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अजमेर शरीफ के दीवान का कड़ा बयान: खामेनेई की मौत पर बोले- हमारा खानदान सिर नहीं झुकाता

नई दिल्ली ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजराइल के हवाई हमले में हुई मौत के बाद भारत के शिया समुदाय में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। एक दिन पहले ही कश्मीर से लेकर कर्नाटक और लखनऊ तक लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। इस मसले पर मुस्लिम स्कॉलर्स और उलेमाओं के तीखे बयान भी सामने आए हैं। इसी मसले पर अजमेर शरीफ दरगाह के चीफ सैयद जैनुल आबेदीन का कड़ा बयान सामने आया है। यह जंग नहीं डिक्टेटरशिप अजमेर शरीफ दरगाह के चीफ सैयद जैनुल आबेदीन का कहना है कि ईरान और इजराइल के बीच जो हो रहा है उसको जंग नहीं कहा जा सकता है। इसे डिक्टेटरशिप कहा जा सकता है। अमेरिका अपने फायदे के लिए दुनिया के नेताओं को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है। वह अलग-अलग मुल्कों में संपत्तियों को कैप्चर कर रहा है। अमेरिका इन मुल्कों के खनिजों पर कब्जा जमाना चाहता है। मौजूदा वक्त में अमेरिका की तानाशाही चल रही है। हसनी हुसैनी खानदान ने गर्दन नहीं झुकाई सैयद जैनुल आबेदीन ने कहा कि आयतुल्लाह अली खामेनेई साहब पर हुए हमले की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए। मिटिंग के दौरान हुए हमले में आयतुल्लाह अली खामेनेई समेत मारे गए तमाम टॉप लीडर्स को शहीद का दर्जा मिलता है। आयतुल्लाह अली खामेनेई साहब पैगंबर मोहम्मद साहब के खानदान से हैं। ये लोग हसनी और हुसैनी हैं। इस खानदान के लोगों ने कभी यजीदियों के सामने गर्दन नहीं झुकाई। शिया आवाम के रहनुमा थे खामेनेई सैयद जैनुल आबेदीन ने आगे कहा- अमेरिका और इस्राइल यजीदी कौम हैं। हुजूर ने अपने संदेश में ही साफ कर दिया था कि यजीदियों के साथ कैसा सलूक करना है। आयतुल्लाह अली खामेनेई केवल ईरान के सर्वोच्च नेता नहीं थे। वह पूरी दुनिया की इस्लामिक शिया आवाम के रहनुमा थे। पूरी दुनिया में जो पैनिक देखा जा रहा है इसके कुसूरवार अमेरिका और इस्राइल हैं। मेरा सवाल यह कि क्या यूएन का चार्टर्ड इसकी इजाजत देता है। भारत सरकार से की अपील सैयद जैनुल आबेदीन ने कहा कि ईरान और भारत के काफी जमाने से ताल्लुकात रहे हैं। मैं भारत सरकार से गुजारिश करूंगा कि इस पैनिक को खत्म कराने के लिए अपने पॉवर का इस्तेमाल करते हुए एक पहल करे। भारत के सूफी संतों ने जो अमन का पैगाम पूरी दुनिया को दिया है उसका अमल कराने की कोशिश की जानी चाहिए। इन मुल्कों के कारण जब से दुनिया ने अमन का पैगाम भुला दिया है तब से अशांति देखी जा रही है।

वेस्टइंडीज पर जीत के बाद बुमराह बोले—यह रहा टर्निंग पॉइंट, संजू सैमसन पर चुप्पी

नई दिल्ली संजू सैमसन की यागदार पारी के दम पर भारत ने वेस्टइंडीज को पांच विकेट से हराकर सेमीफाइनल का टिकट कटाया। वेस्टइंडीज ने ईडन गार्डन्स में 196 रनों का टारगेट दिया था, जिसे भारत ने 19.2 ओवर में चेज किया। ओपनर सैमसन ने आखिरी सुपर-8 मैच में 50 गेंदों में नाबाद 97 रन बनाए। उन्होंने 12 चौके और चार छक्के लगाए। उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। हालांकि, भारत के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह का मानना है कि मैच का टर्निंग पॉइंट सैमसन की पारी नहीं बल्कि शिवम दुबे के दो चौके थे। दुबे ने चार गेंदों में नाबाद 8 रन बनाए। बता दें कि भारत की टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड से भिड़ंत होगी। यह मैच पांच मार्च को मुंबई के मैदान पर आयोजित होगा। ‘दो चौकों की कोई अहमियत नहीं लेकिन…’ बुमराह ने वेस्टइंडीज के खिलाफ प्रभावी गेंदबाजी की। उन्होंने चार ओवर के स्पेल में 36 रन देकर दो अहम विकेट चटकाए। मैच के बाद बुमराह से जब आईसीसी से बातचीत के दौरान टर्निंग पॉइंट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ”दुबे ने जो दो चौके लगाए। उनकी भले ही क्रिकेट बुक्स और आंकड़ों में कोई अहमियत नहीं लेकिन जो लोग वाकई क्रिकेट जानते हैं, उनकी नजर में अहमियत है। उन दो चौकों से आखिरी ओवर में हमारे ऊपर से प्रेशर कम हुआ कभी-कभी आखिरी ओवर में 8-9 रन भी मुश्किल खड़ी कर सकते हैं।” हार्दिक पांड्या (17) के आउट होने के बाद बैटिंग करने आए दुबे ने शमार जोसेफ द्वारा डाले गए 19वें ओवर की तीसरी और पांचवी गेंद को बाउंड्री के पार भेजा था। ऐसे में भारत को 20वें ओवर में महज 7 रनों की जरूरत थी। वेस्टइंडीज ने आखिरी ओवर में रोमारियो शेफर्ड को गेंद थमाई। सैमसन ने पहली गेंद पर छक्का और दूसरी पर चौका लगाकर भारत को जीत की दहलीज पार कराई। कोच गौतम गंभीर ने भी दुबे की तारीफ की बुमराह के अलावा हेड कोच गौतम गंभीर ने भी दुबे के दो चौकों की अहमियत का जिक्र किया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”मुझे खुशी है कि आप सभी के योगदान के बारे में बात कर रहे हैं क्योंकि कई वर्षों से हम केवल कुछ विशेष योगदानों के बारे में ही बात करते रहे हैं। यह एक टीम गेम है और यह हमेशा टीम गेम ही रहेगा। मेरे लिए शिवम के दो चौके भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने संजू के 97 रन, क्योंकि अगर उसने वे दो चौके नहीं लगाए होते तो आप उस (97 रन की पारी) के बारे में बात भी नहीं करते।” उन्होंने कहा, ”’बड़ा योगदान सुर्खियां बटोरता है, लेकिन छोटा योगदान भी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वह टीम को जीत दिलाने में मदद कर सकता है, उसे लक्ष्य तक पहुंचा सकता है। इसीलिए मैं कहता हूं कि जब तक मैं इस पद पर हूं, हमारी आगे भी यही नीति रहेगी।”

देसंविवि में आयोजित उत्सव-26 के अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम की धूम, विद्यार्थियों ने दिया संदेश

हरिद्वार देवसंस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज में तीन दिवसीय उत्सव-26 के अंतिम दिन आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं ने नृत्य, नाटक, संगीत और समूह प्रस्तुति के माध्यम से सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को प्रभावी ढंग से मंचित किया। विद्यार्थियों ने बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण संकट पर आधारित नाट्य प्रस्तुति देकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने की अपील की। इसके साथ ही भ्रष्टाचार, सामाजिक कुरीतियों और नैतिक मूल्यों के ह्रास जैसे विषयों पर भी सारगर्भित प्रस्तुतियाँ दी गईं। कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों, लोकनृत्य और आधुनिक नृत्य शैलियों का भी समावेश रहा, जिससे वातावरण उत्साह और ऊर्जा से भर गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रतिभागियों के उत्साह और रचनात्मक अभिव्यक्ति की सराहना की तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। वहीं खेल प्रतियोगिता में प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने टेबल टेनिस में भाग लिया, उनकी टीम ने टेबल टेनिस में जीत दर्ज की। वहीं एक अन्य वर्ग में सिद्धार्थ ने उज्ज्वल को हराकर जीत दर्ज की। फुटबॉल में त्रिलोचन की टीम ने कड़ी टक्कर के मध्य अमित सिंह की टीम को हराया। बालक वर्ग के 400 मीटर दौड़ में यज्ञदेव को प्रथम तथा कुशाग्र को द्वितीय स्थान मिला। बालिका वर्ग की 400 मीटर दौड़ में प्रज्ञा ने बाजी मारी, तो वहीं अपूर्वा को द्वितीय स्थान मिला। रिले रेस में खुशी, ज्योतिका, प्रज्ञा, अनामिका की टीम विजयी रहीं। बालक वर्ग में यज्ञदेव, अमित, मोहन, लवेन्द्र को विजेता घोषित किया गया। सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के विभागाध्यक्ष डॉ शिवनारायण प्रसाद ने बताया कि उत्सव-26 में रंगोली, मेंहदी, ढपली, सोलो प्रज्ञागीत, ग्रुप क्लासिकल संगीत, कविता पाठ, भाषण, क्विज, तबला वादन, एकल व सामूहिक क्लासिक डांस, निबंध सहित कुल 22 प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। जिनमें निकिता, दीक्षा कश्यप, हर्षिता शर्मा, प्रवेश बजाज, अदिति टीम, अनामिका, बरखा स्वर्णकार, भोला रघुवंशी, परशुराम ग्रुप, सत्यम कटारे, प्रशस्ती शर्मा, ममता, संजना बिष्ट, गुजरात ग्रुप आदि अव्वल रहे। तो वहीं यशिका, यचिता, निशिका आर्य, प्रज्ञा पाल, दीपशिखा, सुमन, योशिता, विश्वामित्र टीम, जयेन्द्र श्रीवास्तव, अक्षिता पाल, अनमोल सिंह, शांभवी ग्रुप, बलराम लोधी, राजस्थान ग्रुप आदि को द्वितीय स्थान मिला। उन्होंने बताया कि कई प्रतियोगिताओं में निर्णायक को निर्णय देने में माथापच्ची करनी पड़ी।

US-इजरायल हमले के आरोपों से गरमाया मामला, ईरान के दावे पर IAEA ने क्या कहा?

ईरान ईरान के राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में बड़ा दावा किया है। ईरानी दूत ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल ने रविवार को उसके परमाणु ठिकानों पर हमले किए हैं। हालांकि, UN न्यूक्लियर वॉचडॉग के हेड ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि बताए गए हमलों में किसी न्यूक्लियर साइट को नुकसान हुआ है। IAEA के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी ने सोमवार को एजेंसी के 35 सदस्यों वाले बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को बताया कि एजेंसी के पास “इस बात का कोई संकेत नहीं है कि किसी भी न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन को नुकसान पहुँचा है या उस पर हमला हुआ है।” दरअसल, ईरानी राजदूत से पूछा गया था कि ईरान में किस परमाणु ठिकाने पर हमला हुआ है तो उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका ने नतान्ज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमले किए हैं। ‘रेडियोधर्मिता रिसाव ‘ की संभावना हालांकि, आईएईए के महानिदेशक ने यह भी कहा है कि ‘रेडियोधर्मिता रिसाव ‘ की संभावना को टाला नहीं जा सकता। राफेल ग्रोसी ने ईरान और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और परमाणु प्रतिष्ठानों पर किसी भी तरह के सशस्त्र हमले से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आईएईए स्थिति की निगरानी जारी रखेगा और यदि परमाणु सुरक्षा में कोई उल्लंघन होता है तो सदस्य देशों को तत्काल तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। उन्होंने आगाह किया कि यदि रेडियोधर्मिता रिसाव होता है तो बड़े शहरों को खाली कराने की नौबत आ सकती है। टीम स्थिति का आकलन कर रही ग्रोसी ने कहा कि एजेंसी ने अपने अधिकार क्षेत्र के अनुरूप संभावित रेडियोधर्मिता रिसाव आपात स्थिति की आशंका को ध्यान में रखते हुए तत्काल कार्रवाई की है। आईएईए का ‘इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर’ (आईईसी) सक्रिय है और एक समर्पित टीम स्थिति का आकलन कर रही है, हालांकि संघर्ष के कारण संचार में बाधाएं आ रही हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय सुरक्षा निगरानी नेटवर्क को सतर्क कर दिया गया है और अब तक ईरान से सटे देशों में पृष्ठभूमि स्तर से अधिक विकिरण दर्ज नहीं हुआ है। परमाणु सुरक्षा के लिए जोखिम बढ़ा ईरान में परमाणु प्रतिष्ठानों की स्थिति पर उन्होंने कहा कि अब तक बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, तेहरान अनुसंधान रिएक्टर या अन्य परमाणु ईंधन चक्र सुविधाओं के क्षतिग्रस्त होने का कोई संकेत नहीं मिला है। आईएईए ने ईरान के परमाणु नियामक प्राधिकरण से संपर्क साधने के प्रयास जारी रखे हैं, लेकिन अभी तक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। महानिदेशक ने चेतावनी दी कि क्षेत्र के कई देशों में संचालित परमाणु ऊर्जा संयंत्र और अनुसंधान रिएक्टर हैं, जिससे किसी भी सैन्य हमले की स्थिति में परमाणु सुरक्षा के लिए जोखिम बढ़ जाता है। संयुक्त अरब अमीरात में चार परिचालित परमाणु रिएक्टर हैं, जबकि जॉर्डन और सीरिया में अनुसंधान रिएक्टर संचालित हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासम्मेलन के पूर्व प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए कहा कि परमाणु सुविधाओं पर सशस्त्र हमले कभी नहीं होने चाहिए, क्योंकि इससे गंभीर रेडियोधर्मी उत्सर्जन हो सकता है, जिसके प्रभाव सीमाओं से परे तक पड़ सकते हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दीर्घकालिक समाधान के लिए उन्होंने कूटनीति और वार्ता पर लौटने की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने कहा कि बल प्रयोग अंतरराष्ट्रीय संबंधों का हिस्सा रहा है, लेकिन यह हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए।उन्होंने कहा, “कूटनीति कठिन है, लेकिन असंभव नहीं। परमाणु कूटनीति और भी कठिन है, लेकिन असंभव नहीं। हमें जल्द से जल्द वार्ता की मेज पर लौटना ही होगा।”  

आतंक के खिलाफ कार्रवाई तेज: पाकिस्तान बोला- 350 तालिबानी मारे गए

काबुल, ब्लूमबर्ग तुर्की और कतर जैसे मुल्कों ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश की थी, लेकिन फेल रहे। दोनों इस्लामिक देशों के बीच जारी इस जंग ने साउथ एशिया में ऐसे वक्त में तनाव बढ़ाया है, जब पड़ोस में ही ईरान और इजरायल भी लड़ रहे हैं। उस युद्ध में अमेरिका भी इजरायल संग हमले कर रहा है। इजरायल और ईरान में जारी जंग के बीच भारत के पड़ोस में भी युद्ध तेज हो रहा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहे युद्ध का आज चौथा दिन है। पाकिस्तान का दावा है कि उसके हमलों में अब तक 350 से ज्यादा तालिबान लड़ाके मारे गए हैं। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दावा किया है कि उनके मुल्क ने अफगानिस्तान के 41 ठिकानों पर हमले किए हैं। इन हमलों में तालिबान की 130 चौकियों को तबाह कर दिया गया है। इसके अलावा 530 लोग जख्मी हुए हैं और साढ़े 3 सौ लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने इससे पहले ऐलान किया था कि अफगानिस्तान के साथ अब हम खुली जंग में हैं। उनका कहना था कि तालिबान ने हमारी सीमा में घुसकर हमले किए हैं और अब हम उनका जवाब देंगे। इसके बाद पाकिस्तान ने काबुल, कंधार समेत अफगानिस्तान के बड़े शहरों को टारगेट करते हुए हमले किए थे। तुर्की और कतर जैसे मुल्कों ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश की थी, लेकिन फेल रहे। दोनों इस्लामिक देशों के बीच जारी इस जंग ने साउथ एशिया में ऐसे वक्त में तनाव बढ़ाया है, जब पड़ोस में ही ईरान और इजरायल भी जंग लड़ रहे हैं। उस युद्ध में अमेरिका भी इजरायल के साथ मिलकर हमले कर रहा है। वहीं अफगानिस्तान का दावा है कि उसके हमलों में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के दो मिलिट्री बेस और 19 मिलिट्री पोस्ट भी कब्जाने का दावा किया है। पाकिस्तान ने ऐसे दावों को खारिज किया है। बता दें कि बीते कई सालों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। 2021 में अफगानिस्तान से नाटो सेनाओं ने वापसी की थी। इसके बाद पाकिस्तान को उम्मीद थी कि अब तालिबान के हाथ सत्ता लगेगी और उनके जरिए वह मनमानी कर सकेगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ है और तालिबान ने अपनी धरती का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं करने दिया है। यही नहीं पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत को लेकर दोनों में मतभेद भी पैदा हो गए हैं। इसकी वजह यह है कि तालिबान का कहना है कि वह अंग्रेजों की खींची हुई डूरंड लाइन को नहीं मानता है। इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा में जो पश्तून आबादी है, उनके साथ उनका रिश्ता है। ऐसे में मुक्त आवाजाही की परमिशन भी होनी चाहिए। अकसर ही दोनों सीमा पर तनाव की स्थिति में रहते हैं।  

सऊदी अरब की बड़ी तेल कंपनी ने रोका उत्पादन, ईरान से टकराव के बाद महंगाई का खतरा

सऊदी अरब दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी के रूप में जाने जाने वाली सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको को ईरान ने कथित तौर पर हमला कर दिया है। जानकारी के मुताबिक ईरानी ड्रोन हमले के बाद अपनी रास तनूरा रिफाइनरी को एहतियातन बंद कर दिया है। उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने सोमवार को यह जानकारी दी है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के जवाब में तेहरान पूरे क्षेत्र में लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इन हमलों में खाड़ी देशों में कई लोगों की मौत भी हो गई है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने अल अरबिया टीवी को बताया कि इस क्षेत्र में दो ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया है। ड्रोन के मलबे से सीमित स्तर पर आग भी लगी थी जिसे तुरंत काबू कर लिया गया। इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता बता दें कि रास तनूरा कॉम्प्लेक्स सऊदी अरब के खाड़ी तट पर स्थित है और यह मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है, जिसकी क्षमता लगभग 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) है। यह सऊदी कच्चे तेल के निर्यात का एक अहम टर्मिनल भी है। सूत्र के अनुसार रिफाइनरी को सावधानी के तौर पर बंद किया गया है और हालात नियंत्रण में हैं। मच सकता है हाहाकार रिफाइनरी बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला समुद्री व्यापार भी लगभग ठप हो गया है। दुनिया की करीब पांचवां हिस्सा तेल खपत इसी मार्ग से गुजरती है। रविवार को इस क्षेत्र के आसपास जहाजों पर हमलों के बाद तेल परिवहन प्रभावित हुआ है। इसी वजह से सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। अरामको ने इस मामले पर तुरंत कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। क्या कह रहे विशेषज्ञ? रिस्क इंटेलिजेंस फर्म वेरिस्क मेपलक्रॉफ्ट के मिडिल ईस्ट विश्लेषक टॉरब्योर्न सोल्टवेड्ट ने कहा ताजा हमलों कर चिंता जताते हुए कहा कि रास तनूरा पर हमला क्षेत्रीय तनाव में बड़ी बढ़ोतरी का संकेत है और अब खाड़ी देशों की ऊर्जा संरचना सीधे निशाने पर आ गई है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद सऊदी अरब और पड़ोसी खाड़ी देश अमेरिका और इजराइल के सैन्य अभियानों के और करीब आ सकते हैं। कई खाड़ी देशों में हमले यह ड्रोन हमला क्षेत्र में हाल के हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिनमें अबू धाबी, दुबई, दोहा, मनामा और ओमान के दुक़्म वाणिज्यिक बंदरगाह को भी निशाना बनाया गया है। इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में भी तेल उत्पादन का बड़ा हिस्सा एहतियातन बंद कर दिया गया है, जहां से फरवरी में करीब 2 लाख बैरल प्रतिदिन तेल तुर्की को निर्यात किया गया था।  

माँ मोटी माता परिसर में ताप्ती–नर्मदा रेल लाइन को लेकर बैठक संपन्न हुई

  बड़वानी नरेश रायक ताप्ती नर्मदा रेल लाइन समिति के केंद्रीय संयोजक दामोदर अग्रवाल की अध्यक्षता में माँ मोटी माता परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अवगत कराया गया कि खंडवा–अलीराजपुर रेलवे लाइन के सर्वे कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा वृहद परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। बैठक में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया गया, जिनमें झाबुआ–अलीराजपुर सांसद अनिता नागरसिंह चौहान, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं धार सांसद सावित्री ठाकुर, खरगोन–बड़वानी सांसद गजेंद्र पटेल, खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल तथा राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी शामिल हैं। बैठक में विश्वास व्यक्त किया गया कि शीघ्र ही रेल लाइन को स्वीकृति प्राप्त होगी और बड़वानी जिलेवासियों का रेल यात्रा का सपना साकार होगा। रेल लाइन से क्षेत्र को संभावित लाभ   सस्ती और सुगम यात्रा सुविधा – विद्यार्थियों, मरीजों व श्रमिकों को बड़े शहरों तक आसान आवागमन।  व्यापार एवं कृषि को बढ़ावा – कपास, मिर्च, सोयाबीन सहित स्थानीय उत्पादों का तेज परिवहन। रोजगार के अवसर – निर्माण कार्य से लेकर संचालन तक स्थानीय युवाओं को रोजगार।  स्वास्थ्य व शिक्षा में सुविधा – इंदौर, खंडवा, धार आदि शहरों तक शीघ्र पहुँच।  पर्यटन विकास – क्षेत्र के धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों तक पहुँच आसान। इस अवसर पर सर्वश्री अमित शर्मा, राजेंद्र देवड़े, नारायण वर्मा, भगवती प्रसाद कुमरावत, दीपक जेमन, जगन्नाथ गुप्ता, ताराचंद शर्मा, वीरेंद्र रावत, अशोक शर्मा, संजय माले, संतोष गुप्ता, महेश धनगर, बालकृष्ण सोनगरा, नितिन बद्रीलाल अग्रवाल एवं राजेश राठौड़ सहित अनेक नागरिक उपस्थित थे। बैठक में उपस्थित नागरिकों ने एक स्वर में कहा कि यह रेल परियोजना बड़वानी जिले के समग्र विकास की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

कामयाबी का शॉर्टकट नहीं, स्टीव जॉब्स की ये 5 आदतें अपनाइए और बड़ा मुकाम पाइए

एप्पल कंपनी के मुख्य संस्थापक स्टीव पॉल जॉब्स किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। स्टीव ने iPhone, iPad, Mac के जरिए टेक्नोलॉजी की दुनिया को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। सिंपल लेकिन क्रिएटिव होने में वह ज्यादा विश्वास रखते थे और काम को दिल से करने वाले लोगों को पसंद करते थे। स्टीव ने फुल फोकस के साथ काम किया और दुनिया एप्पल जैसी टेक्नोलॉजी से मिलवाया जो काफी तेज और बेहतरीन है। आज हर हाथ में एप्पल के मोबाइल दिखते हैं और इसका श्रेय स्टीव जॉब्स को ही जाता है। वह करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा है और उनकी कुछ आदतों को हर किसी को अपनाना चाहिए। अगर आप दुनिया में अपना नाम कमाना चाहते हैं, तो स्टीव की इन बातों को गांठ बांध लें। स्टीव जॉब्स की खास आदतें- सिंपल बट क्रिएटिव स्टीव जॉब्स का कहना था कि सादगी से क्रिएटिविटी बढ़ती है। वह खुद हमेशा काफी सिंपल रहें और उन्हें हमेशा सिर्फ ब्लैक टर्टलनेक टी-शर्ट और जींस में देखा गया। उनका कहना था कि किसी भी चीज पर काम करो, तो तब तक लगे रहो जब तक वो परफेक्ट न हो जाए। हर काम की बारीकी मैटर करती है, फिर चाहे उसके लिए कितना भी इंतजार करना पड़े। फोकस हटना नहीं चाहिए स्टीव जॉब्स का कहना था कि आप किसी भी काम को फुल फोकस के साथ करते हैं, तभी उसमें पारंगत हो सकते हैं। इसी वजह से आपको सफलता मिलेगी। स्टीव ने एप्पल के कई सारे प्रोडक्ट्स को हटाकर सिर्फ 10 चीजों को लिया था, जिससे वह उन्हें बेहतर ढंग से बना सकें। ना कहना सीख लें उनका मानना था कि ना कहना भी एक कला है, जो हर व्यक्ति की सीख लेनी चाहिए। वरना आप लोगों की हां में हां मिलाते हुए पीछे खड़े रह जाएंगे। स्टीव का कहना था कि जब आप 1000 चीजों को ना कहेंगे तब जाकर आप खुद की किसी 1 चीज पर फोकस बढ़ा सकेंगे। फोकस करने से ही आपको सफलता मिलेगी। रिस्क लेना जरूरी है स्टीव जॉब्स को कुछ कारणों से एप्पल कंपनी से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी बल्कि NeXT और Pixar जैसे सॉफ्टवेयर बनाकर ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। ये उनके रिस्क लेने की मिसाल है। वह फेल हो सकते थे लेकिन उन्होंने बिना डरे रिस्क लेने का फैसला किया। लक्ष्य तय करो स्टीव जॉब्स का कहना था छोटे और बड़े अलग-अलग गोल्स सेट करो और उसे पूरा करने के लिए स्ट्रैटजी बनाओ। जब आप गोल्स बनाकर चलते हैं, तो सफलता मिलती है। ऐसे में आप सही डिसीजन मेकर भी बनकर उभरते हो। स्टीव जॉब्स रोजाना एक जैसे कपड़े इसलिए पहनते थे, क्योंकि वह इन कपड़ा चुनने जैसे छोटे फैसलों में अपना वक्त बर्बाद नहीं करना चाहते थे।

कोरबा: अधूरे मकान में छिपा था कोबरा, सूचना मिलते ही चला रेस्क्यू ऑपरेशन

कोरबा सोमवार की सुबह शहर के व्यस्त क्षेत्र निहारिका घंटाघर में उस समय हड़कंप मच गया, एक मकान का निमार्ण कार्य के लिए पहुंचे मजदूरों ने कोबरा सांप देखा। जिसके बाद मजदूरों और स्थानीय नागरिकों में हड़कंप मच गया। तुरंत ही क्षेत्र को सुरक्षित किया गया और लोगों को पास जाने से रोका गया और रेप्टाइल केयर एंड रेस्क्यू सोसाइटी की टीम को सूचना दी गई। जिसके बाद आरसीआरएस अध्यक्ष अविनाश यादव अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। और पूरी सावधानी तथा पेशेवर तरीके से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कुछ ही देर बाद कोबरा को सुरक्षित रूप से काबू में कर लिया गया। रेस्क्यू के बाद सांप को जंगल में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया। इस दौरान न तो किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा और न ही सांप को कोई चोट आई। अविनाश यादव ने बताया कि कोबरा सांप 3 फिट का था और फुर्तीला था। इसमें जहर बहुत तेज होता है और हमला बहुत जल्दी करता है, इसलिए छेड़छाड़ सांप से नहीं करना चाहिए। स्थानीय नागरिकों की समझदारी, समय पर दी गई सूचना से सांप पकड़ा गया। जिसके बाद क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली और रेस्क्यू टीम के कार्य की सराहना की।

अल्सर से कैसा डर! समय पर पहचान, सफल उपचार

हमारा पेट नाजुक टिश्यू से बना है। थोड़ी-सी गड़बड़ी सेहत से जुड़ी कई समस्याएं खड़ी कर देती है। पेट में दर्द, जलन व सूजन का एहसास, सीने में जलन व उल्टी की शिकायत-सुनने में भले ही अजीब लगे, पर ऐसा ही होता है, जब पेट में अल्सर की शिकायत होती है। खुद को इसका शिकार बनने से कैसे रोक सकते हैं, बता रहे हैं हम… जीवनशैली और खान-पान में बदलाव का नतीजा है कि किशोर और युवाओं में पेट के अल्सर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सामान्य भाषा में कहें तो पेट में छाले व घाव हो जाने को अल्सर कहा जाता है। सोने का नियत समय न होना, ऑफिस में बेहतर प्रदर्शन का तनाव, जंक फूड का बढ़ता चलन और अधिक डाइटिंग से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। उस पर धूम्रपान, एल्कोहल और तंबाकू का सेवन पेट की परत को नुकसान पहुंचाने का कारण बन जाता है। क्या है पेप्टिक अल्सर:- पेट में घाव या छाले होने को चिकित्सकीय भाषा में पेप्टिक अल्सर कहते हैं। पेट में म्युकस की एक चिकनी परत होती है, जो पेट की भीतरी परत को पेप्सिन और हाइड्रोक्लोरिक एसिड से बचाती है। इस एसिड की खासियत यह है कि जहां यह एसिड पाचन प्रक्रिया के लिए जरूरी होता है, वहीं शरीर के ऊतकों को नुकसान भी पहुंचाता है। इस एसिड और म्युकस परतों के बीच तालमेल होता है। इस संतुलन के बिगड़ने पर ही अल्सर होता है। आमतौर पर यह आहार नली, पेट और छोटी आंत के ऊपरी भाग की भीतरी झिल्ली में होता है।   गैस्ट्रिक अल्सर: यह पेट के अंदर विकसित होता है। इसोफैगियल अल्सरः यह भोजन नली (इसोफैगस) में होता है, जो भोजन को गले से पेट में ले जाती है। यह अल्सर कम देखने में आता है। ड्योडेनल अल्सर: यह छोटी आंत के ऊपरी भाग में होता है, जिसे ड्योडनम कहते हैं। इसके मामले अधिक सामने आते हैं। मानसून में रखें खास एहतियात:- पेप्टिक अल्सर का सबसे प्रमुख कारण एच. पायरोली बैक्टीरिया है, जिसका संक्रमण मल और गंदे पानी से फैलता है। बरसात के मौसम में गंदगी की समस्या दूसरे मौसमों के मुकाबले अधिक होती है। शारीरिक सक्रियता कम होने और रोग प्रतिरोधक तंत्र में होने वाले बदलाव भी इसके कारण बन सकते हैं। अधिक तला-भुना, मसालेदार भोजन और चाय-कॉफी लेना पेट में एसिड के स्तर को प्रभावित करता है। इसके संक्रमण से बचने का सबसे आसान और सस्ता तरीका साफ-सफाई का खास ध्यान रखना है। लक्षण:- पेट में दर्द होना इसका प्रमुख लक्षण है। खाली पेट होने पर यह दर्द और तेज हो जाता है। पेट का एसिड अल्सरग्रस्त कोशिकाओं पर असर डालने लगता है। रात के समय पेट में जलन बढ़ जाती है। कुछ मामलों में खून की उल्टी होना, मल का रंग गहरा हो जाना, जी मिचलाना, भार में तेजी से कमी आना या भूख प्रक्रिया में बदलाव आने जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं। ये देते हैं अल्सर को बुलावा:- -हेलिकोबैक्टर पायरोली बैक्टीरिया का संक्रमण। -तनाव व डायबिटीज। -आनुवंशिक कारण। -अत्यधिक मात्रा में पेट में एसिड का स्राव। -तैलीय और मसालेदार भोजन अधिक खाना। -अधिक मात्रा में शराब, कैफीन और तंबाकू का सेवन। -ऑस्टियोपोरोसिस के उपचार के लिये ली जाने वाली दवाएं। लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में दर्द निवारक दवाओं, एस्प्रिन और ज्वलनरोधक दवाओं का सेवन करना। समय रहते उपचार है जरूरी:- पेप्टिक अल्सर के कारण एनीमिया, अत्यधिक रक्तस्राव और लंबे समय तक बने रहने पर स्टमक कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। आंतरिक रक्तस्राव होने के कारण शरीर में खून की कमी हो जाती है। पेट या छोटी आंत की दीवार में छेद हो जाते हैं, जिससे आंतों में गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। पेप्टिक अल्सर पेट के ऊतकों को भी क्षतिग्रस्त कर सकता है, जो पाचन मार्ग में भोजन के प्रवाह में बाधा पहुंचाता है। इस कारण पेट जल्दी भर जाना, उल्टी होना और वजन कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। दवा से मिलता है आराम:- पेप्टिक अल्सर का उपचार आसान है। कई मामलों में एंटीबायोटिक दवाएं, एंटा एसिड व दूसरी दवाओं से ही आराम आ जाता है। घरेलू उपचार भी इसमें काफी राहत पहुंचाते हैं। यह न खाएं:- -चाय, कॉफी और सोडा का सेवन न करें। इससे पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ जाता है, जो अल्सर को बढ़ाता है। -अधिक तेल और मसालेदार भोजन न खाएं। -ऐसे खाद्य पदार्थ, जिनमें साइट्रिक एसिड की मात्रा अधिक होती है, अल्सर के दौरान इनके सेवन से पेट के घावों को नुकसान पहुंचता है। नीबू, मौसंबी, संतरा, अंगूर, अनन्नास, फलों का जूस, जैम और जैली में सिट्रिक एसिड अधिक होता है। -लाल मांस, मैदे से बनी चीजें, सफेद ब्रेड, चीनी, पास्ता और प्रोसेस्ड फूड भी कम से कम खाएं। -खान-पान में साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। खुले में रखे खाद्य पदार्थों को खाने से बचें। देर से कटा रखा हुआ सलाद न खाएं। खाने से पहले हाथ जरूर धोएं। क्या कहते हैं आंकड़े:- -जिन लोगों का ब्लड ग्रुप ए होता है, उनमें कैंसरयुक्त स्टमक अल्सर होने की आशंका अधिक होती है, हालांकि इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं है। -स्वीडन में हुए एक शोध के अनुसार जो लोग सप्ताह में तीन बार दही का सेवन करते हैं, उन लोगों में अल्सर होने की आशंका उन लोगों से कम होती है, जो इसका सेवन नहीं करते। -विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पेप्टिक अल्सर के 50 प्रतिशत मामलों का कारण एच. पायलोरी बैक्टीरिया होता है। -डेनमार्क में हुए एक अध्ययन के अनुसार जो लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज करते हैं, उनमें पेप्टिक अल्सर होने की आशंका कम होती है। -हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अध्ययन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जो लोग प्रतिदिन एक नाशपति का सेवन करते हैं, उनमें छोटी आंत का अल्सर होने की आशंका 31 प्रतिशत कम होती है। इन्हें खाने से मिलेगी राहत:- खान-पान का ध्यान रख कर ना केवल पेट में अल्सर बढ़ने से रोका जा सकता है, बल्कि हमेशा के लिए इसका शिकार होने से भी बचा जा सकता है। -केले में एंटी बैक्टीरियल तत्व प्रचुरता में होते हैं, जो पेट के अल्सर को बढ़ने से रोकते हैं। नाश्ते के बाद केला खाएं। -नाशपति में फ्लेवोनॉएड और एंटी-ऑक्सीडेंट काफी मात्रा … Read more

ऊर्जा मंत्री तोमर ने किया ऐलान: विद्युत समाधान योजना की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाई

विद्युत समाधान योजना की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाई गई : ऊर्जा मंत्री  तोमर 31 मार्च तक एकमुश्त राशि जमा करने पर सरचार्ज में मिलेगी 90 प्रतिशत तक की छूट भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 के द्वितीय व अंतिम चरण को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पूर्व में यह योजना 28 फरवरी तक लागू थी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 3 नवम्बर को समाधान योजना 2025-26 की शुरुआत हुई थी। समाधान योजना में तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्ताओं को एकमुश्त राशि जमा करने पर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ दिया जा रहा है। मंत्री  तोमर ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि वे तीन माह से अधिक के बकाएदार हैं और योजना में अभी तक शामिल नहीं हो पाए वे अब 31 मार्च तक योजना में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा करके 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं। 21 लाख 67 हजार उपभोक्ताओं ने लिया लाभ मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में 28 फरवरी तक 21 लाख 67 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया है। कुल 1043 करोड़ 53 लाख रूपये जमा किये गये हैं, जबकि 388 करोड़ 77 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 6 लाख 38 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 616 करोड़ 42 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 285 करोड़ 39 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 222 करोड़ 82 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 73 करोड़ 7 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 7 लाख 29 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 204 करोड़ 29 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 30 करोड़ 31 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। यह योजना उन बकायादार उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है जो सरचार्ज के कारण मूलधन राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें समाधान योजना में सरचार्ज में 50 से लेकर 90 प्रतिशत तक छूट के साथ एकमुश्त अथवा किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिल रहा है। समाधान योजना 2025-26 एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। योजना में एक मुश्त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी के पोर्टल पर पंजीयन करना है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखी जा सकती है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।  

बड़वानी में हॉकी खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए एस्ट्रो-टर्फ की उपलब्ध कराई जाएगी सुविधा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ग्रामीण प्रतिभाओं के प्रोत्साहन के लिए दी जाएगी हर संभव मदद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागलवाड़ी में प्रबुद्धजनों से किया आत्मीय संवाद मुख्यमंत्री ने एनआरएलएम की लखपति दीदियों, नेशनल खिलाड़ियों और उन्नत किसानों से सुने अनुभव बड़वानी में हॉकी खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए एस्ट्रो-टर्फ की उपलब्ध कराई जाएगी सुविधा बड़वानी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को नागलवाड़ी में आयोजित पहली कृषि कैबिनेट के अवसर पर बड़वानी जिले के प्रबुद्धजनों से भेंट की। उन्होंने एनआरएलएम की लखपति दीदियों, बड़वानी जिले के नेशनल खिलाड़ियों और उन्नत किसानों के अनुभव सुने और उन्हें शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रबुद्धजनों से भेंटकर कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं, ग्रामीणों, किसानों, खिलाड़ियों सहित समाज के सभी वर्गों की प्रगति के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से मदद उपलब्ध करा रही है। बड़वानी जिले के ग्राम भागसुर की सीमा नरगावे ड्रोन दीदी ने निमाड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि ग्रामीण आजीविका मिशन के स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने जैविक खेती और ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लिया। अब वह अन्य महिलाओं को जैविक खेती करना सिखा रही है। ड्रोन दीदी सीमा ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर उसकी आय में वृद्धि तो हुई ही है, साथ ही उसे एक नई पहचान भी मिली है। सीमा ने बताया कि वह गांव में ड्रोन के माध्यम से खेतों में उर्वरक और कीटनाशक का छिड़काव करती है जिससे घंटों का काम अब मिनिटों में होने लगा है और उसे नियमित रूप से आय भी प्राप्त हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से चर्चा करते हुए हॉकी की नेशनल खिलाड़ी सु स्नेहा मोहनिया ने बताया कि उसे राष्ट्रीय स्तर पर 2 गोल्ड मेडल और 1 सिल्वर मेडल मिल चुका है। स्नेहा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बड़वानी में एस्ट्रो-टर्फ की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आश्वस्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एयर राइफल शूटिंग की नेशनल खिलाड़ी जुलवानिया निवासी सु वैष्णवी महुले से भी चर्चा की। उन्होंने सु वैष्णवी को राज्य स्तर की शूटिंग अकादमी में प्रशिक्षण दिलाने के लिए निर्देश उपस्थित अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जुलवानिया में शूटिंग क्लब प्रशिक्षण केंद्र संचालन कर रहे प्रशिक्षक  नीरज को 5 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि बालिकाओं की ट्रेनिंग के सराहनीय कार्य के लिए देने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बड़वानी जिले के ग्राम घटवा निवासी उन्नत कृषक  महेश पाटीदार ने अपने उत्पाद “गुड़ की चाय” के बारे में बताया।  पाटीदार ने बताया कि उन्होंने पी.एम.एफ.एम.ई. योजना में 28 लाख रुपए का ऋण लिया था। इसमें उन्हें 10 लाख रुपए का अनुदान भी मिला है। वर्तमान में  पाटीदार “गुड़ की चाय” के 500 क्विंटल के पैकेट प्रतिवर्ष बेच रहे हैं। भविष्य में एक हजार क्विंटल प्रतिवर्ष “गुड़ की चाय” के पैकेट बेचने का उनका लक्ष्य है।  पाटीदार ने बताया कि उनकी गुड़ की चाय के पैकेट विक्रय के लिए अमेजॉन एवं अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है। बड़वानी जिले के ही  अमोल महाजन ने भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव को केला उत्पादन के अपने व्यवसाय के बारे में बताते हुए कहा कि वह पहले अमेरिका में जॉब करते थे, बाद में जॉब छोड़कर अपने देश में ही केला उत्पादन का स्टार्ट-अप शुरू किया। आज उनका केला दुबई, ईरान और इराक सहित विश्व के कई देशों में निर्यात हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  महाजन की उपलब्धि की प्रशंसा की।  

ग्रहण का प्रभाव: रामलला मंदिर 3 मार्च को सुबह इतने बजे तक ही खुलेगा, भक्तों के लिए जरूरी सूचना

अयोध्या साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान मंदिरों के पट बंद रखे जाते हैं। इसी नियम का पालन करते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने फैसला किया है कि चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिर में दर्शन बंद रहेंगे। ट्रस्ट के अनुसार सुबह पूजा-अर्चना और आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इसका उद्देश्य धार्मिक परंपरा का सम्मान करना और ग्रहण के समय पूजा और मंत्र पाठ में व्यवधान न आने देना है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस संबंध में एक पत्र जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण (शुक्ल पक्ष पूर्णिमा) के कारण मंदिर में दर्शन की व्यवस्था थोड़ी अलग होगी। सुबह की मंगला आरती और श्रृंगार आरती पहले से निर्धारित समय पर होगी ताकि श्रद्धालु पूजा में हिस्सा ले सकें। इसके बाद, लगभग सुबह 9 बजे से लेकर रात 8:30 बजे तक मंदिर बंद रहेगा। इस दौरान ग्रहण और सूतक के समय को देखते हुए दर्शन बंद रहेंगे। अधिकारियों और पुलिस को भी इसकी जानकारी दी गई है ताकि दर्शन की प्रक्रिया और भी व्यवस्थित रहे। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने अयोध्या के अपर पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर मंदिर के खुलने और बंद होने के समय में हुए बदलाव के बारे में सूचित किया है। साथ ही इसके अनुसार, मंदिर और उसके आसपास आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है। ऐसे में यदि आप भी मंगलवार को रामलला के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो इस शेड्यूल का ध्यान रखें। आम श्रद्धालु सुबह पूजा और आरती में शामिल हो सकते हैं, उसके बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे। चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिर के भीतर कोई भी दर्शन या प्रवेश नहीं होगा। यह व्यवस्था सिर्फ 3 मार्च के दिन के लिए है और अगले दिन से मंदिर की सामान्य दर्शन व्यवस्था फिर से चालू हो जाएगी।

छात्र बोले- रास्ते में रंग लगाया तो परीक्षा में आएगी दिक्कत, राजस्थान में 4 मार्च को 8वीं-12वीं का पेपर

जयपुर/नौगांवा. इस बार दो दिन के होली, धूलण्डी उत्सव ने न केवल आमजन को असमंजस में डाल रखा है, बल्कि हजारों छात्रों के लिए भी ये दोहरी चुनौती बन गया है। गौरतलब है कि चंद्र ग्रहण और पंचांग गणना के कारण कुछ लोग इस बार धुलंडी 4 मार्च को मना रहे हैं। जबकि होलिका दहन 2 मार्च को होगा। 4 मार्च को राजस्थान बोर्ड की कक्षा 8वीं और कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं निर्धारित हैं, जिसके कारण परीक्षा दे रहे हजारों छात्रों और अभिभावकों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। राज्य सरकार ने 2 और 3 मार्च को होली/होलिका दहन के अवकाश घोषित किए हैं, लेकिन 4 मार्च को छुट्टी नहीं है। बोर्ड के परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार कक्षा 12वीं की परीक्षाएं 12 फरवरी से 11 मार्च तक चल रही हैं और 4 मार्च को सुबह की पारी में इतिहास, बिजनेस स्टडीज, एग्रीकल्चरल केमिस्ट्री, केमिस्ट्री आदि विषयों के पेपर हैं। इसी दिन कक्षा 8वीं की तृतीय भाषा की भी परीक्षा है। ऐसे में धूलण्डी के दौरान बच्चे किस तर परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षा देने पहुंचेंगे। अभिभावकों का कहना है कि धूलण्डी पर चौक, चौराहों पर लोग होली खेल रहे होंगे, ऐसे में परीक्षा देने वाले बच्चों को परीक्षा केन्द्र जाते समय कोई रंग लगा देगा, तो उसकी परीक्षा में व्यवधान पडे़गा। परीक्षा की तिथि में बदलाव की मांग इसे लेकर अभिभावकों और छात्रों में रोष है और विभाग से परीक्षा की तिथि में बदलाव की मांग कर रहे है। शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि त्योहार और बोर्ड परीक्षा के टकराव से छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा शेड्यूल विभाग ओर से तय किया गया है, ऐसे में कोई भी निर्देश विभाग की ओर से मिलेगा तो उसकी पालना की जाएगी। इनका कहना है निदेशालय ओर से परीक्षा कार्यक्रम पूर्व में ही तय किया जा चुका है। विभाग के उच्चाधिकारियों के जो निर्देश होंगे उनकी पालना की जाएगी। ओमप्रकाश, प्राचार्य डाइट अलवर बोर्ड ओर से निर्धारित टाइम टेबल के अनुसार परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा तिथि में कोई बदलाव के निर्देष उच्चाधिकारियों के मिलेगें तो उसकी पालना की जाएगी। महेश मेहता, जिला शिक्षा अधिकारी अलवर

CUET PG 2026 City Slip Out: एग्जाम सिटी जानने के लिए यहां करें डाउनलोड

नई दिल्ली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट – पोस्टग्रेजुएट (CUET PG 2026) के उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। एनटीए ने उन अभ्यर्थियों के लिए ‘एडवांस एग्जाम सिटी इंटिमेशन स्लिप’ जारी कर दी है, जिनकी परीक्षाएं 8, 9 और 10 मार्च 2026 को निर्धारित हैं। छात्र अब आधिकारिक वेबसाइट exams.nta.nic.in/CUET-PG पर जाकर अपने परीक्षा शहर की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। सीयूईटी पीजी परीक्षा देश भर के केंद्रीय, राज्य और अन्य भाग लेने वाले विश्वविद्यालयों में पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज में एडमिशन के लिए प्रवेश द्वार है। इस वर्ष यह परीक्षा 6 मार्च से 27 मार्च 2026 के बीच कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जा रही है। क्या है सिटी इंटिमेशन स्लिप और यह क्यों जरूरी है? अक्सर छात्र सिटी इंटिमेशन स्लिप को ही एडमिट कार्ड समझ लेते हैं, लेकिन एनटीए ने स्पष्ट किया है कि यह एडमिट कार्ड नहीं है। उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को उनके परीक्षा शहर के बारे में पहले से सूचित करना है ताकि वे यात्रा और ठहरने की व्यवस्था समय रहते कर सकें। डिटेल्स: इस स्लिप में अभ्यर्थी का नाम, परीक्षा की तारीख, आवंटित शहर और राज्य की जानकारी होती है। हालांकि, इसमें परीक्षा केंद्र का सटीक नाम और पता नहीं दिया जाता है, जो केवल एडमिट कार्ड में ही होगा। 8 से 10 मार्च का परीक्षा कार्यक्रम एनटीए द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, 8 से 10 मार्च के बीच महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षाएं तीन शिफ्टों में आयोजित की जाएंगी: 8 मार्च: बी.एड (विभिन्न श्रेणियों में), जनरल मैनेजमेंट और जनरल पेपर। 9 मार्च: सांख्यिकी, बी.एड गणित, फ्रेंच, तेलुगु और क्रिमिनोलॉजी। 10 मार्च: डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, एम.ए. एजुकेशन, फॉरेंसिक साइंस और होम साइंस। एडमिट कार्ड कब आएगा? परीक्षा के लिए आधिकारिक एडमिट कार्ड परीक्षा की तारीख से लगभग 3-4 दिन पहले जारी किए जाते हैं। यानी 8 मार्च की परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड 4 या 5 मार्च तक आने की संभावना है। एडमिट कार्ड में ही छात्र को अपना रोल नंबर, परीक्षा केंद्र का नाम, रिपोर्टिंग टाइम और शिफ्ट की सटीक जानकारी मिलेगी। CUET PG 2026: सिटी स्लिप डाउनलोड करने के आसान स्टेप्स     सबसे पहले एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट exams.nta.nic.in/CUET-PG पर जाएं। 2. होमपेज पर ‘CUET PG 2026 City Intimation Slip’ के लिंक पर क्लिक करें। 3. अपना एप्लीकेशन नंबर और जन्म तिथि दर्ज करें। 4. स्क्रीन पर दिख रहा सिक्योरिटी पिन (कैप्चा) भरकर ‘Submit’ पर क्लिक करें। 5. आपकी सिटी इंटिमेशन स्लिप स्क्रीन पर आ जाएगी, इसे डाउनलोड करें और प्रिंटआउट ले लें। मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर यदि किसी अभ्यर्थी को सिटी स्लिप डाउनलोड करने में कोई समस्या आती है, तो वे एनटीए के हेल्पलाइन नंबर 011-40759000 पर संपर्क कर सकते हैं या helpdesk-cuetpg@nta.ac.in पर ईमेल भेज सकते हैं। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे नए अपडेट के लिए नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहें।  

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