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OnePlus का पहला कॉम्पैक्ट स्मार्टफोन आज होगा लॉन्च

नई दिल्ली OnePlus के फैन्स के लिए बड़ी खबर है। आज OnePlus 13s लॉन्च होने जा रहा है और उससे पहले ही वनप्लस के कॉम्पैक्ट स्मार्टफोन की कीमत को लेकर अलग-अलग खबरें आने लगी हैं। बता दें कि OnePlus 13s को लेकर काफी क्रेज देखने को मिल रहा है। यह OnePlus का पहला कॉम्पैक्ट स्मार्टफोन होने वाला है, जो कि दमदार स्पेक्स के साथ लॉन्च किया जाएगा। ऐसे में इस फोन की एक अलग ही हाइप पब्लिक के बीच देखने को मिल रही है। इस फोन को लेकर यूजर्स का उत्साह इंडियन स्मार्टफोन मार्केट में कॉम्पैक्ट स्मार्टफोन्स के लिए एक उम्मीद जगाता है। कुछ समय पहले तक माना जा रहा था कि भारत में कॉम्पैक्ट स्मार्टफोन की मार्केट अच्छी नहीं है। वहीं अब OnePlus 13s को लेकर पब्लिक का क्रेज कुछ अलग ही कहानी कह रहा है। क्या रहेगी कीमत OnePlus 13s की ऑफिशियल कीमत के बारे में अभी किसी को कुछ नहीं पता है। हालांकि अलग-अलग सूत्रों से इसे लेकर जानकारी मिल रही है। तमाम खबरों को देखते हुए माना जा सकता है कि OnePlus के इस कॉम्पैक्ट स्मार्टफोन की कीमत 50 से 55 हजार रुपये के बीच होगी। ऐसा भी संभव है कि इसकी शुरुआती कीमत 50 हजार रुपये हो और इसका टॉप वेरिएंट 55 से 65 हजार रुपये तक का हो। हालांकि इस बारे में फिलहाल पुख्ता रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। कीमत की पूरी जानकारी आपको कल लॉन्च के बाद दी जा सकेगी। Apple हुआ फेल, क्या OnePlus होगा कामियाब? OnePlus 13s का क्रेज देखते हुए एक्सपर्ट्स का कहना है कि OnePlus उस काम में कामियाब हो सकता है, जिसमें Apple फेल हो गया था। दरअसल Apple ने भी कुछ साल पहले अपने मिनी मॉडल लॉन्च किए थे लेकिन दो ही मॉडल्स के बाद Apple ने अपनी मिनी सीरीज को डिस्कंटीन्यू कर दिया था। अब सवाल उठ रहा है कि क्या Oneplus का कॉम्पैक्ट फोन कुछ बेहतर करके दिखा पाएगा? Apple मिनी और OnePlus के कॉम्पैक्ट फोन का फर्क जानकारों का मानना है कि OnePlus 13s उन कमियों की पूर्ति करने वाला है जो कि Apple ने अपनी मिनी सीरिज में छोड़ी थी। OnePlus फ्रेश और नए डिजाइन के साथ इस फोन को लॉन्च करेगा। वहीं Apple ने अपनी मिनी सीरीज में नॉच वाला पुराना डिजाइन ही यूजर्स को दिया था। इससे मिनी फोन की छोटी स्क्रीन और छोटी लगने लगती थी। इसके अलावा OnePlus इस फोन में पहली बार अलर्ट स्लाइडर की जगह एक्शन बटन जैसा फीचर देने जा रही है। इससे भी यूजर और OnePlus के फैन इस फोन की ओर आकर्षित होंगे। साथ ही OnePlus 13s का नया कैमरा मॉड्यूल और 6200mah की संभावित बैटरी पूरा गेम बदल सकती है। इससे फोन नया और बैटरी बैकअप के मामले में स्ट्रांग हो जाएगा। इन कमियों को सुधारने की वजह से OnePlus की कहानी Apple से अलग हो सकती है।

सोगरिया-दानापुर-सोगरिया स्पेशल ट्रेन में जुडेंगे 7 नए कोच, अगस्त से लागू होगा नया रेक

भोपाल भोपाल रेल मंडल यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए अपनी सेवाओं में निरंतर सुधार कर रहा है। यात्रियों की मांग को ध्यान में रखते हुए साप्ताहिक ट्रेन 09819-09820 सोगरिया-दानापुर-सोगरिया स्पेशल ट्रेन की कोच संरचना को पूरी तरह बदला जा रहा है। यह बदलाव चार अगस्त से लागू किया जाएगा। नई कोच संरचना के साथ पांच अगस्त से अगली सूचना तक चलाई जाएगी। स्लीपर व सामान्य श्रेणी के कोच भी होंगे शामिल वर्तमान में यह ट्रेन गरीब रथ स्पेशल के रूप में केवल 15 एसी तृतीय श्रेणी इकोनोमी कोचों के साथ संचालित हो रही है। लेकिन अब इसे 22 आधुनिक एलएचबी कोचों के साथ चलाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें वातानुकूलित (एसी), स्लीपर व सामान्य श्रेणी के कोच भी शामिल होंगे। इससे सभी वर्गों के यात्रियों को लाभ मिलेगा और अधिक यात्रियों को यात्रा का अवसर मिल सकेगा। ट्रेन में क्या-क्या बढ़ेगा? ऐसे में दो कोच वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी, दो कोच वातानुकूलित तृतीय श्रेणी, सात कोच एसी इकोनोमी, पांच कोच स्लीपर क्लास, चार कोच सामान्य श्रेणी, एक एसएलआरडी दिव्यांगजन और लगेज के लिए विशेष कोच है। यह ट्रेन बारां, रुठियाई, गुना, सागर, दमोह, कटनी मुड़वारा, मैहर और सतना जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों से होकर गुजरती है, जिससे इन क्षेत्रों के यात्रियों को भी सीधी और बेहतर रेल सेवा मिलेगी। ज्यादा सुरक्षित, आरामदायक व तेज गति से चलने में सक्षम वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि एलएचबी कोच पारंपरिक डिब्बों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित, आरामदायक व तेज गति से चलने में सक्षम होते हैं। इन कोचों में बर्थ की संख्या अधिक होने के कारण वेटिंग लिस्ट की समस्या भी काफी हद तक कम हो सकेगी।

रामघाट पर होगी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुती

 उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार 5 जून को उज्जैन में क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा के समापन समारोह में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ यादव वाल्मिकी धाम से यात्रा में शामिल होकर पैदल भ्रमण करेंगे। इस दौरान साधु, संत, महंत और महामंडलेश्वर भी यात्रा में सहभागिता करेंगे। क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा वाल्मीकि धाम से सोमवारिया , ढ़ाबा रोड, छत्रीचौक ,गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी, महाकाल ,बड़े गणेश, हरसिद्धि, होते हुए रामघाट पहुचेगी। जहां पुण्य सलिला माँ शिप्रा का पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा व उन्हें सोलह श्रृंगार भेंट कर 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित की जायेगी। राम घाट पर इस अवसर पर भव्य लेज़र शो का आयोजन किया जाएगा साथ ही राम घाट पर शाम को सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला भी श्रद्धालुओं के अनुभव को आध्यात्मिक और मनोरंजक बनाएगी। शाम को रामघाट पर सेना के लगभग 100 कलाकारों द्वारा भव्य मिलिट्री बैंड की प्रस्तुति दी जाएगी। मुंबई की प्रसिद्ध कलाकार स्वस्ति मेहुल और उनके दल के द्वारा भक्ति संगीत की प्रस्तुती भी दी जाएगी।  

किसानों को सिंचाई के लिए 5 रुपए में देंगे बिजली कनेक्शन, 32 लाख किसानों को सोलर पंप दिए जाएंगे

लाड़ली बहनों को रक्षाबंधन में मिलेगा अतिरिक्त राशि का उपहार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव महिला सशक्तिकरण के लिये राज्य सरकार संकल्पित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों को सिंचाई के लिए 5 रुपए में देंगे बिजली कनेक्शन, 32 लाख किसानों को सोलर पंप दिए जाएंगे मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में 49.97 करोड़ के निर्माण कार्यों का किया लोकार्पण और भूमिपूजन चित्रकूट में रामलोक के निर्माण के साथ कामतानाथ परिक्रमा पथ का होगा विकास रीवा जिले के हर खेत में सिंचाई के लिए पहुंचाएंगे पानी भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने रीवा जिले के मनगवां में महिला स्वसहायता समूह सशक्तिकरण सम्मेलन में कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी। रीवा की धरती में बहनों का अभिनंदन करते हुए गर्व हो रहा है। बहनों के लिए लाड़ली बहना योजना लगातार जारी रहेगी। रक्षाबंधन में बहनों को इस योजना से अतिरिक्त राशि दी जाएगी। इस योजना की राशि 3 वर्ष में बढ़ाकर 3 हजार रुपए तक ले जाएंगे। महिलाओं को संपत्ति के पंजीयन में दो प्रतिशत की छूट दी जा रही है इसके फलस्वरुप पिछले एक साल में 70 प्रतिशत संपत्तियों का पंजीयन महिलाओं के नाम पर हुआ है। महिला सशक्तिकरण के लिये राज्य सरकार संकल्पित है। महिला स्व-सहायता समूहों को उद्योग लगाने के लिए भी छूट का लाभ दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में 49.97 करोड़ के निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजनकिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा तेजी से विकास कर रहा है और क्षेत्र के विकास के लिए हर संभव सहायता दी जाएगी। रीवा जिले के हर खेत में सिंचाई के लिए पानी की सुविधा मिलेगी। हम किसानों को 5 रुपए में सिंचाई के लिए बिजली का कनेक्शन देंगे। अगले 3 सालों में 32 लाख किसानों को सोलर पंप देकर बिजली के बिल से मुक्ति दिलाएंगे। किसान सोलर से प्राप्त बिजली का उपयोग करेंगे और अतिरिक्त बिजली को सरकार खरीद कर किसानों को पैसा देगी। मुख्यमंत्री ने जनपद पंचायत गंगेव के भवन निर्माण तथा हिनौती गौधाम में बांध निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने मनगवां में स्टेडियम निर्माण तथा देवास हाईस्कूल के हायर सेकेंडरी स्कूल का उन्नयन करने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने मनगवां तिवनी मोड़ से प्रयागराज रोड तक टू लेन सीसी रोड निर्माण की घोषणा की, इस 5.5 किलोमीटर सड़क निर्माण पर 16.5 करोड़ रुपए की लागत आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा से मेरा दोहरा और मीठा नाता है। रीवा के सफेद बाघ और सुंदरजा आम विश्व प्रसिद्ध हैं। रीवा में महानगरों की तरह आईटी पार्क का निर्माण किया जा रहा है। इससे प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। इस साल यूपीएससी की परीक्षा में प्रदेश के 60 उम्मीदवारों को सफलता मिली है जो देश में सर्वाधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती को आधुनिक बनाने के साथ-साथ दूध उत्पादन के लिए भी विशेष प्रयास करेंगे। वर्तमान में देश के 9 प्रतिशत दूध का उत्पादन मध्यप्रदेश में होता है, इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाएंगे। इसके लिए गौपालन करने वालों को अनुदान देंगे तथा सरकार दूध खरीद कर पशुपालकों को लाभान्वित करेगी। मध्यप्रदेश को दूध की राजधानी बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारा और आतंकवादी ठिकानों को सफलतापूर्वक नष्ट किया। अब जो भी देश की ओर नजर उठाएगा उसको कड़ा जवाब दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश तेजी से विकास कर रहा है। 2003 में प्रदेश में पांच मेडिकल कॉलेज थे। आज 27 मेडिकल कॉलेज हैं और तीन शीघ्र बनने वाले हैं। 2003 में प्रतिव्यक्ति वार्षिक आय 11000 रुपए थी जो अब बढ़कर एक लाख 52 हजार रुपए हो गई है। प्रदेश भर में सांदीपनि विद्यालय आधुनिक शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। इस साल कक्षा दसवीं और बारहवीं में परीक्षा परिणाम बहुत अच्छे रहे। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मनगवां विधानसभा क्षेत्र को लगभग 50 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों की सौगात मिली है। मनगवां विधायक प्रजापति ने अधूरे विकास कार्यों को पूरा कराने के लिए लगातार प्रयास किए हैं जिसके परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विकास की गाड़ी सरपट दौड़ती रहेगी। समारोह में सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मनगवां विधानसभा क्षेत्र को 6 लेन ओवरब्रिाज और हिनौती गोधाम की सौगात दी है। इसके साथ-साथ कई निर्माण कार्यों को भी मंजूरी दी गई है। सम्मेलन में विधायक मनगवां इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति ने अतिथियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में रिमोट का बटन दबाकर 49 करोड़ 97 लाख रुपए के निर्माण कार्यों का भूमि पूजन और लोकार्पण किया। उन्होंने महिला स्वसहायता समूह की सदस्यों को हितलाभ वितरित किये। समारोह में विधायक गुढ़ नागेन्द्र सिंह, विधायक त्योंथर सिद्धार्थ तिवारी एवं बड़ी संख्या में महिलाएं एवं आमजन उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर किया पौधरोपण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मनगवां विधानसभा क्षेत्र के गंगेव स्टेडियम में विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर मंदिर परिसर में पौधरोपण करके पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और उपस्थितों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हर व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य रोपित करके देखभाल कर उसे बड़ा बनाएं। मुख्यमंत्री ने बरैया तालाब के किनारे प्राचीन बम्बा देवी तथा काली माता मंदिर में पूजा-अर्चना भी की।  

मिनटों में चल जाएगा आधार कार्ड में कब- कब हुआ अपडेट, ऐसे करें पता

नई दिल्ली आधार कार्ड में लोग जरूरत पड़ने पर अपना नाम, मोबाइल नंबर, अड्रेस आदि बदलवाते हैं। इसे जारी करने वाली संस्‍था यूनिक आइडेंटिफ‍िकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी UIDAI लोगों को यह सुविधा देती है कि वो अतीत में बदली गईं डिटेल्‍स के बारे में जान पाएं। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपके आधार कार्ड में कब-कब अपडेट किया गया है तो यूआईडीएआई की वेबसाइट या एमआधार ऐप की मदद से यह पता लगवा सकते हैं। यह फीचर बेहद काम का है। अगर कोई ऐसा अपडेट आपके आधार कार्ड में हुआ है, जो आपसे संबंधित नहीं है, तो उसका पता आसानी से चल जाएगा और आप सही अपडेट करवा सकेंगे। आधार अपडेट हिस्‍ट्री से क्‍या पता चलता है आमतौर पर आधार अपडेट हिस्‍ट्री से कोई व्‍यक्ति जान सकता है कि उसने कितनी बार अपना नाम बदलवाया है। कितनी बार अड्रेस में चेंज कराया है। कितनी बार मोबाइल नंबर और कब फोटो अपडेट कराई है। इसके अलावा डेट ऑफ बर्थ में बदलाव का पता भी हिस्‍ट्री से चल जाता है। आधार अपडेट हिस्‍ट्री को ऐसे करें ऑनलाइन चेक     स्‍टेप 1 : यूआईडीएआई वेबसाइट या एमआधार पर लॉगइन करने के बाद ‘माईआधार’ में क्लिक करें और ‘अपडेट योर आधार’ सेक्‍शन के अंदर ‘आधार अपडेट हिस्‍ट्री’ ऑप्‍शन में जाएं।     स्‍टेप 2 : अगले स्‍टेप में आपको अपनी आधार डिटेल्‍स या वर्चुअल आईडी डालनी होगी।     स्‍टेप 3 : आधार डिटेल्‍स सबमिट करने के बाद ‘सेंड ओटीपी’ का विकल्‍प आएगा। उसके लिए आपको अपना रजिस्‍टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। ओटीपी आते ही उसे एमआधार ऐप पर डालें।     स्‍टेप 4 : ओटीपी एंटर करने के बाद क्‍लिक बटन दबाएं। इसके बाद आपको आधार अपडेट्स दिखाई देने लगेंगे। आधार कार्ड हिस्‍ट्री पीडीएफ को कैसे डाउनलोड करें आपके आधार कार्ड में जब भी बदलाव किया गया है, उससे जुड़ी हिस्‍ट्री को पीडीएफ फॉर्मेट में ऑनलाइन डाउनलोड किया जा सकता है।     सबसे पहले यूआईडीएआई की वेबसाइट में जाकर माई आधार पर क्लिक करें।     आधार अपडेट हिस्‍ट्री पर क्लिक करें। वहां आपको सभी अपडेट्स दिखाई देने लगेंगे।     आधार अपडेट हिस्‍ट्री पेज पर एकदम दायें कोने में आपको तीन डॉट नजर आएंगे, उन पर क्‍ल‍िक करें।     प्रिंट ऑप्‍शन को सिलेक्‍ट करें और उसे पीडीएफ फॉर्मेट में अपने कंप्‍यूटर या मोबाइल पर सेव कर लें। आप चाहें तो स्‍क्रीनशॉट भी ले सकते हैं। आधार अपडेट हिस्‍ट्री के फायदे आधार अपडेट हिस्‍ट्री से आपको यह जानने में मदद मिलती है कि आपने इस अहम डॉक्‍युमेंट में कब-कब बदलाव करवाया। अगर कोई बदलाव आपने नहीं कराया या किसी चेंज में कुछ गलती है तो आप डॉक्‍युमेंट को दोबारा अपडेट करा सकते हैं।

छत्तीसगढ़ में 55 निरीक्षकों की होगी पदोन्नति

रायपुर प्रदेश में विगत 25 वर्षों से पदोन्नति की राह देख रहे 55 निरीक्षक अब उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) बनेंगे। पुलिस विभाग के अंतर्गत कार्यरत निरीक्षक संवर्ग के वर्ष 1999 और 2000 बैच के निरीक्षकों को पदोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विभाग में मात्र 17 रिक्त पदों के कारण यह प्रक्रिया अटकी हुई थी। इसके साथ ही रक्षित निरीक्षक संवर्ग से एक अधिकारी, विशेष शाखा (एसबी) से एक निरीक्षक, आर्म्स शाखा से एक निरीक्षक तथा कंपनी कमांडर पद पर कार्यरत सात अधिकारियों को सहायक सेनानी पद पर पदोन्नत किया गया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से विगत दिनों अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर पदोन्नति की समस्या से अवगत कराया था। इस पर उन्होंने शीघ्र पदोन्नति का आश्वासन दिया था। उनके निर्देश पर डीएसपी के पदों में वृद्धि का निर्णय लेकर प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को भेजा गया था। वित्त विभाग से स्वीकृति मिलते ही पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जो अब पूर्णता की ओर है। इस पदोन्नति को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह निर्णय केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि अधिकारियों के समर्पण, अनुशासन और वर्षों की सेवा के सम्मान का प्रतीक है। सभी विभागों में समय पर पदोन्नति और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

देश में जनगणना 1 मार्च, 2027 से होगी शुरू, हर घर पहुंचकर जाति भी पूछी जाएगी

नई दिल्ली देश में जनगणना 1 मार्च, 2027 से शुरू होगी। इस बार जनगणना में जाति का कॉलम भी होगा। हर घर पहुंचकर जनगणना में जुटे कर्मचारी सभी की जाति भी पूछेंगे। हालांकि, बर्फबारी वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना अगले साल अक्टूबर में ही शुरू हो जाएगी। इनमें लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल है। बाकी राज्यों में एक मार्च, 2027 से इसकी शुरुआत होगी। ‘एनडीटीवी’ ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार इस बार दो चरणों में जनगणना करवा रही है। इसमें सवालों की लंबी लिस्ट शामिल होगी, जिसमें जाति और उप-जातियों पर भी सवाल शामिल होंगे। 30 अप्रैल को मोदी सरकार ने कैबिनेट बैठक में जाति जनगणना करवाने का फैसला लिया था। सरकार ने बताया था कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारा सामाजिक ताना-बाना राजनीतिक दबाव में न आए, यह निर्णय लिया गया है कि जाति गणना को एक अलग सर्वेक्षण के रूप में आयोजित करने के बजाय मुख्य जनगणना में शामिल किया जाना चाहिए। देश में आमतौर पर हर दस साल में जनगणना होती रही है। आखिरी बार साल 2011 में जनगणना करवाई गई थी। इसके बाद 2021 में कोरोना महामारी की वजह से जनगणना को टाल दिया गया था। विपक्ष लगातार जाति जनगणना करवाने की मांग करता रहा है। कैबिनेट में मुहर लगने के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया था। साल 1872 में पहली बार जनगणना की देश में शुरुआत हुई थी। इसका मकसद सामाजिक तानेबाने को समझना था। हालांकि, शुरुआत में तो जाति से जुड़े सवाल जनगणना में शामिल थे, लेकिन बाद में इसमें बदलाव किया गया। पिछली बार 2011 में हुई जनगणना में 29 सवाल पूछे गए थे, जिसमें रोजगार, मातृभाषा के साथ-साथ अन्य सामान्य सवाल शामिल थे। 16 साल बाद हो रही जनगणना में इस बार जाति का फिर से सवाल पूछा जाएगा।  

रेलवे प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला, मध्य प्रदेश से गुजरने वाली सोगरिया-दानापुर स्पेशल ट्रेन में अब आसानी से मिलेगी टिकट.

भोपाल  राजस्थान के सोगरिया से बिहार के दानापुर तक जाने वाली सोगरिया-दानापुर-सोगरिया स्पेशल ट्रेन में अब आम लोग भी यात्रा कर सकेंगे. अब तक इसमें केवल खास लोग ही यात्रा कर सकते थे. दरअसल, इस ट्रेन में अब तक केवल एसी कोच की सुविधा ही उपलब्ध थी. जिसके कारण गरीब आदमी इस ट्रेन में यात्रा करने से कतराता था. हालांकि अब रेलवे प्रशासन ने इस स्पेशल ट्रेन में भी नॉन एसी कोच लगाने का निर्णय लिया है. जिससे रेल यात्रियों को पर्याप्त संख्या में सीट मिल सके और उन्हें भीड़ में यात्रा न करना पड़े. 4 अगस्त से जुड़ेंगे स्लीपर और जनरल कोच बता दें कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार पहुंचने के लिए यह बहुत बढ़िया ट्रेन है, लेकिन इसमें स्लीपर और जनरल कोच नहीं होने से आर्थिक रुप से कमजोर लोग यात्रा नहीं कर पाते थे. साथ ही एसी कोच में कम सीटों के कारण लोगों को वेटिंग में टिकट लेना पड़ता था. लेकिन अब रेलवे प्रशासन ने साप्ताहिक गाड़ी संख्या 09819/09820 सोगरिया-दानापुर-सोगरिया स्पेशल ट्रेन की कोच संरचना में बदलाव का निर्णय लिया है. इस ट्रेन में स्लीपर और जनरल कोच का विस्तार 4 अगस्त 2025 से किया जाएगा. अभी 15 एसी कोच के साथ चलती है गरीब रथ वर्तमान में यह ट्रेन गरीब रथ स्पेशल के रूप में 15 एसी तृतीय श्रेणी इकोनोमी कोचों के साथ संचालित हो रही है, लेकिन यात्रियों की लगातार मांग को ध्यान में रखते हुए इसे अब 22 एलएचबी कोचों के साथ चलाने का निर्णय लिया गया है. ये कोच अत्याधुनिक हैं, जिनमें सामान्य कोच से अतिरिक्त सुविधाएं हैं. नए रेक में सभी श्रेणियों के कोच शामिल होंगे, जिससे ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को यात्रा का अवसर मिल सकेगा. अधिक कोच होने से खत्म होगी वेटिंग की समस्या वरिष्ठ मंडल प्रबंधक वाणिज्य सौरभ कटारिया ने बताया कि “रेलवे ने गरीब रथ स्पेशल ट्रेन में स्लीपर और जनरल कोच जोड़ने का निर्णय लिया है. ये सभी एलएचबी कोच होंगे. जो पारंपरिक कोचों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित, आरामदायक और गति में सक्षम होते हैं. इनमें बर्थ की संख्या अधिक होने से वेटिंग लिस्ट की परेशानी कम होगी.” इन स्टेशनों के यात्रियों को मिलेगा ट्रेन का लाभ यह ट्रेन मध्य प्रदेश में पश्चिम मध्य रेल के बारां, रुठियाई, गुना, सागर, दमोह, कटनी मुड़वारा, मैहर और सतना स्टेशनों से होकर गुजरती है, जिससे इन स्टेशनों के यात्रियों को विशेष लाभ मिलेगा. नई कोच संरचना के साथ गाड़ी संख्या 09819 और गाड़ी संख्या 09820 दोनों ओर से 5 अगस्त से अगली सूचला तक चलाई जाएगी.  बदलाव के बाद नई कोच संरचना इस प्रकार होगी     02 वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी     02 वातानुकूलित तृतीय श्रेणी     07 एसी इकोनोमी कोच     05 स्लीपर कोच     04 सामान्य श्रेणी कोच     01 जनरेटर कार     01 एसएलआरडी (दिव्यांगजन और लगेज के लिए)

संजय गांधी ताप विद्युत गृह में मजदूर की मौत, लापरवाही और ठेकेदारी व्यवस्था पर उठे सवाल

Worker died in Sanjay Gandhi Thermal Power Station, questions raised on negligence and contracting system उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित संजय गांधी ताप विद्युत गृह (एसजीटीपीपी) में बुधवार को हुई एक और दर्दनाक घटना ने संयंत्र की खतरनाक और अमानवीय कार्यप्रणाली को उजागर कर दिया। 19 वर्षीय मजदूर सीताराम साकेत निवासी वार्ड क्रमांक 7 नौरोजाबाद की ऊंचाई से गिरने के कारण मौत का शिकार बन गया। सीताराम पावर हाउस परिसर के वैगन ट्रिपलर में छत की शीट बदलने का काम कर रहा था। लेकिन, उसे कोई भी सुरक्षा उपकरण जैसे हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट प्रदान नहीं की गई थी। जिससे इस घटना को न सिर्फ हादसा, बल्कि ठेकेदार प्रबंधन और अधिकारियों की लापरवाही माना जा रहा है। इलाज में देरी का आरोपसीताराम शिव किरण इंजीनियरिंग वर्क्स के अंतर्गत काम कर रहा था, जिसे मरम्मत कार्य का ठेका मिला था। हादसे के बाद ठेकेदार मनीष मिश्रा ने उसे पहले निजी अस्पताल ले जाने की बात कहकर समय गवांया, फिर शहडोल के शासकीय अस्पताल पहुंचाया गया। वहां भी समय पर उचित इलाज नहीं मिल सका। जबलपुर रेफर करने में भी देरी हुई, समय पर बेहतर इलाज नहीं मिलने के कारण सीताराम की जान नहीं बचाई जा सकी। बार-बार हो रही हैं ऐसी घटनाएंयह पहला मामला नहीं है। एसजीटीपीपी में इससे पहले भी कई मजदूर हादसों के शिकार हो चुके हैं, लेकिन अब तक किसी ठेकेदार या अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हर बार मामले को “दुर्भाग्यपूर्ण घटना” बताकर खानापूर्ति कर दी जाती है। मुख्य अभियंता एचके त्रिपाठी ने घटना को घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि घायल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उसकी हालत गंभीर थी। इलाज के दौरान मौत हो गई।

एम्स भोपाल और पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन मिलकर प्रदेश का सबसे बड़ा हर्बल गार्डन बनाने जा रहे

भोपाल भोपाल AIIMS और पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट के बीच  एक महत्वपूर्ण समझौता (MOU) पर हस्ताक्षर हुए. इस समझौते का उद्देश्य आयुर्वेद, चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है. दोनों संस्थाएं संयुक्त रूप से फैटी लीवर डिजीज और एलर्जी जैसी बीमारियों पर क्लिनिकल रिसर्च करेंगी. पतंजलि की ओर से अनुराग वार्ष्णेय और एम्स की ओर से प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ने संयुक्त रूप से बताया, यह एक सकारात्मक पहल है, जो भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक रूप से स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है. रिसर्च ईएमसीआर के मानकों के अनुरूप होगी. सेफ्टी प्रोटोकॉल के तहत एक इंडीपेंडेंट मॉनिटरिंग बॉडी बनाई जाएगी. रिसर्च के दौरान प्रतिभागियों का बीमा कराया जाएगा. सभी नैतिक मानकों का पालन होगा. अब भोपाल के एम्स अस्पताल में सिर्फ एलोपैथी का इलाज ही नहीं, बल्कि हमारी पुरानी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का खजाना भी मिलेगा। एम्स भोपाल और बाबा रामदेव की पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन मिलकर प्रदेश का सबसे बड़ा हर्बल गार्डन बनाने जा रहे हैं। एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि यह हर्बल गार्डन कोई साधारण बगीचा नहीं होगा। इसमें सिर्फ मध्य प्रदेश के ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों और पूरे देश में मिलने वाले उन खास औषधीय पौधों को लगाया जाएगा जो शायद आपने पहले कभी न देखे हों। एम्स का मानना है कि इन पौधों में कई बीमारियों को ठीक करने की ताकत है, जिनके बारे में हम भूलते जा रहे हैं। मध्य प्रदेश की ‘रिच ट्राइबल मेडिसिन’ ढूंढ़कर निकालेंगे डॉ. सिंह के अनुसार प्रदेश में कई ऐसे इलाके हैं जहां बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय रहते हैं। ये समुदाय सदियों से जंगलों और प्रकृति के करीब रहे हैं। इन समुदायों के पास पेड़-पौधों, जड़ों, पत्तियों और छालों से बीमारियों का इलाज करने का बहुत पुराना और गहरा ज्ञान होता है। यह ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से चलता रहता है। इसे ‘समृद्ध’ इसलिए कहा गया है क्योंकि इस ज्ञान में कई ऐसी जड़ी-बूटियां और उनके इस्तेमाल के तरीके शामिल हैं जिनके बारे में आधुनिक विज्ञान अभी भी पूरी तरह नहीं जानता। एम्स और पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन की टीमें ऐसे ट्राइबल वैद्य, हकीम या बुजुर्गों से मिलेंगे, जो इस पारंपरिक ज्ञान को जानते हैं। उनकी मदद से पौधों की पहचान करेंगे। जो जड़ी-बूटियां खोजी जाएंगी, उन पर एम्स में वैज्ञानिक रिसर्च की जाएगी। इससे पता चलेगा कि वे कितनी असरदार हैं, उनमें कौन से रासायनिक तत्व हैं। अगर ये पारंपरिक औषधियां वैज्ञानिक रूप से प्रभावी साबित होती हैं, तो उनसे नई, सस्ती और असरदार दवाएं बनाई जा सकेंगी। इससे आम लोगों को कम खर्च में बेहतर इलाज मिल पाएगा। ये गठबंधन चिंताजनक… हालांकि, इस समझौते को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है. कांग्रेस पार्टी ने पतंजलि की विश्वसनीयता और उसके उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए MOU की आलोचना की है. कांग्रेस प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा, सुप्रीम कोर्ट पहले ही पतंजलि के भ्रामक विज्ञापनों पर सख्त टिप्पणी कर चुका है और कंपनी अदालत में तीन बार माफी मांग चुकी है. ऐसे में उसके साथ सरकारी चिकित्सा संस्थान का गठबंधन चिंताजनक है. देना होगा पूरा मुआवजा.. कांग्रेस का यह भी कहना है कि जिन मरीजों पर यह ट्रायल किया जाएगा, उनकी सुरक्षा की गारंटी एम्स और पतंजलि दोनों को देनी चाहिए. पार्टी ने आशंका जताई कि कहीं गरीब मजदूरों और आम लोगों पर परीक्षण कर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो. साथ ही यह मांग भी उठाई कि यदि किसी मरीज को नुकसान होता है तो उसका पूरा मुआवजा पतंजलि और एम्स मिलकर दें. तीन चरणों में बनेगा यह गार्डन:     पहला चरण: आसानी से उगने वाले पौधे: शुरुआत में उन औषधीय पौधों को लगाया जाएगा जिन्हें उगाने के लिए किसी खास इंतजाम (जैसे एसी या खास मिट्टी) की जरूरत नहीं होती। ये पौधे भोपाल के मौसम में आसानी से उग सकेंगे।     दूसरा चरण: मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों की खोज: यह चरण सबसे ज्यादा दिलचस्प होगा। एम्स की टीम मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में जाएगी, जहां आज भी लोग इलाज के लिए अपनी पुरानी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते हैं। इन छुपी हुई औषधियों को तलाशा जाएगा, उनकी पहचान की जाएगी और फिर उन्हें एम्स के हर्बल गार्डन में लगाया जाएगा ताकि उन पर रिसर्च की जा सके। यह हमारी अपनी पारंपरिक दवाओं को दोबारा सामने लाने का एक बड़ा प्रयास होगा।     तीसरा चरण: पहाड़ और देश-विदेश के खास पौधे: आखिरी चरण में उत्तराखंड में मिलने वाले कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण औषधीय पौधों को लगाया जाएगा। इसके साथ ही, देश भर से कुछ ‘एग्जॉटिक’ यानी दुर्लभ और खास जड़ी-बूटियों को भी लाया जाएगा। चूंकि इन पौधों को भोपाल के मौसम में जिंदा रखना मुश्किल हो सकता है, इसलिए इन्हें खास ‘आर्टिफिशियल सेटअप’ (नकली वातावरण) में रखा जाएगा। जिससे वो बिना समस्या के पनप सकें। पुराने ज्ञान को नए विज्ञान से जोड़ना इस पूरे प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ एक सुंदर बगीचा बनाना नहीं है। यह न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020 के तहत भी आता है, जिसमें कहा गया है कि मेडिकल की पढ़ाई में हर तरह के इलाज (जैसे एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी) को जोड़कर देखा जाना चाहिए। यानी, मरीजों को सिर्फ एक तरह का इलाज नहीं, बल्कि सबसे बेहतर, सस्ता और असरदार इलाज मिले। चाहे वह किसी भी चिकित्सा पद्धति से क्यों न हो। इसे मॉडर्न साइंस में ‘इंटिग्रेटेड मेडिसिन’ नाम दिया गया है। इलाज के साथ-साथ अब होगी रिसर्च भी यह हर्बल गार्डन बनने से दो बड़े फायदे होंगे। पहला, अस्पताल में ही आयुष विभाग के मरीजों के इलाज के लिए औषधीय जड़ी-बूटियां उपलब्ध हो सकेंगी। दूसरा, एम्स में मेडिकल के छात्र इन पौधों पर गहराई से रिसर्च कर सकेंगे। डॉ. सिंह ने बताया कि अभी तक छात्र सिर्फ किताबों में ही इन पौधों के बारे में पढ़ते थे, लेकिन अब वे इन्हें अपनी आंखों से देख सकेंगे, छू सकेंगे और इनके गुणों को समझ सकेंगे। इनपर जांच भी कर सकेंगे। पांच खास हिस्सों में बंटेगा गार्डन:     ह्यूमन हेल्थ हर्बल गार्डन: इसमें वे पौधे होंगे जो सीधे इंसानों की बीमारियों के इलाज में काम आते हैं।     रसायन वन: यह रिसर्च के लिए होगा, जहां पौधों के रासायनिक गुणों का अध्ययन किया जाएगा।     दुर्लभ एवं लुप्तप्राय … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज एक पेड़ माँ के नाम अभियान का शुभारंभ करेंगे

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विश्व पर्यावरण दिवस आज कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागृह भोपाल में इस वर्ष के “एक पेड़ माँ के नाम’’ अभियान का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एकीकृत पर्यावरण प्रबंधन पोर्टल लांच करेंगे। साथ ही पीएचडी छात्रवृत्ति एवं मध्यप्रदेश वार्षिक पर्यावरण पुरस्कार का वितरण भी करेंगे। विश्व पर्यावरण दिवस “प्लास्टिक प्रदूषण उन्मूलन’’ विषय पर आधारित होगा। कार्यक्रम में वन, पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप सिंह अहिरवार विशेष अतिथि रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण द्वारा तैयार प्रदेश के वेटलैण्ड एटलस का विमोचन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इकाइयों और संस्थानों को “मध्यप्रदेश वार्षिक पर्यावरण’’ पुरस्कार का वितरण भी करेंगे। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव पर्यावरण श्री नवनीत मोहन कोठारी, एप्को के कार्यपालिक संचालक श्री श्रीमन शुक्ला, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव श्री अच्युतानंद मिश्रा, पर्यावरणविद्, इकाइयों, संस्थानों के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहेंगे।  

राहुल गांधी को इतनी भी अंग्रेजी नहीं आती कि वे दोनों शब्दों का अंतर समझ सकें- उमा भारती

भोपाल पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के एक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को ‘सरेंडर’ और ‘सीजफायर’ के बीच का फर्क तक नहीं मालूम। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उमा भारती ने लिखा कि आज तक भारतीय सेना ने कभी पाकिस्तान के सामने समर्पण नहीं किया है और राहुल गांधी को इतनी भी अंग्रेजी नहीं आती कि वे दोनों शब्दों का अंतर समझ सकें। राहुल गांधी ने अपने भोपाल में एक कार्यक्रम में भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नरेंदर सरेंडर’ कहकर संबोधित किया था, जिस पर भाजपा हमलावर हो गई है। उन्होंने भोपाल में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दावा किया कि अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक इशारे पर प्रधानमंत्री मोदी झुक गए। उन्होंने कहा था कि भाजपा-आरएसएस पर थोड़ा दबाव डालो तो ये डरकर भाग जाते हैं। ट्रंप ने एक इशारा किया और नरेंद्र मोदी ने झुककर बात मान ली। 

माँ नर्मदा के उत्तर तटीय ग्रामों में नर्मदा सेवा समितियों का गठन, बांटे गये केसीसी कार्ड

भोपाल प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान प्रदेश भर में 30 जून तक निरंतर जारी रहेगा। प्रदेश के नर्मदा नदी से सटे जिलों में नर्मदा पथ सर्वेक्षण यात्रा निरंतर जारी है। यात्रा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीणों को नर्मदा नदी के किनारों को पर्यावरण सरंक्षण के उद्देश्य से साफ सफाई की शपथ दिलाई जा रही है। इसी के साथ जिलों में तालाबों को चिन्हित कर मछली पालन के जरिये किसानों की आमदनी बढ़ाये जाने के अवसरों की तलाश की जा रही है। स्वच्छता अभियान चलाया गया डिण्डौरी जिले में विकासखंड बजाग की ग्राम पंचायत गीधा स्थित संगम गोमती नर्मदा घाट पर मां नर्मदा पथ सर्वेक्षण एवं जन जागरण यात्रा का विधिवत शुभारंभ नर्मदाष्टक एवं मां नर्मदा की आरती के साथ किया गया। इस अवसर पर जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत घाट परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया। जिले में चल रही यात्रा का उद्देश्य मां नर्मदा के पथ पर जन जागरूकता फैलाना, जल स्रोतों का संरक्षण करना एवं स्वच्छता को बढ़ावा देना है। इस दौरान ग्रामीणों को जल की महत्ता के प्रति जागरूक किया गया और उन्हें प्राकृतिक संसाधनों के सतत सद्उपयोग की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने नर्मदा सेवा के संकल्प को दोहराते हुए पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। माँ नर्मदा के उत्तर तटीय ग्रामों में नर्मदा सेवा समितियों का गठन  प्रदेश के 16 जिलों के 51 विकासखंडों में चिन्हित 335 पंचायतों में माँ नर्मदा सर्वेक्षण एवं जनजागरण यात्रा निकाली जा रही है। मंडला जिले में उत्तर तट की प्रत्येक नर्मदा तटीय ग्राम पंचायत में नर्मदा पथ सर्वेक्षण यात्रा पहुँच रही है। यात्रा के दौरान सार्वजनिक चौपालों के माध्यम से नर्मदा सेवा समितियों का गठन भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में यात्रा ग्राम बड़ी खैरी से प्रारंभ होकर ग्राम, खुड़िया, पटपरा और छपरी ग्राम में समाप्त हुई। प्रत्येक स्थानों में सभी ग्रामीणजनों के समक्ष पतित पावनी मां के प्रवाह पर वर्तमान समय में किस तरह के दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं इससे अवगत कराया गया। चौपालों में सर्वे प्रपत्र की जानकारी भरवाई गई एवं जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत ग्रामवासियों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान बांटे गये केसीसी कार्ड बालाघाट जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान निरंतर जारी है। जिले में पेयजल स्त्रों की सफाई का कार्य सामूहिक भागीदारी से किया जा रहा है। जिले में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिये जिले में उपलब्ध तालाबों में मछली पालन की और अधिक संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत हर दिन विकासखंडों के 2-2 गांवो में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य विभाग के अमले द्वारा कार्यशालाएं आयोजित की जा रही है। इन कार्यशालाओं के माध्यम से सम्बंधित विभागों द्वारा कृषि की उन्नत तकनीकों के साथ ही आवश्यक योजनाओँ के हितलाभ भी देने के प्रयास जारी है। बिरसा जनपद के कचनारी में कार्यशाला हुई। जिला मत्स्य अधिकारी ने बताया कि ग्राम कचनारी में रौबदाभाटा की आदिवासी मछुआ सहकारी समिति के सदस्यों को केसीसी कार्ड प्रदान किये गए है। समिति में शामिल 23 सदस्यों को जीरो प्रतिशत ब्याज पर ऋण प्राप्त करने वाले कार्ड का वितरण किया गया है।  समिति के सदस्य कचनारी सिंचाई तालाब में मछली पालन करते है। समिति के सदस्य एक सीजन में करीब 10 टन मछली का विक्रय करते है। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत होगा वृहद वृक्षारोपण भोपाल संभाग आयुक्त संजीव सिंह ने बताया कि प्रदेश में चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत संबंधित विभागों द्वारा बनाई गई कार्य योजना के अनुसार भोपाल नगर में वृहद वृक्षारोपण किया जाएगा। इसकी शुरुआत विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून से की जाएगी। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से नगर के विभिन्न बाग बगीचे एवं हरित क्षेत्र में वृक्षारोपण करेंगे। उन्होंने कहा कि कार्य ऐसा हो कि अधिक से अधिक पौधे जीवित रहे। संभाग आयुक्त ने निर्देश दिए कि नगर के सभी बाग बगीचों की मैपिंग और जियो टैगिंग करा ली जाए जिसमें बगीचे का नाम, एरिया, नगर निगम के जोन एवं वार्ड का नाम, सिंचाई के लिए पानी का स्रोत, देखभाल करने वाले अधिकारी /कर्मचारी का नाम एवं मोबाइल नंबर आदि जानकारियां हों। नगर निगम सीमा के बाहर के नगरीय क्षेत्र में भी कार्य योजना बनाकर वृक्षारोपण कराया जाए। आयुक्त नगर निगम ने बताया कि भोपाल नगर में नगर निगम के 157 पार्क हैं। इसके अलावा स्मार्ट सिटी, राजधानी परियोजना एवं वन विभाग के बाग बगीचे हैं। नगर में कालिया सोत, खानू गांव सहित पांच क्षेत्रों का चयन किया गया है जहां व्यापक वृक्षारोपण किया जाएगा। संभाग आयुक्त सिंह ने निर्देश दिए कि नगर के विभिन्न जल स्रोतों से प्रदूषण हटाने का कार्य भी निरंतर किया जाए. नगर निगम के अधिकारी द्वारा बताया गया कि भोपाल नगर में कुल 12 तालाब है, जिनमें से किसी भी तालाब में उद्योगों का प्रदूषित पानी नहीं मिलता है।  

NHAI 152KM लम्बे फोरलेन पर 215 करोड़ की लागत से 14 अंडरब्रिज तैयार कर रहा, हदसों से मिलेगी मुक्ति

सागर.  राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के सालों पुराने चिन्हित ब्लैक स्पॉट को समाप्त करने अंडरब्रिज का निर्माण कर रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 152 किलोमीटर लंबाई के फोरलेन पर 215 करोड़ रुपए की लागत से 14 अंडरब्रिज तैयार कर रहा है। इसकी शुरूआत देवरी की ओर से की गई थी, जिसमें से 4 अंडरब्रिज का काम पूरा भी कर लिया गया है, वहीं बाकी के 10 अंडरब्रिज निर्माणाधीन है। कुछ समय पहले ही सिविल लाइन थाना क्षेत्र में आने वाले बम्हौरी चौराहे पर भी अंडरब्रिज का निर्माण शुरू हो गया है। इन अंडरब्रिज के तैयार होने के बाद इस नेशनल हाइवे सफर सुगम होगा तो वहीं हादसों में 70 से 80 प्रतिशत की कमी आ जाएगी।  दरअसल कश्मीर से कन्याकुमारी को जोडऩे वाले (उत्तर-दक्षिण कॉरीडोर) देश के इस सबसे लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग-44 का 152 किलोमीटर लंबा हिस्सा सागर जिले की सीमा में आता है, जो मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश बॉर्डर पर स्थित मालथौन के पास से शुरू होकर देवरी के आगे नरसिंहपुर जिले की सीमा में आने वाले तीतरपानी टोल प्लाजा तक लगता है। – भारी वाहन भी निकल सकेंगे नेशनल लाइवे पर तैयार किए जा रहे इन अंडरब्रिज का आकार 12 वाया 5.5 मीटर रखा गया है, इसमें 12 मीटर की चौड़ाई होगी तो ऊंचाई 5.5 मीटर रहेगी, जिसमें से भारी व बड़े वाहन भी आसानी से निकल सकेंगे। फोरलेन के इन सभी 14 अंडरब्रिज को 6 मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। – सागर से देवरी के बीच 10 अंडरब्रिज बनेंगे सागर से देवरी की ओर बम्हौरी चौराहा, समनापुर तिराहा, सुरखी स्टार्टिंग बायपास व सुरखी ऐंडिंग बायपास, गौरझामर-केसली चौराहा, गौरझामर एंडिंग बायपास, देवरी स्टार्टिंग बायपास, देवरी-दमोह मार्ग, देवरी एंडिंग बायपास व महाराजपुर में अंडरब्रिज तैयार किए जा रहे हैं। – सागर से मालथौन के बीच 4 अंडरब्रिज सागर से मालथौन की ओर बाछलोन, मोठी गांव के पास, झीकनी गांव और बरोदियाकलां में अंडरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। – फैक्ट फाइल 152 किमी लंबा हाइवे जिले की सीमा में 14 ब्लैक स्पॉट पर बन रहे अंडरब्रिज 4 अंडरब्रिज बनकर हो चुके तैयार 215 करोड़ रुपए है प्रोजेक्ट की लागत 12 मीटर चौड़ा, 5.5 मीटर होगी ऊंचाई 6 मार्च 2026 तक पूरा करना है काम – सफर सुगम व सुरक्षित होगा जिले से निकले फोरलेन के ब्लैक स्पॉट समाप्त करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। ऐसे स्थानों को चिन्हित कर 14 अंडरब्रिज तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें 4 का काम पूरा हो गया है, शेष प्रगतिरत हैं। मार्च 2026 तक काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्य पूर्ण होने के बाद फोरलेन का सफर सुगम व सुरक्षित होगा। संदीप जीआर, कलेक्टर

कोरोना के बाद सब कुछ एकदम से ठहर गया, कोहदाड़ रेलवे स्टेशन पर 5 सालों से नहीं रुक रही ट्रेन

खंडवा जिले का एक ऐसा रेलवे स्टेशन जो सालों से खामोश पड़ा है. यहां अब एक भी ट्रेन नहीं रुकती है, कई सालों से स्टेशन पर न कदमों की आहट सुनाई देती है और न बच्चों की हंसी. अब वो बुजुर्ग भी नजर नहीं आते हैं जो कभी स्टेशन की बेंच पर बैठकर चाय की चुस्कियां लिया करते थे. सैकड़ों लोगों की जिंदगी हो रही प्रभावित खंडवा शहर से कुछ ही दूर पर कोहदाड़ रेलवे स्टेशन मौजूद है. जहां कोरोना के बाद सब कुछ एकदम से ठहर सा गया है. इससे पहले स्टेशन गुलजार था. कटनी-भुसावल जाने वाली पैसेंजर गाड़ी में सैकड़ों की संख्या में लोग सफर करते थे. किसान अपनी फसल लेकर बेचने जाते थे, तो वहीं छात्र शहर की ओर पढ़ाई करने और युवा नौकरी की तलाश में निकलते थे. खंडहर बना रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म पर बिछी पटरी से सिर्फ रेलगाड़ी नहीं, बल्कि ग्रामीणों के सपने गुजरते थे. लेकिन, आज कोहदाड़ रेलवे स्टेशन खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. यहां रुकने वाली कटनी-भुसावल पैसेंजर ट्रेन को एक्सप्रेस कर दिया गया है, जिसके चलते अब नहीं रुकती है. हालांकि, दूसरी पैसेंजर ट्रेन भी लगभग 5 सालों से कोहदाड़ रेलवे स्टेशन पर नहीं रुक रही है. कई मायनों में खास है कोहदाड़ स्टेशन टाकलीकला निवासी रामनारायण दशोरे ने कहा, ” कोहदाड़ स्टेशन बहुत पुराना है. स्टेशन के पास नदी है. उस पर बने ब्रिज से ट्रेन अब भी गुजरती है. साल 1960-61 में जब भारी जल संकट था. पीने के लिए पानी नहीं था. उस समय कोयले से ट्रेन चला करती थी. तब कोहदाड़ स्टेशन ही था जिसने रेलवे को पानी पिलाया था.” कोहदाड़ स्टेशन के करीब रहने वाले लतीफ खान ने कहा, ” ट्रेन से ग्रामीणों के सब्जी का रोजगार जुड़ा हुआ था. नेपानगर में सप्ताह में दो दिन बाजार लगती है, यहां ग्रामीण ट्रेन से जाते थे और सब्जी बेचकर शाम तक लौट जाते थे. खंडवा शहर में सब्जी बेचने और खरीदारी करने के लिए ट्रेन मात्र एक सहारा थी. ट्रेन बंद होने के चलते लोगों का रोजगार ठप हो गया.”

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