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DRDO के वैज्ञानिक ह्यूमनॉइड रोबोट पर काम कर रहे हैं, 2027 तक तैयार होगा जो रक्षा और अन्य क्षेत्रों में क्रांति लाएगा

बेंगलुरु रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक एक ऐसे मानवरोबोट (ह्यूमनॉइड रोबोट) के विकास पर काम कर रहे हैं, जो अग्रिम पंक्ति के सैन्य मिशनों में हिस्सा ले सके. एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि इस रोबोट का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सैनिकों की जान को खतरे में डाले बिना जटिल कार्यों को अंजाम देना है. डीआरडीओ के तहत एक प्रमुख प्रयोगशाला, रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (इंजीनियर्स), इस मशीन को विकसित कर रही है. प्रत्यक्ष मानव निर्देशों के तहत जटिल कार्यों को करने में सक्षम होगी. इस रोबोट को विशेष रूप से ऐसे वातावरण में सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है, जहां जोखिम अधिक है. चार साल से चल रहा है प्रोजेक्ट पुणे में सेंटर फॉर सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज फॉर एडवांस्ड रोबोटिक्स के समूह निदेशक एस.ई. तलोले ने बताया कि उनकी टीम पिछले चार साल से इस परियोजना पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि हमने ऊपरी और निचले शरीर के लिए अलग-अलग प्रोटोटाइप विकसित किए हैं. आंतरिक परीक्षणों के दौरान कुछ कार्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया है. यह ह्यूमनॉइड रोबोट जंगल जैसे कठिन इलाकों में भी काम कर सकेगा. हाल ही में पुणे में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन एडवांस्ड लेग्ड रोबोटिक्स में इस रोबोट को प्रदर्शित किया गया था. उन्नत विकास चरण में प्रोजेक्ट वर्तमान में यह प्रोजेक्ट अपने उन्नत विकास चरण में है. टीम का ध्यान रोबोट की ऑपरेटर के निर्देशों को समझने और उन्हें लागू करने की क्षमता को और बेहतर बनाने पर है. इस प्रणाली में तीन मुख्य घटक शामिल हैं:       एक्ट्यूएटर्स: ये मानव मांसपेशियों की तरह गति उत्पन्न करते हैं.       सेंसर: ये आसपास के वातावरण से वास्तविक समय में डेटा एकत्र करते हैं.       नियंत्रण प्रणाली: ये एकत्रित जानकारी का विश्लेषण करके रोबोट के कार्यों को निर्देशित करती हैं. तलोले ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि रोबोट वांछित कार्यों को सुचारू रूप से कर सके. इसके लिए संतुलन, तीव्र डेटा प्रोसेसिंग और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में महारत हासिल करना आवश्यक है. डिज़ाइन टीम का नेतृत्व कर रहे वैज्ञानिक किरण अकेला ने बताया कि शोधकर्ता इन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. 2027 तक इस परियोजना को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं. रोबोट की विशेषताएं और क्षमताएं डीआरडीओ के अधिकारियों ने बताया कि दो पैरों (बाइपेडल) और चार पैरों (क्वाड्रुपेडल) वाले रोबोट रक्षा और सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा, घरेलू सहायता, अंतरिक्ष अन्वेषण और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं प्रदान करते हैं. हालांकि, स्वायत्त और कुशल लेग्ड रोबोट बनाना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है. वैज्ञानिकों ने बताया कि इस ह्यूमनॉइड रोबोट का ऊपरी हिस्सा हल्के वजन वाले हाथों से सुसज्जित होगा, जिसमें गोलाकार रिवॉल्यूट जोड़ कॉन्फ़िगरेशन होगा. इसमें कुल 24 डिग्री ऑफ फ्रीडम होंगे – प्रत्येक हाथ में 7, ग्रिपर में 4, और सिर में 2. यह रोबोट जटिल स्वायत्त कार्य करने में सक्षम होगा, जैसे:  बंद-लूप ग्रिपिंग के साथ वस्तुओं को पकड़ना.   वस्तुओं को मोड़ना, धक्का देना, खींचना, स्लाइडिंग दरवाजे खोलना, वाल्व खोलना और बाधाओं को पार करना. खतरनाक सामग्रियों जैसे खदानों, विस्फोटकों और तरल पदार्थों को सुरक्षित रूप से संभालना. दोनों हाथ मिलकर सहयोगात्मक रूप से कार्य करेंगे, जिससे खतरनाक सामग्रियों को सुरक्षित रूप से संभाला जा सके. उन्नत तकनीकी विशेषताएं यह रोबोट दिन हो या रात, घर के अंदर हो या बाहर, निर्बाध रूप से काम करेगा. इसमें निम्नलिखित तकनीकी विशेषताएं शामिल होंगी… प्रोप्रियोसेप्टिव और एक्सटेरोसेप्टिव सेंसर: ये रोबोट को अपने शरीर और आसपास के वातावरण के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे.       डेटा फ्यूजन क्षमता: विभिन्न स्रोतों से डेटा को एकीकृत करने की क्षमता.       सामरिक संवेदन: यह रोबोट को जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने में मदद करेगा.       ऑडियो-विजुअल धारणा: यह रोबोट को देखने और सुनने की क्षमता प्रदान करेगा. इसके अलावा, यह ह्यूमनॉइड बाइपेड रोबोट निम्नलिखित विशेषताओं से लैस होगा…     फॉल और पुश रिकवरी: गिरने या धक्का दिए जाने पर स्वयं को संभालने की क्षमता.       वास्तविक समय में मैप जनरेशन: आसपास के क्षेत्र का नक्शा बनाने की क्षमता.       स्वायत्त नेविगेशन और पथ नियोजन: सिमुल्टेनियस लोकलाइजेशन एंड मैपिंग (एसएलएएम) के माध्यम से यह रोबोट जटिल और उच्च जोखिम वाले वातावरण में स्वायत्त रूप से संचालित हो सकेगा. भविष्य की संभावनाएं डीआरडीओ के इस ह्यूमनॉइड रोबोट प्रोजेक्ट से न केवल रक्षा क्षेत्र में क्रांति आएगी, बल्कि यह अन्य क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य सेवा, अंतरिक्ष अन्वेषण और औद्योगिक अनुप्रयोगों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की उन्नत तकनीक सैनिकों की सुरक्षा को बढ़ाने के साथ-साथ मानव जीवन को और सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने में मदद करेगी.  

एक मई से नमो भारत रैक का शताब्दीनगर स्टेशन से मोदीपुरम तक ट्रायल शुरू

मेरठ एक मई से नमो भारत रैक का शताब्दीनगर (जागरण चौराहा) स्टेशन से मोदीपुरम तक ट्रायल शुरू हो गया है। शीघ्र मेरठ सेंट्रल ( फुटबाल चौक) स्टेशन से मोदीपुरम तक मेट्रो रैक का ट्रायल शुरू होगा। अभी तक मेरठ साउथ से फुटबाल चौक स्टेशन तक मेट्रो रैक का ट्रायल जारी है। मेरठ मेट्रो कारिडोर की कुल लंबाई 23 किलोमीटर है। जिसमें 18 किमी एलिवेटेड और पांच किमी हिस्सा अंडरग्राउंड है। तीन अंडरग्राउंड समेत कुल 13 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इन सभी स्टेशन पर मेरठ मेट्रो की सेवाएं मिलेगी। मेरठ साउथ के बाद शताब्दी नगर, बेगमपुल (अंडरग्राउंड) और मोदीपुरम स्टेशनों पर नमो भारत की सेवाएं मिलेंगी। इन स्टेशनों को एक प्रमुख ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। जहां से नमो भारत और मेट्रो के अलावा आटो, टैक्सी और बस तक की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पहला स्‍टेशन मेरठ सेंट्रल दिल्ली से मेरठ की दिशा में आगे बढ़ते हुए मेरठ में अंडरग्राउंड सेक्शन का पहला स्टेशन मेरठ सेंट्रल है जहां केवल मेट्रो का स्टॉप होगा। ये स्टेशन फुटबॉल चौक के नजदीक है, जिसके बाद भैसाली और बेगमपुल स्टेशन भी अंडरग्राउंड सेक्शन का हिस्सा हैं। बेगमपुल स्टेशन पर नमो भारत और मेरठ मेट्रो की सेवाएं मिलेंगी, बाकी दोनों स्टेशनों पर केवल मेरठ मेट्रो का स्टॉप होगा। टैंक चौराहे (बेगमपुल के नजदीक) से फिर मेरठ में एलिवेटेड सेक्शन शुरू होता है, जिसमें एमईएस कॉलोनी, दौरली, मेरठ नॉर्थ और मोदीपुरम स्टेशन शामिल हैं। इनमें से मोदीपुरम स्टेशन पर नमो भारत का स्टॉप होगा, बाकी तीन स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के हैं। मेरठ मेट्रो कॉरिडोर की कुल लंबाई 23 किमी इससे पहले मेरठ साउथ से शताब्दी नगर तक नमो भारत के सफल ट्रायल रन किए गए। वहीं, मेरठ सेंट्रल तक के सेक्शन में मेरठ मेट्रो का ट्रायल रन भी जारी हैं। भारत में पहली बार सेमी हाई स्पीड नमो भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही, मेरठ में स्थानीय मेट्रो का परिचालन किया जाएगा। मेरठ मेट्रो कॉरिडोर की कुल लंबाई 23 किलोमीटर है, जिसमें 18 किमी एलिवेटेड और 5 किमी हिस्सा अंडरग्राउंड है। इसके लिए तीन अंडरग्राउंड समेत कुल 13 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। ट्रांजिट हब के रूप में विकसित हो रहे स्‍टेशन मेरठ में मेरठ साउथ के बाद शताब्दी नगर, बेगमपुल (अंडरग्राउंड) और मोदीपुरम स्टेशनों पर नमो भारत और मेरठ मेट्रो दोनों की सेवाएं मिलेंगी। इन स्टेशनों को एक प्रमुख ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां से नमो भारत और मेट्रो के अलावा ऑटो, टैक्सी और बस तक की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। फिलहाल 55 किमी रूट पर चल रहा नमो भारत वर्तमान में नमो भारत ट्रेन न्यू अशोक नगर से मेरठ साउथ के बीच 55 किलोमीटर के सेक्शन पर यात्रियों को सुविधा प्रदान कर रही है। इनमें न्यू अशोक नगर, आनंद विहार, साहिबाबाद, गाज़ियाबाद, गुलधर, दुहाई, दुहाई डिपो, मुरादनगर, मोदी नगर साउथ, मोदी नगर नॉर्थ और मेरठ साउथ समेत 11 स्टेशन शामिल हैं। दिल्ली-मेरठ के बीच 82 किलोमीटर संपूर्ण नमो भारत कॉरिडोर के परिचालित होने से ये दूरी महज 55 मिनट में पूरी हो जाएगी। मेरठ मेट्रो समेत इस पूरी परियोजना को इसी साल संचालित करने का लक्ष्य है।

कांग्रेस शहर अध्यक्ष के लिए कई नए नाम सामने आने से समीकरण भी बदल रहे, दीपू यादव और चिंटू चौकसे पर चर्चा

इंदौर  एमपी के इंदौर शहर में कांग्रेस के जिला-शहर अध्यक्ष के बदलाव को लेकर चल रही कवायद फिर से तेज हो गई है। माना जा रहा था कि गुजरात अधिवेशन के बाद इंदौर के जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। इसके बाद पिछले दिनों भोपाल के अलावा प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में नामों को लेकर बड़े नेताओं से चर्चा की थी। शहर अध्यक्ष के लिए कई नए नाम सामने आने से समीकरण भी बदल रहे हैं। हटाने की कवायद तेज मालूम हो कि लंबे समय तक शहर अध्यक्ष पद खाली रहने के बाद सुरजीत सिंह चड्ढा को कुर्सी मिली थी। वे कमलनाथ के प्रदेश अध्यक्ष होने के समय बनाए गए थे। विधानसभा की सभी सीटें हारने के बाद चड्ढा और जिला अध्यक्ष सदाशिव यादव को हटाने की कवायद चल रही है। गांधी भवन में कैलाश विजयवर्गीय की आवभगत करने के बाद अध्यक्ष बड़े नेताओं के निशाने पर हैं। चड्ढा को जब अध्यक्ष बनाया था तब अरविंद बागड़ी और अमन बजाज ही दावेदार थे। इन नामों पर चर्चा अब नए समीकरण के तहत नए नाम सामने आए हैं। इनमें दीपू यादव और चिंटू चौकसे का नाम सामने आया है। बताया जाता है कि चिंटू राजी नहीं है। ऐसे में यादव के नाम पर विचार चल रहा है। जिला अध्यक्ष के लिए राधेश्याम पटेल दावेदार है। बताया जा रहा है कि दावेदारों ने अपने नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।

अब हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से खजुराहो के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन दतिया रेलवे स्टेशन पर भी रुकेगी

ग्वालियर भारतीय रेलवे बोर्ड ने देश की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन का नया हॉल्ट मध्य प्रदेश के एक नए शहर में देने का फैसला किया है. अब नई दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से खजुराहो के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन दतिया रेलवे स्टेशन पर भी रुकेगी, जिससे दतिया के पीतांबरा माता शक्तिपीठ के दर्शन के लिए आने जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलने जा रही है. मंगलवार से दतिया में रुकेगी वंदेभारत एक्सप्रेस झांसी रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह से मिली जानकारी के अनुसार खजुराहो-निजामुद्दीन के बीच सफर करने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 22469/22470 का दतिया हॉल्ट आगामी 13 मई से लागू होने जा रहा है. भारतीय रेलवे बोर्ड ने यह फैसला यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए लिया है. ये होगा दतिया ग्वालियर और झांसी का नया समय वंदे भारत एक्सप्रेस के दतिया ठहराव के साथ ही रेलवे ने नई समय सारणी भी जारी की है. अब से दतिया हॉल्ट की वजह से ग्वालियर और झांसी रेलवे स्टेशन का समय भी बदलने जा रहा है. जहां खजुराहो से चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस 22469 का दतिया रुकने का समय शाम 6:42-6:44 का होगा, जिसकी वजह अब यह ट्रेन ग्वालियर शाम 7:28 बजे पहुंचेगी और शाम 7:33 बजे निजामुद्दीन के लिए रवाना होगी. निजामुद्दीन से खजुराओ चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस 22470 निजामुद्दीन से चलकर सुबह 09:59 बजे दतिया पहुंचेगी 2 मिनट हॉल्ट के बाद 10:01 बजे आगे के लिए रवाना होगी. मंगलवार से झांसी नए समय पर सुबह 10:30 पर पहुंचेगी और 10:35 बजे खजुराहो रवाना होगी. हर रोज पहुचते हैं लाखों श्रद्धालु बता दें कि लंबे समय से धार्मिक स्थल पीतबारा माई शक्तिपीठ पर यात्रियों की सुविधा के दृष्टिगत वंदे भारत एक्सप्रेस के हॉल्ट की मांग की जा रही थी. क्योंकि प्रतिदिन न सिर्फ प्रदेश से बल्कि देश के कोने कोने से श्रद्धालु पीताम्बरा माता के दर्शन के लिए दतिया पहुंचते हैं. मान्यताओं के हिसाब से शनिवार को यहां आने वालों श्रद्धालुओं की संख्या लाखों की होती है. ऐसे में वंदे भारत एक्सप्रेस का ठहराव चम्बल अंचल के लिए तीर्थ और पर्यटन के लिहाज से एक बड़ी सौगात है.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए पूर्व CM दिग्विजय सिंह ने रखी फुले फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग, भोपाल के डीबी मॉल में होगा आयोजन

भोपाल एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के जीवन और विचारों पर बनी फिल्म “फुले” की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी है।  इसका आयोजन आज 13 मई का भोपाल के डीबी मॉल स्थित सिनेप्लेक्स में किया जाएगा। दिग्विजय सिंह के अलावा पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित अन्य कांग्रेस नेता व पार्टी कार्यकर्ता यहां फिल्म देखेंगे। कार्यकर्ताओं को फुले के संघर्ष से रूबरू कराना इस आयोजन का उद्देश्य पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को फुले के समतावादी विचारों और सामाजिक न्याय के संघर्ष से रूबरू कराना है। दिग्विजय सिंह की इस पहल को सामाजिक परिवर्तन के पुरोधा फुले को वर्तमान राजनीतिक संदर्भ में पुनः स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इस आयोजन को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है। फुले जैसे विचारकों को याद करना जरूरी कार्यक्रम को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि महात्मा फुले ने उस दौर में समानता, शिक्षा और जातिविहीन समाज का सपना देखा था जब ऐसी बातें सोच पाना भी कठिन था। आज जब समाज में विभाजनकारी शक्तियां सक्रिय हैं, फुले जैसे विचारकों को याद करना और उनकी प्रेरणा लेना पहले से कहीं ज्यादा ज़रूरी है। फुले के जीवन संघर्षों पर बनी है यह फिल्म जनकारी के लिए बता दें कि कि यह फिल्म महात्मा फुले के जीवन संघर्ष, शिक्षा आंदोलन और जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ उनके आंदोलन को प्रभावशाली ढंग से दर्शाती है। फिल्म में दिखाया गया है कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने किस तरह समाज के खिलाफ जाकर पहले अपनी पत्नी को पढ़ाया और फिर समाज की लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया। ये सब उस दौर में हुआ जब लड़कियों को पढ़ाना पाप माना जाता था। जब हमारे समाज में बाल विवाह, विधवा का मुंडन कर देना और छुआछूत जैसी कुप्रथाएं जिंदा थी। समाज के एक बड़े तबके के विरोध के बावजूद उन्होंने ये कैसे किया। यही इस फिल्म की कहानी है।  

पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल से गुजरने वाले ट्रेनें अब सिग्नल के इंतजार में लेट नहीं होंगी, ऑप्टिकल फाइबर सिग्नल सिस्टम शुरू

भोपाल पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने रेल सिग्नल प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की है. गौरतलब है कि भारतीय रेल में पहली बार भोपाल मंडल के निशातपुरा यार्ड में ऐसी तकनीक शुरू की गई है, जिसमें सिग्नल ऑपरेशन अब तारों की बजाय ऑप्टिकल फाइबर के जरिए किया जाएगा. अब तक जो सिग्नल प्रणाली चल रही थी, उसमें अलग-अलग तारों के ज़रिए सिग्नलों को कंट्रोल किया जाता था. लेकिन इसमें समय लगता था और कई बार खराबी की संभावना भी रहती थी. यह नई तकनीक ऑप्टिकल फाइबर केबल पर आधारित है, जो पारंपरिक संकेत प्रणाली की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय मानी जा रही है. नई तकनीक में ‘लैम्प आउटपुट मॉड्यूल’ नाम का एक यंत्र लगाया गया है, जो सीधे कंट्रोल रूम से सिग्नल तक ऑप्टिकल फाइबर के ज़रिए सिग्नल भेजता है. यह क्या है? • यह एक नई सिग्नल तकनीक है, जिसमें रेलवे ट्रैक पर लगे सिग्नल अब फाइबर लाइन से सीधा कंट्रोल होंगे. • इसमें कोई भारी वायरिंग नहीं होगी, सब कुछ फाइबर के ज़रिए होगा, जिससे सिग्नल तेज़ी से और बिना रुकावट के काम करेगा. इसका फायदा क्या है? • सिग्नल कभी ‘ब्लैंक’ नहीं होंगे, यानी अगर एक सिग्नल गड़बड़ करे तो भी ट्रेन को सिग्नल का आस्पेक्ट दिखाई देगा. • ट्रेनें ज़्यादा सुरक्षित और समय पर चलेंगी. • सिस्टम के साथ स्वचालित पंखा भी जुड़ा है जो ज़रूरत पड़ने पर खुद चालू होकर मशीन को गर्म होने से बचाता है. • अगर एक लाइन खराब हो जाए तो दूसरी फाइबर लाइन से काम चलता रहेगा – यानी सिस्टम कभी नहीं रुकेगा. • सिग्नल का रख-रखाव आसान और कम खर्चीला होगा. खराबी की आशंका होगी कम सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया, अभी जो सिग्नल प्रणाली थी, उसमें तारों से सिग्नल कंट्रोल करते थे। इसमें समय लगता था। खराबी की आशंका रहती थी। अब नहीं रहेगी। नई तकनीक ऑप्टिकल फाइबर केबल आधारित है। यह ज्यादा विश्वसनीय और तेज है। इनका कहना वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि इस तकनीक की शुरुआत S/SH-15 और S/SH-16 नाम के दो सिग्नलों पर निशातपुरा यार्ड में की गई है. भोपाल से बीना के मध्य रेलखंड पर इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का कार्य प्रारंभ हो चुका है. योजना के अनुसार, जून 2026 तक पूरे रेलखंड में यह उन्नत प्रणाली सक्रिय कर दी जाएगी. यह तकनीक आगे चलकर देशभर की रेलवे लाइनों को और सुरक्षित और आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.  

MP में कर्मचारी-अधिकारियों के वेतन बढ़ोत्तरी के बाद अब, माननीयों के वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी की तैयारी की जा रही

भोपाल मध्य प्रदेश में कर्मचारी-अधिकारियों के वेतन भत्तों में बढ़ोत्तरी के बाद अब करीब 9 साल बाद प्रदेश के माननीयों के वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी की तैयारी की जा रही है. पक्ष और विपक्ष के विधायकों की मांग पर विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने प्रस्ताव तैयार कर संसदीय कार्य विभाग को प्रस्ताव सौंपा गया है. समिति ने विधायकों की वेतन-भत्तों में 40 फीसदी और पेंशन में करीबन 30 फीसदी की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव सौंपा है. वेतन-भत्तों और पेंशन में बढ़ोत्तरी का आधार दूसरे राज्यों में दी जा रही सुविधाओं को बनाया गया है. उधर इस प्रस्ताव पर विधानसभा सचिवालय की लेखा शाखा द्वारा एक बार फिर आंकलन किया जा रहा है. विधायकों को कितना मिलता है वेतन-भत्ता मध्य प्रदेश के विधायकों का वेतन भत्ता 2016 में बढ़ाया गया था, जिसे अब एक बार फिर बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. अभी प्रदेश के विधायकों को वेतन भत्ते मिलाकर करीबन 1 लाख 10 हजार रुपए मिलते हैं. एमपी विधायकों का वेतन भत्ता विधायकों को रेल कूपन भी दिया जाता है, इससे विधायक राज्य के अंदर व बाहर रेल यात्रा कर सकते हैं. यह रेल कूपन विधायक के अकेले सफर के लिए फर्स्ट क्लॉस एससी के लिए होता है. राज्य के अंतर एक साल में 10 हजार किलोमीटर की यात्रा कर सकते हैं. विधायकों को 10 हजार रुपए मेडिकल अलाउंस और विधानसभा की हर बैठक में भाग लेने के लिए 2500 रुपए तक दैनिक भत्ता दिया जाता है. वेतन बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव हुआ तैयार इसको लेकर सत्तापक्ष और विपक्षी विधायकों द्वारा वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी की मांग की जाती रही है. विधानसभा बजट सत्र के दौरान भी विधायकों ने इसको लेकर बात उठाई थी. विधायकों का कहना था कि पिछले 9 सालों में महंगाई बढ़ी है. इसके अलावा बंगले पर पहुंचने वाले कार्यकर्ताओं के स्वागत सत्कार में भी काफी पैसा खर्च होता है. उधर विधायकों की मांग पर अब विधायकों के वेतन-भत्तों और पेंशन में बढ़ोत्तरी के लिए विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने प्रस्ताव तैयार किया है. कहां विधायकों की कितनी सैलरी इसमें विधायकों का वेतन 40 फीसदी बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार रुपए और पेंशन 35 हजार रुपए से बढ़ाकर 58 हजार रुपए दिए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. उधर विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के मुताबिक पूर्व विधायकों, विधायकों को लेकर प्रस्ताव भेजा गया था, फिलहाल शासन स्तर पर यह विचाराधीन है. जबकि इन राज्यों में मध्य प्रदेश से कम सैलरी मिलती है     मॉर्डन हो रहे मध्य प्रदेश के ‘माननीय’, ऑफलाइन से ज्यादा ऑनलाइन पूछे सवाल, जानिए कितना पढ़े-लिखे हैं विधायक     संपत्ति के मामले में बीवियों से पिछड़े माननीय, शिवराज और कमलनाथ भी रह गए गरीब, देखिए किसकी पत्नी कितनी धनवान झारखंड के विधायकों को मिलता है सबसे ज्यादा वेतन देश में झारखंड में विधायकों को सबसे ज्यादा वेतन-भत्ते मिलते हैं. झारखंड में विधायकों को हर माह वेतन-भत्ते सहित करीबन 2 लाख 90 हजार रुपए वेतन-भत्ते दिए जाते हैं. जबकि महाराष्ट्र में करीबन 2 लाख 60 हजार रुपए वेतन-भत्ते मिलते हैं. तेलंगाना विधानसभा में विधायकों को करीबन 2 लाख 75 हजार वेतन-भत्ता मिलता है.

भोपाल समेत आसपास के पांच जिलों को मिलाकर 8791 वर्ग किमी का क्षेत्र तय किया जा रहा

भोपाल भोपाल (Bhopal) मेट्रोपॉलिटन रीजन (Bhopal Metropolitan Region) का प्राथमिक मैप तैयार कर लिया गया है। भोपाल समेत आसपास के पांच जिलों को मिलाकर 8791 वर्ग किमी का क्षेत्र (Mahanagar) तय किया जा रहा है। हेक्टेयर में ये आठ लाख 79 हजार 109.94 है। भोपाल जिले की आबादी के घनत्व 855 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर के अनुसार इसमें 75 लाख की आबादी के लिए जगह तय (Development News) होगी। गौरतलब है कि इसकी डीपीआर के लिए बीडीए ने दस लाख रुपए के शुरुआती बजट के साथ कंसल्टेंट तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी की है। इस माह कंसल्टेंट तय हो जाएगा, इसके 14 माह में डीपीआर बनाना होगी। इन जिलों के ये क्षेत्र भोपाल मेट्रोपॉलिटन में रायसेन जिले के रायसेन, औबेदुल्लागंज। विदिशा जिले के विदिशा, ग्यारसपुर, गुलाबगंज। सीहोर जिले के सीहोर, इछावर, आष्टा, श्यामपुर, जावर। राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़, जीरापुर, ब्यावरा, पिछोर, खूजनेर। भोपाल जिले के हुजूर, बैरसिया, कोलार। टूरिस्ट सेंटर व सर्किट की प्लानिंग मेट्रोपॉलिटन रीजन में सेटेलाइट टाउन बनाकर नए आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। अतिरिक्त आबादी को इसमें बसाया जाएगा। शहरी क्षेत्र की बजाय रीजन के रूरल एरिया में विशेष आवासीय क्षेत्र बनाकर लोगों को बसाएंगे और कार्यस्थल पर आवाजाही के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर करेंगे। इतना ही नहीं, रीजन में नए टूरिस्ट सेंटर व सर्किट तय किए जाएंगे। इस तरह होगा विकास का खाका क्षेत्र विकास के आधार पर योजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की योजना ग्रोथ सेंटर को चिन्हित करना सेटेलाइट टाउन के लिए क्षेत्र चिन्हित करना टूरिस्ट सेंटर व सर्किट भी तय होगा पर्यावरणीय विकास के लिए पूरा मैनेजमेंट तय करना बेहतर कृषि भूमि का संरक्षण प्लान कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान होगा, जिसमें रोड, प्राकृतिक नाले, जनसुविधाएं व सेवाओं के साथ रीजन के आर्थिक विकास का पूरा मैप रहेगा। टूरिस्ट सेंटर व सर्किट की प्लानिंग भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का प्राथमिक मैप तैयार है। बेहतर प्लान के साथ रीजन तय करेंगे। भोपाल का स्वरूप बदलेगा, विकास की संभावनाएं बढ़ेगी। – संजीव सिंह, संभागायुक्त व प्रशासक बीडीए इंदौर में 5 जिलों के 1756 गांव होंगे शामिल इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया में पांच जिले इंदौर, देवास, उज्जैन, धार और शाजापुर को शामिल किया जाएगा। जिसका कुल क्षेत्रफल 9 हजार किलोमीटर का होगा। इसमें भौगोलिक, आर्थिक, धार्मिक-सामाजिक स्थिति का आंकलन किया जाएगा कि कहां कौन सी इंडस्ट्री है, कैसे जरूरतें हैं। इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इसके बाद रीजनल और इंवेस्टमेंट प्लान बनाया जाएगा। बता दें कि, इंदौर के पहले चरण के इंस्पेक्शन का काम पूरा हो चुका है। अब इसमें ऑथरिटी के द्वारा यह तय किया जाएगा कि इसमें कौन-कौन से जिले, तहसीलें और गांवों को शामिल किया जाएगा।

इंदौर-खंडवा हाईवे पर टोल प्लाजा का काम जुलाई से शुरू होगा और एनएचएआई संचालन करेगा

 इंदौर इंदौर-खंडवा राजमार्ग का पहला टोल प्लाजा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने जनवरी से शुरू करने का फैसला किया है। यह प्लाजा तेजाजी नगर बायपास से 33 किमी पर बनाया जाएगा, जो बलवाड़ा के नजदीक गांव पडाली में होगा। मगर वाहन चालकों से 33 की बजाए 46 किमी की सड़क का टोल टैक्स वसूला जाएगा, क्योंकि इंदौर-चोरल की बीच तीन सुरंगें होंगी। इस वजह से राजमार्ग के इस हिस्से की दरें अधिक होंगी। फिलहाल टोल की दरों पर यातायात को लेकर आकलन करना बाकी है, जो अक्टूबर से प्रारंभ किया जाएगा। उसके आधार पर दरें निर्धारित की जाएंगी। अधिकारियों के मुताबिक दिसंबर से भारी वाहन भी राजमार्ग से गुजरेंगे। 216 किमी लंबे इंदौर-खंडवा-एदलाबाद राजमार्ग का काम जनवरी 2025 में खत्म होना था, लेकिन काम धीमा होने से एनएचएआई ने प्रोजेक्ट की डेडलाइन बढ़ाई है। फरवरी 2026 तक मेघा इंजीनियरिंग को यह काम पूरा करना है। मगर तलाई (300), भेरूघाट (500) और चोरल (300) मीटर की तीन सुरंग है। इनका 35-40 फीसद काम बाकी है। एनएचएआइ ने एजेंसी को दिसंबर तक काम पूरा करने पर जोर दिया है। खंडवा तक रहेंगे दो टोल राजमार्ग पर दो से तीन टोल रहेंगे। इंदौर से बलवाड़ा के बीच पहला टोल रखा जाएगा, जबकि धनगांव में दूसरा प्लाजा अगले कुछ दिनों में शुरू हो जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक प्रत्येक 50-55 किमी की दूरी पर टोल प्लाजा रहेंगे। इंदौर-बलवाड़ा वाले हिस्से में टैक्स थोड़ा अधिक होगा, क्योंकि इस हिस्से में तीन सुरंग है। इनकी लंबाई 1300 मीटर रखी है। अधिकारियों के मुताबिक सुरंग की लंबाई की तुलना में दस गुना टैक्स लगाया जाता है। जैसे 1300 मीटर सुरंग की लंबाई है तो 13 किमी सड़क का टोल टैक्स लगाया जाएगा। इस आधार पर इंदौर से बलवाड़ा के बीच 33 किमी का सफर तय करने पर 46 किमी का टैक्स देना होगा। एनएचएआई करेगी संचालित राजमार्ग का प्रोजेक्ट लगभग 900 करोड़ रुपये का है। नए नियमों के मुताबिक एजेंसी की बजाए एनएचएआई ही टोल का संचालन करेगा। टोल टैक्स से आने वाली राशि का कुछ हिस्सा एजेंसी को दिया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जाएगा, क्योंकि निर्माण कार्य के दौरान 60 फीसद राशि एजेंसी लगाती है। अक्टूबर से करेंगे आकलन इंदौर-बलवाड़ा के बीच बनने वाले टोल प्लाजा से वाहन गुजरने का आकलन अक्टूबर से किया जाएगा। तब तक राजमार्ग का हिस्सा भारी वाहनों के लिए भी खोल दिया जाएगा। यातायात के दवाब को देखने के बाद टोल की दरें तय होंगी। कार, हल्के-भारी वाहन, कंटेनर-ट्रक, बस की राशि निर्धारित करेंगे। थोड़ा ज्यादा देना होगा टैक्स     इंदौर-खंडवा राजमार्ग पर पहला टोल प्लाजा बलवाड़ा के पास बनेगा। इसके लिए थोड़ी अधिक टैक्स राशि चुकानी होगी, क्योंकि इस हिस्से में तीन सुरंगें आ रही हैं। इन्हें बनाने में खर्च अधिक आता है। इसके लिए टैक्स भी अधिक वसूला जाएगा। सुरंग की लंबाई के आधार पर दस गुना टैक्स लगता है। जुलाई से टोल प्लाजा का काम शुरू होगा। अक्टूबर से दरें निर्धारित की जाएंगी। – सुमेश बांझल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई  

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे नवंबर से शुरू होगा निर्माण, मप्र, उप्र और राजस्थान को मिलेगा लाभ, 220 करोड़ स्वीकृत

ग्वालियर  ग्वालियर से आगरा के बीच 4,263 करोड़ रुपये की राशि से प्रस्तावित 88.4 किमी. लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए जीआर इंफ्रा से अनुबंध होने के बाद अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करानी है। अधिग्रहण के काम में तेजी लाने, मुआवजा वितरण करने के लिए 220 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी मिल गई है। इस परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के 14 गांव, राजस्थान के धौलपुर के 30 गांव, मध्य प्रदेश के मुरैना और ग्वालियर सहित कुल 100 गांवों में भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। 88.400 किमी. सड़क सिक्सलेन बनेगी इसके बाद नवंबर माह से ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि मुआवजा वितरण में किसानों की ओर से आपत्तियां लगाई गई हैं, लेकिन एनएचएआई के अधिकारी इनका भी निराकरण करने का दावा कर रहे हैं। इस परियोजना में ग्वालियर से राजस्थान के बीच 88.400 किमी. सड़क सिक्सलेन होगी। एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए दोतरफा तैयारियां चल रही हैं, क्योंकि कंपनी को अब छह माह के अंदर निर्माण कार्य के लिए राशि की व्यवस्था करनी है, तो वहीं एनएचएआई को जमीन उपलब्ध करानी है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत कंपनी को वर्तमान ग्वालियर-आगरा फोरलेन हाईवे की मरम्मत को प्राथमिकता से करना होगा। ग्वालियर से सीधे आगरा पहुंचाएगा एक्सप्रेस-वे कंपनी को इस पूरे हाईवे का पुनरुद्धार करना है, ताकि जिन वाहनों को ग्वालियर से सीधे आगरा जाना है, वह एक्सप्रेस-वे का सहारा लें। वहीं जिन वाहनों को मुरैना, धौलपुर की ओर जाना है, वे वर्तमान फोरलेन का सहारा ले सकें। कंपनी को वर्तमान हाईवे की मरम्मत के लिए सिर्फ एक साल का समय दिया जाएगा, यानी नवंबर 2026 तक कंपनी को इसकी मरम्मत का काम पूरा करना होगा। मिल चुकी हैं सारी अनुमतियां इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए एनएचएआई द्वारा सरकारी एजेंसियों से सभी अनुमतियां प्राप्त कर ली गई हैं। रेलवे, पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण, वन विभाग और तीनों राज्यों के राजस्व विभाग से अनुमतियां प्राप्त होने के बाद कार्य में तेजी आई है। अब सिर्फ निजी भूमि के अधिग्रहण के लिए प्रक्रिया बाकी रह गई है। चूंकि एनएचएआई को अब राशि स्वीकृत हो चुकी है, ऐसे में अब मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिग्रहण प्रक्रिया अंतिम चरण में     ग्वालियर-आगरा सिक्सलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके लिए लगभग 220 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हो गई है। जल्द ही मुआवजा वितरण शुरू किया जाएगा। – प्रशांत मीणा, मैनेजर एनएचएआई।  

भविष्य में रतलाम में आर्थिक गतिविधियां उड़ान भरने की संभावना, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रसे-वे और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से तस्वीर बदलेगी

रतलाम  भविष्य में रतलाम में आर्थिक गतिविधियां उड़ान भरने की संभावना है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रसे-वे और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर रतलाम की तस्वीर बदलने जा रहे हैं. इसी को देखते हुए रतलाम के बंजली हवाई पट्टी को विस्तारित करने पर जोर है. यहां से बिजनेस जेट्स और कॉमर्शियल फ्लाइट्स उड़ान भरेंगी. मध्य प्रदेश सरकार बंजली हवाई पट्टी पर बिजनेस जेट्स उतारने की तैयारी कर रही है. इसके लिए रविवार को भोपाल से टेक्निकल टीम विशेष विमान से रतलाम पहुंची. टेक्निकल टीम ने किया हवाई पट्टी का निरक्षण टेक्निकल टीम ने बंजली हवाई पट्टी का निरीक्षण किया. हवाई पट्टी को बिजनेस जेट्स की आवाजाही के लिए तैयार करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश तकनीकी टीम ने लोक निर्माण विभाग और अन्य सबंधित विभागों को दिए. रतलाम जिले से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे और यहां बन रहे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को देखते हुए रतलाम की इस एयर स्ट्रिप पर कॉमर्शियल उड़ानें भी शुरू हो सकेंगी. भोपाल से पहुंची टीम के सीनियर पायलट कैप्टन विश्वास राय ने कहा “निरीक्षण का लक्ष्य हवाई पट्टी के विस्तार और कॉमर्शियल उड़ानों की संभावना को तलाशना है.” रतलाम हवाई पट्टी का विस्तार दो भागों में योजना के अनुसार रतलाम एयर स्ट्रिप की सतह को व्यवस्थित किया जाएगा. दो भागों में एयर स्ट्रिप का विस्तार किया जाएगा. इसके लिए सरकारी भूमि को चिह्नित कर लोक निर्माण और राजस्व विभाग की मदद से हवाई पट्टी के विस्तार की योजना को अमल मे लाया जाएगा. गौरतलब है कि दिल्ली-मुंबई 8 लेन एस्कप्रेस-वे पर रतलाम के पास करीब 1500 हेक्टेयर में नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आकार ले रहा है. ऐसे में रतलाम हवाई पट्टी पर, विमानों का आवागमन बढ़ जाएगा.

प्रदेश में अब एक जैसी प्रकृति के विभागों के लिए एक साथ होंगी भर्तियां, भर्ती प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता

 भोपाल मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए यह बड़ी खबर है. अब सरकारी नौकरी की तैयारी करने वालों को अलग-अलग विभागों की अलग-अलग परीक्षाओं से जूझना नहीं पड़ेगा. दरअसल, राज्य सरकार भर्ती प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है. सभी विभागों में भर्ती के एक जैसे नियम बनाए जाएंगे, ताकि युवाओं को नियम समझने में कोई परेशानी न हो.। इसके लिए आदर्श भर्ती नियमावली बनाई जा रही है। शासन ने इसकी जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग को दी है। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों से इस बारे में सुझाव मांगे हैं। दरअसल, प्रदेश में विभिन्न विभागों में अगले दो-तीन साल में करीब ढाई लाख पदों पर भर्तियां होनी हैं। इसके लिए ही सभी विभागों के भर्ती नियम एक जैसे करने का निर्णय लिया गया है, ताकि कोई नियमसंगत समस्या खड़ी न हो। ऐसा इसलिए, क्योंकि अब तक कई विभागों में भर्ती के कुछ नियमों में भिन्नता है। 2.5 लाख पदों पर होंगी भर्तियां बता दें कि राज्य के अलग-अलग विभागों में आने वाले 2-3 सालों में करीब 2.5 लाख पदों पर भर्तियां की जाएंगी। इसलिए राज्य सरकार द्वारा सभी विभागों में कर्मचारियों के भर्ती नियम एक समान बनाने का फैसला किया गया है। दरअसल, अब तक कई विभागों में भर्ती के कुछ नियम काफी अलग हैं। इसकी वजह से प्रदेश लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल भर्ती नियम तैयार करते हैं और अलग-अलग विज्ञापन निकालते हैं। कुछ नियम अलग-अलग हैं मसलन, वन विभाग, शिक्षा विभाग और नगर तथा ग्राम निवेश सेवा भर्ती के कुछ नियम अलग-अलग हैं। इनके आधार पर राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल भर्ती नियम तैयार करके अलग-अलग विज्ञापन निकालते हैं। नियम अलग होने से इन चयन एजेंसियों को विभागवार भर्ती करने में परेशानी होती है और समय भी अधिक लगता है। चूंकि, अब प्रदेश में बड़े पैमाने पर भर्तियां होनी हैं, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि सभी विभागों के भर्ती नियमों में एकरूपता रहे ताकि भर्ती विज्ञापन जारी करने में विलंब न हो। एक जैसी प्रकृति के विभागों के लिए भर्ती एक साथ करवा दी जाएंगी। रिपोर्ट के आधार पर भर्ती नियमों को देंगे अंतिम रूप इससे समय और संसाधन की बचत होगी। इसे देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। सेवानिवृत्त अधिकारियों की एक समिति भी बनाई गई है, जो नियमों का अध्ययन करके रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट के आधार पर भर्ती नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमों की समानता सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लागू की जाएगी। क्या है राज्य सरकार का प्लान? विभागों के कर्मचारियों के भर्ती नियम अलग होने के कारण राज्य की चयन एजेंसियों को भर्ती करने में परेशानी होती है। इसके अलावा, भर्ती के प्रोसेस पर भी काफी समय लगता है। प्रदेश में आने वाले सालों में पैमाने पर विभाग में भर्तियां होने वाली हैं। अगर पुराने नियम से भर्ती हुई तो उसमें काफी समय लगेगा। समय और संसाधन की बचत के लिए प्रदेश में एक नई भर्ती नियमावली बनाई जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमों की समानता सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लागू की जाएगी। ये नियम हो सकते हैं एक समान     उम्र संबंधी।     पात्रता के मानक।     आरक्षण संबंधित मानक।     महिला अभ्यर्थियों को आरक्षण मानक।     परिवीक्षा अवधि। चयन भर्तियों में किया जा चुके हैं बदलाव बता दें कि हाल ही में राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं को लेकर कुछ बदलाव किए गए हैं। इनके अंतर्गत अब वर्ष में केवल एक बार होंगी। इससे अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा और फीस नहीं देनी होगी। जनवरी 2026 से नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इससे भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और समय पर होगी। यह कदम अभ्यर्थियों के हित में माना जा रहा है।

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