A complaint has been filed alleging a conspiracy to embezzle crores of rupees deposited in the treasury of the Maa Baglamukhi Temple, but the district headquarters has not yet submitted a report. संवाददाता चंदा कुशवाहनलखेड़ा /आगर मालवा। पूरे विश्व में प्रख्यात मां बगलामुखी मंदिर में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दान स्वरूप चढ़ाई जाने वाली करोड़ों रुपये की राशि पर कुछ लोगों की गिद्ध दृष्टि लगी होने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस संबंध में पूर्व में एक विस्तृत शिकायत की गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज दिनांक तक जिला मुख्यालय स्तर से कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले को लेकर पुलिस लोकायुक्त उज्जैन द्वारा पत्र क्रमांक /2209/पुअ/विपुस्थ/2025 के माध्यम से कलेक्टर, जिला आगर मालवा को पत्र भेजा गया था। लोकायुक्त पुलिस उज्जैन द्वारा दिनांक 25 अप्रैल 2025 को पत्र जारी कर निश्चित समयावधि में बिंदुवार जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे,परंतु आज तक कलेक्टर जिला आगर मालवा द्वारा इस संदर्भ में कोई जानकारी लोकायुक्त पुलिस को उपलब्ध नहीं कराई गई। इस स्थिति को लेकर यह प्रश्न खड़े हो रहे हैं कि कहीं जानकारी जानबूझकर रोकी तो नहीं जा रही और क्या वास्तविक तथ्यों को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायत सही पाए जाने पर अधिकारियों पर गिर सकती है गाज कार्यालय पुलिस अधीक्षक, विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त उज्जैन को की गई शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार निजी भूमि स्वामियों एवं तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आपसी साठगांठ कर फर्जी भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव तैयार किया गया। इस प्रस्ताव के तहत मंदिर से लगी निजी भूमि को अधिग्रहित दर्शाकर भूमि स्वामियों को करोड़ों रुपये की मुआवजा राशि दिए जाने की योजना बनाई गई, जिसमें तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की संलिप्तता बताई गई है। शिकायतकर्ता द्वारा लोकायुक्त कार्यालय में साक्ष्यों सहित शिकायत प्रस्तुत की गई, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर के समीप लगभग 20 हेक्टेयर शासकीय भूमि उपलब्ध होने के बावजूद किसी भी प्रकार के भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं थी। इसके बावजूद मंदिर के कोष में जमा करोड़ों रुपये की धनराशि को निकालने के उद्देश्य से षड्यंत्रपूर्वक दस्तावेज तैयार किए गए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाती है, तो परत-दर-परत चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं। लोकायुक्त द्वारा जिन बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई लोकायुक्त पुलिस उज्जैन द्वारा निम्नलिखित पत्रों एवं आदेशों से संबंधित जानकारी एवं प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे— पत्र क्रमांक /अक/स्टेनो/2023/455 दिनांक 06.12.2023, अपर कलेक्टर द्वारा तहसीलदार से जानकारी प्राप्त करने हेतु पत्र क्रमांक री/12023/1292 दिनांक 20.12.2023, तत्कालीन तहसीलदार द्वारा पालन में भेजा गया पत्र क्रमांक री/2024/04 सुसनेर, दिनांक 01.01.2024, एसडीओ सुसनेर द्वारा अपर कलेक्टर को पत्र क्रमांक /492/अक/स्टेनो/2024 दिनांक 09.09.2024, कलेक्टर के अनुमोदन पश्चात निजी भूमि से प्रतिबंध हटाने संबंधी आदेश पत्र क्रमांक /671/अक/स्टेनो/2024 दिनांक 28.11.2024, संभावित अधिग्रहण बताकर निजी भूमि पर प्रतिबंध पत्र क्रमांक आ/का/देव/2024/641 दिनांक 09.10.2024, तहसीलदार नलखेड़ा द्वारा पत्र क्रमांक रि/2024/1929 दिनांक 10.10.2024 पत्र क्रमांक भू-अर्जन/2024/646 दिनांक 25.11.2024, अपर कलेक्टर द्वारा आयुक्त उज्जैन को पत्र क्रमांक 6496/देव/भू-अर्जन/2024 दिनांक 17.12.2024, आयुक्त उज्जैन पत्र क्रमांक 04/भू-अर्जन/2024 दिनांक 02.01.2025, धर्मस्व विभाग को पत्र क्रमांक एफ/आरटीई/2049/2025 दिनांक 13.09.2025, धर्मस्व विभाग भोपाल द्वारा की गई जांच इसके अतिरिक्त यह भी निर्देश दिए गए थे कि यदि इस शिकायत से संबंधित कोई अन्य दस्तावेज या पूर्व जांच उपलब्ध हो, तो उसकी प्रमाणित प्रति भी दिनांक 25.04.2025 को कार्यालयीन समय में विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त कार्यालय, बृहस्पति भवन, कोठी पैलेस के सामने, उज्जैन संभाग में उपलब्ध कराई जाए। लोकायुक्त का बयान इस संबंध में उप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन संभाग राजेश पाठक ने बताया कि उक्त शिकायत जिला मुख्यालय को भेज दी गई थी, लेकिन वहां से अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और लोकायुक्त जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है। यह मामला न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता, बल्कि मां बगलामुखी मंदिर जैसे पवित्र स्थल के कोष की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।