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पंजाब विधानसभा में राज्यपाल कटारिया का भाषण: गिनाईं सरकार की उपलब्धियां, स्पीकर को दी अहम सलाह

चंडीगढ़ गवर्नर के अभिभाषण के दाैरान कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल के बजट अभिभाषण के दौरान नारेबाजी की और सदन से वाकआउट कर दिया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है। वहीं गवर्नर के अभिभाषण के दाैरान कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल के बजट अभिभाषण के दौरान नारेबाजी की और सदन से वाकआउट कर दिया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है। आये दिन हाल बिगड़ते जा रहे हैं और उस पर चर्चा करवाई जानी चाहिए। सभी कांग्रेस विधायकों ने जमकर नारेबाजी की। हालांकि राज्यपाल ने कहा कि आपको  अपनी बात रखने का उचित समय मिलेगा, लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी जारी रखी। राज्यपाल ने बजट अभिभाषण खत्म होने के बाद विधानसभा स्पीकर को सलाह दी कि सत्र की शुरुआत या अंत में राष्ट्रगीत वंदे मातरम का उच्चारण भी किया जाना चाहिए। स्पीकर ने इस पर भरोसा दिलाया। सत्र से पहले सीएम भगवंत मान ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-2027 के बजट अनुमान को पंजाब मंत्रिमंडल ने पारित कर दिया है। यह बजट रविवार को पेश किया जाएगा। इस दिन को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह बजट प्रत्येक पंजाबी की प्रगति और समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देगा और पंजाब को एक बार फिर रंगला पंजाब बनाने में सहायक होगा। विधानसभा में 7 मार्च को शनिवार के दिन अवकाश रहेगा। 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आप सरकार अपना पांचवां बजट पेश करेगी। माना जा रहा है कि इस बजट में महिलाओं के लिए विशेष घोषणाएं की जा सकती हैं। 9 मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी, जबकि 10 और 11 मार्च को विधायकों द्वारा बजट पर चर्चा की जाएगी। 12 मार्च को वैधानिक कार्य निपटाए जाएंगे। 13 से 15 मार्च तक प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित रहेगी। 16 मार्च को सत्र के अंतिम दिन विभिन्न विधेयक विधानसभा में पेश किए जाएंगे। अधूरे वादों और कानून-व्यवस्था पर कांग्रेस का प्रदर्शन विधानसभा सत्र के दौरान पंजाब प्रदेश कांग्रेस ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक और नेता पंजाब भवन से विधानसभा तक रोष मार्च निकालेंगे। कांग्रेस का कहना है कि वह सरकार को अधूरे चुनावी वादों, बढ़ते गैंगस्टरवाद और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेरने जा रही है। खासतौर पर महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपये देने के वादे को लेकर कांग्रेस सरकार से जवाब मांगेगी। कांग्रेस का दावा है कि 2022 में किए गए इस वादे के आधार पर सरकार को प्रत्येक महिला को चार साल के 48 हजार रुपये देने चाहिए। विपक्ष कथित फर्जी मुठभेड़ों और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को भी सत्र के दौरान जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है। प्रताप बाजवा की टिप्पणी के विरोध में मंत्री ईटीओ ने बजवाया बैंड कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने शुक्रवार को विधानसभा परिसर में बैंड बाजा बजवाकर प्रदर्शन किया। कुछ दिन पहले नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मंत्री पर बैंड बाजे से संबंधित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। मंत्री ने एसएसपी अमृतसर को प्रताप बाजवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत भी दी है। फरवरी में अजनाला रैली के दौरान बाजवा ने कहा था कि मंत्री हरभजन ईटीओ बैंड बजाते थे लेकिन अब वह पंजाब का बैंड बजा रहा हैं। इस पर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर राजा वड़िंग ने मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस पर अब मंत्री ईटीओ कहा कि यदि वे मेहनत के बूते जमीन से उठकर मंत्री पद तक पहुंचे हैं तो कांग्रेस को क्या दिक्कत है। दरअसल, ये बयान कांग्रेसियों की मानसिकता को दर्शाते हैं।

कांधला की आस्था जैन बनीं प्रेरणा, सेल्फ स्टडी के दम पर UPSC में हासिल की 9वीं रैंक

शामली  संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा घोषित सिविल सेवा परीक्षा 2023 के परिणामों ने शामली जनपद का नाम रोशन किया है। शहर की होनहार बेटी आस्था जैन ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में ऑल इंडिया नौवीं रैंक प्राप्त कर नया इतिहास रचा है। आस्था की इस असाधारण उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जनपद को गौरवान्वित किया है।   आस्था जैन का बचपन से ही मेधावी छात्रा के रूप में एक उज्ज्वल भविष्य रहा है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा शहर के प्रतिष्ठित स्कॉटिश स्कूल से प्राप्त की। वर्ष 2018-19 में उन्होंने सीबीएसई कक्षा 12वीं की परीक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान हासिल कर अपनी शैक्षणिक क्षमता का लोहा मनवाया था।   बिना कोचिंग, पहला प्रयास और असाधारण सफलता आस्था जैन ने अपनी यूपीएससी की तैयारी के लिए किसी भी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। उन्होंने स्वयं अध्ययन और दृढ़ संकल्प के बल पर इस परीक्षा को उत्तीर्ण किया। यह उनका तीसरा प्रयास था, जिसमें उन्होंने न केवल सफलता प्राप्त की, बल्कि टॉप 10 में स्थान बनाकर सभी को अचंभित कर दिया। इससे पहले वर्ष 2023 में अपने पहले प्रयास में उन्होंने 131वीं रैंक हासिल की थी और वर्तमान में वे पुलिस अकादमी हैदराबाद में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।   आईएएस बनने का बचपन का सपना आस्था जैन का बचपन से ही आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करने का सपना था। अपने तीसरे प्रयास में इस सपने को साकार कर उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे बुलंद हों और मेहनत में कोई कसर न छोड़ी जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम आस्था कांधला के बड़ा बाजार की निवासी हैं। ये सफलता उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण का परिणाम है।

धमतरी: महिला दिवस पर दिव्यांग महिलाओं के लिए ब्रेल पुस्तकें और 3000+ ऑडियो बुक्स, सशक्तिकरण की प्रेरक पहल

धमतरी प्रतिवर्ष 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समाज में महिलाओं की उपलब्धियों, उनके अधिकारों और सशक्तिकरण को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है। इसी भावना को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ में दिव्यांग महिलाओं और बालिकाओं के शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल सामने आई है।   राजधानी रायपुर स्थित लोक भवन, सिविल लाइन में  पिछले माह जनवरी में आयोजित एक गरिमामय राज्य स्तरीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका के करकमलों से दो महत्वपूर्ण ब्रेल पुस्तकों—‘दिव्यांग महिलाओं की सफलता की कहानी’ और ‘छत्तीसगढ़ के वीर’—का विमोचन किया गया। साथ ही दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई 3000 से अधिक ऑडियो बुक्स का भी लोकार्पण किया गया। यह पहल विशेष रूप से उन दिव्यांग बालिकाओं और महिलाओं के लिए आशा की नई किरण बनकर सामने आई है, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में शैक्षणिक संसाधनों तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ब्रेल पुस्तकें और ऑडियो बुक्स अब उन्हें शिक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही हैं। कार्यक्रम में धमतरी जिला की समर्पित शिक्षिका श्रीमती प्रीति शांडिल्य को दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट और नवाचारी योगदान के लिए राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया। उनके प्रयासों से ब्रेल पुस्तकों और ऑडियो बुक्स के निर्माण का कार्य गति पकड़ सका, जिससे दृष्टिबाधित बच्चों विशेषकर बालिकाओं के लिए शिक्षा के नए द्वार खुले हैं।  लोकार्पित ऑडियो बुक्स में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के सभी विषयों के पाठ, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष सामग्री, सरगुजिया लोककथाएं, सामान्य ज्ञान, महिला सशक्तिकरण, तथा दिव्यांगजनों के लिए संचालित शासकीय योजनाओं से जुड़ी जानकारी शामिल की गई है। यह सभी सामग्री “वर्ल्ड ऑडियो बुक” यूट्यूब चैनल पर एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गई है, जिससे दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को निःशुल्क और सरल शैक्षणिक संसाधन मिल सकें।      तब राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षकों के इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि सामान्य पुस्तकों को ब्रेल और ऑडियो स्वरूप में उपलब्ध कराना समावेशी शिक्षा की उत्कृष्ट मिसाल है। उन्होंने कहा कि इस पहल को अन्य राज्यों तक भी पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि यह राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श मॉडल बन सके।   इस अभियान की प्रेरणा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित दुर्ग की शिक्षिका के. शारदा को वर्ष 2024 में मिले सम्मान के बाद मिली। 25 अक्टूबर 2024 से शुरू हुए इस अभियान में उन्होंने स्वयं 800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कीं। बाद में विभिन्न जिलों के शिक्षकों के सहयोग से यह संख्या बढ़कर 3100 से अधिक हो गई। पूर्व में के. शारदा और प्रीति शांडिल्य द्वारा संयुक्त रूप से तैयार ब्रेल पुस्तकों को छत्तीसगढ़ के 20 ब्रेल विद्यालयों में 100-100 प्रतियों के रूप में निःशुल्क वितरित किया जा चुका है।  कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले की शिक्षिका प्रीति शांडिल्य सहित सभी शिक्षक साथियों द्वारा दिव्यांगजनों के लिए किया जा रहा यह कार्य अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल शिक्षा को समावेशी बनाती है, बल्कि समाज में संवेदनशीलता, सेवा भावना और सकारात्मक सोच को भी मजबूत करती है।   इस ऑडियो बुक निर्माण अभियान में 30 शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही। राज्यपाल ने सभी योगदानकर्ता शिक्षकों को सम्मानित करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।    महिला दिवस के अवसर पर यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जब महिलाएं शिक्षा और सेवा के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों के लिए कार्य करती हैं, तो परिवर्तन की नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। ब्रेल पुस्तकों और ऑडियो बुक्स के माध्यम से दिव्यांग बालिकाओं और महिलाओं के लिए ज्ञान के द्वार खुल रहे हैं, जो उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की राह दिखा रहे हैं।

सिद्धारमैया की दरियादिली! बजट में अल्पसंख्यकों के लिए बड़े ऐलान, शिक्षा और वेलफेयर को बढ़ावा

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्य का बजट पेश करते हुए अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शिक्षा, कल्याण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई नई योजनाओं की घोषणा की। इन योजनाओं का उद्देश्य अल्पसंख्यक छात्रों के लिए शैक्षिक सुविधाओं का विस्तार करना, कौशल विकास को बढ़ावा देना और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करना है। अपने बजट भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों की बढ़ती मांग को देखते हुए छात्रावास सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिक मांग वाले जिलों में 150 क्षमता वाले 25 नए पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास शुरू किए जाएंगे। सीएम ने कहा कि मौजूदा 25 छात्रावासों की क्षमता में 50 और छात्रों की बढ़ोतरी की जाएगी। बजट पेश करते हुए, उन्होंने कहा कि सरकार माइनॉरिटी स्टूडेंट्स और कम्युनिटीज़ के लिए एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल सपोर्ट सिस्टम को बढ़ाएगी, साथ ही एंटरप्रेन्योरशिप और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देगी। स्कूलों का उन्नयन और उच्च शिक्षा की तैयारी उन्होंने कहा कि 2026-27 में 25 नए संत शिशुनाला शरीफ रेजिडेंशियल स्कूल शुरू किए जाएंगे। इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में कहा कि 117 मौलाना आज़ाद मॉडल स्कूलों और उर्दू स्कूलों को 600 करोड़ रुपये की लागत से कर्नाटक पब्लिक स्कूलों के तौर पर अपग्रेड करने का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस साल, 400 करोड़ रुपये की लागत से इसी मॉडल के तहत और 100 स्कूलों को अपग्रेड किया जाएगा। लर्निंग सेंटर्स और सिटीज़न सर्विस सेंटर्स का ऐलान सिद्धारमैया ने कहा कि 25 मोरारजी देसाई रेजिडेंशियल स्कूलों में PUC साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम शुरू की जाएंगी। इसके अलावा 18 APJ अब्दुल कलाम रेजिडेंशियल स्कूलों में कॉमर्स स्ट्रीम शुरू की जाएगी। सिद्धारमैया ने कहा कि इसके अलावा, माइनॉरिटी रेजिडेंशियल स्कूलों के चुने हुए काबिल PUC स्टूडेंट्स को K-CET, JEE और NEET एग्जाम के लिए अच्छी कोचिंग देने के लिए सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस के तौर पर चार रेजिडेंशियल स्कूल बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के बीच लगातार सीखने को बढ़ावा देने के लिए लर्निंग सेंटर्स और सिटीज़न सर्विस सेंटर्स भी बनाए जाएंगे। चार नए वर्किंग विमेन हॉस्टल्स बनेंगे उन्होंने कहा कि वर्किंग विमेन हॉस्टल्स की डिमांड ज़्यादा है, इसलिए बेंगलुरु में 100 लोगों की कैपेसिटी वाले चार नए वर्किंग विमेन हॉस्टल्स शुरू किए जाएंगे। सिद्धारमैया ने कहा कि सरकार ने जैन, बुद्धिस्ट और सिख कम्युनिटीज़ के बड़े डेवलपमेंट के लिए 100 करोड़ रुपये भी रखे हैं। उन्होंने बुद्धिस्ट कम्युनिटी के धम्मचारियों को 6,000 रुपये महीने का मानदेय देने की घोषणा की। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी अल्पसंख्यक छात्रों में से 5,000 छात्रों को लैपटॉप खरीदने के लिए 50,000 रुपये देने का भी उन्होंने ऐलान किया। आर्थिक सशक्तिकरण और स्वरोजगार मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक युवाओं को स्वरोजगार के अवसर देने के लिए सरकार फास्ट फूड ट्रक या मोबाइल किचन कियोस्क उपलब्ध कराएगी। इसके तहत परियोजना लागत का 75% या अधिकतम 3 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यक महिला सहकारी समितियां भी स्थापित की जाएंगी। अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं जैन, बौद्ध और सिख समुदायों के समग्र विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान। बौद्ध समुदाय के धम्माचारियों को प्रति माह 6,000 रुपये मानदेय। हुब्बली और कलबुर्गी में नए हज भवनों का निर्माण। वक्फ संस्थानों के 31 महिला पीयू कॉलेजों को डिग्री कॉलेज में अपग्रेड किया जाएगा। सवनूर में एक नया महिला पीयू कॉलेज शुरू होगा। व्यावसायिक क्षेत्रों में स्थित वक्फ संपत्तियों का पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकास किया जाएगा। बीजेपी ने किया विरोध इन घोषणाओं पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भारतीय जनता पार्टी की कर्नाटक इकाई ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार “तुष्टिकरण की राजनीति” कर रही है और राज्य के खजाने का बड़ा हिस्सा अपने वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए खर्च कर रही है।  

‘हिंदू रीति से शादी करने वाले ST पर हिंदू मैरिज एक्ट लागू होगा’, छत्तीसगढ़ HC का अहम निर्णय

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करने वाले अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के लोगों को हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए जगदलपुर फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या था। क्या था मामला जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी। इस मामले में एक आदिवासी (ST) पति और अनुसूचित जाति (SC) की पत्नी ने आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दी थी। दोनों ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13बी के तहत विवाह खत्म करने के लिए जगदलपुर की फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन फैमिली कोर्ट ने उनकी अर्जी रद्द कर दी थी। कपल की शादी 15 अप्रैल 2009 को हुई थी और वे अप्रैल 2014 से अलग रह रहे थे। हालांकि, जगदलपुर फैमिली कोर्ट ने 12 अगस्त को उनकी अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 2(2) के अनुसार यह कानून अनुसूचित जनजाति (ST) पर तब तक लागू नहीं होता, जब तक केंद्र सरकार इसकी अधिसूचना न जारी करे। हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी शादी हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि दोनों पक्षों ने साफ कहा था कि उनकी शादी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था और इसमें ‘सप्तपदी’ जैसी पारंपरिक रस्में निभाई गई थीं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वे जनजातीय परंपराओं की बजाय हिंदू परंपराओं का पालन करते हैं। क्या बोला कोर्ट कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि किसी जनजाति के सदस्य स्वेच्छा से हिंदू रीति-रिवाज और परंपराएं अपनाते हैं, तो उन्हें 1955 के अधिनियम के प्रावधानों से बाहर नहीं रखा जा सकता। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 2(2) जनजातीय समुदायों की पारंपरिक प्रथाओं की रक्षा के लिए बनाई गई है, न कि उन लोगों को कानून के दायरे से बाहर रखने के लिए जो हिंदू रीति-रिवाज अपना चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का भी दिया हवाला अपने फैसले में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्णयों का भी हवाला दिया और कहा कि यदि साक्ष्यों से यह साबित होता है कि जनजातीय समुदाय के लोग हिंदू परंपराओं का पालन कर रहे हैं, तो उनकी शादी और उत्तराधिकार जैसे मामलों में उन पर हिंदू कानून लागू होगा।

नक्सलवाद पर सरकार का अंतिम वार! अमित शाह ने बताई भारत को मुक्त करने की तारीख

रायपुर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत के 31 मार्च तक माओवादियों से मुक्त हो जाने का दावा करते हुए शुक्रवार को कहा कि सुरक्षा बल आंध्र प्रदेश के तिरुपति से नेपाल के पशुपति तक लाल गलियारा बनाने का सपना देखने वालों को पराजित करेंगे। शाह ने कटक जिले के मुंडाली में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि सीआईएसएफ प्रमुख प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करके देश की आर्थिक वृद्धि में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, ‘आज, मैं राष्ट्र को आश्वस्त करना चाहता हूं कि देश 31 मार्च तक माओवादियों से मुक्त हो जाएगा। हमारी सेनाएं तिरुपति से पशुपति तक लाल गलियारा बनाने का सपना देखने वालों को पराजित करेंगी।’ शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा, ‘हमारे सुरक्षा बल अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं और देश अब लाल विद्रोहियों का सफाया करने के कगार पर है।’ पांच लाख रुपये का इनामी नक्सली ढेर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में पांच लाख रुपये का एक इनामी नक्सली मारा गया है। पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि मुठभेड़ बुधवार रात गीदम पुलिस थाना इलाके के जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में हुई, जब जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर फाइटर्स का एक संयुक्त दल नक्सल विरोधी अभियान पर निकला था। उन्होंने बताया कि मारे गए नक्सली की पहचान बीजापुर जिले के बुरजी गांव के निवासी राजेश पुनेम के रूप में हुई है, जो माओवादियों की भैरमगढ़ एरिया कमेटी का सदस्य था। उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। राय ने बताया कि सुरक्षाबलों को तीन मार्च को गीदम थाना क्षेत्र के गुमलनार, गिरसापारा और नेलगोड़ा के मध्य जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में नक्सली सामग्री और हथियार छिपाए जाने की जानकारी मिली थी। ओडिशा ने बलांगीर, बरगढ़ को नक्सल-मुक्त घोषित किया ओडिशा पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए राज्य के दो पश्चिमी जिलों बलांगीर और बरगढ़ को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किया है। पुलिस महानिदेशक वाई बी खुरानिया ने आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा की कि बलांगीर और बरगढ़ जिले अब नक्सल-मुक्त हो गये हैं। यह घोषणा उस समय की गई जब बरगढ़ से सटे महासमुंद जिले के 15 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। बताया गया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन में सक्रिय थे। उनके मुख्यधारा में लौटने के साथ ही इन दोनों जिलों में नक्सली गतिविधियों के पूरी तरह समाप्त होने की पुष्टि की गई।

RBI का MuleHunter करेगा फर्जी बैंक खातों का सफाया, डिजिटल अरेस्ट में आएगी मुश्किलें

 नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहायक फर्म Reserve Bank Innovation Hub ने एक एडवांस्ड AI टूल तैयार किया है, जो साइबर क्रिमिनल्स, स्कैमर्स और डिजिटल अरेस्ट करने वालों पर नकेल कसेगा. इस AI टूल का नाम MuleHunter.AI है. यह AI टूल हर महीने लगभग 20,000 म्यूल अकाउंट्स का पता लगाकर उन्हें बंद कर रहा है। डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन फर्जीवाड़ों के पीछे के एक विशाल फर्जी बैंक अकाउंट का नेटवर्क होता है, जिसे म्यूल अकाउंट भी कहते हैं। इन फर्जी अकाउंट (म्यूल अकाउंट) का यूज ठगी गई रकम ट्रांसफर को एक जगह से दूसरी जगह पर भेजने में इस्तेमाल किया जाता है. कई साल से साइबर क्रिमिनल्स म्यूल अकाउंट नेटवर्क का यूज करके भोले-भाले लोगों को शिकार बना रहे हैं। म्यूल अकाउंट को पकड़ना क्यों मुश्किल है म्यूल अकाउंट को पकड़ना इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि ये बहुत थोड़े समय के लिए होते हैं. जैसे ही म्यूल अकाउंट को ओपन किया जाता है, उसके कुछ दिन बाद ही बंद कर दिया जाता है. ज्यादातर म्यूल अकाउंट को फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर ओपन किया जाता है। अमित शाह भी कर चुके हैं तारीफ  केंद्रीय गृह मंत्री अमित ने हाल ही में बढ़ते हुए साइबर अपराधों के खिलाफ इसको एक अहम हथियार बताया है. ये टूल सिर्फ साइबर ठगी को ट्रैक नहीं करता है, बल्कि उसकी धड़कन को समझता है। म्यूल अकाउंट को कर देगा फ्रीज  साइबर ठगी के बाद जैसे ही म्यूल अकाउंट के जरिए रुपये को एक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट और फिर तीसरे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है. यह सिस्टम उसको ट्रैक करता है और ट्रांजैक्शन को रोक देता है. साथ ही बैंक अकाउंट को फ्रीज कर देता है।  कई बैंकों में यूज हो रहा सिस्टम  बताते चलें कि यह टूल अभी करीब दो दर्जन बैंक सिस्टम में यूज जा रहा है. MuleHunter.AI टूल का असली मकसद साइबर ठगों के खातों की पहचान करना और उनको बंद करना है। MuleHunter.AI क्या है     इसे Reserve Bank Innovation Hub ने डेवलप किया है, जो भारतीय रिजर्व बैंक की सहायक कंपनी है.      यह एक स्पेशल सिस्टम है, जो म्यूल अकाउंट्स के नेटवर्क को खत्म करने के लिए खासतौर से तैयार किया गया है.      अन्य सिस्टम के तहत घटना के बाद धोखाधड़ी पकड़ते हैं. यह टूल गोल्डन ऑवर में ही अपराध पकड़ लेता है.  कैसे काम करता है ये सिस्टम      यह टूल संदिग्ध लेनदेन को पैसा निकलने से पहले ही फ्रीज करने की काबिलियत रखता है.      यह मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करता है और तुरंत काम होता है.      यह बैंक खातों में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को डिटेक्ट करता है.      खास पैटर्न के आधार पर यह खातों के मिसयूज की तुरंत पहचान कर लेता है.  I4C ने कई लाख म्यूल अकाउंट की पहचान की  इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक 26.5 लाख लेयर-1 म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई थी. करीब 20,000 करोड़ रुपये साइबर क्रिमिमनल्स द्वारा लूटे जाने वाले पैसे में से 8,189 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस मिल चुके हैं। सबसे ज्यादा म्यूल अकाउंट कहां मिले हरियाणा के नूंह में 2025 में 1,000 से ज्यादा म्यूल अकाउंट पकड़े जा चुके हैं. वहीं जामताड़ा में 350 से ज्यादा ऐसे खाते पकड़े जा चुके हैं। होम मिनिस्ट्री ने दी है डेडलाइन  होम मिनिस्ट्री ने दिसंबर 2026 तक सभी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट को MuleHunter प्लेटफॉर्म से कनेक्ट होने की डेडलाइन दी है. इसमें बैंक सरकारी फाइनेंशियल एजेंसियां भी हैं।

जल संचय जन भागीदारी अभियान की समीक्षा बैठक 07 मार्च को

शहडोल  जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जल संचय जन भागीदारी अभियान के संबंध में चर्चा एवं समीक्षा बैठक कलेक्टर डॉ केदार सिंह की अध्यक्षता में 7 मार्च 2026 को प्रातः 11 बजे कलेक्टर कार्यालय के विराट सभागार में आयोजित की जाएगी।  बैठक में जिले में चल रहे जल संरक्षण कार्यों, जल संचय के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा जन भागीदारी से अभियान को प्रभावी बनाने के संबंध में विस्तृत चर्चा की जाएगी।   बैठक में वन विभाग के समस्त एसडीओ, सभी जनपद पंचायतों के सीईओ, जनपदों के सहायक यंत्रियों एवं उपयंत्रियों, नगर निकायों के सीएमओ, जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, डीपीसी, महिला एवं बाल विकास विभाग, पीएचई, स्वास्थ्य विभाग तथा जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को उपस्थित रहने के लिए कहा गया है।

तेल खत्म होने की अफवाह से यूपी में पंपों पर लगी लंबी कतारें, लोग गैलन में पेट्रोल-डीजल भरवाकर रख रहे

बाराबंकी/लखीमपुर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और युद्ध की खबरों का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है. इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर फैल रही चर्चाओं और अफवाहों ने यूपी के कई जिलों में अजीब सा माहौल बना दिया है. कहीं पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ गई है तो कहीं लोग गाड़ियों के साथ-साथ ड्रम, कैन और गैलन लेकर डीजल-पेट्रोल भरवाने पहुंच रहे हैं।  हालात ऐसे बन गए हैं कि सामान्य दिनों में शांत दिखने वाले पेट्रोल पंपों पर अचानक लंबी-लंबी कतारें लग गईं. कई जगहों पर लोगों के बीच जल्द से जल्द तेल भरवाने की होड़ सी लग गई है. सोशल मीडिया पर भी इसके कई वीडियो वायरल हो रहे है. जिसमें देखा जा सकता है कि पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की लाइन सड़क तक लग गई . लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए घंटों खड़े नजर आ रहे हैं।  युद्ध की खबरों से फैली आशंका दरअसल पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इज़राइल और ईरान के बीच तनाव और सैन्य कार्रवाई की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. सोशल मीडिया पर इन खबरों के प्रसारण के बाद आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि अगर युद्ध लंबा खिंच गया तो पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसी आशंका ने धीरे-धीरे अफवाह का रूप ले लिया. कई इलाकों में यह बात फैलने लगी कि जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कमी हो सकती है या फिर इनके दाम अचानक बढ़ सकते हैं. यही कारण है कि लोग पहले से ही तेल जमा करने की कोशिश में जुट गए हैं।  लखीमपुर खीरी में पंपों पर उमड़ी भीड़ उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में यह अफवाह सबसे ज्यादा असर दिखा रही है. जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में गुरुवार को कई पेट्रोल पंपों पर अचानक भारी भीड़ जमा हो गई. सबसे ज्यादा भीड़ निघासन और भीरा थाना क्षेत्र के इलाकों में देखी गई. यहां लोग अपनी मोटरसाइकिल, कार और ट्रैक्टर लेकर पेट्रोल पंपों पर पहुंचने लगे. कई लोग तो केवल गाड़ियों में ही नहीं बल्कि प्लास्टिक के कैन, ड्रम और गैलन लेकर भी पहुंचे, ताकि ज्यादा से ज्यादा डीजल-पेट्रोल भरवाकर घर में स्टॉक कर सकें. पंपों के बाहर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. कई जगहों पर लाइन इतनी लंबी हो गई कि सड़क पर जाम जैसी स्थिति बन गई. लोगों के चेहरों पर जल्द से जल्द तेल भरवाने की बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी।  सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो इन हालातों के वीडियो भी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे. वीडियो में देखा जा सकता है कि पेट्रोल पंपों पर भीड़ को नियंत्रित करना कर्मचारियों के लिए मुश्किल हो रहा है. कुछ जगहों पर लोग एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करते नजर आए, जबकि कई लोग अपनी बारी के इंतजार में धूप में खड़े रहे. सोशल मीडिया पर इन वीडियो के साथ तरह-तरह की बातें भी लिखी जा रही हैं, जिससे अफवाह और तेजी से फैल रही है।  लोगों में डर का माहौल पेट्रोल पंप पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि भीड़ का मुख्य कारण लोगों में फैला डर है. उनके मुताबिक, “भीड़ यहां पर इसलिए है कि अभी जो पश्चिमी देशों में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं, उसी वजह से लोगों में थोड़ा डर सा फैल गया है. लोगों को लग रहा है कि कहीं ऐसा न हो कि तेल खत्म हो जाए, इसलिए लोग ज्यादा से ज्यादा पेट्रोल और डीजल भरवा रहे हैं. माहौल में एक तरह का डर दिखाई दे रहा है. उन्होंने आगे कहा कि पहले भी नमक को लेकर इसी तरह की अफवाह फैल चुकी है. उस समय भी लोग बड़ी मात्रा में नमक खरीदने लगे थे. उनका मानना है कि प्रशासन और सरकार को आगे आकर लोगों को भरोसा दिलाना चाहिए कि पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है।  बाराबंकी में भी दिखा असर सिर्फ लखीमपुर खीरी ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली. यहां भी पेट्रोल और डीजल की संभावित कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की चर्चा ने लोगों को बेचैन कर दिया. बाराबंकी के कई पेट्रोल पंपों पर गुरुवार को भारी भीड़ देखने को मिली. श्री विष्णु नारायण फिलिंग सेंटर आजगना, सद्दीपुर थाना जहांगीराबाद और तहसील फतेहपुर स्थित नेशनल ट्रेडिंग कंपनी पेट्रोल पंप पर सैकड़ों लोग डीजल भरवाने के लिए पहुंच गए. जानकारी के अनुसार करीब डेढ़ सौ से अधिक किसान अपने-अपने ड्रम और कैन लेकर लाइन में खड़े दिखाई दिए. कई किसान ट्रैक्टर लेकर भी पहुंचे, ताकि एक बार में ज्यादा मात्रा में डीजल भरवा सकें. खेती के सीजन ने बढ़ाई चिंता किसानों का कहना है कि इस समय खेती का मौसम चल रहा है और खेतों में काम के लिए डीजल बेहद जरूरी है. अगर अचानक डीजल की कमी हो गई या दाम बढ़ गए तो खेती पर सीधा असर पड़ सकता है. इसी वजह से किसान पहले से ही डीजल जमा करने की कोशिश कर रहे हैं. कई किसानों ने बताया कि वे पिछले डेढ़ से दो घंटे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन अभी तक उनकी बारी नहीं आई. एक किसान ने कहा, हम डीजल भरवाने आए हैं, भीड़ बहुत ज्यादा है. करीब डेढ़ घंटे से लाइन में खड़े हैं. खेती का काम है, इसलिए डीजल जरूरी है।  स्थानीय लोग भी परेशान पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी लाइनों की वजह से आम लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई लोग केवल अपनी गाड़ी में थोड़ा सा पेट्रोल भरवाने आए थे, लेकिन उन्हें भी घंटों इंतजार करना पड़ा. एक स्थानीय निवासी ने बताया कि वे काफी देर से लाइन में खड़े हैं, लेकिन अभी तक उनका नंबर नहीं आया है. उनका कहना था कि अचानक इतनी भीड़ बढ़ जाने से सामान्य व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई है।  पंपकर्मियों के लिए भी चुनौती पेट्रोल पंप कर्मचारियों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है. अचानक बढ़ी भीड़ को संभालना उनके लिए आसान नहीं है. बाराबंकी के फतेहपुर स्थित नेशनल ट्रेडिंग कंपनी इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के मालिक मोहम्मद आरिफ ने बताया कि उन्हें … Read more

बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश: वॉट्सएप चैट से तलाक नहीं, पत्नी पर क्रूरता के आरोप साबित करना होगा

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट ने नासिक फैमिली कोर्ट की ओर से पति को दिया गया तलाक का फैसला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल WhatsApp या SMS संदेशों के आधार पर पत्नी पर मानसिक क्रूरता साबित नहीं की जा सकती, खासकर तब जब पत्नी को अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया गया हो। इससे पहले, नासिक फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका मंजूर करते हुए उसे तलाक दे दिया था। कोर्ट ने पति की गवाही और पति-पत्नी के बीच हुई व्हाट्सऐप व एसएमएस बातचीत को सबूत माना था। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी उस पर पुणे में शिफ्ट होने का दबाव डालती थी, उसके परिवार का अपमान करती थी और इन संदेशों से उसे मानसिक क्रूरता का सामना करना पड़ा।  बॉम्बे हाई कोर्ट ने तलाक के एक मामले में अहर फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने नासिक फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को रद्द करते हुए कहा कि किसी भी मामले में फैसला सुनाने से पहले दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। पत्नी को अपनी सफाई देने का अवसर दिए बिना तलाक देना सही नहीं है। बता दें कि नासिक फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार करते हुए उसे तलाक दे दिया था। कोर्ट ने पति के बयान और पति-पत्नी के बीच हुए व्हाट्सऐप और एसएमएस संदेशों को मुख्य सबूत माना था। पति ने लगाए थे यह आरोप पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी उस पर पुणे शिफ्ट होने का दबाव बना रही थी। उसने कोर्ट में पत्नी के साथ की गई व्हाट्सऐप चैट भी साझा की थी। साथ ही उसने आरोप लगाया था कि उसके ससुराल वालों के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इससे उसे मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। नासिक फैमिली कोर्ट ने पति के हक में फैसला सुनाते हुए कहा था कि अगर पत्नी पति पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने के लिए दबाव बनाती है और ससुराल वालों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती है तो इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने पति को तलाक दे दिया था। अगर पत्नी पति पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने के लिए दबाव बनाती है और ससुराल वालों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती है तो इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। हाई कोर्ट ने फैसले नासिक कोर्ट के फैसल पर जताई आपत्ति नासिक कोर्ट के इस फैसले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने असहमति जताई। हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी को इन मैसेजों के बारे में अपनी बात रखने या उन्हें चुनौती देने का कोई मौका नहीं दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल व्हाट्सऐप चैट को आधार बनाकर तलाक का फैसला नहीं दिया जा सकता। जब तक दोनों पक्षों की बात नहीं सुनी जाती ऐसा निर्णय उचित नहीं माना जाएगा। हाई कोर्ट ने मामले को फिर से नासिक फैमिली कोर्ट को भेज दिया है। अब पत्नी को भी अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का पूरा अवसर दिया जाएगा।  

फिरोजाबाद: होली पर हुड़दंगियों की हरकतें बढ़ीं, पुलिस ने थाने में ‘मुर्गा’ बना कर दी सजा

 फिरोजाबाद फिरोजाबाद के थाना दक्षिण क्षेत्र में होली के पर्व पर हुड़दंग मचाने वाले कुछ युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया. नशे की हालत में शोर मचाने और राहगीरों के साथ बदसलूकी करने की शिकायत मिलने पर पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर इन युवकों को दबोचा. शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस इन आरोपियों को थाने ले आई. वहां पुलिसकर्मियों ने अनुशासन सिखाने के लिए हुड़दंगियों को परिसर में ही ‘मुर्गा’ बनने की सजा दी. इस पूरी कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। नशे में धुत होकर कर रहे थे अभद्रता जानकारी के मुताबिक, होली के उल्लास के बीच कुछ युवक सड़क पर अराजकता फैला रहे थे. ये युवक न केवल तेज आवाज में चिल्ला रहे थे, बल्कि वहां से गुजरने वाले आम लोगों को भी परेशान कर रहे थे. स्थानीय निवासियों द्वारा दी गई सूचना के बाद पुलिस ने घेराबंदी की. पकड़े जाने के बाद पुलिस ने उन्हें सख्त चेतावनी दी कि त्योहार का अर्थ हुड़दंग या दूसरों को परेशान करना कतई नहीं है। पुलिस की सजा और अधिकारियों का बयान थाने में हुड़दंगियों की हेकड़ी निकालने के लिए उन्हें ‘मुर्गा’ बनाया गया. इस मामले पर फिरोजाबाद के अपर पुलिस अधीक्षक (शहर) रवि शंकर प्रसाद ने स्पष्ट किया कि होली के पावन पर्व पर किसी भी प्रकार की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि हुड़दंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं ताकि आम जनता बिना किसी डर के शांतिपूर्वक त्योहार मना सके। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस पुलिस की इस ‘अनोखी’ सजा का वीडियो इंटरनेट पर आते ही लोग दो गुटों में बंट गए हैं. बड़ी संख्या में लोग पुलिस की इस सख्ती की तारीफ कर रहे हैं और इसे अराजकता रोकने का सही तरीका बता रहे हैं. वहीं, कुछ लोग इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन के तौर पर देख रहे हैं।

ग्लोबल टेंशन से भारतीय बाजार पर मार: सेंसेक्स 1,097 अंक टूटा, बैंकिंग सेक्टर में तेज बिकवाली

मुंबई मध्य पूर्व में संघर्ष के चलते भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,097 अंक या 1.37 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,918.90 और निफ्टी 315.45 अंक या 1.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,450.45 पर था। बाजार में गिरावट बैंकिंग शेयरों की तरफ से आई। निफ्टी बैंक 2.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,783.25 पर बंद हुआ। इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी 2.09 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 2.01 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 1.81 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 1.06 प्रतिशत, निफ्टी कंजप्शन 1.02 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 0.89 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 0.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। दूसरी तरफ निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.77 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 0.13 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.12 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.04 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में कम बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.69 प्रतिशत या 399.20 अंक की कमजोरी के साथ 57,393.35 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 39.90 अंक की गिरावट के साथ 16,498.90 पर था। सेंसेक्स पैक में बीईएल, सनफार्मा, एनटीपीसी, इन्फोसिस और एचसीएल टेक गेनर्स थे। आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट,एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, बजाज फिनसर्व, एलएंडटी, इंडिगो, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फाइनेंस और एचयूएल लूजर्स थे। बाजार में बड़ी गिरावट के पीछे बड़ा कारण अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का जारी रहना है। युद्ध के लंबा चलने से अब एनर्जी की आपूर्ति को भी जोखिम पैदा हो गया है, जिससे निवेशकों के सेंटीमेंट पर नकारात्मक प्रभाव हुआ है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बनाने का काम कर रही है। एफआईआई ने गुरुवार को 3,752.52 करोड़ रुपए के इक्विटी की बिकवाली की थी। युद्ध के चलते कच्चे तेल में भी तेजी जारी है। डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 80 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड का दाम 84 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

ईरान के खिलाफ नया मोर्चा? अमेरिका और इजरायल के बाद इस देश ने सेना को दिए एक्शन के आदेश

इजरायल अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहे ईरान की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। खबर है कि अब अजरबैजान ने ड्रोन हमले की बदला लेने की कसम खाई है। साथ ही मुल्क के राष्ट्रपति ने अटैक का जवाब देने के निर्देश अपनी सेना को दे दिए हैं। खबर है कि अजरबैजान ने ईरान से सफाई देने की भी मांग की है। ईरान ने कतर, कुवैत, सऊदी अरब समेत कई मुल्कों में हमले किए हैं। भड़क गया अजरबैजान राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने ईरान पर ‘आतंकवाद और आक्रामकता का निराधार कृत्य’ करने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि उनकी सेना को जवाबी कार्रवाई की तैयारी और उसे लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने नखचिवान की ओर चार ड्रोन भेजे थे, जिनमें से एक को अजरबैजानी सेना ने निष्क्रिय कर दिया, जबकि अन्य ने नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाया, जिनमें एक स्कूल भी शामिल था जहां कक्षाएं चल रही थीं। बड़ी बैठक हुई रॉयटर्स के अनुसार, राष्ट्रपति अलीयेव ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा, ‘हम अजरबैजान के खिलाफ इस बगैर उकसावे के किए गए आतंकवादी कृत्य और आक्रमण को सहन नहीं करेंगे। हमारे सशस्त्र बलों से तैयारी करने और उचित जवाबी कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हम किसी भी दुश्मन ताकत के खिलाफ अपनी शक्ति दिखाने के लिए तैयार हैं। उन्हें ईरान में ये नहीं भूलना चाहिए।’ बातचीत की मांग एक्सियोस से बातचीत में अजरबैजान के अमेरिका में राजदूत खजार इब्राहिम ने कहा कि उनका मुल्क उचित उपाय कर रहा है। जब पूछा गया कि क्या वह अगले हमले को लेकर चिंतित हैं। इसपर उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात नहीं है। उन्होंने कहा, ‘इसके बजाय हम हिसाब लगा रहे हैं, तथ्य जुटा रहे हैं और हम फैसले ले रहे हैं।’ एजेंसी वार्ता के अनुसार, अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि ईरान की ओर से दागे गए कई ड्रोन उनके क्षेत्र में गिरे हैं। इनमें से एक ड्रोन ने हवाई अड्डे की टर्मिनल बिल्डिंग को क्षतिग्रस्त किया है, जबकि दूसरा एक स्कूल भवन के पास जाकर गिरा। मंत्रालय ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जतायी और साथ ही ईरान से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि इस तरह की घटना दोबारा न हो। साथ ही मंत्रालय ने अजरबैजान में ईरान के राजदूत को अपनी कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करने के लिए तलब किया। ईरान क्या बोला ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने अजरबैजान की ओर ड्रोन भेजने से इनकार किया है। ईरान ने बार-बार युद्ध में तेल और अन्य नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने से इनकार किया है, हालांकि उसके ड्रोन और मिसाइल हमलों ने इन स्थलों को निशाना बनाया है।  

बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा निर्णय, कहा- कहीं भी नमाज अदा करने का अधिकार नहीं, पूरा मामला जानें

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट ने छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों को रमजान के दौरान नमाज पढ़ने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि रमजान इस्लाम का महत्वपूर्ण धार्मिक महीना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान पर नमाज पढ़ने का अधिकार मांग सकता है। खासकर एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सुरक्षा को धर्म से ऊपर बताया     जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती।     कोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट परिसर और उसके आसपास का क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील होता है, जहां किसी भी तरह की भीड़ या अस्थायी व्यवस्था सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म चाहे जो भी हो, सुरक्षा सबसे पहले है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अस्थायी शेड हटाए जाने के बाद दाखिल हुई थी याचिका     यह मामला टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर मेंस यूनियन द्वारा दाखिल याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास बने एक अस्थायी शेड के नीचे नमाज अदा करते थे। हालांकि, पिछले वर्ष अधिकारियों ने उस शेड को हटा दिया था।     यूनियन ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें उसी स्थान पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए या फिर आसपास किसी अन्य स्थान को इसके लिए निर्धारित किया जाए। एयरपोर्ट की सुरक्षा का दिया हवाला अदालत ने बार-बार एयरपोर्ट सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सावधानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पिछली सुनवाई में अदालत ने पुलिस और एयरपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि वे यह देखें कि याचिकाकर्ताओं को कहीं और स्थान दिया जा सकता है या नहीं। प्राधिकरणों ने अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की। सात अन्य स्थानों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़भाड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट विकास योजना के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई। मदरसे में जाकर अदा करें नमाज   रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मामला सीधे एयरपोर्ट की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित स्थान से एक किलोमीटर के भीतर एक मदरसा है, जहां नमाज अदा की जा सकती है। पीठ ने कहा कि एयरपोर्ट के आसपास प्रार्थना स्थल बनाने का सवाल ही नहीं उठता। अदालत ने टिप्पणी की कि सुरक्षा सबसे पहले आती है और इस एयरपोर्ट से हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं। जरूरी नहीं कि किसी जगह पर नमाज पढ़ी जाए हाईकोर्ट ने कहा कि दुनिया में कहीं भी एयरपोर्ट के इतने करीब इस तरह की व्यवस्था नहीं देखी गई है। याचिकाकर्ता यह तय नहीं कर सकते कि वे किस जगह नमाज पढ़ेंगे। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कल यह कहे कि वह ओवल मैदान के बीच में खड़े होकर नमाज पढ़ना चाहता है, तो यह संभव नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति दिन में पांच बार नमाज अदा कर सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह किसी भी जगह पर ही की जाए। वैकल्पिक स्थानों का सर्वे, लेकिन नहीं मिली उपयुक्त जगह     इससे पहले अदालत ने पुलिस और एयरपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि वे आसपास के क्षेत्रों का सर्वे कर यह देखें कि क्या नमाज के लिए कोई अन्य स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है।     गुरुवार को अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि सात अलग-अलग स्थानों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट के विकास कार्यों के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई। कोर्ट ने मदरसे में नमाज पढ़ने की दी सलाह     रिपोर्ट देखने के बाद अदालत ने कहा कि वह इस मामले में कोई राहत नहीं दे सकती। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे आसपास मौजूद धार्मिक स्थलों का उपयोग करें।     कोर्ट ने बताया कि प्रस्तावित स्थान से करीब एक किलोमीटर के भीतर एक मदरसा मौजूद है, जहां नमाज अदा की जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में टर्मिनल-1 के पुनर्विकास के दौरान यदि संभव हुआ तो याचिकाकर्ता अपनी मांग एयरपोर्ट प्राधिकरण के सामने रख सकते हैं। सर्वे में नमाज के लिए कोई जगह नहीं मिली कोर्ट ने पुलिस और एयरपोर्ट अधिकारियों से यह जांच करने को कहा था कि क्या याचिकाकर्ताओं को कोई वैकल्पिक जगह दी जा सकती है। गुरुवार को पेश की गई रिपोर्ट में अधिकारियों ने बताया कि सात जगहों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट डेवलपमेंट प्लान के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई। रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट के आसपास नमाज पढ़ने के लिए कोई जगह तय करना संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा- धर्म हो या कुछ और सुरक्षा सबसे पहले आती है। इस एयरपोर्ट से हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं, इसलिए सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट बोला- आप नमाज की जगह तय नहीं कर सकते कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता खुद यह तय नहीं कर सकते कि वे किस जगह नमाज पढ़ेंगे। बेंच ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई किसी सार्वजनिक स्थान के बीच में नमाज पढ़ने की मांग करे तो इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे किसी दूसरी जगह की तलाश करें। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित इलाके से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर एक मदरसा मौजूद है, जहां नमाज पढ़ी जा सकती है।  

धान खरीद में छत्तीसगढ़ का डेटा-संचालित एआई मॉडल, तकनीकी नवाचार से बनी नई मिसाल

रायपुर  छत्तीसगढ़ में धान खरीद व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) द्वारा अपनाई गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि तकनीक का सही दिशा में उपयोग किया जाए, तो न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाएं सुदृढ़ होती हैं, बल्कि सरकारी खजाने को भी बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विजन और मार्कफेड के चेयरमैन जितेंद्र कुमार शुक्ल (IAS) के नेतृत्व में इस तकनीकी पहल के माध्यम से राज्य ने बिना किसी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में कटौती किए, सिस्टम की कमियों को दूर कर लगभग ₹2,780 करोड़ की प्रत्यक्ष बचत सुनिश्चित की है। वित्तीय वर्ष 2025–26 की धान खरीद प्रक्रिया के समापन के बाद आए आंकड़े चौंकाने वाले और सुखद हैं। इस अवधि के दौरान राज्य में कुल 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई, जिस पर सरकार का कुल व्यय ₹43,720 करोड़ रहा। इसके विपरीत, यदि पिछले वित्तीय वर्ष 2024–25 के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो 149.24 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पर लगभग ₹46,500 करोड़ खर्च हुए थे। आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर पता चलता है कि इस बार खरीद की मात्रा में करीब आठ लाख मीट्रिक टन की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी उत्पादन घटने के कारण नहीं, बल्कि गैर-प्रामाणिक प्रविष्टियों, फर्जी पंजीकरण और अन्य सीमावर्ती राज्यों से लाये जाने वाले धान की अवैध रूप से ख़रीदारी पर कड़ाई से लगाए गए नियंत्रण का प्रत्यक्ष परिणाम है। चुनौतियां और तकनीकी समाधान: विगत वर्षों में धान खरीदी के दौरान फर्जी किसान पंजीकरण, रिकॉर्ड में हेराफेरी और भंडारण केंद्रों से धान की चोरी जैसी गंभीर चुनौतियां सामने आती रही थीं। विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, इस विशाल प्रक्रिया में यदि मात्र एक प्रतिशत की भी लीकेज या गड़बड़ी होती है, तो सरकारी खजाने को सालाना कई सौ करोड़ की चपत लगती है। इन्हीं गंभीर चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मार्कफेड ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ‘आईटीआई लिमिटेड’ के साथ हाथ मिलाया। आईटीआई लिमिटेड ने इस परियोजना के लिए आवश्यक नेटवर्क प्रबंधन, अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना और निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान कर इस मॉडल को धरातल पर उतारा। ये कैमरे संदिग्ध गतिविधियों को स्वतः पहचानने में सक्षम हैं। रायपुर में एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष के रूप में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किया गया है, जहां लाइव फीड के जरिए पूरे प्रदेश की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर यहीं से तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए जाते हैं। मार्कफेड के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार शुक्ल ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि, “इस प्रणाली ने न केवल वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया है, बल्कि वास्तविक किसानों के हक को भी सुरक्षित किया है। अब बिचौलियों के लिए व्यवस्था में सेंध लगाना लगभग मुश्किल हो गया है।” महज़ ₹48.92 करोड़ की कुल लागत से तैयार इस परियोजना ने निवेश के अनुपात में कई गुना अधिक प्रतिफल (Return on Investment) सुनिश्चित किया है। आईटीआई लिमिटेड के अनुसार, “यह परियोजना ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस (Minimum government, maximum governance)’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। आज छत्तीसगढ़ का यह डेटा-संचालित मॉडल न केवल देश के अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मानक बन गया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि डिजिटल क्रांति कैसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।” छत्तीसगढ़ का यह मॉडल यह स्पष्ट करता है कि पारदर्शी सुशासन के लिए तकनीक का अपनाना अनिवार्य है। ₹2,780 करोड़ की यह बचत न केवल वित्तीय सफलता है, बल्कि यह उन हजारों किसानों की जीत है जिन्हें अब बिना किसी बिचौलिए या परेशानी के उनकी फसल का सही दाम मिल रहा है। यह सफलता ‘डिजिटल इंडिया’ के सपने को ग्रामीण स्तर पर हकीकत में बदल रही है।

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