LATEST NEWS

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा, मंदिरों में सिर्फ ब्राह्मण ही पुजारी क्यों?

भोपाल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि राज्य सरकार द्वारा संचालित धार्मिक स्थलों में पुजारी के रूप में केवल ब्राह्मणों को ही क्यों मौका दिया जाता है। याचिका अनुसूचित जाति-जन जाति अधिकारी कर्मचारी संघ की ओर से दायर की गई है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा संचालित किए जाने वाले धार्मिक स्थलों से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में सवाल उठाया गया है कि इन धार्मिक स्थलों में पुजारी के रूप में नियुक्ति के लिए केवल ब्राह्मणों को ही अवसर क्यों दिया जाता है। हिंदू धर्म की सभी जातियों को क्यों नहीं। मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में इस सवाल का जवाब देने का आदेश दिया है। अनुसूचित जाति-जन जाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजजाक्स) द्वारा दायर याचिका में मध्य प्रदेश विनिर्दिष्ट मंदिर विधेयक 2019 के तहत अध्यात्म विभाग द्वारा 4 अक्टूबर 2018 और 4 फरवरी 2019 को पारित आदेशों की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट रामेश्वर सिंह ठाकुर और पुष्पेंद्र शाह ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि निर्दिष्ट मंदिर विधेयक 2019 की धारा 46 के तहत सरकार ने अनुसूची 1 में 350 से अधिक मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों को अधिसूचित किया है, जो राज्य के नियंत्रण में हैं। आदेश में एक विशेष जाति को पुजारी के रूप में नियुक्त करने की अनुमति दी गई है। इसके लिए राजकोष से निश्चित वेतन का प्रावधान है। यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 का उल्लंघन है क्योंकि हिंदुओं में ओबीसी/एससी/एसटी वर्ग शामिल हैं। इसलिए पुजारी के पद के लिए केवल एक जाति को प्राथमिकता देना अनुचित है। राज्य सरकार की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता कर्मचारियों का संगठन है, जिसे याचिका दायर करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि सदियों से मंदिरों में केवल ब्राह्मण ही पूजा करते आ रहे हैं। सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं रहा है। 2019 से राज्य सरकार ने धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करते हुए वेतन आधारित पुजारी नियुक्त करने का कानून बना दिया है। इसके बारे में आम जनता को जानकारी नहीं है। याचिका पर सुनवाई करने के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव जीएडी, सामाजिक न्याय मंत्रालय, धार्मिक एवं धर्मस्व मंत्रालय एवं लोक निर्माण विभाग को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।  

बलूचिस्तान चाहता है कि सबसे पहली मान्यता भारत करे, क्या है इसकी वजह? आइए जानते

नई दिल्ली  पाकिस्तान (Pakistan) के लिए बलूचिस्तान (Balochistan) गले की फांस बन चुका है। बलूचिस्तान के ज़्यादातर निवासी खुद को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते। बलूचों के दिल और दिमाग में पाकिस्तानी सरकार और सेना के प्रति नफरत है। समय-समय पर बलूच अलगाववादी पाकिस्तानी सेना और पुलिस को निशाना बनाते हैं। हाल ही में बलूच नेता मीर यार बलूच ((Mir Yar Baloch)) ने बलूचिस्तान की आज़ादी का ऐलान करते हुए कहा कि बलूचिस्तान, पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही मीर ने खुद को बलूचिस्तान का पहला राष्ट्रपति भी घोषित किया। महरंग बलूच (Mahrang Baloch) समेत अन्य बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता और नेता भी पाकिस्तान के खिलाफ जंग में खड़े हुए हैं। बलूचिस्तान की आज़ादी की घोषणा के बाद बलूच नेता दुनियाभर से मान्यता और समर्थन की मांग कर रहे हैं। सबसे पहले भारत से मान्यता चाहता है बलूचिस्तान बलूचिस्तान के नेता चाहते हैं कि दुनियाभर के देश उन्हें एक अलग देश के तौर पर मान्यता और समर्थन दे। बलूच नेता चाहते हैं कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान को आज़ाद देश के रूप में मान्यता देने के साथ ही मुद्रा, पासपोर्ट, और अन्य संसाधनों के लिए अंतर्राष्ट्रीय समर्थन दिया जाए। हालांकि पहले समर्थन की बात करें, तो बलूच नेता चाहते हैं कि भारत, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान को आज़ाद देश के रूप में मान्यता देने वाला पहला देश बने। बलूच नेताओं ने भारत में दूतावास खोलने की मांग भी की है। बलूच नेता मीर सोशल मीडिया पर भारत-बलूचिस्तान की दोस्ती, भारत से समर्थन और भारत के प्रति अपने प्रेम को सोशल मीडिया पर जमकर दिखा रहे हैं। सबसे पहले भारत से समर्थन क्यों चाहता है बलूचिस्तान? बलूचिस्तान सबसे पहले भारत से ही समर्थन क्यों चाहता है? मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है। इसकी मुख्य वजह है भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव किसी से भी छिपा नहीं है। हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terrorist Attack) और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) की वजह से दोनों देशों के बीच तनाव और ज़्यादा बढ़ गया है और युद्ध जैसे हालात भी पैदा हो गए। हालांकि भारत ने पाकिस्तान को धूल चटा दी। इसी वजह से बलूच नेता चाहते हैं कि सबसे पहले भारत ही डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान को मान्यता दे, जिससे बलूच अलगाववादियों और नेताओं द्वारा पाकिस्तान को दिए जख्मों पर नमक लगाया जा सके। बलूच नेता हैं भारत के समर्थक कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहा विवाद जगजाहिर है। पाकिस्तान समय-समय पर कश्मीर मुद्दा उठाता रहता है। बलूच नेताओं ने खुलकर कश्मीर मुद्दे पर भारत का समर्थन किया है और कहा है कि पाकिस्तान को पीओके को खाली कर देना चाहिए। ऐसे में अगर भारत बलूचिस्तान को मान्यता दे देता है, तो इससे न सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव पड़ेगा, बल्कि भारत को देखते हुए अन्य देश भी बलूचिस्तान को मान्यता दे सकते हैं। भारत को बलूचिस्तान का समर्थन करके क्या फायदा होगा? बलूचिस्तान को मान्यता देकर भारत पाकिस्तान और बलूचिस्तान के बीच भड़की चिंगारी को हवा दे सकता है जिससे पाकिस्तान का ध्यान भारत से हटेगा और बलूचिस्तान पर लग जाएगा, जिससे बलूचिस्तान में भड़की आज़ादी की चिंगारी से पाकिस्तान की चिंता बढ़ जाएगी। रणनीतिक रूप से यह भारत का पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। इसकी वजह है बलूचिस्तान की आज़ादी से पाकिस्तान की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति का कमज़ोर होना। इससे पाकिस्तान की क्षेत्रीय स्थिति को बड़ी बड़ा झटका लगेगा। आज़ाद बलूचिस्तान, भारत के चाबहार पोर्ट परियोजना को और मज़बूत कर सकता है। इतना ही नहीं, आज़ाद बलूचिस्तान से भारत की अरब सागर में मज़बूती भी बढ़ेगी जिससे पाकिस्तान के साथ ही चीन की भी चिंता बढ़ेगी।

मौसम विभाग आर्बर्जेवेशन नेटवर्क को अपडेट करने माइक्रोवेव रेडियोमीटर और विंड प्रोफाइल लगायेगी

भोपाल अब मौसम के पूर्वानुमान की और सटीक जानकारी मिल सकेगी। इसके लिए भोपाल मौसम केंद्र में माइक्रोवेव रेडियोमीटर और विंड प्रोफाइल लगाई जाएगी। इससे वायुमंडल में आर्द्रता, तापमान की जानकारी और अधिक आंधी,तूफान और हवा की चाल की पूर्व और सटीक जानकारी मिल सकेगी। इन दोनों डिवाइस के लिए प्रस्ताव बनाकर केंद्रीय मौसम विभाग को भेजा गया है। क्या है माइक्रोवेव रेडियोमीटर यह एक ऐसा उपकरण है जो माइक्रोवेव तरंगों (0.3-300 गीगाहर्ट्ज़ की आवृत्ति) पर उत्सर्जित ऊर्जा को मापता है। इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के अनुप्रयोगों में किया जाता है, जैसे कि मौसम पूर्वानुमान, जलवायु निगरानी, रेडियो खगोल विज्ञान और रिमोट सेंसिंग आदि। अभी जीपीएस से लेते हैं जानकारी माइक्रोवेव रेडियोमीटर डिवाइस जमीन से सात से दस किमी ऊंचाई तक आर्द्रता, तापमान की जानकारी देती है। इससे तापमान और नमी की स्थिति का अनुमान और सटीकता से होगा। अभी जीपीएस,सेटेलाइट के जरिए यह जानकारी मिलती है। पूर्वानुमानों को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है काम मौसम विभाग द्वारा लगातार पूर्वानुमानों को बेहतर बनाने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसके लिए आर्बर्जेवेशन नेटवर्क को अपडेट करने के साथ ही कई तरह के कार्य किए जा रहे हैं। आने वाले समय में माइक्रोवेव रेडियोमीटर लगाने की भी तैयारी है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा है, मंजूरी के बाद इस पर कार्य शुरू किया जाएगा।

नए गठित जिले मऊगंज में पुलिस विभाग ने कानून व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया

मऊगंज  मध्यप्रदेश के नए गठित जिले मऊगंज में पुलिस विभाग ने कानून व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है। जिसके लिए कई पुलिस चौंकियों को थाने में तब्दील करने का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय भेजा गया है। साथ ही कई नई चौकियां भी बनाने का प्रस्ताव है।  दरअसल, मऊगंज के जिला बनने के बाद से यहां पर पुलिस पिटाई कांड, शिखा कांड, गड़रा कांड, देवरा दंगा कांड जैसी कई घटनाएं हो चुकी हैं। जिसके सरकार लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए कलेक्टर और एसपी की नियुक्ति की है। साथ ही पुलिस मुख्यालय से अतिरिक्त बल भी मांगा गया है। नए थानों और पुलिस चौकियों की स्थापना से अपराधों पर शिकंजा कस सकेगा। इन चौकियों को थाने में तब्दील करने का प्रस्ताव पिपराही, खटखरी, भीर और हाटा पुलिस चौकियों को थानों में तब्दील करने का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय भेजा गया है। साथ ही सीतापुर, बहेराडाबर, जड़कुड, पहाड़ी और बहुती में नई पुलिस चौकियां बनाई जाएंगे। इसके अलावा एसएफ की बटालियन भी मांगी गई है। सीएम मोहन यादव कर सकते हैं बड़ी घोषणाएं सीएम डॉ मोहन यादव मई के अंत में देवतालाब में जनसभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह थाना, चौकी और बटालियन जैसी कई योजनाओं की घोषणा कर सकते हैं।

नगर निगम ने मानसून से पहले खजराना मंदिर का सर्विस रोड सुधारने की ली जिम्मेदारी

इंदौर इंदौर के खजराना चौराहे से गणेश मंदिर तक जाने वाले सर्विस रोड की मरम्मत का कार्य नगर निगम द्वारा शुरू कर दिया गया है। इस कार्य के चलते यह मार्ग अगले 25 दिनों तक बंद रहेगा, हालांकि मुख्य सड़क पर यातायात पूर्ववत चालू रहेगा। मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को अब खजराना गांव की ओर से वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करना होगा। यह सर्विस रोड लंबे समय से जर्जर अवस्था में था और फ्लायओवर निर्माण के कारण इसकी स्थिति और खराब हो गई थी। नगर निगम ने अब मानसून पूर्व इस मार्ग की मरम्मत की जिम्मेदारी ली है, जिससे श्रद्धालुओं और आमजन को राहत मिल सके। आईडीए ने जारी किया बजट, नगर निगम ने उठाया काम इस मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी पहले इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) को दी गई थी, लेकिन आईडीए द्वारा पहले ही नगर निगम को सर्विस रोड निर्माण के लिए आवश्यक बजट उपलब्ध करा दिया गया था। ड्रेनेज और जल आपूर्ति पाइपलाइन को स्थानांतरित करने में समय लगने के कारण काम में विलंब हुआ। अब नगर निगम द्वारा चारों दिशाओं के सर्विस रोड पर एक साथ कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिससे समय रहते सभी मार्गों को दुरुस्त किया जा सके। मालवीय नगर सड़क पर भी मरम्मत कार्य प्रारंभ नगर निगम के अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने जानकारी दी कि सड़क मरम्मत के लिए आईडीए से तीन करोड़ रुपए का बजट मांगा गया था, जिसे स्वीकृति भी मिल गई है। इस बजट से विभिन्न इलाकों की सड़कों का सुधार किया जाएगा। हालांकि मास्टर प्लान की सड़कों में शामिल सुभाष मार्ग और छावनी क्षेत्र में अभी कार्य शुरू नहीं हो पाया है। दूसरी ओर मालवीय नगर वाली सड़क पर मरम्मत का कार्य आरंभ कर दिया गया है। पाटनीपुरा-मालवा मिल पुल निर्माण कार्य दोबारा शुरू मालवा मिल से पाटनीपुरा के बीच प्रस्तावित पुल निर्माण का कार्य भी बुधवार से दोबारा शुरू कर दिया गया है। कुछ दिन पूर्व पार्षद लालबहादुर वर्मा और ठेकेदार के बीच विवाद के चलते यह कार्य रुक गया था। इससे परेशान स्थानीय व्यापारियों ने विधायक रमेश मेंदोला से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद सभी पक्षों की बैठक कर समाधान निकाला गया। एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने बताया कि कुछ अतिक्रमणों को हटा दिया गया है, जबकि शेष के लिए नोटिस जारी किया गया है। अतिक्रमण को लेकर उत्पन्न हुए विवाद के कारण कार्य को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था।  

48 तालाबों की योजनाओं के लिये 74 करोड़ रूपये की राशि अनुदान के रूप में जारी

भोपाल प्रदेश के शहरी क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली झीलों एवं तालाबों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा संरक्षण एवं संवर्धन योजना चलाई जा रही है। योजना में अब तक 41 नगरीय निकायों में 48 तालाबों की योजनाओं के लिये 74 करोड़ रूपये की राशि अनुदान के रूप में जारी की जा चुकी है। योजना में नगरीय क्षेत्रों में झीलों एवं तालाबों की सीमा में होने वाले कटाव को रोकने संबंधी कार्य, झीलों एवं तालाबों के आस-पास बाउंड्रीवॉल बनाने, सघन पौधरोपण, लैम्प और फव्वारों की स्थापना के लिये नगरीय निकायों को राज्य शासन की ओर से अनुदान राशि दी जा रही है। नगरीय निकाय इस अनुदान राशि का उपयोग अपशिष्ट जल को रोकने, ट्रीटमेंट व्यवस्था, झील एवं तालाबों के किनारे सीवर पाईप व्यवस्था के लिये भी उपयोग कर रहे हैं। योजना में नगरीय निकायों को दी जाने वाली अनुदान राशि का प्रतिशत भी निर्धारित किया गया है। नगर निगम को कुल लागत राशि का 60 प्रतिशत, नगर पालिका परिषद को 75 प्रतिशत और नगर परिषद को 90 प्रतिशत राज्य शासन की ओर से अनुदान दिये जाने की व्यवस्था है। अनुदान राशि के अलावा शेष राशि की व्यवस्था संबंधित नगरीय निकायों को स्वयं अपनी इनकम जनरेट करने के निर्देश हैं।  

India जल्द बनने वाला है दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनमी, जापान की इकनॉमी की ग्रोथ रेट अभी शून्‍य से भी नीचे

नई दिल्‍ली भारत ने हाल में ही जर्मनी को पीछे छोड़कर चौथी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था का खिताब हासिल कर लिया है और अब उसकी निगाह तीसरी बड़ी अव्‍यवस्‍था बनने पर है. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था से आगे फिलहाल जापान, चीन और अमेरिका ही बचे हैं. इसमें भी जापान की हालत लगातार खराब होती जा रही है. जापान सरकार ने  एक रिपोर्ट जारी कर बताया कि उसकी सालाना ग्रोथ रेट 2025 की पहली तिमाही में गिरकर 0.7 फीसदी पर आ गई है, जबकि भारत अभी 6 फीसदी से ज्‍यादा की दर से आगे बढ़ रहा है. जापान सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, जापान का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (या किसी देश की वस्तुओं व सेवाओं का माप) जनवरी-मार्च में अक्टूबर-दिसंबर 2024 (पिछली तिमाही) की तुलना में अनुमान से भी ज्‍यादा 0.2 फीसदी सिकुड़ गया है. पिछले एक साल में पहली बार इसमें संकुचन दर्ज किया गया. संकुचन का मतलब है कि जापान की ग्रोथ रेट शून्‍य से भी नीचे चली गई है और यह अर्थव्‍यवस्‍था का आकार बढ़ने के बजाय घटने लगा है. कहां से कहां पहुंच गया जापान रिपोर्ट के अनुसार, जापान की अर्थव्यवस्था 2024 की अंतिम तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 2.4 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ रही थी. निर्यात में 2.3 फीसदी की दर से गिरावट दिख रही, जबकि उपभोक्ता खर्च स्थिर रहा और पूंजी निवेश में 5.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले जनवरी-मार्च, 2024 की तिमाही में भी जापान की इकनॉमी शून्‍य से नीचे जाकर माइनस 0.4 फीसदी रही थी. इस तरह, सालाना आधार पर देखा जाए तो अभी जापान की अर्थव्‍यवस्‍था माइनस 0.7 फीसदी की दर से घट रही है. मंदी की तरफ जा रहा जापान जापान की मुश्किलें अभी खत्‍म नहीं हुई हैं, बल्कि आगे और चुनौतियां आ रही हैं. दरअसल, अमेरिकी शुल्क से जापान के बड़े निर्यातकों, खासतौर पर मोटर वाहन विनिर्माताओं को नुकसान होने की आशंका है. न केवल जापान से भेजे जाने वाले उत्पादों के लिए, बल्कि मैक्सिको और कनाडा जैसे अन्य देशों से भी. जापान के अधिकारियों ने माना कि प्रतिक्रिया की योजना बनाना भी एक चुनौती है, क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना रुख बदलते रहते हैं. ऐसे में जापान की तरफ से कोई प्रस्‍ताव देना भी बड़ा मुश्किल काम है. अगर टैरिफ का असर दिखा तो 2025 की दूसरी तिमाही में भी जापान की ग्रोथ रेट शून्‍य से नीचे रहने की आशंका है, जिससे यह तकनीकी रूप से मंदी में चला जाएगा. अभी कहां खड़ा है जापान साल 2025 में जापान की जीडीपी 4.39 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है. इस दौरान जापान की पर्चेजिंग पॉवर 6.77 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है. इस लिहाज से देखा जाए तो जापान अभी तीसरी अर्थव्‍यवस्‍था बना हुआ है. साल 2024 में जापान की पर्चेजिंग पॉवर 6.31 ट्रिलियन डॉलर रही थी. अब जबकि जापान की इकनॉमी ग्रोथ शून्‍य से भी नीचे चली गई है तो उसकी अर्थव्‍यवस्‍था का आकार भी कम हो सकता है. कहां खड़ा है भारत अगर भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की बात करें तो अभी इसका आकार 4.3 ट्रिलियन डॉलर है. तमाम रेटिंग एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि भारत हर डेढ़ साल में अपनी इकनॉमी में 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ सकता है. इस तरह, देखा जाए तो अगले 2 से 3 महीने में ही भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था जापान को पीछे छोड़ देगी. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की ग्रोथ रेट अभी 6.5 फीसदी के आसपास चल रही है, जबकि जापान शून्‍य से भी नीचे चला गया है. लिहाजा जल्‍द ही भारत इसे पीछे छोड़ते हुए तीसरी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन जाएगा. भारत की तेज गति भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था तक पहुंचने में 60 साल का समय लगा, जबकि 1 से 2 ट्रिलियन डॉलर का सफर महज 7 साल में पूरा किया. इसके बाद 3 और 4 ट्रिलियन डॉलर की इकनॉमी बनने में भी सिर्फ 4 साल का समय लगा. अब तो ग्रोथ इतनी तेज हो गई है कि भारत हर डेढ़ साल में अपनी इकनॉमी को 1 ट्रिलियन डॉलर बढ़ाने की क्षमता रखता है. आईएमएफ ने क्‍या लगाया अनुमान आईएमएफ ने साल 2025 में दुनिया की टॉप-5 इकनॉमी के साइज का अनुमान जारी किया है. इसमें सबसे ऊपर 30.5 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमेरिका है. दूसरे पायदान पर 19.2 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन के रहने का अनुमान है. जर्मनी की इकनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे पायदान पर और भारत की इकनॉमी 4.34 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे तो जापान की इकनॉमी 4.38 ट्रिलियन डॉलर के साथ पांचवें पायदान पर रहने का अनुमान है.  

MP में किसानों को जो सोलर पम्प दिए जाएंगे उनकी जियो टैगिंग की जाएगी, किसान जमा करेंगे 10 प्रतिशत राशि

भोपाल प्रदेश में किसानों को सोलर पम्प देने की तैयारी में जुटी मोहन यादव सरकार ने इसको लेकर नियम तय कर दिए हैं। किसानों को जो सोलर पम्प दिए जाएंगे उनके सोलर प्लांट की जियो टैगिंग की जाएगी। इससे सोलर पम्प और बिजली कनेक्शन पर अनुदान की डुप्लीकेसी की स्थिति से मिलेगी राहत। इस योजना में यह भी तय किया गया है कि 3 हार्स पावर तक के सोलर प्लांट के लिए किसानों को 5 प्रतिशत और इससे अधिक क्षमता की सोलर एनर्जी जनरेट करने वाले सोलर प्लांट के लिए 10 प्रतिशत मार्जिन मनी जमा करनी होगी। इसके लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग ने नोटिफिकेशन जारी किया है। यह योजना मार्च 2028 तक लागू रहेगी। जनवरी में कैबिनेट ने दी थी मंजूरी     24 जनवरी 2025 को हुई कैबिनेट मीटिंग में सिंचाई के लिए सोलर पम्प स्थापना योजना को मंजूरी दी गई थी।     भारत सरकार की कुसुम योजना के घटक में देय अनुदान के माध्यम से प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना मार्च 2028 तक प्रभावी रहेगी।     पांच और सात हार्स पावर के सोलर पम्प कनेक्शन सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेंगे जिनके पास स्थायी विद्युत कनेक्शन नहीं है।     हर सोलर पम्प के साथ एक बोर्ड लगाया जाएगा।     इसमें योजना के नाम और अनुदान का उल्लेख होगा।     पम्प पर लगे क्यूआर कोड से पूरी जानकारी हासिल की जा सकेगी।     मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना में रजिस्टर्ड किसान शर्तों को पूरा करने पर योजना का लाभ ले सकेंगे। दूसरे स्टेप में मिलेगा स्थायी कनेक्शन वाले किसानों को लाभ योजना के पहले चरण का लाभ सिर्फ ऐसे किसानों को दिया जाएगा, जिनके पास बिजली कनेक्शन नहीं है। दूसरे स्टेप मे स्थायी विद्युत पम्प का उपयोग कर रहे किसानों को भी सोलर पम्प दिया जाएगा। विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा वर्ष 2023-24 और वर्ष 2024-25 में अस्थायी विद्युत कनेक्शन और स्थायी विद्युत कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं की समग्र और आधार ई-केवाईसी का उपयोग कर उनकी जमीन की डिटेल निकाली जाएगी। इसके आधार पर तैयार होने वाले डेटाबेस पर राज्य सरकार द्वारा ऋण भुगतान किया जाएगा। इसी के आधार पर सब्सिडी वाले किसान तय किए जाएंगे। सिंचाई के अलावा दूसरे कामों में उपयोग की जा सकेगी जनरेट हुई बिजली     सोलर पैनल से साल भर में 330 दिन व औसत 8 घंटे ऊर्जा का उत्पादन होता है।     खेती के लिए पंपिंग की जरूरत मात्र 150 दिन ही होती है।     सोलर एनर्जी से जनरेट होने वाली ऊर्जा के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।     बची हुई ऊर्जा का उपयोग चाफ कटर, आटा चक्की, कोल्ड स्टोरेज, ड्रायर, बैटरी चार्जर आदि कामों में किया जा सकेगा।     सोलर पम्प के साथ ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने किसान कल्याण, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग प्राथमिकता पर काम करेगा। राज्य और जिला स्तर पर बनेगी कमेटी योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य और जिला स्तर पर कमेटी बनेगी। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी काम करेगी। इसमें सचिव नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग सदस्य सचिव होंगे। ऊर्जा, वित्त, नगरीय विकास और आवास, किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग, पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग, राजस्व विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सदस्य के रूप में होंगे। जिला स्तरीय कमेटी के अध्यक्ष कलेक्टर होंगे। जिला पंचायत सीईओ, उप संचालक कृषि, प्रबंधक जिला सहकारी बैंक, सहायक संचालक उद्यानिकी, महाप्रबंधक या अधीक्षण यंत्री विद्युत वितरण कम्पनी, जिला अक्षय ऊर्जा अधिकारी ऊर्जा विकास निगम सदस्य के रूप में शामिल होंगे। योजना में ऐसे मिलेगा अनुदान     भारत सरकार की कुसुम योजना के अंतर्गत 3 हार्स पावर तक के सोलर पम्प पर 30 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।     किसान को 5 प्रतिशत मार्जिन मनी देनी होगी और 65 प्रतिशत राशि कृषक ऋण से आएगी।     3 हार्स पावर से अधिक वाले पंपों पर 30 प्रतिशत अनुदान भारत सरकार से मिलेगा।     60 प्रतिशत से अधिक राशि कृषक ऋण के रूप में होगी।     किसान को मार्जिन मनी के रूप में 10 प्रतिशत राशि देना होगी।     कुसुम बी योजना में 7.5 हार्स पावर से अधिक के पम्प पर केंद्र के अंश की राशि 7.5 एचपी पम्प पर दिए जाने वाले अनुदान तक ही रहेगी।  

36 किमी लंबी कलियासोत नदी अब पूरे साल कल-कल करती बहेगी, स्टॉप डैम बनेंगे, जल-संसाधन विभाग सर्वे कर रहा

भोपाल मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में स्थित 36 किलोमीटर लंबी कलियासोत नदी को साल भर पानी से भरपूर बनाए रखने के लिए जल-संसाधन विभाग ने तीन स्टॉप डैम बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए वर्तमान में विस्तृत सर्वे किया जा रहा है। यह परियोजना नदी की जल उपलब्धता बढ़ाने और भू-जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कलियासोत नदी की खासियत और परियोजना का उद्देश्य कलियासोत नदी, जो कि कलियासोत वन क्षेत्र के जलस्रोतों से निकलती है, लगभग 36 किलोमीटर लंबी है। वर्तमान में यह नदी साल के अधिकांश महीनों में सूखी रहती है, केवल 3-4 महीने ही इसमें पानी बहता है। नदी के किनारे लगभग 8,000 एकड़ निजी जमीन है। नदी का प्रवाह भोजपुर से मिसरोद तक लगभग 17 किलोमीटर का है। इस नदी को गुजरात की साबरमती नदी की तरह विकसित करने की योजना है ताकि यह पूरे साल पानी से भरी रहे। तीन स्टॉप डैम कहां-कहां बनेंगे? जल-संसाधन विभाग द्वारा किए गए प्रारंभिक सर्वे के अनुसार, तीन प्रमुख स्थानों पर स्टॉप डैम बनाए जाएंगे:- स्टॉप डैम 1 :– सर्वधर्म पुल के पास, जो नदी के एक ढाई किलोमीटर के भीतर है। स्टॉप डैम 2 :- जेके अस्पताल पुल और दानिश कुंज ब्रिज के बीच, लगभग दो किलोमीटर दूरी पर। स्टॉप डैम 3 :- सलैया ब्रिज से आगे, जहां मौजूदा ब्रिज डूब जाएगा इसलिए नया पुल बनाना होगा। इन तीनों स्टॉप डैम से लगभग 30 लाख घनमीटर पानी जमा किया जा सकेगा और इससे नदी में लगभग 8 किलोमीटर तक लगातार पानी बना रहेगा। शहर में नदी का बहाव 17 किमी 36 किमी लंबी नदी के किनारे 8,000 एकड़ के करीब निजी जमीन है। शहर में इसका बहाव भोजपुर से मिसरोद तक 17 किमी है। इसे गुजरात की साबरमती की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। अभी नदी 8-9 माह सूखी रहती है। कोई घाट नहीं है। नदी भोजपुर के पास बेतवा में मिलती है। अभी सीवेज का गंदा पानी ● शाहपुरा के पास कोलार रोड से नदी में टीटी नगर, मैनिट, पंचशील नगर, चार इमली, चूनाभट्टी के नालों से घरेलू कचरा मिल रहा है। ● मंडीदीप के पश्चिमी भाग के नाले से और दक्षिण पूर्वी भाग की बस्तियों से नदी में सीवेज व गंदा पानी जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र का कचरा मिलने से भी नदी दूषित हो रही है। ● मिसरोद व इससे जुड़ी आबादी का सीवेज नदी को गंदा कर रहा है। तीन नए डैम से बदलेगी तस्वीर रिवर डेवेलपमेंट के इस प्रोजेक्ट को गुजरात की साबरमती नदी की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, जिससे नदी के आस-पास का क्षेत्र भी बेहतर तरीके से विकसित होगा। इस प्रक्रिया से नदी में पानी का प्रवाह बढ़ेगा और यह पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी होगा। हालांकि, नदी के रास्ते में कुछ समस्या भी मौजूद है। शाहपुरा, टीटी नगर, मैनिट, और चूनाभट्टी जैसे इलाकों से सीवेज का गंदा पानी नदी में मिल रहा है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। इसके अलावा, औद्योगिक क्षेत्रों और मिसरोद से भी गंदा पानी नदी में मिल रहा है। यह समस्या भविष्य में परियोजना की सफलता के लिए चुनौती बन सकती है, और इसे सही तरीके से नियंत्रित किया जाना जरूरी होगा। नदी के पुनर्जीवन की उम्मीद यह परियोजना नदी के पुनर्जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। जैसे ही इन तीन स्टॉप डैमों का निर्माण होगा, कलियासोत नदी की स्थिति में बदलाव आएगा, और यह नदी जीवनदायिनी बनकर पूरे साल बहती रहेगी। इससे शहर में जलवायु और पर्यावरणीय स्थिति में भी सुधार होगा। नदी की वर्तमान स्थिति और पर्यावरणीय चुनौतियां हालांकि नदी के संरक्षण की यह योजना सराहनीय है, किन्तु नदी पर कई पर्यावरणीय चुनौतियां भी हैं:- सीवेज का मिलना :– शाहपुरा क्षेत्र के कोलार रोड से आने वाले नालों से मैनिट, पंचशील नगर, चार इमली, चूनाभट्टी जैसे इलाकों का घरेलू और औद्योगिक कचरा सीधे नदी में जा रहा है, जिससे नदी दूषित हो रही है। औद्योगिक प्रदूषण :– मंडीदीप के पश्चिमी भाग के नाले और दक्षिण पूर्वी बस्तियों से भी सीवेज और औद्योगिक कचरा नदी में मिल रहा है। नदी के किनारे अवैध निर्माण :– दी और इसके बफर जोन में लगभग 1100 से अधिक निर्माण हो चुके हैं, जो भविष्य में डैम बनने पर पानी की पकड़ में आ सकते हैं और इन्हें हटाना आवश्यक होगा। सर्वे के बाद की संभावनाएं जल-संसाधन विभाग के पीएस विनोद देवड़ा के अनुसार, 1998 में भी कलियासोत नदी पर एक डैम बनाया गया था। वर्तमान सर्वे इसी को आधार बनाकर तीन स्टॉप डैम बनाने के लिए प्रारंभिक तथ्य एकत्रित कर रहा है। यदि ये डैम बन जाते हैं, तो नदी का जल प्रवाह स्थायी होगा और भू-जल स्तर भी बढ़ेगा। साथ ही नदी के किनारे के इलाकों में खेती और जल संचयन को लाभ मिलेगा।

चिलवाहा बायोगैस संयंत्र में हर दिन पांच टन बायो गैस और 50 टन बायोमास पैलेट का निर्माण होगा

भोपाल मध्य प्रदेश के रायसेन जिले को उद्योग के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि मिलने वाली है। रायसेन तहसील के ग्राम चिलवाहा में बायो गैस संयंत्र (biogas plant) की स्थापना के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। केंद्र सरकार के ग्लोबल बायो फ्यूल एलायंस के तहत कपर्दी बायो एनर्जी लिमिटेड द्वारा चिलवाहा में बायोगैस संयंत्र लगाया जा रहा है। जिसमें हर दिन पांच टन बायो गैस और 50 टन बायोमास पैलेट का निर्माण होगा। खास बात यह कि ये उत्पाद नरवाई से बनाए जाएंगे, जो जिले के किसानों से ही खरीदी जाएगी। संयंत्र लगाने के लिए कंपनी ने पांच एकड़ जमीन पर कार्य शुरू कर दिया है। फिलहाल जमीन की लेवलिंग का काम किया जा रहा है।  कंपनी के कार्यकारी अधिकारी अभिषेक पाठक ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस का शुभारंभ किया था, जिसके तहत 2030 तक शुद्ध-शून्य कार्बर उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया था। इसी के तहत बायो गैस प्लांट की स्थापना जिले में की जा रही है। रायसेन. संयंत्र लगाने शुरू हुआ काम। बायो गैस प्लांट बनने के बाद होंगे ये फायदे     नरवाई से बनाएंगे बायो गैस तथा बायोमास पैलेट     स्थानीय किसानों से नरवाई (पराली) खरीदी जाएगी। जिससे किसानों को फायदा होगा।     किसान नरवाई जलाना बंद करेंगे।     पर्यावरण सुरक्षित होगा।     क्षेत्र में बायो गैस के उपयोग से पर्यावरण सुरक्षित होने के साथ तापमान पर नियंत्रण होगा।     15 हजार हैक्टेयर फसल की नरबाई का उपयोग बायो गैस बनाने में होगा।     संयंत्र में गोवंश के अवशेष का उपयोग भी बायोगैस बनाने में किया जाएगा, जिससे गोवंश पालकों को भी अतिरिक्त आय होगी।     संयंत्र में गैस बनाने से जैविक खाद बनेगा, जिसे किसानों को दिया जाएगा।     यह खाद पूर्ण जैविक होगा, जिससे किसानों की फसलों का उत्पादन बढ़ने के साथ रसायनों से मुक्ति मिलेगी। किसानों के साथ पर्यावरण को फायदा अभिषेक पाठक ने बताया कि चिलवाहा में बनने वाली बायो गैस और बायोमास पैलेट इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड को देंगे, जिसके जरिए यह उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी। गैल कंपनी से भी इस संबंध में अनबंध किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिले में गैल कंपनी ने रसोई गैस सप्लाई पर काम शुरू किया है। घरों में पाइप लाइन लगाई जा रही है।

राजधानी भोपाल से होगी प्रदेशभर में बसों की निगरानी, बीमा-फिटनेस खत्म होते ही जाएगा संदेश

भोपाल बाणगंगा चौराहा हादसे से सबक लेते हुए परिवहन विभाग ने प्रदेश में बसों की निगरानी के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। हादसे में जिस बस से महिला डॉक्टर की मौत हुई थी, उसका फिटनेस सर्टिफिकेट ही नहीं था। अब ऐसी लापरवाही रोकने के लिए एक केंद्रीकृत निगरानी सिस्टम शुरू किया जा रहा है, जिसकी कमान भोपाल में बने कंट्रोल रूम के हाथ में होगी। भोपाल स्थित परिवहन आयुक्त के कैंप ऑफिस में यह कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है, जहां से पूरे मध्यप्रदेश की बसों के फिटनेस, परमिट, पीयूसी और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) की निगरानी की जाएगी। परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने बताया कि इस व्यवस्था की जिम्मेदारी एआरटीओ स्तर के अधिकारियों को दी गई है। पूरे प्रदेश से जुटाया जा रहा डेटा राज्यभर से पंजीकृत 57 हजार बसों की जानकारी एकत्र की जा रही है। इसमें बसों का रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस, पीयूसी और VLTD की स्थिति शामिल है। यह सारा डेटा कंप्यूटर में फीड कर एक एनालिटिकल सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा, जो दस्तावेजों की वैधता खत्म होने से पहले ही अलर्ट भेजेगा। अलर्ट सिस्टम देगा पहले से सूचना सिस्टम में ऐसा अलर्ट फीचर जोड़ा गया है, जो किसी दस्तावेज की वैधता खत्म होने से 7 दिन पहले कंट्रोल रूम की स्क्रीन पर अलर्ट दिखाएगा। जैसे अगर किसी बस का परमिट 15 तारीख को समाप्त हो रहा है, तो 8 तारीख से ही अलर्ट दिखने लगेगा। चिन्हित बसों की जानकारी संबंधित जिले के आरटीओ को भेजी जाएगी, जो बस मालिक को नोटिस जारी कर दस्तावेज अपडेट कराने को कहेगा। तय समय तक दस्तावेज अपडेट नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।     तीन चरणों में लागू होगा प्रोजेक्ट     पहला चरण: 26 हजार शैक्षणिक बसें     दूसरा चरण: 20 हजार यात्री बसें     तीसरा चरण: 11 हजार औद्योगिक संस्थानों की बसें पहले चरण की मॉनिटरिंग इसी महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी। भोपाल आरटीओ का नया प्रभार बाणगंगा हादसे के बाद भोपाल आरटीओ रहे जितेंद्र शर्मा को निलंबित कर दिया गया था। उनके स्थान पर सीहोर के जिला परिवहन अधिकारी रितेश तिवारी को भोपाल आरटीओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। साथ ही, निलंबन के बाद खाली हुए नरसिंहपुर जिला परिवहन अधिकारी का कार्यभार जबलपुर की संभागीय उप परिवहन आयुक्त रमा दुबे को दिया गया है। सचिव परिवहन विभाग मनीष सिंह ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी किए। हर जिले से रजिस्टर्ड बसों की जानकारी मंगाई जा रही है। इसमें रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस, पीयूसी की वैधता और वीएलटीडी की स्थिति शामिल है। सारा डेटा कंप्यूटर में फीड कर एक एनालिटिकल सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा। तीन चरणों में शुरू होने वाले इस प्रोजेक्ट के पहले चरण की मॉनिटरिंग इसी महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी। परिवहन विभाग बुलवा रहा है 57 हजार बसों की जानकारी, आरटीओ को बताएंगे बस का फिटनेस कब खत्म हो रहा है नोटिस से पहले अलर्ट जैसे ही अलर्ट सिस्टम में कोई बस चिन्हित होगी, उसका डेटा संबंधित जिले के आरटीओ को भेजा जाएगा। वहां से बस मालिक को नोटिस भेजकर दस्तावेज समय रहते अपडेट कराने को कहा जाएगा। तय समय तक अपडेट नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी। कैसे काम करेगा सिस्टम: डिप्टी टीसी किरण शर्मा ने बताया कि सॉफ्टवेयर में ऐसा अलर्ट सिस्टम होगा, जो किसी भी दस्तावेज की वैधता खत्म होने से 7 दिन पहले स्क्रीन पर जानकारी ब्लिंक करेगा। मसलन, अगर किसी बस का परमिट 15 तारीख को खत्म हो रहा है, तो 8 तारीख से ही कंट्रोल रूम में अलर्ट आने लगेगा। रितेश तिवारी को भोपाल आरटीओ का अतिरिक्त प्रभार बाणगंगा चौराहा पर अनफिट बस से हुए हादसे के बाद खाली हुए भोपाल आरटीओ के पद का प्रभार रितेश तिवारी को सौंपा गया है। अब तक वह जिला परिवहन अधिकारी सीहोर थे। अब उन्हें भोपाल क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उनका मूल पद सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी है। तीन दिन पहले बाणगंगा चौराहा पर हुए हादसे के बाद भोपाल संभागायुक्त संजीव सिंह ने भोपाल आरटीओ रहे जितेंद्र शर्मा को निलंबित कर दिया था। तब जितेंद्र शर्मा के पास नरसिंहपुर जिले के आरटीओ का भी अतिरिक्त प्रभार था। उनके निलंबन आदेश के बाद नरसिंहपुर जिला जिला परिवहन अधिकारी का पद भी खाली हो गया था। इसलिए जबलपुर कार्यालय संभागीय उप परिवहन आयुक्त रमा दुबे को नरसिंहपुर जिला परिवहन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। सचिव परिवहन विभाग मनीष सिंह ने गुरुवार को आदेश जारी कर दिए हैं।

श्रीअन्न का उत्पादन बढ़ाएं, सरकार खरीदेगी किसानों से श्रीअन्न : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Increase the production of Shrianna, the government will buy Shrianna from farmers: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में रागी, कोदो-कुटकी, ज्वार-बाजरा, मक्का जैसे श्रीअन्न का उत्पादन बढ़ाया जाए और किसानों को श्रीअन्न उत्पादन के लिए प्रोत्साहि त किया जाए। किसानों द्वारा उत्पादित श्रीअन्न अब सरकार खरीदेगी। उन्होंने कहा कि तुअर उत्पादक किसानों को अच्छे किस्म के खाद, बीज और उत्पादन वृद्धि के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाए। इसके लिए किसानों को फसल अनुदान देने और उनकी फसल का बीमा कराने जैसे नवाचार भी किये जा सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव सहकारिता अशोक बर्णवाल, सचिव कृषि एम. सेल्वेन्द्रम सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। कृषि उपज मंडी के अलावा फल व सब्जी मंडी, मसाला मंडी स्थापना के लिए भी करें प्रयास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की सभी मंडियों में प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी मंडियों का विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों से आकस्मिक निरीक्षण करायें। मंडियों की व्यवस्थाओं को और भी बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई जरूरतों के मुताबिक अब अलग-अलग मंडियों की स्थापना पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंडियों का फसलवार मॉडल तैयार करें। कृषि उपज मंडी के अलावा अब फल व सब्जी मंडी, मसाला मंडी या अन्य विशेष पैदावार की मंडी स्थापना के लिए भी प्रयास किए जाएं। इसके लिए रोडमैप तैयार किया जाए और यदि आवश्यकता है तो इसमें प्रायवेट सेक्टर को भी सम्मिलित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडियों में जारी वर्तमान व्यवस्थाओं का समुचित तरीके से किसानों के हित में प्रबंधन किया जाए। मंडी शुल्क की प्राप्त राशि से किसानों की कल्याण गतिविधियों पर फोकस किया जाए। आदर्श बनें प्रदेश की कृषि उपज मंडियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की कृषि उपज मंडियों को आदर्श बनाया जाए। मंडियों में कृषि आधारित सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों। मंडियों में किसानों को फसल बेचने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मंडी में अपनी फसल बेचने आने वाले हर किसान को उसकी उपज का सही दाम मिले किसी का भी नुकसान न होने पाए। मंडियों को और अधिक आधुनिक बनाया जाए यहां किसानों को उनके उपज में गुणवत्ता संवर्धन के बारे में भी बताया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी मंडियां अपने विकास कार्यों के लिए आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे स्थानीय निकायों से नई मंडियों की स्थापना/ फसल भण्डारण क्षमता बढ़ाने के लिए समन्वय करें, जिससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अधिक सुविधाएं मिल सकें। किसानों को मिले प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। प्रदेश के किसानों को रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर उन्नत किस्म के बीज, आधुनिक कृषि यंत्रों, अच्छा भाव, अनुदान आदि का प्रोत्साहन मिले। उन्होंने कहा कि श्रीअन्न रागी, कोदो-कुटकी, मक्का, ज्वार, बाजरा की फसलों को प्रोत्साहन दिया जाए। इन फसलों के उत्पादक क्षेत्र को अच्छी पैदावार करने के लिए प्रोत्साहन मिले। आवश्यकता अनुसार अनुदान की राशि भी बढ़ाई जाए। ग्रीष्मकालीन मूंग में खरपतवारनाशकों के उपयोग को करें हतोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रीष्मकालीन मूंग में खरपतवारनाशकों के उपयोग से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए खरपतवारनाशकों को हतोत्साहित करने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा मिले। स्वाभाविक फसलों की पैदावार पर विशेष जोर दिया जाए। कृषि उद्योग समागम के अनुभवों से आगे बढ़ें, किसानों को मिले बेहतर परिणाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हर संभाग में किसान मेलों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इन मेलों में कृषि आधारित उद्योगों में निवेश पर जोर दिया जा रहा है। हाल ही में मंदसौर जिले के सीतापुर में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को कृषि के आधुनिक यंत्रों और तकनीक से अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीतामऊ में हुए कृषि उद्योग समागम के अनुभवों को सामने रखें और इन अनुभवों के आधार पर आगे होने वाले कृषि उद्योग समागमों की तैयारी करें, जिससे किसानों को इन समागमों से अधिक और बेहतर परिणाम प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि किसानों को खेतों में नरवाई जलाने से रोकने के प्रयास किए जाएं। किसानों को हैप्पी सीडर कृषि यंत्र का उपयोग करने के लिए जागरूक किया जाए। उन्होंने कृषि यंत्रों को प्रोत्साहन और हर ग्राम पंचायत में हैप्पी सीडर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। तीन फसलों को जल्द ही मिलेगा जीआई टैग बैठक में बताया गया कि राज्य शासन की प्रगतिशीलता से प्रदेश में उत्पादित होने वाली 3 फसलों को बहुत जल्द जीआई-टैग मिल जाएगा। सचिव कृषि ने बताया कि डिंडोरी जिले की नागदमन मकुटकी, सिताही कुटकी और बैंगनी अरहर की फसल को जीआई टैग परीक्षण के लिए भेजा गया है, उम्मीद है कि जल्द ही इन फसलों को जीआई टैग प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि ई-अनुज्ञा प्रणाली लागू करने के बाद प्रदेश में बीते एक अप्रैल 2025 से प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी योजना भी लागू कर दी गई है। सभी मंडियों में अब डिजीटल तरीके से रिकार्ड कीपिंग की जा रही है। 26,27 एवं 28 मई को नरसिंहपुर में होगा कृषि आधारित उद्योगों का सम्मेलन बैठक में सचिव कृषि ने जानकारी दी कि आगामी 26, 27 एवं 28 मई को जिला मुख्यालय नरसिंहपुर में कृषि आधारित उद्योगों का सम्मेलन सह विशाल कृषि मेला आयोजित किया जाएगा। आयोजन में कृषि आधारित उद्योगों के बारे में जानकारी के अलावा दुग्ध उत्पादन, मत्स्य उत्पादन, शाक-सब्जी उत्पादन, श्रीअन्न उत्पादन, उद्यानिकी, बागवानी, उन्नति किस्म के बीज, खाद, उर्वरक की जानकारी सहित उन्नत कृषि उपकरणों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तीन दिन अलग-अलग गतिविधियां होंगी। इस दौरान उन्नत कृषि उपकरणों के साथ किसानों से आधुनिक कृषि उपकरणों की बुकिंग भी कराई जाएगी। कृषि के क्षेत्र में नए र्स्टाट-अप्स के बारे में जानकारी भी दी जाएगी। उन्होंने बताया … Read more

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login