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बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत से दोस्ती पर जोर, BNP ने PM मोदी को दिया धन्यवाद

ढाका बांग्लादेश में संसदीय चुनाव में शानदार जीत के बाद Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के बधाई संदेश के लिए सार्वजनिक रूप से आभार जताया है। पार्टी ने इसे भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। BNP ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पार्टी प्रमुख Tarique Rahman के नेतृत्व को मिली मान्यता का वह स्वागत करती है। पार्टी ने कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता के भरोसे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास को दर्शाती है। BNP ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि वह लोकतांत्रिक शासन, समावेशिता और राष्ट्रीय विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पार्टी ने संकेत दिया कि आने वाले समय में नई सरकार भारत के साथ रचनात्मक और सहयोगपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाना चाहती है। BNP ने कहा कि वह भारत के साथ पारस्परिक सम्मान, एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता और क्षेत्रीय शांति, स्थिरता एवं समृद्धि के साझा लक्ष्य के आधार पर काम करने को तैयार है।   इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को उनकी पार्टी की निर्णायक जीत पर बधाई दी थी और कहा था कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में हमेशा खड़ा रहेगा। 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक माने जा रहे हैं। यह चुनाव 2024 के जन आंदोलनों के बाद पहला था, जिनके चलते लंबे समय से सत्ता में रहीं Sheikh Hasina को पद छोड़ना पड़ा था। चुनाव में BNP ने 300 सीटों वाली संसद में बहुमत हासिल कर सत्ता में वापसी की है, जबकि जमात-ए-इस्लामी गठबंधन मुख्य विपक्ष के रूप में उभरा है।  

मध्यप्रदेश पुलिस की पिछले तीन दिनों की प्रमुख कार्यवाहियाँ

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने, अपराध नियंत्रण एवं जनसुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विगत तीन दिनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस ने डकैती, नकबजनी एवं लूट जैसे संगीन अपराधों का सफल खुलासा कर  79 लाख रूपए से अधिक का चोरी व लूट की संपत्ति जब्‍त की है। विदिशा: अरिहंत ज्वैलर्स डकैती कांड में बड़ी सफलता, 15 लाख रूपए की चांदी बरामद थाना कोतवाली, जिला विदिशा क्षेत्रांतर्गत अरिहंत ज्वैलर्स, खरीफाटक रोड पर घटित डकैती के प्रकरण में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। प्रकरण में फरार चल रहे आरोपी को थाना बजरंगगढ़ जिला गुना क्षेत्रांतर्गत ग्राम गड़ला गिर्द के जंगल से गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से चोरी गया लगभग सवा 5 किलो चांदी का सामान बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 15 लाख रूपए है, साथ ही घटना में प्रयुक्त औजार भी जप्त किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि दिनांक 03.01.2026 को फरियादी द्वारा इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिस पर पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के निर्देशन में गठित 08 विशेष टीमों द्वारा तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज एवं सतत पतारसी के आधार पर अब तक कुल 03 आरोपी एवं 02 विधि विरुद्ध बालकों की गिरफ्तारी कर लगभग 13 लाख रूपए की संपत्ति बरामद किया था। अलीराजपुर: नकबजनी का खुलासा 10 लाख के सोने के हार एवं औजार जप्त, आरोपी गिरफ्तार थाना जोबट, जिला अलीराजपुर क्षेत्र में घटित नकबजनी की वारदात का सफल पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी के दो सोने के हार, अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख रुपए तथा घटना में प्रयुक्त लोहा काटने का कटर जप्त किया है। मुरैना: अम्बाह डकैती कांड का खुलासा, 05 इनामी आरोपी गिरफ्तार, 16 लाख 77 हजार रुपए की संपत्ति जब्त थाना अम्बाह क्षेत्रांतर्गत हुई सनसनीखेज डकैती की घटना का सफल खुलासा करते हुए पुलिस ने 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण एवं तकनीकी जांच के आधार पर 10-10 हजार रुपए के इनामी 05 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से लूटी गई नगदी, सोने-चांदी के आभूषण, मोबाइल फोन एवं घटना में प्रयुक्त कार सहित कुल 16 लाख 77 हजार की संपत्ति जब्त की है। सतना: चित्रकूट पुलिस की बड़ी सफलता, 14 लाख रूपये की चोरी का पर्दाफाश थाना चित्रकूट, जिला सतना पुलिस द्वारा घर में घुसकर चोरी करने वाले 03 आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 लाख 26 हजार रुपए नगद एवं लगभग 4 लाख रुपए के सोने के आभूषण सहित कुल 14 लाख 26 हजार की सामग्री जब्त की  है। दतिया: 12 घंटे में चोरी का खुलासा थाना कोतवाली पुलिस ने मात्र 12 घंटे के भीतर चोरी की घटना का खुलासा करते हुए फरियादी के घर कार्यरत महिला आरोपिया को गिरफ्तार किया। आरोपिया के कब्जे से लगभग 17 लाख रुपए मूल्य के सोने के जेवरात जब्त किए हैं। उज्जैन: लूट गिरोह का भंडाफोड़, 6 लाख रुपए की सामग्री जब्त थाना बिरलाग्राम, नागदा क्षेत्रांतर्गत उज्जैन पुलिस ने चाकू एवं लोहे के पाइप से लूट की वारदात को अंजाम देने वाले 03 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से लगभग 6 लाख रुपए के सोने-चांदी के आभूषण, मोबाइल फोन, हथियार एवं मोटरसाइकिल जप्त की है। मध्यप्रदेश पुलिस अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाते हुए नागरिकों में सुरक्षा एवं विश्वास का वातावरण सुदृढ़ कर रही है। पुलिस की यह प्रतिबद्धता आने वाले समय में भी प्रदेश को सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं अपराधमुक्त बनाए रखने की दिशा में निरंतर जारी रहेगी।

प्रशासनिक ढांचे में बदलाव: नॉर्थ-साउथ ब्लॉक से नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट होंगे विभाग

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साउथ ब्लॉक में अंतिम बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। ये सिर्फ स्थान परिवर्तन का क्षण नहीं है, यह इतिहास और भविष्य के संगम के भी पल हैं। इस परिसर ने गुलामी से आजादी और फिर स्वतंत्र भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है, गढ़ा है। मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से नया प्रधानमंत्री कार्यालय, जिसे अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा, राष्ट्र को समर्पित किया गया है। साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों ने भारत को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखने के लिए किया था। 1947 में भारत को गुलामी से तो मुक्ति मिली, लेकिन इन भवनों को तत्कालीन सरकार की ओर से अपने कार्यों के निष्पादन के लिए बनाए रखा गया। स्वतंत्रता के बाद से ही प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक के इस भवन से कार्य करता रहा है।” उन्होंने कहा कि इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में बनी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले होते देखे हैं। इसकी सीढ़ियों पर जवाहरलाल नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक के पदचिन्ह हैं। इस भवन की सीढ़ियों पर चढ़ते कदमों ने देश को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। उन्होंने कहा, “बीते दशकों में यहां कैबिनेट की बैठकों में, संविधान के आदर्शों, जनता से मिले जनादेश और राष्ट्र की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। यहां भारत की सफलताओं का उत्सव भी मनाया गया, असफलताओं का आंकलन भी हुआ और साथ ही संकटों और चुनौतियों से निपटने के लिए कड़े और बड़े फैसले भी लिए गए।” मीडिया को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के इन कमरों ने विभाजन की विभीषिका भी देखी, युद्ध और आपातकाल की चुनौतियों को भी देखा और शांतिकाल की नीतियों पर भी चिंतन और मनन किया। इन्होंने टाइपराइटर से लेकर डिजिटल गवर्नेंस तक, तकनीक की लंबी छलांग को महसूस किया है। यहां बैठकर अधिकारियों की कई पीढ़ियों ने ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने भारत को आजादी के तुरंत बाद की अनिश्चितता से निकालकर स्थिरता की राह पर आगे बढ़ाया। सबके प्रयासों का परिणाम है कि आर्थिक चुनौतियों और संकटों से निकलकर, आज भारत एक आत्मविश्वासी राष्ट्र बनकर खड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “बीते एक दशक में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में साउथ ब्लॉक राष्ट्र के अनेक ऐतिहासिक निर्णयों का केंद्र रहा। ये स्थान मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस की प्रेरणा स्थली बना। यहां से रिफॉर्म एक्सप्रेस को पूरे देश में प्रोत्साहन मिला है। यहीं से डीबीटी, ‘स्वच्छ भारत अभियान’, गरीब कल्याण से जुड़े अभियान, ‘डिजिटल इंडिया’ और जीएसटी जैसे व्यापक सुधारों को आकार मिला। यहां से ही आर्टिकल-370 की दीवार गिराने और तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने जैसे सामाजिक न्याय के साहसिक और संवेदनशील निर्णय लिए गए। यहीं लिए गए ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘एयर स्ट्राइक’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के निर्णयों के माध्यम से भारत ने अपनी दृढ़ और आत्मविश्वासी सुरक्षा नीति का स्पष्ट संदेश विश्व को दिया।” प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री ने कहा, “आज का भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत आज एक सुरक्षित और सक्षम राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आया है और वैश्विक मंचों पर अपनी स्पष्ट और प्रभावशाली आवाज रख रहा है। आज देश विकसित भविष्य के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके लिए एक आधुनिक, तकनीकी और पर्यावरण के प्रति अनुकूल कार्यालय की आवश्यकता थी। एक ऐसा कार्यक्षेत्र, जो यहां काम करने वाले हर कर्मयोगी की उत्पादकता को बढ़ाए, सेवाभाव के उसके संकल्प को प्रोत्साहित करे।” अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के उ‌द्घाटन के करीब 95 साल के बाद शुक्रवार को भारत सरकार ने इन भवनों को खाली किया है और ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरित हुई है। यह प्रतीकात्मक रूप से गुलामी के अतीत से ‘विकसित भारत’ के भविष्य की ओर बढ़ने की ओर देश का एक और कदम है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में देश में ‘सत्ता भाव’ के बजाय ‘सेवा भाव’ की संस्कृति सशक्त हुई है। आज का ये स्थानांतरण, इन संस्कारों को और मजबूती देगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “शनिवार को कैबिनेट ने यह संकल्प भी लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ का हिस्सा बनाया जाए, जो हमारी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता से पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ये संग्रहालय, हमारी कालातीत और शाश्वत सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाएगा और हमारे गौरवशाली अतीत को समृद्ध भविष्य से जोड़ेगा।”

रोमांचक मुकाबले में स्नेहित ने ओइकावा को चौंकाया, प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर बढ़ाया भारत का मान

चेन्नई स्नेहित सुरवज्जुला ने शुक्रवार को जापान की 13वीं सीड मिजुकी ओइकावा के खिलाफ जीत दर्ज करते हुए मेंस सिंगल्स के प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। राउंड ऑफ 16 में उनका सामना टॉप सीड ओह जुनसुंग से होगा। शुक्रवार को तमिलनाडु फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में हुए मुकाबले में स्नेहित ने 0-2 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए मैच अपने नाम किया। इसके बाद हिम्मत दिखाते हुए अपना तीसरा मैच प्वाइंट 3-2 (9-11, 15-17, 11-4, 11-6, 18-16) से जीतकर राउंड ऑफ 16 में टॉप सीड ओह जुनसुंग के खिलाफ मैच तय किया। यह बताते हुए कि पांचवें गेम के आखिर में उनके दिमाग में क्या चल रहा था, स्नेहित ने कहा, “मैं बस खुद से कह रहा था कि एक बार में एक प्वाइंट पर फोकस करूं और स्कोर के बारे में न सोचूं, क्योंकि मैंने शुरुआती दो मैच प्वाइंट्स पर गलतियां की थीं।” 25 वर्षीय स्नेहित ने कहा कि वह बिना किसी उम्मीद के मैच में उतरे थे, लेकिन पहले दो गेम हारने से उन्हें असल में यह आत्मविश्वास मिला कि वह मुकाबला कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “मैं पहला गेम 9-11 से हार गया था। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं उनके स्तर की बराबरी कर पाऊंगा। फिर मैं दूसरा गेम हार गया, लेकिन इससे मुझे अगला गेम जीतने का आत्मविश्वास मिला।” इससे पहले, साथियान जी. और हरमीत देसाई की अनुभवी मेंस डबल्स जोड़ी ने फ्लोरियन बौरासॉड और एस्टेबन डोर की तीसरी सीडेड फ्रेंच जोड़ी को 3-0 (11-7, 11-9, 11-7) से शिकस्त देकर सेमीफाइनल में जगह बनाई, जहां उनका सामना कोरिया की दूसरी सीडेड जोड़ी लिम जोंगहून और ओह जुनसुंग से होगा। इस बीच, वाइल्ड कार्ड एंट्री पायस जैन और सिंड्रेला दास ने टॉप सीड मानुष शाह और दीया चितले को 3-1 (12-10, 13-11, 10-12, 11-9) से शिकस्त देकर मिक्स्ड डबल्स सेमीफाइनल में जगह बनाई।  

कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में भारत-पाक मैच: टीम इंडिया के रिकॉर्ड और रोचक आंकड़े

कोलंबो ऑफ-फील्ड ड्रामा और राजनीतिक शोर-शराबे के बाद आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप का सबसे बहुप्रतीक्षित मैच आखिरकार तय कार्यक्रम के अनुसार होने जा रहा है. भारत और पाकिस्तान रविवार को कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में आमने-सामने होंगे. क्रिकेटीय कारणों से इस प्रतिद्वंद्विता को लेकर उत्साह अब भी बरकरार है. इस मुकाबले में कई लोग भारत को प्रबल दावेदार मान रहे हैं, क्योंकि इस भिड़ंत में उनका दबदबा रहा है. मौजूदा टी20 विश्व कप में उनका प्रदर्शन भी इस दलील को मजबूत करता है. भारत ने अपने अभियान की शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका पर जीत के साथ की. सूर्यकुमार यादव ने कठिन परिस्थिति में अहम पारी खेलकर टीम को संभाला और जीत दिलाई. इसके बाद भारत ने नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में नामीबिया को 93 रन से हराया. यह टी20 विश्व कप इतिहास में रन के अंतर से भारत की सबसे बड़ी जीत भी रही.  पाकिस्तान का ऐसा रहा है प्रदर्शन दूसरी ओर, पाकिस्तान को नीदरलैंड्स के खिलाफ कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा, जहां फहीम अशरफ की उपयोगी कैमियो पारी ने उन्हें रोमांचक मुकाबले में जीत दिलाई. इसके बाद उन्होंने अमेरिका के खिलाफ अधिक पेशेवर प्रदर्शन करते हुए टूर्नामेंट में लगातार दूसरी जीत दर्ज की. रविवार का मुकाबला हाई-वोल्टेज थ्रिलर होने की उम्मीद है. लगातार जीत के साथ भारत लय में है और मानसिक बढ़त भी रखता है. पिछले दशक में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पाकिस्तान पर उनका दबदबा उन्हें मनोवैज्ञानिक बढ़त देता है. हालांकि, इस बड़े मुकाबले से पहले यह समझना जरूरी है कि भारत को जीत के लिए क्या करना होगा. प्रेमदासा स्टेडियम भारत के लिए अनजाना नहीं है. यहां की परिस्थितियां उन्हें भली-भांति मालूम हैं. कोलंबो में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है? भारत ने कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में शानदार सफलता हासिल की है. 2009 से अब तक यहां खेले गए 15 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत ने 11 जीते और सिर्फ 4 हारे हैं. आईसीसी टी20 विश्व कप 2012 में भारत ने इस मैदान पर पांच में से चार मैच जीते थे, जबकि एकमात्र हार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आई थी. मेजबान श्रीलंका के अलावा केवल ऑस्ट्रेलिया ही इस मैदान पर भारत को हरा सका है. भारत का टी20I रिकॉर्ड (आरपीएस, कोलंबो): मैच – 15 जीत – 11 हार – 4 कोलंबो में कितना स्कोर चाहिए? आर प्रेमदासा स्टेडियम में अक्सर लक्ष्य का पीछा करने वाली टीमों को फायदा मिला है. यहां खेले गए 51 टी20I मैचों में औसत स्कोर 152 रहा है, जबकि 28 बार लक्ष्य का सफल पीछा किया गया है. हालांकि मौजूदा टूर्नामेंट में पीछा करना कठिन साबित हुआ है. वर्तमान टूर्नामेंट में औसत स्कोर 158 रहा है. भारत ने जब-जब यहां पहले बल्लेबाजी करते हुए 150 से अधिक रन बनाए हैं, तब छह में से पांच मैच जीते हैं. ऐसे में 165 या उससे थोड़ा अधिक का स्कोर रविवार को जीत के लिए पर्याप्त हो सकता है. **कोलंबो में भारत का सर्वोच्च स्कोर:** 176/3 बनाम बांग्लादेश (मार्च 2018) **न्यूनतम स्कोर:** 81/8 बनाम श्रीलंका (जुलाई 2021) **औसत स्कोर:** 157 (15 मैचों में) स्पिन से मिलेगी जीत? कोलंबो में टी20I में तेज और स्पिन गेंदबाजों दोनों को सफलता मिली है. पेसरों ने 323 विकेट लिए हैं, जबकि स्पिनरों के नाम 282 विकेट हैं. हाल ही में वनींदु हसरंगा और माहेश थीक्षाना ने आयरलैंड के बल्लेबाजों को रोका, जबकि एडम जाम्पा ने शानदार चार विकेट लिए. तेज गेंदबाजों में जसप्रीत बुमराह की वापसी भारत के लिए बड़ी मजबूती है. वहीं पाकिस्तान के मिस्ट्री स्पिनर उस्मान तारिक को भी भारत के खिलाफ बड़ा हथियार माना जा रहा है. रविवार को मुकाबले का फैसला केवल स्पिन से नहीं होगा. तेज गेंदबाज भी नतीजे में अहम भूमिका निभा सकते हैं.  

डराने की हद पार: रुचि तिवारी को रेप और नग्न परेड की धमकी, जातिगत हमले का आरोप

नई दिल्ली दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूजीसी के सपोर्ट में हुए प्रोटेस्ट के दौरान एक यूट्यूब चैनल की महिला पत्रकार को भीड़ द्वारा घेरकर कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी करने का मामला सामने आया है। इस बीच, पीड़ित महिला पत्रकार रुचि तिवारी ने आज मीडिया से बात करते हुए आपबीती सुनाई।   दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूजीसी के सपोर्ट में हुए प्रोटेस्ट के दौरान यूट्यूब चैनल की एक महिला पत्रकार को भीड़ द्वारा घेरकर कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी करने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर इस घटना के कुछ वीडियो भी अब वायरल रहे हैं। हालांकि, लाइव हिन्दुस्तान इस पूरी घटना की पुष्टि नहीं कर करता। इस बीच, पीड़ित महिला पत्रकार रुचि तिवारी ने आज मीडिया से बात करते हुए आपबीती सुनाई। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण होने के चलते मुझ पर हमला हुआ। उन्होंने पुलिस पर चुपचाप खड़े होकर सबकुछ देखते रहने का भी आरोप लगाया है। पत्रकार रुचि तिवारी ने कहा, “… वीडियो हर जगह है, लोग खुद ही अंदाज़ा लगा सकते हैं कि किसने किसे भड़काया… मैं एक जर्नलिस्ट हूं, जो प्रोटेस्ट कवर करने वहां गई थी। इस बीच, मीडिया वालों में से ही किसी एक ने मेरा ध्यान खींचने के लिए मेरा नाम लिया। मैं उनके पास गई, फिर उन्होंने मेरा पूरा नाम और जाति पूछी। उन्होंने कुछ लोगों को इशारा किया और पूरी भीड़ मेरी तरफ आई और मुझ पर हमला कर दिया, यह वीडियो में साफ देखा जा सकता है। करीब 500 लोगों ने मुझ पर हमला किया। उनके पास बस झूठी बातें और झूठे आरोप हैं।” उन्होंने आगे कहा, ”मेरे आस-पास की लड़कियों ने मेरे कानों में रेप की धमकी दीं क्योंकि मैं ब्राह्मण हूं; “आज तू चल, तेरा नंगा परेड निकलेगा।” उन्होंने यही कहा। मेरे आस-पास के आदमी कह रहे थे कि वे मुझे सबक सिखाएंगे। लड़कियों ने मुझे हाथ और गर्दन से पकड़ा हुआ था। यह हत्या की कोशिश है। मैं बेहोश हो गई थी, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। वे UGC के गुंडे थे, वे स्टूडेंट नहीं हो सकते। मुझ पर मेरी जाति की वजह से हमला हुआ। किसी ने मेरा साथ नहीं दिया, सिर्फ कुछ लॉ फैकल्टी के लोगों ने इंसानियत दिखाई और मैं उनकी मदद से और कुछ महिला पुलिसवालों की मदद से बाहर आ पाई। एफआईआर रजिस्टर हो गई है, मुझे कानून पर भरोसा है। यह घटना करीब आधे घंटे तक चली। वहां मॉब लिंचिंग हुई, मैं किसी तरह बच निकली, यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।” चश्मदीद ने क्या बताया महिला पत्रकार पर हमले के चश्मदीद और स्टूडेंट आकाश पाठक ने कहा, “मेरी राय में, उन्हें स्टूडेंट कहना बहुत बुरी बात होगी, जिस तरह की बदतमीजी उन्होंने दिखाई, जिस तरह से वे जाति के आधार पर जर्नलिस्ट को गाली दे रहे हैं, और जिस तरह से वे ब्राह्मणवाद के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। जिस तरह से उन्होंने एक महिला ब्राह्मण जर्नलिस्ट के साथ बुरा बर्ताव किया है और जैसा माहौल बनाया है—मेरी राय में, वे बिल्कुल भी स्टूडेंट नहीं हैं। UGC को लेकर उन्होंने जो मांगें की हैं, वह सब आप अपनी मर्जी से कर सकते हैं, लेकिन ब्राह्मणवाद के खिलाफ नारे लगाना किसी तरह से गलत है। एफआईआर हो गई है, लेकिन पुलिस प्रशासन कोई एक्शन नहीं ले रहा है। पत्रकारों के साथ इस तरह का बुरा बर्ताव हर दिन हो रहा है। ब्राह्मणों को टारगेट किया जा रहा है। इस तरह की सोच वाले किसी का कभी शोषण नहीं किया जा सकता, प्रशासन कोई एक्शन नहीं ले रहा है और हर कोई उनके सपोर्ट में जा रहा है। पुलिस उन्हें बचा रही है। क्या इस देश में ब्राह्मण होना गुनाह है?” महिला पत्रकार पर हमले को लेकर एबीवीपी-लेफ्ट के बीच जुबानी जंग दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक प्रोटेस्ट के अराजक होने के बाद तनाव बढ़ गया, जिसमें विरोधी स्टूडेंट ग्रुप्स ने एक-दूसरे पर मारपीट और धमकाने का आरोप लगाया, जिसमें एक जर्नलिस्ट के साथ बदसलूकी करने का आरोप भी शामिल है। सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो में आर्ट्स फैकल्टी में गुस्साए स्टूडेंट्स के एक ग्रुप और एक युवती के बीच टकराव दिख रहा है। क्लिप में, एक बड़ी भीड़ को नारे लगाते और युवती को घेरे हुए देखा जा सकता है। माहौल तनावपूर्ण लग रहा है, कई स्टूडेंट्स उसे घेरकर जोर-जोर से नारे लगाते दिख रहे हैं। एएनआई इस पूरी घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने एक बयान में आरोप लगाया कि प्रोटेस्ट के दौरान जर्नलिस्ट पर हमला किया गया था। वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने दावा किया कि उन्होंने जर्नलिस्ट को बचाने की कोशिश की, जब उस पर “राइट-विंग गुंडों” ने हमला किया था। एबीवीपी के क्या आरोप एबीवीपी के बयान में कहा गया, “दिल्ली यूनिवर्सिटी के आर्ट्स फैकल्टी में शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे, यूट्यूब चैनल ब्रेकिंग ओपिनियन से जुड़ी एक महिला पत्रकार पर कथित तौर पर हमला किया गया। यह घटना एक बार फिर लेफ्ट से जुड़े स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन के हिंसक चरित्र को सामने लाती है, जो वैसे तो देशभर की यूनिवर्सिटीज में बोलने की आजादी का सपोर्ट करने का दावा करते हैं।” एबीवीपी के दिल्ली स्टेट सेक्रेटरी सार्थक शर्मा ने कहा, “मीडिया, जिसे डेमोक्रेसी का चौथा पिलर माना जाता है, पर हमला बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेफ्ट-विंग पॉलिटिक्स का इतिहास हिंसा को बढ़ावा देने से जुड़ा रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने ऐसी सोच को पूरी तरह से नकार दिया है। अपनी घटती अहमियत से निराश होकर ये ग्रुप मीडिया में बने रहने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। एक महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी करने की कायरतापूर्ण हरकत उनके असली चरित्र को दिखाती है।” 

‘वंदे मातरम्’ विवाद: उज्जैन के इमाम की मुस्लिम अभिभावकों से स्कूल बदलने की अपील

उज्जैन वंदे मातरम् वाले स्कूलों से निकाल ले बच्चे; मुसलमानों से उज्जैन ईमाम की अपील केंद्र सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में वंदे मातरम के सभी 6 छंदों का गायन अनिवार्य करने का निर्णय किया है। इसको लेकर गृह मंत्रालय ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों को खड़ा होना जरूरी होगा। इस फैसले का उज्जैन के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कड़ा विरोध किया है। उनकी दलील है कि वंदे मातरम् इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है क्योंकि इसमें मातृभूमि की पूजा की बात की गई है। उन्होंने मुस्लिमों से अपने बच्चों को उन स्कूलों से निकालने की अपील की है जहां वंदे मातरम् को अनिवार्य किया जा रहा है। इस्लाम नहीं देता इजाजत उज्जैन के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कहा कि भारत में हर धर्म और मजहब के लोग रहते हैं। हम किसी को यह नहीं कह सकते हैं कि आप किसी एक खुदा को मानें… हम यह भी किसी से नहीं कह सकते हैं कि आप कई खुदा को मानें। हिन्दुस्तान एक ऐसा चमन है जहां हर तरह के फूल को रखा गया है। यही इसकी ब्यूटी है। वंदे मातरम् में साफ लिखा गया है कि हम इस धरती की पूजा करते हैं। इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता है। इस्लाम का आधार ही एकेश्वरवाद है। हम तो पैगम्बर मोहम्मद साहब को भी नहीं पूजते मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने आगे कहा कि हम खुदा के साथ किसी को शामिल नहीं कर सकते हैं। हम ना तो हिन्दुस्तान की जमीन को पूज सकते हैं ना ही मक्का और मदीना की जमीन को पूज सकते हैं। हम पैगम्बर मोहम्मद साहब को भी पूजते नहीं हैं। हम उनकी तालीम पर चलते हैं। इस्लाम एक ही ईश्वर पर आधारित है। हम इसे छोड़ नहीं सकते हैं। हम हुकूमत से यह गुजारिश करते हैं कि आगे से इस तरह का कोई प्रोग्राम ना चलाए जो किसी धर्म को चोट पहुंचाते हों। जिन स्कूलों में वंदे मातरम् वहां से बच्चों को निकाल लें मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार इस फैसले को वापस ले। हम अपने बच्चों को ऐसी किसी भी संस्था में नहीं भेज सकते जहां उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ होता हो। हमारे यहां हिन्दुस्तान की पूजा का कोई जिक्र नहीं है। इस्लाम तो इसकी बिल्कुल इजाजत नहीं देता है। हम कहेंगे कि जिन स्कूलों में वंदे मातरम् को अनिवार्य किया जा रहा है, मुसलमान वहां से सभी अपने बच्चों को निकाल लें। कानून नहीं मानने वालों को देश में रहने की कोई जरूरत नहीं मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी के बयान पर सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। हिन्दू संगठनों ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। संतों ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है। महामंडलेश्वर अतुलेशनन्द ने कहा कि भारत में रहना है तो वंदे मातरम गाना होगा। यह भारत भूमि है और कानून सबके लिए एक है। इस कानून को जो नहीं मानता या नहीं स्वीकार करता है उसको इस देश में रहने की कोई जरूरत नहीं है। इस देश में रहने वाले कुछ लोग हमारे संविधान को मानते नहीं हैं। ऐसे लोगों के लिए बांग्लादेश या पाकिस्तान के रास्ते खोल देने चाहिए।

सुरक्षा के साथ संवेदनशीलता का संदेश: CRPF 65वीं बटालियन के जनविश्वास अभियान ने ग्रामीणों का जीता भरोसा

गरियाबंद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ विकास और विश्वास की मजबूत नींव रखने की दिशा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 65वीं बटालियन लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही है। इसी कड़ी में ग्राम छिंदोला स्थित डी/65 बीएन सीआरपीएफ कैंप में सिविक एक्शन कार्यक्रम का प्रभावशाली आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी ने इसे जनविश्वास अभियान का स्वरूप दे दिया। बता दें कि यह आयोजन बटालियन कमांडेंट राधे श्याम सिंह के मार्गदर्शन में तथा उप कमांडेंट सुधेंद्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत दवनई सहित आसपास के गांवों से करीब 250 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे स्कूल बैग, कॉपी, पेन, पेंसिल बॉक्स और ज्योमेट्री बॉक्स वितरित किए गए। वहीं युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए क्रिकेट किट, वॉलीबॉल, फुटबॉल और बैडमिंटन रैकेट प्रदान किए गए, ताकि वे खेलों के माध्यम से सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकें। ग्रामीण परिवारों को साड़ी, कंबल, मच्छरदानी, सोलर लैंप, कृषि उपकरण तथा दैनिक उपयोग की सामग्री देकर उनकी जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया गया। उप कमांडेंट सुधेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में ग्रामीणों से अपील की कि वे नक्सलियों की भ्रामक और विध्वंसक गतिविधियों से सावधान रहें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा बलों को दें। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास और शांति स्थापना के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि सिविक एक्शन कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सामग्री वितरण नहीं, बल्कि सुरक्षा बल और स्थानीय जनता के बीच विश्वास, सहयोग और संवाद की मजबूत कड़ी बनाना है। ऐसे कार्यक्रमों से ग्रामीणों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित होते हैं। कार्यक्रम में सहायक कमांडेंट रामानंद प्रसाद, निरीक्षक पीयूष कुमार सिंह, निरीक्षक हरेंद्र कुमार सिंह, सरपंच रश्मिला बाई सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल उनकी जरूरतों को पूरा करते हैं, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी दिलाते हैं कि सुरक्षा बल उनके साथ खड़े हैं। क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में सीआरपीएफ की यह पहल एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखी जा रही है।

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में गूंजा रुबियो का बयान: ‘अमेरिका यूरोप का चाइल्ड’, पश्चिमी नीतियों पर कड़ा प्रहार

म्यूनिख (जर्मनी) यूएस के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अमेरिका को यूरोप का ‘चाइल्ड’ यानी ‘संतान’ बताया है। उन्होंने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के मंच से उस इतिहास की बात की जिसे यूएस और यूरोप साझा करते हैं। दावा किया कि उनका देश यूरोप के साथ मिलकर खुशहाली का नया रास्ता तय करना चाहता है। उनके भाषण का सभागार में मौजूद विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर और तालियां बजाकर स्वागत किया। बेहद सौम्य और साधारण अंदाज में उन्होंने ट्रांस-अटलांटिक युग के अंत का लक्ष्य न रखने की बात कही। रुबियो ने कहा, “ट्रांसअटलांटिक युग का अंत न तो हमारा लक्ष्य है और न ही हमारी इच्छा है। हम अमेरिकियों का घर भले ही वेस्टर्न हेमिस्फेयर में हो, लेकिन हम हमेशा यूरोप की संतान ही रहेंगे।” इसके बाद उन्होंने यूरोप-यूएस के बॉन्ड की बात की। साझा इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे यूएस की कहानी एक इतालवी एक्सप्लोरर से शुरू हुई और पहली कॉलोनियां अंग्रेजों ने बनाईं। फिर स्कॉटिश, आयरिश और जर्मन किसानों ने उन्हें आकार दिया। रुबियो के मुताबिक, “हमारा इतिहास और हमारी किस्मत दोनों हमेशा एक-दूसरे से जुड़े रहेंगे। अमेरिका खुशहाली की एक नई सदी के लिए रास्ता बना रहा है, लेकिन वह ऐसा यूरोप के साथ करना चाहता है। हम नहीं चाहते कि हमारे सहयोगी और साथी शर्म की जंजीरों में जकड़े हों।” अमेरिकी विदेश मंत्री की मानें तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुआई में संयुक्त राज्य अमेरिका ग्लोबल “रिन्यूअल और रेस्टोरेशन” को लीड करना चाहता है। उन्होंने म्यूकहा कि यूनाइटेड स्टेट्स “एक ऐसे भविष्य के विजन से आगे बढ़ेगा जो उतना ही गौरवान्वित करने वाला होगा, उतना ही स्वायत्त और जरूरी होगा जितना हमारी सभ्यता का अतीत रहा है।” उन्होंने कहा, “और अगर जरूरत पड़ी, तो हम इसे अकेले करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह हमारी पसंद और उम्मीद है कि हम इसे  आपके साथ, यूरोप में हमारे दोस्तों के साथ मिलकर करेंगे।” रुबियो ने कहा, “हम चाहते हैं कि यूरोप मजबूत हो। हमारा मानना ​​है कि यूरोप को जिंदा रहना चाहिए।” रुबियो ने डीइंडस्ट्रियलाइजेशन (उद्योग धंधों को बंद करना) और बड़े पैमाने पर माइग्रेशन को यूरोप के लिए खतरनाक बताया। उनके मुताबिक डीइंडस्ट्रियलाइजेशन “आवश्यक नहीं था,” और यह युद्ध के बाद के “भ्रम” का एक “बेवकूफी भरा” नतीजा था। उन्होंने माइग्रेशन को हल्के में न लेने की सलाह भी दी। बोले, “बड़े पैमाने पर माइग्रेशन कोई मामूली चिंता नहीं है, था भी नहीं,” क्योंकि वह चेतावनी देते हैं कि यह “पूरे पश्चिम में समाजों को बदल रहा है और अस्थिर कर रहा है। यह हमारे समाज के ताने-बाने और हमारी सभ्यता के बने रहने के लिए एक बड़ा खतरा है।” म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन हर साल फरवरी में जर्मनी के म्यूनिख शहर में आयोजित किया जाता है। इसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, रक्षा मंत्री और सैन्य विशेषज्ञ जुटते हैं और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध और कूटनीति पर खुलकर चर्चा करते हैं।

IND vs PAK: 8 मैचों में किसका पलड़ा भारी? कल फिर पाकिस्तान की बढ़ेगी मुश्किलें

नई दिल्ली T20 World Cup 2026 का फाइनल से भी बड़ा मैच रविवार 15 फरवरी को कोलंबो में खेला जाना है, जो कि इंडिया वर्सेस पाकिस्तान मैच है। हर कोई यही बात कह रहा है कि ये क्रिकेट की सबसे बड़ी राइवलरी है, लेकिन आंकड़ों पर गौर करेंगे तो आप पाएंगे कि इसमें राइवलरी नाम का कुछ है ही नहीं। टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास के आंकड़ों को उठाया जाए तो आप देखेंगे कि पाकिस्तान भारत के आगे टिकता ही नहीं है। टीम इंडिया और पाकिस्तान के बीच टी20 विश्व कप के इतिहास में अब तक 8 मुकाबले खेले गए हैं। इन 8 मैचों में से सिर्फ एक बार पाकिस्तान को जीत मिली है। 7 बार भारतीय टीम ने मुकाबला जीता है। इसके अलावा 8 में से 3 मैचों में प्लेयर ऑफ द मैच एक ही खिलाड़ी रहा है, जो इस बार टीम का हिस्सा नहीं है, लेकिन उसके आगे पाकिस्तान के गेंदबाजों को एक नहीं चलती थी। ये थे क्रिकेट के किंग विराट कोहली। हालांकि, एक बार ऐसा भी हुआ है, जब पाकिस्तान का एक खिलाड़ी प्लेयर ऑफ द मैच रहा, लेकिन उनकी टीम को भारत से हार का सामना करना पड़ा। ऐसा हुआ था साल 2007 के टी20 विश्व कप के ग्रुप फेज के मैच में, जब मोहम्मद आसिफ को 4 विकेट लेने के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था। ये मैच टाई रहा था और बॉल आउट के जरिए मैच का नतीजा निकला था, जिसमें भारत को जीत मिली थी। पाकिस्तान का एक और खिलाड़ी इंडिया वर्सेस पाकिस्तान टी20 विश्व कप मैच में प्लेयर ऑफ द मैच रहा है, जो कि शाहीन शाह अफरीदी हैं। 2021 के टी20 विश्व कप के लीग फेज के मैच में शाहीन ने 4 ओवर में 31 रन देकर 3 विकेट निकाले थे। इसमें केएल राहुल, रोहित शर्मा और विराट कोहली का विकेट शामिल था। इसके अलावा 6 मैचों में भारतीय खिलाड़ी प्लेयर ऑफ द मैच रहे हैं। उनमें भी 3 बार विराट कोहली ने ये खिताब जीता है। विराट कोहली ने 2012, 2016 और 2022 के टी20 विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड जीता है। 2007 के टी20 विश्व कप फाइनल में इरफान पठान प्लेयर ऑफ द मैच थे। 2014 में अमित मिश्रा ने ये अवॉर्ड अपने नाम किया था। 2024 में जसप्रीत बुमराह ने प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड हासिल किया था। एशिया कप 2025 में भारत ने लगातार तीन मैचों में पाकिस्तान को हराया था। ऐसे में पाकिस्तान का मनोबल गिरा हुआ होगा।

सर्च ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को सफलता, नक्सलियों के छिपाए गए हथियार व IED बरामद

कांकेर कांकेर जिले में सुरक्षा बल के जवानों को बड़ी सफलता हाथ लगी है. सर्चिंग में निकले जवानों को कांकेर नारायण सीमावर्ती क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा डंप किया गया बड़ी मात्रा में हथियार और आईईडी बरामद हुआ है. सुरक्षा बलों की कार्यवाही से नक्सलियों द्वारा भविष्य में घटित की जा सकने वाली बड़ी नक्सली घटना टल गई है. बस्तर रेंज में नक्सलियों को समाप्त करने के लिए सुरक्षाबलों का अभियान लगातार जारी है. आईजी पी सुन्दराज के निर्देशन और एसपी कांकेर निखिल राखेचा के मार्गदर्शन में पुलिस बल के द्वारा नक्सल उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है. अभियान में बीएसएफ डीआईजी ओम प्रकाश प्रभारी राघवेंद्र सिंह सेनानी 94 वीं वाहिनीं बीएसएफ का भी सहयोग मिल रहा है. नक्सल विरोधी अभियान के तहत डीआरजी/ बीएसएफ की संयुक्त टीम सर्चिंग में निकली थी. 13 फरवरी को कांकेर– नारायणपुर सीमावर्ती क्षेत्र में थाना छोटेबेठिया क्षेत्रांतर्गत ग्राम बीनागुंडा के पास नक्सलियों के द्वारा डंप किया गया हथियार, विस्फोटक,नक्सल साहित्य और अन्य सामग्री मिली. सामग्रियों को जब्त करने के साथ थाना छोटेबेठिया में वैधानिक कार्यवाही की जा रही है. जब्त सामग्री बीजीएल लांचर-2, 12 बोर- 2, एयरगन- 1, डायरेक्शन आईईडी-3, टिफिन आईईडी लगभग 5 किग्रा-1, बीजीएल बम-30, 12 बोर राउण्ड -26, बारुद प्लास्टिक पैकेट मे लगभग 2 किग्रा, मल्टी मीटर-1, पटाखा-12 पैकेट, बिजली वायर-2 बंडल, पोच-2, स्पिलंटर – 1 पैकेट

गुमनामी में खोया रामायण का अंगद: मुस्लिम कलाकार, जिसके आगे लंका के बलवान भी हुए बेबस

मुंबई रामानंद सागर का पौराणिक धारावाहिक ‘रामायण’ जब कोविड में दोबारा टीवी पर आया तो इसने हलचल मचा दी। इसके पुनः प्रसारण के बाद से ही यह धारावाहिक कई कारणों से खबरों में आ गया। हाई टीआरपी से लेकर महिला सशक्तिकरण, शारीरिक शक्ति और कई सारी चीजें, सोशल मीडिया पर ढेर सारे मीम्स शेयर किए गए। 1980 और 1990 के दशक में दूरदर्शन सबसे बड़े टीवी चैनलों में से एक था। यह चैनल अपने पौराणिक शोज के लिए काफी प्रसिद्ध हुआ – रामानंद सागर की रामायण उनमें से एक थी, जिसे जनता ने खूब पसंद किया। उस समय, इसके लीड एक्टर्स बहुत फेमस थे। हालांकि, समय बीतने और नई पीढ़ियों के आने के साथ, वे धीरे-धीरे गुमनामी में खो गए। इन्हीं में से एक थे अंगद का किरदार निभाने वाले एक्टर बशीर खान। आज हम एक ऐसे अभिनेता की बात करेंगे, जिन्होंने रामानंद सागर की मशहूर टीवी सीरियल में अंगद का किरदार निभाया था। उनका नाम बशीर खान है। सीरियल में बाली और तारा के बेटे अंगद के दमदार किरदार से उन्हें खूब प्रसिद्धि मिली। अंगद के रूप में उनका एक सीन आज भी दर्शकों को याद है, जब वे रावण के दरबार में मजबूती से खड़े हो गए और किसी को भी उन्हें हिलाने की हिम्मत नहीं थी। पूरा सीन उनके दृढ़ संकल्प, शक्ति और व्यक्तित्व को दिखाता है। वीरेंद्र सहवाग ने की थी तारीफ कोविड के वक्त भी एक एपिसोड में अंगद का वह सीन दिखाया गया जिसमें रावण उनका पैर हिलाने की कोशिश करता है लेकिन असफल हो जाता है। इस सीन ने लोगों को इस किरदार की खूब तारीफ करने पर मजबूर कर दिया। यहां तक कि पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने भी ये फोटो शेयर करते हुए कहा था कि यहीं से उन्हें अपनी बल्लेबाजी की प्रेरणा मिली। उन्होंने लिखा, ‘तो यहीं से मुझे अपनी बल्लेबाजी की प्रेरणा मिली 🙂 पैर हिलाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। #अंगद जी रॉक्स’ ‘महाभारत’ और ‘श्री कृष्ण’ में भी किया काम ‘रामायण’ के अलावा, बशीर खान ने बी.आर. चोपड़ा की ‘महाभारत’ (1988) और ‘श्री कृष्ण’ (1993) जैसे क्लासिक पौराणिक शोज में भी अभिनय किया। उनकी एक्टिंग ने भारतीय टेलीविजन पर अमिट छाप छोड़ी और दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। बशीर खान गुमनामी में खोए बशीर खान ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत रामानंद सागर के उस समय के फेमस शो ‘विक्रम बेताल’ से की थी। हालांकि, उन्हें असली पहचान रामायण में अंगद के किरदार को निभाने के बाद मिली, जिसे आज भी कई लोग इस क्लासिक शो में उनके योगदान के लिए याद करते हैं। लेकिन आज वो गुमनामी में खो गए हैं और अब उन्हें रोल्स ऑफर नहीं होते हैं।

बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में गौ कथा का दिव्य समापन, धर्म व गौ संरक्षण का लिया संकल्प

भोपाल . बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में स्थित  रेवासा धाम एवं  वृंदावन धाम के पावन सानिध्य में मलूक पीठाधीश्वर परम पूज्य  राजेंद्रदास जी महाराज द्वारा आयोजित गौ कथा एवं गौ आधारित प्राकृतिक खेती विषयक दिव्य कथा का तीसरा एवं अंतिम दिवस अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ कथा श्रवण किया। महाराज  ने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पृथ्वी सात स्तंभों पर आधारित है। प्रथम स्तंभ गौ माता हैं, द्वितीय ब्राह्मण, तृतीय वेद, चतुर्थ सती-सावित्री पतिवृता नारियां, पंचम सत्यवादी पुरुष, षष्ठम लोभरहित पुरुष और सप्तम दानशील पुरुष। इन सातों तत्वों के संरक्षण से ही समाज और सृष्टि का संतुलन बना रहता है। चित्रकूट के संत शिरोमणि संकादिक महाराज भी गोकथा में शामिल हुए। मलूक पीठाधीश्वर  राजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज की उपस्थिति में बसामन मामा गौधाम परिसर में ऋषिकुलम आवास गृह का भूमिपूजन किया एवं पीपल का पौधा रोपण किया। महाराज  ने कहा कि युग निर्माता ब्राह्मण होता है। जो संपूर्ण समाज की पीड़ा को अनुभव करे, वही सच्चा ब्राह्मण है। धर्माचरण से ही अर्थ और काम रूपी पुरुषार्थ की सिद्धि संभव है। जब अर्थ की प्राप्ति धर्म के अनुशासन और नियंत्रण में होती है, तब वह अर्थ अनर्थ का कारण नहीं बनता, बल्कि लोक कल्याण का साधन बनता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपवित्र धन कभी पवित्र कार्यों में नहीं लगता और जो धन धर्मकार्य में समर्पित होता है, वह स्वयं पवित्र हो जाता है। उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि हम सबके लिए यह अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि पूज्य  राजेंद्रदास जी महाराज के मुखारविंद से अमृतवाणी श्रवण का अवसर प्राप्त हुआ। एक ओर बसामन मामा की पुण्यभूमि, जहाँ दस हजार गौ माताओं के संरक्षण एवं संवर्धन का विशाल प्रकल्प संचालित है, और दूसरी ओर पूज्य महाराज  का दिव्य प्रवचन यह संगम सचमुच त्रिवेणी के समान है, जो दीर्घकाल तक समाज का कल्याण करता रहेगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि गौ माता का सम्मान ही मानवता का सम्मान है। यदि गौ माता का अपमान होगा तो मानव जाति का कल्याण संभव नहीं। उन्होंने कहा कि महाराज  के प्रवचनों से उन्हें गौ संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य में और अधिक ऊर्जा एवं संकल्प प्राप्त हुआ है। उन्होंने भावुकता से कहा कि कभी-कभी जब वे किसी कठिन कार्य का दायित्व लेते हैं और वह सहज ही पूर्ण हो जाता है, तो उन्हें अनुभव होता है कि यह सब गौ माता की कृपा और उनकी प्रसन्नता का ही परिणाम है। कार्यक्रम का समापन भक्ति, भाव और संकल्प के साथ हुआ, जिसमें गौ सेवा, धर्माचरण और समाज कल्याण के लिए कार्य करने का संदेश प्रमुख रहा। कथा समापन के बाद बसामन मामा में विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। कथा के समापन दिवस पर सांसद  जनार्दन मिश्र, विधायक सिरमौर  दिव्यराज सिंह, विधायक मनगवां इंजी. नरेन्द्र प्रजापति, विधायक सिहावल  विश्वामित्र पाठक, पूर्व मंत्री  पुष्पराज सिंह, पूर्व विधायक  केपी त्रिपाठी और बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री ने शिव बाबा रथयात्रा का किया शुभारंभ महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर प्रजापिता ब्राम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा रीवा में शिव बाबा रथयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने प्रजापिता ब्राम्हकुमारी विश्वविद्यालय आश्रम से आरंभ हुई। शिव बाबा रथयात्रा को हरी झण्डी दिखाई। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि भगवान शिव संहार से साथ-साथ कल्याण के देवता हैं। भक्तों की भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होने वाले भगवान शिव कालों के महाकाल हैं। प्रजापिता ब्राम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा शिव चेतना को जगाने के लिए किये जाने वाले प्रयास सराहनीय हैं। इस संस्थान ने सामाजिक क्षेत्र में भी बढ़चढ़ कर योगदान दिया है। इस अवसर पर प्रजापिता ब्राम्हकुमारी संस्थान द्वारा उप मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।  

CM का बड़ा ऐलान- केन-बेतवा लिंक से 300 गांवों को मिलेगा पानी

दमोह मध्य प्रदेश के दमोह जिले के नोहटा में आयोजित नोहलेश्वर महोत्सव और किसान सम्मेलन के मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दमोह जिले के लिए विकास योजनाओं की झड़ी लगा दी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक प्रक्षेत्र, सिंचाई परियोजनाओं और पर्यटन विस्तार से जिले के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, सूखे खेत को पानी मिल जाए तो फसल सोने जैसी हो जाती है और केन-बेतवा लिंक परियोजना दमोह की तस्वीर बदल देगी। चीतों की संख्या 35 हुई सीएम ने बताया कि प्रदेश में चीतों का पुनर्स्थापन देश के लिए उदाहरण बना है। श्योपुर के उद्यान में लाए गए चीतों की संख्या अब बढ़कर 35 हो चुकी है और इसी वर्ष जून से पहले नौरादेही अभयारण्य में भी चीते छोड़े जाएंगे। इससे दमोह क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए घर ठहराव योजना के तहत अनुदान भी दिया जा रहा है। 600 करोड़ की घोषणा सिंचाई के मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने व्यारमा नदी से पानी लिफ्ट कर बांदकपुर-सेमरखो जलाशय की क्षमता बढ़ाने और दमोह विधानसभा के 33 गांवों की 14 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा देने के लिए 600 करोड़ रुपये की घोषणा की। साथ ही राजनगर तालाब, सीतानगर और सतधरू बांध पर पर्यटन गतिविधियां तथा जल क्रीड़ा केंद्र विकसित किए जाएंगे। एक नजर में घोषणाएं-:     नौरादेही अभयारण्य में चीता पुनर्स्थापन     गीता भवन निर्माण के लिए 2 करोड़     600 करोड़ की लिफ्ट सिंचाई योजना     नवीन जिला जेल के लिए 70 करोड़     तेंदूखेड़ा और हटा में खेल स्टेडियम     राजनगर तालाब व बांधों पर पर्यटन और बोट क्लब     नोहटा को नगर परिषद बनाने पर परीक्षण     व्यारमा नदी पर जल क्रीड़ा केंद्र

शंकराचार्य विवाद गरमाया: अविमुक्तेश्वरानंद बोले—योगी होकर मुख्यमंत्री रहना कैसे संभव?

वाराणसी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि शंकराचार्य की पहचान राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं होती। सवाल यह है कि अगर आप योगी हैं, तो मुख्यमंत्री  कैसे रह सकते हैं? शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच बयानबाजी को लेकर सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। इस बयान के बाद शंकराचार्य ने पलटवार करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र या सरकारी मान्यता से तय नहीं होती। उन्होने कहा कि जो योगी बन गया, उसे राजपाट से दूर रहना चाहिए। राजा योगी बन सकता है, लेकिन योगी फिर से राजा नहीं बनता। तो सवाल यह है कि अगर आप योगी हैं, विरक्त हैं, तो मुख्यमंत्री सत्ता स्वीकार कैसे कर रहे हैं? ‘कोई सीएम शंकराचार्य नियुक्त नहीं करेगा’ एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सपा ने शंकराचार्य को मारा था। आप भी मार चुके हो। मतलब सपा ने जिसे मारा, उसे हम भी मार सकते हैं। अगर यही परिभाषा है, तो सपा से अलग कैसे हो सकते हो? जो अहंकार 2015 में अखिलेश के माथे पर चढ़ा था, वही अहंकार चढ़ गया है। अखिलेश तो बर्बाद हो गए। अब इनका देखिएगा। सनातन में ऐसी कोई परंपरा नहीं कि कोई मुख्यमंत्री या सरकार प्रमाणपत्र देकर शंकराचार्य नियुक्त करे। उन्होने कहा कि सनातन धर्म की परंपराएं सदियों पुरानी हैं और इनमें धार्मिक पदों का निर्धारण आध्यात्मिक परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर होता है। उन्होंने कहा कि सरकार या कोई राजनीतिक दल यह तय नहीं कर सकता कि कौन शंकराचार्य होगा या नहीं। सीएम योगी ने क्या कहा था? शंकराचार्य विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता और कानून से ऊपर कोई नहीं है, यहां तक कि मुख्यमंत्री भी नहीं। योगी ने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है और इसकी अपनी परंपराएं व नियम हैं, जिनका पालन जरूरी है। उन्होने आरोप लगाया कि माघ मेले में जिस मुद्दे को लेकर विवाद बनाया गया, वह वास्तविक नहीं था बल्कि जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या पर साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था बनाई थी और किसी को भी नियम तोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए पूछा कि अगर संबंधित व्यक्ति शंकराचार्य थे तो पूर्व में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई। ‘गेरुआ वस्त्र पहनने से कोई योगी नहीं बन जाता’ वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि केवल गेरुआ वस्त्र पहनने या कान छिदवाने से कोई योगी नहीं बन जाता और संतों का सम्मान होना चाहिए। इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।  

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