नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद दुकानदार की मौत
Shopkeeper dies after administrative action in Nalkheda चंदा कुशवाह संवाददातानलखेड़ा। बगलामुखी मंदिर के पास स्थित राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के अगले ही दिन स्थानीय दुकानदार ललित चौहान की मौत ने पूरे कस्बे में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।परिजनों का सीधा आरोप है कि SDM, तहसीलदार, SDOP और TI की मौजूदगी में बिना किसी पूर्व सूचना उनकी दुकान गिरा दी गई, जिसके सदमे में ललित चौहान गंभीर मानसिक तनाव में चले गए और आज सुबह 4 बजे हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।बिना बताए तोड़ी दुकान… रातभर सो नहीं पाए”—परिवार का आरोप परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार: परिवार का कहना है—“ललित जी रातभर यही बोलते रहे—मेरी रोज़ी-रोटी खत्म हो गई… और सुबह उनकी सांस ही रुक गई।”कस्बे में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल—‘क्या यह मौत टाली जा सकती थी?’ स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि: प्रशासन ने राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में अत्यधिक तेजी और सख्ती दिखाई। मौके पर SDM सर्वेश यादव, तहसीलदार प्रियांक श्रीवास्तव, SDOP, TI, व राजस्व अमला मौजूद था,पर दुकानदारों को सामान निकालने या तैयारी करने का मौका नहीं दिया गया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि:“धार्मिक भूमि खाली कराना सही है, लेकिन बिना नोटिस लोगों की रोज़ी-रोटी तोड़ देना क्या उचित है?”कस्बे में यह चर्चा तेज है कि प्रशासन की जल्दबाजी और संवेदनहीनता ने यह त्रासदी पैदा की।कुछ जगह विरोध, कई दुकानें गिरीं—ललित पर सबसे ज्यादा असर प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार: कई लोगों ने विरोध किया, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी।कई दुकानों पर JCB चली। परिजनों का दावा है कि दुकान टूटते ही ललित चौहान मानसिक रूप से टूट गए,क्योंकि उनकी पूरी आजीविका उसी दुकान पर निर्भर थी।परिजनों ने SDM–तहसीलदार–SDOP–TI पर गंभीर आरोप लगाए, जांच की मांग मृतक के परिवार ने कहा: “अगर प्रशासन थोड़ी संवेदनशीलता दिखाता… नोटिस देता… तैयारी का समय देता… तो यह मौत नहीं होती।” परिवार ने संबंधित अधिकारियों पर मानवीय लापरवाही का आरोप लगाते हुएउच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है। कस्बे में व्यापारियों के बीच भी यह मांग उठ रही है किअतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया कानूनन सही लेकिन मानवता के साथ होनी चाहिए।