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राज्य के सड़क विकास को रफ्तार: NH-30 के 122 किमी हिस्से के 4-लेन प्रस्ताव पर गडकरी–विजय शर्मा की बैठक

रायपुर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नागपुर प्रवास के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के धवईपानी (चिल्फी) से कवर्धा होते हुए सिमगा तक करीब 122 किलोमीटर लंबे सेक्शन को 4-लेन में उन्नत करने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री ने प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि एनएच-30 के जबलपुर से मंडला और चिल्फी तक लगभग 160 किलोमीटर हिस्से को पहले ही 4-लेन में विकसित करने की स्वीकृति मिल चुकी है। वर्तमान में चिल्फी (धवईपानी) से कवर्धा और कवर्धा गुरूनाला से सिमगा तक का मार्ग 10 मीटर चौड़ाई की 2-लेन सड़क है। उन्होंने कहा कि जब जबलपुर-मंडला-चिल्फी सेक्शन 4-लेन में परिवर्तित होगा, तब आगे के 2-लेन हिस्से पर यातायात का दबाव और बढ़ जाएगा। भारी और व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही को देखते हुए धवईपानी से सिमगा तक पूरे मार्ग को 4-लेन में अपग्रेड करना आवश्यक है, ताकि सड़क सुरक्षा और यातायात सुगमता सुनिश्चित की जा सके। उपमुख्यमंत्री ने जिला कबीरधाम मुख्यालय कवर्धा में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए 4-लेन मय पेव्ड शोल्डर कवर्धा बायपास के निर्माण का प्रस्ताव भी रखा। उनका कहना है कि बायपास बनने से शहर के भीतर दुर्घटनाओं की संभावना घटेगी और यातायात सुचारू रहेगा। नागपुर से लौटने के बाद रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए विजय शर्मा ने बताया कि सिमगा से रायपुर और धवईपानी से जबलपुर तक 4-लेन निर्माण के आदेश पहले ही जारी हो चुके हैं, लेकिन बीच का महत्वपूर्ण सेक्शन शेष था। इस कड़ी को भी 4-लेन में बदलने का आग्रह किया गया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इस परियोजना के पूर्ण होने पर जबलपुर से रायपुर तक आमजन को निर्बाध 4-लेन मार्ग की सुविधा मिल सकेगी, जिससे क्षेत्रीय व्यापार, आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

भगोरिया मेले में सोशल मीडिया का जादू: रील बनाने की होड़, ₹500 में ‘इंस्टेंट एडिटिंग’ सर्विस और 3000 फॉलोअर्स का इजाफा

झाबुआ  मांदल की थाप, उड़ता हुआ गुलाल और पारंपरिक वेशभूषा… भगोरिया का मेला हमेशा से अपनी इसी रौनक के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन इस बार मेले की तस्वीर थोड़ी बदली-बदली नजर आई। अब यहां युवा सिर्फ नाचने-गाने नहीं, बल्कि कंटेंट बनाने भी आ रहे हैं। ढोल बजते ही मोबाइल के कैमरे ऑन हो जाते हैं और देखते ही देखते अलीराजपुर और झाबुआ का यह पारंपरिक त्योहार इंस्टाग्राम की फीड पर छा जाता है। 5 दिन में 3 हजार फॉलोअर्स भगोरिया से जुड़े वीडियो पोस्ट करने वाले दीपक बताते हैं कि महज पांच दिनों में उनके पेज पर 3,000 नए फॉलोअर्स जुड़ गए। आलम यह है कि दिल्ली और मुंबई में रहने वाले लोग मैसेज करके पूछ रहे हैं कि अगला मेला कब और कहां लगेगा? पलायन की वजह से जो युवा बाहर चले गए थे, उनके लिए अब भगोरिया सिर्फ घर वापसी का जरिया नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर अपनी जड़ों को दिखाने का एक बड़ा मंच बन गया है। गहनों के साथ चश्मा और ब्रांडेड जूते मेले में आई कॉलेज स्टूडेंट रेखा लोहारिया कहती हैं, ‘यह हमारा सबसे बड़ा त्योहार है। इसे सिर्फ यहां के लोग ही क्यों देखें? मेरे सूरत और अहमदाबाद के दोस्त हर साल मेरे वीडियो का इंतजार करते हैं।’ दिलचस्प बात यह है कि इस बार फैशन में भी बदलाव दिखा। पारंपरिक चांदी के गहनों और कढ़ाई वाले ब्लाउज के साथ युवा धूप का चश्मा और ब्रांडेड जूते पहनकर कैमरे के सामने पोज देते नजर आए। ₹200 से ₹500 में ‘इंस्टेंट रील’ का धंधा इस ट्रेंड का फायदा स्थानीय फोटोग्राफर्स भी उठा रहे हैं। वे ₹200 से ₹500 के बीच मौके पर ही प्रोफेशनल रील्स बनाकर, एडिटिंग और म्यूजिक के साथ दे रहे हैं। हालांकि, बुजुर्ग इस बदलाव से थोड़े असहज हैं। झाबुआ के नत्थू सिंह कहते हैं, ‘पहले लोग त्योहार में शामिल होने आते थे, अब सिर्फ रिकॉर्ड करने आते हैं।’ बुजुर्गों की चिंता पर युवाओं का तर्क बुजुर्गों की चिंता पर युवाओं का अपना तर्क है। गुजरात की टेक्सटाइल यूनिट में काम करने वाले राकेश कहते हैं, ‘हम अपनी पहचान दुनिया को दिखा रहे हैं। अगर हम इसे पोस्ट नहीं करेंगे, तो कोई और हमारी कहानी अपने तरीके से बताएगा।’ भगोरिया अब सिर्फ एक मेला नहीं रह गया है, बल्कि एक डिजिटल ग्लोबल स्टेज बन चुका है।

वाल्व फेल होते ही बढ़ा खतरा, दौसा में गैस टैंकर रिसाव पर जयपुर रेस्क्यू टीम की त्वरित कार्रवाई

दौसा दौसा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर बीती रात गैस से भरे टैंकर में रिसाव की सूचना से हड़कंप मच गया। घटना कैलाई बस स्टैंड के पास हुई, जब गुजरात से उत्तर प्रदेश जा रहा टैंकर कालाखोह के पास किसी अज्ञात वाहन से साइड में टकरा गया। टकराव से रोटो गेज वाल्व क्षतिग्रस्त हो गया और गैस रिसने लगी। चालक को इस रिसाव की जानकारी नहीं थी, लेकिन एक वाहन चालक ने कंट्रोल रूम को सूचना दी। सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। सिकंदरा पुलिस ने टोल प्लाजा से पहले टैंकर को रोककर करीब 300 मीटर दूर कैलाई देवनारायण मंदिर के पास एक खेत में खड़ा करा दिया। उपखंड अधिकारी सिकराय नवनीत कुमार, नायब तहसीलदार डोण्ढीराम मीना, थाना प्रभारी अशोक कुमार सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। एहतियात के तौर पर फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस भी तैनात की गईं। विज्ञापन जैविक और रासायनिक खतरे को देखते हुए जयपुर से सेफ्टी टेक्निकल टीम को बुलाया गया। टैंकर में करीब साढ़े 17 टन गैस भरी हुई थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त वाल्व को सुरक्षित रूप से बंद किया, जिससे संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई। इसके बाद टैंकर को जयपुर स्थित आईओसी प्लांट ले जाकर गैस खाली कराई गई। सेफ्टी अधिकारी निखिल शर्मा ने बताया कि अज्ञात वाहन से टकराने के कारण वाल्व में लीकेज हुआ था, जिसे समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। देर रात अफरा-तफरी के बीच प्रशासन की सतर्कता और तकनीकी टीम की तत्परता से सड़क मार्ग सुचारु रूप से चालू कर दिया गया। इस घटना में किसी प्रकार की हताहत की सूचना नहीं मिली।

CJI सूर्यकांत ने सूर्यकुमार यादव के बारे में क्या कहा, ‘आखिरी ओवर डालने की उम्मीद नहीं होती’

नई दिल्ली देश की सर्वोच्च अदालत में फैसले देने वाले भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने क्रिकेट का उदाहरण दिया है। इस दौरान उन्होंने भारतीय क्रिकेट टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव का नाम लिया। साथ ही कानून के छात्रों को बताया कि किसी एक क्षेत्र में माहिर होना कितना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जैसे क्रिकेट खिलाड़ी सभी भूमिकाएं नहीं निभा सकते। वैसे ही वकील भी इस पेशे के हर क्षेत्र में माहिर नहीं बन सकते। 28 फरवरी को गुजरात के गांधीनगर स्थित GNLU यानी गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 16वें दीक्षांत समारोह में सीजेआई पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि एक सफल टीम तब बनती है, जब सभी की भूमिकाएं स्पष्ट हों और हर एक व्यक्ति को उनकी ताकत के बारे में पता हो। उन्होंने कहा कि कोई भी उम्मीद नहीं करता कि डेथ ओवर्स में सूर्य कुमार यादव गेंदबाजी करें। उन्होंने कहा कि कोई उम्मीद नहीं करता कि बल्लेबाजी करते हुए रन चेज करने के दौरान जसप्रीत बुमराह सबसे आगे रहें। ऐसे ही वकीलों को भी धीरे-धीरे उन क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए, जो उनकी क्षमता है। उन्होंने कहा कि वकीलों को उन ताकतों के इर्द गिर्द ही अपने पहचान बनानी चाहिए। छात्रों को सलाह भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कानून का पेशा उन लोगों को शायद ही कभी इनाम देता है, जो सभी कामों को बराबर करने की कोशिश करते हैं। बार एंड बेंच के अनुसार, सीजेआई ने कहा, ‘मेरे प्रिय ग्रेजुएट्स, इस पेशे में आप कहां फिट बैठते हैं, यह सवाल खुद से शुरुआत में ही पूछना जरूरी है। यहां उन लोगों को शायद ही कभी सफलता मिलती है जो हर काम को बराबर तरीके से करने की कोशिश करते हैं। आप में से कुछ लोग क्रिकेट के शौकीन होंगे, और अगर आप सुनवाइयों के बीच T20 वर्ल्ड कप देख रहे हैं, तो आपने एक बात गौर की होगी। कामयाब टीमें इस आधार पर नहीं बनतीं कि हर खिलाड़ी को हर चीज में माहिर होना चाहिए। कोई भी सूर्यकुमार यादव से आखिरी ओवरों में बॉलिंग करने की उम्मीद नहीं करता, और न ही कोई यह उम्मीद करता कि जसप्रीत बुमराह रन चेज करें। उन्हें सिर्फ वही करने का भरोसा दिया जाता है जिसमें वे माहिर हैं। आपकी वकालत पर भी यही सिद्धांत लागू होता है।’ उन्होंने कहा कि बड़े वकील सब कुछ बराबर करने की कोशिश में ऊंचे पद तक नहीं पहुंचते। उन्होंने कहा, ‘यह ऐसा सवाल नहीं है जो करियर के पहले या तीसरे साल में खुद हल हो जाएगा। लेकिन इस सवाल को खुद से जल्दी पूछना और बार-बार पूछना जरूरी है। क्योंकि जो वकील अपने काम में सबसे ज्यादा सुकून और आत्मविश्वास में दिखते हैं, वे लगभग वही लोग होते हैं जिन्होंने कहीं न कहीं दिखावा करना बंद कर दिया और असल मायने में वकालत शुरू कर दी।’ उन्होंने छात्रों से कहा कि यह पेशा आपसे हर दिन कोई उपलब्धि नहीं मांगता, बल्कि मुश्किल समय में आपकी विश्वसनीयता मांगता है। अंत में यही बात तय करती है कि आप भविष्य में किस तरह के वकील बनेंगे।

‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ के जरिए पनीर, घी, फुलक्रीम दूध व छाछ का बड़े पैमाने पर उत्पादन

हौसले और मेहनत से पूजा ने रचा सफलता का नया अध्याय, 80 लाख का वार्षिक कारोबार हरजीगढ़ी में 50 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया आधुनिक डेयरी प्रोजेक्ट ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ के जरिए पनीर, घी, फुलक्रीम दूध व छाछ का बड़े पैमाने पर उत्पादन लखनऊ अलीगढ़ जनपद के इगलास क्षेत्र स्थित कलवारी गांव की पूजा चौधरी ने अपने दृढ़ निश्चय और लगातार मेहनत के दम पर यह कर दिखाया है कि कम संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। विवाह के बाद जब उन्होंने ससुराल में कदम रखा, तब परिवार दूध के छोटे व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। पूजा ने इस कार्य को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने और बड़े स्तर पर विकसित करने का निर्णय लिया। इसके चलते पूजा ने साल 2023 में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग से 50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ नाम से एक डेयरी प्लांट की स्थापना की। उनके इस दूरदर्शी कदम से आज उनका वार्षिक कारोबार 80 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।  इस डेयरी प्लांट में पनीर, घी, मावा, पाउच पैक फुलक्रीम दूध, छाछ सहित कई अन्य उत्पादों को तैयार किया जाता है। इन उत्पादों की आपूर्ति न केवल जिले में की जाती है, बल्कि मथुरा-वृंदावन तक नियमित रूप से की जा रही है। हरजीगढ़ी में 50 लाख के निवेश से शुरू की आधुनिक डेयरी टप्पल क्षेत्र के छोटे से गांव हरजीगढ़ी में आधुनिक तकनीक से लैस ऑटोमेटिक डेयरी प्लांट की स्थापना करना पूजा के लिए आसान नहीं था। लेकिन जब इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी करना संभव है। इसमें पूजा के पति रोहिताश और परिवार ने उनका पूरा सहयोग किया और अपने छोटे से दुग्ध व्यवसाय को नए मुकाम तक पहुंचा दिया। दरअसल वर्ष 2008 में उनके परिवार ने कामधेनु डेयरी योजना का लाभ लेकर दूध का बूथ शुरू किया था। विवाह के बाद पूजा ने कारोबार में अकाउंट संबंधी जिम्मेदारी संभाली और विस्तार की दिशा में कदम आगे बढ़ाया। विभाग में आवेदन, जमीन की उपलब्धता और ऋण स्वीकृति के बाद प्लांट शुरू करने में थोड़ा विलम्ब जरूर हुआ पूजा ने हार नहीं मानी। डेयरी शुरू होने के बाद पूजा ने 35 लोगों को रोजगार दिया और 70 किसानों से दूध आपूर्ति का अनुबंध भी किया। पनीर, घी, फुलक्रीम दूध व छाछ का उत्पादन ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ के नाम से संचालित इस डेयरी प्लांट में पनीर, घी, मावा, पाउच पैक फुलक्रीम दूध और छाछ सहित अन्य उत्पाद मशीन के जरिये तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों की आपूर्ति जिले के अलावा मथुरा-वृंदावन, हाथरस और अन्य कस्बों तक की जा रही है। पूजा के ससुर इस व्यवसाय को और भी बढ़ाना चाहते हैं। आज लगभग 20 डीलर विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। पूजा ने सभी उत्पादों की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए उत्पादन और वितरण की एक व्यवस्थित व्यवस्था बनाई है जिससे उनका यह व्यवसाय तेजी से बढ़ा है और अच्छा मुनाफा भी हुआ है।  महिला उद्यमिता की प्रेरक पहचान बनीं पूजा अक्सर यह धारणा रही है कि विवाह के बाद बहुओं की भूमिका घर की चारदीवारी तक सीमित हो जाती है। आज भी कई स्थानों पर यह सोच कायम है। लेकिन पूजा के साथ ऐसा नहीं हुआ। शादी के बाद उन्हें परिवार का पूरा सहयोग और प्रोत्साहन मिला, जिसने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया और आगे बढ़ने का हौसला दिया।  पूजा ने राजकीय कन्या महाविद्यालय से स्नातक किया। शुरू से उनकी इच्छा व्यवसाय करने की थी। ससुर और पति के प्रोत्साहन से उन्होंने डेयरी प्लांट में निवेश का निर्णय लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को उन्नत पशुपालन के लिए प्रेरित भी किया और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। आज 35 से अधिक लोग दूध संग्रह कर डेयरी तक पहुंचा रहे हैं। पूजा चौधरी की यह यात्रा ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली हर महिला के लिए प्रेरणास्रोत है, जिन्होंने आत्मनिर्भर बनकर उद्यमिता के क्षेत्र में सशक्त पहचान स्थापित की है।

सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति, 86 जनजातीय ग्राम होंगे लाभान्वित

कृषकों का हित और कल्याण शासन की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़वानी के पानसेमल और वरला में 2 हजार 67 करोड़ रूपये लागत की माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति 86 जनजातीय ग्राम होंगे लाभान्वित मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और नर्मदा नियंत्रण मंडल की बैठक हुई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बड़वानी के नांगलवाड़ी में सोमवार को हुई नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 269वीं बैठक और नर्मदा नियंत्रण मंडल की 86वीं बैठक में 1 हजार 207 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत की पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 860 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत की वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री तथा नर्मदा नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषकों का हित और कल्याण शासन की प्राथमिकता है, जिसे ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जा रही हैं। इन माइक्रो उद्वहन परियोजनाओं से बड़वानी जिले के लाभान्वित होने वाले पानसेमल तहसील के 53 ग्राम और वरला तहसील के 33 ग्राम ऊंचाई में स्थित होने, अल्पवर्षा क्षेत्र होने और भूजल स्तर अत्यंत कम होने से सिंचाई सुविधा से वंचित रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 11 जनवरी 2025 की घोषणा के अनुपालन में पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 14 नवंबर 2025 की घोषणा के अनुपालन में वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना की नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 269वीं बैठक में प्रशासकीय स्वीकृति की अनुशंसा की गई, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में नर्मदा नियंत्रण मंडल की 86वीं बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई है। पानसेमल में 22 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में उपलब्ध होगी सिंचाई सुविधा पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के माध्यम से बड़वानी जिले की तहसील पानसेमल में 22 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना में लगभग 1,207 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत से ग्राम सोंदुल से नर्मदा नदी से 7.20 क्यूमेक (74.65 एमसीएम) जल उद्वहन किया जाएगा, जिससे 53 जनजातीय ग्राम लाभान्वित होंगे। परियोजना अंतर्गत भूमिगत प्रेशराइज्ड पाइप्ड नहर प्रणाली से पाइपलाइन बिछाकर सिंचाई व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे कृषक सीधे स्प्रिंकलर और ड्रिप इरीगेशन पद्धति से खेतों में सिंचाई कर सकेंगे। परियोजना में कोई डूब क्षेत्र नहीं है। भूमिगत पाइपलाइन, राइजिंग मेन और ग्रैविटी मेन के लिए 48.79 हेक्टेयर निजी भूमि का अस्थाई भूअर्जन, पंप हाउस और ट्रांसमिशन लाइन निर्माण के लिए 4 हेक्टेयर स्थाई भूअर्जन तथा 18 हेक्टेयर वन भूमि का अर्जन किया जाएगा। परियोजना के तहत 3 पंप हाउस से कुल 339.67 मीटर तक जल उद्वहन का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए 5 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जाएगा। परियोजना में कुल 34.60 मेगावाट विद्युत की आवश्यकता होगी जिस पर वार्षिक विद्युत व्यय 34 हजार 249 रुपए प्रति हेक्टेयर रहेगा। वरला के 33 जनजातीय ग्रामों में 15 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र होगा सिंचित वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना अंतर्गत बड़वानी जिले की तहसील अंजड़ के ग्राम मोहिपुरा से नर्मदा नदी से 4.96 क्यूमेक (51.42 एमसीएम) जल उद्वहन किया जाएगा जिससे तहसील वरला के 33 जनजातीय ग्रामों में 15 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना की कुल लागत 860 करोड़ 53 लाख रुपए प्राक्कलित की गई है, जिसमें 4 पंप हाउस के माध्यम से 390 मीटर तक जल उद्वहन का प्रावधान किया गया है। परियोजना में 30.5 मेगावाट विद्युत आवश्यकता होगी जिस पर 33 हजार 316 रुपए वार्षिक विद्युत व्यय प्रति हेक्टेयर रहेगा। परियोजना के लिए 30 हेक्टेयर वन भूमि, 204.13 हेक्टेयर निजी भूमि का अस्थाई तथा 7.5 हेक्टेयर निजी भूमि का स्थाई भूअर्जन किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव तथा उपाध्यक्ष, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि पानसेमल और वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं से लाभान्वित होने वाले ग्राम जनजातीय बहुल होने के साथ वन से घिरे हुए हैं। इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद बड़वानी जिले में कुल 70 प्रतिशत क्षेत्रफल में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, जो वर्तमान में 60 प्रतिशत है। उन्होंने परियोजनाओं के विभिन्न घटकों का तकनीकी विवरण प्रस्तुत किया। बैठक में 10 नवंबर 2025 को आयोजित नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 268वीं बैठक तथा नर्मदा नियंत्रण मंडल की 85वीं बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि भी की गई।  

होली और रमजान पर एमपी में सुरक्षा कड़ी, सीएम मोहन यादव ने जारी किए सख्त निर्देश

भोपाल  होली और रमजान समेत आगामी त्योहारों को लेकर मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद राजधानी भोपाल समेत प्रदेश भर में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार हाई अलर्ट मोड में है। सीएम मोहन यादव ने प्रदेशभर के अधिकारियों को सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। VC में दिए स्पष्ट और सख्त निर्देश, एमपी को बताया शांति का टापू वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई इस समीक्षा बैठक में प्रदेश भर के जिलों के एसपी ऑनलाइन शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी अफसरों को कहा कि मध्य प्रदेश शांति का टापू है, इसकी ये छवि बनाए रखना है। वहीं उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि शांति और सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। त्योहार खुशियों के हों, तनाव के नहीं- सीएम सीएम ने समीक्षा बैठक आयोजित कर वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष निगरानी रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि संवेदनशील इलाकों की पहचान कर उन क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया जाए। इसके साथ ही सोशल मीडिया मॉनिटरिंग तेज करने और अफवाहों पर तत्काल एक्शन करने और निपटने को कहा है। मोहन यादव ने बैठक में कहा कि त्योहारों का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, समाज को तोड़ना नहीं। प्रशासन प्राथमिकता तय करे कि आम नागरिक सुरक्षित और बेफिक्र होकर त्योहार मनाए। यहां जानें प्रशासन के खास इंतजाम संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च- जिन क्षेत्रों को संवेदनशील माना गया है, जहां पहले तनाव की घटनाएं सामने आई हैं, वहां पुलिस और प्रशासन संयुक्त रूप से फ्लैग मार्च करेगा। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी- भीड़भाड़ वाले बाजार, धार्मिक स्थल और जुलूस मार्गों पर ड्रोन कैमरों के साथ ही अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाएं गए हैं। शांति समितियों की बैठक– स्थानीय स्तर पर धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सामंजस्य की अपील की जा रही है। अफवाहों पर तुरंत कार्रवाई के आदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम आगि पर भ्रामक जानकारी पोस्ट करने पर, अफवाह फैलाने वालों पर साइबर सेल की नजर रहेगी। प्रशासन का फोकस- प्री एम्प्टिव एक्शन जानकारी के मुताबिक इस बार रणनीति केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एहतियात बरतना है। जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी छोटी घटना को हल्के में न लें। रात के समय गश्त बढ़ाई जाए। जुलूस मार्गों पर जुलूस पूर्व जांच की जाए। राजनीतिक और सामाजिक संदेश सीएम मोहन यादव ने यह भी संकेत दिए हैं कि त्योहारों को लेकर किसी तरह की राजनीति या उकसावों की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों पर कार्रवाई हो, ताकि आमजन में भरोसा कायम रहे। बता दें कि रमजान के बीच होली पर्व आने से प्रशासन के लिए सौहार्द्र और शांति बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। क्योंकि एक तरफ रंग-गुलाल और जुलूसों का माहौल होता है, तो दूसरी तरफ रोजा और इबादत की पाबंदियों का समय। ऐसे में समय, मार्ग और कार्यक्रमों में समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाता है। जन-जन से अपील अफवाहों पर ध्यान न दें संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी का ध्यान रखते हुए कोई भी पोस्ट शेयर करें सांप्रदायिक सौहार्द्र और शांति बनाए रखें

CUET-PG 2026 एडमिट कार्ड जारी, एग्जाम सेंटर की जानकारी मिलेगी इस दिन

देशभर के विश्वविद्यालयों में पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए होने वाली कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट-पीजी (सीयूईटी-पीजी) 6 से 27 मार्च के बीच किया जाएगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित परीक्षा के लिए 6 और 7 मार्च को निर्धारित परीक्षाओं के लिए प्रवेश पत्र जारी कर दिए है। संबंधित विद्यार्थी आधिकारिक वेबसाइट से अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।  इंदौर में 3 परीक्षा केंद्र बने अन्य तिथियों की परीक्षाओं के प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे। इंदौर जिले में इस बार दो से तीन परीक्षा केंद्र बनाए गए है। यहां करीब 15 से 20 हजार अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने का अनुमान है। अधिकारियों के अनुसार परीक्षा शहर की सूचना पर्ची (एग्जाम सिटी इंटिमेशन स्लिप) परीक्षा तिथि से करीब 10 दिन पहले वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि विद्यार्थी समय रहते अपनी यात्रा और ठहरने की व्यवस्था कर सकें। विषयवार परीक्षा तिथियां अलग-अलग निर्धारित एनटीए ने परीक्षा को अलग-अलग सत्रों में आयोजित करने का कार्यक्रम तय किया है। कुल 15 दिनों में 44 सत्र आयोजित होंगे। कुछ तिथियों 14, 15, 20, 21, 22, 23 और 26 मार्च को परीक्षा नहीं रखी गई है। जिन दिनों परीक्षा होगी, उन दिनों दो से तीन शिफ्ट में पेपर लिए जाएंगे। पहले दिन योग, खेल विज्ञान, संस्कृत, उर्दू और टेक्सटाइल डिजाइन जैसे विषयों की परीक्षा से शुरुआत होगी। विषयवार परीक्षा तिथियां अलग-अलग निर्धारित की गई है। बदला हुआ परीक्षा पैटर्न इस बार परीक्षा पैटर्न में संशोधन किया गया है। प्रश्नपत्र 300 अंकों का होगा, जिसे हल करने के लिए 90 मिनट का समय दिया जाएगा। देशभर में करीब 4 लाख 11 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होंगे। कुल 157 विषयों के लिए परीक्षा आयोजित की जा रही है। 41 भाषाओं में प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों को हिंदी और अंग्रेजी के साथ कुल 41 भाषाओं में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि, कुछ पाठ्यक्रमों के लिए भाषा संबंधी विशेष प्रावधान किए गए हैं। एमटेक और उच्च विज्ञान विषयों के प्रश्नपत्र केवल अंग्रेजी में होंगे। आचार्य पाठ्यक्रम के प्रश्नपत्र केवल संस्कृत में उपलब्ध रहेंगे। भारतीय ज्ञान प्रणाली और बौद्ध दर्शन के प्रश्नपत्र त्रिभाषी (हिंदी. संस्कृत और अंग्रेजी) होंगे। हिंदू अध्ययन विषय के पेपर हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध रहेंगे। 

100 साल से बिना होलिका दहन की होली! छत्तीसगढ़ के इन गांवों की रहस्यमयी परंपरा

कोरबा कोरबा जिले के धमनागुड़ी और खरहरी गांवों में एक अनूठी परंपरा है। यहां कई वर्षों से होलिका दहन नहीं किया जाता है। ग्रामीण रंग गुलाल भी नहीं खेलते हैं। यह परंपरा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रहती है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्वजों की विशेष मान्यता और आस्था के कारण ऐसा होता है। गांव में लोग शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना कर पर्व मनाते हैं। हालांकि, अग्नि प्रज्वलन की परंपरा का पालन नहीं किया जाता। धमनागुड़ी निवासी गनपत सिंह कंवर ने बताया कि लगभग सौ वर्षों से होली नहीं मनाई जाती है। खरहरी के आसपास के आश्रित गांवों में बुजुर्ग और बैगा देव स्थल में पूजा करते हैं। वे रंग गुलाल चढ़ाते हैं और टीका लगाते हैं। इन गांवों में आज भी होलिका दहन और रंग गुलाल नहीं खेला जाता। आज तक होली के कारण कोई विवाद या मारपीट की स्थिति नहीं बनी है। अनहोनी की आशंका खरहरी गांव निवासी तामेश्वर सिंह पैकरा ने बताया कि पिछले कई वर्षों से होली नहीं मनाई जाती। नौ साल पहले एक परिवार ने होली मनाने की कोशिश की थी। रंग गुलाल लगाने के कुछ समय बाद उनके घर में आग लग गई। इस घटना के बाद से गांव में होली नहीं खेली जाती है। गांव वालों का मानना है कि होली खेलने से अनहोनी की आशंका बनी रहती है। यदि कोई व्यक्ति गांव से बाहर दूसरी जगह होली खेलकर आता है। उसे गांव में प्रवेश करने से पहले रंग गुलाल धोना पड़ता है। इसके बाद ही वह गांव में प्रवेश कर सकता है। यह नियम आज भी सख्ती से लागू है। गांव में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए यह परंपरा कायम है।

एमपी में बढ़ी गर्मी, पारा 35 डिग्री के पार, अप्रैल-मई में और तेज गर्मी का खतरा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मार्च ने आते ही तेवर दिखा दिए हैं। महीने के पहले ही दिन प्रदेश के कई शहरों में तापमान 30 डिग्री के पार पहुंच गया, जबकि निमाड़ क्षेत्र के खरगोन में पारा 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में भी तेज धूप ने लोगों को गर्मी का अहसास करा दिया। मौसम विभाग का अनुमान है कि अप्रैल और मई सबसे ज्यादा तपिश भरे रहेंगे। ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में पारा 45 डिग्री के पार जा सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग भी भीषण गर्मी की चपेट में रहेंगे।  अगले 4 दिन और चढ़ेगा पारा मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले चार दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। यानी मार्च की शुरुआत ही तपिश भरी रहने वाली है। दिन के साथ रात का तापमान भी धीरे-धीरे ऊपर जाएगा। रविवार को पचमढ़ी को छोड़ प्रदेश के लगभग सभी शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री या उससे ज्यादा दर्ज किया गया। धार, गुना, खंडवा, श्योपुर, खजुराहो, मंडला, नरसिंहपुर, सतना और सिवनी जैसे जिलों में पारा 33 डिग्री से ऊपर पहुंच गया। रातें भी हो रहीं गर्म फरवरी के आखिर और मार्च की शुरुआत में रात का तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है। जबलपुर में न्यूनतम तापमान 19.3 डिग्री और सतना में 18.2 डिग्री दर्ज किया गया। धार, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, सागर, टीकमगढ़ और उमरिया समेत कई शहरों में रात का पारा 17 डिग्री से अधिक रहा। रंगपंचमी पर बदल सकता है मौसम गर्मी के बीच राहत की भी उम्मीद है। 4 मार्च से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में सक्रिय हो रहे नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर दो दिन बाद मध्य प्रदेश में देखने को मिल सकता है। इसके चलते रंगपंचमी के आसपास कुछ जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। यदि सिस्टम सक्रिय रहता है तो तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव भी हो सकता है। 40 डिग्री तक पहुंच सकता है पारा पिछले वर्षों के ट्रेंड पर नजर डालें तो मार्च में दिन गर्म, रातें अपेक्षाकृत ठंडी और बीच-बीच में बारिश का दौर देखने को मिलता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही संकेत मिल रहे हैं। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन का तापमान 40 डिग्री तक पहुंच सकता है, जबकि रातें 10 से 17 डिग्री के बीच रह सकती हैं। ग्वालियर में तापमान में उतार-चढ़ाव सबसे ज्यादा देखने को मिलता है।  

गोवंश प्रतिषेध मामले में हाईकोर्ट का फैसला: अपीलीय आदेश खारिज, याचिकाकर्ता को राहत

जबलपुर  जबलपुर ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनवाई पूरी कर सुनाई गई सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए अपीलीय न्यायालय ने एक अन्य व्यक्ति के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत कार्रवाई के आदेश जारी किए थे। इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ए.के. सिंह की एकलपीठ ने अपीलीय कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। छिंदवाड़ा निवासी मोहम्मद नासिर कुरैशी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने कोमल सोलंकी को मध्य प्रदेश गोवंश प्रतिषेध अधिनियम, 2004 की धारा 9 तथा मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 सहपठित धारा 192 के तहत 9 अप्रैल 2019 को दोषी ठहराया था। उक्त निर्णय के खिलाफ कोमल सोलंकी ने अपील प्रस्तुत की थी।अपील की सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशंस जज ने वाहन मालिक एवं याचिकाकर्ता के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि धारा 319 के अंतर्गत किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई तभी संभव है, जब ट्रायल के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों में उसकी स्पष्ट भूमिका सामने आए। पुलिस द्वारा कोमल सोलंकी के विरुद्ध प्रस्तुत चार्जशीट में याचिकाकर्ता की किसी भी प्रकार की भूमिका का उल्लेख नहीं था। ट्रायल के दौरान पेश तीन गवाहों ने भी याचिकाकर्ता के संबंध में कोई आरोप नहीं लगाया। एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अपीलीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश विधि-सम्मत नहीं है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऐसा सिद्धांत आपराधिक न्यायशास्त्र में मान्य नहीं है, अतः इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता। परिणामस्वरूप, अपीलीय कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ए. उस्मानी ने पैरवी की।

तेज रफ्तार का कहर: उन्नाव में खड़े ट्रक से भिड़ी बस, 3 की मौत, 31 लोग घायल

उन्नाव लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर सिरधरपुर और देवखरी गांव के पास मथुरा और आगर डिपो की दो रोडवेज बसें एक ही ट्रक में भीड़ गईं। हादसे में तीन यात्रियों की मौत हो गई जबकि दोनों बसों के 31 यात्री घायल हो गए। पुलिस ने घायलों को बांगरमऊ सीएचसी भेजा। वहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है। दोनों घटनाएं चालक को झपकी आने से बताई जा रही हैं। एक्सप्रेसवे पर रविवार रात 12 बजे एक ट्रक किलोमीटर संख्या 226 सिरधरपुर गांव के सामने सड़क घेरकर खड़ा था। रात करीब 12 आगरा फोर्ट की बस खड़े ट्रक में पीछे से भिड़ गई। हादसे में 14 सवारी घायल हो गईं। हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने पांच एंबुलेंस से सभी घायलों को बांगरमऊ स्वास्थ्य केंद्र भिजवाया साथ ही हाइड्रा मंगाकर क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने का प्रयास शुरू किया। पुलिस रोडवेज बस हटवाने के बाद रात्रि 2:30 बजे क्षतिग्रस्त ट्रक को प्रीतमपुरा चौकी ले जाया जा रहा था, तभी आगरा फोर्ट की ही दूसरी रोडवेज बस इस ट्रक में पीछे से टकरा गई। हादसे में तीन सवारियों की मौत हो गई उसमें बैठी 17 सवारियां घायल हो गईं। फिर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और घायलों को स्वास्थ्य केंद्र लाई। डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों बसों के घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। मृतकों की पहचान न होने पर शव पोस्टमार्टम हाउस में रखवाए गए हैं। कोतवाल अखिलेशचंद्र पांडेय ने बताया कि ट्रक सड़क के किनारे खड़ा था। दोनों बसों में 31 सवारियां घायल हुई हैं। तीन की मौत हुई है। शवों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 951 गिद्धों की पहचान, सर्वे के दौरान सात प्रजातियों की हुई पुष्टि

जबलपुर  मध्य प्रदेश वन विभाग के निर्देशानुसार वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 20 से 22 फरवरी 2026 तक गिद्धों की त्रिदिवसीय गणना सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गिद्धों की वास्तविक संख्या, उनकी प्रजातियों और आवास की स्थिति का आकलन करना था। वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 20 फरवरी को 951, 21 फरवरी को 741 तथा 22 फरवरी को 844 गिद्ध दर्ज किए गए। तीन दिनों के दौरान अलग-अलग स्थलों पर की गई इस गणना में गिद्धों की उल्लेखनीय उपस्थिति सामने आई, जो क्षेत्र में अनुकूल पर्यावरण और संरक्षण प्रयासों की सकारात्मक स्थिति को दर्शाती है। वर्ष 2026 के सर्वेक्षण में कुल सात प्रजातियों की पहचान की गई। इनमें सबसे अधिक संख्या भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर) की पाई गई, जबकि व्हाइट रंप्ड गिद्ध भी बड़ी संख्या में दर्ज किए गए। इजिप्शियन गिद्ध की संख्या मध्यम स्तर पर रही, वहीं रेड-हेडेड वल्चर अपेक्षाकृत कम संख्या में मिले। इसके अलावा यूरेशियन ग्रिफॉन, हिमालयन ग्रिफॉन और सिनेरियस गिद्ध जैसी प्रवासी प्रजातियों की उपस्थिति भी दर्ज की गई। इन दुर्लभ एवं प्रवासी प्रजातियों की मौजूदगी टाइगर रिजर्व की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गिद्धों की नियमित मॉनिटरिंग और संरक्षण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से उनकी संख्या में स्थिरता और वृद्धि की उम्मीद है। भविष्य में भी इस तरह की वैज्ञानिक गणना जारी रखी जाएगी, ताकि गिद्धों के संरक्षण के लिए ठोस रणनीति बनाई जा सके।

दीपावली, होली, नवरात्र और गणेश महोत्सव जैसे पर्वों में खुदरा व्यापार में भी हुई उल्लेखनीय वृद्धि

यूपी में ‘फेस्टिवल इकोनॉमी’ बनी आर्थिक इंजन सुरक्षा और सुशासन से बदली तस्वीर, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था से बढ़ा भरोसा, त्योहारों के दौरान कई गुना तक बढ़ा फुटफॉल दीपावली, होली, नवरात्र और गणेश महोत्सव जैसे पर्वों में खुदरा व्यापार में भी हुई उल्लेखनीय वृद्धि कुम्हार, मूर्तिकार और हस्तशिल्प कारीगरों को बड़े ऑर्डर, स्वयं सहायता समूहों का त्योहार आधारित कारोबार तेज भव्य आयोजनों से बढ़ा धार्मिक पर्यटन, अयोध्या-वाराणसी-मथुरा बने आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से आयोजन हुए व्यवस्थित, स्थानीय विकास कार्यों को भी मिली गति लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में पर्व-त्योहारों के आयोजन का स्वरूप बदला है। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक तैयारी और राजनीतिक स्तर पर बढ़ी सक्रियता के चलते प्रमुख पर्वों-त्योंहारों पर सांस्कृतिक आयोजनों का दायरा कहीं ज्यादा व्यापक हो गया है। इसका सीधा असर प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। योगी सरकार के प्रयासों से 9 वर्षों में बदले परिदृश्य ने प्रदेश में इस फेस्टिवल इकॉनमी को जन्म दिया है, जिसके माध्यम से न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी बाजार में कारोबार कई गुना तक बढ़ रहा है। सुरक्षा के भरोसे ने त्योहारों को बनाया आर्थिक इंजन उत्तर प्रदेश में फेस्टिवल इकॉनमी को गति देने में योगी सरकार में सुदृढ़ कानून-व्यवस्था निर्णायक कारक बनी है। प्रमुख पर्व-त्योहारों पर राज्य से लेकर जिला स्तर तक विशेष सुरक्षा प्लान लागू किए जाते हैं। संवेदनशील जिलों और धार्मिक नगरों में अतिरिक्त पुलिस व पीएसी बल की तैनाती, महिला सुरक्षा दल और दंगा नियंत्रण इकाइयों की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित की जाती है। ड्रोन से रियल टाइम निगरानी, प्रमुख बाजारों व आयोजन स्थलों पर व्यापक सीसीटीवी कवरेज और इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के जरिए 24×7 मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। यातायात के लिए पूर्व निर्धारित डायवर्जन प्लान और अतिरिक्त सार्वजनिक परिवहन भी लागू होता है। प्रशासन और व्यापारी संगठनों के अनुसार बेहतर सुरक्षा माहौल का सीधा असर बाजार पर दिखा है। होली, दीपावली और नवरात्र जैसे अवसरों पर कई प्रमुख बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में 30 से 50 प्रतिशत तक अधिक फुटफॉल दर्ज किया गया। अधिकारियों का मानना है कि भरोसेमंद कानून-व्यवस्था ने न सिर्फ लोगों को खुलकर पर्व-त्योहारों का उत्सव मनाने का अवसर दिया, बल्कि व्यापार व सेवा क्षेत्र में विश्वास का वातावरण भी तैयार किया है, जिससे त्योहार आर्थिक गतिविधियों का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। बाजार गतिविधियों का बढ़ा दायरा व्यापार मंडल पदाधिकारियों का कहना है कि पिछले नौ वर्षों में त्योहारों के दौरान बाजार गतिविधियों का दायरा स्पष्ट रूप से बढ़ा है। दीपावली, होली और नवरात्र जैसे प्रमुख अवसरों पर खुदरा बाजार में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक कारोबार दर्ज किया जा रहा है। कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सर्राफा, मिठाई, सजावटी सामग्री और पूजा उत्पादों की मांग में लगातार उछाल आया है। व्यापारिक संगठनों का दावा है कि संगठित प्रबंधन और बेहतर कानून-व्यवस्था के कारण ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है, जिससे बिक्री के आंकड़े मजबूत हुए हैं। त्योहारों ने बढ़ाया फुटफॉल, सेवा क्षेत्र को मिला व्यापक लाभ त्योहारों के सांस्कृतिक आयोजनों के विस्तार का प्रभाव पर्यटन और सेवा क्षेत्र में भी दिखाई देता है। अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और मथुरा जैसे शहरों में बड़े आयोजनों के दौरान होटल ऑक्यूपेंसी दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। परिवहन, टूर ऑपरेटर, टैक्सी, ई-रिक्शा और खानपान कारोबार में भी उछाल आया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार संगठित और सुरक्षित आयोजनों के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे अस्थायी और स्थायी दोनों प्रकार के रोजगार के अवसर बढ़े हैं। अधिकारियों का मानना है कि कानून-व्यवस्था की सख्ती, प्रशासनिक समन्वय और त्योहारों के योजनाबद्ध विस्तार ने इन आयोजनों को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों का सशक्त माध्यम बना दिया है। कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा आर्थिक लाभ त्योहारों के विस्तारित स्वरूप का प्रभाव परंपरागत कारीगरों पर स्पष्ट दिखाई देता है। अयोध्या के दीपोत्सव के दौरान लाखों दीयों की मांग ने आसपास के जिलों के कुम्हारों को बड़े स्तर पर ऑर्डर उपलब्ध कराए। कई स्थानों पर प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से स्थानीय कुम्हारों से सीधे खरीद की व्यवस्था की गई, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसी तरह, वाराणसी की देव दीपावली और प्रयागराज के माघ मेले जैसे आयोजनों में हस्तशिल्प, पूजा सामग्री और पारंपरिक सजावटी वस्तुओं की बिक्री में तेज उछाल दर्ज किया गया। मथुरा-वृंदावन की होली के दौरान गुलाल, पारंपरिक परिधान और धार्मिक उपहार सामग्री के कारोबार में बढ़ोतरी देखी गई। नवरात्र और दुर्गा पूजा के समय मूर्तिकारों, पंडाल निर्माताओं, लाइटिंग और साउंड सिस्टम से जुड़े व्यवसायों को बड़े पैमाने पर काम मिला। कई जिलों में स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को प्राथमिकता देने की पहल से क्षेत्रीय रोजगार को बल मिला। महिला स्वयं सहायता समूहों ने भी इस अवसर को आय के स्रोत में बदला। दीपावली पर दीये और मोमबत्ती, नवरात्र में प्रसाद पैकिंग, होली पर हर्बल गुलाल, पापड़-चिप्स जैसे पारंपरिक खाद्य उत्पाद और त्योहार आधारित गिफ्ट पैक्स तैयार कर समूहों ने शहरी बाजारों और सरकारी मेलों में स्टॉल के माध्यम से उल्लेखनीय बिक्री की। ग्रामीण उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच मिलने से कुटीर उद्योगों को स्थायी बाजार आधार मिला है। पारंपरिक आयोजनों का पुनर्जागरण प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान कई ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हुए हैं, जो पहले सीमित दायरे में होते थे, लेकिन अब उनका विस्तार राज्य स्तर तक दिखाई देता है। अयोध्या का दीपोत्सव और वाराणसी की देव दीपावली के अलावा रंगभरी एकादशी का आयोजन अब बड़े पैमाने पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के साथ होता है। इसी प्रकार कृष्ण जन्मोत्सव (मथुरा-वृंदावन) में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यापक प्रबंधन व्यवस्था लागू की गई है। श्रावणी मेले और कांवड़ यात्रा के आयोजन का स्वरूप भी बदला है। गणेश महोत्सव, जो पहले मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर सीमित था, अब कई शहरों में बड़े सांस्कृतिक आयोजनों के रूप में उभरा है। पंडाल निर्माण, मूर्ति निर्माण, लाइटिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दायरा बढ़ा है। इसके अतिरिक्त रामोत्सव, कृष्णोत्सव, बुद्ध महोत्सव, महाशिवरात्रि मेले, चित्रकूट दीप महोत्सव जैसे आयोजनों को भी संगठित रूप से बढ़ावा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन आयोजनों को पर्यटन कैलेंडर से जोड़ने और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के … Read more

हाईस्पीड कनेक्टिविटी: नमो भारत से मेरठ से दिल्ली मिनटों में, सफर बना सुपरफास्ट

मेरठ नमो भारत (RRTS) ट्रेन ने मेरठ को दिल्ली से इस कदर जोड़ दिया है कि अब देश की राजधानी के प्रमुख स्थल जैसे कनाट प्लेस, लालकिला, एम्स और आईजीआई एयरपोर्ट मेरठवासियों की सीधी पहुंच में आ गए हैं। नमो भारत और दिल्ली मेट्रो के बीच बढ़ते समन्वय ने न केवल समय की बचत की है, बल्कि यात्रियों को ‘एक ही ऐप’ से दोनों ट्रेनों की टिकट बुक करने की सुविधा भी दे दी है। अब यात्रियों को दिल्ली मेट्रो के लिए अलग से लाइन में लगने या ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है। एम्स और शिक्षण संस्थानों के लिए वरदान स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दिल्ली जाने वाले मरीजों के लिए नमो भारत एक लाइफलाइन साबित हो रही है। यदि किसी मरीज को स्ट्रेचर के साथ एम्स (AIIMS) ले जाना हो, तो ट्रेन में इसके लिए विशेष प्रबंध हैं। शताब्दीनगर स्टेशन से सराय काले खां और फिर मेट्रो के जरिए मात्र 77 मिनट में एम्स पहुंचा जा सकता है, जिस पर कुल 212 रुपये का खर्च आता है। इसी तरह, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) जाने वाले छात्र अब मात्र 78 मिनट में और 183 रुपये खर्च कर अपने कॉलेज पहुंच सकते हैं। वहीं, जेएनयू (JNU) जाने के लिए न्यू अशोक नगर रूट से 96 मिनट का समय और 214 रुपये का खर्च आता है।   एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों की सीधी कनेक्टिविटी हवाई यात्रा करने वालों के लिए भी यह सफर अब तनावमुक्त हो गया है। शताब्दीनगर से आनंद विहार और वहां से मेट्रो की विभिन्न लाइनों का उपयोग कर यात्री केवल 96 मिनट में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (टर्मिनल-3) पहुंच सकते हैं। इस पूरी यात्रा का कुल खर्च लगभग 247 रुपये बैठता है। वहीं, कश्मीरी गेट आईएसबीटी (ISBT) जाने के लिए गाजियाबाद स्टेशन से मेट्रो बदलना सबसे सस्ता और तेज विकल्प है, जहां यात्री 65 मिनट में महज 153 रुपये में पहुंच सकते हैं। पर्यटन और प्रशासनिक केंद्रों तक आसान पहुंच दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनाट प्लेस और चांदनी चौक जैसे बाजारों तक पहुंचना अब बेहद सरल है। शताब्दीनगर से आनंद विहार होते हुए मात्र 59 मिनट में कनाट प्लेस और 70 मिनट में चांदनी चौक पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा, इंडिया गेट, सुप्रीम कोर्ट और नए संसद भवन (सेवा तीर्थ स्टेशन) जाने के लिए भी नमो भारत और ब्लू लाइन मेट्रो का तालमेल यात्रियों का समय बचा रहा है। प्रगति मैदान स्थित ‘भारत मंडपम’ जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन सबसे नजदीकी पॉइंट है, जहां मेरठ से आनंद विहार होकर आसानी से पहुंचा जा सकता है। स्मार्ट कनेक्टिविटी और पार्किंग की सुविधा नमो भारत का शताब्दीनगर स्टेशन शहर के कई हिस्सों को जोड़ता है और यहां पार्किंग की बेहतर व्यवस्था होने के कारण यात्री इसे अपना मुख्य आधार बना रहे हैं। नमो भारत का मोबाइल ऐप न केवल टिकट बुकिंग में मदद करता है, बल्कि यात्रियों को यह भी गाइड करता है कि उन्हें किस स्टेशन पर ट्रेन बदलनी है, जिससे पहली बार दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए भी सफर काफी आसान हो गया है।

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