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दलहन उत्पादन बढ़ाकर आत्मनिर्भरता हासिल करना हमारा लक्ष्य: केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान

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भोपाल .

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की उपजाऊ धरती, समृद्ध जल संसाधन और अनुकूल जलवायु हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इकार्डा जैसे अंतर्राष्ट्री य अनुसंधान संस्थान का सशक्त होना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। भारत में अन्न केवल उत्पादन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और संस्कार का आधार है “अन्न देवो भव:” हमारी कृषि परंपरा का मूल मंत्र है। मध्यप्रदेश ‘कृषक कल्याण वर्ष’ मना रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ किसान के साथ खड़ी सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना, आयात निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इस मिशन किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक भंडारण और सुनिश्चित विपणन की सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। दलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जिससे इस मिशन का सर्वाधिक लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (ICARDA) सीहोर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक प्लांट टिशु कल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इकार्डा का यह नवीन भवन प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए नई आशाओं और संभावनाओं का द्वार खोलेगा। यह केंद्र वैज्ञानिक खेती, उन्नत तकनीक और वैश्विक कृषि अनुभव को किसानों से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंचाई विस्तार और जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि इकार्डा द्वारा विकसित वैज्ञानिक मॉडल प्रदेश की योजनाओं को मजबूत आधार प्रदान करेंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय और इकार्डा का यह संयुक्त प्रयास मध्यप्रदेश को टिकाऊ और समृद्ध कृषि का राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक मॉडल बना सकता है। उन्होंने कहा कि सीहोर का यह राष्ट्रीय सम्मेलन दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों, मूल संवेदनाओं और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विमर्श का सशक्त मंच बनेगा और नीति निर्धारण व अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय कृषि मंत्रालय एवं इकार्डा की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह अनुसंधान केंद्र प्रदेश की कृषि को नई दिशा देगा और किसानों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश भारत का फूड बॉस्केट है। भारतीय संस्कृति में अन्न देवता के माध्यम से समाज पल्लवित होता है। प्रधानमंत्री  मोदी ने देश के विकास और कल्याण के लिए 4 श्रेणियां गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण बताई हैं। हमारी भारतीय सभ्यता में कृषि आधारित जीवन शैली विकसित हुई। आधुनिक समय में खेती में कई प्रकार के विकार आ गए। खेती में रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से हमारी जीवन शैली में बदलाव आया। प्रधानमंत्री  मोदी ने हमेशा किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा। अमेरिका जैसे देश ने भारत की बात मानी। उन्होंने कहा कि दाल हर भारतीय परिवार की प्रतिदिन की थाली का अभिन्न हिस्सा और हर मौसम में भारतीय परिवारों की जरूरत है। इसका उत्पादन और खपत बताता है कि दलहन क्षेत्र में हमें और अधिक काम करने की जरूरत है। इसलिए अब मध्यप्रदेश में दलहन फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ायेंगे। इसके लिए हम केन्द्र सरकार के साथ हम-कदम होकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार दालों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार के हर मिशन, हर संकल्प की पूर्ति में हर जरूरी सहयोग देगी। हम देश में दाल समृद्धि का संकल्प मिल-जुलकर पूरा करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भावांतर भुगतान योजना से सोयाबीन की उपज की 1500 करोड़ रूपये से अधिक राशि किसानों के खातों में पहुंची है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन उपयुक्त प्रबंधन के अभाव में प्रदेश का बड़ा भू-भाग सिंचाई से वंचित था। हमारी सरकार आने के बाद प्रदेश में सिंचाई का रकबा 44 लाख हैक्टेयर बढ़ा है। देश की पहली केन-बेतवा राष्ट्रीय लिंक नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी जोड़ो परियोजना से प्रदेश में सिंचाई का रकबा और तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि हमने आने वाले सालों में प्रदेश का सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर तक करने का लक्ष्य रखा है।

दलहन उत्पादन में अग्रणी है मध्यप्रदेश : केन्द्रीय मंत्री  चौहान

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  चौहान ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के 27 देशों से हमारा समझौता हुआ है। उन्होंने अमेरिका के साथ कृषि समझौते में किसानों के हितों की रक्षा की गई है। सीहोर का शरबती गेहूं दुनिया में धूम मचाएगा। देश के बासमती चावल और मसालों को 18 प्रतिशत टैरिफ से लाभ मिलेगा। टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को फायदा होगा। देश को दलहन में आत्मनिर्भर बनाना है। देश में मूंग को छोड़कर अन्य दालों का उत्पादन घट गया। दाल हमें विदेश से आयात करना पड़े यह देश के हित में नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार को बधाई देते हुए कहा कि हमारा मध्यप्रदेश आज भी दलहन उत्पादन में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल गेहूं, सोयाबीन और धान ही नहीं उगाना चाहिए, बल्कि फसल चक्रण पर ध्यान देना चाहिए। देश में चना, मसूर और उड़द का उत्पादन बढ़ाना है। इकार्डा के माध्यम से दलहन फसलों के उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे।

केन्द्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने कहा कि देश का कृषि मंत्रालय अब दिल्ली से नहीं, गांव और खेतों से चल रहा है। हमारे कृषि वैज्ञानिक प्लांट टिशू कल्चर के माध्यम से मसूर सहित अन्य दलहन फसलों की नई और उन्नत किस्में तैयार हो रही हैं। किसानों को ज्यादा उत्पादन वाले और रोग रहित बीच उपलब्ध कराना है। दलहन आत्म निर्भरता मिशन के अंगर्तग दालों के कलस्टर बनाए जाएंगे। इकार्डा के सहयोग से बीज ग्राम और बीज हब बनाए जाएंगे। प्रगतिशील और आदर्श किसानों को एक हैक्टेयर में दलहन उत्पादन के लिए 10 हजार रुपए प्रोत्साहन दिया जायेगा। इस कलस्टर में अगर कोई दाल मिल शुरू करना चाहता है तो इसके लिए भारत सरकार 25 लाख रुपए का अनुदान देगी। किसानों को उपज का सही दाम दिलाने के लिए देशभर में 1000 दाल मिल खुलेंगी, जिसमें से 55 मध्यप्रदेश में स्थापित होंगी। मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय राज्य सरकार के साथ है।

केन्द्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों से 8000 रुपए प्रति क्विंटल तुअर, 7800 रुपए प्रति क्विंटल उड़द, 5875 रुपए प्रति क्विंटल चना, 7000 रुपए प्रति क्विंटल मसूर खरीदेगी। केंद्र सरकार सभी दलहन फसलों की शत-प्रतिशत खरीदी करेगी। मध्यप्रदेश में भावांतर भुगतान योजना शुरू की। हमारी सरकार बीज से लेकर बाजार तक किसानों की चिंता कर रही है। शाकाहारियों के लिए दालें प्रोटीन का मुख्य विकल्प हैं। किसान अन्नदाता भी हैं और जीवनदाता भी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश को दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत 354 करोड़ की बजट राशि मिलेगी। केंद्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने सम्मेलन में आए विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों को दलहन मिशन की बजट राशि का स्वीकृति-पत्र भी सौंपा।

प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। प्रधानमंत्री  मोदी ने किसानों की आय दो गुना करने का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए कार्य कर रही है। किसान जब खुशहाल होगा, तभी देश और प्रदेश भी खुशहाल होगा। अभी हमारे किसान पारम्परिक तरीके से खेती करते हैं। बदलते दौर में अब तकनीक आधारित आधुनिक प्रणाली से खेती करने की आवश्यकता है।

संयुक्त सचिव केन्द्रीय कृषि मंत्रालय  संजीव कुमार अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के लिए भारत सरकार ने 11 हजार 440 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय मिशन मोड में दलहन फसलों के प्रोत्साहन के लिए काम कर रहा है। दलहन मिशन के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। किसानों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को नई तकनीक और मशीनों के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश दलहन उत्पादन में अग्रणी राज्य है। सीहोर में इकार्डा ने कई फसलों के बीजों पर काम किया। मध्यप्रदेश की धरती पर विकसित हुई तकनीक और बीज देशभर में पहुंचेंगे।

अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (इकार्डा) के महानिदेशक  अली अबुर साबा ने कहा कि भारत सरकार कृषि, किसान और खाद्य प्रसंस्करण को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इकार्डा को पल्सेस प्रोडक्शन डेवलम्पमेंट कंसल्टेशन के लिए चुना है। भारत वैश्विक स्तर पर दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। यहां दालें प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत हैं। इकार्डा ने अपने शोध केंद्रों में 41 सभी प्रकार की दालों की नई किस्में तैयार की हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री  चौहान, मुख्यमंत्री डॉ. यादव और इकार्डा के सहयोग से दालों के अनुसंधान के लिए सीहोर में यह केंद्र शुरू किया गया है। देश में दालों की पैदावार की औसत उत्पादकता 926 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर है, जबकि मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 1200 किलोग्राम है। अगर मध्यप्रदेश से सीखकर हम इसे देश में लागू करेंगे, तो भारत में दालों का उत्पादन 8 मिलियन टन तक बढ़ सकता है और देश दलहन उत्पादन के मामलों में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर लेगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भी कृषि मंत्रालय, इकार्डा और किसानों के साथ मिलकर कार्य करेगी। हम सब मिलकर भारत को बहुत जल्द दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएंगे।

कार्यक्रम में कृषि मंत्री  कंषाना ने 'एक उत्पाद-श्रेष्ठ उत्पाद' के तहत मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के अनुपम उत्पाद सम्मेलन में आए सभी अतिथियों को भेंट किए। कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा दलहन मिशन पोर्टल का शुभारंभ किया और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रकाशित बुलेटिन इकॉर्डा की पुस्तक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम स्थल पर कृषि विकास संबंधी प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही इकॉर्डा परिसर में पौध-रोपण भी किया गया।

राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री द्वय  रामनाथ ठाकुर एवं  भागीरथ चौधरी, प्रदेश के राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं सीहोर जिले की प्रभारी मंत्री मती कृष्णा गौर, राज्यों के कृषि मंत्रियों में ओडिशा के उप-मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री  केवी सिंहदेव, उत्तरप्रदेश से  सूर्य प्रताप शाही, हरियाणा से  श्याम सिंह राणा, गुजरात से  रमेशभाई भूराभाई कटारा, छत्तीसगढ़ से  रामविचार नेताम, महाराष्ट्र से  आशीष जायसवाल, राजस्थान से डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, बिहार से  रामकृपाल यादव, इकार्डा के निदेशक  शिवकुमार अग्रवाल, केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के निदेशक  अविनाश लवानिया, कृषि क्षेत्र में कार्य करने वाली विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ सहित बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे। 

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