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हवा में हिंसा! 30 हजार फुट पर यात्रियों की खून-खराबे वाली लड़ाई, अचानक करानी पड़ी लैंडिंग

तुर्की तुर्की से यूनाइटेड किंगडम (UK) जा रही Jet2 की एक फ्लाइट में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब यात्रियों के बीच हवा में ही हिंसक झड़प शुरू हो गई। इस घटना के चलते विमान को रास्ते में ही Belgium में डायवर्ट करना पड़ा। फ्लाइट LS896, जो Antalya से Manchester जा रही थी, में गुरुवार को अचानक दो यात्रियों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि विमान के गलियारे में यात्री एक-दूसरे पर घूंसे बरसा रहे हैं, जबकि आसपास बैठे लोग चीखते-चिल्लाते नजर आ रहे हैं। एयरलाइन की ओर से जारी बयान में इस घटना को “बेहद शर्मनाक और अस्वीकार्य व्यवहार” बताया गया।   जेट2 के मुताबिक, झगड़े में शामिल दोनों “डिसरप्टिव पैसेंजर्स” को ब्रसेल्स में विमान से उतार दिया गया, जहां स्थानीय पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। इसके बाद फ्लाइट ने दोबारा उड़ान भरी और मैनचेस्टर पहुंची। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि झगड़े की शुरुआत किस वजह से हुई, लेकिन ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक चश्मदीद ने दावा किया है कि उड़ान के दौरान एक पुरुष यात्री ने कथित तौर पर नस्लवादी टिप्पणी की थी, जिसके बाद विवाद हिंसा में बदल गया। यह घटना एक बार फिर फ्लाइट सेफ्टी और यात्रियों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में न सिर्फ यात्रियों की जान जोखिम में पड़ती है, बल्कि सैकड़ों लोगों की यात्रा भी प्रभावित होती है।

कम समय और कम लागत में धन प्रेषण की वकालत, जयराम रमेश का बयान

नई दिल्ली कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को कहा कि घरेलू स्तर पर धन प्रेषण (रेमिटेंस) में लगने वाला समय और लागत कम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे उत्तर प्रदेश सहित कई पूर्वी और उत्तरी राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं को मदद मिलती है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”भारत को 2025 में विदेशों से पहले लगभग 135 अरब डॉलर की राशि (रेमिटेंस) प्राप्त हुई। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 3.4 प्रतिशत है। देश के भुगतान संतुलन के प्रबंधन में विदेश से भारतीय नागरिकों द्वारा भेजे जाने वाले पैसे की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है और केरल जैसे कई राज्यों की अर्थव्यवस्था के लिए ये निर्णायक रहे हैं। इन धन प्रेषण (रेमिटेंस) पर व्यापक अध्ययन भी हुआ है।” उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, देश के भीतर एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवासी श्रमिकों द्वारा भेजी जाने वाली राशि की मात्रा के बारे में अपेक्षाकृत कम जानकारी उपलब्ध है। रमेश ने कहा, ”केरल के संबंध में कुछ अनुमान लगाए गए हैं, जिनके अनुसार एक अध्ययन बताता है कि केरल के भीतर से होने वाले घरेलू धन प्रेषण, केरल को विदेशों से प्राप्त प्रेषणों का लगभग एक-तिहाई हो सकते हैं।” रमेश ने इस बात का उल्लेख किया, ”एमस्टर्डम विश्वविद्यालय के शिक्षाविद रॉबिन वैन जेन ड्यूजिन ने अत्यंत उपयोगी लेख लिखा है। उनके अनुसार, 2024 में पूरे भारत में घरेलू धन प्रेषण का अनुमान 36 से 48 अरब डॉलर के बीच है। यह भारत को विदेशों से प्राप्त प्रेषण का लगभग एक-तिहाई से अधिक है।” रमेश ने कहा, ”दुर्भाग्यवश, घरेलू धन प्रेषण को कम सुर्खियां मिलती हैं, वे कम उत्साह पैदा करते हैं और उन्हें विदेशों से आने वाले धन प्रेषण की तुलना में कम नीतिगत ध्यान प्राप्त होता है। यह स्थिति बदलनी चाहिए, क्योंकि घरेलू प्रेषण की मात्रा भी महत्वपूर्ण है और उनका सामाजिक-आर्थिक प्रभाव भी व्यापक है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन प्रेषण में लगने वाले समय और लागत को कम किया जाना चाहिए। रमेश का यह भी कहना है कि घरेलू प्रेषण पूर्वी राज्यों तथा उत्तर प्रदेश जैसे कुछ उत्तरी राज्यों की अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ कर रहे हैं।  

आज का गोल्ड-सिल्वर रेट: चांदी में बड़ी गिरावट, सोना भी फिसला—22 और 24 कैरेट की कीमतें जानें

झारखण्ड अगर आप सोना-चांदी खरीदने या गहने बनवाने की सोच रहे हैं, तो पहले ताजा भाव जरूर जान लें। बाजार में इन दिनों सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। ऐसे में सही जानकारी के बिना खरीदारी करना महंगा पड़ सकता है। रांची में सोना-चांदी के दाम में गिरावट रांची ज्वेलरी एसोसिएशन के अनुसार राजधानी रांची में सोने और चांदी की कीमतों में कमी आई है। आज 22 कैरेट सोना 1,44,300 रुपये प्रति 10 ग्राम और 24 कैरेट सोना 1,51,520 रुपये प्रति 10 ग्राम बिक रहा है। चांदी की बात करें तो आज इसका भाव 2,80,000 रुपये प्रति किलो है। जबकि शनिवार को चांदी 3,00,000 रुपये प्रति किलो बिक रही थी। यानी एक ही दिन में चांदी 20,000 रुपये सस्ती हो गई है। सोना भी हुआ सस्ता रांची में 22 और 24 कैरेट सोने की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है।     22 कैरेट सोना कल 1,46,200 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो आज घटकर 1,44,300 रुपये हो गया है। यानी 1,900 रुपये की कमी आई है।     24 कैरेट सोना कल 1,53,510 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो आज 1,51,520 रुपये पर आ गया है। यानी 1,990 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। अन्य शहरों में क्या है हाल? बोकारो     22 कैरेट सोना: 1,46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम      24 कैरेट सोना: 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम     चांदी: 2,55,000 रुपये प्रति किलो जमशेदपुर     22 कैरेट सोना: 1,42,200 रुपये प्रति 10 ग्राम     24 कैरेट सोना: 1,55,240 रुपये प्रति 10 ग्राम     चांदी: 2,45,630 रुपये प्रति किलो देवघर     22 कैरेट सोना: 1,43,229 रुपये प्रति 10 ग्राम     24 कैरेट सोना: 1,56,250 रुपये प्रति 10 ग्राम     चांदी: 2,45,630 रुपये प्रति किलो कुल मिलाकर, आज सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए राहत की खबर है। हालांकि बाजार में दाम रोज बदल रहे हैं, इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर जांच लें।  

कोल्ड्रिफ सिरप मामले में विसरा रिपोर्ट ने दिखाया सच, मासूमों की मौतों के पीछे की वजह सामने आई

छिंदवाड़ा  साल 2025 में जहरीला कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौत मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. छिंदवाड़ा सहित मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौतें हुईं थी. इस मामले की विसरा रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें इस बात की पुष्टि हो गई है कि बच्चों की मौत जहरीले केमिकल डाई एथिलीन ग्लाइकॉल की वजह से हुई है. इस मामले में पुलिस चार्जशीट में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था. सितंबर 2025 में कफ सिरफ से हुई बच्चों की मौतों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. ‘डाई एथिलीन ग्लाइकॉल से खराब हुईं किडनी’ छिंदवाड़ा और बैतूल के बच्चों को मामूली सर्दी जुकाम और बुखार की शिकायत के बाद परासिया के सरकारी डॉक्टर के निजी क्लीनिक में इलाज कराया गया था. जांच के बाद डॉक्टर ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप बच्चों को पिलाने के लिए लिखा था. इस दवा के इस्तेमाल से बच्चों की लगातार मौतें हो रहीं थीं. जांच में पाया गया था कि सिरप में जरूरत से ज्यादा मात्रा में डाई एथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया था. जिसके बाद मृतक बच्चों की विसरा रिपोर्ट भी जांच के लिए भेजी गई थी. परासिया के एसडीओपी और SIT प्रभारी जितेंद्र सिंह जाट ने  बताया कि “बच्चों के आंतरिक अंगों में भी डाई एथिलीन ग्लाइकॉल दवा पाई गई है. जिसकी वजह से किडनी खराब हुईं थी. कोल्ड्रिफ कफ सिरप में भी यह ज्यादा मात्रा में पाई गई है.” ‘सप्लीमेंट्री चार्जशीट फिर से की जाएगी पेश’ एसआईटी प्रभारी जितेंद्र सिंह जाट ने बताया, “बिसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद यह साबित हो गया है कि बच्चों की मौत कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से हुई है. इसमें पाया जाने वाला केमिकल खतरनाक था. इस आधार पर सप्लीमेंट्री चार्ज शीट फिर से पेश की जाएगी, जिसमें इन तथ्यों को शामिल कर उन लोगों को आरोपी बनाया जाएगा जो इसमें शामिल हैं.” 11 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने के बाद बच्चों की धीरे-धीरे किडनी खराब हो रही थीं. इसके चलते छिंदवाड़ा और बैतूल के कुल 24 बच्चों की मौत हो गई थी. इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार और छिंदवाड़ा पुलिस ने एसआईटी का गठन किया था. टीम ने कार्रवाई करते हुए कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के मालिक रंगनाथन सहित कफ सिरप बच्चों को प्रिसक्राइब करने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी, स्टॉकिस्ट और केमिकल एनालिस्ट सहित कुल 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. फिलहाल, सभी आरोपी जेल में हैं. प्रशासनिक कार्रवाई से संतुष्ट नहीं परिजन पीड़ित परिजनों की पैरवी कर रहे एडवोकेट संजय पटेरिया का कहना है, “जिस तरीके से इस मामले की जांच की गई और कुछ लोगों को ही आरोपी बनाया गया है. इस कार्रवाई से पीड़ितों के परिजन नाखुश हैं. इससे नाराज परिजनों ने 17 फरवरी से प्रदर्शन करने की प्रशासन से अनुमति मांगी है.” परिजनों का कहना है कि डॉ. अमन सिद्दीकी और डॉ. अमित ठाकुर ने भी कोल्ड्रिफ सिरप से बच्चों का इलाज किया था. उन दोनों पर मामला दर्ज नहीं किया गया है, जबकि पुलिस का कहना है की जांच अभी जारी है, जो भी दोषी होंगे उनको सप्लीमेंट्री चार्जशीट में शामिल कर आरोपी बनाया जाएगा.

US में भारतीय छात्र लापता होने से हड़कंप, सैन फ्रांसिस्को में दूतावास ने संभाली कमान

न्यू यार्क अमेरिका से भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। कर्नाटक के रहने वाले और University of California, Berkeley में पोस्ट-ग्रेजुएट की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया लापता हो गए हैं। इस मामले पर Consulate General of India, San Francisco ने गहरी चिंता जताई है। दूतावास ने बताया कि वह छात्र के माता-पिता के संपर्क में है और स्थानीय अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर साकेत की तलाश में जुटा हुआ है। भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि साकेत श्रीनिवासैया के लापता होने की जानकारी बेहद चिंताजनक है और हरसंभव सहायता की जा रही है। यह घटना कोई पहली नहीं है। बीते वर्षों में विदेशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों ने नस्लीय भेदभाव, हमलों और स्थानीय प्रशासन की कथित लापरवाही की शिकायतें उठाई हैं। इसी मुद्दे पर लोकसभा में सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा सवाल पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय ने बताया था कि सरकार भारतीय छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेशों में किसी भी अप्रिय घटना को तुरंत संबंधित देश की सरकार के सामने उठाया जाता है। भारतीय दूतावास छात्रों से लगातार संपर्क में रहते हैं, प्री-ओरिएंटेशन सत्र आयोजित करते हैं और MADAD पोर्टल, व्हाट्सऐप ग्रुप, इमरजेंसी हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि संकट की स्थिति में भारतीय समुदाय कल्याण कोष (ICWF) के जरिए छात्रों को मदद दी जाती है और जरूरत पड़ने पर बड़े पैमाने पर निकासी अभियान भी चलाए जाते हैं। साकेत श्रीनिवासैया की गुमशुदगी ने एक बार फिर विदेशों में भारतीय छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

‘सेवा तीर्थ’ बना सत्ता का नया केंद्र: साउथ ब्लॉक को अलविदा, यहां होंगी कैबिनेट बैठकें

नई दिल्ली प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का पता अब बदल गया है। कल 13 फरवरी 2026 को साउथ ब्लॉक में कैबिनेट की आखिरी बैठक हुई, जहां एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए भवन परिसर का उद्घाटन किया, जिसका नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है। अब से कैबिनेट बैठकें और पीएमओ का काम इसी नए परिसर में होगा। साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण ब्रिटिश काल में हुआ था। ये भवन औपनिवेशिक शासन के प्रतीक थे, जिनके जरिए भारत को लंबे समय तक गुलामी में रखा गया। 1947 में आजादी मिलने के बाद भी प्रशासनिक ढांचा काफी हद तक उसी पुरानी व्यवस्था पर आधारित रहा। स्वतंत्रता के बाद से पीएमओ साउथ ब्लॉक से ही संचालित होता आया है। अब यह बदलाव एक ऐतिहासिक कदम है, जो औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति और भारतीय मूल्यों पर आधारित नई शुरुआत का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा तीर्थ के उद्घाटन के दौरान कहा कि सेवा भारत की आत्मा और असली पहचान है। इस नए परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय भी एक छत के नीचे आ गए हैं। इससे प्रशासनिक कामकाज अधिक कुशल, एकीकृत और नागरिक-केंद्रित बनेगा। परिसर की दीवार पर ‘नागरिक देवो भव’ का आदर्श वाक्य अंकित है, जो सेवा की भावना को मजबूत करता है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह बदलाव सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है, जिसके तहत कई अन्य नाम भी बदले गए हैं, जैसे केंद्रीय सचिवालय को कर्तव्य भवन और राजपथ को कर्तव्य पथ। सरकार का मानना है कि ये कदम औपनिवेशिक प्रतीकों से दूर हटकर आधुनिक, भारतीय जनभावना के अनुरूप शासन व्यवस्था को मजबूत करेंगे। सेवा तीर्थ में आधुनिक सुविधाएं, डिजिटल एकीकरण और बेहतर समन्वय की व्यवस्था है, जो देश की प्रगति और विकास के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगी।

बांग्लादेश: BNP कर सकती है PM मोदी को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित, तैयारियां शुरू

नई दिल्ली बांग्लादेश में फरवरी 2026 के चुनावों में भारी बहुमत हासिल करने के बाद तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए तैयार हैं. इस ऐतिहासिक अवसर पर BNP ने भारत के साथ संबंधों में एक ‘नई शुरुआत’ करने का संकेत दिया है. सूत्रों के अनुसार, पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करने की तैयारी कर रही है. इसके अलावा बीएनपी सभी क्षेत्रीय राष्ट्राध्यक्षों को भी आमंत्रित कर सकती है. तारिक रहमान के विदेशी मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने पीटीआई से बात करते हुए स्पष्ट किया है कि यह समय दोनों देशों के लिए अपनी पुरानी धारणाओं को बदलने का है. उन्होंने कहा, ‘भारत को यह समझना होगा कि आज के बांग्लादेश में शेख हसीना और अवामी लीग का अस्तित्व नहीं बचा है. BNP ने भारत से अपील की है कि वह शेख हसीना जैसी “आतंकवादी” को अपनी जमीन पर पनाह न दे, जिन्होंने बांग्लादेश को अस्थिर करने का प्रयास किया. हुमायूं कबीर के अनुसार, यदि भारत ‘पड़ोसी प्रथम’ की नीति के तहत सम्मानजनक व्यवहार करता है, तो दोनों देश विकास के नए आयाम छू सकते हैं. पीएम मोदी और तारिक रहमान की बातचीत चुनाव परिणामों के तुरंत बाद, 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री मोदी ने तारिक रहमान से फोन पर बात की और उन्हें इस शानदार जीत की बधाई दी. बातचीत बेहद सौहार्दपूर्ण रही, जिसमें पीएम मोदी ने एक लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया. पीएम मोदी ने तारिक रहमान को अपनी सुविधानुसार भारत आने का निमंत्रण भी दिया है.  

भारत-कनाडा आर्थिक समझौते पर सकारात्मक संकेत, जल्द बन सकती है CEPA डील

कनाडा कनाडा में भारत के उच्चायुक्त ने भारत-कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर बड़ा और सकारात्मक संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यह डील “बिल्कुल भी मुश्किल नहीं” होनी चाहिए और इसके लिए औपचारिक व्यापार वार्ताएं फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में शुरू हो सकती हैं। कनाडा के प्रतिष्ठित अख़बार Financial Post को दिए साक्षात्कार में उच्चायुक्त पटनायक ने बताया कि भारत और कनाडा ने G20 शिखर सम्मेलन, जोहान्सबर्ग के दौरान CEPA वार्ता शुरू करने का फैसला किया था और फिलहाल दोनों देश Terms of Reference (संदर्भ शर्तों) को अंतिम रूप दे रहे हैं।  क्यों आसान होगी CEPA डील? दिनेश पटनायक ने कहा कि भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत कई वर्षों से चल रही थी, लेकिन कुछ कारणों से यह प्रक्रिया रुकी हुई थी। अब वह “पॉज” हटा लिया गया है। उन्होंने बताया कि कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney की सरकार ने संसद को 90 दिन का नोटिस दे दिया है, जिसके बाद औपचारिक वार्ताएं शुरू हो सकेंगी।  उनका कहना है कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में आए बदलाव, भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि और दोनों देशों द्वारा अलग-अलग व्यापार समझौते किए जाने से CEPA को नया आकार मिलेगा। पटनायक ने कहा -“दोनों पक्षों की मंशा साफ है, इसलिए मुझे भरोसा है कि हम इसे बहुत जल्द पूरा कर लेंगे।”   किन सेक्टरों पर होगा फोकस? उच्चायुक्त ने बताया कि CEPA केवल एक समझौता नहीं, बल्कि लगभग हर बड़े सेक्टर को कवर करेगा। इसमें शामिल होंगे:       डिफेंस और एयरोस्पेस     माइनिंग और एनर्जी     निवेश और फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स     रिसर्च, इनोवेशन और AI     उन्होंने कहा कि समझौते का मकसद होगा:     टैरिफ कम करना     कस्टम्स और दस्तावेज़ी प्रक्रिया सरल बनाना     नॉन-टैरिफ बैरियर्स हटाना     लॉजिस्टिक्स और निवेश को आसान बनाना पटनायक ने CEPA की तुलना “शादी” से की पटनायक ने CEPA की तुलना “शादी” से करते हुए कहा कि जैसे शादी में रिश्ते को आसान बनाने वाली बाधाएं हटाई जाती हैं, वैसे ही यह समझौता व्यापार में आने वाली अड़चनों को खत्म करेगा।     भारत-कनाडा व्यापार का मौजूदा आंकड़ा     भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार:     2024 में भारत का कनाडा को निर्यात: 8.02 अरब कनाडाई डॉलर     कनाडा से भारत का आयात: 5.30 अरब कनाडाई डॉलर     यह आंकड़े बताते हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। CEPA से आगे भी रिश्तों पर जोर दिनेश पटनायक ने साफ किया कि CEPA अहम जरूर है, लेकिन यही एकमात्र केंद्रबिंदु नहीं है। भारत और कनाडा जल्द ही Canada-India Friendship Society शुरू करने पर भी विचार कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों की संसदों, सांसदों, नागरिक समाज और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सीधा संवाद बढ़े।उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में रिश्तों में आई “छोटी-सी खरोंच” के बावजूद  लोगों के बीच संबंध मजबूत रहे, व्यापार बढ़ता रहा, शिक्षा, शोध और नवाचार पर कोई असर नहीं पड़ा।  यह दोनों देशों के रिश्तों की असली मजबूती दिखाता है।  

बच्चों के जन्म और शादी के बाद नहीं अटकेगा राशन, खाद्य सुरक्षा योजना में जुड़ेंगे नाम

भरतपुर. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसए) के तहत चयनित परिवारों के राशन कार्ड में जो सदस्य अब तक जुड़ने से शेष रह गए थे, उनके नाम अब जोड़े जा सकेंगे। इसके लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू कर दी गई है। सरकार की ओर से यह प्रक्रिया पुन: शुरू किए जाने से हजारों परिवारों को राहत मिलेगी, जिनके यहां बच्चों का जन्म हुआ है या विवाह के बाद परिवार में नए सदस्य जुड़े हैं। जिला रसद अधिकारी पवन अग्रवाल ने बताया कि जारी निर्देशों के अनुसार परिवार का कोई भी सदस्य विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। शेष सदस्यों के नाम जनआधार एपीआई के माध्यम से राशन कार्ड में जोड़े जाएंगे। यदि जुड़ने वाले सदस्य के नाम पर एलपीजी गैस कनेक्शन है तो उसकी एलपीजी आईडी का विवरण भी आवेदन में दर्ज किया जा सकेगा। आवेदन जिला रसद अधिकारी, विकास अधिकारी अथवा अधिशासी अधिकारी के स्तर से अनुमोदित होने के बाद संबंधित सदस्य का नाम खाद्य सुरक्षा योजना में जोड़ा जाएगा। ई-केवाईसी कराना अनिवार्य इसके बाद 90 दिनों के भीतर सभी नए जुड़े सदस्यों की ई-केवाईसी कराना अनिवार्य होगा, ताकि उन्हें योजना का लाभ निर्बाध रूप से मिल सके। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, इसलिए पात्र लाभार्थियों को अनावश्यक रूप से ई-मित्र केंद्रों पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य आमजन को सुविधा देना और पारदर्शिता बढ़ाना है। साथ ही जिला रसद अधिकारियों को अपने अधीनस्थ प्रवर्तन स्टाफ को इस प्रक्रिया का प्रशिक्षण देने और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि काफी समय से यह सुविधा बंद थी, जिसे सरकार ने अब पुन: चालू कर दिया है। इससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र लाभार्थियों को समय पर पूरा अनाज और अन्य सामग्री प्राप्त करने में सुविधा होगी। यह बोले डीएसओ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत चयनित परिवारों के राशन कार्ड में शेष रह गए सदस्यों के नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जिन परिवारों में बच्चों का जन्म हुआ है या विवाह के बाद नए सदस्य जुड़े हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। पात्रता की जांच के बाद संबंधित सदस्यों को राशन कार्ड में जोड़ा जाएगा।

‘उम्मीदों और लोकतंत्र की जीत’—तारिक रहमान का बड़ा बयान

ढाका बांग्लादेश चुनाव में मिली बंपर जीत के बाद पहली बार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) चीफ तारिक रहमान ने मीडिया के सामने देशवासियों का आभार जताया। उन्होंने इसे देश, लोकतंत्र और जनता की उम्मीदों की जीत करार दिया। बांग्ला संबोधन में रहमान ने कहा, “यह जीत बांग्लादेश की है, डेमोक्रेसी की है, और लोगों की उम्मीदों की है। मैं बांग्लादेश के लोगों को डेमोक्रेसी स्थापित करने में आई रुकावटों को पार करने के लिए बधाई देता हूं।” उन्होंने आगे कहा, “फासीवादी सरकार द्वारा संविधान और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की अनदेखी नाकाम हो गई है। हमारी सरकार अब पूरे देश में कानून और पक्की सुरक्षा व्यवस्था करेगी।” उन्होंने सत्ता की जवाबदेही का भरोसा दिलाया। बोले, “देश में डायरेक्ट वोटिंग के जरिए लोगों के प्रति जवाबदेह संसद और सरकार फिर से बनाई जा रही है। यह पक्का करने के लिए कि कोई भी बुरी ताकत देश में तानाशाही फिर से न ला सके और यह पक्का करने के लिए कि देश गुलाम देश न बन जाए, हमें एकजुट रहना होगा और लोगों की इच्छा का सम्मान करना होगा।” बीएनपी चेयरमैन तारिक रहमान ने आगे कहा, “बांग्लादेश के लोगों का बीएनपी पर दिखाया गया भरोसा दिखाता है कि नागरिकों का हम पर पूरा विश्वास है। इस भरोसे के जरिए, हम सभी बांग्लादेशियों के विकास और तरक्की के लिए अथक काम करेंगे। हमारे रास्ते और राय अलग हो सकते हैं, लेकिन देश हित में हमें एकजुट रहना होगा। मेरा पक्का मानना ​​है कि देश की एकता हमारी सामूहिक ताकत है।” तारिक रहमान ने विदेशी प्रेस से बात करते हुए अपनी मां और देश की पूर्व पीएम खालिदा जिया को भी याद किया। सभी पार्टियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि देश खालिदा जिया को बहुत याद कर रहा है। यह लोगों का जनादेश है और हम आप सभी को बधाई देते हैं। बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव हुए थे। कुल 297 सीटों के परिणाम घोषित किए गए। इनमें सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बीएनपी उभरी। जिसने 209 सीटें हासिल की। गठबंधन को कुल 212 सीटें मिलीं। नतीजतन एक बार फिर बांग्लादेश में बीएनपी सत्ता में वापसी कर रही है।

प्रयागराज में गरजे डिप्टी CM: ‘नसीमुद्दीन का जाना बेअसर, 2027 में BJP फिर बनेगी पूर्ण बहुमत की सरकार’

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक प्रयागराज पहुंचे। जहां उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जमकर निशाना साधा। वहीं कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने की अटकलों पर यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने से बीजेपी पर कोई असर नहीं होगा। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दावा किया है कि 2027 में बीजेपी फिर से प्रचंड बहुमत से सत्ता में आएगी। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने वंदे मातरम् गीत पर आपत्ति जताने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् गीत को आजादी के दीवानों ने हंसते हुए गाया था, आजादी के दीवानों ने हंसते हुए वंदे मातरम् गीत गाकर फांसी के फंदे को चूम लिया था। ब्रजेश पाठक ने कहा आपत्ति करने वाले तुष्टिकरण की राजनीति कर रहें हैं, जबकि सच्चाई ये है कि हर भारतवासी वंदे मातरम् गीत को गाना चाहता है।  

आचार संहिता में 6 महीने और करना होगा इंतजार!, सैकड़ों शिक्षकों के स्थाईकरण की अटकी सांसें

बांसवाड़ा. अधिकारियों के आपसी सामंजस्य के अभाव के चलते जिले के सैकड़ों शिक्षकों की सांसें अटकी हुई हैं। शिक्षक भर्ती 2022 के तहत बांसवाड़ा में लगे तृतीय श्रेणी के लेवल-2 के 220 शिक्षकों के स्थाईकरण की फाइल चार माह से प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के दफ्तर में धूल फांक रही है। वहीं पड़ोसी जिले में यह काम परीविक्षा काल पूरा होते ही पूरा कर लिया गया है और शिक्षकों को समस्त परिलाभ मिलने भी शुरू हो गए हैं। जबकि बांसवाड़ा के शिक्षक वेतन वृद्धि, एरियर और अन्य सेवा लाभों से वंचित हो रहे हैं। शिक्षकों को डर सता रहा है कि यदि पंचायती राज चुनाव की आचार संहिता लग जाती है तो स्थाईकरण की फाइल कम से कम छह माह और अटक सकती है। यह है मामला शिक्षक भर्ती 2022 के तहत चयनित शिक्षक प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। उनका परीविक्षा काल अक्टूबर 2025 में पूर्ण होने के बाद प्रावधानों के अनुसार स्थाईकरण होना है, लेकिन चार माह बाद भी फाइल लंबित है। ये हो रहा है नुकसान स्थायीकरण में हो रही देरी का सीधा असर शिक्षकों की वेतन वृद्धि, एरियर और अन्य सेवा लाभों पर पड़ रहा है। समय पर स्वीकृति नहीं मिलने से शिक्षक आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। वहीं कई बार प्रकरण लंबित रहने पर बाद में विभाग को एरियर सहित एक साथ बड़ी राशि देनी पड़ती है। इससे विभाग का बजट भी प्रभावित होता है। 2 बार लेकर गई फाइल : डीईओ स्थायीकरण का काम हमारी तरफ से नवंबर में ही पूरा हो गया है। पहली बार 30 नवंबर और दूसरी बार 10 फरवरी को फाइल भेजी गई। पर दोनों बार कलक्ट्रेट में कहा गया कि डीईसी की बैठक होगी, तब बताएंगे। डीईओ कार्यालय ने पूरा काम कर दिया है। – शम्मे फरोजा बतुल अंजूम, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, बांसवाड़ा फाइल देंगे, तो बुला लेंगे मीटिंग : सीईओ हमारे पास स्थायीकरण की कोई फाइल नहीं आई है। फाइल आएगी तो तुरंत जिला स्थापना समिति की बैठक बुला लेंगे। फाइल मेरी टेबल पर देंगे, तो कार्रवाई करेंगे। – गोपाललाल स्वर्णकार, सीईओ, जिला परिषद, बांसवाड़ा

दुबई हिला देने वाला मामला: विवादित टिप्पणी के बाद वरिष्ठ अधिकारी का इस्तीफा

दुबई दुनिया के कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से कथित संबंधों को लेकर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच दुबई की एक प्रमुख बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स कंपनी के शीर्ष अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम उस वक्त उठाया गया, जब वैश्विक निवेशकों ने कंपनी में निवेश रोकने की चेतावनी दे दी थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस्तीफा देने वाले अधिकारी को दुबई के शासक का बेहद करीबी और उनका “राइट हैंड” माना जाता था। हाल ही में सार्वजनिक हुए एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में उनके नाम का उल्लेख सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े हो गए। इन दस्तावेजों में कथित तौर पर एपस्टीन के साथ कारोबारी अवसरों पर बातचीत, निजी मुलाकातों और महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक चर्चाओं का जिक्र है।रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इन बातचीतों में एक बार “100% रशियन महिला” का संदर्भ आया था, जिसने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दीं। इसके साथ ही एपस्टीन नेटवर्क से जुड़े कथित टॉर्चर वीडियो और महिलाओं के शोषण के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया।जैसे ही विवाद की आंच कंपनी तक पहुंची, कई अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और कारोबारी साझेदारों ने साफ कर दिया कि जब तक नेतृत्व स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती, वे निवेश पर पुनर्विचार करेंगे। इसके बाद कंपनी के बोर्ड ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शीर्ष अधिकारी का इस्तीफा स्वीकार किया और नए नेतृत्व की नियुक्ति का ऐलान किया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम सिर्फ एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि एपस्टीन कांड की गूंज अब वैश्विक कॉरपोरेट और राजनीतिक गलियारों में भी तेज़ी से सुनाई दे रही है। खाड़ी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कारोबारी संस्थाओं पर पारदर्शिता और जवाबदेही का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

शहरों की किस्मत बदलेगा नया फंड, स्मार्ट के साथ ‘समृद्ध’ भी बनेंगे भारतीय नगर

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को भारतीय शहरों की सूरत बदलने के लिए ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (UCF) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में ₹1 लाख करोड़ की सहायता राशि प्रदान करेगी। सरकार का लक्ष्य इस फंड के जरिए 2031 तक शहरी बुनियादी ढांचे में कुल ₹4 लाख करोड़ का निवेश जुटाना है। फंडिंग का बदला अंदाज यह योजना भारत के शहरी विकास में एक बड़े बदलाव का संकेत है। अब शहर केवल सरकारी Grants पर निर्भर नहीं रहेंगे। केंद्र सरकार किसी भी प्रोजेक्ट की लागत का केवल 25% हिस्सा देगी। शहरों को प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए कम से कम 50% रकम बाजार (बैंक लोन, म्युनिसिपल बॉन्ड या प्राइवेट निवेश) से जुटानी होगी। शेष 25% हिस्सा राज्य सरकार या नगर निगम को वहन करना होगा। शहरों के बीच होगी ‘टक्कर’ फंड के लिए शहरों का चयन ‘चैलेंज मोड’ के जरिए होगा। इसका मतलब है कि जिन शहरों के प्रोजेक्ट प्रस्ताव सबसे प्रभावी, सुधारवादी और परिणामोन्मुखी होंगे, उन्हें ही फंडिंग मिलेगी। यह फंड 2030-31 तक चालू रहेगा और भविष्य में इसे 2034 तक बढ़ाया जा सकता है। पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए विशेष कवच छोटे शहरों और पहाड़ी राज्यों (North-East) की मदद के लिए सरकार ने ₹5,000 करोड़ का एक विशेष कॉर्पस बनाया है। यह उन नगर निकायों के लिए ‘क्रेडिट गारंटी’ का काम करेगा जो पहली बार बाजार से कर्ज ले रहे हैं। इसका उद्देश्य इन निकायों को इतना मजबूत बनाना है कि वे खुद निवेश जुटाने में सक्षम हो सकें। किन कामों पर होगा खर्च? इस फंड का मुख्य फोकस तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा:     शहरों को आर्थिक विकास का हब बनाना।     पुराने शहरी केंद्रों और हेरिटेज साइट्स का पुनर्विकास।     जल आपूर्ति और स्वच्छता प्रणालियों में सुधार (जैसे सीवेज नेटवर्क, कचरा प्रबंधन और बेहतर परिवहन)।  

सांसद नीरज डांगी ने राज्यसभा में उठाया मामला, पत्रकारों को रेल यात्रा की रियायतें पुनः बहाल हों

आबूरोड/सिरोही. सांसद नीरज डांगी ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान देश के लोकतांत्रिक ढांचे के चौथे स्तंभ-पत्रकारिता से संबंधित, संवेदनशील एवं जनहित से सीधे जुड़े विषय की ओर ध्यान आकर्षित किया। सांसद डांगी ने बताया कि कोविड-19 महामारी से पूर्व भारतीय रेल की ओर से पत्रकारों को दी जा रही यात्रा रियायतें महामारी के दौरान स्थगित की गई थीं। सांसद डांगी ने बताया कि महामारी के दौरान स्थगित करना उस समय की परिस्थितियों में एक अस्थायी एवं व्यावहारिक निर्णय था, लेकिन खेद का विषय है कि देश में सामान्य स्थिति बहाल होने, सभी आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियां सुचारू रूप से प्रारंभ होने तथा अन्य श्रेणियों को दी गई रियायतें फिर लागू होने के बावजूद पत्रकारों की यह महत्वपूर्ण सुविधा आज तक बहाल नहीं की गई है। सांसद डांगी ने कहा कि पत्रकार केवल समाचार संकलन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे देश के दूर-दराज़, दुर्गम एवं संवेदनशील क्षेत्रों में जाकर आम नागरिकों की समस्याओं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, आपदाओं, सामाजिक असमानताओं तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। कई बार उन्हें सीमित संसाधनों, जोखिमपूर्ण परिस्थितियों और समयबद्ध दबावों में कार्य करना पड़ता है। ऐसे में भारतीय रेल की ओर से दी जाने वाली यात्रा रियायतें किसी प्रकार का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि उनके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायक एक आवश्यक सुविधा रही हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना के अनुरूप नहीं सांसद डांगी ने कहा कि पत्रकारों को यात्रा रियायतों से वंचित रखना अप्रत्यक्ष रूप से उनकी कार्यक्षमता को सीमित करता है और यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना के अनुरूप नहीं कही जा सकती। विशेष रूप से छोटे एवं स्वतंत्र पत्रकार, ग्रामीण एवं क्षेत्रीय मीडिया से जुड़े संवाददाता इस निर्णय से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। लोकतंत्र सशक्त, जीवंत और उत्तरदायी लोकतंत्र तब ही रह सकता है जब उसकी आवाज़ निर्भय, स्वतंत्र और निर्बाध हो। सांसद डांगी ने सरकार से मांग की है कि कोविड-19 महामारी से पूर्व भारतीय रेल की ओर से पत्रकारों को प्रदान की जा रही सभी यात्रा रियायतों को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए। मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी एवं स्थायी नीति का निर्माण किया जाए, जिससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में उनके अधिकारों एवं सुविधाओं की अनावश्यक समाप्ति ना हो। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस नीति का लाभ वास्तविक एवं सक्रिय पत्रकारों तक सरल प्रक्रिया के माध्यम से पहुंचे।

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