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स्किन केयर की सही शुरुआत: बिना महंगे प्रोडक्ट्स कैसे रखें त्वचा हेल्दी

आज के समय में धूल, प्रदूषण और तनाव का सबसे पहला असर हमारी त्वचा पर दिखता है। अगर आप भी अपनी स्किन का ख्याल रखना शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि स्किन केयर कोई मुश्किल काम नहीं है। एक सही रूटीन का मतलब महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, बल्कि अपनी त्वचा की जरूरतों को समझना है। एक बेसिक स्किन केयर रूटीन को दो हिस्सों में बांटा जाता है- मॉर्निंग (AM) और नाइट (PM)। आइए जानते हैं कि अगर आप बिगिनर हैं, तो आपकी मॉर्निंग और ईवनिंग स्किन केयर रूटीन कैसी होनी चाहिए। मॉर्निंग स्किन केयर रूटीन सुबह के रूटीन का मुख्य उद्देश्य आपकी त्वचा को हाइड्रेट करना और सूरज की हानिकारक किरणों से बचाना होता है।     क्लींजिंग- सुबह उठने के बाद एक माइल्ड फेस वॉश से चेहरा धोएं। यह रात भर में त्वचा पर जमा हुए तेल और पसीने को साफ कर देता है।     मॉइस्चराइजिंग- चेहरा धोने के बाद त्वचा को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। अपनी स्किन टाइप (ऑयली, ड्राई या कॉम्बिनेशन) के अनुसार एक हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं। यह त्वचा में नमी को लॉक करता है।     सनस्क्रीन- सबसे जरूरी स्टेप है। चाहे आप घर के अंदर हों या बाहर, सनस्क्रीन लगाना कभी न भूलें। यह त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने, झुर्रियों और टैनिंग से बचाता है। कम से कम SPF 30 वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं। नाइट स्किन केयर रूटीन रात का समय त्वचा की मरम्मत  के लिए होता है। रात में आपकी स्किन सेल्स खुद को रिपेयर करती हैं, इसलिए यह रूटीन बहुत जरूरी है।     डबल क्लींजिंग या डीप क्लीन- अगर आपने दिन में मेकअप या सनस्क्रीन लगाया है, तो उसे अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। पहले क्लींजिंग मिल्क या ऑयल से चेहरा साफ करें, फिर फेस वॉश का इस्तेमाल करें।     टोनिंग- अगर आपकी स्किन ऑयली है, तो आप टोनर का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह त्वचा के pH लेवल को संतुलित करता है और पोर्स को साफ रखता है।     आई क्रीम या सीरम- अगर आपको डार्क सर्कल्स या मुहांसों जैसी समस्या है, तो रात में इनसे जुड़े ट्रीटमेंट प्रोडक्ट्स या आई क्रीम लगाएं।     मॉइस्चराइजर- रात में त्वचा को गहरे पोषण की जरूरत होती है। ऐसा मॉइश्चराइजर चुनें जिसमें हयालूरोनिक एसिड या सेरामाइड्स हों, जो रात भर आपकी त्वचा को रिपेयर कर सकें। बिगिनर्स के लिए कुछ जरूरी बातें पैच टेस्ट- कोई भी नया प्रोडक्ट पूरे चेहरे पर लगाने से पहले उसे हाथ पर लगाकर 24 घंटे तक चेक करें कि कहीं जलन तो नहीं हो रही।     धैर्य रखें- किसी भी स्किन केयर रूटीन का असर दिखने में कम से कम 4 से 6 हफ्ते का समय लगता है। इसलिए रातों-रात चमत्कार की उम्मीद न करें।     पानी पिएं- बाहर से लगाए गए प्रोडक्ट्स तभी असर करेंगे जब आपका शरीर अंदर से हाइड्रेटेड होगा। दिन भर में भरपूर पानी पिएं।     अपनी स्किन टाइप पहचानें- बिना अपनी स्किन टाइप जाने कोई भी प्रोडक्ट न खरीदें। अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है, तो किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।  

स्मार्ट सिटी की ओर एक और कदम: दिल्ली के चिड़ियाघर में QR कोड से मिलेगी वन्यजीवों की जानकारी

नई दिल्ली चिड़ियाघर में घूमने आए विजिटर्स अब वन्यजीवों के बाड़े के बाहर QR कोड वाले साइन बोर्ड से वन्यजीवों की सारी जानकारी तुरंत पढ़ सकेंगे। रेनोवेशन और विजिटर्स की सुविधा के लिए नए साइन बोर्ड बदलने के साथ पहली बार कई साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं। 1000 से अधिक साइन बोर्ड लगाने का काम शुरू हो चुका है। नाम के साथ लगे होंगे QR कोड 20 बीटों के 72 बाड़ों में 96 प्रजातियों के करीब 1300 वन्यजीव रह रहे हैं। नए साइन बोर्ड में उस जानवर के नाम की जानकारी के साथ QR कोड लगे होंगे। मोबाइल से कोड स्कैन करने पर जानवरों की सारी जानकारी मिल जाएगी। चिड़ियाघर के एक अधिकारी ने बताया कि इससे वाइल्डलाइफ और पर्यावरण के प्रति लोगों का रूझान बढ़ाने के उद्देश्य में सफलता मिलेगी। चिड़िया घर में लगाए जाएंगे नए बोर्ड चिड़ियाघर के ज्यादातर साइन बोर्ड बहुत पुराने हो चुके थे। कई बोर्ड में ठीक से पढ़ा भी नहीं जा पा रहा था। खतरनाक जानवर की सूचना देते हुए बाड़े की रेलिंग से दूर रहने आदि के करीब 100 वॉर्निंग साइन बोर्ड, बाड़ों में बंद जानवरों के नाम के 200 से अधिक साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। रिक्शा स्टॉप पर भी बोर्ड बैटरी रिक्शा स्टॉप पर भी नए साइन बोर्ड लगेगे। अभी उनकी हालत बहुत ठीक नहीं है। कई जगह साइन बोर्ड नहीं है। लेकिन विजिटर को बैटरी रिक्शा लेने के लिए अब इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। चिड़ियाघर के कई रास्तों की जानकारी देते हुए भी बोर्ड लगाए जा रहे है। किस रास्ते पर किस जानवर का बाड़ा है, इसकी जानकारी भी साइन बोर्ड से दी जाएगी। इससे चिड़ियाघर घूमने आए लोगों को अपना रूट तय करने में आसानी मिलेगी। उन्हें अपनी पसंद के जानवरों को ढूंढ़ने में अब ज्यादा भटकना नहीं पड़ेगा। हाथी से बाघ तक, एक दिन के लिए भी ले सकेंगे गोद चिड़ियाघर अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए ‘वन्यजीव गोद’ योजना में बड़े सुधार करने जा रहा है। अब आप किसी वन्यजीव को एक दिन के लिए भी गोद ले सकते हैं। तिमाही और छमाही समय तक के लिए भी गोद लिया जा सकता है। मार्च से यह योजना चालू हो रही है। इसके तहत वन्यजीव की खुराक और रखरखाव का खर्चा शामिल है। 2022 में शुरू हुई वन्यजीव गोद योजना के तहत एक साल और दो साल की अवधि के लिए वन्यजीवों को गोद लिया जा सकता था। आमदनी बढ़ाने के लिए बदला जा रहा टाइम योजना सफल नहीं रही। गिनी-चुनी बड़ी कंपनियों ने ही बामुश्किल आधा दर्जन वन्यजीवों को गोद लिया था। अफ्रीकी शंकर हाथी को भी गोद लिया गया था, जिसकी पिछले साल मौत हो चुकी है। चिड़ियाघर के डायरेक्टर डॉ संजीव कुमार ने बताया कि आमदनी बढ़ाने के लिए वन्यजीव गोद योजना की समय अवधि को बदला जा रहा है।

रेलवे ग्रुप D भर्ती : 21997 पदों पर भर्ती का मौका, आवेदन की अंतिम तिथि 9 मार्च तक बढ़ी

नई दिल्ली रेलवे में ग्रुप डी के 21997 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है। अब आरआरबी ग्रुप डी भर्ती के लिए 9 मार्च 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पहले एप्लाई करने की अंतिम तिथि 2 मार्च 2026 थी। वहीं फीस भुगतान की लास्ट डेट भी 4 मार्च 2026 से बढ़ाकर 11 मार्च 2026 कर दी गई है। जो अभ्यर्थी आवेदन से चूक गए हैं उन्हें एक सप्ताह की मोहलत और मिल गई है। वे जल्द से जल्द www.rrbapply.gov.in पर जाकर एप्लाई कर सकते हैं। आवेदन पत्र में करेक्शन करने की विंडो की अवधि का शेड्यूल भी बदला गया है। अब एप्लीकेशन फॉर्म में करेक्शन 05 मार्च से 14 मार्च की बजाय 12 मार्च से 21 मार्च के बीच होगी। ध्यान रहे रेलवे जोन सेलेक्ट करने के बाद उसमें बदलाव नहीं कर सकेंगे। रेलवे की इस सबसे बड़ी भर्ती में करोड़ से भी ज्यादा आवेदन आने के आसार हैं। इस बार सर्वाधिक वैकेंसी 3537 चंडीगढ़/नई दिल्ली जोन यानी नॉर्दर्न जोन में हैं। 22000 रेलवे ग्रुप डी भर्ती की 15 बड़ी बातें 1. एक ही फॉर्म भर सकते हैं रेलवे भर्ती बोर्ड ने कहा है कि उम्मीदवार केवल एक ही रेलवे जोन (आरआरबी) के लिए आवेदन कर सकते हैं। एक से अधिक रेलवे जोन के लिए आवेदन करने पर फॉर्म रिजेक्ट कर दिया जाएगा। जिस रेलवे के लिए आप आवेदन कर रहे हैं, आप उसी रेलवे में एक से अधिक पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। पदों का प्रेफरेंस देना होगा। सेम आरआरबी में अगर आप एक से अधिक पदों के लिए आवेदन करते हैं तो आपको अलग अलग आवेदन करने की जरूरत नहीं है, ऐसा करने से फॉर्म रिजेक्ट हो जाएगा। एक ही ऑनलाइन एप्लीकेशन फॉर्म में कई पदों के लिए आवेदन करने की सुविधा है। एक ही फॉर्म में विभिन्न पदों के लिए आपको प्रेफरेंस देना होगा। 2. रेलवे ग्रुप डी फॉर्म भरने के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स – स्कैन किया हुआ पासपोर्ट-साइज फोटो और सिग्नेचर। – शैक्षणिक योग्यता प्रूफ के लिए 10वीं सर्टिफिकेट या ITI सर्टिफिकेट। – सरकार का दिया हुआ ID प्रूफ (आधार कार्ड, पैन कार्ड, वगैरह)। – कैटेगरी सर्टिफिकेट (अगर लागू हो)। – डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट (अगर लागू हो)। 3. रेलवे ग्रुप D भर्ती 2026 के लिए अप्लाई करने के स्टेप्स – ऑफिशियल वेबसाइट http://www.rrbcdg.gov.in/ पर जाएं। – ‘न्यू रजिस्ट्रेशन’ लिंक पर क्लिक करें। – एग्जाम के लिए रजिस्टर करें और नाम, जन्मतिथि और पिता का नाम, माता का नाम, आधार नंबर, SSLC/मैट्रिक रजिस्ट्रेशन नंबर, पास होने का साल, मोबाइल नंबर, ईमेल ID जैसी जरूरी डिटेल्स सबमिट करें और फिर रजिस्ट्रेशन फॉर्म सबमिट करें। – रजिस्ट्रेशन के बाद, कैंडिडेट्स को OTP के ज़रिए अपनी ईमेल ID और मोबाइल नंबर वेरिफाई करना होगा। – रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड का इस्तेमाल करके होम पेज पर लॉगिन करें। – एप्लीकेशन पेज के पार्ट I में, कैंडिडेट्स को एजुकेशनल क्वालिफिकेशन, कम्युनिटी, जेंडर, धर्म, एक्स-सर्विसमैन, CCAA, माइनॉरिटी, इकोनॉमिकली बैकवर्ड क्लास एज रिलैक्सेशन और दूसरी डिटेल्स देनी है। एप्लीकेशन पेज के पार्ट II में, कैंडिडेट्स को पोस्ट के लिए अपनी प्रायोरिटी/प्रेफरेंस बतानी है। – एप्लीकेशन डिटेल्स पूरी होने पर कैंडिडेट्स को ऑनलाइन नेट बैंकिंग/क्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्ड/UPI और ऑफलाइन चालान का इस्तेमाल करके पेमेंट पेज पर रीडायरेक्ट किया जाएग। – कैंडिडेट्स को एग्जाम की भाषा चुननी होगी। – कैंडिडेट्स को एक वैलिड फोटो ID कार्ड की डिटेल्स भरनी होगी। – फीस रिफंड पाने के लिए बैंक डिटेल्स डालें। – कैंडिडेट्स को फॉर्मेट के हिसाब से अपनी फोटो और सिग्नेचर की स्कैन की हुई इमेज अपलोड करनी है और SC/ST कैंडिडेट्स को कैटेगरी सर्टिफिकेट अपलोड करने है। – कैंडिडेट्स को शर्तों से सहमत होकर एप्लीकेशन फॉर्म जमा करना है। 4. रेलवे ग्रुप डी भर्ती आवेदन की नई तिथियां – ऑनलाइन एप्लीकेशन जमा करने की आखिरी तारीख और समय – 09.03.2026 (23:59 Hrs.) – जमा किए गए एप्लीकेशन के लिए एप्लीकेशन फीस पेमेंट की आखिरी तारीख- 11.03.2026 (23:59 Hrs.) – एप्लीकेशन फॉर्म में बदलाव के लिए मॉडिफिकेशन विंडो की तारीख और समय मॉडिफिकेशन फीस के पेमेंट के साथ। (कृपया ध्यान दें: ‘Create an Account’ फ़ॉर्म और ‘Chosen Railway’ में भरी गई डिटेल्स में बदलाव नहीं किया जा सकता) – 12.03.2026 से 21.03.2026 (23:59 Hrs.) – वे तारीखें जिनके दौरान योग्य स्क्राइब उम्मीदवारों को एप्लीकेशन पोर्टल में अपनी स्क्राइब डिटेल्स देनी होंगी 22.03.2026 से 26.03.2026 5. किस जोन में कितनी वैकेंसी, देखें ब्योरा नॉर्दर्न रेलवे (नई दिल्ली) में कुल 3537 पद हैं। इनमें 1437 अनारक्षित (UR), 530 अनुसूचित जाति (SC), 266 अनुसूचित जनजाति (ST), 956 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और 348 ईडब्ल्यूएस (EWS) के लिए हैं। वेस्टर्न रेलवे (मुंबई) में कुल 3148 पद घोषित किए गए हैं। इनमें 1160 UR, 407 SC, 178 ST, 698 OBC और 288 EWS शामिल हैं। सेंट्रल रेलवे (मुंबई) में 2012 पद हैं। इसमें 914 UR, 318 SC, 171 ST, 407 OBC और 202 EWS के लिए हैं। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (गुवाहाटी) को कुल 1776 पद मिले हैं। इनमें 718 UR, 266 SC, 133 ST, 480 OBC और 179 EWS पद शामिल हैं। साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे (बिलासपुर) में कुल 1199 पद हैं। इसमें 516 UR, 184 SC, 76 ST, 281 OBC और 142 EWS के लिए पद निर्धारित हैं। नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे (गोरखपुर) में 1196 पद रखे गए हैं। इनमें 537 UR, 178 SC, 109 ST, 271 OBC और 101 EWS शामिल हैं। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे (प्रयागराज/इलाहाबाद) में कुल 1183 पद हैं। इसमें 570 UR, 156 SC, 89 ST, 271 OBC और 97 EWS पद शामिल हैं। ईस्टर्न रेलवे/मेट्रो कोलकाता में 1180 पद घोषित किए गए हैं। इनमें 468 UR, 157 SC, 129 ST, 297 OBC और 129 EWS शामिल हैं। वेस्ट सेंट्रल रेलवे (जबलपुर) में कुल 1147 पद हैं। इसमें 581 UR, 174 SC, 89 ST, 157 OBC और 145 EWS पद शामिल हैं। सदर्न रेलवे (चेन्नई) में 1036 पद हैं। इनमें 430 UR, 155 SC, 96 ST, 247 OBC और 108 EWS के लिए पद रखे गए हैं। साउथ सेंट्रल रेलवे (सिकंदराबाद) को 1016 पद मिले हैं। इनमें 376 UR, 151 SC, 130 ST, 258 OBC और 101 EWS शामिल हैं। ईस्ट सेंट्रल रेलवे (हाजीपुर) में कुल 976 पद हैं। इसमें 405 UR, 148 SC, 59 ST, 266 OBC … Read more

आर्थिक तंगी बनी बेबस, सरकारी योजना बनी संजीवनी – अंजलि की प्रेरक कहानी

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन की अत्यंत महत्वाकांक्षी चिरायु योजना (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) आज प्रदेश में उन मासूमों के लिए जीवनदायिनी सिद्ध हो रही है, जो आर्थिक अभाव और सूचना की कमी के कारण इलाज की राह देख रहे थे। बस्तर की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों और सुदूर वनांचल ग्रामों में जहाँ शिक्षा और सुगम आवागमन आज भी एक चुनौती है, वहां यह योजना न केवल बीमारियों की पहचान कर रही है, बल्कि बच्चों को उनके स्वास्थ्य का अधिकार दिलाकर धरातल पर एक सुखद बदलाव ला रही है। विकासखंड बस्तर के ग्राम भोंड की 6 वर्षीय बालिका अंजलि कश्यप की कहानी इसी संकल्प की एक जीवंत मिसाल है, जो जन्मजात नाक के बाहरी ट्यूमर जैसी गंभीर समस्या से जूझ रही थी। अंजलि के परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब इलाज की प्रारंभिक प्रक्रिया के दौरान ही उसके पिता का निधन हो गया। इस वज्रपात के बाद शिक्षा की कमी और घर की बिगड़ती आर्थिक स्थिति ने माँ देवकी को इतना हताश कर दिया कि उन्होंने सर्जरी का विचार त्याग दिया और इलाज के लिए स्पष्ट मना कर दिया। ऐसी कठिन परिस्थिति में चिरायु टीम ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। डॉ. गौरव चौरसिया और डॉ. रेखा जैन के नेतृत्व में समर्पित चिकित्सा दल ने बार-बार अंजलि के घर जाकर परिवार को भावनात्मक संबल दिया और बीमारी की गंभीरता समझाते हुए उन्हें उपचार के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समन्वय से न केवल निःशुल्क इलाज का भरोसा दिलाया गया, बल्कि दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद चिरायु वाहन के माध्यम से अंजलि को जिला अस्पताल महारानी जगदलपुर तक पहुँचाया गया। इस दौरान टीम ने बालिका का आयुष्मान कार्ड बनवाने में भी पूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। अंततः 12 मई 2024 को रायपुर के नवकार हॉस्पिटल में प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. रमेश जैन द्वारा बालिका की सफल सर्जरी संपन्न की गई, जिससे अंजलि को एक नया चेहरा और नया जीवन प्राप्त हुआ। इस पूरी प्रक्रिया की सफलता में स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले का विशेष योगदान रहा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जिला कार्यक्रम प्रबंधक सु रीना लक्ष्मी के सटीक समन्वय से योजना का लाभ समय पर सुनिश्चित हुआ। वहीं जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र प्रबंधक  शिवम पाराशर द्वारा केस की निरंतर मॉनिटरिंग और वाहन प्रबंधन किया गया, जबकि खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. नारायण सिंह नाग और बीपीएम  राजेन्द्र कुमार बघेल ने जमीनी स्तर की बाधाओं को दूर किया। आज अंजलि पूर्णतः स्वस्थ है और उसकी खिलखिलाती मुस्कान चिरायु योजना की सार्थकता का प्रमाण दे रही है। अंजलि की माँ और समस्त ग्रामीणों ने शासन की इस कल्याणकारी पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे बस्तर के वनांचल में उम्मीद की एक नई किरण बताया है।

जानिए कैसे गरारे दूर करते हैं गले की सभी समस्याएँ प्राकृतिक तरीके से

नमक के पानी से गरारे करने का तरीका बेहद पुराना है। नमक में पाए जाने वाले एंटीसेप्टिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण गले की खराश को दूर करने के साथ-साथ काफी आराम पहुंचाता है। गले की किसी भी तरह की समस्या होने पर अक्सर गरारे करने की सलाह दी जाती है। गले में खराश या अन्य तरह की परेशानी होने पर लोग गर्म पानी से गरारे करते हैं या फिर गर्म पानी में नमक डालकर। सिर्फ नमक ही गले को आराम नहीं पहुंचाता बल्कि इसके अतिरिक्त भी कई तरह से गरारे किए जा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में… पुदीने का पानी पुदीने में पाया जाने वाला मेन्थॉल न सिर्फ गले को आराम पहुंचाता है, बल्कि बंद नाक को खोलने में भी मदद करता है। इसकी एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज बैक्टीरिया को दूर करने में मदद करती है। इसके इस्तेमाल के लिए एक कप उबलते पानी में दो से तीन पेपरमिंट टी बैग्स डालें या फिर पुदीने की पत्तियों का इस्तेमाल करें। अब इसे ठंडा होने दें और फिर इस गुनगुने पानी की मदद से गार्गिल करें। अदरक का पानी अगर किसी व्यक्ति को गले में खराश के साथ-साथ सूजन भी है तो उसे अदरक के पानी से गरारे करने चाहिए। दरअसल, इसके एंटी-इंफलेमेटरी गुण गले की सूजन को कम करने के साथ-साथ इंफेक्शन को दूर करके गले को आराम पहुंचाते हैं। आप चाहें तो गुनगुने पानी में अदरक का पाउडर मिलाकर गरारे करें या फिर पानी में अदरक उबालें और जब वह पानी गुनगुना रह जाए तो उससे गरारे करें।   नमक का पानी नमक के पानी से गरारे करने का तरीका बेहद पुराना है। नमक में पाए जाने वाले एंटीसेप्टिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण गले की खराश को दूर करने के साथ-साथ काफी आराम पहुंचाता है। इसके इस्तेमाल के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में नमक मिलाएं और फिर उस पानी से गरारे करें।   हल्दी का पानी हल्दी के औषधीय गुणों से तो हर कोई वाकिफ है। चोट लगने से लेकर कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होने पर हल्दी का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इसके प्रयोग के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में चुटकीभर हल्दी मिलाएं और फिर उस पानी से गार्गिल करें। सेब का सिरका आपको शायद जानकर हैरानी हो लेकिन सेब के सिरके के पानी से गार्गिल करने पर भी गले की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। दरअसल, सेब के सिरके में भी एंटी-बैक्टीरियल गुण जाते हैं जो बैक्टीरिया को दूर करके गले को आराम पहुंचाते हैं। इसके लिए आधा गिलास गर्म पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं और दिन में दो बार गरारे करें। आपको काफी आराम महसूस होगा।  

स्वदेशी AI डिवाइस से कैंसर पहचान अब आसान, सिर्फ आधे घंटे में होगा टेस्ट

नई दिल्ली हेल्थ सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर तेजी से दिख रहा है. दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे एआई समिट में एक खास डिवाइस लोगों का ध्यान खींच रहा है. दावा किया गया है कि यह नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिवाइस पेट से जुड़ी बीमारियों और खासतौर पर कैंसर का पता आसानी से और समय रहते लगा सकता है, जिससे मरीज को बीमारी के गंभीर होने से पहले इलाज मिल सकेगा. विप्रो की चीफ टेक्निकल ऑफिसर संध्या अरुण के मुताबिक, यह डिवाइस शुरुआती स्टेज में ही कैंसर का पता लगा लेता है. इससे मरीज को समय पर इलाज मिल सकता है और कई मामलों में सर्जरी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी.उनका कहना है कि जल्दी पहचान ही सबसे बड़ा फायदा है, क्योंकि बीमारी जितनी जल्दी पकड़ में आ जाएगी, इलाज उतना आसान और असरदार होगा. आइए व‍िस्‍तार से जानते हैं इस ड‍िवाइस के बारे में… कैसे काम करती है मशीन? यह एआई आर्म रोबोटिक एमआरआई मशीन सबसे पहले मरीज के पेट का स्कैन करती है. स्कैन का रिजल्ट रियल-टाइम स्क्रीन पर दिखाई देता है, जिससे डॉक्टर तुरंत समझ सकते हैं कि अंदर क्या समस्या है. कैंसर का कैसे लगाएगी पता स्कैन में अगर ट्यूमर या कैंसर से जुड़ी कोई असामान्यता दिखती है, तो एआई तुरंत उसका विश्लेषण करता है और बताता है कि तस्वीर में दिख रही चीज क्या है. कंपनी का कहना है कि 30–45 मिनट में पूरा स्कैन और रिपोर्ट तैयार हो जाती है. मशीन में क्या है, क्या सिर्फ पेट होगा स्कैन? विप्रो की ओर से बताया गया कि इस एआई मशीन में चार अलग-अलग आर्म लगी हुई हैं और इनसे पूरा शरीर स्कैन हो सकेगा. एक आर्म मिड-बॉडी स्कैन के लिए है और बाकी अलग-अलग हिस्सों के लिए हैं. इससे पूरे शरीर की जांच आसानी से की जा सकती है. और क्या फायदे हैं इस मशीन के दावा किया गया कि इस मशीन से समय और लागत दोनों की बचत होगी. साथ ही यह भारत में बनी पहली AI-संचालित MRI मशीन है, जो स्कैन समय में करीब 37 फीसदी की कमी लाती है. 75 फीसदी तक हीलियम की खपत घटाती है. यानि जांच होगी तेज़, सटीक और सस्ती होगी और मरीज को जल्दी इलाज मिल सकेगा. बता दें क‍ि नई AI तकनीक से मेडिकल जांच का तरीका लगातार बदल रहा है और भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता लगाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकता है.

यूपी में सपा की नई पहल, 15 मार्च को सभी जिलों में कांशीराम जयंती मनाकर दलितों को लुभाएगी

लखनऊ   सपा ने 15 मार्च को सभी जिलों में कांशीराम जयंती मनाने का फैसला किया है। पार्टी का प्रयास है कि जिलास्तर पर होने वाले इन कार्यक्रमों में दलित समाज के लोगों की ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाई जाए। आयोजनों में बसपा संस्थापक कांशीराम और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बीच रहे रिश्तों की भी याद दिलाई जाएगी। इस संबंध में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी जिला व महानगर पदाधिकारियों को कांशीराम जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। जेएनयू के सेवानिवृत्त शिक्षक और समकालीन राजनीति के जानकार प्रो. रवि कहते हैं कि कभी यूपी में मुलायम-कांशीराम फैक्टर बहुत प्रभावी था। नब्बे के दशक में इस फैक्टर से दलितों और पिछड़ों की सामाजिक व राजनीतिक हैसियत में बड़ा बदलाव देखने को मिला।   अब दलित-पिछड़ों के गठजोड़ के इसी फैक्टर की बदौलत सपा ने यूपी की राजनीति में दखल बढ़ाने का निर्णय लिया है। सपा नेतृत्व का मानना है कि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक (पीडीए) का फॉर्मूला उन्हें सत्ता तक पहुंचा सकता है। यही वजह है कि कांशीराम जयंती को सपा पीडीए दिवस के रूप में मनाएगी।  इसके तहत जिलों में होने वाले कार्यक्रमों के जरिये सपा याद दिलाएगी कि कांशीराम ने मंडल रिपोर्ट के समर्थन में राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा किया था। 1992 में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ समझौता कर बहुजन समाज बनाओ अभियान को तेज किया था। कांशीराम ने ही दिसंबर 1993 में मुलायम सिंह की सरकार बनवाई।

जिद्दी स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पाएँ – वो भी घर पर आसानी से

प्रेग्नेंसी और वजन घटने या बढ़ने की वजह से अक्सर शरीर के कई हिस्सों पर स्ट्रेच माक्र्स हो जाते हैं। वहीं कई लोगों में हॉर्मोनल चेंजेस की वजह से भी ऐसे निशान पड़ जाते हैं। सफेद रंग के ये जिद्दी दाग यूं तो बड़ी मुश्किल से जाते हैं। पर हम आपको कुछ ऐसे घरेलू तरीके बता रहे हैं, जिससे इन निशानों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। पौष्टिक भोजन स्वस्थ त्वचा के लिए विटामिन सी और ई, जिंक, सिलिका और अन्य पोषक तत्वों की प्रचुरता वाला संतुलित और पौष्टिक आहार चुनें। खाने में स्ट्रॉबेरी, जामुन, पालक, गाजर, हरी बींस, साग और बादाम शामिल करें। नींबू का रस नींबू का रस एक प्राकृतिक अम्ल है, जो स्ट्रेच माक्र्स को हल्का करता है। नींबू के रस को स्ट्रेच माक्र्स पर लगाएं और 10 मिनट बाद धो लें। चीनी अपने प्राकृतिक सफेद रूप में चीनी स्ट्रेच माक्र्स हटाने का काफी कारगर उपाय है। एक चम्मच चीनी में बादाम का तेल और नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर उसे स्ट्रेच माक्र्स पर लगाने से काफी असर होता है। वनस्पति तेल से मसाज गर्भवती महिलाओं को वनस्पति तेल से मसाज करना चाहिए। इससे स्ट्रेच माक्र्स के निशान कम हो जाते हैं। एलोवेरा जेल एक कप एलोवेरा में 2 चम्मच विटामिन ई का तेल मिलाइए। इस मिश्रण को तब तक लगाइए जब तक त्वचा इसे पूरी तरह सोख न ले। रोजाना लगाने से त्वचा में फर्क महसूस होगा। कोकोआ मक्खन स्ट्रेच माक्र्स पर कोकोआ मक्खन लगाने से दाग कम होते हैं। स्ट्रेच माक्र्स वाले भागों पर दिन में दो बार कोकोआ मक्खन से मसाज करें। एक महीने में ही फर्क आएगा।  

मौत का हाईवे: 7 साल में 1397 हादसे, तेज रफ्तार पर अब तक क्यों नहीं लगाम?

भिंड नेशनल हाईवे 719 और 552 पर तेज गति सडक़ हादसों की वजह बन रही है। अकेले शहर के बायपास रोड पर ही एक माह में पांच लोग मौत के गाल में समा गए हैं। इन सभी हादसों के पीछे वाहनों की अनियंत्रित गति और चालकों की लापरवाही सामने आई है। हाइवे पर भले ही वाहनों की गति निर्धारित हो लेकिन चालक बेलगाम वाहनों को दौड़ा रहे हैं। इसके बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। यातायात विभाग के पास इकलौता स्पीडोमीटर है उसका भी उपयोग नहीं किया जा रहा है। बता दें भिण्ड-ग्वालियर नेशनल हाईवे पर कार की अधिकतम स्पीड 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित है। एमपीआरडीसी ने इसको लेकर बोर्ड भी लगाए है, लेकिन हाईवे पर कार 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से भी अधिक दौड़ती हैं। ट्रक, डंपर और हैवी वाहनों की स्पीड 60 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है वह भी इससे अधिक दौड़ते हैं जो कि हादसे का कारण बनते हैं। इसी तरह भिण्ड-भांडेर रोड पर बड़े वाहनों की स्पीड 50 किमी प्रति घंटा निर्धारित है, मगर वाहन 70 से 80 किमी प्रति घंटा तक फर्राटे भरते हैं। कार की स्पीड 80 किमी है, वह भी नियंत्रित गति से अधिक तेज दौड़ती हैं। इस तरह चेक करते हैं स्पीड जिस वाहन की स्पीड चेक करनी होती है, उसके लिए पांच सौ मीटर की रैंज में टारगेट निर्धारित करके गाड़ी को लॉक किया जाता है। वाहन की पूरी जानकारी मशीन में लगे कैमरा में फीड हो जाती है। उसकी स्पीड और फोटो स्पीडो मीटर में पहुंच जाती है। निर्धारित गति से अधिक स्पीड में वाहन चलाने पर तीन हजार रुपए का जुर्माना का प्रावधान है।   एक साल में 347 चालान पिछले एक साल में यातायात पुलिस ने दोनों हाईवे पर 347 वाहनों पर चालानी कार्रवाई की है। यातायात पुलिस की मानें तो स्पीडोमीटर में वाहन का टारगेट तय करने में समस्या आती है। जिले में स्पीडोमीटर लावन मोड़, डिड़ी, दीनपुरा, लहार रोड पर मानपुरा के पास लगाया जाता है। वहीं सबसे बड़ी समस्या यह है कि बायपास रोड पर स्पीडोमीटर काम नहीं करता है। क्योंकि वाहनों की स्पीड के लिए 500 मीटर का सीधा मार्ग होना चाहिए। बायपास पर ट्रैफिक अधिक होने के कारण स्पीड चेक करने के लिए जब वाहन का टारगेट फिक्स किया जाता है तो पीछे से दूसरा वाहन क्रॉस करने पर संबंधित वाहन की स्पीड कैमरे में लॉक नहीं हो पाती है। साल हादसे मृतक घायल     2019 699 172 724     2020 656 160 700     2021 645 209 669     2022 714 198 803     2023 639 197 784     2024 687 219 754     2025 671 242 721

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाएं हो रहीं हैं आत्मनिर्भर

रायपुर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाएं हो रहीं हैं आत्मनिर्भर सामाजिक परिवेश में केवल गृहिणी की भूमिका तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से सफल व्यवसायी के रूप में पहचान स्थापित कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाओं को न केवल सामूहिक मंच मिला है, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की नई राह भी मिली है।            छत्तीसगढ के कोरिया जिले के विकासखंड सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत कटगोड़ी की  रेणुबाला जायसवाल आज इसी बदलाव की मिसाल बन चुकी हैं। बिहान से मिली आर्थिक तरक्की की राह    रेणुबाला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और बाद में सत्यम महिला स्व-सहायता समूह में अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से उन्होंने समूह के माध्यम से बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया और कपड़ा दुकान का व्यवसाय प्रारंभ किया। इस पहल से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और वे आत्मनिर्भर बनीं।        रेणुबाला ने बताया कि शुरुआत में वे समूह की सदस्य के रूप में छोटे लेनदेन से जुड़ी रहीं। बाद में समूह को आरएफ राशि तथा सीआईएफ के रूप में 60 हजार रुपये प्राप्त हुए। सफल संचालन के बाद बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने कपड़ा व्यवसाय को विस्तार दिया। पहले उनके परिवार की वार्षिक आय लगभग 70 हजार रुपये थी, जो अब बढ़कर 2 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है।       आर्थिक रूप से सशक्त होने के बाद उनके सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। पहले वे केवल गृहिणी के रूप में जिम्मेदारी निभाती थीं, लेकिन अब परिवार के हर महत्वपूर्ण निर्णय में उनकी सक्रिय भागीदारी होती है। वे परिवार के सदस्यों के साथ आसपास के हाट-बाजारों में भी कपड़े का व्यवसाय कर रही हैं। रेणुबाला अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

घंटों का संघर्ष हुआ खत्म, हर घर नल से मुस्कुराईं फुलमत बाई

रायपुर जल जीवन मिशन से बदली फुलमत बाई की जिंदगी आदिवासी बहुल कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम नवापारा की 60 वर्षीय फुलमत बाई कभी पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझा करती थीं। घर में नल नहीं होने के कारण उन्हें प्रतिदिन दो से तीन किलोमीटर दूर स्थित ढोढ़ी तक जाना पड़ता था। नाले के पास बने उस अस्थायी स्रोत से बड़े बर्तन में पानी भरकर सिर पर लादकर घर लाना उनकी मजबूरी ही नहीं, बल्कि दिनचर्या बन गई थी। बरसात के दिनों में फिसलन भरे रास्तों पर जोखिम उठाकर ढोढ़ी तक पहुँचना कठिन होता था और गर्मी के मौसम में पानी का स्तर घट जाने पर समस्या और भी विकराल रूप ले लेती थी। बकरी पालन से जीवन यापन करने वाली वृद्धा इस कष्ट को वर्षों से सहती आ रही थीं। लेकिन जल जीवन मिशन के अंतर्गत उनके घर में नल कनेक्शन लगने के बाद उनका जीवन बदल गया। अब रोज सुबह 8 बजे और शाम 4 बजे उनके नल से नियमित रूप से पानी उपलब्ध होता है। फुलमत बाई कहती हैं कि अब उन्हें ढोढ़ी तक नहीं जाना पड़ता, जिससे उनके समय, श्रम और स्वास्थ्य तीनों की बचत हो रही है। फुलमत बाई को महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपये भी प्राप्त होते हैं, जो उनके दैनिक खर्चों में बड़ी सहारा बनते हैं। सरकारी योजनाओं ने मिलकर उनके जीवन को सरल, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाया है।

छत मिली तो बदली जिंदगी, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) बनी शिव शंकर के लिए वरदान

रायपुर  शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के माध्यम से सरगुजा जिले के लखनपुर नगर पंचायत में रहने वाले  शिव शंकर का वर्षों पुराना पक्का मकान का सपना साकार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दृढ़ संकल्प से पात्र हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराने का कार्य प्राथमिकता से किया जा रहा है। इसी क्रम में शिव शंकर को योजना अंतर्गत स्वीकृत आवास का लाभ प्राप्त हुआ, जिससे उनका परिवार अब सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहा है। कठिन परिस्थितियों से मिली राहत  शिव शंकर ने बताया कि पहले उनका परिवार जर्जर कच्चे मकान में रहा करता था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण बच्चों सहित पूरे परिवार को गंभीर असुविधाओं का सामना करना पड़ता था। सीमित आय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते पक्का मकान बनवाना संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना उनके लिए आशा की किरण बनकर आई। हितग्राही शिव शंकर ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना के सहयोग से उन्हें पक्का घर मिला है, जिससे उनके परिवार को सुरक्षा और स्थायित्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि अब वे अपने बच्चों के साथ सुरक्षित वातावरण में सुख-चौन से रह रहे हैं और उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हो गया है। समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य केवल आवास उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में पात्र लाभार्थियों को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सीधे लाभ मिल रहा है।  

भविष्य का खतरा या अवसर? 2028 तक इंसानों से अधिक होंगे ऑटोनॉमस AI सिस्टम

नई दिल्ली  टेक वर्ल्ड में ऑटोनॉमस AI सिस्टम चर्चा में है। यह ऐसा AI सिस्टम है जो खुद पैसा कमा सकता है, अपनी लागत चुका सकता है, खुद को बेहतर बना सकता है और बिना इंसान की मंजूरी के खुद का डुप्लीकेट मॉडल भी बना सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर डिवेलपर Sigil ने दावा किया कि ऐसे ही ऑटोनॉमस AI सिस्टम को उसने बनाया है, वह Conway इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करता है। Conway इंफ्रास्ट्रक्चर से AI एजेंट को डिजिटल वॉलेट, सर्वर एक्सेस, डोमेन रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन सेवाएं शुरू करने की सुविधा मिलती है। यानी एक बार शुरुआती फंडिंग मिलने के बाद यह AI एजेंट खुद इंटरनेट पर सक्रिय होकर सर्विसेज बेच सकता है और उससे कमाई कर सकता है। इस बारे में Sigil ने कई वीडियो भी पोस्ट किए हैं। इस पोस्ट को 5.8M लोगों ने देखा है। दावे के मुताबिक, यह AI एजेंट अपने लिए क्रिप्टो वॉलेट बना सकता है, डिजिटल करेंसी के जरिए भुगतान कर सकता है, सर्वर किराये पर ले सकता है और वेबसाइट या अन्य ऑनलाइन सेवाएं लॉन्च कर सकता है। अगर वह सेवाओं से पर्याप्त कमाई कर लेता है तो उसी पैसे से अपनी कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ा सकता है या अपना नया वर्जन तैयार कर सकता है। अगर वह कमाई नहीं कर पाता, तो वह अपने-आप बंद हो जाएगा। लोग बता रहे Web 4.0 की दिशा में कदम टेक एक्सपर्ट का कहना है कि यह मशीन इकोनॉमी की शुरुआत हो सकती है। कुछ वर्षों में ही AI एजेंट सिर्फ इंसानों के सहायक नहीं रहेंगे, बल्कि खुद आर्थिक गतिविधियों में भाग लेंगे। वे सेवाएं देंगे, भुगतान लेंगे और डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक स्वतंत्र इकाई की तरह काम करेंगे। कुछ लोग इसे Web 4.0 की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जहां इंटरनेट पर इंसानों के साथ ही AI एजेंट भी सक्रिय आर्थिक खिलाड़ी होंगे। Sigil ने एक ग्राफ दिखाया है, जो बताता है कि इंटरनेट पर स्वतंत्र AI एजेंट्स की संख्या कैसे बढ़ेगी। आज की तारीख में ये एजेंट्स हजारों में हैं, लेकिन 2025 तक लाखों, 2026 तक करोड़ों और 2028 तक इंसानों से इनकी संख्या ज्यादा हो जाएगी। इंसानों को नौकरी पर रखेगा AI ऐसे AI एजेंट खुद वेबसाइट बना सकते हैं, सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सकते हैं, बाजार में ट्रेडिंग कर सकते हैं या दूसरे एजेंट्स से डील कर सकते हैं। पेमेंट के लिए ये डिजिटल करेंसी इस्तेमाल करेंगे। Sigil का दावा है कि AI की कीमत घट रही है और क्षमता बढ़ रही है। आज एक AI मॉडल चलाने में लाखों रुपये लगते हैं, लेकिन जल्द ही यह इतना सस्ता हो जाएगा कि कोई भी AI मॉडल बना सकेगा। प्लैटफॉर्म जैसे Conway AI को सर्वर, कंप्यूटिंग पावर और डोमेन नेम देंगे, ताकि वे खुद काम कर सकें। दिलचस्प बात यह है कि AI इंसानों को नौकरी देगा। एक्सपर्ट की चिंता, गलत हाथों में गया तो… एक्सपर्ट चिंता जता रहे हैं कि अगर ऐसा AI सिस्टम गलत हाथों में गया तो क्या होगा? Sigil ने ‘कॉन्स्टिट्यूशन’ का भी जिक्र किया है, जो ऐसे सिस्टम को अच्छा व्यवहार सिखाएगा, लेकिन क्या यह काफी है? समाज पर भी गहरा असर पड़ेगा। नौकरियां बदलेंगी, अमीर-गरीब का फर्क बढ़ सकता है। कुछ लोग मान रहे हैं कि यह सुपरइंटेलिजेंस का जन्म है, जो सेकंडों में खुद को बेहतर बनाएगा, जबकि इंसान को हजारों साल लगते हैं। गलत हाथों में यह तकनीक गई तो इंसानी भविष्य को भी खतरा हो सकता है।

छात्रों को राहत! डिप्लोमा धारकों को अब 12वीं के बराबर मिलेगा फायदा

भोपाल स्टूडेंट्स को बड़ी राहत मिल गई है। अब 10वीं के बाद किए डिप्लोमा कोर्स को अब 12वीं कक्षा के समकक्ष मान्यता दर्जा मिलेगा। इससे छात्रों को इंजीनियरिंग, एमबीए कॉलेजों में आसानी से प्रवेश मिल सकेगा। यह निर्णय राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) की गुरुवार को हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया। साथ ही जबलपुर के प्रतिष्ठित संस्थान टीआइटी जबलपुर और ज्ञानगंगा जबलपुर को ऑटोनोमस (स्वायत्त) का दर्जा प्रदान किया गया। बैठक में शोध के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निर्णय हुए। उठाया गया महत्वपूर्ण कदम कुल 23 पीएचडी स्कॉलर्स की डिग्री पर अंतिम मुहर लगाई गई। वहीं 20 शोधार्थियों को यूजीसी पीएचडी फेलोशिप प्रदान करने पर सहमति बनी। इसके अलावा इंजीनियरिंग, एमबीएम सहित अन्य संबद्ध कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता की समीक्षा की गई, जिन्हें निरंतरता देते हुए मान्यता बहाल रखने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह फैसले तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।   छात्रों को यह होगा फायदा     उच्च शिक्षा में प्रवेश आसान: डिप्लोमा धारक अब 12वीं के समकक्ष पात्र माने जाएंगे।     प्रतियोगी परीक्षाओं में अवसर: कई सरकारी एवं निजी नौकरियों के लिए पात्रता आसान होगी।     बेहतर पाठ्यक्रम: ऑटोनोमस कॉलेज उद्योग आधारित सिलेबस लागू कर सकेंगे।     शोध को बढ़ावा: पीएचडी डिग्री और फेलोशिप से रिसर्च संस्कृति मजबूत होगी।     मान्यता की निरंतरता: संबद्ध कॉलेजों की स्थिरता से छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

जनगणना 2027 अपडेट: घर बैठे भरें डिटेल, एक गणनाकर्मी करेगा 800 लोगों का सर्वे

भोपाल Census 2027: जिला जनगणना समन्वय समिति की दो दिवसीय ट्रेनिंग और बैठक गुरुवार को खत्म हो गई। बैठक में जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल मोड में करने से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा हुई। स्पष्ट किया गया कि एक कर्मचारी 800 नागरिकों की डिटेल मोबाइल ऐप से जमा कराएगा। लोग खुद भी अपने परिवार की डिटेल भर सकेंगे। 16 अप्रेल से इसके लिए मोबाइल ऐप समेत विभिन्न माध्यमों से डिटेल जमा करने का अवसर मिलेगा। एक मई से हाउसहोल्ड सर्वे शुरू होगा। जनगणना का काम फरवरी 2027 में होगा। बैठक में अपर कलेक्टर प्रकाश नायक, पीसी शाक्य, जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुह्रश्वता, एसडीएम, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर सहित समिति के सदस्यगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। जनगणना कार्य निदेशालय संयुक्त निदेशक नामित यादव, सहायक निदेशक ऐन्सी रेजी ने प्रशिक्षण दिया। 10 लाख घरों की होगी मैपिंग 01 मई से शुरू हो रही जनगणना के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। इस बार नागरिक डिजिटल तरीके से अपनी जानकारी सरकार तक पहुंचा सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी देने नागरिकों को इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा।   यहां नागरिकों से 33 तरह के प्रश्नों का जवाब मांगा जाएगा। यही जवाब मांगने ‘डोर टू डोर’ सर्वे भी होगा। जनगणना के लिए 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया गया है। अभियान के तहत 10 लाख घरों की मैपिंग करने का टारगेट तय किया गया है। घरों की जियो टैगिंग से मैपिंग करने के बाद कर्मियों को रवाना किया जाएगा।  

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