन मंदिर का निर्माण कार्य करेंगे। पुरातत्व विभाग की निगरानी में खुदाई हुई थी श्री महाकालेश्वर मंदिर में विस्तारीकरण कार्य के लिए मंदिर परिसर के मुख्य द्वार पर सामने के भाग में जून 2021 में खोदाई का काम शुरू किया था। नए निर्माण कार्य के लिए करीब 25 से 30 फीट की खोदाई के दौरान मिट्टी में दबे प्राचीन मंदिर के पुरा अवशेष प्राप्त हुए थे। जानकारी मिलने के बाद मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के आयुक्त शिवशेखर शुक्ला ने पुराविद् डा. रमेश यादव के नेतृत्व में चार सदस्यीय दल गठित कर पुरासंपदा का निरीक्षण कर विभाग को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इस पर आयुक्त ने महाकाल मंदिर के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित करने के लिए पुरातत्व विभाग की निगरानी में खोदाई कराने का निर्णय लिया था। वहीं शोध अधिकारी डा. धु्रवेंद्रसिंह जोधा को पुरातात्विक विधि से खुदाई कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। खुदाई में ये पुरासंपदा प्राप्त हुई- पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ की देखरेख में खोदाई के दौरान मंदिर का आधार भाग, प्राचीन शिव लिंग, नंदी, गणेश, मां चामुंडा, शार्दुल की मूर्तियां प्राप्त हुई थी। इसके अलावा भारवाही कीचक तथा दो हजार साल पुराने शुंग, कुषाण, मौर्य व परमार काल में निर्मित मिट्टी के बर्तन भी मिले थे। विशेषज्ञों की देखरेख में इस स्थान से मिले स्तंभ, कुंभ भाग, आमलक आदि के अवशेषों का वर्गीकरण के बाद विभाग ने इन पुरा अवशेषों पर नंबरिंग भी है। जिससे निर्माण के दौरान जो भाग जहां का है वहीं स्थापित किया जा सके। पुरातत्व विभाग आधार भाग से शिखर तक के हिस्सों को जोड़कर प्राचीन स्वरूप में ही मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ करेगा

मध्यप्रदेश में मंजूरी के 4 दिन बाद तबादला नीति जारी: आधी रात के बाद आदेश; जिनकी परफॉर्मेंस खराब, उनको पहले बदलेंगे

Transfer policy issued in Madhya Pradesh 4 days after approval: Order after midnight; Those with poor performance will be replaced first 29 अप्रैल को मध्यप्रदेश कैबिनेट ने तबादला नीति को मंजूरी दे दी थी, लेकिन आदेश जारी नहीं किए गए थे। भोपाल। मध्यप्रदेश में कैबिनेट की मंजूरी के चार दिन बाद आधी रात को सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। एक अप्रैल 2024 से 30 अप्रैल 2025 के बीच जिन अधिकारियों-कर्मचारियों का तबादला किया है, उनका ट्रांसफर मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा। मंगलवार 29 अप्रैल को मोहन कैबिनेट ने तबादला नीति को मंजूरी दे दी थी, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके आदेश जारी नहीं किए थे। शनिवार और रविवार की रात 12.05 बजे राज्य सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। इसमें राज्य एवं जिला स्तर पर तबादले के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नीति जारी की गई है. जिसका पालन सभी विभागों को करना होगा। प्रदेश में 6 लाख 6 हजार नियमित कर्मचारी हैं। नई तबादला नीति में 10% का तबादला होना तय माना जा रहा है। ऐसे में 30 मई तक 60 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले हो सकते हैं। तबादला नीति की 3 बड़ी बातें… विभाग अपने लिए अलग से तबादला नीति बना सकेंगे, लेकिन जीएडी के प्रावधानों का पालन करना जरूरी होगा। जीएडी की नीति से हटकर किए जाने वाले तबादलों में मुख्यमंत्री के समन्वय में आदेश प्राप्त करने होंगे। जिला संवर्ग के कर्मचारी का और राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिले के भीतर तबादला कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद किया जाएगा। पुलिस तबादला बोर्ड के फैसले पर जिलों में पोस्टिंग तबादला नीति में कहा गया है कि गृह विभाग के अंतर्गत उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले गृह विभाग द्वारा गठित पुलिस स्थापना बोर्ड ‌के आधार पर होंगे। तबादला बोर्ड द्वारा जिले में पदस्थापना का निर्णय लिया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ‌द्वारा प्रभारी मंत्री के परामर्श के बाद पदस्थापना की जाएगी। उप पुलिस अधीक्षक और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विभागीय मंत्री के अनुमोदन बाद सीएम समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर किए जाएंगे। कमजोर परफार्मेंस वालों को पहले हटाएंगे तबादला नीति में प्रावधान किया है कि प्रशासनिक आधार पर किए जाने वाले तबादलों में उन शासकीय सेवकों को पहले बदला जा सकेगा, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया है। यानी उनका परफार्मेंस कमजोर रहा हो। यह अनिवार्य नहीं है कि 3 साल पूर्ण होने पर ही तबादला किया जाए। खुद के खर्च पर ऐसे होंगे ट्रांसफर जो कर्मचारी-अधिकारी खुद के खर्च पर ट्रांसफर करवाना चाहते हैं या परस्पर ट्रांसफर चाहते हैं, उनके आवेदन ऑनलाइन या कार्यालय प्रमुख ‌द्वारा सत्यापित आवेदन के रूप में पेश किए जाएंगे। स्वयं के व्यय पर रिक्त परस्पर किए गए स्थानांतरण तथा प्रशासनिक कारणों से किए गए स्थानांतरण संबंधी आदेश अलग-अलग जारी किए जाएंगे। स्वेच्छा से स्थानांतरण संबंधी आवेदन में उन शासकीय सेवकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को पूर्ण किया गया हो। तबादला नीति में ये प्रावधान भी खास हैं… जो अधिकारी या कर्मचारी एक साल या उससे कम समय में रिटायर हो रहे हैं, उनका ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। पति-पत्नी एक साथ ट्रांसफर का आवेदन देते हैं तो उनका ट्रांसफर किया जा सकेगा। लेकिन नियुक्ति की जगह प्रशासनिक जरूरत के आधार पर तय होगी। ऐसे कर्मचारी जिन्हें गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, किडनी खराब होने के कारण डायलिसिस या हार्ट सर्जरी की वजह से रेगुलर जांच कराना जरूरी है, उनका जहां ट्रांसफर होता है वहां ये सुविधा नहीं है तो मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर उनकी चाही गई जगह पर ट्रांसफर हो सकेगा। जो कर्मचारी 40% या इससे अधिक दिव्यांग कैटेगरी में हैं, उनके ट्रांसफर नहीं होंगे। वे चाहें तो खुद से ट्रांसफर ले सकेंगे। सभी तरह के अटैचमेंट खत्म होंगे ट्रांसफर पॉलिसी में कहा है कि सभी प्रकार के अटैचमेंट खत्म किए जाना है। साथ ही तबादले से रिक्त होने वाले पद की भरपाई उसी पद या समकक्ष अधिकारी की पदस्थापना से की जाएगी। नियमित अधिकारी या कर्मचारी का तबादला कर उस पद का चार्ज जूनियर अधिकारी कर्मचारी को नहीं दिया जाएगा। जितने भी तबादले होंगे उसकी जानकारी विभाग प्रमुखों को जीएडी को देना अनिवार्य होगी। जिसका तबादला हो जाएगा, उस शासकीय सेवक का अवकाश नई पदस्थापना वाले कार्यालय में जॉइन करने के बाद ही स्वीकृत किया जाएगा। सभी तबादला आदेश ऑनलाइन अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष के ई-ऑफिस माड्यूल से ही किए जाएंगे। 30 मई के बाद की गई एंट्री को शून्य माना जाएगा। ऐसे आदेशों का पालन नहीं होगा। कर्मचारी संगठन पदाधिकारियों को इस आधार पर मिलेगी छूट शासन से पत्राचार करने की मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों की प्रदेश, संभाग, जिला, तहसील, विकासखंड शाखा के पदाधिकारियों जैसे अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष को पद पर नियुक्ति के बाद स्थानांतरण से दो पदावधि के लिए यानी 4 साल तक के लिए छूट रहेगी। यह सुविधा उसके पूरे सेवाकाल में दो पदावधि के लिए मिलेगी। चार साल से अधिक समय होने पर प्रशासकीय आवश्यकता के आधार पर ऐसे पदाधिकारियों को भी स्थानांतरित किया जा सकेगा। संगठन के पदों में नियुक्ति की पूर्व सूचना के संबंध में सक्षम अधिकारी से संतुष्टि का आधार लिया जाएगा। काॅलेज से अतिशेष शिक्षकों को हटाएंगे तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, उच्च शिक्षा विभाग के जिन संस्थाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों में विषयवार तय संख्या से अधिक शिक्षक काम कर रहे हैं, वहां से अतिशेष शिक्षकों को दूसरी जगह पदस्थ किया जाएगा। ऐसा करने से जूनियर टीचर को अतिशेष कर्मचारी होने की स्थिति में सबसे पहले स्थानांतरित किया जाएगा। मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग शिक्षकों और जिनका रिटायरमेंट एक साल के कम है, उन्हें स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। स्कूल शिक्षा में 6 से 16 मई तक लेंगे आवेदन उधर, स्कूल शिक्षा विभाग की तबादलों के लिए जारी गाइडलाइन में कहा है कि स्वैच्छिक तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन 6 मई से 16 मई तक किए जा सकेंगे। इस पर आदेश जनरेट करने का काम 20 मई तक होगा। ऐसे अतिशेष शिक्षक जिन्होंने स्वैच्छिक स्थानांतरण का … Read more

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