Former Collector IAS Raghavendra Singh and ADM R.P. Verma may be subject to Lokayukta scrutiny; the district administration’s silence raises questions.
संवाददाता चंदा कुशवाह
नलखेड़ा (आगर मालवा)। विश्वविख्यात मां बगलामुखी मंदिर के कोष में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित करोड़ों रुपये की राशि से जुड़े एक गंभीर प्रकरण ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस मामले में लोकायुक्त पुलिस द्वारा मांगी गई बिंदुवार रिपोर्ट अब तक जिला प्रशासन की ओर से प्रस्तुत नहीं की गई है, जिससे जांच की प्रक्रिया और प्रशासनिक भूमिका को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस पूरे प्रकरण को लेकर पुलिस लोकायुक्त उज्जैन द्वारा पत्र क्रमांक /2209/पुअ/विपुस्थ/2025 के माध्यम से कलेक्टर, जिला आगर मालवा को पत्र भेजा गया था। लोकायुक्त पुलिस ने दिनांक 25 अप्रैल 2025 को संबंधित सभी दस्तावेज एवं जानकारी निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन आज दिनांक तक जिला मुख्यालय से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
क्या है पूरा मामला
लोकायुक्त कार्यालय में प्रस्तुत की गई शिकायत के अनुसार, निजी भूमि स्वामियों से संबंधित भूमि अधिग्रहण के प्रस्ताव प्रशासनिक स्तर पर तैयार किए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि मां बगलामुखी मंदिर के समीप लगभग 20 हेक्टेयर शासकीय भूमि उपलब्ध होने के बावजूद भूमि अधिग्रहण की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं थी।
इसके बावजूद निजी भूमि को अधिग्रहण योग्य दर्शाने से संबंधित दस्तावेज तैयार किए गए, जिससे मंदिर कोष से धनराशि व्यय होने की संभावना बनी। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होती है, तो कई प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा आवश्यक हो सकती है।
पूर्व कलेक्टर IAS राघवेंद्र सिंह और ADM आर.पी. वर्मा की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की संभावना
सूत्रों के अनुसार, लोकायुक्त द्वारा जिन पत्रों, आदेशों एवं अनुमोदनों से संबंधित जानकारी मांगी गई है, वे सभी जिला स्तर से जुड़े हुए हैं। ऐसे में आगर मालवा के पूर्व कलेक्टर IAS राघवेंद्र सिंह तथा वर्तमान अपर कलेक्टर (ADM) आर.पी. वर्मा की भूमिका भी लोकायुक्त जांच के दायरे में आने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय में अनुमोदन की प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि लोकायुक्त जांच में संबंधित दस्तावेजों की बिंदुवार समीक्षा की जाती है, तो उस अवधि में पदस्थ अधिकारियों की भूमिका का परीक्षण स्वाभाविक रूप से किया जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जा रहा है कि फिलहाल यह पूरा मामला जांचाधीन है और किसी भी अधिकारी के विरुद्ध कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
लोकायुक्त का पक्ष
उप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन संभाग राजेश पाठक ने बताया कि संबंधित शिकायत जिला मुख्यालय को भेज दी गई थी, लेकिन अब तक वहां से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। जांच नियमानुसार जारी है।









